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ED ने छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को किया गिरफ्तार: ₹2161 करोड़ के शराब घोटाले मामले में हुई कार्रवाई, लेकिन कॉन्ग्रेस नेता ने सारा ठीकरा अडानी पर फोड़ा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार (18 जुलाई 2025) को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई ₹2161 करोड़ के कथित शराब घोटाले से जुड़ी धन शोधन जाँच के तहत हुई। इस केस में ईडी कॉन्ग्रेस भवन समेत तमाम संपत्तियों को भी जब्त कर चुकी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने सुबह-सुबह भिलाई, दुर्ग जिले में बघेल के आवास पर छापेमारी की, जहाँ चैतन्य अपने पिता के साथ रहते हैं। नए सबूत मिलने के बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत यह कदम उठाया। सूत्रों के मुताबिक, चैतन्य ने तलाशी के दौरान सहयोग नहीं किया, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। चैतन्य को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 5 दिन की हिरासत में भेज दिया गया।

ईडी का कहना है कि 2019 से 2022 के बीच जब भूपेश बघेल की कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में थी, एक संगठित शराब सिंडिकेट ने राज्य में ₹2161 करोड़ की अवैध कमाई की। इस घोटाले में सरकारी अधिकारियों, नेताओं और शराब कारोबारियों ने मिलकर शराब की बिक्री से गैर-कानूनी कमीशन वसूला।

जाँच में पाया गया कि तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को हर महीने मोटी रकम दी जाती थी। साथ ही नकली होलोग्राम लगाकर कच्ची शराब बेची गई, जिसका पैसा सरकारी खजाने में न जाकर सिंडिकेट के पास गया। विदेशी शराब के कारोबार में भी FL-10A लाइसेंस धारकों से रिश्वत ली गई। अब तक ईडी ने इस मामले में ₹205 करोड़ की संपत्ति जब्त की है।

छापेमारी के दौरान भिलाई में भूपेश बघेल के घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात था। कुछ कॉन्ग्रेस समर्थकों ने ईडी की गाड़ियों को रोकने की कोशिश की।

भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने लिखा, “ED आ गई, आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है। अडानी के लिए तमनार में काटे जा रहे पेड़ों का मुद्दा आज उठना था। भिलाई निवास में ‘साहेब’ ने ED भेज दी है।” बता दें कि रिपोर्ट के मुताबिक ईडी की छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले की जाँच में बड़े खुलासे हो चुके हैं।

यह पहली बार नहीं है जब ईडी ने चैतन्य को निशाना बनाया। मार्च 2025 में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी हुई थी, जिसमें कुछ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जब्त किए गए थे। इस मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा, अनवर ढेबर, पूर्व IAS अनिल टुटेजा और अन्य की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।

जिस मौलाना को ‘हीरो’ बनाने में जुटा वामपंथी मीडिया, उसका ‘निमिषा प्रिया’ की फाँसी टालने में कोई हाथ नहीं: MEA ने किया साफ; ग्राउंड वर्कर ने भी रिपोर्ट्स को बताया फर्जी

यमन की जेल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया का मामला चर्चा में है। फाँसी की सजा पाने वाली निमिषा प्रिया की सजा फाँसी से 1 दिन पहले आगे के लिए टाल दी गई। इस बीच, लोगों को एक नाम तेजी से सुनाई देने लगा – मौलाना कंथापुरम एपी अबु बक्र मुसलियार का। दावा किया जाने लगा कि मुसलियार ने निमिषा प्रिया की फाँसी रुकवाई है।

ये प्रोपेगेंडा वामपंथी और इस्लामी मीडिया आउटलेट्स ने तेजी से फैलाया। क्योंकि उन्हें लगा कि यही सही मौका है कि लोगों को ये बता जाए कि मुसलियार ने निमिषा प्रिया की फाँसी रुकवाई। इस पूरे मामले को इस्लाम के सॉफ्ट नजरिए से जोड़ते हुए लोगों के जेहन में इस्लाम के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर बनाया जाए। हालाँकि जब सच्चाई सामने आई, तो वामपंथियों और इस्लामी मीडिया आउटलेट्स का भांडा फूटता नजर आ रहा है।

दरअसल, निमिषा प्रिया की फाँसी की सजा टलने और उसकी रिहाई के लिए किए जा रहे प्रयासों में मौलाना कंथापुरम एपी अबूबक्र मुसलियार की कथित भूमिका को विदेश मंत्रालय ने नकार दिया है।

निमिषा प्रिया केस में मौलाना के रोल को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है, “इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता, हमें इसकी जानकारी नहीं है।”

दरअसल कई मीडिया रिपोर्ट में निमिषा प्रिया की फाँसी की सजा टालने का श्रेय मौलाना कंथापुरम एपी अबूबक्र मुसलियार को दिया जा रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि भारत की यमन की हूती प्रशासन से कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं है इसलिए मौलाना की मदद ली गई।

यमन से लेकर मित्र देशों तक निमिषा को बचानें में जुटा MEA

लेकिन विदेश मंत्रालय ने उन सभी प्रयासों का उल्लेख किया जो निमिषा प्रिया की फाँसी को टालने और उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त करने के लिए लगातार किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ये संवेदनशील मामला है। भारत सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। हम कानूनी सहायता भी दे रहे हैं। हमनें एक वकील को नियुक्त किया है जो परिवार की सहायता कर रहा है। हमने एक काउंसलर को नियुक्त किया है जो नियमित रूप से घर जाकर फैमिली से बातचीत कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “यमन के लोकल अथॉरिटी और प्रिया के परिवार के सदस्यों के साथ भारत सरकार लगातार संपर्क में है।” विदेश मंत्रालय के मुताबिक, “पिछले कुछ दिनों से समाधान तक पहुँचने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। पूरे मामले पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। इस मुद्दे पर उस परिवार से भी बातचीत कर रहे हैं जिसने आरोप लगाया है।”

विदेश मंत्रालय ने कहा, “इस मामले पर कुछ मित्र देशों से भी बातचीत चल रही है। यमन सरकार के कुछ लोगों से भी लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। हम सभी जानते हैं कि लोकल अथॉरिटी ने 16 जून को होने वाले फाँसी की सजा को टाल दिया है।”

सरकार ने जितने प्रयास किए हैं इस पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बार भी मौलाना की चर्चा नहीं की। यहाँ तक कि इस मामले पर सवाल पूछने पर भी उन्होंने ये कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।

मौलाना को क्रेडिट देने की जल्दबाजी

वहीं दूसरी ओर केरल मीडिया समेत देशभर की कई मीडिया संस्थान ने अपनी रिपोर्टिंग में भारत सरकार के प्रयास के बजाए मौलाना मुसलियार की भूमिका की बात की।

केरल बेस्ड न्यूज नेटवर्क एशियानेट ने भी ये प्रोपेगेंडा फैलाया।

केरल के नंबर वन चैनल होने का दावा करने वाले – रिपोर्टर टीवी नाम के मीडिया आउटलेट ने तो मौलाना मुसलियार की गाथा में लंबी-चौड़ी तकरीरें कर दी। वामपंथियों से जुड़े इस मीडिया आउटलेट ने भारत सरकार को नहीं, बल्कि मुसलियार को ही निमिषा प्रिया का रक्षक बता दिया।

मनोरमा ऑनलाइन ने भी यही झूठ परोसा।

हेट डिटेक्टर नाम से इस्लामी प्रोपेगेंडा चलाने वाले एक्स हैंडल ने तो मुसलियार को ही असली रक्षक बता दिया और बताया कि मुसलियार ने ही फाँसी रुकवा दी।

खुद मौलाना मुसलियार तक ने इस प्रोपेगेंडा को रोकने की कोशिश नहीं की। बल्कि मौलाना ने समाचार एजेंसी एएनआई से दावा कर दिया कि उन्होंने यमन के सूफी इस्लामी विद्वानों से संपर्क साधा और निमिषा के मामले में दखल देने की अपील की। इस्लामिक शरिया कानून को सामने रखते हुए सजा की जगह रहम को तरजीह देने की वकालत की। केरल से ही यमन के जिम्मेदार स्कॉलर्स से संपर्क किया और उन्हें हालात समझाए।

क्या है मामला?

निमिषा प्रिया केरल की नर्स हैं जो 2008 में यमन चली गई। 2017 में कथित तौर पर उसने यमन नागरिक बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो मेहदी की हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि निमिषा प्रिया की ट्रैवल दस्तावेज उसने जब्त कर लिए थे और लगातार प्रताड़ित कर रहा था। निमिषा ने बेहोश करके मेहदी से अपने कागजात लेने की कोशिश की, लेकिन ड्रग ओवरडोज की वजह से उसकी मौत हो गई। उन पर हत्या का ही मुकदमा चला और मेहदी के परिजनों ने ब्लड मनी के बदले निमिषा को माफ करने से इनकार कर दिया है।

ऐसे में यमन में उन्हें फाँसी की जो सजा मिली है, जिसे टलवाने में भारत सरकार जुटी हुई है। हालाँकि सरकारों के भी दखल की एक सीमा होती है, क्योंकि यमन के बड़े हिस्से पर विद्रोही गुटों का कब्जा है, जिनकी सरकार को भारत सरकार मान्यता नहीं देती, ऐसे में यमन के साथ भारत का कोई सीधा राजनयिक संबंध नहीं है। भारत सरकार यमन के पड़ोसी देशों या फिर ईरानी चैनल के माध्यम से निमिषा को बचाने के प्रयत्न कर रही है।

चूँकि यमन की राजधानी सना पर एक इस्लामी संगठन का कब्जा है। ऐसे में वामपंथियों और इस्लामी प्रोपेगेंडा ग्रुप्स ने निमिषा को बचाने का क्रेडिट मौलाना को देना शुरू कर दिया, जबकि ऐसी मौलवी को लेकर फैलाई जा रही ऐसी मीडिया खबरों को सेव ‘निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ भी खारिज कर चुकी है।

हालाँकि मौलाना मुसलियार की बात को सच भी मान लें, तो अपील करने और सजा रुकने में फर्क होता है। अब तक मेहदी के परिवार ने कोई माफी नहीं दी है। सच सिर्फ इतना है कि अभी तक कानूनी तौर पर निमिषा की फाँसी टली है, जिसके लिए भारत सरकार अपने डिप्लोमेटिक चैनल्स, मित्र देशों की मदद ले रही है। न कि किसी मौलाना की बात भर से, क्योंकि अगर मौलाना की बात से यमन की ‘हूती’ सरकार को मानना होता, तो वो निमिषा को रिहा कर चुकी होती। वहीं, अब विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान सामने आ चुका है। ऐसे में मौलाना से जुड़े वामपंथी और इस्लामी मीडिया आउटलेट्स के सारे दावों की पोल खुद ब खुद खुलती नजर आ रही है।

वोटर्स के बदले BLO ने नहीं किए सूची पर साइन, वो लिस्ट मृत मतदाताओं की थी: यूट्यूबर अजीत अंजुम का पटना DM ने किया फैक्ट चेक, पहले ECI बता चुका है सच्चाई

पिछले दिनों प्रोपेगेंडा पत्रकार अजीत अंजुम अपनी सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में सरकारी कामकाजों में बाधा डालते दिखे। इसके बाद अजीत अंजुम पर BLO की तरफ से FIR भी होती है। अजीत अंजुम ने जिस रिपोर्टिंग के दम पर झूठी और भ्रामक खबरें फैलाई थी उसका फैक्ट चैक चुनाव आयोग ने किया था। लेकिन अजीत अंजुम अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थे। अब इस पर पटना DM का भी बयान आया है।

प्रोपेगेंडा पत्रकार अजीत अंजुम के बूथ लेवल ऑफिसर पर आरोप लगाने वाले बयान को पटना के जिलाधिकारी ने भी खारिज किया। पटना के DM ने बताया कि वीडियो में BLO मतदाता सूची पुनरीक्षण के फॉर्म नहीं भर रहे थे, बल्कि वे निर्वाचन क्षेत्र में मृत या एक जगह से दूसरी जगह चले गए मतदाताओं की सूची को तैयार कर रहे थे।

पटना के DM ने यह भी बताया कि वीडियो में जिन शांति देवी और चंद्रप्रकाश शाह के फॉर्म पर हस्ताक्षर किए जाने की बात अजीत अंजुम अपनी रिपोर्टिंग में बता रहे थे, वे दोनों मतदाता मृत पाए गए हैं। BLO दोनों मृत मतदाताओं के फॉर्म पर मृत का निशान लगाकर सत्यापन के तौर पर अपने हस्ताक्षर कर रहे थे।

सरकारी काम में दखलअंदाजी

दिल्ली से बिहार पहुँचे प्रोपेगेंडा पत्रकार अजीत अंजुम बिना किसी इजाजत के कैमरा और माइक लेकर सीधे BLO के ऑफिस में घुसकर सरकारी काम में दखलअंदाजी करते हैं। बलिया के एक मतदान केंद्र पर अजीत अंजुम और उनके सहयोगी जबरन सभागार में घुस जाते है, जहाँ BLO मोहम्मद अंसारुल हक मतदाता सूची के फॉर्म अपलोड कर रहे थे।

प्रोपेगेंडा पत्रकार अजीत अंजुम ने BLO से बूथ में मतदाताओं की संख्या, फॉर्म वितरण और अन्य संवेदनशील जानकारी माँगने की कोशिश की। BLO ने अपनी FIR शिकायत में यह भी कहा कि अंजुम ने मुस्लिम मतदाताओं की गिनती और उनके फॉर्म जमा करने की जानकारी भी माँगी, जो सांप्रदायिक तनाव भड़काने की साजिश लगती है।

अजीत अंजुम के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये और सरकारी काम में बाधा डालने के लिए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। उन पर BNS 2023 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

गैर-जिम्मेदाराना और मनगढ़ंत सारी बात…एअर इंडिया प्लेन क्रैश पर विदेशी मीडिया को AAIB ने लगाई लताड़: ‘पायलट पर आरोप’ वाली खबरों को नकारा, कहा- जाँच नहीं हुई पूरी, अंतिम रिपोर्ट बाकी

भारत के विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो यानी एएआईबी ने गुरुवार (16 जुलाई 2025) को अहमदाबाद विमान हादसे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के रवैये की कड़ी आलोचना की है और ऐसी रिपोर्टिंग को ‘गैर जिम्मेदाराना’ बताया है। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल समेत कई विदेशी मीडिया ने दुर्घटना में ‘पायलट की भूमिका’ की बात की थी।

एएआईबी ने क्या कहा?

विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो ने कहा, “यात्रियों, विमान के चालक दल और क्रू मैंबर्स के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लोगों की मौत हुई थी। हमें मृतकों के परिजनों की संवेदनशीलता का सम्मान करना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के कुछ लोग बार-बार चुनिंदा और मनगढ़ंत रिपोर्टिंग के जरिए निष्कर्ष निकालने की कोशिश कर रहे हैं। अभी जाँच जारी है। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई गैर-जिम्मेदाराना है।”

एएआईबी ने कहा कि एअर इंडिया दुर्घटना के संबंध में उसके शुरुआती जाँच रिपोर्ट केवल यह जानकारी देने के लिए थे कि ‘क्या’ हुआ था। प्रारंभिक रिपोर्ट को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। इस समय किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी। एएआईबी की जाँच अभी पूरी नहीं हुई है। अंतिम जाँच रिपोर्ट मूल कारणों और सुझावों के साथ आएगी।

एएआईबी ने आगे कहा, “हम जनता और मीडिया दोनों से आग्रह करते हैं कि वे समय से पहले ऐसी बातें फैलाने से बचें, जिनसे जाँच प्रक्रिया बाधित होती हो।”

एएआईबी ने यह भी कहा कि जाँच ‘नियमों और अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार सख्त और प्रोफेशनल तरीके से’ की जा रही है।

विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो ने ये भी कहा है कि 2012 से उनकी संस्था काम कर रही है और भारत सरकार के प्रति पूरी तरह जवाबदेह है। अब तक 93 दुर्घटनाओं और 111 गंभीर मामलों की जाँच कर चुका है। इसमें गड़बड़ियाँ नहीं मिली है। अहमदाबाद विमान हादसे की जाँच के अलावा दूसरे कई दुर्घटनाओं की भी जाँच अभी कर रहा है।

वॉल स्ट्रीट जरनल ने क्या कहा था?

अमेरिकी अखबार WSJ ने गुरुवार (16 जुलाई, 2025) को एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि अब एअर इंडिया हादसे की जाँच सीधे तौर पर AI-171 के मुख्य पायलट सुमीत सभरवाल पर केन्द्रित हो गई है। इस रिपोर्ट में 3 दशक से विमान उड़ा रहे पायलट सुमीत सभरवाल को फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने का दोषी ठहरा दिया गया है, जिसकी वजह से हादसा हुआ।

WSJ की रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे के बाद बरामद हुए विमान के ब्लैक बॉक्स में सेव हुई आवाज की रिकॉर्डिंग इशारा करती है कि कैप्टन सुमीत सभरवाल ने ही फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद किए। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अहमदाबाद एयरपोर्ट से विमान को लेकर फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर उड़े थे और फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद होने के बाद संभवतः उन्होंने ही कैप्टन सुमीत सभरवाल से पूछा था, “तुमने ये स्विच क्यों बंद किया?”

WSJ की रिपोर्ट में पायलटों को दोषी ठहराने के साथ यह नहीं स्पष्ट बताया गया है कि इसी आवाज की रिकॉर्डिंग में सुमीत सभरवाल ने फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने से इनकार किया था। WSJ की रिपोर्ट के बाद विदेशी मीडिया के बाकी संस्थान भी इसी सुर में गाने लगे हैं। रायटर्स, ब्लूमबर्ग, CNN और न्यू यॉर्क पोस्ट समेत बाक़ी अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने सीधे तौर पर अपनी हेडलाइंस और खबर में कैप्टन सुमीत सभरवाल को फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने का दोषी मान लिया है।

ऐसा नहीं है कि भारतीय पायलट के नाम दोष डालने का काम सिर्फ अमेरिकी या बाकी विदेशी मीडिया ही कर रहा हो। इस काम में भारतीय मीडिया संस्थान भी शामिल हैं। बिजनेस स्टैण्डर्ड से लेकर ऑनमनोरमा तक ने WSJ की रिपोर्ट के हवाले से पायलटों की कथित गलती की बात को हेडलाइन्स में चलाया है। इन संस्थानों ने भी वह महत्वपूर्ण तथ्य नजरअंदाज कर दिया, जिसमें पायलट ने फ्यूल कंट्रोल स्विच को बंद करने से इनकार किया था।

12 जून को एयर इंडिया फ्लाइट का हादसा

अहमदाबाद विमान हादसा 12 जून को उस वक्त हुआ था, जब एअर इंडिया विमान AI-171 अहमदाबाद से लंदन जा रहा था। इस हादसे में 260 लोगों क जान गई थी जबकि सिर्फ 1 व्यक्ति जिंदा विमान से निकल पाया था। मरने वालों में 169 भारतीय नागरिक, 53 ब्रिटिश नागरिक, 7 पुर्तगाली और 1 नेपाली, 1 कनाडाई नागरिक शामिल थे।

धर्म पूछकर मारते हैं गोली, सैनिक और BJP नेता होते हैं निशाना… पहलगाम में जिस TRF ने दिया था हिंदुओं के नरंसहार को अंजाम, उसे अब अमेरिका ने भी आतंकी संगठन माना: जानें ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ कैसे करता है काम

एक तारीख जो भारत के दिल में नासूर बनकर दर्ज हो गई, वो है 22 अप्रैल 2025 की। पहलगाम की शांत घाटियों में गूंजती गोलियों की आवाजों ने 26 बेगुनाह जिंदगियों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। इस बार आतंकियों ने न धर्म छिपाया, न नीयत- ‘क्या तुम हिंदू हो’??? पूछने के बाद सीधे गोली मार दी। ये कोई छिपा हमला नहीं था, ये एक धार्मिक नरसंहार था।

जिस आतंकी संगठन TRF ने इस कत्लेआम की जिम्मेदारी ली थी, उसे भारत पहले ही आतंकी संगठन घोषित कर चुका था। TRF कोई आम संगठन नहीं है। ये पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की गोद में पला वो खूनी भेड़िया है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा ने नया नाम और नया चेहरा देकर छोड़ा है। लेकिन अब अमेरिका ने भी आधिकारिक रूप से TRF को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह जानकारी दी। मार्को रुबियो ने बताया कि यह फैसला ट्रंप सरकार ने आतंकवाद से लड़ने और पहलगाम हमले में न्याय दिलाने के लिए लिया है।

अमेरिका ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी कर TRF को आतंकी संगठन घोषित किया

वहीं, भारतीय विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा कि अमेरिका ने TRF को आतंकी संगठन घोषित करके अच्छा किया। उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर लिखा कि यह भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद के खिलाफ मजबूत साथ होने का सबूत है। जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिकी विदेश विभाग की तारीफ भी की।

टीआरएफ क्या है और कैसे काम करता है?

द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) एक आतंकी संगठन है। यह पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का ही एक नया रूप है। TRF सीधे-सीधे बड़ा संगठन नहीं है। यह छोटे-छोटे आतंकी समूहों की तरह काम करता है, जिन्हें टेरर मॉड्यूल कहते हैं। इनमें फाल्कन स्क्वाड जैसे नाम शामिल हैं।

ये समूह किसी खास काम के लिए तैयार होते हैं और काम खत्म होने के बाद या तो खत्म हो जाते हैं या अपना चेहरा बदल लेते हैं। TRF के आतंकी बहुत चालाक होते हैं। वे आम लोगों की तरह रहते हैं।

हमला करने से पहले वे अपनी जगह की रेकी करते हैं, यानी वहाँ की पूरी जानकारी जुटाते हैं। फिर वे हथियार इकट्ठा करते हैं और ट्रेनिंग लेते हैं। हमले के बाद वे अपने हथियार छिपा देते हैं और घाटियों या जंगलों में छिप जाते हैं।

ये आतंकी सोशल मीडिया का भी खूब इस्तेमाल करते हैं। वे इसके जरिए इस्लामिक कट्टरता फैलाते हैं और युवाओं का ब्रेनवॉश करते हैं, ताकि वे उनके साथ जुड़ जाएँ। ऐसा करने से उन्हें दो फायदे होते हैं। पहला, वे हमलों के लिए स्थानीय लड़कों का इस्तेमाल कर पाते हैं। दूसरा, स्थानीय लोगों को चुनने से उन्हें सहानुभूति भी मिलती है और छिपने के लिए जगह भी मिल जाती है।

TRF जैसे आतंकी संगठन हाइब्रिड मिलिटेंट्स का भी इस्तेमाल करते हैं। ये ऐसे आम नौजवान होते हैं जिनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता। ये ऑनलाइन माध्यम से इन आतंकी समूहों से जुड़ते हैं।

फिर इन्हें ट्रेनिंग दी जाती है और हमला करने का लक्ष्य बताया जाता है। हमला करने के बाद ये फिर से अपने गाँव या शहर जाकर आम जिंदगी जीने लगते हैं। चूंकि इनका कोई रिकॉर्ड नहीं होता, इसलिए इन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

TRF जैसे संगठन आर्टिक्स 370 हटाए जाने के बाद सामने आए। ये ऑनलाइन ही शुरू हुए थे और बाद में दूसरे बड़े आतंकी गुटों से जुड़ गए। ऊपर से देखने पर ये ऐसे लगते हैं जैसे नए बने हों, लेकिन इनका मकसद एक ही होता है- कश्मीर के स्थानीय लोगों के मन में गैर-कश्मीरियों के लिए डर और गुस्सा पैदा करना।

साथ ही, कश्मीर को आतंकवाद से अस्थिर बनाए रखना। ये आतंकी एक ‘शैडो वॉर’ (अदृश्य युद्ध) चला रहे हैं, जिसमें वे खुद को ‘हम’ और बाकी देश व सेना को ‘वे’ बताते हैं, जो उनके साथ गलत कर रहे हैं।

टीआरएफ ने अब तक कितने हमले किए हैं?

टीआरएफ ने अब तक कई आतंकी हमले किए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हमले नीचे दिए गए हैं।

अप्रैल 2020 में कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में घुसपैठ करने के बाद इस हमले में सेना के 5 जवान बलिदान हुए थे, जिनमें एक जेसीओ भी शामिल थे।

30 अक्टूबर 2020 को साउथ कश्मीर के कुलगाम जिले में बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

26 नवंबर 2020 को श्रीनगर के लवेपोरा इलाके के पास श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर उन्होंने दो सैनिकों को गोली मारी और उनके हथियार छीन लिए। उन्होंने इस हत्या का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया था।

26 फरवरी 2023 को कश्मीरी पंडित संजय शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

20 अक्टूबर 2024 को गांदरबल के गगनगीर इलाके में श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे पर टनल बनाने वाली जगह पर फायरिंग की। इस हमले में बडगाम के डॉक्टर शहनवाज मीर और पंजाब-बिहार के 6 मजदूर मारे गए थे।

अमरनाथ यात्रा शुरू होने से ठीक पहले जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इस हमले में कई लोग घायल भी हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी भी TRF ने ही ली थी। यह हमला टीआरएफ ने अपने फाल्कन स्क्वाड की मदद से किया था, जिसे बेहद खूंखार और तेज-तर्रार माना जाता है।

अमेरिकी अधिकारियों मार्को रुबियो ने इस हमले को 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में नागरिकों पर हुआ सबसे घातक हमला बताया।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का स्टेटमेंट

पहलगाम हमला

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकी हमला हुआ। यह हमला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने मिलकर प्लान किया था।

इसे पाकिस्तान के नेताओं और सेना के कहने पर अंजाम दिया गया था। यह हमला सिर्फ पाकिस्तानी आतंकियों ने ही किया था। ISI ने पाकिस्तान में बैठे लश्कर कमांडर साजिद जट्ट को साफ निर्देश दिए थे कि वह पहलगाम में केवल विदेशी आतंकियों का इस्तेमाल करे।

हमले को गुप्त रखने के लिए किसी भी कश्मीरी आतंकी को इसमें शामिल नहीं किया गया। इसके बजाय, जम्मू-कश्मीर में पहले से मौजूद लश्कर के विदेशी आतंकियों को यह काम सौंपा गया।

पहलगाम हमले की अगुवाई सुलेमान नाम का एक शख्स कर रहा था। वह पाकिस्तान के विशेष बल का एक संदिग्ध कमांडो रह चुका है। उसने 2022 में LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) पार करके जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की थी।

सुलेमान ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लश्कर के ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण लिया था। इस दस्ते में सुलेमान के अलावा दो और पाकिस्तानी आतंकी थे। सैटेलाइट फोन से पता चला कि सुलेमान 15 अप्रैल 2025 को त्राल के जंगल में था।

इससे पता चलता है कि वह हमले से करीब एक हफ्ते पहले ही पहलगाम के पास पहुँच गया था। सुलेमान अप्रैल 2023 में पुंछ में सेना के एक ट्रक पर हुए हमले में भी शामिल था, जिसमें पाँच सैनिक शहीद हुए थे।

हालाँकि, ISI और लश्कर के इस बड़े मिशन को अंजाम देने से पहले वह दो साल तक शांत रहा था। हमलावरों ने 26 लोगों को चुना और मार दिया, जिनमें सभी पुरुष थे और 25 हिंदू थे। अभी घाटी में करीब 68 विदेशी आतंकी और 3 स्थानीय आतंकी एक्टिव हैं।

20,000 करोड़ की DRDO परियोजना को मिली हरी झंडी, एयर इंडिया के 6 एयरबस A321 विमान बनेंगे नेत्रा MK-2: स्वदेशी रडार से लैस AWACS बनेंगी इंडियन एयरफोर्स की आँखें

भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए छह स्वदेशी एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमानों के निर्माण को मंज़ूरी दे दी है। यह प्रोजेक्ट 20,000 करोड़ रुपए की लागत वाली एक बड़ी रक्षा परियोजना है, जिसे DRDO एयरबस और भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर तैयार करेगा।

ये विमान भारतीय वायुसेना की निगरानी, कमांड और कंट्रोल क्षमताओं को नई ताकत देंगे। रिपोर्टस के अनुसार इस परियोजना को AWACS इंडिया कार्यक्रम या नेत्रा MK-2 कहा जा रहा है। इसके तहत एयर इंडिया के बेड़े से प्राप्त छह एयरबस A321 विमानों को अत्याधुनिक निगरानी विमानों में बदला जाएगा।

इन विमानों में पृष्ठीय पंख के ऊपर एक बड़ा रडार एंटीना लगाया जाएगा, जो 360 डिग्री रडार कवरेज देगा। यह प्रणाली दुश्मन के विमानों, जमीनी राडार और अन्य खतरों का लंबी दूरी से पता लगाने और ट्रैक करने में सक्षम होगा। इसमें AESA (Active Electronically Scanned Array) रडार तकनीक का इस्तेमाल होगा, जो दुनिया की सबसे उन्नत रडार तकनीकों में से एक है।

नेत्रा MK-2 विमान में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT), संचार इंटेलिजेंस (COMINT), मल्टी-मिशन ऑपरेटर स्टेशन और सक्रिय शोर रद्दीकरण जैसी उन्नत क्षमताएँ भी होंगी। DRDO इस पूरी प्रणाली को डिजाइन और विकसित कर रहा है, जबकि विमान के सैन्य बदलावों की जिम्मेदारी फ्रांस या स्पेन में एयरबस की सुविधाओं पर किया जाएगा।

इसके तहत यात्री विमानों की सीटें हटाई जाएँगी, आगे के हिस्से को मज़बूत किया जाएगा, अतिरिक्त विद्युत इकाई लगाई जाएगी और मिशन कंसोल इंस्टॉल किए जाएँगे। यह पहली बार होगा जब भारत में एयरबस A321 जैसे विमान को इतनी जटिल सैन्य भूमिका के लिए बदला जा रहा है।

अभी भारतीय वायुसेना इजराइल के सहयोग से बनाए गए तीन IL-76 ‘फाल्कन’ AWACS और कुछ सीमित स्वदेशी नेत्रा विमान (Emb-145 प्लेटफॉर्म पर) का उपयोग करती है। लेकिन IL-76 विमानों में बार-बार तकनीकी समस्याएँ आती रही हैं, जिससे भारत को अपने निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई।

AWACS प्रणाली हवा में उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम करती है, जो दुश्मन के हमलों की पहले से चेतावनी देती है और युद्ध के दौरान अपने लड़ाकू विमानों को सही दिशा में गाइड करती है। यह परियोजना चीन और पाकिस्तान जैसी सीमाओं पर चौकसी को और बेहतर बनाएगी।

नेत्रा MK-2 AWACS से जुड़ीं 10 खास बातें

  • 360 डिग्री रडार कवरेज: नेत्रा MK-2 में एक बड़ा रडार एंटीना होगा, जो 360 डिग्री निगरानी देगा। यह दुश्मन के विमान, मिसाइल और जमीनी ठिकानों को सैकड़ों किलोमीटर दूर से पकड़ सकता है।
  • स्वदेशी AESA रडार: इसमें DRDO का बनाया GaN-बेस्ड AESA रडार होगा, जो 500 किमी से ज्यादा दूरी तक छोटे-बड़े खतरों को ट्रैक करेगा, जैसे ड्रोन और स्टील्थ विमान।
  • हवा में कमांड सेंटर: यह विमान उड़ता हुआ कंट्रोल रूम है, जो युद्ध के दौरान IAF के लड़ाकू विमानों को गाइड करेगा और रियल-टाइम जानकारी देगा।
  • एयरबस A321 का इस्तेमाल: एयर इंडिया के 6 A321 विमानों को सैन्य जरूरतों के लिए बदला जाएगा। ये विमान बड़े, भरोसेमंद और लंबी उड़ान के लिए मुफीद हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक और संचार खुफिया: इसमें ELINT और COMINT सिस्टम होंगे, जो दुश्मन की रेडियो सिग्नल और बातचीत को पकड़कर खुफिया जानकारी जुटाएँगे।
  • आधुनिक मिशन कंसोल: विमान में मल्टी-मिशन ऑपरेटर स्टेशन होंगे, जो कई तरह के ऑपरेशनों को एक साथ मैनेज करने में मदद करेंगे।
  • स्व-रक्षा की क्षमता: इसमें रडार वार्निंग रिसीवर और काउंटर मेजर्स डिस्पेंसिंग सिस्टम होंगे, जो मिसाइल हमलों से विमान को बचाएँगे।
  • आत्मनिर्भर भारत का कदम: यह प्रोजेक्ट DRDO और भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर बन रहा है, जो मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगा और विदेशी निर्भरता कम करेगा।
  • निर्यात की संभावना: नेत्रा MK-2 की तकनीक इतनी उन्नत है कि भविष्य में इसे अन्य देशों को बेचा जा सकता है, जिससे भारत की रक्षा इंडस्ट्री को फायदा होगा।
  • 2026-27 में शामिल होने की उम्मीद: पहला विमान 2026-27 तक IAF को मिलेगा, जो चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर निगरानी को और मजबूत करेगा।

इस प्रोजेक्ट के 3 साल में पूरा होने की उम्मीद है और पहला विमान 2026-27 तक भारतीय वायुसेना को सौंपा जा सकता है। इससे भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास स्वदेशी रूप से विकसित हवाई चेतावनी प्रणाली है। साथ ही यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। भविष्य में यह तकनीक निर्यात के लिए भी रास्ते खोल सकती है।

ED ने गुरुग्राम की विवादित लैंड डील में रॉबर्ट वाड्रा, उनकी कंपनियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट: 43 संपत्तियाँ हो चुकी हैं कुर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिखोपुर लैंड डील मामले में कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा सहित 11 लोगों और संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट गुरुवार (17 जुलाई 2025) को नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष PMLA कोर्ट में दाखिल की गई।

रिपोर्टस के अनुसार, यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसमें वाड्रा की कंपनी पर भारी मुनाफा कमाने और नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

मामला वर्ष 2008 में गुरुग्राम के शिखोपुर गाँव (अब सेक्टर 83) की 3.53 एकड़ जमीन की खरीद से जुड़ा है। ED के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा लि ने यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से महज 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।

कुछ ही महीनों में हरियाणा सरकार ने इस जमीन पर व्यावसायिक कॉलोनी के लिए लाइसेंस दे दिया, जिससे जमीन की कीमत लगभग 700% बढ़ गई। इसके बाद सितंबर 2012 में इस जमीन को DLF को करीब 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।

उस वक्त हरियाणा में कॉन्ग्रेस की भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार थी। इस सौदे की जाँच तत्कालीन IAS अधिकारी अशोक खेमका ने शुरू की और म्यूटेशन रद्द कर दिया। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का मामला बताया।

इसी के आधार पर 1 सितंबर 2018 को गुरुग्राम पुलिस ने FIR  दर्ज की। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की।  का कहना है कि इस सौदे से जो मुनाफा हुआ, उसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इधर-उधर घुमाया गया।

रॉबर्ट वाड्रा को अप्रैल 2025 में तीन दिनों तक पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहाँ उनके बयान PMLA के तहत दर्ज किए गए। वाड्रा ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है और कहा है कि उन्होंने जाँच में पूरा सहयोग किया है और 23000 से ज्यादा पेज के दस्तावेज भी सौंपे हैं।

इस चार्जशीट में रॉबर्ट वाड्रा के अलावा उनकी कंपनियों, सत्यनंद याजी, केवल सिंह विर्क और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्रा. लि. को आरोपित बनाया गया है। इसके अलावा बुधवार (16 जुलाई 2025) को ED ने वाड्रा और उनकी कंपनियों की कुल 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनकी कीमत लगभग 37.64 करोड़ रुपए बताई गई है।

फिलहाल कोर्ट ने इस चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया है। अगली सुनवाई की तारीख तय की जा चुकी है, जिसके बाद यह तय होगा कि आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलेगा या नहीं।

महाकाल की नगरी में टीचर शकील मोहम्मद ने जलाई हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें, मुँह खोलने पर छात्रों को दी जान से मारने की धमकी: नमाज-कुरान पढ़ने का भी डाला दबाव, गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में सरकारी स्कूल के टीचर शकील मोहम्मद ने हिंदू देवी-देवताओं और भारत माता की तस्वीरें जलाईं। इसके साथ राष्ट्रीय ध्वज को भी जलाने की कोशिश की गई। शकील पर छात्रों को जबरन कुरान और नमाज पढ़ाने का भी आरोप है।

दरअसल, महिदपुर के नागपुर गाँव में माध्यमिक विद्यालय नागपुरा है। स्कूल के एक छात्र ने अपने चाचा रोहित राठौड़ को शकील मोहम्मद के करतूतों के बारे में बताया। छात्रों के अनुसार, 11 जुलाई 2025 को शकील ने छात्र-छात्राओं के सामने भगवान गणेश, माता सरस्वती और भारत माता की तस्वीर तोड़ दी और उन्हें आग के हवाले कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्र की शिकायत पर उसके चाचा रोहित राठौड़ 16 जुलाई 2025 को स्कूल पहुँचे। यहाँ चश्मदीद बने बाकी छात्र-छात्राओं से बात की गई, तो घटना सही निकली। फिर सभी छात्रों के परिजनों ने मिलकर टूटी हुई तस्वीरों के फोटो और वीडियो बनाए। उन्हें लेकर पुलिस के पास पहुँचे।

रोहित राठौड़ ने पुलिस से आरोपित शकील मोहम्मद के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। रोहित ने बताया कि उनका भतीजा अनुराग राठौड़ माध्यमिक विद्यालय नागपुरा में कक्षा छठीं का छात्र है। उसने बताया कि टीचर शकील मोहम्मद ने छात्रों के सामने हिंदू देवी-देवताओं और भारत-माता की तस्वीर को जलाया। साथ ही किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

इसके अलावा शकील मोहम्मद कक्षा में छात्रों पर नमाज पढ़ने और कुरान पढ़ने का भी दबाव डालता है। कहता है कि वह छात्रों को नमाज और कुरान पढ़ाएगा। इसके साथ छात्रों के माता-पिता के खिलाफ भी आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करता था।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि आरोपित टीचर ने लसूड़िया मंसूर क्षेत्र के स्कूल में टीचर रहते हुए भी यह काम किया है। इसके साथ बाकी जगहों पर भी इसे दोहराया है।

वहीं, पुलिस ने आरोपित शकील मोहम्मद के खिलाफ BNS की धारा 298, 351(3) में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने शकील मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया है। उधर जिला शिक्षा अधिकारी आनंद शर्मा ने भी शकील मोहम्मद को पद से निलंबित कर दिया है।

हिंदू संगठन ने किया विरोध-प्रदर्शन

शकील मोहम्मद के हिंदू देवी-देवताओं को जलाने का मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठन ने रोष जताया। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पुलिस थाने का घेराव कर विरोध-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की माँग की। वहीं, पुलिस ने आरोपित शकील को महिदपुर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।

पति का पत्नी से जबरन पासवर्ड माँगना निजता का उल्लंघन, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: विवाह में भी सीमाएँ जरूरी, शक के आधार पर नहीं माँग सकते कॉल डिटेल्स

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक फैसले में साफ कर दिया कि शादी का मतलब यह नहीं कि पति को पत्नी की निजी जानकारी, जैसे मोबाइल पासवर्ड या बैंक खाते का विवरण, हासिल करने का हक मिल जाता है। कोर्ट ने साफ कहा कि पति अपनी पत्नी को उसके मोबाइल फोन या बैंक खाते के पासवर्ड शेयर करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने इसे निजता का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि ऐसा करना घरेलू हिंसा की श्रेणी में आ सकता है। यह मामला तब सामने आया जब दुर्ग के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) माँगने के लिए दुर्ग के एसएसपी और और फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने अनुरोध किया कि उसकी पत्नी के कॉल डिटेल उसको उपलब्ध कराए जाएँ।

पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i-a) के तहत क्रूरता का हवाला देते हुए तलाक की अर्जी दाखिल की थी। उसका दावा था कि पत्नी के व्यवहार और संदिग्ध गतिविधियों के चलते उसे कॉल रिकॉर्ड की जरूरत है। पत्नी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कोर्ट में अपना पक्ष रखा। पति ने पारिवारिक कोर्ट में माँग की कि पुलिस को उसकी पत्नी के कॉल रिकॉर्ड देने का आदेश दिया जाए, लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया। इसके बाद उसने हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जो भी खारिज हो गई।

हाई कोर्ट के जस्टिस राकेश मोहन पांडे ने सुनवाई के दौरान कहा कि विवाह एक साझेदारी है, न कि स्वामित्व। पति-पत्नी को एक-दूसरे की निजता का सम्मान करना होगा।

हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के के.एस. पुट्टस्वामी जैसे फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक है। इसमें मोबाइल पर निजी बातचीत और व्यक्तिगत जानकारी शामिल है। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि बिना ठोस सबूत के संदेह के आधार पर किसी की कॉल डिटेल माँगना गलत है।

कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है। इसमें व्यक्तिगत अंतरंगता, विवाह की पवित्रता और यौन अभिविन्यास जैसे मुद्दों का संरक्षण शामिल है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि मोबाइल पर की गई बातचीत अक्सर गोपनीय और निजी प्रकृति की होती है और यह किसी व्यक्ति के निजी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इस प्रकार की बातचीत में हस्तक्षेप करना निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा।

दिल्ली में विकास नाम के युवक ने लाइव स्ट्रीमिंग कर दी जान, शाकिब नाम के युवक पर लगाया पत्नी को फाँसने का आरोप: बेटे के लिए भी की अपील, Video हुआ वायरल

दिल्ली के निहाल विहार में एक शख्स ने लाइव वीडियो चला कर फाँसी लगा ली। वीडियो में उसने कहा कि उसकी पत्नी का शाकिब नाम के व्यक्ति के साथ संबंध है। उसने कहा कि पत्नी आए दिन कलह करती थी, इसलिए वह आत्महत्या कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, आत्महत्या करने वाले व्यक्ति का नाम विकास है। वह निहाल विहार का रहने वाला था। वायरल वीडियो में वह कह रहा है – “मैं विकास हूँ, मेरी पत्नी का नाम पूजा है और हमारा चार साल का बच्चा है। मेरी शादी को पाँच साल हो चुके हैं। पहले सब कुछ ठीक था, जिंदगी सही चल रही थी, लेकिन अचानक सब कुछ खराब हो गया। मैंने अपनी जिंदगी खुद बर्बाद कर ली।”

रिपोर्ट के मुताबिक, उसने कहा कि उसकी पत्नी का शाकिब नाम के एक व्यक्ति से संबंध है। उसने शाकिब पर साइबर क्राइम में शामिल होने और उसे झूठे केस में फँसाने का भी आरोप लगाया। विकास ने बताया कि उसकी पत्नी उसे छोड़कर मायके चली गई थी और उनके चार साल के बेटे को भी उपने साथ ले गई है।

वायरल वीडियो में विकास कह रहा है, “मेरी पत्नी अपनी माँ और बहनों के साथ रहती है। इनका हिसाब बहुत गलत है। पता नहीं किस तरह खर्चा चलता है। आज मैं मर जाता हूँ तो मेरे बेटे को मेरे माता पिता और बहन को सौंपा जाए, उसकी माँ को न दिया जाए।

विकास के मुताबिक, “कर्ज के चलते पत्नी चार साल के बच्चे को छोड़कर शाकिब नाम के युवक के साथ घूमने लग गई है। मैं काफी कर्ज में था जिसके चलते घरेलू कलह होता था, लेकिन अब मैंने सब कर्ज चुका दिया है और मर रहा हूँ।” पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जाँच कर रही है।