न्याय सुनिश्चित करना न्यायपालिका का काम है। पर एक महिला जज ने ही इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उन्हें न्याय देने में यह सिस्टम विफल रहा है। इस महिला जज का नाम अदिति शर्मा है।
उन्होंने राजेश कुमार गुप्ता को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का जज बनाए जाने के विरोध में इस्तीफा दिया है। महिला जज ने गुप्ता पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। हालाँकि जज गुप्ता का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी आरोपों की आधिकारिक जानकारी नहीं है।
गुप्ता ने हाई कोर्ट के जज के तौर पर फिलहाल शपथ नहीं ली है। लेकिन इस पर विरोध दर्ज कराते हुए मध्य प्रदेश के शहडोल की सिविल जज अदिति शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
अदिति शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अपना इस्तीफा भेजा है। इसमें कहा है, “अपनी नैतिकता और भावनाओं को लगे आघात को देखते हुए मैं न्यायिक सेवा से इस्तीफा दे रही हूँ, इसलिए नहीं कि मैंने न्याय में विश्वास खो दिया है, बल्कि इसलिए कि ‘न्याय’ ने उसी संस्था के भीतर अपना रास्ता खो दिया है जिसने इसकी रक्षा करने की शपथ ली थी।”
उन्होंने अपने इस्तीफे को ‘विरोध दर्ज कराने का तरीका’ कहा है। जज अदिति शर्मा ने लिखा है, “उन्होंने न्याय में विश्वास नहीं खोया है, बल्कि उस सिस्टम से टूट चुकी हैं, जो न्याय की संरक्षक मानी जाती है। उनका इस्तीफा इस रूप में दर्ज हो कि कभी मध्यप्रदेश में एक महिला जज थी जो न्याय के लिए समर्पित थी, लेकिन उसी संस्था ने उसके साथ न्याय नहीं किया।”
शर्मा ने इस साल की शुरुआत में भारत के राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम से कई शिकायतें की थीं, जिनमें उन्होंने गुप्ता की पदोन्नति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। शर्मा उन छह महिला जस्टिस में से एक थीं जिन्हें जून 2023 में मध्य प्रदेश सरकार ने सेवा से हटा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सभी 6 जजों की बहाली का आदेश दिया था। टॉप कोर्ट ने कहा था कि न्यायिक संस्थानों को महिला अधिकारियों के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि न्याय न सिर्फ दिया जा रहा है, बल्कि दिखाई भी दे रहा है। इसके बाद जज अदिति शर्मा शहडोल में 2024 में दोबारा सिविल जज बनीं ।
हाईकोर्ट के जज बने आरोपित जज राजेश कुमार गुप्ता पर जज अदिति शर्मा के अलावा दो दूसरी न्यायिक अधिकारियों ने भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने आरोपित जज के नाम की सिफारिश की और केन्द्र ने मंजूरी दे दी।
आरोपित जज राजेश गुप्ता ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार करते हुए सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके खिलाफ किसी शिकायत की उन्हें आधिकारिक जानकारी नहीं है। वे तीन दशक से न्यायिक सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं।
गुजरात की ATS यूनिट ने बेंगलुरु से अल कायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) की एक महिला इस्लामी आतंकी को गिरफ्तार किया है। इसका नाम शमा परवीन है। शमा परवीन सोशल मीडिया से अल कायदा का आतंक फैला रही थी। उसका लिंक हाल ही में अनकवर किए गए मॉड्यूल से है। ATS उससे बाकी जानकारियाँ निकालने में जुटी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गिरफ्तारी बेंगलुरु में 30 जुलाई, 2025 के आसपास हुई है। पकड़ी गई शमा परवीन 30 वर्ष की है। शर्मा परवीन झारखंड की रहने वाली अहिहै। वह बेंगलुरु में अपने भाई के साथ रहती है। यहीं से वह सोशल मीडिया पर इस्लामी आतंक का प्रचार-प्रसार करती है।
Ahmedabad | Gujarat ATS arrested a woman named Sama Parveen (30) from Bengaluru, who was associated with Al Qaeda. Earlier, three terrorists were arrested: Sunil Joshi, DIG Gujarat ATS
शमा परवीन को कुछ रिपोर्ट्स में भारत अल कायदा मॉड्यूल का सरगना बताया गया है। शमा परवीन की गिरफ्तारी अल कायदा मॉड्यूल के खुलासे के बाद हुई है। 23 जुलाई, 2025 को देश के अलग-अलग हिस्से से पकड़े गए 4 इस्लामी आतंकियों से पूछताछ में शमा परवीन का नाम आया था। इसके बाद बाद उसे बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया।
गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी के अनुसार, शमा परवीन पूरी तरह कट्टरपंथी है और पाकिस्तान के सीधे सम्पर्क में थी। यहाँ वह अपने हैंडलर्स से बातचीत करती थी। ATS ने बताया है कि वह इंस्टाग्राम समेत बाक़ी सोशल मीडिया पर आतंकी कंटेंट साझा करती थी और लोगों को भड़काती थी। इसके साथ ही वह आतंकी भर्ती में भी लगी हुई थी।
शमा परवीन भड़काऊ बयान डाउनलोड करके भी साझा करती थी। उसका लिंक गुजरात के अलकायदा मॉड्यूल से भी था। शमा परवीन और उससे जुड़े लोग देश भर में बड़े हमले की योजना बना रहे थे। यह भी जानकारी सामने आई है।
शमा परवीन वर्तमान में बेरोजगार है लेकिन उसका भाई बेंगलुरु में तीन साल से नौकरी करता है। ATS ने उसे गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया और उसकी ट्रांजिट रिमांड ली है। अब उससे और भी पूछताछ की जा रही है। अल कायदा मॉड्यूल में शमा परवीन पहली महिला आतंकी है।
गौरतलब है कि इससे पहले गुजरात ATS ने अल कायदा 4 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था। यह आतंकवादी देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार किए गए थे। यह चारों अल कायदा के लिए भर्ती चला रहे थे। इनकी पहचान मोहम्मद फरदीन रईस, सेफुल्लाह कुरैशी रफीक, मोहम्मद फैक रिजवान और जीशान अली के रूप में हुई थी।
दो आतंकी को गुजरात में अलग-अलग जगहों से पकड़ा गया था। वहीं, एक को दिल्ली और अन्य को नोएडा से गिरफ्तार किया गया था। ये सभी आतंकी सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालकर लोगों को अल कायदा से जोड़ने का काम कर रहे थे। यह सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी और आतंकवादी विचारधारा से संबंधित फोटो-वीडियो डालते थे।
भारत के राज्य कर्नाटक में स्थित कोलार जिला वैसे तो अपने सोने की खदानों के साथ दूध के उत्पादन के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है। लेकिन अब ये जिला एक अन्य कारण से भी चर्चा में है।
चर्चा ये कि यहाँ पर 38 वर्षीय महिला में एक नया और दुर्लभ रक्त समूह सामने आया है। ये रक्त समूह महिला को नई पहचान देने के साथ उसके लिए मुश्किलों का सबब भी है। वह न तो किसी को अपना खून दे सकती है और न ही किसी तरह की आपात स्थिति में दुनिया केस किसी भी अन्य रक्त समूह से ब्लड यूनिट ले पाएगी। आइए आपके बताते हैं पूरा मामला
पहुँची हार्ट सर्जरी के लिए, सामने आई दूसरी मुश्किल
कर्नाटक के कोलार जिले में 38 वर्ष की एक महिला अपने हृदय की सर्जरी के लिए अस्पताल पहुँची। सामान्य जाँचों में उसका रक्त समूह O+ve निकल कर आया। हालाँकि डॉक्टरों को रक्त में कुछ बदलाव नजर आया। आगे की जाँच में उन्हें पता चला कि महिला का रक्त किसी अन्य O+ve रक्त यूनिट से मेल नहीं खाता। इसके बाद आगे की जाँच की गई।
जाँच में पाया गया कि महिला का रक्त पैनरिएक्टिव था। इसका अर्थ है कि ये रक्त किसी भी अन्य रक्त के नमूने से किसी भी तरह से मैच नहीं हो रहा था। इसके बाद महिला के रक्त को रोटरी बैंगलोर टीटीके ब्लड सेंटर की एडवांस्ड इम्यूनोहेमेटोलॉजी लैब को भेजा गया। यहाँ पर जाँच होने के साथ-साथ रक्त का नमूना ब्रिटेन स्थित इंटरनेशनल ब्लड ग्रुप रेफरेंस लैब भी भेजा गया।
10 महीने लंबी जाँच के बाद सामने आया CRIB
इस पूरे मामले में 10 महीने की लंबी जाँच की प्रक्रिया चली। वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई। पता चला कि महिला के रक्त में नया एंटीजन है। यह दुर्लभ है। दुर्लभ रक्त का मतलब है कि किसी व्यक्ति के रक्त में एक बहुत ही सामान्य एंटीजन की कमी है जो अधिकांश आबादी में पाया जाता है, या फिर उसमें एंटीजन का एक संयोजन मौजूद नहीं है।
10 महीने की गहन जाँच के बाद वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए नए रक्त एंटीजन को क्रोमर समूह की श्रेणी में रखा गया है। इसका नाम CRIB रखा गया है। CR का मतलब क्रोमर Cromer और IB का अर्थ भारत और बेंगलुरू (India, Bangalore) है।
पूरी जांच के बाद जब महिला का रक्त समूह सामने आया उसके बाद महिला के हार्ट सर्जरी की गई। खास बात यह रही कि इस हार्ट सर्जरी में महिला को बिना किसी अतिरिक्त खून ब्लड यूनिट के पूरी शल्य प्रक्रिया खत्म की गई।
न किसी को खून दे सकती है, न ले सकती है
हालाँकि इस नए रक्त समूह के जानकारी के बाद महिला के साथ एक नई चुनौती भी है और वह किसी से खून ले नहीं सकती और न ही किसी को खून दे सकती है। ऐसे में भविष्य में यदि महिला को कभी भी रक्त की आवश्यकता होती है तो उन्हें अपना ही रक्त पहले ब्लड बैंक को देना होगा ताकि उसकी जाँच के बाद वहीं उन्हें वापस चढ़ाया जा सकेगा।
भारत के कुछ दुर्लभ रक्त समूह
भारत में सामान्य तौर पर A+, B+, A-, B-, AB+, AB-, O+ और O-ve रक्त समूह मिलते हैं। -ve फैक्टर वाले रक्त समूह ज्यादातर कम ही पाए जाते हैं। इनके साथ ही भारत में पाए जाने वाले बॉम्बे ब्लड ग्रुप और RhNull दुर्लभ रक्त समूह हैं।
अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे के बाद इसकी जाँच जारी है। 12 जून 2025 को हुए इस हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी। इस पर AAIB की शुरुआती जाँच रिपोर्ट के बाद अब कंपनी में विमान संचालन को लेकर DGCA की ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है।
ऑडिट रिपोर्ट में 100 से ज्यादा गड़बड़ियों का जिक्र
विमानन सुरक्षा नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA ने अपने ऑडिट में टाटा समूह की एयरलाइंस एअर इंडिया में 100 से ज्यादा खामियाँ पाई हैं। जानकारी के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट में चालक दल के आराम और काम की अवधि, प्रशिक्षण, चालक दल की संख्या में कमी और उड़ान की योग्यता से संबंधित 100 से ज्यादा उल्लंघन और निष्कर्ष डीजीसीए ने अपनी रिपोर्ट में दिए हैं।
इन खामियों को 7 भागों में विभाजित किया गया है। लेवल 1 में 7 गडबड़ियाँ हैं जो सुरक्षा मानको की दृष्टि से अति गंभीर श्रेणी में आते हैं। इन गड़बड़ियों को 30 जुलाई तक ठीक करने के लिए कहा गया है। शेष 93 खामियों को सुधारने के लिए 23 अगस्त 2025 तक का समय दिया गया है। डीजीसीए की रिपोर्ट के मुताबिक, ” एअर इंडिया की संचालन प्रणाली में पायलटों के प्रशिक्षण अधूरे, ट्रेनिंग रिकॉर्ड बिखरे और रोस्टर में गड़बड़ियाँ मिली। कम विजिबिलिटी में उड़ान भरने के लिए जरूरी अनुमतियों में भी अनियमितता मिलीं।”
ऑडिट रिपोर्ट पर एअर इंडिया की प्रतिक्रिया
एअर इंडिया ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एअर इंडिया ने कहा है कि डीजीसीए की रिपोर्ट का एयरलाइन जवाब देगी और सुधार के लिए कदम उठाए जाएँगे। एअर इंडिया के मुताबिक, “सभी एयरलाइन कंपनियों में नियमित परीक्षण और उन्हें लगातार मजबूत बनाने के लिए नियमित ऑडिट की जाती है।” एअर इंडिया के मुताबिक, “हम अपना जवाब सुधारात्मक कार्रवाइयों की जानकारी देते हुए डीजीसीए के सामने तय समय में पेश करेंगे।” कंपनी ने कहा है कि 12 जून 2025 को हुए विमान हादसे के बाद विमानों की नियमित जाँच की जा रही है।
गुरुग्राम सेंटर में 1-4 जुलाई तक हुआ ऑडिट
एअर इंडिया का ऑडिट 1 से 4 जुलाई के बीच गुरुग्राम सेंटर पर हुआ था। इसमें फ्लाइट के पूरे ऑपरेशन की जाँच की गई थी। डीजीसीए ने 23 जुलाई को एअर इंडिया को कारण बताओ नोटिस भेजा था। इसमें ऑपरेशनल प्रोसीजर मसलन चालक दल के आराम और ड्यूटी नियमों का उल्लंघन, ट्रेनिंग के नियम को लेकर सवाल पूछे गए थे।
3 अधिकारियों पर गिरी थी गाज
इससे पहले 21 जून को एअर इंडिया के 3 अधिकारियों को शेड्यूलिंग और रोस्टरिंग में लापरवाही का आरोप लगाते हुए ड्यूटी से हटाने का निर्देश डीजीसीए ने एअर इंडिया को दिया था। डीजीसीए ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे और घोर लापरवाही की बात कहते हुए एअर इंडिया को कड़ी फटकार लगाई थी।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक डीजीसीए ने एअर इंडिया को कहा था कि एयरबस ए 320 के पार्टस् का बदलाव तय समय पर नहीं किया गया और काम समय पर पूरा दिखाने के लिए एएओ रिकॉर्ड बदला गया। एजेंसी के मुताबिक एयरलाइन ने अपनी गलती मान ली थी। हालाँकि कहा था कि दिक्कत की जानकारी मिलते ही उसने जरूरी कदम उठा लिए थे।
AAIB की शुरुआती जाँच रिपोर्ट
AAIB ने अपनी रिपोर्ट में कॉकपिट के ऑडियो रिकॉर्ड के आधार पर बताया था कि विमान के इंजन हवा में बंद हो गए थे। दोनों इंजनों के काम नहीं करने पर विमान नीचे गिर गया। रिपोर्ट के मुताबिक MAY DAY का कॉल पायलट की तरफ से दुर्घटना के चंद सैकेंड पहले आया था, हालाँकि विमान नॉर्मल टेकऑफ की तरह की उड़ान भरा था लेकिन चंद सेकेंड के बाद ही उसमें गड़बड़ी आ गयी।
रिपोर्ट में उन तकनीकी चीजों का सिलसिलेवार तरीके से जिक्र किया गया, जो विमान के उड़ान के बाद कुछ सेकेंड में घटित हुए।
अहमदाबाद में हुआ था विमान हादसा
एअर इंडिया की फ्लाइट AI 171 अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। एअर इंडिया का ये बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान कुछ सेकेंड बाद ही बी जे मेडिकल कॉलेज के होस्टल पर गिर गया। इस दुर्घटना में 260 लोग मारे गए।
मरने वालों में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल थे। इसके अलावा बीजी मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में मौजूद कई छात्रों समेत 19 अन्य लोग भी अपनी जान गँवा बैठे। इस हादसे में एक यात्री की जान बच गई। ये विमान हादसा भारत की सबसे भयानक विमान दुर्घटनाओं में एक माना जाता है।
रूस के पूर्वी क्षेत्र के तटवर्ती इलाके कामचटका में बुधवार (30 जुलाई 2025) को जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर तीव्रता 8.8 मापी गई है। यह भूकंप समुद्र के नीचे 19.3 किलोमीटर (12 मील) की गहराई पर आया है।
इसके बाद अमेरिका के कैलिफोर्निया के तट से लेकर जापान तक सुनामी के लिए चेतावनी जारी कर दी गई है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के अनुसार, समुद्र में 3 से 12 फीट तक ऊँची लहरें उठ सकती हैं जिसके कारण कई क्षेत्रों में तबाही के आशंका जताई गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भूकंप जापान के चार बड़े द्वीपों में से सबसे उत्तरी द्वीप होक्काइडो से लगभग 250 किलोमीटर (160 मील) दूर था। वहाँ इसके हल्के झटके महसूस हुए। हालाँकि होक्काइडो तट पर भी 30 सेंटीमीटर ऊँची लहरें पहुँचीं।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की मानें तो भूकंप समुद्र में आया। कुरील द्वीप समूह की मुख्य बस्ती सेवेरो-कुरील्स्क में पहली सुनामी लहर टकराई। इसके बाद आस पास के क्षेत्रों में बाढ़ आ गई। हालाँकि अलर्ट के चलते पहले ही संभावित क्षेत्रों से लोगों को हटा दिया गया था। लगभग 2,000+ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।
73 वर्षों बाद फिर हिला कामचटका
रूस में 1 महीने के अंदर 5 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। कामचटका में इतना तीव्रता वाला भूकंप इससे पहले 4 नवंबर 1952 को आया था जिसकी तीव्रता 9 थी और इसके कारण कामचटका में काफी नुकसान हुआ था।
रूस में कामचटका एक प्रायद्वीप है, जो उसके पूर्वी हिस्से में स्थित है। यह प्रशांत महासागर के किनारे साइबेरिया के पूर्व में बसा है। मुख्यतः रूस से जुड़े होने के साथ इसके उत्तर में बेरिंग सागर, दक्षिण में जापान और पूर्व में प्रशांत महासागर है।
जापान में भी जारी हुआ अलर्ट
सुनामी की चेतावनी पर जापान के फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को खाली कर दिया गया है। 2011 में यहाँ पर 9 की तीव्रता पर भूकंप और सुनामी आई थी, जिसके बाद फुकुशिमा न्यूक्लियर पावर प्लांट को काफी क्षति पहुँची थी। स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि सुनामी के लहरों के कारण यहाँ का कूलिंग और बिजली का सिस्टम ठप हो गया था इसकी वजह से रेडियोएक्टिव रिसाव की स्थिति भी बन गई थी।
इन देशों में भी सुनामी का खतरा
रूस में आई सुनामी के बाद जापान समेत आसपास के 30 देशों में भूकंप और सुनामी के लिए चेतावनी जारी की गई है और चपेट में आ सकने वाले संभावित उलाकों को खाली करवाया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ पर भूकंप की जानकारी साझा की है।
अलर्ट जारी किए गए देशों में अमेरिकी समोआ, एंटार्टिका, कोलंबिया, कुक आइलैंड्स, कोस्टा रीका, अल सल्वाडोर, फिजी, गुआम, गुआटेमाला, होलैंड एंड बेकर, इंडोनेशिया, जार्विस आइलैंड, कैर्मेडिस आइलैंड, किरीबाटी, मार्शल आइलैंड, मेक्सिको, मिडवे आइलैंड, न्यूजीलैंड, निकारागुआ, पलाऊ, पल्मिरा आइलैंड, पनामा, पापुआ न्यू गिनी, पेरू, फिलीपींस,समोआ, ताइवान, टोन्गा और वानुअतु शामिल हैं। सभी देशों में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए चेतावनी जारी की गई है।
अलर्ट में मोड पर आया भारत
भूकंप की खबर के बाद भारत सरकार भी अपने पर्यटकों और भारतीय नागरिकों को लेकर अलर्ट मोड पर है। सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास से भारतीय नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की गई है। इसके तहत कैलिफोर्निया, हवाई और अमेरिका के अन्य पश्चिमी तटीय राज्यों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।
लोगों ने सोशल मीडिया पर साझा किए वीडियो
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सुनामी को लेकर उनके घर में आए भूकंप के झटकों की वीडियो और तस्वीरें साझा की हैं जिसमें झटकों के साथ उसके बाद की भयावहता को साफ तौर पर देखा जा सकता है।
Whoahhhhh! Videos showing the shaking from the M8.7 earthquake that hit off the coast of Kamchatka, Russia ??? pic.twitter.com/Q5dYAstWil
सुनामी के चलते कामचटका में छोटे बच्चों के स्कूल किंडरगार्टन की इमारत भी ध्वस्त हो गई। हालाँकि उस समय इमारत में कोई भी नहीं था। अलर्ट से इमारत को पहले ही खाली करवा लिया गया था।
मैं भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपना वक्तव्य इन लाइनों के साथ चालू किया। उन्होंने इस दौरान जहाँ भारतीय सेनाओं की सफलता पर बात की तो वहीं कॉन्ग्रेस को लगातार उलटे-सीधे प्रश्न उठाने पर आइना भी दिखाया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है।
ऑपरेशन सिंदूर में कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाया
लोकसभा में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस अब पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ा रही है।
पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर को दुनिया का समर्थन तो मिला, लेकिन दुर्भाग्य है कि मेरे देश के वीरों के पराक्रम को कॉन्ग्रेस का समर्थन नहीं मिला। 22 अप्रैल 2025 के बाद 3-4 दिन में ही यह उछल रहे थे। ये लोग अपनी स्वार्थी राजनीति के लिए मुझ पर निशाना साध रहे थे, लेकिन इनकी बयानबाजी और इनका छिछोरापन देश के सैनिकों का मनोबल गिराती रही।”
ऑपरेशन सिंदूर पर कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाने काम किया है। इस पर पीएम ने कहा, “10 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हो रहे एक्शन को रोकने की घोषणा की। इसको लेकर यहाँ भांति-भांति की बातें कही गईं। यह वही प्रोपेगेंडा है जो सीमा पार से फैलाया गया है। कुछ लोग सेना द्वारा दिए तथ्यों की जगह पाकिस्तान के झूठ को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।”
पीएम ने आगे कहा, “देश देख रहा है कि कॉन्ग्रेस राजनीतिक मुद्दों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर होता जा रहा है। कॉन्ग्रेस को पाकिस्तान के मुद्दे इम्पोर्ट करने पड़ रहे हैं। जब बालाकोट में एयरस्ट्राइक हुई तो कॉन्ग्रेस वाले पूछने लगे कि फोटो दिखाई, पाकिस्तान भी यही पूछता था, ये भी यही पूछते थे। आतंकवादी रो रहे हैं, उनके आका रो रहे हैं और उनको रोते देख यहाँ भी कुछ लोग रो रहे हैं।”
पीएम ने कॉन्गेस के लिए कहा, “पाकिस्तान के बयान और हमारा विरोध करने वालों के बयान फुल स्टॉप और कॉमा के साथ एक हैं। देश हैरान है कि कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस को भारत के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है, इनका भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल से बनता और बदलता है।
कॉन्ग्रेस को रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री पर तक भरोसा नहीं… क्या हालत हो गई है इनकी,कॉन्ग्रेस का भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल से बनता है और बदलता है: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी pic.twitter.com/XhH804y5W8
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कॉन्ग्रेस के उठाए गए सवालों को लेकर विपक्ष को जमकर घेरा। पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर पर इन्होंने (विपक्ष) कहा कि रोक क्यों दिया, पहले मानते ही नहीं थे और पूछते हैं कि रोक क्यों दिया। वाह रे बयानबहादुरों, पूरा देश आप पर हँस रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने कारगिल की लड़ाई में भारत की जीत को भी अब तक नहीं अपनाया है।
कॉन्ग्रेस की गलती याद दिलाईं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस सरकार को उनकी गलती याद दिलाईं। इनमें सिंधु जल समझौता से लेकर बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “1962 और 1963 के बीच कॉन्ग्रेस के नेता जम्मू-कश्मीर के नेता पूँछ, नीलम वैली और उरी को छोड़ देने का प्रस्ताव रख रहे थे। यह सब लाइन ऑफ़ पीस के नाम पर किया जा रहा था, 1966 में इन्होंने ही कच्छ के रण पर मध्यस्थता स्वीकार की थी, यह इनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर विजन है।
1962 और 1963 के बीच कॉन्ग्रेस के नेता जम्मू-कश्मीर के नेता पूँछ, नीलम वैली और उरी को छोड़ देने का प्रस्ताव रख रहे थे… यह सब लाइन ऑफ़ पीस के नाम पर किया जा रहा था, 1966 में इन्होने ही कच्छ के रण पर मध्यस्थता स्वीकार की थी, यह इनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर विजन है: प्रधानमंत्री… pic.twitter.com/8e2SByrn5u
पीएम ने आगे कहा, “1971 में पाकिस्तान के 93 हजार फौजी हमारे पास बंदी थे, उसका हजारों किलोमीटर एरिया हमने कब्जा किया था। हम बहुत कुछ कर सकते थे। उस दौरान थोड़ी समझ होती तो POK वापस लिया जा सकता था। इतना सारा जब सामने टेबल पर था तो करतारपुर साहिब वापस ले सकते थे।”
सिंधु जल समझौते पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “सिंधु नदी से भारत जाना जाता था, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उस पर पंचायत करने का अधिकार वर्ल्ड बैंक को दिया। सिंधु जल समझौता भारत के स्वाभिमान के साथ बहुत बड़ा धोखा था। राज्यों के भीतर पानी को लेकर विवाद होता रहा और पाकिस्तान मौज मनाता रहा। अगर सिंधु जल समझौता ना होता तो कई बड़ी परियोजनाएँ बनतीं। सिंधु जल समझौते के बाद नेहरूजी ने करोड़ों रूपए भी दिए ताकि पाकिस्तान नहर बना सके।”
पीएम ने आगे कहा, “बाँध हमारा है, पानी हमारा है लेकिन पाकिस्तान का निर्णय है कि आप उसकी सफाई (डीसिल्टिंग) नहीं कर सकते। नेहरू ने कहा था कि सिंधु जल समझौता बाकी समस्याओं के लिए रास्ता खोलेगा। उन्होंने बाद में कहा लेकिन हम वहीं के वहीं हैं।”
कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान देश में असुरक्षा के माहौल पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “2014 से पहले असुरक्षा का जो माहौल था, उसे याद करके लोग सिहर जाते हैं… हर जगह पर घोषणा होती थी कि कोई भी लावारिस चीज दिखे छूना मत, ये बम हो सकता है। देश के कोने-कोने में यही हाल था।”
बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान सोनिया गाँधी के आँसूओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “दिल्ली में जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ तो कॉन्ग्रेस की एक बड़ी नेता के आँख में आसू थे, वोट पाने के लिए इसे देश भर में प्रसारित किया गया।”
पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने हिंदुत्व का अपमान किया है। पीएम ने बताया, “कॉन्ग्रेस दुनिया को हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी बेचने में लगी हुई थी। कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता ने अमेरिका के राजनयिक को कह दिया था कि लश्कर से बड़ा खतरा हिंदुत्व हैं।”
लोकसभा से पाकिस्तान को लताड़ा
प्रधानमंत्री ने लोकसभा से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फैलाई गई झूठी साजिशों का पर्दाफाश किया। पाकिस्तान को ‘आतंकियों का आका’ बताकर पीएम ने कहा कि उनकी रूह काँप रही है।
पीएम ने कहा, “सेना को कार्रवाई की खुली छूट दी गई कि कब, कहाँ और कैसे जवाब दिया जाए। आतंकियों के आकाओं को ऐसी सजा मिली कि उनकी अब तक रूह काँप रही है। ऑपरेशन सिंदूर में 22 मिनट में 22 अप्रैल 2025 का बदला सेना ने निर्धारित लक्ष्य के साथ ले लिया।”
उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी को हमने झूठा साबित कर दिया, भारत ने सिद्ध कर दिया कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग अब नहीं चलेगी और ना ही अब इसके सामने भारत झुकेगा। आज तक पाकिस्तान के कई एयरबेस ICU में पड़े हैं… ऑपरेशन सिंदूर तकनीक की महारत में सफल सिद्ध हुआ है, पिछले 10 साल में हमने जो तैयारियाँ की हैं, वह ना की होती तो तकनीक के युग में हमारा कितना नुकसान हो सकता था, इसका अंदाजा लगा सकते है।”
पाकिस्तान को धमकी देते हुए पीएम ने कहा, “पहले दिन से क्लियर था कि हमारा लक्ष्य आतंकी और उनके आका हैं, उनके अड्डे हैं… उनको हम ध्वस्त करना चाहते हैं, हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हमने अपना काम कर दिया है। पाकिस्तान में समझदारी होती तो आतंकियों के साथ खुलेआम खड़े रहने की गलती ना करता, उसने निर्लज्ज होकर आतंकियों के साथ खड़े होने का फैसला किया… हम पूरी तरह तैयार थे और मौके की तलाश में थे।”
प्रधानमंत्री ने सीजफायर पर बोलते हुए कहा, “पकिस्तान ने इतने कड़े प्रहार के बाद DGMO को पाकिस्तान ने फोन करके गुहार लगाई कि बहुत मारा, अब और मार झेलने की ताकत नहीं है, हमला रोक दो। उसी दौरान 9 मई, 2025 को रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बात का प्रयास किया।”
पकिस्तान ने इतने कड़े प्रहार के बाद DGMO को पाकिस्तान ने फोन करके गुहार लगाई कि बहुत मारा, अब और मार झेलने की ताकत नहीं है, हमला रोक दो: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी pic.twitter.com/i60tfOdqDp
पीएम ने आगे कहा, “वह घंटे भर प्रयास कर रहे थे, लेकिन सेना के साथ मीटिंग के चलते मैं फोन उठा नहीं पाया। मैंने उन्हें कॉल बैक किया… तब उन्होंने फोन पर बताया कि पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला करने वाला है। मेरा जवाब था- अगर पाकिस्तान का यह इरादा है तो उसे बहुत महँगा पड़ेगा। मैंने कहा था- हम गोली का जवाब गोले से देंगे।”
अंत में पीएम मोदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है।”
जल्दी ही UPI (Unified Payments Interface) में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इससे पैसा भेजते वक्त अकाउंट होल्डर का नाम भी दिखेगा। बैलेंस देखने और गलती से पेमेंट होने पर भी पैसा वापस लेने को लेकर भी नियम बदल रहे हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के अनुसार, यह बदलाव 1 अगस्त, 2025 से लागू हो रहे हैं।
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, NPCI का कहना है कि इससे रिस्पॉन्स टाइम (भुगतान में लगने वाला समय) बेहतर होगा और UPI ट्रांजैक्शन्स की परफॉर्मेंस सुधरेगी। अब आप एक दिन में किसी एक UPI एप से 50 से ज्यादा बार अपना बैंक बैलेंस चेक कर पाएँगे। वहीं ऑटो-पे (जैसे EMI, सब्सक्रिप्शन या बिल पेमेंट) अब किसी भी समय के बजाय तय समय स्लॉट्स में होंगे। वहीं अगर कोई पेमेंट अटक जाता है तो आप उसका स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक कर सकते हैं।
जानिए कौन-कौन से फीचर्स में होगा बदलाव?
1. डेली बैलेंस चेक लिमिट: अब हर UPI ऐप पर यूजर एक दिन में केवल 50 बार ही अपना बैंक बैलेंस चेक कर सकेंगे। अगर आप अलग-अलग ऐप (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) इस्तेमाल करते हैं, तो हर ऐप पर अलग-अलग यह लिमिट लागू होगी।
2. ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक लिमिट: पेंडिंग ट्रांजैक्शन का स्टेटस आप सिर्फ 3 बार ही चेक कर सकते हैं और हर बार इसके बीच में 90 सेकंड का अंतर जरूरी होगा।
3. ऑटो-पे (AutoPay) टाइमिंग: ऑटो पे ट्रांजैक्शन्स में अब सिर्फ तीन विशेष समय स्लॉट में ही प्रोसेस होंगी- सुबह 10 बजे से पहले, दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे के बीच और रात 9:30 बजे के बाद
4. लिंक्ड बैंक अकाउंट व्यू लिमिट: इसके तहत आप अपने ऐप में बैंक अकाउंट की डिटेल्स एक दिन में केवल 25 बार ही देख पाएँगे।
5. पेमेंट रिवर्सल लिमिट: अगर कोई ट्रांजैक्शन गलत हो गया हो, तो आप 30 दिनों में अधिकतम 10 बार रिवर्सल की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। वहीं एक सेंडर की ओर से अधिकतम 5 रिक्वेस्ट ही मान्य होंगी।
6. बेनीफिशियरी नाम डिस्प्ले: अब पेमेंट करने से पहले रिसीवर का बैंक में रजिस्टर्ड नाम दिखेगा, जिससे गलती और फ्रॉड की संभावना कम होगी।
7. बैंक और UPI ऐप्स पर सख्त निगरानी: NPCI अब बैंकों और UPI ऐप्स की API यूजेज को मॉनिटर करेगा। अगर कोई ऐप या बैंक नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर जुर्माना लग सकता है या उसकी UPI एक्सेस सीमित भी की जा सकती है।
यूजर्स के लिए ऐप में खुद ही लागू होंगे सभी बदलाव
आम यूजर्स को इन बदलावों के लिए कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं होगी। आपका हर दिन का पेमेंट, बिल पेमेंट या मनी ट्रांसफर सब उसी तरह से चलता रहेगा, जैसे नियम बदलने से पहले चलता था। वहीं ये सभी बदलाव आपके UPI एप्स में अपने आप लागू हो जाएँगे।
NPCI का कहना है कि पिछले महीनों में UPI सर्वर पर बोझ बढ़ा था, जिससे कई बार ट्रांजैक्शन फेल होने या स्लो होने की शिकायतें आईं थी। NPCI के मुताबिक, बार-बार बैलेंस चेक करने या ऑटोपे प्रोसेसिंग से सिस्टम पर दबाव पड़ता है। अब नए नियमों से सर्वर लोड कम होगा।
NPCI इस नई तकनीक पर काम कर रहा है ताकि बढ़ते साइबर क्राइम से बचा जा सके और पेमेंट प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाया जा सके। इसके अलावा इस योजना पर भी विचार चल रहा है कि UPI में पिन को वैकल्पिक करके फेस और फिंगर का भी इस्तेमाल किया जाए।
भविष्य में यह सुविधा करोड़ों UPI यूजर्स के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। यह फीचर कम पढ़े-लिखे लोगों और बुजुर्गों के लिए मददगार सिद्ध होगा। जानकारी के अनुसार, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की तेज और उन्नत डिजिटल पेमेंट प्रणाली की तारीफ भी की है।
IMF ने कहा, “भारत अब दुनिया में सबसे तेज पेमेंट्स करने वाला देश बन गया है।” गौरतलब है कि UPI के आने के बाद से कैश का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम हो रहा है और डेबिट/क्रेडिट कार्ड्स जैसे अन्य माध्यमों की तुलना में UPI ने बहुत तेजी से विस्तार किया है।
आज UPI हर महीने 18 अरब (18 billion) से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है और भारत में इलेक्ट्रॉनिक रिटेल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।
लोकसभा में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में मंगलवार (29 जुलाई 2025) को अमित शाह ने बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी बाटला हाउस एनकाउंटर पर रो रही थीं, लेकिन शहीद पुलिस इंस्पेक्टर मोहन शर्मा की शहादत पर चुप रहीं।
लोकसभा में वाकया सुनाते हुए अमित शाह ने कहा, “मैं सलमान खुर्शीद को याद करना चाहूँगा। एक दिन, मैं सुबह ब्रेकफास्ट कर रहा था, तब मैंने टीवी पर सलमान खुर्शीद को सोनिया गाँधी के घर से बाहर निकलते देखा। वो रो रहे थे। मैंने सोचा कुछ बड़ा हो गया है। लेकिन खुर्शीद ने कहा कि सोनिया गाँधी बाटला हाउस एनकाउंटर पर रो रही हैं।”
अमित शाह ने आगे कहा कि इसका वीडियो उनके मोबाइल में सेव है और वे इसे सुबह से रिपीट पर देख रहे हैं। अगर स्पीकर चाहें तो इस वीडियो को सदन में लगे टीवी पर दिखाने को भी तैयार हैं। अमित शाह की सोनिया गाँधी पर टिप्पणी करते ही विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया।
जानिए सलमान खुर्शीद ने क्या कहा था ?
सलमान खुर्शीद के जिस बयान का जिक्र अमित शाह ने लोकसभा में किया, वह बयान सलमान खुर्शीद ने साल 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत आजमगढ़ में आयोजित एक जनसभा के दौरान दिया था। इसका वीडियो क्लिप एक बार फिर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सलमान खुर्शीद बताते हैं कि बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीरें देख सोनिया गाँधी रोने लग गईं।
रोना था तो हुतात्मा मोहन शर्मा के लिए रोते!
गृह मंत्री अमित शाह जी ने 'बाटला हाउस' के आतंकियों पर आंसू बहाने वाली Sonia Gandhi को एक्सपोज़ कर दिया।
असल में सलमान खुर्शीद ने कहा था, “हमने सोनिया गाँधी से बात की, उन्हें बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीर दिखाई तो उनके आँसू फूट पड़े और उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि ये तस्वीर मुझे मत दिखाओ। फौरन जाओ वजीर-ए-आजम (प्रधानमंत्री) से बात करो।”
हालाँकि, बाद में कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ऐसी किसी भी मुलाक़ात से इनकार कर दिया। सोनिया गाँधी से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल कॉन्ग्रेस नेता परवेज़ हाशमी ने भी सोनिया गाँधी को रोते हुए देखने से इनकार किया। उन्होंने तब स्पष्ट किया था, “वह चिंतित थीं।” इसके 7 साल बाद खुर्शीद ने भी कहा कि वह कभी रोई ही नहीं।
कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल के सामने हुई थी पुलिस की पेशी
बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद पुलिसकर्मियों को जहाँ-तहाँ इस बारे में अपनी बेगुनाही का सबूत देना पड़ा था। यहाँ तक कि उनको साल 2008 में तत्कालीन UPA सरकार में केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भी लंबी पूछताछ के लिए तलब कर लिया था। इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस के पूर्व IPS अधिकारी करनाल सिंह ने अपनी एक किताब में दी है।
करनाल सिंह दिल्ली पुलिस के ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर थे और वो बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में भी जुड़े थे। करनाल सिंह ने अपनी किताब ‘बाटला हाउस: एन एनकाउंटर दैट शुक द नेशन’ में बताया था कि एक दिन दिल्ली के तत्कालीन लेफ्टिनेन्ट गवर्नर तेजेंद्र खन्ना का फोन उन्हें आया था।
करनाल सिंह ने बताया है कि तेजेंद्र खन्ना ने उन्हें केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के सामने बाटला हाउस एनकाउंट की जानकारी रखने के लिए बुलाया था। करनाल सिंह ने किताब में लिखा है कि तेजेंद्र खन्ना ने सिंह को ‘तैयार होकर आने’ की सलाह दी थी।
करनाल सिंह लिखते हैं कि सिब्बल ने उन्हें मीडिया सहित कई विभिन्न मुद्दों के बारे में बताने के लिए कहा और उन्होंने हर मुद्दे पर जवाब दिया और पुलिस के पास उपलब्ध सभी सूचनाओं को सिब्बल से शेयर किया।
करनाल सिंह के अनुसार, दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल के घर पर कैबिनेट मंत्री कपिल सिब्बल को एनकाउंटर के सारे तथ्य दिखाए गए थे। इन तथ्यों से तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को भी अवगत कराया गया था। बाद में एक मुलाकात में मनमोहन सिंह ने खुद उन्हें बेहतरीन जाँच के लिए बधाई भी दी थी।
आखिर बाटला हाउस एनकाउंटर में क्या हुआ था?
13 सितंबर, 2008 को दिल्ली में पाँच बम धमाके हुए। एक धमाका गफ्फार मार्केट में शाम 6 बजकर 7 मिनट पर हुआ। यह धमाका कार के पास विस्फोट रखकर किया गया था। कुछ देर बाद कनॉट प्लेस में दो बम धमाके हुए। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि दो व्यक्तियों ने कचरे के डब्बे में विस्फोटक रखे थे। इसके कुछ मिनट बाद ही ग्रेटर कैलाश-1 के एम-ब्लॉक मार्केट में दो और ब्लास्ट हुए। बम ब्लास्ट में 26 लोगों की मौत हुई थी और 133 लोग घायल हुए थे।
इन बम धमाकों के 5 दिन बाद 19 सितंबर 2008 एनकाउंटर स्पेशलिस्ट मोहन चंद शर्मा की लीडरशिप में दिल्ली पुलिस की टीम बाटला हाउस पहुँची। पुलिस को बाटला हाउस में बम धमाके से जुड़े एक आतंकी के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिली थी। पुलिस उसे खोजते हुए बिल्डिंग की दूसरी मंजिल के फ्लैट में घुसी।
तभी दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। इस गोलीबारी में आतंकी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए। वहीं, मोहम्मद सैफ को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि शहजाद और जुनैद भागने में कामयाब हो गए। माना जा रहा है कि भागने वालों में एक आतंकी ISIS का रिक्रूटर बन गया।
एनकाउंटर में पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा घायल हुए, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। साथ ही हेड कॉन्सटेबल बलविंदर घायल हुए थे। इस पुलिस और आतंकियों के बीच मुठभेड़ को बाटला हाउस एनकाउंटर का नाम दिया गया।
सत्ताधारी कॉन्ग्रेस ने बाटला हाउस एनकाउंटर को हमेशा फर्जी बताया है। कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था। उन्होंने मई 2016 टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, मैंने हमेशा कहा है कि यह एनकाउंटर फर्जी है और आज भी इस पर अडिग हूँ।
यह जाँच एजेंसी की जिम्मेदारी है कि इसकी पुष्टि करे हमने न्यायिक जाँच की माँग की थी। अगर इसे मान लिया जाता तो सही तथ्य सामने आ जाते। बाद में यह पूरा मामला खुला और सामने आया कि बाटला हाउस एनकाउंटर फर्जी नहीं था बल्कि यहाँ देश पर हमले की फैक्ट्री चल रही थी।
कॉन्ग्रेस ने तब इस एनकाउंटर के तथ्य जानते हुए भी फर्जी इसलिए बताया क्योंकि उसे मुस्लिम वोटों की चिंता थी। बाटला हॉउस एनकाउंटर मुस्लिम इलाके में हुआ था, यहाँ मारे जाने वाले आतंकी मुस्लिम थे। कॉन्ग्रेस को लगता था कि अगर वह बाटला हाउस पर मुस्लिमों का पक्ष लेगी तो उसे लगातार मुस्लिम वोट मिलते रहेंगे।
हैरानी वाली बात यह है कि स्पष्ट सबूत सामने होते हुए भी कॉन्ग्रेस ने तब बाटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी बताया लेकिन हिन्दू आतंकवाद के नैरेटिव को लगातार हवा देती रही। 26/11 हमले तक को हिन्दुओं पर मढ़ने का प्रयास हुआ। अब अमित शाह ने फिर उस साजिश की याद दिलाकर कॉन्ग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया है।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मुस्लिम भीड़ ने काँवड़ियों को जान से मारने की कोशिश की। काँवड़िए हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगा रहे थे, यह इस्लामी कट्टरपंथियों को नागवारा हुआ। काँवड़ियों को अल्लाह हू अकबर बोलने और इस्लाम कबूलने का दबाव डालने लगे। ऐसा न करने पर धारदार हथियार से सिर पर हमला किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 जुलाई 2025 की शाम 5 बजे राजातालाब थाना इलाके में मुख्य बाजार से शुभम यादव और पलटू राम यादव काँवड़ लेकर जा रहे थे। यहाँ 10-12 मुस्लिम युवकों ने उन्हें घेरा और जबरन लड़की को छेड़ने का आरोप लगा दिया। फिर हर-हर महादेव और बोल बम जयकारे बोलने से रोकने लगे।
एक मुस्लिम युवक बोला, “ये सब तुम्हें नहीं बोलना चाहिए। तुम लोग अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाओ।” इसे नजरअंदाज कर काँवड़िए शुभम और पलटू आगे बढ़ गए। इतने में पीछे से मुस्लिम युवक हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने लगे। काँवड़ियों ने इसका विरोध किया, तो मुस्लिम युवकों ने मिलकर हमला कर दिया।
काशी के बडैनीकला निवासी पीड़ित काँवड़िए पलटू यादव ने कहा, “हम अपने दोस्त शुभम के साथ अदलपुरा से जल लेकर जंसा शिव मंदिर जा रहे थे। हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगा रहे थे। राजातालाब के रेलवे फाटक के पास 10-12 युवकों ने रोककर बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे लगाने से रोका।”
पीड़ित ने बताया कि मुस्लिम युवकों ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूलने के लिए भी बोला और अल्लाह-हू-अकबर बोलने पर मजबूर किया। उन्होंने बताया कि विरोध करने पर धारदार हथियार के सिर पर हमला कर दिया। इससे पलटू का सिर फट गया। पलटू के दोस्त शुभम जान बचाते हुए भागा तो उसे भी सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
सड़क पर मौजूद बाकी काँवड़ियों ने शुभम और पलटू को बचाया। दोनों घायलों को ऑटो से अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद गुस्साए काँवड़ियों और हिंदू संगठन ने सड़क जाम कर हंगामा भी किया। इसकी सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची, लेकिन काँवड़िए कार्रवाई की माँग कर धरने पर डटे रहे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देर रात 12 बजे हंगामे के बीच पलटू यादव की तहरीर पर 12 आरोपितों के खिलाफ मारपीट, लूट, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और लालच देने का केस दर्ज किया गया।
अपर पुलिस आयुक्त ने शिवहरी मीणा ने बताया कि काँवड़ यात्री और स्थानीय दुकानदार के बीच विवाद हुआ था। काँवड़ियों की तहरीर पर मुनव्वर समेत 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। शांति व्यवस्था कायम है। वहीं, बाजार के हालत को देखते हुए बैरिकेडिंग करके जंसा और राजातालाब के रास्ते को बंद कर दिया है।
मार्केटिंग कंपनी नायरा एनर्जी ने माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह रूस की भागीदारी वाली भारत की एक प्रमुख तेल रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनी है। कंपनी का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट ने बिना किसी पूर्व सूचना के उसके ईमेल एक्सेस जैसी जरूरी डिजिटल सेवाएँ अचानक बंद कर दी।
नायरा एनर्जी का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट के इस कदम से पूरे भारत भर के संचालन पर बुरा असर पड़ा है और कंपनी की रोजमर्रा की गतिविधियाँ बाधित हो गई हैं।
प्रतिबंधों का परिणाम और परिचालन पर प्रभाव
हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) ने नायरा एनर्जी पर प्रतिबंध लगाए हैं क्योंकि उसका संबंध रूसी तेल कंपनी रोजनेफ्ट (Rosneft) से है। इस फैसले के बाद कई असर दिखाई दिए। हालाँकि माइक्रोसॉफ्ट का मुख्यालय अमेरिका में है और नायरा का तर्क है कि माइक्रोसॉप्ट कंपनी अमेरिकी या भारतीय कानूनों के तहत किसी भी तरह से यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को लागू नहीं कर सकती।
EU के प्रतिबंधों के बाद कम से कम दो जहाजों ने नायरा की वडिनार रिफाइनरी से रिफाइंड प्रोडक्ट्स की लोडिंग टाल दी। साथ ही एक टैंकर जो रूसी Urals क्रूड लेकर आ रहा था, उसे रास्ते में ही मोड़ दिया गया। इस पूरे संकट के बीच नायरा के CEO ने इस्तीफा दे दिया है और उनकी जगह अब सर्गेई डेनिसोव (Sergey Denisov) को नया CEO नियुक्त किया गया है।
नायरा ने की कोर्ट से तत्काल राहत की माँग
याचिका में अंतरिम आदेश और सेवाओं की तुरंत बहाली की माँग की गई है। नायरा का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट ने यह कदम ‘एकतरफा, बिना किसी पूर्व सूचना, सलाह या बातचीत के’ उठाया और इसे ‘कानूनी अनुपालन (compliance)’ के नाम पर किया गया।
खास बात यह है कि नायरा ने जिन सेवाओं का उपयोग किया, वे ‘पूरी तरह से भुगतान की गई लाइसेंस (fully paid-up licences)’ के तहत ली गई थीं। यही वजह है कि यह कार्रवाई और भी अनुचित लगती है।
नायरा का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट की इस कार्रवाई की वजह से उन्हें अपने ही डाटा और खुद के बनाए टूल्स और प्रोडक्ट्स तक पहुँच नहीं मिल पा रही है। मंगलवार (29 जुलाई 2025) को लगाई गई इस रोक से उनके रोजमर्रा के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है।
भारत की ईंधन अर्थव्यवस्था में रणनीतिक महत्व
अपनी याचिका में कंपनी ने भारत के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे में अपने महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया है। कंपनी देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता के लगभग 8% हिस्से के लिए जिम्मेदार है और 7% पेट्रोल पंप का संचालन करती है। इसके अलावा कंपनी भारत की 8% पॉलीप्रोपाइलीन उत्पादन क्षमता भी विकसित कर रही है।
कंपनी ने मौजूदा चुनौतियों के बावजूद यह भरोसा दिलाया है कि वह पूरे देश में ईंधन की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रखेगी और भारतीय नियमों का पूरी तरह से पालन करते हुए काम करती रहेगी।
इस महीने की शुरुआत में यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के 18वें पैकेज के तहत नायरा की वाडिनार रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगा दिए। इन प्रतिबंधों में संपत्तियों को फ्रीज करना, शिपिंग और बीमा पर रोक, और रूसी कच्चे तेल की कीमत की सीमा में कटौती शामिल हैं। हालाँकि, भारत सरकार ने एकतरफा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को मानने से स्पष्ट इनकार किया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नायरा एनर्जी ने यूरोपीय संघ के इस कदम को ‘अनुचित और गैरकानूनी’ बताया। कंपनी ने कहा, “नायरा एनर्जी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दबाव और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है, जिनका कोई कानूनी आधार भी नहीं है। यह एकतरफा कदम बिल्कुल निराधार आरोपों पर आधारित है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है।
नायरा ने कहा, “ध्यान देने योग्य बात यह है कि कई यूरोपीय देश आज भी रूसी ऊर्जा का आयात कर रहे हैं, लेकिन एक ऊँचे नैतिक स्तर का दिखावा करते हुए एक भारतीय रिफाइनरी पर सवाल उठा रहे हैं, जो कि रूसी कच्चे तेल को परिशोधित करके भारत की 1.4 अरब आबादी और व्यवसायों के लिए उपयोग करती है।”
इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में जल्दी ही होने की उम्मीद है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
पश्चिमी प्रतिबंधों की रणनीति में भू-राजनीतिक हथियार के रूप में बिग टेक
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद कई बड़ी पश्चिमी कंपनियों ने रूस में अपने कामकाज को निलंबित कर दिया था। इन कंपनियों ने इसका कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन करना और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को बताया।
वीजा और मास्टरकार्ड जैसी बड़ी वित्तीय कंपनियों ने रूसी बैंकों से जुड़ी सेवाएँ बंद कर दीं, जिससे रूस के बाहर लेन-देन (cross-border payments) पर बड़ा असर पड़ा।
गूगल जैसी टेक कंपनियों ने भी कई सेवाएँ, विज्ञापन और कमाई के रास्ते (monetisation channels) रूस में सीमित कर दिए। मैकडॉनल्ड्स जैसी कंपनियों ने भी रूस से पूरी तरह कारोबार समेट लिया, लेकिन बाद में उनकी जगह स्थानीय ब्रांडों ने ले ली।
ये सभी कदम उस समय उठाए गए जब कंपनियाँ युद्ध और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को देखते हुए कानूनी, नैतिक और अपनी छवि से जुड़ी जोखिमों का फिर से मूल्यांकन कर रही थीं। इस तरह रूस से कंपनियों का एक बड़ा पलायन देखने को मिला।