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लड़की को फँसाने के लिए हिंदू बन डीपी में भगवान की फोटो लगाने लगा वसीम, मुस्लिम बनाने के लिए छांगुर ने दिए ₹15 लाख: सऊदी में बेचने की साजिश, इनकार करने पर गैंगरेप

जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर केवल धर्मांतरण नहीं, लड़कियों को बेचने का धंधा भी करता था। छांगुर के धर्मांतरण नेटवर्क की शिकार हुई कर्नाटक की पीड़िता ने उस पर हुए जुल्मों की कहानी सुनाई, जिसको सुनते ही किसी के भी रौंगटे खड़े हो जाएँगे। छांगुरृ हिंदू लड़कियों को ‘पैकेज’ समझता था। यही नाम लेकर हिंदू लड़कियों को सऊदी अरब भेजा जाता था, जहाँ उन्हें बेच देते थे। छांगुर के जाल में फँसी कर्नाटक की पीड़िता ने उसपर हुए जुल्मों की आपबीती सुनाई।

कैसे पीड़िता को भारत से सऊदी अरब ले जाया गया। पीड़िता को बंद कमरे में कई-कई दिन तक रखकर प्रताड़ित किया गया। किसी तरह चंगुल से भागकर भारत लौटी। तो यहाँ भी जीने नहीं दिया गया। फर्जी तरीके से पैसे ऐंठे गए। सहारनपुर में छांगुर के गुर्गों ने गैंगरेप किया। पीड़िता आज भी एक बंद कमरे में रहती है, जहाँ न टॉयलेट है और न रसोई। छांगुर की गिरफ्तारी के बाद घर की बिजली भी कट गई है।

राजू राठौड़ बनकर वसीम ने की दोस्ती

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, युवती पर जुल्म की कहानी साल 2021 से शुरू होती है। जब राजू राठौड़ नाम से मोहम्मद वसीम इंस्टाग्राम पर युवती से दोस्ती की फरमाइश भेजता है। युवती लगातार इग्नोर करती है, तो एक अलग अकाउंट से महिला का मैसेज आता है। वह खुद को वसीम की भाभी बताती है। भाभी के कहने पर युवती ने वसीम से दोस्ती कर ली।

तब वसीम खुद को राजपूत बताता था। उसकी इंस्टाग्राम DP पर भी अक्सर हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें लगी होती थीं। कुछ दिन बाद कॉल पर बात होने लगी। युवती अनाथ थी और भाई की कुछ महीने पहले ही मौत हुई थी। वसीम ने युवती के अकेलेपन का फायदा उठाया। युवती को परिवार का मोह था, यही बात वसीम जान चुका था।

अब वसीम ने युवती को वसीम के साथ परिवार बनाने का लालच दिया। शादी के लिए प्रपोज किया। यहाँ तक की वसीम की भाभी ने भी जोर देकर कहा कि वसीम से शादी कर लोगी तो परिवार बन जाएगा। युवती ने बता मान ली।

सऊदी अरब ले जाकर धर्मांतरण कराया

वसीम सऊदी अरब रहता था। युवती को भी सऊदी बुलाया। कुछ ही दिन में फर्जी वीजा और पासपोर्ट युवती के पते पर पहुँच गए। अब युवती को वसीम पर पूरा भरोसा हो गया था। युवती और उसके भाई ने मिलकर घर बनाया था और युवती ब्यूटी पार्लर चलाती थी। पार्लर और घर दोनों बेच दिया और सऊदी की फ्लाइट पकड़ने दिल्ली पहुँच गई।

दिल्ली एयरपोर्ट पर वसीम के पापा और भाभी मिले, उनके साथ एक और शख्स था। तीनों ने युवती को फ्लाइट पकड़ने के तरीके सिखाए। छह घंटे में सऊदी अरब पहुँच गई, यहाँ वसीम से पहली मुलाकात हुई। वह दिखने में हिंदू ही था, बात-बात में भगवान का नाम भी लेता था।

युवती ने वसीम को फोन पर बात करते हुए ‘पैकेज’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए सुना। यहाँ ‘पैकेज’ हिंदू लड़कियों को बोला जा रहा था, जो भारत से सऊदी लाई जा रही थीं।

युवती ने आगे बताया कि उसे सऊदी अरब में अल-बदीहा के एक मकान में रखा गया। मकान में पहुँचते ही वसीम ने युवती को मंगलसूत्र पहनाया और माँग भर दी। इस वक्त तक युवती ने जीवनभर के सपने संजो लिए थे। लेकिन तभी वसीम को कॉल पर बात करते सुना, “(युवती का नाम लेते हुए बोला) वो आ चुकी है और धर्म बदलने के लिए तैयार है।” इतना सुनते ही युवती घबरा गई।

युवती को तब वसीम की असलियत पता लगी कि राजू राठौड़ असल में मुस्लिम है। वह युवती को आयशा बनाना चाहता था। युवती ने विरोध किया तो मारपीट की गई। अश्लील वीडियो बनाया और वायरल करने को ब्लैकमेल किया। युवती का फोन भी छीन लिया और उसे फ्लैट में तीन दिन तक बंद कर रखा।

तीन दिन बाद फ्लैट में छांगुर का चेला बदर अख्तर सिद्दीकी आया। वह सऊदी में धर्मांतरण का नेटवर्क संभालता था। बदर और वसीम को आपस में बात करते सुना तो पता लगा कि युवती को यहाँ तक लाने के लिए ₹15 लाख रुपए मिले थे।

कर्नाटक वापस आकर भी प्रताड़ना जारी रही

सऊदी अरब में युवती पर तीन महीने तक रोजाना जुल्म ढहाए गए। अब युवती का टूरिस्ट वीजा खत्म हो चुका था। तो युवती वापस कर्नाटक आकर किराए के मकान में रहने लगी। यहाँ युवती रोजाना इस खौफ में रहती कि कहीं उसका वीडियो वायरल तो नहीं हो गया। पार्लर में असिस्टेंट की नौकरी करने लगी।

लेकिन वसीम की धमकियाँ यहाँ आकर भी नहीं रुकी। रोजाना कॉल पर पैसे माँगने लगा, कभी कोई मर गया तो कभी कोई बीमार है। ढाई साल तक यह सिलसिला चलता गया। हिम्मत कर कर्नाटक पुलिस को शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने युवती के दिए नंबरों पर फोन किया।

इसके बाद युवती को जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगी। युवती को सहारनपुर बुला लिया गया, जहाँ वसीम के घरवाले रहते थे। मई 2024 में युवती सहारनपुर पहुँची थी। यहाँ युवती का सच से वास्ता हुआ। असल में जिसे वसीम की भाभी समझा, वह तो वसीम की बीवी थी। यहाँ पूरे गाँव में वसीम का कुनबा था।

यहाँ युवती को बँधक बनाकर रखा गया। घर का हर सदस्य युवती को धर्म बदलने के लिए धमकाते रहे। युवती अगर पुलिस के पास पहुँचती भी तो पुलिस दोबारा उसे वसीम के घर छोड़ जाती थी। फिर दोबारा धमकाने और मारपीट शुरू कर दी जाती।

गोमांस परोसा, सिगरेट से जलाया और वसीम के रिश्तेदारों ने गैंगरेप किया

एक रोज घरवालों ने युवती के सामने गोमांस परोस दिया। युवती ने हाथ लगाने से इनकार किया तो लातों और बेल्टों से पीटा। इतना ही नहीं अगले दिन जब युवती बाहर निकली, तो 12-14 लोगों ने गाड़ी मे डालकर ले गए। मुँह पर कपड़ा और हाथ-पैर बाँधकर गैंगरेप किया गया।

आरोपित वसीम के चाचा, दोस्त और कई रिश्तेदार थे। इसका वीडियो भी बनाया गया। खाली प्लॉट में ले जाकर चाकू-लातों-बेल्ट से मारा। हिंदू धर्म को गालियाँ दी। युवती की हालत बहुत खराब हो गई, सारी हड्डियाँ चूर हो चुकी थी।

छांगुर पीर के अड्डे पर ले गए

इसके बाद छांगुर पीर के अड्डे पर ले जाया गया। छांगुर ने देखते ही पहली बात कही- “अरे, इसे चेहरे पर क्यों मारा। उसे तो ठीक रखना था, वरना खरीदेगा कौन। अब ले जाओ। इसका इलाज करवाओ और चाहे जितने पैसे लगें। रूहानी इलाज मैं कर देता हूँ।” इतना कहते ही युवती को एक तावीज पहना दिया।

युवती को अस्पताल में गलत जानकारी से भर्ती करा दिया गया। वहाँ से घसीट-घसीटकर फिर एक बार भागी और सीधा कचहरी पहुँची। यहाँ हिंदू संगठन विश्व हिंदू रक्षा परिषद के गोपाल राय से युवती की मुलाकात हुई। गोपाल राय ने युवती को न्याय दिलाने में मदद की।

अब 03 जून 2025 को लखनऊ के गोमतीनगर में युवती ने घर वापसी कर ली है। छांगुर भी गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन आज भी युवती छांगुर और उसके गुर्गों के खौफ में रहती है। युवती सहारनपुर में उसी घर में रहती है, जहाँ वसीम के घरवालों ने प्रताड़ना की थी।

युवती बताती है कि अब वह घर-घर जाकर पार्लर का काम करती है। लेकिन सड़क पर चलते आज भी भद्दे इशारे किए जाते हैं, तो कोई सिगरेट का धुआँ फेंकता है। युवती को अलग-अलग नंबर से धमकियाँ भी मिलती हैं। युवती को डर है कि जब तक छांगुर के गुर्गे बाहर खुला घूम रहे हैं, तब तक कभी-भी उसकी हत्या की जा सकती है।

युवती का यही कहना है कि वह अनाथ थी, लेकिन परिवार के सपने ने उसे अकेला भी बना दिया।

सेक्सी बातें हो या गाली देना या फिर मीमबाजी… सब कुछ करती है एलन मस्क की ‘एनी’, यूजर के कहने पर कपड़े भी उतार देती है: AI गर्लफ्रेंड के बारे में जानिए सब कुछ

जहाँ एक ओर प्यार में पड़कर धोखे खाने वाली खबरें जब-तब सामने आती रहती हैं। वहीं, दूसरी ओर एलन मस्क ने इसके तोड़ के लिहाज से एक नया ‘आविष्कार’ कर डाला है। इस आविष्कार का नाम ‘एनी’ रखा गया है। एनी एलन मस्क की AI गर्लफ्रेंड के तौर पर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। इसे लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के साथ आलोचना भी हो रही है।

असल में एलन मस्क ने अपने AI चैटबॉट ग्रोक (Grok) में एक नया फीचर लॉन्च किया है। इसे ‘AI कंपेनियन्स’ कहा जा रहा है। इनमें एक गॉथिक एनीमे लड़की एनी (Ani) है। इसे सुनहरे बालों और काले कपड़े के साथ डिजाइन किया गया है।

ये यूजर्स से फ्लर्ट करती है, मीम्स भेजती है और भावनात्मक रूप से जुड़ने की कोशिश करती है। साथ ही ये सेक्स चैट (अंतरंग या यौन संकेतों वाली बातचीत) के लिए भी आसानी से उपलब्ध होगी।

इसके अलावा दूसरा कैरेक्टर बैड रूडी ( Bad Rudy) नाम का एक रेड पांडा है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये मजाक उड़ाने, ताना मारने और अश्लील स्वभाव भी दिख सकता है। मस्क के ये एनीमे यूजर्स को ऐसे 3D एनिमेटेड कैरेक्टर्स के रूप में मिलते हैं जिन्हें अपनी पसंद के अनुसार न केवल बदला जा सकता है पर साथ ही अपने अनुसार ढाला भी जा सकता है।

ये नए फीचर्स यूजर्स को ज्यादा रोमांचक और व्यक्तिगत अनुभव देने के लिहाज से तैयार किए गए हैं। एनी को 3D एनिमेशन, वॉयस सिंथेसिस और इमोशन रिकग्निशन जैसी क्षमताओं के साथ भी जोड़ा गया है। मस्क ने इस फीचर को ‘काफी शानदार’ बताया है और कहा है कि यह फिलहाल टेस्टिंग प्रक्रिया में है, लेकिन जल्द ही Super AI सब्सक्राइबर्स के लिए आसानी से उपलब्ध होगा।

प्रशंसा या आलोचना

एलन मस्क के इस नए ‘अविष्कार’ को जितने लोग पसंद कर रहे हैं उतनी ही इसकी आलोचना भी हो रही है। Apple के App Store पर Grok को 12+ उम्र के लिए सुरक्षित बताया गया है। इस लिहाज से एनी 12 वर्ष की आयु से अधिक हर किसी व्यक्ति के लिए आसानी से उपलब्ध हो सकती है। ऐसे में इसे लेकर भविष्य में कई चुनौतियाँ सामने आने के आसार हैं।

एनी के साथ बातचीत के दौरान ‘नॉट सेफ फॉर वर्क’ यानी NSFW मोड भी डाला गया है। इसके तहत एनी यूजर के लिए अंतरंगता के स्तर तक आ सकती है। इसके तहत वह यूजर के कहने पर बिकनी जैसे कपड़ों में दिख सकती है और उसी स्तर की बात भी कर सकती है।

इसे लेकर कई संस्थाओं ने आलोचना की है। नेशनल सेंटर ऑन सेक्शुअल एक्प्लॉइटेशन (National Center on Sexual Exploitation) ने एनी को बच्चों को यौन स्तर पर सरलता से उपलब्ध होने और यौन व्यवहार में जोखिम बढ़ाने वाला बताया है। इससे बच्चों के लिहाज से वैश्विक सुरक्षा चिंताओं समेत कई तरह के अपराध बढ़ने की भी आशंका जताई गई है।

असल में एनी को डिजाइन जापानी ‘waifu culture’ से प्रेरित है। इसमें लोग एनीमे पात्रों से भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं। सांस्कृतिक संदर्भ से देखा जाए तो एक क्षेत्र विशेष या कुछ अन्य यूजर्स के लिए ये आकर्षक हो सकता है, लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि ये यौन संबंधों के प्रचार और एक तरह से भावनात्मक शोषण के लिए भी जिम्मेदार हो सकता है।

किसके लिए है उपलब्ध

यह फीचर फिलहाल सिर्फ iOS ऐप और SuperGrok Heavy सब्सक्राइबर्स के लिए ही उपलब्ध है, जिनकी मासिक कीमत $300 (लगभग ₹25,700) है। xAI ने इस फीचर को $30/माह के SuperGrok सब्सक्रिप्शन में शामिल किया है।

इसके साथ ही मस्क ने इस फीचर में और नयापन लाने के लिए ‘Waifu Engineer’ की वैकेंसी सामने आई है। इसके तहत 180,000 से 440,000 डॉलर (1 करोड़ 54 लाख 70 हजार 700 से 34 करोड़ 80 लाख रुपए) की नौकरियाँ भी निकाली गई हैं। इससे ये तो साफ है कि कंपनी इस तकनीक को और विस्तार देने की योजना बना रही है

तकनीकी के स्तर पर एनी को मनोवैज्ञानिक तौर पर ‘इंटिमेसी सिस्टम’ की तरह काम करने वाला बनाया गया है। इसका अर्थ है कि जैसे-जैसे यूजर एनी से बात करता जाएगा, वैसे वैसे एनी का व्यवहार भी उसी स्तर पर अधिक व्यक्तिगत और अंतरंग होता चला जाएगा।

विश्लेषकों का मानना है कि इससे ऑनलाइन स्तर पर भावनात्मक निर्भरता और डिजिटल अकेलापन बढ़ने के आसार होंगे। ऐसे में इसे मानव संबंधों की जगह लेने वाला एक खतरनाक विकल्प बताया जा रहा है। हालाँकि इन्हीं के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस तरह की प्रणाली को ‘रिलेशनशिप का भविष्य’ भी मान रहे हैं।

एक तरह से देखा जाए तो एनी तकनीक का वह चमत्कार है जो आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस और इंसान की भावनाओं के बीच एक समन्वय बनाने की कोशिश कर सकता है। लेकिन इसके साथ ही यह नैतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक खतरों को भी सामने लाता है।

एलन मस्क का यह तकनीकी अविष्कार AI के भविष्य की दिशा भी तय कर सकती है और साथ ही सवाल भी उठा सकती है कि तकनीक का सहारा लेकर अकेलेपन का इलाज ढूँढना कितना सही और सुरक्षित हो सकता है।

ओडिशा में कॉलेज छात्रा के सुसाइड केस में NSUI पर उठी उँगली, दोस्त का दावा- ऑनलाइन बदनामी में जुटा था कॉन्ग्रेस का संगठन: क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जाँच की जिम्मेदारी

ओडिशा के बालासोर में फकीर मोहन महाविद्यालय की छात्रा की मौत हो गई है। इस पर राजनीति गरमा गया है। कॉन्ग्रेस समेत विपक्षी दलों ने 17 जुलाई 2025 को राज्य बंद का आह्वान किया। लेकिन अब खुलासा हुआ है कि कॉन्ग्रेस की छात्र संगठन एनएसयूआई ने पीड़िता को ऑनलाइन प्रताड़ित किया।

दरअसल छात्रा ने यौन उत्पीड़न के आरोपी एक प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कॉलेज परिसर में खुद को आग के हवाले कर दिया। बी.एड. द्वितीय वर्ष की छात्रा तीन दिन तक जिंदगी के लिए संघर्ष करती रही। आखिरकार सोमवार (14 जुलाई 2025) रात एम्स-भुवनेश्वर में उसने दम तोड़ दिया।

छात्रा के भाई ने बालासोर जिले के भोगराई थाने में शिकायत दर्ज कराई है और चार लोगों पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके परिवार को परेशान करने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि सोशल मीडिया पर उनके परिवार के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ की जा रही है और कुछ लोग इसका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

क्राइम ब्रांच कर रही जाँच

ओडिशा पुलिस ने यह मामला महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध शाखा (सीएडब्ल्यू एंड सीडब्ल्यू) को सौंप दिया। डीएसपी इमान कल्याण नायक को मुख्य जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे संवेदनशील मामलों को संभालने के लिए जाने जाते हैं। उनकी मदद के लिए इंस्पेक्टर पंचाली राउत को लगाया गया है। यह टीम सहदेव खुंटा पुलिस थाने के साथ मिलकर काम करेगी। प्राथमिकी इसी थाने में दर्ज किया गया है।

यह जाँच धारा 75(1)(iii) के तहत यौन उत्पीड़न, धारा 78 के तहत पीछा करने, धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और धारा 351(2) के तहत धमकी देने के लिए किया गया है।

अधिकारियों ने जाँच में सबूतों और गवाहों के बयानों की फिर से जाँच करने की बात कही है। इस दौरान कॉलेज प्रोफेसर और बाकी अधिकारियों की भूमिका की भी जाँच की जाएगी। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, ” प्रधानाचार्य दिलीप घोष और विभागाध्यक्ष समीर कुमार साहू के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।”

हताशा में उठाया कदम

12 जुलाई को पीड़िता परेशान होकर प्रिंसिपल घोष के ऑफिस के बाहर खुद को आग के हवाले कर दिया। सीसीटीवी फुटेज से पता चल रहा है कि पीड़िता रोते हुए घोष के ऑफिस में घुसी। करीब आधे घंटे बाद पीड़िता रोती हुई बाहर आई। बताया जा रहा है कि उसने कथित तौर पर एक दोस्त को फोन किया था, जिसमें उसने बताया था कि प्रिंसिपल उस पर विभागाध्यक्ष समीरा कुमार साहू के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत वापस लेने का दबाव बना रही हैं।

दोस्त के मुताबिक प्रिंसिपल ने पहले समय माँगा, लेकिन कुछ नहीं किया। दोस्त के मुताबिक, ” प्रिंसिपल ने शिकायत वापस नहीं लेने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी।”

दोस्त ने कहा कि उसे जूनियर छात्रों ने भी ट्रोल किया। उसे सोशल मीडिया और कैंपस में उसके चरित्र पर कीचड़ उछाला गया और ‘बुरी लड़की’ के तौर पर प्रचारित किया गया। 30 जून को भी वह प्रिंसिपल के पास गई थी। प्रिंसिपल ने 7-8 दिनों का समय माँगा लेकिन कुछ नहीं किया। इस दौरान विभागाध्यक्ष ने उसे बदनाम करने की साजिश रची।

कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन पर उठे सवाल

कॉन्ग्रेस पार्टी की दोगलई उस वक्त सामने आ गई जब ये पता चला कि एनएसयूआई से जुड़े छात्र पीड़िता को परेशान कर रहे थे। जहाँ पार्टी राज्यव्यापी बंद का आह्वान करती है वहीं छात्रसंघ इस मामले में फँसता नजर आ रहा है।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने पीड़िता के पिता से बात कर घटना के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया।

हालाँकि सौम्यश्री के एक दोस्त ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि एनएसयूआई लड़की को एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाह रहा था।

जानकारी के मुताबिक सोशल मीडिया और दूसरे साक्ष्यों से पता चलता है कि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ ने सौम्यश्री के खिलाफ ऑनलाइन चरित्र हनन करने की कोशिश की। NSUI से जुड़े अकाउंट्स ने सौम्यश्री को ‘ चालाक’ बताते हुए, ‘शिक्षा मंत्री के करीबी’ होने और ‘सहानुभूति बटोरने’ की कोशिश करने का आरोप लगाया।

NSUI सदस्य अजय कुमार पांडा ने अपने पोस्ट में दावा किया कि सौम्यश्री का एक वरिष्ठ मंत्री के साथ लेन-देन का रिश्ता है। यह पोस्ट वायरल हो गया। इससे सौम्यश्री और हताश हो गयी । बीजेपी प्रवक्ता संजू वर्मा ने एनएसयूआई कार्यकर्ता और राहुल गाँधी के समर्थक सौरव बेहरा की तस्वीरें साझा करते हुए उसे लड़की के आत्मदाह करने का आरोपी बताया। वर्मा ने बताया कि सौम्यश्री भाजपा की छात्र शाखा एबीवीपी से जुड़ी थी और बेहरा उसे लगातार परेशान कर रहा था।

एबीवीपी ने आरोपी विभागाध्यक्ष डॉ. साहू की एनएसयूआई नेताओं के साथ आराम से भोजन करते हुए तस्वीरें भी शेयर की हैं। इस बीच सीपीएम नेता सुरेश पाणिग्रही ने पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है। उन्होंने कहा, ” पीड़िता ने लोकल विधायक से लेकर शिक्षा मंत्री तक शिकायत की…लेकिन कुछ नहीं हुआ”

पूरे मामले पर सौम्यश्री का परिवार बुरी तरह टूट गया है। उसने सभी चार आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की माँग की है। परिवार का कहना है कि अगर न्याय नहीं मिला तो पूरा परिवार सामूहिक आत्महत्या कर लेगा।

मजहबी कट्टरपंथ से किन्नर भी नहीं महफूज, इस्लाम कबूलने से इनकार करने पर HIV संक्रमित इंजेक्शन लगाया: हिंदू किन्नरों के जबरन धर्मांतरण के 10 मामले एक साथ

मध्य प्रदेश के इंदौर में हाल ही में हिंदू किन्नरों पर धर्मांतरण का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। यहाँ हिंदू किन्नरों को इस्लाम न कबूलने पर HIV संक्रमित इंजेक्शन लगाया गया। इससे अब तक 60 किन्नर HIV संक्रमित हो चुके हैं। पुलिस को तहरीर देते हुए हिंदू किन्नर समूह ने बताया कि पायल उर्फ नईम अंसारी और सीमा हाजी उर्फ फरजाना इस अवैध धर्मांतरण कृत्य में शामिल हैं।

इनके डर से कई हिंदू किन्नर इस्लाम कबूल चुके हैं। बाकी हिंदू किन्नर जो अपना धर्म न छोड़ने पर अड़े हुए हैं, उनको HIV संक्रमित इंजेक्शन लगा दिया गया। इंदौर शहर में HIV संक्रमित 100 से अधिक किन्नर घूम रहे हैं। वहीं, जब पुलिस इन आरोपितों को पकड़ने पहुँचती है, तो पुलिस को भीतर नहीं जाने दिया जाता है। इसके चलते पुलिस खाली हाथ लौटती है।

इसकी शिकायत CJI, PMO, CMO, DM और पुलिस कमिश्नर से की जाती है। इसके बाद मामले की जाँच के लिए SIT गठन कर जाँच शुरू की गई है। लेकिन हिंदू किन्नरों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का मामला पहला नहीं है। पिछले सालों में मुस्लिम किन्नरों का हिंदू किन्नरों पर धर्मांतरण कराने के कई मामले सामने आए हैं। इनमें छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से हैं। ऐसी 10 घटनाओं का विवरण नीचे दिया गया है।

इस्लाम कबूल न करने पर समाज से बहिष्कार करने की दी धमकी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सकरी क्षेत्र में मु्स्लिम किन्नरों ने हिंदू किन्नरों को धर्म परिवर्तन करने के लिए धमकाया। पीड़ित आसमा किन्नर ने बताया कि राजा किन्नर उन्हें संदल चढ़ाने के दबाव बनाती है, इसके नाम पर 10-19 हजार रुपए भी वसूलती हैं। ऐसा न करने पर गुंडों से हाथ-पैर तुड़वाकर सामाजिक बहिष्कार करने की धमकियाँ दी गईं। 06 मई 2025 को हिंदू किन्नरों की मामले में पुलिस अधीक्षक से शिकायत की।

उस्ताद किन्नर ने धर्मांतरण के लिए पीटा

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के बीबीनगर क्षेत्र स्थित केसूपुर गाँव में मुस्लिम किन्नर ने सीता उर्फ सपना पर धर्मांतरण का दबाव बनाया। सीता ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि इस्लाम कबूल करने से इनकार करने पर उसके उस्ताद ने जबरन बंद कमरे में बँधक बनाकर मारपीट की। सीता ने चंगुल से भागकर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाई।

मुजफ्फरनगर में हिंदू किन्नर को इस्लाम न कबूलने पर बेरहमी से पीटा

घटना मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाना क्षेत्र की है। दलित हिंदू किन्नर मुस्कान ने पुलिस को धर्म परिवर्तन का दबाव और जानलेवा हमला होने संबंधित तहरीर दी। मुस्कान ने बताया कि प्रीति, कौशर अली और गुड्डू ने उसे इस्लाम कबूल न करने पर बेरहमी से पीटा। मुस्कान को पूजा-पाठ करने से भी रोका गया।

मुस्कान ने दावा किया कि कौशर अली लोगों को अपना नाम गीता बताता है। प्रीति भी मुस्लिम है, लेकिन हिंदू नाम रखा हुआ है। मुस्कान ने बताया कि प्रीति पहले पुरुष था, बाद में ऑपरेशन कराकर किन्नर बन गया।

पूजा-पाठ करने पर जान से मारने की धमकी दी, नमाज पढ़ने का दबाव

मध्य प्रदेश के इंदौर में हिंदू किन्नर ने पुलिस तहरीर में बताया कि उसपर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया जा रहा है। नंदलाल पुर में अधिकतर मुस्लिम किन्नर रहते हैं, पीड़ित किन्नर को भी वही रहकर नमाज पढ़ने पर मजबूर किया गया। इनकार करने पर घर में घुसकर जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित किन्नर ने बताया कि पूजा पाठ करने से भी रोका गया।

सीतापुर में हिंदू किन्नरों पर मंदिर हटाकर इस्लाम कबूलने का दबाव

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में मु्स्लिम किन्नरों ने हिंदू किन्नरों पर मंदिर हटाकर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया। हिंदू किन्नर ने बताया कि मुस्लिम किन्नर क्षेत्र में घूम-घूमकर धर्म परिवर्तन करने के लिए किन्नरों को ब्रेनवॉश कर रहा है। हिंदू किन्नरों ने मामले की जानकारी हिंदू संगठनों को दी। इसके बाद पुलिस ने तहरीर के आधार पर 4 मुस्लिम किन्नरों के खिलाफ केस दर्ज किया।

अलीगढ़ में हिंदू किन्नरों पर जबरन माँस खाने और नमाज पढ़ने का दबाव

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में हिंदू किन्नरों ने बताया कि मुस्लिम किन्नर गुंडे बुलाकर उनकी पिटाई करवाते हैं। हिंदू किन्नरों पर जबरन माँस खाने और नमाज पढ़ने का दबाव बनाते हैं। मुस्लिम किन्नरों ने हिंदू इलाकों में घुसकर बधाई भी माँगी।

इसके बाद दोनों गुटों के बीच हंगामा में खूनी-संघर्ष भी हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर मामला शांत कराया। मामले में पुलिस ने FIR भी दर्ज की थी।

प्रयागराज में मौलाना ने हिंदू किन्नर का धर्मांतरण किया

उत्तर प्रदेश के प्रयागजराज में मौलाना की मदद से एक किन्नर ने दूसरे किन्नर का धर्मांतरण करवा दिया। पीड़ित किन्नर की माँ ने जॉर्जटाउन थाने पहुँचकर आरोपित किन्नर पर मुकदमा दर्ज कराया। पीड़ित किन्नर की माँ ने बताया कि उसका बच्चा पंकज को जबरन आपत्तिजनक चीजें खिलाई और उसका शारीरिक उत्पीड़न किया। पत्थर गली स्थित मौलाना ने दूसरे किन्नरों के कहने पर इस्लाम में धर्म परिवर्तन भी करवा दिया।

इस्लाम कबूलो या निकलो, करनाल में हिंदू किन्नर को दी गालियाँ

हरियाणा के करनाल स्थित जुंडला घरौंडा क्षेत्र में हिंदू किन्नरों पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर डेरे से निकाल देने के धमकी दी। साथ ही बीफ और बाकी मांस खाने को भी कहा। हिंदू किन्नर ज्योति ने बताया कि आरोपित मुस्लिम किन्नर अब्दु कर रहमान और अब्दुल करीम उर्फ लल्लू ने जबरन घर में घुसकर उनके गुरु और उन्हें गंदी गालियाँ भी दी।

फरीदाबाद में हिंदू किन्नरों पर धर्म परिवर्तन का दबाव, पुलिस से सुरक्षा की माँग

हरियाणा के फरीदाबाद के सेक्टर-16 क्षेत्र में हिंदू किन्नरों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। पीड़ित किन्नर कुमकुम, सपना, राधिका, सोमिया, सलोनी, लवली ने बताया कि गुड्डू किन्नर ने इस्लाम कबूल कर लिया है। इसके बाद से गु्ड्डू बाकी हिंदू किन्नर पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव बना रही है। हिंदू किन्नरों ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की माँग की।

पायलटों ने ही गिराया एअर इंडिया का विमान… जिस थ्योरी को विदेशी मीडिया ने बढ़ाया आगे, उसमें अब देसी सुर भी: जानिए इसमें कितने झोल, बोइंग का शेयर मार रहा उछाल

अहमदाबाद एअर इंडिया विमान के हादसे को लेकर अंततोगत्वा पायलटों को दोषी ठहरा दिया गया है। 12 जून, 2025 को AI-171 फ्लाइट हादसे को लेकर पायलट को ही कुर्बानी का बकरा बनाने का प्रयास प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट सामने आने से पहले से ही चालू हो गया था। पहले इस विषय में दावे किए गए थे, रिपोर्ट आने के बाद इस पर आशंका जताई गई और कुछ दिनों के बाद विदेशी मीडिया के सहारे पायलटों को पूर्ण रूप से दोषी ठहरा दिया गया है। विदेशी मीडिया के इस कोरस गाने में भारतीय मीडिया भी शामिल हो गया है।

WSJ ने अब पायलटों को ही ठहरा दिया दोषी

इसकी शुरुआत अमेरिकी समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जनरल (WSJ) ने की है। WSJ ने गुरुवार (16 जुलाई, 2025) को एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि अब एअर इंडिया हादसे की जाँच सीधे तौर पर AI-171 के मुख्य पायलट सुमीत सभरवाल पर केन्द्रित हो गई है। इस रिपोर्ट में 3 दशक से विमान उड़ा रहे पायलट सुमीत सभरवाल को फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने का दोषी ठहरा दिया गया है, जिसकी वजह से हादसा हुआ।

पायलटों को दोषी ठहराती WSJ की रिपोर्ट
पायलटों को दोषी ठहराती WSJ की रिपोर्ट

WSJ की रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे के बाद बरामद हुए विमान के ब्लैक बॉक्स में सेव हुई आवाज की रिकॉर्डिंग इशारा करती है कि कैप्टन सुमीत सभरवाल ने ही फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद किए। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अहमदाबाद एयरपोर्ट से विमान को लेकर फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर उड़े थे और फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद होने के बाद संभवतः उन्होंने ही कैप्टन सुमीत सभरवाल से पूछा था, “तुमने ये स्विच क्यों बंद किया?”

WSJ की रिपोर्ट में पायलटों को दोषी ठहराने के साथ यह नहीं स्पष्ट बताया गया है कि इसी आवाज की रिकॉर्डिंग में सुमीत सभरवाल ने फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने से इनकार किया था। WSJ की रिपोर्ट के बाद विदेशी मीडिया के बाकी संस्थान भी इसी सुर में गाने लगे हैं। रायटर्स, ब्लूमबर्ग, CNN और न्यू यॉर्क पोस्ट समेत बाक़ी अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने सीधे तौर पर अपनी हेडलाइंस और खबर में कैप्टन सुमीत सभरवाल को फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने का दोषी मान लिया है।

विदेशी मीडिया कैप्टन सुमीत सभरवाल को लेकर एक साथ खबरें प्रकाशित हुई हैं

विदेशी मीडिया के साथ भारतीय मीडिया भी मिला रहा सुर

ऐसा नहीं है कि भारतीय पायलट के नाम दोष डालने का काम सिर्फ अमेरिकी या बाकी विदेशी मीडिया ही कर रहा हो। इस काम में भारतीय मीडिया संस्थान भी शामिल हैं। बिजनेस स्टैण्डर्ड से लेकर ऑनमनोरमा तक ने WSJ की रिपोर्ट के हवाले से पायलटों की कथित गलती की बात को हेडलाइन्स में चलाया है। इन संस्थानों ने भी वह महत्वपूर्ण तथ्य नजरअंदाज कर दिया है कि जिसमें पायलट ने फ्यूल कंट्रोल स्विच को बंद करने से इनकार किया है।

बोइंग को बचने की पटकथा का अंतिम अध्याय भी पूरा

WSJ समेत तमाम संस्थानों ने अब पायलटों को अंतिम तौर पर पायलटों को दोषी ठहरा दिया ही है। हालाँकि इसकी पटकथा कई दिनों पहले से ही लिखी जा रही थी। अमेरिकी अखबार WSJ ने गुरुवार (10 जुलाई,2025) को इसी संबंध में एक खबर प्रकाशित की थी। इस खबर में दावा किया गया था कि जाँचकर्ता अब एअर इंडिया हादसे की जाँच इंजन या अन्य फेलियर के एंगल से नहीं परंतु पायलटों की ‘भूल’ के एंगल से कर रहे हैं। 

यह खबर तब प्रकाशित की गई थी जब AAIB की जाँच रिपोर्ट सामने नहीं आई थी। बाद में जब AAIB की रिपोर्ट सामने आई तो इसमें पायलटों की भूल की बात तक नहीं की गई। यह प्रयास सिर्फ वॉल स्ट्रीट जनरल ने ही नहीं किया था। वॉल स्ट्रीट जनरल के अलावा ब्लूमबर्ग, रॉयटर्स, ABC न्यूज और विमानन पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट एयर करेंट ने भी विमान हादसे का कारण इंजन को ईंधन पहुंचाने वाले फ्यूल स्विच के ‘गलती से बंद होना’ बताने का प्रयास किया था।

इन सभी मीडिया पोर्टल में यह खबरें 8 जुलाई से 10 जुलाई के बीच प्रकाशित हुई थी जबकि AAIB की जाँच रिपोर्ट 12 जुलाई को प्रकाशित हुई थी। यह प्रयास AAIB रिपोर्ट के बाद रुके नहीं थे। AAIB रिपोर्ट को भी विदेशी मीडिया संस्थानों जैसे रॉयटर्स, बीबीसी, डेली मेल आदि ने इस रिपोर्ट को जानबूझकर गलत तरीके पेश किया। AAIB रिपोर्ट में पायलटों की गलती को लेकर कोई बात नहीं कही गई थी। फिर भी इन मीडिया संस्थानों ने पायलटों को ही को दोषी ठहराने की कोशिश की।

WSJ जाँच रिपोर्ट आने से पहले, जाँच रिपोर्ट के बाद और अब भी पायलटों को दोषी बता रहा है

इस कड़ी में FAA की वह नोटिफिकेशन भी सामने आई थी जिसमे बोइंग को क्लीन चिट दी गई। अब इसी कहानी के अंतिम अध्याय में पायलटों को दोषी ठहराते हुए कैप्टन सुमीत सभरवाल को फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने का दोषी बता दिया गया है। यह सब तब हो रहा है जब AAIB ने स्वयं कहा है कि इस हादसे की जाँच अभी पूरी नहीं हुई है और जो भी रिपोर्ट सामने आई है वह प्रारम्भिक है। लेकिन बोइंग को क्लीन चिट देने के चक्कर में एक के बाद एक ऐसी पायलटों की गलती को लेकर रिपोर्ट्स गढ़ी जा रही हैं।

सरकार, एक्सपर्ट, पायलट… सभी ने खारिज किए दावे

WSJ समेत बाकी देसी-विदेशी मीडिया संस्थानों की बोइंग को बचाने की कोशिश हालाँकि ना ही पायलटों की यूनियन को रास आई है और ना ही भारत सरकार इस मामले में अधपकी बातों पर विश्वास करने को तैयार है। यहाँ तक कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ तक हवा में तीर चलाने की इन कोशिशों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और खारिज कर दे रहे हैं। इस रिपोर्ट पर सरकार ने कैप्टन सुमीत सभरवाल को कटघरे में खड़े करने से इनकार कर दिया है।

NEWS18 इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने WSJ रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि कॉकपिट में रिकॉर्ड हुई आवाज के आधार पर कैप्टन सभरवाल को दोषी ठहराया जाना ठीक है। सरकार ने कहा है कि दोनों पायलटों की बातचीत को तोड़-मरोड़ का पेश किया जा रहा है। यह भी सरकारी सूत्रों ने कहा है कि कैप्टन सभरवाल तनाव में थे इसका कोई सबूत नहीं है और उनके पिता तक नागरिक उड्डयन मंत्रालय से रिटायर हुए थे।

इसी तरह भारतीय पायलट फेडरेशन (FIP) के मुखिया कैप्टन CS रंधावा ने कैप्टन सभरवाल को दोषी ठहराने की रिपोर्ट्स खारिज कर दी हैं। उन्होंने कहा है कि अब तक AAIB और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह नहीं कहा है कि हादसे का कारण कैप्टन सुमीत सभरवाल थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में ANA NH985 फ्लाइट को याद किया जाना चाहिए, जिसमें पायलट के बिना कुछ किए ही फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गए थे।

FIP मुखिया कैप्टन रंधावा ने कहा है कि यह घटना भी वैसी ही गड़बड़ का दोहराव है। उन्होंने बोइंग पर भी प्रश्न उठाए है कि उसने अभी तक इस मामले में ना कोई एक्शन लिया है और ना ही कोई सलाह जारी की है। कैप्टन रंधावा ने जाँच समिति में अनुभवी पायलटों को शामिल किए जाने की माँग की है। उन्होंने इस समिति में पायलटों के साथ ही हादसे वाले विमान मॉडल के अनुभवी इंजीनियर्स को भी जाँच में शामिल करने की अपील केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से की है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मैरी शिवाओ ने भी यह मानने से इनकार किया है कि कैप्टन सभरवाल ने फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद किए थे। उन्होंने कहा कि इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई भी सबूत मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा, CVR में मौजूद आवाज़ों, शब्दों और ध्वनियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जाना चाहिए। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पायलट के आत्महत्या या हत्या का संकेत मिले। CVR की पूरी कॉपी जल्द से जल्द जारी की जानी चाहिए ताकि उलटी सीधी व्याख्या से बचा जा सके।

मैरी शिवाओ ने भी 2019 के ही ANA एयरलाइन घटना का जिक्र किया है। शिवाओ अमेरिका में कई विमान हादसों को लेकर जाँच में शामिल रही हैं और वह अमेरिकी ट्रांसपोर्ट बोर्ड की मुखिया रही हैं जो अमेरिका में विमान हादसों की जाँच करता है। शिवाओ के अलावा हवाई यातायात से जुड़े तमाम लोग पायलट को दोषी ठहराने की थ्योरी को खारिज कर रहे हैं लेकिन अमेरिकी मीडिया लगातार ऐसी खबरें छाप रहा है। ऐसे में बोइंग को बचाने की साजिश के प्रश्न उठे हैं।

क्यों नहीं पचती कैप्टन सभरवाल की गलती की बात

WSJ समेत बाकी मीडिया संस्थान भले ही कैप्टन सुमीत सभरवाल को इस हादसे का दोषी मान चुके हों लेकिन यह दावे गले नहीं उतरते। सरकार और विशेषज्ञों के खारिज करने के अलावा सामान्य तौर पर यह बात गले नहीं उतरती है। जिन कैप्टन सभरवाल को इस हादसे का दोषी बताया जा रहा है वह तीन दशक से विमान उड़ा रहे थे। 54 वर्षीय कैप्टन सुमीत सभरवाल 8000 घंटों से अधिक विमान उड़ा चुके थे। उनका एक हँसता खेलता परिवार है।

एअर इंडिया की हादसे वाली फ्लाइट के पायलट सुमीत सभरवाल (बाएँ) और क्लाइव कुंदर (दाएँ)

ना ही अनुभव के हिसाब से उनमें कोई कमी थी और ना ही वह मानसिक तौर पर अस्थिर व्यक्ति थे। ऐसे में उनके जानबूझ कर विमान को क्रैश करने की थ्योरी कहीं नहीं टिकती। जिस कॉकपिट की आवाज के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया बता जा रहा है, उसी में उन्होंने स्पष्ट तौर पर फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने से इनकार किया है। इसके अलावा उनकी आत्महत्या के कथित दावे भी हवा हवाई दिखाई पड़ते हैं। क्योंकि अगर उन्हें जानबूझ कर ही विमान क्रैश करना होता तो वह उसे टेकऑफ के तुरंत बाद ही क्यों गिराते।

वर्ष 1999 में इसी तरह इजिप्ट एयर का एक विमान अटलांटिक महासागर में जाकर क्रैश हो गया था। फ्लाइट 990 नाम से जाने वाली यह फ्लाइट अमेरिकी शहर लॉस एंजिल्स से मिस्र की राजधानी काहिरा जा रही थी। यह बोइंग का 767-300ER विमान था। इस हादसे में 217 लोग मारे गए थे। जाँच में सामने आया था कि इसके पायलट गमील अल बतूती ने जान बूझ कर यह विमान महासागर में क्रैश कर दिया था। इस हादसे की जाँच में सामने आया था कि बतूती ने फ्लाइट के कंट्रोल गड़बड़ किए, जिससे हादसा हुआ।

एयर इजिप्ट फ्लाइट 990 क्रैश, फोटो साभार : Medium

इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि पायलट ने तब तक इन्तजार किया जब तक किसी के बचने की संभावना शून्य ना हो जाए और फिर विमान को क्रैश हो जाए। यहाँ कैप्टन सुमीत सभरवाल ने ऐसा कोई कृत्य नहीं किया। ना ही जाँच में यह बात सामने आई है। दूसरी बात फ्यूल कंट्रोल स्विच से जुड़ी है। हादसे के बाद कई विशेषज्ञों ने बताया है कि धोखे से हाथ लगने पर कंट्रोल स्विच बंद या चालू नहीं हो सकते, क्योंकि यह इस तरह डिजाइन किए गए हैं।

2019 का हादसा तकनीकी गड़बड़ी का कर रहा इशारा

पायलटों के ऊपर पूरा दोष मढ़ रहे मीडिया और बाकी लोगों को 2019 का ANA एयर का इंसिडेंट भी याद करना चाहिए, जिसकी बात लगातार कई विशेषज्ञ कर रहे हैं। दरअसल, 2019 में आल निप्पन एयरवेज (ANA) का एक 787 ड्रीमलाइनर जापान की राजधानी टोक्यो से ओसाका शहर को जा रहा था। लैंडिंग के कुछ ही सेकंड्स पहले इसके भी फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद हो गए थे। इसमें पायलटों का कोई हस्तक्षेप नहीं था और जाँच में सामने आया था कि यह घटना एक सॉफ्टवेयर फेलियर थी।

एअर इंडिया हादसा भी कुछ-कुछ वैसा ही है। हालाँकि, अभी जाँच पूरी नहीं हुई है और यह सामने नहीं आया है कि क्या यहाँ भी तकनीकी खराबी के चलते AI171 फ्लाइट के इंजनों की सप्लाई बंद हो गई। यह कोई बात सामने आए, इससे पहले ही कैप्टन सुमीत सभरवाल के रूप में एक कुर्बानी का बकरा ढूंढ लिया गया है और उसी पर दोष डाल कर बोइंग को बचाने का प्रयास चल रहा है। बोइंग को सीधे तौर पर पायलट को दोषी बताए जाने वाली रिपोर्ट्स से फायदा भी हो रहा है।

बोइंग के शेयर पर रिपोर्ट्स का सीधा फायदा

अहमदाबाद में विमान हादसे, इसकी जाँच और इससे जुड़ी रिपोर्ट्स का सीधा असर बोइंग के शेयर पर दिख रहा है। जब 12 जून, 2025 को हादसा हुआ था तो बोइंग के शेयर ने तेज गोता लगाया था। हादसे के दौरान जिस बोइंग का शेयर $215 से गोता लगाते हुए सीधे तौर पर $198 तक आ गया था। लगभग 7%-8% की यह गिरावट बोइंग के लिए एक बड़ा झटका थी। हालाँकि, इसके बाद जैसे ही बोइंग हादसा मामले में पायलटों पर दोष मढ़ा जाना चालू हुआ, इसका शेयर वापस चढ़ने लगा।

WSJ की हालिया रिपोर्ट सामने आने के बाद यह शेयर $229 तक चढ़ चुका है। यह एक वर्ष में इसका उच्चतम स्तर है। यानी अमेरिकी अखबारों में आई इन खबरों का सीधा फायदा बोइंग को वित्तीय मोर्चे पर है। इस एंगल से देखने पर स्पष्ट नजर आता है कि बोइंग के इस हादसे में पाक साफ़ निकलने का सीधा कारण क्या है। यह कोई नई बात नहीं है कि बोइंग अपने वित्तीय फायदे के लिए पायलटों को दोषी बताए, इससे पहले 2019 में भी यही कहानी हो चुकी है। इसलिए फिर से इसके होने पर कोई आश्चर्य नहीं होता।

जश्न मनाने कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार भी पहुँची, पर भगदड़ के लिए RCB जिम्मेदार: कहा- आयोजन की ‘उचित अनुमति’ नहीं ली, विराट कोहली के Video से आई भीड़

बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर 4 जून 2025 को हुए भयानक हादसे में 11 लोगों की जान चली गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हादसे के लिए कर्नाटक सरकार ने अपनी रिपोर्ट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) को जिम्मेदार ठहराया है।

सरकार का कहना है कि आरसीबी ने बिना पुलिस की इजाजत और बिना किसी तैयारी के विजय जुलूस और उत्सव का आयोजन किया, जिसके चलते इतना बड़ा हादसा हुआ। इस मामले में विराट कोहली का एक वीडियो भी चर्चा में है, जिसे आरसीबी ने अपने सोशल मीडिया पर डाला था। आइए, इस पूरे मामले को समझते हैं।

भगदड़ से पहले और बाद में क्या हुआ

आरसीबी ने 3 जून 2025 को पहली बार आईपीएल का खिताब जीता। इसके जश्न में बेंगलुरु में चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर विजय जुलूस और उत्सव का आयोजन किया गया। लेकिन इस आयोजन के लिए जरूरी इजाजत नहीं ली गई थी। सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, आरसीबी, उनके इवेंट पार्टनर डीएनए नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड और कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (केएससीए) ने बिना पुलिस से बात किए और बिना लाइसेंस लिए यह आयोजन कर डाला।

केएससीए के सीईओ शुभेंदु घोष ने 3 जून 2025 को शाम 6:30 बजे कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन को एक पत्र दिया था। पत्र में कहा गया कि अगर आरसीबी फाइनल जीतती है, तो अगले दिन विजय जुलूस निकाला जाएगा। लेकिन पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी, क्योंकि आयोजकों ने न तो भीड़ के आकार की जानकारी दी और न ही कोई तैयारी बताई।

इसके बावजूद 4 जून 2025 को सुबह 7:01 बजे आरसीबी ने अपने सोशल मीडिया पर जुलूस की घोषणा कर दी। सुबह 8:55 बजे एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें विराट कोहली ने लोगों को जश्न में शामिल होने का न्योता दिया। इस पोस्ट को 16 लाख लोग देख चुके थे। दोपहर 3:14 बजे एक और पोस्ट में बताया गया कि जुलूस शाम 5 से 6 बजे तक होगा और स्टेडियम में सीमित मुफ्त पास उपलब्ध हैं।

इन पोस्ट्स की वजह से लाखों लोग स्टेडियम के बाहर जमा हो गए। सरकार का अनुमान है कि करीब 3 से 5 लाख लोग वहां पहुंचे, जबकि स्टेडियम की क्षमता सिर्फ 35,000 है। दोपहर 3:14 बजे अचानक यह घोषणा की गई कि स्टेडियम में प्रवेश के लिए पास जरूरी है, जिससे भीड़ में भगदड़ मच गई। लोग गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। गेट नंबर 1, 2, 2A, 6, 7, 15, 17, 18 और 21 पर भगदड़ हुई, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई और 50 से ज्यादा घायल हो गए। घायलों को बौरिंग और व्यदेही अस्पताल ले जाया गया।

जिम्मेदारी से साफ-साफ बच के निकली सरकार

कर्नाटक सरकार ने अपनी रिपोर्ट में सारा दोष आरसीबी पर डाला। सरकार का कहना है कि आरसीबी ने पुलिस से कोई इजाजत नहीं ली और सोशल मीडिया पर जुलूस की घोषणा करके लाखों लोगों को बुला लिया। सरकार ने कोहली के वीडियो का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने लोगों को जश्न में शामिल होने के लिए कहा था। सरकार के मुताबिक, आयोजकों ने सिर्फ एक पत्र देकर सूचना दी, लेकिन जरूरी अनुमति के लिए कोई आवेदन नहीं किया, जो कि 2009 के लाइसेंसिंग और कंट्रोलिंग ऑफ असेंबलीज एंड प्रोसेसन्स (बेंगलुरु सिटी) ऑर्डर के तहत जरूरी है।

हालाँकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस हादसे को गंभीरता से लिया और अपने आप इसकी जाँच शुरू की (सुओ मोटो पीआईएल)। कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट माँगी। सरकार ने पहले इस रिपोर्ट को गोपनीय रखने की माँग की, लेकिन कोर्ट ने इसे सार्वजनिक करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई गोपनीय जानकारी नहीं है और यह सिर्फ तथ्यों का ब्यौरा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को यह रिपोर्ट आरसीबी, केएससीए और डीएनए नेटवर्क्स को देनी होगी।

पुलिस ने भी झटका हाथ

पुलिस का कहना है कि उन्हें आयोजन की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर ने बताया कि 3 जून को केएससीए ने सिर्फ एक पत्र दिया, जिसमें जुलूस की बात थी, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं थी। पुलिस ने समय कम होने की वजह से इजाजत देने से मना कर दिया। इसके बावजूद, आरसीबी ने सोशल मीडिया पर जुलूस का ऐलान कर दिया। पुलिस ने कहा कि इतनी बड़ी भीड़ को संभालना मुश्किल था, क्योंकि रात में भी लोग सड़कों पर जश्न मना रहे थे। फिर भी, पुलिस ने सात घायल जवानों की मदद से स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।

RCB बोली – अनुमति समेत बाकी जिम्मेदारी DNA, KCCA की

आरसीबी ने कर्नाटक हाई कोर्ट में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी) के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसे हादसे का जिम्मेदार ठहराया गया था। आरसीबी का कहना है कि सीएटी ने बिना उनकी बात सुने यह फैसला दिया, जो कि गलत है। आरसीबी ने कहा कि मुख्यमंत्री का पोस्ट ने भीड़ को आकर्षित किया। वे मानते हैं कि सोशल मीडिया प्रमोशन किया, लेकिन पुलिस को सूचना दी थी। आरसीबी ने कहा कि अनुमति लेने और आयोजन की जिम्मेदारी डीएनए और केएससीए की थी। आरसीबी ने यह भी दावा किया कि हादसे के बाद उन्होंने पीड़ित परिवारों को आर्थिक की मदद दी और ‘आरसीबी केयर्स’ फंड बनाया।

बिना जानकारी के ही स्टेडियम में पहुँचे मुख्यमंत्री और डिप्टी मुख्यमंत्री?

हैरानी की बात है कि कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने इस हादसे में अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया। क्या पूरा सरकारी तंत्र इतना लापरवाह था कि बिना पुलिस की जानकारी, बिना किसी ठोस तैयारी और बिना इजाजत के स्टेडियम में उत्सव का आयोजन कर लिया गया? लोग स्टेडियम के बाहर मर रहे थे, घायल हो रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार स्टेडियम में जश्न मना रहे थे।

इतना ही नहीं, हादसे के बाद भी आरसीबी की पूरी टीम को विधानसभा ले जाया गया और वहाँ सम्मानित किया गया, जबकि उसी वक्त 11 परिवार अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा नुकसान झेल रहे थे और दर्जनों लोग अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे।

क्या यह सरकार की संवेदनहीनता नहीं है? एक तरफ लोग अपनी जान गँवा रहे थे, दूसरी तरफ सरकार और उसके नेता फोटो खिंचवाने और वाहवाही लूटने में व्यस्त थे। सरकार ने पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया, लेकिन क्या यह सिर्फ अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश नहीं थी? अगर पुलिस को पहले से जानकारी नहीं थी, तो फिर मुख्यमंत्री और उनके साथी स्टेडियम और विधानसभा में क्या कर रहे थे?

यह सवाल उठता है कि क्या सरकार ने सिर्फ अपनी छवि चमकाने के लिए इस आयोजन को बढ़ावा दिया, बिना यह सोचे कि इसका नतीजा क्या हो सकता है? यह हादसा सिर्फ आरसीबी की लापरवाही का नहीं, बल्कि कॉन्ग्रेस सरकार की गैर-जिम्मेदारी का भी नतीजा है। जनता के सामने अब यह सवाल है कि आखिर जिम्मेदार कौन है – क्या सिर्फ आरसीबी, या फिर वह सरकार जो अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए दूसरों पर ठीकरा फोड़ रही है?

शंख, सोना, हाथी के दाँत… कीलाडी में मिले 18000+ प्राचीन सामान: अमरनाथ रामकृष्ण की रिपोर्ट पर क्यों हो रहा विवाद, क्यों ASI-केंद्र के पीछे पड़ी तमिलनाडु की DMK सरकार?

तमिलनाडु के कीलाडी (Keeladi) में हुई खुदाई ने दक्षिण भारत में एक प्राचीन और शहरीकृत सभ्यता के अस्तित्व का प्रमाण दिया है। यह खुदाई 2014 में शुरू हुई थी और इसकी शुरुआती जिम्मेदारी पुरातत्वविद् के. अमरनाथ रामकृष्ण को सौंपी गई थी।

हालाँकि, इस खुदाई के दौरान एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया। मामले में के. अमरनाथ के कई बार तबादले हुए। इस वजह से राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई। वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी उनकी खुदाई वाली रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। ASI ने अमरनाथ से कहा कि वे अपनी रिपोर्ट में बदलाव करें, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इस इंकार के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

अब के. अमरनाथ रामकृष्ण को ग्रेटर नोएडा में स्थित ‘राष्ट्रीय स्मारक और पुरावशेष मिशन’ (National Mission on Monuments and Antiquities – NMMA) का निदेशक नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे इसी मिशन के नई दिल्ली कार्यालय में निदेशक के रूप में कार्यरत थे। अपने पिछले कार्यकाल से छह महीने बाद उनका यह तबादला हुआ है। इससे पहले  वे उत्खनन एवं अन्वेषण निदेशक के तौर पर तीन महीने तक काम कर चुके थे।

यह सब कैसे शुरू हुआ: कीलाडी की खोज और उसका महत्व

कीलाडी, जिसे कीझाडी भी कहा जाता है, तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में स्थित है। यह मदुरै से लगभग 12 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में वैगई नदी के किनारे है। यहाँ खुदाई का कार्य लगभग दस साल पहले अमरनाथ रामकृष्ण के नेतृत्व में शुरू हुआ था। रामकृष्ण उस समय ASI के अधीक्षक पुरातत्वविद थे। उनके नेतृत्व में इस कार्य की शुरुआत पल्लिचंथई नामक स्थान से हुई थी।

यहाँ पहले 100 एकड़ का नारियल का एक बाग था। वैगई नदी के किनारे 100 से अधिक स्थानों को खुदाई के लिए चिन्हित किया गया था, जिनमें कीलाडी सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ। शुरू में खुदाई के तीन चरण ASI ने किए, उसके बाद कार्यभार तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) ने सँभाला।

कीलाडी से अब तक 18,000 से अधिक प्राचीन वस्तुएँ मिल चुकी हैं। इनमें कुएँ, जल निकासी प्रणाली, ईंटों से बने भवन, तमिल ब्राह्मी लिपि में लेख लिखे मिट्टी के बर्तन, सोने के आभूषण, ताँबे की वस्तुएँ, अर्ध-कीमती पत्थर और रत्न, शंख और हाथी दाँत से बनी चूड़ियाँ, काँच की मोतियाँ, कताई और बुनाई के उपकरण, मिट्टी की मुहरें और अन्य वस्तुएँ शामिल हैं।

इन खोजों से यह सिद्ध होता है कि कीलाडी में एक समृद्ध, उन्नत और योजनाबद्ध नगरी बसती थी। यहाँ व्यापार, बुनाई, रंगाई, मिट्टी के बर्तन और मोती बनाने जैसे कई व्यवसाय मौजूद थे। यहाँ मिले कार्नेलियन और अगेट जैसे विदेशी पत्थरों से बने गहनों से यह भी पता चलता है कि यहाँ समुद्री व्यापार भी होता था। इसके साथ ही खुदाई में मिली ताँबे की सुई, सूत लटकाने के पत्थर, कताई के चक्के और मिट्टी के बर्तन इस क्षेत्र में कपड़ा उद्योग की समृद्धता को दर्शाते हैं।

इसके अलावा, हॉप्सकॉच जैसे खेलों के चिह्न, पासे और गोटियों जैसी वस्तुएँ उच्च वर्गीय समाज की उपस्थिति और उनके मनोरंजन के साधनों को दर्शाती हैं। क्षेत्र की उपजाऊ भूमि और पशुपालन ने यहाँ के लोगों को समृद्ध किया और समुद्री व्यापार में सक्षम बनाया।

कार्बन डेटिंग के अनुसार कीलाडी की सभ्यता लगभग 2160 साल (द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व) पुरानी है। लेकिन 2019 में तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग की एक रिपोर्ट में बताया गया कि यहाँ की सांस्कृतिक परतें छठी से पहली शताब्दी ईसा पूर्व के बीच की हैं। अमेरिका भेजे गए छह नमूनों में से एक नमूने को 353 सेंटीमीटर गहराई से लिया गया था। इस पर तारीख 580 ईसा पूर्व पाई गई। इसका अर्थ यह है कि कीलाडी की सभ्यता पहले माने गए समय से लगभग 300 साल पुरानी है।

इससे संगम युग की शुरुआत अब लगभग 800 ईसा पूर्व मानी जा सकती है, जो पहले के 300 ईसा पूर्व के अनुमान से कहीं पहले है। संगम युग तमिल इतिहास में साहित्य और संस्कृति के उत्कर्ष का काल माना जाता है और कीलाडी से मिले साक्ष्य इस युग की ऐतिहासिकता को पुष्ट करते हैं।

यहाँ के भवनों की दिशा चारों दिशाओं के अनुसार तय की गई थी, जिससे नगर नियोजन की समझ दिखाई देती है। बर्तनों पर ब्राह्मी लिपि में लेख मिलना यह दर्शाता है कि उस समय कीलाडी के लोग साक्षर थे। सूरज और चाँद की आकृतियाँ यह संकेत देती हैं कि वे खगोल विज्ञान के ज्ञान से भी परिचित थे।

कीलाडी में मिले कुछ प्रतीक सिंधु घाटी सभ्यता से मिलते-जुलते हैं। हालाँकि दोनों के बीच लगभग 1000 वर्षों का अंतर है, इसलिए इस संबंध पर और शोध की आवश्यकता है। तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग के अनुसार कीलाडी एक पूर्ण रूप से विकसित नगरीय सभ्यता थी, जहाँ ईंटों से बने भवन, शिल्पकला, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रमाण मिलते हैं।

इसने स्पष्ट रूप से यह सिद्ध किया कि तमिलनाडु में प्रारंभिक ऐतिहासिक काल में नगरीय जीवन और बस्तियाँ मौजूद थीं। कीलाडी ने न केवल तमिल संगम साहित्य की प्रामाणिकता को बल दिया बल्कि दक्षिण भारत के इतिहास को भी और पीछे ले जाकर समृद्ध किया।

रामकृष्ण की खोज और उनका ट्रांसफर

कीलाडी की खुदाई की शुरुआत 2014 में पुरातत्वविद् अमरनाथ रामकृष्ण की अगुवाई में हुई थी। उन्होंने 2014 से 2016 के बीच पहले दो चरणों की खुदाई करवाई और इस दौरान मिली जानकारी को 982 पन्नों की रिपोर्ट में संकलित किया। इस रिपोर्ट को उन्होंने ASI  की महानिदेशक वी. विद्यावती को सौंपा। इस रिपोर्ट के बारह अध्यायों में खुदाई के उद्देश्यों और उसके ऐतिहासिक महत्व को समझाया गया।

एक अलग अध्याय में अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित बीटा एनालिटिकल लैब में 23 नमूनों की AcceleratorMass Spectrometry (AMS) तकनीक से की गई कार्बन डेटिंग का विवरण दिया गया। इस अध्याय में पौधों और जानवरों के अवशेषों के विश्लेषण और अन्य विश्वविद्यालयों से मिली जानकारियों के आधार पर कीलाडी की सभ्यता की समय-सीमा तय की गई।

केवल पहले दो चरणों में करीब 5,800 वस्तुएँ मिली थीं, जिससे यह स्थान ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। लेकिन इसके बाद अमरनाथ रामकृष्ण का तबादला असम कर दिया गया। इसे कई लोगों ने खुदाई कार्य में एक बड़ा झटका माना।

आलोचकों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने खुदाई को जानबूझकर रोकने की कोशिश की। ऐसा इसलिए क्योंकि पहले खुदाई के लिए फंड और सहयोग देने का वादा किया गया था, लेकिन फिर उसे टाल दिया गया। इस बीच, खुदाई का तीसरा चरण शुरू हो चुका था, जिसकी जिम्मेदारी पुरातत्वविद् पी.एस. श्रीरामन को दी गई। तीसरे चरण में 400 वर्ग मीटर तक खुदाई करने के बाद श्रीरामन ने कहा कि पहले मिले ईंटों के निर्माण में कोई निरंतरता नहीं पाई गई।

इस बयान के बाद तमिलनाडु में यह आरोप लगे कि केंद्र सरकार कीलाडी की ऐतिहासिकता को कमतर दिखाने की कोशिश कर रही है। इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया और तमिल राजनीति में अक्सर उठने वाले उत्तर भारत-विरोधी भावनाओं को इससे जोड़ा जाने लगा।

ASI को रोके जाने के बाद तमिलनाडु सरकार ने शुरू की खुदाई परियोजना, मिलीं 13,000 वस्तुएँ

कीलाडी खुदाई स्थल पर ASI  ने तीसरे चरण के बाद खुदाई को यह कहकर रोक दिया था कि कोई विशेष खोज नहीं हुई है। लेकिन 2017 में तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग ने खुदाई का काम सँभाला और तब से अब तक हजारों पुरावशेष मिल चुके हैं। अप्रैल 2023 में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने खुदाई के नौवें चरण की शुरुआत की थी। यह सितंबर 2023 में पूरा हुआ।

अब तक राज्य पुरातत्व विभाग 13,000 से अधिक वस्तुएँ खोज चुका है, और कार्बन डेटिंग से यह पता चला है कि यह क्षेत्र लगभग 580 ईसा पूर्व से 200 ईस्वी के बीच सक्रिय था। वर्ष 2024-2025 में खुदाई का दसवाँ चरण भी शुरू हो चुका है, जिसमें सैकड़ों और प्राचीन वस्तुएँ मिली हैं।

हाल ही में कीलाडी खुदाई स्थल की तीसरी खाई (ट्रेंच) में एक नई 30 फीट लंबी संरचना मिली है, जबकि पहले ASI ने इस क्षेत्र में कोई बड़ी खोज की संभावना को नकार दिया था। यह संरचना जमीन से 90 सेंटीमीटर नीचे पश्चिमी हिस्से में मिली और इसकी लंबाई लगभग 10 मीटर आँकी गई है। यह पूर्व-पश्चिम दिशा में बनी है।

इस संरचना में जो ईंटें इस्तेमाल हुई हैं, वे कीलाडी की दूसरी खोजों में मिली ईंटों के जैसी ही हैं। यह समानता इस खोज की प्रामाणिकता को और मजबूत करती है। इतिहास के प्रोफेसर वी. मरप्पन (प्रेसीडेंसी कॉलेज) के अनुसार, पहले की टीम ने यह अनुमान लगाया था कि यह क्षेत्र कभी औद्योगिक क्षेत्र रहा होगा।

उन्होंने यह भी कहा, “नई खोजों से यह सवाल उठता है कि क्या अभी भी जमीन के नीचे के कई हिस्से खुदाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” खुदाई करने वाले पुरातत्वविदों का मानना है कि यह संरचना संभवतः किसी कार्यशाला या औद्योगिक इमारत की हो सकती है।

मद्रास हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

कीलाडी में चल रही पुरातत्विक खुदाई के मामले में कुछ समय के लिए मामला कोर्ट तक पहुँच गया। इस दौरान मद्रास हाई कोर्ट के जजों ने भी खुदाई स्थल का दौरा किया और ASI को खुदाई जारी रखने का आदेश दिया। साथ ही तमिलनाडु पुरातत्व विभाग को खुदाई में शामिल होने की अनुमति भी दी गई।

तमिलनाडु का पुरातत्व विभाग तीसरे चरण से खुदाई में सक्रिय रूप से शामिल रहा। इसके कारण पूरी घटना ने एक महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया। 2019 में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने यह फैसला सुनाया कि खुदाई को रोका नहीं जाना चाहिए क्योंकि इससे तमिल सभ्यता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई हैं।

जस्टिस डी. कृष्णकुमार और जस्टिस आर. विजयकुमार की पीठ ने कहा कि खुदाई से जनता को तमिल सभ्यता के बारे में और जानकारी मिलेगी, इसलिए संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खुदाई में कोई रुकावट न आए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि पुरातत्वविद् अमरनाथ रामकृष्ण को 15 दिनों के भीतर तमिलनाडु वापस भेजा जाए ताकि वह खुदाई का कार्य जारी रख सकें। उन्हें राज्य वापस बुलाए जाने के बाद जनवरी 2023 में खुदाई के पहले दो चरणों की रिपोर्ट पेश की गई।

2023 में ही मदुरै निवासी पी. प्रभाकर पांडियन की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी की और कहा कि ASI की पहले दो चरणों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उसी साल कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वे खुदाई से संबंधित डाली गईं कई जनहित याचिकाओं पर जवाबी हलफनामे दाखिल करें।

इनमें 2016 और 2017 की वे याचिकाएँ भी शामिल थीं जिनमें खुदाई को बंद करने के बजाय उसे आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर मार्गदर्शन माँगा गया था। एक याचिका में सरकार से कीलाडी में ‘साइट म्यूजियम’ बनाने की माँग की गई थी। इसके बाद मार्च 2023 में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने दो एकड़ में बने 18.43 करोड़ की लागत वाले कीलाडी संग्रहालय का उद्घाटन किया।

2016 में कोर्ट ने ASI को खुदाई में मिले अवशेषों के वैज्ञानिक परीक्षण के लिए देहरादून स्थित प्रयोगशाला ले जाने की अनुमति दी। हालाँकि साथ ही यह भी कहा कि राज्य के पुरातत्व आयुक्त को इसकी जानकारी पहले दी जाए। आयुक्त को निर्देश दिया गया कि वे वस्तुओं के वीडियो और फोटो लें और ASI को आदेश दिया गया कि परीक्षण के बाद सभी अवशेष तमिलनाडु वापस लाए जाएँ और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी जाए।

केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच  छिड़ा विवाद

जनवरी 2023 में पुरातत्वविद अमरनाथ रामकृष्ण ने कीलाडी खुदाई पर तैयार 982 पन्नों की एक अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। इससे पहले उन्होंने 2016 और 2017 में प्रारंभिक और अंतरिम रिपोर्ट्स भी दी थीं। यह रिपोर्ट लगभग ढाई साल तक ASI के पास रही। उसके बाद ASI ने रामकृष्ण को इसे संशोधित करने के लिए कहा।

ASI ने रिपोर्ट में दिये गए कुछ कालखंडों और निष्कर्षों की वैज्ञानिक पुष्टि पर सवाल उठाए। ASI ने कहा कि प्रारंभिक काल यानी 8वीं सदी ईसा पूर्व से 5वीं सदी ईसा पूर्व के दावे के लिए ठोस प्रमाण नहीं दिये गए हैं। संस्था ने कहा कि सिर्फ गहराई का जिक्र करना पर्याप्त नहीं, परत (लेयर) नंबर भी देना जरूरी है ताकि तुलनात्मक अध्ययन किया जा सके।

ASI ने कहा कि रिपोर्ट्स में तारीखें जिस तरह से दी गई हैं, उन्हें और वैज्ञानिक रूप में पेश करने की जरूरत है। लेकिन अमरनाथ रामकृष्ण ने रिपोर्ट में कोई बदलाव करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका शोध वैज्ञानिक मानकों पर आधारित है और उसमें मैटीरियल कल्चर (सामग्री संस्कृति), परत दर परत विश्लेषण और AMS (Accelerator Mass Spectrometry) जैसे वैज्ञानिक तरीकों से तारीखों की पुष्टि की गई है।

इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), विदुथलै चिरुथैगल काच्ची (VCK) और इतिहासकार आर. बालकृष्णन ने ASI के कदम को तमिल संस्कृति को दबाने की कोशिश बताया। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार कीलाडी की ऐतिहासिकता को राजनीतिक कारणों से नहीं मान रही है।

वहीं केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि रिपोर्ट को मान्यता देने से पहले और वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक खोज से पूरे ऐतिहासिक विमर्श को नहीं बदला जा सकता। उनका कहना था कि तमिलनाडु भारत का अहम हिस्सा है और उसका इतिहास विज्ञान के आधार पर सम्मानित होना चाहिए, न कि भावनात्मक राजनीति के जरिए।

शेखावत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह विवाद इसलिए बढ़ा है, क्योंकि तमिलनाडु सरकार केंद्र के साथ सहयोग करने को तैयार नहीं है? उन्होंने कहा, “ऐसे पदों पर बैठे लोग अगर क्षेत्रीय भावनाएँ भड़काएँगे, तो यह उचित नहीं होगा। हमें विशेषज्ञों को फैसला लेने देना चाहिए, न कि नेताओं को।”

तमिलनाडु के पुरातत्व मंत्री थंगम थेनारासु ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलों के साथ निचले दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा, “दो साल तक रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, कोई फंड नहीं दिया गया, और अब कहा जा रहा है कि पर्याप्त सबूत नहीं हैं।”

MDMK नेता वायको ने आरोप लगाया कि केंद्र एक ‘काल्पनिक संस्कृत सभ्यता’ को बढ़ावा देना चाहता है और तमिल सभ्यता को दबा रहा है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी सोशल मीडिया पर लिखा, “हमें नहीं बदलना है, बदलनी हैं कुछ सोच। हम तमिलों ने हजारों वर्षों से हर रुकावट का सामना किया है और विज्ञान की मदद से अपने इतिहास को साबित किया है।”

मदुरै से CPI (M) के सांसद एस. वेंकटराजन ने कहा कि रामकृष्ण को रिपोर्ट लिखने से रोका गया, उन्हें ट्रांसफर किया गया और वे कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही रिपोर्ट तैयार कर सके। उन्होंने कहा कि ASI ने संसद और कोर्ट में कहा था कि 11 महीने में रिपोर्ट प्रकाशित होगी, लेकिन वह वादा भी पूरा नहीं हुआ। उनका आरोप था, “यह सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि तमिलनाडु और दक्षिण भारतीय इतिहास पर हमला है।”

रामकृष्ण की रिपोर्ट के समय तमिलनाडु में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) की सरकार थी। AIADMK ने लंबे समय तक इस विवाद पर चुप्पी साधे रखी। लेकिन 18 जून को उसके वरिष्ठ नेता आर.बी. उधयकुमार ने कहा कि केंद्र सिर्फ और वैज्ञानिक प्रमाणों की माँग कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर रिपोर्ट खारिज की जाती है, तो उनकी पार्टी सबसे पहले विरोध करेगी।

DMK ने AIADMK पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने केंद्र के आगे झुककर तमिल पहचान से समझौता किया है। AIADMK के एक और वरिष्ठ नेता माफोई पंडियाराजन ने खुद को ‘कीलाडी नायकर’ कहकर तमिल पुरातनता को सिद्ध करने का श्रेय लिया, लेकिन DMK नेताओं ने इसे दिखावा कहा और आरोप लगाया कि AIADMK ने गठबंधन की राजनीति को तमिल गौरव से ऊपर रखा।

केंद्र सरकार ने माँगी उत्खनन रिपोर्ट

ASI ने सेवानिवृत्त अधीक्षण पुरातत्वविद् पी. एस. श्रीरामन से कीलाडी खुदाई के तीसरे चरण की आधिकारिक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। वर्ष 2017 में रामकृष्ण के अचानक तबादले के बाद श्रीरामन को यह खुदाई सौंपी गई थी, लेकिन उस चरण में कोई बड़ी खोज नहीं हुई थी।

श्रीरामन वर्ष 2019 में रिटायर हो गए थे। अब उन्हें ASI ने अनुमति दी है कि वे अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कीलाडी और कोडुमनाल खुदाई कार्यों की रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने ‘द हिंदू’ को बताया कि वे चेन्नई स्थित ASI कार्यालय से रिपोर्ट तैयार करेंगे क्योंकि खुदाई से जुड़ा सारा रिकॉर्ड और सामग्री वहीं पर है। उन्होंने कहा, “चूंकि मैं सेवानिवृत्त हो चुका हूँ, दोनों रिपोर्टें लंबित थीं। मैंने ASI से सामग्री तक पहुँच की अनुमति माँगी थी और वह अब मिल गई है। मैं जल्द ही रिपोर्ट तैयार करना शुरू करूँगा।”

श्रीरामन को 2017-18 में कोडुमनाल में भी एक सीजन तक खुदाई कार्य का अनुभव है। कोडुमनाल, नॉयल नदी के उत्तर तट पर इरोड जिले में स्थित है। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, कोडुमनाल को दो सांस्कृतिक कालों, प्रागैतिहासिक युग और मेगालिथिक युग में बाँटा जा सकता है। उस समय के लोग कुशल कारीगर थे, टिकाऊ ढाँचे बनाते थे और कई देशों से व्यापार करते थे।

डेक्कन हेराल्ड से बातचीत में श्रीरामन ने कहा, “मैंने रिपोर्ट पूरी करने के लिए ASI से औपचारिक अनुमति माँगी है। ASI ने मुझे निर्देश दिया है कि इसे जल्द से जल्द पूरा करूँ। मैं कोडुमनाल की रिपोर्ट पर ज्यादा ध्यान दे रहा हूँ क्योंकि वह मेरी व्यक्तिगत कार्य था, जबकि कीलाडी में मेरा कार्यकाल सीमित था और यह पहले से चल रहे कार्य का हिस्सा था।”

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब एक महीने पहले ASI ने रामकृष्ण को उनके द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुसार बदलाव कर दोबारा जमा करने के लिए कहा था।

भारत के इतिहास में नया सवेरा: समानांतर सभ्यता के निशान

तमिलनाडु के कीलाडी पुरातत्व स्थल ने राज्य के इतिहास का एक नया अध्याय सामने रखा है। अमेरिका की बीटा एनालिटिक्स (Beta Analytics) लैब द्वारा की गई रेडियोकार्बन डेटिंग से यह पता चला कि यहाँ से मिली एक वस्तु 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व की है। यह समय वही है जब गंगा घाटी में भारत का दूसरा शहरीकरण शुरू हो रहा था।

तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा 2017-18 से अब तक 29 वस्तुओं की रेडियोकार्बन डेटिंग करवाई गई है। सबसे पुरानी वस्तु 580 ईसा पूर्व की पाई गई है और सबसे नई 200 ईस्वी की। इसका मतलब है कि यह इलाका लगभग 800 वर्षों तक एक जीवंत शहरी और औद्योगिक सभ्यता का केंद्र था।

यहाँ संगम युग (Sangam Age) की बड़ी ईंटों से बनी इमारतें मिली हैं, जो संगम साहित्य में वर्णित शहरी विकास की पुष्टि करती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पुरातत्वविद् के. राजन ने बताया कि ईंट की इमारतों के ऊपर की परतों से मिली चीजें तीसरी सदी ईसा पूर्व के बाद की हैं, जबकि नीचे की परतें छठी सदी ईसा पूर्व तक जाती हैं।

कीलाडी के पास कोन्डगई (Kondagai) में एक कब्र स्थल से एक मानव खोपड़ी मिली है। आधुनिक 3D तकनीक और खोपड़ी की माप के जरिये वैज्ञानिक उस व्यक्ति का चेहरा, उम्र, खानपान, और लिंग जानने की कोशिश कर रहे हैं। राजन ने बताया कि यह सब दर्शाता है कि कीलाडी भी गंगा घाटी की तरह ही एक प्राचीन शहरी सभ्यता का हिस्सा था। 29 डेटिंग में से 12 नमूने अशोक के समय से भी पहले के हैं।

भारत और विदेश के 20 से अधिक शोध संस्थान कीलाडी पर शोध कर रहे हैं, जैसे लिवरपूल यूनिवर्सिटी (UK), यूनिवर्सिटी ऑफ पीसा (Italy), फील्ड म्यूजियम (Chicago), फ्रेंच इंस्टिट्यूट ऑफ पांडिचेरी, IIT गांधीनगर, और डेक्कन कॉलेज। कीलाडी में खुदाई के दौरान बैल, भैंस, बकरी, गाय, कुत्ते, सूअर, हिरण और अन्य जानवरों की हड्डियाँ भी मिली हैं। डेक्कन कॉलेज में इनका विश्लेषण चल रहा है। मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक प्राचीनमानव और पशु DNA का अध्ययन कर रहे हैं ताकि यहाँ के लोगों के जीवन और प्रवास के बारे में और जानकारी मिल सके।

पुरातत्व विभाग के संयुक्त निदेशक आर. शिवानंदम ने बताया कि इतने अधिक नमूनों की डेटिंग से यह साफ है कि कीलाडी एक साक्षर समाज था, जहाँ कारीगर रहते थे और यह एक औद्योगिक केंद्र था। यह जगह मदुरै होते हुए पूर्वी तट के अलागनकुलम और पश्चिमी तट के मुजिरिस बंदरगाह को जोड़ने वाले प्राचीन व्यापार मार्ग पर स्थित थी।

हालाँकि इस बस्ती का प्राचीन नाम अभी तक ज्ञात नहीं है। संगम साहित्य में नगरों, सड़कों, महलों, गहनों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का वर्णन मिलता है। कीलाडी की खोज से यह साफ हो गया है कि संगम साहित्य केवल कल्पना नहीं बल्कि वास्तविक जीवन का चित्रण था।

यहाँ से मिट्टी और हाथी दाँत के पासे भी मिले हैं, जो संगम साहित्य के ‘कलीथोगई’ ग्रंथ में वर्णित हैं। राजन ने यह भी बताया कि कीलाडी ही नहीं, बल्कि कोडुमनाल, पोरुन्थल, सिवगलाई, आदिचनाल्लूर और कोरकाई जैसे अन्य स्थल भी छठी सदी ईसा पूर्व के हैं। कोरकाई से तो 785 ईसा पूर्व की भी एक तिथि मिली है, जो दिखाता है कि उस समय तमिल क्षेत्र में नगरीकरण व्यापक रूप से फैला हुआ था।

कीलाडी में 110 एकड़ के क्षेत्र में अब तक सिर्फ 4% खुदाई हुई है। राज्य सरकार आगे और खुदाई कराएगी और यहाँ एक ऑन-साइट म्यूजियम भी बनाएगी, जो देश का पहला ऐसा संग्रहालय होगा।

पुरातत्वविद् बालकृष्णन ने कहा, “तमिलनाडु में लंबे समय से पुरातत्व की उपेक्षा होती रही, लेकिन कीलाडी ने तमिल समाज में नई जागरूकता पैदा की है।” राजन ने अंत में कहा, “कीलाडी वह पहली साइट है जिसने तमिलनाडु में पुरातत्व की सोच ही बदल दी है।”

कीलाडी से प्राप्त चेहरे

मदुरै कामराज विश्वविद्यालय और ब्रिटेन की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी  के विशेषज्ञों ने मिलकर एक अनोखा फॉरेंसिक फेस रिकंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट किया, जिसमें उन्होंने करीब 2500 साल पहले के दो व्यक्तियों के चेहरे फिर से बनाए। ये दोनों कंकाल तमिलनाडु के कीलाडी क्षेत्र के पास कोंडगई में पाए गए थे। यह एक प्राचीन कब्रिस्तान है और मुख्य खुदाई स्थल से 800 मीटर दूर स्थित है।

चेहरे के लक्षणों को देखकर वैज्ञानिकों ने बताया कि इन लोगों के चेहरे दक्षिण भारतीय जैसे थे, लेकिन उनमें प्राचीन ऑस्ट्रो-एशियाटिक जनजातियों और पश्चिम ईरानी (ईरान क्षेत्र के शिकारी) समुदाय के भी कुछ संकेत मिले हैं। इससे पता चलता है कि उस समय के तमिल लोगों का मिश्रित वंश (genetic ancestry) रहा होगा। हालाँकि वैज्ञानिकों ने कहा है कि और अधिक DNA रिसर्च की जरूरत है ताकि वंश के बारे में पक्के तौर पर बताया जा सके।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार लिवरपूल यूनिवर्सिटी के फेस लैब की निदेशक प्रोफेसर कैरोलाइन विल्किंसन ने बताया कि उन्होंने कंप्यूटर की मदद से एक 3D फेशियल रिकंस्ट्रक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिससे खोपड़ी की संरचना और माँसपेशियों के आधार पर चेहरे तैयार किए गए। हालाँकि दोनों खोपड़ियों के निचले जबड़े गायब थे, इसलिए उन्होंने सिर की नाप और आकार के आधार पर दाँतों और जबड़े की बनावट का अनुमान लगाया।

मदुरै कामराज विश्वविद्यालय में जेनेटिक्स विभाग के प्रोफेसर जी. कुमारेशन ने कहा, “ये प्रक्रिया 80% विज्ञान और 20% कला है।” उन्होंने बताया कि DNA की जानकारी और ये बनाए गए चेहरे संगम काल के समय के तमिल लोगों की नस्ल और पहचान समझने में मदद कर सकते हैं।

भारत की सभ्यता यात्रा में महत्वपूर्ण क्षण

यहाँ पर एक 90 x 60 मीटर क्षेत्र में खुदाई की गई है, जहाँ पासे, अज्ञात ताँबे के सिक्के, काँच, शंख, हाथीदाँत, मोती, मिट्टी के मनके, मुहरें और सोने की सजावटी वस्तुएँ मिली हैं। यह क्षेत्र तमिलनाडु के कुछ गिने-चुने स्थानों में से एक है जैसे कि अरिकामेडु, कावेरीपट्टिनम और कोरकाई। यहाँ विभिन्न प्रकार की संरचनाएँ पाई गई हैं, जैसे कि जटिल ईंटों से बनी इमारतें, टैंक जैसी जल निकासी प्रणाली, दोहरी दीवार वाले भट्ठी और टेराकोटा के कुएँ।

ये खोजें यह दर्शाती हैं कि यहाँ एक समृद्ध, शिक्षित और उन्नत शहरी सभ्यता थी। इससे यह भी पता चलता है कि भारत की सभ्यता केवल गंगा घाटी तक सीमित नहीं थी, बल्कि उत्तर और दक्षिण दोनों क्षेत्रों में अनेक प्राचीन और विकसित समुदाय बसे हुए थे। इसके अलावा इन खोजों से यह भी साफ होता है कि उस समय के लोग बाहरी दुनिया से भी जुड़े हुए थे।

इन बातों से यह साबित होता है कि भारत की सभ्यता की जड़ें बहुत गहरी हैं। यह उन मिथकों को भी खारिज करता है जो कहते हैं कि भारत में विदेशी आकर बसे और सभ्यता की शुरुआत की। इसके विपरीत यह स्पष्ट होता है कि भारत में पहले से ही उन्नत नगर नियोजन, व्यापार, मनोरंजन और एक जीवंत सांस्कृतिक जीवन था।

इस तरह की खोजें न केवल गर्व का विषय हैं बल्कि हमारे अतीत को समझने, उसकी निरंतरता को महसूस करने और हमारी सांस्कृतिक पहचान को जानने में भी मदद करती हैं। हमारे पूर्वजों की सोच और उन्होंने जिस तरह के समाज को बनाया और सदियों तक सँजोया, वे वास्तव में प्रशंसा के पात्र हैं।

कीलाडी अब इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, शिलालेख विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। यहाँ की खोजों ने कई शोधों को प्रेरित किया है और यह जगह अब धीरे-धीरे विश्व के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में अपनी जगह बना रही है

इस खबर को मूल रूप से अंग्रेजी में रुकमा राठौर ने लिखा है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। इसका अनुवाद किया है सौम्या सिंह ने।

UP से मुंबई तक छांगुर पीर के 14 ठिकानों पर ED की रेड: रिपोर्ट में बताया- गुलाम रब्बानी की मदद से दुबई होते थे करोड़ों ट्रांसफर, आतंकी नेटवर्क के जुड़े दस्तावेज भी मिले

बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण रैकेट के सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन की गिरफ्तारी के बाद सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। ED ने कार्रवाई करते हुए 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। इसमें यूपी के बलरामपुर के 12 और मुंबई के 2 ठिकाने शामिल हैं।

इस बीच, नसरीन और गुलाम रब्बानी के बीच दुबई पैसे भेजने की साजिश का भी पर्दाफाश हुआ है, जो इस रैकेट के इंटरनेशनल कनेक्शन को उजागर करता है। ED को छांगुर पीर के UAE में 5 विदेशी खाते भी मिले हैं।

ED की जाँच में पता चला कि छांगुर पीर के 30 में से 18 बैंक खातों में ₹68 करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ। 3 महीने में 7 करोड़ की विदेशी फंडिंग खातों में आई। नवीन के बैंक खाते से शहजाद शेख के खाते में ₹2 करोड़ ट्रांसफर किए गए थे। शहजाद शेख से ED पूछताछ कर रही है।

गुलाम रब्बानी की मदद से होता था करोड़ों का ट्रांसफर

गिरोह की गतिविधियों से जुड़े आतंकी नेटवर्क के दस्तावेज मिले हैं। एक बड़ी इमारत को आतंकी ट्रेनिंग कैंप के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। हालाँकि यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह इमारत कहाँ है।

यूपी ATS की पूछताछ में सामने आया है कि नसरीन ने अपनी गिरफ्तारी से पहले सारी जमीन गुलाम रब्बानी की मदद से हिबानामा (गिफ्ट डीड) के जरिए ट्रांसफर करने की योजना बनाई थी। इसका मकसद करोड़ों की रकम को हवाला के जरिए दुबई भेजना था।

नसरीन ने दुबई में अवैध धर्मांतरण का पूरा काम संभाला था। वह दिल्ली-एनसीआर और महानगरों से लड़कियों को दुबई भेजती और वहाँ उनका धर्मांतरण करवाती। जाँच में सामने आया है कि उसने 19 बार दुबई की यात्रा की थी।

छांगुर गैंग से आतंकी कनेक्शन

पूछताछ में नसरीन ने बताया कि छांगुर पीर धर्मांतरण के लिए कई मौलानाओं को बुलाता था, जिनमें दुबई से आने वाले मौलाना भी शामिल थे। छांगुर और नसरीन ने कबूला कि उनका मकसद सिर्फ लव जिहाद नहीं, बल्कि पूरे परिवार का धर्मांतरण कराना था।

छांगुर पीर का नेटवर्क नेपाल बॉर्डर के जरिए विदेशी फंडिंग लाकर मिशनरी संगठनों को देता था। यूपी के बलरामपुर, श्रावस्ती, संतकबीर नगर और महाराजगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में 16 ऐसी मिशनरी संस्थाएँ पाई गई हैं।

प्रशासनिक मिलीभगत

2019 से 2024 के बीच बलरामपुर में तैनात एक एडीएम, दो सीओ और एक इंस्पेक्टर की भूमिका भी संदिग्ध है। इन पर छांगुर पीर की गतिविधियों पर जानबूझकर आँख मूंदने का आरोप है। दो तहसीलदार और कई राजस्व कर्मी भी जाँच के दायरे में हैं, जिन्होंने जमीन के कागजों में गड़बड़ी की।

छांगुर पीर ने पुलिसकर्मियों को भारी रकम, गाड़ियाँ और अन्य उपहार देकर मामले को दबाने की कोशिश की थी। इन अधिकारियों के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई होने की संभावना है।

बांग्लादेश में नहीं टूटेगा ‘सत्यजीत रे’ का पैतृक निवास, भारत के विरोध के बाद युनूस सरकार झुकी: पुनर्निमाण के लिए बनाई कमेटी; कट्टरपंथी सांस्कृतिक धरोहर मिटाने में जुटे

महान फिल्म निर्माता सत्यजीत रे के पैतृक निवास को बांग्लादेश में तोड़ने के काम को रोक दिया गया है। अब घर के पुनर्निमाण के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। यह कदम बांग्लादेश में सत्यजीत रे के पैतृक घर को ढहाए जाने को लेकर भारत की प्रतिक्रिया के बाद आई है।

ये घर सत्यजित रे के दादा उपेन्द्र किशोर रे चौधरी की थी। वे एक प्रसिद्ध बांग्ला लेखक थे।

भारत ने जताई चिंता

भारत ने घर को सांस्कृतिक धरोहर करार देते हुए इसे गिराने को लेकर चिंता वक्त की थी। साथ ही बांग्लादेश से कहा था कि इसकी मरम्मत और संरक्षण का जिम्मा भारत सरकार उठाने के लिए तैयार है। बंगाल की राजनीतिक पार्टियाँ भी इस मकान को गिराए जाने का विरोध कर रही हैं।

इनका कहना है कि यह मकान बंगाल के सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ा हुआ है। हालाँकि बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस इमारत को जर्जर कहते हुए इसे ‘नशेड़ियों का अ्डडा’ बताया था।

एनडीटीवी से बात करते हुए बांग्लादेश के मंत्री फैजल महमूद ने कुछ अलग ही दावा किया है। उनका कहना है कि सत्यजीत रे के दादा उपेन्द्र किशोर रे चौधरी मैमनसिंह वाले घर में कभी नहीं रहे।

उन्होंने कहा, ” वह बगल के किशोरगंज जिले के कोटियाडी में रहते थे। उनका घर का संरक्षण पहले ही किया जा चुका है। हमारी विरासत सूची में 531 संरक्षित इमारतें हैं। यह घर उपेंद्र किशोर राय चौधरी के पूर्वज का है। यह मैमनसिंह प्रशासन की चूक है कि इसे उस विरासत सूची में शामिल नहीं किया गया, इसलिए यह संरक्षित इमारत नहीं थी। “

टैगौर के पैतृक घर को भी तोड़ा गया

दरअसल जब से बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गई है और जब से अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस बने हैं, तभी से बांग्लादेश के कट्टरपंथी अपनी ही विरासत को मिटाने में लगे हैं। इससे पहले महान लेखक रविन्द्रनाथ टैगोर के पैतृक घर में तोड़फोड़ की गई थी।

ये सिराजगंज जिले के शहजादपुर में मौजूद है। यहाँ मुस्लिम भीड़ ने घर के मुख्य हॉल को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान एक अधिकारी पर हमला किया गया और संग्रहालय को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

भारतीय शख्सियतों की विरासत तो छोड़िए बांग्लादेश अपनी विरासत भी संभाल नहीं पा रहा। कट्टरपंथी इस्लामिक भीड़ ने बांग्लादेश के निर्माता शेख मुजीबुर्रहमान की जगह जगह लगी प्रतिमा तोड़ डाली। हिन्दू देवी देवताओं की प्राचीन मूर्तियाँ और मंदिरों को नहीं बख्शा। आज भी इन मंदिरों को तोड़ने, हड़पने की साजिश चल रही है।

सत्यजीत रे का फिल्मों में अमूल्य योगदान

सत्यजीत रे विश्व सिनेमा के बड़े फिल्मकारों में से एक रहे हैं। उनकी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई। वह फिल्म डायरेक्टर होने के साथ-साथ लेखक, संगीतकार और चित्रकार भी थे। रे की फिल्मों में बंगाल की सामाजिक, सांस्कृतिक गहराई है। ये दुनिया के दिलों को छू लेती है।

उन्हें 1992 में ऑस्कर का मानद पुरस्कार मिला जिसे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड” के नाम से भी जाना जाता है।

भारत-अमेरिका के बीच जल्द हो सकती है ट्रेड डील, ट्रंप ने किया इशारा: इंडोनेशिया की तर्ज पर लग सकता है टैरिफ, डेयरी और कृषि सेक्टर में कर रहा घुसने की कोशिश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौता जल्द होने के आसार जताए हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका, इंडोनेशिया की तर्ज पर भारत से जल्द ही व्यापार समझौता कर सकता है। ट्रंप का एक मकसद भारत के बाजार में अमेरिकी पहुँच को बढ़ाना भी है।

बहरीन के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा के साथ ओवल ऑफिस में बुधवार (16 जुलाई 2025) को हुई एक बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा, “अमेरिका भारत के साथ जल्द ही ट्रेड डील कर सकता है।” उन्होंने कुछ नए ट्रेड एग्रीमेंट्स की घोषणा करने की बात कही है।

व्यापार समझौते पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील इंडोनेशिया के साथ हुए करार के जैसा ही होगा। मंगलवार (15 जुलाई 2025) को अमेरिका ने इंडोनेशिया के साथ नए व्यापार समझौते की घोषणा की थी। इसके तहत इंडोनेशिया के सामानों पर अमेरिका में 19% टैरिफ लगेगा। इसके बदले मअमेरिकी वस्तुएँ इंडोनेशिया के बाजारों में अप्रतिबंधित और बिना टैरिफ के उपलब्ध होंगी। 

टर्ंप ने कहा, “हम बातचीत कर रहे हैं। सबसे अच्छा ट्रेड जो हम कर सकते हैं वो ये कि हमें एक पत्र भेजकर ये लिखना है कि आप 20, 25,30,35 फीसद का भुगतान करेंगे।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशिया ने अमेरिका से 50 बोइंग जेट, 15 अरब डॉलर (15000 करोड़ रुपए) की ऊर्जा खरीद, 4.5 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद खरीदने का करार किया है। इसी की तर्ज पर ट्रंप ने कहा, “भारत इंडोनेशिया की तरह ही काम कर रहा है। ट्रेड डील के साथ ही हमें भारत के बाजार में एंट्री मिलेगी। यहाँ अब तक हमारी पहुँच नहीं थी। अब हमें वहाँ टैरिफ के जरिए प्रवेश मिल रहा है।”

भारत के साथ ट्रेड डील के बीच में ट्रंप ने ‘शायद’ भी जोड़ा। उन्होंने कहा, “कल भी एक समझौता हुआ है। एक और समझौता होने वाला है.. शायद भारत के साथ।” ट्रंप ने आगे कहा कि हमने 100 अरब डॉलर (10 हजार करोड़) का निवेश किया है। अब तक ऑटोमोबाइल, स्टील समेत कुछ क्षेत्रों में हमने टैरिफ अब तक नहीं लगाए हैं।

गौरतलब है कि भारत से वाणिज्य मंत्रालय का एक दल अमेरिका के साथ टैरिफ और ट्रेड डील पर द्विपक्षीय वार्ता के लिए अमेरिका में है। इस बातचीत का एक उद्देश्य वाहन और कृषि संबंधी क्षेत्रों में व्यापार को लेकर आने वाली अड़चनों को समय पर दूर करना है।

अमेरिका भारत के डेयरी समेत कई बाजारों में अपनी पहुँच बनाने को लालायित है। हालाँकि अब तक भारत ने अमेरिका को उन क्षेत्रों में प्रवेश नहीं दिया है।