कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब/बुर्का विवाद (Hijab/Burqa Controversy) प्रतिबंधित होने के बावजूद यह राज्य में टकराव का मुद्दा बन गया और पूरे देश में विवाद का विषय बन गया। इस विवाद को कुछ इस्लामवादी और वामपंथी कथित बुद्धिजीवी इसे बहुत चालाकी से हिंदू-मुस्लिम विवाद बना रहे हैं। वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर में खुद को ऑडियंस एडिटर बताने वाली नाओमी बार्टन ने मंगलवार (15 फरवरी) को हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए इस मुद्दे को खुले तौर पर इस्तेमाल किया।
वायर की पत्रकार बार्टन ने ट्वीट किया, “यदि मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति एक हिंदू महिला से दुपट्टा लेने के लिए एकजुट हुए होते तो सड़कों पर खून बह गया होता। यह एक क्रूर अपमान है कि मुस्लिमों को असहाय होकर मुस्लिम महिलाओं के अपमान को प्रतिशोध के डर से देखने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”
If any Muslim community had come together to so much as take a dupatta from a Hindu woman there would be blood in the streets.
It is a particularly brutal humiliation that Muslims are forced to watch helplessly at the insult given to Muslim women for fear of retaliation.
बार्टन ने यह बेबुनियाद दावा करते हुए मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ हथियार उठाने के लिए उकसाने का प्रयास किया है। जाहिर है कि उसके पास हिंदुओं के प्रति नफरत के अलावा अपने हास्यास्पद दावों का समर्थन करने के लिए कोई सबूत या आधार नहीं है।
बार्टन उन तथाकथित उदारवादियों में से एक हैं, जो अपने हिंदू विरोधी एजेंडे को फैलाने के लिए पिछले महीने कर्नाटक में शुरू हुए हिजाब विवाद का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पहले ऑपइंडिया ने बताया था कि बॉलीवुड के जरिए मनोरंजन करने वाली स्वरा भास्कर ने कैसे हिजाब मुद्दे की तुलना महाभारत में द्रौपदी के चीर हरण से की थी।
तब कई चरमपंथी मुस्लिमों ने स्वरा भास्कर की इस बकवास टिप्पणी का समर्थन करते हुए दावा किया था कि भारतीय दर्शक की तरह हिजाब विवाद का आनंद ले रहे हैं। उन्होंने महाभारत से द्रौपदी वस्त्र हरण प्रकरण की कल्पना करके हिंदू संस्कृति का भी अपमान किया था। स्वरा भास्कर ने अक्सर इस्लामिक आतंकवादी की भाषा बोलती हैं और हिंदुओं का मजाक उड़ाने के लिए ‘गौ मुत्र’ का मजाक बनती हैं।
नाओमी बार्टन भी अतीत में खुले तौर पर हिंदुओं के प्रति अपनी नफरत को प्रदर्शित करने में शामिल रही हैं। उन्होंने कहा था कि हर हिंदू हनुमान चालीसा नहीं जानता। एक संदर्भ में बात करते हुए उन्होंने कहा था कि कुछ ‘जय श्रीराम’ कहकर और भी घृणा फैलाएँगे।
This is not a fake narrative, but yes, I fully agree with you.
Not every Hindu will know the Hanuman Chalisa.
Some will be even more disgusted by saying Jai Shri Ram than this Catholic girl is.
बार्टन की हिंदू विरोधी नफरत इतनी गहरी है कि एक बार वह एक प्यारे पिल्ला के एक हानिरहित वीडियो में ‘ब्राह्मणवाद’ को घुसेड़ दी थीं।
This is, ostensibly harmless and cute but says a lot about how the entire edifice on which Brahmanism is built is a construct, given how this is now a Hindu Upper Caste… Golden Retriever?
Also it is 2020. Get rescued dog, and don't contribute to awful puppy mills. https://t.co/KYRDBdNPeI
दरअसल, एक सोशल मीडिया यूजर ने अपने पालतू कुत्ते गोल्डन रिट्रीवर को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार घर में स्वागत करते हुए एक वीडियो ट्वीट किया था। इस वीडियो पर जवाब देते हुए कथित पत्रकार ने कहा था कि वीडियो प्यारा और हानिरहित लग रहा है, लेकिन वास्तव में यह दिखाता है कि ब्राह्मणवाद का निर्माण कैसे हुआ।
यहाँ तक कि उन्होंने गोल्डन रिट्रीवर प्रजाति के कुत्ते को ऊँची जाति का घोषित कर दिया। जाहिर है कि वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट से जुड़ी इस पत्रकार के लिए अपनी इच्छा के अनुसार पिल्लों का स्वागत करना ‘ब्राह्मणवाद’ है और इसकी जड़ें जातिवाद में हैं।
गुजरात के भावनगर में शिहोर नगरपालिका को पिछले हफ्ते शिहोर मेमन जमात द्वारा प्रबंधित कब्रिस्तान को तोड़कर बनाई गई सड़क को हटाने और कब्रिस्तान की पूर्व की स्थिति को बहाल करने का आदेश दिया गया था। गुजरात स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल ने नगरपालिका से कब्रों, गिरे हुए पेड़ों और शौचालय को कब्रिस्तान में उसकी मूल स्थिति में वापस लाने के लिए कहा।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिहोर नगरपालिका ने कब्रिस्तान के बाहरी हिस्से को तोड़कर ढांचागत विकास के तहत एक सड़क का निर्माण कराया था। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा है कि कब्रिस्तान की बहाली का खर्च विध्वंस करने वाले दो अधिकारियों से वसूल किया जाएगा।
ट्रिब्यूनल ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर 24 घंटे के भीतर सड़क नहीं हटाई गई तो बहाली का खर्च सरकारी निकाय के मुख्य अधिकारी द्वारा वहन किया जाएगा। 2 फरवरी को नगरपालिका ने शिहोर मेमन जमात को सड़क के लिए अपने कब्रिस्तान निर्माण के हिस्से को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था और उसके बाद उसे तोड़ दिया था।
तोड़फोड़ के बाद जमात ने दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। बाद में इसने दीवानी अदालत से मुकदमा वापस ले लिया और इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए गुजरात राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। नागरिक निकाय ने अपने तर्क में दावा किया कि जिस जमीन पर सड़क बनाई गई थी, वह कभी भी शिहोर मेमन जमात की नहीं थी। वहीं, शहर के सर्वेक्षण में कहा गया है कि जमीन एक कब्रिस्तान की है, जो कि वक्फ की है।
ट्रिब्यूनल ने SC के आदेश का हवाला देते हुए आगे कहा कि जमीन एक बार कब्रिस्तान बन जाती है तो हमेशा कब्रिस्तान रहती है। इसने बहाली पर नगर निकाय से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। इसके साथ ही सड़क को हटाने के बाद शहर की पुलिस से सुरक्षा देने को कहा गया है।
‘वक्फ’ का अर्थ मुस्लिम कानून द्वारा पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी भी उद्देश्य के लिए चल या अचल संपत्ति को इस्लाम को मानने वाले व्यक्ति द्वारा स्थायी समर्पण है। इसका मतलब यह है कि उपयोगकर्ता द्वारा किसी भी संपत्ति को बोर्ड के साथ पंजीकृत किया जा सकता है, ‘वक्फ’ बन जाता है और संपत्ति के मूल मालिक की मृत्यु होने पर भी ऐसा ही रहता है। कब्रिस्तान भी वक्फ के साथ पंजीकृत एक संपत्ति है।
ओडिशा पुलिस ने सोमवार (14 फरवरी 2022) को एक 54 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने 14 महिलाओं से शादी की और हर बार अपनी नकली पहचान और डॉक्यूमेंट्स पेश किया। इसके साथ ही उसने पैसों की ठगी भी की। आरोपित की पहचान रमेश चंद्र स्वैन उर्फ बिधू प्रकाश स्वैन या रमानी रंजन स्वैन के रूप में हुई है। वह ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में होम्योपैथी डॉक्टर है।
मामला तब सामने आया जब उसकी 14 पत्नियों में से एक ने अपने पति के खिलाफ महिला पुलिस स्टेशन में एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। महिला को जब पता चला कि उसके पति ने फर्जी पहचान बनाई और उसी चाल का इस्तेमाल करके कई महिलाओं को लूट लिया।
Briefing the media persons about the case, Bhubaneswar DCP Umashankar Dash said the man has been arrested from a rented accommodation in #Bhubaneswar based on a complaint filed by a woman school teacher of #NewDelhi at Mahila Thana in July last year. https://t.co/DddFlEFaIWpic.twitter.com/fPws7mKo0n
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिकायतकर्ता दिल्ली में एक स्कूल टीचर है और उसने आरोप लगाया है कि उन्होंने दिल्ली के आर्य समाज मंडल में शादी की। इसके बाद स्वैन उसे भुवनेश्वर लेकर आया। जाँच के दौरान, पुलिस और विशेष दस्ते ने पाया कि रमेश भुवनेश्वर, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद और दिल्ली सहित विभिन्न शहरों की 13 महिलाओं से पहले ही शादी कर चुका था।
उसने वैवाहिक वेबसाइटों पर हर बार फर्जी पहचान और आवासीय दस्तावेज, हाई प्रोफाइल पत्र और सरकारी दस्तावेज दिखाकर महिलाओं को ठगा था। पुलिस ने उसे 14 फरवरी को केंद्रपाड़ा जिले में किराए के मकान से गिरफ्तार किया था।
बैंकों को भी ठगा था
इसके अलावा रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रमेश ने पहली बार 1982 में शादी की और फिर 2002 से 2020 के बीच 13 महिलाओं से शादी की। पुलिस ने कहा, “रमेश डॉक्टर या सरकारी अधिकारी नहीं है। वह लोगों को धोखा देने के लिए अपने वाहन पर सरकारी कर्मचारी का स्टिकर लगाता था।” पुलिस ने कहा कि उसे पहले आंध्र प्रदेश पुलिस और केरल पुलिस ने 13 बैंकों से 1 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
भुवनेश्वर डीसीपी उमाशंकर दास ने मामले के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए आगे बताया कि रमेश का इरादा महिलाओं से पैसे लेने और संपत्ति हासिल करने का था। उन्होंने कहा, “वह अधेड़ उम्र की अविवाहित महिलाओं को निशाना बनाता था और पैसे लूटकर उन्हें छोड़ देता था। पीड़ितों में वकील, शिक्षक, डॉक्टर और उच्च शिक्षित महिलाएँ, जिनमें से ज्यादातर ओडिशा से बाहर के हैं।”
पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि रमेश ने पंजाब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की एक महिला अधिकारी से शादी की थी और उससे 10 लाख रुपए ठगे थे। इसके बाद उसने गुरुद्वारे को भी ठगा। उसने इलाके में अस्पताल बनाने का वादा करके 11 लाख रुपए में शादी कर ली।
रमेश ने कथित तौर पर पैसे के लिए मेडिकल छात्रों को भी धोखा दिया था। उन्हें हैदराबाद पुलिस ने तब गिरफ्तार किया था जब उन्होंने पाया कि रमेश ने छात्रों से एक मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का वादा करके लगभग 2 करोड़ रुपए ठगे थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने उसकी सभी पत्नियों से संपर्क किया है और घटनाक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने अब तक रमेश स्वैन के पास से 11 एटीएम कार्ड और 4 आधार कार्ड जब्त किए हैं। उस पर आईपीसी की धारा 498 (ए), 419, 468, 471 और 494 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
इतिहासकार विक्रम संपत ने विवादित लेखक ऑड्रे ट्रुश्के और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर सहित अन्य के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों और प्लेटफॉर्म पर उनके खिलाफ लगाए गए झूठे आरोपों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। दरअसल रविवार (13 फरवरी 2022) को ट्विटर पर एक पत्र वायरल हुआ था। इसमें भारतीय क्रांतिकारी वीर सावरकर को लेकर प्रसिद्ध इतिहासकार विक्रम संपत द्वारा दिए गए भाषण को लेकर ‘साहित्यिक चोरी’ (‘Plagiarism’) का आरोप लगाया गया था।
[BREAKING] Indian historian @vikramsampath is approaching the Delhi High Court against historians who wrote to The Royal Historical Society, Twitter Inc, and others for defamatory remarks made against him. Further details awaited. pic.twitter.com/G7xpSQazBa
संपत पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाने का प्रयास करने वाला पत्र अमेरिका में विश्वविद्यालयों के तीन प्रोफेसरों- अनन्या चक्रवर्ती, रोहित चोपड़ा और ऑड्रे ट्रुश्के द्वारा लिखा गया था। पत्र को रॉयल हिस्टोरिकल सोसाइटी, यूके को निर्देशित किया गया था। इसमें संपत के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया गया था। बता दें कि इतिहासकार संपत भी इसके सदस्य हैं।
उल्लेखनीय है कि साहित्यिक चोरी का मामला पहले से ही विफल हो गया था, क्योंकि उस दौरान यह पाया गया था कि विक्रम संपत ने पहले से ही उनके द्वारा लिखित सभी शैक्षणिक कार्यों में उचित हवाला और क्रेडिट दिए थे।
Savarkar-loving author & historian Vikram Sampath (@vikramsampath) caught in plagiarism row.
He is accused of plagiarizing work of scholars in his 2017 essay for India Foundation Journal and recently published two volume biography on Hindutva ideologue Savarkar. 1/2 https://t.co/OFUdSF3H1E
यह पहली बार नहीं है जब लेखक और इतिहासकार पर सावरकर पर उनके दो-खंडों के काम पर झूठे आरोप लगाकर हमला किया गया था। सावरकर की जीवनी लिखने पर विक्रम संपत को लगातार वामपंथी इतिहासकारों ने निशाना बनाया, उन्हें ट्रोल किया। इसके बावजूद ट्विटर ने उन पर किसी तरह की कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं समझी और संपत के खिलाफ हो रहे ऑनलाइन हमलों पर भी संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि ऑड्रे ट्रुशके और रोहित चोपड़ा पहले से ही ट्विटर पर फेक न्यूज और हिंदूफोबिया फैलाने के लिए जाने जाते हैं। रोहित चोपड़ा को ट्विटर पर अपनी नफरत फैलाने का खामियाजा भी भुगतना पड़ा। दिल्ली स्थित थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा 2020 में अपनी वेबसाइट से उनके निबंधों को हटाने का फैसला किया था।
ऑड्रे ट्रुश्के का विवाद औरंगजेब और मुगल तानाशाह के महिमामंडन से शुरू होता है। उनका हिंदूफोबिक समूहों के साथ रिश्ता जगजाहिर है। वह 2021 में आयोजित ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ (‘DismantlingGlobal Hindutva‘) सम्मेलन की प्राथमिक प्रतिभागियों में से एक थीं। अपने संदिग्ध ‘अकादमिक’ कार्यों के अलावा, उन्हें रटगर्स विश्वविद्यालय के हिंदू छात्रों को टारगेट करते हुए भी पाया गया था। उन्होंने परिसर में अपनी हिन्दुओं के प्रति नफरत की भावना को भी प्रदर्शित किया था।
वैलेंटाइन डे के मौके पर पाकिस्तान के कॉलेजों और विभिन्न यूनिवर्सिटी को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए गए। इसी क्रम में लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर बताया गया कि उन्होंने 14 फरवरी को ‘हया दिवस’ मनाने का ऐलान किया है। साथ ही लड़कियों को काला बुर्का और लड़कों को तबलीगियों वाली नमाजी टोपी पहनने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ यूनिवर्सिटी ने छात्र-छात्राओं से 100 मीटर दूरी बनाए रखने को भी कहा।
पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर फैली इस हैरान करने वाली खबर पर अब यूनिवर्सिटी ने अपना पक्ष रखा है। यूनिवर्सिटी का दावा है कि जिस पत्र में 14 फरवरी को ‘हया दिवस’ मनाने की बात कही गई थी, लड़कियों को बुर्के और लड़कों को नमाजी टोपी में आने को कहा गया था, वो पत्र उनका नहीं है। इस संबंध में पीयू कुलपति प्रोफेसर डॉ नियाज अहमद अख्तर ने भी जानकारी दी और स्पष्ट किया कि ये फेक नोटिफिकेशन है, यूनिवर्सिटी ने इसे जारी नहीं किया।
बता दें कि जैसे लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर जानकारी सोशल मीडिया पर जगह-जगह वायरल हुई। वैसी ही खबर कल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक मेडिकल कॉलेज से आई थी। जहाँ वैलेंटाइन डे पर दिशानिर्देश जारी करके लड़कियों से वैलेंटाइन डे के दिन हिजाब (बुर्का) पहनने और लड़कों को नमाज वाली सफेद टोपी पहनने के लिए कहा गया था। इसके अलावा लड़कों को लड़कियों से दो मीटर की दूरी बनाए रखने के भी निर्देश दिए थे।
नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई थी कि इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले विद्यार्थियों को पकड़ने के लिए कॉलेज स्टॉफ के सदस्य परिसर में गश्त करेंगे। जो भी लोग इन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएँगे, उन पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। कॉलेज के सर्कुलर के हवाले से खबर में कहा गया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
कुवैद-ए-इजाम यूनिवर्सिटी
दिलचस्प बात ये है कि सिर्फ मेडिकल कॉलेज ही नहीं, इस्लामाबाद की कुवैद-ए-इजाम यूनिवर्सिटी को लेकर भी कहा गया कि कॉलेज ने 14 फरवरी को हया दिवस मनाने का ऐलान किया और उक्त नियम अपने छात्र-छात्राओं के लिए भी बनाए। बस यहाँ जुर्माना राशि 3000 पाकिस्तानी रुपया है।
पेशावर यूनिवर्सिटी
पेशावर यूनिवर्सिटी ने तो 14 फरवरी को छुट्टी ही घोषित कर दी है। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी ने एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें 5 फरवरी (पाकिस्तान के हिसाब से कश्मीर दिवस) के नाम पर 14 फरवरी को छुट्टी दी गई।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पाकिस्तान की लगभग हर यूनिवर्सिटी ने ऐसा नोटिस जारी किया था और सोशल मीडिया यूजर्स इन्हें शेयर करके इनके पक्ष और विरोध की बहस में उलझे दिखे थे। इनमें से पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर तो बयान आ गया लेकिन बाकी यूनिवर्सिटी के सर्कुलर पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं है। कई मीडिया पोर्टल्स पर इस संबंध में खबर भी प्रकाशित है।
कर्नाटक में चल रहे बुर्का विवाद (Hijab Controversy) पर हाईकोर्ट में याचिकाएँ दायर की गई है। इन याचिकाओं में शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती दी गई है। मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की 3 जजों की फुल बेंच आज मंगलवार, (15 फरवरी, 2022) को सुनवाई की।
कर्नाटक हिजाब मामले में मंगलवार को भी हाईकोर्ट से कोई फैसला नहीं हो पाया। बेंच ने सुनवाई 16 फरवरी तक बढ़ा दी है। हालाँकि, इससे पहले देवदत्त कामत ने कहा था कि सुनवाई मार्च के बाद करें, क्योंकि इस हिजाब विवाद का चुनाव में फायदा लेने की कोशिश हो रही है। इस पर बेंच ने कहा कि ये चुनाव आयोग से जुड़ा मामला है हमसे जुड़ा नहीं।
याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने भारत के संविधान का कन्नड़ में आधिकारिक अनुवाद बेंच के सामने रखा। दक्षिण अफ्रीका के नोज पिन केस का हवाला देते हुए कहा, ” दक्षिण अफ्रीका में 2004 के सुनाली पिल्ले बनाम डरबन गर्ल्स हाई स्कूल केस का जिक्र किया। जहाँ स्कूल ने लड़कियों को नाक में नथ पहनने की अनुमति नहीं दी थी। स्कूल का तर्क था कि यह स्कूल के कोड ऑफ कंडक्ट के खिलाफ है।”
Sr advocate Kamat, for petitioner, refers to a judgment of a South Africa court. Issue was whether a Hindu girl with roots in South India could wear nose ring in school
He refers to the judgement which says that this case is not about uniforms,but exemptions to existing uniforms
हाई कोर्ट में सीनियर वकील देवदत्त कामत (Devdutt Kamat) ने कुंडापुरा कॉलेज के दो स्टूडेंटस की अर्जी पर पैरवी करते हुए कहा कि सिर पर स्कार्फ लगाने से शांति व्यवस्था को कोई नुकसान नहीं हो सकता। वहीं हाई कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार से ही राज्य में स्कूल-कॉलेज खोल दिए गए हैं। हाई कोर्ट ने अगले आदेश तक राज्य के स्कूल-कॉलेजों में हर तरह के धार्मिक पोशाक पर रोक लगाई है। लेकिन अभी भी मुस्लिम छात्राओं के हिजाब में कॉलेज आने से कुछ छिटपुट विवाद भी जारी है। वहीं कोर्ट कल भी इस मामले पर सुनवाई करेगा।
Senior advocate Devadatt Kamat says – our Constitution follows positive secularism, not like Turkish secularism, that is negative secularism. He says – our secularism ensures that everyone's religious rights are preserved.
अधिवक्ता का उल्लेख है कि न्यायालय का अंतरिम आदेश केवल उन महाविद्यालयों के लिए है जिनके पास यूनिफॉर्म है। लेकिन इसके बावजूद मुस्लिम लड़कियों को उन कॉलेजों में भी हिजाब हटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है जिनके पास यूनिफॉर्म नहीं है।
Senior advocate Devadatt Kamat says – our Constitution follows positive secularism, not like Turkish secularism, that is negative secularism. He says – our secularism ensures that everyone's religious rights are preserved.
सीजे अवस्थी: स्पष्टीकरण के लिए एक आवेदन दायर करें।
एडवोकेट मोहम्मद ताहिर: अदालत के आदेश का दुरुपयोग हो रहा है। मुस्लिम छात्राओं से जबरन हिजाब उतरवाया जा रहा है। गुलबर्गा के एक उर्दू स्कूल में अधिकारियों ने शिक्षकों और मुस्लिम छात्राओं पर जोर-जबरदस्ती डालते हुए हिजाब उतारने को कहा। अधिकारियों की ओर से हाई कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल हो रहा है। मैंने सारी मीडिया रिपोर्ट को कोर्ट में पेश कर दिया है।
चीफ जस्टिस: हम इस पर सभी की राय जानने के बाद निर्देश जारी करेंगे। एडवोकेट जनरल- हलफनामा स्पष्ट नहीं है। वे उचित अप्लीकेशन लेकर आएँ फिर हम जवाब देंगे। हलफनामा किसी याचिकाकर्ता की ओर से नहीं फाइल किया गया है।
देवदत्त कामत- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार यदि कोई धार्मिक प्रथा घृणित है तो राज्य सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य या नैतिकता के आधार पर उसे रोक सकता है। लेकिन यह मामला अलग है। सिर पर स्कार्फ पहनने से कोई नुकसान नहीं हो सकता। कर्नाटक शिक्षा अधिनियम में संविधान की धारा 25 के तहत गारंटीकृत अधिकारों पर अंकुश लगाने का कोई इरादा नहीं था। ड्रेस कोड पर 5 फरवरी का सार्वजनिक आदेश औचित्यहीन है, जो हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करता है।
देवदत्त कामत- राज्य का कहना है कि सरकारी आदेश में शब्द सार्वजनिक सुव्यवस्ते का अर्थ सार्वजनिक व्यवस्था नहीं है। संविधान का आधिकारिक कन्नड़ अनुवाद सार्वजनिक व्यवस्था के लिए सार्वजनिक सुव्यवस्थ शब्द का उपयोग करता है। मुझे आश्चर्य है कि राज्य ने यह तर्क दिया।
जस्टिस कृष्ण दीक्षित- एक सरकारी आदेश में इस्तेमाल किए गए शब्दों को एक कानून के शब्दों की तरह नहीं पढ़ा जा सकता है।
देवदत्त कामत- मैं आदरपूर्वक मानता हूँ कि सरकारी आदेश में लिखे गए सार्वजनिक सुव्यवस्थ का दो अर्थ नहीं बनता है और इसका मतलब सार्वजनिक व्यवस्था ही है।
कामत ने अपनी दलीलों में कहा, “शिक्षा अधिनियम में किसी छात्र को ड्रेस का पालन नहीं करने पर निष्कासित करने का कोई प्रावधान नहीं है। यदि आपको एक अतिरिक्त पोशाक के लिए निष्कासित कर दिया जाता है, तो आनुपातिकता का सिद्धांत आ जाएगा। यह सिर पर दुपट्टा डालने और ड्रेस न बदलने की एक अहानिकर प्रथा है। यह भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक पहलू है। यदि सिर पर स्कार्फ पहनने के लिए छोटी छूट दी जाती है, तो यह वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अनुरूप होगा।”
कामत ने कहा: राज्य का कहना है कि हम एक धर्मनिरपेक्ष राज्य हैं, हम तुर्की के सैनिक नहीं हैं। हमारा संविधान सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता प्रदान करता है और सभी धर्मों को मान्यता दी जानी चाहिए। अगर राज्य कहता है कि अगर कोई सिर पर दुपट्टा पहनता है और इससे गलता होगा, तो हम इसकी अनुमति नहीं दे सकते, यह एक अनुचित तर्क है।
कामत ने न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ द्वारा लिखित उच्चतम न्यायालय के फैसले का उदाहरण दिया जिसमें बढ़ती असहिष्णुता के बारे में उल्लेख किया गया है। कामत ने कहा, “राज्य एक सरल तर्क नहीं दे सकता है कि सार्वजनिक व्यवस्था बाधित है और उसे अधिकारों का आनंद लेने के लिए एक सकारात्मक वातावरण बनाना है।” जैसे ही कामत ने कहा कि वह कनाडा के फैसले का हवाला देना चाहते हैं।
चीफ जस्टिस: ये निर्णय इस मामले के मुद्दों के लिए कैसे प्रासंगिक हैं? हम अपने संविधान का पालन करते हैं।
कामत ने अब बताया कि कैसे साउथ अफ्रीका के कोर्ट ने स्कूल के इस तर्क को खारिज कर दिया कि नाक-स्टड की अनुमति देने से शरीर-छेदने और अन्य भयानक परेड के दावों की अनुमति मिल जाएगी। कोर्ट ने कहा कि स्कूल अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को समझने में विफल रहा है और उनका अनादर है।
गौरतलब है कि सुनवाई से पहले अदालत ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि मीडिया को ऐसे संवेदनशील विषय पर और जिम्मेदार बनने की जरूरत है। कल सोमवार को भी हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष कहा कि हिजाब पर प्रतिबंध को लेकर दिया गया सरकारी आदेश दिमाग का गैर-उपयोग है। उनका कहना था कि यह सरकारी आदेश अनुच्छेद-25 के तहत है और यह कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। हिजाब की अनुमति है या नहीं, यह तय करने के लिए कॉलेज कमेटी का प्रतिनिधिमंडल पूरी तरह से अवैध है।
वहीं, सुनवाई के दौरान एक वकील ने अपने आवेदन में इस मुद्दे पर मीडिया और सोशल मीडिया टिप्पणियों को प्रतिबंधित करने के लिए कहा क्योंकि अन्य राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। इस पर कर्नाटक हाइकोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग इस पर कंसीडर करता है तो हम इस मुद्दे पर विचार कर सकते हैं।
बता दें कि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मीडिया से हिजाब मामले में बढ़ते विरोध को देखते हुए जिम्मेदार होने का अनुरोध किया है। वकील सुभाष झा का कहना है कि उनका अनुरोध है कि सभी पक्षों को अपने सबमिशन को नियम पुस्तिका में सीमित करना चाहिए और सांप्रदायिक रंग नहीं देना चाहिए। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने याचिकाकर्ता की दलीलों की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि सरकार का आदेश कानून की जरूरतों को पूरा किए बिना प्रयोग किया गया है। ये अनुच्छेद 25 के मूल में हैं और ये कानूनी रूप से टिकने वाला नहीं है।
रॉयटर्स के पत्रकार आदित्य कालरा ने 13 फरवरी को ट्विटर पर बताया कि धनी ऐप ने उनके नाम पर लोन दिया है, जिसके लिए उन्होंने आवेदन नहीं दिया था। अपने ट्वीट में कालरा ने बताया कि इंडियाबुल्स की तत्काल लोन देने वाले ऐप धनी से उनके पैन नंबर का प्रयोग कर लोन लिया गया है। कालरा ने कहा, “मेरी क्रेडिट रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा। आईवीएल फाइनेंस (इंडियाबुल्स) धनी द्वारा मेरे पैन नंबर और नाम पर उत्तर प्रदेश और बिहार में लोन दिए। इसके बारे में मुझे कुछ पता नहीं। मेरे नाम और पैन पर लोन कैसे दिया जा सकता है।”
Shocking revelation in my credit report. A loan disbursed by IVL Finance (Indiabulls) @dhanicares with my PAN number & name, addresses in Uttar Pradesh and Bihar. I have no clue. How can a disbursal happen on my name and PAN. In default already @RBI@IncomeTaxIndia@nsitharamanpic.twitter.com/LMMrwKyeit
कालरा ने सिबिल रिपोर्ट से कर्ज की जानकारी का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। दस्तावेजों के अनुसार, लोन दी गई राशि 1,000 रुपये है और इसे 14 नवंबर 2021 को स्वीकृत किया गया था। ऋण लेने वाले व्यक्ति ने ऋण नहीं चुकाया।
कालरा अकेले व्यक्ति नहीं हैं, जिनके नाम पर लोन दिया गया और वे इससे अनजान रहे। कालरा ने स्कैमर्स द्वारा ठगे गए कई लोगों के ट्वीट साझा किए। ऐसा लगता है कि हर मामले में स्कैमर्स ने बेहद छोटे लोन लेने के लिए पैन के डिटेल का उपयोग किया।
More from others with credit report photos. Same case. Loan disbursed to someone who submitted someone else’s PAN and name. Then default starts. Scary bad loans ticking bomb, fraud and more. @RBI@dhanicares@IncomeTaxIndiahttps://t.co/xX5X5XQ5rO
कालरा ने ऋण लेने के बाद से अपने क्रेडिट स्कोर में उतार-चढ़ाव का एक स्क्रीनशॉट साझा किया। अगस्त 2021 में उनका क्रेडिट स्कोर 801 था, जो दिसंबर 2021 में गिरकर 666 हो गया। यह जनवरी में यह फिर से रिवाइव हो गया। संभवतः इस क्रेडिट लाइन पर अन्य गतिविधियाँ होने के कारण ऐसा हुआ।
Oops. Another big one. Dhani representatives have now told me on phone that amount of loan was tranferred to fraudster’s Dhani wallet who gave an incorrect Aadhar number, but used my name and PAN! https://t.co/PD7OVJXRR4
ध्यान देने वाली बात यह है कि ऐसे मामलों में यदि धनी या वित्तीय संस्थान जल्द कार्रवाई नहीं करते हैं तो पीड़ित के क्रेडिट स्कोर पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा। जालसाज एक पैसा भी वापस नहीं देता, इसलिए पीड़ित व्यक्ति को ऋण लेने में भविष्य में परेशानी होगी। जब भी वह ऋण लेने की कोशिश करेगा तो मामला सामने आएगा और उसकी प्रतिष्ठा को चोट पहुँचेगी।
जाँच के दौरान ऑपइंडिया को ऐसे कई मामले मिले। कथित ऋण धोखाधड़ी के पीड़ितों में से एक ऋषभ बबुता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि वह पिछले तीन महीनों से इस संकट से बाहर निकलने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। एनआरआई (मर्चेंट नेवी ऑफिसर) बबुता ने कहा, “चूँकि मैं एक एनआरआई हूँ, इसलिए कोई भी बैंक या संस्थान मुझे बिना गिरवी या ओवरड्राफ्ट खाते के ऋण या कार्ड जारी नहीं कर सकते। नियमों के बावजूद धनी द्वारा लोन दिया गया और मैं समस्या में फँस गया हूँ।”
@FinMinIndia There is a new scam brewing at @dhanicares / @ibhomeloans – They are issuing loans without verification of PAN There are others like me, who never took these loans and are affected by them for non-payment. No one is listening today as this is not a Scam of Crores YET
बबुता को इस घोटाले के बारे में नवंबर 2021 में पता चला। उन्होंने बताया कि उनके नाम पर एक हजार और दो हजार रुपये के दो कर्ज लिए गए। इन लोन का भुगतान न करने के कारण जुर्माने सहित कुल देय राशि 12,000 रुपये हो गई। उन्होंने जाँच की कि कहीं CIBIL रिपोर्ट में कोई त्रुटि तो नहीं है। 27 दिसंबर को एक बार जब उन्हें यकीन हो गया कि सिबिल की ओर से कोई मुद्दा नहीं है तो उन्होंने धनी से संपर्क किया।
बबुता द्वारा धनी को भेजा गया इमेल
बबुता समेत हर मामले में धनी ने शिकायत का जवाब तो दिया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं बताया। उन्होंने कहा, “धनी ने इस धोखाधड़ी का समाधान नहीं किया है। मैं अभी भी समाधान खोजने की कोशिश कर रहा हूँ। मैं उनकी धोखाधड़ी टीम के संपर्क में हूँ, जिन्होंने मुझे अपने मूल दस्तावेज भेजने के लिए मजबूर किया, लेकिन समाधान फिर भी नहीं कर पाए।”
इससे ये बात साबित होती है कि धनी ने पैन को सत्यापित नहीं किया, अन्यथा लोन स्वीकृत नहीं होता। बबुता ने इस मामले की शिकायत साइबर क्राइम यूनिट, आयकर विभाग, सिबिल और आरबीआई से की, लेकिन अभी भी उन्हें समाधान का इंतजार है। उन्होंने कहा, “मैंने 14 जनवरी को साइबर अपराध अधिकारी के साथ डिटेल साझा किया था। साइबर सेल के नेशनल अकाउंट से एक पुष्टिकरण ईमेल मिला, लेकिन उनकी तरफ से आज तक कोई कॉल या जवाब नहीं आया।”
अंदरूनी लोगों के शामिल होने की आशंका
ऑपइंडिया से बात करते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) गुरु प्रसाद ने कहा, “इस तरह की धोखाधड़ी से प्रभावित क्रेडिट स्कोर को जाँच पूरी होने के बाद ही ठीक किया जा सकता है। संभावित धोखाधड़ी के बारे में जानने के बाद पीड़ित को सबसे पहले बैंक को सूचित और पुलिस में शिकायत दर्ज करानी है। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने का कोई आसान तरीका नहीं है।” उन्होंने कहा, “कंपनी के अंदर से कर्ज बाँटने वाले की जब तक संलिप्तता नहीं होगी, तब तक इस तरह की धोखाधड़ी संभव नहीं है।”
लोन देने वाली कंपनियाँ पैन को सत्यापित नहीं करतीं
विशेषज्ञों के अनुसार, ये ऋण कंपनियां जिस कार्यप्रणाली का पालन कर रही हैं, उसमें समस्या है। V2Technosys के सीईओ विनय मुरारका ने कहा, “बैंकों के साथ एक ऐसा तंत्र है जिसका उन्हें ऋण देते समय पालन करना चाहिए। जब आप ऋण के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक दस्तावेजों को प्रमाणित करता है और उसके बाद ही आपको ऋण देता है। धानी ऐप में क्या हो रहा है, ऐसे मामलों में कंपनी दस्तावेजों को प्रमाणित नहीं कर रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि ऋण को पैन कार्ड से जुड़े खाते में वितरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “पैन कार्ड से जुड़े बैंक खाते में पैन कार्ड और बैंक खाते में उल्लिखित मिलान विवरण के साथ ऋण का वितरण किया जाना चाहिए। साथ ही, कंपनियों को ऋण देने से पहले आधार प्रमाणीकरण करना होगा। यह स्पष्ट रूप से ऋण कंपनी की गलती है क्योंकि वे ऋण देने से पहले दस्तावेजों को प्रमाणित नहीं कर रहे हैं।”
सिबिल स्कोर पर इसके पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “पीड़ित के लिए अदालत में लड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। यदि आप पीड़ित हैं तो पुलिस में शिकायत दर्ज करें, अधिकारियों को सूचित करें और कंपनी के खिलाफ अदालत में मामला दर्ज करें।” उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि सिबिल भी इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, “सिबिल को धनी के खिलाफ कई शिकायतें मिली होंगी। मुझे आश्चर्य है कि वे अभी भी इन कंपनियों को इसमें शामिल कर रहे हैं और पीड़ितों के सिबिल स्कोर में जानकारी जोड़ रहे हैं। यही हाल आरबीआई का भी है। उन्हें अब तक कंपनी के ऑपरेशन को निलंबित कर देना चाहिए था।”
विशेषज्ञों का मानना है कि धनी ऐप के हर छह डाउनलोड में से एक फ्रॉड से लिंक्ड है। कैशलेस कंज्यूमर के श्रीकांत लक्ष्मणन ने कथित धोखाधड़ी के तकनीकी पहलू के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि धनी अपने उपयोगकर्ताओं को लोन देेने के लिए पैन के रैंडम कलेक्शन का उपयोग करता है। उनके पास 75 मिलियन इंस्टाल हैं और आशंका है कि 6 में से 1 का पैन इस फर्जी क्रेडिट लाइन का शिकार हो सकता है।”
So @dhanicares uses random collection of PAN to give its users credit on their wallet.
उन्होंने आगे कई ट्वीट साझा किए, जहाँ तथाकथित तकनीकी विशेषज्ञों ने रैंडम पैन नंबरों का उपयोग करके दस्तावेजों के बिना धनी ऐप में मुफ्त रिचार्ज कैसे प्राप्त करें को लेकर विस्तृत वीडियो साझा किए थे। उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो को लाखों व्यूज मिल चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 2020 से ऐसी गतिविधियाँ हो रही हैं, जो ट्वीट्स से देखी जा सकती हैं, लेकिन धनी या किसी सरकारी एजेंसी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
For a Rs. 30 recharge, someone can enter random PAN and you might be lucky one! pic.twitter.com/wd56ptragq
ऑपइंडिया से बात करते हुए श्रीकांत ने कहा, “हम इस तरह के घोटालों से बचने के लिए विभिन्न उपायों की बात कर सकते हैं, लेकिन हमें धनी से स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। शिकायतों को देखकर यह व्यक्तिगत श्रेणी का धोखाधड़ी नहीं, बल्कि धनी की जानकारी/गैर-जानकारी वाली एक एक संगठित अपराध हैं।”
धनी ने शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं की या ऋणों को देने वाली अपनी कार्य-प्रणाली में बदलाव नहीं किया, इस पर उन्होंने कहा, “डिजिटल ऋण उद्योग में हालिया ट्रेंड आधार या पैन आधारित ई-केवाईसी के अलावा वीडियो केवाईसी (विशेष रूप से कोविड के बाद) का भी चलन है। ज्यादातर ऐप आईडी प्रूफ का ओसीआर वेरिफिकेशन करते हैं। कुछ तो आईडी प्रूफ के साथ सेल्फी लेने के लिए भी कहते हैं। इस मामले में निश्चित रूप से ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने शायद आईडी का सिर्फ एक इनपुट लिया था।”
उन्होंने आगे सभी से ऐसी स्थितियों से बचने के लिए पैन और आधार की जानकारी साझा नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “सरकार को किसी भी लिंकिंग जनादेश की माँग करने से पहले डेटा संरक्षण कानून लाना चाहिए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। पैन-आधार लिंकेज इस 31 मार्च को होने वाला है। श्रीकांत ने इस तरह की धोखाधड़ी पर रोक लगाने और ऐसे सभी अज्ञात ऋणों को हटाने के लिए क्रेडिट रिपोर्ट की जाँच करते रहने पर भी जोर दिया।
यदि आप धोखाधड़ी बन गए तो आपको क्या करना चाहिए
सबसे पहले आपको अपनी CIBIL रिपोर्ट को नियमित रूप से जाँच करना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई धोखाधड़ी गतिविधि हुई है या नहीं। आप या तो शुल्क का भुगतान करके CIBIL.com पर चेक कर सकते हैं या आप इसे एक्सपीरियन जैसे सेवा प्रदाताओं के साथ मुफ्त में देख सकते हैं।
यदि आप पीड़ित हैं तो विशेषज्ञों का सुझाव है कि आपको निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
धोखाधड़ी के बारे में तुरंत बैंक या वित्तीय संस्थान को सूचित करें। उनकी आधिकारिक मेल आईडी पर ईमेल लिखकर या पंजीकृत कार्यालय में शिकायत दर्ज करें। शिकायत की एक प्रति अपने पास रखें और एकनॉलेजमेंट नंबर को भविष्य के लिए सुरक्षित रखें। धोखाधड़ी के बारे में आपके पास मौजूद सभी विवरण इसमें शामिल करें।
सभी दस्तावेज एकत्र करें और पुलिस में शिकायत दर्ज करें। अपने पास FIR की कॉपी जरू रखें।
एफआईआर की कॉपी बैंक या वित्तीय संस्थान में जमा करें, ताकि उन्हें कानूनी कार्यवाही के बारे में जानकारी हो।
वित्तीय संस्थान द्वारा कोई कार्रवाई शुरू करने और अदालत में शिकायत दर्ज करने की प्रतीक्षा न करें। विशेषज्ञों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ना ही एकमात्र रास्ता है।एक उपभोक्ता के रूप में आप या तो उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज कर सकते हैं या आप बैंक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर सकते हैं। शिकायत दर्ज करने के लिए किसी वकील से सलाह लें।
मामले में कोई प्रगति हुई है या नहीं, यह जानने के लिए नियमित रूप से बैंक और पुलिस के संपर्क में रहें।
इस समय पीड़ित केवल यही कर सकता है कि वह इसे कानूनी रूप से अदालत में लड़े।
ऑपइंडिया ने ईमेल के जरिए धानी से संपर्क किया। जब तक यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई, हमें उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। हम मामले को लेकर कई विशेषज्ञों से भी बातचीत कर रहे हैं। अधिक जानकारी मिलने पर हम कहानी को अपडेट करेंगे।
बीजेपी नेताओं को जेल भेजने की धमकी देने वाले शिवसेना नेता संजय राउत आज (15 फरवरी 2022) प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आपा खो बैठे और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर डाला। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना कभी भी उन लोगों से नहीं डरती जो लोग नामर्दों की तरह वार करते हैं। बालासाहेब ठाकरे के नाम पर राउत ने कहा, “अगर तुमने कोई पाप नहीं किया है, अगर तुम्हारा मन साफ है तो किसी के बाप से मत डरो। आज के इस पत्रकार परिषद से हम संदेश देना चाहते हैं कि महाराष्ट्र गा^%* की औलाद नहीं है। मराठी मानुस ईमानदार है और हम आपसे डरने वाले नहीं हैं।”
बीबीसी द्वारा साझा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस की वीडियो में 7 मिनट के बाद राउत के मुँह से गालियों को सुना जा सकता है। इस कॉन्फ्रेंस में राउत ने केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर अपना गुस्सा निकाला। वह बोले, “पिछले कई दिनों से शिवसेना, ठाकरे परिवार, आनंदराव अडसुल, रविंद्र वायकर, अनिल परब, भावना गवली, एनसीपी प्रमुख शरद पवार के परिवार समेत कई लोगों पर केंद्रीय एजेंसियों का हमला हो रहा है। यह चिंता की बात है।”
सरकार गिराए जाने की बात से बौखलाए राउत ने बंगाल और महाराष्ट्र की स्थिति की तुलना की। बीजेपी पर निशाना साधने के लिए उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र की सरकार उन्हें गिरानी है और इसलिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। झूठे आरोप लगाकर दबाव देने की कोशिश हो रही है।” राउत ने कहा कि कुछ बीजेपी नेताओं की ओर से उनको सरकार गिराने की तारीख दी जा रही है। वह पूछते हैं कि बीजेपी नेताओं ने कहा कि 10 मार्च को यह सरकार गिरेगी, ये बात उन्होंने किस आधार पर कही है।
वैंकया नायडू को लिखा पत्र, बीजेपी नेता को गाली
कॉन्फ्रेंस में राउत ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में वैंकया नायडू को पत्र लिखा है। उन्होंने दावा किया कि 20 दिन पहले बीजेपी के कुछ प्रमुख लोग उन्हें 3 बार मिले और बार-बार यह बताना चाहा कि वो इस सरकार से निकल जाएँ क्योंकि राष्ट्रपति शासन आने वाला है। राउत ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं ने उनसे कहा था कि अगर वो साथ नहीं देते, मदद नहीं करते तो केंद्रीय एजेंसियों से उन्हें टाइट करवाया जाएगा। राउत ने कॉन्फ्रेंस में बिन किसी भाजपा नेता का नाम लिए कहा, “मैं उन लोगों का नाम अभी नहीं ले रहा, भविष्य में लूँगा। उनसे मैंने कह दिया है कि ठाकरे सरकार को कुछ नहीं होगा। आप देखिए, उसी समय पवार परिवार पर भी दबाव बनाया जा रहा है।”
बाला साहेब ठाकरे का नाम लेकर राउत ने कहा कि उन्होंने शिवसेना को झुकना नहीं सिखाया। राउत बोले, “मुझपर दबाव बनाने के लिए बार बार मेरे परिवार पर प्रेशर बनाया गया। मराठी मानुस को यह कोई काम नहीं करने देना चाहते। मेरे बच्चों को फोन करके कहा गया कि ईडी कल सुबह 4 बजे तुम्हारे घर आएगी और तुम्हारे पिता को अरेस्ट करेगी। ऐसी राजनीति कभी महाराष्ट्र में नहीं हुई लेकिन अब बीजेपी कर रही है। पिछले कुछ सालों से शिवसेना और उद्धव ठाकरे पर लगातार हमला हो रहा है।” अपनी कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने भाजपा नेता किरीट सोमैया को दलाल तक कहा और कहा कि जो सोमैया ने ठाकरे परिवार के अलीबाग में 19 बंगले होने के आरोप लगाए हैं, अगर वहाँ जाकर वो झूठे निकले तो वो राजनीति छोड़ देंगे और उस ‘दलाल’ को चप्पल से मारेंगे।
जब कंगना रनौत को कहा ‘हरामखोर’
यह पहला मौका नहीं है जब शिवसेना सांसद ने सार्वजनिक तौर पर इतनी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया हो। सितंबर 2020 में उन्होंने अभिनेत्री कंगना रनौत को ‘हरामखोर’ तक कह दिया था। राउत ने कहा था, “क्या होता है कानून? उस लड़की ने जिस तरह से बात किया, क्या वह कानून के लिए सम्मान था? आप क्या उस ‘हरामखोर’ लड़की की वकीली कर रहे हैं। जिसने शिवाजी महाराज का अपमान किया, जिसने महाराष्ट्र का अपमान किया है, आपका चैनल उसकी तरफदारी कर रहा है।” हालॉंकि विवाद बढ़ने पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि कंगना रनौत को हरामखोर इसलिए बोला था, क्योंकि इसके मायने महाराष्ट्र में अलग हैं। राउत ने कहा था, “मेरा हरामखोर कहने से वो मतलब नहीं था। हमारे महाराष्ट्र में ‘तू हरामखोर है’ का मतलब है कि नॉटी है, बेईमान है। कंगना दोनों है। मेरे हिसाब से वे नॉटी गर्ल हैं। मैंने देखा है कि वो मजा-मजाक करती हैं। और कोई भी लड़की मुंबई में रहती है, अगर देश के साथ ऐसा करती है। तो मैं कहता हूँ कि वो बेईमान है।”
केंद्रीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दक्षिण मुंबई में 10 ठिकानों पर छापेमारी की। जानकारी के मुताबिक ईडी ने दाऊद इब्राहिम की दिवंगत बहन हसीना पारकर और भाई इकबाल कासकर के आवासों सहित मुंबई में 9 और ठाणे में 1 जगहों पर छापे मारे हैं।
Enforcement Directorate (ED) is carrying out searches at several places linked to the people associated with the underworld, in Mumbai in a money laundering case: Sources
दिलचस्प बात यह है कि कई न्यूज सोर्स ने बताया है कि चल रही छापेमारी में महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ राजनेता से संबंधित एक प्रॉपर्टी डील की जाँच भी शामिल है। बताया गया कि दाऊद के एक सहयोगी के साथ कथित तौर पर सौदा करने वाला एक स्थानीय राजनेता भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की जाँच के दायरे में है। उसकी भी जाँच की जा रही है।
मराठी समाचार एजेंसी एबीपी माझा ने बताया कि ईडी की जाँच मुख्य रूप से हसीना और इकबाल द्वारा महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ राजनेता के साथ किए गए सौदों की जाँच पर आधारित है। ईडी आगे की जाँच के लिए आने वाले दिनों में इकबाल कासकर को हिरासत में ले सकती है। इकबाल फिलहाल जेल में है।
Mumbai: ED officials opened the sealed residence of Dawood Ibrahim’s sister Haseena Parkar and conducted a search inside the house.
हाल ही में, ईडी ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज एक FIR के आधार पर भगोड़े दाऊद इब्राहिम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। ईडी ने जिन परिसरों पर छापा मारा, उनमें से कुछ नागपाड़ा इलाके में हैं जो कभी दाऊद का गढ़ हुआ करता था।
ईडी कथित तौर पर हवाला एंगल की भी जाँच कर रहा है, जिसके माध्यम से दाऊद ने आतंकवाद फैलाने, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने और भारत में धार्मिक समूहों के बीच दरार पैदा करने के लिए अपने अवैध धन का इस्तेमाल किया। दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है।
फडणवीस के आरोप के बाद ED की जाँच?
इससे पहले नवंबर 2021 में, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि उनके पास एनसीपी के मौजूदा मंत्री नवाब मलिक और उनके परिवार के खिलाफ सबूत हैं, जो 2005 में मुंबई 1993 बम धमाकों के दोषियों के साथ लैंड डील में शामिल थे। फडणवीस ने बताया कि मलिक और उनके परिवार ने कंपनी ‘सॉलिडस’ के नाम पर मुंबई के कुर्ला में मालिक सरदार शाह वली खान और सलीम पटेल से जमीन खरीदी थी।
Another person is Mohammad Salim Ishaq Patel alias Salim Patel as he’s known – front man of Haseena Parker. He was arrested in 2007 with Haseena Parkar in land grabbing and other fraud issues. He has been her frontman in property grabbing matters: @Dev_Fadnavis#DevendraFadnavis
उल्लेखनीय है कि सरदार शाह वली खान को 1993 के मुंबई विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया था और सलीम पटेल को हसीना पारकर का करीबी सहयोगी भी कहा जाता है। मामले के बारे में बात करते हुए फडणवीस ने कहा, “नवाब मलिक का अंडरवर्ल्ड से सीधा संबंध है। मेरे पास पाँच संपत्ति सौदों के दस्तावेज हैं। अंडरवर्ल्ड से जुड़ी चार संपत्तियाँ खरीदी गईं। मैं उपयुक्त अधिकारी, चाहे वह पुलिस, ईडी, एनआईए हो, को उन्हें सौंप दूँगा।”
हिजाब को लेकर जारी विवाद के बीच मंगलवार (15 फरवरी, 2022) को हरियाणा के गुरुग्राम (Gurugram) में बुर्का पहने हुई एक विदेशी महिला ने एक कैब ड्राइवर को चाकू मारकर घायल कर दिया। जिससे अफरातफरी मच गई। वहीं घायल कैब ड्राइवर को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसकी हालत फ़िलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई है।
#Gurugram में #Hijab पहने हुई महिला ने मचाया आतंक, कैब ड्राइवर को दिनदहाड़े मारा चाकू, सड़क पर ही पुलिस वालों को पीटा
बवाल बढ़ने पर जब महिला पुलिसकर्मी ने जब बुर्का पहनी महिला को किनारे ले जाने की कोशिश की तो वह पुलिस से भी हाथापाई पर उतर आई। हालाँकि गुरुग्राम पुलिस आरोपित महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। महिला मिस्र की नागरिक बताई जा रही है। वहीं सेक्टर 15 सिविल लाइन के इंस्पेक्टर वेद प्रकाश ने बताया कि अभी तक विदेशी महिला पुलिस को जाँच में सहयोग नहीं कर रही है। महिला की भाषा पुलिस समझ नहीं पा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम के राजीव चौक पर मंगलवार सुबह करीब 11 बजे बुर्का और हिजाब पहने हुई एक विदेशी महिला ने चौक पर खड़े कैब ड्राइवर को चाकू मारकर घायल कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद महिला वहाँ से भागने लगी। वहीं घायल कैब चालक भी महिला के पीछे दौड़ा। जैसे चौक के पास तैनात पुलिसकर्मियों को घटना की जानकारी मिली तो वह भी मौके पर पहुँच कर बड़ी मुश्किल से महिला को काबू किया। वह पुलिस कर्मियों से भी हाथापाई करने लगी थी।
वहीं पीड़ित कैब ड्राइवर रघुराज ने बताया, “मैं गाड़ी चलाता हूँ। मैंने सवारी बैठा ली। ये महिला पीछे से आई तो मैंने इससे पूछा कि क्या काम है तो इसने मुझे चाकू मारा और गायब हो गई। इसने मुझसे कुछ बात भी नहीं की। मुझे कुछ नहीं पता कि कौन है क्या करती है।”
घटना के बारें में कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि महिला ने कैब ड्राइवर को रोका और जैसे ही कैब ड्राइवर ने पूछा कि आपको कहाँ जाना है? तो महिला ने चाकू निकालकर उसके कंधे पर वार कर दिया। वार करने के बाद महिला भागने लगी। कैब ड्राइवर ने भागती हुई महिला को पकड़ने की कोशिश की। तभी कैब ड्राइवर को आसपास के लोगों ने पकड़ लिया। फिलहाल हमले की वजह अभी पता नहीं चल सकी है। पुलिस की एक टीम महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।