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10 दिन में संगीत जगत को दूसरा झटका: लता मंगेशकर के बाद अब मशहूर गायक बप्पी लहरी का हुआ निधन, 70 के दशक में बॉलीवुड को दिया था रॉक म्यूजिक

बॉलीवुड को 70 के दशक में रॉक म्यूजिक देने वाले मशहूर सिंगर व म्यूजिशियन बप्पी लहरी अब हमारे बीच नहीं हैं। मुंबई के अस्पताल में उनका कल रात 11 बजे निधन हो गया। वह लंबे समय से काफी बीमार थे। उनका इलाज क्रिटी अस्पताल में चल रहा था।

69 वर्षीय बप्पी लहरी का असली नाम आलोकेश लाहिड़ी था। लोग उन्हें उनकी आवाज के अलावा उनके आभूषणों के कारण ज्यादा पहचानते थे। वह हमेशा गोल्ड ज्वेलरी से लदे होते थे। कहते हैं कि बप्पी लहरी इसे अपना लक मानते थे इसलिए हमेशा गोल्ड पहननकर रखते थे।

बप्पी लहरी ने अपने करियर में काफी सारे हिट गाने दिए। उन्होंने रिएलिटी शो में भी भाग लिया था। 27 नवम्बर 1952 कोलकत्ता में पैदा हुए बप्पी लहरी ने अपने अलग अंदाज की वजह से पूरे फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाई थी। 

बॉलीवुड में आने की बात करें तो उन्होंने 70 के दशक से फिल्म इंडस्ट्री में काम करना शुरू कर दिया था। वह हर फिल्म में गाने के लिए निर्माणताओं की पहली पसंद थे। आज भी गुनगुनाया जाने वाला ‘यार बिना चैन कहाँ रे’, ‘तम्मा तम्मा’ ‘बंबई से आया मेरा दोस्त’, ‘आईएम डिस्को डांसर’, ‘जूबी-जूबी’ उन्हीं की आवाज में गाए गए गाने हैं।

बता दें पिछले दो साल में बॉलीवुड को कई झटके लगे हैं। इरफान खान, ऋषि कपूर, सुशांत सिंह राजपूत वो नाम हैं जिन्होंने पिछले सालों में अचानक दुनिया को अलविदा कह दिया। वहीं संगीत जगत में अभी 6 फरवरी को देश ने देश की दिग्गज गायिका लता मंगेशकर को खोया था और अब 16 फरवरी को बप्पी लहरी का निधन हो गया।

लहरी के निधन की खबरें आने के बाद अब कई कलाकार और आम यूजर्स सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उन गानों को याद किया जा रहा है जिन्हें अपनी आवाज देकर लहरी ने एक नई पहचान दी।

लाल किला हिंसा के आरोपित पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू की सड़क दुर्घटना में मौत: दिल्ली से पंजाब लौटते वक्त हुआ हादसा

पंजाबी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता और सोशल ऐक्टिविस्ट दीप सिद्धू (Punjabi Film Actor Deep Sidhu) का मंगलवार (15 फरवरी) हरियाणा में सोनीपत के पास एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। सोनीपत पुलिस ने दीप सिद्धू की मौत की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि दीप सिद्धू अपने दोस्तों के साथ दिल्ली से पंजाब जा रहे थे।

दीप सिद्धू सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में हुए किसान आंदोलन का वह प्रमुख चेहरा थे। 26 जनवरी 2021 के दिन निकाली गई ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले पर व दिल्ली के अंदर हुई हिंसा के मामले में दीप सिद्धू का नाम था। इस मामले में वह मुख्य आरोपित थे और उन्हें जेल जाना पड़ा था। इस मामले में दिल्ली की अदालत ने उन्हें जमानत दी थी और वह फिलहाल जमानत पर थे।

दीप सिद्धू का नाम अक्सर विवादों के साथ जुड़ा रहता था। दीप पर खालिस्तान समर्थक होने के भी आरोप लगते रहे हैं। कहा जाता है कि कुख्यात आतंकी भिंडरावाला का वह समर्थक थे और खालिस्तान के आंदोलन को भी वह गलत नहीं मानते थे। समय-समय पर उन्होंने इनके समर्थन में अपनी राय रखा था, जिसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था।

दीप सिद्धू पर जालंधर में SC/ST एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। दरअसल एक फेसबुक लाइव के दौरान वह कुछ किसानों से बात कर रहे थे। इसी दौरान किसी किसान ने जातिसूचक शब्द कह दिए थे। जिसके बाद थाना नई बारादरी में पुलिस ने दीप और उसके साथ खड़े किसानों पर केस दर्ज कर लिया था। 

दीप सिद्धू का जन्म पंजाब के मुक्तसर जिले में साल 1984 में हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की थी और किंगफिशर मॉडल अवॉर्ड भी जीत चुके थे। साल 2015 में दीप की पहली पंजाबी फिल्म ‘रमता जोगी’ रिलीज हुई थी। इसके बाद साल 2018 में आई फिल्म ‘जोरा दस नंबरिया’ से उनकी लोकप्रियता बढ़ी। इस फिल्म में उन्होंने गैंगस्टर की भूमिका निभाई थी।

इंग्लैंड के क्रिकेटर केविन पीटरसन ने पैन कार्ड खोने पर PM मोदी से माँगी मदद, आयकर विभाग ने तुरंत दिया जवाब

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज केविन पीटरसन (Kevin Pietersen) ने मंगलवार (15 फरवरी) को सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर एक ट्वीट किया, जो वायरल हो गया। दरअसल, पीटरसन ने अपना पैन कार्ड खोने की जानकारी देते हुए उन्होंने भारत के लोगों से मदद माँगी। उन्होंने पहले अंग्रेजी में ट्वीट किया, फिर हिंदी में। अपने ट्वीट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को भी टैग किया।

अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “भारत कृपया मदद करें⚠️ मैंने अपना पैन कार्ड खो दिया है और सोम यात्रा कर रहा हूँ लेकिन काम के लिए भौतिक कार्ड की जरूरत है। क्या कोई कृपया मुझे किसी ऐसे व्यक्ति के पास भेज सकता है जिससे मैं अपनी सहायता के लिए यथाशीघ्र संपर्क कर सकूँ? cc @narendramodi ??”

पीटरसन का कहना था कि वह सोमवार को यात्रा कर रहे हैं, लेकिन उनका पैन कार्ड खो गया है और काम के लिए उन्हें पैन कार्ड की सख्त जरूरत है। उनके इस ट्वीट के बाद आयकर विभाग ने भी जवाब देते हुए मदद की पेशकश की। इस पर आयकर विभाग ने कहा, “हम यहाँ आपकी सहायता के लिए उपलब्ध हैं। यदि आपके पास अपका पैन विवरण है तो भौतिक पैन कार्ड (फिजिकल पैन कार्ड) के पुनर्मुद्रण (रिप्रिंट) के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया के लिए कृपया इन लिंक पर जाएँ।”

अपने दूसरे ट्वीट में आयकर विभाग ने कहा, “यदि आपको अपना पैन विवरण याद नहीं है और भौतिक कार्ड रीप्रिंट कराने के लिए आवेदन करने के लिए पैन का पता लगाने की आवश्यकता है तो कृपया हमें [email protected] और [email protected] पर मेल करें।” इसके बाद पीटरसन ने आयकर विभाग को धन्यवाद दिया।

पीटरसन भारत के प्रति अपने लगाव को समय-समय जाहिर करते रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर पीटरसन को चिट्ठी भी लिखी थी। इसके बाद पीटरसन ने पीएम मोदी का आभार जताया था और कहा था कि एक अरब की जनसंख्या वाला यह देश महाशक्ति है।

पीटरसन क्रिकेट कमेंट्री के लिए अक्सर भारत आते रहते हैं और IPL में कमेंट्री पैनल से जुड़े हुए हैं। वह आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, सनराइजर्स हैदराबाद, डेक्कन चार्जर्स और पुणे सुपरजाएंट्स जैसी टीमों के साथ खेल चुके हैं।

इतना ही नहीं, पीटरसन असम में गैंडों को प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा भी वह भारत में कई से जुड़े हुए हैं। यहाँ टैक्स भरने के लिए उन्हें पैन कार्ड रखना जरूरी है। बता दें कि भारतीय नागरिक सहित उन विदेशियों को भी भारत में टैक्स भरना अनिवार्य है, जो यहाँ कमाई करते हैं और टैक्स भरने के लिए पैन कार्ड होना जरूरी है।

रूस कभी भी कर सकता है यूक्रेन पर हमला: युद्ध की आशंका के बीच भारत ने अपने 20000 नागरिकों को देश छोड़ने को कहा, जारी की एडवाइजरी

रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले की अटकलों के बीच भारत ने यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है और उन्हें अस्थायी रूप से यूक्रेन छोड़ने को कहा है। कीव में भारतीय दूतावास ने एक बयान में कहा, “यूक्रेन में मौजूदा स्थिति की अनिश्चितताओं को देखते हुए, भारतीय नागरिक, विशेष रूप से ऐसे छात्र, जिनका रहना आवश्यक नहीं है, अस्थायी रूप से छोड़ने का सुझाव दिया है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन में 20 हज़ार से अधिक भारतीय छात्र और नागरिक यूक्रेन के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं, जिसमें सीमावर्ती इलाके भी शामिल हैं। हालाँकि अभी यूक्रेन में उड़ानों पर कोई संकट नहीं है, लेकिन पिछले दो दिनों में ही फ्लाइट टिकट दोगुने दाम दोगुनी हो गई है।

भारत द्वारा जारी एडवाइजरी में नागरिकों से यूक्रेन में अपनी उपस्थिति के बारे में दूतावास को अपडेट देने के लिए भी कहा ताकि अधिकारियों को जब भी आवश्यकता हो, मदद के लिए पहुँचने में आसानी हो। साथ ही बताया गया है कि दूतावास सामान्य रूप से काम करता रहेगा। यह आदेश दो दिन बाद है जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूक्रेन में अपने दूतावास को खाली करने का फैसला किया और सभी अमेरिकी नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने के लिए कहा। भारत ने चेतावनी दी कि रूस किसी भी समय आक्रमण कर सकता है।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जोर देकर कहा था कि अमेरिका किसी भी शर्त पर यूक्रेन में अपने सैनिक नहीं भेजेगा क्योंकि अमेरिकी और रूसी का एक दूसरे पर गोली चलाना एक ‘विश्व युद्ध’ होगा। अपने रूसी समकक्ष से फोन पर बात करते हुए, बाइडेन ने भी गंभीर प्रतिबन्ध का संकेत दिया था कि अगर रूस यूक्रेन पर आक्रमण करता है तो अमेरिका रूस पर लगाएगा।

इस बीच रूस ने भी यूक्रेन में सीमा के पास सैनिकों के बड़े पैमाने पर जमावड़े बीच अपने कर्मचारियों को वहाँ से हटाने की घोषणा की है। गौरतलब है कि रूस ने यूक्रेन सीमा पर एक लाख से अधिक सैनिकों को तैनात किया है। जबकि रूस लगातार कह रहा है कि उसका हमला करने का कोई इरादा नहीं है, वहीं अमेरिका ने दुनिया भर के अन्य देशों को जल्द से जल्द यूक्रेन छोड़ने का सुझाव दिया है।

गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते विवाद ने यूक्रेन में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि रूस ने यूक्रेन की सीमा पर अपने 1 लाख से ज्यादा सैनिक तैनात किए हुए हैं और वो कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकते हैं। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का फेसबुक पोस्ट भी सामने आया है। इस फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि उन्हें बताया गया है कि 16 फरवरी यूक्रेन पर हमले का दिन होगा। लेकिन यूक्रेन इस दिन एकता दिवस मनाएगा। इससे जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

यूक्रेन और रूस के बीच क्या विवाद है?

यूक्रेन और रूस के बीच का पूरा विवाद नाटो में शामिल होने को लेकर है। यूक्रेन की सालों से कोशिशें हैं कि वो नाटो का हिस्सा बने जबकि ऐसा नहीं चाहता। उसकी दिक्कत है नाटो जो कि एक सैन्य समूह है उसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे 30 देश शामिल हैं और रूस के कई पड़ोसी देश इसका हि्सा हैं। रूस का पक्ष है कि अगर यूक्रेन भी नाटो का हिस्सा बनातो वो चारो ओर से अपने दुश्मनों से घिर जाएगा और अमेरिका जैसे देश उस पर हावी होंगे। इसके अलावा यदि भविष्य में रूस ने यूक्रेन पर कोई हमला किया तो भी उसके नाटो से जुड़ने पर 30 देश रूस के दुश्मन बन जाएँगे और यूक्रेन की सैन्य सहायता में आगे रहेंगे।

कर्नाटक बुर्का विवाद के नाम पर वायर की पत्रकार ने मुस्लिमों को हिंसा के लिए उकसाया: पहले भी भगवान राम और हिन्दुओं को लेकर दे चुकी है विवादित बयान

कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब/बुर्का विवाद (Hijab/Burqa Controversy) प्रतिबंधित होने के बावजूद यह राज्य में टकराव का मुद्दा बन गया और पूरे देश में विवाद का विषय बन गया। इस विवाद को कुछ इस्लामवादी और वामपंथी कथित बुद्धिजीवी इसे बहुत चालाकी से हिंदू-मुस्लिम विवाद बना रहे हैं। वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर में खुद को ऑडियंस एडिटर बताने वाली नाओमी बार्टन ने मंगलवार (15 फरवरी) को हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए इस मुद्दे को खुले तौर पर इस्तेमाल किया।

वायर की पत्रकार बार्टन ने ट्वीट किया, “यदि मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति एक हिंदू महिला से दुपट्टा लेने के लिए एकजुट हुए होते तो सड़कों पर खून बह गया होता। यह एक क्रूर अपमान है कि मुस्लिमों को असहाय होकर मुस्लिम महिलाओं के अपमान को प्रतिशोध के डर से देखने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

बार्टन ने यह बेबुनियाद दावा करते हुए मुस्लिमों को हिंदुओं के खिलाफ हथियार उठाने के लिए उकसाने का प्रयास किया है। जाहिर है कि उसके पास हिंदुओं के प्रति नफरत के अलावा अपने हास्यास्पद दावों का समर्थन करने के लिए कोई सबूत या आधार नहीं है।

बार्टन उन तथाकथित उदारवादियों में से एक हैं, जो अपने हिंदू विरोधी एजेंडे को फैलाने के लिए पिछले महीने कर्नाटक में शुरू हुए हिजाब विवाद का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पहले ऑपइंडिया ने बताया था कि बॉलीवुड के जरिए मनोरंजन करने वाली स्वरा भास्कर ने कैसे हिजाब मुद्दे की तुलना महाभारत में द्रौपदी के चीर हरण से की थी।

तब कई चरमपंथी मुस्लिमों ने स्वरा भास्कर की इस बकवास टिप्पणी का समर्थन करते हुए दावा किया था कि भारतीय दर्शक की तरह हिजाब विवाद का आनंद ले रहे हैं। उन्होंने महाभारत से द्रौपदी वस्त्र हरण प्रकरण की कल्पना करके हिंदू संस्कृति का भी अपमान किया था। स्वरा भास्कर ने अक्सर इस्लामिक आतंकवादी की भाषा बोलती हैं और हिंदुओं का मजाक उड़ाने के लिए ‘गौ मुत्र’ का मजाक बनती हैं।

नाओमी बार्टन भी अतीत में खुले तौर पर हिंदुओं के प्रति अपनी नफरत को प्रदर्शित करने में शामिल रही हैं। उन्होंने कहा था कि हर हिंदू हनुमान चालीसा नहीं जानता। एक संदर्भ में बात करते हुए उन्होंने कहा था कि कुछ ‘जय श्रीराम’ कहकर और भी घृणा फैलाएँगे।

बार्टन की हिंदू विरोधी नफरत इतनी गहरी है कि एक बार वह एक प्यारे पिल्ला के एक हानिरहित वीडियो में ‘ब्राह्मणवाद’ को घुसेड़ दी थीं।

दरअसल, एक सोशल मीडिया यूजर ने अपने पालतू कुत्ते गोल्डन रिट्रीवर को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार घर में स्वागत करते हुए एक वीडियो ट्वीट किया था। इस वीडियो पर जवाब देते हुए कथित पत्रकार ने कहा था कि वीडियो प्यारा और हानिरहित लग रहा है, लेकिन वास्तव में यह दिखाता है कि ब्राह्मणवाद का निर्माण कैसे हुआ।

यहाँ तक कि उन्होंने गोल्डन रिट्रीवर प्रजाति के कुत्ते को ऊँची जाति का घोषित कर दिया। जाहिर है कि वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट से जुड़ी इस पत्रकार के लिए अपनी इच्छा के अनुसार पिल्लों का स्वागत करना ‘ब्राह्मणवाद’ है और इसकी जड़ें जातिवाद में हैं।

सड़क हटाओ, कब्रिस्तान बनाओ: गुजरात वक्फ ट्रिब्यूनल का आदेश, तोड़फोड़ का खर्च अधिकारियों से वसूलने को कहा

गुजरात के भावनगर में शिहोर नगरपालिका को पिछले हफ्ते शिहोर मेमन जमात द्वारा प्रबंधित कब्रिस्तान को तोड़कर बनाई गई सड़क को हटाने और कब्रिस्तान की पूर्व की स्थिति को बहाल करने का आदेश दिया गया था। गुजरात स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल ने नगरपालिका से कब्रों, गिरे हुए पेड़ों और शौचालय को कब्रिस्तान में उसकी मूल स्थिति में वापस लाने के लिए कहा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिहोर नगरपालिका ने कब्रिस्तान के बाहरी हिस्से को तोड़कर ढांचागत विकास के तहत एक सड़क का निर्माण कराया था। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा है कि कब्रिस्तान की बहाली का खर्च विध्वंस करने वाले दो अधिकारियों से वसूल किया जाएगा।

ट्रिब्यूनल ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर 24 घंटे के भीतर सड़क नहीं हटाई गई तो बहाली का खर्च सरकारी निकाय के मुख्य अधिकारी द्वारा वहन किया जाएगा। 2 फरवरी को नगरपालिका ने शिहोर मेमन जमात को सड़क के लिए अपने कब्रिस्तान निर्माण के हिस्से को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था और उसके बाद उसे तोड़ दिया था।

तोड़फोड़ के बाद जमात ने दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। बाद में इसने दीवानी अदालत से मुकदमा वापस ले लिया और इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए गुजरात राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। नागरिक निकाय ने अपने तर्क में दावा किया कि जिस जमीन पर सड़क बनाई गई थी, वह कभी भी शिहोर मेमन जमात की नहीं थी। वहीं, शहर के सर्वेक्षण में कहा गया है कि जमीन एक कब्रिस्तान की है, जो कि वक्फ की है।

ट्रिब्यूनल ने SC के आदेश का हवाला देते हुए आगे कहा कि जमीन एक बार कब्रिस्तान बन जाती है तो हमेशा कब्रिस्तान रहती है। इसने बहाली पर नगर निकाय से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। इसके साथ ही सड़क को हटाने के बाद शहर की पुलिस से सुरक्षा देने को कहा गया है।

‘वक्फ’ का अर्थ मुस्लिम कानून द्वारा पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी भी उद्देश्य के लिए चल या अचल संपत्ति को इस्लाम को मानने वाले व्यक्ति द्वारा स्थायी समर्पण है। इसका मतलब यह है कि उपयोगकर्ता द्वारा किसी भी संपत्ति को बोर्ड के साथ पंजीकृत किया जा सकता है, ‘वक्फ’ बन जाता है और संपत्ति के मूल मालिक की मृत्यु होने पर भी ऐसा ही रहता है। कब्रिस्तान भी वक्फ के साथ पंजीकृत एक संपत्ति है।

फर्जी ‘डॉक्टर’ ने कई राज्यों में 14 महिलाओं से की शादी, सातवीं पत्नी की शिकायत के बाद ओडिशा से गिरफ्तार

ओडिशा पुलिस ने सोमवार (14 फरवरी 2022) को एक 54 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने 14 महिलाओं से शादी की और हर बार अपनी नकली पहचान और डॉक्यूमेंट्स पेश किया। इसके साथ ही उसने पैसों की ठगी भी की। आरोपित की पहचान रमेश चंद्र स्वैन उर्फ बिधू प्रकाश स्वैन या रमानी रंजन स्वैन के रूप में हुई है। वह ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में होम्योपैथी डॉक्टर है।

मामला तब सामने आया जब उसकी 14 पत्नियों में से एक ने अपने पति के खिलाफ महिला पुलिस स्टेशन में एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। महिला को जब पता चला कि उसके पति ने फर्जी पहचान बनाई और उसी चाल का इस्तेमाल करके कई महिलाओं को लूट लिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिकायतकर्ता दिल्ली में एक स्कूल टीचर है और उसने आरोप लगाया है कि उन्होंने दिल्ली के आर्य समाज मंडल में शादी की। इसके बाद स्वैन उसे भुवनेश्वर लेकर आया। जाँच के दौरान, पुलिस और विशेष दस्ते ने पाया कि रमेश भुवनेश्वर, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद और दिल्ली सहित विभिन्न शहरों की 13 महिलाओं से पहले ही शादी कर चुका था।

उसने वैवाहिक वेबसाइटों पर हर बार फर्जी पहचान और आवासीय दस्तावेज, हाई प्रोफाइल पत्र और सरकारी दस्तावेज दिखाकर महिलाओं को ठगा था। पुलिस ने उसे 14 फरवरी को केंद्रपाड़ा जिले में किराए के मकान से गिरफ्तार किया था। 

बैंकों को भी ठगा था

इसके अलावा रिपोर्ट्स में कहा गया है कि रमेश ने पहली बार 1982 में शादी की और फिर 2002 से 2020 के बीच 13 महिलाओं से शादी की। पुलिस ने कहा, “रमेश डॉक्टर या सरकारी अधिकारी नहीं है। वह लोगों को धोखा देने के लिए अपने वाहन पर सरकारी कर्मचारी का स्टिकर लगाता था।” पुलिस ने कहा कि उसे पहले आंध्र प्रदेश पुलिस और केरल पुलिस ने 13 बैंकों से 1 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था

भुवनेश्वर डीसीपी उमाशंकर दास ने मामले के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए आगे बताया कि रमेश का इरादा महिलाओं से पैसे लेने और संपत्ति हासिल करने का था। उन्होंने कहा, “वह अधेड़ उम्र की अविवाहित महिलाओं को निशाना बनाता था और पैसे लूटकर उन्हें छोड़ देता था। पीड़ितों में वकील, शिक्षक, डॉक्टर और उच्च शिक्षित महिलाएँ, जिनमें से ज्यादातर ओडिशा से बाहर के हैं।”

पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि रमेश ने पंजाब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की एक महिला अधिकारी से शादी की थी और उससे 10 लाख रुपए ठगे थे। इसके बाद उसने गुरुद्वारे को भी ठगा। उसने इलाके में अस्पताल बनाने का वादा करके 11 लाख रुपए में शादी कर ली।

रमेश ने कथित तौर पर पैसे के लिए मेडिकल छात्रों को भी धोखा दिया था। उन्हें हैदराबाद पुलिस ने तब गिरफ्तार किया था जब उन्होंने पाया कि रमेश ने छात्रों से एक मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का वादा करके लगभग 2 करोड़ रुपए ठगे थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने उसकी सभी पत्नियों से संपर्क किया है और घटनाक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने अब तक रमेश स्वैन के पास से 11 एटीएम कार्ड और 4 आधार कार्ड जब्त किए हैं। उस पर आईपीसी की धारा 498 (ए), 419, 468, 471 और 494 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

ऑड्रे ट्रुश्के, रोहित चोपड़ा और ट्विटर सहित अन्य के खिलाफ मानहानि का मामला: दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचे इतिहासकार विक्रम संपत

इतिहासकार विक्रम संपत ने विवादित लेखक ऑड्रे ट्रुश्के और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर सहित अन्य के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों और प्लेटफॉर्म पर उनके खिलाफ लगाए गए झूठे आरोपों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। दरअसल रविवार (13 फरवरी 2022) को ट्विटर पर एक पत्र वायरल हुआ था। इसमें भारतीय क्रांतिकारी वीर सावरकर को लेकर प्रसिद्ध इतिहासकार विक्रम संपत द्वारा दिए गए भाषण को लेकर ‘साहित्यिक चोरी’ (‘Plagiarism’) का आरोप लगाया गया था।

संपत पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाने का प्रयास करने वाला पत्र अमेरिका में विश्वविद्यालयों के तीन प्रोफेसरों- अनन्या चक्रवर्ती, रोहित चोपड़ा और ऑड्रे ट्रुश्के द्वारा लिखा गया था। पत्र को रॉयल हिस्टोरिकल सोसाइटी, यूके को निर्देशित किया गया था। इसमें संपत के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया गया था। बता दें कि इतिहासकार संपत भी इसके सदस्य हैं।

उल्लेखनीय है कि साहित्यिक चोरी का मामला पहले से ही विफल हो गया था, क्योंकि उस दौरान यह पाया गया था कि विक्रम संपत ने पहले से ही उनके द्वारा लिखित सभी शैक्षणिक कार्यों में उचित हवाला और क्रेडिट दिए थे।

यह पहली बार नहीं है जब लेखक और इतिहासकार पर सावरकर पर उनके दो-खंडों के काम पर झूठे आरोप लगाकर हमला किया गया था। सावरकर की जीवनी लिखने पर विक्रम संपत को लगातार वामपंथी इतिहासकारों ने निशाना बनाया, उन्हें ट्रोल किया। इसके बावजूद ट्विटर ने उन पर किसी तरह की कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं समझी और संपत के खिलाफ हो रहे ऑनलाइन हमलों पर भी संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। 

गौरतलब है कि ऑड्रे ट्रुशके और रोहित चोपड़ा पहले से ही ट्विटर पर फेक न्यूज और हिंदूफोबिया फैलाने के लिए जाने जाते हैं। रोहित चोपड़ा को ट्विटर पर अपनी नफरत फैलाने का खामियाजा भी भुगतना पड़ा। दिल्ली स्थित थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा 2020 में अपनी वेबसाइट से उनके निबंधों को हटाने का फैसला किया था।

ऑड्रे ट्रुश्के का विवाद औरंगजेब और मुगल तानाशाह के महिमामंडन से शुरू होता है। उनका हिंदूफोबिक समूहों के साथ रिश्ता जगजाहिर है। वह 2021 में आयोजित ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ (‘Dismantling Global Hindutva‘) सम्मेलन की प्राथमिक प्रतिभागियों में से एक थीं। अपने संदिग्ध ‘अकादमिक’ कार्यों के अलावा, उन्हें रटगर्स विश्वविद्यालय के हिंदू छात्रों को टारगेट करते हुए भी पाया गया था। उन्होंने परिसर में अपनी हिन्दुओं के प्रति नफरत की भावना को भी प्रदर्शित किया था।

‘काले बुर्के में लड़कियाँ-लड़के नमाजी टोपी (तबलीगी जमात वाली) पहनकर आएँ, 100 मीटर दूर रहें’: पंजाब यूनिवर्सिटी के वायरल सर्कुलर का जानिए सच

वैलेंटाइन डे के मौके पर पाकिस्तान के कॉलेजों और विभिन्न यूनिवर्सिटी को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए गए। इसी क्रम में लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर बताया गया कि उन्होंने 14 फरवरी को ‘हया दिवस’ मनाने का ऐलान किया है। साथ ही लड़कियों को काला बुर्का और लड़कों को तबलीगियों वाली नमाजी टोपी पहनने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ यूनिवर्सिटी ने छात्र-छात्राओं से 100 मीटर दूरी बनाए रखने को भी कहा।

पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर फैली इस हैरान करने वाली खबर पर अब यूनिवर्सिटी ने अपना पक्ष रखा है। यूनिवर्सिटी का दावा है कि जिस पत्र में 14 फरवरी को ‘हया दिवस’ मनाने की बात कही गई थी, लड़कियों को बुर्के और लड़कों को नमाजी टोपी में आने को कहा गया था, वो पत्र उनका नहीं है। इस संबंध में पीयू कुलपति प्रोफेसर डॉ नियाज अहमद अख्तर ने भी जानकारी दी और स्पष्ट किया कि ये फेक नोटिफिकेशन है, यूनिवर्सिटी ने इसे जारी नहीं किया।

इस्लामाबाद के कॉलेजों से जारी हुआ फरमान

बता दें कि जैसे लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर जानकारी सोशल मीडिया पर जगह-जगह वायरल हुई। वैसी ही खबर कल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक मेडिकल कॉलेज से आई थी। जहाँ वैलेंटाइन डे पर दिशानिर्देश जारी करके लड़कियों से वैलेंटाइन डे के दिन हिजाब (बुर्का) पहनने और लड़कों को नमाज वाली सफेद टोपी पहनने के लिए कहा गया था। इसके अलावा लड़कों को लड़कियों से दो मीटर की दूरी बनाए रखने के भी निर्देश दिए थे।

नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई थी कि इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले विद्यार्थियों को पकड़ने के लिए कॉलेज स्टॉफ के सदस्य परिसर में गश्त करेंगे। जो भी लोग इन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएँगे, उन पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। कॉलेज के सर्कुलर के हवाले से खबर में कहा गया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा।

कुवैद-ए-इजाम यूनिवर्सिटी

दिलचस्प बात ये है कि सिर्फ मेडिकल कॉलेज ही नहीं, इस्लामाबाद की कुवैद-ए-इजाम यूनिवर्सिटी को लेकर भी कहा गया कि कॉलेज ने 14 फरवरी को हया दिवस मनाने का ऐलान किया और उक्त नियम अपने छात्र-छात्राओं के लिए भी बनाए। बस यहाँ जुर्माना राशि 3000 पाकिस्तानी रुपया है।

पेशावर यूनिवर्सिटी

पेशावर यूनिवर्सिटी ने तो 14 फरवरी को छुट्टी ही घोषित कर दी है। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी ने एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें 5 फरवरी (पाकिस्तान के हिसाब से कश्मीर दिवस) के नाम पर 14 फरवरी को छुट्टी दी गई।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पाकिस्तान की लगभग हर यूनिवर्सिटी ने ऐसा नोटिस जारी किया था और सोशल मीडिया यूजर्स इन्हें शेयर करके इनके पक्ष और विरोध की बहस में उलझे दिखे थे। इनमें से पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर तो बयान आ गया लेकिन बाकी यूनिवर्सिटी के सर्कुलर पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं है। कई मीडिया पोर्टल्स पर इस संबंध में खबर भी प्रकाशित है।

कर्नाटक हिजाब विवाद को चुनाव में भुनाया जा रहा, मार्च बाद हो सुनवाई: कोर्ट ने खारिज की माँग, आज भी नहीं हो सका फैसला

कर्नाटक में चल रहे बुर्का विवाद (Hijab Controversy) पर हाईकोर्ट में याचिकाएँ दायर की गई है। इन याचिकाओं में शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती दी गई है। मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की 3 जजों की फुल बेंच आज मंगलवार, (15 फरवरी, 2022) को सुनवाई की

कर्नाटक हिजाब मामले में मंगलवार को भी हाईकोर्ट से कोई फैसला नहीं हो पाया। बेंच ने सुनवाई 16 फरवरी तक बढ़ा दी है। हालाँकि, इससे पहले देवदत्त कामत ने कहा था कि सुनवाई मार्च के बाद करें, क्योंकि इस हिजाब विवाद का चुनाव में फायदा लेने की कोशिश हो रही है। इस पर बेंच ने कहा कि ये चुनाव आयोग से जुड़ा मामला है हमसे जुड़ा नहीं।

याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने भारत के संविधान का कन्नड़ में आधिकारिक अनुवाद बेंच के सामने रखा। दक्षिण अफ्रीका के नोज पिन केस का हवाला देते हुए कहा, ” दक्षिण अफ्रीका में 2004 के सुनाली पिल्ले बनाम डरबन गर्ल्स हाई स्कूल केस का जिक्र किया। जहाँ स्कूल ने लड़कियों को नाक में नथ पहनने की अनुमति नहीं दी थी। स्कूल का तर्क था कि यह स्कूल के कोड ऑफ कंडक्ट के खिलाफ है।”

हाई कोर्ट में सीनियर वकील देवदत्त कामत (Devdutt Kamat) ने कुंडापुरा कॉलेज के दो स्टूडेंटस की अर्जी पर पैरवी करते हुए कहा कि सिर पर स्कार्फ लगाने से शांति व्यवस्था को कोई नुकसान नहीं हो सकता। वहीं हाई कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार से ही राज्य में स्कूल-कॉलेज खोल दिए गए हैं। हाई कोर्ट ने अगले आदेश तक राज्‍य के स्‍कूल-कॉलेजों में हर तरह के धार्मिक पोशाक पर रोक लगाई है। लेकिन अभी भी मुस्लिम छात्राओं के हिजाब में कॉलेज आने से कुछ छिटपुट विवाद भी जारी है। वहीं कोर्ट कल भी इस मामले पर सुनवाई करेगा।

आज की सुनवाई की कुछ मुख्य बातें:

अधिवक्ता का उल्लेख है कि न्यायालय का अंतरिम आदेश केवल उन महाविद्यालयों के लिए है जिनके पास यूनिफॉर्म है। लेकिन इसके बावजूद मुस्लिम लड़कियों को उन कॉलेजों में भी हिजाब हटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है जिनके पास यूनिफॉर्म नहीं है।

सीजे अवस्थी: स्पष्टीकरण के लिए एक आवेदन दायर करें।

एडवोकेट मोहम्मद ताहिर: अदालत के आदेश का दुरुपयोग हो रहा है। मुस्लिम छात्राओं से जबरन हिजाब उतरवाया जा रहा है। गुलबर्गा के एक उर्दू स्कूल में अधिकारियों ने शिक्षकों और मुस्लिम छात्राओं पर जोर-जबरदस्ती डालते हुए हिजाब उतारने को कहा। अधिकारियों की ओर से हाई कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल हो रहा है। मैंने सारी मीडिया रिपोर्ट को कोर्ट में पेश कर दिया है।

चीफ जस्टिस: हम इस पर सभी की राय जानने के बाद निर्देश जारी करेंगे।
एडवोकेट जनरल- हलफनामा स्पष्ट नहीं है। वे उचित अप्लीकेशन लेकर आएँ फिर हम जवाब देंगे। हलफनामा किसी याचिकाकर्ता की ओर से नहीं फाइल किया गया है।

देवदत्त कामत- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार यदि कोई धार्मिक प्रथा घृणित है तो राज्य सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य या नैतिकता के आधार पर उसे रोक सकता है। लेकिन यह मामला अलग है। सिर पर स्कार्फ पहनने से कोई नुकसान नहीं हो सकता। कर्नाटक शिक्षा अधिनियम में संविधान की धारा 25 के तहत गारंटीकृत अधिकारों पर अंकुश लगाने का कोई इरादा नहीं था। ड्रेस कोड पर 5 फरवरी का सार्वजनिक आदेश औचित्यहीन है, जो हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करता है।

देवदत्त कामत- राज्य का कहना है कि सरकारी आदेश में शब्द सार्वजनिक सुव्यवस्ते का अर्थ सार्वजनिक व्यवस्था नहीं है। संविधान का आधिकारिक कन्नड़ अनुवाद सार्वजनिक व्यवस्था के लिए सार्वजनिक सुव्यवस्थ शब्द का उपयोग करता है। मुझे आश्चर्य है कि राज्य ने यह तर्क दिया।

जस्टिस कृष्ण दीक्षित- एक सरकारी आदेश में इस्तेमाल किए गए शब्दों को एक कानून के शब्दों की तरह नहीं पढ़ा जा सकता है।


देवदत्त कामत- मैं आदरपूर्वक मानता हूँ कि सरकारी आदेश में लिखे गए सार्वजनिक सुव्यवस्थ का दो अर्थ नहीं बनता है और इसका मतलब सार्वजनिक व्यवस्था ही है।

कामत ने अपनी दलीलों में कहा, “शिक्षा अधिनियम में किसी छात्र को ड्रेस का पालन नहीं करने पर निष्कासित करने का कोई प्रावधान नहीं है। यदि आपको एक अतिरिक्त पोशाक के लिए निष्कासित कर दिया जाता है, तो आनुपातिकता का सिद्धांत आ जाएगा। यह सिर पर दुपट्टा डालने और ड्रेस न बदलने की एक अहानिकर प्रथा है। यह भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक पहलू है। यदि सिर पर स्कार्फ पहनने के लिए छोटी छूट दी जाती है, तो यह वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अनुरूप होगा।”

कामत ने कहा: राज्य का कहना है कि हम एक धर्मनिरपेक्ष राज्य हैं, हम तुर्की के सैनिक नहीं हैं। हमारा संविधान सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता प्रदान करता है और सभी धर्मों को मान्यता दी जानी चाहिए। अगर राज्य कहता है कि अगर कोई सिर पर दुपट्टा पहनता है और इससे गलता होगा, तो हम इसकी अनुमति नहीं दे सकते, यह एक अनुचित तर्क है।

कामत ने न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ द्वारा लिखित उच्चतम न्यायालय के फैसले का उदाहरण दिया जिसमें बढ़ती असहिष्णुता के बारे में उल्लेख किया गया है। कामत ने कहा, “राज्य एक सरल तर्क नहीं दे सकता है कि सार्वजनिक व्यवस्था बाधित है और उसे अधिकारों का आनंद लेने के लिए एक सकारात्मक वातावरण बनाना है।” जैसे ही कामत ने कहा कि वह कनाडा के फैसले का हवाला देना चाहते हैं।

चीफ जस्टिस: ये निर्णय इस मामले के मुद्दों के लिए कैसे प्रासंगिक हैं? हम अपने संविधान का पालन करते हैं।

कामत ने अब बताया क‍ि कैसे साउथ अफ्रीका के कोर्ट ने स्कूल के इस तर्क को खारिज कर दिया कि नाक-स्टड की अनुमति देने से शरीर-छेदने और अन्य भयानक परेड के दावों की अनुमति मिल जाएगी। कोर्ट ने कहा कि स्कूल अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को समझने में विफल रहा है और उनका अनादर है।

गौरतलब है कि सुनवाई से पहले अदालत ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि मीडिया को ऐसे संवेदनशील विषय पर और जिम्मेदार बनने की जरूरत है। कल सोमवार को भी हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष कहा कि हिजाब पर प्रतिबंध को लेकर दिया गया सरकारी आदेश दिमाग का गैर-उपयोग है। उनका कहना था कि यह सरकारी आदेश अनुच्छेद-25 के तहत है और यह कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। हिजाब की अनुमति है या नहीं, यह तय करने के लिए कॉलेज कमेटी का प्रतिनिधिमंडल पूरी तरह से अवैध है।

वहीं, सुनवाई के दौरान एक वकील ने अपने आवेदन में इस मुद्दे पर मीडिया और सोशल मीडिया टिप्पणियों को प्रतिबंधित करने के लिए कहा क्योंकि अन्य राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। इस पर कर्नाटक हाइकोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग इस पर कंसीडर करता है तो हम इस मुद्दे पर विचार कर सकते हैं।

बता दें कि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मीडिया से हिजाब मामले में बढ़ते विरोध को देखते हुए जिम्मेदार होने का अनुरोध किया है। वकील सुभाष झा का कहना है कि उनका अनुरोध है कि सभी पक्षों को अपने सबमिशन को नियम पुस्तिका में सीमित करना चाहिए और सांप्रदायिक रंग नहीं देना चाहिए। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने याचिकाकर्ता की दलीलों की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि सरकार का आदेश कानून की जरूरतों को पूरा किए बिना प्रयोग किया गया है। ये अनुच्छेद 25 के मूल में हैं और ये कानूनी रूप से टिकने वाला नहीं है।