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हिंदू रीति-रिवाज से शादी करेगा ऑस्ट्रेलिया का यह क्रिकेटर, तमिल में प्रिंट वेडिंग कार्ड वायरल: जानिए कौन हैं ग्लेन मैक्सवेल की होने वाली दुल्हन

ऑस्ट्रेलिया और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल (Glenn Maxwell) इन दिनों काफी परेशान और चिंतित हैं। वजह है- उनकी शादी की कार्ड का वायरल होना। जानकारी के मुताबिक, वह अपनी भारतीय मूल की गर्लफ्रेंड विनी रमण (Vini Raman) से शादी कर रहे हैं। मैक्सवेल को आईपीएल टीम के उनके एक पूर्व साथी ने बताया कि उनका तमिल भाषा में छपा वेडिंग कार्ड ऑनलाइन लीक (Wedding card) हो गया है। 

इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई अखबारों के सामने खुलासा किया है कि सप्ताह भर चलने वाले उनके विवाह समारोह का निमंत्रण ऑनलाइन लीक होने के बाद अब वह अपनी शादी में सुरक्षा बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। भारत में अपनी लोकप्रियता के कारण मैक्सवेल अब इस बात से चिंतित हैं कि कार्ड के ऑनलाइन लीक हो जाने से बहुत सारे बिन बुलाए मेहमान शादी में मेलबर्न पहुँच सकते हैं। 

शादी का निमंत्रण कार्ड भारतीय अभिनेता कस्तूरी शंकर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया था और मैक्सवेल ने स्वीकार किया कि उनका ‘बिग डे’ थोड़ा अधिक तनावपूर्ण होने वाला है, क्योंकि अब तमिलभाषी लोग मेलबर्न में उनकी शादी का समय और स्थान जानते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे एक पूर्व आईपीएल टीममेट ने एक तस्वीर भेजी। उन्हें (पारंपरिक) तमिल शादी का निमंत्रण कई लोगों द्वारा भेजा गया था। मुझे लगता है कि हमें अपनी हिंदू रीति-रिवाज से होने वाली शादी में सुरक्षा बढ़ानी होगी। ऑनलाइन चेक करें। यह हर जगह है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विनी और मैक्सवेल साल 2017 से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। इसके बाद दोनों ने फरवरी 2020 में सगाई कर ली थी। 14 मार्च 2020 के एक इंस्टाग्राम पोस्ट में विनी ने अपनी पारंपरिक भारतीय शैली में सगाई की एक तस्वीर शेयर की थी। पोस्ट को कैप्शन देते हुए विनी ने लिखा कि उन्होंने अपनी भारतीय सगाई का जश्न मनाया और उन्होंने ग्लेन को एक छोटा सा टीज़र दिया कि शादी कैसी होगी। अब यह खबर वायरल हुई है कि दोनों 27 मार्च में मेलबर्न में पारंपरिक तमिल रिवाजों के मुताबिक शादी करेंगे। 

विनी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहती हैं। उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल के मुताबिक वे एक फार्मासिस्ट हैं। विनी का परिवार चेन्नई से है। हालाँकि उनका जन्म और पढ़ाई-लिखाई ऑस्ट्रेलिया में ही हुई है। विनी के पिता वेंकट रमन और माँ विजयलक्ष्मी उनके जन्म से पहले ही ऑस्ट्रेलिया में बस गए थे। विनी और मैक्सवेल तमिल ब्राह्मण शैली से विवाह करेंगे। इसमें कई इंटरनेशनल क्रिकेटर्स को आमंत्रित किया जाएगा। 

शादी की वजह से ग्‍लेन मैक्‍सवेल पाकिस्‍तान का दौरा (Australia Tour of Pakistan 2022) नहीं करेंगे। साथ ही वो आईपीएल (IPL 2022) के दौरान शुरुआती कुछ मैचों के दौरान भी उपलब्‍ध नहीं रहेंगे। उन्होंने अब तक लगाए जा रहे कयासों पर विराम लगाते हुए मैक्‍सवेल ने औपचारिक तौर पर अब यह साफ कर दिया है कि उनके लिए पाकिस्‍तान का दौरा करना मुश्किल और शुरुआती आईपीएल मैच खेल पाना संभव नहीं है।

‘यूपी-बि​हार के भइयों’ से प्रियंका गाँधी ने माँगी माफी, कॉन्ग्रेस ऑफिस में लगवाया बोर्ड – ‘एक बिहारी, 100 पर भारी’

प्रियंका गाँधी देश की बहुत बड़ी नेता हैं। ये जब बोलती हैं, हवा बदल जाती है। चलती हैं तो धूल उड़ते हैं। भाग्य है बिहार का, जो इतनी महान हस्ती यहाँ पधारीं। वरना ये अंतरराष्ट्रीय/राष्ट्रीय स्तर से नीचे के मसलों पर कम ही बोलती-दिखाई देती हैं।

प्रियंका गाँधी के कद का अंदाजा लगाना है तो ऐसे आँकिए – खुद कभी सांसद-विधायक का चुनाव तक नहीं लड़ीं… लेकिन कम ही सही, कई कॉन्ग्रेसी विधायक-सांसद-सीएम इनके आगे-पीछे घूमते पाए जाते हैं। इनके सामने सबकी घिग्घी बँधी रहती है।

बहुत भूमिका हो गई। अब डायरेक्ट चलते हैं एक्शन पर। एक्शन से समझिए प्रियंका गाँधी की शख्सियत को। बिहारियों के लिए क्या किया, यह भी समझने की जरूरत है।

प्रियंका गाँधी, गाँधी मैदान और माफी

पटना का गाँधी मैदान। लाखों की भीड़। सब प्रियंका गाँधी को सुनने धूप में खड़े। मंच पर आते ही जब हाथ उठाया तो लगा जैसे सलाम कर रही हैं। लोगों ने भी हाथ हिला कर बता दिया कि वो उन्हें देख चुके। इसके बाद प्रियंका ने सबसे पहला वाक्य कहा – “मुझे माफ कर दीजिए बिहारी भइए।” फिर अपनी माँ सोनिया गाँधी की तरह रोने लगीं। सन्नाटा छा गया।

बिहारी बड़े आत्मीय होते हैं। उन्हें बड़ा दुख हुआ। उनके नाम पर इतने बड़े नेता को रोना पड़ा। तभी प्रियंका ने शीला दीक्षित से लेकर राहुल गाँधी और दूसरे पार्टी के अरविंद केजरीवाल-ममता बनर्जी तक के नाम पर माफी माँग कर दूसरी बार सबको चौंका दिया। दिल पर पंजा रख कर यह भी बताया कि पंजाब में जब बिहारियों का मजाक उड़ाया जा रहा था, उस वक्त वो दिल से रो रही थीं… बस चेहरे पर हँसी थी क्योंकि बहुत सारे कैमरा थे वहाँ।

बिहार का पब्लिक अब तक पागल हो चुका था। दबंग नेताओं की दबंगई सहने, चोर-भ्रष्टाचारियों की लूट-खसोट सुनने-देखने वाली जनता के पल्ले ये नहीं पड़ रहा था। शक्तिशाली मगध साम्राज्य, भगवान बुद्ध, राजा जनक और सीतामैया से जुड़ी धरती के लोग ऐसे रोने-घिघियाने वाले नेता से कनेक्ट नहीं कर पा रहे थे। भाषण खत्म होते-होते गाँधी मैदान खाली हो चुका था।

बिहारी एक प्रजाति

“गंगा मैया, सम्राट अशोक, लिची-मालदह आम, बोधगया, बिजली-सड़क-पानी… ई सब पर कुछ नै बोली। एकदम बुड़बक है। माफी माँगने लगी। ऊ भी बिहारी के नाम पर। ‘अबे चल ना बिहारी… ओए सा# बिहारी’… ई सब तो हम लोग हर दिन सुनते हैं। इस पर काहे के लिए माफी माँगी?” – रोहनवा ने अपनी बात रखी।

मंगरुआ ने दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया – “दिल जीतना चाह रही थी। उसको का पता है कि हम असली गाँधी के चंपारण वाली धरती से हैं। चारा चोर-भ्रष्टाचारी ललुआ तक को हम माफ कर देते हैं। उसकी पार्टी और बेटा ऐसे थोड़े ना सबसे बड़का दल बन गया है बिहार में। नेता में हनक होना चाहिए, डरपोक नेता से हुआ है कुछ आज तक!”

“बिहारी नाम की कोई चीज है ही नहीं, यह एक प्रजाति है।” अनिल ने मानो पत्थर दे मारा हो प्रियंका गाँधी को। तर्क को आगे बढ़ाते हुए वो कहता है – “देश-दुनिया में कहीं भी यह प्रजाति पाई जा सकती है। इसकी अपनी कोई पहचान नहीं होती। रिक्शे-ठेले वाले से लेकर मंत्री-संतरी तक कोई भी बिहारी हो सकता है। दिल्ली हो या कनाडा… यह प्रजाति कभी भी सड़क जाम नहीं करती। नेता इस प्रजाति की खूबियाँ जानते हैं, इसलिए इनके सामने कभी हँसते हैं, कभी रोते हैं। सबसे कमाल की बात यह कि बिहारी प्रजाति भी नेताओं को जानती है… उनकी जाति देख कर बटन दबा देती है।”

बिहार में कॉन्ग्रेस की सरकार?

लखनऊ जीत का सपना प्रियंका गाँधी के लिए अधूरा भले रह गया हो लेकिन वो लड़ सकती हैं, क्योंकि वो लड़की हैं। 2025 के बिहार चुनाव में वो लड़ रही हैं, रो रही हैं। कॉन्ग्रेस ऑफिस के बाहर बोर्ड भी लगा रखा है – ‘एक बिहारी, 100 पर भारी’

पेपर वाले ने ‘बिहार में बन गई कॉन्ग्रेस की सरकार’ बोल कर इतनी जोर से अखबार फेंका कि नींद खुल गई। तब से हँसे जा रहा हूँ।

‘पीओके समेत पूरा कश्मीर भारत का अभिन्न अंग’: नागपुर के KFC रेस्टोरेंट में लगे पोस्टर, जानिए क्या है पूरा मामला

रेस्टोरेंट चेन केएफसी के पाकिस्तान स्थित फ्रेंचाइजी ने कश्मीर सॉलिडेरिटी दिवस का समर्थन करते हुए ट्वीट किया था, जिसको लेकर भारत में लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार (14 फरवरी 2022) को नागपुर में विरोध दिखा। नागपुर के श्रद्धानंद पेठ में माटे स्क्वेयर स्थित KFC के आउटलेट में राष्ट्रीय युवा गठबंधन (NYA) के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध किया।

यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि करीब 15-20 लोग ‘केएफसी मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए रेस्टोरेंट के अंदर घुसते हैं। ये लोग हाथ में तिरंगा लिए हुए थे। प्रदर्शन कर रहे एनवाईए कार्यकर्ता अपने साथ कश्मीर पर कब्जा करने के मकसद से पाकिस्तान का समर्थन करने वाले रेस्टोरेंट चेन की आलोचना करने वाले पोस्टर भी साथ लाए थे। प्रदर्शनकारियों ने KFC से कश्मीर पर उसके स्टैण्ड स्पष्ट करने की माँग की। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “आपकी कंपनी देश द्रोही कंपनी है, अब आप हमें ये बताइए कि आप किस तरह से अपनी माफी माँगेंगे।”

प्रदर्शनकारियों के विरोध के बीच रेस्टोरेंट के कर्मचारी ने माफी माँगी तो प्रदर्शनकारियों ने एंट्री गेट पर माफी माँगने की माँग की। इस मसले पर एनवाईए के अध्यक्ष राहुल पांडे कहते हैं, “केएफसी भारत में काम कर रहा है और इस तरह की देशविरोधी गतिविधियाँ नहीं चल सकती हैं यहाँ। आपको आज़ाद कश्मीर जैसे आंदोलनों में शामिल होने का अधिकार किसने दिया?”

साभार: नागपुर टुडे

केएफसी के स्टाफ को एनवाईए के कार्यकर्ताओं ने उसके एंटी इंडिया ट्वीट के बारे में बताते हुए वहाँ रिसेप्शन काउंटर पर एक पोस्टर भी लटका दिया, जिसमें लिखा था, “पीओके समेत पूरा कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।” इसके बाद एनवाईए के सदस्यों ने रेस्टोरेंट के स्टाफ से भी ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद, कश्मीर इंडिया का है, पीओके भी इंडिया का है!’ के नारे भी लगवाए। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने केएफसी रेस्टोरेंट की दीवारों पर ‘कश्मीर बिलोंग्स टू कश्मीरी’, ‘शेम ऑन यू’ और केएफसी पाकिस्तान के आपत्तिजनक ट्वीट के साथ पोस्टर भी चिपकाए।

जब ऑपइंडिया से इस विषय में बात करते हुए आउटलेट के कर्मियों ने इस मसले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। वहीं एनवाईए का विरोध शांतिपूर्ण था।

क्या है मामला

पाकिस्तान में केएफसी की फ्रेंचाइजी ने 5 फरवरी 2021 को पाकिस्तान में ‘कश्मीर एकजुटता दिवस’ मनाते हुए आतंकवाद का समर्थन करती इमेज ट्वीट किया था। इसी तरह का एक अन्य मैसेज फेसबुक पर भी केएफसी ने पोस्ट किया था। सालभर बाद उसकी यह करामात ऐसे सामने आ गई जब हुंडई पाकिस्तान ने ट्विटर के जरिए ‘कश्मीर सॉलिडेरिटी डे’ पर ऐसा ही एक ट्वीट किया। इसके बाद कंपनी के खिलाफ शुरू हुए विरोध के बाद पाकिस्तान में काम करने वाली दूसरी कंपनियों के भी ट्वीट सामने आ गए।

हालाँकि, इस तरह के भारत विरोधी बयानों के बीच भारत में हुंडई, केआईए मोटर्स और केएफसी ने अपने बयानों के लिए माफी माँग ली है।

राणा अयूब के ख़िलाफ़ मुंबई में FIR दर्ज, भगवाधारियों को बताया था- आतंकी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामी प्रोपगेंडे को हवा देने वाली राणा अयूब के विरुद्ध मुंबई पुलिस में एक वकील ने केस दर्ज कराया है। अयूब पर आरोप है कि उन्होंने कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब का विरोध करने वाले भगवाधारियों को आतंकी कहा। अयूब के ख़िलाफ़ ये शिकायत वकील आशुतोष जे दुबे ने दर्ज कराई है। उनकी माँग है कि 1.5 मिलियन फॉलोवर वाली राणा अयूब की विवादित वीडियो पर कार्रवाई की जाए जिसमें उन्होंने भगवा झंडा उठाने वाले छात्रों को आतंकी बताया था।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले वित्तीय धोखाधड़ी कर पकड़ी गईं वाशिंगटन पोस्ट की स्तंभकार राणा अयूब ने बीबीसी वर्ल्ड न्यूज से बुर्का विवाद पर अपना इंटरव्यू दिया था। इस इंटरव्यू में अयूब ने शैक्षणिक संस्थानों में न सिर्फ लड़कियों के हिजाब पहनने के मसले पर झूठ बोला था बल्कि जय श्री राम कहने वालों को ‘हिंदू आतंकी’ कहा था।

अयूब ने आर्टिकल 25 का हवाला देकर इस दौरान ये तो बताया था कि कैसे देश में हर नागरिक को अपने मजहब का अभ्यास करने का अधिकार है, लेकिन ये बताना भूल गईं कि हर शैक्षणिक संस्थान के पास भी अपने नियम बनाने का अधिकार है जिसमें ड्रेस कोड का निर्धारण आता है और जिसे हर छात्र को फॉलो करना होता है।

अपने इंटरव्यू में अयूब ने इतने झूठ बोले कि वो खुद आँकड़ों में कन्फ्यूज हो गईं। उन्होंने शुरू में कहा कि 100 हिंदुओं ने कर्नाटक में  मुस्लिम लड़की को घेरा और कुछ ही देर में वो बोलती सुनी गईं कि ये संख्या 200 थी। अयूब बोलीं, “ये वो भारत नहीं है जिस पर हमें कभी गर्व होता था। ये दक्षिणपंथी आतंकियों का भारत है।”

अपने इस इंटरव्यू में अयूब ने मुस्लिमों के साथ होती हिंसा, उनकी लिंचिंग, उन्हें नमाज न पढ़ने देने के मुद्दे को बढ़-चढ़ कर उठाया लेकिन ये नहीं बता पाईं कि कैसे मुस्लिम सार्वजनिक स्थल घेरकर नमाज पढ़ने का काम करते थे और कैसे देश में हिंदुओं के ख़िलाफ़ तमाम अपराध होते हैं। बात चाहे गुजरात के किशन भरवाड की हो या झारखंड के रुपेश पांडे की, अयूब ने अपने इंटरव्यू में हर हिंदू के साथ हुई बर्बरता को एक सिरे से नजरअंदाज कर दिया।

बुर्का प्रोटेस्ट पर UP पुलिस का लाठीचार्ज: गाजियाबाद में बिना इजाजत हो रहा था प्रदर्शन, रोका तो गाली-गलौच पर उतर आई भीड़

कर्नाटक से शुरू हिजाब/बुर्का विवाद (Hijab/Burqa Controversy) की आँच देश के हर कोने में पहुँच गई है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के खोड़ा में हिजाब के समर्थन में बुर्का पहनकर प्रदर्शन कर रही मुस्लिम महिलाओं और उनके पुरुष साथियों ने पुलिस के साथ अभद्रता, गाली-गलौच और मारपीट की। इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों ने उन पर लाठी चार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

पुलिस का कहना है कि राज्य में चुनाव आचार संहिता और धारा 144 लागू है, फिर भी बिना इजाजत लिए प्रदर्शन किया जा रहा था। खोड़ा थाना एसएचओ बृजेश कुमार कुशवाहा ने बताया कि रविवार (13 फरवरी) को हुए प्रदर्शन में एक होटल संचालक समेत करीब 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने प्रदर्शन की वीडियोग्राफी भी कराई है। इसके आधार पर अज्ञात महिलाओं और पुरुषों की पहचान की जा रही है।

इस मामले में पुलिस ने पहचान के आधार पर मंगलवार (15 फरवरी) को खोड़ा की रहने वाली इमराना और मुस्कान नाम की दो मुस्लिम महिलाओं से पूछताछ भी की। बताया जा रहा है कि इस प्रदर्शन में स्थानीय लोग शामिल थे, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि प्रदर्शन में बाहरी लोग शामिल थे। खुफिया विभाग प्रदर्शन के पीछे किसका हाथ है, इस बात की जाँच कर रही है।

खोड़ा इंस्पेक्टर ने बताया कि इस मामले में मुख्य आरोपी नजर मोहम्मद है, जो फरार है। वह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से जुड़ा हुआ है। नजर मोहम्मद इस पार्टी में किस पद पर है, अभी इस बात की जानकारी जुटाई जा रही है। उसने ओवैसी की पार्टी की कॉल बताकर महिलाओं को इकट्ठा किया गया था। महिलाओं को जुटाने की जिम्मेदारी मुस्कान पर थी। उन्हें बैनर-पोस्टर आदि सामान नजर मोहम्मद और राशिद ने मुहैया कराए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को तकरीबन 20-25 महिला और पुरुष हिजाब के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे। बिना अनुमति लिए प्रदर्शन करने के कारण जब पुलिस ने इनसे लौटने की अपील की तो ये प्रदर्शनकारी नारेबाजी करने लगे और सरकार विरोधी पोस्टर लहराने लगे। इसके बाद पुलिस ने पोस्टर छिनने की कोशिश की तो भीड़ ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की।

लाठी चार्ज होने के बाद सभी प्रदर्शनकारी वहाँ से भाग गए। SHO कुशवाहा ने बताया कि इस घटना से जुड़ा 30 सेकेंड का एक वीडियो बुधवार (16 फरवरी) को सामने आया है। यह वीडियो पास की बिल्डिंग की छत पर खड़े शख्स के द्वारा मोबाइल से बनाई गया है, जो अब वायरल हो रहा है।

बता दें कि प्रदर्शन के नाम कानून की धज्जियाँ वाले लोगों को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने आगाह करते हुए कहा था कि गजवा-ए-हिंद का सपना तो किसी का कयामत तक भी पूरा नहीं होगा। हिजाब को लेकर ANI से सीएम योगी ने कहा था, “हम इस देश और इसके संस्थान पर अपनी धार्मिक मान्यताएँ या चुनाव नहीं थोप सकते। क्या मैं यूपी के हर नागरिक और कर्मचारी से भगवा पहनने को बोलता हूँ? वो जो पहनते हैं ये उनकी मर्जी है। लेकिन स्कूलों में ड्रेस कोड को लागू किया जाना चाहिए। ये स्कूल और वहाँ के अनुशासन की बातें हैं।”

मौलवी नूर इस्लाम ने बच्ची से किया रेप: उर्दू सीखने आती थी, 7वीं में पढ़ती है पीड़िता

हरियाणा (Haryana) के सोनीपत (Sonipat) में सातवीं कक्षा की एक छात्रा से रेप (Rape) का मामला सामने आया है। आरोपित एक मौलवी है। घटना सोनीपत के थाना खरखोदा क्षेत्र की है। पुलिस ने छात्रा की माँ की शिकायत पर मौलवी के खिलाफ दुष्कर्म और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता उर्दू की पढ़ाई करने के लिए नूर इस्लाम नाम के मौलवी के पास जाती थी। सोमवार (14 फरवरी 2022) को इसी दौरान मौलवी ने उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि वह पढ़ने आई छात्र को अपनी कार में बैठाकर सुनसान जगह पर ले गया और उससे रेप किया। जब काफी देर तक बच्ची घर नहीं पहुँची तो उसकी माँ को चिंता होने लगी। वह उसे ढूँढने के लिए निकल पड़ी।

इस दौरान उसे पता चला कि उसकी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है। इसके बाद उसने इस बात की शिकायत खरखोदा थाना को दी। पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा। फिलहाल पुलिस आरोपित से गहनता से पूछताछ कर रही है। 

मामले की जानकारी देते हुए थाना खरखोदा प्रभारी जसपाल सिंह ने बताया, “हमें 7वीं कक्षा की एक छात्रा की माँ ने शिकायत दी थी कि उसकी बेटी नूर इस्लाम नाम के एक शख्स के पास उर्दू सीखने जाती है। बीते सोमवार को आरोपित ने उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया है। हमने छात्रा की माँ की शिकायत पर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पेशे से मौलवी बताया जा रहा है।”

इससे पहले तेलंगाना के हैदराबाद स्थित दारूल उलूम मदरसे में एक 10 साल के बच्चे के साथ कुकर्म का मामला सामने आया है। आरोपित मदरसे में अरबी पढ़ाने वाला 25 साल का शोएब अख्तर है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार यह मामला तब सामने आया जब बच्चा पिछले कई दिनों से लगातार दर्द की शिकायत कर रहा था। उसके जख्म और खून देख परिजन हैरान रह गए।

बीते साल नवंबर में भी दादरा नगर हवेली के सिलवासा स्थित एक मदरसे के छात्रावास में रहकर पढ़ने वाली नाबालिग लड़की ने मौलवी पर हॉस्टल में ही रेप करने का आरोप लगाया था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित मौलवी शेख मोहम्मद तारिक को पॉस्को एक्ट के तहत करवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया था।

इसी तरह इस साल की शुरुआत में बिहार के सीतामढ़ी जिले से मदरसे की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक मौलवी तबरेज़ ने मदरसे में पढ़ने के लिए आई नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार कर उसे गर्भवती कर दिया। उसने इस हरकत को रिकॉर्ड भी कर लिया और वीडियो के जरिए पीड़िता को ब्लैकमेल कर रहा था। 

बीते साल अगस्त में कर्नाटक के तुमकुरु जिले में नाबालिग लड़के से अप्राकृतिक यौनाचार के दोषी पाए गए मुफ्ती मुशर्रफ को बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट ने 11 साल जेल की सजा सुनाई थी। उत्तर प्रदेश का रहने वाला मुशर्रफ तुमकुरु में अमलापुर के पास एक मदरसे में शिक्षक था। उसने 17 अप्रैल, 2015 को मदरसे में एक नाबालिग बच्चे के साथ कुकर्म किया था। यह घटना तब सबके सामने आई, जब नाबालिग की माँ मदरसे में उससे मिलने गई। 13 वर्षीय बच्चे ने उस समय अपनी माँ को मुशर्रफ की करतूत के बारे में बताया और उसे मदरसे से वापस ले जाने के लिए कहा था।

बप्पी लहरी के निधन के बाद गूगल पर लोग सर्च कर रहे OSA, जानें क्या है ये: कुछ ‘संघी’ लिख बता रहे अपनी ‘बीमारी’

मशहूर सिंगर बप्पी लहरी के निधन के बाद जहाँ बॉलीवुड जगत से लेकर सामान्य जन उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं मीडिया में लहरी के निधन की खबरों के बाद अब उनके जीवन, उनके करियर की तरह उनकी बीमारी पर चर्चा शुरू हो गई है। बीमारी पर बात करके समझाया जा रहा है कि किस वजह से आखिर इतनी बड़ी शख्सियत को 69 साल में दुनिया को अलविदा कहना पड़ा।

ऑब्स्ट्रक्ट‍िव स्लीप एपन‍िया (Obstructive Sleep Apnea)

डॉक्टरों ने बताया कि बप्पी लहरी को एक माह पहले फेफड़ों में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया था। ये इंफेक्शन उन्हें ऑब्स्ट्रक्ट‍िव स्लीप एपन‍िया (Obstructive Sleep Apnea) के कारण हुआ था। जानकारी के मुताबिक, लंबे समय से बीमार चल रहे बप्पी लहरी को एक साल से ऑब्स्ट्रक्ट‍िव स्लीप एपन‍िया (OSA) और चेस्ट इन्फेक्शन की समस्या थी। इस बीमारी से साँस लेने में परेशानी होती है। मरीज के सोते वक्त ही बार-बार साँस रुकती और बढ़ती है। मरीज को पता भी नहीं चलता कि साँस कब रुकी और कब चलना शुरू हुई। कई बार ये परेशानी 1 मिनट तक भी रहती है।

बताया जाता है कि ये बीमारी खून में ऑक्सीजन की कमी से और कॉर्बन डाई ऑक्साइड जमा होने से होती है। बीमारी में मरीज का दिमाग एक्टिव हो जाता है और कुछ सेकेंड के लिए जगता है ताकि साँस लेने की कोशिश की जाए। साँस जाने और आने की परेशानी ऐसी होती है कि व्यक्ति को कई बार उठना पड़ता है और एक दो बार गहरी साँस लेनी पड़ती है। कथिततौर पर ये सब 5 से 30 बार भी हो सकता है। इस बीमारी से जूझने वाले लोग हमेशा उबासी लेते रहते हैं क्योंकि उनकी नींद कभी रात में पूरी नहीं होती।

OSA होनी की वजह

वैसे तो स्लीप एपनिया कई प्रकार के होते हैं लेकिन इनमें सबसे कॉमन ऑब्सट्रक्टिव स्लीम एपनिया है। ये तब होता है जब गले की मांसपेशियाँ ढीलीं हो और एयरफ्लो में रुकावट आए। इन परेशानियों के चलते मरीज को तेज खर्राटे आते हैं और साँस लेने की परेशानी के कारण खून में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। बीमारी के लक्षणों में- ज्यादा नींद आना, खर्राटे लेना, सोते में साँस रुक-रुक कर आना, हाँफना, घुटन होना, मुँह सूखना, मूड चेंज होना, हाई बीपी जैसे चीजें आती हैं। इस बीमारी होने के पीछे का एक कारण मोटापा होता है। साँस की नली  में फैट जमता है तो साँस लेना भारी हो जाता है और मोटापा अन्य बीमारी भी मरीज को देता चला जाता है। इसके बाद हाई ब्लड प्रेशर-डायबिटीज, अस्थमा ग्रसित मरीजों को भी बीमारी का खतरा रहता है।

भाजपा से नफरत करने वाले लहरी को बुला रहे संघी

यहाँ बता दें कि सिर्फ ये बीमारी ही अकेली वजह नहीं है जिसकी वजह से बप्पी लहरी पर बात हो रही है। सोशल मीडिया पर कुछ चुनिंदा लोग ऐसा भी देखने को मिले जो बप्पी लहरी के निधन के बाद भी उनमें संघी और बीजेपी खोज रहे थे। उनके लिए इतनी बड़ी शख्सियत का जाना हँसने का विषय इसलिए है क्योंकि सिंगर का झुकाव भाजपा की ओर था। उनके इस झुकाव की वजह से निधन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर संघी बताया जा रहा है।

सिर्फ हिजाब ही क्यों? हिन्दू लड़कियों के चूड़ी पहनने पर भी उठा सवाल: कर्नाटक बुर्का विवाद पर आज भी नहीं हुआ फैसला, कल फिर होगी सुनवाई

कर्नाटक हिजाब विवाद (Karnataka Hijab Row) पर हाई कोर्ट ने आज 16 फरवरी 2022 को चौथे दिन फिर से सुनवाई की, हालाँकि आज भी फैसला नहीं आया और अब कल गुरुवार को फिर से सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ आज दोपहर 2:30 बजे से मामले की सुनवाई कर रही थी।

एडवोकेट कुमार ने बेंच के सामने कई दलीलें दी जिनमें से एक में यह भी था कि सरकार अकेले हिजाब का मुद्दा क्यों क्यों उठा रही है? हिन्दू लड़कियाँ चूड़ी पहनती हैं, क्या वे धार्मिक प्रतीक नहीं हैं। उन्हें बाहर क्यों नहीं निकाला जाता।

फ़िलहाल, बुधवार को भी कर्नाटक हाईकोर्ट में इस मामले पर कोई फैसला नहीं आ सका। सीनियर एडवोकेट आदिश अग्रवाल ने इंटरवेंशन एप्लिकेशन के बारे में बताया, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि केस में किसी भी इंटरवेंशन की सुनवाई तब तक नहीं होगी जब तक कि जरूरी न हो। मामले की सुनवाई गुरुवार 17 फरवरी दोपहर को भी होगी।

उडुपी के एक सरकारी कॉलेज से शुरू हुए हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाई कोर्ट में चौथे दिन सुनवाई चल रही है। मुस्लिम छात्राओं के वकील आर्टिकल 25 का हवाला देते हुए इसे जरूरी इस्लामिक प्रथा बता रहे हैं। वहीं हाई कोर्ट में सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत (Devdutt Kamat) ने राज्य सरकार के नोटिफिकेशन को अवैध ठहराते हुए कहा है कि कर्नाटक एजुकेशन एक्ट में इस संबंध में प्रावधान नहीं है।

बता दें कि चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और और जस्टिस जेएम खाजी की फुल बेंच के पास ये मामला है। सुनवाई शुरू होते ही वकील सुभाष झा ने कहा कि यह लगातार चौथा दिन है जब मामले की सुनवाई हो रही है। कोई भी वकील घंटों दलील देने में सक्षम है लेकिन जितनी जल्दी संभव हो उतनी जल्दी मामले पर फैसला होना चाहिए।

आज की सुनवाई की खास बातें

चीफ जस्टिस : याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता कर रहे हैं। हस्तक्षेपों पर विचार करने का सवाल कहाँ है? इन आवेदनों से कोर्ट का समय बर्बाद होगा।

एडवोकेट जनरल: सबरीमाला के मामले में, न्यायमूर्ति इंदुआ मल्होत्रा ने कहा था कि धार्मिक मामलों में जनहित याचिका में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

वरिष्ठ वकील रवि वर्मा कुमार: कर्नाटक एजुकेशन रूल का नियम 11 कहता है कि शैक्षणिक संस्थान को माता-पिता को वर्दी बदलने के लिए एक साल का अग्रिम नोटिस देना चाहिए। 1995 के नियमों में किए गए ये प्रावधान सामान्य हैं। पीयू कॉलेज एक अलग नियम के तहत आते हैं। इस तथ्य पर ध्यान देना बहुत जरूरी है कि कॉलेज विकास परिषद (CDC) एक प्राधिकरण नहीं है जो नियमों के तहत स्थापित या मान्यता प्राप्त है। सरकारी आदेश में घोषित किया गया है कि पीयू कॉलेजों के लिए कोई तय यूनिफॉर्म नहीं है।

इस तथ्य पर ध्यान देना बहुत जरूरी है कि कॉलेज विकास परिषद (CDC) एक प्राधिकरण नहीं है जो नियमों के तहत स्थापित या मान्यता प्राप्त है। सरकारी आदेश में घोषित किया गया है कि पीयू कॉलेजों के लिए कोई तय यूनिफॉर्म नहीं है। न तो एजुकेशन ऐक्ट के प्रावधान और न ही नियम कोई ड्रेस निर्धारित करते हैं। न तो कानून के तहत और न ही नियमों के तहत हिजाब पहनने पर प्रतिबंध है।

चीफ जस्टिस: क्या शैक्षणिक मानकों को बनाए रखने के लिए ड्रेस निर्धारित नहीं की जा सकती है?

वरिष्ठ वकील रविवर्मा कुमार: बहुत सम्मान के साथ मैं कहना चाहता हूँ कि शैक्षणिक मानकों का ड्रेस से कोई संबंध नहीं है। अकादमिक मानक छात्र-शिक्षक, पाठ्यक्रम आदि से संबंधित हैं। सीडीसी के पास छात्रों के खिलाफ पुलिस जैसे अधिकार नहीं हो सकते हैं।

जस्टिस कृष्ण दीक्षित: यह सही सवाल नहीं हो सकता है। यदि उस दृष्टिकोण को लिया जाता है, तो कोई कह सकता है कि कक्षा में हथियार ले जाने के लिए किसी लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है क्योंकि कोई निषेध नहीं है। मैं तार्किक रूप से विश्लेषण कर रहा हूँ कि आपका प्रस्ताव हमें किस ओर ले जा सकता है। यदि यह निर्धारित नहीं है तो कृपाण ले जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालाँकि, नियम 9 के तहत निर्धारित करने की शक्ति है। इस पर स्वतंत्र रूप से तर्क देने की जरूरत है।

वरिष्ठ अधिवक्ता रविवर्मा: एक विधायक (जो समिति का अध्यक्ष भी है) एक राजनीतिक दल और विचारधारा का प्रतिनिधित्व भी करता है। क्या आप छात्रों के कल्याण को किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक विचारधारा को सौंप सकते हैं? इस तरह की समिति का गठन हमारे लोकतंत्र को मौत का झटका देता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रोफेसर रविवर्मा– शासनादेश में किसी अन्य धार्मिक चिन्ह पर विचार नहीं किया गया है। सिर्फ हिजाब ही क्यों? क्या यह उनके धर्म के कारण नहीं है? मुस्लिम लड़कियों के साथ भेदभाव विशुद्ध रूप से धर्म पर आधारित है। सरकार अकेले हिजाब क्यों चुन रही है… चूड़ी पहने हिंदू लड़कियों और क्रॉस पहनने वाली ईसाई लड़कियों को बाहर नहीं भेजा जाता है।

हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई से पहले हुबली के एक स्कूल में मुस्लिम छात्राओं द्वारा हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का पालन नहीं किया गया। जिसके बाद हुबली के एसजेएमवी महिला कालेज में छुट्टी कर दी गई है। एएनआइ की रिपोर्ट के अनुसार, एसजेएमवी महिला कालेज के प्राचार्य लिंगराज अंगड़ी ने बताया कि, आज हमने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का पालन करने के लिए कुछ छात्रों से कहा था, लेकिन उन्होंने ड्रेस कोड का पालन नहीं किया और हिजाब पहनकर स्कूल में आने की बात कही। जिसके बाद हमने छुट्टी घोषित कर दी।

वरिष्ठ वकील यूसुफ मुच्छल भी मुंबई से जुड़े। मुच्छल ने कहा, मेरे साथी काउंसल ने जो तर्क दिया, उसका मैं समर्थन करता हूँ। श्री हेगड़े, श्री कामत और प्रोफेसर रविवर्मा कुमार। मैं दो-तीन बिंदुओं पर विस्तार से बताने के लिए इजाजात चाहता हूँ, जिन पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया है।

वरिष्ठ वकील यूसुफ मुच्छल: कर्नाटक सरकार का जीओ स्पष्ट रूप से मनमानी है। मैं शायरा बानो (ट्रिपल तालक केस) से तीन पैराग्राफ का उल्लेख करूँगा और दिखाऊंगा कि कैसे लड़कियों को हेडस्कार्फ पहनने से रोकने वाला यह जीओ स्पष्ट रूप से मनमाना है।

मुख्य न्यायाधीश: आप किस उद्देश्य से इस फैसले का हवाला देना चाहते हैं? मनमानापन दिखाने के लिए।

मुख्य न्यायाधीश: ठीक है।

वरिष्ठ वकील यूसुफ मुच्छल: अगर कोई लड़की चश्मा पहने हुए है, तो क्या इस पर जोर दिया जा सकता है कि वह यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है? आप इसे इतनी सख्ती से नहीं ले सकते।

मुख्य न्यायाधीश: क्या यह यूनिफॉर्म का हिस्सा है?

वरिष्ठ वकील यूसुफ मुच्छल: यहाँ इस मामले में स्कूल में दाखिला लेने के बाद से ही बच्चियों ने सिर पर दुपट्टा ओढ़ रखा था।

वरिष्ठ वकील यूसुफ मुच्छल: वे सिर पर सिर्फ एक एप्रन लगा रहे हैं। जब हम यूनिफॉर्म कहते हैं, तो हम कड़ाई से ड्रेस कोड तक ही सीमित नहीं रह सकते। स्कूल में क्या प्रथा अपनाई गई थी, यह देखना होगा। इसे बिना सूचना के बदल दिया गया।

मुख्य न्यायाधीश: क्या कोई हेडगियर यूनिफॉर्म का हिस्सा था?

वरिष्ठ वकील यूसुफ मुच्छल: निष्पक्षता यही है कि पहले नोटिस दिया जाए। निष्पक्षता को सुनने की आवश्यकता है। स्कूल में किसी तरह की परेशानी से बचने के लिए पीटीए कमेटी का गठन किया गया, उनसे सलाह नहीं ली गई। निष्पक्षता के लिए जरूरी है कि नोटिस दिया जाना चाहिए। पीटीए कमेटी से परामर्श क्यों नहीं लिया गया? ऐसी क्या जल्दी थी? जब से उन्होंने स्कूलों में प्रवेश लिया तब से पहनने की प्रथा थी। बदलने की क्या जल्दी थी? छात्र इसी जल्दबाजी का विरोध कर रहे हैं। वे किसी भी धार्मिक अधिकार का दावा नहीं कर रहे, मगर सिर्फ लड़कियों का विरोध हो रहा है। क्या यह निष्पक्षता है? दोनों पक्षों को सुना जाना चाहिए था और समाधान निकाला जाना चाहिए था। यह जाहिर तौर पर मनमानी का आधार है।

वरिष्ठ वकील यूसुफ मुच्छल: धर्म के अभिन्न अंग के बारे में सवाल तब उठता है जब अनुच्छेद 26 के तहत एक संप्रदाय की ओर से अधिकार का दावा किया जाता है, न कि तब जब कोई व्यक्ति अनुच्छेद 25 के तहत अंतरात्मा की स्वतंत्रता का दावा कर रहा हो। तथ्य यह है कि ऐसा अन्य छात्रों (दूसरे धर्म) के विरोध के कारण किया जा रहा है, यह शासनादेश में भी कहा गया है। इसलिए यह पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। यह पूरी तरह से अनुचित है। जब अनुच्छेद 25(1) और 19(1)(ए) के तहत अधिकार का दावा किया जाता है, तो व्यक्ति की ओर से एक ईमानदार फेथ का सम्मान रखना मायने रखता है। जब अधिकार को अंतःकरण के विषय के रूप में दावा किया जाता है, तो इस सवाल की गहराई में जाने की जरूरत ही नहीं है कि क्या यह धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं।

वहीं जब मुच्छल ने बहस के लिए और समय माँगा मगर बेंच ने इनकार कर दिया। मुच्छल से बाकी के आर्गुमेंट लिखित में देने के लिए कहा। मुच्छल ने अगले दिन जिरह के लिए 10 मिनट का समय माँगा। हाई कोर्ट में बुधवार की सुनवाई पूरी हुई। गुरुवार को दोपहर ढाई बजे आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

गौरतलब है कि मंगलवार को सुनवाई के दौरान मुस्लिम याचिकाकर्ताओं के वकील ने दक्षिण अफ्रीका से लेकर तुर्की तक का हवाला देते हुए स्कूलों में बुर्का पर बैन हटाने की अपील की। कहा कि हमारा सेक्युलरिज्म सकारात्मक है, न कि इन देशों की तरह नकारात्मक।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि, हिजाब धार्मिक कट्टरता नहीं, बल्कि आस्था और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। इस दौरान उन्होंने विदेशी अदालतों के फैसलों का भी उल्लेख किया। मुख्य न्यायाधीश रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की 3 जजों की बेंच राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

बता दें कि मंगलवार को हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देव दत्त कामत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील पेश की। हिजाब विवाद पर दक्षिण अफ्रीका की एक अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कामत ने तर्क दिया, “यह मामला वर्दी के बारे में नहीं है, बल्कि मौजूदा वर्दी को छूट का है।”

वहीं याचिकाकर्ता रेशम की ओर से अधिवक्ता रविवर्मा कुमार ने भी कोर्ट में अपनी दलील शुरू की। हालाँकि, इस बीच कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई कल दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी है। आज याचिकाकर्ता रेशम की ओर से अधिवक्ता रविवर्मा कुमार की दलील से सुनवाई शुरू की जाएगी।

देवदत्त कामत ने सुनवाई के दौरान कहा कि दक्षिण अफ्रीका के फैसले में यह भी कहा गया है कि अगर अन्य छात्र हैं जो अब तक अपने धर्मों या संस्कृतियों को व्यक्त करने से डरते थे और जिन्हें अब ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, तो यह जश्न मनाने की बात है, डरने की नहीं। कामत ने आगे कहा कि हमारा संविधान सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता का पालन करता है, न कि तुर्की धर्मनिरपेक्षता की तरह जो नकारात्मक धर्मनिरपेक्षता है। हमारी धर्मनिरपेक्षता सुनिश्चित करती है कि सभी के धार्मिक अधिकार सुरक्षित रहें।

या तो पंजाब का CM बनूँगा या स्वतंत्र देश (खालिस्तान) का पहला PM: केजरीवाल ने कहा था, कुमार विश्वास का खुलासा

कवि कुमार विश्वास ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में विश्वास ने उन पर अलगावादियों के सम​र्थन का आरोप लगाया। दावा किया कि एक बार केजरीवाल ने उनसे कहा था कि या तो वे पंजाब के मुख्यमंत्री बनेंगे या फिर स्वतंत्र देश (खालिस्तान) के पहले प्रधानमंत्री बनेंगे। कुमार विश्वास (Kumar vishwas) भी आप में रह चुके हैं और कभी केजरीवाल से उनकी काफी करीबी थी।

16 फरवरी 2022 को समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में कुमार विश्वास ने पंजाब विधानसभा चुनाव में केजरीवाल के प्रचार पर चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें समझने की जरूरत है कि पंजाब एक राज्य नहीं। पंजाब एक भावना है। पंजाबियत पूरी दुनिया में एक भावना है। उन्होंने कहा, “ऐसे में एक ऐसा आदमी जिसे पिछले चुनाव में मैने ये सुझाव दिया था कि अलगाववादी तत्वों का समर्थन न लें, जो कि पिछले चुनाव में अलगाववादियों से मिला हुआ था। लेकिन, उसने कहा था कि नहीं-नहीं हो जाएगा चिंता मत करो। जब मैंने उससे पूछा कि वो कैसे करेगा तो उसने इसका फार्मूला भी बताया था कि भगवंत मान और फुलका को लड़वा दूँगा। आज भी वो उसी रास्ते में है। नहीं भी होगा तो सरकार को कंट्रोल करने के लिए कोई न कोई कठपुतली बैठा लेगा।”

केजरीवाल के दिमाग में गहरे बेस अलगाववाद की भावना पर बात करते हुए विश्वास ने कहा, “उसने मुझसे ऐसी भयानक बातें बोली हैं जो पंजाब में सभी को पता है। एक दिन जब मैंने उससे 2020 के जनमत संग्रह के बारे में बात की तो वो कहता है कि तू चिंता मत कर एक दिन मैं या तो स्वतंत्र सूबे का मुख्यमंत्री बनूँगा या फिर स्वतंत्र राष्ट्र (खालिस्तान) का पहला प्रधानमंत्री बनूँगा। जब मैंने बताया कि इस रेफरेंडम को आईएसआई से लेकर दुनियाभर के अलगाववादी तत्व फंडिंग कर रहे हैं, तो उन्होंने मुझे चिंता नहीं करने को कहा।”

एक्ट्रेस गुल पनाग ने भी लगाए थे यही आरोप

यह पहली बार नहीं है, जब केजरीवाल पर इस तरह के आरोप लगे हों। इससे पहले साल 2018 में एक्ट्रेस गुल पनाग ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे। पनाग ने पंजाब में खालिस्तानी समर्थकों को ‘के’ गैंग बताते हुए कहा था, “यह बहुत ही खराब तरीके की इश्कबाजी है। जिसको लेकर मैंने बार-बार चेताया था। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे पंजाब को ‘समझ’ नहीं पाए। मुझे लगा लगा कि यह ‘के’ गैंग का चुनावी वेटेज है। हम सभी पंजाब को बहुत अच्छे तरीके से जानते हैं। लेकिन अफसोस!”

गुल पनाग का 2018 का ट्वीट

उल्लेखनीय है कि 2017 में हुए विधानसभा के चुनावों के दौरान प्रतिबंधित सिख संगठन इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) के गुरदयाल सिंह ने केजरीवाल का समर्थन और आप का प्रचार किया था। 2018 में रिपब्लिक टीवी ने खुलासा किया था कि पंजाब चुनाव के दौरान आप को खालिस्तानियों से फंडिंग मिली थी।

‘सरकारी आदेश से महत्वपूर्ण हमारी आस्था’: कर्नाटक में बुर्कानशीं छात्राओं ने निकाला जुलूस, लगे ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे

कर्नाटक (Karnataka) के स्कूल-कॉलेजों में हिजाब (Hijab) पहनने को लेकर शुरू हुआ मुस्लिम लड़कियों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। इसी क्रम में बुधवार (16 फरवरी) से राज्य में कॉलेज एक बार फिर से खुल गए हैं, जहाँ बुर्का पहनी मुस्लिम छात्राओं को कॉलेजों में प्रवेश नहीं देने पर मुस्लिमों का गुस्सा भड़क उठा। इसके बाद राज्य के तुमकुर में हिजाब पहनी मुस्लिम छात्राओं ने सड़क पर ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के भड़काऊ नारों के साथ जुलूस निकाला। साथ ही एक कॉलेज पर PFI का पोस्टर लगा दिया गया।

राज्य के बीजापुर, कलबुर्गी, विजयपुर, उडुपी, यदगीर, शिमोगा सहित कई शहरों में मुस्लिम छात्राएँ जानबूझकर हिजाब पहन स्कूल पहुँचीं। इसी तरह के एक वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि ये मुस्लिम छात्राएँ गले में आईडेन्टिटी कार्ड डाले सड़क पर मजहबी नारेबाजी कर रही हैं। ये लगातार ‘अल्लाह-हु-अकबर’ चिल्लाने के साथ ‘वी वॉन्ट जस्टिस’ के नारे लगा रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के अधिकतर सरकारी कॉलेजों में बुर्के या हिजाब पहनकर आई मुस्लिम छात्राओं को कॉलेज के अंदर घुसने से रोक दिया गया। इसके बाद मुस्लिम छात्राएँ नारेबाजी करने कर माहौल को एक बार फिर गरमाने की कोशिश करने लगीं। इस तरह की घटनाओं से राज्य में एक बार फिर से तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया है।

वहीं, शिवमोगा जिले में स्थित सागर गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में हिजाब के कारण तनाव बढ़ने पर कॉलेज प्रशासन ने एक दिन की छुट्टी कर दी। इसी तरह से जिले के डीवीएस कॉलेज में अंदर आने की अनुमति से इनकार करने पर मुस्लिम छात्राओं ने कहा कि किसी भी सरकारी आदेश से ज्यादा महत्वपूर्ण उनके लिए उनकी आस्था है। एक लड़की ने कहा, “आज हमारी परीक्षा थी, लेकिन हमें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। हमारे लिए अपने धर्म का पालन शिक्षा जितना ही महत्वपूर्ण है और बुर्का हमारी आस्था का हिस्सा है। हम इसे हटाने नहीं देंगे।”

शिवमोगा शहर के ही मौलाना अब्दुल कलाम आजाद इंग्लिश मीडियम स्कूल के गेट पर कुख्यात इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का एक पोस्टर चिपका दिया गया। प्रशासन ने माहौल को भाँपते हुए उसे जल्दी में हटा दिया। इस पोस्टर में PFI ने पॉपुलर फ्रंट डे मनाने का आह्वान किया है। 

गौरतलब है कि हिजाब विवाद पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि जब तक हिजाब विवाद पर अदालत का फाइनल फैसला नहीं आ जाता है, तब तक किसी भी शिक्षण संस्थानों में हिजाब और भगवा शॉल जैसे धार्मिक प्रतीकों को नहीं पहन सकेगा। वहीं, राज्य के गृह मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र ने कहा है कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कर्नाटक विधानसभा में कॉन्ग्रेस ने उठाया हिजाब का मुद्दा

कर्नाटक विधानसभा के दूसरे दिन मंगलवार (15 फरवरी 2022) को कॉन्ग्रेस ने शून्यकाल में हिजाब विवाद को उठाया। विधानसभा में विपक्ष के उप नेता यूटी खादर स्कूलों में अराजकता की स्थिति की बात करते हुए दावा किया कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को लागू करने को लेकर भ्रम की स्थिति है। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन शिक्षकों को भी स्कूल परिसर में आने से पहले हिजाब हटाने के लिए कह रहे हैं, जबकि कोर्ट ने ड्रेस कोड पर जोर दिया है। वहीं, कॉन्ग्रेस के एमएलसी हरीश कुमार ने इसे अनावश्यक विवाद करार दिया है।

कब से चल रहा है यह मामला

पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है।