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जिनकी दलीलों से फाँसी पर लटका पाकिस्तानी आतंकी आमिर अजमल कसाब, उनको राज्यसभा में भेजते ही कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम को याद आई ‘बिरयानी’: राष्ट्रहित पर तुष्टिकरण भारी

मशहूर वकील उज्ज्वल निकम आजकल सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। वजह? 26/11 मुंबई हमलों में आतंकी अजमल कसाब को फाँसी की सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले उज्जवल निकम को राष्ट्रपति ने राज्यसभा का नामित सदस्य बनाया है। राष्ट्रपति ने उन्हें ये सम्मान दिया, लेकिन विपक्ष खासकर कॉन्ग्रेस समर्थक और कुछ मुस्लिम एक्टिविस्ट इस बात से भड़के हुए हैं। उज्जवल निकम की पुरानी बात को उठाकर कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ट्रोल कर रहा है, जिसमें निकम ने कहा था कि कसाब को जेल में बिरयानी दी गई।

हालाँकि बाद में निकम ने खुद माना कि ये बात उन्होंने गढ़ी थी, ताकि कसाब के लिए जनता में हमदर्दी न बढ़े। लेकिन अब ट्रोलर्स इसे बीजेपी की साजिश और निकम का झूठ बताकर हमला बोल रहे हैं। सोशल मीडिया पर ट्रोल करने वालों में कई तरह के लोग शामिल हैं। सबसे ज्यादा सक्रिय हैं कॉन्ग्रेस के लोग, उसके समर्थक और कुछ ऐसे एक्टिविस्ट जो मुस्लिम वोट बैंक से जुड़े मुद्दों पर बोलते रहते हैं।

इसी में से एक हैं कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता और मुंबई हमलों के समय पत्रकार रही सुप्रिया श्रीनेता। सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर लिखा, “निकम ने कसाब को बिरयानी की फर्जी कहानी फैलाई, जिसे बीजेपी ने प्रचार के लिए इस्तेमाल किया और अब निकम को राज्यसभा सीट देकर इनाम दिया गया। इनका कहना है कि निकम ने कॉन्ग्रेस को बदनाम किया।”

पप्पू यादव ने लिखा कि मोदी जी ने निकम को झूठ बोलने का इनाम दिया, क्योंकि बिरयानी की बात फर्जी थी।


शेख शफीक अंसारी ने निकम के बयान को कोट किया कि कसाब ने बिरयानी मांगी थी, और बाद में निकम ने खुद माना कि ये झूठ था। इन्हें लगता है कि निकम ने ये सब सांप्रदायिक माहौल बनाने के लिए किया।

कॉन्ग्रेस समर्थक पत्रकार ने लिखा कि निकम ने बिरयानी की झूठी कहानी फैलाई, जिससे बीजेपी और संघ को कॉन्ग्रेस के खिलाफ प्रचार का मौका मिला। अब निकम को राज्यसभा सीट सांप्रदायिक सोच के लिए मिली, न कि कानूनी योग्यता के लिए।

वैसे, मुकेश कुमार की मानें तो उज्जवल निकम कोई ज्ञानी वकील नहीं हैं और न ही उन्हें कानून से कुछ लेना देना है। खैर, इन हास्यास्पद बातों पर क्या लिखें, ये सोचने का भी मन नहीं करता।

बहरहाल, उज्जवल निकम की ट्रोलिंग की वजह है – बिरयानी वाली बात। 26/11 के मुंबई हमलों के बाद, जब कसाब को पकड़ा गया था, निकम पब्लिक प्रॉसीक्यूटर थे। उन्होंने मीडिया में कहा कि कसाब ने जेल में बिरयानी माँगी थी। ये बात आग की तरह फैली। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया और कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार पर हमला बोला कि वो आतंकियों को बिरयानी खिला रही है। बाद में निकम ने माना कि ये बात झूठ थी। उन्होंने ये इसलिए कहा था ताकि कसाब के लिए जनता में कोई हमदर्दी न बढ़े, क्योंकि कुछ लोग कसाब को ‘बेचारा’ दिखाने की कोशिश कर रहे थे।

ट्रोलर्स अब यही बात पकड़कर कह रहे हैं कि निकम ने देश को गुमराह किया, कॉन्ग्रेस को बदनाम किया और अब बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा सीट देकर झूठ का इनाम दिया। लेकिन असल में ये सिर्फ बहाना है। असली वजह है राजनीति और वोट बैंक। ट्रोलर्स खासकर कॉन्ग्रेस समर्थक और कुछ मुस्लिम एक्टिविस्ट इस मुद्दे को उठाकर दो चीजें कर रहे हैं-

  1. बीजेपी को घेरना : निकम को बीजेपी से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि बीजेपी ने उन्हें 2024 में मुंबई से लोकसभा टिकट दिया था (हालाँकि वो हार गए) और अब राज्यसभा सीट दी। ट्रोलर्स इसे बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति से जोड़ रहे हैं।
  2. मुस्लिम वोट बैंक को खुश करना : कसाब एक पाकिस्तानी आतंकी था, जिसने 150 से ज्यादा लोगों की जान ली। फिर भी कुछ लोग उसे ‘पीड़ित’ दिखाने की कोशिश करते हैं। बिरयानी वाली बात को उठाकर ट्रोलर्स ये दिखाना चाहते हैं कि कसाब के साथ गलत हुआ। ये मुस्लिम वोटर्स को लुभाने की रणनीति है, क्योंकि कुछ लोग मानते हैं कि कसाब जैसे मुद्दों पर सॉफ्ट कॉर्नर दिखाने से वोट मिलते हैं।

ट्रोलिंग के पीछे की असली वजह क्या है?

वोट की राजनीति : कॉन्ग्रेस और उसके समर्थक जानते हैं कि मुस्लिम वोट बैंक उनके लिए अहम है। कसाब को लेकर हमदर्दी दिखाकर या निकम को झूठा बताकर वो मुस्लिम कम्युनिटी में ये मैसेज देना चाहते हैं कि वो उनके साथ हैं। उन्हें निकम से कोई खास दिक्कत नहीं है, न ही कॉन्ग्रेस से कोई प्यार – बस बीजेपी को घेरना है और वोट लेना है।

पुरानी हार का बदला : 2008-2012 में कॉन्ग्रेस की सरकार थी, तब निकम सरकारी वकील थे। बिरयानी वाली बात उस समय कॉन्ग्रेस के लिए भी फायदेमंद थी, क्योंकि वो आतंक के खिलाफ सख्त रुख दिखाना चाहते थे। लेकिन अब, जब निकम बीजेपी के साथ जुड़े, तो कॉन्ग्रेस को मौका मिला पुराने हिसाब चुकाने का। वो निकम को निशाना बनाकर बीजेपी पर हमला कर रहे हैं।

ये ट्रोलिंग गलत क्यों है?

दोगलापन : जब कसाब का केस चल रहा था, तब महाराष्ट्र और दिल्ली में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने ही निकम को पब्लिक प्रॉसीक्यूटर बनाया था। निकम ने जो बिरयानी वाली बात कही, वो सरकारी इशारे पर ही कही गई होगी, ताकि कसाब को सजा दिलाने में मदद मिले। उस समय कॉन्ग्रेस ने इसका विरोध नहीं किया। कसाब को फाँसी भी 2012 में कॉन्ग्रेस सरकार ने ही दी। अब वही लोग निकम को झूठा बता रहे हैं, क्योंकि वो बीजेपी के साथ हैं। ये दोगलापन है।

आतंक के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करना : निकम ने कसाब को फांसी दिलाकर देश की सेवा की। 26/11 के हमलों में 150 से ज्यादा लोग मरे थे। निकम ने न सिर्फ कसाब को सजा दिलाई, बल्कि ये भी सुनिश्चित किया कि आतंकी के लिए कोई हमदर्दी न बने। लेकिन ट्रोलर्स अब उसी बात को पकड़कर निकम को बदनाम कर रहे हैं। ये आतंक के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करता है।

कसाब के लिए हमदर्दी : ट्रोलर्स की बातों से ऐसा लगता है जैसे वे कसाब को बेचारा दिखाना चाहते हैं। बिरयानी वाली बात को बार-बार उठाकर वो ये मैसेज दे रहे हैं कि कसाब के साथ गलत हुआ। ये गलत है, क्योंकि कसाब एक आतंकी था, जिसने बेगुनाहों का खून बहाया।

देश के हीरो का अपमान : निकम ने अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर आतंकियों के खिलाफ केस लड़ा। उन्हें सम्मान मिलना चाहिए, न कि ट्रोलिंग। ट्रोलर्स सिर्फ पॉलिटिकल स्कोरिंग के लिए एक हीरो को निशाना बना रहे हैं।

दरअसल, 26/11/2008 को मुंबई हमले के बाद पूरा देश गुस्से में था। कसाब को पकड़ा गया और लोग चाहते थे कि उसे सख्त से सख्त सजा मिले। लेकिन कुछ लोग, खासकर लेफ्ट-लिबरल और कुछ एक्टिविस्ट कसाब को ‘बेचारा’ दिखाने की कोशिश कर रहे थे। वे कहते थे कि कसाब गरीब था, मजबूरी में आतंकी बना। ऐसे में निकम ने बिरयानी वाली बात कही, ताकि जनता का गुस्सा बना रहे और कसाब के लिए हमदर्दी न बढ़े। ये एक रणनीति थी और उस समय कॉन्ग्रेस को भी इसमें कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन अब, जब निकम बीजेपी के साथ हैं, वही बात ट्रोलर्स के लिए हथियार बन गई।

निशाना निकम नहीं, बल्कि भाजपा और मुस्लिम वोटबैंक

ट्रोलर्स का मकसद निकम को बदनाम करना नहीं, बल्कि बीजेपी को घेरना और मुस्लिम वोट बैंक को लुभाना है। वे कसाब के लिए हमदर्दी दिखाकर ये मैसेज देना चाहते हैं कि बीजेपी सांप्रदायिक है और कॉन्ग्रेस मुस्लिम समुदाय की हितैषी है। लेकिन सच ये है कि कसाब को फाँसी कॉन्ग्रेस सरकार में ही हुई। अगर निकम ने झूठ बोला, तो उस समय कॉन्ग्रेस ने क्यों नहीं रोका? अब निकम को ट्रोल करना सिर्फ पॉलिटिकल गेम है।

बता दें कि उज्ज्वल निकम एक मशहूर वकील हैं, जो मुंबई में कई बड़े केस लड़ चुके हैं। 1993 के मुंबई ब्लास्ट, गुलशन कुमार मर्डर, प्रमोद महाजन हत्याकांड और सबसे बड़ा – 26/11 का कसाब केस। कसाब ने 166 लोगों की जान ली थी, और निकम ने बतौर पब्लिक प्रॉसीक्यूटर (सरकारी वकील) उसे फाँसी दिलाई। पद्मश्री मिला, Z+ सिक्योरिटी मिली। 2024 में बीजेपी ने उन्हें मुंबई से लोकसभा टिकट दिया, लेकिन वो हार गए। अब राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा में भेजा है। लेकिन ये बात अब कॉन्ग्रेसियों को पच नहीं रही।

उज्ज्वल निकम एक ऐसे वकील हैं, जिन्होंने देश के लिए बड़ा काम किया। कसाब जैसे आतंकी को सजा दिलाकर उन्होंने लाखों लोगों का गुस्सा शांत किया। बिरयानी वाली बात एक रणनीति थी, जिसे उस समय की सरकार ने भी सपोर्ट किया था। अब उसे बहाना बनाकर ट्रोल करना गलत है। ट्रोलर्स को न निकम से दिक्कत है, न कॉन्ग्रेस से प्यार – वे सिर्फ वोट की राजनीति और बीजेपी को घेरने के लिए ये सब कर रहे हैं। ये दोगलापन है। देश को निकम जैसे लोगों का सम्मान करना चाहिए, न कि उन्हें ट्रोल करना। कसाब जैसे आतंकियों के लिए हमदर्दी दिखाना देश के साथ गद्दारी है। हमें अपने हीरोज का साथ देना चाहिए, न कि पॉलिटिकल गेम में उन्हें नीचा दिखाना।

Aaj Tak की एंकर को नूहं की ब्रजमंडल यात्रा से दिक्कत, 2023 की इस्लामी हिंसा का जिक्र कर अनुमति देने पर उठाए सवाल: इस्लामी कट्टरपंथियों पर साधी चुप्पी, हिन्दुओं पर डाला दोष

हिन्दुओं ने सावन माह के पहले सोमवार (14 जुलाई, 2025) को हरियाणा के नूहं में ब्रजमंडल अभिषेक यात्रा निकाली है। इस शोभायात्रा का आयोजन हर साल विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा किया जाता है। 80 किलोमीटर लंबी यह शोभायात्रा दोपहर 12 बजे शुरू हुई। इस शोभायात्रा के लिए पुलिस ने इंटरनेट बंद करने समेत तमाम सुरक्षा व्यवस्था की है। यहाँ हजारों जवान भी रास्ते में लगाए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों में भी छुट्टी घोषित की गई है। हालाँकि, इस यात्रा के आयोजन से मीडिया के धड़े को समस्या हो गई है।

आजतक की पत्रकार को यात्रा से समस्या

आजतक की एंकर नेहा बाथम ने ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा की तैयारियों पर रिपोर्टिंग के दौरान एक विवादित बयान दिया। नेहा बाथम ने चैनल के लाइव प्रसारण के दौरान ऑन-ग्राउंड रिपोर्टर से बात करते हुए सवाल किया कि जब सांप्रदायिक तनाव की आशंका थी, तो जुलूस निकालने की इजाज़त क्यों दी गई।

उन्होंने कहा, “जब ऐसी घटना 2023 में होगी, तो जुलूस निकालने की क्या ज़रूरत थी? आख़िरकार, शांति ही पहली प्राथमिकता है।” हैरानी की बात यह है कि रिपोर्टिंग के दौरान, ऑन-ग्राउंड रिपोर्टर अनमोल वली और नेहा ने यह नहीं बताया कि 2023 में निकली ब्रजमंडल यात्रा पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था

तथ्यों से भी की छेड़छाड़

अनमोल ने बताया कि हिन्दू कार्यकर्ता बिट्टू बजरंगी को जुलूस में शामिल होने से रोका गया है। अनमोल ने दावा किया कि उस पर दंगे भड़काने का आरोप लगाया गया था। अनमोल ने यह भी बताया कि जुलूस में ‘त्रिशूल’, ‘बेसबॉल बैट’ जैसे हथियारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

अनमोल ने इस तथ्य को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया कि 2023 में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने ही हिंदुओं, पुलिसकर्मियों और होमगार्डों पर हमला किया था। अनमोल ने इस तथ्य को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया कि मुस्लिमों ने पथराव किया था और हिंदुओं पर लाठियों और डंडों से हमला किया था तथा उन पर गोलियाँ चलाई थीं।

आज तक के पत्रकारों ने उन अभिषेक का ज़िक्र करना नज़रअंदाज़ कर दिया, जिनकी इस हिंसा में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। अभिषेक को पहली गोली मारी गई थी और उनका गला रेत दिया गया था। उनके चेहरे को पत्थरों से कुचल दिया गया था।

आजतक के पत्रकारों ने यह भी बताने से इनकार कर दिया कि कैसे नूंह और आसपास के इलाकों में इस दौरान हिंदुओं की दुकानों को चुन-चुनकर लूटा और आग लगा दी गई।

2023 में मुस्लिमों ने बनाया था हिन्दुओं को निशाना

गौरतलब है कि 31 जुलाई 2023 को इसी नूहं में निकाली गई ब्रजमंडल यात्रा पर इस्लामी कट्टरपंथी हमलावर हो गए थे। उन्होंने हिन्दुओं की गाड़ियों को निशाना बनाया था और यहाँ तक कि मंदिर पर हमला भी किया था। इस हिंसा में सात लोगों की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे। कई पुलिस वाहनों को आग लगा दी गई थी।

इस दौरान दुकानों को लूटा और जला दिया गया था। हमले में शिव मंदिर परिसर में मुस्लिम भीड़ ने अभिषेक नाम के एक हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या कर दी थी। उसे गोली मार दी गई थी और उसका सिर कुचल दिया गया था, जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं बचा था।

अपनी तीन साल की बेटी के साथ घर जा रही एक महिला जज पर मुस्लिमों ने हमला किया था। उनकी गाड़ी को आग लगा दी गई थी और वह किसी तरह से बच कर निकल सकीं थी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद मिडल ईस्ट से लेकर लैटिन अमेरिका तक ब्रह्मोस की डिमांड, 17 देशों को चाहिए: 3600 KM/h+ की स्पीड वाले हथियार का लखनऊ में भी होगा प्रोडक्शन

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी शानदार युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान की चूलें हिला दी। क्षमता का प्रदर्शन किया, जिसके बाद वैश्विक स्तर पर इसकी माँग में तेजी आई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ के ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी का उद्घाटन करते हुए कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस की भूमिका के बाद 14-15 देशों ने भारत से इस मिसाइल की माँग की है। उन्होंने एक कार्यक्रम में भी यही बात दोहराई है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह संख्या बढ़कर 17 तक पहुँच गई है, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका के देश शामिल हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि यह फैसिलिटी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगी और रोजगार सृजन करेगी, साथ ही उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देगी। आइए, हम ब्रह्मोस मिसाइल की हर छोटी-बड़ी बात को विस्तार से समझते हैं। साथ ही ये भी जानते हैं कि भारत का इसके साथ भविष्य का प्लान क्या है और दुनिया इसे क्यों चाहती है।

ब्रह्मोस मिसाइल क्या है?

ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मॉस्कवा नदी से लिया गया है। ये नाम दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग का प्रतीक है। ये मिसाइल इतनी तेज, सटीक और घातक है कि इसे रोकना लगभग असंभव है। इसे जमीन से, समुद्र से, हवा से और यहाँ तक कि पनडुब्बी से भी छोड़ा जा सकता है। ये सिर्फ आम हथियार ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर परमाणु हथियार भी ले जा सकती है, जो इसे रणनीतिक तौर पर बहुत खास बनाता है।

ये मिसाइल 1998 में भारत और रूस के बीच हुए एक समझौते से शुरू हुई थी। भारत का डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) और रूस का एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया इस प्रोजेक्ट में साथ आए। भारत के मशहूर वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। 2001 में इसका पहला टेस्ट चाँदीपुर तट पर हुआ, और तब से ये लगातार बेहतर होती गई। आज ये भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना का अहम हिस्सा है।

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस ने दिखाया जलवा

बता दें कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस ने पहली बार असल जंग में अपनी ताकत दिखाई। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। इनमें रफीकी, मुरिद, नूर खान, रहीम यार खान, सुक्कुर और चुनियाँ जैसे हवाई अड्डे शामिल थे। स्कर्दू, भोलारी, जैकोबाबाद और सरगोधा के हवाई ठिकानों को भी भारी नुकसान हुआ। सियालकोट और पासरूर के रडार स्टेशन भी निशाने पर थे। इन हमलों में ब्रह्मोस ने SCALP और Hammer जैसे हथियारों के साथ मिलकर काम किया और अपनी सटीकता से दुश्मन को हैरान कर दिया।

11 मई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में ब्रह्मोस की नई फैसिलिटी के उद्घाटन के दौरान इसकी तारीफ की थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा कि इस ऑपरेशन के बाद 14-15 देशों ने ब्रह्मोस खरीदने की इच्छा जताई। ये पहला मौका था जब ब्रह्मोस को युद्ध में इस्तेमाल किया गया, और इसने दुनिया को दिखा दिया कि ये कितना दमदार हथियार है।

ब्रह्मोस की खासियतें बनाती हैं इसे बेमिसाल

ब्रह्मोस की कई ऐसी खूबियाँ हैं, जो इसे दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में शुमार करती हैं। आइए, इन खूबियों को एक-एक करके विस्तार से समझते हैं –

तेज रफ्तार (सुपरसोनिक स्पीड) : ब्रह्मोस की रफ्तार ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना, यानी मैक 2.8 से मैक 3 तक है। अगर आप इसे आसान भाषा में समझें, तो ये इतनी तेज है कि दुश्मन को इसका जवाब देने का समय ही नहीं मिलता। उदाहरण के लिए, अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल सबसोनिक है, यानी ध्वनि की गति से कम तेज। लेकिन ब्रह्मोस की रफ्तार इसे पलक झपकते टारगेट तक पहुँचा देती है। इसकी वजह से दुश्मन के डिफेंस सिस्टम, जैसे मिसाइल शील्ड इसे रोकने में नाकाम रहते हैं।

फायर एंड फॉरगेट सिस्टम : इसका मतलब है कि ब्रह्मोस को एक बार छोड़ने के बाद उसे और कोई निर्देश देने की जरूरत नहीं। ये अपने आप टारगेट को ढूँढ लेती है। ये सिस्टम इसे बहुत तेज और सुरक्षित बनाता है, क्योंकि छोड़ने वाला प्लेटफॉर्म (जैसे जहाज या विमान) फौरन वहाँ से हट सकता है, जिससे उस पर हमले का खतरा कम हो जाता है।

छुपने की खूबी (स्टील्थ डिजाइन) : ब्रह्मोस का डिजाइन ऐसा है कि इसे रडार से पकड़ना बहुत मुश्किल है। इसका रडार क्रॉस-सेक्शन बहुत छोटा है, और इसमें स्टील्थ मटेरियल का इस्तेमाल हुआ है। आसान भाषा में कहें, तो ये मिसाइल दुश्मन के रडार की नजरों में कम आती है, जिससे इसे ट्रैक करना और रोकना मुश्किल हो जाता है।

कई जगह से छोड़ने की क्षमता (मल्टी-प्लेटफॉर्म) : ब्रह्मोस को आप जमीन पर मोबाइल लॉन्चर से, समुद्र में युद्धपोत या पनडुब्बी से या हवा में सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमान से छोड़ सकते हैं। ये लचीलापन इसे हर तरह की जंग में उपयोगी बनाता है। मिसाल के तौर पर अगर समुद्र में दुश्मन का जहाज है, तो नौसेना इसे जहाज या पनडुब्बी से छोड़ सकती है। अगर जमीन पर कोई ठिकाना निशाने पर है, तो सेना या वायुसेना इसे हिट कर सकती है।

हर मौसम में काम करने की ताकत : चाहे भारी बारिश हो, धुंध हो, रात हो या दिन, ब्रह्मोस हर हाल में अपना काम बखूबी करती है। ये खराब मौसम में भी टारगेट को सटीक निशाना बना सकती है। ये खासियत इसे उन मिसाइलों से अलग करती है, जो मौसम की वजह से कमजोर पड़ जाती हैं।

बेहद सटीक निशाना : ब्रह्मोस की सटीकता इतनी जबरदस्त है कि ये 1-2 मीटर के दायरे में टारगेट को हिट कर सकती है। यानी अगर आप किसी बिल्डिंग की खिड़की को निशाना बनाना चाहें, तो ये उसी खिड़की को हिट करेगी। इसकी तेज रफ्तार और सटीकता मिलकर इसे भारी तबाही मचाने वाला हथियार बनाते हैं।

लंबी रेंज: ब्रह्मोस की सामान्य रेंज 290 किलोमीटर है, लेकिन नए वेरिएंट में ये 450 किलोमीटर तक जा सकती है। कुछ खबरों की मानें, तो 800 किलोमीटर रेंज वाला वर्जन भी टेस्टिंग में है। इतनी दूरी तक मार करने की क्षमता इसे रणनीतिक तौर पर बहुत अहम बनाती है।

कई रास्तों से टारगेट तक पहुँचना: ब्रह्मोस अलग-अलग रास्तों से टारगेट तक पहुँच सकती है। जैसे ये समुद्र के ऊपर सिर्फ 3-10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ सकती है (जिसे सी-स्किमिंग कहते हैं) या फिर ऊँचाई से गोता लगाकर हमला कर सकती है। ये रास्ते बदलने की खूबी इसे दुश्मन के डिफेंस सिस्टम से बचाती है।

जैमिंग और चकमा देने की ताकत : इसमें एडवांस्ड सेंसर जैसे इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और जीपीएस हैं, जो इसे सटीक रास्ता दिखाते हैं। साथ ही, इसमें जैमिंग तकनीक है, जो दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस को भटका देती है। ये मिसाइल उड़ान के दौरान रास्ता बदल सकती है, जिससे इसे पकड़ना और मुश्किल हो जाता है।

दो चरणों वाला इंजन : ब्रह्मोस में दो चरणों का प्रणोदन सिस्टम है। पहला चरण सॉलिड प्रणोदक बूस्टर है, जो इसे शुरुआती तेज रफ्तार देता है। दूसरा चरण लिक्विड रैमजेट इंजन है, जो इसे लगातार सुपरसोनिक स्पीड देता है। ये इंजन इसे लंबी दूरी तक तेज उड़ान भरने में मदद करता है।

भारी विस्फोटक ले जाने की क्षमता : ये मिसाइल 200-300 किलो का वॉरहेड ले जा सकती है। इतना भारी विस्फोटक किलेबंद ठिकानों, जैसे बंकर या सैन्य इमारतों को भी आसानी से नष्ट कर सकता है। इसकी तेज रफ्तार की वजह से विस्फोट का असर और बढ़ जाता है।

फोटो साभार: AI Dall-E

हर जरूरत के लिए तैयार रहता है ब्रह्मोस

ब्रह्मोस के कई वेरिएंट हैं, जो अलग-अलग कामों के लिए बनाए गए हैं। आइए, इन्हें समझते हैं:

जहाज से छोड़ा जाने वाला वर्जन : भारतीय नौसेना के युद्धपोत, जैसे INS राजपूत, इस वर्जन का इस्तेमाल करते हैं। ये समुद्र और जमीन दोनों पर हमला कर सकता है। इसे एक बार में 8 मिसाइलों के सैल्वो (समूह) में छोड़ा जा सकता है, जो दुश्मन के जहाजों या ठिकानों को तबाह कर देता है।

जमीन से छोड़ा जाने वाले वर्जन: भारतीय सेना के पास 4-6 मोबाइल लॉन्चर वाले ब्रह्मोस कॉम्प्लेक्स हैं। ये तीन तरह के कॉन्फिगरेशन में काम करते हैं-

  • ब्लॉक I: सटीक हमले के लिए।
  • ब्लॉक II: सुपरसोनिक डाइव के साथ टारगेट चुनने की क्षमता।
  • ब्लॉक III: पहाड़ी इलाकों में हमले के लिए।

ये लॉन्चर न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल (NBC) हमलों से बचाने वाले एयर-कंडीशंड कम्पार्टमेंट के साथ आते हैं।

हवा से छोड़ा जाने वाला वर्जन: सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान से छोड़ा जाता है। 2017 में बंगाल की खाड़ी में इसका पहला टेस्ट हुआ था। ये वर्जन लंबी दूरी से हमला करने में सक्षम है।

पनडुब्बी से छोड़ा जाने वाला वर्जन : 2013 में विशाखापट्टनम तट से इसका टेस्ट हुआ। ये 50 मीटर गहराई से छोड़ा जा सकता है, जो इसे स्टील्थ अटैक के लिए आदर्श बनाता है।

ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जेनरेशन) : ये छोटा, हल्का और ज्यादा स्टील्थ वाला वर्जन है, जो राफेल और नौसैनिक जरूरतों के लिए बन रहा है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स होंगे, जो इसे और खतरनाक बनाएँगे।

हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-II : ये भविष्य का वर्जन है, जो मैक 8 की रफ्तार और 1500 किमी रेंज के साथ आएगा। ये दुनिया की सबसे तेज मिसाइलों में से एक होगी।

ब्रह्मोस के एक्सपोर्ट पर दुनिया की नजर

मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) के नियमों के कारण, भारत एक्सपोर्ट के लिए 290 किमी रेंज वाला वर्जन देता है, जो खास तौर पर जहाजों को निशाना बनाने (एंटी-शिप) के लिए है। भारत अपने लिए 300 से 450 किमी और भविष्य में 800 किमी रेंज वाले वर्जन रखता है। चूँकि ये भारत-रूस का जॉइंट वेंचर है, इसलिए एक्सपोर्ट के लिए रूस की मंजूरी भी जरूरी है।

फिलीपींस ने ब्रह्मोस खरीदने का सौदा किया है। इसके अलावा वियतनाम, थाईलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई, ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना, वेनेजुएला, मिस्र, सऊदी अरब, यूएई, कतर और ओमान जैसे देशों ने इसमें रुचि दिखाई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इन देशों का भरोसा और बढ़ गया, क्योंकि इसने असल जंग में अपनी ताकत साबित की।

भविष्य के लिए ब्रह्मोस को और ताकतवर बना रहा है भारत

भारत का ब्रह्मोस को लेकर बड़ा और महत्वाकांक्षी प्लान है। लखनऊ में नया प्लांट मास प्रोडक्शन के लिए बनाया गया है, ताकि भारत अपनी और वैश्विक मांग को पूरा कर सके। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ये प्लांट न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा, बल्कि उत्तर प्रदेश में रोजगार और उद्योग को भी बढ़ावा देगा। वहाँ की बेहतर कानून-व्यवस्था और इन्फ्रास्ट्रक्चर (एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो) की वजह से निवेश बढ़ रहा है।

भारत के कुछ खास प्लान

  • 800 किमी रेंज वाला वर्जन: एक एक्सटेंडेड-रेंज वर्जन टेस्टिंग में है, जो भारत की रणनीतिक ताकत को और बढ़ाएगा।
  • पनडुब्बी वर्जन का टेस्ट: P75I प्रोग्राम के तहत पनडुब्बियों से ब्रह्मोस को और बेहतर किया जाएगा। जल्द ही इसका टेस्ट होगा।
  • हल्का और छोटा वर्जन: राफेल और अन्य लड़ाकू विमानों के लिए ब्रह्मोस-NG बन रहा है, जो छोटा, हल्का और ज्यादा स्टील्थ होगा।
  • हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-II : मैक 8 की रफ्तार और 1500 किमी रेंज वाला ये वर्जन भविष्य में गेम-चेंजर होगा।
  • एक्सपोर्ट बढ़ाना : भारत ब्रह्मोस को बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट करने की योजना बना रहा है। फिलीपींस के बाद वियतनाम और अन्य देशों से बातचीत चल रही है।

लखनऊ प्लांट भारत की आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

लखनऊ-कानपुर हाईवे पर बना ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी भारत की आत्मनिर्भरता का बड़ा कदम है। ये प्लांट बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के लिए बनाया गया है, ताकि भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करे, बल्कि दुनिया की माँग को भी पूरा कर सके। राजनाथ सिंह ने कहा कि ये सुविधा उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगी और हजारों नौकरियाँ पैदा करेगी। भारत का प्लान है कि सबसे एडवांस्ड वर्जन अपने पास रखे और कम रेंज वाले वर्जन एक्सपोर्ट करे। लेकिन ये कम रेंज वाले वर्जन भी दुनिया के ज्यादातर मिसाइल सिस्टम से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं।

दुनिया क्यों चाहती है ब्रह्मोस?

ब्रह्मोस की मैक 3 की रफ्तार और 1-2 मीटर की सटीकता इसे बेजोड़ बनाती है। ये दुश्मन के लिए बड़ा खतरा है। ब्रह्मोस को हर प्लेटफॉर्म जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से छोड़ा जा सकता है, जो इसे हर तरह की जंग के लिए उपयोगी बनाता है। स्टील्थ डिजाइन, कम रडार सिग्नेचर और चकमा देने की क्षमता इसे दुश्मन के डिफेंस सिस्टम से बचाती है। ये मिसाइल न सिर्फ पारंपरिक जंग के लिए है, बल्कि परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता इसे रणनीतिक तौर पर अहम बनाती है।

ब्रह्मोस मिसाइल भारत की सैन्य ताकत और तकनीकी प्रगति का एक चमकता सितारा है। ऑपरेशन सिंदूर में इसकी सफलता ने दुनिया को दिखा दिया कि ये कितना घातक और भरोसेमंद हथियार है। लखनऊ का नया प्लांट और भारत का एक्सपोर्ट प्लान इसे वैश्विक रक्षा बाजार में और मजबूत करेगा। भविष्य में हाइपरसोनिक और एक्सटेंडेड-रेंज वर्जन के साथ ब्रह्मोस भारत को और ताकतवर बनाएगा। ये न सिर्फ भारत की रक्षा को मजबूत करता है, बल्कि दुनिया में भारत का कद भी बढ़ाता है।

‘तुम्हें फँसाना सवाब का काम’: नावेद ने कलावा-तिलक लगा 18 हिन्दू लड़कियों से किया लव जिहाद, फोन में मिली 1900 फोटो-वीडियो, इस्लाम कबूल करवाने बनाई थी; धर्मांतरण गैंग में भाई कैफ भी था शामिल

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में हिंदू युवती से दुष्कर्म करने वाले नावेद उर्फ कासिब पठान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नावेद के फोन से अश्लील तस्वीरें और वीडियो मिली हैं। नावेद ने अब तक 18 हिंदू युवतियों को प्रेमजाल में फँसाया है। इसमें नावेद का भाई कैफ भी शामिल था।

पुलिस ने बताया कि नावेद के फोन में अलग-अलग लड़कियों के साथ फोटो मिली हैं। इसके अलावा 4 विभिन्न नामों से इंस्टाग्राम आईडी भी मिली हैं, इनमें लगभग 1900 फोटो पोस्ट किए गए हैं।

दरअसल, शनिवार (12 जुलाई 2025) को एक हिंदू युवती ने चौक कोतवाली थाने में नावेद उर्फ कासिब पठान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। युवती ने बताया कि 2 साल पहले ‘शिव वर्मा’ नाम से नावेद ने सोशल मीडिया पर दोस्ती की। फिर शादी का झाँसा देकर दुष्कर्म किया।

नावेद और उसका भाई कैफ हिंदू लड़कियों को बनाते निशाना

नावेद और उसका भाई हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर फँसाते है। फिर दुष्कर्म कर वीडियो भी बनाते है। उसी वीडियो से ब्लैकमेल कर धर्मांतरण का दबाव बनाते हैं। नावेद ने भी इसे कबूल कर लिया है। इस रैकेट का सरगना आकिल है।

वहीं, शाहजहाँपुर में पीड़िता ने भी शिकायत में बताया कि नावेद के साथ-साथ उसका भाई कैफ ने भी पीड़िता से दुष्कर्म किया। साथ ही गर्भवती होने पर नावेद, उसके भाई कैफ, अब्बा आलम, अम्मी उजमा और बहन समन ने गर्भपात के लिए मजबूर किया। पीड़िता ने विरोध किया तो नावेद ने पेट पर लात मारकर गर्भपात करा दिया।

माथे पर तिलक और हाथ में कलावा बाँधकर युवती से मिलता

शिकायत करने वाली युवती ने बताया कि नावेद माथे पर तिलक लगाकर और हाथ में कलावा बाँधकर उससे मिलता था। शुरू में वह खुद को हिंदू बताता था। हिंदू देवी-देवताओं की कसम भी खाता था। इंस्टाग्राम पर शिव वर्मा नाम से आईडी बनाई थी। वहीं युवती से दोस्ती की थी। इसके अलावा अन्य हिंदू युवतियों को भी फँसाया था।

युवती ने बताया कि 11 जुलाई 2025 को नावेद को फोन देखा तो असलियत सामने आई। उसका असली नाम नावेद उर्फ कासिब पठान है। वह पहले सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला तारीन बहादुरगंज में रहता था। युवती ने नावेद के फोन में अश्लील वीडियो भी देखे।

इस बारे में जब पीड़िता ने उससे पूछा तो नावेद ने कहा कि हिंदू लड़कियों से संबंध बनाना हमारे लिए सवाब का काम है। नावेद ने युवती को खूब पीटा और जबरन धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाने लगा।

नावेद और उसका भाई हिंदू युवतियों को निशाना बनाते थे। सोशल मीडिया पर फर्जी हिंदू नाम से अकाउंट बनाकर लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाते थे। इसमें आशंका जताई जा रही है कि ये दोनों भाई बलरामपुर में सामने आया छांगुर के धर्मांतरण गैंग से मिले हो सकते हैं। नावेद अब तक 18 हिंदू युवतियों को फँसा चुका है।

हिन्दू लड़कियों को फँसाने के लिए छांगुर ने बना रखा था 1000 मुस्लिम युवकों का दस्ता, धर्मांतरण करवाने पर देता था पैसा: 579 जिलों में फैला है इस्लामी गैंग

धर्मांतरण गैंग चलाने वाला छांगुर पीर 1000 मुस्लिम लड़कों को हिन्दू लड़कियों फँसाने के लिए फंडिंग देता था। उसने उन जिलों को टारगेट बनाया था जहाँ हिन्दू बहुसंख्यक हैं। उसने इनका सर्वे करवाया था। इसके लिए भी उसने हजारों लड़के लगा रखे थे।

सर्वे करवा बना रहा था टारगेट

छांगुर पीर का धर्मांतरण नेटवर्क 579 जिलों में फैला हुआ था। उसने इसके लिए देश भर में एक सर्वे करवाया था। उसे पता चला था कि देश के 600 से अधिक जिलों में से यही 579 जिले हैं जहाँ हिन्दू बहु संख्यक हैं। उसने यहाँ धर्मांतरण के लिए 3000 से अधिक गुर्गों को प्रशिक्षण दिया था कि वह हिन्दुओं का धर्मांतरण करवाएँ।

उसका यह नेटवर्क नेपाल के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय था। इनकी कमान छांगुर पीर की करीबी नीतू रोहरा उर्फ नसरीन संभालती थी। ये सब बातें छांगुर पीर ने आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की रिमांड के चौथे दिन की पूछताछ में कबूली हैं।

रविवार (12 जुलाई 2025) को छांगुर पीर और नीतू उर्फ नसरीन को आमने-सामने बिठाकर सवाल-जवाब किए गए। एटीएस के अधिकारियों के अनुसार, छांगुर पीर से धर्मांतरण के बारे में जब भी पूछा गया, तो उसने एक ही रट लगाई कि एक भी अवैध धर्मांतरण नहीं कराया। उसने दावा किया कि सबने अपनी मर्जी से ही इस्लाम कबूल किया।

जब छांगुर से पैसे देकर धर्मांतरण की बात पूछी गई तो उसने गोलमोल जवाब दिए। उधर, जब बैंक खातों का ब्यूरो पूछा गया तो छांगुर ने जवाब दिया कि उसको सिर्फ अपने खाते के बारे में पता है। वहीं नसरीन ने कहा कि सारे खातों का हिसाब छांगुर ही रखता था। नसरीन ने कहा कि वह केवल अपने 8 खातों के बारे में जानती है।

1000 मुस्लिम लड़कों का गिरोह तैयार किया

जाँच में यह भी सामने आया है कि छांगुर ने हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाने के लिए 1000 मुस्लिम लड़कों को तैयार किया था। ये गिरोह महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल के 7 जिलों में हिंदू लड़कियों को निशाना बनाता था। इसके लिए छांगुर मुस्लिम लड़कों को मोटी रकम देता था।

यह लड़के हिन्दू लड़कियों को निशाना बनाने के लव जिहाद जैसी ट्रिक्स का इस्तेमाल करते थे। इनका भी पता लगाया जा रहा है। इसके लिए फंडिंग का कैसे इस्तेमाल हुआ था, यह भी ढूंढा जा रहा है। इसके लिए ATS के साथ ही NIA कार्रवाई कर रही है।

ED भी कर रही है जाँच

धर्मांतरण का नेटवर्क चलाने वाले छांगुर पीर के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अहम सबूत मिले हैं। ईडी ने छांगुर पीर के 30 बैंक में 18 बैंक खातों को खंगाल लिया है। इन खातों में लगभग 68 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है। बीते तीन महीने में ही इन खातों में 7 करोड़ रुपए जमा कराए गए हैं।

जाँच एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि यह रकम विदेशी फंडिंग नेटवर्क के इकट्ठा किया गया है। इसका इस्तेमाल कर देशभर के विभिन्न जिलों में धर्मांतरण का नेटवर्क चलाया गया और कई प्रॉपर्टी खरीदी गई हैं। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में छांगुर पीर की आलीशान कोठी की कीमत भी करोड़ो आंकी गई थी, यह कोठी भी विदेशी फंडिंग के पैसों से खरीदी गई थी।

इसके अलावा ईडी को बैंकों में संदिग्ध लेन-देन का ब्योरा मिला है, जिनमें NGO, ट्रस्ट और निजी खातों का नेटवर्क शामिल है। ईडी इन सभी संस्थाओं से भी पूछताछ कर सकती है। वहीं, ईडी की टीम बैंक खातों के अलावा छांगुर पीर की प्रॉपर्टीज, आयकर रिटर्न और जमीनों से जुड़ी हर डिटेल खंगाल रही है

1000 मुस्लिम लड़कों का गिरोह तैयार किया

जाँच में यह भी सामने आया है कि छांगुर ने हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाने के लिए 1000 मुस्लिम लड़कों को तैयार किया था। ये गिरोह महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल के 7 जिलों में हिंदू लड़कियों को निशाना बनाता था। इसके लिए छांगुर मुस्लिम लड़कों को मोटी रकम देता था।

धर्मांतरण नेटवर्क चलाने को छांगुर ने बनाए कोडवर्ड्स

छांगुर पीर हिंदू लड़कियों को फँसाकर ब्रेनवॉश करता और फिर धर्मांतरण कर निकाह करा देता था। इसके लिए कोडवर्ड्स का इस्तेमाल किया जाता था।। इसमें लड़कियों को ‘प्रोजेक्ट’ कहा जाता था। ब्रेनवॉश की प्रक्रिया को ‘काजल करना’, लड़की को छांगुर से मिलाने को ‘दीदार करना’ कहा जाता था।

इसी तरह धर्मांतरण को ‘मिट्टी पलटना’ कहते थे। इन कोड्स में छांगुर और उसका गैंग आपस में बातचीत करता था। ताकि किसी को उनके नेटवर्क के बारे में पता न लगे।

फ्यूल कंट्रोल स्विच में नहीं गड़बड़, FAA-बोइंग ने एडवायजरी में बताया: कहा- पूरी तरह सेफ हैं, इसी के OFF होने से क्रैश हुआ था एअर इंडिया का 787

अहमदाबाद विमान दुर्घटना की जाँच के बीच बोइंग का कहना है कि उसके ईंधन स्विच लॉक सुरक्षित हैं। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफएए और विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि विमान के फ्यूल स्विच लॉक पूरी तरह सुरक्षित हैं।

एफएए ने 11 जुलाई को जारी अपने सर्कुलर में कहा कि फ्यूल कंट्रोल स्विच का डिजाइन और लॉकिंग फीचर्स दूसरे बोइंग विमान की तरह ही हैं। इसलिए बोइंग 787 समेत किसी विमान के लिए एयरवर्थिनेस डायरेक्टिव जारी करने की जरूरत नहीं है।

बोइंग ने एफएए की इस सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा है कि कंपनी किसी भी अतिरिक्त कार्रवाई की सिफारिश नहीं कर रही है। हालाँकि एफएए ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार किया है।

एएआईबी ने एफएए के एडवाइजरी का जिक्र किया

भारत में अहमदाबाद विमान हादसे की जाँच कर रहा एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट में 2018 के एफएए के एक एडवाइजरी दस्तावेज का उल्लेख है, जिसमें सिफारिश की गई थी कि बोइंग अपने 787 समेत तमाम मॉडल के फ्यूल कटऑफ स्विच की लॉकिंग की जाँच करवाए। हालाँकि ये अनिवार्य नहीं था।

एअर इंडिया ने कहा है कि उसने इस सिफारिश के मद्देनजर कोई जाँच अभी नहीं की है। जाँच में ये भी पाया गया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान के थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल यानी टीसीएम को 2019 और 2023 में बदला गया था। टीसीएम में फ्यूल स्विच भी आता है।

एएआईबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान ने सभी जरूरी निर्देशों का पालन किया था। इसके बावजूद फ्यूल कैसे कटऑफ तक चला गया इसको लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

पायलटों की कोई गलती नहीं- पायलट संघ

भारतीय पायलट संघ यानी एएलपीए इंडिया ने जाँच को पारदर्शी और तथ्यपरक रखने की माँग की है। संघ ने विमान की दुर्घटना में पायलटों की गलती को सिरे से खारिज कर दिया है।

अमेरिका के दो सिक्योरिटी एक्सपर्टस ने भी पायलट संघ की माँग का समर्थन किया है। वहीं एयर इंडिया के प्रवक्ता ने भी कहा है कि कंपनी संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के प्रोटोकॉल का पालन कर रही है और उसे एएआईबी की जाँच पर पूरा भरोसा है।

अहमदाबाद एयरपोर्ट से 12 जून को एयर इंडिया का विमान टेकऑफ करते ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिससे 260 लोगों की मौत हो गयी थी।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में छांगुर पीर और उसके करीबियों से ED करेगी पूछताछ: 32 बैंक खातों – करोड़ों के ट्रांजेक्शन का खुलेगा राज, दुबई के रास्ते भी धर्मांतरण के लिए मिल रहा था पैसा

उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर धर्मांतरण की साजिश करने वाला सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर पर अब ईडी का शिकंजा कस गया है। छांगुर और उसके करीबियों के करीब 30 बैंक खतों की जानकारी ईडी को मिली है जिसमें पिछले 10 सालों में पैसे का लेन-देन हुआ है। ईडी ने संबंधित बैंक से पूरा स्टेटमेंट माँगा है।

ATS के बाद अब ED का शिकंजा

इससे पहले एटीएस ने जाँच में छांगुर उर्फ जलालुद्दीन के करीबियों के 40 से ज्यादा बैंक खातों का खुलासा किया था जिनसे 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के लेन-देन किए गए।

इन बैंक खातों में विदेश से पैसे आते थे। इनमें से सबसे ज्यादा पैसे दुबई से आए थे। इससे छांगुर ने धर्मांतरण के लिए और अपनी संपत्ति बनाने में किया। छांगुर के गिरोह ने जितनी भी संपत्तियाँ खरीदी हैं उसके लिए नसरीन उर्फ नीतू रोहरा के खातों का इस्तेमाल किया गया।

दुबई में नवीन रोहरा के ज्यादातर खाते हैं

दूसरी तरफ छांगुर के करीबी नवीन रोहरा के बैंक खाते ज्यादातर दुबई में हैं। इसकी जाँच के लिए विदेश मंत्रालय दुबई में भारतीय दूतावास से बात कर रहा है ताकि यूएई की सरकार से बात कर बैंक खातों का पूरा ब्योरा निकाला जा सके। इसमें वक्त लग सकता है क्योंकि जब तक यूएई की सरकार बैंक खातों की जानकारी नहीं देगी तब तक जाँच आगे नहीं बढ़ सकेगा।

छांगुर और नीतू फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं जिनसे धर्मांतरण को लेकर पूछताछ चल रही है। रिमांड खत्म होने के बाद ईडी दोनों को मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूछताछ के लिए कस्टडी में ले सकती है।

धर्मांतरण के लिए कई तरकीबें आजमाता था छांगुर पीर

हिंदुओं का ब्रेनवॉश करके उनका धर्म परिवर्तन करना और उनके नाम पर अवैध जमीन करने के साथ-साथ छांगुर अपने काम को अंजाम देने के लिए भी कई तरकीबें खोजता था।

इसके साथ ही वह सरकारी जमीनों पर कब्जा कर कागजों में हेर फेर भी करता था। जाँच में सामने आया है कि विदेशी फंडिंग के जरिए छांगुर ने करोड़ों की संपत्ति बनाई। इसके साथ ही उतरौला में कई महँगी प्रॉपर्टी का भी निर्माण करवाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छांगुर ने उतरौला में कई लोगों के नाम पर पहले जमीन खरीदी और फिर सरकारी जमीनों पर कब्जा जमा लिया। इसके लिए उन जमीनों पर गरीबों का नाम दिखा कर कागजों में हेर-फेर भी की।

उतरौला के पटेल नगर में एक सरकारी तालाब कुंडवा को भी छांगुर ने पटवा कर वहाँ पर लगभग 30,000 वर्ग फीट में अवैध प्लॉटिंग भी करवाई। इसके लिए गरीबों के नाम पर की गई जमीन को छांगुर ने नीतू उर्फ नसरीन के नाम पर 93 लाख में खरीद ली।

लाताब पाटने के लेकर उस समय के ADM बलरामपुर ने उतरौला की नगर पालिका को लिखित शिकायत भी की थी। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

स्कूल-इंटरनेट बंद, 2500+ पुलिसकर्मी तैनात… हरियाणा के नूहं में हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा से पहले के हालात: 2023 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने यहीं नल्हड़ महादेव मंदिर पर किया था हमला, 6 की गई थी जान

हरियाणा के नूहं (मेवात) जिले में सोमवार (14 जुलाई 2025) को ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा से पहले माहौल तनावपूर्ण है। सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। इनमें इंटरनेट और एसएमएस सर्विस को 24 घंटे के लिए बंद करना और स्कूलों को बंद रखना शामिल है।

ऐसा साल 2023 की घटना के चलते किया गया है, क्योंकि तब इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं पर हमला कर दिया था। नल्हड़ महादेव मंदिर तक में हिंसा कई गई थी, जो बाद में बढ़ गई थी। हिंसा में 6 लोगों की मौत हुई थी, तो 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

नूहं में इंटरनेट और स्कूल बंद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा सरकार ने नूहं में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सर्विस को 13 जुलाई रात 9 बजे से 14 जुलाई रात 9 बजे तक बंद कर दिया है। हालाँकि बैंकिंग, मोबाइल रिचार्ज और वॉयस कॉल की सुविधा पहले की तरह चालू रहेगी। इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा के लिए सोमवार (14 जुलाई 2025) को जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल बंद हैं।

डिप्टी कमिश्नर विश्राम कुमार मीणा ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है और सभी स्कूलों को इसका पालन करना होगा।” वहीं, पुलिस नूहं के संवेदनशील इलाकों में गश्ती कर रही है और पहाड़ी इलाकों में ड्रोन से नजर रखी जा रही है।

इस बार ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए 2500+ पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके लिए 14 डीएसपी अलग-अलग टीमों का नेतृत्व कर रहे हैं, तो 28 चेकपॉइंट्स लगाए गए हैं।

सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार ने ड्रोन, माइक्रोलाइट, हवाई जहाज, ग्लाइडर, हॉट एयर बैलून, पतंगबाजी, चाइनीज माइक्रोलाइट और आतिशबाजी पर भी रोक लगा दी है। बीते साल भी प्रशासन ने ऐसे निषेधात्मक कदम उठाए थे।

साल 2023 में हुआ था हिंदुओं पर हमला, गई थी 6 लोगों की जान

नूहं में ये सख्ती इसलिए की गई है, क्योंकि साल 2023 में ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान भयानक हिंसा हुई थी। उस वक्त विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की यात्रा पर एक भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हमले में 6 लोगों की मौत हो गई, जिसमें दो होमगार्ड्स शामिल थे। इस हिंसा में करीब 200 लोग घायल हुए थे।

बता दें कि जुलाई 2023 में भी नूहँ में वीएचपी की ओर से ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा निकाली जा रही थी। तभी इस्लामी कट्टरपंथियों की एक बड़ी भीड़ ने यात्रा पर पत्थरबाजी और फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में कई गाड़ियों को आग लगा दी गई और नल्हड़ महादेव मंदिर में फँसे लोग भी सुरक्षित नहीं थे।

पीड़ित हिंदुओं का कहना है कि नल्हड़ शिव मंदिर पर करीब 150 कट्टरपंथियों की भीड़ फायरिंग कर रही थी। इस मंदिर में सैकड़ों की संख्या में लोग फँसे हुए थे, जिन्हें पुलिस-प्रशासन ने सोमवार की रात बाहर निकाला था। प्रत्यक्षद​र्शियों के अनुसार हिंदुओं को निशाना बनाने वाली भीड़ ‘अल्लाह-हू अकबर’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रही थी।

मुस्लिम हमलावरों ने साइबर पुलिस स्टेशन को आग लगा दी, 150 से ज्यादा गाड़ियाँ जला दीं। हिंसा इतनी बढ़ गई कि गुरुग्राम तक फैल गई। बाद में पुलिस ने बड़े अभियान चलाकर दंगाइयों को पकड़ा, इसके लिए ड्रोन और पहाड़ियों पर कॉम्बिंग तक का सहारा लेना पड़ा। ये गिरफ्तारियाँ अगले कई दिनों तक होती रही थी।

काशी से लेकर देवघर तक, हरिद्वार से मुंबई में… हर जगह गूँजा ‘हर-हर महादेव’: वाराणसी में तो भक्तों पर फूल भी बरसे, ड्रोन से रखी जा रही चप्पे-चप्पे पर नजर

सावन के पहले सोमवार (14 जुलाई 2025) को देशभर के शिव मंदिरों में भोलेनाथ के भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ से लेकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ, हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव से मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर तक, हर जगह ‘हर-हर महादेव’ की गूँज सुनाई दे रही है।

सावन का महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय माना जाता है, और इस पवित्र दिन पर लाखों श्रद्धालु मंदिरों में जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और भक्ति में लीन हैं। मंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी झालरों और दीयों से सजाया गया है और भजनों की मधुर धुनों से वातावरण भक्तिमय हो गया है। देश भर में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए हैं। ड्रोन से लेकर हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।

काशी विश्वनाथ में भक्ति का अनूठा संगम

वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के पहले सोमवार को सुबह मंगला आरती के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस बार प्रोटोकॉल दर्शन पर पूरी तरह रोक लगाई गई है, ताकि सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन का मौका मिले। मंदिर के गर्भगृह में केवल 21 यादव बंधुओं को प्रवेश की अनुमति दी गई है।

सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं, और गंगा जल, बेलपत्र, दूध, और धतूरा चढ़ाकर भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने में जुटे हैं। मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिए ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है, और पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। वहीं, प्रशासन ने शिवभक्तों पर फूल भी बरसाए।

हरिद्वार में भगवान शिव की ससुराल में भक्तों का उत्साह

हरिद्वार जिसे भगवान शिव की ससुराल कहा जाता है, में दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का हुजूम उमड़ा। मान्यता है कि सावन माह में भगवान शिव दक्षेश्वर महादेव के रूप में यहीं निवास करते हैं।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने बताया कि सावन में गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक विशेष फलदायी होता है, क्योंकि माँ गंगा शिव की जटाओं से प्रकट हुई थीं। सुबह से ही भक्त गंगा जल, दूध, शहद और भाँग से जलाभिषेक कर रहे हैं।

हरिद्वार में काँवड़ यात्रा के लिए विशेष मार्ग बनाए गए हैं और प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को सुचारू करने के लिए रूट डायवर्जन और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।

देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर पर भक्तों की भीड़

झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सावन की पहली सोमवारी पर भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर में भी देर रात से ही श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुँच रहे हैं। मंदिर के पुजारी अभिषेक पाठक के अनुसार, करीब एक से डेढ़ लाख भक्तों ने जलाभिषेक किया, ये संख्या बढ़ती ही जा रही है।। इस बार मंदिर में अरघा प्रणाली की व्यवस्था की गई है, जिससे भक्त आसानी से जल चढ़ा सकें। पहलेजा से गंगा जल लेकर हजारों काँवड़िए यहाँ पहुँचे और मंदिर परिसर ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूँज उठा।

मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर में भक्ति की लहर

मुंबई के प्रसिद्ध बाबुलनाथ मंदिर में भी सावन के पहले सोमवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगीं। भक्तों ने शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर पूजा-अर्चना की। मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है और भजन मंडलियों ने वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना दिया। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की है, ताकि सभी को सुगमता से दर्शन मिल सकें।

दिल्ली के गौरी शंकर मंदिर में भक्तों का ताँता

पुरानी दिल्ली में लाल किले के सामने स्थित गौरी शंकर मंदिर में भी सुबह से ही शिव भक्तों की भीड़ जुट गई। भक्तों ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की और जलाभिषेक किया। मंदिर के बाहर कांवड़ियों के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं, जिसमें भोजन और पानी की सुविधा शामिल है।

दिल्ली के अन्य शिव मंदिरों जैसे नागेश्वर मंदिर और झंडेवालान मंदिर में भी रुद्राभिषेक और विशेष पूजा का आयोजन किया गया। मंदिर प्रशासन ने बताया कि स्फटिक शिवलिंग पर जलाभिषेक की विशेष व्यवस्था की गई है।

गुवाहाटी के शुक्रेश्वर मंदिर में भारी भीड़

असम के गुवाहाटी में शुक्रेश्वर मंदिर में भी सावन के पहले सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भक्तों ने गंगा जल, दूध, और बेलपत्र के साथ शिवलिंग का अभिषेक किया। मंदिर परिसर में भजनों और कीर्तन की मधुर धुनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। स्थानीय प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए, ताकि भक्तों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

काँवड़ यात्रा और प्रशासन की तैयारियाँ

सावन के पहले सोमवार को काँवड़ यात्रा का उत्साह भी चरम पर है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में प्रशासन ने काँवड़ियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश, मेरठ, मुरादाबाद और गाजियाबाद जैसे शहरों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है, और मंदिरों के प्रवेश द्वारों पर बैरियर लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है।

गाजियाबाद पुलिस ने काँवड़ियों के लिए विशेष भोजन और पानी की व्यवस्था भी की है। प्रशासन का कहना है कि उनका लक्ष्य भक्तों की आस्था और सुरक्षा दोनों को सुनिश्चित करना है।

सावन का पहला सोमवार देशभर में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम लेकर आया है। काशी विश्वनाथ, दक्षेश्वर महादेव, बाबा बैद्यनाथ, बाबुलनाथ, और गौरी शंकर जैसे मंदिरों में भक्तों की भीड़ और ‘हर-हर महादेव’ की गूँज ने पूरे देश को शिवमय बना दिया है। प्रशासन की चुस्त व्यवस्था और भक्तों का उत्साह इस पवित्र दिन को और भी खास बना रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सोमवार के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:11 से 4:52 बजे), अभिजित मुहूर्त (11:59 से 12:55 बजे) और विजय मुहूर्त (2:45 से 3:40 बजे) में जलाभिषेक करना विशेष फलदायी है।

जिन्होंने राम जन्मभूमि से लेकर काशी-मथुरा तक वामपंथियों के प्रोपेगेंडा की उड़ाई धज्जियाँ, उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया राज्यसभा के लिए नामित: जानिए – डॉ मीनाक्षी जैन के बारे में सबकुछ

प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले विद्वानों को मान्यता देते हुए, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार (12 जुलाई 2025) को राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मनोनीत किया। जिनका नाम उज्ज्वल निकम (प्रसिद्ध वकील), सी. सदानंदन मास्टे (समाजसेवी), हर्षवर्धन श्रृंगला (पूर्व विदेश सचिव) और डॉ मीनाक्षी जैन, जो इतिहास लेखन में भारतीय दृष्टिकोण की सशक्त आवाज मानी जाती हैं।

डॉ मीनाक्षी जैन का नाम आज देश की उन इतिहासकारों में शुमार होता है, जिन्होंने इतिहास लेखन के क्षेत्र में दशकों से जारी वामपंथी प्रभुत्व को चुनौती दी और भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक स्थलों से जुड़े तथ्यों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के साक्ष्य आधारित तरीके से प्रस्तुत किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में इतिहास की प्रोफेसर रह चुकीं डॉ. जैन को वर्ष 2020 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। वर्तमान में वे भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) की वरिष्ठ फेलो हैं।

डॉ. मीनाक्षी जैन कौन हैं?

डॉ जैन एक प्रसिद्ध इतिहासकार, लेखिका और शिक्षाविद हैं, जो भारतीय इतिहास, संस्कृति, धर्म और मंदिर पर केंद्रित अपने शोध के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने लंबे समय तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन किया और युवाओं को भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास देखने के लिए प्रेरित किया। उनका दृष्टिकोण यह रहा है कि भारतीय इतिहास को पश्चिमी या वामपंथी चश्मे से नहीं, बल्कि मूल भारतीय परंपरा और संस्कृति को आधार बनाकर समझा जाना चाहिए।

प्रमुख लेखन और योगदान

डॉ मीनाक्षी जैन ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें से कुछ को स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रमों में भी शामिल किया गया है। उनका लेखन मुख्य रूप से उन ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है, जिन्हें लंबे समय तक दबाया या नजरअंदाज किया गया।

‘राम और अयोध्या’ (2013)

‘राम के लिए युद्ध: अयोध्या में मंदिर का मामला’ (2017)

इन दोनों पुस्तकों में डॉ जैन ने ऐतिहासिक, पुरातात्विक और साहित्यिक प्रमाणों के आधार पर यह साबित किया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद एक भव्य राम मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1989 से पहले तक लगभग सभी ऐतिहासिक दस्तावेज इसी बात की ओर इशारा करते हैं।

अयोध्या मामले पर वामपंथियों के प्रोपेगेंडा की निकाली हवा

डॉ जैन ने अयोध्या मामले में वामपंथी इतिहासकारों जैसे इरफान हबीब, डीएन झा, रोमिला थापर और आरएस शर्मा की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कैसे इन इतिहासकारों ने ‘विष्णु हरि शिलालेख’ को फर्जी साबित करने का प्रयास किया, जिसे 1992 में बाबरी विध्वंस के दौरान मलबे से बरामद किया गया था।

यह शिलालेख साफ शब्दों में दर्शाता है कि 12वीं शताब्दी में उस स्थान पर एक विष्णु मंदिर था। जब इरफान हबीब ने दावा किया कि यह शिलालेख किसी ‘निजी संग्रह’ से वहाँ लाया गया, तो संस्कृत विद्वान और पूर्व IPS अधिकारी किशोर कुणाल ने लखनऊ संग्रहालय से ‘त्रेता के ठाकुर’ मंदिर का वास्तविक शिलालेख खोज निकाला। यह शिलालेख टूटे-फूटे और अपठनीय अवस्था में था, जबकि विष्णु हरि शिलालेख पूरी तरह से स्पष्ट और प्रामाणिक था। इससे वामपंथी दावे की पोल खुल गई।

रिकॉर्ड में हेराफेरी को भी किया उजागर

डॉ जैन ने ब्रिटिश काल के राजस्व रिकॉर्ड्स में की गई हेराफेरी को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि 1857 के बाद के ब्रिटिश दस्तावेजों में अयोध्या के विवादित स्थल को केवल ‘जन्मभूमि’ के रूप में दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में उसमें ‘और बाबरी मस्जिद’ जोड़ दिया गया, ताकि मुस्लिम पक्ष का दावा भी प्राचीन दिखे।

यह हेराफेरी वामपंथी सोच के संरक्षण में की गई ताकि सत्य को भ्रम में बदला जा सके। जिसके बाद डॉ. जैन ने भारतीय इतिहास में वामपंथी दृष्टिकोण के एकाधिकार को कठोरता से चुनौती दी है।

उन्होंने बार-बार यह कहा है कि वामपंथी इतिहासकारों ने अदालतों को अपनी राय को तथ्यों के रूप में प्रस्तुत किया और मुस्लिम पक्ष को झूठा आश्वासन दिया कि वे यह मुकदमा जीत सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ये इतिहासकार स्वयं अदालत में पेश नहीं हुए और अपने छात्रों को भेजते रहे, जबकि बाहर लेखों और पुस्तकों के माध्यम से भ्रम फैलाते रहे।

काशी और मथुरा पर डॉ. जैन के काम

अयोध्या के बाद डॉ जैन ने काशी और मथुरा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के इतिहास पर गहन अध्ययन शुरू किया। उनकी नवीनतम पुस्तक ‘विश्वनाथ: उदय और पुनरुत्थान’ (2024) काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास पर केंद्रित है।

इस पुस्तक में उन्होंने बताया कि मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा मंदिरों को बार-बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार हिंदू समाज ने उनका पुनर्निर्माण किया। उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर, मराठों और अन्य नायकों के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। मथुरा पर उनका काम अभी शोध के स्तर पर है, लेकिन वे इस विषय पर भी आने वाले समय में पुस्तक प्रकाशित करने की योजना में हैं।