Home Blog Page 307

मुस्लिम सहेली ने हिंदू लड़की को पहले घर बुलाया, फिर हैदर से रेप करवाके बनाई Video: धमकी देकर कहा- इस्लाम कबूल कर करे निकाह, वरना करेंगे वायरल; रीमा बानो हरदोई से गिरफ्तार

सभी लड़कियाँ जो लव जिहाद को महज एक अफवाह मानकर दूसरे समुदाय के लोगों से दोस्ती करती हैं, उन्हें इस कहानी से सबक लेना चाहिए। ये कोई फिल्मी किस्सा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की एक सच्ची घटना है, जहाँ एक मासूम हिंदू लड़की अपनी ही सहेली के जाल में फँस गई और उसकी जिंदगी नर्क बन गई। ये कहानी बताती है कि कैसे दोस्ती के नाम पर धोखा दिया जाता है और फिर ब्लैकमेलिंग, रेप और धर्मांतरण का दबाव डालकर लड़की को तोड़ने की कोशिश की जाती है।

हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग में हमने पीड़िता के परिवार, पुलिस और लोकल लोगों से बात की और ये सारी डिटेल्स सामने आईं। माहौल ऐसा है कि इलाके की लड़कियाँ अब डर के साए में जी रही हैं, और माता-पिता अपनी बेटियों को कॉलेज भेजने से पहले दस बार सोच रहे हैं।

बात दिसंबर 2024 की है। पीड़िता (24 साल) एक हिंदू युवती है, जो हरदोई के आईटीआई कॉलेज में डिप्लोमा कर रही थी। वहाँ उसकी मुलाकात रीना बानो से हुई, जो उसी क्लास में पढ़ती थी। रीना बानो मुस्लिम समुदाय से थी, लेकिन दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। वे साथ पढ़तीं, बातें करतीं, और एक-दूसरे के साथ समय बितातीं।

पीड़िता को लगा कि रीना उसकी सच्ची सहेली है। लेकिन ये दोस्ती एक साजिश का हिस्सा थी। एक दिन रीना ने उसे अपने घर पर बुलाया, जो पिहानी थाना क्षेत्र के मोहल्ला लोहानी में है। पीड़िता बिना कुछ सोचे चली गई, क्योंकि उसे क्या पता था कि वहाँ कोई जिहादी जाल बिछा है।

घर पहुँचते ही रीना उसे एक कमरे में ले गई। वहाँ पहले से ही हैदर नाम का एक आदमी मौजूद था, जो प्रयागराज का रहने वाला है और रीना की ससुराल का रिश्तेदार है। हैदर इन दिनों अपनी ससुराल में आया हुआ था। जैसे ही पीड़िता कमरे में घुसी, रीना बाहर निकल गई और दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। पीड़िता घबरा गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

हैदर ने अपनी जेब से एक तमंचा (रिवॉल्वर) निकाला और उसे डराया-धमकाया। उसने कहा, “चुप रहो, वरना गोली मार दूँगा।” पीड़िता ने विरोध किया, चीखी-चिल्लाई, लेकिन कमरा बंद था और बाहर कोई सुनने वाला नहीं। हैदर ने तमंचे की नोक पर उसके साथ जबरदस्ती की, रेप किया। इतना ही नहीं, उसने पूरा वाकया अपने मोबाइल से रिकॉर्ड भी कर लिया। पीड़िता रोती-बिलखती रही, लेकिन हैदर ने उसे धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो वीडियो वायरल कर देगा और उसकी इज्जत मिट्टी में मिला देगा।

इसके बाद रीना कमरे में आई और दोनों ने मिलकर पीड़िता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। वे वीडियो दिखाकर कहते, “अब तू हमारी बात मान, वरना ये वीडियो तेरे परिवार और सोशल मीडिया पर डाल देंगे। तेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।” ये ब्लैकमेलिंग करीब सात महीने तक चली। हर हफ्ते-दो हफ्ते में वे उसे फोन करते, मिलने बुलाते, और और ज्यादा तस्वीरें या वीडियो बनाते।

हैदर ने तो हद पार कर दी। उसने पीड़िता पर दबाव डाला कि वो हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल कर ले और उसके साथ दूसरी बीवी बनकर निकाह कर ले। वो कहता, “तू मुसलमान बन जा, मेरी दूसरी औरत बन। वरना वीडियो सबको दिखा दूँगा।” पीड़िता ने कई बार विरोध किया, लेकिन ब्लैकमेलिंग के डर से चुप रहती। उसकी जिंदगी नर्क बन गई, रातों को नींद नहीं आती, कॉलेज जाना मुश्किल हो गया, परिवार से झूठ बोलना पड़ता। वो डिप्रेशन में चली गई, खाना-पीना छूट गया। परिवार वाले पूछते तो कहती कि पढ़ाई का टेंशन है। लेकिन अंदर ही अंदर वो टूट रही थी।

आखिरकार पीड़िता की हिम्मत टूट गई। 11 जुलाई 2025 को वो हरदोई के शाहाबाद थाने पहुँची और पूरी कहानी सुनाई। उसने एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें रेप, ब्लैकमेलिंग, अश्लील वीडियो बनाने और धर्मांतरण के दबाव की सारी डिटेल्स हैं।

पीड़िता ने अपने बयान में बताया, “मैं आईटीआई में पढ़ती हूं। रीना मेरी सहेली बनी। दिसंबर 2024 में वो मुझे अपने घर ले गई। वहाँ हैदर पहले से था। रीना ने कमरा बंद किया। हैदर ने तमंचा दिखाकर मेरे साथ गलत काम किया और वीडियो बनाया। फिर दोनों ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर मुझे प्रताड़ित किया। हैदर ने कहा कि मैं मुसलमान बनूँ और उसके साथ निकाह करूँ, क्योंकि वो पहले से शादीशुदा है। मैंने विरोध किया, लेकिन डर के मारे चुप रही। अब मैं तंग आ गई हूँ, न्याय चाहिए।”

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। सीओ शाहाबाद अनुज मिश्रा ने कन्फर्म किया कि केस यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धाराओं के तहत दर्ज हुआ है। पुलिस ने हफीजुल्ला की बेटी रीना बानो को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी टीम में उप-निरीक्षक सत्येंद्र कुमार, कांस्टेबल गोविंद कुमार और महिला कांस्टेबल सोनिका चौहान शामिल थे। लेकिन हैदर फरार है, पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।

इलाके में इस घटना से हड़कंप मच गया। मोहल्ला लोहानी के लोग डरे हुए हैं, लड़कियाँ घर से बाहर निकलने से कतराती हैं। परिवार वाले कहते हैं, “दूसरे समुदाय की दोस्ती पर भरोसा मत करो, ये लव जिहाद का तरीका है।” पुलिस का कहना है कि जाँच तेज है और दोषियों को सजा मिलेगी। लेकिन सवाल ये है कि कितनी लड़कियाँ ऐसी साजिशों का शिकार हो रही हैं?

ये घटना एक चेतावनी है कि दोस्ती सोच-समझकर करो, क्योंकि कभी-कभी वो जिंदगी बर्बाद कर सकती है। अगर ऐसी कोई घटना हो, तो तुरंत पुलिस से मदद लो। लव जिहाद कोई मिथ नहीं, हकीकत है।

पायलटों पर फोड़ा विमान क्रैश का ठीकरा, पहले खुद कहा था- जाँच रिपोर्ट में कहीं उन्हें दोषी न बनाएँ: एअर इंडिया हादसे पर पूर्व कैप्टन मोहन रंगनाथन का अपनी थ्योरी से ही U-टर्न

एअर इंडिया विमान हादसे को लेकर शुरूआती जाँच रिपोर्ट सामने आ गई है। इसके बाद रिपोर्ट को लेकर हर तरह के विशेषज्ञ अपनी-अपनी थ्योरी दे रहे हैं। इन्हीं में एक विशेषज्ञ पूर्व पायलट भी है। उसने दावा किया है कि एअर इंडिया फ्लाइट AI-171 के पायलटों ने जानबूझ कर विमान क्रैश करवा दिया। यह थ्योरी उसने बिना किसी जाँच रिपोर्ट में यह बात कहे जाने के दी है। इसी विशेषज्ञ ने एक माह पहले इससे ठीक उल्टा दावा किया था।

यह थ्योरी देने वाले विशेषज्ञ का नाम कैप्टन मोहन रंगनाथन है। वह स्वयं पूर्व पायलट है। वह एअर इंडिया हादसे के बाद से लगातार टीवी चैनल और बाकी मीडिया में नई-नई थ्योरी दे रहा है। AAIB के प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट देने के बाद उसने NDTV से दावा किया है कि हादसे की वजह बने फ्यूल कंट्रोल स्विच को जानबूझ कर ऑफ किया गया था। उसने यह बात लाइव टीवी शो में कही है और पायलटों को कठघरे में खड़ा किया है।

कैप्टन मोहन रंगनाथन ने दावा किया कि दोनों में से एक पायलट ने यह जानते हुए फ्यूल कंट्रोल स्विच जानबूझकर ऑफ किया कि इससे विमान क्रैश हो जाएगा। विशेषज्ञ रंगनाथन ने इसे ‘आत्महत्या’ तक का केस बता डाला। इसके बाद रंगनाथन ने यहाँ तक दावा किया कि फ्यूल कंट्रोल स्विच गड़बड़ कर ही नहीं सकते और उन्हें इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि उन्हें पायलट ही बंद कर सकते हैं।

कैप्टन मोहन रंगनाथन ने कहा, “यह अपने आप या पॉवर फेलियर की वजह से नहीं हो सकता क्योंकि फ्यूल कंट्रोल स्विच स्लाइडिंग टाइप नहीं होता। वे एक स्लॉट में रहने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, और उन्हें ऊपर या नीचे ले जाने के लिए आपको उन्हें बाहर निकालना पड़ता है। इसलिए, अनजाने में उन्हें ‘बंद’ स्थिति में ले जाने की संभावना नहीं है। यह निश्चित रूप से जानबूझकर किया गया काम है ताकि फ्यूल कंट्रोल स्विच को चयन का मामला है ताकि इसे ‘बंद’ किया जा सके।”

काल कवलित हुए ड्रीमलाइनर विमान के फ्यूल स्विच कैसे होते हैं और उनको कैसे चलाया जा सकता है इस पर बात करना एक पायलट के लिए कोई विशेष मुद्दा नहीं है। लेकिन किसी पायलट का बिना जाँच में सामने आए यह कह देना कि उन्होंने आत्महत्या के लिए ऐसा किया है, काफी विचित्र बात है। यह तब और अजीब हो जाती है यह बात कहने वाला व्यक्ति ही एक माह पहले ही पायलटों के अधिकारों के लिए एकदम टाल ठोंक के खड़ा हो।

दरअसल, इन्हीं कथित विशेषज्ञ ने एक माह पहले इस बात की आशंका जताई थी कि हादसे की जाँच के अंत में किसी तरह पायलटों पर डाला जाएगा। द न्यूज मिनट से बात करते हुए मोहन रंगनाथन ने दावा किया था कि एयरपोर्ट के पास चिड़िया थीं और वह प्लेन टकराई थी। रंगनाथन ने कहा था, “मैं शर्त लगा सकता हूँ कि जाँचकर्ता या तो एअर इंडिया के मेंटेनेस या विमान को दोषी ठहराने की कोशिश करेंगे, और निश्चित रूप से पायलटों को दोषी ठहराएँगे। लेकिन वे यह स्वीकार नहीं करेंगे कि वहाँ चिड़िया थी।”

काफी हास्यास्पद है कि जो व्यक्ति एक माह पहले पायलटों को दोषी ठहराए जाने को लेकर शर्तें लगा रहा था आज वह खुद अपनी बात से पलट गया है। कैप्टन रंगनाथन ने यह सारे दावे तब किए हैं जब AAIB की जाँच रिपोर्ट में स्पष्ट तौर कहीं नहीं लिखा कि पायलटों की गलती से यह हादसा हुआ। रिपोर्ट में लिखा है कि विमान का टेकऑफ के बाद फ्यूल कंट्रोल स्विच ऑफ हुआ और एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया, जिसका जवाब दूसरे पायलट ने मना करके दिया।

लेकिन मोहन रंगनाथन का विवादों से नाता कोई नया नहीं है। वर्ष 1999 में मोहन रंगनाथन ने सिल्कएयर को लेकर दावा किया था। रंगनाथन का दावा था कि उन्होंने एक और पायलट के विमान को गड़बड़ तरीके से चलाने के चलते इस्तीफ़ा दिया था। दरअसल, जिस पायलट के बारे में रंगनाथन ने दावे किए थे वह दावे सेकुछ ही दिन पहले विमान सही हादसे का शिकार हुआ था और इस दुर्घटना में 104 यात्री मारे गए थे। इस मामले की जाँच में आत्महत्या का एंगल भी रखा गया था।

इसको लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच यह दावा रंगनाथन ने किया था, इसे एयरलाइन ने खारिज कर दिया था और कहा कि असल में उनके नौकरी छोड़ने का कारण कुछ और था। संभव है कि तब भी मोहन रंगनाथन सुर्ख़ियों में आने के लिए ऐसे दावे कर रहे हों, जैसे वह अब पायलटों को दोषी ठहरा के कर रहे हैं। हालाँकि, उनके दावे काफी अजीब और आधारहीन दिखाई पड़ते हैं।

इस्लामी भीड़ ने हिन्दू परिवार पर किया हमला, घर के दरवाजे को कुल्हाड़ी से तोड़ा… लाठी-डंडों से की पिटाई: यासीन शेख था सरगना, छत्तीसगढ़ के रायपुर की घटना

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में कचरा फेंकने से शुरू हुए विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया। यहाँ संजय चौधरी ने सड़क पर कचरा फेंका, तो पड़ोसी राजेश तिवारी ने इसका विरोध किया। मामले में हिस्ट्रीशीटर यासिन शेख उर्फ सोनू कूद पड़ा और 70 से 80 मुस्लिम भीड़ के साथ राजेश तिवारी और उनके परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना 07 जुलाई 2025 को भावना नगर क्षेत्र की है। यहाँ आए दिन संजय चौधरी सड़क पर कचरा फेंक देते थे। इसका विरोध पड़ोसी राजेश तिवारी ने किया। उस दिन भी यही हुआ, लेकिन बीच में यासिन शेख टपका और हिंसा शुरू कर दी। यासिन तिवारी ने मौके पर राजेश तिवारी को जान से मारने की धमकी दी।

इसके बाद यासिन शेख अपने साथियों संग राजेश तिवारी के घर में घुसने की कोशिश की। घर के दरवाजे को कुल्हाड़ी ठोककर तोड़ डाला। घर के भीतर दहशत में राजेश तिवारी और उनके बेटे छत की ओर भागे। बेटे ने बताया कि वहाँ भी पड़ोसियों की छत पर मुस्लिम भीड़ लाठी, डंडे, रॉड, चाकू और अन्य हथियार लेकर खड़ी थी।

मुस्लिम भीड़ ने राजेश तिवारी को बुरी तरह पीटा। साथ ही बेटे और उसके दोस्त पर वार किए। घटना में राजेश तिवारी का हाथ टूट गया और शरीर में कई घाव आए हैं। वहीं, बेटे के दोस्त का मुँह फोड़ दिया। इसके अलावा सिर, पेट और पीठ में भी गहरी चोटें आई हैं।

अस्पताल में भी पुलिस के सामने पीटा

घटना की जानकारी मिलने के काफी समय बाद पुलिस मौके पर पहुँची। फिर घायलों को अस्पताल ले जाया गया। लेकिन हमलवार फिर भी नहीं रुके। उन्होंने अस्पताल में पुलिस के सामने भी मारपीट चालू कर दी।

मामले में राजेश तिवारी ने पुलिस से FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने CCTV और चश्मदीदों के बयान के आधार पर मुख्य आरोपित संजय चौधरी, यासिन शेख समेत इरफान सिद्दीकी, अनस आतिफ और रयाज अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। अब भी दर्जनों हमलावर फरार हैं।

बजरंग दल का विरोध-प्रदर्शन

रायपुर की सांप्रदायिक हिंसा की घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें मुस्लिम भीड़ हिंदू परिवार पर जानलेवा हमला कर रही है। इसके बाद बजरंग दल ने घटना को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने पुलिस थाने और यासिन शेख के घर के बाहर खड़े रहकर सख्त कार्रवाई की माँग की।

वहीं, यासिन के परिवार ने गुनाह कबूल कर लिया है। लेकिन घटना को सांप्रदायिक हिंसा बताने से इनकार किया है। उधर, बजरंग दल ने पुलिस प्रशासन से आरोपितों को पकड़ने में देरी करने के लिए चेतावनी दी है। इसके बाद पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। लेकिन स्थानीय लोग अब भी दहशत में हैं।

असम सरकार ने गोलपाड़ा में 1000 बीघा+ जमीन पर से हटाया अतिक्रमण, ज्यादातर ‘मुस्लिमों’ का था कब्जा: 4 साल में खाली करवाई 25 हजार एकड़ भूमि, CM हिमंता ने कहा- जारी रहेगा अभियान

असम में इन दिनों हर तरफ बुलडोजर की आवाज सुनाई दे रही है। सरकार वन भूमि, सरकारी जमीन और आरक्षित इलाकों से अवैध कब्जा हटाने का जोरदार अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा कहते हैं कि ये बंगाली लोग हैं, जो बांग्लादेश से आकर यहाँ बस गए और असम की डेमोग्राफी बदलने की साजिश कर रहे हैं। लेकिन विपक्ष इसे गरीबों और मुसलमानों को निशाना बनाने का तरीका बता रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12 जुलाई 2025 को असम के गोलपाड़ा जिले में पैकन रिजर्व फॉरेस्ट में बड़ा बेदखली अभियान चला। यहाँ 140 हेक्टेयर (करीब 1,038 से 1,040 बीघा) वन भूमि पर अवैध कब्जा था।

गोलपाड़ा के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर तेजस मारिस्वामी ने बताया कि 1,080 परिवारों ने यहाँ घर बना रखे थे। इनमें से ज्यादातर बंगाली मूल के मुसलमान थे, जो पड़ोसी इलाकों या बांग्लादेश से आकर बसे हुए थे। अभियान में 36 बुलडोजर लगाए गए, इलाके को 6 ब्लॉकों में बाँटा गया। करीब 2,500 से 2,700 संरचनाएँ (घर, दुकानें) ढहाई गईं। सुरक्षा के लिए 1,000 से ज्यादा पुलिस और फॉरेस्ट गार्ड तैनात थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक दिन पहले ही 95% लोग खुद इलाका छोड़ चुके थे, अपना सामान रिश्तेदारों के यहाँ रख दिया। लेकिन अभियान के दौरान एक व्यक्ति फौजौल होक ने घर गिराने से पहले खुदकुशी की कोशिश की, उसे अस्पताल ले गए। लोग रोते-बिलखते रहे, लेकिन कोई बड़ा विरोध नहीं हुआ क्योंकि डर था। एक प्रभावित रोकीबुल हुसैन (28) ने कहा, “हमारा घर चंद मिनटों में मिट्टी हो गया। अब टारपॉलिन शीट तानकर सड़क पर सोएँगे, पानी-बिजली सब काट दिया। बच्चों का क्या होगा?”

शेख राजू अहमद ने बताया कि 18 जून से रोज लाउडस्पीकर पर ऐलान हो रहा था- 27 जून तक खाली करो। पिछले साल नवंबर-दिसंबर से नोटिस मिले थे, आखिरी वॉर्निंग 10 जुलाई की थी। शुक्रवार को जुमे की नमाज की वजह से अभियान टाला गया। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने वन भूमि खाली करने का ऑर्डर दिया था, ताकि हाथी-मानव संघर्ष कम हो।

इससे ठीक पहले, 8-9 जुलाई 2025 को धुबरी जिले में चरुवा बकरा, चिरकुटा और संतोषपुर गांवों से 3,500 बीघा (करीब 1,160 एकड़) जमीन खाली कराई गई। यहाँ 1,100 से 1,600 परिवार रहते थे, ज्यादातर बंगाली मूल के मुसलमान घुसपैठिए। ये जमीन 3,400 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट के लिए दी जानी है। सीएम हिमंता ने पिछले महीने साइट का दौरा किया था। अभियान में हिंसा हुई- लोगों ने एक्सकेवेटर मशीनों को नुकसान पहुँचाया, पुलिस पर हमला किया। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 11 जुलाई 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मई 2021 से अब तक 25,000 एकड़ (करीब 10,000 हेक्टेयर) से ज्यादा जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है। अगले हफ्ते पूरा डेटा जारी करेंगे।

सरमा ने कहा, “अभियान जारी रहेगा। हाईकोर्ट ने वन भूमि खाली करने को कहा है, सिर्फ बेदखल लोगों को पानी और जरूरी सामान दें। ये घुसपैठिए बंगाली हैं, जो 200-300 किमी दूर से आकर हिंदू या असमिया मुसलमान बहुल इलाकों में बस रहे। साजिश है असम की डेमोग्राफी बदलने की। अगर बीजेपी न होती, तो भूगोल बदल जाता।”

हिमंता ने अपनी बात को उदाहरण देते हुए समझाया कि लखीमपुर में साउथ सलमारा, करीमगंज से लोग आए। ग्वालपाड़ा, बारपेटा, धुबरी में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए, 10-12 हजार परिवार आकर स्थानीयों को विस्थापित कर रहे। पुनर्वास पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “सिर्फ भूमिहीन भारतीय नागरिकों को जमीन मिलेगी, अपने जिले में अप्लाई करके। घुसपैठियों के लिए कुछ नहीं।” सरमा ने कहा, “स्वदेशी लोगों की जमीन बचानी है। मैं असमिया बहुमत बनाए रखने के लिए लड़ूँगा, वरना हट जाऊँगा।”

कई बार अतिक्रमण विरोधी अभियान चला चुकी है बीजेपी सरकार

  • साल 2021 में हिमंता सीएम बने, तो पहला बड़ा अभियान 20 सितंबर 2021 को दरांग के ढालपुर में- 25 हजार एकड़ पर 3 हजार परिवार हटाए, हिंसा में 2 मौतें, 20 घायल।
  • दिसंबर 2022 में नागाँव के बटद्रवा में 1,200 बीघा खाली, 5 हजार लोग प्रभावित।
  • जनवरी 2023 में पावा रिजर्व फॉरेस्ट में 450 हेक्टेयर से 500 परिवार हटाए।
  • 2023 से गोलपाड़ा के चार रेंजों में 650 हेक्टेयर खाली- 200 हेक्टेयर पर घर, 450 पर खेती।
  • 2021-2022 से दिसंबर 2024 तक कुल 10,905 हेक्टेयर मुक्त।
  • काजीरंगा, बटाद्रबा थान जैसी जगहों से भी कब्जा हटाया।
  • बीजेपी का 2021 चुनावी वादा था- सरकारी जमीन मुक्त कराकर स्वदेशी भूमिहीनों को दें।

राज्य में कुल कितना अतिक्रमण?

  • साल 2024 तक असम की कुल फॉरेस्ट लैंड 17 लाख हेक्टेयर, जिसमें 3.62 लाख हेक्टेयर (22%) पर कब्जा।
  • 2021 तक कुल 43 लाख बीघा (करीब 6,652 वर्ग किमी) जमीन पर अतिक्रमण- गोवा जैसे राज्य के कुल क्षेत्रफल से भी दोगुना, जिसमें 3,172 वर्ग किमी वन भूमि।
  • सत्र भूमि (वैष्णव मठों की) पर भी- 11 जिलों में 15,288 बीघा (1,898 हेक्टेयर) जमीन पर भी अतिक्रमण
  • पड़ोसी राज्यों द्वारा अतिक्रमण- अरुणाचल 16 हजार हेक्टेयर, नागालैंड 59 हजार, मेघालय 3.4 हजार, मिजोरम 3.6 हजार। कुल 82 हजार हेक्टेयर।
  • असम में 323 रिजर्व फॉरेस्ट, 18 वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, 5 नेशनल पार्क

इस अभियान से सरकार को असमिया वोटरों में समर्थन मिल रहा है, जो मानते हैं कि बंगाली मुस्लिमों ने उनकी ज़मीन और पहचान छीनी है। लेकिन दूसरी ओर विपक्ष इस पर सरकार को ‘क्रूर’ और ‘एकतरफा’ बता रहा है। अगले साल 2026 में चुनाव हैं। उससे पहले यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से और ज़्यादा चर्चा में आ सकती है।

बिहार की वोटर लिस्ट में मिले घुसपैठियों के नाम, बांग्लादेश-नेपाल-म्यांमार से आकर बनाई फर्जी पहचान: EC सबको करेगा बाहर, राज्य में कुल 7.89 करोड़ वोटर

बिहार में चल रही विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) ने एक बड़ी खोज की है। उन्होंने चुनावी सूची में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए कई लोगों के नाम पाए हैं। चुनाव आयोग के सूत्रों ने रविवार (13 जुलाई 2025) को बताया कि जाँच के बाद इन नामों को अंतिम सूची से हटाया जा सकता है। यह खबर ऐसे समय आई है जब बिहार में मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने का काम जोरों पर है।

सूत्रों के मुताबिक, नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों के नाम 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित होने वाली अंतिम चुनावी सूची में शामिल नहीं किए जाएँगे। लेकिन यह फैसला 1 अगस्त 2025 के बाद ठीक से जाँच करने के बाद ही लिया जाएगा। अभी तक चुनाव आयोग ने ऐसे कितने मतदाताओं की संख्या नहीं बताई है।

यह पता चला है कि बीएलओ घर-घर जाकर लोगों से नामांकन फॉर्म बाँट रहे थे और इकट्ठा कर रहे थे। यह फॉर्म उन मतदाताओं के लिए हैं जो 24 जून 2025 तक वोटर के रूप में रजिस्टर्ड हो चुके हैं। बिहार में कुल करीब 7.89 करोड़ वोटर हैं। यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए चलाई जा रही है।

एसआईआर के टाइमलाइन के अनुसार, लोग अपनी नागरिकता और जन्म तिथि साबित करने वाले दस्तावेज 25 जुलाई तक जमा कर सकते हैं। अगर कोई 25 जुलाई तक दस्तावेज नहीं दे पाता, तो उसके पास 30 अगस्त तक का समय है, जब दावे और आपत्तियाँ दाखिल करने की आखिरी तारीख है। 1 अगस्त को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होगी, जिसमें शामिल होने के लिए नामांकन फॉर्म जमा करना जरूरी है। अगर फॉर्म बिना दस्तावेज के जमा किया गया, तो 30 अगस्त तक दस्तावेज देकर अंतिम सूची में नाम शामिल करवाया जा सकता है।

इसके लिए इन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी-

  • मान्यता प्राप्त बोर्ड या विवि द्वारा निर्गत शैक्षिक प्रमाण पत्र
  • जाति प्रमाण पत्र
  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी)
  • पासपोर्ट
  • राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकार द्वारा तैयार पारिवारिक रजिस्टर
  • बैंक, डाकघर, एलआईसी आदि द्वारा 1 जुलाई 1987 के पूर्व निर्गत किया गया कोई भी प्रमाण पत्र
  • वन अधिकार प्रमाण पत्र
  • नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी कर्मियों का पहचान पत्र
  • स्थाई निवास प्रमाण पत्र
  • सरकार की कोई भी भूमि या मकान आवंटन का प्रमाण पत्र
  • सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत जन्म प्रमाण पत्र

विपक्षी पार्टियों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह अभियान गरीबों और प्रवासी मजदूरों को वोट से वंचित करने की साजिश है। वे दावा करते हैं कि कई गरीब लोग दस्तावेज जमा करने में मुश्किल महसूस करते हैं, जिससे उनका नाम सूची से कट सकता है। चुनाव आयोग ने कहा है कि यह सिर्फ सही मतदाताओं को सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि फर्जी नाम न रहें।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार जैसे बड़े राज्य में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहते हैं। नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोग अक्सर सीमा पार करके भारत में रहते हैं और काम करते हैं। लेकिन वोटर बनने के लिए भारतीय नागरिकता जरूरी है। अगर जाँच में साबित हो गया कि ये लोग विदेशी हैं, तो उनके नाम हटाए जाएँगे। चुनाव आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे समय पर दस्तावेज जमा करें, ताकि कोई समस्या न आए।

RSS के जिस स्वयंसेवक के वामपंथी गुंडों ने काट दिए पैर, राष्ट्रपति ने उनको राज्यसभा भेजा: जानिए कौन हैं केरल के सदानंदन मास्टर

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 4 हस्तियों को राज्यसभा के लिए नामित किया है। राज्यसभा के लिए नामित किए जाने वालों में पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, अजमल कसाब के खिलाफ केस लड़ने वाले वकील उज्जवल निकम, इतिहासकार मीनाक्षी जैन और सामाजिक कार्यकर्ता C सदानंदन मास्टर हैं।

इन चारों नामों को राज्यसभा में नामित करने का फैसला राष्ट्रपति ने रविवार (13 जुलाई, 2025) को लिया है। राज्यसभा में 12 ऐसे सदस्य राष्ट्रपति नामित करते हैं। लेकिन इस बार नामित होने वाली हस्तियों में एक नाम सबसे अलग है। यह नाम केरल से आने वाले स्वयंसेवक C सदानंदन मास्टर का है जिनके पैर कम्युनिस्टों ने 1994 में काट दिए थे।

सदानंदन मास्टर को राज्यसभा में नामित किए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी बधाई दी है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा. “श्री C सदानंदन मास्टर का जीवन साहस और अन्याय के आगे न झुकने की प्रतिमूर्ति है। हिंसा और धमकी भी राष्ट्र विकास के प्रति उनके जज्बे को डिगा नहीं सकी।”

उन्होंने आगे लिखा, “एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उनके प्रयास सराहनीय हैं। युवा सशक्तिकरण के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता है। राष्ट्रपति जी द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत होने पर उन्हें बधाई। सांसद के रूप में उनकी भूमिका के लिए शुभकामनाएँ।”

कौन हैं सदानंदन मास्टर?

61 साल के केरल के C सदानंदन मास्टर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए नामित किया है। सदानंदन मास्टर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रहे हैं। वह बीते लगभग 5 दशक से RSS के स्वयंसेवक हैं। केरल के कन्नूर के रहने वाले सदानंदन मास्टर पेशे से शिक्षक रहे हैं।

सदानंदन मास्टर का पूरा परिवार ही कम्युनिस्टों का था। उनके पिता और भाई सक्रिय वामपंथी कार्यकर्ता थे। सदानंदन मास्टर के भाई वामपंथी छात्र संगठन SFI के पुराने काडर थे। घर में सभी के कम्युनिस्ट होने के बावजूद सदानंदन मास्टर का झुकाव RSS की तरफ था।

2016 में द न्यूज मिनट को दिए एक इंटरव्यू में सदानंदन मास्टर ने बताया था कि वह 12वीं तक लगातार संघ के कामों में लगे हुए थे। उन्होंने बताया था कि इसके बाद वह जब आगे की पढ़ाई के लिए कॉलेज पहुँचे तो वह वामपंथ के प्रभाव में आ गए और कुछ दिनों तक खुद भी कम्युनिस्ट बन गए।

उन्होंने बताया कि कम्युनिस्ट बनने के बावजूद उनका झुकाव संघ की तरफ होता रहा और उनको यह प्रतीत हुआ मार्क्सवाद नहीं बल्कि राष्ट्रवाद की विचारधारा ही सही है। उन्होंने बताया था कि इसके बाद वह मलयालम कवि की ‘भारत दर्शानांगल’ कविता पढ़ने के बाद पूरी तरह वापस स्वयंसेवक हो गए।

सदानंदन मास्टर की लगातार समाजसेवा और उनके संघर्ष को देखते हुए 2016 में उन्हें भाजपा ने कूथूपरम्बू विधानसभा से टिकट भी दिया था। हालाँकि, वह कम्युनिस्ट उम्मीदवार KK शैलजा से हार गए थे। KK शैलजा बाद में केरल की स्वास्थ्य मंत्री बनी थीं।

सदानंदन मास्टर की कहानी इन सबसे अलग एक और है। यह कहानी उनके विचारधारा के प्रति समर्पण और कम्युनिस्टों की हिंसा से जुड़ी हुई है। सदानंदन मास्टर की यह कहानी 1994 में पैर काटे जाने से जुड़ी है। यह कीमत उन्हें वामपंथी विचारधारा छोड़ने के लिए चुकानी पड़ी थी।

1994 का वो हादसा और मास्टर सदानंदन

सदानंदनन 30 साल की थी जब यह भयावह घटना हुई थी। वह पेरिनचरी, मट्टनूर नगर पालिका में सरकार-एडेड कुजिक्कल लोअर प्राइमरी स्कूल में एक शिक्षक थे। 25 जनवरी, 1994 को सदानंदन मास्टर अपनी बहन की शादी की व्यवस्था पर बात करने के बाद शाम को अपने चाचा के घर से लौट रहे थे।

जैसे ही वह बस से नीचे उतरे और अपने घर की ओर चलना शुरू कर दिया, कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने उनकी पिटाई चालू कर दी। यह CPI(M) के गुंडे थे। जिन्होंने न केवल मास्टर को बेरहमी से पीटा, बल्कि उनके दोनों पैरों को बीच सड़क पर काट दिया।

खून के प्यासे वामपंथियों ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि सदानंदन मास्टर अब उनकी विचारधारा से ताल्लुक नहीं रखते थे औ RSS का हिस्सा बन चुके थे। कम्युनिस्ट इसे एक धमकी के तौर पर दिखाना चाहते थे कि जो भी वामपंथ छोड़ेगा, उसका यही हश्र होगा।

कन्नूर की भीड़ में मौजूद कोई व्यक्ति उन्हें बचाने ना आए, इसके लिए वामपंथियो ने वहाँ पर एक बम धमाका भी किया। इसके बाद उन्हें वहीं ऐसे छोड़ दिया। उनको बाद में अस्पताल में भर्ती करवाया गया और उनके पैर भी अस्पताल ले जाए गए।

लड़े और जीते RSS के मास्टर

पैर काटे जाने के चलते मास्टर सदानंदन चलने-फिरने में सक्षम नहीं रहे थे। उनका कई दिनों तक अस्पताल में इलाज चला। सदानंदन मास्टर को इसके बाद प्रोस्थेटिक लेग्स यानी नकली पैर लगाए गए। उन्होंने इनसे चलना 6 महीने में सीख लिया और वापस संघ के काम में लग गए।

कम्युनिस्टों का जानलेवा हमला भी उन्हें रोक नहीं पाया। निरंतर वह समाजसेवा में जुटे रहे। सदानंदन मास्टर ने इसके बाद केरल में भाजपा को खड़ा करने में सहयोग दिया। उनके चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हिस्सा लिया था और उनके साहस की प्रशंसा की थी।

वर्ष 2007 में उन्हें न्याय मिला था और उन पर हमला करने वाले कम्युनिस्टों को सजा और जुर्माना दोनों दिया गया था। बाद में हाई कोर्ट ने भी कम्युनिस्टों की यह सजा बरकरार रखी थी। 2025 में भी केरल हाई कोर्ट ने इस सजा बरकरार रखा था।

अमीरी का लालच, सनातन की बुराई, मुस्लिम लड़कों को टारगेट… छांगुर पीर 3 तरीके से करवाता था धर्मांतरण: पीड़िता ने बताया- शागिर्द मेराज ने पूरे परिवार के लिए फँसाई हिन्दू लड़कियाँ

छांगुर पीर धर्मांतरण कराने के लिए कई तरीके अपनाता था। इनमें सबसे पहला तरीका था मुस्लिम युवकों से हिंदू लड़कियों को दोस्ती कर निकाह कराना। दूसरे में वह नीतू और नवीन का उदाहरण देता था कि कैसे दोनों ने इस्लाम अपनाया और अब अमीर हो गए। लोग उसकी बातों से प्रभावित होकर इस्लाम अपना लेते थे।

ऐसे कई मामलों में छांगुर पीर की धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा हुआ। कई पीड़ितों ने सामने आकर छांगुर के जाल में फँसने की आपबीती सुनाई है।

औरैया की छांगुर ने हिंदू परिवार बर्बाद किया

एक मामला औरैया जिले का है, जहाँ हिंदू लड़की ने सामने आकर छांगुर की सच्चाई बताई है। कैसे छांगुर ने लड़की का परिवार बर्बाद कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 22 साल की हिंदू युवती ने 3 जुलाई 2025 को घर वापसी की। युवती औरैया जिले के बाबरपुर गाँव की रहने वाली है। एक दिन माँ ज्योति शर्मा और पिता अरविंद शर्मा कानपुर गए हुए थे। वहाँ एक लड़के से मुलाकात हुई, उसने अपना नाम रुद्र शर्मा बताया था।

युवती बताती हैं कि तभी माँ ने उससे पिता के शराब की लत के बारे में जिक्र किया। तो रुद्र ने छांगुर पीर के पास इलाज बताया। फिर पूरा परिवार रुद्र शर्मा के साथ छांगुर के पास पहुँचा। छांगुर ने परिवार को ताबीज दिया। इसके बाद से रुद्र शर्मा ने युवती को प्रेमजाल में फँसाया और फतेहपुर की एक मस्जिद में निकाह कर लिया।

युवती को निकाह के बाद रुद्र शर्मा का असली नाम मेराज अंसारी होने की जानकारी लगी। युवती ने बताया कि वह उसका घर छोड़कर आ गई। उसके भाई भी हिंदू लड़कियों को फँसाने का काम करते थे। एक बार उसके अब्बा रियाज और भाई उमर ने भी युवती का शारीरिक शोषण किया।

युवती ने बताया कि एक दिन मेराज उसके घर आया और युवती की छोटी बहन से निकाह करने के लिए कहा। ऐसा न करने पर युवती की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो वायरल करने की धमकी दी।

इस धमकी के बाद युवती के पिता ने उसके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया, जिसके बाद मेराज की मौके पर ही मौत हो गई। युवती बताती हैं कि मेराज अंसारी की हत्या में उसकी माँ और पापा दोनों जेल में बंद हैं।

हिंदू परिवार को लालच देकर धर्मांतरण कराया

छांगुर पीर का धर्मांतरण का दूसरा तरीका लालच देना था। वह हिंदुओं को पैसे और जिंदगी बदलने लालच देकर इस्लाम कबूल करवाता था।

ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ है। एक बार छांगुर के घऱ मजदूर नरेंद्र, जग प्रसाद कश्यप, हरजीत, मालती देवी पहुँची। यहाँ छांगुर ने चारों लोगों को शांति पाठ पढ़ाया। फिर इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश करने लगा। कहता कि इस्लाम अपनाओगे तो फायदे में रहोगे। छांगुर ने नवीन और नीतू रोहरा का उदाहरण दिया। कहा कि इनके पास बंगला और गाड़ी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नरेंद्र, जग प्रसाद कश्यप और हरजीत ने छांगुर के जाल में फँसकर धर्म परिवर्तन करा लिया। लेकिन मालती देवी ने इनकार कर दिया। इसके बाद छांगुर ने मालती देवी पर चोरी का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई है। मालती देवी छांगुर की ही साइट में मजदूरी करती थी। अब इस एफआईआर पर ATS जाँच कर रही है।

वहीं, हरजीत ने 03 जुलाई 2025 को घर वापसी कर ली है। हरजीत ने बताया कि छांगुर ने नागपुर में सुपरवाइजर की नौकरी दिलाने का झाँसा देकर धर्मांतरण कराया था। हरजीत बताते हैं कि उन्होंने विरोध किया था, लेकिन छांगुर ने उनके खिलाफ 2 मुकदमे दर्ज कर दिए।

तीसरे तरीके में हिंदू धर्म को बुराई कर धर्मांतरण कराता

छांगुर का धर्मांतरण कराने का तीसरा तरीका था हिंदू धर्म की बुराई करना। वह गरीब और बेसहारा लोगों को निशाना बनाता था। उनसे हिंदू धर्म की बुराई करता और इस्लाम की अच्छा बताता।

छांगुर का दूसरा ठिकाना आजमगढ़ था। जिले में देवगाँव थाना क्षेत्र के चिरकिहिट गाँव में पुलिस ने छापेमारी की थी। यहाँ पुलिस को एक मजार में त्रिशुल मिला था, जिस पर फूलों की माला लटकी थी। इस मजार में कव्वाली गई जाती थी। इसके जरिए हिंदू धर्म की मान्यताओं को गलत और खराब बताया जाता था।

छांगुर के जिगरी दोस्त ने उसे पकड़वाया

छांगुर को बड़े अधिकारियों संग उठना बैठना था। उसकी प्रशासन में गहरी पकड़ थी। वह अधिकारियों को ‘नग’ देकर अपनी छवि मजबूत करता था। इसी वजह से उस पर कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन हालात तब बदल गए, जब उसके ही जिगरी दोस्त ने उसके खिलाफ सबूत इकट्ठा करने शुरू किए।

छांगुर के साथ काम करने वाला बब्बू चौधरी ने ही छांगुर की अवैध गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज जुटाए। फिर उन दस्तावेजों को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुँचा दिया। इसके बाद ही ATS और STF ने मामले में संज्ञान लिया और छांगुर पीर का अवैध धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा हुआ।

दरअसल, साल 2021 में निर्माण कार्य के दौरान छांगुर और बब्बू चौधरी के बीच पैसों के लेन-देन में बात बिगड़ी। नीतू को शक हुआ कि बब्बू ने निर्माण कार्य में ₹2.5 करोड़ की बेईमानी की है। इसके बाद छांगुर ने बब्बू पर पुलिस केस दर्ज कराया। तभी से बात बिगड़ी और बब्बू ने बदला लेने के लिए छांगुर के खिलाफ सबूत जुटाने शुरू कर दिए।

छांगुर ने नीतू की बेटी का निकाह अपने नाती से करा दिया

छांगुर के साथ धर्मांतरण नेटवर्क में काम करने वाली नीतू उर्फ नसरीन और उसके परिवार ने धर्म परिवर्तन कर लिया। इसके बाद नसरीन की बेटी का निकाह छांगुर के नाती अरबाज से करा दिया गया। अरबाज की उम्र करीब 25 वर्ष है। वहीं, नसरीन की बेटी की उम्र पासपोर्ट के मुताबिक केवल 15 वर्ष है।

बलरामपुर में ग्रामीण बताते हैं कि नसरीन की बेटी को स्कूल जाने से रोका गया था। छांगुर उसे घर से बाहर नहीं जाने देते था, इस डर से की कहीं वो उसके राज न खोल दे। इसीलिए अक्सर परिवार के साथ ही रखता था।

क्या है पूरा मामला ?

बलरामपुर में एक बड़े अवैध धर्मांतरण नेटवर्क को चलाने वाला जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर (जिसे हाजी पीर जलालुद्दीन, पीर बाबा या हजरत बाबा भी कहा जाता है) पुलिस की गिरफ्त में हैं। छांगुर पीर पर हिंदू लड़कियों, गरीब और असहाय लोगों को बहला-फुसलाकर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप है।

छांगुर पीर का नेटवर्क खाड़ी देशों से ₹100 करोड़ से अधिक की विदेशी फंडिंग प्राप्त करता था। इस फंडिंग से धर्मांतरण की गतिविधियों को अंजमा देता था। गैंग के पास 40 से अधिक बैंक खाते थे, जिनमें बड़े पैमाने पर लेनदेन होता था।

छांगुर पीर इन पैसों से लग्जरी गाड़ियाँ, बंगले और अन्य संपत्तियाँ खरीदता था। गैंग जाति के आधार पर धर्मांतरण के लिए पैसा देता था। गैंग में शामिल मुस्लिम युवक हिंदू पहचान बताकर युवतियों को प्रेमजाल में फँसाते और उनका ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण करवाते।

छांगुर पीर के साथ नीतू रोहरा उर्फ नसरीन भी पुलिस की गिरफ्त में है। ATS ने बताया कि पूरा नेटवर्क भारत में फैला है। इस गैंग के 14 अन्य सदस्य फरार हैं, जिनकी तलाश में टीमें जुटी हुई हैं।

फिलहाल छांगुर पीर की अवैध ठिकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है और उसके खिलाफ ATS, पुलिस और ED समेत कई एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं।

छांगुर पीर का मामला केवल धर्मांतरण का नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित आपराधिक गैंग का है। विदेशी फंडिंग और ‘शिजर-ए-तैयबा’ जैसी सामग्री का उपयोग करते हुए, यह रैकेट ‘लव जिहाद’ और लालच के माध्यम से कमजोर वर्गों (खासकर हिंदुओं) को निशाना बना रहा था। एटीएस और ईडी की लगातार कार्रवाई इस गहरी साजिश की परतों को खोल रही है।

‘पायलट की गलती’ या फ्यूल कंट्रोल स्विच में तकनीकी खराबी: 2018 की FAA एडवायजरी ने उठाए नए सवाल, बताया था- गड़बड़ हो सकती है ईंधन की सप्लाई

अहमदाबाद से लन्दन जा रहे एअर इंडिया के 787-8 ड्रीमलाइनर विमान हादसे की शुरूआती जाँच रिपोर्ट सामने आ चुकी है। इसमें हादसे का कारण इंजन को ईंधन की सप्लाई बंद होना बताया गया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह सप्लाई किसने बंद की।

रिपोर्ट में पायलटों के फ्यूल स्विच बंद होने को लेकर बातचीत सामने आई है। लेकिन इसी के साथ अमेरिकी विमानन नियामक FAA (फेडरल एयर एडमिनिस्ट्रेशन) की एक 2018 की एडवायजरी भी प्रकाश में आई है, जिसमें बोइंग निर्मित विमानों के फ्यूल स्विच में गड़बड़ी की बात कही गई थी।

FAA ने क्या कहा था?

FAA ने दिसम्बर, 2018 में यह बुलेटिन सभी एयरलाइन्स को भेजा था। FAA ने बताया था कि बोइंग कम्पनी को 737 विमान ऑपरेट करने वाली एयरलाइन्स से फ्यूल स्विच के बारे में कुछ रिपोर्ट्स मिली हैं। FAA के अनुसार, एयरलाइन्स ने बताया था कि कुछ विमानों में फ्यूल कंट्रोल स्विच बिना लॉकिंग फीचर के इंगेज हुए इंस्टाल हो गए थे।

FAA ने बताया था कि फ्यूल कंट्रोल स्विच में लॉकिंग फीचर इसलिए होता है ताकि इसको धोखे से बंद या चालू नहीं किया जा सके। FAA के अनुसार, अगर लॉकिंग स्विच काम ना करे तो ईंधन सप्लाई और उसकी कटौती अनजाने में हो सकती है और यह गड़बड़ कर सकती है।

FAA की फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर एडवायजरी

एडवायजरी में FAA ने यह बताया था कि लॉकिंग फीचर चालू रहने की सूरत में फ्यूल कंट्रोल स्विच को ऑन/ऑफ करने के लिए पायलट को उसे ऊपर उठाना पड़ता है और अगर लॉकिंग फीचर नहीं होता तो स्विच को बिना उठाए ही उसकी स्थिति बदली जा सकती है।

FAA ने कहा था कि स्विच को लॉकिंग फीचर के बिना चलाने पर इंजन बंद होने जैसे अनपेक्षित घटनाएँ भी हो सकती हैं। 2018 की इस एडवायजरी के अनुसार, जिन फ्यूल कंट्रोल स्विच में यह गड़बड़ी सामने आई थी, वह बोइंग की वेंडर कम्पनी हनीवेल ने बनाए थे।

इस एडवायजरी में FAA ने बताया था कि यह घटनाएँ भले ही 737 विमान मॉडल के साथ सामने आई हों लेकिन फ्यूल कंट्रोल स्विच का डिजाइन और भी विमानों में इसके जैसा ही था। इन विमानों की फेहरिस्त में 787-8 ड्रीमलाइनर भी था। यही विमान 12 जून, 2025 को अहमदाबाद में हादसे का शिकार हुआ।

FAA ने सभी एयरलाइन्स को बोला था कि वह इस सूचना के बाद जल्द से जल्द अपने विमानों की जाँच कर लें। इसे एअर इंडिया समेत बाकि एयरलाइन्स को भी भेजा गया था क्योंकि यह भी उस फेहरिस्त में शामिल कई विमानों का संचालन करती है। हालाँकि, इस जाँच को बाध्यकारी नहीं बनाया गया था।

अब क्यों चर्चा में है FAA की रिपोर्ट?

12 जून, 2025 को अहमदाबाद में हुए विमान हादसे की शुरूआती जाँच रिपोर्ट भारतीय एजेंसी AAIB ने 12 जुलाई को जारी की है। इस जाँच रिपोर्ट में बताया गया है कि विमान के उड़ान भरने के कुछ सेकंड के भीतर ही विमान को ईंधन मिलना बंद हो गया था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 में ईंधन सप्लाई बंद होने के बाद एक पायलट ने दूसरे पायलट से पूछा था कि उसने फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद क्यों किया। इसके जवाब में दूसरे पायलट ने ऐसा करने से इनकार किया था।

AAIB रिपोर्ट का वह हिस्सा, जहाँ पर फ्यूल कंट्रोल स्विच के विषय में बात हुई है

रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि फ्यूल कंट्रोल स्विच क्यों बंद हो गए थे। चूंकि पायलटों ने इससे मना किया था और बाकी बातचीत के लिए समय नहीं बचा था इसलिए इस पर और भी कोई जानकारी सामने नहीं आई। ऐसे में फ्यूल कंट्रोल स्विच की संभावित गड़बड़ी को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

विमान में क्यों लगाए जाते हैं फ्यूल कंट्रोल स्विच?

आधुनिक विमान बड़ी मात्रा में तेल खपत करते हैं और उनके इंजनों को चलने के लिए नियमित ईंधन की सप्लाई चाहिए होती है। विमानों में फ्यूल सप्लाई को नियमित करने के लिए यह स्विच लगाए जाते हैं। इनको बंद करने की आवश्यकता ईंधन भरते समय पड़ती है।

फ्यूल कंट्रोल स्विच

इसके अलावा अगर किसी विमान के इंजन उड़ान के दौरान गड़बड़ करते हैं या बंद हो जाते हैं तो उन्हें दोबारा चालू करने के लिए भी फ्यूल कंट्रोल स्विच काम में लाए जाते हैं। कई ऐसे भी मौके हो सकते हैं जब दो विमान वाले इंजन का एक इंजन खराब हो जाए, ऐसे में उसे बंद करने के लिए भी फ्यूल कंट्रोल स्विच का इस्तेमाल किया जाता है।

धोखे से यह बंद या चालू ना हो जाएँ, इसके लिए इन स्विच के आसपास लोहे की एक रेलिंग जैसी लगाई जाती है। फ्यूल कंट्रोल स्विच क कॉकपिट में लगाने की शुरुआत जेट विमानों के आने के साथ ही 1950 के दशक में चालू हो गई थी। बोइंग 707 और डगलस DC-8 जैसे विमानों में पहली बार आधुनिक फ्यूल कंट्रोल स्विच लगाए गए थे।

एअर इंडिया का इस मामले पर क्या रुख?

एअर इंडिया ने भी 2018 की FAA एडवायजरी को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। एअर इंडिया ने हादसे की जाँच कर रही एजेंसी AAIB को बताया है कि उसे भी FAA की यह एडवायजरी मिली थी लेकिन इसमें कही गई इंस्पेक्शन की बात अनिवार्य नहीं थी। एअर इंडिया ने बताया है कि उसने यह इंस्पेक्शन अपने विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर नहीं किए थे। उसने यह भी स्पष्ट किया है कि विमान के बाकी मानकों को वह लगातार पूरा कर रही थी।

‘पायलटों की गलती’ वाले दावे का खंडन

इंडियन एयरलाइन्स पायलट एसोसिएशन (ALPA) ने AAIB की शुरूआती जाँच रिपोर्ट का खंडन किया है। यूनियन ने कहा है कि शुरूआती तौर पर पायलटों को गलत दिखाने का प्रयास किया गया है। उसने यह भी कहा गया है कि रिपोर्ट में पायलटों को लेकर पक्षपात किया गया है। यूनियन ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि रिपोर्ट जारी होने से पहले ही मीडिया के पास पायलटों को लेकर जानकारी पहुँच गई थी, जो ठीक नहीं है।

पायलट की गलती या गड़बड़ी, इसका नहीं कोई जवाब

एअर इंडिया हादसे की रिपोर्ट ने जहाँ कई जवाब दिए हैं, वहीं कई प्रश्न भी खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद होने का असल कारण क्या था, जो बाद में हादसे कारण बना। रिपोर्ट में यह भी जवाब स्पष्ट नहीं हुआ कि आखिर फ्यूल कंट्रोल स्विच चालू किए जाने के बाद एक ही इंजन वापस क्यों ऑन हो पाया।

इस बीच कई विदेशी मीडिया पोर्टल ने एअर इंडिया के पायलटों कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर को ही हादसे का जिम्मेदार बताने का प्रयास किया है। जबकि AAIB जाँच रिपोर्ट से कहीं पर भी यह स्पष्ट नहीं होता कि उन्होंने ही फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद किया था।

इस बीच 2018 की उस एडवायजरी ने यह भी प्रश्न उठा दिए हैं कि कहीं इन स्विच में कोई तकनीकी समस्या तो नहीं थी।

छांगुर पीर ने सरकारी तालाब को पाट कर की 30000 स्क्वायर फीट जमीन पर अवैध प्लॉटिंग, खड़ी की महँगी प्रॉपर्टी: धर्मांतरण के सरगना के नेटवर्क की हो रही पड़ताल, खुल रहीं परतें

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में बड़े स्तर पर धर्मांतरण की साजिश करने वाले सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर को लेकर कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। हिंदुओं का ब्रेनवॉश करके उनका धर्म परिवर्तन करना और उनके नाम पर अवैध जमीन करने के साथ-साथ छांगुर अपने काम को अंजाम देने के लिए भी कई तरकीबें खोजता था।

इसके साथ ही वह सरकारी जमीनों पर कब्जा कर कागजों में हेर फेर भी करता था। जाँच में सामने आया है कि विदेशी फंडिंग के जरिए छांगुर ने करोड़ों की संपत्ति बनाई। इसके साथ ही उतरौला में कई महँगी प्रॉपर्टी का भी निर्माण करवाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छांगुर ने उतरौला में कई लोगों के नाम पर पहले जमीन खरीदी और फिर सरकारी जमीनों पर कब्जा जमा लिया। इसके लिए उन जमीनों पर गरीबों का नाम दिखा कर कागजों में हेर-फेर भी की।

उतरौला के पटेल नगर में एक सरकारी तालाब कुंडवा को भी छांगुर ने पटवा कर वहाँ पर लगभग 30,000 वर्ग फीट में अवैध प्लॉटिंग भी करवाई। इसके लिए गरीबों के नाम पर की गई जमीन को छांगुर ने नीतू उर्फ नसरीन के नाम पर 93 लाख में खरीद ली।

लाताब पाटने के लेकर उस समय के ADM बलरामपुर ने उतरौला की नगर पालिका को लिखित शिकायत भी की थी। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

आजतक की रिपोर्ट्स के अनुसार, उस जगह पर रहने वाले स्थानीय लोगों ने छांगुर को लेकर कई खुलासे किए। छांगुर ने सांसद निधि से बनी पुलिया को भी अपने कब्जे में कर बंद कर दिया। इसकी वजह से बारिश के समय पर वहाँ के लोगों को काफी परेशानी होती है।

लड़कियाँ प्रोजेक्ट, धर्मांतरण की शर्तें

छांगुर के शब्दकोष में लड़कियों के लिए ‘प्रोजेक्ट’, धर्मांतरण के लिए ‘मिट्टी पलटना’, छांगुर से मिलने के लिए ‘दीदार’ और ब्रेन वॉश के लिए ‘काजल करना’ जैसे शब्द शामिल थे। इन कोडवर्ड्स का उपयोग करके वह अपने ज्यादातर मिशन को अंजाम देता था।

छांगुर लड़कियों को निकाह का वादा करके धर्मांतरित करता था और नए जीवन को लेकर कई शर्तें बताईं जाती थीं। इसके बाद युवाओं और लड़कियों को विदेश भेजने और पैसों का लालच दिखाया जाता था।

सभाओं में आते थे विदेशी

छांगुर पीर का एक बड़ा नेटवर्क फैला हुआ था। ये नेटवर्क बलरामपुर के चाँद औलिया दरगाह से चलाता था। यहाँ पर ही छांगुर नियमित तौर पर सभा आयोजित करता था। इसमें भारत के अंदर के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक भी शामिल होते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच में यूपी ATS को छांगुर पीर के ठिकाने से ‘शिजर-ए-तैयबा’ नाम की किताब मिली है। यह किताब खुद छांगुर पीर ने छपवाई थी। इस किताब का मकसद लोगों का ब्रेनवॉश करना था।

किताब में ऐसे लोगों का जिक्र किया गया है, जो इस्लाम के लिए अपनी जान दे सकते हैं। किताब में यह भी बताया गया है कि कैसे युवाओं को इस्लाम की तरफ आकर्षित किया जाए। यह किताब विदेशी पैसों से छपी थी।

इसके अलावा एजेंसियों के अनुसार, छांगुर पीर ‘मिशन आबाद’ का हिस्सा था। धर्मांतरण के बदले छांगुर पीर को विदेश से पैसा मिलता था। साथ ही छांगुर पीर के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से कनेक्शन थे। छांगुर पीर हाल ही में काठमांडू में हुए एक कार्यक्रम में शामिल हुआ था।

जाँच में आ सकती है कई नई बातें

जानकारी के अनुसार, छांगुर पीर का संबंध कई अन्य संगठनों से भी रहा है। जाँच में पता चला है कि उसका जुड़ाव सऊदी अरब इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक, मुस्लिम वर्ल्ड लीग, दावत-ए-इस्लाम और इस्लामिक संघ ऑफ नेपाल जैसे संगठनों से था।

छांगुर को लेकर लगातार जाँच चल रही है। ATS इस मामले पर कई बिंदुओं पर पड़ताल कर रही हैं। इस्लामिक एंगल के साथ फंडिंग, क्षेत्रीय और अन्य पहलुओं पर भी सुरक्षा एंजेंसियाँ लगातार पड़ताल में जुटी हुई हैं। वहीं ED भी छांगुर के चल अचल संपत्तियों की पड़ताल के लिए छांगुर के परिवार-जानने वालों और बैंकों से संपर्क साध रही है।

पश्चिम बंगाल में मधु मुल्ला ने भगवान शिव पर आपत्तिजनक पोस्ट की शेयर, भड़के आम हिंदू: BJP नेता सुवेंदु अधिकारी ने की गिरफ्तारी की माँग, FIR दर्ज

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के मंदिरबाज़ार इलाके में शुक्रवार (11 जुलाई 2025) को धार्मिक भावना भड़काने वाली एक फेसबुक पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया। आरोपित युवक मधु मुल्ला ने एक ऐसी तस्वीर शेयर की जिसमें भगवान शिव का अपमान किया गया था।

तस्वीर वायरल होते ही सोशल मीडिया पर आक्रोश फैल गया और पुलिस को मामले में कार्रवाई करनी पड़ी। ‘पागलिर पागल’ नाम से फेसबुक पेज चलाने वाले मधु मुल्ला ने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें एक बच्चा भगवान शिव पर पेशाब करता दिखाई दे रहा था।

साथ ही तस्वीर में बेहद आपत्तिजनक कैप्शन लिखा गया था। यह पोस्ट मंदिरबाजार निवासी और मशरूफ मुल्ला के बेटे मधु मुल्ला द्वारा की गई है। घटना के सामने आने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने एक्स पर इस मामले को उठाते हुए ममता सरकार पर आरोप लगाया कि वह हिंदू विरोधी गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं करती।

शुभेंदु अधिकारी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

उन्होंने पश्चिम बंगाल के DGP को पत्र लिखकर आरोपित की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की और चेतावनी दी कि कार्रवाई न होने पर वह खुद मंदिरबाजार जाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपित की प्रोफाइल लॉक कर दी और पोस्ट हटवा दिया।

पुलिस का कहना है कि मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और जाँच जारी है। हालाँकि अभी तक आरोपित की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी आपत्तिजनक तस्वीरों को शेयर न करें और कानून-व्यवस्था बनाए रखें। इससे पहले भी राज्य में मंदिरों में तोड़फोड़ या धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामलों को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।