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‘जो इस्लाम छोड़े उसकी हत्या कर दो’: ऑनलाइन क्लास में बच्चों को भड़काते दिखा मदरसा टीचर, गिरफ्तारी की माँग

सोशल मीडिया पर समस्त केरल सुन्नी शिक्षा बोर्ड के एक शिक्षक शफी सादी कुमारमपुत्तूर की एक वीडियो सामने आई है। वीडियो कब की है ये स्पष्ट नहीं हो पाया है। लेकिन इस वीडियो में इस्लामी उलेमा बच्चों को ये पढ़ा रहा है कि जो कोई भी इस्लाम धर्म को छोड़ता है उसे मार दिया जाना चाहिए।

कक्षा 12 के बच्चों की ऑनलाइन क्लास लेते हुए शफी सादी को यह विवादित टिप्पणी करते सुना जा सकता है। वह कहता है, “अगर कोई इस्लाम/धर्म छोड़ देता है तो उसका नसीब ही क्या है? इस्लाम उसे पश्चाताप करने के लिए कहता है, फिर भी, यदि वह पश्चाताप नहीं करता है तो उसे अल्लाह द्वारा मार दिया जाना चाहिए या जो जिम्मेदार व्यक्ति है उसके द्वारा।”

शफी वीडियो में आगे कहता है, “क्या यह हिंसा है? नहीं। यह इस्लाम के अनुयायियों को याद दिलाने के लिए है कि मजहब छोड़ने का क्या परिणाम होता है और मौत के बाद उसके साथ कैसा बर्ताव किया जाएगा। वह नरक में जाएगा।” सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इस वीडियो को देखने के बाद अब शफी सादी की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

मौलवी के विरुद्ध एक्शन की माँग

बता दें कि समस्त केरल सुन्नी विद्याभ्यासा बोर्ड इस्लामिक शिक्षा, केरल में सबसे प्रभावशाली संगठनों में से एक है, जिसका नेतृत्व भारतीय इस्लामी बुद्धिजीवी मुफ्ती मौलाना शेख अबूबकर करते हैं। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, लगभग दस हजार मदरसे समस्त केरल सुन्नी बोर्ड से संबद्ध हैं। मदरसा के बच्चे सामान्य शिक्षा के लिए स्कूलों में जाने से पहले दो घंटे के लिए धार्मिक शिक्षा प्राप्त करते हैं।

उल्लेखनीय है कि साल 2020 में प्रकाशित एक आर्टिकल के मुताबिक, यूएन ने आतंकवाद पर अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी थी कि केरल और कर्नाटक में ISIS आतंकवादियों की संख्या ज़्यादा है। इसके अलावा पिछले हफ्ते हमने भी एक रिपोर्ट में बताया था कि 2016 में कैसे फातिमा नाम की महिला 19 अन्य लोगों के साथ केरल से अफगानिस्तान गई। लेकिन जब उसके पति को वहाँ आतंकियों ने मार दिया तो उसने अफगान सरकार को सरेंडर कर दिया और अब वह भारत आने की इच्छुक है। फातिमा जैसी कई अन्य लोग हैं जिनका संबंध केरल से हैं और वह ISIS से प्रभावित होकर अफगानिस्तान चले गए।

‘किसानों’ की छेड़खानी, शराब, अपराध: OpIndia ने किया उजागर, महापंचायत ने कहा- खाली करो सड़क

दिल्ली के सीमाओं पर कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे ‘किसानों’ के खिलाफ दिल्ली के गाँव व बॉर्डर से सटे हरियाणा के गाँवों के किसानों की महापंचायत हुई। इसमें ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों को अल्टीमेटम दिया गया है कि वह 10 दिन के अंदर सिंघू बॉर्डर को खाली करें।

सोनीपत के सिरसा में हुई इस महापंचायत में दिल्ली के 12 गाँव और हरियाणा के 17 गाँव के किसान व अन्य लोग शामिल हैं। महापंचायत के अध्यक्ष का कहना है, “हमारी 3 माँगें हैं – एक तरफ से सिंघू बॉर्डर खोले, कोई हिंसा नहीं होनी चाहिए और प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड्स नहीं लगाने चाहिए।”

बता दें कि इस महापंचायत का विशेष कारण- किसानों की तरफ से लगातार बॉर्डर पर बढ़ रही हिंसा है। ताजा घटना की बात करें तो टिकरी बॉर्डर पर मुकेश नाम के युवक को जलाकर मार डाला गया था। इसके अलावा कई बार छोटी-मोटी झड़प की घटनाएँ भी हुई हैं।

इन्हीं सबसे नाराज हो कर ग्रामीणों ने घोषणा की थी कि वह 36 बिरादरी की महापंचायत करेंगे और आंदोलन के खिलाफ फैसला लिया जाएगा। यह पंचायत जांटी रोड, सिंघु स्कूल के पास सिरसा गाँव की बारात घर में हुई। इसमें हजारों लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है।

‘किसानों’ के टेंट या गुंडई का अड्डा?

‘किसानों’ ने जिस मुकेश को जला कर मार डाला, उसकी आवाज बन कर ऑपइंडिया ने वहाँ की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। ऑपइंडिया ने ही पहली बार इस बात को उजागर किया कि ‘किसान’ आंदोलन के ‘किसान’ ब्राह्मण विरोधी मानसिकता वाले हैं और मुकेश की जान भी इसी मानसिकता ने ली। मुकेश के गाँव के सरपंच टोनी कुमार ने इस बात को स्पष्ट बताया था कि जिसने मुकेश को जलाया, उसी ने जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल भी किया था। मुकेश की विधवा रेणु भी कहती हैं –

“ये लोग किसान नहीं हैं। ये लोग अपराधी हैं। दारू पिए रहते हैं। होश में नहीं रहते हैं। एक साल हो गया ये लोग जा नहीं रहे यहाँ से। गदर मचा रखा है यहाँ पर।”

मुकेश की विधवा की बातें उनकी अकेली व्यथा नहीं है। ऑपइंडिया से बातचीत में इन कथित किसानों के शराब पीने और उत्पात को लेकर मुकेश के परिजनों के अलावा सरपंच टोनी कुमार और अन्य ग्रामीणों ने भी शिकायतें कीं। ग्रामीणों का कहना है कि ये किसान उनके खेतों में शौच के लिए आते हैं, जिससे महिलाओं को परेशानी होती है। ये गाँव में आकर शराब पीकर हुड़दंग करते हैं। ट्रैक्टर पर घूमते हैं। महिलाओं से छेड़खानी करते हैं। इन्हें तुरंत प्रभाव से गाँव कसार की परिधि से हटाया जाए।”

किसान आंदोलन के कारण हो रहे धंधे चौपट

इसी संबंध में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महापंचायत के आयोजन से जुड़े संदीप ने कहा कि किसान करीब 7 महीनों से नेशनल हाइवे पर कब्जे करके बैठे हुए हैं, जिनके कारण गाँव के लोगों के अलावा बॉर्डर की सड़कों पर दुकानदार, आस-पास के इंडस्ट्रियल एरिया के फैक्ट्री मालिकों और दूसरे व्यवसाय से जुड़े लोगों का काम धंधा चौपट है।

संदीप ने बताया कि लगातार आस-पास के गाँव के लोगों के साथ मारपीट की घटनाएँ बढ़ रही हैं, पिछले दिनों पास के गाँव में रहने वाले एक व्यक्ति के हाथ काटे जाने की भी खबर है। उनके अनुसार कई बार किसान संगठनों से वे लोग माँग कर चुके हैं कि वह आंदोलन जारी रखें, बशर्ते नेशनल हाइवे के एक हिस्से को लोगों के लिए खोल दें, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

जिन पर 30000+ लोगों के कत्लेआम का आरोप, वो बनेंगे ईरान के नए राष्ट्रपति: जानिए कौन हैं इब्राहिम रायसी

ईरान के राष्ट्रपति पद के चुनावों में रुढ़िवादी मौलवी इब्राहिम रायसी को बहुमत मिलने के बाद शनिवार (जून 19, 2021) को उनकी विजय की घोषणा हुई। 60 वर्षीय रायसी ने 72 साल के मौजूदा राष्ट्रपति हसन रुहानी को रिप्लेस करते हुए राष्ट्रपति पद के लिए जीत हासिल की। अब आधिकारिक तौर पर वह अगस्त में राष्ट्रपति पद को सँभालेंगे।

बता दें कि ईरान में रुढिवादी धड़े से आने वाले रायसी को ईरान के सबसे बड़े धार्मिक नेता अयातोल्लाह अली खेमनई का कट्टर समर्थक बताया जाता है। साथ ही दुनिया उन्हें 1988 की एक घटना में 30,000 मौतों का जिम्मेदार मानती है। कहा जाता है कि 1988 में रायसी ने गर्भवती महिलायों को यातना देने, कैदियों को चट्टानों से फेंकने, लोगों को बिजली के तारों से झटका देने और हिंसा से जुड़े अन्य क्रूर आदेश दिए थे। जिसके कारण अमेरिका उनपर कुछ साल पहले प्रतिबंध लगा चुका है।

इब्राहिम रायसी

14 दिसंबर 1969 को जन्मे रायसी ईरान के कट्टर मौलवियों में से एक हैं। राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने से पहले वह ईरान की न्यायपालिका में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। 2004-2014 तक उन्होंने डिप्टी चीफ जस्टिस का पद सँभाला। बाद में 2014-2016 तक वह एटार्नी जनरल के पद पर रहे और 2019 के बाद अब तक वह ईरान के चीफ जस्टिस हैं। इसके पहले 80 और 90 के दशक में रायसी ने तेहरान में बतौर अधिवक्ता और डिप्टी अधिवक्ता के तौर पर काम किया। मालूम हो यही वह समय भी था जब उनकी पहचान एक क्रूर शासक के तौर हुई और कुछ जगह उन्हें ‘कसाई’ की संज्ञा भी मिली।

जानकारी के मुताबिक रायसी ने खमेनेई के तहत धर्मशास्त्र और इस्लामी न्यायशास्त्र की पढ़ाई की थी। चीफ जस्टिस बनने से पहले वो 2018 से वो मशहद में एक शिया मदरसा में पढ़ा भी रहे हैं। इसी के बाद 2018 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने रायशी को सुप्रीम कोर्ट का हेड नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही रायशी उस कमेटी के भी सदस्य है, जो ईरान का सर्वोच्च नेता का चुनाव करता है। रायशी ने तेहरान के शाहिद-बेहेश्ती विश्वविद्यालय में साइंस लेक्चरर जमीलेह अलमोलहोदा से शादी की है। इनकी दो बेटियाँ हैं।

न्यायपालिका में इतने लंबे करियर के दौरान वर्ष 2017 में हुए चुनाव में रायसी ने भी चुनाव लड़ा था लेकिन उदारवादी रुहानी ने उन्‍हें भारी मतों से हरा दिया था। रायसी को 38 फीसदी वोट मिले थे, वहीं रुहानी को 57 प्रतिशत वोट मिले थे। लेकिन इस बार रायसी ने भारी मतों से जीत हासिल की। उन्हें 1 करोड़ 78 लाख के करीब वोट मिले। चुनाव में उनके मजबूत प्रतिद्वंदी माने जाने वाले  ‘सेंट्रल बैंक’ के पूर्व प्रमुख अब्दुलनासिर हेम्माती उनके बहुत पीछे रहे। वहीं एक अन्य उम्मीदवार आमिर हुसैन गाजीजादा हाशमी को 10 लाख मत मिले।

1988 में 30 हजार लोगों को मारने का आरोप

1980 में रायसी सिर्फ 20 साल के थे। उस समय रायसी को तेहरान के पश्चिम में करज की क्रांतिकारी अदालत का प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया गया था और 1988 तक उन्हें तेहरान के डिप्टी प्रॉसिक्यूटर के रूप में प्रमोट किया गया। इसके बाद वो कैद में बंद ईरान के पीपुल्स मोजाहिदीन संगठन (पीएमओआई) के कार्यकर्ताओं की हत्या करने के लिए चुने गए 4 व्यक्तियों में से एक बन गए।

कुछ ही महीनों में पूरे ईरान में जेलों में बंद करीब 30,000 पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को दीवार के आगे खड़ा करके गोली मार दी गई। इन सबकी गलती मात्र ये थी कि वह शासन के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। हालाँकि, 2018 में जब रायशी से विपक्षी नेताओं को फाँसी की सजा देने में उनके योगदान के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने किसी भी तरह की भूमिका होने से इनकार कर दिया था (लेकिन इस नरसंहार का जिक्र और लोगों की आपबीती आज भी कई रिपोर्ट्स में पढ़ने को मिलती थी।) उन्होंने कहा था कि उन्हें इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी से फाइल मिला था, जिसके तहत शुद्धिकरण की प्रक्रिया की गई थी। लेकिन, उन्हीं आरोपों को लेकर 2019 में अमेरिका ने रायसी और कुछ दूसरे नेताओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिका ने रायसी पर मानवाधिकर उल्लंघन का भी आरोप लगाया था।

हरदोई में 15 साल की लड़की से तमंचे के बल पर गैंगरेप: तस्लीम, जीशान, अब्दुल सहित 5 पर आरोप, 3 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के सांडी कस्बे में गैंगरेप को अंजाम दिया गया है। गैंगरेप पीड़िता 15 साल की लड़की है जबकि रेप करने वाले 5 आरोपित हैं – तसलीम, जीशान, अब्दुल, दिलशाद और जंडेल। 15 जून की रात को इस घटना को अंजाम दिया गया था। इसके बाद पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर पाँचों आरोपित फरार हो गए थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के भाई का कहना है कि आरोपी दबंग हैं और इन लोगों ने उसे और परिजनों को घर से ही नहीं निकलने दिया। शनिवार (19 जून 2021) को पीड़िता के घर वालों ने किसी तरह सांडी थाना पहुँचे और थानाध्यक्ष अनिल सक्सेना को पूरी घटना की जानकारी दी।

पुलिस ने पाँचों आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट और गैंगरेप की धारा के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया है। मामले दर्ज करने के तुरंत बाद यूपी पुलिस हरकत में आई और कार्रवाई करते हुए पाँच में से तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

पीड़िता के भाई ने दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया कि 15 जून की रात उसके पिता रोडवेज बस चलाने शाहजहाँपुर गए थे। वह और परिवार के अन्य लोग गाँव निवासी ताऊ के लड़के की बारात में शामिल होने गए थे। घर पर उसकी 15 वर्षीय बहन व उससे छोटी बहन मौजूद थीं। इसी दौरान देर रात मौका पाकर तसलीम, जीशान, अब्दुल, दिलशाद और जंडेल के घर में घुस आए। आरोपितों ने जबरन किशोरी को गाँव के बाहर एक बाग में ले गए वहाँ पर उसके साथ तमंचे के बल पर गैंगरेप की वरदात को अंजाम दिया। 

कुछ मीडिया रिपोर्ट में पीड़िता के भाई के हवाले से कहा जा रहा है कि 15 जून की रात उसकी 15 वर्षीय बहन रात में करीब 11 बजे शौच के लिए खेतों की तरफ गई थी। इसी दौरान जंडैली, जीशान, अब्दुल, दिलशाद और तसलीम वहाँ पहुँच गए और पाँचों आरोपितों ने तमंचे के बल पर बारी-बारी से किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता नाबालिग के शोर मचाने पर आरोपितों ने जान से मारने की धमकी दी और भाग गए।

अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार यादव ने कहा, “सांडी थाना पुलिस को एक व्यक्ति ने प्रार्थना पत्र दिया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उसकी 15 वर्षीय बहन के साथ गाँव के कुछ लड़कों ने दुराचार किया है। पुलिस को जैसे ही सूचना मिली, पुलिस ने तत्काल उचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना प्रारंभ की। जो नामजद आरोपित हैं, उनमें से तीन को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। पीड़िता का मेडिकल कराया जा रहा है। जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”

BBC ने लगाया भारत का गलत नक्शा, J&K और लद्दाख को किया गायब: विरोध होने पर लगाई गुजरात के एम्बुलेंस की तस्वीर

अंग्रेजी मीडिया संस्थान BBC ने एक बार फिर से अपना भारत विरोधी रवैया दिखाया है। बीबीसी ने भारत का गलत नक्शा दिखाया, जिसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख को भारत का हिस्सा नहीं बताया गया। यूके के पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (BBC)’ ने कोविड-19 के डेल्टा वैरिएंट को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें ये छेड़छाड़ की गई। विवाद होने के बाद BBC ने भारत के उस नक़्शे को हटा दिया।

बीबीसी ने दिखाया भारत का गलत नक्शा

गौर करने वाली बात ये है कि BBC ने भारत का गलत नक्शा हटा कर उसकी जगह पर सही नक्शा नहीं लगाया, बल्कि भारत के तिरंगे झंडे को लगा दिया। लोगों ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय को टैग कर के BBC के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की। वीडियो में बीबीसी के प्रेजेंटर रोस अटकिंस समझा रहे थे कि कैसे कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट का नामकरण किया गया। उन्होंने दावा किया कि B.1.617.2 वैरिएंट भारत में अक्टूबर 2020 में पहली बार मिला।

नक़्शे को ठीक नहीं किया, लगा दिया भारत का झंडा

साथ ही कहा कि यूनाइटेड किंगडम भारत से आने वाले यात्रियों से होने वाले खतरे को पहचानने में विफल रहा। बता दें कि उस समय कई देशों में भारत से उड़ान प्रतिबंधित था, ऐसे में भारत से किसी देश में इसके फैलने की आशंका नहीं ही थी। वीडियो के 24वें सेकेंड में भारत का नक्शा दिखाया गया, जिसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख को गायब कर दिया गया। इसके बाद बदलाव कर के नक्शा की जगह भारत का झंडा लगा दिया गया।

ध्यान देने वाली बात ये भी है कि वीडियो में बदलाव के बाद रोस अटकिंस ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें भारत के नक़्शे की जगह गुजरात के एक एम्बुलेंस की तस्वीर थी। गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है, ऐसे में राज्य को लेकर वामपंथी मीडिया के मन में अक्सर नकारात्मक भावना ही रहती है। बता दें कि अब तक गुजरात में कोरोना के 8,22,149 मामले सामने आए हैं, जबकि महाराष्ट्र में इससे 7.3 गुना ज्यादा 59,63,420 संक्रमित मिले हैं।

वीडियो के एक अन्य वर्जन में भारत के नक़्शे की जगह लगा दी गुजरात के एम्बुलेंस की तस्वीर

चूँकि महाराष्ट्र में शिवसेना, NCP और कॉन्ग्रेस की सरकार है, ऐसे में BBC ने जानबूझ कर भाजपा शासित गुजरात के एम्बुलेंस की तस्वीर लगाई। अटकिंस ने लिखा कि ‘भारत के डेल्टा वैरिएंट’ ने बोरिस जॉनसन की कोविड योजनाओं में देरी करा दी। इसी साल जनवरी में भी BBC ने भारत का गलत नक्शा दिखाने के बाद माफ़ी माँगी थी। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन और दुनिया के देशों के संबंधों के बारे में बात की गई थी।

‘जो अकेले चुनाव लड़ने की बात करेगा, जनता उसे जूते-चप्पलों से पीटेगी’: CM उद्धव ने कॉन्ग्रेस पर साधा निशाना, MVA में फूट

महाराष्ट्र की सत्ताधारी ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार में फूट अब सतह पर आ गई है। कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा था कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ सकती है। शिवसेना के स्थापना दिवस पर पार्टी सुप्रीमो और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो अकेले लड़ने का फैसला करेगा, जनता जूते-चप्पलों से उसकी पिटाई करेगी। इससे गठबंधन में अनबन की आशंका बलवती हो गई है।

पार्टी के 55वें स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि कोरोना काल में हृदयविदारक स्थिति है और लोगों का रोजगार चला गया गया है, उनकी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। इसके बाद उन्होंने कहा कि इस परिस्थिति में कोई अकेले लड़ने की बात करेगा तो जनता उसे जूतों से मारेगी। उद्धव ने कहा कि वो सत्ता में बने रहने के लिए लाचार नहीं हैं। इस मौके पर उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की भी तारीफ़ की।

उन्होंने शनिवार (जून, 2021) को ये बात कही। साथ ही उन्होंने हिंदुत्व और मराठा अस्मिता को पार्टी की प्राथमिकता करार। दिया वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध हिंसा की घटना पर उन्होंने कहा कि शोर करने वालों को शिवसैनिक धमाकेदार जवाब देते हैं। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि सड़कों पर ख़ून-खराबा शिवसेना कार्यकर्ताओं की पहचान नहीं है। लेकिन, साथ ही कहा कि एक सच्चा शिवसैनिक अन्याय का सामना करने वालों की मदद के लिए दौड़ता है।

उद्धव ने आगे कहा, “हिंदुत्व किसी का पेटेंट नहीं है। हिंदुत्व हमारी साँस है, इसलिए शिवसेना कार्यकर्ता पहले जय हिंद और उसके बाद जय महाराष्ट्र का नारा लगाते हैं। महाविकास अघाड़ी की सरकार बनने के बाद कुछ लोगों के पेट में दर्द हो रहा है, लेकिन मैं डॉक्टर नहीं हूँ। उन्हें वक्त आने पर राजनीतिक दवा दूँगा। सत्ता न मिलने पर कई लोग छटपटा रहे हैं। हमसे पूछा जा रहा है कि एक साल में क्या किया, तो मैं उनसे कहना चाहूँगा कि वो काम देख लें।”

वहीं उद्धव ठाकरे के बयान का उनकी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अकेले चुनाव लड़ने की बात करने वाले लड़ सकते हैं, लेकिन हम क्या चुपचाप बैठ कर देखते रहेंगे? उन्होंने कहा कि शिवसेना ने अपने राजनीतिक बल पर चुनाव लड़े और जीते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव बाद भी गठबंधन हो सकते हैं, लेकिन महाराष्ट्र की साख या शिवसेना के अस्तित्व की बात आएगी तो हम लड़ेंगे।

बता दें कि महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने ऐलान किया था कि राज्य का अगला विधानसभा चुनाव उनकी पार्टी अकेले ही लड़ेगी। खास बात यह है कि पटोले ने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा भी जताई थी।  उन्होंने कहा था, ”2024 के चुनाव में कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। केवल कॉन्ग्रेस की विचारधारा ही देश को बचा सकती है।” साथ ही अमरावती के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं से पूछा था, ”क्या आप नाना पटोले को 2024 में सीएम नहीं बनाना चाहते हैं?

2 से अधिक बच्चे हैं तो सुविधाओं में कटौती, सरकारी नौकरी भी नहीं: UP में जनसंख्या नियंत्रण कानून पर काम शुरू

उत्तर प्रदेश में जल्द ही नियंत्रण के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। ‘हम दो, हमारे दो’ की राह पर चलने वालों को अच्छी खबर मिल सकती है। देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य में 2 से अधिक बच्चों वाले अभिभावकों को सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है। राज्य विधि आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एएन मित्तल के मुताबित, राजस्थान व मध्य प्रदेश में लागू कुछ कानूनों का इसके लिए अध्ययन किया जा रहा है।

‘दैनिक जागरण’ की खबर समेत विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में ये जानकारी दी गई है। इसके अनुसार, आयोग अपना अध्ययन कर के जल्द ही योगी आदित्यनाथ की सरकार को रिपोर्ट सौंप सकता है। लव जिहाद से लेकर गोरक्षा और उपद्रवियों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की वसूली तक, योगी सरकार में कई अहम कानून पारित हुए हैं। अब दो से अधिक बच्चों के पैरेंट्स को सरकारी सुविधाओं से वंचित किए जाने संबंधी प्रस्ताव पर अध्ययन हो रहा है।

राशन व अन्य सब्सिडी वाली सुविधाओं सहित बाकी सरकारी योजनाओं में ऐसे अभिभावकों को मिलने वाली सुविधाओं में कितनी कटौती की जा सकती है, इस पर विचार हो रहा है। सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि किस समय सीमा के आधार पर ऐसे अभिभावकों को कानून के दायरे में लाया जाए और सरकारी नौकरी में उनके लिए क्या नियम तय किए जाएँ, इस पर विचार हो रहा है। योगी सरकार इसके लिए बेरोजगारी और भूखमरी जैसी समस्याओं को भी ध्यान में रख रही है।

ज्ञात हो कि राज्य विधि आयोग की सिफारिश पर ही उत्तर प्रदेश में गो-वध निवारण (संशोधन) अधिनियम-2020 बना था। राज्य में किन्नर समुदाय के सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक उत्थान, कृषि तथा संपत्ति में उत्तराधिकार को लेकर भी कानून बना। धर्म परिवर्तन विरोधी कानून का मसौदा भी आयोग ने ही तैयार किया था। महिलाओं से लूट की घटना रोकने के लिए आयोग ने विशेष प्रस्ताव दिया। संपत्ति नुकसान के बाद वसूली वाला कानून भी बना।

फिलहाल राज्य विधि आयोग के कई प्रस्तावों पर विचार चल रहा है। असामाजिक तत्वों व संगठित समूहों द्वारा जमीन पर अवैध कब्जा रोकने, निर्विवाद उत्तराधिकार, उन्मादी हिंसा पर रोकथाम और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण को लेकर कानून बनाने के प्रस्तावों पर विचार चल रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक ढाँचा बना देने से लेकर सरकारी स्थल पर धार्मिक गतिविधियों को भी रोक लगाने का प्रस्ताव सरकार के पास है।

उधर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) को लागू करने का फैसला किया है। घोषणा के अनुसार कर्जमाफी या अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए यह अनिवार्य होगा। कुछ विशेष समुदायों को 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) से फिलहाल छूट दी गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के अनुसार, चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर फिलहाल यह नीति लागू नहीं होगी।

‘भारत के खिलाफ अंतिम और निर्णायक युद्ध, फिर होगा इस्लाम का राज’: गूगल ने विरोध के बाद ‘गजवा-ए-हिंद’ एप को हटाया

गूगल का सहारा लेकर भी अब इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। शनिवार (जून 19, 2021) को गूगल के प्ले स्टोर पर कुछ लोगों ने ‘गजवा-ए-हिंद’ नाम का एप देखा, जिसके बाद इसका विरोध शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर ट्रेंड करा कर गूगल से अपील की गई कि वो इस एप को अपने प्लेटफॉर्म से हटाए। ‘गजवा-ए-हिंद’ का अर्थ हुआ पूरे भारत पर इस्लाम का कब्ज़ा। इस्लामी कट्टरपंथी और आतंकी अक्सर इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं।

इसके तहत वो पूरे भारत को इस्लाम के अधीन कर के यहाँ खलीफा का राज़ स्थापित करने का स्वप्न देखते हैं। इन शब्दों को इस्लामी साहित्य हदीथ के आधार पर बनाया हुआ बताया जाता है। तमिलनाडु के राजनीतिक दल ‘इंदु मक्कल काची’ ने ट्विटर पर इस एप के बारे में शेयर करते हुए लिखा था कि गूगल अब भारत के खिलाफ जिहाद को बढ़ावा देने में भी लग गया है। ‘अग्निवीर’ के संस्थापक संजीव नेवार ने इस मामले में NIA और केंद्रीय गृह मंत्रालय को टैग किया।

उन्होंने कहा कि इसे एक शैक्षिक एप के रूप में प्ले स्टोर पर डाला गया है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि न सिर्फ इस एप को हटाया जाए, बल्कि इसके पीछे कौन लोग हैं इसका भी पता लगाया जाए। अन्य प्लेटफॉर्म पर भी ये एप डाउनलोड के लिए उपलब्ध है, जिसके विवरण में लिखा है कि ‘गजवा-ए-हिंद’ के बारे में कुछ अच्छे हदीथ में बताया गया है, खासकर सुनन अन नसाई की किताब में इसका विवरण है।

अदील खान की कंपनी लाहौर में स्थित है

साथ ही इसका अर्थ समझाते हुए लिखा है कि ये भारत के खिलाफ अंतिम और निर्णायक युद्ध होगा, जिसके तहत पूरे भारतीय उप-महाद्वीप पर इस्लाम का राज होगा। साथ ही ‘अल्लाह के संदेशवाहक के दास थॉबान’ के हवाले से लिखा है कि उम्माह के दो समूह हैं, जिन्हें अल्लाह आग से स्वतंत्र करेंगे। लिखा है कि इसमें से एक समूह भारत पर आक्रमण करेगा और एक ‘इसा-बिन मरयम’ के साथ में रहेगा। 2016 में इसे लेकर एक इस्लामी कट्टरपंथी साहित्य लिखा गया था।

बता दें कि तभी इस एप को भी बनाया गया था और इसे Tareensoft नाम की एक पाकिस्तानी कंपनी ने तैयार किया था। मुहम्मद अदील खान इस कंपनी का मालिक है। अदील के फ्रीलांस प्रोफ़ाइल से देखा जा सकता है कि ये कंपनी लाहौर में स्थित है। इस्लाम से लेकर तब्लीगी जमात तक, इस कंपनी के कई साहित्य ऑनलाइन उपलब्ध हैं। गूगल प्ले स्टोर की पॉलिसी कहती है कि हिंसा को बढ़ावा देने वाले कंटेंट को वो हटा देगा। इस एप को भी अब हटा दिया गया है।

हाल ही में गूगल कन्नड़ को सबसे घटिया भाषा बताने वाले परिणाम दिखा कर विवादों में आया था। बाद गूगल ने कन्नड़ भाषा में लिखे अपने माफीनामे में कहा कि सर्च का रिजल्ट कंपनी की सोच को नहीं दिखाता है। कंपनी ने कहा था कि वो अपने एल्गोरिदम को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी के साथ गूगल ने कन्नड़ को सबसे गंदी भाषा बताने वाले सर्च रिजल्ट्स को हटा लिया था।

‘राम मंदिर में नहीं हुआ है कोई घोटाला’: ‘AAP नेता’ ने संजय सिंह पर लगाया पार्टी फंड चुराने का आरोप, बताया चाटुकार और झूठा

राम मंदिर में जमीन घोटाले का आरोप लगाने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) नेता संजय सिंह अब अपनी ही पार्टी में घिर गए हैं। ‘AAP के ही एक नेता’ ने उन्हें झूठा और राम विरोधी करार दिया। अरविंद केजरीवाल की ही पार्टी के एक अन्य नेता रत्नेश मिश्रा ने राज्यसभा सांसद संजय सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। रत्नेश मिश्रा ने खुद को AAP यूथ ब्रिगेड का प्रदेश प्रवक्ता बताया। ‘राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट पर लगे आरोपों से उन्होंने नाराज़गी जताई।

अयोध्या में प्रेस वार्ता कर के रत्नेश मिश्रा ने कहा कि जमीन खरीद में घोटाले का आरोप लगा कर संजय सिंह राम मंदिर को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। रत्नेश मिश्रा ने पार्टी आलाकमान की पोल खोलते हुए कहा कि उन्हें ऊपर से आदेश था कि वो अयोध्या के संतों को राम मंदिर ट्रस्ट और भाजपा के खिलाफ बोलने के लिए तैयार करें। इस तरह से AAP भाजपा को हिन्दुओं के बीच ही बदनाम करना चाहती थी।

गोंडा के रहने वाले रत्नेश मिश्रा ने कहा कि उन्हें अयोध्या पहुँच कर इसका एहसास हुआ कि संजय सिंह पाप कर रहे हैं, क्योंकि जमीन खरीद मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के हर पहलू पर जब उन्होंने चर्चा की तो सारे आरोप झूठे निकले। उन्होंने संजय सिंह पर ओछा बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो अपनी राजनीति चमकाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। भावुक रत्नेश ने बता कि उनके पिता का निधन कारसेवा के दौरान ही हुआ था, इसीलिए उनसे ज्यादा AAP में शायद ही किसी ने राम मंदिर के लिए काम किया होगा।

रत्नेश मिश्रा ने बड़ा आरोप लगाया कि संजय सिंह पार्टी का फंड खाते हैं और पार्टी का पैसा चुरा कर ही उन्होंने सुल्तानपुर में एक आलीशान मकान बनवाया है। उन्होंने कहा, “पार्टी फंड के रुपए चुराने वाले ने राम मंदिर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जिससे मैं आहत हूँ। मैं दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल का सच्चा सिपाही हूँ और हमेशा रहूँगा। मैं उनसे माँग करूँगा कि संजय सिंह को पार्टी से निकाल बाहर किया जाए।”

रत्नेश मिश्रा ने संजय सिंह को ‘चाटुकार’ बताते हुए कहा कि उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली पार्टी को भ्रष्टाचारी बना दिया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट ने न कोई घोटाला किया है, न ही कोई टैक्स चोरी हुई है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम में आस्था रखने वाले पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें जाँच के लिए भेजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय सिंह सीएम केजरीवाल तक किसी को पहुँचने ही नहीं देते हैं।

हालाँकि, रत्नेश मिश्रा के बारे में ये दावा भी किया जा रहा है कि उन्हें फरवरी 2021 में ही पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगा कर निष्काषित किया जा चुका है। हाल ही पस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने बताया था कि उन्हें ट्रस्ट और बीजेपी का विरोध करने के लिए 100 करोड़ का ऑफर दिया था। लेकिन जब वह इसके लिए नहीं माने तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाने तक का लालच दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद में घोटाला नहीं हुआ है।

740 रुपए प्रति डोज के हिसाब से नेपाल को वैक्सीन बेच रहा चीन, मीडिया में लीक हुए डिटेल्स तो दी घुड़की

नेपाल को महँगे दामों पर कोरोना वायरस की वैक्सीन बेच रहा चीन अब उससे नाराज़ हो गया है। कुछ मीडिया संस्थानों ने चीन की Sinopharm वैक्सीन को लेकर दोनों देशों के बीच हो रहे करार की गुप्त बातें लीक कर दी थीं, जिसके बाद ड्रैगन की ये नाराज़गी सामने आई है। मीडिया लीक के अनुसार, नेपाल ने चीन से 10 डॉलर (741.44 भारतीय रुपए) प्रति डोज के हिसाब से कोरोना वैक्सीन खरीदने की योजना बनाई है। कोरोना की दूसरी लहर के बीच ये फैसला लिया गया।

नेपाल और चीन के बीच हुए गुप्त एग्रीमेंट के अनुसार, चीन की वैक्सीन की 40 लाख डोज की खरीद की जानी है। वैक्सीन के मूल्य के साथ-साथ डिलीवरी डेट तक गुप्त रखा जाएगा। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार, चीन ने नेपाल से अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। साथ ही काठमांडू में स्थित चीनी दूतावास ने भी इस डील के डिटेल्स के बारे में नेपाल को याद दिलाया है। ये समझौता गुप्त है, इसकी याद दिलाई गई।

नेपाली स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि जिस तरह मीडिया ने वैक्सीन के मूल्य और अन्य लॉजिस्टिक्स के मुद्दों को लेकर बात की, उसके बाद लग ही नहीं रहा था कि नेपाल को वैक्सीन मिल भी पाएगा, क्योंकि ये खासा संवेदनशील मुद्दा है। नेपाल ने बताया कि उसे चीन से पहले ही कोरोना वैक्सीन की 18 लाख डोज मिल चुकी है। उसने कहा कि चीन के अलावा अन्य देशों से भी वैक्सीन लेने की योजना बनाई जा रही है।

वैक्सीन के दाम, मात्रा और डिलीवरी सहित अन्य सभी डिटेल्स पर मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन करते हुए नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे अफवाह करार दिया। नेपाल ने यहाँ तक दावा किया है कि ये डील अभी फाइनल ही नहीं हुई है। मीडिया में नेपाल के दो मंत्रियों और दो सरकारी सचिवों के बयान के बाद वैक्सीन के मूल्य को लेकर डिटेल्स प्रकाशित हुए थे। चूँकि अंग्रेजी मीडिया ने ये रिपोर्ट्स प्रकाशित की थीं, नेपाल ने खंडन वाला बयान भी अंग्रेजी में जारी किया।

नेपाली मीडिया का कहना है कि चूँकि भारत ने कोरोना वैक्सीन को देश से बाहर भेजे जाने पर अब रोक लगा दी है, इसीलिए उस पर निर्भर रहे नेपाल को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देश के प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री खुद चीन से वैक्सीन खरीद को लेकर सार्वजनिक बयान दे चुके हैं, ऐसे में मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किए जाने की आलोचना हो रही है। Sinopharm से डील के बाद बांग्लादेश को भी कुछ ऐसा ही बयान जारी करना पड़ा था।

बता दें कि नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट एक कानूनी रूप से बाध्यकारी कॉन्ट्रैक्ट है जिसका अर्थ है, एक गोपनीय संबंध स्थापित करना, इसके तहत कीमत सहित कोई भी विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा सकते हैं। नेपाली स्वास्थ्य मंत्रालय के बताया था कि प्रस्तावित नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट में कीमत और विशिष्टताओं सहित एक दर्जन से अधिक मुद्दे शामिल हैं। अपनी वैक्सीनों को बेहतर बताकर उसे दूसरे देशों को बेचना और वैक्सीनों के बारे में सही जानकारी न देना ही चीन की रणनीति का हिस्सा रहा है।