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सीढ़ियों पर चलने से संगीत की ध्वनि… आस्था और रहस्य का अद्भुत मेल: कुंभकोणम का 800 साल पुराना ऐरावतेश्वर मंदिर

द्रविड़ वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना और चोल साम्राज्य के ‘द ग्रेट लिविंग टेंपल्स’ में से एक है ऐरावतेश्वर मंदिर। 12वीं शताब्दी में राजराजा चोल द्वितीय द्वारा बनवाया गया यह मंदिर तमिलनाडु के कुंभकोणम के पास दारासुरम में स्थित है। देवताओं के राजा इन्द्र के सफेद हाथी ऐरावत द्वारा भगवान शिव की पूजा किए जाने के कारण यह मंदिर ऐरावतेश्वर कहलाया। मंदिर का रहस्य और वास्तु आज भी लोगों को आश्चर्यचकित कर देते हैं।

फोटो साभार : दैनिक जागरण

पौराणिक मान्यता

ऐसा माना जाता है कि भगवान इन्द्र का हाथी ऐरावत सफेद रंग का था। किसी कारण वश ऋषि दुर्वासा ने ऐरावत को श्राप दे दिया जिसके कारण ऐरावत का रंग बदल गया। इससे दुखी होकर ऐरावत ने मंदिर के पवित्र जल में स्नान करके भगवान शिव की आराधना की और अपना मूल रंग पुनः प्राप्त किया। जिसके कारण मंदिर को ऐरावतेश्वर के नाम से जाना गया।

ऐरावत के अलावा मृत्यु के राजा यम भी एक ऋषि के श्राप से पीड़ित हुए। इस कारण उनका शरीर भयंकर जलन से ग्रसित हो गया। इस पीड़ा से मुक्ति प्राप्त करने के लिए यम ने भी मंदिर में स्थित सरोवर में स्नान किया और भगवान शिव की पूजा की। इसके बाद उन्हें अपनी पीड़ा से मुक्ति मिली।

मंदिर की वास्तुकला और संरचना

द्रविड़ वास्तुकला में पत्थरों से बनाए गए इस मंदिर में शानदार नक्काशी की गई है। मंदिर का विमानम 80 फुट ऊँचा है। मुख्य मंदिर के सामने स्थित मंडपम का एक भाग पत्थर के विशाल पहियों वाले एक रथ के समान है, जिसे घोड़ों द्वारा खींचा जा रहा है। हालाँकि भगवान शिव को समर्पित यह ऐरावतेश्वर मंदिर चोल साम्राज्य के दूसरे ‘लिविंग टेंपल्स’ बृहदीश्वर और गंगईकोंडचोलीश्वरम से ऊँचाई में छोटा है लेकिन ऐरावतेश्वर का विस्तार पर्याप्त है।

फोटो साभार : पत्रिका

मंदिर के भीतरी आँगन में नक्काशीदार इमारतों का समूह स्थित है। भगवान शिव के अलावा मंदिर में पेरिया नायकी अम्मन, भगवान गणेश के मंदिर भी स्थापित हैं। मंदिर के आँगन के दक्षिण-पश्चिमी कोने में 4 तीर्थ वाला एक मंडपम है, जहाँ यम की प्रतिमा अंकित की गई है। यम ने भी इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा की थी इसलिए उनकी भी प्रतिमा मंदिर में अंकित की गई। मंदिर में ही एक विशाल शिला है, जहाँ सप्तमाताओं की प्रतिमा स्थापित है।

कुंभकोणम का ऐरावतेश्वर मंदिर अपने एक रहस्य के लिए जाना जाता है। दरअसल भगवान गणेश के मंदिर के पास चौकोर आधार के पास एक नक्काशीदार सीढ़ियों का एक समूह है जहाँ पैरों को पटकने पर संगीत की ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं। हालाँकि आज तक यह रहस्य ही है कि संगीत ध्वनि क्यों और कैसे उत्पन्न हो रही है।

फोटो साभार : पत्रिका

मंदिर में कई शिलालेख हैं, जिनमें से एक लेख में कुलोतुंगा चोल तृतीय द्वारा मंदिर का नवीकरण कराए जाने का पता चलता है। मंदिर के गोपुरम के पास स्थित एक शिलालेख से यह पता चलता है कि यहाँ स्थित आकृति कल्याणी से लाई गई, जिसे राजाधिराज चोल प्रथम के द्वारा कल्याणपुरा नाम दिया गया। ऐरावतेश्वर मंदिर यूनेस्को की विश्व विरासत स्थलों की सूची में शामिल है।

800 वर्षों पुराने इस मंदिर के न तो निर्माण को समझा जा सका है और न ही संगीत की ध्वनि उत्पन्न करने वाली उन सीढ़ियों के पीछे के विज्ञान को। ऐरावतेश्वर बस एक ऐसे मंदिर के रूप में जाना जाता है, जहाँ भक्तों को एक अद्भुत शांति की अनुभूति होती है।

कैसे पहुँचे?

कुंभकोणम पहुँचने के लिए नजदीकी हवाईअड्डा तिरुचिरापल्ली है, जो यहाँ से लगभग 91 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा कुंभकोणम, नागापट्टिनम से 50 किमी की दूरी पर है जो कि एक समुद्री बंदरगाह है। कुंभकोणम दक्षिण भारत के कई शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है। चेन्नई, मदुरै, तिरुचिरापल्ली और कोयंबटूर जैसे बड़े शहरों से भी कुंभकोणम रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा चिदंबरम, तिरुचिरापल्ली और तंजावुर से लोकल पैसेंजर ट्रेनों के माध्यम से भी कुंभकोणम पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भी कुंभकोणम पहुँचना आसान है। तमिलनाडु के कई बड़े शहरों से कुंभकोणम के लिए नियमित तौर पर बस सेवाएँ उपलब्ध हैं और इसके अलावा टैक्सी आदि की सुविधा भी पर्यटकों के लिए उपलब्ध है।

केरल के ईसाई परिवार को भारी पड़ी आयशा सुल्ताना की आलोचना, आ रहे धमकी भरे कॉल्स: दिव्यांग बच्चे को भी नहीं छोड़ा

केरल के एक परिवार ने आरोप लगाया है कि लक्षद्वीप की फिल्म निर्माता आयशा सुल्ताना की आलोचना करने के लिए उनका पीछा किया जा रहा है और उन पर साइबर अटैक हुआ है। बता दें कि आयशा सुल्ताना लक्षद्वीप में लाए गए सुधार कानूनों से खासी नाराज हैं और उन्होंने इसके खिलाफ कई अयान भी दिए। केरल के परिवार ने बताया कि उन्हें कॉल कर के धमकियाँ दी जा रही हैं और प्रताड़ित किया जा रहा है।

आयशा सुल्ताना ने लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस परिवार ने उनके इसी बयान की आलोचना की थी। सोशल मीडिया पर परिवार का एक पोस्ट वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने आयशा सुल्ताना की आलोचना की थी। इसके बाद अलग-अलग नंबरों से धमकी भरे कॉल्स आने शुरू हो गए। पति-पत्नी ने जून 9, 2021 को फेसबुक पर ये पोस्ट लिखा था।

‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ की एक्सक्लूसिव खबर के अनुसार, परिवार ने बताया कि पोस्ट वाले दिन ही साइबर अटैक किया गया और उसके अगले दिन 12 नंबरों से धमकी भरे कॉल्स आए। पीड़ित ने बताया कि उनकी पत्नी ने आतंकी संगठन ISIS के प्रभाव को लेकर एक पुस्तक लिखने की घोषणा की थी, जिसका नाम ‘राइज ऑफ ISIS – सीक्रेट्स ऑफ इस्लामी स्टेट’ होगा। सोशल मीडिया पर उनके दिव्यांग बेटे तक को नहीं बख्शा गया।

पीड़ित परिवार ने केरल पुलिस के साथ-साथ NIA के समक्ष भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है। ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखने वाला ये परिवार कोल्लम जिले के कोट्टारक्करा में रहता है। यहाँ तक कि उन्हें बांग्लादेश से भी फोन कॉल कर के धमकी दी गई। उनकी गलती सिर्फ इतनी है कि उन्होंने फ़िल्म निर्माता और ‘एक्टिविस्ट’ आयशा सुल्ताना के खिलाफ पोस्ट लिखा। पीड़ित निक्सन और उनके परिवार ने मीडिया और लोगों से बी मदद माँगी है।

पीड़ित परिवार ने दर्ज कराई शिकायत (वीडियो साभार: रिपब्लिक वर्ल्ड)

आयशा सुल्ताना पर उनकी आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। आयशा सुल्ताना ने कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है और वो लक्षद्वीप को ‘न्याय’ मिलने तक लड़ती रहेंगी। कवरत्ती पुलिस थाने ने उन्हें रविवार (जून 20, 2021) को पूछताछ के लिए समन किया है। उन्होंने लक्षद्वीप पुलिस के साथ सहयोग करने की बात कही है। केरल हाईकोर्ट में एक PIL दर्ज कर सुधार कानूनों को लागू होने से रोकने की माँग की गई थी, जिसे रद्द कर दिया गया।

आयशा सुल्ताना ने पुलिस पर ‘एकपक्षीय’ ढंग से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लक्षद्वीप को ‘सीज’ किए जाने के प्रयास का वो विरोध करती रहेंगी। उधर केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने सुधार कानूनों को सही ठहराते हुए कहा कि समान भौगोलिक लोकेशन और प्राकृतिक सुंदरता के साथ पर्यटन का हब बना हुआ है। मिनिकॉय, कदमत और सुहेली में नीति आयोग के साथ मिल कर इको-फ्रेंडली टूरिज्म वॉटर विला प्रोजेक्ट्स निर्मित किए जा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता की याचिका खारिज करते हुए कहा हाईकोर्ट ने कहा था कि सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदम अभी मसौदा के चरण में हैं। इससे पहले इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा था। जस्टिस एसवी भाटी और जस्टिस मुरली पुरुषोत्तम की बेंच ने कॉन्ग्रेस नेता नौशाद अली की याचिका पर सुनवाई की। बता दें कि इस याचिका में लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन 2021 और द्वीपों में असामाजिक गतिविधि अधिनियम (PASA) पर रोक की माँग की गई थी।

असम में 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) लागू, ‘भय का माहौल है’ का रोना रो रहे लोग

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) को लागू करने का फैसला किया है। घोषणा के अनुसार कर्जमाफी या अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ लेने के लिए यह अनिवार्य होगा।

कुछ विशेष समुदायों को 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) से फिलहाल छूट दी गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के अनुसार चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर फिलहाल यह नीति लागू नहीं होगी।

असम सरकार ने हालाँकि यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 2 बच्चों की नीति (Two-Child Policy) सबके लिए अनिवार्य होगी। सभी समुदायों पर इसे लागू करने के लिए चरणबद्ध तरीका अपनाया जाएगा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार (19 जून 2021) को बताया कि 2 बच्चों की नीति असम में चल रही सभी योजनाओं पर तुरंत ही लागू नहीं होगी क्योंकि कई योजनाएँ केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती हैं। स्कूल-कॉलेज में मुफ्त शिक्षा या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास जैसी योजनाओं में यह नीति फिलहाल लागू नहीं होगी।

सोशल मीडिया पर भय का माहौल

गरीबी उन्मूलन के लिए लाई गई इस नीति के फायदे की जगह सोशल मीडिया पर लोग इसे डर का माहौल से जोड़ रहे हैं।

‘आबादी कंट्रोल करें’ – अल्पसंख्यकों को CM सरमा का मैसेज

बतौर मुख्यमंत्री 30 दिन पूरे होने पर 10 जून 2021 को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गरीबी कम करने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय से आबादी कंट्रोल करने को कहा। उन्होंने कहा था कि गरीबी का मुख्य कारण लगातार आबादी बढ़ना है। उस समय AIUDF विधायक हफीज रफीकुल इस्लाम ने इसे सांप्रदायिक रंग देते हुए कहा था कि सिर्फ एक ही समुदाय ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करती।

‘नाइट चार्ज पर भेजो रं$* सा*$ को’: दरगाह परिसर में ‘बेपर्दा’ डांस करना महिलाओं को पड़ा महंगा, कट्टरपंथियों ने दी गाली

जम्मू कश्मीर की एक दरगाह के सामने खुशी से झूमना 4 महिलाओं को इतना महंगा पड़ा कि उन्हें अब सोशल मीडिया पर सबके सामने आकर अपने डांस के लिए माफी माँगनी पड़ी। चारों महिलाओं की वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आई थी। इसके बाद कट्टरपंथियों ने उनका इतना विरोध किया कि उनके ख़िलाफ़ शिकायतें दर्ज हुईं, उन्हें गालियाँ दी गईं, लानत भेजी गई, अंत में उन्हें हिजाब पहनकर सबसे माफी माँगनी पड़ी।

महिलाओं को माफी वाली वीडियो में कहते सुना जा सकता है, “हम लोग शाहदरा शरीफ गए थे। वहाँ हमसे एक वीडियो बन गई। इस वीडियो के लिए मैं आपसे माफी माँगती हूँ। पहले अपने अल्लाह से माफी माँगती हूँ। फिर बुजुर्गों से माफी माँगती हूँ। फिर जम्मू कश्मीर के अपने सारे भाई बहनों से माफी माँगती हूँ। अगर किसी के दिल को ठेस पहुँची है। तो हमें माफ किया जाए। अल्लाह का वास्ता है हमें माफ किया जाए। हमें इस वीडियो की माफी दी जाए। हमारा किसी का दिल दुखाने का इरादा नहीं था।”

वीडियो में आगे महिलाएँ कहती हैं, “हमारा बच्चा 2 मंजिल छत से नीचे गिर गया था। हमने दुआ की थी कि हमारा बच्चा बच जाए तो हमारा बच्चा बच गया, 2-3 लाख रुपए लग गए। हम उसे बाहर लेकर गए थे। वो ठीक हुआ तो हम बाबा के पास आए। हमसे गलती हो गई। हमें गलती का पछतावा है। हमें माफ किया जाए।”

गौरतलब है कि यूट्यूब पर इस संबंध में कई वीडियोज हैं। लोगों ने महिलाओं के ख़िलाफ़ नाराजगी जाहिर करते हुए वीडियो बनाई हुई है। मेंधर न्यूज डायरी नाम के यूट्यूब चैनल पर नजीम खतना नाम के व्यक्ति ने इस संबंध में वीडियो बनाई और बताया, “घटना रजौरी की है। जहाँ जियारत बाबा गुलाम शाह बादशाह, शाहदरा शरीफ की दरगाह में 4 जाहिल लड़कियों की डांस करती वीडियो वायरल हुई।”

नजीम का कहना है कि इस तरह से डांस करके चारों लड़कियों ने इंसानियत को शर्मसार किया। इसका दुख न केवल मुस्लिम बल्कि हर मजहब के शख्स को है। वीडियो में नजीम को ये बताते भी देखा जा सकता है कि इस घटना के उजागर होने के बाद प्रशासन ने लड़कियों के विरुद्ध मात्र 20 मिनट में एफआईआर कर दी। आगे वह माँग करते हैं कि चारों महिलाओं पर सख्त कार्रवाई हो और कम से कम 2 साल की सबको सजा मिले ताकि ये जाहिल लोग ऐसा दोबारा न करें।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर महिलाओं को गाली देने का काम भी बहुत धड़ल्ले से हुआ है। एक यूजर ने कमेंट इकट्ठा करके इन्हें शेयर किया है। नीरज ब्लोरिया नाम के व्यक्ति का कहना है कि रजौरी में दरगाह परिसर में 30 सेकेंड की वीडियो बनाने पर केस हो गया और इस तरह ये लोग (कट्टरपंथी ) उसका जश्न मना रहे हैं।

एक जगह इकट्ठा करके पेस्ट किए गए कमेंट्स में देख सकते हैं कि महिलाओं के लिए गंदी गाली लिखी है। किसी ने इन्हें बेशर्म माँ बाप की बेशर्म औलाद कहा है। किसी का कहना है कि आखिर दरगाह में बेपर्दा इन्हें आने की इजाजत कैसे मिली। सदाकत मलिक लिखते हैं, “इनका मुँह काला कराकर बाजार में घुमाओ। ताकि बाकी आने वाली लड़कियों को भी पता चले।” मलिक एजाज ने लिखा, “नाइट चार्ज पर भेजो रं& सा*$ को।”

द इंट्रिपिड नाम के यूजर ने मामले में कट्टरपंथियों पर निशाना साधते हुए पूछा है कि ये लोग दरगाह में डांस भी बर्दाश्त नहीं कर सकते और चाहते हैं कि मंदिर में किसिंग सीन हो। 

अल्लाह के नाम पर मस्जिद में गाना… फिर भी गिरफ्तार

24 साल की किन्नर नानू विश्वास गिरफ्तार करवा दी जाती हैं। क्यों? क्योंकि उन्होंने मस्जिद में वीडियो शूट किया था और उसमें गाना लगा कर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया था।

कट्टरपंथियों ने इतना भी नहीं देखा कि किन्नर नानू ने जिस गाने पर डांस किया, वो 2009 में आई फिल्म ‘कुर्बान’ का गाना ‘शुक्रान अल्लाह’ है, जिसमें सैफ अली खान और करीना कपूर नजर आए थे। जबकि यह फिल्मी गाना दिल्ली स्थित हुमायूँ के मकबरे में शूट किया गया था। शायद कट्टरपंथियों को तब फिल्म के हीरो के नाम से प्यार रहा होगा!

TV9 भारतवर्ष के डॉक्यूमेंट्री शो में ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ कॉन्ग्रेस के लोगो के साथ दिखीं: जानिए क्या है मामला

न्यूज चैनल TV9 भारतवर्ष ने हाल ही में उस विवाद को फिर खड़ा कर दिया है, जिसमें ISIS की ‘जेहादी दुल्हन’ शमीमा बेगम को भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी के लोगो वाला दस्तावेज पकड़े हुए दिखाया गया था। TV9 भारतवर्ष के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 11 जून 2021 को एक विवादित वीडियो अपलोड किया गया था। वीडियो के लगभग 2 मिनट 30 सेकंड में शमीमा बेगम कागज का एक टुकड़ा पकड़े हुए दिखाई दी। हैरानी की बात यह है कि इसके पीछे कॉन्ग्रेस पार्टी का लोगो चिपका हुआ देखा जा सकता है। इस खुलासे ने सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा दिया था।

चैनल के इस वीडियो को मूल रूप से फरवरी 2019 में गार्जियन न्यूज द्वारा अपलोड की गई 2 साल पुरानी एक डॉक्यूमेंट्री से लिया गया था। दस्तावेज, जिसे शमीमा बेगम ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ था। इसे यूके गृह मंत्रालय द्वारा जारी किया गया था, जिसमें उसकी ब्रिटिश नागरिकता छीन लेने की घोषणा की गई थी। गार्जियन न्यूज वीडियो में लगभग 3 सेकंड में और बाद में भी यह देखा जा सकता था कि दस्तावेज के पीछे कॉन्ग्रेस का लोगो नहीं था और कागज का वह हिस्सा पूरी तरह से खाली था।

ऐसे में यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि शमीमा को जारी यूके होम ऑफिस के आदेश पर कॉन्ग्रेस का लोगो नहीं था, लेकिन जब TV9 भारतवर्ष ने अपने वीडियो में एक फ्रेम का इस्तेमाल किया, तो लोगों को उस पेपर पर कॉन्ग्रेस का लोगो दिखाई दिया।

असली तस्वीर, जिसमें शमीमा बेगम बिना कॉन्ग्रेस के लोगो का पेपर पकड़े दिख रही हैं

फुटेज में दस्तावेज के पीछे कॉन्ग्रेस का लोगो कैसे दिखाई दे रहा है इसको लेकर हमने जाँच की। हमने पाया कि TV9 भारतवर्ष ने एक व्यंग्य साइट से इस छवि का इस्तेमाल किया है। उन्होंने शायद इसकी जाँच नहीं कि थी। दरअसल, यह एडिट किया गया है।

(वीडियो साभार: यूट्यूब/द गार्जियन)

अप्रैल 2019 में यह वीडियो सामने आने के ठीक एक महीने बाद भारतीय व्यंग्य साइट द फौक्सी (The fauxy) ने “ISIS ब्राइड शमीना बेगम गिव्स थम्स अप टू कॉन्ग्रेस मेनिफेस्टो” शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया था। व्यंग्य लेख में कहा गया था कि शमीमा बेगम ने आम चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी के घोषणापत्र की प्रशंसा की थी।

बता दें कि 15 साल की उम्र में इंग्लैंड से भागकर सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकियों के गढ़ में पहुँची शमीमा बेगम अब 21 साल की हो चुकी है। शमीमा को ‘जेहादी दुल्हन’ के नाम से भी जाना जाता है। सीरिया के एक कैंप में रह रही शमीमा ब्रिटिश नागरिकता दोबारा हासिल करने के लिए जंग लड़ रही है।

इन 6 तरीकों से उइगर मुस्लिमों का शोषण कर रहा है चीन, वहीं की एक महिला ने सुनाई खौफनाक दास्ताँ

चीन शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के प्रति किस तरह की भेदभावपूर्ण और दमनकारी नीति अपना रहा है, इसकी कई रिपोर्ट अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया में सामने आ चुकी हैं। अब एक और ऐसी ही एक रिपोर्ट सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में एक उइगर महिला की कहानी को साझा किया गया है, जो चीनी अत्याचारों से गुजर चुकी है।

उइगर महिला नैन्सी फिलहाल संयुक्त राज्य अमेरिका में सुरक्षित हैं, लेकिन वह इस बात से डरती हैं कि बोलने से उसके माता-पिता की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन योजनाबद्ध तरीके से उइगर मुसलमानों की संख्‍या सीमित करने में जुटा है और इसका असर अगले 20 वर्षों में साफ देखने को मिलेगा।

नैन्सी ने स्त्री रोग विशेषज्ञ अपनी एक रिश्तेदार के बारे में बताया है, जिसे दो साल के लिए एक कन्सनट्रेशन कैंप में भेजा गया था और फिर स्वास्थ्य कारणों से दो महिलाओं से आईयूडी निकालने के लिए 6 साल जेल की सजा सुनाई गई।

एक अन्य रिश्तेदार को दो साल के लिए एक कन्सनट्रेशन कैंप में भेज दिया गया, क्योंकि वह उइगर गाँव में परिवार नियोजन कार्य की देखरेख कर रही थी, जहाँ एक महिला बिना अनुमति के गर्भवती हो गई थी। नैन्सी ने सुना कि गर्भवती महिला के पति को 11 साल जेल की सजा सुनाई गई, लेकिन माँ या बच्चे का क्या हुआ इसकी जानकारी उसे नहीं है।

नैन्सी की कहानी दिखाती है कि किस तरह से चीन में उइगरों को कुचला जाता है। वो बताती है कि उसका परिवार धार्मिक नहीं था, उसकी माँ कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य थीं, जिन्हें एक वरिष्ठ सरकारी नौकरी सौंपी गई थी और परिवार इस व्यवस्था में काम करने के लिए तैयार था। दरअसल, जब नैन्सी हाई स्कूल में थी, तो चीनी सरकार ने उसे पूर्वी चीन में रहने के लिए भेज दिया, ताकि उसे पूरी तरह परिवर्तित कर उइगर एजेंट के रूप में ढाला जा सके।

लेकिन हान चीनी और उइगरों के बीच तनाव बढ़ गया। अंततः चीन में शिक्षित उइगरों के लिए अच्छी नौकरियों की कमी से निराश होकर नैन्सी ने तुर्की में जॉब करना शुरू किया। उस समय तो किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन 2016 में चीन द्वारा कार्रवाई शुरू करने के बाद उइगरों की कोई भी विदेश यात्रा संदिग्ध नजर से देखी जाने लगी।

नैन्सी के माता-पिता तुर्की में उससे मिलने गए थे, इसलिए उन्हें फिर से कन्सनट्रेशन कैंप में रखा गया था। शिविरों से रिहा होने के बाद उसके माता-पिता ने उसे वॉइस मैसेज भेजकर वापस चीन लौट आने के लिए कहा।

उसकी माँ ने उससे कहा, “तुम्हारा देश तुम्हें प्यार करता है। यहाँ तुम्हारे देश को तुम्हारी जरूरत है।” नैन्सी को तुरंत संदेह हुआ, खासकर तब जब उसकी माँ ने कहा कि हो सकता कि गर्भावस्था के कारण नैन्सी का वापस आना मुश्किल हो। वास्तव में, नैन्सी गर्भवती नहीं थी और उसने अनुमान लगाया कि उसे फुसलाकर वापस बुलाने के लिए कोई उसकी माँ को मजबूर कर रहा था, लेकिन उसकी माँ उसे नहीं आने का संकेत देने की कोशिश कर रही थी।

नैन्सी का कहना है कि शिविर में रहने के दौरान उसके एक चाचा पिटाई की वजह से लकवाग्रस्त हो गए और एक अन्य रिश्तेदार की अंदर ही मौत हो गई। उसने कहा कि उसके चार चचेरे भाई वर्तमान में बंधुआ मजदूरी शिविरों में बंद हैं और उन्हें भूख से नहीं मरने देने के बदले गार्ड्स उनसे रिश्वत माँग रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि चीन में उइगर समुदाय को निशाना बनाने के लिए 6 तरीके अपनाए जा रहे हैं।

1. योजनाबद्ध तरीके से उइगर मुसलमानों की आबादी घटा रहा है चीन

चीन एक ओर से जहाँ अपनी जनसंख्‍या बढ़ाने में लगा है, वहीं दूसरी ओर वह योजनाबद्ध तरीके से उइगर मुसलमानों की आबादी कम करने में जुटा है। रिपोर्ट के मुताबिक, शिनजियांग क्षेत्र के लिए चीन की बर्थ कंट्रोल पॉलिसी का असर भविष्‍य में इस समुदाय के लोगों की आबादी पर दिखेगा। अगले दो दशकों में शिनजियांग प्रांत में रहने वाले अल्‍पसंख्‍यकों के 26 लाख से 45 लाख बच्‍चे कम पैदा होंगे।

शिनजियांग उइगर ऑटोनोमस रीजन स्टेटिस्टिकल ईयरबुक के मुताबिक, 1949 में शिनजियांग की हान चीनी आबादी 6.7 फीसदी थी, जो चाइनीज सेंसस 2020 के अनुसार, बढ़कर 42.24 प्रतिशत हो गई है। 1949 में इस क्षेत्र में 80 फीसदी आबादी उइगर मुस्लिम की थी। 1949 में यह आँकड़ा 76 फीसदी था। ताजा आँकड़े देखें, तो यहाँ उइगर आबादी 45 फीसदी पर आ गई है।

2. शिनजियांग में हान चीनी कर्मचारियों को तवज्जो

शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों की संख्या घटाने के साथ ही यहाँ पर हान चीनी कर्मचारियों को तवज्जो दिया जा रहा है। यहाँ पर उनके लिए 88 फीसदी बस्तियाँ बनाई गई है। यहाँ के उद्योगों को भी हान चीनी समुदाय ही नियंत्रित करते हैं। जानकारी के मुताबिक यहाँ की ज्यादातर नौकरियाँ हान समुदाय के लिए है, इस पर उइगरों का कोई अधिकार नहीं है। यही वजह है कि यहाँ पर उइगरों की स्थिति बदहाल है और हान समुदाय के लोगों की स्थिति काफी अच्छी है।

3. शिनजियांग में रोज़ा रखने पर भी प्रतिबन्ध

इस्लाम के पवित्र महीने रमजान में चीन स्थित टकलामकान रेगिस्तान में हज़ारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग आया करते थे। यहाँ कुछ ऐसी मजारें थीं, जहाँ 8वीं शताब्दी के इस्लामिक योद्धा की याद में लोग नमाज़ पढ़ते थे। लेकिन, इस साल यह स्थल खाली पड़ा हुआ था। ‘द गार्डियन’ के एक ख़ुलासे के अनुसार, चीनी मुसलामानों के लिए हज की तरह महत्व रखने वाला ये स्थल खाली इसीलिए पड़ा हुआ था क्योंकि इसे ढाह दिया गया है। चीन ने इमाम आसीन दरगाह को छोड़ कर इसके बाकी हिस्से को मिट्टी में मिला दिया।

चीन ने चुन-चुन कर उन मस्जिदों को ज्यादा तबाही पहुँचाई है, जहाँ उइगर मुसलमान भारी संख्या में जाया करते थे। इसके अलावा चीन ने शिनजियांग में रमजान महीना शुरू होते ही सरकारी अधिकारियों, छात्रों और बच्चों के रोज़ा रखने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। 

4. जनसंख्या नियंत्रण के लिए उइगर समुदाय की औरतों के गर्भाशय में यंत्र फिट कर देता है चीन

उइगर महिलाओं का जबरदस्ती गर्भपात करा दिया जाता है। उइगर महिलाओं का नियमित रूप से प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया जाता है। साथ ही उनके गर्भाशय में यंत्र फिट कर दिए जाते हैं। हज़ारों महिलाओं का जबरन गर्भपात कराए जाने की भी ख़बर सामने आई है। कहा जा रहा है कि अब तक लाखों महिलाओं के साथ ये सब कुछ किया जा चुका है। जहाँ पूरे चीन में गर्भपात की संख्या घटती जा रही है, शिनजियांग में इसमें जबरदस्त वृद्धि आई है। शिनजियांग में डर का आलम ये है कि मात्र 1 साल में बच्चों के जन्म की दर 24% घट गई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये औसत काफ़ी कम, मात्र 4.2% ही है।

5. चीन में उइगर मुस्लिमों को जबरन डाला जा रहा कन्संट्रेशन कैंप में 

चीन में उइगर मुस्लिमों पर होते अत्याचारों की सच्चाई अब किसी से छिपी नहीं हैं। जानकारी के अनुसार बीते दिनों उइगर कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने जातीय समूह को हिरासत में लेने के लिए चीन द्वारा चलाए जा रहे करीब 500 शिविर और जेल देखे हैं। कार्यकर्ताओं ने यह आरोप लगाया कि अभी तक चीन में हिरासत में रह रहे लोगों की संख्या 10 लाख बताई जाती रही है, लेकिन यह आँकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। नस्लीय भेदभाव को हटाने पर बनी संयुक्त राष्ट्र की कमेटी ने कहा कि अनुमानित 20 लाख उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक कन्सनट्रेशन कैंप में हैं।

6. उइगर मुस्लिमों को बंधुआ मजदूर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है

चीन में उइगर मुस्लिमों की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। वहाँ पर उनके साथ किए जा रहे अत्याचारों की कई रिपोर्टें सामने आती रहती हैं। बताया जा रहा है कि वहाँ पर उइगर मुस्लिमों के साथ बंधुआ मजदूरों जैसा बर्ताव होता है। उनसे जबरन काम करवाया जाता है। पिछले दिनों ASPI की जाँच रिपोर्ट से पता चला कि चीन ने 2017 और 2019 के बीच शिनजियांग से 80 हजार उइगर हटाए गए हैं। हालांकि, शिनजियांग में उद्योगों में बंधुआ मजदूरी कर रहे लोगों की संख्या और भी ज्यादा होने का अनुमान है। बजफीड की एक जाँच रिपोर्ट में बताया गया कि शिनजियांग में उइगर डिटेंशन कैंप्स के पास या अंदर करीब 1500 चीनी कंपनियाँ हैं। कैंप्स के अंदर इन कंपनियों को शुरू करने का एकमात्र मकसद यहाँ लाए गए उइगरों से काम कराना है।

मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी नन्हे खान को UP पुलिस ने गाँव से उठाया, ₹53 लाख की संपत्ति जब्त

बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के करीबियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए अब यूपी पुलिस ने उसकी गैंग के एक और सदस्य को गिरफ्तार किया है। गाजीपुर की करीमुद्दीन पुलिस ने नन्हे खां के ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की। थाने के प्रभारी निरीक्षक रामनिवास का कहना है कि मुख्तार अंसारी गैंग के बेहद करीबी महेंद गाँव निवासी मेहरुद्दीन खां उर्फ नन्हे प्रधान के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की गई।

पुलिस के मुताबिक, उनको जानकारी मिली थी कि नन्हे गाँव में ही रह रहा है। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार (जून 18, 2021) को उसके गाँव में दबिश दी और उसको गिरफ्तार कर लिया। एसओ ने बताया कि अभियुक्त के विरुद्ध गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। संबंधित धाराओं में उसका चालान कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि नन्हे ने मंगई नदी पर कई करोड़ रुपए की सरकारी जमीन कब्जा किया हुआ था। वह वहाँ मछली पालन के उद्देश्य से अवैध पुल का निर्माण करवा चुका था। इस निर्माण को पुलिस प्रशासन ने ध्वस्त करके उसके ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस के अनुसार नन्हे खां द्वारा अवैध रूप से मंगई नदी से बनाए गए अवैध पुल ध्वस्त करते हुए दो मंडा जमीन, एक बोलेरो को सीज करते हुए 53 लाख रुपए की संपत्ति को जब्त किया गया था।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के विरुद्ध लगातार योगी सरकार कार्रवाई कर रही है। लेकिन जहाँ कुछ गड़बड़ होती है वहाँ वह अधिकारियों पर भी सख्ती बरत रही है। 14 मई को उत्तर प्रदेश की चित्रकूट जेल में गैंगवार में खूँखार गैंगस्टर मुकीम काला और मेराजुद्दीन समेत 3 कैदी मारे गए थे। इन दोनों को शार्पशूटर अंशू दीक्षित द्वारा गोली मारी गई, जिसे बाद में पुलिस ने मार गिराया। घटना पर संज्ञान लेते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने जाँच का आदेश दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक शूटआउट के समय चित्रकूट जेल के तीन सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जिसके कारण उत्तर प्रदेश सरकार ने जेल अधीक्षक एस पी त्रिपाठी और जेलर महेंद्र पाल को सस्पेंड कर दिया। साथ ही तीन अन्य जेल कर्मचारी संजय खरे, हरिशंकर राम और अमित कुमार को भी सस्पेंड किया गया।

शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति के सामने पेश हुआ Twitter, खुद अपने ही जाल में फँसा: जानें क्या हुआ

नए आईटी नियमों को लेकर भारत सरकार और ट्विटर के बीच टकराव जारी है। इसी बीच शुक्रवार (18 जून 2021) को माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के प्रतिनिधि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति के सामने पेश हुए। इस दौरान प्रतिनिधि ने कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति के समक्ष सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने पर अपना पक्ष रखा।

दरअसल, ट्विटर इंडिया के प्रतिनिधियों ने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और डिजिटल स्पेस में महिला सुरक्षा पर विशेष जोर देने सहित सामाजिक और ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के दुरुपयोग की रोकथाम के मुद्दे पर संसदीय समिति के सामने बयान दर्ज कराया। ट्विटर इंडिया के सार्वजनिक नीति प्रबंधक शगुफ्ता कामरान और कानूनी वकील आयुषी कपूर इस सिलसिले में शुक्रवार (18 जून) को पैनल के सामने पेश हुए थे।

इस दौरान ट्विटर के संज्ञान में कई मुद्दे लाए गए। सूत्रों के अनुसार, पूरी संसदीय समिति अपनी माँग को लेकर एकमत थी। उन्होंने ट्विटर के अधिकारियों से पूछताछ करते हुए साफ कहा कि देश का कानून सर्वोपरि है ना कि आपकी नीतियाँ। इसलिए ट्विटर भारत के कानूनों का पालन करे। संसदीय समिति ने जिन मुद्दों को उठाया उनमें भारतीय कानूनों का पालन, ट्विटर पर चाइल्ड पोर्न वीडियो को बढ़ावा देना शामिल हैं।

भारतीय कानून के पालन की बात सामने आई, ट्विटर अब भी बेशर्म

जब समिति ने पूछा कि कंपनी किसका अनुसरण करती है- भारतीय कानून का या अपनी नीतियों का, इस पर ट्विटर के प्रतिनिधि ने कहा, ”हम अपनी नीतियों को फॉलो करते हैं, क्योंकि वे भी समान रूप से उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।” इससे उनका तात्पर्य यह था कि यदि वे ट्विटर की नीतियों के साथ संघर्ष करते हैं तो वे भारतीय कानूनों का पालन नहीं करेंगे। हालाँकि, समिति के सदस्यों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि देश का नियम-कानून सबसे ऊपर है। आपकी नीतियाँ नहीं।

ट्विटर पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी

संसदीय स्थायी समिति द्वारा उठाया गया एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा चाइल्ड पोर्नोग्राफी का था। समिति ने पूछा कि जब चाइल्ड पोर्न को बढ़ावा देने वाली पोस्ट मिलती हैं तो ट्विटर क्या करता है? क्या यह भारतीय अधिकारियों को ऐसी सामग्री के बारे में बताता है, जो पोक्सो (POCSO) अधिनियम के खिलाफ हैं।

सूत्रों के मुताबिक, ट्विटर ने इस सवाल पर बेहद निराशाजनक प्रतिक्रिया दी। उसने कहा कि वह इस तरह की सामग्री के अस्तित्व में आने के बाद भारतीय अधिकारियों की बजाए एक एनजीओ (NGO) को सूचित करता है।

इस पर समिति ने कहा कि यह देश के कानून के खिलाफ है। ट्विटर को कानून का पालन करते हुए चाइल्ड पोर्न कंटेंट के अस्तित्व में आने पर तुरंत पुलिस को सूचित करना जरूरी है, क्योंकि यह POCSO कानून के तहत बड़ा जुर्म है।

ट्विटर ने खुद को फँसाया

दिलचस्प बात यह है कि ट्विटर ने संसदीय स्थायी समिति के सामने खुद को फँसा लिया। सुनवाई के दौरान, ट्विटर प्रतिनिधि ने कहा कि वे सुनिश्चित करते हैं कि वे ‘अच्छी बातचीत’ को बढ़ावा देते हैं और ‘खराब बातचीत’ को दबा देते हैं। इस पर समिति के सदस्यों ने पूछा कि वे ऐसा कैसे करते हैं। ट्विटर ने यह कहते हुए जवाब दिया कि उनके पास एक एल्गोरिथम है जो यह चुनता है कि उन्हें किस बातचीत को बढ़ावा देना चाहिए और किसको नहीं।

इस पर संसदीय समिति ने पलटवार करते हुए कहा कि ट्विटर ने प्रभावी ढंग से स्वीकार किया है कि वे एक प्रकाशक के रूप में काम करते हैं न कि एक मध्यस्थ के रूप में। यदि ट्विटर एक मध्यस्थ के रूप में कार्य नहीं करता है, तो अनिवार्य रूप से उन्हें दिए गए सेफ्टी हार्बर नेट का क्या मतलब है। इसका तो सीधा सा यही मतलब है कि उनके प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई सामग्री के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।

यहाँ ध्यान देना होगा कि इन दिशानिर्देशों के सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक यह है कि यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गाइडलाइन्स में निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं करते हैं, तो उसे आईटी कानून और अन्य दंडात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। नई गाइडलाइन में कहा गया है कि सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को इसका पूरी ईमानदारी से पालन करना होगा। यदि कोई इंटरमीडियर इसका पालन नहीं करता है, तो प्रावधान सेफ हार्बर प्रोविजन (safe harbour provisions) उन पर लागू नहीं होंगे।

सेफ हार्बर प्रावधानों को आईटी अधिनियम की धारा-79 के तहत परिभाषित किया गया है। मध्यस्थों को प्राप्त होने वाली शिकायतों के निस्तारण हेतु एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी और इस अधिकारी के नाम व संपर्क विवरण को साझा करना होगा। मूल रूप से यूजर्स द्वारा अपने प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई किसी भी सामग्री के लिए उन्हें उत्तरदायी नहीं माना जाता है। इसमें कहा गया है कि एक मध्यस्थ किसी भी तीसरे पक्ष की जानकारी, डेटा या संचार लिंक के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, जो उनके द्वारा उपलब्ध या होस्ट किया गया हो। बशर्ते उन्होंने स्वयं ऐसा संचार माध्यम शुरू नहीं किया हो और आईटी अधिनियम के तहत उचित कार्य का पालन करता हो।

2013 से भारत की सेवा की, लेकिन भारतीय कानूनों का पालन नहीं किया

ट्विटर ने संसदीय स्थायी समिति को बताया कि वह 2013 से भारत में काम कर रहा है। वह हमेशा से भारत के सर्वोच्च हितों को ध्यान में रखते हुए में काम करता है। इस पर समिति ने कहा कि भले ही ट्विटर भारत के सर्वोच्च हित में काम करने का दावा करता है, लेकिन उसने भारत के कानूनों का पालन करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। भारत ने ट्विटर से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि वे भारत में एक शिकायत अधिकारी और एक अनुपालन अधिकारी नियुक्त करें। हालाँकि, उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया है। इसको लेकर ट्विटर ने कहा कि उन्होंने एक अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी को नियुक्त किया है। समिति ने कहा कि जबकि भारत की ओर से इसकी कोई आवश्यकता प्रकट नहीं गई थी।

संसदीय स्थायी समिति ने आगे यह भी बताया कि जहाँ ट्विटर भारतीय हितों की देखभाल करने का दावा करता है, वहीं ट्विटर द्वारा लद्दाख को चीन के हिस्से में चिह्नित करने वाली गलती को सुधारने में 12 दिन लग गए थे।

संसदीय स्थायी समिति ने ट्विटर को बताया कि कई देशों ने अपने कानूनों का पालन नहीं करने के लिए ट्विटर पर जुर्माना लगाया है। तो भारत के कानूनों का उल्लंघन करने पर हमें आप पर जुर्माना क्यों नहीं लगाना चाहिए?

यह ध्यान देने योग्य है कि यूरोप के जीडीपीआर डेटा गोपनीयता नियमों (GDPR data privacy rules) को तोड़ने के लिए आयरलैंड में डेटा संरक्षण आयोग द्वारा ट्विटर पर €450,000 (£400,000) का जुर्माना लगाया गया था। इसने फैसला सुनाया कि जनवरी 2019 में डेटा उल्लंघन की पहचान करने के बाद ट्विटर 72 घंटों के भीतर इसे सूचित करने में विफल रहा और पर्याप्त दस्तावेज जुटाने में नाकामयाब रहा कि क्या हुआ था। ट्विटर ने इसमें अपनी चूक स्वीकार कर ली थी।

फेक न्यूज, मेनिपुलेटेड मीडिया और पूर्वाग्रह

संसदीय समिति ने पूछा कि ट्विटर कैपिटल हिल पर हुए हंगामे को अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ मानता है और राष्ट्रपति ट्रंप का अकाउंट ब्लॉक कर देता है, तो फिर भारत सरकार के कहने के बावजूद 26 जनवरी को हुए हंगामे पर उन्होंने ऐसे कदम क्यों नहीं उठाया? समिति ने कहा कि कॉन्ग्रेस के टूलकिट का मामला हो या फिर गाजियाबाद का मामला, ट्वीटर ने क्यों नहीं कार्रवाई की, लेकिन ट्विटर के पास इसका कोई पुख्ता जवाब नहीं था। इसने ट्विटर के पूर्वाग्रह और दोहरे मानदंड को भी सामने ला दिया।

इस ओर इशारा करते हुए यह भी उल्लेख किया गया था कि मेनिपुलेटेड मीडिया टैग्स उन ट्वीट्स पर लागू किए गए थे, जहाँ कॉन्ग्रेस टूलकिट का खुलासा किया जा रहा था। हालाँकि, गाजियाबाद मामले में जहाँ ऑल्ट न्यूज जैसे कथित फैक्ट चैकर द्वारा ऑडियो को म्यूट करके हिंदुओं को फँसाने के लिए एक नकली वीडियो को वायरल किया था। इसके लिए वीडियो में ट्विटर ने ट्वीट्स को ‘manipulated media’ के रूप में चिह्नित नहीं किया। सूत्रों ने संकेत दिया कि ट्विटर ने दावा किया कि वे ट्वीट्स ‘manipulated media’ की श्रेणी में नहीं आते, क्योंकि इसमें बदलाव नहीं किया गया था और इससे शांति और कानून व्यवस्था को कोई खतरा नहीं था।

इस पर पैनल ने बताया कि वीडियो से देश में हिंसा भड़क सकती थी, क्योंकि इसे सांप्रदायिक एंगल दिया गया था। संसदीय समिति ने ट्विटर से यह भी सवाल किया कि वे फैक्ट चैकर के साथ कैसे साझेदारी करते हैं, उदाहरण के लिए Alt News, जो गाजियाबाद मामले में फर्जी खबरें फैलाते हुए पकड़े गए थे। इस पर ट्विटर ने कहा कि वे पेरोल में नहीं थे। हालाँकि, उनके पास तथ्यों की जाँच के लिए सलाहकार थे।

ट्विटर इस बारे में समिति से जानना चाहता है कि ऐसे सलाहकार नियुक्त करने के लिए कौन से पैरामीटर हैं और ये सलाहकार वास्तव में कौन हैं। इसके अलावा सूत्रों ने संकेत दिया है कि फेसबुक को भी इस चर्चा का हिस्सा होना चाहिए था। हालाँकि, फेसबुक ने दावा किया कि कोरोना काल में वह ऐसी किसी भी चर्चा का हिस्सा नहीं बन रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पैनल ने फेसबुक को भी अपने सामने पेश होने का निर्देश दिया है।

एक बार जब ट्विटर और फेसबुक दोनों पैनल में जवाब देने के लिए वापस आते हैं, तो पैनल अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप देगा। सूत्रों के अनुसार, पैनल अब तक ट्विटर की प्रतिक्रिया से खुश नहीं हैं, क्योंकि यह माना जा रहा है कि उनकी प्रतिक्रिया स्क्रिप्टेड थी। इसके साथ ही ट्विटर के पक्षपाती रुख और भारतीय कानूनों का पालन नहीं करने के उनके आग्रह को ठीक प्रकार से स्पष्ट नहीं किया गया है।

वाराणसी पहुँचे CM योगी ने की बिजली विभाग के MD की छुट्टी, नालों की सफाई के लिए दी आखिरी चेतावनी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी दौरे के दौरान एक अधिकारी के लापरवाह रवैये को देखते हुए उसे पद से निलंबित कर दिया। शुक्रवार (जून 18, 2021) को बिजली विभाग के मैनेजिंग डायरेक्टर सरोज को ड्यूटी से सस्पेंड करने के अलावा सीएम ने जल निगम के चीफ इंजीनियर को भी फटकार लगाई। साथ ही जलजमाव को देखते हुए नगर आयुक्त को सख्त निर्देश दिए और स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाराणसी पहुँचकर योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान विद्युत विभाग के जेनरेशन लॉस पर सीएम ने विभाग के एमडी से जवाब जानना चाहा। लेकिन वहाँ एमडी की जगह दूसरे अफसर खड़े हुए और जवाब देने लगे। सीएम ने इस पर पूछ लिया कि वो जवाब क्यों दे रहे हैं, विभाग के एमडी कहाँ हैं। अधिकारी ने बताया, “वह घर पर हैं, उन्होंने मुझे भेजा है।”

अधिकारी की इस लापरवाही को देखते हुए सीएम नाराज हो गए और एमडी को निलंबित करने का आदेश जारी किया। इसके अलावा, सर्किट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर विकास कार्य पूरा कराने के लिए सभी कार्यदायी विभागों को आदेशित किया। उन्होंने कहा कि हर 15 दिन पर सभी जनप्रतिनिधियों के साथ अफसरों की बैठक हो। विकास कार्य की समीक्षा की जाए। बाधाओं को दूर कर कार्य को गति दी जाए।

आगे सीएम योगी ने बारिश के कारण हुए जलजमाव को देखकर जल निगम के चीफ इंजीनियर को डाँटा। उन्होंने अधिकारी को फटकारते हुए कहा, “कई बार से सुन रहा हूँ कि नाले की सफाई हो रही है लेकिन कुछ दिख नहीं रहा है। अगली बैठक में यह नहीं सुनूँगा, तब तक ठीक हो जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने गोद लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाथी बाजार का भी दौरा किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार सीएम के दौरे के बाद स्थानीय लोगों में उत्साह है कि पीएचसी में आधुनिक मेडिकल सुविधाएँ बढ़ेगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सर्व सुविधायुक्त बनाने की कार्ययोजना सीएम को दिखाई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल शाम 4:50 बजे सेवापुरी विकासखंड के हाथी बाजार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचे थे। सीएम के पहुँचते ही पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। सीएम सबसे पहले वैक्सीनेशन रूम में पहुँचे। वहाँ पर स्वास्थ्य कर्मी एएनएम सुनीता कुमारी व पूनम गुप्ता से वैक्सीनेशन के बारे में जानकारी ली। साथ ही कोविड वार्ड,लेबर रूम, ऑब्जर्वेशन कक्ष, टेलीमेडिसिन रूम का जायजा लिया।

हिन्दू देवी की मॉर्फ्ड तस्वीर शेयर कर आस्था से खिलवाड़, माफी माँगकर किनारे हुआ पाकिस्तानी ब्रांड: भड़के लोग

गुरुवार (जून 17, 2021) को, ‘हिंदू समता’ (‘Hindu Samata’) के नाम से एक पॉपुलर इंस्टाग्राम पेज ने बताया कि एक प्रमुख पाकिस्तानी महिला ब्रांड, जेनरेशन ने अपने कार्यालय में हिंदू देवता की एक विकृत छवि डालकर हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया। ‘जेनरेशन’ नाम के इस कपड़े की ब्रांड के इंस्टाग्राम पर 1.2 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

अपने पोस्ट में, हिंदू समता ने कहा, “इस प्रसिद्ध पाकिस्तानी ब्रांड ने अपने कार्यालय में हिंदू देवता का मजाक उड़ाते हुए एक अपमानजनक पोस्टर लगाया। पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून हैं जो केवल गैर-मुसलमानों पर लागू होते हैं। इस्लाम/मुसलमानों के बारे में कुछ भी कहने पर हिंदुओं को झूठे आरोपों में कैद किया जा सकता है। यह पेज अल्पसंख्यकों के हाशिए पर जाने को प्रोत्साहित करने के लिए उनके बड़े फॉलोइंग का इस्तेमाल कर रहा है।”

अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में जेनरेशन ने हिंदू देवी की तस्वीर को बदल दिया था और ‘अस्त्रों’ को लैपटॉप और अन्य सामानों से परिवर्तित कर दिया था। साद और नोशीन रहमान नामक एक पाकिस्तानी शौहर-बीबी की जोड़ी द्वारा स्थापित ब्रांड ने हिंदू देवी का अपमान किया।

हिंदू अधिकार कार्यकर्ता का पाकिस्तानी न्याय प्रणाली के दोहरे मानकों की ओर इशारा

बुधवार (जून 16, 2021) को हिंदू अधिकार कार्यकर्ता कपिल देव ने इस मामले पर संज्ञान लिया और ट्वीट किया, “अभी एक दोस्त से पता चला कि @GENERATION_PK ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक हिंदू देवी की मॉर्फ्ड तस्वीर पोस्ट की, बाद में माफी माँगी।”

उन्होंने आगे कहा, “बस सोच रहा था कि क्या इससे बचने के लिए सिर्फ एक माफी ही काफी है? तुम करो तो माफी, और हम न करें तो भी ईशनिंदा।” यह याद दिलाने पर कि अगर एक हिंदू इस्लामी आस्था को अपवित्र करता है तो स्थिति अलग होगी, कपिल देव ने जोर देकर कहा, “बिल्कुल! हम एक पाखंडी समाज में रहते हैं जहाँ सिद्धांत केवल व्यक्तिगत लाभ और हितों के लिए मायने रखते हैं।”

कपड़ों के ब्रांड ने अनदेखी और असंवेदनशील तस्वीर के लिए माफी माँगी

सोशल मीडिया पर नाराजगी के बाद, जेनरेशन ने शुक्रवार (जून 18, 2021) को माफी माँगी। वूमेन्सवियर ब्रांड ने एक बयान में कहा, “कुछ दिनों पहले जेनरेशन मुख्यालय में एक गंभीर निरीक्षण हुआ था। एक अनभिज्ञ और असंवेदनशील तस्वीर सार्वजनिक हो गई जो हमारे संरक्षकों के लिए हानिकारक थी, खासकर उन लोगों के लिए जो हमारे झंडे में सफेद का प्रतिनिधित्व करते हैं (अल्पसंख्यकों का जिक्र करते हुए)।

इसमें आगे कहा गया, “हमें बहुत खेद है! हम बेहतर और अधिक सूचित विकल्प बनाने के लिए बेहतर बनने का प्रयास करने का संकल्प लेते हैं। हम उन लोगों के बारे में अधिक जानने के लिए मुख्यालय में नियमित संवेदनशीलता कार्यशालाएँ आयोजित करने का भी संकल्प लेते हैं जिनके साथ हम अपने देश को साझा करते हैं। हम आशा करते हैं कि आप हमें क्षमा कर सकते हैं, और हम एक समुदाय के रूप में अधिक संवेदनशील और जागरूक बन सकते हैं।”

हिंदू अधिकार कार्यकर्ता ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी

शनिवार (जून 19, 2021) को हिंदू अधिकार कार्यकर्ता कपिल देव ने जनरेशन द्वारा माफी नोट का जवाब देने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। उन्होंने कहा, ‘यह माफी नाकाफी है। हमने वकीलों से बात की है और ब्रांड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। आप केवल माफी माँगने से बच नहीं सकते। ”

उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय में हिंदू देवता के एक विकृत पोस्टर की उपस्थिति प्रबंधकीय पदों पर हिंदू कर्मचारियों की कमी को दर्शाती है। कपिल देव ने पूछा, “यह असंवेदनशीलता दर्शाती है कि ब्रांड प्रबंधन में विविध टीम का अभाव है। ब्रांड के पास कितने हिंदू कर्मचारी (प्रबंधन) हैं?”