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बंगाल में BJP की महिला मोर्चा उपाध्यक्ष रेखा मैती पर जानलेवा हमला, पहले भी TMC के अटैक में हुआ था मिसकैरिज

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ हिंसा अभी थमी नहीं है। हाल ही में वहाँ तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पूर्वी मिदनापुर के पताशपुर में भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्षा रेखा मैती पर निर्मम तरीके से हमला किया था। अब भाजपा कार्यकर्ता उनकी आर्थिक मदद करने में जुटे हैं।

भाजपा कार्यकर्ता देवदत्त माजी ने रेखा मैती की हमले के बाद की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “ईस्ट मिदनापुर के पताशपुर में ये रेखा मैती हैं। टीएमसी की हिंसा की पीड़िता। 2018 से इन्हें नरक भोगना पड़ रहा है। उस समय ये 6 माह गर्भवती थीं, तब इन्हें इतनी तेज मारा गया था कि इनका मिसकैरिज हो गया था। अब ये और इनका परिवार फिर से भाजपा का साथ देने पर भुगत रहा है। मैं इनके परिवार की मदद करने की कोशिश में लगा हूँ।”

देवदत्त द्वारा शेयर चार तस्वीरों में एक तस्वीर उस अमॉउंट की भी है, जो उन्होंने रेखा मैती के परिवार के लिए दी हैं।

बता दें पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम के बाद यानी 2 मई से शुरू हुई राजनीतिक हिंसा का क्रम अब तक जारी है। इसी कड़ी में गत 11 जून को पूर्व मेदिनीपुर के पताशपुर विधानसभा की भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्षा रेखा मैती पर तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने जानलेवा हमला किया और मरने वाली हालत में छोड़कर चले गए। मैती को बाद में नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहाँ उनकी हालात नाजुक बनी हुई है। इससे पहले बीरभूम जिले के खैराशोल में भारतीय जनता पार्टी के बूथ उपाध्यक्ष मिथुन बागदी की तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने हत्या कर दी।

इसके अलावा, 6 जून को उत्तर 24 परगना के बैरकपुर इलाके में भाजपा कार्यकर्ता पर बम से हमला कर हत्या कर दी गई थी। मृत कार्यकर्ता का नाम जयप्रकाश यादव बताया गया था। बंगाल भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) को इस हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया था। स्थानीय सांसद अर्जुन सिंह ने भी कहा था कि भाटपाड़ा के वार्ड नंबर 1 में तृणमूल के गुंडों ने भाजपा के कार्यकर्ता जे.पी. यादव के सिर पर बम मारकर उनकी हत्या कर दी।

पृथ्वी की गति, आकार, समय, संख्या, अंतरिक्ष… इस्लाम-ईसाई धर्म के उदय से पहले फल-फूल चुकी थी सनातन ज्ञान परंपरा

5000 वर्षों से अधिक समय से भारत उस बौद्धिक संपदा का धनी रहा जो मानव जाति के लिए सर्वोत्तम बिन्दु था। विश्व की सबसे पुरातन सभ्यता, भारत की ज्ञान और विज्ञान की एक महान परंपरा रही है। यदि प्राचीन भारत साधु और संतों की भूमि रही तो यह महान शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की कर्मस्थली भी रही। 

प्राचीन वैदिक काल से लेकर आज तक भारतीयों ने सभी क्षेत्रों में वह ज्ञान अर्जित किया, जिसकी तुलना नहीं की जा सकती है। हमारे पूर्वज हमारे लिए ज्ञान का वह पिटारा छोड़कर गए, जिसकी सहायता से सहस्त्राब्दियों से सभ्यताओं ने अपने ज्ञान के आधार को मजबूत किया। खगोल से लेकर धातु विज्ञान, गणित, चिकित्सा और अन्य कई क्षेत्रों में भारतीयों का योगदान सम्पूर्ण विश्व के लिए ही अनूठा रहा है।

यह भारतीय विज्ञान वैदिक काल अर्थात 3000 साल पहले से ही फलता-फूलता रहा। भारतीय वैज्ञानिकों ने कई सारे आविष्कार किए और पश्चिम सभ्यता से कई हजारों साल पहले वैज्ञानिक अवधारणाओं पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिक घटनाओं की व्याख्या के साथ-साथ हमारे भारतीय ऋषि-मनीषियों ने वैज्ञानिक विधियों का भी आविष्कार किया।  

इन सबमें सबसे रोचक यह है कि भारतीय खोजकर्ताओं ने यह सब अवलोकन सामान्य उपकरणों और कुछ ऐसी तकनीकों की सहायता से किया, जिसे हम आज प्राचीन और अपरिष्कृत समझते हैं।

यह अत्यंत गर्व का विषय है कि भारतीयों ने खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, अंकशास्त्र, समय की माप, उपकरणों के निर्माण, ग्रहों की गति, कैलेंडर निर्माण और ऐसे ही कई क्षेत्रों के महान ग्रंथों की रचना की।

ऐसी ही एक किताब है ‘इंडियन एस्ट्रोनॉमी: अ सोर्स बुक’ जिसे बीवी सुब्बारय्यप्पा और केवी शर्मा ने लिखा है। इस पुस्तक में भारतीय वैज्ञानिकों, खगोलशास्त्रियों और गणितज्ञों द्वारा 3000 से अधिक ऐसी खोजों का वर्णन किया गया है, जो हजारों सालों के दौरान की गई हैं। इस पुस्तक के माध्यम से खगोल विज्ञान, अंकशास्त्र, समय की माप और दूसरे अन्य पहलुओं पर चर्चा की गई है, जो प्राचीन भारत में हमारे वैज्ञानिकों के अध्ययन के प्रमुख क्षेत्र थे।  

इस पुस्तक में 3000 ऐसे पदों का वर्णन किया गया है, जो आर्यभट्ट, भास्कराचार्य और ब्रह्मगुप्त के द्वारा रचे गए। इन पदों को कई मूल ग्रंथों से लिया गया है, जो अधिकांशतः संस्कृत में थे, जिनका अनुवाद अंग्रेजी में किया गया। उनमें से कुछ पद यहाँ वर्णित किए जा रहे हैं, जो यह बताते हैं कि किस तरह से भारतीय वैज्ञानिकों ने विश्व की कुछ महानतम खोजें कीं।

1. एक ज्योतिर्विद की योग्यता

संस्कृत में दिए हुए ये पद्यांश भारतीय ज्योतिषशास्त्र की आधारभूत विशेषताओं को बताते हैं और साथ ही एक खगोलशास्त्री के लिए आवश्यक विशेषताओं के बारे में भी। आगे दिए गए पद्य बताते हैं कि प्राचीन समय में सटीकता का कितना महत्व था और एक व्यक्ति को ज्योतिर्विद बनने के लिए किस प्रकार सभी तरह की विधियों की जानकारी चाहिए थी। इससे भी महत्वपूर्ण है कि इन प्राचीन ग्रंथों में इस बात पर भी महत्व दिया गया था कि घटनाओं का आकलन और गणितीय दस्तावेजीकरण किया जाए, जिससे एक भारतीय ज्योतिर्विद अनुमान पर नहीं अपितु आँकड़ों के आधार पर अपने काम को अंजाम दे।

यहाँ एक श्लोक दिया गया है, जो किसी भी व्यक्ति के लिए ज्योतिषशास्त्र के अध्ययन करने के योग्यता के पैमाने को सेट करता है। ये प्राचीन श्लोक वैदिक काल में लिखे गए थे और यह सुनिश्चित करते थे कि एक व्यक्ति को किन नियमों का पालन करना चाहिए।

वेदों में कहा गया है कि कोई विशेष यज्ञ करने से पहले निश्चित समय पर कुछ विशेष कार्य करने चाहिए। इसलिए जो ज्योतिष को जानता है, जो समय पर आधारित विज्ञान है, वह यज्ञ को जानता है। यह ऋग्वेद में लिखा हुआ है।  

फोटो सोर्स : बी.वी. सुब्बारय्यप्पा और केवी शर्मा की इंडियन एस्ट्रोनॉमी अ सोर्स बुक

प्राचीन हिन्दू ज्योतिर्विद, खगोलशास्त्री और बहुज्ञ वाराहमिहिर ने अपने महान ग्रंथ बृहत संहिता में भी ज्योतिर्विद बनने के लिए कुछ योग्यताएँ बताईं हैं। ईसा पूर्व 6वीं शताब्दी में वराहमिहिर खुद एक ऐसे ज्योतिर्विद थे, जिन्होंने विश्व में सर्वप्रथम अपनी रचना सूर्य सिद्धांत में सूर्य का अध्ययन किया था।

नीचे दिए गए श्लोक (जो फोटो में हैं) एक ज्योतिर्विद के लिए आवश्यक योग्यताओं के बारे में बताते हैं। फोटो के नीचे उनके हिंदी अनुवाद दिए गए हैं।

फोटो सोर्स : बी.वी. सुब्बारय्यप्पा और केवी शर्मा की इंडियन एस्ट्रोनॉमी अ सोर्स बुक

ज्योतिषीय गणनाओं में, एक ज्योतिषी को समय की माप होनी चाहिए। जैसे युग, वर्ष, आयनांत, ऋतु, मास, प्रहर, दिन और रात, यम (डेढ़ घंटे का समय), मुहूर्त (48 मिनट का समय), नाड़ी (24 मिनट का समय), प्राण (एक श्वास के लिए आवश्यक समय), त्रुटि (समय की एक सूक्ष्म माप) और उसके उपभाग एवं ग्रहण इत्यादि जो पंच सिद्धांतों पौलिश, रोमक, वसिष्ठ, सौर एवं पैतामह में वर्णित हैं। (4)  

एक ज्योतिर्विद को समय के मापन की चार व्यवस्थाओं के बारे में भी जानना चाहिए। ये चार व्यवस्थाएँ हैं, सौर अर्थात सौरमंडल, सावन अर्थात क्षेत्रीय समय (किसी गृह अथवा तारे के दो लगातार उदय के बीच का समयांतराल), नक्षत्र काल और चंद्र समय। इसके साथ ही उसे अधिक मास एवं घटते-बढ़ते सौर दिवसों की जानकारी भी होनी चाहिए। (5)

इसके अलावा उसे 60 वर्षों के समयचक्र, एक युग (5 वर्षों के समयांतराल), एक वर्ष, एक मास, एक दिन, एक होरा (एक घंटा) की गणना एवं इनके क्रमशः अधिपतियों की जानकारी होनी चाहिए। (6)

एक ज्योतिर्विद को सौर एवं अन्य समय पद्धतियों के मध्य समानता, असमानता, संबंध, विच्छेद, तर्क एवं तथ्य और उनके वर्णन की क्षमता भी होनी चाहिए। (7)

विभिन्न सिद्धांतों में अयनांतों के अंत के बारे में विभिन्न विचारों के बावजूद एक ज्योतिर्विद में सही गणना और शंकु एवं जल-यंत्र के द्वारा निर्मित छाया के द्वारा बनाए गए वृत्त के आकलन के संबंध को उचित रूप से प्रस्तुत करने की क्षमता होनी चाहिए। (8)

एक गणक (ज्योतिर्विद) को विभिन्न ग्रहों की विभिन्न गतियों का भी ज्ञान होना चाहिए। जैसे, तीव्र, मंद, दक्षिणवर्ती, उत्तरावर्ती, पृथ्वी के निकटवर्ती और दूरस्थवर्ती। (9)

उसमें यह क्षमता होनी चाहिए कि वह गणना के द्वारा चंद्र ग्रहण और सूर्यग्रहण के प्रारंभ, अंत, दिशा, तीव्रता, अंतराल, माप और रंग का पूर्वानुमान लगा सके। साथ ही पाँच ताराग्रहों के साथ चंद्रमा की युति और ग्रहों की युति का भी पूर्वानुमान लगा सके। (10)

एक ज्योतिर्विद में प्रत्येक ग्रह की गति, उसकी कक्षा और अन्य सभी आयामों की गणना योजन में करने की क्षमता होनी चाहिए। (11)

उसे पृथ्वी के घूर्णन (सूर्य के चारों ओर एवं अपनी धुरी पर) और नक्षत्रों के चक्र के साथ उसके परिक्रमण, उसके आकार और ऐसे अन्य विवरणों, किसी स्थान के अक्षांश और उसके पूरक की लंबाई में अंतर से अच्छी तरह से परिचित होना चाहिए। इसके अलावा उसे दिन और रात (दिन-चक्र का व्यास), किसी स्थान के कारखंड, किसी दिए गए स्थान पर राशियों की बढ़ती अवधि, छाया की लंबाई को समय में परिवर्तन और समय को छाया की लंबाई में परिवर्तन के तरीके और इस तरह की अन्य चीजों के मापन का भी ज्ञान हो। (12)

2. ज्योतिषशास्त्र की अवधारणा

पृथ्वी का आकार

पश्चिमी खगोलवेत्ताओं के हजारों वर्ष पहले ही भारतीय खगोलशास्त्रियों ने यह बता दिया था कि पृथ्वी का आकार गोल है। वराहमिहिर के दौरान खगोलशास्त्र और ज्योतिषशास्त्र का विज्ञान अपने सर्वोत्तम बिन्दु तक पहुँच गया था। अपनी पुस्तक पौलिश सिद्धांत में वराहमिहिर ने न केवल पृथ्वी के गोल होने के बारे में बताया बल्कि उसका स्थलाकृतिक (topographical) अध्ययन भी किया।

फोटो सोर्स : बी.वी. सुब्बारय्यप्पा और केवी शर्मा की इंडियन एस्ट्रोनॉमी अ सोर्स बुक

पौलिश सिद्धांत के श्लोकों (ऊपर का चित्र) में इनका वर्णन किया गया है। इन श्लोकों का हिंदी अनुवाद है:

पृथ्वी गोलाकार है और पाँच तत्वों से मिलकर बनी है। यह अंतरिक्ष में इस प्रकार स्थित है मानो एक लोहे की गेंद किसी चुंबक के पिंजरे में स्थित हो। (1)

पूरी पृथ्वी की सतह में पेड़-पौधे, पहाड़, नदियाँ, समुद्र और कई शहर स्थित हैं। मेरु पर्वत (उत्तरी ध्रुव) देवों का निवास है जबकि जो असुर हैं वो नीचे की तरफ (दक्षिणी ध्रुव) में रहते हैं। (2)

जिस प्रकार किसी जल स्रोत में किसी वस्तु की परछाई उल्टी बनती है, उसी तरह असुर (देवताओं के साथ उनके संबंध) भी होते हैं। असुर भी देवताओं को उल्टा मानते हैं। (3) 

जिस प्रकार यहाँ मनुष्यों द्वारा अग्नि की ज्वाला ऊपर उठती दिखाई देती है और ऊपर फेंकी गई वस्तु नीचे की ओर गिरती है, ठीक उसी तरह अग्नि की ज्वाला का ऊपर उठना और ऊपर फेंकी गई वस्तु का नीचे की ओर आना असुरों द्वारा भी महसूस किया जाता है। (4)

आगे वराहमिहिर द्वारा पृथ्वी और उसके निकटतम सहयोगियों के पंचभूतों से निर्मित होने के बारे में जानकारी (नीचे का फोटो) दी गई है। फोटो के नीचे इन श्लोकों का हिंदी अनुवाद भी दिया गया है:

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पृथ्वी पाँच तत्वों आकाश, वायु, अग्नि, जल और मिट्टी से बनी हुई है और इन सभी पाँच तत्वों से परिपूर्ण कक्षाओं (चंद्रमा इत्यादि की) से घिरी हुई है। इसके अलावा इसका विस्तार अंतरिक्ष में तारों के क्षेत्र तक है। (1)

जिस प्रकार चुम्बकों के बीच रखा हुआ एक लोहे का गोला बिना किसी आधार के हवा में स्थित राहत है, उसी प्रकार अंतरिक्ष में पृथ्वी बिना किसी आधार के स्थित है। (2)

तीसरा श्लोक कहता है, यमकोटि, लंका (जो पृथ्वी के केंद्र में है) के पूर्व में स्थित है और रोमक पश्चिम में। सिद्धपुर लंका के नीचे है (ठीक विपरीत), मेरु (पर्वत) उत्तर में स्थित है और असुरों का निवास दक्षिण में है। (3)

ये (चारों शहर) द्वीपों पर स्थित हैं। मेरु जमीन पर है और असुरों का निवास जल से घिरा हुआ है। ये 6 स्थान एक दूसरे के अनुप्रस्थ स्थित हैं और माना जाता है कि इनके बीच की दूरी पृथ्वी की परिधि का एक चौथाई है। (4) 

जो पृथ्वी की परिधि की आधी दूरी पर स्थित हैं, वो प्रतिलोम (एंटीपॉड) हैं, ठीक उसी तरह जैसे नदी के किनारे खड़े हुए व्यक्ति की परछाई। आकाश सबसे ऊपर है और पृथ्वी उसके नीचे। सभी प्रजातियाँ पृथ्वी की सतह के नीचे ही रहती हैं। (5)

भूकंप का कारण

कमलकार एक भारतीय खगोलशास्त्री और गणितज्ञ थे, जो कि 17वीं शताब्दी के दौरान वाराणसी में रहते थे। कमलकार ने सबसे पहले पृथ्वी की सतह पर आने वाले भूकंपों की जानकारी दी। हालाँकि यूरोपीय भूगर्भ विज्ञानियों को पृथ्वी की आंतरिक संरचना और भूकंपों के कारणों की समझ कमलकार से एक सदी बाद आई।

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अपनी पुस्तक सिद्धांततत्वविवेक में कमलकार ने बताया कि भूपर्पटी कठोर और चट्टानों से बनी हुई है। भूकंप को समझते हुए उन्होंने लिखा है, “ताकत की कमी के कारण दरार पैदा होती है, गैसें तेजी से बाहर निकलती हैं, इसी के कारण पृथ्वी में कंपन पैदा होती है और इससे तेज आवाज भी उत्पन्न होती है।“

पृथ्वी की गति

ठीक इसी तरह लल्ला, जो कि एक भारतीय गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और ज्योतिर्विद थे, ने 8वीं शताब्दी में ही यह बता दिया था कि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर गति करती है और यदि कोई उत्तरी ध्रुव के तारे से देखे तो यह बाईं ओर मुड़ जाती है अर्थात वामावर्त।

यूरोपीय खगोलशास्त्रियों के सैकड़ों साल पहले ही भारतीय वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की गति और गति की दिशा की जानकारी दे दी थी। लल्ला ने पृथ्वी की अपने अक्ष पर घूर्णन और घूर्णन की दिशा के बारे में बताया है।

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पृथ्वी की भूमध्य रेखा पर खगोलीय क्षेत्र को प्रवाह वायु द्वारा हमेशा पश्चिम की ओर ले जाया जाता है। देवताओं (उत्तरी ध्रुव) के लिए यह बाईं से दाईं ओर गति करता दिखाई देता है, वहीं असुरों (दक्षिणी ध्रुव) के लिए यह दाईं से बाईं ओर गति करता हुआ दिखाई देता है। (3) 

पृथ्वी का घूर्णन

एक दूसरे ज्योतिर्विद थे, चतुर्वेद प्रितुदाक स्वामी। यह अपने गणितीय समीकरणों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बताया कि पृथ्वी दिन में एक बार घूर्णन करती है। उन्होंने यह भी बताया कि तारों का क्षेत्र स्थिर है, जिसके कारण ग्रहों और तारों का उदय एवं अस्त होता है।

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अपनी पुस्तक ब्रह्मस्फुटसिद्धांत में प्रितुदाक स्वामी ने दिन और रात होने के पीछे के कारण की व्याख्या की है।

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चतुर्वेद प्रितुदाक स्वामी ने अपनी पुस्तक में लिखा है, “पृथ्वी के घूर्णन को आर्यभट्ट ने भी स्वीकार किया, उनके शब्दों के अनुसार, ‘पृथ्वी एक सेकंड प्रति एक प्राण के अनुसार घूमती है।’ लोगों के द्वारा संभावित आलोचना के चलते भास्कर प्रथम और अन्य लोगों ने इसकी व्याख्या दूसरे ढंग से की।”

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आर्यभट्ट निश्चित तौर पर विश्व के सबसे पुराने खगोलशास्त्री थे। उन्होंने अपनी पुस्तक आर्यभट्टीयम में पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन की व्याख्या की थी।

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अपनी पुस्तक में आर्यभट्ट ने लिखा है, “जिस प्रकार एक नाव में बैठा हुआ व्यक्ति जब आगे बढ़ता है तब उसे नदी के दूसरी ओर स्थित वस्तुएँ अपनी विपरीत दिशा में चलती हुई दिखाई देती हैं। उसी प्रकार लंका (भूमध्य रेखा पर स्थित) के लोगों को स्थिर तारे पश्चिम की ओर गति करते हुए दिखाई देते हैं।“ (9)

यह ऐसा प्रतीत होता है मानो संचालित करने वाली वायु के द्वारा इनका उदय और अस्त होता है, और इन्हीं वायु के द्वारा ग्रहों के साथ-साथ तारों के पुंज की पूरी संरचना लंका के पश्चिम की ओर चली गई है। (10)

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इसके पहले भी कई ग्रंथों में पृथ्वी की घूर्णन गति के बारे में बताया गया है। मक्कीभट्ट में भी यह दर्शाया गया है कि पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर गति करती है।

पृथ्वी का आयाम या परिमाण

ऋग्वेद के श्लोक जो आज से लगभग 5000 साल पहले लिखे गए थे, पृथ्वी के परिमाप को बताते हैं। यहाँ ऋग्वेद का वह श्लोक दिया जा रहा है, जिसमें धरती और उनके परिमाप का बखूबी वर्णन किया गया है। भले ही यह पृथ्वी के आकार और परिमाप के बारे में पूरी जानकारी न दे पाए, लेकिन यह सबसे पुराना दस्तावेज (नीचे फोटो, फोटो के नीचे हिंदी अनुवाद) है।

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हे इन्द्र (भगवान), क्या यह पृथ्वी भी अपने आपको 10 गुणा तक बढ़ाती है? इस पर रहने वाले मनुष्य दिन-ब-दिन कई गुणा बढ़ते जा रहे हैं, क्योंकि केवल तभी आपकी शक्ति और महानता स्वर्ग के समान विशाल होगी। 

वराहमिहिर ने ऋग्वेदिक मान्यताओं के आधार पर पृथ्वी की परिधि की माप 3200 योजन बताई थी। एक योजन लगभग 12-15 किलोमीटर होता है। इसके हिसाब से पृथ्वी की परिधि लगभग 38000 किमी से 45000 किमी हुई, जो कि आधुनिक मापन के तुल्य है। वर्तमान में भूमध्यरेखा के आस-पास में मापी गई पृथ्वी की परिधि की माप 40075.017 किमी है।

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भूमध्यरेखा पर जब सूर्य स्थित होता है तो यह ध्रुवों से सभी अक्षांशों पर दिखाई देता है, (दिन और रात के बराबर होने पर)। पृथ्वी का केंद्र (उत्तरी ध्रुव) उज्जैन से उत्तर में 586 2/3 योजन तथा लंका से 800 योजन की दूरी पर है।   

पृथ्वी का व्यास और परिधि

इसी तरह अपनी पुस्तक खंडखद्यक में ब्रह्मगुप्त ने भी पृथ्वी की परिधि की गणना की। उनकी पुस्तक में यह वर्णित (फोटो नीचे है, अनुवाद फोटो के नीचे) है कि उन्होंने गणितीय विधि से पृथ्वी की परिधि का मापन किया।

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किसी स्थान के संपार्श्विक माप की थेज्जा को 5000 से गुणा करके प्राप्त परिमाण को त्रिज्ड से भाग देने पर उस स्थान पर पृथ्वी की परिधि ज्ञात होती है (Multiply 5000 by thejja of the colatitude of the place and divide the product by the trijyd. The result is the correct circumference of the Earth at that place. (6a)  

देव, जो एक और प्राचीन खगोलविद थे, उन्होंने पृथ्वी की परिधि का सही मापन किया। इसके अलावा देव ने उज्जैन (मध्य प्रदेश) से लंका के बीच की दूरी का मापन भी किया। उनके अनुसार दोनों स्थानों के बीच की दूरी 200 योजन या लगभग 3000 किमी है।

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3299 योजन पृथ्वी की परिधि है और इसे 16 से भाग देने पर लंका और उज्जैन (अवन्ति) के बीच की दूरी ज्ञात होती है।

इसी प्रकार भास्कर द्वितीय ने अपनी रचना सिद्धांत शिरोमणि में यह बताया है कि पृथ्वी की परिधि लगभग 4967 योजन है। भास्कर द्वितीय ने सिद्धांत शिरोमणि में लिखा (फोटो नीचे, हिंदी अनुवाद फोटो के नीचे) है:

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“पृथ्वी का व्यास 1581 1/24 योजन है। इसका पृष्ठीय क्षेत्रफल (surface area) 785034 वर्ग योजन है। इससे यह पता चलता है कि किसी गोलाकार वस्तु की परिधि और उसके व्यास का गुणनफल ही उस गोलाकार वस्तु का पृष्ठीय क्षेत्रफल बताता है।“ (52)

भास्कर द्वितीय के अनुसार:
एक योजन = (दो स्थानों के बीच की दूरी*360) / (परिधि – (एक ही स्थलीय याम्योत्तर पर दो स्थानों के अक्षांशों में डिग्री में अंतर)
a yojana = (distance between the two places*360) / (circumference – (difference in the latitudes of two places on the same terrestrial meridian in degrees)

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अपनी पुस्तक में भास्कर द्वितीय ने लिखा, “पृथ्वी की विषुवतीय परिधि को cos 0 से गुणा करने पर और R से भाग देने पर अथवा 12 से गुणा करने पर और विषुवतीय भूमध्यरेखीय छाया के द्वारा निर्मित शंकु से बने दक्षिणावर्ती समकोणीय त्रिभुज के कर्ण से भाग देने पर जो परिमाण प्राप्त होता है, वह पृथ्वी की परिधि के समतुल्य होता है और भूमध्यरेखा के समानांतर होता है।  

पृथ्वी के व्यास का अनुमान लगाते हुए खगोलविद नीलकंठ ने पृथ्वी का व्यास लगभग 1050 योजन बताया, अर्थात लगभग 12000 किमी (फोटो नीचे)।   

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यहाँ एक और प्राचीन ग्रंथ का श्लोक दिया गया है, जो पृथ्वी की परिधि के मापन के लिए गणितीय माप (फोटो नीचे, फोटो के नीचे अनुवाद) प्रदान करता है।

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बिल्कुल उत्तर और दक्षिण में स्थित दो स्थानों पर नियत करके, उनके अक्षांश और उनके बीच के योजन की संख्या निर्धारित करें।
फिर तीन का नियम लागू करें: यदि अक्षांशों में उनके अंतर के कारण दो स्थानों के बीच की दूरी है, तो एक वृत्त (यानी, 360°) में डिग्री के लिए कितनी (दूरी होगी)? यही परिणाम पृथ्वी की परिधि होगी। (12-13)
Then apply the rule of three: If their difference in latitudes causes the distance between the two places, how much (will the distance be) for the degrees in a circle (i.e., 360°)? The result will be the circumference of the Earth. (12-13)

अगला श्लोक कहता है: यदि दो अक्षांशों के डिग्री में अंतर उनके बीच के योजन के बराबर है, तो 90° के लिए कितनी योजन होंगी, जो मेरु का अक्षांश है? यही पृथ्वी की परिधि का एक चौथाई हिस्सा देगा। (14)

3. दशमलव संख्या

भारतीय गणितज्ञों ने सबसे पहले दशमलव संख्या प्रणाली का आविष्कार किया, जो आज आधुनिक गणित का आधार है। प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय गणितीय रचनाएँ, जो सभी संस्कृत में रचित हैं, संख्याओं की दशमलव प्रणाली पर चर्चा करने वाले कई सूत्रों से मिलकर बनी हैं।

वो भारतीय ही थे, जिन्होंने सभी संख्याओं को दस प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त करने की सरल विधि दी – दशमलव प्रणाली। दशमलव अंकन की सादगी ने गणना की सुविधा प्रदान की और भारतीयों द्वारा आविष्कार की गई इस प्रणाली ने व्यवहारिक आविष्कारों में अंकगणित के उपयोग को बहुत तेज और आसान बना दिया।

अपनी रचना आर्यभट्टीयम में, आर्यभट्ट संख्याओं की दशमलव प्रणाली की व्याख्या (फोटो नीचे, अनुवाद फोटो के नीचे) करते हैं, जहाँ एक अंक का संगत स्थानीय मान हमेशा उसके दाईं ओर के अंक के स्थानीय मान से 10 गुना अधिक होता है।

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आर्यभट्ट की रचना का अनुवाद जो मूल रूप से संस्कृत में लिखा गया है, इस प्रकार है: एक (इकाई का स्थान), दास (दस स्थान), शत (सौ स्थान), सहस्र (हजार स्थान), आयुता (दस हजार स्थान), नियुता (सौ हजार स्थान), प्रायुत (मिलियन स्थान), कोटि (दस मिलियन स्थान), अर्बुदा (सौ मिलियन स्थान), और वृंदा (हजार मिलियन स्थान) क्रमशः एक स्थान से दूसरे स्थान पर पूर्ववर्ती से प्रत्येक दस गुना हैं। (2)

मध्ययुगीन काल के उत्तरार्ध में खगोलशास्त्री-गणितज्ञ शंकर वर्मन ने भी दशमलव प्रणाली की व्याख्या (फोटो नीचे, फोटो के नीचे अनुवाद) की, जो आर्यभट्ट के समान ही थी। यह इस प्रकार है:

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एका (1), दशा (10), शत (100), सहस्र (1000), आयुता (10,000), नियुता (लाख), प्रायुत (10 ^ 6), कोटि ( 10^7), अर्बुदा (10^8), वृंदा (10^9), खर्व (10^10), निखर्व (10^11), महापद्म (10^12), संकू (10^13), वरिधि (10^9) ^14), अंत्य (10^15), मध्य (10^16), परार्धा (10^17) संख्याएँ हैं, प्रत्येक संख्या पिछले की दस गुना है।

यहाँ एक यजुर्वेदिक श्लोक (फोटो नीचे, फोटो के नीचे अनुवाद) है, जो वैदिक युग में दशमलव प्रणाली के उपयोग के बारे में बताता है। इसके अलावा यजुर्वेदिक सूक्तों में अनुष्ठानों में भी दशमलव मूल्य प्रणाली के उपयोग का उल्लेख है।

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हे अग्नि, ये (यज्ञ) ईंटें मेरे लिए फायदेमंद हो सकती हैं: एक और एक दस, एक दस और एक सौ, एक सौ और एक हजार, एक हजार और एक दस हजार, एक दस हजार और एक लाख, एक लाख और एक दस लाख, एक दस लाख और एक सौ मिलियन, एक हजार मिलियन, एक दस हजार मिलियन, एक सौ हजार मिलियन, एक लाख-मिलियन या अरब। ये ईंटें मेरे लिए फायदेमंद हो सकती हैं उस दुनिया में भी और इस दुनिया में भी।

4. समय की माप

भारत में, समय मापन की एक प्रणाली प्रारंभिक वैदिक युग की शुरुआत में थी, जो 2500 ईसा पूर्व की थी। वेदों और उपनिषदों में समय के मापन के कई संदर्भ हैं।

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यहाँ एक ऋग्वैदिक सूक्त है, जो बताता है कि वैदिक युग में समय को कैसे मापा जाता था। उपरोक्त सूक्त (फोटो ऊपर) में लिखा है कि वैदिक युग में समय का विभाजन वर्ष, मास और दिनों के आधार पर होता था।

ऊपर के ऋग्वेद स्तोत्र के अनुवाद के अनुसार बारह तीलियों से बना चक्र (समय का) बिना थके आकाश के चारों ओर घूमता है। हे अग्नि! उसके 720 संतान हैं (अर्थात दिन और रात)। उपरोक्त श्लोक कहता है कि समय को 12 तीलियों (प्रति घंटा) में विभाजित किया गया था, जिसमें 720 दिन और रातें शामिल थीं, जिससे यह 360 कैलेंडर दिन का समय बन गया।

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एक अन्य ऋग्वैदिक स्तोत्र (फोटो ऊपर) के अनुसार, चाप बारह हैं, पहिया एक है, तीन (विभाजित) धुरी हैं, लेकिन इसे कौन जानता है? इसके भीतर 360 (तीलियाँ) एकत्र हैं जो जैसे पहले थे – चल और अचल – अभी भी वैसे ही हैं।

ऋग्वेद के अनुसार, ऋषि धृतव्रत बारह महीनों को जानते थे। वैदिक दस्तावेजों से पता चलता है कि वैदिक लोग 360 दिनों, 12 महीनों से युक्त एक परिष्कृत प्रणाली को जानते थे और उसका अभ्यास करते थे, जो लगभग हजारों साल बाद आए कैलेंडर की ग्रेगोरियन प्रणाली के समान है। और आज भी इस्तेमाल किया जाता है।

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यहाँ एक और यजुर्वेद प्रार्थना है, जिसमें दिन और रात के निर्माण के लिए जिम्मेदार सूर्य, चंद्रमा, तारे जैसे अंतरतारकीय पिंडों की जयकार की गई है।

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यजुर्वेद के इस श्लोक (फोटो ऊपर, अनुवाद इसी लाइन में) में संसर्पा (अन्तरालीय मास) को आहुति, चन्द्रमा को आहुति, दीप्तिमानों को आहुति, मालिमलुका (अन्तरालीय मास) को आहुति, सूर्य को आहुति दी गई है।

तैत्तिरीय ब्राह्मण कैलेंडर की चंद्र प्रणाली के अनुसार 13 महीनों के नाम भी सूचीबद्ध (फोटो नीचे, अनुवाद फोटो के नीचे) करते हैं:

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अरुणा, अरुणराज, पुंडरिका, विश्वजीत, अभिजीत, आर्द्रा, पिन्वमन, अन्न-वन, रस-वन, इरावन, सरवौषध, सांभर और महास्वन।

तैत्तिरीय ब्राह्मणों द्वारा 24 अर्ध मास (पक्षों) के नामों का भी उल्लेख (फोटो नीचे, अनुवाद फोटो के नीचे) मिलता है:

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24 अर्धमाह (पक्ष) हैं – पवित्रा, पविस्यन, पूत, मेध्य, यसस, यशस्वन, आयुस, अमृत, जीव, जीविस्यन, सर्ग, लोक, सहस्वान, सहल्याण, ओजस्वन, सहमन, जयन, अभिजयन, सुद्रविना, द्रविनोदास, अर्द्रपवित्र, हरिकेश, मोद और प्रमोद।

शतपथ ब्राह्मणों द्वारा 354 दिनों के चंद्र वर्ष का भी उल्लेख (फोटो नीचे, अनुवाद फोटो के नीचे) है:

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शतपथ ब्राह्मणों के अनुसार, “निश्चय ही जो पूर्णिमा और अमावस्या का यज्ञ करते हैं, इसे पंद्रह साल तक निभाना चाहिए। लेकिन, इन पंद्रह वर्षों में तीन सौ साठ पूर्णिमा और अमावस्या होती है। और एक वर्ष में तीन सौ साठ रातें होती हैं और यही वह रातें हैं, जहाँ उसे कुछ न कुछ प्राप्त होता है।“ (10)

इसके अलावा, उसे फिर एक और पंद्रह साल के लिए यज्ञ करना चाहिए। इन पन्द्रह वर्षों में तीन सौ साठ पूर्णिमा और अमावस्या होती हैं और एक वर्ष में तीन सौ साठ दिन होते हैं। यही वे दिन हैं, जब वह कुछ न कुछ प्राप्त करता है। (11)

इस धरा पर जन्म लिए लेखकों ने अपनी महान रचना में 3,000 से अधिक छंदों का दस्तावेजीकरण किया है, जो पश्चिमी वैज्ञानिकों के सैकड़ों साल पहले भारतीयों की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हैं।

यह लेख मूल तौर पर अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं। लेख का अनुवाद ओम द्विवेदी ने किया है। कहीं-कहीं हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी में भी कंटेंट दिया गया है, ताकि समझने में आसानी हो।

बेसमेंट में ले जाकर आसिफ ने चार लोगों को डूबोकर मारा, चंगुल से भागे बड़े भाई ने 4 माह बाद किया खुलासा

पश्चिम बंगाल के मालदा में हुई एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या ने सबको झकझोर दिया है। पुलिस का मानना है कि ये कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि इसके संबंध आतंकवाद से जुड़े हो सकते हैं। कालियाचक के गुरुटोला गाँव में हुए इस हत्याकांड में आरोपित आसिफ मोहम्मद ने अपने माता, पिता, बहन और दादी को मौत के घाट उतारा और फिर उनका शव घर में ही दफना दिया। 

आसिफ के बड़े भाई आरिफ की शिकायत पर ये मामला घटना के 4 माह बाद सामने आया है। पुलिस ने आसिफ को गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ कर रही है। कहा जा रहा है कि आसिफ मोहम्मद फोटो खिंचवाने के बहाने अपने परिवार के सभी लोगों को मकान के तहखाने में लेकर गया और वहीं लकड़ी के ढाँचे में पानी में डुबोकर सभी की जान ले ली। पुलिस को आशंका है कि इस वारदात के पीछे संपत्ति से जुड़ा विवाद हो सकता है या इसके तार आतंकवाद से भी जुड़े हो सकते हैं। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले की छानबीन के दौरान आसिफ के दोस्त पकड़े गए हैं। इनकी पहचान साबिर अली और मोहम्मद मारुफ के तौर पर हुई है। पुलिस ने इनके पास से 5 पिस्तौल, 80 कारतूस, 10 मैग्जीन बरामद की हैं। कथित तौर पर ये हथियार आसिफ ने ही इन्हें एक हफ्ते पहले दिए थे।

मालदा ग्रामीण के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनीश सरकार ने बताया कि हालाँकि हत्याकांड में केवल आसिफ का हाथ था और अब तक दोस्तों के पास से बरामद हथियारों से इनका कोई संबंध नहीं मिला है, लेकिन पता लगाने की कोशिश हो रही है कि उसने ये हथियार कहाँ से इकट्ठा किए थे।

पड़ताल में आसिफ की आपराधिक प्रवृत्ति का भी खुलासा हुआ है। घटना से पूर्व उसने अपने ही अपहरण का षड्यंत्र रचकर अब्बा से 2 लाख की फिरौती ले ली थी। इसमें उसके दोस्तों ने उसका साथ दिया था। यह लोग साइबर अपराधों में भी लिप्त पाए गए हैं।

बता दें कि इस संबंध में आसिफ के बड़े भाई आरिफ ने पुलिस में शुक्रवार को शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने मकान के कमरे के भीतर खुदाई करके चारों शवों को निकाला और आसिफ को गिरफ्तार किया। मृतकों में आसिफ के अब्बा जावेद अली (50), अम्मी इरा बीबी (45), बहन आरिफा खातून (17) और दादी अलेकजान बीबी (75) थे।

पूरी घटना इसी साल 28 फरवरी को अंजाम दी गई थी। उस दिन आसिफ ने कोल्ड ड्रिंक में नींद की गोलियाँ मिलाकर इन लोगों को दे दीं, जिसे पीने के बाद सभी बेहोशी की हालत में पहुँच गए। इसके बाद वह फोटो खिंचवाने के बहाने उन सबको घर के भीतर बने तहखाने में ले गया और लकड़ी के ढाँचे के भीतर उन्हें जाने को कहा। इसके बाद उसने सबके मुँह पर टेप लगा दिया और हाथों को बाँध दिया। बाद में उसी ढाँचे में पानी भरकर उन्हें मारा और फिर सभी शवों को एक कमरे में दफना दिया।

आसिफ का बड़ा भाई आरिफ बताता है कि घटना वाले दिन वह किसी तरह आरिफ के चंगुल से भाग निकला था और 4 महीने ठिकाने बदल बदल कर रह रहा था। शुक्रवार को इस बाबत पुलिस थाने पहुँचकर उसने शिकायत दी। पुलिस ने जाँच की तो वाकई शव दफन मिले।

घटना वाले घर से पुलिस ने कई ई-उपकरण जब्त किए हैं। पुलिस ने आरिफ से भी क्रॉस सवाल किए लेकिन कुछ संदेहास्पद नहीं मिला। उसने बस यही जानकारी दी कि आसिफ उसकी हत्या भी करना चाहता था लेकिन वह चंगुल से भाग निकला।

उसके मुताबिक, आसिफ लगातार उसको धमका रहा था। इसीलिए उसने इस घटना का किसी को कुछ नहीं बताया, लेकिन जब सहन नहीं हुआ तो हिम्मत इकट्ठा कर पुलिस को घटना के बारे में सूचित किया। अब पुलिस आईपीसी की धारा 302 और हथियार कानून के तहत मामला दर्ज किया है। आगे की पूछताछ जारी है।

सिवान में मस्जिद के पीछे झोले में रखा बम फटने से पिता-पुत्र की हालत नाजुक, सगीर साई को तलाश रही बिहार पुलिस

लगता है कि बिहार में बम ब्लास्ट होना रोजमर्रा वाली और आम बात हो गई है। ताजा मामला बिहार के सिवान जिले का है, जहाँ के हुसैनगंज थाना क्षेत्र के जुड़कन गाँव में मस्जिद के पीछे जबरदस्त ब्लास्ट हुआ है। इस ब्लास्ट में पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए दोनों को पटना रेफर कर दिया गया है।

घायल जुड़कन निवासी विनोद माँझी और उसका तीन वर्षीय पुत्र सत्यम कुमार है। चिकित्सकों ने बताया कि विस्‍फोट के कारण विनोद का शरीर काफी जल गया था। उसकी स्थिति नाजुक थी।

परिजनों ने बताया कि विनोद माँझी अपने बेटे सत्यम को लेकर गाँव की दुकान पर बिस्किट खरीदने गए थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात सगीर साई नाम के व्यक्ति से हुई और उसने एक एक झोला दे दिया। सगीर ने किसी व्यक्ति का नाम लेते हुए कहा कि वह आएगा तो ये झोला उसे दे देना है। इसी बीच झोले में रखा बम ब्लास्ट हो गया।

हादसे के बाद सीवान पुलिस सगीर की तलाश में जुटी है ताकि यह पता चल सके कि सगीर बम कहाँ भेज रहा था। सीवान के एसपी अभिनव कुमार के मुताबिक, “वे बम कैसे थे और उसे कहाँ ले जा रहा था। पुलिस उसका आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है।”

रोती-बिलखती विनोद मांझी की माँ (तस्वीर: दैनिक भास्कर)

उन्होंने कहा, “पता चला है कि जिस व्यक्ति ने बम दिया था वह पटाखे का धंधा करता है। फिलहाल हम लोग जाँच कर रहे हैं और उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।”

मिली सूचना के मुताबिक, पुलिस सगीर के परिजनों में से तीन महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने ले गई है, ताकि सगीर के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि सगीर भी इस बम धमाके में घायल था, लेकिन उसे फिर किसी ने नहीं देखा।

अभी कुछ दिन पहले ही बांका और फिर दरभंगा में बम ब्‍लास्‍ट हुआ था। जिसमें काफी नुकसान हुआ था। अभी ये मामले ठंडे भी नहीं हुए कि इस तरह की यह तीसरी घटना हो गई। ऐसे में पुलिस भी चौकन्नी हाे गई है।

ट्विटर ने अब कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन PFI को दिया ‘ब्लू टिक’, जिसका सांप्रदायिक हिंसा, आतंकी फंडिंग का है इतिहास

एक विवादास्पद कदम उठाते हुए माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने कुख्यात कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के ट्विटर हैंडल को सत्यापित करते हुए ब्लू मार्क दे दिया है।

शनिवार को सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी ट्विटर इंक, जो भारतीय कानूनों की लड़ाई में पहले ही फँसी हुई है, ने सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस को बढ़ाते हुए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कर्नाटक इकाई के ट्विटर हैंडल को ‘सत्यापित’ करने का फैसला किया।

16 हजार से अधिक फॉलोवर वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की कर्नाटक इकाई के हैंडल को अब ट्विटर द्वारा ‘ब्लू टिक’ दे दिया गया है।

गौरतलब है कि कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर भारत में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने और देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़काने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

गौरतलब है कि मंगलवार (15 जून 2021) को आयकर विभाग ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का 80जी पंजीकरण रद्द कर दिया है। आयकर विभाग ने कहा कि यह इस्लामिक संगठन विभिनन्न समुदायों के बीच ‘सद्भावना’ और ‘भाईचारे’ को खत्म कर रहा है।

पिछले साल जनवरी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सीएए विरोधी दंगों के दौरान पीएफआई सदस्यों द्वारा की गई हिंसा के कारण पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। पीएफआई के सदस्यों को अक्सर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाया गया है, जिनमें सांप्रदायिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हत्या करना भी शामिल है।

वहीं, फरवरी में केरल के चेलारी में पीएफआई ने अपने स्थापना दिवस पर रैली निकाली थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। वीडियो में परेड के दौरान आरएसएस की वेश-भूषा वाले कुछ युवकों को जंजीरों से जकड़ा हुआ दिखाया गया था। इसके अलावा अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह जैसे इस्लामिक नारे लगाए जा रहे थे।

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पीएफआई का हिंसा फैलाने का इतिहास

पीएफआई का हिंसा फैलाने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान पीएफआई की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। साथ ही, पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा, पिछले साल नवंबर में कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगे और हिंसा उकसाने के आरोपित किसानों के सरकार विरोधी प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था। उसने प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। दिसंबर 2019 में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

नए IT कानून सोशल मीडिया यूजर्स को मजबूत करने के लिए: भारत के स्थाई मिशन ने UN में सभी सवालों के दिए जवाब

भारत सरकार द्वारा अधिनियमित सूचना प्रौद्योगिकी नियमों पर ह्यूमन राइट्स काउंसिल की स्पेशल प्रॉसीजर ब्रांच ने पिछले दिनों अपनी कुछ चिंता जाहिर करते हुए सवाल किए थे। इन्हीं सवालों का जवाब अब भारत के स्थाई मिशन ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सामने दिया है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने साफ किया है कि नए आईटी कानून सामान्य सोशल मीडिया यूजर्स को सशक्त करने के लिए बनाए गए हैं। इन्हें लंबे विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है।

मालूम हो कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से बताया है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने इस बाबत जवाब दिया। भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र को बताया है कि सोशल मीडिया पर पीड़ित व्यक्ति के पास शिकायत करने के लिए आधिकारिक फोरम होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज में सरकार ने कहा, “भारत का स्थाई मिशन यह भी सूचित करना चाहता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 2018 में कई व्यक्तियों, सिविल सोसाइटी, उद्योग संघ और संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया और तैयार करने के लिए सार्वजनिक टिप्पणियाँ आमंत्रित कीं ताकि नियम ड्राफ्ट किए जा सके। इसके बाद एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में प्राप्त टिप्पणियों पर विस्तार से चर्चा हुई और उसके बाद नियमों को अंतिम रूप दिया गया।”

बयान में आगे कहा गया है, “भारत का स्थाई मिशन यह भी बताना चाहेगा कि भारत की लोकतांत्रिक साख सर्वविदित है। भारतीय संविधान के तहत वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी दी गई है। स्वतंत्र न्यायपालिका और मजबूत मीडिया भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे का हिस्सा हैं।”

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार “नए आईटी रूल्स को लागू करना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत उपयोग की घटनाएँ बढ़ रही थी। इसमें लालच देकर आतंकियों की भर्ती, अश्लील सामग्री का प्रचार-प्रसार, अशांति फैलाना, ऑनलाइन फ्रॉड, हिंसा उकसाना, व्यवस्था बिगाड़ना आदि शामिल है।”

विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अन्य अनुप्रयोगों में चाइल्ड पोर्नोग्राफी और संबंधित सामग्री को खत्म करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश तैयार करने को कहा था। न्यायालय ने निर्देश दिया था कि ऐसे सामग्री संदेशों को भेजने वाले व्यक्तियों, संस्थानों और निकायों का पता लगाने के लिए उचित व्यवस्था तैयार करना अनिवार्य हो। ऐसे में बिचौलियों से इस तरह की जानकारी लेना जरूरी हो गया।

इसके अलावा भारतीय संसद ने बार-बार भारत सरकार से कानूनी ढाँचे को मजबूत करने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों के तहत जवाबदेह बनाने के लिए कहा था। माँग के अनुरूप एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में प्राप्त टिप्पणियों पर विस्तार से चर्चा की गई और उनके बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया गया।

मालूम हो कि नए आईटी नियमों को भारत सरकार ने 25 फरवरी को अधिसूचित किया था, और आवश्यक लोगों की नियुक्ति के लिए तीन महीने की अवधि दी गई थी। जिसके बाद ये नए आईटी नियम 26 मई 2021 से लागू हुए।

इन नियमों का जहाँ अधिकतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों ने बिना किसी सवाल के पालन किया। वहीं ट्विटर लगातार सरकार की नाफरमानी करता रहा जिसके चलते सरकार और ट्विटर के बीच अनबन हुई। ट्विटर ने भारत सरकार के सामने अकड़ दिखाते हुए ये तक कहा कि उनकी अपनी नीतियाँ भारत सरकार के कानून से ज्यादा जरूरी हैं। वहीं संसदीय कमेटी ने कहा कि देश का कानून सर्वोच्च हैं और कंपनी को इसे फॉलो करना ही होगा।

ट्रेन में चोरी करता था उम्मेद पहलवान, नेता बनने के चक्कर में लोनी कांड की साजिश: 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

गाजियाबाद के लोनी में बुजुर्ग की पिटाई के मामले में आरोपी उम्मेद पहलवान को गाजियाबाद कोर्ट ने 14 दिन की नायिका हिरासत में भेज दिया है। उम्मेद पहलवान को पुलिस ने डासना जेल भेजा है।

गाजियाबाद पुलिस के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने के बाद खुद को फँसता देख उम्मेद पहलवान बुजुर्ग अब्दुल समद से एफिडेविट तैयार कराने वाला था। अब्दुल समद से उम्मेद एफिडेविट में लिखवाना चाहता था कि ‘जय श्रीराम’ न कहने पर ही उसे पीटा गया और दाढ़ी काटी गई। उम्मेद चाहता था कि इससे यह साबित हो जाए कि जय श्रीराम विवाद के बाद ही वह फेसबुक लाइव किया था और वह जाँच में बच जाए।

गाजियाबाद के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में पहले तो उम्मेद ने गुमराह किया, लेकिन जब सिलसिलेवार तरीके से पूछताछ हुई तो उम्मेद ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद उम्मेद के खिलाफ कुछ धाराएं एफआईआर में और बढाई हैं। पुलिस के अनुसार, राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते उम्मेद ने यह सारा मामला रचा था। आपको बता दें कि गाजियाबाद में बुजुर्ग से मारपीट और दाढ़ी काटने के मामले में सभी 11 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

उम्मेद पहलवान ने कुबूल किया कि फेसबुक पर भड़काऊ लंबे वीडियो लाइव करने के पीछे उसका मकसद सियासी फायदा लेना था। वह खुद को लोनी में कट्टर धार्मिक नेता के रूप में स्थापित करना चाहता था और पालिका चेयरमैन या विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहता था। कट्टर छवि के जरिए वह वोटों का ध्रुवीकरण करने की सोच रहा था।

एसपी देहात डॉ. ईरज राजा ने उससे हुई पूछताछ के हवाले से बताया कि उसे इसकी जानकारी थी कि बुलंदशहर के अनूपशहर निवासी तांत्रिक अब्दुल समद की दाढ़ी लोनी निवासी प्रवेश गुर्जर ने इसलिए काटी, क्योंकि दोनों के बीच विवाद हो गया था। समद ने प्रवेश को ताबीज बनाकर दिया था। इसके बाद प्रवेश की परेशानियाँ और बढ़ गई। बकौल एसपी, उम्मेद ने बताया कि उसे लगा कि अगर इस घटना को सांप्रदायिक रंग मिल गया तो उसके लिए चेयरमैन के चुनाव की राह आसान हो जाएगी।

गौरतलब है कि लोनी बॉर्डर इलाके में उम्मेद पहलवान का काफी रुतबा था, इसीलिए उसने जानबूझकर लोनी बॉर्डर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया और घटनास्थल को लोनी बॉर्डर बताया, जबकि जाँच में पता चला कि बुजुर्ग की पिटाई की घटना प्रवेश के घर बंथला में हुई थी। उम्मेद बुजुर्ग के साथ मारपीट करने के एक आरोपित इंतजार का काफी करीबी है, जबकि उम्मेद पहलवान प्रवेश को नापंसद करता है।

बता दें कि उम्मेद पहलवान ने सबूत मिटाने के लिए अपने मोबाइल फोन की कई चैट्स डिलीट की हैं। गाजियाबाद पुलिस ने उम्मेद की चैट्स बरामद करने के लिए WhatsApp को लेटर लिखा है। इसके अलावा गाजियाबाद पुलिस IPDR के जरिए डिजिटल रिकॉर्ड भी हासिल करेगी।

बार-बार बदल रहा था अपनी जगह

गिरफ्तारी से बचने के लिए उम्मेद पहलवान बार-बार अपनी जगह बदल रहा था। उसे डर था कि पुलिस उसे गोली मारकर गिरफ्तार करेगी, इसी वजह से वह सरेंडर करने की फिराक में था। यह बात उसने कहा था कि एक जानकार ने उसे पुख्ता सूचना दी है कि यूपी पुलिस दो गोली मारकर उसे गिरफ्तार करेगी। पुलिस रास्ते में उसकी गाड़ी भी पलटवा सकती है। 

पुलिस के मुताबिक केस दर्ज होने से पहले उम्मेद बुलंदशहर गया था। गत बुधवार को जिस वक्त पुलिस उसके खिलाफ केस दर्ज कर रही थी, वह अनूपशहर से फेसबुक लाइव कर रहा था। पुलिस के पहुँचने से पहले ही उसने बुलंदशहर छोड़ दिया। बृहस्पतिवार को वह नोएडा सेक्टर-16 फिल्म सिटी में रुका। 

पुलिस के मुताबिक, उम्मेद को लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल में खुद का चेकअप कराने जाना था। सरेंडर करने से पहले उसकी योजना खुद को अस्पताल में भर्ती कराने की थी, लेकिन पुलिस को भनक लग गई और अस्पताल के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस से बचने के लिए उम्मेद घर से दस दिनों के खर्चे के पैसे लेकर गया था।

एसपी ग्रामीण ने बताया कि दिल्ली में एलएनजेपी अस्पताल के पास पुलिस जैसे ही उसकी कार की तरफ बढ़ी तो उसने विपरीत दिशा में कार दौड़ा दी। इस दौरान इंस्पेक्टर नागेंद्र चौबे सड़क पर गिरकर चोटिल हो गए। इसके बाद अन्य दो टीमों ने घेराबंदी की तो उम्मेद ने पैदल ही फरार होने की कोशिश की, लेकिन उसे पकड़ लिया गया।

उम्मेद ने किन्नर समेत तीन से किया निकाह

पुलिस के मुताबिक, आपराधिक जीवन की शुरुआत में उम्मेद अटैची चोरी करके चलती ट्रेन से कूद जाता था, इसीलिए वह उम्मेद कूदा के नाम से कुख्यात हो गया। उम्मेद के अब तक तीन निकाह करने की बात सामने आई है। इनमें एक निकाह किन्नर और दूसरा मुजफ्फरनगर दंगे के बाद एक विधवा से किया था

हालाँकि, किन्नर से किया निकाह चंद दिनों में टूट गया था। एसपी ग्रामीण का कहना है कि कुछ बातों को उम्मेद ने स्वीकार किया है तो कुछ को इनकार किया है। कुछ केसों में उसे क्लीन चिट मिल चुकी है।

इसके अलावा, पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान लोनी थाना क्षेत्र में पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्र के संभ्रांत लोगों के साथ बैठक की। इसमें कोरोना से बचाव के लिए लॉकडाउन का पालन करने व दो गज की दूरी रखने की अपील की गई थी, लेकिन इसी बैठक में उसने लोगों से गले मिलकर कोराना जैसी कोई बीमारी न होने का दावा किया था।

उम्मेद पर अब तक दर्ज मामले

  • -2006 में पिलखुआ थाने में जानलेवा हमले का केस दर्ज हुआ।
  • -2017 में लोनी बॉर्डर थाने में गोवध निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ।
  • -2018 में साहिबाबाद थाने में महिला से छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ। घटना की वीडियो वायरल हुई थी।
  • -2018 में लोनी बॉर्डर थाने में हत्या की कोशिश व बलवे का केस दर्ज हुआ।
  • -2021 में 16 जून को लोनी बॉर्डर थाने में धार्मिक भावना आहत करने का केस दर्ज हुआ।

PM मोदी के साथ जुड़ने से मिलेगा फायदा: शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने लिखा उद्धव ठाकरे को पत्र

महाराष्ट्र में उद्धव सरकार में चल रही खींचतान के बीच शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि यदि शिवसेना पीएम नरेंद्र मोदी से जुड़ती है तो फायदे में रहेगी। कथिततौर पर यह पत्र 10 दिन पुराना है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, प्रताप सरनाईक ने महाराष्ट्र सीएम उद्धव ठाकरे को पत्र में कहा- “NCP और कॉन्ग्रेस अपना खुद का सीएम चाहते हैं। कॉन्ग्रेस अकेले चुनाव लड़ना चाहती है और NCP शिवसेना से नेताओं को तोड़ने की कोशिश कर रही है। ऐसा लगता है कि NCP को केंद्र से परोक्ष समर्थन प्राप्त है, क्योंकि NCP नेताओं के पीछे कोई सेंट्रल एजेंसी नहीं लगी है।”

सरनाईक आगे  लिखते हैं, “हम आप पर और आपके प्रतिनिधित्व पर विश्वास करते हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस और NCP हमारी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। मेरा मानना है कि अगर आप पीएम मोदी के करीब आते हैं तो बेहतर होगा। अगर हम एक बार फिर साथ आ गए तो यह पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए फायदेमंद होगा।”

शिवसेना विधायक उद्धव ठाकरे से अपील करते हैं, “बिना किसी गलती के सेंट्रल एजेंसियाँ हमें निशाना बना रही हैं, अगर आप पीएम मोदी के करीब आते हैं तो रवींद्र वायकर, अनिल परब, प्रताप सरनाईक जैसे नेताओं और उनके परिवारों की पीड़ा समाप्त हो जाएगी। यह कार्यकर्ताओं की भावना है।”

गौरतलब है कि शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक फिलहाल ईडी के शिंकंजे में हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ महानगर पालिका चुनाव में गठबंधन हुआ तो उसका फायदा शिवसेना को होगा। सरनाईक का कहना है कि राज्य और केंद्र के संघर्ष के बीच वे पिस रहे हैं। सरनाईक ने उनके गायब होने के भाजपा के आरोपों को एक तरफ से खारिज करते हुए बताया की ईडी की कार्रवाई के बाद से अदालती प्रक्रिया शुरू है, वे उसी में व्यस्त हैं। इसको लेकर विरोधी बिना मतलब दुष्प्रचार कर रहे हैं। मालूम हो कि सरनाईक को लेकर भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया, ठाणे में भाजपा अध्यक्ष, विधायक निरंजन डावखरे के नेतृत्व में वर्तक थाने के करीब मानव शृंखला बनाई थी। इस दौरान उन्हें मिस्टर इंडिया कहा गया था। इसी पर उन्होंने अपना जवाब दिया।

बता दें कि महाराष्ट्र की सत्ताधारी ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार में फूट अब सतह पर आ गई है। इससे पहले कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा था कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ सकती है। शिवसेना के स्थापना दिवस पर पार्टी सुप्रीमो और राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो अकेले लड़ने का फैसला करेगा, जनता जूते-चप्पलों से उसकी पिटाई करेगी।

पार्टी के 55वें स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि कोरोना काल में हृदयविदारक स्थिति है और लोगों का रोजगार चला गया गया है, उनकी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। इसके बाद उन्होंने कहा कि इस परिस्थिति में कोई अकेले लड़ने की बात करेगा तो जनता उसे जूतों से मारेगी। उद्धव ने कहा कि वो सत्ता में बने रहने के लिए लाचार नहीं हैं। इस मौके पर उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की भी तारीफ़ की।

वो ब्राह्मण राजा, जिनका सिर कलम कर दिया गया: जिन मुस्लिमों को शरण दी, उन्होंने ही अरब से युद्ध में दिया धोखा

राजा दाहिर सिंध के अंतिम हिन्दू राजा थे, जिनके बाद वहाँ इस्लामी शासन शुरू हो गया। 711-12 CE में मात्र 17 साल के मुहम्मद कासिम के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, जिसे खलीफा ने एक विशाल सेना के साथ भेजा था। राजा दाहिर ने अरब से आई फौज को रोकने की भरसक कोशिश की, लेकिन उनकी सेना सीमित थी, इसीलिए उन्हें क्रूर अरबों के हाथों हार मिली। तब भारतीय शासक इस्लामी आक्रांताओं की क्रूरता और छल-प्रपंच वाले युद्ध से भी परिचित नहीं थे।

उनके पिता का नाम चच था, जिन्हें ‘अलोर का चच’ भी कहा जाता है। उन्हें अपने चाचा चंदर से राजगद्दी मिली थी। सिंध आज भी एक रेगिस्तानी क्षेत्र है। राजा दाहिर पर जब मुहम्मद बिन कासिम ने आक्रमण किया, तब उनके पास विकल्प था कि वो पड़ोस में किसी राजा के यहाँ सुरक्षित भाग जाएँ, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा था कि वो एक खुले युद्ध में अरब की फौज से मिलने जा रहे हैं और अपनी तरफ से वो अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश करेंगे।

दाहिर ने कहा था, “अगर मैं जीत जाता हूँ तो मेरा साम्राज्य मजबूत हो जाएगा। लेकिन, अगर मैं युद्धभूमि में सम्मान के साथ मौत को गले लगाता हूँ तो ये घटना अरब के इतिहास में अंकित हो जाएगी और देश-विदेश के बड़े-बड़े लोग भारत के बारे में बात करेंगे। लोग कहेंगे कि राष्ट्र के लिए राजा दाहिर ने दुश्मन से लड़ते हुए अपने जीवन का बलिदान कर दिया।” राजा दाहिर दूरदर्शी थे, लेकिन उन्हें पड़ोसी राजाओं का सहयोग न मिला।

जब उनके वजीर ने उन्हें सलाह दी थी कि किसी मित्र राजा के यहाँ शरण ले लें, तो उन्होंने उन राजाओं के पास ये संदेश भिजवाया था, “आपलोगों को पता होना चाहिए कि अरब और आपके बीच मैं एक दीवार हूँ। अगर मैं गिरता हूँ तो अरब की फौज के हाथों आपकी तबाही को कोई नहीं रोक पाएगा।” जब उनके वजीर ने उन्हें कम से कम अपने परिवार को सुरक्षित कहीं पहुँचाने का निवेदन किया, तो उन्होंने कहा कि जब उनके ठाकुरों और सरदारों के परिवार यहाँ हैं, वो अपने परिवार को ही केवल कहीं और कैसे भेज सकते हैं?

राजा दाहिर के बारे में मुस्लिम शासक भी मानते थे कि वो वीर और निडर थे। उनके बारे में एक कहानी है कि जब एक बाघ ने हमला किया था तो उन्होंने अपने हाथ पर कपड़ा बाँध कर बाघ के मुँह में घुसा दिया था और उसे मार डाला था। राजा दाहिर ने 40 साल (c. 668 – 712 AD) सिंध पर राज किया था। इस दौरान उनके इलाकों में कानून का राज था और लुटेरे खदेड़ दिए गए थे। अरब फौज ने 635 AD में ही पर्सिया पर कब्ज़ा कर लिया था, लेकिन राजा दाहिर की एकमात्र यही कमजोरी थी कि वो इस खतरे को तुरंत भाँप नहीं पाए।

राजा दाहिर जहाँ अरब से दोस्ताना सम्बन्ध रखना चाहते थे, अरब को उस समय के किसी भी राजा के साथ दोस्ती पसंद नहीं थी और उनका एक ही लक्ष्य था – साम्राज्य विस्तार। राजा दाहिर ने अरब के कलाकारों को अपने दरबार में जगह दी और वो अरब की युद्धनीति को पसंद करते थे। उमय्यद खलीफाओं के अल्लाफी दुश्मनों ने राजा दाहिर के दरबार में शरण ली। क्रूर हज्जाज-बिन-युसूफ तब अरब का गवर्नर था।

जिन लोगों ने राजा दाहिर के यहाँ शरण ली थी, उनके किसी रिश्तेदार का उसने सिर कलम करवा दिया था। उसकी चमड़ी उधेड़ दी गई थी। बदला लेने के इरादे से ये लोग वहाँ से भागे थे। इतिहासकार मानते हैं कि अरब और राजा दाहिर के बीच दुश्मनी 8 जहाजों के लूटे जाने के बाद शुरू हुई। श्रीलंका में कुछ अरब के व्यापारियों की मौत हो गई थी और इसका फायदा श्रीलंका के राजा ने अरब की कृपा प्राप्त करने के लिए उठाया।

श्रीलंका से उन अरब व्यापारियों की विधवाओं, बेटियों और अन्य परिजनों को जहाज से अरब भेजा गया। साथ ही काफी कीमती गिफ्ट भी भेजे गए। मौसम खराब रहने के कारण कराची के पास स्थित देबल बंदरगाह पर उन जहाजों को रुकना पड़ा, जहाँ लुटेरों ने सब कुछ लूट लिया। हज्जाज को जब ये पता चला कि उसने दाहिर को बंधकों को छोड़ने और धन लौटाने को कहा। दाहिर ने जवाब दिया कि वो बाहर के लुटेरे थे, जिन पर उसका कोई वश नहीं।

इस कहानी के कई वर्जन हैं। लेकिन, कहा जाता है कि दाहिर के ही देश में कई ऐसे लोग थे जिन्होंने उनके साथ गद्दारी की थी। जिन अल्लाफी भाइयों को राजा दाहिर ने शरण दी थी, अब उनकी जिम्मेदारी थी कि वो अरब के भेद बता कर सिंध की सेना की मदद करें। राजा दाहिर ने जब कई दिनों तक शरण देने की एवज में उनसे मदद माँगी, तो उन्होंने कहा, “हम आपके आभारी हैं, लेकिन हम इस्लाम की फौज के खिलाफ तलवार नहीं उठा सकते।”

इसके बाद उन लोगों ने दरबार से जाने की इजाजत माँगी और राजा दाहिर ने उन्हें सिंध से बाहर भेज दिया। राजा दाहिर की सेना के साथ मुहम्मद बिन कासिम का युद्ध हुआ, जिसे हम करोड़ अरोड़कोट का युद्ध कहते हैं। जैसा कि इस्लामी प्रचलन था, राजा दाहिर के धड़ से सिर को अलग कर दिया गया और उसे हज्जाज के पास भेजा गया। राजघराने की कई महिलाओं ने जौहर किया। बाकी महिलाओं को पकड़ कर दास बना दिया गया और उनकी खरीद-बिक्री की गई।

आज राजा दाहिर से सिंध के लोग ही नफरत करते हैं और मुहम्मद बिन कासिम को नायक मानते हैं। चूँकि अब वहाँ इस्लामी मुल्क पाकिस्तान स्थित है और मुस्लिमों की जनसंख्या ज्यादा है, राजा दाहिर की मूर्तियों को ध्वस्त भी कर दिया जाता है। उनके लिए राजा दाहिर विलेन हैं और आक्रांता मुहम्मद बिन कासिम देवता। वो मुहम्मद बिन कासिम, जिसने सिंध की कई महिलाओं का बलात्कार किया। उसकी जीत के बाद सिंध में मंदिरों को ध्वस्त कर उनकी जगह मस्जिदें खड़ी की गईं।

कहते हैं, शक्तिशाली राजा हर्षवर्धन ने अपने काल में अरब आक्रमणों (642-43 CE) में अरब दुश्मनों का दमन करने की कोशिश नहीं की, जिससे उनका मनोबल बढ़ता गया। सिंध के तो लोग भी अमीर नहीं थे, वहाँ की जमीन उतनी उपजाऊ नहीं थी और देबल के मंदिर के पास उतना अकूत धन नहीं था, फिर भी वहाँ इस्लामी आक्रमण हुआ। मुहम्मद बिन कासिम ने देबल का मंदिर गिरा दिया और वहाँ खलीफा के नाम का खुतबा पढ़ा गया।

मुहम्मद बिन कासिम के आक्रमण को आप भारतीय उप-महाद्वीप में प्रथम इस्लामी कत्लेआम भी कह सकते हैं। चचनामा ने इस युद्ध के बारे में कहा है कि ऐसा पहले कभी देखा-सुना नहीं गया था। साथ ही इसे एक ‘साहसी युद्ध’ बताया गया है। लेकिन, यहाँ मुस्लिमों को अलग नीति अपनानी पड़ी और उन्हें हिन्दू ‘काफिरों’ को सुविधाएँ देकर बहलाना-फुसलाना पड़ा, ताकि भारत पर उनके कब्जे का मंसूबा आगे बढ़े।

एक कहानी ये भी है कि कैसे खलीफा से झूठ बोल कर राजा दाहिर की बेटियों ने मुहम्मद बिन कासिम का अंत करवाया। खलीफा इस बात से नाराज था कि मुहम्मद बिन कासिम ने सूर्यदेवी के ‘सतीत्व’ को भंग कर दिया है, जबकि ऐसा करने का अधिकार सिर्फ उसे, यानी खलीफा को ही था। चचनामा के अनुसार, सूर्यदेवी ने अपने पिता राजा दाहिर की हत्या का बदला लेने के लिए खलीफा से झूठ बोला था और इसका पता चलते ही खलीफा ने दोनों बहनों को घोड़े की पूछ से बाँधकर तब तक घसीटे जाने की आज्ञा दी, जब तक उनकी मौत न हो जाए।

दिल्ली: गंदे पानी की वजह से मायके भाग गई पत्नी, जल बोर्ड के खिलाफ पुलिस के पास पहुँचा दलित युवक

राजधानी दिल्ली के ख्याल इलाके के लोग जल बोर्ड के अधिकारियों से खफा हैं। एक व्यक्ति ने दिल्ली पुलिस से फोन कर मदद माँगी है और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निवेदन किया है। युवक ने बताया की गंदे पानी की समस्या के कारण उसकी पत्नी उसे छोड़ कर भाग गई है और अब वापस ही नहीं आ रही है। इलाके में लंबे समय से दिल्ली जल बॉर्ड गंदे पानी की सप्लाई करता है, जिससे उसकी पत्नी परेशान थी।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी है कि पीड़ित युवक अपने परिवार के साथ ख्याला गाँव की ही एक हरिजन बस्ती में रहता है। शनिवार (जून 19, 2021) की शाम को पीड़ित ने पुलिस को फोन किया और बताया कि दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारियों ने उसके घर का पानी का कनेक्शन काट दिया है, जिसके चलते उनके घर में पानी नहीं आ रहा है। कभी-कभार पानी आता भी है तो बेहद गंदा।

युवक ने बताया कि इस कारण वो लंबे समय से परेशान चल रहा है। मायके गई पत्नी ने ससुराल लौटने से साफ़ इनकार कर दिया है और वो कह रही है कि जब तक साफ़ पानी नहीं आएगा, वो वापस नहीं आएगी। युवक ने दिल्ली पुलिस से निवेदन किया है कि वो उसके घर के पानी का कनेक्शन जुड़वा दे और दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों पर भी कार्रवाई करे, ताकि उसकी पत्नी वापस आ जाए और दोनों साथ रह सकें।

अब जब गर्मी बढ़ती जा रही है, ऐसे में राजधानी के कई क्षेत्रों में गंदे पानी से लोग परेशान हैं। संगम विहार और ओखला जैसे इलाकों में लोग गंदे पानी और पानी की कमी की वजह से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि टैंकर आने तक वो लोग प्यासे बैठे रहते हैं। उनका पूछना है कि उनकी कमाई पानी की व्यवस्था में ही खप जाएगी तो वो खाएँगे क्या? ओखला फेज-2 में पहले आधे घंटे पानी आता था, अब बमुश्किल रोज सिर्फ 20 मिनट पानी मिल रहा है।

पिछले 3 सप्ताह से वहाँ ये समस्या बदस्तूर जारी है। ANI ने भी अपनी खबर में बताया कि ओखला फेज-2 में पानी की कमी की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। एक व्यक्ति ने बताया, “पहले पानी आधा घंटा आता था लेकिन अब पानी सिर्फ 20 मिनट आ रहा है। टैंकर यहाँ शाम को आता है। मैं सरकार से कहना चाहता हूँ कि पानी सुबह और शाम आधे घंटे दिया जाए ताकि पानी की कमी खत्म हो।”