17 वर्षों तक दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के प्रबंध निदेशक रहे ई श्रीधरन भारतीय जनता पार्टी में में शामिल हो गए हैं। देश के हालिया मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने ‘लव जिहाद’ का भी जिक्र किया है। ‘मेट्रो मैन’ ने कहा कि वो ‘लव जिहाद’ वाली विचारधारा के खिलाफ रहे हैं क्योंकि उन्होंने देखा है कि केरल में हिन्दू लड़कियों को इसके जाल में फाँसा जाता है। उन्होंने कहा कि वो भाजपा को केरल में सत्ता में आने में मदद करेंगे और मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने के लिए भी तैयार हैं।
दिल्ली मेट्रो के जनक माने जाने वाले ई श्रीधरन ने कहा, “हाँ, मैं देख रहा हूँ कि केरल में क्या हो रहा है। हिंदुओं को शादी के लिए फँसाया जाता है और अंत में उन्हें भुगतना पड़ता है। मुस्लिम और ईसाई लड़कियों के साथ भी ऐसा होता है। मैं इन चीजों का विरोधी हूँ।” श्रीधरन ने कहा कि वो व्यक्तिगत रूप से शाकाहारी हैं और अंडे तक नहीं खाते, और उन्हें माँस खाने वाले पसंद भी नहीं। बीफ खाने के सवाल पर उन्होंने ऐसा कहा।
NDTV से बात करते हुए 88 वर्षीय ‘मेट्रो मैन’ ने कहा कि वो जीवन भर प्रोफेशनल जिम्मेदारियाँ निभाते रहे हैं, लेकिन अब समाज और केरल के लिए राजनीति से जुड़ कर कुछ करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केरल में पिछले 20 वर्षों में कोई इंडस्ट्री नहीं आई। भ्रष्टाचार और स्कैंडलों की बात करते हुए उन्होंने केरल सरकार पर केंद्र से लड़ते रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा में राष्ट्र से प्यार करने वाले मेहनती लोग हैं।
उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित रहे हैं लेकिन पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के साथ भी उनके अच्छे संबंध थे और उन्होंने ही दिल्ली मेट्रो का पहला सेक्शन खुलवाया था। उन्होंने बताया कि वाजपेयी ने दिल्ली मेट्रो का पहला टिकट खुद खरीदा था। भाजपा नेता ने भाजपा के सांप्रदायिक पार्टी होने की बात से स्पष्ट मना किया।
Deep respects for E Sreedharan for saying this. Doesn’t matter what name you give to the phenomenon – of Hindu girls tricked into relationship for purposes of conversion or humiliation – it’s acknowledgement is the least that’s expected from responsible citizens https://t.co/QEgKnbrC1A
ई श्रीधरन ने तीनों कृषि कानूनों का भी समर्थन किया और साथ ही स्पष्ट किया कि देश में कोई असहिष्णुता नहीं है। तीनों कानूनों के विरोध में पिछले 100 दिनों से भी अधिक समय से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई विदेशी व्यवस्था भारत को बदनाम करने का प्रयास करे तो उसे नियंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार कि बातों से इत्तिफ़ाक़ नहीं रखते, वही असहिष्णुता के आरोप लगा देते हैं।
श्रीधरन ने बताया कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने उनके साथ राज्य में कई प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को ईमानदार, भ्रष्टाचार-मुक्त, प्रतिबद्ध, मेहनती, दूरदर्शी और देशहित में संलग्न नेता बताया। उन्होंने कहा कि आजकल फैशन हो गया है कि सरकार कुछ भी करे तो उसका विरोध करो। उन्होंने ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ छीने जाने के आरोपों को भी गलत बताया।
उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार ने प्रदेश के सरकारी विभागों में रिक्त पद भरने के लिए नई भर्तियों के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। ये पद लगभग 50 हजार के करीब हैं व इन पर नियुक्ति उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा की जाएगी। इसके लिए आयोग द्विस्तरीय परीक्षा प्रणाली के तहत प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) कराएगा।
विभिन्न सरकारी विभागों के इन रिक्त पदों को भरने के लिए की जा रही तैयारी के बाबत प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि तमाम विभागों के रिक्त पदों को भरने के लिए आयोग की योजना तैयार हो गई है। साथ ही प्रदेश सरकार को भी इस संबंध में जानकारी दे दी गई है। जिसके बाद सीएम मे इन सीटों को पारदर्शिता के साथ भरने का आदेश दिया है।
बता दें कि आयोग ने पिछले दिनों इस संबंध में परीक्षा प्रणाली का खाका तैयार करके उसी प्रेजेंटेशन सीएम योगी के समक्ष पेश की थी। उसके बाद अब आयोग ने सरकारी विभागों के रिक्त पदों को भरने के लिए आयोग द्विस्तरीय परीक्षा प्रणाली के तहत प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) कराने की तैयारी शुरु की है।
इस परीक्षा में सफल होने वालों को शॉर्ट लिस्ट किया जाएगा। फिर उन्हें मेन्स में बैठने का मौका मिलेगा। जब परीक्षार्थी उसमें भी सफल हो जाएगा तो अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, परिवार कल्याण विभाग में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के 9212 पदों, राजस्व परिषद में राजस्व लेखपाल के 7882 पदों, कृषि निदेशालय में प्राविधिक सहायक-ग्रुप -सी के 1817 पदों, राजस्व परिषद में कनिष्ठ सहायक के 1137 पदों, आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षक विभाग में सहायक लेखाकार के 1068 पदों, गन्ना एवं चीनी विभाग में गन्ना पर्यवेक्षक के 874 पदों, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग में प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ के 700 पदों , वन विभाग में वन रक्षक के 694 पदों, प्रशिक्षण एवं सेवा योजना विभाग में अनुदेशक के 622 पदों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में एक्सरे प्राविधिज्ञ के 456 पदों पर भर्ती करने के लिए कार्यवाही शुरु की गई है।
इस नियुक्ति प्रक्रिया में सबसे पहली परीक्षा दो घंटे की होगी। इसमें 100 प्रश्न पूछे जाएँगे। प्रत्येक गलत जवाब में नेगेटिव मार्किंग है। पहला रिजल्ट परसेंटाइल पर आएगा। इन पदों पर स्नातक किए छात्र को भी मौका मिलेगा और प्रोफेशनल कोर्सेज और इंटरमीडिएट समेत तकनीकी योग्यता रखने वालों को भी। इसके लिए आयोग अलग-अलग विभागों से आए भर्ती प्रस्तावों को योग्यता के आधार पर अलग करेगा। मुख्य परीक्षा में चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्तियां विभिन्न विभागों में की जाएँगी।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के असोहा में बुधवार (फरवरी 17, 2021) को खेत में दो लड़कियों का शव और एक लड़की के गंभीर हालत में मिलने से सनसनी फैल गई। विपक्षी दलों ने मौका देख योगी सरकार पर निशाना साधा, लेकिन पड़ताल में पता चला कि पूरा मामला एक तरफा प्रेम का था।
हालिया जानकारी के मुताबिक लखनऊ आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह ने इस मामले में खुलासा करते हुए बताया कि लड़कियों की कीटनाशक पिलाकर हत्या करने की कोशिश हुई। इस बात को आरोपित विनय ने स्वयं स्वीकार किया है।
#UPDATE | Police have arrested one Vinay and a minor in connection with the death of two girls in Baburaha village in Unnao district: Uttar Pradesh Police https://t.co/KasoPyNLC6
पूछताछ के दौरान विनय ने पुलिस को बताया कि वह तीनों में से एक लड़की से एकतरफा प्यार करता था। लड़की के इंकार करने पर उसने पानी की बोतल में कीटनाशक मिलाकर उसे पिलाया। लेकिन वह पानी अन्य दोनों लड़कियों ने भी पी लिया। जिससे उनकी मौत हो गई। तीनों लड़कियाँ दोनों आरोपित लड़कों को जानती थीं। आरोपितों ने उन्हें गेहूँ में रखने वाली कीटनाशक पिलाई थी। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अस्पताल में भर्ती किशोरी से पड़ोस के गाँव का विनय कुमार प्यार करने लगा था। लेकिन कई बार प्रपोज करने पर जब लड़की नहीं मानी तो उसने कीटनाशक मिलाकर उसे पानी पीने को दे दिया। इससे पहले उसने लड़की को नमकीन खिलाई थी, जिसका पैकेट पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ। जिसे उन्होंने घटनास्थल से पाया और उसे फॉरेंसिक टीम को जाँच के लिए भेजा।
दरअसल, इसी पैकेट को सूँघने के बाद खोजी कुत्ता बार-बार एक दुकान की ओर बढ़ रहा था, जहाँ से वह चिप्स खरीदी गईं। जब पुलिस उस दुकान पर जाँच के लिए गई तो एक नया एंगल सामने आया। दुकानदार ने बताया कि घटना से पहले लड़कियाँ उसकी दुकान से नमकीन खरीदने आईं थी।
इसी बिंदु पर आगे जाँच करते हुए विनय के बारे में भी पता चला। पूछताछ में उसने बताया कि वह प्यार करता था उससे बात करने के लिए फोन नंबर माँग रहा था। लड़की के कई बार मना करने पर यह बात उसे बर्दाशत नहीं हुई और उसने गुस्से में ये कदम उठाया। गौरतलब है कि असोहा के इस केस में दो लड़कियों की मृत्यु हो गई है, वहीं एक की हालत अस्पताल में नाजुक बनी हुई है। एक लड़की के पिता ने घटना के 18 घंटे बाद असोहा थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के पर्सविरन्स रोवर ने गुरुवार (फरवरी 18, 2021) को मंगल ग्रह की सतह पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की। तय समय के दौरान इस रोवर ने कम से कम 472 मिलियन किमी का सफर तय किया, वो भी 19000 किमी प्रति घंटा की स्पीड से। जब रोवर ने मंगल ग्रह की सतह पर लैंडिग की तब एक भारत से जुड़ी आवाज ने इसकी हर जानकारी दी।
ये आवाज भारतीय-अमेरिकन वैज्ञानिक स्वाति मोहन की थी। उन्होंने बताया, “मैंने ऑपरेशन के दौरान मंगल 2020 का एटिट्यूड कंट्रोल सिस्टम का नेतृत्व किया, और पूरे डेवलपमेंट तक लीड सिस्टम इंजीनियर रही। एटिट्यूड कंट्रोल सिस्टम उस व्हेकिल को देखता है जहाँ उसे होना चाहिए और यह भी पता लगाने में मदद करता है कि अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में कहाँ जा रहा है।”
“The spacecraft @NASAPersevere is currently transmitting heartbeat tones — these tones indicate that Perseverance is operating normally.”
नासा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, स्वाति मोहन का परिवार संयुक्त राज्य अमेरिका में तब गया था जब वह सिर्फ एक साल की थीं। उन्होंने 2000 में मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के लिए कॉर्नेल विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने से पहले उत्तरी वर्जीनिया/वाशिंगटन डीसी मेट्रो क्षेत्र में अपना बचपन बिताया।
अपने ग्रेजुएशन के बाद, स्वाति मोहन ने 2010 में एयरोस्पेस, एरोनॉटिकल और एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग में Massachusetts Institute of Technology (एमआईटी) से एमएस और पीएचडी पूरी की।
Linkedin प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट
जानकारी के अनुसार नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में 2004 और 2005 के बीच सिस्टम इंजीनियर के रूप में काम करते हुए स्वाति मोहन ने 2005 में MIT में पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला लिया था। अपनी पीएचडी पूरी होने के बाद, वह एक गाइडेंस नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम इंजीनियर के रूप में फिर से नासा में शामिल हो गईं। उन्होंने कैसिनी मिशन और GRAIL के ऊपर काम किया है। उसके बाद 2013 से वह MARS प्रोजेक्ट पर हैं।
Linkedin प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट
बताया जाता है कि स्वाति शुरू में बाल रोग विशेषज्ञ बनना चाहती थीं, लेकिन अंत में वह नासा पहुँच गईं। इसके बारे में उन्होंने बताया, “मुझे अंतरिक्ष में हमेशा दिलचस्पी थी, लेकिन मुझे उस रुचि को नौकरी में बदलने के अवसरों के बारे में वास्तव में नहीं पता था। जब मैं 16 साल की थी, तब मैंने अपनी पहली फिजिक्स की क्लास ली। मैं भाग्यशाली थी कि मेरे पास एक महान शिक्षक थे, और सब कुछ समझना इतना आसान था। तभी मैंने वास्तव में इंजीनियरिंग को अंतरिक्ष तक पहुँचने का रास्ता माना था।”
अपनी यात्रा के बारे में बात करते हुए, वह कहती हैं, “मुझे याद है 9 साल की उम्र में मैंने ‘स्टार ट्रेक’ को पहली बार देखा। जहाँ अंतरिक्ष के सुंदर चित्रण वाले क्षेत्रों को खंगाला जा रहा था।” वह कहती हैं कि उन्हें याद है कि उन्होंने उस समय सोचा कि वह भी ऐसा करना चाहती हैं, वह भी ब्रह्माण के नए सुदर क्षेत्रों को खोजना चाहती हैं।
वह कहती है कि अंतरिक्ष इतना व्यापक है कि अभी हमने बस सीखना ही शुरू किया है। उनके अनुसार वह गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सबसिस्टम व अन्य मंगल परियोजना के बीच कम्युनिकेशन के दौरान प्रमुख बिंदु थीं। इसके अलावा टीम को प्रशिक्षित करने, GN&C टीम के लिए नीतियों और प्रक्रियाओं को पूरा करने और मिशन नियंत्रण स्टाफिंग को शेड्यूल करने में भी शामिल है।
वह कहती हैं, “GN & C सबसिस्टम अंतरिक्ष यान की ‘आँख और कान’ है … मंगल पर प्रवेश, अवरोहण और लैंडिंग के दौरान, GN & C अंतरिक्ष यान की स्थिति निर्धारित करता है और लैंडिंग को सुरक्षित रूप से करने के लिए आदेश देता है।”
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रिंकू शर्मा की हत्या ने पिछले दिनों पूरे देश को झकझोर दिया। हर ओर से इस घटना के बाद इंसाफ की माँग उठी। ऐसे में कुछ लोग वह भी रहे जिन्होंने इंसाफ की माँग उठाने के साथ साथ रिंकू शर्मा के परिवार की आर्थिक सहायता करने का बीड़ा उठाया। भाजपा नेता कपिल मिश्रा उन्हीं लोगों में शामिल थे, जो अब तक परिवार के पास 50 लाख रुपए भिजवा चुके हैं।
आज भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी दी कि रिंकू शर्मा की माँ के अकॉउंट में ₹50 लाख उनकी ओर से जा चुके हैं। इसके अलावा मनीष मुंद्रा ने भी रिंकू के पिताजी के अकॉउंट में 7 लाख 50 हजार रुपए भेजे हैं। यानी कुल सहायता 57 लाख 50 रुपए की हो चुकी है। कपिल मिश्रा का दावा है कि 26 फरवरी तक 1 करोड़ रुपए परिवार के खाते में ट्रांसफर हो जाएँगे।
गौरतलब है कि इससे पहले भाजपा नेता पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर गए थे। वहाँ उन्होंने इस हत्या को आतंकी घटना करार दिया था। साथ ही कहा था कि कुछ राम, मन्दिर, जय श्री राम के खिलाफ नफरत भर रहे हैं। हम मिलकर परिवार को एक करोड़ रुपए की सहायता दे रहे हैं।
रिंकू शर्मा जी की माता जी के एकाउंट में 50 लाख रुपये जा चुके है@ManMundra जी ने भी पिताजी के बैंक खाते में 7 लाख 50 रुपये भी भेज दिए है
कुल 57 लाख 50 हजार रुपये अभी तक
26 फरवरी तक पूरे एक करोड़ रुपये परिवार के खाते में ट्रांसफर हो जाएंगे
कपिल मिश्रा ने इस दौरान हत्या को जिहाद कहते हुए बयान दिया था कि निशाना लगाकर बेटे को मारा गया है, उसे चुन कर मारा गया है जो सबसे ज्यादा जोश और उत्साह के साथ धर्म का काम करता था, उसको उसके घर में घुस कर मारा गया। फिर चैन नहीं पड़ा तो अस्पाल में जाकर दोबारा मारा गया।
उनके अनुसार इसको कोई साधारण आपराधिक घटना नहीं माना जा सकता। इसको वैसे ही समझना पड़ेगा जैसे किसी आतंकी घटना को समझा जाता है। मारने वालों को तो फाँसी होनी ही चाहिए और मारने वालों के पीछे वो कौन लोग थे जिन्होंने उनके दिमाग में ऐसा जहर भरा, जिन्होंने उनके दिमाग में ऐसी नफरत भरी कि कोई तो चंदा माँगने आए राम मंदिर का तो उसको भी निशाना बनाकर मारा जाए, उस मास्टरमाइंड को भी पकड़ा जाना जरूरी है।
उन्होंने माँग की थी कि इस घटना की जाँच सामान्य आपराधिक घटना की तरह न हो, बल्कि आतंकी हमले की तरह हो। इसी दौरान उन्होंने ये भी बताया था कि वह लोग परिवार को 1 करोड़ रुपया आर्थिक मदद के तौर पर दे रहे हैं और उसे परिवार के बैंक खाते में ट्रांस्फर करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं।
रिंकू शर्मा जी की हत्या आतंकी घटना है,
कुछ लोग जानबूझकर राम, मन्दिर, जय श्री राम के खिलाफ नफरत भर रहे हैं
गलवान घाटी में 15 जून 2020 की रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई, क्योंकि चीन ने पूर्वी लद्दाख में यथास्थिति को बदलने की कोशिश करते हुए गलवान घाटी में घुसपैठ की थी। इस हिंसक झड़प में जहाँ 20 भारतीय सैनिक बलिदान हुए, वहीं हमारे सैनिकों ने चीन को खदेड़ते हुए उनके 43 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।
हिंसक झड़प के बाद चीन ने अपने सैनिकों के हताहत होने का कोई आँकड़ा जारी नहीं किया था। इसके अलावा मामले में सामने आई रिपोर्टों का भी खंडन किया था। हालाँकि, अब खबर सामने आई है कि चीन ने बाद में झड़प में मारे गए 4 सैनिकों के परिवारों को सम्मानित किया है।
चीन की स्टेट मीडिया पीपुल्स डेली ने आज बताया कि चार चीनी सैनिक, जोकि पिछले साल जून में भारत मे हुए हिंसक झड़प के दौरान शहीद हुए थे, उन्हें मरणोपरांत मानद उपाधियों और प्रथम श्रेणी के योग्यता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। एक कर्नल, जिन्होंने उनका नेतृत्व किया और गंभीर रूप से घायल हो गए, उन्हें भी मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ने पीएलए शिनजियांग मिलिट्री कमांड के रेजिमेंटल कमांडर, Qi Fabao को सीमा की रक्षा के लिए वीर रेजिमेंटल कमांडर का टाइटल, चेन होंगज़ुन को बॉर्डर की रक्षा करने के लिए हीरो और चेन जियानग्रोंग, जिओ सियुआन और वांग ज़ुओरन को प्रथम श्रेणी की योग्यता से सम्मानित किया गया है।
गौरतलब है कि यह पहली बार है जब चीन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि भारत के साथ गलवान हुए टकराव के दौरान उनके सैनिक भी हताहत हुए थे। दुनिया के सामने सच को नकारने वाले चीन ने केवल चार ही सैनिकों को लेकर सूचना दी है, हालाँकि, यह बात किसी से छुपी नहीं है कि इस झड़प में 43 से ज्यादा चीनी सैनिक हताहत हुए थे।
बता दें, चीन की तरफ से आधिकारिक नाम आने से पहले चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वीबो पर अगस्त 2020 में, झड़प में मारे गए चेन सियानग्रोंग (Chen Xiangrong) के एक चीनी सैनिक की एक मकबरे की तस्वीर वायरल हुई थी।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के एक चीनी विशेषज्ञ एम टेलर फेयलर के अनुसार, गलवान घाटी में एक चीनी सैनिक की कब्र का चित्र चीन में एक सैन्य मंच पर साझा किया गया था, जिसमें मारे गए सैनिक के बारे में बताया गया था, उसकी पहचान चीनी सैनिक चेन सियानग्रोंग के रूप में हुई थी।
उल्लेखनीय है कि चीन द्वारा सम्मानित किए गए 4 सैनिकों में से एक चेन सियानग्रोंग भी है, जिसका उल्लेख मकबरे के एपिटाफ में किया गया था। और उसकी एक तस्वीर अगस्त 2020 में वायरल हो गई थी।
वहीं अब चीन के मारे गए सैनिकों को सम्मानित करने और उनके नाम सार्वजनिक करने के बाद यह सच्चाई सामने आ गई है कि अगस्त 2020 में वायरल हुई यह तस्वीर और व्यापक रूप से भारतीय मीडिया के एक वर्ग द्वारा रिपोर्ट की गई खबर, जिसमें ऑपइंडिया भी शामिल था, वास्तव में बिल्कुल सही और सटीक थी।
चीन के झूठ के विपरीत कब्र की तस्वीर एक सबूत है, हालाँकि इसके बावजूद कई भारतीय मीडिया प्लेटफॉर्म और ड्रैगन के प्रति सहानुभूति रखने वाले लोग गलवान घाटी में हुए झड़प के बाद चीन के वाहवाही करने में जुट गए थे और साथ ही देश को बदनाम करने की पूरी कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा वायरल हुई तस्वीर को फेक बताने पर तूल गए थे।
स्व-घोषित फैक्ट-चेकर्स प्रतीक सिन्हा और मोहम्मद जुबैर का पोर्टल AltNews भी एकतरफा मीडिया की इस रेस में शामिल था।
उस दौरान तस्वीर वायरल होने के ठीक बाद AltNews ने उन सैनिकों की कब्रों का फैक्ट चेक किया था, जो गलवान घाटी संघर्ष के दौरान मारे गए थे। लेख की हेडलाइन में लिखा है, “इंडिया टुडे ग्रुप, टाइम्स नाउ ने पीएलए कब्रिस्तान की पुरानी तस्वीरों को गलवान में मारे गए चीनी सैनिकों की कब्रों के रूप में दिखाया है।” और इस लेख को प्रतीक सिन्हा, मोहम्मद जुबैर और उनके एक अन्य प्रोपेगेंडाबाज ने लिखा था।
पत्रकार सुशांत सिन्हा के हवाले से ट्विटर पर मोहम्मद ज़ुबैर ने इस लेख को डाला था, जिन्होंने अपने ट्वीट में दो तस्वीरें जोड़ी थीं। एक कब्रिस्तान और दूसरा जो किसी कब्र के रूप में दिखता था।
जुबैर ट्विटर
हालाँकि, ट्वीट में लगी तस्वीरों को देखते ही पता चल जाता है कि दोनों तस्वीरें फेंक है। मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा लिखे गए लेख को देखते ही यह पता चलता है कैसे AltNews ने न केवल मकबरे की तस्वीर को बदनाम करने की कोशिश की, बल्कि इस तथ्य को भी मानने से इनकार कर दिया कि वास्तव में भारत के साथ गलवान घाटी में हुए संघर्ष के दौरान चीनी सैनिक भी हताहत हुए थे।
वहीं मकबरे को लेकर ऑल्ट न्यूज़ ने अपने खबर में यूज़र गीता मोहन द्वारा किए गए एक ट्वीट को भी लगाया और मामले में खुद को बचाने की कोशिश की। ऑल्ट न्यूज़ ने लिखा सोशल मीडिया पर एक और तस्वीर वायरल हो रही है, हो सकता है कि यह हाल ही की हो, लेकिन वो ये बात कंफर्म नहीं कर पा रहे।
साभार: ऑल्ट न्यूज़
मात्र एक लाइन में बात को घुमाने की कोशिश करने के बाद उन्होंने एक अलग सेक्शन में इस बात को लेकर भी जिक्र किया कि कैसे सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरे फैलाई जा रही हैं। उस सेक्शन में ऑल्ट न्यूज़ ने पत्रकार सुशांत सिन्हा का ट्वीट लगाया और इसे गलत सूचना बताया।
सुशांत सिन्हा के ट्वीट को लगाते हुए उन्होंने बस यह उल्लेख किया कि उसने कांग्सीवा युद्ध स्मारक की छवियों को पोस्ट करते हुए दावा किया है और वह गलत सूचना फैला रहे हैं।
गौरतलब है कि AltNews द्वारा किया गया यह पूरा फैक्ट- चेक पाठकों के मन में संदेह का बीज डालने की एक धूर्त कोशिश थी कि अगर पहली छवि युद्ध स्मारक के रूप में साबित होती है और गलवान घाटी के सैनिकों की नहीं, तो दूसरी छवि कब्र वाली भी फर्जी खबर होनी चाहिए और यह अल्ट्न्यूज़ द्वारा अक्सर की जाने वाली एक स्टैंडर्ड रणनीति है।
यहाँ यह भी ध्यान देने योग्य है कि AltNews द्वारा यह एकमात्र किया गया फैक्ट चेक नहीं था, जिसने इस तथ्य को खारिज करने और अस्वीकार करने की कोशिश की कि गलवान में हुए झड़प में चीन के एक भी सैनिक हताहत नहीं हुए।
बता दें, गलवान घाटी में हुए हिंसक झड़प के एक दिन बाद ही ऑल्ट न्यूज़ इस खबर को अफवाह बताते हुए फैक्ट चेक किया कि गतिरोध के दौरान 5 चीनी सैनिक भारतीय सैनिकों द्वारा मार दिए गए थे।
चीनी राज्य प्रचार चैनल ग्लोबल टाइम्स के साथ मुख्य रिपोर्टर ने ट्वीट किया था कि गतिरोध के दौरान 5 चीनी सैनिक मारे गए और 11 घायल हुए थे। इस खबर को तब कई भारतीय पत्रकारों और मीडिया हाउसों ने चलाया था। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि ये प्रारंभिक रिपोर्ट्स थीं और बाद में 43 सैनिकों के हताहत होने की रिपोर्ट आई थी।
वहीं ऑल्ट न्यूज़ द्वारा प्रकाशित एक दूसरे लेख को शीर्षक दिया गया , “भारत-चीन विवाद: 43 चीनी सैनिक मारे गए? मीडिया आउटलेट और पत्रकार का गुमराह करना”
जहाँ एक और ऑल्ट न्यूज़ फैक्ट-चेक ने 43 सैनिकों की मौत को फेक न्यूज़ बताया वहीं में एएनआई ने बताया कि झड़प में चीन के हताहतों की संख्या 43 थी, जिसमें मृत और घायल शामिल थे।
टूलकिट (ToolKit) मामले में हिरासत में ली गई क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि (Disha Ravi) को आज (फरवरी 19, 2021) तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस कस्टडी की अवधि खत्म होने पर पुलिस ने दिशा को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था। वहीं कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। पुलिस ने कोर्ट के सामने कहा कि वह शांतनु और निकिता के सामने दिशा से पूछताछ करना चाहती है।
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से आज दिशा की तीन दिन की हिरासत माँगते हुए कोर्ट को बताया कि दिशा रवि सवालों के जवाब देने में आना कानी करती हैं। उन्होंने मामले में अन्य आरोपित शांतनु को भी नोटिस दिया। वह 22 फरवरी को जाँच में शामिल होगा। ऐसे में दिशा का उनके साथ आमना-सामना करवाया जाएगा क्योंकि पूछताछ में दिशा ने निकिता और शांतनु पर सारा आरोप मढ़ा है।
इधर, दिशा की ओर से कोर्ट में सिद्धार्थ अग्रवाल ने मामले में पैरवी की। उन्होंने केस डायरी पेश करने की माँग की। अदालत को बताया गया कि दिशा रवि ने जमानत की अर्जी दी है, जो 20 फरवरी को सुनवाई के लिए आएगी।
गौरतलब है कि दिशा रवि पर किसान आंदोलन से जुड़े टूलकिट को संपादित करने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के साइबर सेल टीम ने 13 फरवरी को इस मामले में बेंगलुरु के सोलादेवनहल्ली इलाके से दिशा को गिरफ्तार किया था। वह बीबीए से ग्रेजुएट हैं और फ्राइडेज़ फॉर फ्यूचर इंडिया’ नामक संगठन की संस्थापक सदस्य भी हैं।
पुलिस का कहना है कि फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया व उसके सदस्यों द्वारा देशविरोधी हरकतें करने में टूलकिट का इस्तेमाल कोई नया मामला नहीं है। दिशा, निकिता व शांतनु तीनों फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया से कई सालों से जुड़े हुए हैं। दिल्ली पुलिस अब इस अभियान से जुड़े लोगों की आय के स्रोतों का भी पता लगा रही है।
दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसा के संबंध में पुलिस लगातार उपद्रवियों की पहचान करके उनके ख़िलाफ़ एक्शन लेने में जुटी है। ऐसे में एक किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने एक भड़काऊ वीडियो जारी करके कथित किसानों से अपील की है कि यदि दिल्ली पुलिस उन्हें नोटिस दे तो वह उनके सामने पेश न हों और यदि पुलिस उन्हें पकड़ने उनके घर आए तो वह लोग उन्हें बंधक बना लें।
वीडियो में गुरनाम को कहते सुना जा सकता है, “26 जनवरी को जो दिल्ली में ट्रैक्टर परेड थी, उसको लेकर दिल्ली पुलिस अति क्रूरता कर रही है। बहुत से हमारे किसानों को पहले ही पकड़ा जा चुका है। वह अभी तक जेलों में हैं। इनके ऊपर 307 तक के मुकदमे लगा दिए गए हैं। कई ट्रैक्टर हमारे पकड़े हुए हैं, जो अभी नहीं छूटे हैं। जब किसान वहाँ पर जाता है तो उसे वहीं बैठा लिया जाता है। इसके अलावा उन लोगों पर भी कई तरह के अवैध मुकदमे दर्ज हो रहे हैं जिनकी फोटो आ गई है या वीडियो में जिनकी गाड़ी का नंबर आ गया है। पुलिस इन लोगों को नोटिस भेज रही है और कइयों को घर से आकर गिरफ्तार कर रही है।”
अपनी वीडियो में किसान नेता अन्य प्रदर्शनकारियों से या उस दिन हिंसा में शामिल उपद्रवियों से आगे अनुरोध करते हैं कि अगर किसी को दिल्ली पुलिस नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाती है तो पेश ना हों, क्योंकि वे लोग वहीं पर पकड़ रहे हैं और अगर दिल्ली पुलिस किसी के घर पर छापा मारने आए या पकड़ने आए तो उनका घेराव करें। उनको वहीं बैठाकर पूरे गाँव को इकट्ठा करें। साथ ही इन पुलिस वालों को तब तक न छोड़ा जाए जब तक जिला प्रशासन आकर आश्वासन न दे कि दिल्ली पुलिस आपके गाँव और आपके जिले में नहीं घुसेगी।
दिल्ली पुलिस गिरफ्तार करने आए तो गांव में ही घेर कर बिठा लो, बिठाओ उनको खिलाओ – पिलाओ जब तक जिला अधिकारी ना आ जाएं और ये ना कह देंगे दोबारा दिल्ली पुलिस गांव नहीं आए गी तब तक नहीं जाने देना लेकिन किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार न करें – गुरनाम सिंह चढूनी@GurnamsinghBku
कथित किसानों को भड़काने के बाद ये किसान नेता खुद के बचाव में आखिर में इस बात को भी जोड़ते हैं कि जिस भी पुलिस वाले का घेराव किया जाए उसके साथ किसी तरह की मारपीट न हो, किसी तरह की ज्यादती न हो। उनको बैठाकर खिलाएँ-पिलाएँ, लेकिन उन्हें छोड़ा तब तक न जाए जब तक जिला प्रशासन न आ जाए।
गुरनाम कहते हैं कि सभी को इन बातों का ध्यान रखते हुए एक्शन लेना है, क्योंकि दिल्ली पुलिस का कोई और इलाज नहीं रहा है, इस तरह की ज्यादतियाँ बर्दाश्त नहीं की जाएँगीं। सभी जगह पुलिस वालों का घेराव करना शुरू कर दो।
गौरतलब है कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के आंदोलन का आज 86वाँ दिन है। वह लगातार तीनों कृषि कानून रद्द कराने की माँग पर अड़े हैं। बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने आज ही कहा है कि देश का किसान 70 वर्षों से घाटे की किसानी कर रहा है। अगर इस बार एक फसल की कुर्बानी देनी होगी तो इसके लिए किसान तैयार है। ज्यादा मजदूर लगाकर अगर फसल काटनी पड़ी तो वह उसे भी करेंगे। फसल की वजह से आंदोलन कमजोर नहीं होगा।
दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में दिल्ली नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेश पर 50 साल पुराना हनुमान मंदिर तोड़ा था। अब उसी जगह पर रातों-रात एक बार फिर मंदिर का निर्माण कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ फ़िलहाल इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है कि निर्माण कैसे हुआ और किसने कराया। वहीं दूसरी तरफ उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर का कहना है कि मंदिर का निर्माण ‘हनुमान जी के भक्तों’ ने कराया है।
दरअसल, जनवरी 2021 के पहले हफ्ते में चाँदनी चौक का सौंदर्यीकरण हो रहा था। इस बीच वहाँ मौजूद हनुमान मंदिर तोड़ा गया था, जिस पर दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार की काफी आलोचना हुई थी। वहीं उत्तरी दिल्ली नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मुद्दे पर कहा था कि अदालत के आदेशानुसार मंदिर ‘अतिक्रमण’ की श्रेणी में आता था इसलिए उसे तोड़ा गया। कई मीडिया रिपोट्स में बताया गया है कि भक्तों ने खुद से ही चंदा इकट्ठा करके मंदिर का अस्थायी पुनर्निर्माण कराया है।
इसके अलावा लोगों ने मंदिर में हनुमान की वही मूर्ति स्थापित की है, जो पहले वाले मंदिर में मौजूद थी। सोशल मीडिया पर नए अस्थायी पुनर्निर्माण की कई तस्वीरें भी आई हैं। शुकवार (19 फरवरी 2021) को सुर्ख़ियों में आई इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि स्टील का मंदिर खड़ा कर दिया गया है। आस-पास के लोग इसके भीतर स्थापित की गई हनुमान जी की मूर्ति की पूजा करते हुए नज़र आ रहे हैं।
इस घटना पर उत्तरी दिल्ली के मेयर जय प्रकाश ने ट्वीट करते हुए बताया कि राम जी और हनुमान के मंदिरों को उनके भक्तों द्वारा बनाया गया है। ऐसा करने के दौरान नियमों की अनदेखी की गई है लेकिन हमें आम जनता की आस्था का भी ख़याल रखना होगा। इस ट्वीट में अस्थायी रूप से बनाए गए मंदिर की दो तस्वीरें भी मौजूद थीं। तस्वीर में कई लोग पूजा करते हुए देखे जा सकते हैं।
इसके बाद जय प्रकाश ने अपने ट्वीट में लिखा, “चाँदनी चौक में विराजे पवनसुत हनुमान। जय श्री राम आज दोपहर 12:30 बजे हनुमान मंदिर का दर्शन करके आशीर्वाद प्राप्त करूँगा।”
इसके अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी रातों रात बने हनुमान मंदिर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा ने हमेशा इसे दोबारा स्थापित करने की बात कही है। आम जनता ने इस मंदिर का निर्माण किया है और ये केजरीवाल सरकार के मुँह पर तमाचा है। अब तो अरविंद केजरीवाल को खुद मंदिर जाकर दर्शन के बाद प्रायश्चित करना चाहिए।
दरअसल, चाँदनी चौक के अधिकृत क्षेत्र में किसी भी तरह के सिविल कार्य के किए अधिकारियों की अनुमति की ज़रूरत होती है। चाँदनी चौक ऐतिहासिक क्षेत्र है जहाँ व्यापारियों और पुरानी हवेलियों का गढ़ है। इसे राजधानी का अहम पर्यटन क्षेत्र भी माना जाता है और यह दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आता है।
3 जनवरी को चाँदनी चौक स्थित लगभग 50 साल पुराने हनुमान मंदिर पर सुबह 4 बजे के आस-पास बुलडोजर चला दिया गया था। देर रात हुई इस कार्रवाई की वजह से जनता में इसे लेकर काफ़ी आक्रोश था। इस घटना की वजह से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।
पुडुचेरी की विधानसभा में कॉन्ग्रेस के तीन और विधायक पार्टी से इस्तीफा देने को तैयार हैं। यह ताजा दावा भाजपा नेता ने शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को किया है। इससे पहले चार कॉन्ग्रेस नेता पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। इनमें से दो ने भाजपा भी ज्वाइन कर ली है। जिनके नाम ए नमस्सिवम ( A Namassivayam) और ई थेप्पनथन ( E Theeppainthan) हैं।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में भाजपा के इंचार्ज निर्मल कुमार सुराणा ने कहा कि अन्य दो कॉन्ग्रेस विधायक- मल्लदी कृष्ण राव और ए जॉन कुमार भी जे पी नड्डा के नेतृत्व वाली भाजपा में शामिल होंगे।
उन्होंने पीटीआई को बताया, “वह दोनों (कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने वाले नेता) भाजपा से जुड़ने वाले हैं। वह हमारे शीर्ष नेतृत्व से बात कर रहे हैं” बीजेपी नेता का मानना है कि कॉन्ग्रेस सदन में शत प्रतिशत विश्वास मत खोने वाली है।
हालाँकि, सवालों के जवाब देते हुए बीजेपी नेता ने उन तीन कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम बताने से इंकार किया जो भाजपा से जुड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा, “मैं अभी नहीं बता सकता। वह (तीनों विधायक) नारायणस्वामी सरकार से नाखुश हैं और इस्तीफा देना चाहते हैं। ये बात 100 प्रतिशत पक्की है कि वह इस्तीफा देंगे।” सुराणा ने कहा कि जो कोई भी भाजपा की विचारधारा स्वीकारता है और इससे जुड़कर पुडुचेरी के विकास पर काम करना चाहता है, पार्टी उसे लेने को तैयार है।
गौरतलब है कि 22 फरवरी को पुडुचेरी में बहुमत साबित करने की बात उठने के बाद सत्ताधारी कॉन्ग्रेस ने गुरुवार को बैठक की थी । हालाँकि, इसमें पार्टी ने भविष्य की कार्रवाई के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया और विश्वास मत से एक दिन पहले फिर से मिलने का संकल्प लिया।
बता दें कि पुडुचेरी की 33 सदस्यीय विधानसभा में कुल 30 विधायक चुनकर आते हैं। ऐसे में वर्तमान में यहाँ स्पीकर समेत कॉन्ग्रेस के दस सदस्य हैं। जबकि इसके गठबंधन सहयोगी DMK के पास तीन सदस्य हैं और माहे क्षेत्र भी स्वतंत्र रूप से इसका समर्थन करता है।
इसी प्रकार नए सदस्यों के जुड़ने के साथ सदन में विपक्ष के कुल 14 सदस्य हो गए हैं, जिन पर कॉन्ग्रेस का कहना है कि उन तीन नेताओं को विपक्ष में अभी नहीं गिना जाना चाहिए जो हाल में शामिल हुए और उन्हें कॉन्फिडेंस मोशन के दौरान वोट करने का भी अधिकार नहीं होना चाहिए। विपक्ष के पास सिर्फ़ 11 की शक्ति है न कि 14 की।
मालूम हो कि साल 2016 में पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस ने 15 सीटें जीती थीं। कॉन्ग्रेस को 3 डीएमके और 1 निर्दलीय विधायक का समर्थन मिला था। मगर अब सदन में कॉन्ग्रेस विधायकों की संख्या घटकर 10 हो गई है। 4 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि एक को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण पार्टी से बाहर निकाला जा चुका है।