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भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने पूर्व बसपा सांसद अकबर अहमद पर लगाया बदसलूकी का आरोप: FIR दर्ज

भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने बसपा के पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी पर अभद्रता का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में दिल्ली स्थित वसंत कुंज थाने में बसपा नेता के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई है। भाजपा नेता ने एफ़आईआर में बताया है कि 5 फरवरी 2021 को वह अपने परिचित के रात्रि भोज में शामिल हुई थीं, जहाँ बसपा के पूर्व सांसद अकबर अहमद ने उनके साथ बदसलूकी की।

घटना के बाद शाजिया इल्मी ने पुलिस से इस घटना की शिकायत की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 7 फरवरी 2021 को वसंत कुंज थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (धमकी देना) और 509 (महिला के साथ दुर्व्यवहार) के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई थी।

एक समाचार समूह से बात करते हुए दिल्ली भाजपा की उपाध्यक्ष इल्मी ने कहा कि वह इस मामले को सार्वजनिक नहीं करना चाहती थीं। वह जिस परिचित के यहाँ गई थीं उन्होंने और उनके परिजनों ने भी अकबर अहमद को रोकने का प्रयास किया था।

इसके बावजूद पूर्व बसपा सांसद ने किसी की बात नहीं सुनी उल्टा और अपमानित करना शुरू कर दिया। इसके अलावा शिकायत में यह भी कहा गया है कि अकबर अहमद ने हिन्दू देवी देवताओं पर भी अनैतिक टिप्पणी की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पूर्व बसपा सांसद ने शाजिया इल्मी को अपशब्द भी कहे।

इस आयोजन में रात के लगभग साढ़े नौ बजे कृषि कानून और भारत- दक्षिण अफ्रीका व्यापार सम्भावनाओं पर चर्चा हो रही थी। तभी पूर्व बसपा सांसद ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी की। इसके बाद शाजिया इल्मी के लिए भी अभद्र टिप्पणी की। इस घटना को लेकर अकबर अहमद की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं दक्षिण पश्चिम डीसीपी इंगीत प्रताप सिंह का इस मामले पर कहना है कि अकबर अहमद पर एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है।  

पत्रकार रह चुकी शाजिया इल्मी मूल रूप से कानपुर की रहने वाली हैं। अक्सर समाचार चैनलों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखती हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक करियर आम आदमी पार्टी से शुरू किया था लेकिन कुछ ही समय बाद भाजपा में शामिल हो गई थीं। अकबर अहमद डंपी बसपा के टिकट पर आजमगढ़ से सांसद रह चुके हैं। 72 वर्षीय अकबर अहमद अक्सर अपने बयानों की वजह से सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। वह बसपा के टिकट पर दो बार आजमगढ़ से सांसद रह चुके हैं। पहली बार वह 1998 में सांसद चुने गए थे और इसके बाद 2008 में चुनाव जीता था। 

राम कुमार नहीं, मोहम्मद हनीफ निकला 9 साल की बच्ची का रेप और हत्या करने वाला: पहचान बदल 12 वर्षों से कर रहा था नौकरी

पश्चिम बंगाल के जोड़ाबागान में एक बलात्कार और हत्या के मामले में जाँच के दौरान आरोपित को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। 9 वर्षीय नाबालिग लड़की के रेप एवं मर्डर केस में गिरफ्तार आरोपित के बारे में पता चला है कि वो पिछले 12 वर्षों से अपनी पहचान छिपा कर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था। बिहार और झारखंड में फर्जी पते के जरिए उसने जाँचकर्ताओं को भी गुमराह किया। आरोपित का नाम मोहम्मद हनीफ है।

लेकिन, वो राम कुमार उर्फ़ लम्बू के नाम से रह रहा था और एक स्थानीय इमारत में बतौर सिक्योरिटी गार्ड कार्यरत था। उसने खुद को समस्तीपुर और गिरिडीह का निवासी बताया था, लेकिन पुलिस को पता चला है कि वो झारखंड के देवघर का रहने वाला है। उसने फर्जी पते के साथ अपने फर्जी दस्तावेज भी बना लिए थे। बंगाल पुलिस की टीम बिहार-झारखंड में उसके बारे में पता लगाने निकली थी, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य हाथ लगे।

अब इन नई सूचनाओं को लेकर उससे फिर से पूछताछ की जाएगी। देवघर पुलिस उसका इतिहास खँगाल रही है और उन सूचनाओं का बंगाल पुलिस को भी आगे की कार्रवाई के लिए इंतजार है। जॉइंट सीपी (क्राइम) मुरलीधर शर्मा ने बताया कि बैकग्राउंड की जाँच न होने की वजह से मोहम्मद हनीफ को ये जॉब मिल गई थी। एक अन्य आरोपित रणवीर ताँती उर्फ़ रघुवीर की पहचान को लेकर भी अब संदेह खड़ा हो गया है।

पुलिस इसकी भी जाँच कर रही है। वो मार्बल काटने की तकनीक में दक्ष है। पुलिस फाइनल चार्जशीट में इस धोखाधड़ी वाली करतूत का भी डिटेल में वर्णन करेगी। पुलिस ये पता कर रही है कि उसने इस काण्ड की साजिश पहले ही तो नहीं रच ली थी। ये मामला फरवरी 3, 2021 का है। नाबालिग पीड़िता ने कुछ ही दिन पहले अपना नौवाँ जन्मदिन मनाया था। सोवाबाजार में उसका घर था, लेकिन वो अपनी बड़ी बहन के साथ मामा के यहाँ आई हुई थी।

पहुँचने के कुछ ही देर बाद वो अपनी दोस्तों के साथ बाहर खेलने निकली थी। बच्ची की नानी ने उसे पहले ही उस इमारत के पास जाने से मना किया था जहाँ ये वारदात हुई, लेकिन लुका-छिपी खेलते-खेलते वो वहाँ चली गई। आरोपित ने उसे बिरयानी और चिप्स का लालच दिया। इसके बाद उसका रेप किया गया और फिर हत्या कर दी गई। उस समय वो शराब के नशे में भी था। पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल भी कर ली थी।

ट्विटर ने सस्पेंड किया रिंकू शर्मा के परिवार के लिए ₹1 करोड़ जुटाने वाली वैशाली पोद्दार का अकाउंट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर ने भाजपा नेता वैशाली पोद्दार का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बताया कि ट्विटर ने बिना कोई कारण बताए ये हरकत की है। उन्होंने ‘ब्रिंग बैक वैशाली’ हैशटैग ट्रेंड कराने की भी अपील की। वैशाली पोद्दार दिल्ली के मंगोलपुर में हुए रिंकू शर्मा हत्याकांड के बाद उनके परिजनों के लिए धन इकट्ठा करने के अभियान में शामिल रही थीं।

उन्होंने ही ‘Crowdcash’ नामक वेबसाइट पर रिंकू शर्मा के परिवार के लिए धन दान करने हेतु अपील की थी, जिसका पूर्व मंत्री कपिल शर्मा ने समर्थन किया था। इस अभियान के तहत 1 करोड़ रुपए की धनराशि इकट्ठी कर के रिंकू शर्मा के परिवार को दी गई। वैशाली ट्विटर के माध्यम से लगातार इस अभियान का प्रचार-प्रसार कर रही थीं और रिंकू शर्मा के परिवार को न्याय दिलाने की माँग भी कर रही थीं।

वैशाली पोद्दार ट्यूनीशिया में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में जा चुकी हैं। उन्होंने भाजयुमो में जिला उपाध्यक्ष और भाजपा में जिला आईटी इंचार्ज का पद संभाला था। साथ ही वो BJYM दिल्ली की स्टेट एग्जीक्यूटिव सदस्य भी रह चुकी हैं। रिंकू शर्मा की याद में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भी वो उपस्थित रही थीं। रमेश सोलंकी और कपिल मिश्रा सहित कई नेताओं ने उनके समर्थन में ट्विटर इंडिया को टैग कर के ट्वीट किया।

Twitter ने भाजयुमो नेता वैशाली पोद्दार का हैंडल सस्पेंड किया

बिहार से ताल्लुक रखने वाली वैशाली पोद्दार के समर्थन में कई अन्य लोगों ने भी ट्वीट्स किए। एक यूजर ने लिखा कि राष्ट्रवादियों के अकाउंट को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और अमेरिका के बाद ट्विटर अब भारत में इस तरह की हरकतें कर रहा है। कई लोगों ने पूछा कि क्या किसी हिन्दू की हत्या के बाद उसके परिवार की सहायता करना कोई अपराध है? लोगों ने सरकार से भी ट्विटर के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

संत जोसेफ स्कूल का संचालक बेंजामिन छात्र से अप्राकृतिक यौनाचार के मामले में गिरफ्तार, कमरे में बुलाकर किया गंदा काम

बिहार के लखीसराय में एक स्कूल के निदेशक द्वारा छात्र के साथ अप्राकृतिक यौनाचार करने का मामला सामने आया है। छात्र के अप्राकृतिक यौन शोषण का ये मामला कबैया थाना क्षेत्र बायपास रोड स्थित संत जोसेफ स्कूल (St. Joseph’s School) का है। आरोप है कि स्कूल के संचालक बेंजामिन जयपाल ने कक्षा 6 के एक छात्र को अपने कमरे में बुला कर उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। कबैया पुलिस ने इस घृणित हरकत की सूचना मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया है।

छात्र को मेडिकल जाँच के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। परिजनों ने बताया कि उक्त छात्र घर लौटते समय रो रहा था। जब उसे पूछा क्या कि बात क्या है? तो उसने बताया कि स्कूल के निदेशक ने उसके साथ ‘गंदी हरकत’ की है। परिजनों ने माँग की है कि बेंजामिन जयपाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। जबकि, निदेशक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा और बेबुनियाद करार दिया है।

हिन्दू संगठनों और स्थानीय लोगों ने जताया आक्रोश

आरोपित निदेशक का कहना है कि उक्त छात्र की माँ के साथ कुछ दिनों पहले उसका विवाद हुआ था, इसीलिए बदले की भावना से उसके खिलाफ ये आरोप लगाए गए हैं। कबैया थानाध्यक्ष राजीव कुमार छात्र का बयान और आरोपित निदेशक से पूछताछ में लगे हुए हैं। डीएसपी रंजन कुमार ने आश्वासन दिया कि इस मामले का स्पीड ट्रायल कराकर दोषी को सजा दिलाने का कार्य पुलिस द्वारा किया जाएगा। उन्होंने पीड़ित को न्याय दिलाने की बात कही।

‘हिंदुस्तान’ के स्थानीय संस्करण में प्रकाशित खबर (साभार)

छात्र ने पुलिस को बताया कि निदेशक ने सबसे पहले तो उसे अपने कमरे में बुलाया और पाँव दबवाने लगा। इसके बाद उसने गलत कार्य किया और विरोध करने पर छात्र को पिटाई की धमकी दी। छात्र की आक्रोशित माँ ने स्कूल में निदेशक का दरवाजा खटखटाया लेकिन वो बाहर नहीं निकला, जिसके बाद उसने पुलिस में जाकर मामला दर्ज कराया। पुलिस ने कहा कि इस तरह की हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

माँ और पुलिस का बयान (साभार: लखीसराय लाइव)

स्थानीय हिन्दू कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए कहा कि बुद्धिजीवी वर्ग छात्र के साथ अप्राकृतिक यौनाचार करने वाले आरोपित बेंजामिन को बचाने में लगा हुआ है और ऐसी स्थिति रही तो लखीसराय में हिन्दुओं का सर्वनाश हो जाएगा। स्थानीय लोगों ने आरोपित को फाँसी देने की माँग करते हुए मार्च निकाला। पीड़ित माँ ने भी उक्त स्कूल निदेशक को कड़ी सजा देने की माँग करते हुए कहा कि बात एक बच्चे की नहीं है, उस स्कूल में कई बच्चे पढ़ते हैं और सभी परिजन चिंतित हैं।

हिन्दुओं की दाढ़ी पर खार: वह तकलीफ जो उन दिनों मुग़लों को थी, आज मोदी-विरोधियों को है

इन दिनों प्रधानमंत्री मोदी की दाढ़ी को लेकर विरोधियों में बड़ी हाय-तौबा मची हुई है। मुद्दा कोई भी हो, उसे मोदी की दाढ़ी से जोड़ा जाना मानो अनिवार्य सा हो गया है। बस्तर से कॉन्ग्रेसी सांसद दीपक बैज ने जीडीपी के मुद्दे को इसके साथ जोड़ दिया, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने बंगाल-चुनाव के साथ तो वहीं तेजप्रताप यादव ने पेट्रोल के दामों के साथ। इतना ही नहीं बरखा दत्त और शशि थरूर के एक इंटरव्यू एवं पाकिस्तानी न्यूज़-चैनलों की कुछ डिबेट्स में भी मोदी की बढ़ती हुई दाढ़ी पर ‘गंभीर चर्चा’ हो चुकी है।

वैसे दाढ़ी-मूँछ रखना, नहीं रखना या कितनी रखनी है, यह विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत मसला है और राजनीतिक चर्चा में इसकी कोई जगह नहीं बनती। फिर भी, जब कई लोगों की बदहजमी का कारण मोदी की बढ़ती हुई दाढ़ी ही है, तो हमारे लिए इतिहास की गहराइयों में जाकर इस विषय को भी गंभीरता से समझना जरूरी हो जाता है।

केश और दाढ़ी रखना, यह भारत में अनादि काल से हिन्दू साधु-सन्यासियों की परंपरा रही है। गुरु गोबिंद सिंह ने भी जब खालसा-पंथ की घोषणा की तो ‘पाँच ककारों’ में इसे अनिवार्य रूप से शामिल किया गया था। इसी कारण मध्यभारत के इतिहास में एक समय ऐसा भी आया जब पंजाब के आसपास के विस्तार में सिखों एवं हिन्दुओं की एकता में ‘दाढ़ी-मूँछ’ एक महत्वपूर्ण पहलू बन गई थी जिस पर मुग़ल खूब खार खाते थे।

सिख धर्म के उदय में भले ही हिन्दू-मुस्लिम एकता का उदारवादी दृष्टिकोण था लेकिन सिखों को भी ‘काफिरों’ की संज्ञा मिलने में देर न लगी। सिख गुरुओं की हत्याएँ, गुरु गोबिंद सिंह के साहिबज़ादों को जिंदा दीवार में चुनवा देने की घटना एवं गुरु के अनुयायियों पर दमन यह सब उसी ‘मुसलमान बनाम काफ़िर’ की सोच का ही नतीजा था।

जब गुरु गोबिंद सिंह ने देखा कि इस्लाम के नाम पर हिन्दुओं एवं सिखों को काफिर बताकर खूब अत्याचार ढाये जा रहे हैं तब उन्होंने एक हिन्दू सन्यासी ‘लछमनदास’ को उन अत्याचारियों को दण्डित करने का जिम्मा दिया और उसे एक नया नाम दिया ‘बंदा’। वही बंदा जिसे मुस्लिम इतिहासकारों ने ‘इस्लाम के दुश्मन’ के रूप में वर्णित किया है।

सिख धर्म में बंदा की भूमिका एक सेनानायक की तौर पर देखी जा सकती है, जिसके काल में मुसलमानों में यह बात घर कर गई थी कि यदि बंदा जीत गया तो वे सब बर्बाद हो जाएँगे! बची-खुची कसर वजीर खान ने पूरी कर दी, जिसने मुल्ला-मौलवियों को राजी किया कि वे काफिरों के खिलाफ जंग छेड़ दें। यूँ तो बंदा का आंदोलन किसानों से जुडी एक क्रांति थी लेकिन मुसलमान शासकों के संरक्षण में पले-बड़े मस्लिम इतिहासकारों ने इस क्रांति को भी ‘इस्लाम विरोधी जिहाद’ साबित किया हुआ है।

खुशवंत सिंह अपनी किताब ‘सिखों का इतिहास’ में बंदा के विषय में लिखते हैं कि ‘यमुना से लेकर रावी और उसके पार, अगर किसी आदमी का जोर था, तो वह बंदा ही था और अगर किसी सत्ता की इज्जत थी, तो वह किसान फौजें (बंदा की फौजें) ही थी। सौभाग्यशाली दिनों में अगर बंदा ने थोड़ा और जोखिम उठाया होता, तो उसने दिल्ली और लाहौर को भी फतह कर लिया होता और इतिहास की पूरी दिशा ही बदल दी होती।’

मुगल इतिहासकार खफी खान तत्कालीन स्थिति पर लिखता है कि ‘इन काफिरों ने नया शासन चलाया, सिर और दाढ़ी के बाल काटने से मनाही कर दी। इस पथभ्रष्ट पंथ के विद्रोह और तबाही को शहंशाह की जानकरी में लाया गया जिससे उन्हें खासी ‘तकलीफ’ हुई।

सिखों के इतिहास पर यदि गौर करें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि सिख आंदोलन को हिंदुओं के बहुत बड़े बहुमत का सहयोग प्राप्त न होता तो कदाचित यह धर्म आज की वर्तमान स्थिति में नहीं पहुँच पाता। गौर करें तो इस्लाम के हमलों के खिलाफ यह हिंदुओं का प्रतिरोध ही था, जिसने सिख आंदोलन को सफल बनाया। ‘बहादुर शाहनामा’ से ज्ञात होता है कि चूँकि बंदा की क्रांति को हिन्दुओं को पूर्ण समर्थन था, इसी के खार में 1710 के सितंबर महीने में उसने हिन्दुओं को दाढ़ी बनाकर ही रहने की एक घोषणा जारी कर दी।

अब इतिहास के इसी वाकए को वर्तमान परिदृश्य के साथ जोड़कर देखें तो मोदी के दाढ़ी बढ़ाने पर विरोधियों को तकलीफ क्यों है, बखूबी समझा जा सकता है।

नोट: यह लेख अभिषेक सिंह राव द्वारा लिखा गया है

श्वेता के बाद मस्जिद का मौलवी भूला माइक बंद करना? खर्राटों की आवाज़ वाला वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर अक्सर अजीबोगरीब चीज़ें वायरल होती हैं, और फिर उसे हास्य का विषय बनते भी देर नहीं लगती। इसका सबसे हालिया उदाहरण है ज़ूम (Zoom) पर चल रही क्लास का वीडियो, जिसमें श्वेता नाम की लड़की माइक बंद करना भूल जाती है। इसी कड़ी में अब एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें सुनाई दे रही आवाज को कथित तौर पर मस्जिद में माइक खुला छोड़कर सो रहे मौलवी के खर्राटों की आवाज बताया जा रहा है।

इस वीडियो को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि मौलवी मस्जिद का माइक बंद करना भूल गया। फिर क्या था; रात भर आस-पास के लोग मौलवी के खर्राटे की आवाज सुनाते रहे। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तमाम प्रकार की प्रतिक्रियाएँ देखने के लिए मिल रही हैं।

एक ट्विटर यूज़र द्वारा साझा किए गए इस वीडियो को अब तक लगभग 50 हज़ार लोग देख चुके हैं। इसके अलावा, वीडियो पर 2903 लाइक्स और 783 रीट्वीट हैं। लगभग 14 सेकेंड के इस वायरल वीडियो के कैप्शन में लिखा है, “मौलवी साहब माइक ऑन करके सो गए।” वीडियो में साफ़ तौर पर सुना जा सकता है मौलवी सो रहा है और उसके खर्राटों की आवाज़ दूर दूर तक सुनाई दे रही है।

सोशल मीडिया की आबादी ने इस मौके का फ़ायदा उठाने में बिलकुल देरी नहीं की। नेटिज़न्स ने इस वीडियो और वीडियो में सुनाई देने वाले मौलवी के खर्राटों की भरपूर मौज ली। फ़िलहाल इस वीडियो में बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं उपलब्ध हो पाई है कि ये कहाँ और कब का है, लेकिन नेटिज़न्स इस वीडियो पर जमकर मीम्स बना रहे हैं। 

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा कि काफी समय बाद मैंने इतनी मज़ाकिया चीज़ देखी है। 

वहीं एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “आस्था की पराकाष्ठ नींद में भी परवरदिगार की इबादत। नतमस्तक।” 

एक यूज़र ने तो इस वीडियो को श्वेता वाले मीम से ही जोड़ दिया,  

एक और ट्विटर यूज़र ने लिखा, “भाई जितने बार सुन रहा हूँ इतनी बार हँसी आ रही है। 

इस ट्विटर यूज़र ने कहा, “अल्लाह ऐसी सुकून की नींद सब को फ़रमाए।”

मंदिरों के खुलने से बढ़ रहा महाराष्ट्र में कोरोना: शिवसेना ने भाजपा पर लगाया आरोप

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और अब वहाँ की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना ने इसके लिए राज्य में विपक्ष में बैठी भाजपा (BJP) को ही जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए भाजपा को राज्य में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया। पार्टी ने कहा है कि मंदिरों के खुलने और BJP की ‘मंदिर राजनीति’ की वजह से ऐसे हालात पैदा हुए हैं।

शिवसेना ने कहा कि विपक्षी दल भाजपा के दबाव के कारण मंदिरों को खोलने का निर्णय लिया गया। महाराष्ट्र में स्थिति दिन पर दिन बदतर होती जा रही है और प्रतिदिन कोरोना के 6000 से भी अधिक मामले सामने आ रहे हैं। राज्य में कोरोना के कुल 44,765 सक्रिय मामले है। केरल 59,817 मामलों के साथ अब भी देश भर में नंबर-1 पर बना हुआ है और वहाँ भी हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं।

महाराष्ट्र में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 20,87,632 मामले सामने आए हैं, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। इसके बाद 10,25,938 मामलों वाले केरल का नंबर आता है। आप देख सकते हैं कि पहले और दूसरे स्थान पर काबिज इन राज्यों के बीच दोगुने का फासला है। महाराष्ट्र में अब तक कोरोना ने 51,713 लोगों की जान ली है। जानने वाली बात ये है कि दूसरे किसी भी राज्य में इस संक्रमण से इसके एक चौथाई लोग भी नहीं मरे हैं।

ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र टेस्टिंग के मामले में सबसे आगे है, क्योंकि उत्तर प्रदेश 3 करोड़ टेस्टिंग के साथ नंबर-1 पर काबिज है और इस मामले में महाराष्ट्र पाँचवें नंबर पर आता है जहाँ 1.6 करोड़ टेस्टिंग हुई है। सीएम उद्धव ठाकरे कह रहे हैं कि मास्क पहनना ही कोरोना के खिलाफ एकमात्र ढाल है। भाजपा विधायक आशीष सेलार ने पूछा है कि आखिर ऐसी स्थिति कैसे आई कि राज्य में दोबारा लॉकडाउन लगाने की बातें हो रही हैं?

महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री बच्चू कडु दूसरी बार कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इससे पहले सितम्बर 2020 में भी उन्हें कोरोना हुआ था। अमरावती जिले के आँचलपुर के विधायक ने उनसे सभी से टेस्ट कराने की अपील की है, जो उनके संपर्क में आए। राज्य के दो अन्य मंत्री राजेश टोपे और जयंत पाटिल को भी कोरोना हो गया है। मार्च के पहले हफ्ते के आसपास राज्य में बजट भी आना है, ऐसे में समस्या गंभीर हो गई है।

ज्ञात हो कि महाराष्ट्र सरकार ने बृहस्पतिवार (फरवरी 18, 2021) को कोरोनो वायरस मामलों में एक बार फिर उछाल आने के बाद राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लॉकडाउन सहित नए कोरोना दिशानिर्देशों की घोषणा की। तीन दिन पहले ही अकेले मुंबई में कोरोना संक्रमण के 700 नए मरीज सामने आए थे। इसके बाद महाराष्ट्र में सख्ती बढ़ा दी गई है। बीएमसी ने सार्वजनिक रूप से मास्क के बिना पाए जाने पर लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।

कॉन्ग्रेस नेता के ‘नाचने-गाने वाली’ बयान पर कंगना ने कहा- मैं हड्डियाँ तोड़ने वाली राजपूत हूँ, I don’t shake a*s

मध्य प्रदेश स्थित बैतूल में कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद सुखदेव पानसे ने अभिनेत्री कंगना रनौत को लेकर एक विवादित बयान दिया है। कॉन्ग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री पानसे ने बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को ‘नाचने-गाने वाली’ कहा है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के समर्थक सुखदेव पानसे कृषि क़ानून और महँगाई को लेकर ज्ञापन सौंपने कलेक्ट्रेट पहुँचे थे। इस दौरान पूर्व सांसद ने ये विवादित बयान दिया। 

सुखदेव पानसे ने कहा, “कंगना जैसी नाचने-गाने वाली महिला ने किसानों के सम्मान को ठेस पहुँचाई है। कंगना ने मध्य प्रदेश के किसानों का भी अपमान किया है। प्रदेश की पुलिस ने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की है। जब कॉन्ग्रेस किसानों के सम्मान में खड़ी होती है उस पर लाठी चार्ज किया जाता है। पुलिस को कंगना की कठपुतली की तरह काम नहीं करना चाहिए क्योंकि सरकारें बदलती रहती हैं। इस पुलिस कार्रवाई की जाँच होनी चाहिए और जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती है तब तक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।” 

कॉन्ग्रेस नेता के इस बयान पर चर्चा बढ़ने के बाद कंगना ने खुद इसका जवाब दिया। कंगना ने ट्वीट करते हुए लिखा, “ये मूर्ख जो कोई भी है, क्या ये जानता है मैं दीपिका, कैटरीना या आलिया नहीं हूँ। मैं इकलौती हूँ, जिसने आईटम नंबर्स ठुकराए, बड़े सितारों (खान/कुमार) के साथ फ़िल्में करने से मना किया। जिसकी वजह से पूरा बॉलीवुडिया गैंग मेरे विरोध में है। मैं राजपूत हूँ, मैं कमर नहीं मटकाती, हड्डियाँ तोड़ती हूँ।”

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर आक्रामक रवैया रखने और तीखे जवाबों के चलते सुर्ख़ियों में बने रहने वाली कंगना रनौत जब मध्य प्रदेश में ‘धाकड़’ फिल्म की शूटिंग कर रही थीं तब मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के तमाम नेताओं ने फिल्म की शूटिंग रोकने के लिए आंदोलन की धमकी दी थी। जब कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जबरन शूटिंग रोकने का प्रयास किया तो प्रदेश पुलिस ने उन पर कार्रवाई की थी।    

लद्दाख के इस ‘इडियट’ ने सेना के लिए बनाया अनोखा सोलर मिलिट्री टेंट: बाहर -14°C और भीतर +15°C तापमान

वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने ट्विटर पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें एक बार फिर से उनके इनोवेटिव प्रयास की सराहना हो रही है। उन्होंने एक ‘सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट’ तैयार किया है, जिसकी सहायता से भारतीय सेना के जवानों को बहुत ज्यादा ठंड वाले माहौल में रहने में भी आसानी होगी। सोनम ने बताया कि उन्होंने गलवान घाटी में भारतीय सेना की सहायता के लिए इस टेंट को तैयार किया है।

उन्होंने शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) की रात ये तस्वीरें शेयर की और बताया कि रात के 10 बजे जहाँ बाहर का तापमान -14°C था, वहीं टेंट के भीतर का तापमान +15°C था। अर्थात, टेंट के बाहर के प्राकृतिक तापमान से टेंट के भीतर का तापमान 29°C ज्यादा था, जिससे गलवान घाटी में भारतीय सेना के जवानों को वहाँ रात गुजारने में खासी आसानी होगी और साथ ही इतनी ज्यादा ठंड से भी राहत मिलती है।

सबसे बड़ी बात ये है कि ये टेंट सौर ऊर्जा पर संचालित है। सोनम वांगचुक ने बताया कि इससे कई टन केरोसिन तेल के उपयोग में भी कमी आएगी, जिससे प्रदूषण भी नहीं होगा। इससे जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी मदद मिलेगी। सोनम ने बताया कि इस एक टेंट के भीतर 10 जवान आराम से रह सकते हैं। उन्होंने एक और बड़ी जानकारी दी कि इस टेंट में लगे सारे उपकरण और पार्ट्स पोर्टेबल हैं। उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।

साथ ही, इसका वजन भी 30 किलो से कम है, जिससे एक जगह से दूर जगह तक इसे ले जाने में कोई समस्या नहीं आएगी। उन्होंने इस ‘सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट’ के बारे में जानकारी दी कि ये पूर्णरूप से ‘मेड इन इंडिया’ प्रोडक्ट है, जिसे कि लद्दाख में ही बनाया गया है।

उन्होंने इस ट्वीट के साथ ‘कार्बन न्यूट्रल’ का हैशटैग भी इस्तेमाल किया है। इसका अर्थ हुआ कि इसके उपयोग से वातावरण में जरा भी कार्बनडाईऑक्साइड पैदा नहीं होगी। बता दें कि सुपरहिट फिल्म ‘3 इडियट्स’ में आमिर खान का कैरेक्टर ‘फुनसुख वाँगड़ू’ इन्हीं सोनम वांगचुक से प्रति था।

उधर पैंगोंग त्सो झील के आसपास भारत-चीन के बीच समझौते के बाद चीन की सेना पीछे हट गई है। साथ ही उसने अपने अस्त्र-शस्त्र भी हटा लिए हैं। भारत ने भी समझौते का पालन किया है। अब दोनों देशों की सेनाओं के बीच दसवें दौर की वार्ता होगी। रेचिन ला और रेजांग ला दर्रों पर तनाव ख़त्म हो गया है। अन्य क्षेत्रों को लेकर भी बातचीत जारी है। पहली बार ‘Disengagement’ के सभी समझौते लिखित में दोनों पक्षों द्वारा तैयार किए गए हैं।

इधर चीन की स्टेट मीडिया पीपुल्स डेली ने बताया है कि चार चीनी सैनिक, जो कि पिछले साल जून में भारत मे हुए हिंसक झड़प के दौरान शहीद हुए थे, उन्हें मरणोपरांत मानद उपाधियों और प्रथम श्रेणी के योग्यता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। एक कर्नल, जिन्होंने उनका नेतृत्व किया और गंभीर रूप से घायल हो गए, उन्हें भी मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह पहली बार है जब चीन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि भारत के साथ गलवान हुए टकराव के दौरान उनके सैनिक भी हताहत हुए थे।

केरल में होता है लव जिहाद: ‘मेट्रो मैन’ ने असहिष्णुता को बताया फर्जी, कृषि कानूनों का किया पूर्ण समर्थन

17 वर्षों तक दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के प्रबंध निदेशक रहे ई श्रीधरन भारतीय जनता पार्टी में में शामिल हो गए हैं। देश के हालिया मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने ‘लव जिहाद’ का भी जिक्र किया है। ‘मेट्रो मैन’ ने कहा कि वो ‘लव जिहाद’ वाली विचारधारा के खिलाफ रहे हैं क्योंकि उन्होंने देखा है कि केरल में हिन्दू लड़कियों को इसके जाल में फाँसा जाता है। उन्होंने कहा कि वो भाजपा को केरल में सत्ता में आने में मदद करेंगे और मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने के लिए भी तैयार हैं।

दिल्ली मेट्रो के जनक माने जाने वाले ई श्रीधरन ने कहा, “हाँ, मैं देख रहा हूँ कि केरल में क्या हो रहा है। हिंदुओं को शादी के लिए फँसाया जाता है और अंत में उन्हें भुगतना पड़ता है। मुस्लिम और ईसाई लड़कियों के साथ भी ऐसा होता है। मैं इन चीजों का विरोधी हूँ।” श्रीधरन ने कहा कि वो व्यक्तिगत रूप से शाकाहारी हैं और अंडे तक नहीं खाते, और उन्हें माँस खाने वाले पसंद भी नहीं। बीफ खाने के सवाल पर उन्होंने ऐसा कहा।

NDTV से बात करते हुए 88 वर्षीय ‘मेट्रो मैन’ ने कहा कि वो जीवन भर प्रोफेशनल जिम्मेदारियाँ निभाते रहे हैं, लेकिन अब समाज और केरल के लिए राजनीति से जुड़ कर कुछ करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केरल में पिछले 20 वर्षों में कोई इंडस्ट्री नहीं आई। भ्रष्टाचार और स्कैंडलों की बात करते हुए उन्होंने केरल सरकार पर केंद्र से लड़ते रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा में राष्ट्र से प्यार करने वाले मेहनती लोग हैं।

उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित रहे हैं लेकिन पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के साथ भी उनके अच्छे संबंध थे और उन्होंने ही दिल्ली मेट्रो का पहला सेक्शन खुलवाया था। उन्होंने बताया कि वाजपेयी ने दिल्ली मेट्रो का पहला टिकट खुद खरीदा था। भाजपा नेता ने भाजपा के सांप्रदायिक पार्टी होने की बात से स्पष्ट मना किया।

ई श्रीधरन ने तीनों कृषि कानूनों का भी समर्थन किया और साथ ही स्पष्ट किया कि देश में कोई असहिष्णुता नहीं है। तीनों कानूनों के विरोध में पिछले 100 दिनों से भी अधिक समय से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई विदेशी व्यवस्था भारत को बदनाम करने का प्रयास करे तो उसे नियंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार कि बातों से इत्तिफ़ाक़ नहीं रखते, वही असहिष्णुता के आरोप लगा देते हैं।

श्रीधरन ने बताया कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने उनके साथ राज्य में कई प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को ईमानदार, भ्रष्टाचार-मुक्त, प्रतिबद्ध, मेहनती, दूरदर्शी और देशहित में संलग्न नेता बताया। उन्होंने कहा कि आजकल फैशन हो गया है कि सरकार कुछ भी करे तो उसका विरोध करो। उन्होंने ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ छीने जाने के आरोपों को भी गलत बताया।