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‘गंदी बात’ वाली हीरोइन खुद मालामाल, दूसरों को एक फिल्म के बस ₹15-20 हजार; ‘बोल्ड’ सीन के लिए करती थी मजबूर

एकता कपूर के फेमस वेब शो ‘गंदी बात’ की एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ को मुंबई क्राइम ब्रांच ने शनिवार (फरवरी 6, 2021) को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उसे बुधवार (फरवरी 10, 2021) तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। गहना वशिष्ठ को ‘मिस एशिया बिकनी क्राउन’ विजेता के रूप में जाना जाता है।

गहना पर एक वेबसाइट के लिए एडल्ट वीडियो शूट करने और उन्हें अपलोड करने का आरोप है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वो स्ट्रगल कर रहीं एक्ट्रेस को काम का लालच देकर पोर्न वीडियो शूट करवाती थी। काम के एवज में हर फिल्म के लिए 15,000 से 20,000 रुपए भुगतान करती थी। पुलिस को आरोपितों के सैकड़ों एक्स-रेटेड वीडियो मिले हैं।

एक क्राइम ब्रांच अधिकारी ने बताया कि चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए 2000 रुपए देने होते थे। अन्य लीडिंग और जानी-मानी मॉडल भी हैं, जिन्होंने इन वेबसाइटों पर ऐसे वीडियो शेयर किए हैं। अधिकारी ने कहा, “हम कानूनी राय ले रहे हैं कि क्या अभिनेत्रियों और मॉडलों के खिलाफ उनके सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य पोर्न साइटों पर उनके अश्लील वीडियो साझा करने के लिए कार्रवाई की जा सकती है।”

मामले में पुलिस ने यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा, प्रतिभा नलावडे, मोनू गोपालदास जोशी, भानुसूर्यम ठाकुर, मोहम्मद आसिफ और सैफी को धर-दबोचा है। पुलिस का मानना है कि इस रैकेट के पीछे यास्मीन बेग खान उर्फ़ रोवा का दिमाग है। गंदे कारोबार का भंडाफोड़ करने वाले इंस्पेक्टर केदार पवार ने कहा, “वे विदेशी आईपी एड्रेस का इस्तेमाल कर हॉटहिट ऐप के जरिए वीडियो अपलोड कर रहे थे।” पेड वेबसाइट के करीब 4 लाख सब्सक्राइबर हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह ने भद्दी वीडियो बेचकर करोड़ों कमाए हैं और पीड़ितों को सिर्फ 15,000 या 20,000 रुपए का भुगतान किया है।

गौरतलब है कि मुंबई में अभिनेत्री और मॉडल गहना वशिष्ठ को पोर्न वीडियो शूट कर के अपनी वेबसाइट पर डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस को पोर्न इंडस्ट्री के एक बड़े नेटवर्क के बारे में पता चला है, जिसमें कई अभिनेत्री, प्रोडक्शन कंपनियाँ और ऐसे मॉडल्स शामिल हो सकते हैं। ये सभी मोबाइल एप्स और वेबसाइट्स पर पोर्न फ़िल्में शूट कर के डालते रहे हैं।

गहना हिंदी और तेलुगु सिनेमा की फिल्मों के अलावा कई एडवर्टाइजमेंट वीडियोज में भी देखी जाती रही है। उससे शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) की शाम को पूछताछ की गई। उसने अपनी वेबसाइट पर 87 पोर्न/अश्लील-आपत्तिजनक वीडियोज अपलोड की थी, जिन्हें देखने के लिए सब्सक्रिप्शन लेना होता था। इन एप्स के सब्सक्रिप्शन से जुटाए गए 36 लाख रुपए एक बैंक अकाउंट में मिले हैं, जिसे सीज कर दिया गया।

पुलिस ने बताया कि उन्हें 3 ऐसे पीड़ितों की शिकायत मिली है, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पोर्न वीडियोज शूट करने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद मुंबई पुलिस ने मलाड के मढ़ द्वीप स्थित ग्रीन पार्क बंगलो में तलाशी ली।

ट्विटर पर एक्शन लेने की तैयारी में मोदी सरकार: IT मंत्रालय स्वदेशी Koo ऐप पर

सरकार के आदेशों के बावजूद देश-विरोधी गतिविधियों को मंच देने और प्रोत्साहित करने को लेकर ट्विटर और केंद्र सरकार लगातार आमने-सामने हैं। अब ‘युअर स्टोरी’ की एक खबर की मानें तो इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और इसके कई संगठन माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर, से मेड-इन-इंडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘कू’ (Koo) की ओर रुख कर चुके हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, MyGov, Digital India, India Post, NIC, NIELIT, SAMEER, कॉमन सर्विसेज सेंटर, UMANG ऐप, डिजी लॉकर, NIXI, STPI, CDAC, और CMET को इस प्लेटफ़ॉर्म यानी, ‘कू’ पर वेरिफाइड अकाउंट्स बन चुके हैं।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब सरकार खालिस्तानी और भारत-विरोधी अकाउंट को हटाने के अपने आदेशों के उलंघन करने पर ‘ट्विटर’ के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। समाचार चैनल ‘न्यूज़18’ के अनुसार, “जिन ट्विटर अकाउंट पर एक्शन लेने का आदेश दिया गया था वो खालिस्तानी समर्थक, या पाकिस्तान द्वारा समर्थित और विदेशों से संचालित होने वाले अकाउंट हैं। कई खाते भी स्वचालित बॉट्स हैं, जिनका इस्तेमाल किसानों के विरोध के नाम पर गलत सूचना और भड़काउ सामग्री शेयर करने के लिए किया गया था।”

सरकार ने ट्विटर (Twitter) के सीईओ जैक डोर्सी (Jack Patrick Dorsey) की ट्विटर गतिविधि, जो भारत विरोधी पूर्वग्रह का संकेत देती हैं, का भी संज्ञान लिया है। इस पर मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, “यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि कुछ दिनों पहले जैक डोर्सी (Jack Patrick Dorsey) ने किसान विरोध के समर्थन में विदेशी आधारित हस्तियों द्वारा किए गए कई ट्वीट लाइक किए थे। इसे देखते हुए, ट्विटर द्वारा सरकार के आदेशों की अवहेलना कई सवाल खड़े करती है।”

जैसा कि हमने पहले भी बताया था, जैक डोर्सी ने किसान विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में ट्वीट करने के वाली पॉप स्टार रिहाना के ट्वीट को ‘उत्पीड़ितों’ के उत्थान के लिए किया गया एक प्रयास बताते हुए ‘लाइक’ किया था।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में, ट्विटर ने उन अकाउंट को ब्लॉक करने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने एक हैशटैग ट्रेंड किया था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी पर ‘किसान नरसंहार’ का प्रयास करने का आरोप लगाया गया। जनवरी 31, 2021 को भी इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने ट्विटर अकाउंट्स और ट्वीट्स के 257 लिंक की एक सूची ट्विटर को सौंपी थी।

भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस पर हुए दंगों के बाद तनावपूर्ण स्थिति के दौरान हिंसा भड़काने की संभावनाओं के कारण ट्वीट और खातों को ब्लॉक करने का अनुरोध किया, लेकिन ट्विटर ने इसका पालन करने से इनकार कर दिया। इसके बाद, सरकार ने ट्विटर को एक और नोटिस भेजा और अब, उन्होंने अनुरोध किया है कि ऐसे करीब एक हजार भारत विरोधी अकाउंट को ब्लॉक किया जाए जिन्हें भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने चिन्हित किया है।

वहीं, अपने प्लेटफॉर्म पर मनमाने फैसलों को लेकर ट्विटर को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि फ़्रांस भी आक्रोशित है। फ़्रांसिसी राष्ट्रपति इमैनुएल मेक्रों ने हाल ही में कहा कि इस तरह के फैसले लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा पारित कानूनों के अनुसार किए जाने चाहिए और निजी ‘टेक’ दिग्गजों पर नहीं छोड़े जाने चाहिए।

सूत्रों ने यह भी कहा कि ‘ट्विटर ने अभी तक भारत के किसी भी न्यायालय में इनमें से किसी भी आदेश को चुनौती नहीं दी है। तार्किक रूप से कोई भी कंपनी किसी भी सरकारी आदेश के खिलाफ अपील करने के लिए स्वतंत्र है, यदि उसे लगता है कि वह उस आदेश का पालन नहीं कर सकती।’

इस प्रकार, यह भी स्पष्ट है कि ट्विटर लोगों के विचार प्रतिबंधित करने और उन्हें अपनी मनमर्जी से अनुमति देने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जो वर्तमान में राष्ट्रहितों को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।

‘योगी सरकार को बर्खास्त कर लगाएँ राष्ट्रपति शासन’: CJI बोले- आगे बहस की तो भारी जुर्माना लगाएँगे, याचिका खारिज

उत्तर प्रदेश में चल रही योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग करने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है। इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 356 (केंद्र की संघीय सरकार को राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता या संविधान के स्पष्ट उल्लंघन की दशा में राज्य सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने का अधिकार) का प्रयोग करने की माँग की गई थी।

सीआर जया सुकिन नाम के एक अधिवक्ता ने यह याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मनमाने ढंग से गैर-न्यायिक हत्याएँ हो रही हैं। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा इन मामलों में कोई दिशा-निर्देश न जारी किए जाने की भी बात कही। इस पर CJI बोबडे ने पूछा कि वो किन आँकड़ों के आधार पर ऐसा कह रहे हैं?

उन्होंने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता ने अन्य राज्यों के आपराधिक आँकड़ो का अध्ययन किया है? इस पर जया ने दावा किया कि देश में जितनी भी आपराधिक घटनाएँ होती हैं, उनमें से 30% सिर्फ यूपी में ही होते हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सवाल पूछा गया कि इससे वादी के मौलिक अधिकारों का कैसे हनन होता है? इस पर जया सुकिन कहने लगे कि वो भारत देश के नागरिक हैं। संतोषजनक और स्पष्ट जवाब न मिलने पर उन्हें चेतावनी दी गई।

CJI बोबडे ने उन्हें चेताया कि अगर वो आगे इसी तरह बहस करते रहे तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। तत्पश्चात उन्होंने याचिका ख़ारिज कर दी। अपनी याचिका में ने सुकिन ने पिछले 1 वर्ष में यूपी में हुई घटनाओं के आधार पर ये माँग की थी। हाथरस मामला, डॉक्टर कफील खान केस, AMU में ‘पुलिस द्वारा हिंसा और ज्यादती’, CAA विरोधियों के पोस्टर सार्वजनिक करने और गौतम बुद्ध नगर में अस्पताल में बेड की कमी की वजह से एक गर्भवती महिला की मृत्यु जैसी ख़बरों को आधार बनाया था।

साथ ही उन्नाव मामले में पीड़ित परिवार की सुरक्षा में विफल रहने के आरोप के साथ-साथ यूपी को याचिका में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित करार दिया गया था। NCRB (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो) के आँकड़ों को आधार बनाते हुए दावा किया गया था कि भारत में 2019 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,05,861 मामले दर्ज किए गए और इनमें से उत्तर प्रदेश की 59,853 घटनाएँ थीं।

योगी आदित्यनाथ की सरकार पर गैरकानूनी, मनमाने, सनकपन और अनुचित तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा गया था कि सत्ता के अधिकारों के दुरुपयोग हो रहा है और सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक अभिव्यक्ति आज़ादी पर बंदिश है। इतना ही नहीं, दलितों के खिलाफ अत्याचार बढ़ने, जबरन बाल श्रम, ऑनर किलिंग, बेरोजगारी, बेरोजगारी, गरीबी और NGOs पर कार्रवाई सहित कई अन्य आरोप भी लगाए गए थे।

भारत के समर्थन में सचिन-लता-अक्षय: महाराष्ट्र सरकार कराएगी जाँच, मंत्री ने कहा – ‘किस दबाव में लिखा, एक जैसा क्यों

सचिन तेंदुलकर, अक्षय कुमार, लता मंगेशकर, सायना नेहवाल जैसे लोगों ने भारत की संप्रभुता की बात की। कॉन्ग्रेस और NCP के साथ टिकी महाराष्ट्र की सरकार को लेकिन यह रास नहीं आया। अब वो इसकी जाँच करवा रहे हैं कि आखिर एक साथ इतने बड़े भारतीय सेलेब्रिटी एक ही मुद्दे पर ट्वीट कैसे कर सकते हैं।

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख जाँच का आदेश देते हैं। वो कहते हैं – “पूरे दुनिया में यह बात हो रही है। अपने-अपने क्षेत्र के नामचीन लोग जैसे सचिन साब, लता जी, साइना नेहवाल… इनकी अपनी-अपनी सोच है, लेकिन जिस प्रकार की टाइमिंग है, क्या किसी दबाव से इस प्रकार की ट्वीट आई है क्या? साइना नेहवाल और अक्षय कुमार के ट्वीट एकदम एक जैसा ट्वीट है।”

भारत में ‘किसान’ आंदोलन हो रहा है। इसके लिए समर्थन खालिस्तान जैसे आतंकी संगठनों से आ रहा है। और विदेशी ताकतों से भी। इनमें बड़े-बड़े नाम भी शामिल हैं। ये नाम भारत-विरोधी कंटेंट को सोशल मीडिया पर बढ़ावा दे रहे हैं।

इनके विरोध में सचिन तेंदुलकर, अक्षय कुमार, लता मंगेशकर, सायना नेहवाल जैसे लोगों ने भारत की संप्रभुता की बात की।

“भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता है। बाहरी ताकतें दर्शक हो सकती हैं लेकिन प्रतिभागी नहीं। भारतीय भारत को जानते हैं और उन्हें ही भारत के लिए फैसला करना है। आइए एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहें। IndiaTogether #IndiaAgainstPropaganda”

यह ट्वीट सचिन तेंदुलकर ने 3 फरवरी 2021 को किया था। क्यों किया था? क्योंकि भारत के अंदरूनी मामले में विदेशी लोग (बड़े-बड़े नाम, वो भी एक साजिश और प्रपंच के तहत) हस्तक्षेप करने लगे थे।

सचिन के अलावा अक्षय कुमार, लता मंगेशकर, सुरेश रैना, साइना नेहवाल जैसे बड़े नामों ने भी विदेशी ताकतों और प्रोपेगेंडा के खिलाफ अपनी बात सोशल मीडिया पर रखी थी। लेकिन यह महाराष्ट्र सरकार को रास नहीं आई। वजह राजनीतिक है या सच में किसी साजिश की आशंका है महाराष्ट्र की सरकार को… यह सिर्फ वहाँ के गृहमंत्री अनिल देशमुख ही बता सकते हैं।

इससे पहले कॉन्ग्रेस सांसद जसबीर सिंह गिल ने तेंदुलकर पर हमला करते हुए कहा है कि वे ‘भारत रत्न के लायक नहीं हैं’। साथ ही दावा किया है कि सचिन अपने बेटे को आईपीएल टीम में जगह दिलाने के लिए सरकार का समर्थन कर रहे हैं।

बिरयानीजीवी, हार्वर्डजीवी, थप्पड़जीवी…: PM के ‘आंदोलनजीवी’ के बाद मीम्स की बौछार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (फरवरी 8, 2021) को संसद के उच्च सदन राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के तहत हुई चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान किसान आंदोलन की आड़ में हो रही राजनीति को लेकर उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि हमने बुद्धिजीवी सुना था। लेकिन कुछ लोग आंदोलनजीवी बन गए हैं। देश में कुछ भी हो वे वहाँ पहुँच जाते हैं। कभी पर्दे के पीछे और कभी आगे, इनकी पूरी जमात है। ऐसे लोगों की पहचान कर हमें इनसे बचना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले श्रमजीवी और बुद्धिजीवी हुआ करते थे। अब एक नया वर्ग जुड़ गया है- आंदोलनजीवी। ऐसे लोग खुद आंदोलन नहीं चला सकते हैं। लेकिन किसी का आंदोलन चल रहा है तो वहाँ पहुँच सकते हैं। ये आंदोलनकारी ही परजीवी हैं, जो हर जगह मिलते हैं।

प्रधानमंत्री के ‘आंदोलनजीवी’ शब्द का इस्तेमाल करने के बाद सोशल मीडिया में मीम्स की बौछार हो गई है। यूजर्स कुछ लोगों की ‘विशेषता’ को ध्यान में रखते हुए बता रहे हैं कि वे कौन सा जीवी हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर ने सीएए-एनआरसी के खिलाफ शाहीन बाग में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल बिल्किस बानो (दादी) की तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें ‘बिरयानीजीवी’ बताया है।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने NDTV के ‘पत्रकार’ रवीश कुमार की तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें ‘डर का माहौल जीवी’ बताया।

ऐसे ही एक मीम में ‘इच्छाधारी’ प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव को ‘आंदोलनजीवी’ बताया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक मीम में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को लोगों ने ‘थप्पड़जीवी’ का नाम दिया है।

यूजर्स ने NDTV की पूर्व पत्रकार निधि राजदान पर मीम बनाते हुए उन्हें ‘हार्वर्डजीवी’ बताया है।

लोगों ने भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को ‘क्रिटिक्सजीवी’ करार दिया है।

इसी कड़ी में राणा अयूब और आरफा खानम शेरवानी को ‘फोटोशॉपजीवी’ नाम दिया गया है।

प्रशांत भूषण के रूप में देश को मिला पहला ‘आन्दोलनजीवी’, नहीं मालूम UP और हरियाणा किधर हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में ‘आन्दोलनजीवी’ शब्द का प्रयोग किया। पीएम ने राज्यसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों में एक नई जमात सामने आई है- आंदोलनजीवियों की, जो कि वकीलों का आंदोलन हो, छात्रों का आंदोलन हो, सब जगह पहुँच जाते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि ये आंदोलनजीवी परजीवी होते हैं, देश को इन आंदोलनजीवियों से बचाने की जरूरत है। पीएम मोदी के इस बयान के ट्विटर पर चर्चा बनते ही प्रशांत भूषण ने फ़ौरन इसका एक उदाहरण पेश कर दिया, और साबित कर दिया कि वो ना ही श्रमजीवी हैं ना ही बुद्धिजीवी।

दरअसल, ट्विटर पर लेफ्ट-लिबरल्स के मसीहा बनने वाले प्रशांत भूषण ने रविवार (फरवरी 07, 2021) को एक वीडियो रीट्वीट किया जिसमें लिखा था, “चरखी दादरी पर आज किसान आंदोलन।” प्रशांत भूषण ने इसे रीट्वीट करते हुए लिखा, “बंगाल जीतने के चक्कर में शायद भाजपा उत्तर प्रदेश खो दिया है।”

वास्तव में, प्रशांत भूषण को ये जानकारी ही नहीं थी कि चरखी-दादरी उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि हरियाणा राज्य में स्थित है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के कंचन गुप्ता ने प्रशांत भूषण के ट्वीट का स्क्रीनशॉट ट्वीट करते लिखा, “चरखी दादरी हरियाणा में है। याद है 1996 में सऊदी और कज़ाख (कजाकिस्तान) विमान इस जगह पर टकरा गए थे और खेत जली लाशों से भरे हुए थे? RSS कार्यकर्ता तब सबसे पहले मौके पर मदद करने वाले लोग थे और वो मानव अवशेष एकत्र कर रहे थे। मरने वाले यात्रियों में से अधिकांश मुस्लिम थे। उस दिन तुम कहाँ थे?”

कंचन गुप्ता ने लिखा कि वो उस दिन वहाँ मौजूद थे। गौरतलब है कि नवंबर 12, 1996 को चरखी-दादरी जगह पर ही हवा में दो विमान टकरा गए थे। इस विमान हादसे में करीब 349 लोगों की मौत हो गई थी। यात्रियों के शव लगभग 10 किमी के दायरे में फैले थे। यह हादसा देर शाम हुआ था इसलिए बचाव और राहत के काम में काफी दिक्कतें आई थीं और आरएसएस ने तब राहत और बचाव कार्य में मदद की थी।

प्रशांत भूषण का यह ट्वीट प्रधानमंत्री के आज के भाषण के बाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहाँ है कि प्रशांत भूषण ना ही बुद्धिजीवी है क्योंकि उसे चरखी-दादरी तक का पता नहीं, ना ही वह श्रमजीवी है, क्योंकि वो विमान हादसे के दिन भी कहीं मौजूद नहीं थे। बाकी जो एक कैटेगरी अब बचती है, वह है- आन्दोलनजीवी की और उसका सबसे बेहतरीन उदाहरण प्रशांत भूषण हैं ही।

पीएम मोदी ने कहा कि कुछ बुद्धिजीवी होते हैं, लेकिन कुछ लोग आंदोलनजीवी हो गए हैं, देश में कुछ भी हो वो वहाँ पहुँच जाते हैं, कभी पर्दे के पीछे और कभी फ्रंट पर, ऐसे लोगों को पहचानकर हमें इनसे बचना होगा क्योंकि ये आंदोलनजीवी ही परजीवी हैं, जो हर जगह मिलते हैं।

धोती और साड़ी में स्कीइंग… बर्फीली वादियों में गजब का बैलेंस, वायरल हो रहा वीडियो

एक NRI कपल के वीडियोज काफी वायरल हो रहे हैं, जिनमें वो धोती और साड़ी जैसे भारतीय पारंपरिक परिधान पहन कर स्कीइंग करते हुए देखे जा सकते हैं। ये वीडियोज मिनेसोटा के वेल्श गाँव का है। अमेरिका का ये क्षेत्र स्कीइंग के लिए अच्छा डेस्टिनेशन माना जाता है और यहाँ लोग इसीलिए आते भी हैं। मधु और दिव्या नामक पति-पत्नी ने जो वीडियो शूट किए, उन्हें दिव्या ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर डाला है।

इंस्टाग्राम पर दिव्या ने शेयर किया वीडियो

दिव्या ने इन वीडियोज को शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें अपना ध्यान बँटाने के लिए कुछ अलग, कुछ क्रेजी करना पड़ा। इस वीडियो में दोनों पहले स्कीइंग गियर थामे हुए दिखते हैं। जहाँ मधु ने सफ़ेद रंग की धोती पहन रखी है, वहीं दिव्या ने हरे रंग की साड़ी पहनी है। उनके वीडियो को इंस्टाग्राम पर अब तक लगभग 4 लाख लोगों ने देखा है और जम कर प्रशंसा की है। खासकर भारतीय लोग इससे खुश नजर आए।

लाखों लोगों ने देख कर की सराहना

कई कमेंट्स में लोगों ने उन दोनों की सराहना की और उन्हें ‘मेड फॉर एच अदर’ बताया। वहीं कई लोग ‘ओह माय गॉड’ का कमेंट देते हुए देखे गए। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि इस तरह से कोई अमेरिका में कर सकता है। कुछ लोगों ने टिप्पणी की कि उन्होंने आज जो सबसे अच्छी चीज देखी है, वो यही है। लोगों ने विदेश में भारतीय परंपरा को इस तरह से जीवित रखने के लिए उनका धन्यवाद भी किया।

NGO से लेकर बेंगलुरु दंगों की फंडिंग तक: चीन बिना लड़े ही दुनिया जीत लेगा, ताइवान के लेखक ने बताया

‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ (PRC) एक खूनी गृहयुद्ध से जन्मा था, जो कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) द्वारा जीता गया था। विस्तारवादी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए अपनी भौगोलिक सीमाओं के विस्तार का यह अघोषित युद्ध फिर कभी समाप्त ही नहीं हुआ। चीन निरंतर ही अपने इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपने देश के भीतर से लेकर विदेशों को भी विभिन्न तरह से निशाना बनाते रहा है और उसका सबसे पहला लक्ष्य है भारत!

ताइवान के युद्ध विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर केरी गेर्शनेक (Kerry Gershaneck) ने अपनी पुस्तक ‘पॉलिटिकल वॉरफेयर चीन’ (Political Warfare: Strategies for Combating China’s Plan to Win without Fighting) में कम्युनिस्ट नेतृत्व वाले चीन द्वारा ताइवान और दुनिया पर अपना वर्चस्व बनाने के उद्देश्य से अपनाई जा रही रणनीतियों और चीन के संदेशों के बारे में बताया है कि किस तरह से चीन बिना किसी प्रत्यक्ष युद्ध के ही दुनिया जीतने की रणनीति पर काम करता रहा है।

गेर्शेनक की इस पुस्तक के अनुसार, भारत पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के इस राजनीतिक युद्ध का एक प्रमुख लक्ष्य है। उनका मानना है कि पीआरसी का पूरा राजनीतिक युद्ध बल भारत को कमजोर करने से लेकर, एनजीओ की फंडिंग, और संभवतः बेंगलुरु में एक ताइवानी निर्माण फैक्ट्री पर हमला कराने के लिए काम कर रहा है। लेखक ने बेंगलुरु में हुई उस हिंसा की ओर इशारा किया है, जो हाल ही में एप्पल के ताइवानी कांट्रेक्टर कंपनी विस्ट्रोन की फैक्ट्री में की गई थी।

लेखक के अनुसार, नई दिल्ली ने आत्मरक्षा में कुछ कदम उठाए हैं, जैसे कि चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाना। हालाँकि, उनका मानना है कि भारत पर चीनी हमले होते रहेंगे, खासकर अगर भारत को लगता है कि यह चीन की सप्लाई चेन को विस्थापित करने के साथ ही इंडो-पेसिफिक क्षेत्र के लिए सुरक्षा कवच के रूप में उभर सकता है।

पुस्तक के अनुसार, भारत को चीन के इस आक्रामक रुख से निपटने के लिए अपने जैसे देशों को साथ लेकर एक रणनीति बनाने की आवश्यकता है। लेखक का कहना है कि स्वतंत्र दुनिया को अब यह तय करना होगा कि क्या वह बिना लड़े हारने को तैयार है? इस पुस्तक में ऐसे कई अहम फैसलों का सुझाव दिया गया है, जो स्वतंत्र राष्ट्रों को चीन के खिलाफ अपनानी चाहिए। चीनी अधिकारियों पर कार्रवाई से लेकर उनके संस्थानों पर कड़ी पैरवी भी इनमें से कुछ सुझाव हैं।

CCP ने लंबे समय से अपने दुश्मनों के खिलाफ दुष्प्रचार का तरीका अपनायाहै। लेखक का कहना है कि हाल ही के कुछ वर्षों में चीन ने सोशल मीडिया की नई दुनिया में ‘राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक युद्ध’ के द्वारा बड़ी कामयाबी हासिल की और इसका लाभ उठाकर प्रोपेगेंडा के साथ अपने विरोधियों के खिलाफ माहौल बनाया। लेखक का कहना है कि सोशल मीडिया का उपयोग कर चीन ने यह विश्वास पैदा करने की कोशिश की है कि लोकतंत्र में लोगों का विश्वास कमजोर होता रहे और राजनीतिक अस्थिरता बनी रहे।

इसके अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रभुत्व जमाने के लिए पीआरसी ने पीएलए साइबर फोर्स की स्थापना की है, जिसमें 3,00,000 ‘सैनिकों’ के साथ-साथ शायद 2 मिलियन लोगों का एक समूह ’50 सेंट आर्मी’ बनाया है, जिन्हें सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने और सीसीपी के प्रचार के लिए मामूली सी फीस दी जाती है।

सभी ‘नाराज फूफा’ को PM मोदी ने कहा – ‘MSP था, MSP है, MSP रहेगा… बनाएँगे मंडियों को अत्याधुनिक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए राज्यसभा में विपक्षी दलों के ‘शादी वाले फूफाजी’ विशेषण का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि सदन में किसान आंदोलन की भरपूर चर्चा हुई है। ज्यादा से ज्यादा समय जो बात बताई गईं, वो आंदोलन के संबंध में बताई गई। लेकिन, उन्होंने ये भी कहा कि किस बात को लेकर आंदोलन है उस पर सब मौन रहे।

उन्होंने सलाह दी कि जो मूलभूत बात है, अच्छा होता कि उस पर भी चर्चा होती। उन्होंने पूछा कि खेती की मूलभूत समस्या क्या है, उसकी जड़ कहाँ है? उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए कहा कि वो छोटे किसानों की दयनीय स्थिति पर हमेशा चिंता करते थे। पीएम मोदी ने सवाल दागा कि पहले की सरकारों की सोच में छोटा किसान था क्या? जब हम चुनाव आते ही एक कार्यक्रम करते हैं कर्जमाफी, ये वोट का कार्यक्रम है या कर्जमाफी का… ये हिन्दुस्तान का नागरिक भलीभाँति जानता है।

उन्होंने ये भी ध्यान दिलाया कि जब कर्जमाफी की जाती है, तो छोटा किसान उससे वंचित रहता है, उसके नसीब में कुछ नहीं आता है। पहले की फसल बीमा योजना भी छोटे किसानों को नसीब ही नहीं होती थी। यूरिया के लिए भी छोटे किसानों को रात-रात भर लाइन में खड़े रहना पड़ता था, उस पर डंडे चलते थे। अपनी सरकार की उपलब्धि गिनाते हुए उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना से सीधे किसान के खाते में मदद पहुँच रही है। 10 करोड़ ऐसे किसान परिवार हैं, जिनको इसका लाभ मिल गया।

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये उनके खाते में भेजे गये हैं, जिसमें अधिकतर छोटे किसान हैं। साथ ही अफ़सोस जताया कि अगर पश्चिम बंगाल में ये सहायता पहुँचने दी जाती तो ये आँकड़ा कहीं ज्यादा होता। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद सरकार ने कुछ परिवर्तन किया, फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ा दिया ताकि छोटा किसान भी उसका फायदा ले सके। उन्होंने आँकड़े बताए कि पिछले 4-5 साल में फसल बीमा योजना के तहत 90 हजार करोड़ रुपए के क्लेम किसानों को दिए गए है। पीएम ने कहा:

“पहली बार हमने किसान रेल की कल्पना की। छोटा किसान जिसका सामान बिकता नहीं था, आज गाँव का छोटा किसान किसान रेल के माध्यम से मुंबई के बाजार में अपना सामान बेचने लगा, इससे छोटे किसान को फायदा हो रहा है। ‘किसान उड़ान’ के द्वारा हवाई जहाज से जैसे हमारे नॉर्थ-ईस्ट की कितनी बढ़िया-बढ़िया चीजें जो ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अभाव में वहाँ का किसान लाभ नहीं उठा पाता था, आज उसे किसान उड़ान योजना का लाभ मिल रहा है। हर कानून में अच्छे सुझावों के बाद कुछ समय के बाद बदलाव होते हैं। इसलिए अच्छा करने के लिए अच्छे सुझावों के साथ, अच्छे सुधारों की तैयारी के साथ हमें आगे बढ़ना होगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी को मिल कर चलने की सलाह दी और निमंत्रण दिया कि हम देश को आगे बढ़ाने के लिए, कृषि क्षेत्र के विकास के लिए, आंदोलनकारियों को समझाते हुए, हमें देश को आगे ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें एक बार देखना चाहिए कि कृषि परिवर्तन से बदलाव होता है कि नहीं। कोई कमी हो तो उसे ठीक करेंगे, कोई ढिलाई हो तो उसे कसेंगे। साथ ही विश्वास दिलाया कि मंडियाँ और अधिक आधुनिक बनेंगी। उन्होंने कहा, “एमएसपी है, एसएसपी था और एमएसपी रहेगा।”

पीएम मोदी ने सभी को सदन की पवित्रता का ख्याल रखने की सलाह देते हुए आश्वासन दिया कि जिन 80 करोड़ लोगों को सस्ते में राशन दिया जाता है, वो भी लगातार रहेगा। उन्होंने कहा कि एक बड़े परिवार में ऐसा होता है कि शादी-ब्याह में फूफा नाराज़ हो जाते हैं कि हमें नहीं पूछा, नहीं बुलाया, लेकिन मिल-बैठ कर सभी समस्याएँ सुलझा ली जाती हैं। पीएम के इस बयान पर सदन में माहौल काफी हल्का हो गया।

किसान आंदोलन में राजनीति करने वालों पर निशाना साधते हुए PM मोदी ने कहा, “पहले श्रमजीवी और बुद्धिजीवी हुआ करते थे, अब एक नया वर्ग जुड़ गया है – आन्दोलनजीवी… और ये सारे आंदोलनजीवी परजीवी होते हैं।”

81 साल के मौलवी को जमानत: कराया था बाल विवाह, निकाह से पहले ही शादीशुदा शौहर ने जबरन बना लिए थे शारीरिक सम्बन्ध

महाराष्ट्र के ठाणे में बाल-विवाह के मामले में आरोपित 81 वर्षीय मौलाना को अदालत ने गिरफ्तारी से राहत प्रदान की है। उसने एक नाबालिग का निकाह कराया था। स्पेशल POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम) जज केडी शिरभाते ने सोमवार (फ़रवरी 1, 2021) को उसे गिरफ़्तारी पूर्व एंटीसिपेटरी बेल दिया, जिस आदेश की कॉपी शनिवार को उपलब्ध हुई। पीड़िता ने जनवरी में ही शिकायत दर्ज कराई थी।

उस शिकायत में कहा गया था कि उसका निकाह एक व्यक्ति से ठीक कर दिया गया था और दोनों परिवारों ने निर्णय लिया था कि उसके 18 वर्ष के होते ही दोनों का निकाह करा दिया जाएगा। लेकिन, दिसंबर 2017 में उक्त व्यक्ति ने पीड़िता से जबरन शारीरिक सम्बन्ध बनाए। तब तक वो बालिग़ भी नहीं हुई थी। इसके बाद उसने धमकाया कि वो इसी तरह उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाती रहे, वरना अच्छा नहीं होगा।

जनवरी 5, 2019 को आखिरकार उसका निकाह उस व्यक्ति से करा दिया गया। लड़की तब भी बालिग़ नहीं हुई थी, जिससे ये बाल-विवाह की श्रेणी में आता है और भारत के कानून के हिसाब से ये अपराध है। शिकायतकर्ता ने अपनी अर्जी में आरोपितों की सूची में 81 वर्षीय मौलवी का नामा भी दिया था, जिसने निकाह की प्रक्रिया संपन्न कराई। पीड़िता ने ये भी खुलासा किया है कि निकाह के बाद वो 2 बार गर्भवती हुई।

आरोप है कि दोनों बार उसके शौहर ने उसका जबरन गर्भपात करा दिया। कोर्ट के आदेश में पीड़िता की उम्र की चर्चा नहीं की गई है। पीड़िता ने बताया है कि उसके निकाह के 3 महीने बाद ही उसका शौहर एक दूसरी महिला को घर में लेकर आया था। उसने दावा किया कि वो महिला उसकी पहली पत्नी है, जिससे उसने दिसंबर 24, 2018 को निकाह किया था। जबकि वो इससे 1 वर्ष पूर्व ही पीड़िता के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना चुका था।

पीड़िता ने बताया कि उसके शौहर के साथ अक्सर उसका झगड़ा होता था और वो उसकी पिटाई भी करता था। उसने दिसंबर 10, 2020 को इन हरकतों से तंग आकर अपने शौहर का घर छोड़ दिया। फिर जनवरी 2021 में FIR दर्ज कराई। मौलवी ने अपने बचाव में कहा कि पीड़िता की उम्र दस्तावेजों में 18 वर्ष थी और उसने इस्लामी रीति-रिवाजों के हिसाब से सब किया। जज ने उसके रोल को सीमित’ मानते हुए जमानत दे दी।