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मुख्तार अंसारी बोला- हामिद अंसारी के परिवार से हूँ, यूपी मत भेजो: योगी सरकार ने कहा- गैंगस्टर की मदद कर रहा पंजाब

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (8 फरवरी 2021) को मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को पंजाब की जेल से उत्तर प्रदेश ट्रांसफर करने के मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। मीडिया रिपोर्टों के अुनसार यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब की सरकार पर गैंगस्टर को बचाने का आरोप लगाया। वहीं अंसारी ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और अपने परिवार का हवाला देते हुए यूपी नहीं भेजने की गुहार लगाई। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी।

मुख्तार अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि वह एक ऐसे परिवार से है, जिसके सदस्य भारत के स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा थे। उसने हामिद अंसारी से भी अपने संबंध का हवाला दिया।

अंसारी की याचिका में कहा गया, “प्रतिवादी ऐसे परिवार का हिस्सा है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत बड़ा योगदान दिया है। भारत को हामिद अंसारी जैसा नेता दिया जो उपराष्ट्रपति रहे। इसके अलावा बाबा शौकतुल्ला अंसारी ओडिशा के राज्यपाल थे। माननीय न्यायमूर्ति आसिफ अंसारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे।”

यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पंजाब सरकार मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश भेजने का विरोध कर रही है। पंजाब सरकार का कहना है कि मुख्तार अंसारी डिप्रेशन का शिकार है और वो कहता है कि वो स्वतंत्रता सेनानी के परिवार से है। हकीकत में वो गैंगस्टर है और उसने पंजाब में केस के लिए जमानत इसलिए नहीं लगाई क्योंकि वो वहाँ की जेल में खुश है।

उन्होंने कहा कि अंसारी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और मामले यूपी में पेंडिंग हैं। दो साल पहले उसे एक नाबालिग से संबंधित केस में पंजाब लाया गया था और तब से वह यहाँ के जेल में बंद हैं। उसे संबंधित मामले के मद्देनजर यूपी जेल में ट्रांसफर किया जाए। अंसारी यूपी में पेंडिंग केस में पेशी से बच रहा है।

सुप्रीम कोर्ट को सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि पंजाब सरकार कैसे अंसारी का सपोर्ट कर सकती है? पंजाब क्यों अंसारी का बचाव कर रही है? सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अंसारी पर यूपी में गंभीर मामले दर्ज हैं और उसी में समन जारी हुआ है। 

गौरतलब है कि रूपनगर जेल में बंद बाहुबली और माफिया मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले करने से पंजाब सरकार मना कर चुकी है। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कहा गया है कि मुख्तार अंसारी की गैरमौजूदगी की वजह से मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। 

योगी सरकार के मुताबिक़ कई बार गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया गया, लेकिन पंजाब सरकार अब तक इस बात को टालती रही है। पंजाब सरकार स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मुख्तार अंसारी को सौंपने में टालमटोल कर रही है। 

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से भारतीय जनता पार्टी विधायक अलका राय ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा को चिट्ठी लिखकर बाहुबली मुख्तार अंसारी को बचाने का आरोप लगाया था। अलका राय, पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी हैं, जिनकी हत्या का आरोप मुख्तार अंसारी पर लगा था। बीजेपी विधायक अलका ने प्रियंका वाड्रा से भावनात्मक सवाल पूछा था कि उनकी सरकार हत्यारे को क्यों बचा रही है? गौरतलब है कि पंजाब में कॉन्ग्रेस की ही सरकार है।

OLX पर केजरीवाल की बेटी से ठगी, NDTV ने बताकर डिलीट मारी स्टोरी: जानिए, रिपोर्ट में क्या कुछ था

NDTV ने सोमवार (फरवरी 8, 2021) को एक रिपोर्ट पब्लिश की। इसमें मीडिया हाउस ने बताया था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बेटी हर्षिता केजरीवाल ने जब ऑनलाइन मार्केटप्लेस ओएलएक्स (OLX) पर सेकेंड हैंड सोफा बेचने की कोशिश की, तो एक जालसाज ने उसे 34,000 रुपए का चूना लगा दिया

इसमें कहा गया था कि दिल्ली के सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई है और मामले की जाँच की जा रही है। लेकिन, रिपोर्ट प्रकाशित करने के कुछ मिनट बाद NDTV ने अपनी वेबसाइट से इसे हटा लिया।

NDTV deletes story about daughter of Arvind Kejriwal being duped
NDTV की रिपोर्ट, जिसे प्रकाशित होने के कुछ मिनट बाद हटा दिया गया था

NDTV ने इस स्टोरी वाली ट्वीट भी कुछ देर पहले डिलीट कर दी।

NDTV deletes story about daughter of Arvind Kejriwal being duped
NDTV का ट्वीट, जो अब डिलीट कर दिया गया है

इंडिया टीवी ने भी इस रिपोर्ट को पब्लिश किया था, लेकिन फिर बाद में डिलीट कर दिया।

इंडिया टीवी की डिलीट की गई रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित ने हर्षिता को 34,000 रुपए का चूना लगाया। आरोपित ने शुरू में उसका विश्वास हासिल करने के लिए हर्षिता केजरीवाल के खाते में कुछ राशि जमा की थी। बाद में, हर्षिता को भेजे गए एक क्यूआर कोड का उपयोग करते हुए, जालसाज ने उसके खाते से राशि वापस निकाल ली।

NDTV deletes story about daughter of Arvind Kejriwal being duped
NDTV की रिपोर्ट का अंश जो डिलीट कर दी गई है

दिल्ली सिविल लाइंस पुलिस ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की बेटी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है और जाँच चल रही है।

यह स्पष्ट नहीं है कि NDTV ने स्टोरी क्यों हटाई। यह भी साफ नहीं हो पाया है कि यह स्टोरी झूठी थी या एनडीटीवी और अन्य मीडिया घरानों ने AAP के दबाव में रिपोर्ट हटाई है।

‘दीदी! प्लीज मत जाओ’: ट्विटर वाली महिमा कौल के इस्तीफे से ‘फूफा-फूफी’ दुखी, हैशटैग ट्रेंड कराने की होड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (फरवरी 8, 2021) राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के तहत हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों के लिए ‘फूफा-फूफी‘ शब्द का इस्तेमाल किया था। वे बताना चाहते थे कि जिस तरह घरों में आयोजन के वक्त कोई फूफा या फूफी नाराज हो जाती हैं, वही हाल देश के विपक्षी दलों का है। विपक्षी दलों का यही गम ट्विटर की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर (भारत और दक्षिण एशिया) महिमा कौल के इस्तीफे को लेकर भी झलक रहा है।

महिमा कौल ने कथित तौर पर व्यक्तिगत वजहों इस्तीफ़ा दे दिया है। लेकिन उनके चाहने वालों पर उनकी वापसी के लिए इस कदर बेचैन हो गए कि ट्विटर पर हैशटैग #MahimaPleaseDontGo ट्रेंड कराने लगे। 

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीयूष मिश्रा इस बात से बेहद निराश नज़र आए। 

उन्होंने महिमा कौल के समर्थन में हैशटैग ट्रेंड कराने की ज़िम्मेदारी उठा ली। अपने एक ट्वीट में लिखा, ‘दीदी! प्लीज़ मत जाओ’।

पीयूष मिश्रा इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने सीधे ट्विटर के सीईओ (CEO) जैक डोर्सी को टैग किया कि वे महिमा कौल का इस्तीफ़ा नहीं स्वीकार करें। 

फिर डिजिटल दुनिया की इस तात्कालिक क्रांति को आगे बढ़ाते हुए नज़र आए तमाम कॉन्ग्रेसी नेता।  

उन्होंने न जाने किन कारणों से गुरप्रीत वालिया नाम के व्यक्ति को टैग कर दिया, जो खुद को ‘पत्रकार’ बताता है। वह भी महिमा कौल की वापसी के लिए हैशटैग ट्रेंड कराने की कोशिश में जुटा हुआ था। 

उसने दावा किया कि ये हैशटैग उसने ही शुरू किया था और उसने अपने फॉलोवर्स से भी ऐसा करने के लिए कहा था। वालिया एक ‘पत्रकार’ है जो TV24 के लिए काम करता है। 

समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता जूली सिंह ने भी इस पहल में अपना योगदान देने में कसर नहीं छोड़ी।   

इसी तरह आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और स्वघोषित ‘सोशल मीडिया एक्टिविस्ट’ भी इस काम में जुट गए। हालाँकि महिमा कौल ने ऐसी किसी भी अपील पर ध्यान तक नहीं दिया। 

साल 2018 में ट्विटर के मुखिया जैक डोर्सी ने कबूला था कि उनके कर्मचारी वामपंथी विचारधारा की तरफ झुकाव रखते हैं। इसके कुछ ही हफ़्तों बाद महिमा कौल ने अपने पुराने ट्वीट डिलीट करना शुरू कर दिए थे जिसमें उनकी राजनीतिक ‘विचारधारा का झुकाव’ साफ़ नज़र आ रहा था। 

महिमा कौल के पुराने ट्वीट जो अब डिलीट किए जा चुके हैं (साभार: @iankursingh on Twitter)

ऐसे ही 2010-11 के दौरान जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, ट्विटर के एक पूर्व कर्मचारी रहील खुर्शीद ने 15 साल की लड़की का मज़ाक बनाया था। इसकी वजह ये थी कि उस लड़की की राजनीतिक विचारधारा कन्हैया कुमार के विरोध में थी और ये बात खुर्शीद को हज़म नहीं हुई।

‘तस्वीर उसकी करनी बता रही’: दिल्ली दंगों में पुलिस पर पिस्तौल तानने वाले शाहरुख को जमानत नहीं

साल 2020 में दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान जाफराबाद में हेड कॉन्स्टेबल दीपक दहिया पर पिस्तौल तानने के आरोपित शाहरुख पठान को कड़कड़डूमा कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की कोर्ट ने आरोपित की तस्वीर उस दिन घटना में उसकी संलिप्तता और उसके व्यवहार के बारे में बताती हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत ने शाहरुख की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपित का आचरण जमानत देने लायक नहीं है। यह तीसरा मौका है जब उसकी जमानत याचिका खारिज हुई है। अभियोजन पक्ष की तरफ से पेश वकील डीके भाटिया ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि पिछले वर्ष 24 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन और मौजपुर चौक के बीच 66 फुट रोड पर एक गुट जाम लगा रहा था। वहीं दूसरा गुट उन्हें जाम लगाने से रोकने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान दोनों गुट भिड़ गए थे और पथराव होने लगा था। इसी बीच कुछ लोग हवा में पिस्तौल लहराते हुए पुलिस कर्मियों पर फायरिंग करने लगे थे।

वजीराबाद पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के हेड कॉन्स्टेबल दीपक दहिया ने बहादुरी दिखाते हुए फायरिंग कर रहे दंगाइयों को रोकने का प्रयास किया तो उन पर गोली चला दी गई। किसी तरह झुक कर उन्होंने जान बचाई। फिर भी हाथ में पिस्तौल लिए एक युवक उनकी तरफ बढ़ गया। उन्होंने बताया कि जाँच के दौरान वीडियो के जरिए हेड कॉन्स्टेबल पर पिस्तौल तानने वाले युवक की पहचान अरविंद नगर निवासी शाहरुख पठान के रूप में हुई थी। उसे शामली बस अड्डे से गिरफ्तार किया गया था।

कलीम नामक शख्स ने उसे घर में पनाह दी थी। उसे भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जिस कार में शाहरुख पठान फरार हुआ था, वह कार भी शामली के कैराना से बरामद की गई थी। कोर्ट को यह भी बताया गया कि दिसंबर 2019 में शाहरुख ने मेरठ के बाबू वसीम से 35 हजार रुपए में पिस्तौल और 20 कारतूस खरीदे थे।

अभियाेजन पक्ष की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि आरोपित के परिवार का आपराधिक इतिहास रहा है। उसका पिता साबिर अली नशीले पदार्थ के साथ वर्ष 1994 व 1995 में गिरफ्तार हो चुका है। शाहरुख की अम्मी के भी ड्रग तस्करों से ताल्लुकात हैं। साथ ही मौसा भी ड्रग तस्कर है। अभियोजन पक्ष पहले ही साक्ष्य के रूप में वीडियो फुटेज, आरोपित के घर से बरामद पिस्तौल और उसके कपड़े कोर्ट में पेश कर चुका है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

गौरतलब है कि शाहरुख पठान के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 216, 186, 307, 353 और 34 आईपीसी और धारा 25 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध में 23 और 24 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे से ठीक पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा हुई थी। इस दौरान जाफराबाद-मौजपुर इलाके में लोगों को भड़काने और पुलिस पर पिस्तौल तानने के आरोपित शाहरुख को यूपी के शामली से 3 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। 

हिंसा के दौरान शाहरुख ने जाफराबाद इलाके में 8 राउंड फायरिंग की थी। उसके पास से एक पिस्तौल तथा दो कारतूस जब्त किए गए थे। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में शाहरुख के घर से पिस्टल और तीन कारतूस बरामद किए थे। 

‘दर्जी चाचा’ मोहम्मद सोनू और ‘अम्मा’ उमा ने 3 बच्चों को किया टॉर्चर, उनकी माँ और ट्यूटर को मार डाला

गाजियाबाद में 29 साल की महिला और 16 साल की किशोरी की हत्या तथा तीन बच्चों को प्रताड़ित करने के मामले में पुलिस ने मोहम्मद सोनू और उमा सिंह को गिरफ्तार किया है। गाजियाबाद में सरस्वती विहार इलाके में शनिवार (फरवरी 6, 2021) रात यह घटना अंजाम दी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों की पहचान डॉली ठाकुर (32) और अंशु कुमारी (16) के रूप में की गई है। सरस्वती विहार की रहने वाली डॉली अपने तीन बच्चों के साथ अपने घर पर थी। कक्षा 9 की छात्रा और प्राइवेट ट्यूटर अंशु कुमारी घटना के समय उनके तीन बच्चों को पढ़ा रही थी। आरोपित उमा, जो कि डॉली की दूर की रिश्तेदार है ने अपने प्रेमी मोहम्मद सोनू के साथ मिलकर पीड़िता को लूटने की योजना बनाई थी।

दोनों शनिवार रात 8:30 बजे डॉली के घर पहुँचे और पीड़िता को बातों में उलझा दिया। चाय पीने के बाद उन्होंने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया और बंदूक की नोक पर डॉली को जबरदस्ती उठा लिया। इसके बाद सोनू ने .32 कैलिबर पिस्टल का इस्तेमाल कर डॉली के पेट में और किशोरी अंशु के सिर में गोली मारी। इसके बाद आरोपित ने 5 वर्षीय रुद्र और उसकी बहनों, गौरी और मीनाक्षी को मारने की कोशिश की। लेकिन, मोहम्मद सोनू की बंदूक जाम हो गई और उसने तीनों बच्चों को क्रूर यातना दिया।

आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज, एक पीड़िता की हालत गंभीर

अपराधी ने एक पेचकस, पीसने वाला पत्थर और चाकू से बच्चों को घातक चोटें पहुँचाई। इसके बाद उन लोगों को घायल अवस्था में छोड़ कर उमा और सोनू वहाँ से भाग गए। रात के लगभग 9:30 बजे डॉली के पति महेश ठाकुर और उनके ससुर घर लौटे तो उन्होंने डॉली को मृत और तीनों बच्चों को घायल अवस्था में देखा। उन्होंने मसूरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की।

आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 307, 380, 394 और 411के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और शस्त्र अधिनियम की प्रासंगिक धाराएँ लगाई गई। बच्चों को चिकित्सा के लिए नेहरू नगर के यशोदा अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि 9 साल की मीनाक्षी की हालत गंभीर है, जबकि रुद्र और गौरी की हालत स्थिर है।

आरोपित उमा को उसके आवास से गिरफ्तार किया

एसपी (ग्रामीण) इराज राजा ने बताया, “सबसे महत्वपूर्ण सुराग दो लड़कियों में से एक ने दिया था, जिन्होंने बताया कि ‘अम्मा’ (उमा सिंह का जिक्र करते हुए) घर आए थे। बच्चे संदिग्ध महिला को इसी नाम से बुलाते थे। उन्होंने मोहम्मद सोनू को भी ‘दर्जी चाचा’ कहा।”

इस बीच, पुलिस ने लाल क्वार्टर इलाके में उमा के घर पर छापा मारा जहाँ उसने अपना अपराध कबूल किया। उसने एक वीडियो बयान में कहा, “डॉली मेरी सास की पोती थी और उसके बच्चे मुझे ‘अम्मा’ कहते थे। हम लंबे समय से डकैती की योजना बना रहे थे। शनिवार की रात हम डॉली के घर गए और वहाँ चाय भी पी। बाद में सोनू ने उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया और पहले किशोर लड़की और फिर डॉली की गोली मारकर हत्या कर दी। फिर, उसने चाकू और रसोई से पीसने वाला पत्थर लेकर बच्चों को मारा।”

एक मुठभेड़ के बाद पुलिस ने मोहम्मद सोनू को पकड़ लिया

उमा के विपरीत, मोहम्मद सोनू गाजियाबाद से भागने की योजना बना रहा था। उसे दबोचने के लिए कुल पाँच पुलिस दल तैनात थे। रविवार (फरवरी 7, 2021) को, जब उसे डासना के पास पुलिस ने देखा, तो आरोपित ने गोलीबारी की। पुलिस द्वारा जवाबी कार्रवाई के बाद सोनू जख्मी हो गया और उसे पकड़ लिया गया। पुलिस ने उसके पास से नकदी, गहने और एक पिस्तौल बरामद की

सत्ता में आए तो केरल में लव जिहाद के खिलाफ कानून, ईसाई संगठन और चर्च भी कर रहे माँग: BJP

केरल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा (BJP) ने कहा है कि यदि वह राज्य की सत्ता में आती है तो ग्रूमिंग जिहाद/लव जिहाद के खिलाफ कानून लाएगी। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि केरल में राजग गठबंधन के सत्ता में आने पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारित कानून की तर्ज पर धर्मांतरण विरोधी कानून बनया जाएगा।

भाजपा की केरल इकाई के प्रमुख ने कहा, “लव जिहाद एक गंभीर चिंता का विषय है। हिंदू संगठनों के अलावा, ईसाई संगठन और चर्च भी माँग (लव जिहाद के खिलाफ कानून) कर रहे हैं। हम इसे अपने घोषणा-पत्र (आगामी विधानसभा चुनाव के लिए) में शामिल करने की योजना बना रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की तरह हम भी लव जिहाद के खिलाफ कानून लाएँगे।” बता दें कि केरल में अप्रैल-मई में चुनाव होने वाले हैं।

गौरतलब है कि दिसंबर 2009 में खुद केरल हाईकोर्ट ने सरकार को ‘लव जिहाद’ की रोकथाम के लिए कानून बनाने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने कहा था कि कुछ पुलिस रिपोर्ट्स के हिसाब से ये स्पष्ट है कि लड़कियों के धर्मान्तरण के लिए साजिशन प्रयास किया गया और इसके पीछे कुछ संगठनों का हाथ भी दिख रहा है।

पिछले दिनों केरल में कैथोलिक पादरियों के एक संगठन ने कहा था कि ‘लव जिहाद’ एक वास्तविक समस्या है। केरल के चर्च ने इसके पीछे ISIS का हाथ बताते हुए कहा था कि ‘लव जिहाद’ के जरिए कई महिलाओं का जबरन धर्मान्तरण हो रहा है। केरल के चर्च का कहना था कि कुछ महीनों पहले केरल के जिन 21 लोगों को ISIS में शामिल कराया गया था, उनमें से आधे ईसाई थे। पादरियों का कहना था कि ‘लव जिहाद’ से सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को ठेस पहुँच रही है। उनका ये भी आरोप था कि केरल का पुलिस-प्रशासन इस खतरे से निपटने को गंभीर नहीं है।

जब केरल के चर्चों ने ‘लव जिहाद’ को लेकर चर्चा शुरू की तो वामपंथी मीडिया घबरा गया और उसने इसे पादरियों पर ही हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप मढ़ दिया। रवीश कुमार ने लव जिहाद को ‘हिन्दू-मुस्लिम सिलेबस का हिस्सा’ भी बता दिया। रवीश कुमार ने केरल में ‘लव जिहाद’ के एक भी मामले साबित न होने की बात कही तो ‘Scroll’ इसे कंस्पिरेसी थ्योरी बताया।

जिस बच्चे के सर से उठ गया पिता का साया, माँ भी छोड़ गई… योगी सरकार ने उठाया पढ़ने-रहने-खाने का दायित्व

उत्तर प्रदेश के मथुरा में गरीबी से जूझ रहे एक बच्चे की मदद के लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार आगे आई है। उसके खाने-पाने से लेकर पढ़ाई-लिखाई की भी समुचित व्यवस्था की है, ताकि आर्थिक स्थिति उसके भविष्य के आड़े न आए। दरअसल, रश्मि शर्मा नामक ट्विटर यूजर ने एक वीडियो अपलोड किया था। इसमें एक बच्चा चूल्हे पर भोजन पकाते दिख रहा था और कोई व्यक्ति उससे बातचीत करते हुए वीडियो बनाता है।

उस व्यक्ति ने बच्चे से नाम पूछा, जिसके जवाब में उसने बताया कि उसका नाम दानी है। इसके बाद उससे पूछा गया कि वो खाना क्यों बना रहा है? इसके जवाब में उसने कहा कि उसकी माँ उसके साथ नहीं रहती है और उसके पिता की मृत्यु तभी हो चुकी है, जब वो काफी छोटा था। उससे पूछा गया कि वो काम क्या करता है, तो उसने बताया कि वो अपना पेट पालने के लिए मजदूरी करता है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि उसके पास मिट्टी का एक चूल्हा है। रोटी पकाने के लिए तवा तक नहीं है। इसके कारण वह प्लेट को ही आँच पर डाल कर रोटी पका रहा था। वीडियो में उसने अपने सोने की जगह दिखाई, जहाँ उसे छत भी नसीब नहीं थी।

उस बच्चे का घर पूरी तरह से जर्जर था। उसके पिता की तस्वीर रखी हुई थी और उसके सामने उसने दीया भी जला रखा था। लेकिन काफी जर्जर होने के कारण घर में कोई भी दुर्घटना हो सकती थी। ये वीडियो मथुरा के शेरगढ़ छाता का था। रश्मि शर्मा ने इसे अपलोड करते हुए कहा कि इस बच्चे का कोई अपना नहीं है। उन्होंने उसका दर्द साझा करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से ही सरकार से मदद की गुहार लगाई।

जैसे ही इस वीडियो पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी की नज़र पड़ी, उन्होंने बच्चे की मदद के लिए प्रयास शुरू किए। बाद में उन्होंने जानकारी दी कि मथुरा के जिलाधिकारी के प्रयासों से बच्चे का स्कूल में प्रवेश करा दिया गया है और योगी सरकार के दखल के बाद बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने ली है। उन्होंने बताया कि सरकारी व्यवस्था व सामाजिक संगठनों की मदद से भी उसे हर संभव सहायता देने का प्रयास किया जा रहा है।

मथुरा के शेरगढ़ स्थित ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ में उसका दाखिला भी करा दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देश में लिखा है कि बच्चे की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, उसके पास जमीन और कमाई का कोई जरिया भी नहीं है, उसका अपना कोई नहीं है- इसलिए, विद्यालय के प्रधानाचार्य ने उसकी शिक्षा निःशुल्क करने का निर्णय लिया है। 11 वर्षीय बच्चे का दाखिला कक्षा 3 में कराया गया। प्रधानाचार्य ने उसके उज्जवल भविष्य की भी कामना की।

इन सबके बावजूद कुछ ‘विरोधजीवी’ योगी सरकार को बदनाम करने में लगे रहते हैं। सीआर जया सुकिन नाम के एक अधिवक्ता ने उत्तर प्रदेश में अपराध बढ़ने, गैर-न्यायिक हत्याएँ होने और दलितों व महिलाओं पर अत्याचार होने के आरोप लगाते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग करने वाली याचिका दायर की थी।  याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी।

पाकिस्तान के 365 मंदिरों में से 287 पर भू माफियाओं का कब्जा: Pak सुप्रीम कोर्ट में शोएब आयोग की रिपोर्ट

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को किस तरह के हालातों का सामना करना पड़ता है, ये सभी जानते हैं। अक्सर अल्पसंख्यक समुदाय के साथ अत्याचार और प्रताड़ना की ख़बरें सामने आती हैं लेकिन अब इस बात की पुष्टि काफी बड़े पैमाने पर हुई है। दरअसल पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने एक आयोग बनाया था। इस आयोग ने पाकिस्तान में मौजूद मंदिरों की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। 

पाकिस्तानी मीडिया समूह ‘डॉन’ (Dawn) के मुताबिक़ एक सदस्य वाले इस आयोग के मुखिया थे डॉ. शोएब संदल। इन्होंने पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों की स्थिति पर यह रिपोर्ट तैयार की।

आयोग ने हिन्दू मंदिरों की स्थिति पर आधारित रिपोर्ट 5 फरवरी 2021 को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की। रिपोर्ट में बताया गया है कि इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB: Evacuee Trust Property Board) लगभग आधे से अधिक प्राचीन हिन्दू मंदिरों को सुरक्षित रखने में असफल रहा है। 

आयोग ने 6 जनवरी को चकवल स्थित ‘कटस राज मंदिर’ और 7 जनवरी को मुल्तान स्थित ‘प्रहलाद मंदिर’ का दौरा किया था। रिपोर्ट के भीतर पाकिस्तान स्थित 4 प्राचीन हिन्दू स्थलों में 2 की जानकारी दी गई है। बताया गया है कि कैसे पिछले कुछ समय में इनका काफी नुकसान हुआ है।

रिपोर्ट में इन धार्मिक स्थलों की तस्वीरें भी शामिल की गई हैं। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इस आयोग में 3 सहायक सदस्य भी शामिल किए गए थे – डॉ. रमेश वंकवानी, साकिब जिलानी और पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल। 

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ETPB को आदेश दे कि वो खैबर पख्तूनखवा सरकार के साथ मिल कर, खंडित मंदिर/समाधि ‘टेरी’ का पुनर्निर्माण शुरू करे। इसके अलावा रिपोर्ट में हिंगलाज मंदिर (लसबेला), प्रहलाद मंदिर (मुल्तान), कटस राज मंदिर (चकवल) और टेरी मंदिर (करक) के पुनर्निर्माण की बात भी कही गई है।

शोएब संदल की रिपोर्ट के मुताबिक़ ETPB अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिए। यह जरूरी है क्योंकि इसी आधार पर हिन्दू और सिखों के धार्मिक स्थलों के हालात सुधारने के लिए पहल की जा सकेगी। 

दरअसल पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को ETPB को आदेश दिया था। इसके तहत उसके दायरे में जितने भी हिन्दुओं के मंदिर और सिखों के गुरुद्वारे आते हैं, उसकी जानकारी प्रदान करनी थी। इसके बाद आयोग ने 12 जनवरी को इस मामले में ETPB से संपर्क किया, जिससे अगली सुनवाई तक सम्बंधित जानकारी उपलब्ध हो सके।

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ETPB की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। 25 जनवरी को ETPB ने एक रिपोर्ट पेश की लेकिन उसमें भी पूरी जानकारी नहीं दी गई थी और आयोग द्वारा तय किए गए प्रारूप को भी नज़रअंदाज़ किया गया था। 

ETPB द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ पाकिस्तान में फ़िलहाल लगभग 365 मंदिर हैं, जिनमें से ETPB सिर्फ 13 मंदिरों का रखरखाव करता है। इसके अलावा लगभग 65 मंदिरों की देखभाल हिन्दू समुदाय के लोग खुद करते हैं और 287 मंदिरों पर भू माफ़ियाओं का कब्ज़ा है।

रिपोर्ट में ETPB पर और भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बीते 73 सालों में इनका प्रयास सिर्फ प्रवासी अल्पसंख्यकों की कीमती संपत्ति पर कब्ज़ा करना था। छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक अल्पसंख्यक समुदाय के मंदिरों, पूजा स्थलों और भी कई प्रकार के धार्मिक स्थलों पर ETPB का कब्ज़ा है। 

हाल ही में पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत ने खैबर पख्तूनखवा स्थित जमींदोज़ किए गए लगभग एक सदी पुराने मंदिर को नए सिरे से बनाने का आदेश दिया था। दिसंबर 2020 के दौरान कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने इस मंदिर पर हमला करके इसे आग के हवाले कर दिया था। इस मुद्दे पर पाकिस्तान की वैश्विक स्तर पर आलोचना और फ़ज़ीहत हुई थी।   

उत्तर प्रदेश: बदायूँ में पुजारी की धारदार हथियार से गोदकर हत्या, मंदिर में खून से लथपथ शव मिला

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में एक मंदिर के पुजारी की धारदार हथियार से गोदकर हत्या कर दी गई। वारदात इस्लामनगर थाना क्षेत्र की है। ‘सखी बाबा’ के नाम से मशहूर पुजारी जय सिंह यादव पिछले 45 वर्षो से मंदिर में सेवारत थे और साड़ी और चूड़ियाँ पहनकर ‘देवी काली’ की तरह वेशभूषा में रहते थे।

सूचना पाकर पहुँची पुलिस मौका-ए-वारदात की गहनता से पड़ताल कर रही है। पुलिस ने बताया कि आरोपित रामवीर यादव, फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें तैनात की गई हैं। वह उसी इलाके का रहने वाला है। पुलिस ने कहा, “किस इरादे से हत्या की गई है यह अभी भी अस्पष्ट है।”

इस्लामनगर थाना क्षेत्र के मोहजुद्दीनगर ढकनगला गाँव स्थित मंदिर में शनिवार (फरवरी 06, 2021) सुबह लोग पूजा-पाठ के लिए पहुँचे तो 75 साल के जय सिंह का खून से लथपथ शव मिला। इस घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

सखी बाबा मंदिर परिसर में ही झोपड़ी बनाकर रहते थे। खबरों के मुताबिक, शनिवार को रामवीर यादव मंदिर में सखी बाबा से मिलने आया था। इस दौरान दोनों के बीच गरमागरम बहस हुई। तभी यादव ने अचानक से चाकू निकाला और सखी बाबा की हत्या कर दी। इसके बाद वो वहाँ से भाग गया। ग्रामीणों ने आरोपित को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह उनसे बच कर भाग निकला।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने कहा, “पुरानी रंजिश के चलते रामवीर यादव ने चाकू घोंपकर सखी बाबा की हत्या कर दी है। रामवीर यहीं का रहने वाला है। हमने उस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया है और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हत्या के पीछे का कारण अभी भी स्पष्ट नहीं है। हमने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और उनके रिश्तेदारों को सूचित कर दिया है।”

लखनऊ में पुजारी की निर्मम हत्या

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाहरी इलाके में शिवपुर गाँव में एक शिव मंदिर के 85 वर्षीय पुजारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुजारी फकीरे दास का खून से लथपथ शव बुधवार (जनवरी 20, 2021) को मंदिर परिसर में उनकी झोपड़ी के अंदर मिला था। पुलिस के अनुसार पुजारी के सिर पर चोट के निशान थे। एसपी ने कहा था, “चोरी के कोई निशान नहीं हैं। मंदिर की दान पेटी में रखी नकदी भी चोरी नहीं हुई है।” पुजारी मूल रूप से सुल्तानपुर जिले के रहने वाले थे।

Instagram पर कमलनाथ (कॉन्ग्रेसी और पूर्व CM) जिसे फॉलो करते हैं, उसे आप घर-परिवार के बीच नहीं देख सकते

जन प्रतिनिधियों का सोशल मीडिया पर सक्रिय होना जितना स्वाभाविक होता है, उतना ही ज़रूरी भी। लिहाज़ा हर राजनीतिक दल के नेता सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं लेकिन जब एक वरिष्ठ नेता ज़रूरत से ज़्यादा सक्रिय हो जाएँ तब? तब हादसा होता है, जो कमलनाथ के साथ हुआ है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ भी कई सोशल मीडिया मंचों पर सक्रिय हैं। उन तमाम सोशल मीडिया मंचों में एक है इन्स्टाग्राम (instagram)। आभासी दुनिया (virtual world) का ‘फोटो/वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म’। 

इन्स्टाग्राम पर दो विकल्प होते हैं – पहला किसी को फॉलो (follow) करना और दूसरा फॉलो किया जाना। इन्स्टाग्राम पर कमलनाथ के लगभग 2.10 लाख फॉलोवर हैं। बदले में वो सिर्फ 17 लोगों को फॉलो करते हैं।

इन 17 लोगों में सिर्फ कुछ ही ऐसे एकाउंट हैं, जिनकी प्रोफाइल पर ‘ब्लू टिक’ नहीं है लेकिन हैरानी की बात ये नहीं है। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता की ‘फॉलो लिस्ट’ में तीसरी प्रोफाइल ऐसी है, जो उतनी सामान्य नहीं नज़र आती है। 

कमलनाथ द्वारा फॉलो किया जाने वाला एकाउंट

उस प्रोफाइल/पेज का नाम है- करोना वायरल ऑफिशियल (karona viral official)। नाम से ही स्पष्ट है कि इसका न तो कॉन्ग्रेस से लेना देना है और न ही राजनीति या समाज से सरोकार है।

लगभग 25000 फॉलोवर वाले इस पेज पर ऐसे मिजाज़ का ‘कंटेंट’ साझा किया गया है, जो सार्वजनिक मंच पर दिखाया तक नहीं जा सकता है। ऐसी तस्वीरें, ऐसे वीडियो और ऐसे पोस्ट हैं, जो यहाँ दिखाने लायक कतई नहीं हैं। न जाने क्या लाचारी रही होगी ‘माननीय’ कमलनाथ जी की इस पेज को फॉलो करने की!

कमलनाथ द्वारा फॉलो किया जाने वाला एकाउंट

मज़े की बात ये है कि इस एकाउंट का नाम ‘करोना वायरल ऑफिशियल’ है। कोई भी आम नागरिक इस भ्रम में पड़ सकता है कि इस पर महामारी से संबंधित कोई अहम जानकारी होगी या जनहित से जुड़ी बातें मौजूद होंगी।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने फॉलो किया है तो कुछ ‘सामाजिक-राजनीतिक चेतना’ से लब्ध बात होगी लेकिन जनता का दुर्भाग्य! पेज खोलते ही ऐसे गंदे-गंदे पोस्ट नज़र आते हैं, जिन्हें लेकर सार्वजनिक मंचों पर चर्चा तक नहीं की जा सकती है। चर्चा तो दूर यहाँ शेयर तक नहीं किया जा सकता है।

खैर कमलनाथ जी दिग्गज नेता हैं, होगा कोई निजी कारण जो जनता की समझ से बाहर है। 

ऐसे ही 2020 के मार्च महीने में कमलनाथ को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा छिड़ी हुई थी। दरअसल मार्च के अंतिम हफ्ते में आइफा (iifa) होना था, शहर तय किया गया था इंदौर! इसके पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक कार्यक्रम हो चुका था, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।

इस तस्वीर में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और जैक्लीन फर्नांडीस भी मौजूद थे। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों का प्रभाव कुछ इस कदर पड़ा कि ट्विटर पर ‘कमरनाथ’ ट्रेंड करना लगा। जिसकी वजह इस तस्वीर में साफ़ देखी जा सकती है। 

क्यों ट्रेंड कर रहा था ‘कमरनाथ’

इसके अलावा आइफा के आयोजन की काफी आलोचना हुई थी। पहला देश में कोरोना महामारी दस्तक दे चुकी थी और दूसरा इस आयोजन की लिए तय किया गया 700 करोड़ का खर्च। फ़िलहाल बड़ी बात ये है कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता एक ऐसा पेज फॉलो करते हैं, जिसका नाम भले ‘करोना वायरल’ है लेकिन कोरोना से शायद ही कोई लेना देना नज़र आए।