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‘लोकतंत्र की हत्या’ गिरोह को संसद में PM मोदी ने दिया करारा जवाब, नेताजी बोस को बताया ‘प्रथम प्रधानमंत्री’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (फ़रवरी 8, 2021) को राज्यसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। संसद के उच्च-सदन में अभिभाषण पर चर्चा शुक्रवार को ही ख़त्म हो गई थी। प्रधानमंत्री का ये सम्बोधन ऐसे समय में हुआ, जब दिल्ली और आसपास के इलाकों में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ संसद में बहस का मुद्दा बना रहा। वहीं असम और पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरा विश्व अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है और शायद ही किसी ने सोचा होगा कि मानव जाति को ऐसे कठिन दौर से गुजरना होगा, ऐसी चुनौतियों के बीच। उन्होंने कहा कि जब हम पूरी दुनिया को देखते हैं और फिर भारत की तरफ ध्यान देते हैं तो पता चलता है कि हमारा देश युवा प्रतिभाओं के लिए मौकों का देश बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत आज एक युवा, उत्साही और मेहनती देश है।

पीएम मोदी ने 13-14 घंटे तक 50 से अधिक सदस्यों द्वारा अपने विचार रखने को लेकर धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अनेक चुनौतियों के बीच राष्ट्रपति का इस दशक का प्रथम भाषण हुआ। लेकिन, ये भी सही है जब पूरे विश्व पटल की तरफ देखते हैं, भारत के युवा मन को देखते हैं तो ऐसा लगता है कि आज भारत सच्चे में एक अवसरों की भूमि है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि अनेक अवसर हमारा इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए ये भी एक अवसर है कि हम आजादी के 75 वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, ये अपने आप में एक प्रेरक अवसर है। साथ ही लोगों से अपील की कि हम जहाँ भी, जिस रूप में हों, माँ भारती की संतान के रूप में इस आजादी के 75वें पर्व को हमें प्रेरणा का पर्व मनाना चाहिए।

साथ ही कहा कि भारत के लिए दुनिया ने बहुत आशंकाएँ जताई थीं और विश्व बहुत चिंतित था कि अगर कोरोना की इस महामारी में अगर भारत अपने आप को संभाल नहीं पाया तो न सिर्फ भारत पूरी मानव जाति के लिए कितना बड़ा संकट आ जाएगा।

प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा कि कोरोना की लड़ाई जीतने का यश किसी सरकार को नहीं जाता है, किसी व्यक्ति को नहीं जाता है, लेकिन पूरे हिंदुस्तान को तो जाता है। उन्होंने पूछा कि गर्व करने में क्या जाता है? विश्व के सामने आत्मविश्वास से बोलने में क्या जाता है? उन्होंने लोकतंत्र पर शक उठाने वालों को करारा जवाब देने के लिए नेताजी का उद्बोधन साझा किया। उन्होंने कहा कि हमने अपने युवा पीढ़ी को ये नहीं दिखाया कि हम लोकतंत्र की जननी हैं।

“हमारा लोकतंत्र किसी भी मायने में पश्चिमी संस्थान नहीं है, ये एक मानव संस्थान है। भारत का इतिहास लोकतांत्रिक संस्थानों से भरा पड़ा है। प्राचीन भारत में 81 लोकतंत्र का वर्णन मिलता है। आज इस लोकतंत्र पर चौतरफा हमला हो रहा है। ये न तो आक्रामक है, न संकीर्ण है। ये सत्यम, शिवम्, सुंदरम से प्रेरित है।” – पीएम मोदी ने कहा कि ये बयान ‘आज़ादी हिन्द फ़ौज के प्रथम सरकार के प्रथम प्रधानमंत्री’ नेताजी सुभास चंद्र बोस ने दिया था।

उन्होंने कहा कि जब दुनिया भर में निराशा का माहौल है, भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार बढ़ रहा है, अन्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है और इंटरनेट यूजरों के मामले में हम दूसरे बड़े देश हैं। उन्होंने कहा कि अब देश में निवेश बढ़ रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2 वर्ष पहले इसी सदन में कुछ लोग कह रहे थे कि लोगों के पास मोबाइल फोन कहाँ है, डिजिटल लेनदेन कैसे होगा लेकिन अब हर महीने 4 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन डिजिटली हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यहाँ की धरती पर हुए स्टार्टअप्स की जयजयकार दुनिया कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अक्षय ऊर्जा से लेकर जल-नभ और थल तक भारत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने संसद में 2014 में दिए अपने पहले भाषण की याद दिलाई, जब उन्होंने अपनी सरकार को गरीबों को समर्पित बताया था। उन्होंने कोरोना के दौरान करोड़ों लोगों को अनाज दिए जाने से लेकर अपनी अन्य योजनाओं के बारे में गिनाया।

उन्होंने कहा कि इस कोरोना काल में भारत ने वैश्विक संबंधों में एक विशिष्ट स्थान बनाया है, वैसे ही भारत ने हमारे फेडरल स्ट्रक्चर को इस कोरोना काल में, हमारी अंतर्भूत ताकत क्या है, संकट के समय हम कैसे मिल कर काम कर सकते हैं, ये केंद्र और रज्य सरकार ने मिल कर कर दिखाया है। साथ ही कहा कि भारत का लोकतंत्र ऐसा नहीं है कि जिसकी खाल हम इस तरह से उधेड़ सकते हैं। देश के नागरिक कभी इसे नहीं मानेंगे।

प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि चुनौतियाँ तो हैं, लेकिन हमें तय करना है कि हम समस्या का हिस्सा बनना चाहते हैं या समाधान का माध्यम बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि जाने-अनजाने में हमने नेताजी की भावना को, उनके आदर्शों को भुला दिया है। उसका परिणाम है कि आज हम ही, खुद को कोसने लगे हैं। हमने अपनी युवा पीढ़ी को सिखाया नहीं कि ये देश लोकतंत्र की जननी है। हमें ये बात नई पीढ़ी को सिखानी है।

‘दुनिया की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले मुल्क की सड़कों पर खून की बाढ़, बहुत बड़ा अपशकुन’ : FACT CHECK

इंडोनेशिया की सड़कों पर कुछ लाल-लाल सा बहता दिख रहा है, जिसकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। जहाँ कई लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर अपशकुन के रूप में देखा, वहीं कुछ लोगों ने बाइबिल की बातें करते हुए इसे ‘खून की बाढ़’ बता खतरे की आशंका जताई। दुनिया ख़त्म होने से लेकर खून की बारिश तक, न जाने लोगों ने कैसी-कैसी बातें की। इंडोनेशिया में भारी बारिश हुई है और कई इलाकों में अभी भी बाढ़ की स्थिति है।

आपको बता दें कि ये तस्वीरें वास्तविक हैं। ये घटना जेंग्गोट की है। ये गाँव पेकालोंगन क्षेत्र की है। ये क्षेत्र ‘Batik’ के निर्माण के लिए खासा प्रसिद्ध है, जो एक वैक्स-रेजिस्ट डाईंग है। इसका उपयोग विभिन्न वस्तुओं के रंगरोगन में किया जाता रहा है। व्हाट्सएप्प पर भी वायरल हो रहे एक संदेश में कहा जा रहा है, “दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया की सड़कें खून से लाल है। कोई जवाब है इसका?”

इंडोनेशिया में सड़कों पर ‘खून फैलने’ की अफवाह

अब आपको बताते हैं कि इसकी सच्चाई क्या है। इससे पहले ये बताना ज़रूरी है कि कुछ ही महीनों पहले इंडोनेशिया की सड़कों पर हरे रंग का द्रव्य बहता हुआ दिखा था। असल में जो इंडोनेशिया की सड़कों पर बह रहा है, वो ‘बाटिक डाई’ का ही कमाल ही है। वहाँ की कई फैक्ट्रियों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिसमें बाटिक डाई मिक्स हो गया। इससे जिस रंग का डाई था, उसी रंग का पानी भी बन गया और वो पानी फिर सड़कों पर बह निकला।

इंडोनेशिया के बोर्नेओ द्वीप पर अब तक 15 से अभी अधिक लोगों की बाढ़ के कारण मौत हो चुकी है और जनवरी महीने में ही हजारों लोगों को वहाँ से स्थानांतरित किया जा चुका है। इंडोनेशिया में बाढ़ के कारण भूस्खलन भी हो रहा है। 17,000 द्वीपों वाले इस देश के अधिकतर लोग पहाड़ों या फिर नदी के किनारे बने मैदानों में निवास करते हैं। अधिकारियों ने कहा है कि बारिश के और पानी के साथ मिलने के बाद ये लाल रंग गायब हो जाएगा।

पैगंबर मुहम्मद, जीसस… शादी के बाहर सेक्स करते थे? – बॉलीवुड एक्टर के ट्वीट पर लोग पूछ रहे – ‘अंग्रेजी नहीं आती क्या’

सोशल मीडिया पर अक्सर विवादों में रहने वाले अभिनेता सिद्धार्थ एक बार फिर से अपनी ट्वीट की वजह से चर्चा में हैं। मुख्यतः तमिल फिल्मों में काम करने वाले सिद्धार्थ ने बॉलीवुड और तेलुगु में भी फ़िल्में की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा कर डाला है कि पैगंबर मुहम्मद, जीसस क्राइस्ट, बुद्ध, साईं बाबा और गुरु गोविंद सिंह – ये सभी विवाहेतर शारीरिक सम्बन्ध बनाते थे, अर्थात शादी के बाहर सेक्स करते थे।

सिद्धार्थ ने ट्विटर पर इन पाँचों के बारे में लिखा, “ये सभी मनुष्य ही तो थे। ईश्वर की निश्चित रचना थे। वो सभी एकदम आपकी तरह ही थे। वो भोजन करते थे, विवाहेतर सेक्स करते थे, वो शौच करते थे और उन सबकी मृत्यु भी हुई। आप ख़ास हो। आप ईश्वर हो। अपने-आप से प्यार करो। दूसरों की सहायता करो। एक ईश्वर की तरह बनो। ईश्वर की संतान की तरह बनो। प्यार हमें स्वतंत्र करेगा।” इस ट्वीट के बाद उन्हें लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ा।

जहाँ कई लोगों ने उनकी अंग्रेजी पर सवाल उठाए, तो कई ने आशंका जताई कि जीसस क्राइस्ट, पैगंबर मुहम्मद, गुरु गोविंद सिंह, साईं बाबा और महात्मा बुद्ध के बारे में ऐसी टिप्पणी कर के उन्होंने इन सबके अनुयायियों को नाराज़ कर दिया है। कुछ ने उनसे कहा कि आप अपने ट्वीट डिलीट मत करना। कुछ ने उन्हें याद दिलाया कि इनमें से एक तो मृत्यु के 3 दिनों बाद जीवित हो गए थे। एक यूजर ने उन्हें याद दिलाया कि रावण, कंस और दुर्योधन भी खुद को भगवान मानते थे।

हालाँकि, कुछ लोगों ने आशंका जताई कि वो ठीक चीज कहना चाह रहे हैं, लेकिन उन्होंने ‘Fornicated’ शब्द का इस्तेमाल शायद गलती से या बिना इसका अर्थ समझे कर दिया है। एक यूजर ने ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB)’ से पूछा कि क्या वो इससे इत्तिफ़ाक़ रखते हैं? एक यूजर ने कहा कि ये स्टार्स सिर्फ फ़्लूएंट इंग्लिग की ट्रेनिंग लेते हैं, उन्हें ठीक तरह से अंग्रेजी नहीं आती। कुछ ने इसे ‘ओवर स्मार्टनेस’ करार दिया।

हाल ही में कई सेलेब्रिटीज ने रिहाना, ग्रेटा थनबर्ग और मिया खलीफा जैसों की ट्वीट के खिलाफ ‘इंडिया स्टैंड्स टुगेदर’ और ‘इंडिया अगेंस्ट प्रोपेगंडा’ टैग के साथ देश का समर्थन किया था, जिसका ट्विटर पर अक्सर वामपंथी एजेंडा लेकर चलने वाले सिद्धार्थ ने मजाक बनाया था। उन्होंने इंग्लैंड और भारत में चल रही टेस्ट सीरीज को लेकर बयान दिया था कि ‘भारत बोलिंग, बैटिंग और फील्डिंग’ जानता है, उसे ‘बाहरी हस्तक्षेप’ की जरूरत नहीं।

रात भर युद्ध स्तर पर राहत कार्य: NDRF से लेकर CM-DM सब मुस्तैद, ब्रिटेन, फ़्रांस, UN ने भी दिया सहयोग का आश्वासन

उत्तराखंड के चमोली जिले के तपोवन में रविवार (फ़रवरी 07, 2021) को ग्लेशियर टूटने से हुए हादसे के बाद रातभर चले राहत और बचाव कार्य के बीच चमोली जिला पुलिस ने बताया कि अब तक कुल 15 व्यक्तियों को रेस्क्यू किया गया है एवं 14 शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए हैं। अभी भी 125 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, टनल में फंसे हुए श्रमिकों की तलाश और बचाव में रातभर दुर्गम इलाकों में कार्य जारी रहा। उत्तराखंड में हुए इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत लगातार बचाव कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि भारतीय थल सेना, वायु सेना, NDRF, ITBP, SDRF तत्परता से बचाव कार्य में घटनास्थल पर पहुँच चुके हैं और अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं। साथ ही, केंद्र सरकार बचाव कार्यों की लगातार मोनिटरिंग कर रही है

सुबह 04 बजे से एक बार फिर बचाव कार्य शुरू किया गया है। सुरंगों के पास से मलबा हटाया जा रहा है। प्रभावित रैणी और तपोवन में राहत बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। तपोवन टनल से मलबा हटाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो सुरंगों में अभी भी 50 लोग फँसे हैं।

बचाव कार्यों के लिए भारतीय सेना द्वारा जोशीमठ में कण्ट्रोल रूम तैयार कर लिया गया है। मौके पर जेसीबी, चीता हेलिकॉप्टर, इंजीनियरिंग टास्क फ़ोर्स, मेडिकल टीम तैनात हैं।

रात को ही भारतीय वायुसेना के दो C-130 एयरक्राफ्ट NDRF की टीम के साथ देहरादून के जॉलीग्रांट एअरपोर्ट पर उतरे, जिन्हें प्रभावित इलाकों में भारतीय वायुसेना (IAF) के चॉपर्स से भेजा गया। भारतीय वायुसेना ने पूरी मदद का आश्वासन दिया है। इससे पहले ITBP, NDRF, SDRF रेस्क्यू ऑपरेशन्स में मौजूद थे।

विमान और बाहर की फ़ोटो हो सकती है

इसके साथ ही, ब्रिटेन, अमेरिका, फ़्रांस के बाद अब संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी उत्तराखंड में हुए इस हादसे पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए बचाव कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने कहा, “महासचिव को उत्तराखंड में ग्लेशियर के फटने और उसके बाद आई बाढ़ से हुए जानमाल के नुकसान और दर्जनों लोगों के लापता होने का गहरा दुख है। वह पीड़ितों के परिवारों, लोगों और भारत सरकार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं। संयुक्त राष्ट्र आवश्यकता होने पर बचाव और सहायता प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार है।”

अल्लाह के लिए 6 साल के बेटे की कुर्बानी: पैर बाँध कर मदरसा टीचर माँ ने रेत डाला गला, कमरे में सोए रहे पिता और 2 बच्चे

केरल के पलक्कड जिले की यह खबर पुलिस के लिए भी चौंकाने वाली थी। क्योंकि अपराध करने वाली कोई आम महिला नहीं थी बल्कि एक माँ थी। जिसकी हत्या हुई, वो कोई आम बच्चा नहीं था, बल्कि उसका खुद का बेटा था। लेकिन इससे भी ज्यादा खौफनाक था हत्या का कारण – अल्लाह को खुश करने के लिए बेटे की गर्दन रेत कर कुर्बानी देना।

7 फरवरी 2021 की रात को 3-4 बजे के बीच पुलिस को इस अपराध से संबंधित कॉल गई। कॉल करने वाली कोई और नहीं बल्कि खुद वो माँ थी, जिसने अपने 6 साल के बेटे की कुर्बानी दी।

30 साल की शाहिदा ने फोन पर पुलिस को बताया कि उसने अपने 6 साल के बेटे आमिल की हत्या अल्लाह के लिए कुर्बानी के तौर पर की है। जिस मोबाइल से कॉल की गई थी, उसका लोकेशन ट्रेस करते-करते जब केरल पुलिस की टीम उसके घर पर पहुँची, तो शाहिदा गेट पर उनका इंतजार कर रही थी।

हाथ और शरीर के अन्य जगहों पर खून के निशान देख कर पुलिस जल्दी से घर में घुसी लेकिन देर तो हो ही चुकी थी। बाथरूम में 6 साल के आमिल का पैर बंधा हुआ था, गर्दन रेता हुआ था। जबकि बेडरूम में शाहिदा का पति सुलेमान और उसके दो अन्य बच्चे सो रहे थे… इस हत्या से बिल्कुल अनजान।

अपने ही बेटे की कातिल शाहिदा मदरसे में टीचर है। वो 3 महीने की गर्भवती भी है। उसका पति सुलेमान पहले खाड़ी के देशों में काम करते था। अब लॉकडाउन के दौरान वो पलक्कड में ही ऑटो-रिक्शा ड्राइवर का काम करता है। इनके 2 और बच्चे 11 साल व 8 साल के हैं, जो हत्या की रात अपने पिता के साथ कमरे में बेखबर सोए हुए थे।

पलक्कड की पुलिस के अनुसार इस मामले की जाँच की जा रही है। हत्या के अलावा मनोवैज्ञानिक कारणों की भी जाँच की जाएगी।

चमोली आपदा: PM मोदी ने 4 बार CM रावत को किया कॉल, अनाथ बच्चों को गोद लेगा पतंजलि, नहीं बचे 2 पॉवर प्रोजेक्ट्स

उत्तराखंड के चमोली में आए जल-प्रलय आपदा के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने तो त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए लगातार कई कदम उठाए जिससे लोगों की जान बची, लेकिन उस पूरे इलाके को इस त्रासदी ने तबाह कर डाला। ऋषिगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट को नदी अपने साथ ही बहा कर ले गई। साथ ही 530MW धौलीगंगा हाइडल पॉवर प्रोजेक्ट को भारी नुकसान पहुँचा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति (NCMC) ने भी रविवार (फ़रवरी 7, 2021) को बैठक की।

ये बैठक समिति के अध्यक्ष और कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा के नेतृत्व में हुई। इस बैठक में इस आपदा और इससे हुए नुकसान को लेकर विचार-विमर्श किया गया। ऋषिगंगा में जलस्तर अब भी बढ़ा ही हुआ है। धौलीगंगा नदी आगे जाकर अलकनंदा में ही मिलती है। अब कई छोटे-बड़े पॉवर प्रोजेक्ट्स के मलबे इन्हीं नदियों में दबे हुए हैं। अपने सामान्य स्तर से 15 मीटर ऊपर बह रही नदी सब कुछ अपने साथ ले गई।

ऋषिगंगा हाइडल प्रोजेक्ट के अंतर्गत किनारों पर जो कंक्रीट संरचनाएँ बन हुई थीं, अब केवल वही बची रह गई है। धौलीगंगा प्रोजेक्ट के पास से भी शुरुआत में 2 लाशें मिलीं। धौलीगंगा प्लांट में 42 मजदूर घिरे हुए थे। जहाँ 12 को वहाँ से बचा लिया गया, 30 दूसरे टनल में फँसे हुए थे। दोनों प्रोजेक्ट्स के 170 कामगार गायब हैं। रैणी गाँव के लोगों ने ऋषिगंगा हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ अदालत में अर्जी दे रखी थी, जिसके बाद न्यायालय ने एक टीम बना कर जाँच करने को कहा था।

तपोवन हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर डैम भी अब नहीं रहा। मलारी घाटी में जाने के लिए जो 2 पुल थे, वो भी नदी के साथ बह गए। हालाँकि, जोशीमठ से तपोवन तक की प्रमुख सड़क अभी भी ठीक है। भारतीय वायुसेना के 2 हैलीकॉप्टर राहत कार्य में लगे हुए हैं। 2 एयरक्राफ्ट्स की मदद से राहत सामग्रियाँ पहुँचाई गईं। पीएम मोदी ने सीएम रावत को दिन भर के दौरान 4 बार फोन कॉल किया। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपए मुआवजा राशि की घोषणा की है।

इस आपदा में जानवरों को भी नुकसान पहुँचा है, जो पहाड़ी गाँवों की अर्थव्यवस्था में बड़ा किरदार निभाते हैं। 180 भेड़-बकरियाँ नदी के साथ ही बह गईं। 5 स्थानीय लोग, जिनमें एक चरवाहा और 2 घास काट रही महिलाएँ शामिल थीं, इस आपदा में नहीं बच सके। सरकार फ़िलहाल लोगों की जान बचाने और राहत कार्य पर ध्यान दे रही है, जिसके बाद आपदा के पुष्ट कारणों की समीक्षा होगी। सीएम रावत ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के ये जानकारी दी।

गायब लोगों का कुल आँकड़ा फिलहाल 170 है। एक टनल से 12 लोगों को सुरक्षित निकालने के बाद उत्साहित ITBP के जवानों ने ‘जय बद्री विशाल’ और ‘जय नंदा देवी’ के नारे लगाए। तपोवन के पास अपने आप ही एक झील बन गई है। टिहरी डैम से पानी छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। DRDO के विशेषज्ञों की टीम सोमवार को घटनास्थल पर जाकर ग्लेशियरों का अध्ययन करेगी। अब नंदप्रयाग से आगे अलकनंदा का बहाव सामान्य है।

उधर आचार्य बालकृष्ण ने ऐलान किया है कि उत्तराखंड जोशीमठ त्रासदी में जितने भी बच्चे अनाथ हुए हैं, ‘पतंजलि योगपीठ’ उन्हें गोद लेगी। उन्होंने कहा कि पतंजलि के लिए देश एक बाजार नहीं, बल्कि परिवार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि तत्काल किसी भी सहायता के लिए कंपनी तैयार है। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अपनी एक मैच की सैलरी राहत कार्य के लिए दान कर दी। राज्य सरकार ने अफवाहों से बचने की सलाह दी है।

1 दिन पहले सीएम ने बतया था कि सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, NDRF, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और पुलिस के जवान बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं। तपोवन स्थित जिन दो सुरंगों में मजदूर फँसे हुए हैं, वहाँ मुस्तैदी से बचाव कार्य चल रहा है। करीब 1 घंटे पहले तक ITBP के जवान रस्सी से सुरंग के अंदर करीब 150 मीटर तक पहुँच पाए थे। ये सुरंग करीब 250 मीटर लंबी है। अभी तक 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ट्रंप को सेंसर करने के लिए फेसबुक-ट्विटर को लताड़ा, सरकारी कायदों से चलने की दी नसीहत

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने एक हालिया बयान में अभिव्यक्ति की आजादी को प्रतिबंधित करने को लेकर किए गए मनमाने फैसलों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और ट्विटर की आलोचना की है। मैक्रों ने बयान में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बैन किए जाने का मुद्दा उठाया। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब सोशल मीडिया पर सेंसरशिप की बहस भारत में भी गरमाई हुई है।

मैक्रों ने कहा, “हम पेरिस में बहुत परेशान थे (कैपिटल हमले को लेकर)। लेकिन उसी समय हम इस बात को लेकर भी उतना ही परेशान थे कि कुछ ही घंटों बाद सभी प्लेटफॉर्म, जो राष्ट्रपति ट्रम्प को अपनी बात रखने का मौका देते थे, जहाँ वो अपनी चीजें रख रहे थे, वहाँ उन्हें बैन कर दिया गया। कुछ ही देर में जब उन्हें (मीडिया प्लेटफॉर्म) यह स्पष्ट हो गया कि वे (ट्रंप) सत्ता से बाहर हो चुके है, अचानक से उनकी आवाज बंद कर दी गई।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं एक ऐसे लोकतंत्र में नहीं रहना चाहता जहाँ महत्वपूर्ण निर्णय और फैसले एक प्राइवेट प्लेयर, एक प्राइवेट सोशल नेटवर्क द्वारा तय किया जाता है, जो मुख्य समय में आपकी आवाज को बंद कर दें।” फ्रांस के राष्ट्रपति ने 4 फरवरी को दिए आपने बयान में कहा, “मैं चाहता हूँ कि यह आपके प्रतिनिधि द्वारा या एक विनियमन द्वारा मतदान किए गए कानून द्वारा तय किया जाए। जिसे लोकतांत्रिक नेताओं द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा और अप्रूव किया गया हो।”

बता दें, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की यह टिप्पणी ऐसे समय मे सामने आई जब भारत सरकार भी ट्विटर के रवैए से नाखुश है। गौरतलब है कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ने उन ट्वीट्स और अकाउंट को हटाने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई हिंसा के ठीक बाद भड़काऊ दावे किए थे।

दरअसल, भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म से ट्वीट और एकाउंट्स को ब्लॉक करने का अनुरोध किया था, क्योंकि इससे देश में कानून और व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है। हालाँकि, ट्विटर ने यह दावा करते हुए सरकार की बात को नकार दिया कि यह ‘बोलने की स्वतंत्रता’ थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दोहरापन और इससे जो खतरा पैदा हुआ है, उससे स्पष्ट होता है कि वे अपनी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर सेंसरशिप लगाते हैं, जो भारतीय हितों को जरूरी नहीं मानता है।

जर्मनी के एंजेला मर्केल और मेक्सिको के आंद्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर जैसे अन्य नेताभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों द्वारा लागू की गई मनमानी सेंसरशिप की निंदा कर चुके हैं।

उत्तराखंड में 170 अब भी लापता, तपोवन के टनल से 16 जिंदा निकाले गए; ग्लेशियर हादसे के मृतकों के परिजनों को ₹6 लाख

उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने से भारी तबाही के बीच 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 170 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। मृतकों का आँकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र ने यह जानकारी दी है।

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐलान किया है कि घटना में जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उनके परिजनों को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा राज्य सरकार देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय आपदा कोष से मृतकों के परिवार के लिए 2-2 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार मुआवजे का ऐलान किया है।

16 बचाए गए

सीएम ने कहा कि सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, NDRF, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और पुलिस के जवान बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं। तपोवन स्थित जिन दो सुरंगों में मजदूर फँसे हुए हैं, वहाँ मुस्तैदी से बचाव कार्य चल रहा है। करीब 1 घंटे पहले तक ITBP के जवान रस्सी से सुरंग के अंदर करीब 150 मीटर तक पहुँच पाए थे। ये सुरंग करीब 250 मीटर लंबी है। अभी तक 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

आईटीबीपी के जनसंपर्क अधिकारी विवेक पांडे ने बताया, “अब हम दूसरी सुरंग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो कि सुरंग नंबर एक है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार यहाँ लगभग 30 लोग फँसे हुए हैं। हम रात में भी ऑपरेशन करेंगे। हमारी टीमें पहले से ही काम पर लगी हुई हैं और उम्मीद है कि हम उन्हें जल्द ही बाहर निकाल लेंगे।”

सीएम ने कहा कि भारतीय सेना मौके पर पहुँच गई है। एनडीआरएफ की टीम देहरादून पहुँच गई है और चमोली के रूट पर है। डॉक्टरों की टीम भी वहाँ पर पहुँच गई है। इसके साथ ही उपकरणों के साथ 60 एसडीआरएफ कर्मियों की एक टीम मौके पर पहुँच गई है।

बचाव दल को लेकर देहरादून पहुँचा सुपर हरक्यूलिस परिवहन विमान

एनडीआरएफ के बचाव दल और हैवी उपकरण को लेकर देहरादून भारतीय वायु सेना का सुपर हरक्यूलिस परिवहन विमान पहुँचा गया है। उत्तराखंड के चमोली में रविवार (फरवरी 7, 2021) को ​​ग्लेशियर टूटने ​के बाद मची तबाही को देखते हुए तीनों सेनाओं ने अपने-अपने स्तर पर मोर्चा सँभाल रखा है​​​​​।​​ सेना की टीम सुरंग में फँसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है​। ​वायुसेना ने अपने परिवहन विमानों से एनडीआरएफ टीमों को मौके पर पहुँचाया है​​​।​

पानी के बहाव में आई कमी

मुख्यमंत्री ने बताया, “ग्लेशियर फटने से वहाँ बन रहे बाँध को क्षति पहुँची है। मानव क्षति के बारे में अभी अधिकृत तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। पानी की तीव्रता चमोली तक आते-आते काफी कम हो गई है। पानी खतरे के निशान से नीचे अब हो गया है।”

गौरतलब है कि उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही हुई है। चमोली जिले के रेणी गाँव के पास ग्लेशियर के टूटने से कई गाँव वालों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। यह ग्लेशियर धौली गंगा नदी के किनारे-किनारे बह रहा है। आपदा से निपटने या किसी जानकारी के लिए या किसी जगह की सूचना के लिए राज्य सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। 1070 या 9557444486 नंबर पर कॉल कर आप इस संबंध में सूचना ले या दे सकते हैं।

बाढ़ आने के समय 13.2 मेगावाट की ऋषिगंगा प्रोजेक्ट और NTPC की 480 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड प्रोजेक्ट में करीब 176 मजदूर काम कर रहे थे। इनके अलावा, ऋषिगंगा परियोजना में ड्यूटी कर रहे दो पुलिसकर्मी भी लापता हैं। बाढ़ से दोनों हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को भारी नुकसान हुआ है।

छत्तीसगढ़ में सरकारी फरमान: कॉन्ग्रेस MLA शकुंतला साहू के जन्मदिन में दरी बिछाएँ-जलपान बाँटे कर्मचारी

छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार पार्टी विधायक शकुंतला साहू के जन्मदिन पर सरकारी फरमान निकालने को लेकर विवादों में घिर गई है। जन्मदिन को सरकारी तौर पर मनाने का यह आदेश सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मामले के तूल पकड़ने के बाद इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

कसडोल की विधायक शकुंतला साहू का 7 जनवरी को जन्मदिन था। इसको लेकर पलारी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने लिखित आदेश जारी करते हुए शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की दरी बिछाने, जलपान, टेंट व अन्य व्यवस्था करने की ड्यूटी लगा दी।

साभार: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

कॉन्ग्रेस विधायक के जन्मदिन की तैयारी को लेकर लिखित आदेश जारी कर छोटे-बड़े लगभग दर्जनों अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अधिकारियों की जमकर फजीहत हुई।

आदेश में कहा गया था कि कार्यक्रम में लगभग 500 लोग उपस्थित रहेंगे और इसके लिए सभी की उपस्थिति अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। आम तौर पर महान शख्सियत का जन्मदिवस कार्यक्रम ही शासकीय स्तर पर आयोजित होता है, लेकिन यह पहला मौका था जब पहली बार की कॉन्ग्रेस विधायक शकुंतला साहू का जन्मदिन कार्यक्रम सरकारी तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया था।

आयोजन में शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने का मामला सामने आने के बाद बीजेपी ने कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया है। बीजेपी के पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने कहा, “ऐसी शर्मनाक हरकत केवल कॉन्ग्रेस के शासन में हो सकती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे आदेश आधिकारिक तौर पर सरकारी कर्मचारियों को कॉन्ग्रेस नेता के निजी समारोह का संचालन करने के लिए दिए जाते हैं। इसे रोका जाना चाहिए अन्यथा कॉन्ग्रेस का हर एक विधायक भविष्य में इसी तरह अस्वीकार्य तरीके से कार्यक्रम आयोजित करेगा।”

61 साल की राजेश्वरी ने किराया माँगा तो पाशा ने कर दी हत्या, परिजनों संग मिल शव को नाले में फूँक दिया

कर्नाटक के बेंगलुरु में 61 वर्षीय मकान मालकिन की भीषण हत्या के मामले में शुक्रवार (फरवरी 5, 2021) को वीवी पुरम पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता की पहचान राजेश्वरी के रूप में हुई है। कोरमंगला की निवासी राजेश्वरी गुरुवार (फरवरी 4, 2021) सुबह 10:30 बजे किराएदारों अलीम पाशा (26) और उसके भाई जीलन (20) से किराया लेने के लिए पार्वतीपुरा गईं थी। पाशा ने पिछले साल मार्च से किराया नहीं दिया था। जब भी राजेश्वरी पैसे माँगती, तो वह कहता था कि लॉकडाउन के कारण उसका कैटरिंग बिजनेस अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।

मकान मालकिन ने पहले उसके 3 महीने के किराए को माफ कर दिया था और उसे बाकी का 35000 किराए का भुगतान करने के लिए कहा। घटना वाले दिन, राजेश्वरी, पाशा के पास गई और भुगतान न करने पर उसे घर खाली करने के लिए कहा। तभी पाशा एक रॉड लेकर आया और उसके सिर एवं गर्दन पर वार किया। इस चोट की वजह से राजेश्वरी तुरंत बेहोश हो गई और फिर मौके पर ही उनकी मौत हो गई। उनका शरीर ठंडा और पीला पड़ गया। जब पाशा ने अपने चाचा इब्राहिम और दादी अशरफुन्निसा को पुलिस को आत्मसमर्पण करने की अपनी योजना के बारे में बताया, तो दोनों ने इसके खिलाफ सलाह दी। 

इब्राहिम ने अलीम पाशा, जीलन और अशरफुन्निसा के साथ मिलकर शव को पॉलीथीन और बेडशीट में लपेट दिया। इसके बाद तिरपाल से ढक जीलन के ऑटो की पैसेंजर सीट पर रख दिया। इब्राहिम और जीलन शव को ऑटो से कुंभलगोडु तक ले गए। इस दौरान पाशा अपनी बाइक से ऑटो के पीछे चलता रहा। पाशा को मैरीगोल्ड इंटरनेशनल स्कूल के पास एक नाला दिखा। तीनों ने नाले में शव फेंक दिया और पेट्रोल डालकर उसमें आग लगा दी। शव को ठिकाने लगाने के लिए जाते समय उन्होंने रास्ते में पेट्रोल खरीदा था।

पीड़िता के बेटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई 

अपराध के सबूतों को नष्ट करने के बाद आरोपित घर लौट आए, स्नान किया और खून का दाग साफ किया। यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता के बेटे डॉ. दीपक एमआर ने पुलिस में शिकायत दर्ज की।

जब राजेश्वरी घर नहीं लौटी और उनका फोन बंद आया, तो उसने अपनी माँ के बारे में जानने के लिए रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों से संपर्क किया। पीड़िता ने अपने बेटे से कहा था कि वह पाशा से किराया लेने जा रही है। दीपक गुरुवार की रात लगभग 11 बजे, पाशा के घर गया और अपनी माँ के बारे में पूछताछ की। पाशा ने दावा किया कि उससे किराया वसूलने के बाद राजेश्वरी उसके घर से चली गईं थी।

अगली सुबह, दीपक फिर से अपनी पत्नी ममता के साथ आरोपित के घर गया और जोर देकर कहा कि वह कमरों की जाँच करना चाहता है। हालॉंकि पाशा ने दावा किया कि कमरों से एक में ‘छिड़काव’ किया गया है, इसलिए अंदर अभी नहीं जाया जा सकता। अन्य किराएदारों से पूछताछ करने पर पता चला कि पाशा और उसके परिवार के सदस्यों को उन्होंने एक ऑटो-रिक्शा में तिरपाल से ढके बंडल को ले जाते हुए देखा था।

अन्य किराएदारों की बात से दीपक चौकन्ना हो गया और उसने तुरंत वीवी पुरम पुलिस के पास एक गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जाँच शुरू की, राजेश्वरी के कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया और पाया कि उसका फोन पार्वतीपुरा के एमवी लेन में बंद था। किराएदारों से पूछताछ करने और सीसीटीवी फुटेज की पुष्टि करने पर, पुलिस ने पाशा, जीलन और अशरफुन्निसा को हिरासत में लिया।

24 घंटे के भीतर मामले को सफलतापूर्वक हल करने के बाद, पुलिस ने सूचित किया, “हमने अलीम पाशा, जीलन और अशरफुन्निसा को पकड़ा, जिन्होंने अपराध स्वीकार किया। अभी हमें इब्राहिम को गिरफ्तार करना बाकी है। उन पर हत्या और सबूत मिटाने का मामला दर्ज किया गया है।”