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मस्जिद में चल रही थी बम बनाने की क्लास, फट गया… मर गया 30 आतंकी: अफगान रक्षा मंत्रालय ने की पुष्टि

अफगानिस्तान के एक मस्जिद में शनिवार (फरवरी 13, 2021) को बम बनाने के दौरान हुए विस्फोट में 30 तालिबानी आतंकी मारे गए। आधिकारिक सूचना के मुताबिक मरने वालों की संख्या में 6 विदेशी आतंकी भी शामिल थे। 

अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि मस्जिद में हुए बम विस्फोट के कारण 30 आतंकियों के मरने की सूचना है। इनमें 6 विदेशी भी शामिल थे, जो प्रोफेशनली बम बनाने का काम करते थे। बयान के अनुसार, घटना एक ऐसी जगह घटी, जहाँ कई तालिबानी बम बनाने के लिए एकत्र हुए थे।

मंत्रालय के अनुसार, यह घटना सुबह 9.15 बजे बल्ख प्रांत के दावत अबद जिले के कितला गाँव में हुई, जो राजधानी काबुल के उत्तर में लगभग 450 किलोमीटर दूर है और उज्बेकिस्तान के साथ अपनी सीमा साझा करता है।

मंत्रालय प्रवक्ता फवाद अमन ने इस घटना को सबसे घातक बताते हुए कहा कि इसमें कोई आतंकी जीवित नहीं बचा। अरब न्यूज को दिए बयान में वह बताते हैं कि पूर्व में भी ऐसी घटनाएँ हुईं लेकिन 6, 8 या 10 की संख्या में बम लगाते या उसे बनाते हुए आतंकियों की धज्जियाँ उड़ी, मगर इस बार संख्या ज्यादा है।

मालूम हो कि तालिबान ने बम विस्फोट की बात को स्वीकार लिया है। हालाँकि उनकी ओर से जान हानि की कोई पुष्टि नहीं की गई है। तालिबान के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने बताया, 

“हाँ, वहाँ पर विस्फोट हुआ है, जहाँ बम स्टोर किए गए थे, लेकिन वैसा नहीं जैसे सरकारी अधिकारी बता रहे हैं। हम उन रिपोर्ट को खारिज करते हैं जिसमें मौत की बातें है, कोई भी नहीं मरा है।” 

जबिहुल्लाह के अनुसार, सुबह के समय दुश्मनों के प्लेनों ने आकर बमबारी की थी, जिसके कारण पास के एक मस्जिद को क्षति पहुँची है।

वहीं बल्ख राज्यपाल के प्रवक्ता मुनीर अहमद फरहाद ने बताया कि दवलत अबाद में सालों से तालिबानियों की उपस्थिति है, लेकिन इस घटना से संबंधित रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के बारे में उन्होंने नहीं सुना था।

बता दें कि अफगानिस्तान में बल्ख उन जगहों में से एक था जहाँ से तालिबानियों ने कुछ समय पहले तक दूरी बनाई हुई थी। मगर, अब अमेरिका के सैनिकों के हटने के बाद और सरकारी नेताओं से अनबन के चलते उन्होंने वहाँ पहुँच बना ली है।

हालिया विस्फोट को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में एक स्वतंत्र जाँच अनिवार्य है। पता लगना चाहिए कि ये कोई एयरस्ट्राइक थी या फिर सरकार के दावे सही हैं कि वहाँ बम बनाने के कारण विस्फोट हुआ?

CAA विरोधी दंगाइयों के ‘बलिदान’ का स्मारक बनवाएगी कॉन्ग्रेस: असम में चुनाव से पहले पार्टी ने किया वादा

असम में अप्रैल 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने CAA को फिर से मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। शिवसागर में चुनावी सभा के दौरान पार्टी के पूर्व-अध्यक्ष राहुल गाँधी ने CAA विरोधी गमछा गले में डाला हुआ था। अब पार्टी ने कहा है कि एंटी-CAA आंदोलन मरने वाले ‘बलिदानियों’ की याद में स्मारक बनवाया जाएगा। कॉन्ग्रेस पार्टी ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को ये ऐलान किया।

पार्टी ने कहा कि दिसंबर 2019 में CAA विरोधी आंदोलनों में जिनकी मौत हुई थी, उनके सम्मान वो स्मारक बनेगा। सांसद गौरव गोगोई, प्रद्युत बोरोडोलोई और असम प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने सोशल मीडिया के माध्यम से ये ऐलान किया। इन नेताओं ने लिखा कि आने वाले दिनों में गुवाहाटी में एक नया लैंडमार्क जुड़ेगा और वो होगा कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा बनवाया जाने वाला ये स्मारक।

कॉन्ग्रेस ने सत्ता में आने पर इस स्मारक के निर्माण का वादा किया है। अपर असम में शिवसागर में हुई रैली में राहुल गाँधी ने कहा था कि उनकी पार्टी असम में ‘इस विवादित कानून’ को नहीं लागू होने देगी। दिसंबर 2019 में CAA विरोधी उपद्रव में राज्य में 5 लोगों की मौत हुई थी। राज्य के वित्त, योजना एवं विकास विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और लोक निर्माण विभाग के मंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि CAA चुनावी मुद्दा है ही नहीं।

उन्होंने कहा कि राज्य का युवा ये सोच रहा है कि राज्य सरकार ऐसी कोई योजना लॉन्च करेंगी कि नहीं जिससे उन्हें मोटरसाइकिल मिले, जैसी सुविधा प्रतिभावान छात्राओं को दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ये सब चुनाव में चर्चा के मुद्दे हैं। वहीं सांसद प्रद्युत ने कहा कि भाजपा ने ऐतिहासिक असम एकॉर्ड का उल्लंघन किया है और सांप्रदायिक तनाव पैदा किया है। कॉन्ग्रेस पार्टी फ़िलहाल ‘आइए, असम को बचाएँ’ अभियान चला रही है।

जिस मेमोरियल का वादा कॉन्ग्रेस ने किया है, उसके बारे में पार्टी ने बताया कि उसमें एंटी-CAA प्रदर्शनकारियों के ‘त्याग और उनके प्रयासों’ के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी। साथ ही बताया कि उसमें गानों और पेंटिंग के जरिए CAA विरोधियों का गुणगान किया जाएगा। कॉन्ग्रेस ने कहा कि ये भाजपा को प्रदेश का सन्देश होगा – ‘असम में CAA नहीं’। वहीं गौरव गोगोई ने कहा कि लोग ‘CAA विरोधियों के दमन’ को नहीं भूलेंगे।

किरण बेदी को हटाए जाने के बाद कॉन्ग्रेस के दफ्तरों में फूटे पटाखे, CM ने बाँटी मिठाइयाँ: आज पहुँचेंगे राहुल गाँधी

पुडुचेरी में हाल के दिनों में कॉन्ग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई है। ऐसा लग रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश का राजनीतिक ड्रामा अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों तक यूँ ही चलता रहेगा। अब केंद्र सरकार ने उप-राज्यपाल किरण बेदी को अपने पद से हटा दिया है। उनकी जगह तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदरराजन को पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

तमिलसाई पहले तमिलनाडु में भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष हुआ करती थीं। मंगलवार (फरवरी 16, 2021) की रात राष्ट्रपति भवन की इस अधिसूचना के बाद घटनाक्रम तेज़ी से बदलने लगा। राष्ट्रपति भवन ने कहा है कि जब तक पुडुचेरी के उप-राज्यपाल के रूप में अगली नियुक्ति नहीं की जाती, तमिलसाई सुंदरराजन अतिरिक्त प्रभार संभालती रहेंगी। भाजपा के एक यूनिट के कुछ नेताओं ने भी किरण बेदी के कामकाज से आपत्ति जताई थी।

किरण बेदी को मई 2016 में उप-राज्यपाल बनाया गया था, ऐसे में उनका कार्यकाल पूरा होने को मात्र 3 महीने ही बचे हुए थे। कॉन्ग्रेस पार्टी ने लगातार पुडुचेरी में ये बात फैलाई थी कि किरण बेदी के कामकाज से जनता नाराज़ है और वो चुनी हुई सरकार के ऊपर हावी हैं। स्थानीय भाजपा यूनिट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को 3 बार याचिका भेज कर किरण बेदी को हटाने की माँग की थी।

किरण बेदी ने पुडुचेरी में ट्रैफिक नियमों में सख्ती की थी और हेलमेट न पहनने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया था। गरीबों को अनाज के बदले ‘डायरेक्ट बेनेफिर ट्रांसफर (DBT)’ पर जोर दिया गया था। प्रदेश सरकार ने जब सरकारी स्कूल के बच्चों को प्रदेश के इंजीनियरिंग/मेडिकल कॉलेजों में 10% आरक्षण देने का फैसला लिया तो किरण बेदी ने इसे नकार दिया था। कॉन्ग्रेस इन बातों से नाराज थी।

किरण बेदी के हटाए जाने की खबर के साथ ही प्रदेश भर में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़ कर अपनी ख़ुशी जताई। कॉन्ग्रेस के दफ्तरों में जश्न मनाया गया। खुद मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी ने नेताओं के बीच मिठाई बाँट कर जश्न मनाया।

सीएम नारायणसामी ने कुछ दिनों पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से किरण बेदी को हटाने की माँग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि बेदी प्रदेश सरकार की विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं पर ब्रेक लगा रही हैं।

वी नारायणसामी ने इस फैसले के तुरंत बाद एक प्रेस बैठक बुलाई और उसमें कहा कि ये न सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी, बल्कि पुडुचेरी की जनता की भी जीत है। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में किरण बेदी के लगातार हस्तक्षेप के बाद जनता के अधिकार सुरक्षित नहीं रह गए थे। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी की जनता ने किरण बेदी को ‘एक बड़ा सबक सिखाया’ है। किरण बेदी अब तक इस मामले में खामोश ही हैं।

एक और अटकल ये लगाई जा रही है कि किरण बेदी सक्रिय राजनीति में वापसी कर सकती हैं, इसीलिए उन्हें हटाया गया है। पिछले साढ़े 4 वर्षों से भी अधिक समय के अपने कार्यकाल में उन्होंने पुडुचेरी में बतौर उप-राज्यपाल प्रतिदिन जनसंपर्क को प्राथमिकता दी है। ये बात नारायणसामी के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी गूँजी। नारायणसामी ने कहा कि अगर वो भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में आती हैं तो उनका स्वागत है।

नारायणसामी ने कहा कि हमने न जाने कितने ही उपवास किए और धरने दिए, तब जाकर केंद्र सरकार की अब नींद खुली है। उन्होंने कहा कि अब पुडुचेरी की जनता खुश है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी ने इसे भाजपा का ड्रामा बताते हुए कहा कि पार्टी को पता था कि अगर बेदी इस पद पर रहतीं तो भाजपा को वोट नहीं मिलते। अब सभी की नजरें राहुल गाँधी पर हैं, जो 4 दिनों के चुनावी कैम्पेन के लिए आज पुडुचेरी पहुँच रहे हैं। कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया संयोजक ने बेदी और संघ/भाजपा के लिए काम करने के आरोप लगाए।

बता दें कि पुडुचेरी में कॉन्ग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गई है क्योंकि पार्टी के एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री वेलु नारायणसामी (Velu Narayanasamy) सरकार ने एक विधायक के जाने से बहुमत खो दिया है। विधायक ए जॉन कुमार ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को विधानसभा से अपना इस्तीफा स्पीकर वीपी शिवाकोलुन्थु को सौंप दिया है। कॉन्ग्रेस यहाँ DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के साथ गठबंधन बना कर सत्ता में है।

‘प्रेमी जोड़ों के लिए डेटिंग डेस्टिनेशन’ – गुजरात कॉन्ग्रेस का चुनावी वादा, BJP ने कहा – ‘राहुल गाँधी के कहने पर…’

गुजरात में जल्द ही 6 नगर निगमों के चुनाव होने वाले हैं। राजकोट, अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत, भावनगर और जामनगर में निकाय चुनाव के लिए जोर-शोर से प्रचार जारी है। वड़ोदरा निकाय चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस ने मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को अपना घोषणापत्र (Manifesto) जारी किया। घोषणापत्र में पार्टी ने एक ऐसा वादा कर दिया है, जिसे लेकर शहर में हलचल मच गई है। 

कॉफी शॉप और डेटिंग डेस्टिनेशन बनाएगी कॉन्ग्रेस 

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने युवाओं को लुभाने के लिए अपने घोषणापत्र में डेटिंग डेस्टिनेशन बनाने का वादा किया है। कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि अगर वह सत्ता में आती है तो शहर में डेटिंग डेस्टिनेशन बनाए जाएँगे।

वड़ोदरा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष प्रशांत पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सत्ता में आने पर कॉन्ग्रेस हर वार्ड में तिरंगा क्लीनिक शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस युवाओं, छात्रों, प्रेमी जोड़ों और कॉरपोरेट्स के लिए कॉफी शॉप के साथ डेटिंग डेस्टिनेशन खोलेगी। इसी के साथ किटी पार्टी के लिए एक हॉल का निर्माण भी किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से डेटिंग डेस्टिनेशन बनाए जाने के वादे पर बीजेपी ने तंज कसा है। वड़ोदरा बीजेपी के पूर्व मेयर भरत डांगा का कहना है कि जिसके जैसे संस्कार होते हैं, वे वैसा ही बात करते हैं। उनका कहना है कि वड़ोदरा को संस्कारी नगरी कहते हैं। यहाँ बीजेपी ने बाग-बागीचे लोगों की फिटनेस और बच्चों के खेलने के लिए बनाए हैं। उनका मानना है कि कॉन्ग्रेस ने डेटिंग डेस्टिनेशन बनाने का वादा राहुल गाँधी के कहने पर किया होगा। 

मुफ्त यात्रा का वादा

वड़ोदरा कॉन्ग्रेस ने सिटी बसों में महिलाओं, सेना से रिटायर्ड जवानों और होमगार्डों को मुफ्त यात्रा का वादा किया है। इसी के साथ छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को बस किराए में 50 प्रतिशत की राहत देगी।

गुजरात के राजकोट, अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत, भावनगर और जामनगर समेत कुल 6 नगर निगमों के चुनाव के लिए 21 फरवरी को मतदान होगा, जबकि 81 नगरपालिकाओं, 31 जिला पंचायतों और 231 तालुका पंचायतों के लिए 28 फरवरी को वोट डाले जाएँगे।

बता दें कि इससे पहले चुनाव प्रचार के लिए गुजरात पहुँची केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को गुजरात से चुनाव लड़ने के लिए ललकारा। स्मृति ईरानी राहुल गाँधी द्वारा असम में ‘चाय बागानों’ को लेकर दिए गए बयान पर भी जमकर बरसी।

स्मृति ईरानी ने कहा, “कॉन्ग्रेस को गुजरात से परेशानी है, गुजरातियों से भी परेशानी है, मैं राहुल गाँधी को चैलेंज देती हूँ कि वे गुजरात से चुनाव लड़कर और जीत कर दिखाएँ। उनकी गलतफहमी दूर हो जाएगी।”

ईरानी ने नवसारी जिले के वांसदा शहर में स्थानीय निकायों के आगामी चुनाव के लिए जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘राहुल गाँधी ने हाल ही में असम में एक रैली में कहा था कि वह गुजरात के छोटे चाय कारोबारियों की जेब से रकम निकलवाएँगे। इससे पहले उन्हें (कॉन्ग्रेस) चाय विक्रेता (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) से परेशानी थी और अब उन्हें चाय पीने वालों से दिक्कत है।’’

बता दें कि राहुल गाँधी ने कहा था कि अगर कॉन्ग्रेस असम में सत्ता में आएगी तो वह चाय बागानों के श्रमिकों की दिहाड़ी मजदूरी में वृद्धि करेगी।

‘राहुल गाँधी शादी करें… वो भी दलित लड़की से, महात्मा गाँधी का सपना पूरा करें’ – रामदास अठावले

रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) चीफ व केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले अक्सर सदन में अपने मजाकिया अंदाज के कारण चर्चा में रहते हैं। अब अठावले ने राहुल गाँधी को ‘हम दो-हमारे दो’ पर सुझाव दिया है। साथ ही अठावले ने अपने इस सुझाव के साथ राहुल गाँधी को महात्मा गाँधी का ‘सपना’ पूरा करने की नसीहत भी दे डाली है।

दरअसल कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए बिना ‘हम दो, हमारे दो’ के जरिए निशाना साध रहे हैं। राहुल गाँधी ने सदन में भी ‘हम दो, हमारे दो’ का नारा दिया। अब राहुल को आरपीआई चीफ रामदास अठावले ने सलाह दी है।

केंद्रीय मंत्री अठावले ने कहा, “हम दो, हमारे दो का नारा परिवार नियोजन के लिए इस्‍तेमाल किया जाता था। यदि वे (राहुल गाँधी) इसका प्रचार करना चाहते हैं तो उन्‍हें शादी जरूर करनी चाहिए। उन्‍हें दलित लड़की से शादी करना चाहिए और जातिवाद को दूर भगाने का राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गाँधी का सपना पूरा करना चाहिए। इससे युवाओं को प्रेरित किया जा सकता है।”

वहीं इससे पहले एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने राहुल गाँधी के हम दो हमारे दो नारों का अर्थ उन्हें समझा दिया था। नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि ‘हम दो-हमारे दो’ का नारा राहुल गाँधी के परिवार का ही बनाया हुआ है। वे इसी का पालन करते हैं। ‘हम दो’ का अर्थ है, माँ और बेटा और ‘हमारे दो’ का मतलब दीदी और बहनोई। नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि वो दो हो गए और उनके दो हो गए। यही बात वह कह नहीं पा रहे हैं तो उसको आप इस अर्थ में निकालिए तो यह सामरिक और सार्थक दिखेगा।

दरअसल, लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गाँधी ने किसान आंदोलन का मुद्दा उठाया और केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने ने कहा कि सालों पहले फैमिली प्लानिंग के लिए नारा था ‘हम दो हमारे दो’। जैसे कोरोना दूसरे रूप में आया है, वैसे ही यह नारा दूसरे रूप में आया है। आज इस देश को 4 लोग चलाते हैं। उन्होंने आगे कहा, “नाम सब जानते हैं। ये किसकी सरकार है- हम दो हमारे दो।”

रामदास अठावले ने इसी के साथ झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को लेकर उन्होंने कहा, “मेरी पार्टी नरेंद्र मोदी और BJP के साथ NDA में है। मैंने शिबू सोरेन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की है कि अगर वे भी NDA में आते हैं, तो यहाँ भी सरकार झारखंड मुक्ति मोर्चा और BJP की रहेगी। दिल्ली में भी उनको सत्ता मिल सकती है।” उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है और उन्हें इसके बारे में सोचना चाहिए।

मंदिर जाने वाली महिलाएँ रखती हैं सेक्स की चाहत: मलयालम उपन्यास ‘मीशा’ को केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार

केरल साहित्य अकादमी ने वर्ष 2019 के लिए पुरस्कारों की घोषणा की। एस हरीश के ‘मीशा’ को सर्वश्रेष्ठ उपन्यास चुना गया। यह उपन्यास मंदिर जाने वाली हिंदू महिलाओं और पुजारियों के किरदार को गलत तरीके से दर्शाने के लिए विवादों में रहा।

@thegeminian_ नाम के एक ट्विटर यूजर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे उपन्यास ने मंदिर जाने वाली महिलाओं को सेक्स की चाहत रखने वालों के रूप में चित्रित किया।

इसमें वह दो दोस्तों के बीच की बातचीत का वर्णन करती है। इसमें एक दोस्त दूसरे से कहता है कि महिलाएँ अच्छे से सज-धज कर मंदिर इसलिए जाती है कि वो लोगों को, खासकर पुजारियों को यह बता सके कि वह सेक्स के लिए तैयार है।

सुप्रीम कोर्ट में उपन्यास को चुनौती

2018 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उपन्यास को चुनौती दी गई थी। उपन्यास में मंदिर जाने वाली महिलाओं के चरित्र को लेकर गंदी टिप्पणी की गई थी। कोर्ट में दलील दी गई थी कि उपन्यास ‘मीशा’ के कुछ पैराग्राफ आपत्तिजनक हैं, क्योंकि उसमें हिंदू धर्म और हिंदू पुजारी का अपमान किया गया है।

मंदिर में हिंदू महिलाओं के जाने के संबंध में उपन्यास के आपत्तिजनक अंश को उजागर करने के लिए उपन्यास में दो पात्रों के बीच बातचीत का अनुवाद प्रस्तुत किया गया था। बातचीत में मंदिर में जाने वाली महिलाओं को सेक्स ऑब्जेक्ट के रूप में दिखाया गया है, जो मंदिर इसलिए जाती हैं, ताकि यह पता चल सके कि वे सेक्स के लिए तैयार हैं। किताब के अंश इस तरह हैं-

6 महीने पहले मॉर्निंग वॉक पर जाने के दौरान एक मित्र ने पूछा, “मंदिर जाने के लिए ये लड़कियाँ नहाती क्यों हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन क्यों करती हैं?” 

मैंने कहा, “प्रार्थना करने के लिए।” 

उसने कहा, “नहीं।”

उसने कहा, “ध्यान से देखो, उन्हें प्रार्थना करने के लिए सबसे अच्छे कपड़े पहनने की क्या ज़रूरत है? वो अनजाने में घोषणा करती हैं कि वो सेक्स करने के लिए तैयार हैं।” मैं हँसा।

उसने आगे कहा, “नहीं तो वे महीने में चार या पाँच दिन मंदिर क्यों नहीं आते? वे लोगों को यह बताती हैं कि वे इसके लिए तैयार नहीं हैं। विशेष रूप से, मंदिर के उन ब्राह्मण पुजारियों को सूचित करती हैं। क्या वे अतीत में इन मामलों में मास्टर नहीं थे?”

हालाँकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीश पीठ ने उपन्यास पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता करार दिया था। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की थी, “आप इस तरह की चीजों को अनुचित महत्व दे रहे हैं। इंटरनेट के युग में, आप इसे एक मुद्दा बना रहे हैं।”

उपन्यास को बैन करने के लिए उठी थी काफी माँग

उपन्यास को पहली बार मलयालम साप्ताहिक मातृभूमि में प्रकाशित किया गया था। साप्ताहिक में तीन अध्याय प्रकाशित करने के बाद इसे बंद कर दिया गया था। इसे बाद में डीसी बुक्स द्वारा एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया। इस उपन्यास को मंदिरों में जाने वाली महिलाओं के चित्रण के लिए भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। 

केरल के भाजपा प्रमुख के सुरेंद्रन ने उपन्यास को केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार दिए जाने की निंदा करते हुए कहा कि इसे हिंदू समुदाय के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “केरल ने ऐसा अपमानजनक उपन्यास नहीं देखा है। मीशा को पुरस्कार देने के फैसले को हिंदू समुदाय के खिलाफ एक कृत्य के रूप में देखा जाना चाहिए। यह सबरीमाला मुद्दे के बाद हिंदुओं का अपमान करने का सिलसिला है।”

राजदीप के खिलाफ SC ने नहीं किया केस दर्ज, स्वतः संज्ञान वाली बात सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से अनजाने में हुई गलती

नोट: कल शाम में खबर आई थी कि पत्रकार राजदीप सरदेसाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज किया। हालाँकि बाद में पता चला कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की वेबसाइट पर यह अनजाने में गलती से अपलोड कर दिया गया था। इसे सुधार लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्टरी के भूल सुधार से पहले की खबर

सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पत्रकार राजदीप सरदेसाई के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज किया है। राजदीप के खिलाफ यह मुकदमा उनके अगस्त 2020 में एडवोकेट प्रशांत भूषण और न्यायपालिका की आलोचना मामले में किए गए ट्वीट को लेकर किया गया है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने आस्था खुराना की याचिका के आधार पर दर्ज किया। इससे पहले, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सरदेसाई के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया था।

आस्था खुराना ने सितंबर 2020 में याचिका दायर की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना के मामले में मुकदमा पंजीकृत किया है। आस्था ने याचिका में राजदीप सरदेसाई के कई ट्विट्स का हवाला दिया था।

याचिका में राजदीप सरदेसाई के खिलाफ देश की न्यायपालिका को लेकर विवादित टिप्पणी करने के लिए अवमानना ​​की कार्रवाई की माँग की गई थी। उसमें यह भी कहा गया कि राजदीप सरदेसाई के ट्वीट से पता चलता है कि ये न केवल लोगों के बीच प्रचार का एक सस्ता स्टंट था, बल्कि भारत विरोधी अभियान के रूप में नफरत फैलाने का जानबूझ कर एक प्रयास किया गया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश की अवमानना के मसले पर प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण पर एक रुपए का ज़ुर्माना लगाया था। कोर्ट ने ज़ुर्माना न भर पाने की सूरत में तीन महीने की क़ैद तथा साथ ही तीन साल के लिए वकालत पर प्रतिबंध लगाया था। हालाँकि बेशर्मी से माफी नहीं मॉंगने की बात कहने वाले भूषण ने जुर्माना भर दिया था।

राजदीप सरदेसाई ने एक ट्वीट में प्रशांत भूषण मामले पर दिए गए फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय की आलोचना करते हुए दावा किया था कि शीर्ष अदालत के पास अवमानना ​​मामले की सुनवाई के लिए समय था जबकि कश्मीर में हिरासत में लिए गए लोगों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका एक साल से अधिक समय से लंबित पड़ी थी।

उन्होंने यह भी कहा था कि भूषण को कोर्ट केस की अवमानना ​​में दी गई सजा सुप्रीम कोर्ट के लिए खुद में एक शर्मिंदगी है। एक और ट्वीट में उन्होंने अदालतों को काम करने का तरीका भी बताया था।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले राजदीप सरदेसाई ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। गौरतलब है कि जस्टिस अरुण मिश्रा ने सचिन पायलट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट बेंच की अध्यक्षता की थी। राजदीप सरदेसाई ने उनका नाम घसीटते हुए कहा था कि यह वही अरुण मिश्रा है, जिन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी को ‘बहुमुखी प्रतिभा’ के रूप में वर्णित किया था।

खादी से बनी डिजाइनर पोशाक भगवान राम को अर्पित: आत्मनिर्भरता के लिए प्रोजेक्ट रामलला, CM योगी ने किया अनावरण

बसंत पंचमी के मौके पर अयोध्या में श्रीरामजन्म भूमि में विराजमान रामलला के लिए खास पोशाक तैयार की गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसंत पंचमी के मौके पर फैशन डिजाइनर मनीष त्रिपाठी द्वारा बनाए गए खास पोशाक को रामलला को भेंट किया।

बता दें कि यह ड्रेस उत्तर प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के सहयोग से फैशन डिजाइनर मनीष त्रिपाठी द्वारा “प्रोजेक्ट रामलला” के तहत बनाई गई है। प्रोजेक्ट रामलला लोगों के दैनिक जीवन में खादी सामग्रियों के उपयोग और खादी के कपड़ों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करती है।

गौरतलब है कि, ‘प्रोजेक्ट रामलला‘ मनीष त्रिपाठी की ‘शहर से गाँव तक’ की पहल का हिस्सा है, जिसे कोरोनोवायरस महामारी के समय प्रवासी श्रमिकों के अपने प्रदेश वापसी के दौरान शुरू किया गया था। परियोजना का उद्देश्य कुशल मजदूरों और कारीगरों को प्रशिक्षित करना है ताकि वे अपनी आजीविका कमा सकें और सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर बन सकें।

उन्होंने कहा कि जब वह महामारी के बीच कारीगरों के साथ काम कर रहे थे, तब अयोध्या में राम मंदिर का भव्य आयोजन हुआ। तभी एक दिन यूँ ही खयाल आया कि भगवान को पॉलीएस्टर के परिधान क्यों पहनाए जाएँ, जबकि हम खुद पहनना कभी पसंद नहीं करेंगे। इसी उधेड़बुन में खादी मास्क के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया, तब लगा कि खादी को हर घर तक पहुँचाने के लिए क्यों न शुरुआत रामलला से की जाए।

प्रोजेक्ट रामलला के तहत, जो महिला कारीगर पहल के तहत काम कर रही हैं, वे ही अयोध्या के भव्य राम मंदिर में विराजमान रामलला के लिए पोशाक बना रही हैं। यह पहल न केवल खादी के उपयोग को प्रोत्साहित और रोजगार के सृजन में मदद करेगी बल्कि यह कुशल मजदूरों की स्थिति में भी सुधार लाएगी।

उल्लेखनीय है कि बसंत पंचमी के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा खादी से बने इन पोशाकों को रामलला को अर्पित किया गया है।

15 साल के लड़के को ऑनलाइन धमकी: ध्रुव राठी के खिलाफ एक्शन में NCPCR, ट्विटर को 7 दिन में कार्रवाई का आदेश

नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के व्लॉगर ध्रुव राठी के खिलाफ जाँच शुरू की है। बता दें कि ध्रुव राठी ने 15 साल के लड़के का आईपी लोकेशन गैरकानूनी तरीके से हासिल कर लिया और फिर उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धमकी दी। जिसके बाद NCPCR ने संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू किया।

सूत्रों के मुताबिक ट्विटर को संबोधित एक पत्र में एनसीपीसीआर ने कहा कि आयोग को शिकायत मिली कि ध्रुव राठी द्वारा 15 वर्षीय लड़के को परेशान किया जा रहा है और उसे धमकी दी जा रही है।

आयोग ने आगे कहा कि लड़के ने इस बात को उजागर किया था कि राठी ने उसे इंस्टाग्राम पर मैसेज किया और उसे नुकसान पहुँचाने की धमकी दी। लड़के ने ट्विटर पर डिटेल्स पोस्ट किया। बच्चे ने आगे आरोप लगाया कि राठी ने उसे कानूनी परिणामों के भुगतने की धमकी दी और दावा किया कि उसने आईपी लोकेशन प्राप्त कर लिया है। राठी ने बच्चे का नाम फर्जी मामलों में घसीटने का भी दावा किया।

आयोग ने सीपीसीआर अधिनियम, 2005 की धारा 13 (1) (d) (j) और (k) के तहत मामले का संज्ञान लिया और ध्रुव राठी के खिलाफ जाँच शुरू की। आगे कहा गया कि नाबालिग का आईपी एड्रेस प्राप्त करना और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसे धमकी देना गंभीर अपराध है।

ट्विटर को 7 दिनों के भीतर राठी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करनी होगी

आयोग ने ट्विटर को पत्र जारी करने के सात दिनों के भीतर ध्रुव राठी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। NCPCR ने ट्विटर को बिना किसी देरी के शिकायत के बारे में संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए कहा। आयोग के आदेशों का पालन करने में विफल रहने पर NRCPC, कानून के अनुसार ट्विटर के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा।

ध्रुव राठी ने 15 वर्षीय लड़के को धमकी दी

एक ट्विटर यूजर ने कुछ स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दावा किया कि ध्रुव राठी ने उसे यूट्यूब चैनल ‘द स्ट्रिंग्स’ का समर्थन करने के लिए इंस्टाग्राम के माध्यम से डीएम (डायरेक्ट मैसेज) में धमकी दी थी। नाबालिग लड़का इस बात से सहमत था कि उसने भी गलती की थी, लेकिन राठी द्वारा डराने और धमकाने की प्रवृत्ति गंभीर थी।

नाबालिग लड़के के ट्विटर से किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट (साभार: Twitter)

नाबालिग द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि राठी ने उसे धमकी दी और कहा कि अगर लड़का स्ट्रिंग्स का समर्थन करता रहेगा, तो वह केस में उसका नाम घसीटेगा और उसका जीवन बर्बाद कर देगा।

Screenshots of messages sent by Dhruv Rathee to the minor boy. (Source: Twitter)

जब लड़के ने उसे बताया कि वह 15 साल का है, तो राठी ने कथित तौर पर कहा कि उसकी उम्र उसके लिए कोई मायने नहीं रखती। लड़के ने तब से अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट/डिएक्टिवेट कर लिया है।

‘सरस्वती शिक्षा की देवी नहीं…’ के अलावा माँ सरस्वती के लिए लिखी बहुत ही गंदी बात: अरेस्ट_दिलीप_मंडल कर रहा ट्रेंड

माँ सरस्वती पर आपत्तिजनक बयान देने के बाद ट्विटर पर अरेस्ट दिलीप मंडल का हैशटैग ट्रेंड #ArrestDilipmandal कर रहा है। सोशल मीडिया पर पत्रकार दिलीप मंडल को जेल में डालने की बात कही जा रही है। मंगलवार (फरवरी 16, 2021) को बसंत पंचमी के अवसर पर मंडल ने माँ सरस्वती पर अभद्र टिप्पणी की, जिसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। लोग ने इस टिप्पणी को हिन्दु भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया है।

दिलीप मंडल ने ट्वीट करते हुए लिखा, “सरस्वती को मैं शिक्षा की देवी नहीं मानता। उन्होंने न कोई स्कूल खोला, न कोई किताब लिखी। ये दोनों काम माता सावित्रीबाई फुले ने किए। फिर भी मैं सरस्वती के साथ हूँ। ब्रह्मा ने उनका जो यौन उत्पीड़न किया, वह जघन्य है।” – इसके लिए मंडल ने महाराष्ट्र सरकार पब्लिकेशन से प्रकाशित Slavery(1991) नामक किसी किताब का जिक्र किया।

इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। एक यूजर ने लिखा, “आरक्षण की भीख पर पलने वाले, जिन्हें डर है कि कहीं लाठी टूट गई तो क्या होगा। वो अब शिक्षा पर भाषण देगा और जो शोषण ईसाई मिशनरियों ने किया, उसके लिए भी साथ हो जा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “काश बुद्धि आरक्षण में मिली होती, तो तुमको पूरा पता होता कि शास्त्रानुसार सरस्वती, ब्रह्माजी की पत्नी हैं। ब्रह्मा ने पत्नी के रूप-गुणों की कल्पना कर उनको रचा था, वो पैदा नहीं हुई थीं। शुक्र है तुमने अपने बाप को माँ के यौन उत्पीड़न और तुमको पैदा करने के जुर्म में जेल नहीं भिजवाया।”

गणेश नाम के यूजर ने लिखा, “मैं भी कुछ लोगों को प्रोफेसर नहीं मानता। जो खुद पढ़ नहीं सकते, वो पढ़ाने में लगे हैं। गजब है ना।”

गीतांजलि मोहापात्रा ने लिखा, “अरे आप पागल हो गए हो, शर्म नहीं आती। कुछ जानते नहीं हो तो कम से कम खुलेआम अपना मजाक क्यों बनाते हो। ब्रह्मा जी और सरस्वती माँ का संबंध क्या था, यह भी आपको पता नहीं। ऐसा लग रहा है कि आप अपने माँ-पापा का रिलेशन को कभी ऐसे गंदे नजर में भी ले लोगे।”

एक यूजर ने लिखा, “यह क्या बकलोली है? माताजी में आस्था नहीं है तो मत मानो! वह आपकी निजी राय है। लेकिन, यहाँ ट्विटर पर भौंकने की क्या जरूरत है? किसने हक दिया आपको करोड़ों हिंदुओ की आस्था को दुखाने का? बकवास करने की बजाय अपना काम कर।”

प्रमिला नाम के एक यूजर ने लिखा, “हिम्मत है तो ऐसा ही तू किसी दूसरे धर्म के आराध्यों के बारे में कह के दिखा, जिंदा नहीं बचेगा। वो तो हिन्दू सहनशील हैं, ऐसे पागल कुत्तों के भौंकने पर रिएक्ट नहीं करते।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “मैं आदर करती थी आपका, लेकिन आरक्षण की रोटियाँ मत सेंको। किसान आंदोलन से जनाधार लेकर जाति का रोना बन्द करो 10-15 साल के लिए था, अभी भी संतुष्टि नहीं हुई। सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी के लिए भी गलत है ये सब, पर आप लोगों को देश नहीं सिर्फ आरक्षण बचाना है। सरस्वती माँ का अपमान शर्म कर कुछ।”

कुमार सोमी नाम के यूजर ने लिखा, “मैकाले शिक्षा पद्धति एवं कम्युनिस्टों द्वारा लिखित इतिहास पढ़ा है तुम जैसे अनपढ़ लोगों ने और अपने धर्म को ढंग से नहीं जाना, तुम्हारे जैसे लोगों ने कभी डर से, कभी बहकावे में आकर ऐसे ही धर्म परिवर्तन कर अपने मूल स्वरूप को भूल चुके हो। अपनी पहचान खो चुके हो।”