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हलाल के नाम पर दुनिया भर के मुस्लिमों को खिलाया घोड़े-कंगारू का मीट, 40 साल से कर रहा था धंधा

मलेशिया को दुनिया का सबसे बड़ा हलाल एक्सपोर्टर बनना था। अब शायद दिक्कत आएगी! हलाल के नाम पर वहाँ के एक गैंग (कई कंपनियाँ भी हो सकती हैं शामिल) ने बहुत बड़ा घोटाला किया है। इससे दुनिया के न सिर्फ तमाम मुस्लिम देश बल्कि खुद मलेशिया की 60% मुस्लिम आबादी भी गुस्से में है।

न्यू स्ट्रेट टाइम्स के अनुसार मलेशिया यह गैंग पिछले 40 सालों से हलाल के नाम पर घोटाला करते आ रही थी। चीन, यूक्रेन और दक्षिण अमेरिका के गैर-हलाल बूचड़खानों से यह गैंग घोड़ों और कंगारूओं तक का मीट खरीदती थी। इसके बाद अधिकारियों को रिश्वत खिला कर उन्हें बीफ में मिला कर पूरी दुनिया के मुस्लिम देशों में सप्लाई करती थी।

मलेशिया की पुलिस ने इस मामले में अभी तक एक गिरफ्तारी की है। लेकिन कंपनी या किसी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। वहाँ की सरकार ने रॉयल कमिशन ऑफ इंक्वॉयरी का गठन करने पर भी विचार किया है, जिसे लेकर धार्मिक मामलों के मंत्री ने कहा कि यह इस तरह के अपराध की जड़ तक पहुँचने का सबसे जरूरी कदम होगा।

हलाल के नाम पर इस घोटाले के उजागर होने का मीट व्यापार पर इतना बड़ा असर पड़ा है कि कुआला लम्पुर के 6000 हॉकरों को बीफ संबंधी सामग्रियों को बेचने की मनाही की गई है। मलेशिया का यह गैंग इतना शातिर था कि जो कंपनियाँ सारे प्रोटोकॉल फॉलो करते हुए हलाल मीट प्रोसेस करती थी, उनमें भी यह मिलावट करते थे।

मिलावट का यह तरीका ही इनका यूनिक बिजनेस मॉडल था, जो 40 सालों तक चला। घोड़े-कंगारूओं के गैर-हलाल मीट को यह गैंग अकेले नहीं बेचता था। इससे पकड़े जाने का खतरा था। इसलिए ये गैर-हलाल मीट बंदरगाहों से अधिकारियों को रिश्वत देकर डायरेक्ट वेयरहाउस में लाया जाता था। यहाँ हलाल सर्टिफायड मीट और बीफ के साथ इन्हें मिक्स कर दिया जाता था। इसके बाद फेक हलाल लोगो वाले पैकेट में फिर से इन्हें पैक कर दुनिया भर के मुस्लिम देशों में भेजा जाता था।

हलाल का बिजनेस 2.3 ट्रिलियन डॉलर का है। मलेशिया फिलहाल अकेले 9 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट करता है।

हलाल मांस = जिहाद

किसी भी भोज्य पदार्थ, चाहे वे आलू के चिप्स क्यों न हों, को ‘हलाल’ तभी माना जा सकता है, जब उसकी कमाई में से एक हिस्सा ‘ज़कात’ में जाए- जिसे वे जिहादी आतंकवाद को पैसा देने के ही बराबर मानते हैं, क्योंकि हमारे पास यह जानने का कोई ज़रिया नहीं है कि ज़कात के नाम पर गया पैसा ज़कात में ही जा रहा है या जिहाद में। और जिहाद काफ़िर के खिलाफ ही होता है- जब तक यह इस्लाम स्वीकार न कर ले!

यानी जब कोई गैर-मुस्लिम हलाल वाला भोजन खरीदता है, तो वह उसका एक हिस्सा अपने ही खिलाफ होने जा रहे जिहाद को आर्थिक सहायता देने में खर्च करता है। इसे ‘हलालो-नॉमिक्स’ यानी हलाल का अर्थशास्त्र कहते हैं। “हलालो-नॉमिक्स का अर्थ है आप अपनी सुपारी खुद दे रहे हैं।”

‘कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन और बीफ खाने का लगा आरोप’: ऑस्ट्रेलिया में भारतीय क्रिकेट टीम को लेकर छिड़ा नया विवाद

देश और विदेश में रहने वाले भारतीय क्रिकेट के दीवाने है। वहीं फैंस के लिए यह कोई मामूली बात नहीं है कि उसके चहेते क्रिकेट स्टार्स अचानक से उससे टकरा जाएँ। क्रिकेट प्रेमी और यूट्यूबर नवलदीप सिंह को शुक्रवार को तीसरे टेस्ट से पहले मेलबर्न के चाडस्टोन शॉपिंग सेंटर के सीक्रेट किचन रेस्टॉरेंट में भारतीय क्रिकेटरों से अचानक से मिलने का मौका मिला।

सिंह ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी कि उसके सामने रोहित शर्मा, शुभमन गिल, ऋषभ पंत और नवदीप सैनी एक मेज पर भोजन कर रहे थे। इस दौरान अपनी खुशी जाहिर करते हुए भारतीय टीम के फैन ने क्रिकेट के दिग्गजों $118.69 (₹6,681.66) के बिल रेस्टोरेंट में भर दिया।

अपने अगले ट्वीट में यह दावा किया कि उसने खिलाड़ियों का बिल चुका दिया है। फैन ने लिखा, ‘‘उन्हें (खिलाड़ियों को) पता नहीं है लेकिन मैंने उनके टेबल का बिल चुका दिया है। इतना तो मैं अपने सुपरस्टार्स के लिए कर ही सकता हूँ।’’

इसके बाद इस फैन ने लिखा, ‘‘जब उन्हें पता चला कि मैंने बिल चुकाए हैं तो रोहित शर्मा ने कहा कि भाई जी पैसे ले लो अच्छा नहीं लगा। मैंने फिर मना कर दिया। इसके बाद ऋषभ पंत ने मुझे गले लगाया और कहा कि फोटो तभी होगी जब पैसे वापिस लोगे। इस पर मैंने कहा कि यह नहीं होने वाला। फिर सबने एक साथ तस्वीर खिंचवाई। मजा आ गया।”

हालाँकि उन्हें नहीं पता था कि यह ट्वीट जल्द ही उन्हें और भारतीय क्रिकेटरों को, खासकर ऋषभ पंत को मुश्किल में डाल देगा।

वहीं भारतीय क्रिकेट टीम के इस दौरे को लेकर ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए मामले को एक अलग ही स्तर पर ले जाने का फैसला किया। द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने अपने एक लेख में दावा किया कि इंडियन नोडल क्रिकेट बॉडी के खिलाड़ियों ने कोरोना वायरस प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है।

उन्होंने आगे लिखा, ऑस्ट्रेलिया और भारतीय बोर्ड इस मामले की जाँच कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की बीओसेक्युरिटी प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का हवाला देते हुए, क्रिकेट डॉट कॉम ने लिखा, “इसमें प्रशिक्षण स्थल पर व्यापक भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाड़ियों के समूह को अलग करना शामिल होगा। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई टीम के सभी सदस्यों की चल रही सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए खिलाड़ियों को सख्त प्रोटोकॉल के अनुसार प्रशिक्षित करने की अनुमति दी जाएगी।” इसी तरह के दावे क्रिकेट डॉट कॉम ने भी किए थे।

BCCI ने ऑस्ट्रेलियाई मीडिया को लताड़ा

क्रिकेट विश्लेषक बोरिया मजूमदार ने ट्विटर पर जानकारी दी कि सोशल मीडिया के दावों के विपरीत, बीसीसीआई किसी भी जाँच पर विचार नहीं कर रहा। “बीसीसीआई ने पुष्टि किया कि उल्लंघन को लेकर किसी भी प्रकार की जाँच नहीं की जा रही और कभी भी ऐसा विचार नहीं किया गया था।”

पीटीआई से बात करते हुए BCCI ने कहा, “नहीं, बीओसेक्युरिटी प्रोटोकॉल में कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। भारतीय टीम से जुड़े सभी लोग प्रोटोकॉल के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं।” ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की आलोचना करते हुए एक अधिकारी ने कहा, “हम इसे केवल ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के एक वर्ग द्वारा दुर्भावनापूर्ण कार्य के रूप में कह सकते हैं और इसकी शुरुआत उनकी शर्मनाक हार के बाद हुई। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया कई बार अपनी क्रिकेट टीम के लिए ऐसे काम करती है।”

सोशल मीडिया पर हुई उथल-पुथल के बाद नवदीप सिंह ने शनिवार सुबह ट्विटर पर स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी ऋषभ पंत को गले नहीं लगाया। उन्होंने लिखा, “स्पष्टीकरण – पंत ने मुझे कभी गले नहीं लगाया यह सब एक्साइटमेंट में कहा गया था हमने सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखा था। गलतफहमी के लिए माफी।”

वहीं भारतीय फैंस ने नवदीप सिंह को क्रिकेटरों की जान जोखिम में डालने और प्रोटोकॉल तोड़ने के लिए लताड़ा। जिसको लेकर नवदीप सिंह ने कहा, “मुझे लोग गालियाँ दे रहे है, देखो गालियों का फर्क नहीं पड़ता मुझे हम पंजाबी है 400-500 गालियाँ दोस्तों के साथ बैठे तो आपस में दे देते हैं, लेकिन मैं सच में दुखी हूँ कि मैं इस वक्त अपने देश के लोगों के ख़िलाफ हूँ। मुझे आप लोग माफ कर दो और मैं उम्मीद करता हूँ कि सब ठीक हो जाए।”

इस बीच फैन द्वारा भुगतान किए गए बिल की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। हम इसकी पुष्टि नहीं कर सकते हैं कि यह भारतीय क्रिकेटरों के रेस्टोरेंट का बिल है या नहीं लेकिन बिल में मौजूद खाने ने सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विवाद पैदा कर दिया है। वायरल हो रहे बिल की कॉपी से पता चलता है कि क्रिकेटरों ने कथित तौर पर बीफ खाया था।

इसने सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर आक्रोश पैदा कर दिया है। हालाँकि, हम यह पुष्टि नहीं कर सकते कि किस क्रिकेटर ने बीफ खाया है या उनमें से किसी ने बीफ खाया भी है या नहीं।

सोशल मीडिया पर लोग खासकर रोहित शर्मा पर यह इल्ज़ाम लगा रहे हैं।

गौरतलब है कि टीम इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच 4 टेस्ट मैचों की सीरीज 1-1 से बराबरी पर है। इस सीरीज का तीसरा मुकाबला 7 जनवरी से सिडनी में खेला जाएगा। रोहित शर्मा की वापसी के साथ भारत अगले मैच में जीत के साथ सीरीज जीतने की उम्मीद कर रहा है।

‘कोविशील्ड’ के बाद पहले स्वदेशी कोरोना टीके ‘कोवैक्सीन’ को मिली एक्सपर्ट कमेटी की मंजूरी

‘कोविशील्ड’ के बाद देश को पहला स्वदेशी टीका ‘कोवैक्सीन’ भी मिल गया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की कोविड-19 पर बनी विशेषज्ञों की समिति ने शनिवार (जनवरी 02, 2021) को भारत बायोटेक द्वारा विकसित इस टीके को भी आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा, “कोरोना का टीका पहले चरण में तीस करोड़ लोगों को मुफ्त मिलेगा। इनमें एक करोड़ स्वास्थ्य कर्मी और दो करोड़ अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी होंगे। तथा 27 करोड़ अन्य वरिष्ठ व्यक्तियों को जिनकी आयु 50 साल से ऊपर है।” इससे पहले, सीरम इंस्टीट्यूट की ‘कोविशील्ड’ वैक्सीन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दी गई थी।

बता दें कि ‘कोवैक्सीन’ पहली ऐसी कोविड-19 वैक्सीन है, जिसे ICMR के सहयोग से देश में ही विकसित किया गया है। इसे भारत बायोटेक ने विकसित किया है। इस वैक्सीन को भारत बायोटेक व एनआईवी पुणे ने मिलकर तैयार किया है।

जानकारी के मुताबिक कोरोना वायरस वैक्सीन का आकलन करने वाली विशेषज्ञों की समिति ने एक बैठक के बाद हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक को शनिवार की दोपहर बैठक के लिए बुलाया था। प्राथमिकता के आधार पर लोगों को जुलाई तक किस तरह से टीका लगाया जाएगा, इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इन लाभार्थियों में 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त इससे कम उम्र के लोग भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, टीके को मंजूरी देने से पहले हम किसी भी प्रोटोकॉल से समझौता नहीं करेंगे।

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में टीकाकरण के पूर्वाभ्यास की समीक्षा करने पहुँचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “कोरोना का टीका आने के बाद सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मचारी, सुरक्षा जवान और पुलिसकर्मियों को उपलब्ध होगा। देश में अभी करीब एक करोड़ स्वास्थ्य कर्मचारी हैं और दो करोड़ सुरक्षा व पुलिस के जवान। इन लोगों को टीका देने के बाद नगर निगम/पालिका और पंचायत के कर्मचारी, पहले से बीमार और 50 या उससे अधिक वर्ष की आयु के लोगों को टीका दिया जाएगा।”

इनकी संख्या करीब 27 करोड़ है। इन्हें दो अलग-अलग चरणों में टीका दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 30 करोड़ लोगों को दो-दो खुराक उपलब्ध कराने में कम से कम पाँच से छ: महीने का वक्त लग सकता है। इसी साल के मध्य तक यह लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद ही किसी और व्यक्ति को टीका मिल सकता है। वहीं, जब हर्षवर्धन से सवाल पूछा गया कि कोरोना वैक्सीन जैसे दिल्ली में मुफ्त होगी, क्या वैसे ही सभी राज्यों में भी मुफ्त होगी?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कोरोना टीका दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मुफ्त होगा। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ही कोरोना टीकाकरण के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कोविशील्ड टीके को आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी। 

वहीं एम्स (AIIMS) के निदेशक रणदीप गुलेरिया (Director Dr. Randeep Guleria) ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 के रोलआउट के लिए भारत आने वाले 10-14 दिनों में तैयार हो जाएगा।

डॉक्टर गुलेरिया ने कहा, “हम लोग बहुत धीमी गति से वैक्सीनेशन शुरू करेंगे, तब तक और वैक्सीन आ जाएँगे। वैक्सीनेशन प्रोसेस जब शुरू होगी तब एक प्रॉपर टाइ्म टेबल के साथ-साथ भीड़ को मैनेज करने के तरीके की भी जरूरत होगी। हम लोगों को यह भी तय करना होगा कि कोल्ड स्टोरेज की कमी की वजह से वैक्सीन बेकार न जाए। इस बात में ड्राइ रन हमारी मदद करेगा।”

पश्चिम बंगाल में सर सैयद अहमद रोड के एक निर्माणाधीन इमारत से STF ने बरामद किए 22 क्रूड बम: जाँच जारी

कोलकाता की स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एक खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करते हुए शनिवार (2 जनवरी, 2021) को एंटली पुलिस थाना क्षेत्र से कई बम बरामद किए है। बीडीएस, डीडी के सख्त मार्गदर्शन में बमों को जब्त कर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, “स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने कोलकाता पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान के तहत एंटली पुलिस थाने क्षेत्र से कई बम बरामद किए। मामले में जाँच जारी है।” मिली जानकारी के अनुसार, मिलिट्री इंटेलिजेंस की कोलकाता यूनिट ने कोलकाता पुलिस के साथ इस मामले की जानकारी साझा की थी।

फोर्ट विलियम से सैन्य खुफिया विभाग के दो अधिकारियों ने शनिवार को लगभग 1.45 बजे पुलिस स्टेशन पहुँच कर स्थानीय पुलिस अधिकारियों से जानकारी साझा करते हुए मामले में उनकी सहायता माँगी थी। जिसके तहत आगे की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

STF के साथ पुलिस ने सर सैयद अहमद रोड 2/1 बी में एक निर्माणाधीन इमारत पर छापा मारते हुए बमों को बरामद किया। 22 क्रूड टाइप के बम दो बक्सों में मिले है। जो एक कमरे के प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर एक मचान पर रखे हुए थे। बता दें यह बिल्डिंग पहले से ही खुफिया एजेंसियों की रडार पर था। संयुक्त ऑपरेशन के तहत पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी है।

आदरणीय अखिलेश यादव जी ने कहा है तो वैक्सीन लगवाने से नपुंसक भी हो सकते हैं: सपा विधान पार्षद

कोरोना का प्रकोप भारत में अब भी थमा नहीं है। देश में कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर तैयारियाँ चरम पर हैं। इस बीच, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाने की बात कही है। उनके इस बयान का समर्थन करते हुए समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने कहा कि अगर अखिलेश जी ने ऐसा कहा है तो कुछ सोचकर ही कहा होगा।

आशुतोष सिन्हा ने न्यूज़ चैनल ‘टाइम्स ना से बात करते हुए कहा, “मुझे इस बात की जानकारी नहीं है लेकिन अगर आगरणीय अखिलेश यादव जी ने इस बात को कहा है तो इसमें जरूर कुछ न कुछ गंभीरता होगी। क्योंकि ये जो सरकार है उत्तर प्रदेश और देश की, यह भरोसे के लायक नहीं है। गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से बच्चे मर गए थे। वहाँ योगी दो दिन पहले दौरा कर के आए थे। इस सरकार पर हमें विश्वास नहीं है। मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है कि अखिलेश ने क्या कहा लेकिन अगर ऐसा कुछ कहा है तो जरूर कुछ न कुछ तथ्यों के आधार पर कहा है।”

सपा नेता ने कहा कि अगर अखिलेश नहीं लगवा रहे है तो मतलब वैक्सीन में कुछ तो होगा जिससे नुकसान हो रहा होगा। बाद में लोग ये न कह दे कि जनसंख्या कम करने के लिए, मारने के लिए वैक्सीन लगा दी। कुछ भी हो सकता है, यह आपको नपुंसक भी बना सकता है। उन्होंने कहा, “आदरणीय अखिलेश यादव ने कहा है तो सिर्फ सपा ही नहीं प्रदेश की जनता को भी वैक्सीन नहीं लगवाना चाहिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोविड-19 वैक्सीन को लेकर दिए एक बयान में कहा कि वो ‘भाजपा की कोरोना वैक्सीन’ नहीं लगाएँगे और जब उनकी सरकार आएगी तो वो लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगाएँगे।

उन्होंने कहा, “मैं अभी कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं लगवाऊँगा। मैं भाजपा की वैक्सीन पर कैसे भरोसा कर सकता हूँ। जब हमारी सरकार बनेगी तो सभी को मुफ्त वैक्सीन मिलेगी। हम भाजपा की वैक्सीन नहीं लगवा सकते।”

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो सरकार ताली बजाने और थाली बजाने की बात कर रही थी, वे टीकाकरण के लिए इतनी बड़ी चेन क्यों बना रही है, वो ताली और थाली से ही कोरोना भगा दें न।

कॉन्ग्रेस हाईकमान के फैसले पर अब कार्ति चिदंबरम ने उठाए सवाल: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव पर कही यह बात

तमिलनाडु में कॉन्ग्रेस की नई कमिटी के गठन के तुरंत बाद पार्टी के अंदर बड़ा विवाद हो गया है। शिवगंगा से पार्टी सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस कमिटी के गठन के तुरंत बाद ट्वीट कर कहा कि इस कमिटी से कोई लाभ नहीं होगा। उन्होंने पार्टी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सौ से अधिक लोगों की कमिटी का मतलब किसी की जिम्मेदारी तय नहीं होगी, न ही किसी के पास कुछ करने का अधिकार होगा।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘इन विशाल समितियों से कोई लक्ष्य पूरा नहीं होता। 32 उपाध्यक्ष, 57 महासचिव और 104 सचिव। किसी के पास कोई ताकत नहीं होगी जिसका मतलब यह है कि कोई जवाबदेही भी नहीं होगी।’’ 

वहीं न्यूज 18 से बातचीत में उन्होंने कहा, “तमिलनाडु कॉन्ग्रेस को एक ठोस टीम की जरूरत है, ना कि विशालकाय कमिटियों की। इन बड़ी-बड़ी कमिटियों से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा। चुनाव 90 दिन दूर है और हमें एक ऐसी टीम की जरूरत है, जिसके पास निर्णय लेने की क्षमता और जवाबदेही हो।”

कार्ति चिदंबरम तमिलनाडु से पार्टी के लोकसभा सांसद हैं। मालूम हो कि इसी साल अप्रैल-मई में तमिलनाडु में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कॉन्ग्रेस का वहाँ डीएमके के साथ गठबंधन है। हालाँकि, दोनों दलों के बीच अभी तक सीटों का बँटवारा नहीं हुआ है। बहरहाल, कार्ति ने अपने ट्वीट में राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को भी टैग किया है। इनके अलावा, उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी, तमिलनाडु प्रदेश कॉन्ग्रेस, केसी वेणुगोपाल और दिनेश गुंडू को भी टैग कर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

दरअसल,  कॉन्ग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शनिवार (जनवरी 02, 2021) को अपनी राज्य इकाई के लिए 32 उपाध्यक्षों समेत कई पदाधिकारियों की नियुक्ति की और कई समितियों एवं चुनाव प्रबंधन दल का गठन किया

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और मणिशंकर अय्यर तथा कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न समितियों में स्थान दिया गया है। कई समितियों में कार्ति को भी शामिल किया गया है। तमिलनाडु प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के लिए 32 उपाध्यक्ष, 57 महासचिव और 104 सचिव नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही, पार्टी ने कार्यकारी समिति के सदस्य और 32 जिला कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं।

लगातार सवाल उठा रहे हैं कार्ति 

कार्ति चिदंबरम, पार्टी के उन नेताओं में शामिल हैं जो हाल के दौर में कॉन्ग्रेस की अंदरूनी चुनौतियों पर मुखर सवाल उठा रहे हैं। दिलचस्प यह भी है कि उनके पिता पी. चिदंबरम कॉन्ग्रेस में जारी मौजूदा अंदरूनी घमासान में कॉन्ग्रेस हाईकमान और असंतुष्ट नेताओं के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

असंतुष्ट नेताओं की सोनिया गाँधी के साथ 19 दिसंबर 2020 को हुई बैठक में चिदंबरम ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए भी ब्लॉक, जिला से लेकर प्रदेश स्तर के संगठन चुनाव कराने की जमकर वकालत की थी। इतना ही नहीं पी चिदंबरम ने कॉन्ग्रेस में करीब दो दशक से ठंडे बस्ते में पड़े संसदीय बोर्ड के ढाँचे को भी फिर से खड़ा करने की पैरोकारी की थी।

अपहरण, बलात्कार और इस्लाम में धर्मांतरण के बाद हिन्दू पीड़िता के पिता पर ही FIR: पाकिस्तानी अंधेरगर्दी का सबूत

पाकिस्तान में इमरान खान की नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर किए गए भारी भरकम दावों के बावजूद हमारे पड़ोसी देश में हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों पर लगातार धार्मिक उत्पीड़न और अत्याचारों की खबर सामने आ रही है।

पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने शुक्रवार (दिसंबर 01, 2021) को ऐसी ही एक हिन्दू उत्पीड़न की जानकारी अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की। जिसमें उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के पंजाब के बहु भाटी गाँव में एक मुस्लिम व्यक्ति ने जबरन रतन लाल की बेटी मिजा कुमारी का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया और निक़ाह करने के लिए बलपूर्वक उसका इस्लाम में धर्मांतरण कर दिया गया।

एक्टिविस्ट ने पीड़िता के माता-पिता की एक वीडियो शेयर की, जिसमें उन्होंने लोगों से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा, “यदि हमारी बेटी हमें वापस नहीं मिलती है तो हम आत्महत्या कर लेंगे। हम गरीब हैं, हम दोषियों से नहीं लड़ सकते, पाकिस्तान में कोई भी हमारी मदद नहीं कर रहा है। जो हमारी वीडियो देख रहा है, हम उनसे मदद का अनुरोध करते हैं।”

मामले को शेयर करते हुए राहत ऑस्टिन ने अपने ट्वीट में लिखा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने 27 अगस्त, 2020 को अपहरण किए जाने के बाद से लापता हुई लड़की के माता-पिता की मदद करने के बजाय, रतन लाल के खिलाफ ही एक झूठा मामला दर्ज किया है।

राहत ऑस्टिन ने आगे बताया कि लड़की का 2 सितंबर, 2020 को जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तित कर दिया गया, हालाँकि इसका प्रमाणपत्र और विवाह प्रमाणपत्र दोनों फर्जी है।

गौरतलब है कि धर्मांतरण और विवाह प्रमाण पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि लड़की एक ईसाई थी, जबकि वह वास्तव में एक हिंदू है। चूँकि, प्रमाण पत्रों में फर्जी तथ्यों का सहारा लिया गया इसलिए राहत ऑस्टिन ने तर्क दिया कि इस हिसाब से दोनों ही सर्टिफिकेट अमान्य हैं।

दूसरी बात, लड़की के धर्मपरिवर्तन से एक दिन पहले 1 सितंबर, 2020 को मुस्लिम युवक ने निक़ाह किया था। ऑस्टिन ने कहा कि रूढ़िवादी इस्लामी कानूनों के अनुसार, एक मुस्लिम व्यक्ति को गैर-मुस्लिम से शादी करने की मनाही है, जब तक कि वह इस्लाम में परिवर्तित नहीं हो जाती, इसलिए यह निक़ाह अवैध है।

राहत ऑस्टिन ने एक बार फिर से पाकिस्तान में मानवाधिकारों के चल रहे खुले उल्लंघनों को सामने लाया है, जो कि अधिकारियों द्वारा चरमपंथियों या धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाले लोगों को दंडित करने के लिए दिखाई गई उदासीनता को भी उजागर करता है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता की इस खबर से एक फिर पड़ोसी देश में मानवाधिकारों के चल रहे उल्लंघन को सबके सामने ला दिया है। इसके अलावा, यह अधिकारियों द्वारा कट्टरपंथी लोगों को बढ़ावा देने और धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाली प्रवत्ति को भी उजागर करता है।

पूर्व पति को ट्रोल कहने वाली गालीबाज ‘फर्जी दलित चिंतक’ के बचाव में उतरा मीडिया गिरोह

‘दलित कार्यकर्ता’ मीना कंडासामी पिछले कुछ दिनों तक एक प्रकरण को लेकर चर्चा में रही हैं। यह पूरा प्रकरण उसके ट्वीट को लेकर उछला था, जिसमें उसने ‘ब्राह्मण d*cks’ आदि अपशब्द कहते हुए डींगें हाँकी थी। मीना के इस घृणित कमेंट का बचाव करने के लिए उसके कई कॉमरेड साथी इस मामले में कूद पड़े थे।

The tweet that started it all

उसकी घृणित टिप्पणी के बाद काफी अधिक आक्रोश देखा गया। इसी दौरान उसके पति द्वारा दिया गया बयान भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। स्वतंत्र पत्रकार दीपिका भारद्वाज द्वारा शेयर किए गए पत्र के अनुसार मीना कंडासामी के पूर्व पति गुनशेखरन धर्मराज ने कहा कि मीना कंडासामी ने उनके खिलाफ फर्जी उत्पीड़न का केस दर्ज किया था, वो भी इसलिए क्योंकि उन्होंने उसके पिता के खिलाफ हमले का केस दर्ज कराया था। धर्मराज ने कहा कि उनके पास उसके द्वारा लिखे गए ईमेल और प्रूफ हैं जो उनके अलग होने के वास्तविक कारण का खुलासा करते हैं।

डॉ. धर्मराज ने यह भी दावा किया कि मीना कंडासामी की ‘दलित’ पहचान भी फर्जी है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार कंडासामी की माँ फॉरवर्ड कम्युनिटी से थीं, जबकि उसके पिता ओबीसी थे। इस खुलासे के बाद लोगों ने उसे आड़े हाथों ले लिया। इस सबके बीच एक ऐसे मीडिया संगठन- Network of Women in Media (NWM) ने मीना के समर्थन में आवाज उठाई, जिसका नाम किसी ने शायद ही सुना हो। हाालँकि, वह फर्जी खबरों को फैलाने में काफी आगे रहा है।

NWM द्वारा दिए गए बयान में कहा गया, “उसने अपने गृह राज्य तमिलनाडु और अन्य जगहों पर फासीवादी ताकतों, धार्मिक असहिष्णुता और जातिगत हिंसा के खिलाफ लगातार आवाज उठाई है।” वहीं मीना कंडासामी ने अपने आलोचकों को ‘संघी फासीवादी’ कहा। उसने उसके ब्राह्मण-विरोधी कमेंट की आलोचना करने वाले लोगों को भी ‘संघी फासीवादी’ करार दिया।

Kandasamy calls her critics ‘Sanghi fascists’

एनडब्ल्यूएम ने इस तथ्य को आसानी से नजरअंदाज कर दिया कि कंडासामी पर सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा उनकी दलित पहचान को धूमिल करने का आरोप लगाया गया। आरोप उनके पूर्व पति ने लगाए थे। उसके पूर्व पति द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर ‘ट्रोल’ करने के साथ ही उसे राजनीति से भी जोड़ा गया।

बयान में आगे कहा गया, “पुरुष अधिकार कार्यकर्ताओं ने उन पर अपने पूर्व पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दायर करने का आरोप लगाया। उन्होंने मीना पर मामले में 6 साल की देरी का भी आरोप लगाया है। 2014 से वर्तमान स्थिति के बारे में पता चलता है कि मामले का विवरण बदल गया है। इस तरह के आरोप और चरित्र हनन, ये ऐसी पुरानी चालें हैं जिसका इस्तेमाल महिलाओं की आवाज को शांत करने के लिए किया जाता है।”

यह आरोप पुरुष अधिकार कार्यकर्ताओं ने नहीं लगाए हैं। बल्कि यह आरोप उसके पूर्व पति ने लगाए हैं। आश्चर्य की बात ये है कि NWM उसके पूर्व पति द्वारा सोशल मीडिया पर उस पर लगाए गए आरोपों के लिए दूसरों को क्यों जिम्मेदार ठहरा रही है। यह उसके गलत इरादे को उजागर करती है।

NWM ने दावा किया, “मीना के खिलाफ सबसे अधिक दोषपूर्ण आरोप यह है कि एक फेमिनिस्ट के रूप में वह इस तरह के अपमानजनक शादी में नहीं रह सकती और यदि वह ऐसी शादी में थी, तो वह एक फेमिनिस्ट नहीं हो सकती।” यह मामले को जानबूझकर अलग ट्विस्ट देने का प्रयास था। दरअसल, उसके पूर्व पति ने दावा किया था कि मीना कंडासामी ने अपनी शादी के लिए दहेज दिया था। इसलिए, वह एक फेमिनिस्ट होने का दावा नहीं कर सकती।

डॉ. धर्मराज ने कहा, “मैं जनता के सामने यह भी घोषणा करता हूँ कि मैं न तो दहेज की माँग करता हूँ और न ही समर्थन करता हूँ। एफआईआर में जो तुमने दहेज के संबंध में दावे किए हैं, वो झूठे हैं। इसलिए दहेज दिए जाने का दावा करके या तो तुम नारीवादी आदर्शों के खिलाफ हो, जिनके लिए आप खड़े होने का दावा करते हो या फिर तुम पुलिस और अदालत को गलत जानकारी देकर उन्हें बरगला रही हो।”

इस सबसे ऐसा लग रहा है कि एनडब्ल्यूएम, कंडासामी के पति द्वारा लगाए गए आरोपों पर टिप्पणी कर रहा है, लेकिन उसे उसी तरह दिखाने के बजाय, वे उसे ट्रोल करने की कोशिश कर रहा है। जो कि काफी घृणित काम है। एनडब्ल्यूएम के बयान से पता चलता है कि वामपंथी नारीवादी महिलाएँ किसी भी परिस्थिति में गलत नहीं कर सकती हैं। कंडासामी के हर आलोचक को एक ‘ट्रोल’ करार दिया गया। यह विचित्र और अटपटा है कि कंडासामी के ‘ब्राह्मण d*cks’ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पर लीपापोती करके उसे व्हाइटवॉश कर दिया गया।

तमिलनाडु: पुनर्जीवन के अंधविश्वास में 20 दिन से पड़ा रहा महिला कांस्टेबल का शव: ईसाई पादरी और सिस्टर गिरफ्तार

डिंडीगुल पुलिस ने 38 वर्षीय अन्नाई इंद्रा नाम की एक ईसाई महिला पुलिस कांस्टेबल की मौत के मामले में गुरुवार को एक ईसाई पादरी सुदर्शनम सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक महिला डिंडीगुल के ऑल वीमेन पुलिस स्टेशन में एक पुलिस कांस्टेबल थी। पट्टिवेरनपट्टी के रहने वाले व्यक्ति पलराज से उसने शादी की थी। शादी के बाद पलराज पर जबरन ईसाई धर्म कबूलने का दबाव बनाने लगी। पति के इनकार करने पर ईसाई महिला ने दो साल पहले उसे छोड़ दिया था। जिसके बाद से महिला अपनी दो बेटियों, सिस्टर वासुकी और पादरी सुदर्शनम के साथ नंदनवनपट्टी ट्रेजरी कॉलोनी में किराए पर रहने लगी।

कुछ महीनों बाद, इंद्रा ने स्वास्थ्य कारणों के चलते स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। वह 16 नवंबर से एक लंबी छुट्टी पर थी। वहीं जब बुधवार को पुलिस उसे मिले आदेश को उसके घर पहुँचाने गई, तो उन्हें घर के भीतर दुर्गंध महसूस हुई। पुलिस ने जब वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जाँच किया तो उन्हें इंद्रा का सड़ता हुआ शव मिला। 7 नवंबर को उसकी मौत हो गई थी और उसका शरीर एक कपड़े से ढका हुआ था।

वहीं इस घटना के बाद उसकी बहन और बेटियों ने एक चौकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि इंद्रा सो रही है और वह जल्द ही जाग जाएगी। उसके परिवार ने कथित तौर पर पादरी के कहने पर उसकी लाश को इस विश्वास के साथ घर में रखा था कि वह जादुई रूप से फिर से ‘पुनर्जीवित’ हो जाएगी।

पुलिस ने शव को सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जाँच में जुट गई है। पुलिस ने पादरी सुदर्शनम और महिला की बहन वासुकी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) धारा 176, 304 ए, 406 और 420 के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं पुलिस को इस प्रकरण के पीछे पादरी सुदर्शनम का हाथ होने का शक है।

ईसाई युवती और मुस्लिम युवक की शादी को चर्च ने घोषित किया अवैध, ऐसा करवाने वाले पादरियों को भी दिया दंड

केरल के सायरो मालाबार चर्च (Syro Malabar Church) की 3 सदस्यों वाली जाँच समिति ने कैथोलिक युवती और मुस्लिम युवक के बीच अंतरधार्मिक विवाह को एक ‘गंभीर त्रुटि’ के कारण अवैध करार दिया है। समाचार पत्र ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक़, यह घटना केरल की है। 

समिति ने अपने आदेश में कहा कि शादी के दौरान कई नियमों का उल्लंघन हुआ है और इस शादी के दौरान ‘कैनन कानून’ (Canon law) का पालन नहीं किया गया इसलिए शादी ‘अवैध’ है। दो पादरियों ने शादी कराने के दौरान कई नियमों का ध्यान नहीं रखा, फ़िलहाल उन्हें भी प्रतिबंधित किया जा चुका है। 

त्रिशूर जिले के इरिनजलक्कुडा की रहने वाली कैथोलिक युवती और कोच्चि के रहने मुस्लिम युवक की 9 नवंबर को शादी हुई थी। इस घटना पर आर्क बिशप मार जॉर्ज एलेनचेरी (Mar George Alencherry) ने जाँच का आदेश दिया है। उन्होंने पादरियों द्वारा अंतरधार्मिक शादियों को ‘बढ़ावा’ देने के पहलू पर भी जाँच के आदेश दिए। 

इसके अलावा, सायरो मालाबार चर्च के पादरी ने कहा, “समिति ने इरिनजलक्कुडा के पादरी, बिशप और एर्नाकुलम-अंगालामी के आर्कडीओसेस (Archdiocese) की जानकारी इकट्ठा की है। यह जानकारी वरिष्ठ आर्की बिशप से भी साझा की जा चुकी है। जानकारी के मुताबिक़ शादी में कैनन लॉ का अनुपालन नहीं किया गया है इसलिए यह अमान्य है।” 

कैथोलिक चर्च का ‘कैनन लॉ’ ऐसे नियमों का संग्रह है, जिसे कैथोलिक चर्च के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने तैयार किया है। कैथोलिक समुदाय के लोगों को इन दिशा निर्देशों का ही पालन करना होता है।

सायरो मालाबार चर्च तय करता है अंतरधार्मिक विवाह के नियम: कैनन लॉ का पालन है आवश्यक

इसके पहले भी सायरो मालाबार चर्च विवादों में रह चुका है। चर्च ने कहा था कि वह खुद सुनिश्चित करेगा कि ईसाई समुदाय में होने वाली हर शादी कैनन लॉ के आधार पर ही होंगी। इसके लिए सभी बिशप को इस क़ानून से संबंधित दिशा-निर्देश भेज दिए जाएँगे। जिससे यह तय किया जा सके कि दो अलग धर्म के लोगों बीच शादी कैथोलिक तरीके से ही हो रही है। 

सायरो मालाबार चर्च पूर्वी (ओरिएण्टल) के 22 कैथोलिक चर्चों में से एक है, जिसका रोम के साथ भरपूर सामंजस्य है। साथ ही, इसने बिशपों को आदेश दे रखा है कि वह कैनन लॉ के तहत ही अंतरधार्मिक विवाह आयोजित कराएँ। चर्च ने बिशपों को आदेश दिया है कि वह अंतरधार्मिक शादियों के साथ ‘समुदाय के विवाह की विषमता’ (Disparity of cult marriages) जैसा बर्ताव करें। 

लेकिन इनका आयोजन कैथोलिक तरीके से ही किया जाना चाहिए। क़ानून में शामिल किए गए दिशा-निर्देशों के मुताबिक़, चर्च दो अलग धर्म के लोगों के बीच होने वाली शादियों में अन्य समुदाय की प्रक्रियाओं को शामिल नहीं करेगा। ईसाई समुदाय का कोई भी व्यक्ति ऐसी शादियों में शामिल होने की इच्छा जाहिर नहीं कर सकता है।

विवाद तब शुरू हुआ जब कोच्चि स्थित कादवंथरा सेंट जोसेफ चर्च (Kadavanthra St Joseph Church) में बिशप की मौजूदगी में एक मुस्लिम व्यक्ति से शादी कर ली। अगले दिन दंपत्ति की तस्वीर समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई, जिसके बाद केरल में कैथोलिक समुदाय के बड़े हिस्से ने विरोध करना शुरू किया।

दरअसल केरल में पादरियों ने सबसे पहले लव/ग्रूमिंग जिहाद का मुद्दा उठाया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय के युवक अन्य समुदाय की गैर मुस्लिम महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाते हैं और फिर उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते हैं।