Home Blog Page 4170

अपने ही घर में मरे मिले थे अन्वय नाइक और उनकी मॉं, उद्धव ठाकरे ने खरीदा था मकान; CM ने 19 घरों की जानकारी छिपाईः बीजेपी नेता किरीट सौमैया का आरोप

भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सीएम उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे द्वारा शिवसेना पार्टी विधायक रवींद्र वायकर की पत्नी मनीषा के साथ संयुक्त रूप से अलीबाग के कोरलाई गाँव में 23,500 स्क्वायर फीट के 19 घरों की खरीद पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में 19 घरों का खुलासा नहीं किया। सोमैया ने बृहस्पतिवार (जनवरी 08, 2021) को एक ट्वीट में कहा, “सीएम उद्धव ठाकरे ने अपने चुनावी हलफनामे में 5.29 करोड़ रूपए मूल्य के 23,500 स्क्वायर फीट के 19 घरों का खुलासा नहीं किया।”

सोमैया ने दावा किया कि ठाकरे ने 21 मार्च, 2014 को इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक से ग्राम कोरलाई (अलीबाग) में भूमि/मकान खरीदा था। गौरतलब है कि ये वही अन्वय नाइक (Anvay Naik) हैं, जिन्होंने 2018 में आत्महत्या कर ली थी।

सोमैया ने पूछा कि इस सौदे का खुलासा सीएम के चुनावी हलफनामे में क्यों नहीं किया गया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि इन 19 संपत्तियों को मार्च, 2014 में अन्वय नाइक से खरीदा गया, लेकिन नवंबर, 2020 में यह ठाकरे के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया था।

भाजपा नेता ने बृहस्पतिवार को एक प्रेस वार्ता में कहा, “5.29 करोड़ रुपए मूल्य के ये 19 घर 12 नवंबर, 2020 तक ठाकरे की बेनामी (बेनामी) सम्पत्ति थे। मैंने कोरलाई गाँव का दौरा किया और ठाकरे के भूमि रिकॉर्ड और अन्वय नाइक के परिवार के लेन-देन की जाँच की।” प्रेस वार्ता के दौरान, सोमैया ने लेनदेन के दस्तावेज भी दिखाए।

उल्लेखनीय है कि नवंबर, 2020 में जब अन्वय नाइक की आत्महत्या का मामला फिर से खुला और पत्रकार अर्णब गोस्वामी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, तो सोमैया ने कोरलाई गाँव में 9.35 एकड़ जमीन खरीदने के बारे में इसी तरह के आरोप लगाए थे और पूछा कि यह सौदा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

अन्वय नाइक और उनकी माँ कुमुद नाइक को मई, 2018 में अलीबाग स्थित उनके घर पर मृत पाया गया था। पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर सुसाइड नोट में अन्वय नाइक ने कहा था कि वह अपना जीवन समाप्त कर रहा है क्योंकि उसे टीवी एंकर अर्णब गोस्वामी और दो अन्य लोगों द्वारा 5.40 करोड़ रुपए का बकाया भुगतान नहीं किया गया।

किरीट सोमैया ने अर्णब की गिरफ्तारी के समय भी कहा था कि मई, 2018 में आत्महत्या कर चुके अन्वय नाइक की पत्नी अक्षता और मुख्यमंत्री ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे के बीच 2014 में जमीन के 21 सौदे हुए थे। भाजपा नेता सोमैया ने ये खुलासे इस बात को सामने रखने के लिए किए थे कि ठाकरे और नाइक परिवारों के बीच पहले से ही आर्थिक लेनदेन को लेकर सम्बन्ध रहे थे।

‘फेक TRP’ मामले में इंडिया टुडे समूह के सीएफओ को समन: जाँच के लिए ED ने बुलाया मुंबई

मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ़ अर्णब गोस्वामी और अन्य कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने के बीच फेक टीआरपी मामले में अहम मोड़ आया है। सूत्रों के मुताबिक़ फ़र्ज़ी टीआरपी मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इंडिया टुडे के सीएफ़ओ को समन भेजा है। 

सूत्रों द्वारा ऑपइंडिया को दी गई जानकारी के मुताबिक़ जॉइंट डायरेक्टर कार्यालय ने इंडिया टुडे समूह के सीएफ़ओ को समन भेजा है। फ़र्ज़ी टीआरपी घोटाला मामले में समूह के सीएफ़ओ को दिल्ली से मुंबई के लिए समन भेजा गया है, जिन्हें सोमवार को पेश होना है। इस मामले में ऑपइंडिया ने इंडिया टुडे के न्यूज़ डायरेक्टर राहुल कँवल से संपर्क करके उनका पक्ष जानने का प्रयास किया लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।    

पूरे मामले में यह पड़ाव तब सामने आया है जब मुंबई पुलिस रिपब्लिक टीवी पर फ़र्ज़ी टीआरपी मामले में शामिल होने का आरोप लगा रही थी। जबकि हंसा रिसर्च की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई एफ़आईआर में इंडिया टुडे का नाम शामिल था। मामले से जुड़ी एक और अहम बात ये है कि मुंबई पुलिस ने अभी तक इंडिया टुडे समूह को न तो समन भेजा है और न ही समूह के खिलाफ़ जाँच शुरू की है।  

ईडी ने टीआरपी मामले में दर्ज की ECIR  

ईडी ने फ़र्ज़ी टीआरपी मामले में एन्फोर्समेंट केस इनफार्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की है जो कि पुलिस की एफ़आईआर के समानांतर होती है। ईडी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जाँच कर रहा है और रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई थी कि एफ़आईआर में जितने चैनल्स का नाम शामिल है सभी की जाँच होगी। मूल एफ़आईआर में शामिल किए गए नामों के अलावा (जिसमें रिपब्लिक का नाम शामिल नहीं है) मुंबई पुलिस की पड़ताल भी जाँच के दायरे में आ सकती है। ईडी इस मामले से जुड़ने वाली दूसरी केन्द्रीय एजेंसी है, इसके पहले सीबीआई ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की थी। 

ईडी का खुलासा: मुंबई पुलिस ने नहीं किया था BARC के आँकड़ों का परीक्षण

दिसंबर 2020 में ईडी ने हंसा रिसर्च के अधिकारियों को समन भेजा था, जिसकी एफ़आईआर के आधार पर असल जाँच शुरू की गई थी। 

इस दौरान ऑपइंडिया ने ख़बर प्रकाशित की थी जिसके मुताबिक़ हंसा रिसर्च ने ईडी की पूछताछ में इंडिया टुडे का ज़िक्र किया था न कि रिपब्लिक टीवी का। इसके बाद जब BARC के दो अधिकारियों को समन भेजा गया था, पहला विजिलेंस विभाग से और दूसरा आईटी विभाग से। दोनों को इस तथ्य के आधार पर गिरफ्तार किया गया था कि मुंबई पुलिस ने BARC के आँकड़ों (raw data) के लिए समन नहीं भेजा था। आँकड़ों का मतलब लगाए गए बार-ओ-मीटर से मिलने वाली जानकारी और यही जाँच की शुरुआत का केंद्र भी था। आरोपों के अनुसार मुंबई पुलिस ने इन आँकड़ों का परीक्षण नहीं किया था। 

एक तरफ मुंबई पुलिस ने BARC के आँकड़ों का परीक्षण नहीं किया था और दूसरी तरफ एफ़आईआर के 48 घंटों के भीतर उसी मुंबई पुलिस ने प्रेस वार्ता की थी। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि रिपब्लिक टीवी टीआरपी घोटाला मामले में शामिल है। हंसा रिसर्च की रिपोर्ट में रिपब्लिक टीवी का नाम कहीं मौजूद नहीं था। 

फ़र्ज़ी टीआरपी मामला 

8 अक्टूबर को मुंबई पुलिस कमीश्नर परमबीर सिंह द्वारा की गई प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि तमाम चैनल अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। रिपब्लिक टीवी इसमें मुख्य आरोपित है। यह शिकायत हंसा रिसर्च ने की थी जो BARC के लिए टीआरपी रिकॉर्ड करने वाली डिवाइस को रेगुलेट करती है। 

शुरूआती एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं मौजूद था बल्कि इंडिया टुडे को मुख्य आरोपित बताया गया था। इसके बाद ऐसे कई सबूत सामने आए थे जिससे यह पता चला कि मुंबई पुलिस ने तमाम लोगों को रिपब्लिक टीवी के खिलाफ़ बोलने के लिए उकसाया था। हंसा समूह ने यह शिकायत भी की थी कि मुंबई पुलिस उसके कर्मचारियों को रिपब्लिक टीवी के खिलाफ़ बयान देने के लिए धमका रही है।    

तिरंगा लहराने वाले शख्स के साथ नजर आईं शशि थरूर की पुरानी तस्वीरें, बचाव में कहा- भटके हुए समर्थकों के लिए मैं जिम्मेदार नहीं

अमेरिकी कैपिटॉल हिल (US Capitol) में बुधवार (जनवरी 06, 2021) को हुए हंगामे के बीच भारतीय तिरंगा चर्चा का विषय बन गया। शुरुआत में जब यह तस्वीरें सामने आईं तो लोगों ने अपने-अपने अनुसार इसे लेकर प्रतिक्रियाएँ दीं। कुछ मजहबी ‘फैक्ट चेकर्स’ ने तो उसे ‘भक्त’ भी घोषित कर दिया। तिरंगे को लेकर ‘ज्ञान’ देने वालों में से एक कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर भी थे, लेकिन उन्होंने शायद ही सोचा होगा कि जिसकी वो निंदा कर रहे हैं, वो वही ज़ेवियर विन्सेंट (Vincent Xavier) है, जो उनका ही एक प्रशंसक है और शशि थरूर उसके साथ डिनर भी कर चुके हैं।

अमेरिकी संसद में जब ‘इलेक्टोरल कॉलेज वोट’ की गिनती हो रही थी, उसी दौरान हुए इस हंगामे की तस्वीरों के बीच तिरंगा नजर आने पर इस पर सवाल उठाने वालों में से ही एक भाजपा नेता वरुण गाँधी भी थे। भाजपा नेता ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “भारतीय ध्वज वहाँ क्यों है? यह एक ऐसी लड़ाई है, जिसमें हमें निश्चित रूप से भाग लेने की आवश्यकता नहीं है।”

वरुण गाँधी के इस ट्वीट पर ‘ज्ञान’ देने उतरे कई लोगों में से एक कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर भी थे। शशि थरूर ने वरुण गाँधी का ट्वीट शेयर करते हुए लिखा, “कुछ भारतीय भी डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की मानसिकता वाले हैं, जो तिरंगे को सम्मान की बजाय एक हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं और जो उनसे मेल नहीं खाता है, उसे एंटी-नेशनल करार देते हैं। वहाँ पर दिख रहा वो झंडा हम सभी के लिए चेतावनी है।”

कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के इस ट्वीट पर वरुण गाँधी ने जवाब देते हुए लिखा, “अपनी शान दिखाने के लिए तिरंगा लहराने वाले लोगों का मजाक उड़ाना आजकल आसान हो गया है। साथ ही, गलत मकसद के लिए भी तिरंगा लहराना आसान हो गया है। दुर्भाग्यवश कई लिबरल भारत में भी एंटी-नेशनल प्रदर्शन (JNU जैसे) में भी तिरंगे के गलत इस्तेमाल की चेतावनी को नजरअंदाज करते आए हैं। तिरंगा हमारे लिए गर्व का चिन्ह है, ऐसे में हम इसका सम्मान बिना किसी ‘मानसिकता’ के करते हैं।”

इस बीच, शुक्रवार (जनवरी 08, 2021) की सुबह तक ट्रम्प के समर्थन में हिंसा करने वालों के बीच तिरंगा लहराने वाले इस व्यक्ति की पहचान भी सामने आ गई। जेवियर विन्सेंट नाम के इस शख्स की पहचान और तस्वीरें जब सामने आईं तो पता चला कि वो शशि थरूर के साथ डिनर भी कर चुका है।

ये स्क्रीनशॉट वास्तव में विन्सन जेवियर पलाथिंगल नाम के व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट से लिए गए हैं। कुछ स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि ट्रंप समर्थक जेवियर विन्सेंट कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर की जीत पर ख़ुशी जाहिर कर चुके हैं और अप्रैल, 2015 में वॉशिंगटन में उनके निमंत्रण पर थरूर ने उनके साथ डिनर भी किया था।

भाजपा नेता वरुण गाँधी ने इन तस्वीरों को ट्वीट करते हुए शशि थरूर को अपने जवाब में लिखा, “प्रिय शशि थरूर, अब जबकि हम जानते हैं कि ये पागल तुम्हारा इतना प्रिय मित्र था, तो कोई केवल यही उम्मीद कर सकता है कि इस तबाही के पीछे तुम और तुम्हारे सहयोगी ही पीछे से जिम्मेदार नहीं थे।”

इन स्क्रीनशॉट्स के सामने आने पर गोलपोस्ट शिफ्ट करते हुए थरूर ने वरुण गाँधी को एक और ट्वीट में जवाब देते हुए लिखा, “इसे पूरी तरह से अस्वीकार करता हूँ। क्या आप हर शुभचिंतक के ‘भटके हुए’ कार्यों के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं? मैं अपने देश के प्रिय झंडे को शर्मनाक अमेरिकी भीड़ के बीच लाने के किसी भी प्रयास की निंदा करता हूँ।”

विन्सेंट जेवियर के सोशल मीडिया अकाउंट तलाश करने पर लोगों ने पाया कि वह अमेरिका का नागरिक है और कम से कम 2008 से ही अमेरिकी चुनावों में मतदात करते आ रहे हैं।

ट्रंप के समर्थकों की भीड़ में यूएस कॉन्ग्रेस के बाहर तिरंगा लहराने वाले विन्सेंट ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इसकी तस्वीरें भी शेयर की हैं। हालाँकि, यह कह देना कि ट्रंप समर्थक होने के साथ-साथ विंसेंट जेवियर भी दंगाइयों में से एक थे, जल्दबाजी होगी। इसके इतर, एक नागरिक होने के नाते, किसी भी राजनीतिक दल के साथ सहमती या असहमति व्यक्त करना उनका निजी अधिकार है।

हिन्दू लड़कियों को झाँसे में लेने के लिए ‘आलम’ बना ‘अनमोल’: नाबालिग के साथ फ़रार, यूपी पुलिस कर रही तलाश

उत्तर प्रदेश पुलिस आलम अंसारी नाम के युवक की तलाश कर रही है जो कि 2 जनवरी 2021 से एक नाबालिग लड़की के साथ फ़रार है। दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश पुलिस ने जानकारी दी कि आलम अंसारी ने हिन्दू नाम (अनमोल मिश्रा) से इन्स्टाग्राम अकाउंट बनाया। 

इसकी मदद से उसने नाबालिग लड़की को अपने झाँसे में लिया और उसके साथ फ़रार हो गया। ‘अनमोल मिश्रा’ नाम से बनाए गए आलम अंसारी के फ़र्ज़ी अकाउंट के बायो में ‘आई लव इंडियन आर्मी’ भी लिखा हुआ था जिससे उसका पेज और असल नज़र आए।  

आलम अंसारी का फ़र्ज़ी इन्स्टाग्राम अकाउंट

पुलिस के मुताबिक़, आलम अंसारी उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले स्थित शोहरतगढ़ का रहने वाला है। वह सोशल मीडिया की मदद से लड़कियों को अपने झाँसे में लेता था। वह अनमोल मिश्रा बन कर नाबालिग लड़की से घंटों बात करता था। जैसे ही उसने नाबालिग लड़की को अपने झाँसे में लिया वैसे ही वह उसके साथ फ़रार हो गया। पुलिस फ़िलहाल दोनों की तलाश में जुटी हुई है। 

मामला तब प्रकाश में आया जब नाबालिग लड़की 2 जनवरी की देर शाम तक घर वापस नहीं लौटी। नतीजतन लड़की के परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने आलम अंसारी पर मामला दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने आलम अंसारी और नाबालिग लड़की की खोजबीन के लिए दो पुलिस अधिकारियों की टीम का गठन किया। इसके अलावा एक सर्विलांस टीम दोनों की मोबाइल लोकेशन खोज रही है। हालाँकि, पुलिस अभी तक दोनों की लोकेशन खोजने में नाकामयाब रही है। 

3 जनवरी को पुलिस को दोनों की लोकेशन बलरामपुर स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पास मिली थी। जिसके बाद सब इंस्पेक्टर हरी नारायण दीक्षित की अगुवाई वाली टीम उस लोकेशन पर भेज दी गई थी लेकिन जब तक वह मौके पर पहुँचे आरोपित आलम अंसारी नाबालिग के साथ फ़रार हो चुका था। पुलिस ने यह अनुमान लगाया था कि अंसारी को दबिश की जानकारी मिल गई थी जिसकी वजह से वह मौके से भागने में कामयाब रहा। 

अनमोल मिश्रा के अकाउंट की डीपी (डिस्प्ले पिक्चर) में आलम अंसारी की तस्वीर लगी है। जाँच के दौरान पुलिस को यह पता चला कि अंसारी ने अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट से नाबालिग लड़की को हिन्दू बन कर अपने जाल में फँसाया। अनमोल मिश्रा नाम के अकाउंट में जो तस्वीर लगी थी वह असल में आलम अंसारी की थी, जिसकी वजह से पुलिस यह पहचानने में सफल हुई कि वह असल में आलम अंसारी है। फ़िलहाल पुलिस आरोपित के सोशल मीडिया अकाउंट को खंगालने में जुटी हुई है कि किन कारणों से उसने फ़र्ज़ी नाम से ये हरकत अंजाम दी। 

भारत में फैलता ‘ग्रूमिंग जिहाद’ खासकर उत्तर प्रदेश 

यह कोई पहला पहला ऐसा मामला नहीं है जिसमें एक मुस्लिम युवक ने खुद को हिन्दू बता कर नाबालिग और मासूम लड़की को अपने जाल में फँसाया है। पिछले कुछ सालों में लव/ग्रूमिंग जिहाद के तमाम हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं। इस तरह की डरावनी कहानियों में कई मामले ऐसे भी हैं, जिनमें मुस्लिम युवक अपनी पहचान हिन्दू बता कर किसी अन्य धर्म की युवती से शादी करता है और कुछ समय बाद उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता है। दबाव बनाने के दौरान तस्वीरें वायरल करने की धमकी, लड़की के साथ मारपीट, यौन हिंसा, बीफ़ खाने का दबाव बनाना, हिन्दू धर्म और हिन्दुओं का मज़ाक बनाना, पीड़िता को उसके परिवार से अलग करना जैसी हरकतें की जाती हैं।  

क्योंकि इस तरह के तमाम मामले सामने आए हैं और समाज में इसके षड्यंत्र की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं इसलिए ग्रूमिंग जिहाद की घटनाओं पर काबू पाने के लिए क़ानून बनाया गया है। इसमें भाजपा शासित राज्य शामिल हैं, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा।        

लंदन में बाल कलर कराने सैलून पहुँची प्रियंका चोपड़ा तो लोगों ने बुला ली पुलिस: जानिए क्या है मामला

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनास (Priyanka Chopra Jonas) बुधवार (जनवरी 06, 2021) शाम लंदन में एक हेयर सैलून जाने के कारण चर्चा में आ गई हैं। दरअसल, ऐसा कर के उन्होंने ब्रिटेन के कोविड -19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन किया है क्योंकि वायरस के नए स्ट्रेन के मिलने के बाद इसके प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए, ब्रिटेन में फरवरी के मध्य तक लॉकडाउन की घोषणा की गई है। इन नियमों के तहत सैलून और स्पा भी बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।

ब्रिटेन में COVID-19 के कारण जारी लॉकडाउन के बीच 38 वर्षीय प्रियंका चोपड़ा जोनास को उनकी माँ डॉ मधु चोपड़ा, और उनकी पालतू कुतिया ‘डायना’ के साथ शाम 4.55 बजे सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट जोश वुड के सैलून जाते देखा गया था।

इसके बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रियंका चोपड़ा की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि सेलिब्रेटी ये क्यों सोचते हैं कि वो बाकी लोगों से हटकर हैं? साथ ही, ये सवाल भी उठाए कि क्या लॉकडाउन के निर्देश सिर्फ आम लोगों के ही लिए हैं?

‘डेली मेल’ के अनुसार, स्थानीय लोगों ने प्रियंका चोपड़ा द्वारा गाइडलाइंस का उल्लंघन किए जाने पर स्थानीय पुलिस को सतर्क कर दिया और फ़ौरन वहाँ पुलिस पहुँच गई। पुलिस द्वारा सैलून में मौजूद उसके मालिक जोश वुड को मौखिक चेतावनी दी गई। हालाँकि, COVID-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन के लिए कोई जुर्माना नहीं लगाया गया।

अभिनेत्री के अनुसार, उनके बालों को उनकी आने वाली एक फिल्म के लिए कलर करने की आवश्यकता थी, जिसके बाद सैलून को COVID ​​-19 परीक्षण किए जाने के बाद निजी तौर पर उपयोग के लिए खोला गया था। गौरतलब है कि सख्त लॉकडाउन के बावजूद लंदन में फिल्म और टीवी सम्बन्धी प्रक्रियाओं को COVID-19 दिशानिर्देशों का पालन करते हुए जारी रखने की अनुमति दी है।

अभिनेत्री के एक प्रवक्ता ने कहा कि सरकारी दिशानिर्देशों के बाद, प्रियंका चोपड़ा जोनास के बाल फिल्म के लिए जोश वुड द्वारा कलर कर लिए गए थेऔर वह वर्तमान में शूटिंग कर रही हैं।

प्रियंका चोपड़ा कथित तौर पर लंदन में अपने पति निक जोनास के साथ फंसी हुई हैं। वह अपनी आगामी फिल्म, ‘टेक्स्ट फॉर यू’ की शूटिंग के लिए शहर में थीं। इस महीने के अंत में फिल्मांकन मूल रूप से समाप्त होने वाला था, प्रोडक्शन टीम सभी के लिए जल्द से जल्द अमेरिका लौटने की व्यवस्था करने की कोशिश कर रही है।

बदायूँ गैंगरेप: आधी रात को गिरफ्तार हुआ मुख्य आरोपित, 4 दिन तक छिपाए रखने वाला भी चढ़ा यूपी पुलिस के हाथ

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में गैंगरेप और जघन्य हत्या के मामले में मुख्य आरोपित 50 हजार के इनामी सत्य नारायण को पुलिस ने आखिरकार गुरुवार (जनवरी 7, 2021) रात को गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सत्यनारायण घटना वाले दिन से गाँव में ही छिपा हुआ था। इसके आलावा यूपी पुलिस दो आरोपितों जसपाल और वेदराम को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

गौरतलब है कि 3 जनवरी की रात आँगनबाड़ी सहायिका से गैंगरेप और हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद से ही मुख्य आरोपित सत्यनारायण फरार चल रहा था। सत्यनारायण की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी हुई थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम जगह-जगह लगातार उसकी तलाश कर रही थी। यहाँ तक कि उसकी तलाश में पुलिस टीमें उत्तराखंड, बरेली, चंदौसी, कासगंज में दबिश दे रही थीं, जबकि वह उसी गाँव में छिपा रहा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार रात पुलिस को पता चला कि वह किसी सहयोगी के घर में छिपा है। रात करीब 11 बजे दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे शरण देने वाले युवक को भी पुलिस पकड़कर थाने ले आई है। अब सत्यनारायण से पूछताछ में दरिंदगी की इस जघन्य घटना से जुड़े कुछ और तथ्य सामने आ सकते हैं।

इस बिच कई मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि गैंगरेप के बाद हत्या के मुख्य आरोपित सत्यनारायण को ग्रामीणों द्वारा पकड़ कर पुलिस को सौंपने की चर्चा भी है। मुख्य आरोपित सत्यनारायण की गिरफ्तारी के दौरान का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें पुलिस के दो कॉन्स्टेबल महंत सत्यनारायण को बाइक पर बैठाकर ले जाते हुए दिख रहे हैं। संभवतः इसी को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि महंत सत्यनारायण को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा है।

गौरतलब है कि बदायूँ गैंगरेप मामले में, महिला के साथ आरोपितों केवल गैंगरेप ही नहीं किया गया बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाली गई और उसके भीतर के अंगों (आंँतों) को भी फाड़ दिया गया था। दुष्कर्म के दौरान महिला का एक पैर और पसली भी तोड़ी गई थी। जाँच में यह पता चला कि महिला के शरीर से सारा खून बह जाने के कारण उसकी मौत हुई थी।

रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि शव का पोस्टमार्टम करते हुए स्वयं तीन महिला डॉक्टरों का पैनल हैरान हो गया था। जाँच में उन्होंने पाया कि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने पहले महिला के प्राइवेट पार्ट में रॉड घुसाई और जब खून तेजी से बहने लगा तो उसे रोकने के लिए उन्होंने गुप्तांग में कपड़े व रुई घुसा दी। घटनास्थल पर महिला के सारे कपड़े खून से सने मिले थे।

बता दें कि बदायूँ में महिला के साथ गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में योगी सरकार तुरंत ही एक्शन में आ गई थी। मामले के मुख्य आरोपित को पकड़ने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने STF को आदेश दिया था। साथ ही घटना का संज्ञान लेते हुए इस संबंध में ADG से रिपोर्ट माँगी थी। सीएम योगी ने आरोपितों पर NSA के तहत कार्रवाई का भी आदेश दिया था।

सुशांत का चेहरा बताता था कि वह एक मासूम, संजीदा और बेहतर इंसान थे: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि सुशांत एक मासूम, संजीदा और अच्छे इंसान थे। सुशांत सिंह की बहनों (प्रियंका सिंह और मीतू सिंह) द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई करने वाली पीठ के मुखिया न्यायाधीश जेजे शिंदे ने यह टिप्पणी की।

बॉलीवुड अभिनेता की बहनों ने यह याचिका उन पर दर्ज किए गए मामले ख़त्म करने के लिए दायर की थी, जिसके आधार पर उन पर सुशांत के अवसाद सम्बंधी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन (medical prescription) में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। यह एफ़आईआर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने बांद्रा पुलिस थाने में दर्ज कराई थी, जिसमें दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर तरुण कुमार का नाम भी शामिल था। 

इस मामले पर फैसला सुरक्षित रखते हुए न्यायाधीश शिंदे ने फिल्म “एमएस धोनी- अनटोल्ड स्टोरी” में सुशांत सिंह के काम की सराहना की। साथ ही यह भी कहा कि कोई भी उनके चेहरे से अंदाज़ा लगा सकता था कि वह (सुशांत सिंह) एक अच्छे इंसान थे। न्यायाधीश शिंदे ने अपनी पूरी टिप्पणी में कहा, “मामला कुछ भी हो, सुशांत सिंह का चेहरा देख कर कोई भी यह अंदाजा लगा सकता था कि वह मासूम, संजीदा और एक बेहतर इंसान थे। उन्हें सभी पसंद करते थे ख़ास तौर पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान की बायोपिक में।”   

गौरतलब है कि रिया चक्रवर्ती ये आरोप लगाती रही हैं कि सुशांत सिंह अवसाद विरोधी उपचार (anti-depressant medication) लेते थे। रिया चक्रवर्ती का दावा था कि बॉलीवुड अभिनेता की बहनों ने दिल्ली के डॉक्टर से दवाइयाँ ली थी और वही दवाइयाँ अपने भाई को देती थीं। इसके आधार पर रिया चक्रवर्ती ने आरोप लगाया था कि सुशांत की मौत का कारण ‘ड्रग्स, नशीले पदार्थ और दवाइयों का खतरनाक कॉकटेल’ हो सकता है। 

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया चक्रवर्ती आरोपित हैं, अभिनेता के पिता ने रिया चक्रवर्ती और उसके परिजनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कराया था। महाराष्ट्र सरकार द्वारा किए गए लंबे राजनीतिक ड्रामे के बाद सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी गई थी। इसके आधार पर सुशांत सिंह राजपूत की बहनों पर दर्ज किए गए मामले की जाँच भी सीबीआई को सौंपी गई है।   

कर्नाटक: गरीब दुल्हनों को ₹25000, पुजारियों से शादी करने पर ₹3 लाख, UPSC के लिए स्कॉलरशिप

पिछले साल ही येदियुरप्पा सरकार द्वारा स्थापित ‘कर्नाटक राज्य ब्राह्मण विकास बोर्ड’ के तहत आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) ब्राह्मणों के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो स्कीम शुरू की गई हैं – अरुंधती (Arundhati)और मैत्रेयी (Maitrey)! इन योजना का उद्देश्य इस तबके की नव विवाहिताओं को आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है। कर्नाटक में 06 करोड़ की आबादी में से लगभग 3% ब्राह्मण समुदाय से हैं।

बोर्ड के अनुसार, पहली योजना ‘अरुंधति’ के अंतर्गत 550 गरीब ब्राह्मण लड़कियों को विवाह के लिए 25,000 रुपए प्रत्येक के अनुसार दिए जाएँगे। जबकि दूसरी योजना, ‘मैत्रेयी’ राज्य में गरीब ब्राह्मण पुजारी से विवाह करने पर 25 लड़कियों को 3 लाख रुपए प्रत्येक के हिसाब से बॉन्ड दिया जाएगा, जो कि तीन साल तक इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

बोर्ड के अध्यक्ष एचएस सचिदानंद मूर्ति ने कहा कि विवाह करने वाली लड़कियों को कुछ अन्य शर्तों को भी पूरा करना होगा। जैसे, ब्राह्मण परिवार आर्थिक रूप से कमजोर की श्रेणी का होना चाहिए। साथ ही, विवाह करने वाली लड़की की यह पहली शादी होनी चाहिए और उन्हें एक निश्चित अवधि तक विवाहित रहना ही होगा।

बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि शुरुआत में ‘मैत्रेयी’ स्कीम ऐसी लड़कियों के लिए शुरू किए जाने की योजना थी, जो किसी गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले ब्राह्मण किसान, बावर्ची या फिर पुजारी से शादी करती। लेकिन सर्वे के बाद यह पता चला कि पुजारी वर्ग आर्थिक तौर पर बेहद कमजोर है और इसलिए इस योजना को पुजारियों के फायदे के लिए चलाने की पहल की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘मैत्रेयी’ स्कीम के अंतर्गत किसी भी विवाहित जोड़े को 3 लाख रूपए के बॉन्ड का पूरा फायदा उठाने के लिए 3 साल तक विवाहित रहना होगा और शादी के हर एक साल के अंत में 1 लाख रुपए की किश्त दंपति को दी जाएगी।

UPSC के लिए भी मिलेगी ब्राह्मणों को मदद

बोर्ड के अध्यक्ष के अनुसार, UPSC की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले गरीब ब्राह्मण छात्रों की मदद के लिए भी 14 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है, जिसका इस्तेमाल अभ्यर्थियों को स्कॉलरशिप, फीस और ट्रेनिंग देने के खर्च में किया जाएगा।

यह योजना ऐसे अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी, जो यह प्रमाणित कर सकेंगे कि उनके पास पाँच एकड़ से ज्यादा खेती लायक जमीन नहीं है और 1000 वर्ग फीट से बड़ा फ्लैट नहीं है। इसके अलावा, इस योजना का लाभ सिर्फ उन गरीब ब्राह्मणों को होगा, जो पिछड़ी या अनुसूचित जाति से नहीं आते होंगे और उनकी सालाना पारिवारिक आय 8 लाख रुपए से भी कम हो।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने वर्ष 2018-19 में अपने कार्यकाल के दौरान ‘ब्राह्मण विकास बोर्ड’ के गठन के साथ ही उसे 25 करोड़ बजट फंड उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन वर्ष 2019 के अंत में भाजपा की बीएस येदियुरप्पा सरकार ने इस बोर्ड का गठन किया और एचएस मूर्ति इसके पहले अध्यक्ष बने। इसी 25 करोड़ रुपए बजटके इस्तेमाल के लिए इस बोर्ड द्वारा ये 2 योजना जारी की गई हैं।

बताया जा रहा है कि येदियुरप्पा सरकार की यह योजना बोर्ड द्वारा ‘विवाह सहायता’ की ऐसी ही एक योजना को लेकर शुरू की गई है, जिसका नाम है- शादी भाग्य! इसे वर्ष 2013 में कॉन्ग्रेस सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर ‘अल्पसंख्यक‘ परिवारों की महिलाओं की शादी के लिए 50,000 रुपए देने के लिए शुरू किया था। येदियुरप्पा ने तब इस योजना की आलोचना करते हुए कहा था कि इसे सभी समुदायों के गरीबों को लाभ पहुँचाने के लिए विस्तारित किया जाना चाहिए।

कश्मीर पर फ्रांस ने किया भारत का समर्थन, कहा- UNSC में चीन को नहीं खेलने दिया कोई ‘प्रोसीज़रल गेम’

कश्मीर के मुद्दे पर फ्रांस ने एक बार फिर भारत का समर्थन किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के एक सलाहकार ने गुरुवार (जनवरी 7, 2021) को कहा कि फ्रांस, कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थक रहा है। इसलिए फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन को कोई ‘प्रक्रियागत खेल’ (प्रोसीज़रल गेम) खेलने की अनुमति नहीं दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस और भारत के बीच रणनीतिक वार्षिक संवाद के लिए भारत के दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) के कूटनीतिक सलाहकार इमैनुएल बोन (Emmanuel Bonne) ने कहा, “चीन जब नियम तोड़ता है, तो हमें बेहद मजबूत और बेहद स्पष्ट होना होगा। हिंद महासागर में हमारी नौसेना की मौजूदगी का यही सन्देश है।” उन्होंने यह भी कहा, “जो हम पब्लिकली कहते हैं, उसे चीन को प्राइवेटली भी कह सकते हैं, इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है।”

गौरतलब है कि विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (वीआईएफ) द्वारा आयोजित ‘फ्रांस और भारत: स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत के साझेदार’ विषय पर अपने संबोधन में बोन ने कहा कि फ्रांस ‘क्वाड’– अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत का समूह- के करीब है और भविष्य में उनके साथ कुछ नौसैनिक अभ्यास भी कर सकता है। इसके अलावा दिन में उन्होंने भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी बातचीत की। जिसमें सुरक्षा सहित कई द्विपक्षीय मामले शामिल थे।

फ्रांसीसी नौसेना के ताइवान जलडमरूमध्य में गश्त करने वाली एक मात्र यूरोपीय नौसेना होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “यह उकसावे के तौर पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर डालने के लिए है। हमें टकराव की और नहीं बढ़ना है और मैं समझता हूँ कि दिल्ली के मुकाबले पेरिस से यह कहना कहीं ज्यादा आसान है, वह भी तब जब हिमालय में आपके यहाँ समस्या है और आपकी सीमा पाकिस्तान से लगी हो।”

अमिताभ का इतिहास साफ़ नहीं, ना ही वो सामाजिक कार्यकर्ता; कॉलर ट्यून से हटाई जाए आवाज: HC में PIL दायर

दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन की आवाज़ को कोरोनो वायरस के खिलाफ सावधानियों और बचाव का संदेश देने वाली कॉलर ट्यून से हटाने का अनुरोध किया गया है। याचिका में इसे हटाने का आधार यह बनाया गया है कि अमिताभ बच्चन स्वयं, परिवार के कुछ सदस्यों के साथ, वायरस से संक्रमित थे।

याचिका को राकेश नाम के एक शख्स ने एडवोकेट एके दुबे और पवन कुमार के जरिए दायर किया है। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार (जनवरी 07. 2021) को सुनवाई के लिए लाई गई। दिल्ली उच्च न्यायलय ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और आने वाली 18 जनवरी को इस पर सुनवाई करेगा।

इस PIL के अनुसार, कोरोना के संक्रमण के खतरों से सावधानी के बारे में बताने वाली इस कॉलर ट्यून में अमिताभ बच्चन की जगह उन कोरोना वॉरियर्स की आवाज शामिल करने की बात कही गई है, जिन्होंने संक्रमण के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान लोगों की सेवा की।

अधिवक्ताओं एके दुबे और पवन कुमार के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, “भारत सरकार कॉलर-ट्यून पर निवारक उपायों के संबंध में आवाज देने के लिए अमिताभ बच्चन को भुगतान कर रही है।’’

PIL के अनुसार, “कुछ कोरोना वॉरियर्स हैं, जो राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं और इस कठिन समय में गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं। साथ ही, उन्हें भोजन, कपड़ा और आश्रय प्रदान कर रहे हैं तथा यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि कुछ कोरोना योद्धाओं ने अपनी कम आय को भी गरीब और जरूरतमंद लोगों में बाँट दिया।”

याचिका में कहा गया है कि कुछ प्रसिद्ध कोरोना योद्धा अब भी बिना किसी भुगतान के अपनी सेवाएँ देने और राष्ट्र की सेवा के लिए तैयार हैं ।

विभिन्न अदालतों में उनके खिलाफ लंबित कई मामलों का जिक्र करते हुए याचिका में आरोप लगाया गया है कि अमिताभ बच्चन का इतिहास बहुत साफ नहीं है और साथ ही वह सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते राष्ट्र की सेवा नहीं कर रहे बल्कि इसके लिए उनको सरकार से मेहनताना दिया गया है। जिस कारण मोबाइल के कॉलर ट्यून से अमिताभ बच्चन की आवाज हटाई जानी चाहिए।

मोबाइल फोन पर सुनाई देने वाली इस कॉलर ट्यून में अमिताभ बच्चन की आवाज में जो संदेश सुनाई देता है वो है, “नमस्कार, हमारा देश और पूरा विश्व आज कोविड-19 की चुनौती का सामना कर रहा है। कोविड-19 अभी खत्म नहीं हुआ है, ऐसे में हमारा फर्ज है कि हम सतर्क रहें। इसलिए जब तक दवाई नहीं, तब तक कोई ढिलाई नहीं। कोरोना से बचाव के लिए जरूरी है, नियमित रूप हाथ धोना, मास्क पहनना और आपस में उचित दूरी बनाए रखना। याद रखिए दो गज दूरी, मास्क है जरूरी। खाँसी, बुखार या साँस लेने में कठिनाई होने पर हेल्पलाइन नंबर 1075 पर संपर्क करें।”