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बंगाल में श्रमिकों को मार्च से नहीं मिला वेतन, बैठक में चली कुर्सियाँ तो भाग खड़े हुए ममता के मंत्री: देखें Video

दिल्ली में कृषि कानून के नाम पर केंद्र सरकार के विरोध में हो रहे किसान आंदोलन का समर्थन करने वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस को अपने ही प्रदेश में मजदूरों की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही। सोमवार (दिसंबर 28, 2020) को इसी कारण बंगाल के नेताजी इंडोर स्टेडियम में टीएमसी नेताओं को ठेका मजदूरों के विरोध का सामना करना पड़ा। नाराज मजदूरों ने कॉन्फ्रेंस के बीच ही कुर्सियाँ पटकनी, फ्लेक्स बोर्ड फाड़ने शुरू कर दिए। मजदूरों का कहना था कि लंबे समय से उन्हें यह नहीं बताया जा रहा है कि उन्हें उनकी सैलरी आखिर कब मिलेगी।

स्टेडियम में मजदूरों का रोष कल (दिसंबर 28, 2020) बैठक के दौरान देखने को मिला। यह बैठक राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों ने मजदूरों की माँग सुनने के नाम पर बुलाई थी। इस पर मजदूरों ने कहा कि वो इस बैठक में तभी शामिल होंगे जब उनकी डिमांड को मानने का आश्वासन दिया जाएगा। इस बैठक में राज्य शहरी मंत्री फिरहाद हकीम, ऊर्जा मंत्री सोभन देब चट्टोपाध्याय और श्रम मंत्री मोलोय घटक मौजूद थे।

कार्यक्रम में मोलोय घटक जैसे ही अपनी स्पीच बंद करने चले, तभी स्टेडियम का माहौल बिगड़ गया। मजदूरों ने कहा कि इस बैठक में वो सैलरी पर बातचीत की अपेक्षा कर रहे थे। मगर जब उन्होंने देखा कि सारी बात खत्म होने के बाद भी कोई इस पर बात नहीं कर रहा तो सभी मजदूरों ने नेताओं के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया। जिसे देख सभी मंत्री जल्दी जल्दी में स्टेडियम से भाग निकलने में सफल हुए।

एक मजदूर ने इस दौरान कहा, “आपको हमारी मासिक 13,500 मजदूरी देनी होगी।” दूसरे ने कहा, “हमें लगा था कि आज हमारी सैलरी मिल जाएगी। फिर आखिर ऐसा क्यों नहीं हुआ।”

सोशल मीडिया पर सामने आई वीडियो में देख सकते हैं प्रदर्शनकारियों को आश्वासान देने की बजाय ये राज्य नेता मंच छोड़कर भागते नजर आए थे। इंडियन एक्स्प्रेस के मुताबिक राज्य शहरी मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा, “डिमांड ऐसी पूरी नहीं की जा सकेंगी। अगर हम मुख्यमंत्री को बताएँगे तो वो जरूर सुनेंगी।”

वहीं घटक ने कहा, “हमारे पास आज घोषणा के लिए कुछ नहीं है। हमें मालूम है इन्हें पिछले 6 माह से कमीशन नहीं मिल रहा। हम इनकी डिमांड पर गौर कर रहे हैं, लेकिन ऐसे प्रदर्शन ठीक नहीं।”

बता दें कि ये विरोध प्रदर्शन सेल्फ एंप्लॉडय लेबर ऑर्गनाइजेशन के मजदूरों द्वारा किया गया था, जिसे वामपंथी काल में अस्तित्व में लाया गया। इसका मकसद असंगठित श्रमिकों से सोशल सेक्योरिटी स्कीम में तय राशि को निकलवाना था। मजदूरों ने इस पर बताया कि उनको असंगठित श्रमिकों से पैसे निकालने के लिए कमीशन मिला। पूरे राज्य में ऐसे लगभग 6,500 कर्मचारी हैं। इनका कहना है कि उनका पैसा मार्च-अप्रैल से रोक दिया गया था, जिससे उन्हें कमीशन भी नहीं मिल रहा। अब इनकी माँग है कि न्यूनतन मजदूरी फिक्स की जाए जबकि मंत्री कह रहे हैं कि वो तभी माँग सुनेंगे जब प्रदर्शन वापस लिया जाएगा।

भाजपा बंगाल ने इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर की है। उन्होंने ऐसी घटना के पीछे भ्रष्टाचार, फर्जी वादे और बढ़ती बेरोजगारी को जिम्मेदार बताया है। साथ ही कहा कि यह सब बंगाल में हर तरह से बढ़ रहा है।

‘क्रिसमस पर PM मोदी गए चर्च, किया प्रेयर’ – कॉन्ग्रेसी महिला नेता ने शेयर की फोटो, हुआ वायरल – Fact Check

सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने के लिए पुरानी तस्वीर शेयर करके अक्सर अपनी फजीहत करवाना कॉन्ग्रेसियों के लिए कोई नई बात नहीं है। लेकिन बार-बार पोल खुलने के बावजूद भी वह इस काम को करने के इतने आदी हो चुके हैं कि मौका आते ही उनकी पहली प्राथमिकता झूठ फैलाना ही होता है।

हाल में क्रिसमस के मौके पर पीएम मोदी ने ट्विटर के जरिए सबको क्रिसमस की बधाई दी, लेकिन कहीं भी ऐसी खबर देखने को नहीं मिली कि पीएम ने चर्च विजिट किया। फिर भी इस बीच उनकी एक तस्वीर का इस्तेमाल करके यह दावा कर दिया गया कि वह चर्च में गए थे

कर्नाटक में महिला कॉन्ग्रेस की सदस्य और कॉन्ग्रेस के प्रियदर्शिनी अभियान की इंचार्ज भव्या नरसिम्हामूर्ति ने तो इसे शेयर करके न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा बल्कि बजरंग दल पर भी तंज कसने का प्रयास किया। बता दें कि असम में कच्छर के बजरंग दल मुख्य सचिव मीथू नाथ ने कहा था कि जो कोई भी क्रिसमस पर चर्च जाएगा, उसे पीटा जाएगा। 

भव्या के कॉन्ग्रेसी नेत्री होने के प्रमाण

इसी के मद्देनदर भव्या ने पीएम मोदी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “कोई तस्वीर में बजरंगदल को टैग कर दो। ये आदमी क्रिसमस पर चर्च जा रहा है। इसकी हिम्मत कैसे हुई?”

ट्विटर पर किसान नाम के यूजर ने लिखा, “नरेंद्र मोदी, हिंदू युवा वाहिनी, करणी सेना, बजरंग दल को चिढ़ाने के लिए क्रिसमस पर चर्च पहुँच गए।” कई अन्य लोगों ने इसी तस्वीर को शेयर करके पीएम मोदी को अंधभक्तों का संता क्लॉज बताया और लिखा, “अंधभक्तों का संता आज चर्च पहुँचे हैं।”

ऐसे फैलाया गया फेक न्यूज

कुल मिलाकर इन सभी लोगों का दावा यही दर्शा रहा था मानो क्रिसमस पर प्रधानमंत्री ने चर्च विजिट किया हो। लेकिन वास्तविकता में यह तस्वीर 9 जून 2019 की है, जब प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका में हुए बम ब्लास्ट के बाद मृतकों के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने गए थे। टाइम्स ऑफ इंडिया ने 9 जून को प्रकाशित अखबार में बताया था कि पीएम मोदी कोलंबो के सेंट एंथनी चर्च ईस्टर हमले का शिकार हुए पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने पहुँचे।

इसके अलावा पीएम मोदी ने भी ट्विटर पर अपने इस दौरे की तस्वीर शेयर की थी। उन्होंने 9 जून 2019 के ट्वीट में लिखा, “मुझे यकीन है कि श्रीलंका दोबारा उठेगा। आतंकियों के कायराना हमले श्रीलंका के साहस को नहीं हरा सकके। भारत श्रीलंका के साथ एकजुट होकर खड़ा है।”

गौरतलब है कि साल 2019 के अप्रैल माह में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो ईस्टर रविवार को विस्फोटों से दहल उठी थी। इस हमले में तीन चर्च और 4 लक्जरी होटलों सहित 8 विस्फोट हुए थे। इस पूरे हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी लेकिन सरकार ने स्थानीय कट्टरपंथी समूह नेशनल तौहीद जमात को भी बमबारी के लिए जिम्मेदार बताया था। इसी हमले के लगभग डेढ़ माह बाद पीएम ने सेंट एंथनी चर्च में विजिट किया था। जो आतंकियों के आत्मघाती हमले का शिकार था।

नेपाल में सड़क पर उतरे लोग: चीन का उलटा पड़ा दाँव तो भारत पर ही लगा दिया जासूसी का आरोप

नेपाल में चीन का दाँव अब काम नहीं आ रहा है, ऐसे में अब चीनी मीडिया ने भारत को ही दोष देना शुरू कर दिया है। चीन ने आरोप लगाया है कि भारत उसकी जासूसी कर रहा है। जबकि दुनिया भर में कई देश चीन पर ही हैकिंग से लेकर जासूसी तक के आरोप लगाते रहते हैं। ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भारत पर नेपाल की राजनीति में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है, जबकि सच्चाई ये है कि चीन का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल फ़िलहाल 4 दिन के प्रवास में काठमांडू में बैठा हुआ है।

ऊपर से चीन दुनिया को बेवकूफ बनाने के लिए ये कह रहा है कि कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के उप-मंत्री गुओ येझोउ के नेतृत्व में चीन की जो टीम नेपाल गई है, वो कोरोना वायरस पर चर्चा के लिए पहुँची है। जबकि चीन लगातार नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) के विभिन्न गुटों को एक करने में लगा हुआ है। चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसने नेपाल की राजनीतिक परिस्थितियों और बदलते घटनाक्रम को संज्ञान में लिया है।

चीन ने नेपाल की सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी को राजनीतिक स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा, देश के हित, विकास और संपूर्ण परिदृश्य को ध्यान में रखने की सलाह देते हुए आंतरिक विवाद को सुलझाने के लिए कहा है। उधर ‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ ने फूदान यूनिवर्सिटी के प्रफेसर लिन मिनवांग के हवाले से दावा किया है कि नेपाल के विवाद में भारतीय हस्तक्षेप से चीन चिंतित है। दावा किया गया है कि भारत के ख़ुफ़िया एजेंट NCP नेताओं पर नजर रख रहे हैं।

वहीं नेपाल के कई राजनीतिक दल और और बुद्धिजीवी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के संसद भंग किए जाने के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। काठमांडू में शनिवार (दिसंबर 26, 2020) को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। इनमें अधिकतर लेखक, कवि और कलाकार शामिल थे। लोगों ने देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखने की बात करते हुए अपना आक्रोश जताया। ओली और प्रचंड गुट के बीच समझौता नहीं हो पा रहा है।

वहीं नेपाल ने कहा है कि भारत के साथ उसके रिश्ते आगे बढ़ते रहेंगे। नेपाल ने कहा कि वहाँ की राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव भारत के साथ उसके रिश्तों पर नहीं पड़ेगा। भारत में नेपाल के राजदूत नीलाम्बर आचार्य ने TOI से कहा कि वहाँ के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली जल्द ही नई दिल्ली आएँगे। साथ ही जॉइंट कमीशन की बैठक भी होनी है। जहाँ नेपाल की राजनीति में चीन बेशर्मी से हस्तक्षेप कर रहा है, भारत ने अपनी तटस्थता से नेपाल की जनता को भी खुश किया है।

इस दौरान भारत के तीन बड़े अधिकारियों ने काठमांडू का दौरा कर के द्विपक्षीय हितों को मजबूत करने पर बल दिया। कॉमर्स और एनर्जी मंत्रालय के सचिवों की नेपाल के उनके समकक्षों के साथ बैठक भी हुई। नेपाल द्वारा गलत नक्शा जारी किए जाने के बाद पिछले कुछ महीनों में उसके रुख में बड़ा बदलाव आया है और भारत के साथ रिश्ते पटरी पर आ गए हैं। उधर चीनी प्रतिनिधिमंडल लगातार NCP नेताओं के साथ बैठकों में व्यस्त है।

बता दें कि चीन का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल रविवार (दिसंबर 27, 2020) को काठमांडू पहुँचा और तुरंत ही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) को टूट से बचाने के काम में लग गया। चीनी टीम ने नेपाल के राष्ट्रपति से मुलाकात की। इसके बाद शाम के 7:30 बजे चीनी टीम बालूवाटर पहुँची और वहाँ पीएम ओली के साथ उसकी बैठक हुई। टीम स्थिति का यही आकलन करने आई है कि नई परिस्थितियों में उस निवेश पर क्या असर पड़ेगा। 

‘ईश्वर की चेतावनी’ के बाद रजनीकांत ने त्यागा राजनीति में आने का प्लान, तमिलनाडु चुनाव में ‘थलाइवा’ की ‘नो एंट्री’

रक्तचाप समस्याओं के कारण सुपरस्टार रजनीकांत कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। अब वहाँ से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा है कि वो राजनीतिक पार्टी की शुरुआत नहीं करेंगे। इससे पहले वो दिसंबर महीने के अंत में राजनीतिक दल शुरू करने को लेकर निर्णय लेने वाले थे। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने उन्हें एक चेतावनी दी है, जिसका अनुपालन करते हुए वो राजनीति में नहीं आएँगे।

अपने प्रशंसकों के लिए उन्होंने ट्विटर पर एक पत्र लिख कर उनका आभार जताया और उन्हें जानकारी दी कि उनके अस्वस्थ होने की हालिया घटना ईश्वर की तरफ से उन्हें मिली एक चेतावनी थी, जिसके बाद उन्होंने राजनीतिक दल शुरू करने की योजना को रोक दिया है। तमिलनाडु में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं और वहाँ ‘थलाइवा’ के नाम से पुकारे जाने वाले रजनीकांत की पोलिटिकल एंट्री का इंतजार सभी को था।

रजनीकांत ने ऐलान किया था कि वो ईश्वर से जुड़े हुए व्यक्ति हैं और इसीलिए उनकी राजनीति आध्यात्मिक किस्म की होगी। उन्होंने कहा कि कई लोग उन पर विश्वास करते हैं और वो नहीं चाहते कि वो लोग अपने-आप को ठगा हुआ महसूस करें, इसीलिए ये निर्णय लिया गया है। उन्होंने महामारी का हवाला देते हुए कहा कि इस परिस्थिति में उनका चुनाव प्रचार करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यूज़ मीडिया और सोशल मीडिया आपको जीत नहीं दिला सकता।

दिसंबर 12 को अपना 70वाँ जन्मदिन मनाने के बाद से ही उन्होंने अपनी फिल्म ‘Annathe’ की शूटिंग शुरू कर दी थी, लेकिन सेट पर कुछ लोगों को कोरोना होने के बाद वो भी रुक गई थी। अब उन्होंने कहा है कि उनके सेट पर ऐसी स्थिति आने के कारण उन्हें भी डॉक्टरों की निगरानी में रहने की सलाह दी गई है। उन्होंने इसका भी जिक्र किया कि कैसे अब ब्रिटेन में इस वायरस ने अपना रूप बदल लिया है।

फ्री कश्मीर का बैनर लहराई थी महक मिर्जा, मुंबई पुलिस ने कहा – ‘बंद हो केस, दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य नहीं था’

मुंबई पुलिस ने अपनी चार्जशीट में 39 वर्षीय महक मिर्जा प्रभु के खिलाफ केस बंद करने की माँग की है, जिसने गेटवे ऑफ इंडिया पर ‘फ्री कश्मीर’ लिखा बैनर लहराया था। JNU में नकाबपोश वामपंथी छात्रों ने हॉस्टल में घुस-घुस कर ABVP के छात्रों की पिटाई की थी, लेकिन देश भर में इसका उलटा नैरेटिव ही फैलाया गया था। फिर उलटा भाजपा के विरोध में ही कई शहरों में वामपंथियों ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए।

मुंबई में आयोजित इसी विरोध प्रदर्शन में महक मिर्जा ने ‘फ्री कश्मीर’ लिखा बैनर लहराया था, जबकि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान ने उसके एक हिस्से पर जबरन कब्ज़ा कर के रखा हुआ है। एस्प्लेनेड अदालत में पेश की गई रिपोर्ट में मुंबई पुलिस ने कहा है कि महक मिर्जा के खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। सोमवार को पुलिस ने 36 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की और कहा कि लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।

इनमें से अधिकतर वकील, कार्यकर्ता, छात्र, कलाकार और शिक्षाविद हैं। 5-6 जनवरी, 2020 को आयोजित इस प्रदर्शन में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कानून CAA के साथ-साथ उस NRC के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जो अभी असम से बाहर कहीं लागू ही नहीं हुआ है। साथ ही जनगणना से पहले होने वाले नियमित NPR को लेकर भी भ्रम फैलाया गया। 36 में से 29 आरोपितों को 10,000 रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी गई।

ये सभी अदालत में उपस्थित भी हुए थे। जनवरी 7, 2020 को महक मिर्जा के खिलाफ IPC की धारा 153B (भारत की प्रभुता और अखंडता की मर्यादा के विरुद्ध कुछ प्रकाशित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया था। जाँच रिपोर्ट में मुंबई पुलिस ने कहा कि उसे आरोपित के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य के कोई सबूत नहीं मिले, ऐसे में उन्हें बरी कर दिया जाए।

वकील मिहिर देसाई, लारा जेसानी, और सुजान अब्राहम, पत्रकार जतिन देसाई और कार्यकर्ता सुवर्णा साल्वे, सलीम साबुवाला और फिरोज मीठीबोरवाला का नाम भी इस चार्जशीट में शामिल है, जिन पर IPC की धारा 143 (गैरकानूनी तरीके से जमा होना) और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने अनुमति के बिना गेटवे ऑफ इंडिया पर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि आज़ाद मैदान में ऐसा किया जा सकता था।

मुंबई पुलिस ने माना कि इस विरोध प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस, ABVP, CAA, और NPR के खिलाफ नारेबाजी की और पीएम मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी नारे लगाए। अगर महक मिर्जा प्रभु पर आरोप साबित हो जाते तो उसे 5 वर्षों तक की सजा दी जा सकती थी। हालाँकि, अब अदालत के हाथ में है कि वो पुलिस की इस रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार करे। ‘फ्री प्लाकार्ड’ मामले में सोशल मीडिया पर आम लोगों ने भी आक्रोश जताया था।

सामना के एग्जीक्यूटिव संपादक संजय राउत ने तब ‘फ्री कश्मीर’ बैनर का बचाव करते हुए कहा था कि जिन्होंने यह बैनर थामा था, उनका मकसद कश्मीर में फ्री इंटरनेट, फ्री मोबाइल सर्विसेज और अन्य प्रतिबंधों से है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस ने भी इसके खिलाफ आवाज़ उठाते हुए कहा था कि उद्धव ठाकरे अपनी नाक के नीचे फ्री कश्मीर एंटी इंडियन कैंपेन को बर्दाश्त कर रहे हैं।

‘मुझ पर पेशाब फेंका, रात में बाहर रखा… बहन के लिए डरता था’: पादरी के कैंप में प्रताड़ना झेल चुके युवक की आपबीती

अमेरिकन पादरी व जॉर्जिया डेमोक्रेटिक सीनेट के राजनेता रेव रैफेल वार्नोक (Rev. Raphael Warnock) द्वारा संचालित चर्च कैंप में 18 साल पहले (साल 2002) 12 साल के एक बच्चे के साथ दुर्व्यव्हार करने का मामला प्रकाश में आया है। एंथनी वॉशिंगटन नाम का वह लड़का आज 30 साल का हो चुका है। उसने वॉशिंगटन फ्री बिकॉन (Washington Free Beacon) को दिए इंटरव्यू में अमेरिकन नेता व चर्च पादरी रेव रैफल वार्नोक के कैंप को लेकर कई खुलासे किए।

एंथनी ने रेव रैफेल की देखरेख में चलाए जा रहे कैंप के बारे में बताया कि वहाँ साल 2002 में उसके ऊपर कैंप काउंसलर ने पेशाब कर दिया था और बाद में उसे कैबिन में बंद करके रात भर रखा गया था। वॉशिंगटन आपबीती सुनाते हुए कहते हैं कि एक शाम अपना बिस्तर गीला करने के कारण वार्नोक के कैंप में उन्हें पूरी रात बाहर सोने को मजबूर किया गया। वो भी बिना तकिया, कंबल या किसी अन्य चीज के, जिससे उसे गर्माहट मिले।

पीड़ित लड़के के मुताबिक चर्च के कैंप में हुई गलती के कारण उसे टेंट में घुसने नहीं दिया जा रहा था, जबकि बाहर एकदम रात हो गई थी। भयावह रात के बारे में बात करते हुए वॉशिंगटन कहते हैं कि उनके सामने एक बास्केट बॉल के अलावा कुछ भी नहीं था। काउंसलर ने उसे अंदर घुसने से साफ मना कर दिया था।

लड़के के मुताबिक काउंसलर ने उस समय उनके ऊपर बाल्टी में बचा हुआ पेशाब भी फेंका, जो आमतौर पर बाथरूम न जा पाने के कारण लड़के इस्तेमाल करते थे। वॉशिंगटन ने अपनी बात को जारी रखते हुए बताया कि उसने काउंसलर को बच्चे पकड़ते भी देखा, लेकिन आगे बताते-बताते वह बिलकुल चुप हो गए और बस यही बता पाए कि उन्हें अपने व अपनी बहन के लिए डर लगता था।

सबसे हैरानी की बात पीड़ित ने यह बताई कि रैफेल द्वारा मैरीलैंड में चलाए जा रहे इस कैंप में बच्चों के अभिभावकों को जाने की अनुमति नहीं थी। लेकिन, लगातार प्रताड़ना झेलने के बाद वह किसी तरह अपनी माँ को कहीं से फोन कर पाए और उनकी माँ ने पुलिस को संपर्क किया। इसके बाद पीड़िता के अनुसार, जब पुलिस आकर काउंसलर से पूछताछ करने लगी तो रैफेल ने उसमें हस्तक्षेप करने का प्रयास किया, जिसके कारण पुलिस ने उन्हें अरेस्ट भी किया। मगर बाद में इस मिसकम्युनिकेशन कह दिया गया।

बता दें कि साल 2005 के बाद से अटलांटा के एबेनेज़र बैपटिस्ट चर्च के पादरी वार्नोक, पहले बाल्टीमोर चर्च के पादरी के रूप में 5 साल तक काम कर चुके थे। उसी चर्च के शिविर पर अब दुर्व्यव्हार के आरोप लगे हैं। इसके अलावा इस चर्च द्वारा करवाए जा रहे कैंप के बंद होने का कारण भी वहाँ बरती जा रही स्वास्थ्य संबंधी असावधानियाँ थीं, जिसे देखते हुए साल 2003 में मैरीलैंड के स्वास्थ्य विभाग ने कैंप को आयोजित करने से मना किया था। उन्होंने इस फैसले के पीछे एक कारण बाल शोषण भी बताया था।

विदेशी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन इल्जामों पर अभी वार्नोक के प्रवक्ता की ओर से स्पष्ट टिप्पणी नहीं आई है। हालाँकि, पहले कि बात करें तो इस घटना पर उनकी ओर से कहा गया था, “यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हमारे बच्चों को अपने पादरी को गिरफ्तार होते देखना पड़ा। मेरी चिंता का विषय सिर्फ काउंसलर की उपस्थिति से था। हमने पड़ताल में पूरा सहयोग किया था। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं था।”

संजय राउत की बीवी नहीं पेश होंगी ED के सामने, 5 जनवरी तक का माँगा समय

शिवसेना सांसद संजय राउत की पत्नी प्रवर्तन निदेशालय के सामने आज (दिसंबर 29, 2020) पेश नहीं होंगी। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उन्होंने केंद्रीय जाँच एजेंसी से 5 जनवरी तक का समय माँगा है। इससे पहले खबर थी कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें 10:30 बजे अधिकारियों के समक्ष पेश होना था। मगर, अब उन्होंने इससे मना कर दिया।

बता दें कि संजय राउत की पत्नी से पूछताछ के संबंध में ईडी ने तीसरा समन जारी किया था। इससे पूर्व भी वो दो दफा स्वास्थ्य आधार पर जाँच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुईं थीं। इस मामले को लेकर उनके पति व शिवसेना नेता संजय राउत ने आरोप लगाया था, बीजेपी महाराष्ट्र सरकार को गिराने के लिए ईडी का इस्तेमाल कर रही है। वहीं ईडी की नोटिस पर भड़के शिवसैनिकों ने मुंबई के कोलाबा में ईडी दफ्तर के सामने भाजपा प्रदेश कार्यालय का पोस्टर लगाया और शिवसेना भवन के सामने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

ईडी संजय राउत की पत्नी वर्षा से क्यों पूछताछ करना चाहती है?

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत की पत्नी वर्षा को पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी बैंक (PMC) घोटाला मामले में जाँच में शामिल होने के लिए समन जारी किया था। इस समन में उन्हें आज यानी 29 दिसंबर को पेश होने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि प्रवीण राउत नाम के एक अन्य आरोपित की पत्नी के साथ वर्षा राउत का 50 लाख रुपए का लेन-देन संदेह के घेरे में है।

संजय राउत के नजदीकी प्रवीण राउत को कुछ दिन पहले ईडी ने गिरफ्तार किया था। जिसके बाद बताया गया कि प्रवीण राउत के अकाउंट से कुछ ट्रांजेक्शन वर्षा राउत के अकाउंट में हुआ। अब इसी संबंध में ईडी जानकारी जुटाना चाह रही है। प्रवर्तन निदेशालय जानना चाहती है कि ये ट्रांजेक्शन कैसे हुआ है और इसके पीछे का कारण क्या है? पूरी जानकारी जुटाने के लिए ही वर्षा राउत को समन किया गया था। मगर उन्होंने इस बार पेश होने की बजाय आगे का समय माँग लिया।

क्या है PMC बैंक का पूरा मामला?

पिछले साल सितंबर में रिजर्व बैंक को पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) में हो रहे कथित घोटाले का पता चला था। इसके बाद आरबीआई ने बैंक से पैसे की निकासी पर सीमा लगा दी थी। भारतीय रिज़र्व बैंक को पता चला था कि पीएमसी बैंक मुंबई के एक रियल इस्टेट डेवलेपर को क़रीब 6500 करोड़ रूपए ऋण देने के लिए नकली बैंक खातों का उपयोग कर रहा है।

जिन डिप्टी स्पीकर को कॉन्ग्रेसी विधायकों ने कुर्सी से खींच धक्का-मुक्की की, उनका शव कर्नाटक में रेलवे ट्रैक पर

कर्नाटक में राज्य विधान परिषद के उपाध्यक्ष और जेडीएस के नेता एसएल धर्मगौड़ा (SL Dharmegowda) का शव मंगलवार (दिसंबर 29, 2020) को कदूर के रेलवे ट्रैक के पास मिला। खबरों में उनकी मौत को आत्महत्या बताया जा रहा है। उनके शव के पास एक पत्र भी मिला है। कथित तौर पर उन्होंने ट्रेन के आगे आकर आत्महत्या की

जानकारी के मुताबिक, सोमवार (दिसंबर 28, 2020) शाम करीब 7 बजे धर्मगौड़ा अपनी कार में अकेले निकले थे। लेकिन जब वह देर रात तक घर नहीं लौट, तो परिवार ने उनकी खोजबीन शुरू की और बाद में उनकी गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी गई। बहुत प्रयास के बाद जब आसपास तलाशने पर उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो पुलिस रेलवे ट्रैक के पास गई, जहाँ उनका शव पड़ा दिखा। इसके बाद शव को जाँच के लिए शिमोंगा के सरकारी अस्पताल भेजा गया। आईजीपी का कहना है कि इस मामले में पड़ताल हो रही है। एक सुसाइड नोट मिला है लेकिन इसमें क्या लिखा है, ये अभी नहीं बता सकते।

राज्य विधान परिषद के उपाध्यक्ष की मृत्यु के बाद पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा ने दुख जताया है। उन्होंने कहा, “राज्य विधान परिषद के सभापति और जेडीएस नेता एसएल धर्मगौड़ा की आत्महत्या की खबर जानकर हैरान हूँ। वह एक शांत और सभ्य व्यक्ति थे। यह राज्य के लिए नुकसान है।”

गौरतलब है कि एसएल धर्मगौड़ा अभी हाल में काफी सुर्खियों में भी आए थे। उन्हें विधान परिषद के सत्र के दौरान कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने जबरन कुर्सी से हटा दिया था। कॉन्ग्रेस वहाँ गोरक्षा कानून का विरोध कर रही थी और इसके ख़िलाफ़ वोटिंग के लिए उन्होंने व्हीप भी जारी किया था। लेकिन जब विधानसभा शुरू हुई तो कॉन्ग्रेस के सदस्य कुर्सी पर उपाध्यक्ष को देख कर भड़क गए।

कॉन्ग्रेस एमएलसी प्रकाश राठौड़ ने इस दौरान कहा था कि बीजेपी और जेडीएस ने डिप्टी चेयरमैन को गैरकानूनी तरीके से चेयरमैन की कुर्सी पर बैठाया, जबकि सदन ऑर्डर में नहीं था। कॉन्ग्रेस ने उन्हें चेयर से नीचे उतरने को कहा और उन्हें बेदखल करना पड़ा क्योंकि यह एक अवैध बैठक थी।

80% सीटों पर BJP की जीत: अरुणाचल के स्थानीय चुनावों में रचा इतिहास, निर्दलीय दूसरे नंबर पर, बाकी पार्टियाँ फुस्स

भारतीय जनता पार्टी ने (BJP) अरुणाचल प्रदेश में हुए स्थानीय निकाय के चुनावों में कमाल का प्रदर्शन किया है। भाजपा ने न सिर्फ कॉन्ग्रेस, बल्कि उत्तर-पूर्व की स्थानीय राजनीतिक दलों को भी पटखनी देकर इतिहास रच दिया। पंचायत और जिला परिषद स्तर पर भाजपा को मिली बड़ी सफलता 2019 की याद दिला गई। तब राज्य में हुए विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने 60 में से 41 सीटें और 50.86% वोट शेयर पाकर सरकार बनाई थी।

पासीघाट म्युनिसिपल काउंसिल की बात करें तो यहाँ BJP ने 8 में से 6 सीटें जीतीं और कॉन्ग्रेस मात्र 2 पर सिमट कर रह गई। वहीं ईटानगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में भाजपा ने 20 में से 10 सीटें जीत ली और दूसरे नंबर पर 9 सीटों के साथ जदयू रही। कोर्नाड संगमा की NPP को 1 सीट मिली, जो मेघालय में भाजपा की सहयोगी पार्टी है। पासीघाट और ईटानगर में भाजपा की जीत से अरुणाचल के बड़े शहरों में उसकी पैठ का पता चलता है।

वहीं अगर ग्रामीण इलाकों की बात करें तो जिला परिषद की 237 सीटों में से भाजपा ने 187 सीटें जीतीं। भाजपा ने जिला परिषद की 78.9% सीटें जीत लीं। दूसरी पार्टियों का प्रदर्शन इतना बुरा रहा कि 22 सीटों के साथ निर्दलीय ने ये स्थान काबिज किया। जदयू को जिला परिषद में 10 और कॉन्ग्रेस को 9 सीटों पर कामयाबी मिली। वहीं NPP ने भी 6 सीटें जीती। कुल मिला कर भाजपा का यहाँ एकतरफा दबदबा रहा।

जहाँ तक ग्राम पंचायत की बात है, उसमें भाजपा को जिला परिषद से भी बड़ी सफलता मिली। भाजपा ने ग्राम पंचायत सदस्यों की 79.48% सीटों को अपने नाम किया। भाजपा ने 8125 कुल सीटों में से 6458 को जीत कर इतिहास रच दिया। ग्राम पंचायत में भी 974 सीटों के साथ निर्दलीय दूसरे स्थान पर रहे। कॉन्ग्रेस को 328 तो NPP को 238 सीटें प्राप्त हुईं। जदयू ने भी 121 सीटें जीत कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

कुल मिला कर देखें तो पूरे स्थानीय निकाय चुनावों में अरुणाचल प्रदेश में भाजपा ने कुल 8390 सीटों में से 6661 को जीत कर एकतरफा दबदबा कायम किया और राज्य में अपनी स्थिति पूरी तरह मजबूत कर ली। 79.39% सीटों पर जीत को मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परफॉरमेंस पर जनता के मुहर के रूप में भी देखा जा रहा है। सीएम खांडू ने इसे मोदी सरकार के कामकाज का नतीजा बताया है और जनता का धन्यवाद किया है।

अब अरुणाचल प्रदेश की विधानसभा में भी जदयू के 6 विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी के विधायकों की संख्या 48 हो गई है। इसके 1 दिन बाद ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ दिया और उनकी जगह उनके ही विश्वस्त आरसीपी सिंह को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का नया अध्यक्ष चुना गया। अरुणाचल की राजनीति का असर बिहार में भी देखने को मिल रहा है।

‘अडानी रेलवे… अब रेलवे निजी संपत्ति है’: पुणे जंक्शन का टिकट वायरल, PM मोदी ने अडानी को बेच दी भारतीय रेलवे?

भारत में अक्सर विपक्षी दल भाजपा की केंद्र सरकार को देश के दिग्गज उद्योगपतियों अंबानी और अडानी से जोड़ते रहते हैं। इस पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी तस्वीरें शेयर की जाती है और लोगों को भड़काने के लिए तरह-तरह की बातें की जाती हैं। अब सोशल मीडिया पर पुणे जंक्शन का एक टिकट शेयर किया जा रहा है, जिसके साथ दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी ने भारतीय रेलवे को अडानी को बेच दिया है।

रेलवे अडानी की निजी संपत्ति हो गई है?

राज प्रीत नामक फेसबुक यूजर ने इस तस्वीर को शेयर किया, जिसमें टिकट पर लिखा नजर आ रहा है – “अडानी रेलवे; रेलवे अब हमारी निजी संपत्ति है”। साथ ही इस पर अगस्त 6, 2020 की तारीख भी अंकित की गई है। इस तस्वीर को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि सरकार ने अडानी को भारतीय रेलवे को बेच दिया है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अडानी ने रेलवे टिकटों के दाम भी काफी बढ़ा दिए हैं।

बता दें कि ये दावा पूरी तरह फेक है, क्योंकि देश के किसी भी हिस्से में कोई भी रेलवे स्टेशन या कोई भी ट्रेन किसी भी अन्य कंपनी को ‘बेची’ नहीं गई है। इसीलिए, ये दावा झूठा है। असली टिकट की तस्वीर के ऊपर अडानी का नाम लिख कर उसे रेलवे की निजी संपत्ति बताते हुए एडिट किया गया है और फिर उसे किसी ने भ्रम फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। ये दावा वैसे पहली बार वायरल नहीं हो रहा।

अगस्त 2020 में पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने भी पुणे जंक्शन पर टिकट के दाम बढ़ाए जाने की बात लिखी थी, जिस पर जवाब देते हुए भारतीय रेलवे ने लिखा था – “पुणे जंक्शन द्वारा प्लेटफार्म टिकट का मूल्य ₹50 रखने का उद्देश्य अनावश्यक रूप से स्टेशन पर आने वालों पर रोक लगाना है, जिस से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके। रेलवे प्लेटफॉर्म टिकट की दरों को कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों से ही इसी प्रकार नियंत्रित करता आया है।”

अडानी सहित 15 ऐसी कंपनियाँ हैं, जिन्हें भारत में कंटेनर ट्रेन्स के ऑपरेशन की अनुमति मिली हुई है, इसीलिए उन कंटेनर ट्रेन्स की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर के भी दावा किया जा रहा है कि भारतीय रेलवे अडानी चला रहा है। ‘General-Purpose Wagon Investment Scheme’ के तहत टाटा जैसे कंपनियों को भी कोयला और मिनरल्स ढोने की अनुमति है। लेकिन, इन ट्रेनों का भी नियंत्रण और रेगुलेशन पूर्णरूपेण भारतीय रेलवे के हाथ में है।

विपक्षी दलों द्वारा ऐसे ही भ्रम फैलाने का नतीजा है कि पंजाब के किसान रिलायंस जियो की दूरसंचार आपूर्ति सेवाओं को बाधित कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें लोगों को कियो टॉवर की बिजली सप्लाई को बंद करते देखा जा सकता है। रिलायंस के पेट्रोल पम्प और रिटेल स्टोर के बाहर विरोध प्रदर्शन के बाद, पंजाब में किसानों ने अब राज्य के कई हिस्सों में दूरसंचार कंपनी की सेवाओं को बाधित करने के लिए रिलायंस Jio मोबाइल टावरों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी है।