“पत्थरबाजी कोई साधारण अपराध नहीं। इससे लोगों की जान भी जा सकती है, भय और आतंक का माहौल पैदा होता है, भगदड़ मचती है। ये साधारण अपराधी नहीं होते हैं। इनके ख़िलाफ़ अभी तक मामूली कार्रवाई होती थी, लेकिन अब कड़ी सजा का प्रावधान कर…”
चीन को झटका, तिब्बतियों ने पूरी दुनिया में किया मतदान: Sikyong चुनाव के लिए भारत के साथ ट्रंप का भी सख्त फैसला
चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की नई तिब्बती नीति और समर्थन कानून के पास होने के बाद रविवार (जनवरी 3, 2021) को विश्व्यापी स्तर पर निर्वासित तिब्बती संसद के लिए मतदान आरंभ हुआ। भारत समेत कई देशों में रहने वाले सैंकड़ों तिब्बतियों ने इस मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
निर्वासित तिब्बती नेता लोबसांग सांगेय (Lobsang Sangay) ने व्यापक स्तर पर हुए मतदान के मद्देनजर कहा कि ये चीन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि तिब्बत में लोकतंत्र कितना अटल है। तिब्बती नेता लोबसांग ने कहा, “यह बीजिंग को साफ संदेश है कि कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह तिब्बतियों को जितना भी दबा लें, लोकतंत्र तिब्बत में अनिवार्य रहेगा।”
उन्होंने भारत में बने Tibetan Government-in-Exile (निर्वासन में तिब्बती सरकार) के अध्यक्ष होने के नाते जिसे सेंट्रल तिब्बती प्रशासन भी कहा जाता है, इस मतदान को लेकर बोला कि इससे तिब्बतियों को आशा का संदेश दिया गया है।
लोबसांग सांगेय ने रविवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में अपना मतदान दिया। यहीं TGIE (Tibetan Government-in-Exile) का हेडक्वार्टर भी है। इन चुनावों में 2 उम्मीदवार हैं। यूएस समेत कई देशों में रहने वाले निर्वासित तिब्बती इनमें से जिसे ज्यादा वोट देंगे, उसके हाथ अगले 5 साल यानी 2026 तक के लिए पद की कमान चली जाएगी।
सांगेय ने कहा, “परम पावन दलाई लामा ने हमें उपहार के रूप में लोकतंत्र दिया है। पुरानी पीढ़ी ने इसे संरक्षित रखा और युवा पीढ़ी इसके लिए अभ्यस्त है। ये आगे भी ऐसे ही सशक्त होगी और तिब्बत के आजादी अभियान को मजबूत करेगी।”
बता दें कि लोबसांग को साल 2011 में इस शीर्ष पद के लिए निर्वाचित किया गया था। इसके बाद उन्होंने 2016 में भी इस पद पर अपनी जगह को बनाए रखा। लेकिन अब, वह अध्यक्ष पद के लिए नए चेहरे की उम्मीद कर रहे हैं। उनकी भाषा में कहें तो अगले Sikyong की। हालाँकि, बीजिंग इन चुनावों में महत्व नहीं देता है और कई बार दिल्ली में संदेश देकर ऐसे मतदान रुकवाने की गुहार लगा चुका है।
तिब्बतियों के अधिकार के लिए अमेरिका लेकर आया नया कानून
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष तिब्बती संसद के 17वें चुनाव अधिक महत्वपूर्ण इसलिए भी हो जाते हैं क्योंकि अभी हाल में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता से हटने से पहले तिब्बत की धार्मिक आज़ादी को समर्थन देते हुए एक नया कानून पास किया था, जिसका चीन ने विरोध भी किया। नए कानून को बनाने से पहले यूएसआईडी पहले ही फंड शुरू कर चुका था। ट्रंप काल में लाए गए इस नए कानून का नाम- Tibetan Policy and Support Act of 2020 है। इसे चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की विदेश नीति की नई शुरुआत की तरह देखा जा रहा है।
इस कानून में कई बड़ी बातें कही गई हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ तिब्बत के लोगों को ही अपना अगला दलाई लामा चुनने का अधिकार है और इस प्रक्रिया में चीन किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। इसके अलावा इसमें ये भी कहा गया है कि तिब्बत के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए अमेरिका एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बना सकता है। बावजूद अगर चीन की सरकार ने अगला दलाई लामा चुनने की कोशिश की, तो अमेरिका उस पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगा सकता है।
तिब्बत की निर्वासित सरकार
तिब्बत की निर्वासित सरकार और संसद को आमतौर पर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन कहते हैं, जो भारत से ही अपना काम कर रही है। इसके पीछे का इतिहास लंबा है। दरअसल, तिब्बत में चीन के कब्जे के बाद वहाँ के तिब्बती चीन के अधीन रहने को मजबूर हैं। ये कब्जा चीन ने साल 1959 में किया था।
इसके कुछ ही हफ्ते बाद वहाँ के नेता और धर्म गुरु दलाई लामा भाग कर भारत आ गए थे। उनके साथ ही यहाँ आई थी तिब्ब्तियों की एक बड़ी आबादी। जो अब हिमाचल के धर्मशाला से लेकर देश के कई हिस्सों में बस चुकी है। यहीं रहते हुए दलाई लामा ने चीन के खिलाफ आजादी की जंग छेड़ी हुई है, जिससे चीन अक्सर भौखलाया रहता है।
‘हलाल’ शब्द सरकारी दस्तावेज से एक झटका में गायब: इस्लामी संस्थाओं के सर्टिफिकेट का खेल बंद, मोदी सरकार का बड़ा फैसला
भारत सरकार के ‘कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority)’ या APEDA ने अपने रेड मीट मैन्युअल में से ‘हलाल’ शब्द को ही हटा दिया है और इसके बिना ही दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए लम्बे समय से अभियान चला रहे हरिंदर एस सिक्का ने सोशल मीडिया पर इस सम्बन्ध में जानकारी दी।
GREAT NEWS: THANKS?@narendramodi @PiyushGoyalOffc
— Harinder S Sikka (@sikka_harinder) January 4, 2021
Govt removes word HALAL from @APEDADOC
Now all are eligible to register. Halal certification NOT mandatory.
No discrimination. One country, One Law.
It’s message to all hotels, restaurants others serving Halal on Sly. Jai Hind pic.twitter.com/LpjPBG3135
उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल को धन्यवाद दिया। सरकार के इस कदम के बाद अब ‘हलाल’ सर्टिफिकेट की ज़रूरत समाप्त हो जाएगी और सभी प्रकार के वैध मीट कारोबारी अपना पंजीकरण करा सकेंगे। हरिंदर सिक्का ने इसे बिना किसी भेदभाव के ‘एक देश, एक नियम’ के तहत लिया गया फैसला बताया और कहा कि ये ‘हलाल’ मीट परोस रहे रेस्टॉरेंट्स के लिए भी एक संदेश है।

APEDA ने अपने ‘फूड सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम’ के स्टैंडर्ड्स और क्वालिटी मैनेजमेंट के डॉक्यूमेंट में बदलाव किया है। पहले इसमें लिखा हुआ था कि जानवरों को ‘हलाल’ प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करते हुए जबह किया जाता है, जिसमें इस्लामी मुल्कों की ज़रूरतों को ध्यान में रखा जाता है। अब इसकी जगह लिखा गया है, “मीट को जहाँ आयात किया जाना है, उन मुल्कों की ज़रूरतों के हिसाब से जानवरों का जबह किया गया है।”
ये बदलाव इस डॉक्यूमेंट के पेज संख्या 8 में किया गया है। वहीं दूसरी तरफ पेज 30 पर जहाँ पहले लिखा था, “इस्लामी संगठनों की मौजूदगी में जानवरों को हलाल प्रक्रिया के तहत जबह किया गया है। प्रतिष्ठित इस्लामी संगठनों के सर्टिफिकेट लेकर मुस्लिम मुल्कों की जरूरतों का ध्यान रखा गया है”, वहाँ अब लिखा है, “आयातक देश के ज़रूरतों के अनुसार जानवरों को जबह किया गया है।” पेज संख्या 35, 71 और 99 पर भी बदलाव किया गया है।
पेज संख्या 35 पर पहले लिखा था कि इस्लामी शरीयत के हिसाब से पंजीकृत इस्लामी संगठन की कड़ी निगरानी में हलाल प्रक्रिया के तहत जानवरों को जबह किया गया है और उनकी निगरानी में ही इसका सर्टिफिकेट भी लिया जाता है। इस पूरी पंक्ति को ही हटा दिया गया है।
वहीं पेज संख्या 71 पर जेलेटीन बोन चिप्स को स्वस्थ भैंस को हलाल प्रक्रिया के तहत जबह किए जाने के बाद तैयार किए जाने की बात लिखी थी। इसे बदल कर भी ‘आयातक देश की ज़रूरतों के अनुरूप’ कर दिया गया है। साथ ही ‘हलाल’ शब्द को हटा कर लिखा गया है कि पोस्टमॉर्टम जाँच के बाद ही इसे तैयार किया गया है।
पेज संख्या 99 पर पूरी प्रक्रिया का फ्लो चार्ट था, जहाँ ‘हलाल’ शब्द को ‘Slaughter’ (जबह) से रिप्लेस कर दिया गया है। अब APEDA के रेड मीट मैन्युअल में आपको कहीं ‘हलाल’ शब्द नहीं मिलेगा। सिर्फ एक मीट प्रोसेसिंग कम्पनी ‘हलाल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से रजिस्टर्ड है, जिसका जिक्र है।
हलाल पर बवाल
करीब 6 महीने पहले सोशल मीडिया पर सरकारी दस्तावेजों में हलाल शब्द को लेकर बवाल हुआ था। तब सरकारी विभाग को इस पर आकर सफाई भी देनी पड़ी थी।

कब APEDA को ऊपर वायरल हुए इमेज पर सफाई देते हुए कहना पड़ा था कि हलाल मीट के निर्यात को लेकर भारत सरकार की ओर से कोई जबरन नियम नहीं था बल्कि यह आयात करने वाले देशों (जो ज्यादातर मुस्लिम देश हैं) के नियमों के अनुरूप था। हालाँकि APEDA के रेड मीट मैन्युअल को कुछ ऐसे लिखा गया था, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती थी और यह लगता था कि भारत सरकार ही मीट को हलाल तरीके से प्रोसेस करने के लिए बाध्य करती है। इसी भ्रम को दूर करने के लिए भारत सरकार ने उपरोक्त बदलाव किया है।
क्या होगा बदलाव
APEDA के रेड मीट मैन्युअल के कारण मीट व्यापार में धार्मिक भेदभाव होता था। हलाल प्रक्रिया का पालन करने के कारण हिंदू नाम के बिजनेसमैन चाह कर भी इसमें आगे नहीं बढ़ पाते थे। हलाल सर्टिफिकेशन की आड़ में भी उनका शोषण होता था। रोजगार में गैर-मुस्लिमों के साथ भेदभाव होता था।
इसका कारण था हलाल के लिए थोपे गए इस्लामी नियम। इसके सबसे आपत्तिजनक शर्तों में से एक है कि हलाल मांस के काम में ‘काफ़िरों’ (‘बुतपरस्त’, गैर-मुस्लिम, जैसे हिन्दू) को रोज़गार नहीं मिलेगा। यह आर्थिक पक्ष हलाल को केवल एक भोजन पद्धति ही नहीं, एक पूरी समानांतर अर्थव्यवस्था बना देता है, जो गैर-मुस्लिमों को न केवल हाशिये पर धकेलती है, बल्कि परिदृश से ही बाहर कर देती है।
हाल ही में ये भी खबर आई थी कि दिल्ली के ऐसे होटल या मीट की दुकान जो SDMC (दक्षिण दिल्ली म्युनिशपल कॉर्पोरेशन) के अंतर्गत आते हैं, उन्हें अब हलाल या झटका बोर्ड टाँग कर रखना जरूरी होगा। SDMC की सिविक बॉडी की स्टैंडिंग कमिटी ने यह प्रस्ताव गुरुवार (24 दिसंबर 2020) को पास कर दिया। इस प्रस्ताव में यह भी लिखा है कि हिंदू और सिख के लिए हलाल मीट खाना वर्जित है।
पत्थरबाजों की संपत्ति से होगी अब नुकसान की भरपाई: MP में शिवराज सरकार ने नया कानून बनाने का किया फैसला
मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने राज्य में पत्थरबाजों के ख़िलाफ़ सख्त कानून बनाने का निर्णय कर लिया है। राज्य सरकार ने कहा है कि पत्थरबाजी सामान्य अपराध नहीं है। ऐसा करने वाले समाज के दुश्मन हैं और ऐसे लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री चौहान ने रविवार (जनवरी 3, 2021) को मीडिया से बात करते हुए इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सजा के लिए कड़े कानून बना रहे हैं। इसमें उपद्रवियों के लिए सजा का प्रावधान होगा, साथ ही आरोपित को पीड़ित व्यक्ति को क्षतिपूर्ति भी देनी होगी।
बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन, इंदौर और मंदसौर जैसे इलाकों में आपसी झड़प और पत्थरबाजी की घटनाओं को देखने के बाद यह निर्णय लिया । उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी कोई साधारण अपराध नहीं है। इससे लोगों की जान भी जा सकती है, इससे भय और आतंक का माहौल पैदा होता है, भगदड़ मचती है, अव्यवस्थाएँ होती हैं। वह बोले कि इस तरह के अपराधी साधारण अपराधी नहीं होते हैं और इन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। इनके ख़िलाफ़ अभी तक तो मामूली सी कार्रवाई होती थी, लेकिन अब कड़ी सजा का प्रावधान करने के लिए कानून बनेगा।
वह बोले कि पथराव करने वाले अक्सर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और आगजनी करने का भी सहारा लेते हैं। यहाँ तक कि घरों और दुकानों को भी जलाते हैं। सीएम ने कहा, “लोगों को लोकतंत्र में शांति से अपने मुद्दों को उठाने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की स्वतंत्रता नहीं है।”
मुख्यमंत्री ने कहा है कि इन नए कानून के अंतर्गत अगर जरूरत पड़ी तो आरोपितों की संपत्ति को नीलाम करवा कर भी क्षति की भरपाई होगी। इस नए कानून के निर्माण के लिए निर्देश दे दिए गए हैं। जल्द ही इन पर काम शुरू होगा।
गौरतलब है कि अभी हाल में मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बेगमबाग इलाके में ‘रामनिधि संग्रहण’ रैली निकालने के दौरान मुस्लिम समुदाय के अराजक तत्वों ने हिन्दू संगठन पर पथराव किया था। इस घटना के बाद संज्ञान लेते हुए पुलिस ने उन लोगों पर कड़ी कार्रवाई की थी। खबरों के अनुसार, पुलिस और नगरपालिका की संयुक्त टीम ने उस घर को ध्वस्त कर दिया था, जिसके आस-पास मौजूद होकर कुछ महिलाएँ और बच्चे यात्रा निकालने वालों पर पथराव कर रहे थे।
#उज्जैन, बेगमबाग में जिस घर से राम भक्तों पर पत्थरबाजी हुई थी, उसे JCB द्वारा ध्वस्त कर दिया गया है।
— Hindu Yuva Vahini Gujarat (@HyvGujarat) December 26, 2020
पहले शहर काजी के दबाव में प्रशासन नें अतिक्रमण को हटाने पर रोक लगा दी थी परंतु बाद में सामाजिक संगठनों व उज्जैन के जन सामान्य के कहने पर अवैध घर को गिरा दिया गया है। @ippatel pic.twitter.com/K23hpEhFId
नाबालिग आदिवासी लड़कियों का यौन उत्पीड़न: केरल से नौफल और शमीम गिरफ्तार, फोन पर की थी दोस्ती
केरल में आदिवासी लड़कियों का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में पुलिस ने 2 युवकों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान कंबलाक्कड़ (Kambalakkad) निवासी मोहम्मद नौफल (Mohammad Noufal) और कानिंपत्त शमीम (Kaniampatta Shamim) के तौर पर हुई है। एक की उम्र 18 साल है और दूसरा आरोपित 19 वर्ष का है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासी लड़कियाँ इन दोनों युवकों की दोस्त थीं और फोन के जरिए बात करते हुए इनके साथ रिलेशन में आई थीं। ये दोनों युवक इसी दोस्ती का फायदा उठा कर उन्हें नए साल की पूर्व संध्या पर अपने साथ ले गए और उनका यौन उत्पीड़न किया।
sickoshttps://t.co/qp6KDNnOwo
— UniversalReligiousFreeDoom (@by2kaafi) January 4, 2021
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पूरा मामला उस समय उजागर हुआ, जब गायब लड़कियों में से एक के माता-पिता ने इस घटना की शिकायत की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमे को POCSO एक्ट व एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज किया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार करके पॉक्सो कोर्ट में पेश किया गया।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व केरल में ही सुमदाय विशेष के दो अन्य युवकों पर 2 नाबालिग बच्चियों से रेप करने का आरोप लगा था। कथित तौर पर दोनों जुड़वाँ भाई थे और इनके नाम नौशाद व नवास थे। दोनों ने 10 साल और 5 साल की बच्चियों का कई बार रेप किया था। बच्चियों के माता-पिता ने इस मामले में दोनों भाइयों नौशाद और नवास के ख़िलाफ़ शिकायत करवाई थी और आरोप लगाया था कि दोनों बच्चियों का कई बार रेप किया गया।
केरल: जुड़वा भाई नौशाद व नवास ने कई बार किया 5 और 10 साल की मासूम बच्चियों का रेप, गिरफ्तार#Kerala #Rape https://t.co/OZQkc8BKRm
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) October 6, 2020
पुलिस ने इस मामले को दर्ज करने बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया था और उनके ऊपर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने बताया था कि आरोपितों ने बच्चियों का कथित तौर पर रेप करने के बाद उन्हें धमकी दी थी कि वह अपने पिता और रिश्तेदारों में से किसी को इस संबंध में न बताएँ।
कहाँ, कब, कैसे और क्यों? कोरोना वैक्सीन पर हरेक सवाल का जवाब यहाँ, भ्रम फैलाने वालों से रहें दूर
भारत में कोरोना वैक्सीन को लेकर जम कर भ्रम फैलाया जा रहा है, इसलिए आपको इसकी पूरी प्रक्रिया और वास्तविकता से परिचित रहने की आवश्यकता है। कोरोना जैसी महामारी के खात्मे के लिए आई वैक्सीन का भी अब राजनीतिकरण किया जा रहा है। सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक के वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद गई है, सरकार ने एक प्रश्नोत्तरी जारी की है, जिसे पढ़ने के बाद आपका सारा भ्रम दूर हो जाएगा।
क्या कोरोना वैक्सीन सभी को एक साथ दिया जाएगा? इसका जवाब है – नहीं। ये काम चरणों में किया जाएगा। भारत सरकार ने हाई-रिस्क समूहों को चिह्नित किया है, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन दिया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मचारियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 50 वर्ष से अधिक की उम्र के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरतमंदों के बाद पूरी जनसंख्या के लिए ये उपलब्ध रहेगी। वैक्सीन के टाइमलाइन को लेकर लोगों में काफी भ्रम है।
वैसे तो वैक्सीन के निर्माण में सालों लग जाते हैं, लेकिन इस महामारी की आपात स्थिति को देखते हुए इसे कुछ ही महीनों में तैयार किया गया। जब वैक्सीन की सटीकता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश की नियामक संस्थाएँ उसे अनुमति देती हैं, तभी उसका प्रयोग किया जाता है। एक और बात जानने लायक ये है कि कोरोना वैक्सीन लेना अनिवार्य नहीं है। सरकार किसी को भी मजबूर नहीं कर रही कि उसे वैक्सीन लेना ही है।
सरकार बस सलाह दे सकती है कि शेड्यूल के हिसाब से लोगों को कोरोना वैक्सीन लेनी चाहिए, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। जो लोग कोरोना संक्रमित हो कर ठीक हो चुके हैं, वो भी अपने इम्यून सिस्टम को और मजबूत करने के लिए वैक्सीन ले सकते हैं। जिन्हें कोरोना संक्रमण है, उन्हें 14 दिनों के लिए वैक्सीन लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे वैक्सीन दिए जाने वाले स्थल पर अन्य लोगों में भी संक्रमण फैलने की आशंका है।
आप कौन सा वैक्सीन लेंगे? जिस भी वैक्सीन को सरकारी नियामक संस्थाओं ने लाइसेंस दे रखी है, उन्हें आप ले सकते हैं। आप उनमें से किसी भी वैक्सीन का प्रयोग कर सकते हैं। हाँ, आप वैक्सीन का शेड्यूल एक से ही पूरा करें, बीच में न बदलें। आपने पहला शॉट भारत बायोटेक वैक्सीन का लिया, फिर आप दूसरा शॉट सीरम वाला नहीं ले सकते। वैक्सीन के रखरखाव के लिए सरकारी सिस्टम पर आप सम्पूर्ण भरोसा कर सकते हैं।
— DD News (@DDNewslive) January 4, 2021
भारत दुनिया में सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाता रहा है। हर साल कम से कम 2.6 करोड़ नवजात शिशुओं और 2.9 करोड़ माँओं को टीके दिए जाते हैं। भारत की जनसंख्या ही इतनी है कि हर वर्ष वैक्सीन मेकेनिज्म के सिस्टम को मजबूत किया जाता है। वैक्सीन का ट्रायल पूरे नियमों के तहत किया गया है, इसलिए भारत में विकसित की गई वैक्सीन भी उतनी ही प्रभावी होगी, जितनी दुनिया में कहीं और की।
मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी और आपको सूचित कर दिया जाएगा कि आप वैक्सीन लेने के लिए योग्य हैं या नहीं। आप किसी भी सरकारी पहचान-पत्र या सर्विस कार्ड का प्रयोग कर वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद ही आपको इसकी अनुमति मिलेगी। रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के लिए फोटो आईडी होनी ही चाहिए। कौन सा डोज कब लेना है, इसकी सूचना पंजीकृत फोन नंबर पर आ जाएगी।
वैक्सीन लेने जाएँ तो सारे प्रोटोकॉल्स का पालन करें और सोशल डिटेन्सिंग के नियमों को न भूलें। अगर कहीं भी कोरोना वैक्सीन का कोई साइड इफ़ेक्ट आता है तो कम्पनी को उसकी पूरे डिटेल्स की रिपोर्ट सरकारी नियामकों को सौंपनी पड़ेगी। डाइबिटीज या हाइपरटेंशन वाले लोगों को हाई-रिस्क वाला मानते हुए प्राथमिकता दी जाएगी। चूँकि पहले फेज में सप्लाई लिमिटेड है, इसलिए प्राथमिकता तय की गई है। वैक्सीन लगाने के 2 सप्ताह के बाद आपके शरीर की एंटीबॉडी डेवेलप हो जाएगी।
उधर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदार पूनावाला ने भी हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए कई सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने इसे एक बड़ी जीत बताते हुए कहा कि मार्च-अप्रैल तक वो आश्वस्त नहीं थे, लेकिन आर्थिक व तकनीकी रूप से शत-प्रतिशत प्रतिबद्ध थे। उन्होंने कहा कि इसके निर्माण में कोई जल्दबाजी नहीं की गई है। सरकार करार पर हस्ताक्षर के बाद 7 दिन का समय देगी, जिसमें वैक्सीन को कहाँ और कैसे भेजना है ये तय किया जाएगा।
— DD News (@DDNewslive) January 4, 2021
HT से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमने पहले 100 मिलियन खुराक के लिए, सरकार के समक्ष 200 रुपए की लिखित में एक विशेष कीमत की पेशकश की है। यह पेशकश केवल सरकार के लिए है और वो भी सिर्फ 100 मिलियन खुराक के लिए। इससे अधिक के ऑर्डर पर कीमत अधिक अथवा अलग हो सकती है। निजी बाजार में इस वैक्सीन की एक खुराक की कीमत MRP के हिसाब से 1000 रुपए हो सकती है। हम संभवतः इसे 600-700 रुपए में बेचेंगे। विदेशों में निर्यात के लिहाज से इस वैक्सीन की एक खुराक की कीमत 3-5 डॉलर के बीच होगी।”
उन्होंने वैक्सीन को लेकर फ़ैल रहे अफवाह और भ्रम को लेकर कहा कि किसी को भी विज्ञान के तथ्यों पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन हमें पढ़ना चाहिए कि डेटा आखिर होता क्या है और कहाँ इसका परीक्षण किया जाता है। विशेषज्ञों के साथ राय-विचार कर आप समझ सकते हैं कि ये वैक्सीन काफी ज्यादा प्रभावी और सुरक्षित है। उन्होंने साफ़ किया कि वैक्सीन लेने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा रहा है।
याद दिला दें कि भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SRI) और भारत बायोटेक द्वारा विकसित की गई कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। दोनों ही वैक्सीन को इमरजेंसी स्थिति में रिस्ट्रिक्टेड प्रयोग के लिए मंजूर किया गया। इसका अर्थ है कि आपात स्थिति में इन दोनों द्वारा निर्मित की गई कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी DCGI (Drug Controller General of India) ने दे दी है।
गाजियाबाद श्मशान घाट हादसे में 25 की मौत: एक्शन में UP पुलिस-प्रशासन, 3 गिरफ्तार, ठेकेदार अभी तक फरार
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रविवार (जनवरी 4, 2020) को श्मशान घाट की छत गिरने से 25 लोगों की मौत हो गई। जहाँ अंतिम संस्कार के बाद लोगों को मोक्ष मिलता है, वहाँ भी भ्रष्टाचार की बात सामने आ रही है। जिन लोगों ने अपने मृत परिजन की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा, वो हमेशा के लिए मौन हो गए। गलियारे की छत गिरने के बाद हुई मौतों के बाद खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सक्रिय हैं और यूपी पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।
अधिशाषी अधिकारी निहारिका सिंह, जूनियर इंजीनियर चंद्रपाल सिंह और सुपरवाइजर आशीष की धर-पकड़ में तो पुलिस को सफलता मिली, लेकिन ठेकेदार अजय त्यागी अब भी फरार चल रहा है। उसकी गिरफ़्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। इन सबके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार और लापरवाही सहित कई मामलों में FIR दर्ज की गई। मण्डलयुक्त अनीता शी मेश्राम मामले की समीक्षा कर रही हैं।
एसपी ग्रामीण इरज राजा ने जानकारी दी है कि मुरादनगर थाने में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। गाजियाबाद के श्मशान घाट के इस गलियारे का निर्माण 2 महीने पूर्व में ही किया गया था। 15 दिन पहले इसे आम लोगों के लिए तो खोल दिया गया, लेकिन अब तक इसका लोकार्पण नहीं हो सका था। इस हादसे ने अधिकारियों और ठेकेदारों के मिलीभगत से चल रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दी है।
या घटना रविवार के सुबह की है, जब एक फल विक्रेता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लोग पहुँचे थे। तभी बारिश होने लगी, जिस कारण करीब 70 लोग इसी गलियारे में खड़े हो गए। नवनिर्मित गलियारा तुरंत ही गिर गया। इसका लिंटर ही भरभरा गया। राहत-कार्य के बाद कई लोगों को बचाया तो गया, लेकिन 25 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। सभी घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।
गाजियाबाद हादसा : 25 लाशों से दहल उठा देश, 2 महीने पहले ही 50 लाख में श्मशान घाट का हुआ था जीर्णोद्धार#GhaziabadAccident #MuradnagarAccident@CMOfficeUP @Uppolice https://t.co/Ddp1kk7pac
— News24 (@news24tvchannel) January 4, 2021
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर शोक जताते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश के मुरादनगर में हुए दुर्भाग्यपूर्ण हादसे की खबर से अत्यंत दुःख पहुँचा है। राज्य सरकार राहत और बचाव कार्य में तत्परता से जुटी है। इस दुर्घटना में जान गँवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूँ, साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।” वहीं सीएम योगी ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के लिए आदेशित कर दिया गया है।
प्रदेश सरकार को तत्काल रिपोर्ट उपलब्ध कराने जाने के बाद इस घटना के पीछे के कारणों पर मंथन होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। सांसद वीके सिंह भी अस्पताल पहुँचे और निष्पक्ष जाँच के बाद दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। ये श्मशान घाट उखरानी/बम्बा रोड में स्थित है। मृतकों में अधिकतर उखलारसी गाँव के हैं। मौके पर NDRF को भी लगाया गया था।
गाजियाबाद के जिस श्मशान घाट गलियारे के गिरने के कारण 25 लोग मौत की नींद सो गए, उसके निर्माण के लिए 50 लाख रुपए का टेंडर जारी किया गया था। स्थानीय लोगों ने निर्माण में घटिया समाग्री के इस्तेमाल की शिकायत नगरपालिका और प्रशासन ने भी की थी। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष ने काम भी रुकवाया था। लेंटर का पिलर ही कमजोर था, जिस कारण नींव में पानी जाने से वो गिर गया। दयानंद कॉलोनी निवासी दयाराम की किसी बीमारी के कारण मौत के बाद लोग वहाँ पर जमा हुए थे।
‘इस्लाम के खिलाफ, Miss Plus World में ‘मोटी’ औरतों का आना हराम: कट्टरपंथियों का विरोध, जीत गईं जस्टीना मोहम्मद
शनिवार (जनवरी 2, 2021) को पेटलिंग जाया शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों के विरोध के बावजूद ‘मिस प्लस वर्ल्ड मलेशिया 2020 (MPWM 2020)’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें मेलीसा मोहन टिंडल को विजेता घोषित किया गया। अब वो अमेरिका के टेक्सस में होने वाले ‘मिस प्लस वर्ल्ड पेजेंट’ में मलेशिया का प्रतिनिधित्व करेंगी। कट्टरपंथी संगठनों और यहाँ तक कि मलेशिया की सरकार ने भी प्लस साइज महिलाओं के कार्यक्रम में आने को इस्लाम के खिलाफ बताया था।
कार्यक्रम के दौरान दो अन्य विजेताओं की भी घोषणा की गई, जिसमें एक मुस्लिम महिला भी हैं। शक्ति छाबड़ा को ‘मिस प्लस इंटरनेशनल मलेशिया 2020’ का टाइटल दिया गया। जस्टीना मोहम्मद जूनूस को ‘मिस प्लस वर्ल्ड इंटरनेशनल एम्बेसडर’ का ख़िताब दिया गया। जस्टीना ने इस बात पर ख़ुशी जताई कि उनके चैरिटेबल कार्यों को पहचान मिली है। उन्होंने कार्यक्रम के विरोध को नकारात्मक ग़लतफ़हमी करार दिया।
उन्होंने बताया कि उस रात महिलाओं ने लम्बे गाउन्स के साथ-साथ इनर कपड़े भी पहन रखे थे, इसीलिए ये मुद्दा नहीं है। उन्होंने बताया कि वो हिजाब भी पहनती हैं। उन्होंने कहा कि पेजेंट का उद्देश्य लुक्स की जगह बहनचारे के बंधन की भावना को बढ़ावा देना है। इससे पहले ‘ययासह डकवाह इस्लामिया मलेशिया’ ने इस शो को कैंसल करने की माँग की थी। संगठन के अध्यक्ष नसरुद्दीन हसन ने प्रशासन को पत्र लिख कर इसे रोकने की माँग की थी।
‘PAS मुस्लिमात विंग’ ने भी इस कार्यक्रम का विरोध किया था और और इसे इस्लाम व मलेशिया के नैतिक सिद्धांतों के विपरीत बताया था। हालाँकि, आयोजकों का कहना है कि शरीर को लेकर जिन महिलाओं को बॉडी शेमिंग और कटाक्षों का सामना करना पड़ता है, उन्हें हौंसला देने के लिए इसका आयोजन हुआ था। साथ ही आयोजकों ने ये भी जानकारी दी कि प्रतिभागियों ने स्विम शूट नहीं पहना था, जो इस्लाम के अनुरूप है।
I see this as a victory for common sense & a potentially defining moment for #Malaysia as it tries to shake off the shackles of religious ignorance. Congrats to the organisers & the winners
— Marcus Osborne (@brandconsultant) January 3, 2021
Plus-size pageant crowns winners despite PAS’ objections https://t.co/FIeNoBuYal
वहीं मजहबी मामलों के उप-मंत्री अहमद मार्जक शारी ने कहा था कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन उचित नहीं है। इस्लामी संगठनों ने इस कार्यक्रम को ‘भोगवादी’ करार दिया था, जिससे सरकार चिंतित थी। उन्होंने इसे महिलाओं का शोषण करार दिया था। वहीं उप-मंत्री ने कोरोना का भी बहाना बनाया और कार्यक्रम को टालने की कोशिश की। वहीं एक राजनेता तो यहाँ तक कहा कि इस्लाम क्या, किसी भी मजहब में इस तरह के कार्यक्रम की अनुमति नहीं है।
आयोजकों ने इसके उलट कहा, “हम नहीं चाहते कि मुस्लिम महिलाएँ अयोग्य महसूस करें, या संकोची बने रहें। हम इस कार्यक्रम का नाम बदल सकते हैं, इसमें हमें कोई समस्या नहीं है। हमने किसी कंटेस्टेंट को डिस्क्वालिफाई नहीं किया है। इस्लामी फतवा में कहा गया कि बिना शरीर कवर किए इस कार्यक्रम में प्लस साइज महिलाओं का आना हराम है। ये बिकनी शो नहीं है, न ही हमने किसी को हिजाब हटाने के लिए मजबूर किया।”
मलेशिया में हाल के दिनों में इस्लामी कट्टरपंथी गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं। ज़ाकिर नाइक ने भी भारत से भाग कर वहीं शरण ले रखी है। हाल ही में भारत में आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए मलेशिया से 2 लाख डॉलर (1.47 करोड़ रुपए) की फंडिंग की गई थी। भारत में आतंकी हमले के लिए हुए इस लेनदेन के तार जाकिर नाइक सहित कई आतंकी संगठनों से भी जुड़े हुए पाए गए थे। इस आतंकी समूह ने मलेशिया में एक महिला को भी कड़ा प्रशिक्षण दिया है।
जिन कट्टरपंथियों ने मंदिर बनवाने वाले ‘मोहम्मद अनवर’ का घर जला डाला, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार
रायबरेली के मोहम्मद अनवर ने इस्लाम को छोड़ दिया था। स्वेच्छा से हिंदू बन कर देव प्रकाश नाम भी रख लिया था। भक्ति-भाव में आकर अपनी जमीन पर मंदिर बनवा रहे थे। लेकिन कट्टरपंथियों को यह रास नहीं आया और जिस घर में वो अपने 3 बच्चों के साथ सो रहे थे, उसमें आग लगा दिया।
पीड़ित देव प्रकाश ने गाँव के प्रधान ताहिर, रेहान उर्फ सोनू, अली अहमद, इम्तियाज सहित मदरसे के लोगों पर घर में आग लगा कर जिंदा जलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इन सभी के खिलाफ UP पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज की गई। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना में शामिल लोग गिरफ़्तार कर लिए गए हैं, ग्राम प्रधान फ़रार है, गिरफ़्तारी के लिए छापे जारी है। https://t.co/t9owRpEBhR pic.twitter.com/61Alumcg6D
— Shalabh Mani Tripathi (@shalabhmani) January 3, 2021
देव प्रकाश (पहले मोहम्मद अनवर) को बच्चों सहित जिंदा जलाने की मंशा के साथ उनका घर जलाने की इस घटना में आरोपित गाँव का प्रधान फरार है। उसकी गिरफ़्तारी के लिए UP पुलिस छापे मार रही है। यह जानकारी CM योगी के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर दी है।
मंदिर बना कारण?
दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ देव प्रकाश पटेल अपने घर के नज़दीक स्थित ज़मीन पर मंदिर का निर्माण कराने जा रहे थे। इस बात से गाँव के कुछ लोग उनसे काफी नाराज़ हो गए थे। इस बात को आधार बनाते हुए शनिवार देर रात कई लोगों ने उनके घर को आग के हवाले कर दिया।
इस वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपितों ने देव प्रकाश के घर के दरवाज़े भी बंद किए थे। आग बढ़ने के बाद बच्चों ने चीखना शुरू कर दिया, जिसके बाद देव प्रकाश ने पीछे का दरवाज़ा तोड़ कर अपनी और अपने बच्चों की जान बचाई।
घटना के बाद जिलाधिकारी और एसपी ने भी पीड़ित देव प्रकाश से मुलाक़ात की। डीएम ने देव प्रकाश को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। इसके अलावा विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी पीड़ित से मुलाक़ात की।
छोड़ दिया था इस्लाम
सितंबर 2020 में रायबरेली, सलोन स्थित रतासो गाँव के निवासी मोहम्मद अनवर ने केकोगना घाट पर हिन्दू धर्म में वापसी की थी। धर्मांतरण के बाद मोहम्मद अनवर ने अपना नाम देव प्रकाश पटेल रख लिया था। धर्मांतरण के बाद उसके तीन बच्चों रेहान, अली और ख़ुशी का नाम देव नाथ, देवी दयाल और दुर्गा देवी कर दिया गया था। देव प्रकाश पटेल ने मुंडन करवाने के बाद पूरे विधि-विधान से हिन्दू धर्म में वापसी की थी।
149 हिंदुओं की हत्या, 2623 का इस्लामी धर्मांतरण, 370 मूर्तियाँ विखंडित: जिसे भारत ने आजाद कराया, वहाँ हिंदुओं की स्थिति
बांग्लादेश में 2020 में विभिन्न घटनाओं में कम से कम 149 हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया गया। इतना ही नहीं, 149 की हत्या के अलावा 7036 हिन्दू घायल भी हुए। ‘जटिया हिंदू महाजोत’ संगठन ने ये आँकड़े दिए हैं। साथ ही ये भी बताया गया है कि ये आँकड़े पिछले वर्ष के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। संगठन ने बुधवार (दिसंबर 30, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के ये जानकारी दी और मुल्क में हिन्दुओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
संगठन के महासचिव गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने बताया कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। राजधानी में ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी के दफ्तर में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनवरी 1 से लेकर दिसंबर 29 तक के 2020 के आँकड़े सामने रखे गए। अगर 2019 के आँकड़ों को देखें तो उस साल 108 हिन्दुओं की हत्या कर दी गई थी और विभिन्न घटनाओं में 484 घायल हुए थे।
वहीं 2020 में 94 हिन्दुओं का अपहरण कर के उन्हें निशाना बनाया गया। साथ ही 2623 हिन्दुओं को जबरन इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया गया। अगर 2019 की बात करें तो उस साल ये आँकड़े क्रमशः 76 और 18 थे। 2020 में इसमें कई गुना ज्यादा बढ़ोतरी हुई। कुल मिला कर बांग्लादेश में 2020 में 53 हिन्दू महिलाओं-बच्चों के साथ बलात्कार किया गया और पूरे साल में 370 मंदिरों की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने की घटनाएँ हुईं।
ये दोनों आँकड़े भी 2019 में 42 और 246 थे। संगठन ने ये भी जानकारी दी कि 2020 में 2125 हिन्दू परिवारों को मुल्क छोड़ कर जाने के लिए मजबूर किया गया। ये संख्या 2019 में 379 थी। इतना ही नहीं, धार्मिक स्थलों पर हमले भी कई गुना बढ़ गए। 2020 में 163 मंदिरों पर हमला किया गया, या फिर उन्हें जला डाला गया। 2019 में ये संख्या 153 थी। कुल मिला कर हिन्दू समाज पर अत्याचार की 40,703 घटनाएँ सामने आईं।
There has been a sharp increase in attacks against Hindus in the year 2020 compared to previous years which signals an alarming trend in the worsening conditions of Hindus in Bangladesh pic.twitter.com/heyJYWF7mX
— Nirmal Ganguly (@NirmalGanguly) January 4, 2021
2019 में ये आँकड़ा 31,505 था। बता दें कि बांग्लादेश से हिन्दुओं के अपहरण, जबरन धर्मांतरण, हिन्दू महिलाओं के बलात्कार, मंदिरों पर हमले, प्रतिमाओं को तोड़ने की घटनाएँ आए दिन होती रहती हैं और अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे इस अत्याचार पर मुखर नहीं रहता। वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन बांग्लादेश चैप्टर (world hindu federation bangladesh chapter) द्वारा जारी सूची के अनुसार, अकेले मई 2020 में ही हिंदुओं के 10 मंदिरों को तोड़ दिया गया था।

