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बड़े परदे पर दिखेगा तीजन बाई का ‘संघर्ष’: पंडवानी गायिका बनेंगी विद्या बालन, अमिताभ बच्चन होंगे नाना

पद्म विभूषण तीजन बाई के जीवन पर हिन्दी फिल्म बनने वाली है, छत्तीसगढ़ के दुर्ग की रहने वाली तीजन बाई का किरदार बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन निभाएँगी। वहीं अमिताभ बच्चन इस फिल्म में उनके नाना का किरदार निभाने वाले हैं, फिल्म की शूटिंग अगले साल फरवरी से मार्च के बीच शुरू हो सकती है। 

फिल्म को लेकर तीजन बाई से मुलाक़ात करने, उनका किरदार समझने और छत्तीसगढ़ी भाषा सीखने के लिए विद्या बालन जल्द ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का सकती हैं। तीजन बाई पंडवानी गायन के लिए पूरे देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। तीजन बाई के जीवन पर फिल्म बनाने के लिए निर्माताओं ने लगभग सारी औपचारिकताएँ पूरी कर ली हैं।

तीजन बाई मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित गनियारी (भिलाई) गाँव की निवासी हैं। उनका जन्म 24 अप्रैल 1956 में हुआ था, उनके पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती देवी था। वह बचपन में अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कहानियाँ सुनती थीं। कुछ ही सालों में उन्हें महाभारत की अधिकाँश कथाएँ याद हो गई थीं, तीजन बाई तंबूरे के साथ पंडवानी गायन करने वाली पहली महिला बनीं।   

पंडवानी का मतलब होता है ‘पांडवाओं की वाणी’ यानी महाभारत और पांडवों से जुड़े किस्सों को इस लोककला के माध्यम से कहना। इस लोककला के दो प्रकार हैं, कापालिक और वेदमती। जिसमें कापालिक शैली का पालन आदमी किया करते थे और वेदमती शैली में औरतें कथाएँ कहती थीं। कापालिक खड़े होकर कही जाती है और वेदमती बैठ कर लेकिन तीजन बाई ने इस चलन को सिरे से नकार दिया। तीजन बाई ने कापालिक शैली में पंडवानी कहना शुरू किया और वह ऐसा करने वाली पहली महिला थीं। उनके गाँव वालों ने ऐसा करने पर उन्हें गाँव से निकाल दिया था और यहीं से उनका संघर्ष शुरू हुआ था।  

तीजन बाई अक्सर साक्षात्कारों में कहा करती हैं, “वह समय उनके लिए बहुत कठिन था, कभी-कभी तो एक वक्त की रोटी मिलना भी मुश्किल हो जाता था।” शुरू-शुरू में उनके लिए सब कुछ बहुत कठिन था, भले वह कितने भी मन से किस्से सुनातीं लेकिन लोग उन्हें तवज्जो नहीं देते थे और विरोध अलग करते थे। इसके बावजूद तीजन बाई ने हार नहीं मानी और मात्र तेरह साल की उम्र से ही सार्वजनिक स्थानों पर पंडवानी गायन शुरू किया था। 

गाँव के गली, मोहल्लों और नुक्कड़ से शुरू हुआ सफ़र इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, रोमानिया, माल्टा जैसे तमाम देशों तक पहुँचा। भारत रत्न के अतिरिक्त तीजन बाई भारत के लगभग हर बड़े सम्मान से सुशोभित की जा चुकी हैं। तीजन बाई के साथ एक और ख़ास बात है, वह जहाँ कहीं भी जाती हैं पंडवानी की पूरी वेश-भूषा अपने साथ लेकर जाती हैं। यहाँ तक कि विदेशों में भी वह पंडवानी की पोशाक अपने साथ रखती हैं।  

बांग्लादेश में मिली सजा-ए-मौत तो 2010 से भारत में छिपा अपराधी: खानपुर से STF ने लोडेड पिस्टल के साथ किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शनिवार (दिसंबर 26, 2020) को एक बांग्लादेशी अपराधी को गिरफ्तार किया है। ये अपराधी अवैध ढंग से भारत में घुसा था और साल 2010 से यहीं छिपा हुआ था। पुलिस ने आज इस अपराधी को दिल्ली के खानपुर से लोडेड पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया है। अब इसकी सूचना बांग्लादेश के दूतावास को दे दी गई है।

समाचार एजेंसी ANI ने क्राइम ब्रांच के हवाले से बताया, “बांग्लादेश में फाँसी की सजा पा चुका एक अपराधी भारत में अवैध ढंग से घुसा था, आज उसे क्राइम ब्रांच की एसटीएफ ने दिल्ली के खानपुर से लोडेड पिस्टल के साथ गिरफ्तार कर लिया है। वह यहाँ साल 2010 से रह रहा था। उसकी सूचना बांग्लादेश के एंबेसी को दे दी गई है।”

बता दें कि इस खबर के आने के बाद एक बार दोबारा NRC की जरूरत को लेकर लोग अपनी राय रखते हुए सोशल मीडिया पर नजर आए। प्रिया शर्मा कहती हैं कि अगर सफलतापूर्वक एनआरसी लागू कर दिया गया तो 20% भारत की जनसंख्या कम हो जाएगी। गृह मंत्रालय को इस पर संज्ञान ले लेना चाहिए।

अमाया इस खबर पर प्रतिक्रिया देकर पूछती हैं, “और कुछ लोग कह रहे थे कि एनआरसी की आवश्यकता नहीं है।”

एक यूजर लिखते हैं, “10 मस्जिद में से 4 मस्जिद भारत में बांग्लादेशियों और रोहिंग्या लोगों को पनाह देते हैं। पिछले दो दशकों में मस्जिदों की संख्या में बढ़ौतरी हुई है। जमीन जिहाद और एनजीओ को मिल रही बाहरी फंडिंग के जरिए ऐसी देश विरोधी गतिविधियाँ हो रही हैं। हमारे सेकुलरिज्म को नमन है।”

गौरतलब है कि भारत में आए दिन बांग्लादेशियों के अवैध घुसपैठ के प्रमाण किसी न किसी की गिरफ्तारी के साथ मिल ही जाते हैं। हाल में उत्तराखंड के रुड़की से पुलिस ने एक बांग्लादेशी युवक को गिरफ्तार किया था। युवक की पहचान मोहम्मद उज्जवल के रूप में हुई थी। मोहम्मद उज्जवल मशीनपुर का निवासी था। उसपर भी आरोप था कि वो अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ और बिना वीजा के यहाँ ठहरा।

राहुल गाँधी के ‘खास’ साकेत गोखले ने उठाए किसानों के खाते में ट्रांसफर हुए पैसों पर सवाल: लोगों ने प्रमाण दे साबित किया ‘पप्पू’

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के अवसर पर 25 दिसंबर 2020 को 9 करोड़ से ज़्यादा किसानों के खाते में 18000 करोड़ से अधिक की मदद पहुँचाई। लेकिन कॉन्ग्रेस के ट्रोलर्स इस अवसर पर भी झूठी खबर फैलाने से बाज नहीं आए। इसी सूची में राहुल गाँधी के फैन साकेत गोखले ने शनिवार (दिसंबर 26, 2020) को  ट्विटर पर अपनी कम बुद्धि का प्रमाण देते हुए डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांस्फर (DBT) स्कीम पर सवाल उठाए।

साकेत गोखले ने लिखा, “मोदी का पीआर इतना पर्फेक्ट है कि वह बड़े स्तर पर किसानों को बैंक ट्रांसफर कर देते हैं वो भी बैंक हॉलिडे के मौके पर।” साकेत के इस ट्वीट का मतलब कोई तंज नहीं था। ये केवल उनकी बेवकूफी थी। जो दर्शाती है कि टेक्वनिकली कम ज्ञान होने के बाद वह जनता को भ्रमित कर रहे थे कि 25 दिसंबर यानी क्रिसमस के मौके पर बैंक से पैसा ट्रांस्फर हो ही नहीं सकता। 

उनके अलावा कई अन्य कॉन्ग्रेसी, कट्टरपंथी भी इसी सूची में थे, जिनका बौद्धिक स्तर गोखले जितना था। इन सबके मुताबिक पीएम मोदी ने बैंक हॉलीडे के दिन पैसे ट्रांसफर नहीं किए और जो भी कुछ हुआ सब सिर्फ़ पीआर का हिस्सा था।

हालाँकि, ये पूरा प्रोपगेंडा ज्यादा देर सोशल मीडिया पर नहीं चल पाया। जिस किसी भी लाभार्थी ने इसे देखा वो सब स्क्रीनशॉट शेयर करके इस झूठ की पोल खोलने लगे और दिखाया कि उनके खाते में पीएम किसान स्कीम के तहत 2000 रुपए पहुँचे हैं। इन स्क्रीनशॉट से यह साफ हो गया कि पीएम मोदी द्वारा मदद ट्रांसफर करने के कुछ घंटों में ही यह लाभ किसानों को पहुँचा।

जब गोखले को लगा कि उनके झूठ की पोल खुल गई है और डिजिटल बैंकिंग के जरिए आज एक क्लिक में कभी भी पैसे पहुँचाना मुमकिन हो चुका है, तो वह आरबीआई नियमों को चेक करने की बात यूजर्स से करने लगे। इसीलिए हमने सोचा कि हम ये पूरा प्रोसेस समझाकर बता देते हैं कि आखिर कैसे डीबीटी सिस्टम के जरिए लाभार्थियों को सीधा पैसा मिला।

इस प्रक्रिया के तीन मुख्य चरण होते हैं:

लाभार्थी की पहचान करना

उनके डेटा सत्यापित करके, उसे बैंकिंग सिस्टम के प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना।

आखिर में बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके लाभार्थी को लाभ देना।

आइए इन्हें थोड़ा विस्तार से समझें।

सबसे पहले लाभार्थियों की लिस्ट, संबंधित मंत्रालय द्वारा तैयार की जाती है और फिर उसे द पब्लिक फाइनेंनेस मैनेजमेंट सिस्टम पर अपलोड किया जाता है। ये PFMS पेमेंट, उनकी ट्रैकिंग, मॉनिट्रिंग आदि के लिए एंड टू एंड सॉल्यूशन है। इसकी देख रेख व्यय विभाग ( Department of Expenditure) द्वारा की जाती है।

लाभार्थियों के नाम इस प्लेटफॉर्म पर अपलोड होते हैं। इसका खाका इस तरह तैयार है कि इसमें आधार कार्ड, बैंक अकॉउंट डिटेल सब शामिल होता है। सूची को प्लेटफॉर्म पर तभी डाला जाता है जब उसे इंटरनली सत्यापित किया जा चुका हो। और इतना सब सिर्फ यही सुनिश्चित करने के लिए होता है कि लाभ गलत व्यक्ति तक न पहुँचे।

उक्त प्रक्रिया पैसे ट्रांसफर करने से पहले की होती है। जिसपर काम शुरू खातों तक पैसा पहुँचाने की निर्धारित तारीख से पहले किया जाने लगता है। पीएफएमएस की सबसे बड़ी ताकत देश में कोर बैंकिंग प्रणाली के साथ इसका एकीकरण है। इसी के कारण हर लाभार्थी को ऑनलाइन पेमेंट मिलती है। वर्तमान में, PFMS इंटरफ़ेस में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों, भारतीय रिज़र्व बैंक, भारत के पोस्ट और सहकारी बैंकों के कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) के साथ इंटरफ़ेस हैं।

लाभार्थियों की सूची बाद में नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के प्लैटफॉर्म पर अपलोड होती है। जहाँ से फंड के ट्रांसफर का काम शुरू होता है। बता दें कि NCPI एक गैर लाभकारी संगठन है जिसे आरबीआई द्वारा स्थापित किया गया है। जैसे ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट अपडेट होती है। NPCI ही बैंको को ट्रांस्फर अपलोड करने के निर्देश देता है। यानी पैसों का अप्रूवल और उनका सर्टिफिकेशन बहुत पहले हो जाता है। NPCI पहले ही बैंको को ट्रांस्फर की डेट बता कर रखता और उन्हें उस दिन ऑफिस में रहने के भी निर्देश दिए जाते हैं।

दूसरा, NPCI बहुत भारी मात्रा में ऐसे फाइल भेज सकता है। इसने ऐसे डीबीटी लेनदेन को करने के लिए मौजूदा आरटीजीएस / एनईएफटी आर्किटेक्चर से स्वतंत्र एक अलग मंच बनाया है।  इसलिए साकेत गोखले के दावों से परे ये सारा काम NEFT और RTGS के आधार पर नहीं होता। ये सारी पेमेंट ईसीएस के जरिए होती है जहाँ आधार आधारित प्रणाली एनपीसीआई का इस्तेमाल होता है, जिससे साफ होता है कि डीबीटी पेमेंट पर RTGS या NEFT की पाबंदियाँ लागू नहीं होती।

शायद अब ये बातें एकदम साफ हों कि डीबीटी सिस्टम वास्तविक बैंकिंग ट्रांजेक्शन से अलग है। डीबीटी ट्रांस्फर के अंतर्गत ट्रांस्फर का अलग खाका और रियल टाइम होता है। बैंक ट्रांस्फर किसी भी दिन और किसी भी टाइम किया जा सकता है। इसके लिए सिर्फ़ केंद्र सरकार का अप्रूवल चाहिए होता है और संबंधित बैंको को NPCI से ऑर्डर।

निजी सेक्टर बैंक के एक स्रोत जिसे NPCI ने 25 दिसंबर को बैंक में रहने को कहा था, उसने ऑपइंडिया को बताया कि उन्हें अलग से शुक्रवार को बैंक में मौजूद रहने के लिए कहा गया था ताकि डीबीटी पेमेंट अप्रूव की जा सकें। इसलिए साकेत गोखले की कॉन्सिपिरेसी थ्योरी का कोई आधार नहीं है। कल हुआ आयोजन वास्तविकता में जनता को लाभ पहुँचाने के लिए था न कि कोई पीआर स्टंट।

‘न हो बाबर के नाम से मस्जिद, वो मुसलमानों का मसीहा नहीं था’: अयोध्या में प्रस्तावित डिजाइन का इकबाल अंसारी ने किया विरोध

राम जन्मभूमि मामले में याचिकाकर्ता रहे इकबाल अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार द्वारा धन्नीपुर में आवंटित भूमि पर बनाई जा रही मस्जिद के डिजाइन को अस्वीकार करते हुए इसका विरोध किया है। अंसारी का कहना है कि मस्जिद का डिजाइन विदेशों की तर्ज पर है। और हम भारतीय शैली पर बनी मस्जिद को स्वीकार करेंगे।

इकबाल अंसारी ने कहा कि मस्जिद शो-ऑफ के लिए नहीं है और यह साधारण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक मस्जिद का प्राथमिक उद्देश्य नमाज पढ़ना है। इसके अलावा उन्होंने मस्जिद के ट्रस्ट पर भी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि 70 साल से मस्जिद के लिए लड़ाई लड़ी गई, लेकिन आज अयोध्या के किसी भी पक्षकार से कोई सलाह नहीं ली गई।

वहीं बाबर के नाम से मस्जिद के नामकरण करने के विचार का भी उन्होंने विरोध किया है। इकबाल अंसारी ने कहा कि मस्जिद को बाबर के नाम से नहीं जाना जाना चाहिए क्योंकि वह देश के मुसलमानों का मसीहा नहीं था।

गौरतलब है कि बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (बीएमएसी) के संयोजक और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य जफरयाब जिलानी ने भी मस्जिद के डिजाइन पर नाराजगी जताई थी। दरअसल, उन्होंने इस मस्जिद के जारी ब्लूप्रिंट को शरियत (इस्लामी कानून) के खिलाफ बताया था।

जिलानी ने कहा, “वक्फ अधिनियम के तहत मस्जिद या मस्जिद की ज़मीन किसी दूसरी चीज़ के बदले में नहीं ली जा सकती। अयोध्या में प्रस्तावित मस्जिद इस कानून का उल्लंघन करती है। यह शरियत कानून का उल्लंघन करती है क्योंकि वक्फ अधिनियम शरियत पर आधारित है।”

यह मुद्दा पहली बार अक्टूबर में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान उठाया गया था, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि वैकल्पिक भूमि पर मस्जिद का निर्माण वक्फ अधिनियम के खिलाफ है।

बता दें प्रस्तावित मस्जिद के ब्लूप्रिंट में गुंबद नहीं है। मस्जिद के अलावा परिसर में एक म्यूजियम, अस्पताल, लाइब्रेरी और कम्युनिटी किचन बनाया जाएगा। मस्जिद की इमारत ढाँचा आकार में गोल होगा। इस मस्जिद को अगले दो साल में बनाकर पूरा करने का लक्ष्य है। इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (आईआईसीएफ) नक्शा पास होने और स्वायल टेस्टिंग के हिसाब से मस्जिद निर्माण की तारीख तय करेगा।

पैगम्बर मोहम्मद के कार्टून पर भड़का पाकिस्तान: गूगल, विकिपीडिया को धमकाया, अहमदिया ‘मुस्लिम’ पर भी बवाल

पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (पीटीए) ने शुक्रवार (25 दिसंबर, 2020) को इंटरनेट के दिग्गज गूगल और विकीपीडिया को ईशनिंदा सामग्री का प्रसार करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। साथ ही पीटीए ने गूगल और विकिपीडिया को नोटिस जारी कर कहा है कि वे इन कंटेंट को डिलीट कर दे नहीं तो कानूनी परिणामों को भुगतने के लिए तैयार रहे।

यह नोटिस पाकिस्तान की गैरकानूनी ऑनलाइन कंटेंट (प्रक्रिया, ओवरसाइट और सेफगार्ड) नियम 2020 को हटाने और ब्लॉक करने के तहत भेजा गया है। जिसके माध्यम से पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण किसी भी ऑनलाइन कंटेंट को हटाने के लिए अधिकृत है, जोकि उनके अनुसार गैरकानूनी है।

पाकिस्तान रेगुलेटर्स ने एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा कि उन्हें Google Play Store पर अहमदिया समुदाय द्वारा अपलोड किए गए “पवित्र कुरान के अनैतिक संस्करण” को लेकर कई शिकायतें मिल रही हैं। यह उन पृष्ठों की ओर भी इशारा करता है, जो धार्मिक नेता मिर्जा मसरूर अहमद का नाम ‘खलीफा’ या इस्लाम के नेता के रूप में बताते हैं। इसके अलावा यह भी कहा गया कि ऐसी चीजें देश में प्रमुख धार्मिक मान्यताओं का खंडन करती है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान प्राधिकरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गूगल से सभी गैरकानूनी सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश दिया है। वहीं ऐसा नहीं करने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

अधिकारियों ने प्रेस रिलीज में आगे कहा, “हमें विकिपीडिया पर पवित्र पैगंबर (PBUH) के कैरिकेचर की मेजबानी और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार करने वाले आर्टिकल के बारे में भी शिकायतें मिली है, जो कि मिर्जा मसरूर अहमद को एक मुस्लिम के रूप में चित्रित करते है। उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखना उचित है कि मिर्ज़ा मसरूर अहमद अहमदिया मुस्लिम समुदाय के नेता हैं और विकिपीडिया द्वारा उसे मुस्लिम कहना पाकिस्तान में एक अपराध के समान है।

बयान में कहा गया है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने उनकी बातों की अवहेलना की तो पीटीए द्वारा इलेक्ट्रॉनिक क्राइम एक्ट 2016 (PECA) और नियम 2020 के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें इससे पहले पाकिस्‍तान दूरसंचार प्राधिकरण ने TikTok पर प्रतिबंध लगा दिया था। पाकिस्तान में इसलिए टिकटॉक पर बैन लगाया गया था क्योंकि टिकटॉक ने उनके निर्देशों का पालन नहीं किया था। दरअसल, पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (पीटीए) ने टिकटॉक को अश्लील वीडियो के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

‘राजनीति से प्रेरित किसान आंदोलन वापस लो’ – जिस सिख रेडियो जॉकी ने यह कहा, उन्हें धारदार हथियार से कई बार गोदा

न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में बतौर रेडियो जॉकी कार्यरत हरनेक सिंह पर हमला करने के बाद उन्हें कई बार धारदार हथियार से गोदा गया, जिसके बाद वो अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। न्यूजीलैंड की मीडिया ने इस हमले को मजहबी कट्टरता से प्रेरित बताया है। उन पर बुधवार (दिसंबर 23, 2020) को हमला किया गया। 53 वर्षीय हरनेक सिंह रात के 10:30 बजे रेडियो शो से लौट रहे थे, तभी उन पर ये हमला हुआ।

इस साल उन पर ये दूसरा हमला है। जुलाई 2020 में भी उनके जन्मदिन के दिन ही ‘लव पंजाब’ रेस्टॉरेंट में उन पर हमला किया गया था। हरनेक सिंह के साथी बलविंदर ने बताया कि वो उनके भाई के समान हैं और सिख समुदाय की सामाजिक और धार्मिक स्थितियों को लेकर अक्सर चर्चा में मशगूल रहा करते थे। साथ ही वो न्यूजीलैंड के सिख समुदाय की भलाई के लिए भी प्रयासरत थे। उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया।

बलविंदर ने बताया कि ये हमला रेडियो पर उनके द्वारा कही गई बातों के विरोध में किया गया है, ऐसा लगता है। उन्होंने कहा कि हरनेक सिंह की सोच और विचारों को लेकर रोष के कारण ये हमला हुआ। उन्होंने हाल ही में दिल्ली में राजनीतिक रूप से प्रेरित आंदोलन को वापस लेने की अपील की थी, जिसमें तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग की जा रही है। हरनेक धार्मिक गलतफहमियों को दूर करने के लिए भी रेडियो शो में बातें किया करते थे।

उनके दोस्त ने बताया कि ये हमला ऐसे मजहबी कट्टरपंथियों ने किया है, जो धर्म को मिथकों में देखता हो और उसे वास्तविकता में कोई रुचि न हो। उनकी पत्नी ने बताया कि उनकी हालत अभी स्थिर है। उनकी सर्जरी भी की गई है। न्यूजीलैंड की पुलिस ने कहा है कि इस मामले में और जाँच की जा रही है। उन पर हुए हमले के बाद रेडियो स्टेशन को भी सैकड़ों कॉल और मैसेजों के द्वारा धमकियाँ मिल रही हैं।

उनके साथियों ने बताया कि हरनेक सिंह सिर्फ धर्म पर ही बातें नहीं किया करते थे, बल्कि सिख समुदाय कैसे पीछे छूट रहा और और क्या सामाजिक समस्याएँ हैं, उनके क्या निदान हो सकते हैं – इन सब पर चर्चा किया करते थे। वो बदलाव की बातें किया करते थे। उनके सिख मित्रों ने कहा कि कुछ लोग अभी भी 100 वर्ष पीछे जीना चाहते हैं और हरनेक सिंह ऐसे लोगों को सही रास्ते पर लाना चाहते थे।

बता दें कि उधर विवादित ‘किसान आंदोलन’ के बीच में पंजाब में तीसरी बार कॉन्ग्रेस के टिकट पर सांसद बने रवनीत सिंह बिट्टू ने मोदी सरकार को धमकाते हुए कहा है कि वो सोचते हैं कि हम यहाँ पर बैठे हैं इतने दिनों से तो बैठे-बैठे थक जाएँगे। उन्होंने कहा, “1 तारीख (जनवरी 1, 2020) के बाद हम लाशों के भी ढेर लगाएँगे। हम अपना खून भी देंगे। हम इसके लिए कहीं भी, किसी भी हद तक जा सकते हैं।”

100 से ज्यादा बच्चियों का सेक्स गैंग लीडर अहदल अली जेल से रिहा: 26 साल की थी सजा, 8 साल में बाहर

13 साल तक की किशोर लड़कियों को वेश्यावृत्ति में ढकेलने वाले यौन अपराधी अहदल ‘एडी’ अली (Ahdel ‘Eddie’ Ali) को उसकी सजा का केवल एक तिहाई समय जेल में काटने के बाद हाल में रिहा कर दिया गया। अहदल उर्फ एडी अली अपने भाई मुबारक अली और 5 अन्य लोगों के साथ श्रॉपशायर (इंग्लैंड) के टेलफोर्ड में ट्रैफिकिंग गैंग चलाता था और ये गैंग 100 से ज्यादा किशोरियों को अपना निशाना बना चुका था।

मिरर की खबर के अनुसार, साल 2012 में 32 साल के अहदल अली को 26 साल की सजा मुकर्रर की गई थी। लेकिन वह आठ साल में रिहा कर दिया गया। साल 2006 से 2009 के बीच ये शख्स 13 साल तक की किशोरियों से वेश्यावृत्ति करवाने के बदले उन्हें खाना, पैसा और शराब का वादा करता था और उनका इस्तेमाल बाल वेश्याओं की तरह करता था।  

अली भाइयों को बाल वेश्यावृत्ति के अलावा 13 साल से 17 साल तक की 4 लड़कियों के साथ कई अपराध करने का दोषी पाया गया था। ये दोनों भाई अपराध के दौरान शादीशुदा थे। जानकारी के मुताबिक दो साल पहले अहदल पर कुछ कैदियों ने रेजर ब्लेड से हमला किया था, जिसके कारण उसे गहरा घाव आया था और 40 टाँके भी लगे थे।

हाल में अहदल की रिहाई की खबर की पुष्टि टेलफॉर्ड एमपी लूसी अलान ने की है। उन्होंने मीडिया को बतााया कि वह इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कानून अभी भी अपराधियों की समय से पहले जल्द रिहाई की अनुमति देता है। हालाँकि, अहदल अली और मुबारक अली की सजा के बाद, ये सब रोकने के लिए कानून बदल चुका है। और उन्हें इस बदलाव में अपनी भूमिका अदा करने पर गर्व है।

न्याय मंत्रालय की ओर से अहदल को रिहा करते हुए कहा गया है कि गंभीर यौन अपराधी को लाइसेंस पर रिहा किया गया है और उस पर नजर रखी जाएगी। अगर वह शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसे दोबारा जेल में डाला जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि स्टाफ़फोर्ड क्राउन कोर्ट ने अली भाइयों के मामले की सुनवाई के दौरान 15 और 16 साल की लड़कियों को केस से जोड़ा था, जो 2008 में वेश्या के तौर पर काम करती थीं। अली भाइयों की सजा गैंग के अन्य सदस्यों से ज्यादा तय की गई थी क्योंकि इन्हें कई अपराधों में दोषी पाया गया था जबकि बाकी अपराधियों को ढाई से सात साल की सजा मिली थी।

बता दें कि यूनाइटेड किंग्डम के गृह मंत्रालय के अनुसार देश में टेल्फॉर्ड बाल यौन अपराध के मामले में तीसरे नंबर पर है। यहाँ एक अनुमान के अनुसार 1000 लड़कियाँ ऐसी अलग-अलग गैंग का शिकार हो चुकी हैं। इनमें कई 11 वर्ष की भी होती हैं।

दादी इंदिरा के बाद प्रियंका को याद आई गाय: CM योगी को मात देने गाय बचाओ यात्रा… लेकिन पैदल मार्च करेंगे कोई और नेता!

देश के कई राज्यों के चुनाव ऐसे हैं जिनमें फ़िलहाल कुछ समय है लेकिन उनके लिए राजनीतिक खींचतान अभी से ही शुरू हो गई है। इस सूची का एक अहम नाम है उत्तर प्रदेश जिसके लिए कॉन्ग्रेस की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं। कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर पदयात्रा की योजना बना रही है और निशाने पर होंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। इस पदयात्रा के ज़रिए कॉन्ग्रेस एक और मुद्दे को साधना चाहती है, ‘गौरक्षा’। 

उत्तर प्रदेश की कॉन्ग्रेस इकाई शनिवार (25 दिसंबर 2020) को प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र (ललितपुर से चित्रकूट) से ‘गाय बचाओ किसान बचाओ’ शुरू करेगी। उल्लेखनीय है कि इस पदयात्रा की अगुवाई प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप आदित्य जैन करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ़िलहाल इस बात के आसार दूर-दूर तक नज़र नहीं आ रहे हैं कि प्रियंका गाँधी वाड्रा इस पदयात्रा में शामिल होंगी।

दादी इंदिरा की ‘गाय के इर्द-गिर्द’ राजनीति

अपनी राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में गाय के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस हमेशा से ही उदासीन रही है। उल्लेखनीय है कि इंदिरा गाँधी के दौर में देश के इतिहास की पुराने पार्टी का चुनाव चिन्ह ही गाय और बछड़ा था। पार्टी नेताओं ने ऐसे नारे बनाए थे जिसमें लोगों से अपील की गई थी कि वह सब कुछ भूल कर गाय और बछड़े को वोट करने। 60 के दशक में बड़े पैमाने पर माँग उठी थी कि गौहत्या पर पाबंदी लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएँ। 

इस पर इंदिरा गाँधी ने शुरुआत में कहा कि वह गौरक्षकों के सामने झुकने वाली नहीं हैं लेकिन जैसे ही विरोध बढ़ा देश की पूर्व प्रधानमंत्री को बैकफुट पर आना पड़ा। यहाँ तक की कॉन्ग्रेस का ही एक हिस्सा गौ हत्या पर पाबंदी के समर्थन में खड़ा था। 1967 के फरवरी में चुनाव भी होने थे और इंदिरा गाँधी समझ चुकी थीं ‘काऊ बेल्ट’ को नाराज़ करने का साफ मतलब था, ‘वोट फ़ीसद में बड़े पैमाने पर गिरावट।’ 

खुद पदयात्रा में शामिल होंगी प्रियंका गाँधी वाड्रा?

समस्या यह थी कि इंदिरा गाँधी पार्टी की छवि और विचारधारा से समझौता नहीं करना चाहती थीं। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए उन्होंने बीच का रास्ता निकाला और कहा कि वह गौहत्या के मुद्दे पर बेहद चिंतित हैं। अंततः उन्होंने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया जिसके सदस्य पशुपालन से जुड़े जानकार थे। ठीक इसी तरह कई दशकों बाद अब प्रियंका गाँधी वाड्रा ने गाय की सुध ली है।

दिल्ली में किसानों का प्रदर्शन भी जारी है इसलिए पार्टी दोनों मुद्दों के बीच संतुलन बनाने की कवायद में जुटी हुई है। लेकिन अफ़सोस अब तक सामने आई ख़बरों के मुताबिक़ प्रियंका गाँधी वाड्रा खुद इस पदयात्रा में शामिल नहीं हो रही हैं। बल्कि उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के मुखिया अजय कुमार लल्लू और पार्टी के अन्य नेता इसकी अगुवाई करने वाले हैं।   

गाय के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  

वहीं गाय के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कई उल्लेखनीय पहल की है। पिछले महीने (नवंबर 2020) में उन्होंने गौरक्षा के मुद्दे पर कहा था, “प्रदेश के भीतर सरकार द्वारा संचालित शेल्टर में 5 लाख से अधिक गाय मौजूद हैं। इसके अलावा राज्य में स्थानीय प्रशासन और जनभागीदारी से चलाए जा रहे शेल्टर्स में लगभग 8 लाख गाय मौजूद हैं।” इसके अलावा योगी आदित्यनाथ ने अगस्त में ‘उत्तर प्रदेश निराश्रित गोवंश सहभागिता स्कीम 2020’ शुरू की थी, जिसके तहत 1 आवारा मवेशी को गोद लेने वाले व्यक्ति को सरकार की तरफ से 900 रुपए प्रतिमाह का भुगतान किया जाएगा।    

PMJAY SEHAT: 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज, योजना अब J&K में भी लॉन्च, 21 लाख परिवारों को लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (दिसंबर 26, 2020) को जम्मू कश्मीर में आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना सेहत की शुरुआत की, जिसे पीएम-जय योजना भी कहा जाता है। इस योजना के तहत प्रदेश में रहने वाले 21 लाख लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुँचेगा। सामाजिक, आर्थिक और जातिगत जनगणना के आधार पर इसका लाभ मिलेगा। इस दौरान उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी कहा कि DDC चुनावों के बाद यहाँ त्रिस्तरीय लोकतंत्र की स्थापना हुई है

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के लोगों को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन जम्मू कश्मीर के लिए बहुत ऐतिहासिक है। आज से जम्मू कश्मीर के सभी लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ मिलने जा रहा है। उन्होंने सेहत स्कीम को अपने-आप में एक बहुत बड़ा कदम करार देते हुए कहा कि और जम्मू-कश्मीर को अपने लोगों के विकास के लिए ये कदम उठाता देख, उन्हें भी बहुत खुशी हो रही है।

प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए भी बधाई देते हुए कहा कि ‘डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल (DDC)’ के चुनाव ने एक नया अध्याय लिखा है। उन्होंने बताया कि वो चुनावों के हर चरण में देख रहे थे कि कैसे इतनी सर्दी और कोरोना संक्रमण के बावजूद नौजवान, बुजुर्ग, महिलाएँ बूथ पर पहुँच रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें जम्मू कश्मीर के हर वोटर के चेहरे पर विकास के लिए एक उम्मीद नजर आई, उमंग नजर आई।

प्रधानमंत्री ने बताया कि जम्मू कश्मीर के हर वोटर की आँखों में उन्होंने अतीत को पीछे छोड़ते हुए, बेहतर भविष्य का विश्वास देखा है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में इन चुनावों ने ये भी दिखाया कि हमारे देश में लोकतंत्र कितना मजबूत है। बकौल पीएम मोदी, लेकिन एक पक्ष और भी है, जिसकी तरफ वो देश का ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पुडुचेरी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पंचायत और म्यूनिसिपल इलेक्शन नहीं हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “आप हैरान होंगे, सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में ये आदेश दिया था। लेकिन वहाँ जो सरकार है, इस मामले को लगातार टाल रही है। पुडुचेरी में दशकों के इंतजार के बाद साल 2006 में स्थानीय निकाय चुनाव हुए थे। इन चुनावों में जो चुने गए, उनका कार्यकाल साल 2011 में ही खत्म हो चुका है।”

इसके बाद पीएम ने जम्मू-कश्मीर की बात करते हुए कहा कि महामारी के दौरान भी जम्मू कश्मीर में करीब 18 लाख सिलेंडर रिफिल कराए गए। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत जम्मू कश्मीर में 10 लाख से ज्यादा टॉयलेट्स बनाए गए। उन्होंने याद दिलाया कि इसका मकसद सिर्फ शौचालय बनाने तक सीमित नहीं, ये लोगों के स्वास्थ्य को सुधारने की भी कोशिश है।

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि आज जम्मू कश्मीर आयुष्मान भारत सेहत स्कीम शुरू की गई है, जिससे 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिलेगा, तो जीवन में कितनी बड़ी सहूलियत आएगी। उन्होंने बताया कि अभी आयुष्मान भारत योजना का लाभ राज्य के करीब 6 लाख परिवारों को मिल रहा था। सेहत योजना के बाद यही लाभ सभी 21 लाख परिवारों को मिलेगा।

पीएम मोदी ने आगे बताया कि इस स्कीम का एक और लाभ होगा जिसका जिक्र बार-बार किया जाना जरूरी है। इससे इलाज सिर्फ जम्मू कश्मीर के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि देश में इस योजना के तहत जो हज़ारों अस्पताल जुड़े हैं, वहाँ भी ये सुविधा जनता को मिल पाएगी।

उन्होंने अपनी सरकार द्वारा किए गए कार्यों को गिनाते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में 7 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें एमबीबीएस की सीटें दो गुनी से भी ज्यादा मिलने वाली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन 15 नए नर्सिंग कॉलेजों को मंजूरी मिली है, उनसे युवाओं को नए अवसर मिलेंगे। जम्मू और श्रीनगर डिवीजन में दोनों जगह दो कैंसर इंस्टीट्यूट भी बनाए जा रहे हैं। दो एम्स का काम भी तेजी से चल रहा है।

प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि नौजवानों को मेंडिकल और पैरामेडिकल एजुकेशन के लिए जम्मू-कश्मीर में ज्यादा से ज्यादा मौके मिलें, इसके लिए भी काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि साथ ही रेलवे का पूरा जोर है कि अगले 2-3 साल में वैली रेलवे से कनेक्ट हो जाए। पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में लाइट से रेल ट्रांजिट मैट्रो को लेकर बात आगे बढ़ रही है और जम्मू में सेमी रिंग रोड का काम जल्द पूरा करने के प्रयास हो रहे हैं।

उन्होंने एक बड़ी जानकारी दी कि नए कृषि सुधारों ने जम्मू में और घाटी में दोनों जगह फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए भी नए अवसर बना दिए हैं, जिससे हजारों लोगों को रोजगार और स्वरोजगार का मौका मिलने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि इसके साथ ही जम्मू कश्मीर में जहाँ एक तरफ हजारों सरकारी नौकरियाँ नोटीफाई की जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ स्वरोजगार के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बैंकों के जरिए अब जम्मू-कश्मीर के नौजवान करोबारियों को आसानी से लोन मिलना शुरू हुआ है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार के फैसलों के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर के गरीब सामान्य वर्ग को आरक्षण का लाभ मिला है। पहली बार पहाड़ी लोगों को आरक्षण का लाभ मिला है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वालों को भी 4% आरक्षण का लाभ केंद्र सरकार ने दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जिस लोगों ने दर्शकों तक शासन किया, उनकी एक बड़ी भूल ये भी रही कि उन्होंने सीमा के पास के विकास को पूरी तरह नजरअंदाज किया और जम्मू कश्मीर हो या नॉर्थ-ईस्ट, इन क्षेत्रों को पिछड़ेपन में जीने को मजबूर कर दिया।

बता दें कि जम्मू कश्मीर में डीडीसी चुनावों (DDC Election) के नतीजे सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। बीजेपी ने इन चुनावों में 74 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि स्थानीय पार्टियाँ अकेले इस आँकड़े के पास नहीं पहुँच पाईं। गुपकार गैंग ने जिला विकास परिषद के चुनावों में 100 से ज्यादा सीटों (101+) के साथ विजय जरूर पाई। मगर, पार्टी लिहाज से देखें तो इसमें 7 राजनीतिक दल एक साथ थे और किसी भी दल को अकेले इतनी सीटों (जितनी पर BJP ने जीत दर्ज की) पर जीत नहीं मिली।

दीन मोहम्मद अपने ही दोस्त की बच्ची का अपहरण कर 1 महीने तक मँगवाता रहा भीख: UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति को अपने ही दोस्त की बच्ची से भीख मँगवाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपित दीन मोहम्मद ने अपने मित्र की बेटी का न सिर्फ अपहरण किया, बल्कि प्रताड़ित कर के उससे भीख भी मँगवाई। पुलिस ने लगभग एक महीने बाद बच्ची को सकुशल बरमाद करते हुए मुरादनगर थाना क्षेत्र स्थित नेकपुर के निवासी दीन मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपित खुद दिव्यांग है और भीख माँगता है। विभिन्न स्थानों पर भीख माँगने के क्रम में ही उसकी नजर रोजी कॉलोनी निवासी अपने दोस्त छोटू खान की मासूम बेटी पर पड़ गई। इसके बाद नवंबर 28, 2020 को वो उसे ट्राइसाइकिल पर घुमाने के बहाने बहला-फुसला कर ले गया और उसका अपहरण कर लिया। सीओ अभय कुमार मिश्र ने बताया कि छोटू ने उसी दिन अपनी बेटी के गायब होने की सूचना भी पुलिस को दे दी थी।

तभी पुलिस ने बच्ची की बरामदगी के लिए 4 टीमों का गठन कर के तलाशी अभियान शुरू कर दिया था। जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खँगाला तो पाया कि एक दिव्यांग व्यक्ति ट्राइसाइकिल से बच्ची को लेकर जा रहा है। एक महीने की मशक्कत के बाद पुलिस ने आरोपित की पहचान करने में कामयाबी पाई। इसके बाद पुलिस ने तिगरी गोलचक्कर से उसे धर-दबोचा। पकड़े जाने के दौरान भी वो बच्ची से भीख मँगवा रहा था।

उसने कबूल किया है कि उसने भीख मँगवाने के लिए ही बच्ची का अपहरण किया था। पुलिस ने जानकारी दी है कि उस बच्ची की तलाश में पुलिस टीमों ने हरिद्वार, रुड़की स्थित कलियर शरीफ की दरगाह, मुजफ्फरनगर, मेरठ, देहरादून, ऋषिकेश, दिल्ली की जामा मस्जिद और अक्षरधाम सहित कई पर्यटन स्थलों को छान मारा था। हरिद्वार और कलियर शरीफ में बच्ची की फोटो दिखाने पर उसके बारे में सूचना मिली।

‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, भीड़भाड़ वाले इलाकों, बाजारों, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों सहित कई स्थानों पर बच्ची की तस्वीर चस्पा कर जानकारी माँगी गई। एक स्थानीय व्यक्ति की सूचना के बाद बच्ची की बरामदगी हुई। दीन मोहम्मद उसे लेकर नोएडा जाने की फिराक में था। बच्ची ने रोते हुए पुलिस को बताया कि जब भी वो अपने पिता के पास जाने की बात करती थी तो आरोपित उसकी पिटाई करता था।

पुलिस को आरोपित की तलाश में इसीलिए इतना समय लग गया, क्योंकि वो मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था और जगह बदल-बदल कर भीख माँगा करता था। वो छोटू खान का दोस्त था और बच्ची की माँ के निधन के बाद अक्सर वहाँ आता-जाता रहता था। बच्ची अपने पिता और दादी के साथ रहती थी। जब छोटू घर पर नहीं था, तभी आरोपित वहाँ पहुँचा और बच्ची को बहला-फुसला कर ले गया।

अगस्त 2019 में इसी तरह की एक खबर आई थी, जब मुंबई के अँधेरी में पुलिस ने 50 वर्षीय यूसुफ़ शेख़ को एक सात साल की बच्ची का अपहरण करने और उससे भीख मँगवाने के आरोप में गिरफ़्तार किया था। बच्ची ने तीन महींने में 5,000 रुपए की भीख माँगी थी। बेघर परिवार की बच्ची का अपहरण उस समय हुआ जब वो रेलवे स्टेशन के पास सड़क किनारे खेल रही थी। गुप्त सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे बरमाद किया था।