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दिल्ली की कंपनी, पिपरिया के किसान, कंप्लेन हुई तो 24 घंटे के भीतर खरीदना पड़ा धान: नए कृषि कानून की उपज यह भी

एक तरफ किसान दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर केंद्र सरकार के नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) अनुबंध मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा क़ानून के अंतर्गत पहली कार्रवाई की गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर किसानों के अधिकार के संबंध में हुई इस कार्रवाई की जानकारी दी है।  

मामला मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिला स्थित पिपरिया क्षेत्र का है। दिल्ली की कंपनी (फॉर्च्यून राइस लिमिटेड) ने अनुबंध होने के बावजूद धान नहीं खरीदा। नतीजतन किसानों ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की और इसके बाद जिला प्रशासन ने कंपनी को आदेश दिया कि वह मंडी के उच्चतम दाम पर धान खरीदे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस त्वरित कार्रवाई पर जिला प्रशासन की सराहना की है।  

एमपी के मुख्यमंत्री के मुताबिक़ इस क़ानून का उद्देश्य अन्नदाताओं के हितों की रक्षा करना है। यह बात उल्लेखनीय है कि इस क़ानून की वजह से महज़ 24 घंटे के भीतर किसानों को न्याय मिला है। इसमें जिला प्रशासन की भूमिका सराहनीय है, उन्होंने इस कार्रवाई से किसानों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नए कृषि क़ानूनों को लेकर प्रदेश के किसानों की जागरूकता पर प्रसन्नता जताई। 

दरअसल 10 दिसंबर को पिपरिया के किसान पुष्पराज पटेल और बृजेश पटेल ने दिल्ली की कंपनी द्वारा धान नहीं खरीदे जाने पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए एसडीएम नितिन टाले ने कंपनी को तलब किया और 24 घंटे के भीतर जवाब माँगा। नए क़ानून के प्रावधानों के आधार पर किसान और कंपनी के बीच समाधान के लिए बोर्ड का गठन किया किया गया और कंपनी ने धान की फसल 2960 रुपए/क्विंटल (उच्चतम मूल्य) और 50 रुपए/क्विंटल बोनस पर खरीदने के लिए सहमति जताई। यानी सिर्फ 24 घंटे के भीतर किसानों को नए कृषि क़ानूनों की वजह से न्याय मिल गया। 

कंपनी ने 3 जून 2020 को किसानों से अनुबंध किया था जिसके अंतर्गत उन्हें किसानों के धान की फसल मंडी के उच्चतम मूल्य पर खरीदनी थी। कंपनी ने कुछ समय तक अनुबंध के तहत धान खरीदा लेकिन मंडी में धान का भाव 3 हज़ार रुपए/क्विंटल हुआ तो उन्होंने खरीद बंद कर दी। इसके बाद किसानों ने कंपनी से संपर्क करने का कई बार प्रयास किया, लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की। 

जिला प्रशासन ने जल्द ही कृषि विभाग से संपर्क किया। विभाग ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग अधिनियम (Contract Farming Act) की धारा 14 के अंतर्गत कार्रवाई का आदेश दिया। नतीजतन कंपनी के निदेशक अजय भलोटिया ने जवाब दिया फिर समझौता बोर्ड का गठन किया गया और बोर्ड के सदस्य किसानों के प्रतिनिधि और तहसीलदार बनाए गए। बोर्ड के साथ बातचीत होने के बाद कंपनी ने धान उच्चतम मूल्य पर खरीदने की बात कही। कंपनी के निदेशक ने इस बात को स्वीकार किया कि धान की कीमत बढ़ने के बाद खरीद बंद कर दी गई थी।

अजमल को साथ लेकर भी 1 पर सिमटी कॉन्ग्रेस, बोडोलैंड काउंसिल चुनाव में भी BJP को बड़ा फायदा

बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (BTC) के चुनावों में बीजेपी को बड़ी सफलता मिली है। उसने 12 सीटें जीतने वाली यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) के साथ मिलकर बहुमत भी हासिल कर ली है। बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) से हाथ मिलाने के बावजूद कॉन्ग्रेस को केवल एक सीट मिली है। वहीं 17 साल से बीटीसी की सत्ता में बनी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को 17 सीटों पर कामयाबी मिली है। हालाँकि सबसे बड़े दल के बावजूद वह सत्ता बचाने में असफल रही है।

बीटीसी के चुनाव असम विधानसभा चुनावों के सेमीफाइनल माने जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कॉन्ग्रेस ने अजमल से हाथ मिलाया था। अजमल मोदी सरकार के खिलाफ जहर उगलने के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में यह बात भी सामने आई है कि एआईडीयूएफ द्वारा संचालित ‘अजमल फाउंडेशन’ को टेरर फंडिंग वाले विदेशी संगठनों से पैसा मिला है।

BTC चुनावों में बीजेपी ने 40 में से 9 सीटों पर जीत दर्ज की है। 2015 में हुए चुनाव में उसे केवल 1 सीट मिली थी। भाजपा को मिली जीत पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “एनडीए ने असम बीटीसी चुनाव में बहुमत हासिल किया है। हमारे सहयोगी यूपीपीएल, सीएम सर्बानंद सोनोवाल, हिमंत बिस्वा सरमा, रणजीत कुमार दास और असम भाजपा को बधाई। मैं असम के लोगों को एक विकसित उत्तर-पूर्व के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प में उनके निरंतर विश्वास के लिए धन्यवाद देता हूँ।”

कॉन्ग्रेस की सहयोगी एआईयूडीएफ इस चुनाव में खाता खोलने में भी नाकाम रही। गण सुरक्षा पार्टी (GSP) को भी इस चुनाव में महज एक सीट ही मिली।

बता दें कि बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद में कुल 46 सीटें हैं। इनमें से 6 नामांकित होते हैं, जबकि 40 पर चुनाव होता है। इन 40 सीटों पर 7 और 10 दिसंबर को चुनाव हुए थे। इस साल की शुरुआत यानी फरवरी 2020 में बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद यह पहला चुनाव था।

पिछले 17 साल से बीटीसी पर शासन करने वाली बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट बहुमत के लिए जरूरी 21 सीटें इस बार जीतने में नाकाम रही है। उसे सिर्फ 17 सीटों पर जीत मिली है। 2015 में उसे 20 सीटें मिली थीं, जो इस बार तीन कम हैं।

पिछले चुनाव में बीपीएफ और बीजेपी के बीच गठबंधन था। लेकिन इस चुनाव में दोनों पार्टियाँ अलग-अलग चुनाव लड़ रही थीं और बीजेपी ने बीपीएफ को कड़ी टक्कर भी दी। इससे पहले, असम बीजेपी ने संकेत दिया था कि वह बीपीएफ के साथ 2021 के असम चुनावों में गठबंधन जारी रखना पसंद नहीं करेगी।

बीजेपी और यूपीपीएल ने औपचारिक तौर पर तो गठबंधन की घोषणा नहीं की है लेकिन दोनों ने ही स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने पर चुनाव परिणाम बाद गठबंधन के संकेत दिए थे। यूपीपीएल प्रमुख प्रमोद ब्रह्मा दो सीटों से जीते हैं।

उन्होंने शनिवार (दिसंबर 12, 202) देर रात बीटीसी चुनाव पर भाजपा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और मंगलदोई के सांसद दिलीप सैकिया के साथ विचार-विमर्श किया। परिषद के गठन के संबंध में उनके निर्णय की घोषणा जल्द होने की संभावना है। सरमा ने बताया था कि इस संबंध में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ चर्चा के बाद निर्णय की घोषणा होगी।

गौरतलब है कि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल द्वारा संचालित ‘अजमल फाउंडेशन’ के खिलाफ असम के दिसपुर पुलिस स्टेशन में शुक्रवार (4 दिसंबर, 2020) को मामला दर्ज किया गया था। गुवाहाटी के सीपी एमएस गुप्ता ने बताया था कि यह मामला सत्य रंजन बोराह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद दायर किया गया था, जिसने एनजीओ पर विदेशी फंड प्राप्त करने और संदिग्ध गतिविधियों में इसका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।

इसके अलावा असम सरकार की दो बच्चों की नीति पर बदरुद्दीन अजमल ने करारा हमला बोला था। अजमल का कहना था कि मुस्लिम बच्चे पैदा करते रहेंगे और वे किसी की नहीं सुनेंगे। अजमल ने कहा था, “मैं निजी तौर पर मानता हूँ और हमारा मजहब भी मानता है कि जो लोग दुनिया में आना चाहते हैं, उन्हें आना चाहिए और उन्हें कोई रोक नहीं सकता है।”

पिछले दिनों बदरुद्दीन अजमल पर निशाना साधते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि ‘अजमल की सेना’ के पुरुष अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर सोशल मीडिया पर लड़कियों से दोस्ती कर रहे हैं और फिर उनसे शादी कर रहे हैं। अगर अजमल की सेना हमारी महिलाओं को छूती है, तो उनके लिए एकमात्र सजा मौत की सजा होगी।

भ्रष्टाचार आरोपित, निलंबित पंजाब के DIG ने ‘किसानों’ के समर्थन में इस्तीफा दिया, रोहिणी सिंह का प्रलाप-विलाप चालू

पंजाब के एक DIG लखविंदर सिंह जाखड़ ने ‘किसानों’ के समर्थन में अच्छी-अच्छी बातें करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि वो पदमुक्त होकर किसानों की सेवा करना चाहते हैं। इससे मीडिया के एक वर्ग को मसाला मिल गया। प्रोपेगेंडा पत्रकार रोहिणी सिंह ने केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया और कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए। इस दौरान ये तथ्य छिपा लिया गया कि उक्त DIG घूसखोरी का आरोपित है, निलंबित किया जा चुका है।

मोदी सरकार की तरफ से किसान संगठनों से बातचीत का जिम्मा केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा पीयूष गोयल ने ही सँभाल रखा था। रोहिणी सिंह ने आरोप लगाया कि वो अपने ‘कॉर्पोरेट साथियों’ के लिए इस किसान आंदोलन का समर्थन करने वालों को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने ‘टाइम्स नाउ’ की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए ये बातें लिखीं, जिसमें बताया गया था कि आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पंजाब के DIG ने इस्तीफा दे दिया है।

सच्चाई ये है कि लखविंदर सिंह जाखड़ को मई 2020 में ही निलंबित किया जा चुका है। उन पर घूसखोरी के आरोप लगे थे। तब वो अमृतसर के DIG (जेल) के रूप में कार्यरत थे। पंजाब के जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भ्रष्टाचार के मामले में उनके खिलाफ विभागीय जाँच का आदेश भी दिया था। पट्टी सब-जेल के इंचार्ज DSP विजय कुमार ने उन पर ये आरोप लगाए थे। इस मामले में जाँच के बाद चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है।

आरोप है कि अप्रैल 7, 2020 को लखविंदर सिंह जाखड़ ने विजय कुमार से घूस की माँग की थी। जाखड़ और उनके कर्मचारी ने मासिक रूप से प्रति महीने 10,000 रुपए की माँग की थी। एक कैदी उनके ड्राइवर को 3000 रुपए का घूस दिया करता था। जाँच में गया कि इस मामले में अभी और भी कई तह हो सकते हैं। पटियाला जेल के सुपरिटेंडेंट रहते हुए उन्होंने बेअंत सिंह के हत्यारे बीएस राजोआना को मिले मृत्युदंड का पालन करने से इनकार कर दिया था।

अब उन्होंने पंजाब सरकार को ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन के नाम पर अपना इस्तीफा भेजा है। उन्होंने खुद को ‘किसान का बेटा’ करार देते हुए दावा किया कि इतनी ठण्ड में भी किसान कई किलोमीटर दूर जाकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वो उनकी ही सेवा के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। निलंबन के बाद उन्हें 15 दिन पहले ही फिर से बहाल किया गया था। एडीजीपी (जेल) पीके सिन्हा ने उनके इस्तीफे की पुष्टि की है।

‘दैनिक जागरण’ ने उच्च-स्तरीय सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि जब किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार का केस चल रहा हो तो ऐसी स्थिति में इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जा सकता। हालाँकि, पीके सिन्हा ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पट्टी जेल से रुपए लेने के आरोप DIG लखविंदर सिंह जाखड़ के खिलाफ जाँच कर रहे आईजी रूप कुमार ने उन्हें दोषी पाया था। फिर भी मीडिया का एक वर्ग इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहा।

रोहिणी सिंह को हाल ही में ‘किसान आंदोलन’ को लेकर ही पत्रकार रुबिका लियाकत से ‘फ़्लैट जवाब’ मिला था। किसान आंदोलन पर रुबिका के एक शो की 9 मिनट की वीडियो शेयर की। इस वीडियो में रुबिका समझा रही थीं कि आखिर सरकार किसानों की माँग मानने से पहले विचार क्यों कर रही है। रुबिका ने उनके बारे में कहा था कि इस महिला को मैं वैसे तो जानती नहीं लेकिन जब भी यूपी की एक क्षेत्रीय पार्टी का ज़िक्र करती हूँ तो बेचैन होकर अनायास ही मेरे टाइमलाइन पर कूद पड़ती हैं।

ये लव जिहाद नहीं तो क्या? शिवा बन जागरण में मिला अख्तर, मंदिर में शादी, राज खुला तो हिंदू युवती को किया कैद

जब-जब ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) पर सख्ती की बात आती है तो लिबरल गिरोह इसे बीजेपी और हिंदू संगठनों का दुष्प्रचार बताता है। वह इसे समस्या मानने से ही इनकार कर देता है। दिल्ली में सामने आए एक मामले ने लव जिहाद के घिनौने रूप और कितने बड़े पैमाने पर इसकी साजिश रची जा रही है उसे फिर से बेनकाब कर दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली के रोहिणी इलाके में रहने वाले अख्तर ने शिवा बनकर हिंदू युवती को प्रेमजाल में फँसाया। जागरण में उससे मुलाकात की और मंदिर में शादी रचाई। उसके बाद लड़की को डिमांड के नाम पर परेशान करने लगा। जब एक दिन अख्तर की झूठी पहचान उजागर हो गई तो उसने अपने भाइयों अफजल, अरशद और पिता मोहम्मद इदरीश के साथ मिलकर युवती को पीटा।

ख़बरों के मुताबिक, शादी के बाद हिंदू युवती को अहसास हुआ कि वह जिसे शिवा समझ रही है असल में वह हिंदू है ही नहीं। उसका असली नाम अख्तर है। वह अपना नाम और मजहब छिपाकर उसके साथ रह रहा है। युवती ने विरोध किया तो अख्तर के परिवार ने उसके खूब मारा-पीटा। इसके बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस से की।

एफआईआर के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए 5 साल पहले प्रेम नगर इलाके में रहने वाली युवती की मुलाकात शिवा बने अख्तर से हुई थी। युवक ने बताया कि वह एक संपन्न हिंदू परिवार से है और किराड़ी का रहने वाला है। उसके बाद एक जागरण में दोनों मिले और उनकी दोस्ती हो गई। धीरे-धीरे युवक ने अपनी प्यार भरी बातों में उसे फँसा लिया।

दोस्ती से प्यार में रिश्ते को बदल कर अख्तर ने कई बार युवती से शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद पीड़िता के कहने पर उसने हिंदू रीति-रिवाजों से 14 अगस्त को आर्य समाज वाहनवासी ट्रस्ट मंदिर में शादी कर ली। शादी के बाद भी वह युवती को अपने घर नहीं ले गया। पीड़िता के दबाव डालने पर वह प्लॉट, गाड़ी और पैसे की डिमांड करने लगा। कहा कि ये सब मिलने के बाद ही उसे अपने घर ले जाएगा।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, शिवा बने अख्तर के बदले व्यवहार से परेशान हो पीड़िता खुद ही उसके घर चली गई। इसके बाद यवुक का राज खुल गया। पता चला कि उसका असली नाम अख्तर है। यह जानने के बाद भी युवती वहाँ रुकी। अपनी शिकायत में पीड़िता ने यह भी बताया कि अख्तर के दोनों भाई अफजल और अरशद ने उसका यौन उत्पीड़न करने की भी कोशिश की। जिसका विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की।

पीड़िता ने बताया कि परिवार के इस रवैए से परेशान होकर उसने मायके जाने का फैसला कर लिया था। लेकिन अख्तर के परिजनों ने उसे घर मे कैद कर दिया। 8 दिसम्बर को जब उसने उनके चंगुल से निकलने की कोशिश की तब अख्तर के अब्बू मोहम्मद इदरीश और सभी लोगों ने उसे खूब मारा। इसके बाद उसने पड़ोसियों की मदद से पुलिस को इसकी सूचना दी।

रोहिणी पुलिस ने बताया है कि उसने आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 419, 467, 468, 471, 474, 376, 506, 34 के तहत केस दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपित अख्तर फिलहाल फरार है। पुलिस उपायुक्त पीके मिश्रा का कहना है कि इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपित अफजल, अरशद और मोहम्मद इदरीश को गिरफ्तार कर लिया गया है। अख्तर अभी फरार है। मामले की जाँच चल रही है।

‘कफील खान का अपराध करने का इतिहास पुराना’: योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी रिहाई के आदेश को चुनौती

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने डॉ. कफील खान की रिहाई के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस संबंध में शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। इस साल सितंबर में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कफील खान की हिरासत रद्द कर दी थी।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार प्रदेश सरकार का कहना है कि कफील खान का अपराध करने का इतिहास पुराना है। इस बात को मद्देनजर रखते हुए उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। उसे निलंबित किया गया। एफआईआर दर्ज की गई और एनएसए भी लगाया गया था।

डॉ. कफ़ील खान को सीएए और एनआरसी के विरोध में भड़काऊ भाषण देने के मामले में योगी सरकार ने एनएसए के तहत हिरासत में लिया था। इस प्रकरण में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें 1 सितंबर 2020 को राहत दी थी। हाई कोर्ट के आदेशानुसार एनएसए के तहत डॉ. कफ़ील की गिरफ्तारी और गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाना गैरकानूनी था। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद उसे मथुरा जेल से रिहा कर दिया गया था। 

योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है, “डॉ. कफ़ील को यह जानकारी दी गई थी कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के आस-पास धारा 144 लागू है। हाई कोर्ट ने भी परिसर के 100 मीटर के दायरे में विरोध-प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद कफील खान वहाँ गए और एएमयू के छात्रों के बीच भड़काऊ भाषण दिया। उस भाषण के परिणामस्वरूप 13 दिसंबर 2019 को एएमयू के लगभग 10 हजार छात्रों ने अलीगढ़ की तरफ मार्च करना शुरू किया था। पुलिस ने उन छात्रों को किसी तरह समझाकर शांत किया, अन्यथा सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका थी।” योगी सरकार के मुताबिक़ हाई कोर्ट का यह आदेश सही नहीं था। 

गौरतलब है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में सीएए को लेकर 12 दिसंबर 2019 को विरोध-प्रदर्शन हुआ था, जिसकी अगुवाई कफ़ील खान ने की थी। इस संबंध में अलीगढ़ सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज की गई थी। 29 जनवरी 2020 को कफील खान की गिरफ्तारी हुई थी और उन्हें मथुरा जेल भेज दिया गया था। इसके बाद 10 फरवरी को सीजेएम अलीगढ़ ने डॉ. कफ़ील की जमानत याचिका स्वीकार कर ली थी और 13 फरवरी को अलीगढ़ के जिलाधिकारी ने एनएसए लगाया था। कफील की माँ ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद उसे राहत मिली थी।      

किसान आंदोलन की खेती पर गिरे ओले: BKU (भानु) में फूट, कृषि मंत्री से 29 किसान नेताओं ने कहा- कानून वापस न लें

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के बीच प्रदर्शनकारी संगठन अब आपस में ही सिर-फुटव्वल पर उतर आए हैं। ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU) के भानु गुट के नेताओं में तकरार की खबर है। प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप ने किसान नेता व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह की बात मानने से साफ़ इनकार कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए बिना ये आंदोलन किसी भी हाल में ख़त्म नहीं किया जाएगा।

इसके बाद वो चिल्ला सीमा पर धरने पर बैठ गए। असल में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए BKU (भानु) गुट से बातचीत की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने नोएडा के सेक्टर-14ए का वो रास्ता शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को खोल दिया था, जो पिछले 12 दिनों से बंद कर रखा गया था। हालाँकि, प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप ने बात नहीं मानी और धरने पर बैठ गए।

फ़िलहाल ये ‘किसान आंदोलन’ अपने 18वें दिन में प्रवेश कर गया है और राजस्थान से भी किसानों को उकसा कर दिल्ली लाए जाने की तैयारी चल रही है। उधर पंजाब में DIG (जेल) लखमिंदर सिंह जाखड़ ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रदेश के किसानों के परेशान होने की बात करते हुए कहा कि वो इन आंदोलन का हिस्सा बन कर दिल्ली जाकर इस लड़ाई का हिस्सा बनना चाहते हैं, क्योंकि वो एक ‘किसान के बेटे’ हैं।

वहीं ‘किसान आंदोलन’ में देश विरोधी ताकतों के घुसने के आरोपों पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों को उन्हें पकड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रतिबंधित संगठनों के लोग उनके बीच घूम रहे हैं तो उन्हें जेल में डालना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उन लोगों को ऐसा कोई नहीं मिला, अगर दिखेगा तो निकाल बाहर करेंगे।

इधर 29 किसानों के एक अन्य प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि अगर केंद्र इन तीनों कृषि कानूनों पर अपने कदम वापस खींचती है तो वो सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर हो जाएँगे। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन (मान) के गुणी प्रकाश कर रहे थे, जो हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं और राज्य में इस संगठन का नेतृत्व करते हैं। इन्होंने मिल कर केंद्रीय कृषि मंत्री को ‘समर्थन पत्र’ भी सौंपा। साथ ही कहा कि सितम्बर में पास किए गए इन कानूनों को लेकर सरकार आगे बढ़े।

शरद पवार के जन्मदिन पर केक के लिए पटका-पटकी पर उतारू NCP के जुझारू कार्यकर्ता, देखें पूरा वीडियो

महाराष्ट्र के बीड़ में शनिवार (12 दिसंबर 2020) को राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) मुखिया शरद पवार का जन्मदिन मनाया जा रहा था। जन्मदिन उत्सव और उल्लास का अवसर होता है लेकिन एनसीपी के जुझारू कार्यकर्ताओं ने उपद्रव और उत्पात के अवसर में तब्दील कर दिया। जिस मंच पर केक काट कर जन्मदिन मनाया जाने वाला था वहाँ पर दंगे जैसे हालात पैदा हो गए। 

दरअसल, एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने पार्टी सुप्रीमो शरद पवार के 80वें जन्मदिन के मौके पर समारोह आयोजित किया था। इस समारोह में केक भी काटा जाना था और इस मौके पर सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे। केक कटने के ठीक बाद तमाम पार्टी कार्यकर्ता केक लेने के लिए उस मंच पर चढ़ गए। घटनास्थल पर मौजूद एक व्यक्ति ने इस पूरे घटनाक्रम का छोटा सा वीडियो भी बनाया है। 

अपने ही साथियों के साथ धक्का-मुक्की

वीडियो में पटका-पटकी का पूरा नज़ारा देखा जा सकता है। कैसे केक के टुकड़े के लिए एनसीपी कार्यकर्ता एक दूसरे को धक्का देते हैं, मुक्के चलाते हैं और एक दूसरे पर गिरने भी लगते हैं। वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि कुछ कार्यकर्ता तो केक के लिए मंच पर ही अपने साथियों को धक्का देकर गिरा देते हैं। कुछ लोग अपने एक या दोनों हाथों में केक लेकर भागते हुए भी नज़र आते हैं।

कल (12 दिसंबर 2020) पूर्व केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शरद पवार 80 वर्ष के हो गए। वर्तमान में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी, महाराष्ट्र की सत्ताधारी ‘महाविकास अघाड़ी सेना’ गठबंधन सरकार का हिस्सा है। इसमें शिवसेना और कॉन्ग्रेस भी शामिल हैं। हाल ही में यह अफ़वाह सामने आई थी कि शरद पवार कॉन्ग्रेस मुखिया सोनिया गाँधी की जगह ले सकते हैं। हालाँकि बाद में एनसीपी ने इस तरह के सभी दावों को सिरे खारिज कर दिया था।        

CM केजरीवाल पर MCD का ₹13000 Cr रोकने का आरोप, प्रदर्शन के लिए अमित शाह के घर जा रहे AAP नेता हिरासत में

दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी (AAP) नेता राघव चड्ढा को हिरासत में ले लिया है। AAP कार्यकर्ताओं ने रविवार (दिसंबर 13, 2020) को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन उपद्रव की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। MCD में घोटाले का आरोप लगाते हुए AAP ने भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन की योजना बनाई थी।

‘दिल्ली जल बोर्ड’ के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने ट्विटर पर दावा किया, “BJP शासित MCD ने दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा ₹2500 करोड़ का घोटाला किया। हमने गृह मंत्री अमित शाह जी से मिलने का समय माँगा तो उन्होंने मुझे मेरे आवास से ही गिरफ्तार करवा लिया है। अमित शाह जी, आप अपनी पुलिस के दम पर अपनी पार्टी का भ्रष्टाचार क्यों दबाना चाहते हैं?” हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया है।

राघव चड्ढा समेत 9 अन्य को ‘प्रिवेंटिव कस्टडी’ में लिया गया है। आम आदमी पार्टी ने घोटाले का आरोप लगाते हुए सीबीआई जाँच की माँग की है। साथ ही AAP नेता आतिशी मर्लेना को उप-राज्यपाल अनिज बैजल के आवास के बाहर धरना प्रदर्शन के लिए भेजा गया। पार्टी का आरोप है कि इन रुपयों से उन डॉक्टरों, नर्सों और शिक्षकों को सैलरी दी जा सकती है, जिन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी इस मामले में जाँच का आदेश दिया है।

वहीं दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल जनता की गाढ़ी कमाई को झूठे प्रचार में खर्च कर रहे हैं लेकिन जनहित की समस्याओं के समाधान के लिए एक भी पैसा नहीं खर्च कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित में कार्य करने वाले तीनों निगमों के महापौर जब भी निगमों के बकाए फंड को जारी करने को लेकर पूरी औपचारिकता के साथ मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलने का समय माँगते हैं तो वह पीठ दिखा कर निकल जाते हैं।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, पहले भी जब निगमों के महापौर मुख्यमंत्री से मिलने के लिए उनके आवास गए थे, तब मुख्यमंत्री ने अपने मंत्री को भेजकर 10 दिनों में बकाए फंड को जारी करने का आश्वासन दिया था लेकिन महीनों हो गए और अभी तक केजरीवाल सरकार ने निगम का बकाया फंड जारी नहीं किया।” इधर सातवें दिन भी तीनों महापौरों सहित निगम पार्षदों का मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना जारी है।

रविवार की सुबह भी प्रतिदिन की तरह निगम के नेताओं ने स्वच्छता अभियान में भाग लिया। दिल्ली भाजपा ने कहा है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल कितना भी भाग लें, उन्हें निगम के बकाया 13000 करोड़ रुपए तो देने ही पड़ेंगे। पार्टी का कहना है कि ठंड के बावजूद भी निगम के नेता पिछले 7 दिनों से मुख्यमंत्री के निवास पर धरने पर बैठे हैं लेकिन ‘सत्ता के नशे में चूर’ मुख्यमंत्री केजरीवाल के पास निगम के नेताओं से मिलने का समय नहीं है।

अक्टूबर 2020 में ही खबर आई थी कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले डॉक्टर्स पिछले चार महीनों से वेतन का भुगतान नहीं करने पर आंदोलन कर रहे हैं। दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारियों ने अक्टूबर 16, 2020 को दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन भी किया था। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश का कहना था कि दिल्ली में 6 साल से अरविंद केजरीवाल सरकार है और पिछले 6 सालों से ही ये संकट है।

ममता सरकार ने बोले ‘मटुआ समुदाय’ से कई झूठ, कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- ‘लागू होकर रहेगा CAA’

पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष चुनाव होने हैं जिसकी वजह से प्रदेश के भीतर सियासी खींचतान अपने चरम पर है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के मुद्दे पर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने ‘मटुआ समुदाय’ के समक्ष यह सुनिश्चित किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार चाहे जितना प्रतिरोध करे लेकिन केंद्र सरकार इसे लागू करने वाली है। दरअसल, कुछ दिनों पहले ममता बनर्जी ने मटुआ समुदाय के लोगों से झूठ बोलते हुए कहा था कि उन्हें सीएए के तहत नागरिकता की ज़रूरत नहीं है। ममता बनर्जी के मुताबिक़, मटुआ समुदाय के लोग पहले ही यहाँ के नागरिक हैं इसलिए उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं है।

नार्थ 24 परगना जिले के ठाकुरनगर (मटुआ समुदाय बाहुल्य क्षेत्र) में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने यह बयान दिया। सीएए को लेकर पूछे गए प्रश्न पर भाजपा नेता कहा, “अगर पश्चिम बंगाल की प्रदेश सरकार इस क़ानून को लागू करने का विरोध करती है तब भी हम इसे लागू करेंगे। केंद्र सरकार के पास इसे लागू करने का पूरा अधिकार है, चाहे राज्य सरकार इसका समर्थन करे या नहीं करे। हम इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं कि पश्चिम बंगाल में यह क़ानून लागू होगा।” मटुआ समुदाय की पिछले काफी समय से माँग रही है कि उन्हें भारत की स्थायी नागरिकता दी जाए।

समुदाय की नागरिकता को लेकर भाजपा महासचिव ने कहा, “पाकिस्तान और बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आने के बाद मटुआ समुदाय के लोग भारत में शरणार्थी की तरह रह रहे हैं। हम उन्हें किसी भी सूरत में नागरिकता देकर रहेंगे और ऐसा करने से हमें कोई नहीं रोक सकता है।” बोनगाँव से भाजपा सांसद और मटुआ समुदाय के नेता शांतनु ठाकुर ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। उनके अनुसार, “हम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के ठाकुरनगर दौरे के समय सीएए क्रियान्वन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

टीएमसी के झूठ और राजनीतिक विलाप

मटुआ समुदाय की नागरिकता के मुद्दे पर टीएमसी नेता सौगत रॉय ने भ्रम फैलाया था। उन्होंने दावा किया था, “मटुआ समुदाय के लोगों को इस तरह का आश्वासन दिया जाना यह दिखाता है कि वह यहाँ के नागरिक नहीं हैं।” टीएमसी की पूर्व सांसद ममता ठाकुर ने इस मुद्दे कहा था कि वह इस तरह की नागरिकता स्वीकार नहीं करेंगे और इसके विरोध में धरने पर बैठेंगे।” इस हफ़्ते की शुरुआत में नार्थ 24 परगना स्थित मटुआ बाहुल्य क्षेत्र ‘बोनगाँव’ के गोपालनगर में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मटुआ समुदाय के लोगों को लालच देने का प्रयास किया था। उनका कहना था कि भाजपा मटुआ समुदाय के लोगों को सीएए के तहत नागरिकता प्रदान करके उन्हें बाँट रही है, वह पहले से ही भारत के नागरिक हैं। 

कौन हैं मटुआ

मटुआ समुदाय के लोग ‘पिछड़ी जाति’ के हिन्दू शरणार्थी हैं जिन्होंने बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना झेलने के बाद भारत में शरण ली है। इस समुदाय की स्थापना हरिचंद ठाकुर (1812-1878) और उनके पौत्र गुरुचंद ठाकुर (1846-1937) ने की थी जो मूल रूप से फरीदपुर, बांग्लादेश के रहने वाले थे। हालाँकि, 1946 में उनका परिवार बंगाल आ गया था और 1971 में इस समुदाय के अधिकतर लोग ‘गैरक़ानूनी’ रूप से भारत आ गए थे। 

इस समुदाय की आबादी पश्चिम बंगाल के 40 संसदीय क्षेत्रों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। पहले टीएमसी को इस समुदाय का समर्थन प्राप्त था लेकिन 2019 लोकसभा चुनावों के बाद इनका समर्थन भाजपा की तरफ झुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मानें तो मटुआ समुदाय के लोग सीएए लागू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय सुनिश्चित कर चुके हैं कि सीएए लागू करने लिए प्रावधान तैयार किए जा रहे हैं। 

मुंबई पुलिस ने ‘बिना किसी कागजात के’ रिपब्लिक के CEO को किया गिरफ्तार, अर्णब ने की इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील

मुंबई पुलिस ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के CEO विकास खानचंदानी के घर पहुँच कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि TRP स्कैम मामले की चल रही जाँच के क्रम में ये कार्रवाई की गई है। वहीं ‘रिपब्लिक’ का कहना है कि ये इन सबके बावजूद किया गया है कि विकास खानचंदानी ने पुलिस की 100 घंटों की पूछताछ का सामना किया और जाँच प्रक्रिया के साथ पूरी तरह सहयोग किया, सवालों के जवाब दिए।

मुंबई पुलिस ने ये कार्रवाई रविवार (दिसंबर 13, 2020) की सुबह की। ‘रिपब्लिक’ का ये भी आरोप है कि मुंबई पुलिस बिना किसी कागजात के वहाँ पर पहुँची थी और इस कार्रवाई को अंजाम दिया। चैनल ने कहा है कि ये कार्रवाई मुंबई पुलिस की प्रतिशोध और दुर्भावना से युक्त इरादों को दर्शाती है, जो उसने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के खिलाफ पाल रखा है। अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के 39 दिन बाद ये कार्रवाई की गई है।

मुंबई पुलिस ने CEO विकास खानचंदानी के घर पर छापेमारी कर के उन्हें गिरफ्तार किया। सोमवार को ही इस मामले में उनकी अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई होनी थी, ऐसे में इससे पहले होने वाली इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। अर्णब गोस्वामी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुंबई पुलिस ने जानबूझकर ऐसा किया है। ये कोर्ट की अवमानना है और लोग इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ।”

नेटवर्क के संस्थापक-सम्पादक अर्णब गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किए है कि वो इस मामले में संज्ञान लें। अर्णब ने कहा कि ये गैरकानूनी गिरफ्तारी है और ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए देश की सभी अदालतों को हस्तक्षेप करना चाहिए। इससे पहले नेटवर्क ने डिस्ट्रीब्यूशन AVP घनश्याम सिंह की कस्टडी में हुई प्रताड़ना के आरोपों के साथ ‘रिपब्लिक’ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।

अभी 2 दिन पहले ही पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले रिपब्लिक टीवी ने बड़ी घोषणा करते हुए बताया था कि अब वह अपना एक चैनल बांग्ला भाषा में भी लेकर आ रहे हैं। हिंदी और अंग्रेजी भाषा में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त करने के बाद रिपब्लिक टीवी ने बांग्ला चैनल को लेकर घोषणा शुक्रवार (दिसंबर 11, 2020) को की। नेटवर्क ने ये भी बताया कि वो नए चैनल के लिए स्टाफ हायर कर रहे हैं।