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टॉफी का लालच देकर अकरम और आसिफ ने 7 साल की बच्ची के साथ किया गैंगरेप, खून से लथपथ छोड़ भागे: दोनों गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर के कोतवाली क्षेत्र स्थित एक गाँव में एक 7 वर्ष की बच्ची के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया। बच्ची के साथ आसिफ और अकरम नामक गाँव के ही दो युवकों ने गैंगरेप किया। जब पीड़ित बच्ची दर्द के कारण चीखने-चिल्लाने लगी, तो दोनों ही आरोपित उसे वहाँ उसी अवस्था में छोड़ कर भाग गए। मुजफ्फरनगर पुलिस ने गढ़ी सखावतपुर स्टैंड से दोनों ही आरोपितों को धर-दबोचा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पीड़िता को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ये घटना बुढ़ाना क्षेत्र के जोला गाँव की है। बच्ची शुक्रवार (दिसंबर 11, 2020) की शाम को अपने साथियों के साथ खेल रही थी। तभी इन दोनों आरोपितों ने किसी बहाने से उसे अपने पास बुलाया और फिर अपने परिवार की ही एक मकान की छत पर लेकर चले गए। वहाँ इन दोनों ने मासूम बच्ची के साथ बलात्कार किया। शोर मचाने के बाद बच्ची वहीं पर बेहोश हो गई, जिसके बाद वे भाग निकले।

बच्ची के चीखने-चिल्लाने की आवाज़ सुनने के बाद अन्य ग्रामीण और उसके परिजन भी उस मकान की छत पर पहुँचे। उसकी गंभीर हालत देख कर त्वरित रूप से पुलिस को सूचित किया गया। इंस्पेक्टर एमएस गिल तुरंत अपनी टीम के साथ घटनास्थाल पर पहुँचे और बच्ची को CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) में इलाज के लिए भर्ती कराया। जब हालत गंभीर हुई तो उसे जिला अस्पताल लेकर जाया गया।

उसी रात पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर FIR दर्ज कर के पुलिस ने दोनों आरोपितों आसिफ और अकरम की गिरफ़्तारी के लिए दबिश देनी शुरू कर दी। लेकिन, इन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला। फिर उनकी गिरफ़्तारी के लिए यूपी पुलिस ने टीम गठित की। अंततः मेरठ-करनाल हाईवे पर स्थित गढ़ी सखावतपुर स्टैंड से उन्हें धर-दबोचा गया। मुजफ्फरनगर पुलिस ने बताया है कि दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।

बताया गया है कि इन दोनों ने टॉफी का लालच देकर बच्ची के साथ गैंगरेप किया था। जब ग्रामीणों और परिजनों ने बच्ची को देखा तो वो खून से लथपथ थी और एकदम बदहवास अवस्था में थी। बच्ची ने परिजनों को अपने साथ हुई दरिंदगी के बारे में किसी तरह बताया भी। बुढ़ाना के सीओ गिरिजा शंकर त्रिपाठी ने बताया है कि आरोपितों के खिलाफ पॉस्को एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और उन्हें जल्द ही कोर्ट से सज़ा दिलाई जाएगी।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में ‘ग्रूमिंग जिहाद’ (लव जिहाद) का मामला भी सामने आया था। यहाँ मंसूरपुर थाने में उत्तराखंड राज्य के दो युवकों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून-2020 के तहत FIR दर्ज की गई थी। आरोप है कि दोनों युवकों ने साजिश के तहत विवाहित महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया। नए कानून के तहत मुजफ्फरनगर जिले में यह पहली FIR थी।

जाकिर नाइक व रोहिंग्या नेता की साजिश: भारत में आतंकी हमले के लिए मलेशिया से ₹1.5 करोड़ की फंडिंग

भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW)’ ने मलेशिया से भारत में हमले के लिए होने वाली फंडिंग की एक कड़ी का पता लगाया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है। पता चला है कि भारत में आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए मलेशिया से 2 लाख डॉलर (1.47 करोड़ रुपए) की फंडिंग की गई थी। भारत में आतंकी हमले के लिए हुए इस लेनदेन के तार जाकिर नाइक सहित कई आतंकी संगठनों से भी जुड़े हुए हैं।

‘आज तक’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, ये आर्थिक लेनदेन मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के रोहिंग्या नेता मोहम्मद नसीर और युवाओं को अपने वीडियोज के जरिए भड़का कर आतंक की राह पर चलने के लिए उकसाने वाले भगोड़े जाकिर नाइक से जुड़े हुए हैं। इस आतंकी समूह ने मलेशिया में एक महिला को भी कड़ा प्रशिक्षण दिया है। बताया जा रहा है कि यही महिला भारत में होने वाले आतंकी हमले की साजिश का नेतृत्व करेगी।

इस पूरे मामले की छानबीन के दौरान तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से एक हवाला कारोबारी को भी दबोचा गया है। ‘इंडिया टुडे’ का दावा है कि उसके पास इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट है, जिससे पता चलता है कि उक्त हवाला कारोबारी के पास भी इस रकम का एक हिस्सा पहुँचा था। आतंकियों के बांग्लादेश या नेपाल की सीमा से भारत में प्रवेश करने की आशंका है। जहाँ नेपाल में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं बांग्लादेश में भी इस्लामी कट्टरता हावी हो रही है।

बांग्लादेश और नेपाल की सीमा जिन भारतीय राज्यों से सटी हुई हैं, उन सभी की पुलिस व ख़ुफ़िया विभाग को सतर्क कर दिया गया है। इसके अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और पश्चिम बंगाल के सुरक्षा अधिकारियों को इस बारे में खास तौर पर सूचित किया गया है। दिल्ली, अयोध्या, बोधगया, पश्चिम बंगाल और श्रीनगर के कुछ क्षेत्रों को आतंकी अपने निशाने पर ले सकते हैं। मलेशिया और तुर्की भारत विरोधी गतिविधियों का हब बनते जा रहे हैं।

TOI की खबर के अनुसार, जिस महिला को इस आतंकी हमले का नेतृत्व करना है, उसे म्यांमार में ट्रेनिंग दी गई है। भारत में PFI के भी इस साजिश में शामिल होने की आशंका है और संगठन के सदस्य इन आतंकियों की मदद कर सकते हैं, इसीलिए उन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। मलेशिया में रोहिंग्या शर्णार्थियीं के नाम पर फंड्स इकठ्ठा करने वाले एक रोहिंग्या संगठन के इसमें शामिल होने की आशंका है, जिसे लेकर पता लगाया जा रहा है।

अक्टूबर 2020 में जाकिर नाइक ने कहा था कि अगर खाड़ी के देशों में रहने वाले गैर मुस्लिम पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करते हैं तो उन्हें जेल में बंद कर दिया जाए और ऐसे लोगों का समुचित दस्तावेज़ (डाटा बेस) तैयार किया जाए, जो सोशल मीडिया पर इस तरह की टिप्पणी करते हैं। उसका कहना था कि जैसे ही ये लोग खाड़ी के देशों में वापस आएँ वैसे ही उनकी गिरफ्तारी हो और उन्हें अदालत के सामने पेश किया जाए।

‘हिंसक वामपंथी कर रहे आंदोलन का नेतृत्व’: किसानों ने तीनों कृषि कानूनों का किया समर्थन, कहा- वापस लिया तो करेंगे प्रदर्शन

जहाँ एक तरह मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के किसानों ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है और लगातार विरोध प्रदर्शन चालू है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे भी किसान हैं जिन्होंने इस मामले में केंद्र सरकार को पूरी तरह अपना समर्थन दिया हुआ है। शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को 29 किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर कृषि कानूनों को अपना सम्पूर्ण समर्थन दिया।

इन किसानों ने ये भी कहा है कि अगर केंद्र इन तीनों कृषि कानूनों पर अपने कदम वापस खींचती है तो वो सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूत हो जाएँगे। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन (मान) के गुणी प्रकाश कर रहे थे, जो हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं और राज्य में इस संगठन का नेतृत्व करते हैं। इन्होंने मिल कर केंद्रीय कृषि मंत्री को ‘समर्थन पत्र’ भी सौंपा। साथ ही कहा कि सितम्बर में पास किए गए इन कानूनों को लेकर सरकार आगे बढ़े

इन किसानों ने बताया कि उन्होंने हर जिले को मेमोरेंडम दे रखा है और अगर सरकार इन कृषि कानूनों को वापस लेती है तो वो विरोध प्रदर्शन करेंगे। साथ ही उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि पिछली यूपीए सरकारों ने आखिर स्वामीनाथन रिपोर्ट की अनुशंसा के आधार पर फैसले क्यों नहीं लिए? उन्होंने कहा कि मौजूदा विरोध प्रदर्शन हिंसक है और वामपंथी इसका नेतृत्व कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि वो इन कानूनों के समर्थन में हैं।

किसानों ने कहा कि इन कानूनों से बिचौलियों को ही नुकसान हो रहा है, लेकिन फिर भी भ्रम फैला कर किसानों को बरगलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये गलत तरीके से आंदोलन हो रहा है और ये झूठ है कि कॉर्पोरेट घराने उनकी जमीनें ले लेंगे। अन्य किसानों ने कहा, “हमलोग उन प्रदर्शनकारियों के साथ नहीं हैं।” केंद्रीय मंत्री तोमर के साथ उन्होंने अपने अनुभव साझा कर के बताया कि उन्हें कैसे नए कानूनों से लाभ हो रहा है।

केंद्रीय मंत्री से मिल कर किसानों ने सौंपा ‘समर्थन पत्र’

किसानों ने अपने समर्थन पत्र में लिखा है, “हम केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित सुधारों को बरक़रार रखने के पक्ष में हैं। केंद्र द्वारा प्रस्तावित संशोधनों के साथ इन्हें बरकरार रखा जाए। हम MSP और मंडी व्यवस्था को भी जारी रखने के पक्षधर हैं। हम आपसे आग्रह करते हैं कि समय प्रदान कर हमारी बात भी सुनी जाए।” इस पत्र पर किसान प्रतिनिधियों ने अपने हस्ताक्षर भी किए। सभी ने खुद को हरियाणा के FPO से जुड़ा और प्रगतिशील किसान बताया।

उन्होंने कहा कि भले ही सबको विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन मौजूदा आंदोलन अब किसानों का नहीं रहा। उन्होंने कहा कि ये अब एक राजनीतिक रंग में रंग गया। उन्होंने आंदोलनकारियों को समझाया कि ये तीनों ही कानून उन्हें सही मायने में स्वतंत्रता देने का काम करेंगे। बता दें कि किसान संगठनों से 6 राउंड की बातचीत होने के बावजूद अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। खुद पीएम मोदी बार-बार चीजों को स्पष्ट कर चुके हैं।

हाल ही में जहाँ एक तरफ 20 किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर के सरकार को अपना समर्थन दिया, वहीं दूसरी तरफ पद्मश्री सम्मान विजेता किसान भारत भूषण त्यागी ने नए ‘अवॉर्ड वापसी गैंग’ को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूछा कि क्या इन लोगों को ये अवॉर्ड खेती में पुरस्कार स्वरूप मिला? उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वो जब सरकार से बातचीत करने जाएँ, तो विरोध वाली मानसिकता न रखें।

पश्चिम बंगाल में संपर्क अभियान पर निकले बीजेपी कार्यकर्ता सैकत भावल की हत्या, 6 अन्य बुरी तरह घायल: TMC के गुंडों पर आरोप

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला जारी है, इसी कड़ी में एक भाजपा कार्यकर्ता की पीट पीट कर हत्या कर दी गई और 6 अन्य बुरी तरह घायल हुए हैं। यह घटना शनिवार (12 दिसंबर 2020) को हुई जब कार्यकर्ताओं का एक समूह उत्तर 24 परगना जिले में गृह संपर्क अभियान (डोर टू डोर) के लिए निकला था। सैकत भावल (Saikat Bhawal) उस समूह में ही शामिल थे, घटना के बाद मौके पर मौजूद लोग उन्हें उपचार के लिए कल्याणी स्थित जेएनएम अस्पताल लेकर गए जहाँ डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

पुलिस का इस घटना पर कहना है कि उन्होंने मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना हालिसहर नगरपालिका के वार्ड संख्या 6 की है जिसमें 6 अन्य कार्यकर्ताओं के साथ भी हिंसा हुई है। उन्हें भी उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस मुद्दे को लेकर बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर आरोप लगाया है। जबकि टीएमसी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सांसद अर्जुन सिंह का कहना है भाजपा इस घटना के संबंध में पूरे शहर के भीतर विरोध प्रदर्शन करेगी। 

भाजपा संगठन के अनुसार उनके कार्यकर्ताओं पर ऐसे समय में हमला हुआ जब वह ‘गृह संपर्क अभियान’ में व्यस्त थे। दरअसल, भाजपा ने यह अभियान अधिक से अधिक संख्या में लोगों से संपर्क और संवाद करने के लिए शुरू किया था। यह पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को मद्देनज़र रखते हुए शुरू किया गया ‘आर-नोई-अन्याय’ (और अन्याय नहीं) का हिस्सा है। हमले और हत्या की घटना के संबंध में नैहाटी से टीएमसी विधायक पार्थ भौमिक ने कहा है कि हत्या दो स्थानीय गुटों की आपसी रंजिश का नतीजा है। 

भाजपा बिना किसी आधार के इस घटना का राजनीतिकरण कर रही है। अंत में टीएमसी विधायक ने भाजपा पर शांति व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि भाजपा को क़ानून व्यवस्था की स्थिति खराब नहीं करने देंगे। बैरकपुर के जॉइंट पुलिस कमीश्नर अजय ठाकुर ने भी इस घटना को लेकर जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि अभी तक इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, उनसे पूछताछ की जा रही है। पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की घटना नई नहीं है, हाल फ़िलहाल में इस तरह की तमाम घटनाएँ सामने आई हैं।      

खालिस्तानी भीड़ ने तोड़ी महात्मा गाँधी की प्रतिमा: कृषि कानूनों के खिलाफ कर रहे थे वाशिंगटन DC में प्रदर्शन

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को खालिस्तानियों ने हाईजैक कर लिया है, लगातार ऐसी खबरें आ रही थीं। अब भारत के बाहर भी तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों में ऐसी-ऐसी हरकतें हो रही हैं, जिससे ये संदेह और मजबूत होता जा रहा है। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को महात्मा गाँधी की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ और तोड़फोड़ की गई है, साथ ही खालिस्तानी झंडा लहराया गया।

ये भी प्रदर्शनकारी भारत में मोदी सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने की योजना के क्रम में लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन देने के लिए सड़क पर उतरे थे। कई खालिस्तानी झंडों के साथ पहुँची भीड़ ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने ही राष्ट्रपति महात्मा गाँधी की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ कर के अपमान किया और फिर तोड़फोड़ भी मचाई

महात्मा गाँधी की ये प्रतिमा वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने स्थित है। इससे पहले जून 3, 2020 को भी वहाँ महात्मा गाँधी की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया गया था, जब अश्वेत अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉएड की हत्या के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था। वहीं खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने बापू की प्रतिमा के चेहरे के साथ भी छेड़छाड़ किया। इससे पहले लंदन में भी इस तरह की हरकत की गई थी।

वहाँ भी खालिस्तानी झंडों के साथ पहुँचे प्रदर्शनकारियों ने भारत के कृषि कानूनों के खिलाफ नारेबाजी की थी। अश्वेत नागरिकों के प्रदर्शन के दौरान प्रतिमा के चेहरे को विकृत कर के स्केच बना दिए गए थे और स्प्रे पेंटिंग से प्रतिमा को बिगाड़ दिया गया था। इस प्रतिमा का डिजाइन गौतम पाल ने बनाया था। बाद में इसकी साफ़-सफाई कर के इसे ठीक किया गया था। सितम्बर 16, 2000 को इस प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था।

हाल ही में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने रेफरेंडम 2020 (सिख फॉर जस्टिस) मामले में 16 विदेशी खालिस्तानियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। एनआईए ने आज कहा कि इन सभी पर ‘रेफरंडम 2020’ के बैनर तले ‘खालिस्तान’ के लिए सोची समझी साजिश के तहत अभियान चलाने का आरोप है। सभी आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा गैर कानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सऊदी अरब में CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पड़ा भारी: बड़ी संख्या में NRIs को किया भारत को प्रत्यर्पित

सऊदी अरब ने बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों (NRIs) को वापस भारत को प्रत्यर्पित किया है। ये सभी खाड़ी मुल्क में रहते हुए CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे थे। इन्होंने दिल्ली के शाहीन बाग़ विरोध प्रदर्शन से प्रेरित होकर वहाँ भी सड़क पर उतर कर मोदी सरकार के इस कानून के खिलाफ जम कर प्रदर्शन किया था। अब सऊदी अरब ने इन सभी को भारत को सौंपने का निर्णय लिया है।

सऊदी अरब की दूसरी वाणिज्यिक राजधानी मानी जाने वाली जेद्दाह में प्लाकार्ड्स लेकर मोदी सरकार और CAA के खिलाफ इन लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। इन सभी ने दिल्ली में इस कानून को लेकर उपद्रव कर रहे लोगों से सहमति जताते हुए उन्हें अपना समर्थन दिया था। इस विरोध प्रदर्शन के बाद से ही इन NRIs के सामने मुश्किलें खड़ी होती गईं। इनमें से कइयों को गिरफ्तार कर के उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई।

उन पर मुल्क के नियम-कायदों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए। साथ ही उन पर अवैध तरीके से भीड़ जुटाने का आरोप लगाया गया। इनमें से कइयों को वापस भारत प्रत्यर्पित किया जा चुका है। खाड़ी मुल्कों में विरोध प्रदर्शनों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है। घेराव या भीड़ जुटा कर नारेबाजी को भी बर्दाश्त नहीं किया जाता। कुछ युवा प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वो इन नियम-कायदों से अनजान थे।

कइयों पर तो सिर्फ इसीलिए कार्रवाई की गई, क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए प्रोपेगंडा फैलाने की कोशिश की थी। अक्टूबर 2019 में सऊदी अरब और भारत ने एक नए रणनीतिक पार्टनरशिप के लिए कदम बढ़ाया था। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान तब नई दिल्ली आए थे और यहीं सुरक्षा के मसलों पर साझेदारी की नई रणनीति बनी। उधर सऊदी अरब ने पाकिस्तान की नाक में दम कर रखा है।

हाल ही में  सऊदी अरब सरकार ने रियाद में मौजूद दूतावास और जेद्दाह स्थित वाणिज्य दूतावास में 27 अक्टूबर को ‘कश्मीर बैक डे’ आयोजन की बात खारिज कर दी। इससे पाकिस्तान को गहरा झटका लगा। सऊदी अरब (जिसे पाकिस्तान अपना नज़दीकी सहयोगी मुल्क मानता है) ने FATF पर पाकिस्तान के विरोध में मत दिया, जिसके चलते पाकिस्तान ग्रे सूची में बना हुआ है। इसके बाद पाकिस्तानी सऊदी अरब को ‘गद्दार’ तक बताने लगे। 

खून से लथपथ संदिग्ध परिस्थितियों में मिली ‘द डर्टी पिक्चर’ की हिरोइन आर्या बनर्जी की लाश, जाँच में जुटी कोलकाता पुलिस

साल 2020 में ना जाने फिल्म इंडस्ट्री के कितने सितारों की मृत्यु हो गई। कई ने आत्महत्या कर लिया तो कितनों के शव संदिग्ध परिस्थितियों में भी मिले। वहीं अब ‘द डर्टी पिक्चर’ और ‘एलएसडीः लव सेक्स और धोखा’ समेत कई बॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुकी एक्ट्रेस आर्या बनर्जी की संदिग्ध अवस्था में मौत गई है। 33 वर्षीय अभिनेत्री दक्षिण कोलकाता के जोधपुर पार्क एरिया में एक अपार्टमेंट में रहती थीं। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर एक्ट्रेस की डेड बॉडी बाहर निकाली।

सितारवादक निखिल बनर्जी की बेटी आर्या का पूरा नाम देबदत्ता बनर्जी था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आर्या बनर्जी का शव उनके फ्लैट में खून से लथपथ मिला और मुँह से उल्टी हुई थी। एक्ट्रेस का शव बेड पर पड़ा मिला और पुलिस उनके फ्लैट का दरवाजा तोड़कर अंदर पहुँची थी। एक्ट्रेस की मेड ने पुलिस को उनके बारे में सूचना दी।

शुक्रवार को अभिनेत्री की मेड रोजाना की तरह उनके घर काम करने पहुँची थी। जिस दौरान सुबह जब उसने फ्लैट की घंटी बजाई, तो उसे कोई जवाब नहीं मिला। जिसके बाद उसने यह जानकारी आर्या के पड़ोसियों को दी।

पड़ोसियों ने भी तमाम दरवाजा खटखटाने, फ़ोन करने समेत तमाम कोशिश की। लेकिन फिर भी जब अंदर से कोई जवाब नहीं आया तो उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। मेड ने कहा कि आर्या अकेली रहती थी और किसी से ज्यादा मेलजोल नहीं रखती थी।

पुलिस ने कहा कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और फॉरेंसिक टीम ने अभिनेत्री के कमरे से नमूने एकत्र किए हैं। पुलिस इस मामले को फिलहाल आत्महत्या का मामला मान रही है। आगे की कार्रवाई वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद करेगी।

गौरतलब है कि इससे पहले सुशांत सिंह राजपूत के साथ फ़िल्म ‘काई पो छे’ में काम कर चुके एक्टर आसिफ बसरा ने भी अपने कुत्ते की रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। 53 साल के अभिनेता ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के धर्मशाला के मैक्लोडगंज में स्थित एक कैफे के पास खुदकुशी की थी। वहीं पुलिस ने मामले में पूछताछ के लिए एक विदेशी महिला को हिरासत में लिया था।

बिजनौर में सोनू बनकर अफजल ने युवती को फँसाया, ब्रेनवाश कर भगा ले गया: यूपी पुलिस ने किया नए कानून के तहत केस दर्ज

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों पर नकेल कसी हुई है। इसके बावजूद ऐसी घटनाएँ कम होने का नाम नहीं ले रही। ताजा मामला बिजनौर जिले का है। जहाँ सोनू बनकर अफजल ने हिन्दू युवती को प्रेमजाल में फँसाया। फिर उसका ब्रेनवाश कर अपने साथ भगा ले गया। पीड़िता के परिजनों ने मामले में पुलिस थाने में तहरीर दी, जिसके बाद यह चौकाने वाला खुलासा हुआ।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के पिता चंडीगढ़ में रहकर पेंटर का काम करते हैं। रिश्तेदारी में शादी के सिलसिले में वह घर आया हुआ था। जिसके बाद 7 सितंबर को आरोपित अफजल उसकी बेटी को बहला फुसला कर भगा ले गया। पीड़ित पिता ने मामले की शिकायत स्थानीय थाने में दी। जिसपर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर युवती और युवक की तलाशी में जुट गए।

वहीं जब पुलिस ने युवती को कड़ी मशक्कत के बाद बरामद किया तो उसके साथ सोनू को लेकर चौकाने वाला खुलासा भी सामने आया। पुलिस पूछताछ में युवती ने बताया कि अफजल ने सोनू बन कर उससे दोस्ती की थी। पिता की तरह सोनू भी चंड़ीगढ़ में रहकर कारपेंटर का काम करता है। अफजल बना सोनू चंडीगढ़ में उसी के घर के पास ही काम करता था। धीरे-धीरे सोनू ने उसे अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। और उनका रिश्ता प्यार में बदल गया। जिसके चलते अफजल उसे झाँसे में लेते हुए अपने साथ भगा ले गया।

पीड़िता ने बताया कि उसे इसकी सच्चाई उसके साथ रहने के बाद पता चली। गौरतलब है कि यूपी पुलिस ने लव जिहाद को लेकर बने नए कानून के तहत इस मामले में एफआईआर दर्ज किया है। प्रभारी निरीक्षक राजेश सोलंकी ने बताया कि युवती को बरामद कर लिया गया है जबकि, आरोपित अफज़ल की तलाश की जा रही है। धर्म परिवर्तन प्रतिशेध की धाराओं में रिपार्ट दर्ज की गई है।

बता दें कि योगी सरकार ने धर्म बदलवाकर शादी करने वालों पर लगाम लगाने के लिए कानून बनाई है। इस कानून के तहत धोखा या लालच देकर शादी करना अपराध माना गया है। शादी के बाद जबरन धर्म बदलवाने पर सज़ा का प्रावधान किया गया है। दोषी को 5 से 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान किया गया है।

योगी सरकार के अध्यादेश में दूसरे धर्म में शादी करने के लिए संबंधित जिले के जिलाधिकारी से इजाजत लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए शादी से पहले 2 माह की नोटिस देना होगा। बिना अनुमति लिए शादी करने या धर्म परिवर्तन करने पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सजा के साथ 10 हजार का जुर्माना भी देना पड़ेगा। इसके अलावा अध्यादेश में नाम छिपाकर शादी करने वाले के लिए 10 साल की सजा का भी प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन पर एक से 10 साल तक की सजा होगी। साथ ही 15 हजार तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है। इसके अलावा सामूहिक रूप से गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन करने पर जहाँ 10 साल तक सजा हो सकती है, वहीं 50 हजार तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

हाथरस मामले में वांछित PFI नेता रऊफ शरीफ केरल से गिरफ्तार: देश छोड़कर भागने की थी तैयारी

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के युवा नेता रऊफ शरीफ को हिरासत में ले लिया। रऊफ शरीफ देश छोड़कर भागने की फिराक में था, मगर ED ने समय रहते कार्रवाई की और उसे धर दबोचा।

केरल से हुई गिरफ्तारी

ED के सूत्रों के अनुसार, शरीफ को केरल के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया है। आरोपित पुलिस को चमका देकर फरार होने की फिराक में था, लेकिन सरकारी एजेंसी ने तत्पर कार्रवाई करते हुए उसकी इस योजना पर पानी फेर दिया।

मीडिया रिपोर्ट में ED के हवाले से कहा गया है कि शरीफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वांछित है। आरोप है कि रऊफ शरीफ के खाते में ओमान और कतर से दो करोड़ रुपए आए थे। यह भी आरोप है कि इन पैसों का प्रयोग असामाजिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। शरीफ से पूछताछ के लिए जाँच एजेंसियों ने उसे नोटिस भी जारी किए थे लेकिन जाँच एजेंसियों के नोटिसों से खुद को बचा रहा था। वह कोरोना महामारी का बहाना बनाकर काफी समय से छिपा हुआ था।

जनपद हाथरस की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में दंगा भड़काने की साजिश में 05 अक्टूबर को कई लोगों को मथुरा से गिरफ्तार किया गया था। इनमें आरोपित अतीकुर्रहमान और मसूद को दंगा भड़काने की साजिश में आर्थिक मदद और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए केरल निवासी रऊफ शरीफ की भूमिका सामने आई थी। इसके बाद लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। रऊफ शरीफ मस्कट जाने की फिराक में था, जिसे एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया है। CFI के महासचिव रउफ शरीफ पर देश-विदेश से करोड़ों रुपए की फंडिंग प्राप्त होने और उसका प्रयोग सामाजिक वैमनस्यता और दंगो को भड़काने में करने का आरोप है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी के मुताबिक उत्तर प्रदेश पुलिस को भी हाथरस मामले में उसकी तलाश है और वह उस मामले में भी वांछित है। हाथरस में हुई बड़ी साज़िश, घूँघट वाली भाभी से लेकर तमाम ‘चर्चित चेहरों’ ने PFI की लिखी हुई स्क्रिप्ट पढ़ी। प्रदेश में नफरत फैलाने और जातीय दंगा भड़काने के लिए उसे विदेशों से कोरड़ों रुपए मिले थे।

गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया के नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेम्बर करमना अशरफ मौलवी के तिरुअनंतपुरम स्थित पूंथुरा आवास पर छापा मारा था। ईडी ने साल 2018 के दौरान पीएफ़आई के कई सदस्यों पर धन शोधन निरोधक अधिनियम (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया था। इसके अलावा कोज़ीकोड़े, मल्लापुरम और एर्नाकुलम स्थित पीएफ़आई नेताओं के आवासों पर भी छापा मारा गया। 

25% ही काम कर रही RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की किडनी, कभी भी हालत हो सकती है गंभीर

चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव का स्वास्थ्य कभी भी बिगड़ सकता है। लगातार उनकी किडनी की समस्या गंभीर होती जा रही है। यह जानकारी उनका इलाज कर रहे डॉक्टर उमेश प्रसाद ने दी है। डॉक्टर उमेश प्रसाद के अनुसार लालू प्रसाद यादव की किडनी सिर्फ 25 फीसदी ही काम कर रही है। जिसको लेकर फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। बता दें कि लालू फिलहाल रिम्स में भर्ती हैं और वे मधुमेह और गुर्दे की बीमारी से ग्रसित हैं।

उमेश प्रसाद ने शनिवार को न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “लालू प्रसाद यादव की स्थिति गंभीर है। उनका किडनी फंक्शन कब बिगड़ेगा इस पर अनुमान लगाना मुश्किल है। उनकी स्थिति ठीक नहीं है और मैंने इसे अधिकारियों को लिखित रूप में दे दिया है।”

रिपोर्ट के अनुसार, लालू प्रसाद यादव की किडनी 25 फीसदी ही काम कर रही है। यह स्थिति अलार्मिंग इस वजह से है क्योंकि इस स्थिति में कभी भी उनके किडनी की फंक्शनिंग अचानक से बंद हो सकती है। अगले कुछ दिनों तक स्थिति ऐसी ही रही तो उन्हें डायलिसिस कराने की जरूरत पड़ सकती है।

लालू का इलाज कर रहे डॉ. उमेश प्रसाद ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लालू प्रसाद बहुत चिंतित और परेशान हैं। उनकी किडनी 25% फंक्शन कर रही है। उन्होंने कहा कि इनकी स्वास्थ्य की जानकारी रिम्स प्रबंधन और सरकार को दे दी गई है।

डॉक्टर के मुताबिक, कुछ दिनों से लालू यादव का ब्लड शुगर भी बढ़ा है। उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट हो रही है। उन्हें अच्छे इलाज की जरूरत है। उमेश यादव ने कहा कि अगर जरुरत पड़ती है तो लालू यादव के इलाज के लिए बाहर से भी डॉक्टर बुलाया जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, शरुआती दिनों में रिम्स में एडमिट होते वक्त लालू का किडनी 53 प्रतिशत काम कर रही थी, जिसका इलाज किया जा रहा था। लेकिन समय के साथ अब मात्र 25 प्रतिशत की किडनी काम कर रही है। जोकि गंभीर स्थिति है। बीते दो सालों में किडनी के काम करने की दरों में काफी गिरावट आई है।