Home Blog Page 4230

रिपब्लिक TV के सीईओ को मुंबई की कोर्ट ने 2 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा, टीआरपी स्कैम में हुई है गिरफ्तारी

मुंबई के चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के सीईओ विकास खानचंदानी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। खानचंदानी को आज (13 दिसंबर 2020) सुबह टीआरपी स्कैम के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। रिपब्लिक ने उनकी गिरफ्तारी को ‘अवैध’ बताते हुए कहा था कि मुंबई पुलिस बिना किसी कागजात के उनको गिरफ्तार करने पहुँची थी।

विकास खानचंदानी और मुख्य वित्तीय अधिकारी शिवसुब्रमण्यम सुंदरम ने गुरुवार (10 दिसंबर, 2020) को अग्रिम जमानत के लिए सत्र न्यायालय का रुख किया था। इस पर सोमवार को सुनवाई होनी थी। बता दें यह गिरफ्तारी रिपब्लिक टीवी के सीईओ की अंतरिम जमानत की सुनवाई से ठीक एक दिन पहले हुई है। उनका कहना था कि पूछताछ दबाव बनाने और डरा-धमका कर एआरजी तथा अर्नब गोस्वामी को फँसाने के लिए किया जा रहा है। उन्हें कि लगातार सहयोग करने के बावजूद इस मामले में उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।

इसमें कहा गया था कि टीआरपी मामले में क्राइम ब्रांच द्वारा किए जा रहे जाँच से उन्हें स्पष्ट हो गया था कि यह बदले की भावना से किया जा रहा है। पहले एफआईआर के संबंध में तलब किए जाने से लगभग दो महीने बाद दिसंबर में पहली बार आवेदक को फर्जी पूछताछ के लिए सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत नोटिस मिलना शुरू हुआ था।

गौरतलब है कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के सीईओ की ‘अवैध गिरफ्तारी’ के खिलाफ महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग (MHRC) के समक्ष याचिका दायर की गई है। इसमें मामले पर तत्काल विचार करने और हस्तक्षेप की माँग की गई है।

मुंबई के पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने 8 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि मुंबई पुलिस को नए टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट्स (TRP) से जुड़े एक नए रैकेट के बारे में पता चला है। परम बीर सिंह ने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि हंसा रिसर्च ने पुलिस में यह शिकायत दर्ज की थी। दिलचस्प बात यह है कि हंसा रिसर्च द्वारा दर्ज की गई इस एफआईआर में एक बार भी रिपब्लिक टीवी का जिक्र नहीं किया गया था। जिस चैनल का जिक्र कई बार किया गया वह इंडिया टुडे था।

27 साल पहले जिन सुधारों के लिए कॉन्ग्रेस से लड़े पिता, आज उसके ही विरोध में बेटे ने खोल रखा है मोर्चा: महेंद्र से राकेश टिकैत तक कैसे बदली किसान पॉलिटिक्स

किसान आंदोलन और उनके नेताओं की मंशा कैसे बदली है, इसका इससे बेहतर उदाहरण नहीं मिल सकता। 27 साल पहले जिन सुधारों को लेकर किसानों के अब तक के सबसे बड़े नेता महेंद्र सिंह टिकैत सरकार से लड़े थे, आज नए कृषि कानूनों में उन्हें पूरा किए जाने के खिलाफ ही उनके बेटे राकेश टिकैत ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

उत्तर प्रदेश के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत 27 साल पहले किसान आंदोलनों का चेहरा हुआ करते थे। टिकैत और भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के चार अन्य नेताओं ने तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव के निमंत्रण पर उनसे मुलाकात की थी। टिकैत ने सरकार से कहा था कि वह किसानों को देश में कहीं भी अपने उत्पाद को बेचने की अनुमति दें।

उन्होंने माँग की थी कि किसान उनको अपना अनाज बेच सकें जो उन्हें अच्छी कीमत देने के लिए तैयार हो। किसान के लिए पूरे देश का बाजार खोला जाए। उसे किसी मंडी के लाइसेंसी को फसल बेचने की बाध्यता नहीं हो।

उस समय कृषि मंत्रालय के सचिव एमएस गिल भी टिकैत और बीकेयू के अन्य नेताओं से मिले थे। उस समय पीवी नरसिम्हा राव ने माँगों को पूरी तरह से पूरा करने में असमर्थता दिखाई थी। टिकैत ने सरकार के खिलाफ विद्रोह किया और अपनी माँगों को पूरा करने के लिए विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व किया। हालाँकि चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के किसानों के लिए किए गए आंदोलन के बावजूद इस माँग को पूरा नहीं किया जा सका। उन्होंने यह भी माँग की थी कि 1967 की कीमत के आधार पर गेहूँ की कीमत तय की जानी चाहिए।

हाल ही में पारित कृषि कानूनों में, सरकार ने किसानों को देश में कहीं भी अपने उत्पाद बेचने की अनुमति दी है। टिकैत की माँग के 27 साल बाद पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार कृषि कानूनों में सुधार लेकर आई। हालाँकि वह इस क्षण के गवाह नहीं बन सके, क्योंकि 2011 में उनका निधन हो गया। अब वही बीकेयू उन कानूनों का विरोध कर रहा है जो 27 साल पहले टिकैत की माँगों के अनुरूप हैं। इस समय बीकेयू के नरेश टिकैत हैं। लेकिन, संगठन की बागडोर असल मायनों में उनके छोटे भाई राकेश टिकैत ने सॅंभाल रखी है। केंद्र सरकार से बातचीत करने वाले किसानों के कोर ग्रुप का भी राकेश हिस्सा हैं। AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के भी BKU के साथ लिंक सामने आए हैं।

कौन थे महेंद्र सिंह टिकैत

1935 में जन्मे टिकैत स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे प्रसिद्ध किसान नेता थे। उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर जिले के सिसौली गाँव से आने वाले टिकैत भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष थे। किसानों के लिए किए गए उनके काम के लिए उन्हें अक्सर किसानों का ‘दूसरा मसीहा’ कहा जाता था।

टिकैत का नाम पहली बार सुर्खियों में तब आया था जब उन्होंने 1987 में मुजफ्फरनगर में किसानों के लिए बिजली बिल-माफी की माँग की थी। 1988 में, दिल्ली में किसानों के विरोध का नेतृत्व करने पर उनका कद बड़ा हो गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के नेतृत्व वाली सरकार को पाँच लाख से अधिक किसानों के क्रोध का सामना करना पड़ा, जिन्होंने सात दिनों के लिए दिल्ली पर कब्जा कर लिया था। उस समय, पुलिस द्वारा उन पर गोलियाँ चलाने के बाद भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे थे। इस दौरान राजेंद्र सिंह और भूप सिंह नाम के दो किसानों की मौत हो गई थी।

उस समय टिकैत ने कहा था, “पीएम ने दुश्मन की तरह व्यवहार किया है। किसानों की नाराजगी उन्हें महँगी पड़ेगी।” किसानों का आंदोलन इतना आक्रामक था कि सरकार को पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम स्थल बदलना पड़ा। टिकैत द्वारा रखी गई सभी 35 माँगों पर सरकार की सहमति के बाद विरोध-प्रदर्शन समाप्त हो गया था।

सैकड़ों ‘किसान प्रदर्शनकारी’ बीमार, लेकिन कोरोना टेस्ट से कर रहे इनकार, 20 अस्पतालों में भर्ती: रिपोर्ट्स

नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली से सटे सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन पर कोरोना संक्रमण का साया मँडरा रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, विरोध-प्रदर्शन में भाग लेने वाले सैकड़ों प्रदर्शनकारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। किसान न तो मास्क पहन रहे हैं और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे। किसान प्रदर्शनकारी अपना कोविड टेस्ट भी कराने से इनकार कर रहे हैं।

संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए अधिकारी चिंतित हैं। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों के बीच बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रिमतों के होने की आशंका ज्यादा है। किसान बीमार हैं और रोगग्रस्त हैं, उनकी सही संख्या का पता नहीं है, लेकिन अनौपचारिक सूत्रों ने उनकी संख्या लगभग 300 बताई है।

सोनीपत के उपायुक्त श्याम लाल पूनिया ने कहा, “हमने सिंघु बॉर्डर पर दो COVID19 काउंटर बनाए हैं। नियमित रूप से प्रदर्शनकारियों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की दस टीमों को तैनात किया गया है। औसतन 70 से 90 लोग हर रोज हमारे पास आ रहे हैं, जिन्हें बुखार, मांसपेशियों में दर्द जैसी शिकायत है।”

पूनिया ने आगे कहा, “हम नियमित रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। मरीज COVID19 परीक्षणों के लिए तैयार नहीं हैं। हमने 50,000 मास्क वितरित किए हैं, लेकिन वे न तो सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं और न ही मास्क पहन रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि COVID-19 जैसा कुछ भी नहीं है।”

वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (सोनीपत) अन्विता कौशिक ने पहले कहा था, “हमारे जिले की मेडिकल वैन और टीमों को सिंघु सीमा पर तैनात किया गया है। वे (प्रदर्शनकारी) खाँसी, बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए हमसे दवाएँ ले रहे हैं, लेकिन COVID-19 का टेस्ट कराने को तैयार नहीं हैं।”

गौरतलब है कि भारतीय किसान यूनियन-एकता उरगान पंजाब के महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा था कि किसान वहाँ (विरोध स्थल) प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए हैं, न कि कोरोना वायरस टेस्ट के लिए। बता दें बीकेयू-एकता उरगान वही समूह है जो एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार किए गए ‘अर्बन नक्सलियों’ की रिहाई और दिल्ली दंगों के मामले में आरोपित इस्लामवादियों की रिहाई की माँग कर रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन में शामिल 20 गंभीर रूप से बीमार प्रदर्शनकारियों को अस्पतालों में भेजा गया है। वहीं बहादुरगढ़ में पाँच और सिंघु बॉर्डर पर एक प्रदर्शनकारी की मौत भी हो गई है। अभी तक उनकी मृत्यु के कारण का पता नहीं लग पाया है। सोशल डिस्टेंसिंग नॉर्म्स के खराब होने और मास्क न पहनने के कारण अधिकारी प्रदर्शन को लेकर चिंतित हैं। इसके अलावा, कुछ वालंटियर्स द्वारा अवैध काउंटर भी खोले गए है, जो सिंघु और टिकारी सीमा पर बिना प्रेस्क्रिप्शन की दवाइयाँ बाँट रहे हैं।

बता दें कि विरोध-प्रदर्शन में ज्यादातर 60 से 80 वर्ष की आयु के बीच के प्रदर्शनकारी शामिल हैं, जो पहले से हाई ब्लड शुगर, दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा से पीड़ित हैं। इन सभी में कोरोना से संक्रमित होने की आशंका ज्यादा है। सरकार लगातार उनसे अपने घरों में वापस जाने की अपील कर रही है, लेकिन वे इनकार कर रहे। इससे पहले सिंघु बॉर्डर के पास प्रदर्शन स्थल पर तैनात दो पुलिस अधिकारियों का कोविड टेस्ट पॉजिटिव आ चुका है।

‘मोदी मर जा तू’: वामपंथी किसान संगठन की महिला ‘प्रदर्शनकारियों’ ने गा-गाकर माँगी PM मोदी के मरने की दुआ

नए कृषि कानूनों के विरोध के पीछे छिपी असल मंशा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। किसानों के इस कथित आंदोलन में दिल्ली दंगों के आरोपितों की रिहाई के लिए पोस्टर लहराए जा चुके हैं। हिंदू महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक बातें की गई है। खालिस्तानी ताकतों की धमकियॉं भी हमने सुनी है। अब एक वीडियो सामने आया है जिसमें ‘प्रदर्शनकारी’ महिलाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मरने की दुआ कर रही हैं। 

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में एक महिला को कहते हुए देखा जा सकता है, “मोदी मर जा तू, शिक्षा बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। रेल बेचकर खा गया रे मोदी, मर जा तू। देश बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। किसानों को धोखा दे गए रे मोदी, मर जा तू।” वहीं सामने बैठी महिला बार-बार ‘हाय-हाय मोदी मर जा तू’ दोहरा रही थी।

हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कहाँ का है। लेकिन बैकग्राउंड में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) और कम्युनिस्ट पार्टी के हथौड़ा निशान वाला पोस्टर लगा देखा जा सकता है। बता दें कि एआईकेएस एक वामपंथी संगठन है। इसके दो गुट हैं- एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और दूसरा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का। वीडियो में पीछे लगे बैनर से लग रहा है कि यह राजस्थान के घड़साना क्षेत्र का है।

दिल्ली बीजेपी महासचिव कुलजीत सिंह चहल ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा कि ये मेरे देश के किसान नहीं हो सकते। साथ ही उन्होंने सवाल भी किया कि ऐसा करने के लिए इन्हें स्पॉन्सर कौन कर रहा है? उन्होंने इसे शर्मनाक बताया।

इस शर्मनाक वीडियो के सामने आने के बाद लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है। कोई कह रहा है कि ये कॉन्ग्रेस के लोग हैं तो वहीं कुछ लोग सच का पता लगाने और उन्हें दंडित करने की बात कह रहे हैं।

इससे पहले पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने ‘किसान आंदोलन’ में भड़काऊ भाषण दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर कहा था कि अगर ‘हिम्मत है तो वो अकेले आएँ और किसानों से बात करे।’ एक पंजाबी समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने पीएम मोदी को जान से मारने की दी गई धमकियों का भी समर्थन किया था। योगराज सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं।

पंजाबी में दिए एअक भाषण में योगराज सिंह ने कहा था, “मैं इन्हें आपलोगों से ज्यादा जानता हूँ। ये माँ-बेटियों की कसमें खा कर भी पलट जाते हैं। मैं आपको बधाई देता हूँ कि जब अमित शाह ने कहा कि निरंकारी ग्राउंड आ जाओ तो आपलोग नहीं गए। इनकी किसी बात का विश्वास नहीं करना। एक बात और कहना चाहता हूँ जब इनकी औरतों को अहमद शाह दुर्रानी ले जाता और वहाँ टके-टके की बिकती थी, तो पंजाबियों ने बचाया।”

जब योगराज सिंह से पूछा गया था कि इस ‘किसान आंदोलन’ में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद करते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा था कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा। उन्होंने इसे भावनाओं की लड़ाई बताते हुए कहा था कि सरकार को ऐसा कोई भी बयान नहीं देना चाहिए, जो भारत को विभाजित करे। उन्होंने भारत सरकार पर मुग़ल बादशाहों बाबर, औरंगजेब और अंग्रेजों से भी ज्यादा क्रूरता और अत्याचार करने के आरोप लगाए।

इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया था जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता था कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे। वहीं एक वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘जय हिन्द’ बोलने से भी इनकार कर रहा था। जब ये सब चल रहा था, तब ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान वहीं पर मौजूद थे। वीडियो में एक प्रदर्शनकारी कह रहा था कि वो ‘जय हिन्द’ नहीं बोलेगा और न ही ‘भारत माता की जय’ बोलेगा, सिर्फ ‘जो बोले सो निहाल’ ही बोलेगा। साथ ही उसने कहा था कि वो ‘अस्सलाम वालेकुम’ भी बोलेगा। AAP विधायक अमानतुल्लाह खान की मौजूदगी में प्रदर्शनकारी ने धमकाया कि जैसे इंदिरा गाँधी को ‘सबक सिखाया गया’ था, वैसे ही पीएम मोदी को भी ‘सबक सिखाया जाएगा।’

प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ के माओ​वादियों, कॉन्ग्रेस और केजरीवाल से लिंक, अर्बन नक्सलियों से सहानुभूति: रिपोर्ट्स

‘किसान विरोध प्रदर्शन’ को शुरुआत से ही हाइजैक करने का प्रयास किया जाता रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राजनीतिक दल अपने एजेंडों को पूरा करने के लिए इसे हाइजैक करने की कोशिश कर रही है। बता दें कि इन विरोध-प्रदर्शनों के दौरान खालिस्तानी ताकतें काफी सक्रिय और मुखर रही हैं।

अब इन तथाकथित प्रदर्शनकारियों का विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ संबंध उजागर हो रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के प्रमुख सरदार वीएम सिंह कॉन्ग्रेस नेता हैं और 8 अलग-अलग मामलों में आरोपित हैं। उनके पास करोड़ों की संपत्ति भी है। IANS ने उन रिपोर्टों की एक श्रृंखला प्रकाशित की है, जिसमें ‘किसान प्रदर्शनकारी’ नेताओं के राजनीतिक संबंधों का खुलासा किया गया है।

IANS ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां (BKU-Ekta Ugrahan) दिल्ली की सीमाओं पर सबसे बड़ा समूह है। बताया जा रहा है कि वहाँ जमा हुए लोगों में से लगभग दो-तिहाई इसी संगठन के सदस्य हैं। बता दें कि यह वही समूह है जो एलगार परिषद मामले में शामिल ‘अर्बन नक्सलियों’ और दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार इस्लामवादियों की रिहाई के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं।

बीकेयू (उगराहां) के वकील और समन्वयक एनके जीत ने कहा कि यह पहले दिन से ही उनकी माँग रही है कि जेलों में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए। उनका दावा है कि पूरे भारत में नक्सल आंदोलन हमेशा से किसानों का आंदोलन रहा है। इसके आरोपितों की रिहाई बीकेयू की एक माँग है। उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ सरकार को जो माँग-पत्र सौंपा था, उसमें भी यह शामिल था। उन्होंने यह भी दावा किया कि नक्सलवाद ने आदिवासियों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने में मदद की है।

ऐसे अन्य लोगों में सुरजीत सिंह फूल, दर्शील पाल, अजमेर सिंह लखोवाल और अन्य शामिल हैं। 70 वर्षीय पाल क्रांतिकारी किसान यूनियन के पंजाब अध्यक्ष हैं, जिन पर माओवादी समर्थक समूहों से संबंध होने का आरोप है। आईएएनएस की रिपोर्ट में कहा गया है, “उनका राज्य के विभिन्न एलडब्ल्यूई कार्यकर्ताओं के साथ घनिष्ठ संबंध है, जिसमें जोगिंदर सिंह उगराहा, झन्धा सिंह जेठुके, सुखदेव सिंह कोकरी कलां (बीकेयू-एकता उगराहां के राज्य महासचिव), सतवंत सिंह वाजिदपुर (इंकलाबी लोक मोर्चा, जो सीपीआई/माओवादी समर्थक है), सुरजीत सिंह फूल, बूटा सिंह बुर्जगिल (बीकेयू-डकौंडा के राज्य अध्यक्ष, जो सीपीआई/माओवादी समर्थक भी है) शामिल हैं।”

पाल कथित तौर पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PDFI) के संस्थापक सदस्य भी हैं। अन्य सदस्यों में वरवरा राव, कल्याण राव, मेधा पाटकर, नंदिता हक्सर, एसएआर गिलानी और बीडी सरमा हैं। हमने पहले बताया था कि हैदराबाद में डॉ. मैरिज चन्ना रेड्डी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार किए गए एक अध्ययन के अनुसार, PDFI माओवादियों द्वारा अपनी स्थिति को मजबूत और विस्तार करने के लिए गठित किए गए टैक्टिकल यूनाइटेड फ्रंट (टीयूएफ) का एक हिस्सा है।

फूल 75 साल के हैं और बीकेयू-क्रांतिकारी के अध्यक्ष हैं। 2009 में यूपीए शासन के दौरान उन्हें कथित तौर पर यूएपीए के तहत बुक किया गया था। उन पर माओवादियों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया गया था और ‘गहन पूछताछ’ के लिए अमृतसर की जेल में रखा गया था।

खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के हरियाणा के किसान नेता और बीकेयू (गुरनाम) के संस्थापक गुरनाम सिंह चादुनी के साथ करीबी संबंध हैं। कीर्ति किसान यूनियन के निर्भय सिंह धुडिके (प्रदेश अध्यक्ष) के घर 2009 में जालंधर पुलिस ने छापा मारा था। यह छापेमारी गिरफ्तार भाकपा-माओवादी कैडर जय प्रकाश दुबे के साथ उनके संबंधों को जानने के लिए की गई थी।

स्पष्ट तौर पर विरोध-प्रदर्शनों में असामाजिक तत्वों की भारी भागीदारी देखी जा रही है। इन विरोध स्थलों पर मसाज पार्लर और जिम की व्यवस्था है। तथाकथित प्रदर्शनकारियों के लिए सड़क पर पिज्जा बनाकर उसे पिकनिक स्पॉट में बदल दिया गया है। 

अब 15 दिन के युद्ध लायक गोला-बारूद रख सकेगी सेना, ₹50000 करोड़ के हथियार खरीदने की भी योजना

सीमा पर जारी तनाव के बीच एक अहम ख़बर आई है। सरकार ने तीनों सेनाओं को 15 दिनों के युद्ध के अनुसार गोला-बारूद और हथियार का संग्रह करने की छूट दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सेना 15 दिन तक चलने वाले बड़े और सघन युद्ध के हिसाब से ज़रूरी हथियार और सामान एकत्रित कर सकेगी। पहले यह सीमा 10 दिनों की थी। इसके अलावा हथियारों की खरीद पर 50,000 करोड़ रुपए खर्च करने की भी योजना है। 

इंडिया टुडे में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि हथियार और गोला-बारूद जमा करने का आदेश कुछ समय पहले जारी किया गया था। फ़िलहाल 15 दिनों तक चलने वाले बड़े युद्ध के मुताबिक़ तैयारियाँ करने का निर्देह दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार काफी पहले 40 दिनों तक चलने वाले युद्ध के हिसाब से हथियार और गोला-बारूद की तैयारी रखने के लिए कहा गया था। इस अवधि को घटा कर 10 दिन कर दिया गया था। उरी हमले के बाद ऐसी आवश्यकता महसूस हुई कि इतनी अवधि के हिसाब से की गई तैयारी बहुत कम है। 

इसके बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने तीनों सेनाओं (जल, थल, वायु) का आर्थिक पैकेज 100 करोड़ से बढ़ा कर 500 करोड़ कर दिया था। तीनों सेनाओं को 300 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी, जिससे युद्ध संबंधी आवश्यक हथियार और गोला-बारूद खरीदे जा सकें। इस आर्थिक सहायता के बाद सेना ने तमाम हथियार, मिसाइल, गोला बारूद और अन्य ज़रूरी उपकरण खरीदे थे। 

वहीं सीमा के उस पर चीनी सेना ने भी भारतीय सेना से मोर्चा लेने के लिए तैयारियाँ बढ़ा दी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ चीनी सेना ने कई मिलिट्री कैम्प बना लिए हैं। चीन की सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के गहराई वाले क्षेत्रों में अभी तक लगभग 20 मिलिट्री कैम्प बना लिए हैं। इन मिलिट्री कैम्प के पीछे चीन की सेना का इकलौता उद्देश्य भारतीय सेना के विरुद्ध युद्ध की तैयारियों को मज़बूत करना था। 

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच सीमा पर कई महीनों से सैन्य गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ चीन ने सीमा पर भारी संख्या में सैनिक तैनात किए हैं तो दूसरी तरफ भारत भी पूरी तरह डटा हुआ है। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर वार्ता का लंबा दौर चला लेकिन अभी तक उसका ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।       

MHRC में रिपब्लिक TV के CEO की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका, मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विकास खानचंदानी को कथित टीआरपी (टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स) घोटाले के सिलसिले में रविवार (13 दिसंबर, 2020) सुबह गिरफ्तार किया। इस ‘अवैध गिरफ्तारी’ के खिलाफ महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग (MHRC) के समक्ष याचिका दायर की गई है। इसमें मामले पर तत्काल विचार करने और हस्तक्षेप की माँग की गई है।

बता दें यह याचिका अधिवक्ता आदित्य मिश्रा द्वारा दायर की गई है। उन्होंने MHRC से विकास द्वारा समन का अनुपालन करने का हवाला देते हुए कहा, “खानचंदानी पहले ही 12.10.2020 को पुलिस के समक्ष पेश होकर जाँच में सहयोग दे चुके हैं और मुंबई की क्राइम ब्रांच के सामने संबंधित दस्तावेज़ों को पेश कर चुके हैं। उनसे कथित तौर पर 9 घंटे के लिए पूछताछ की गई थी। फिर वे 7 दिसंबर 2020 को भी पुलिस के सामने पेश हुए।”

इसके साथ ही उन्होंने मामले को लेकर मुंबई पुलिस के रवैए पर सवाल उठाया है। याचिका में मुंबई पुलिस के अधिकार क्षेत्र को लेकर पूछा गया कि क्या ऐसे मामलों में ‘बल द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की गई थी?’

उन्होंने कहा, “अगर तर्कों के लिए अभियोजन पक्ष के आरोपों को सही भी माना जाए तो फिर भी उपयुक्त मंच भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग है जो इस तरह के आरोपों को देखता है। पुलिस द्वारा दंडात्मक कार्रवाई बिलकुल भी सही नहीं थी, खासतौर पर तब जब आधार टीआरपी बढ़ाने के लिए नगद भुगतान के अस्पष्ट आरोपों का हो।”

बता दें CEO की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस का कहना है कि TRP स्कैम मामले की चल रही जाँच के क्रम में ये कार्रवाई की गई है। लेकिन ‘रिपब्लिक’ का कहना है कि ये इन सबके बावजूद किया गया है कि विकास खानचंदानी ने पुलिस की 100 घंटों की पूछताछ का सामना किया और जाँच प्रक्रिया के साथ पूरी तरह सहयोग किया, सवालों के जवाब दिए।

वहीं रिपब्लिक’ का यह भी आरोप है कि मुंबई पुलिस बिना किसी कागजात के वहाँ पर पहुँची थी और इस कार्रवाई को अंजाम दिया। चैनल ने कहा है कि ये कार्रवाई मुंबई पुलिस की प्रतिशोध और दुर्भावना से युक्त इरादों को दर्शाती है, जो उसने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के खिलाफ पाल रखा है। अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के 39 दिन बाद ये कार्रवाई की गई है।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस ने CEO विकास खानचंदानी के घर पर छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। सोमवार को ही इस मामले में उनकी अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई होनी थी, ऐसे में इससे पहले होने वाली इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। अर्णब गोस्वामी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुंबई पुलिस ने जान-बूझकर ऐसा किया है। ये कोर्ट की अवमानना है और लोग इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ।”

किसान भाइयों से मिलें तो ‘राम-राम’ कहें, दुराचारियों और अपराधियों की ‘राम नाम सत्य है’ यात्रा भी निकालनी चाहिए: CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार (दिसंबर 13, 2020) को एक कार्यक्रम में शामिल होने मेरठ पहुँचे। उन्होंने कहा, “हमने पुलिस प्रशासन से साफ कहा कि जब किसानों से मिलें तो हमारा संबोधन राम-राम होना चाहिए। हमारे यहाँ का किसान भाई जब मिलता है तो वह संबोधन में राम-राम बोलता है, तो राम शब्द का प्रयोग दो बार जरूर होना चाहिए। जब हम किसान भाइयों से मिलें तो हमारा संबोधन राम-राम होना चाहिए। जब सुरक्षा के साथ सेंध लगाने वाला कोई भी ऐसा दुराचारी, अपराधी बहन-बेटियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करे तो उसकी राम नाम सत्य की यात्रा भी निकालनी चाहिए। यह कार्य हम और पुलिस-प्रशासन सुनिश्चित करें।” यह बात सीएम योगी ने किसान महापंचायत में कही।

किसानों को भ्रम में डाल रहे हैं षड्यंत्रकारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ में किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि जो भारत की तरक्की नहीं चाहते, वो लोग षड्यंत्र कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग किसानों को भ्रम में डाल रहे हैं। साथ ही आंदोलन कर रहे किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि समाधान बातचीत से होगा, संघर्ष से नहीं।

कृषि कानूनों को बताया किसान हितैषी

सीएम योगी ने किसानों को संबोधित करते हुए विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया। साथ ही साथ मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कानून को किसानों के हित वाला भी बताया। उन्होंने कहा, “किसान अपनी फसल का मालिक है। उसकी मर्जी है, वो अपनी फसल कहाँ बेचे। किसानों को मिले अधिकार से कुछ  लोग परेशान हैं, वे कृषि सुधार नहीं होने देना चाहते हैं। जो भारत की तरक्की नहीं चाहते, वो लोग षड्यंत्र कर रहे हैं। देश के खिलाफ होने वाले किसी भी षड्यंत्र के खिलाफ खड़ा होना होगा।”

यहाँ इन्‍होंने 32,000 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात मेरठ को दी। सीएम योगी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “भारत सरकार के सहयोग से ₹32,000 करोड़ की लागत से मेट्रो रेल का एक नया विकल्प आरआरटीएस ट्रेन के माध्यम से पहली बार इतनी लंबी दूरी के रूट के तौर पर मेरठ से दिल्ली को जोड़ने की कार्ययोजना बन रही है। इस ट्रेन को मेरठ के बाद मुजफ्फरनगर तक चलाने का भी प्रस्ताव भेजा गया है।”

सीएम योगी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान आंदोलन के बहाने कुछ लोग उपद्रवियों को के रिहाई की माँग कर रहे हैं, उनकी यह मंशा कभी पूरी नहीं होगी।

बंगाल में आएगा हिंदुओं का शासन, घुसपैठियों को राशन- आधार-वोटर कार्ड देकर शासन करती रही ममता: साध्वी प्रज्ञा

पश्चिम बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले की खबरों के बीच पार्टी सांसद साध्वी प्रज्ञा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा है कि घुसपैठियों को राशन, आधार और वोटर कार्ड देकर ममता बनर्जी अब तक शासन करती रही हैं। अब सत्ता जाने के डर से वह तिलमिला गई हैं। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि बंगाल में अब भाजपा की सरकार बनेगी और हिंदुओं का शासन आएगा हिंदुओं का शासन आएगा। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद साध्वी ने कहा, “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पागल हो गई हैं और वह तिलमिला इसलिए रही हैं कि उन्हे समझ आ गया है कि यह भारत है, पाकिस्तान नहीं, जिस पर शासन कर रही हैं।” बीजेपी सांसद ने कहा, “ममता ऐसी महिला हैं जो विदेशी परंपरा का पालन कर रही हैं। हमारा बंगाल हिंदू राज्य बनेगा, भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा। बंगाल अखंड भारत का हिस्सा है ममता इसे अलग करने का प्रयास कर रहीं हैं। जल्द ही बंगाल में बीजेपी और हिंदुओं का शासन आएगा।”

साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून उनके लिए होना चहिए जो देश में राष्ट्र विरोधी गतिविधियाँ करते हैं। जिनको राष्ट्र घात करने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है उनके लिए कानून बनना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का बिना नाम लिए उन पर निशाना साधते हुए कहा, ”जो लोग राष्ट्र को अपमानित करते हैं, भगवा को आतंकवादी कहते हैं, वे क्षत्रिय नहीं होते। भगवा का अपमान करने वालों, हिंदुत्व का अपमान करने वालों को राजा नहीं कहना चाहिए।”

किसान आंदोलन के नाम पर विपक्ष पार्टियों के नापाक इरादों पर भी उन्होंने सवाल उठाया। साध्वी ने कहा, “देश-विरोधी लोग इसमे शामिल हैं। यह किसान नहीं हैं, बल्कि उनके भेष में वामपंथी और कॉन्ग्रेसी छिपे हुए हैं। ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि यह किसान नहीं, अन्य प्रकार के लोग किसानों के भेष में आकर भ्रम फैला रहे हैं। ये लोग राष्ट्र विरोधी हैं।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए हमले के मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। तीनों अधिकारियों को डेप्युटेशन पर दिल्ली बुलाया गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जेपी नड्डा की सुरक्षा में लापरवाही के चलते शनिवार को ये कार्रवाई की।

गुरुवार (दिसंबर 10, 2020) को दक्षिण 24 परगना में एक कार्यक्रम के लिए डायमंड हार्बर की ओर जाते वक़्त बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था। इस हमले में बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर ईंट फेंकी गई थी। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए पूरी घटना की सूचना दी थी। इस घटना पर कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा था, “बंगाल पुलिस को पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी। लेकिन एक बार फिर बंगाल पुलिस नाकाम रही। सिराकोल बस स्टैंड के पास पुलिस के सामने ही TMC के गुंडों ने हमारे कार्यकर्ताओं को मारा और मेरी गाड़ी पर पथराव किया।”

‘2020 का सबसे बेहतर क्षण’: डल झील में कुछ जिंदगियाँ डूबने को थी, इस्लामी कट्टरपंथी और पाकिस्तानी मना रहे थे जश्न

वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी अक्सर हिंसा और त्रासदी पीड़ितों का भी मजाक बनाते हैं। खासकर, पीड़ित उनके विरोधी खेमे के हों। जम्मू-कश्मीर की भी एक ऐसी ही घटना को लेकर उन्होंने जम कर हँसी-मजाक किया। दरअसल, हुआ यूँ कि डल झील में पत्रकारों और भाजपा कार्यकर्ताओं को ले जा रही एक नाव पलट गई, जिस पर तरह-तरह के चुटकुले बनाए गए।

जम्मू-कश्मीर में फ़िलहाल DDC का चुनाव चल रहा है और 6 चरणों का मतदान समाप्त हो चुका है। ‘गुपकार गैंग’ के खिलाफ भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंकी हुई है। नाव में बैठे पत्रकार और भाजपा कार्यकर्ता पार्टी की एक रैली के लिए गए थे। वे रैली में से लौट रहे थे, तभी श्रीनगर स्थित डल झील में उनकी नाव पलट गई। इसके बाद किसी तरह से नाव पर सवार लोगों को पानी में डूबने से बचाया गया।

इस रैली में मुख्य रूप से केंद्रीय वित्त एवं वाणिज्य राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर उपस्थित थे, जिनके साथ भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और राज्य भाजपा के प्रभारी तरुण चुग ने शिरकत की। जो नाव पलटी, उसमें कुछ वीडियो जर्नलिस्ट्स और भाजपा कार्यकर्ता बैठे हुए थे। मौके पर मौजूद लोगों ने सभी को बचा लिया। कुछ पत्रकारों के कैमरे क्षतिग्रस्त हो गए। ये घटना डल झील की घाट संख्या 17 के पास हुई।

एक कट्टरपंथी ने ट्विटर पर ‘डल झील में भाजपा की डूबती नैया’ बताते हुए इस घटना की तस्वीर पोस्ट की। इरफ़ान नाम के व्यक्ति ने इसकी तस्वीरें डालते हुए लिखा कि मैं आपकी टाइमलाइन को शुभ कर रहा हूँ, अनुराग ठाकुर की रैली से लौटते समय भाजपा कार्यकर्ताओं की नाव डूब गई। समर नामक यूजर ने तंज कसा कि अब तो डल झील भी देशद्रोही हो गई है। उसने लिखा, “चलो, 2020 में कुछ तो अच्छा हुआ।”

वहीं पाकिस्तानी भी इस घटना को लेकर ‘जश्न’ मनाने में पीछे नहीं रहे। एक पाकिस्तानी महिला ने लिखा कि ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ में भाजपा नेताओं की नाव डूब गई। साथ ही उसने ‘उलटी करने वाला इमोजी’ डाल कर दावा किया कि इनके पानी में गिरने से अब डल झील भी प्रदूषित हो गया है। इसी घटना के दौरान एक महिला को बचाते हुए एक व्यक्ति की तस्वीर शेयर कर आदिम नामक यूजर ने लिखा कि भाजपा वाले ‘Titanic’ फिल्म का क्लाइमेक्स रिक्रिएट कर रहे हैं।

उसने लाफिंग इमोजी पोस्ट करते हुए लिखा, “मैं भी श्रीनगर से ही हूँ, लेकिन अफ़सोस कि ये नजारा लाइव नहीं देख पाया।” खुद को फोटो जर्नलिस्ट्स बताने वाले जुनैद ने लिखा कि भाजपा की शिकार रैली के दौरान ‘शिकारा ही पंडुक बन गया।’ खुद को अमेरिकी-कश्मीरी बताने वाले आफ़ाक़ ने लिखा कि ये ‘इस वर्ष का सबसे बेहतर क्षण’ है, जब पानी ने ‘भाजपा के खिलाफ बगावत कर दी।’ कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी ने भी इस तस्वीर को शेयर किया।

वहीं जम्मू-कश्मीर की पार्टी PDP के नेता नजमु साकिब ने दावा किया कि डल झील में आयातित कमल के फूल नहीं खिलते हैं। जम्मू-कश्मीर में जहाँ 31 सीटों के लिए जिला परिषद का चुनाव हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ 334 पंच और 77 सरपंच पदों के लिए भी चुनाव चल रहे हैं। 28 नवंबर से शुरू हुआ 8 फेज का ये चुनाव 19 दिसम्बर को खत्म होगा। अनुचहेड-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद ये पहला बड़ा चुनाव है।

इसी तरह से लिबरल गिरोह ने पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या का भी जश्न मनाया था। पश्चिम बंगाल में गुंडों द्वारा किए गए हमले के बाद भाजपा जनता युवा मोर्चा (BJYM) के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने ‘नहीं डरेंगे’ का नारा लगाया, इस दौरान बमबारी होती रही। इसके बावजूद तथाकथित कॉमेडियन कुणाल कामरा ने इस घटना का मजाक उड़ाया। कुणाल कामरा ने इसकी तुलना माउंटेन ड्यू के एडवर्टाइजमेंट से कर दी थी, जिसमें ‘डर के आगे जीत है’ वाला स्लोगन दिया गया था।