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‘किसान आंदोलन से निपटने के लिए सरकार ने सेना बुलाई, लगा दिए जैमर’: क्या है वायरल हो रही खबर का सच?

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के बीच तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही है। इसमें मीडिया भी पीछे नहीं है। ‘न्यूज़ नेशन टीवी’ ने अपनी एक खबर में दावा किया कि दिल्ली की सिंघु सीमा पर ‘किसान आंदोलन’ को देखते हुए जैमर लगाए गए हैं, ताकि नेटवर्क को बाधित किया जा सके। इसी तरह व्हाट्सप्प पर फैलाया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने किसानों से निपटने के लिए सेना बुला ली है।

व्हाट्सप्प पर वायरल हो रहे एक मैसेज में लिखा है, “आज रात दिल्ली में देश की सेना प्रवेश कर रही है। दो वीडियो गाजियाबाद टोल की है, दो वीडियो टोल के बाद की है। भीम सेना के चीफ नवाब सतपाल तँवर ने ये वीडियो खुद रिकॉर्ड किया है। किसान आंदोलन को कुचलने के लिए मोदी सरकार ने देश की सेना को बुला लिया है। शेयर कर दे पूरे देश को इसकी सूचना दें।” मैसेज के साथ ही एक वीडियो भी सर्कुलेट हो रहा है।

‘The Siasat Daily’ ने भी चलाई जैमर वाली खबर

वहीं एक अख़बार की खबर में बताया गया कि सोशल मीडिया पर ‘किसान आंदोलन’ से जुड़ी खबरें वायरल न होने पाएँ, इसीलिए जगह-जगह पर जैमर लगा दिया गया है। दावा किया गया कि लोग सिंघु सीमा से वीडियो लेकर सोशल मीडिया पर न डाल पाएँ, इसीलिए ऐसा किया गया। हालाँकि, इन दावों का सच कुछ और ही है। PIB ने अपने फैक्ट-चेक में इन दावों की पोल खोली और इन्हें झूठा बताया है।

PIB के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए, सेना को बुलाया गया है। एजेंसी ने कहा कि यह दावा फर्जी है। यह सैनिकों की नियमित आवाजाही का एक वीडियो है और किसान प्रदर्शन के साथ इसका कोई भी सम्बन्ध दुर्भावनापूर्ण और गलत है। जैमर वाले दावे को फर्जी बताते हुए PIB ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है।

उधर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के शीर्ष सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की। इनमें सुरक्षा विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के हिंसक होने की आशंका है। ऐसे में केंद्र सरकार पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखते हुए अधिकारियों को सतर्क रखना चाहती है। किसी भी प्रकार की हिंसा की वारदात को टालने की योजना बनाई जा रही है।

केरल के वन्नियामबलम मंदिर में जूते पहनकर घुसी बुर्के वाली महिला: धार्मिक भावनाएँ भड़काने के आरोप में शिकायत दर्ज

केरल के मलप्पुरम जिले के वन्नियामबलम मंदिर में जूते पहन कर प्रवेश करने वाली एक महिला के खिलाफ श्री त्रिपुरसुंदरी देवी मंदिर के सचिव सरथ कुमार ने शिकायत दर्ज करवाई है। ऑर्गेनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार महिला ने हिजाब पहन रखा था। हालाँकि, अभी तक महिला की पहचान नहीं हो पाई है। मंदिर परिसर में बैठी इस लड़की की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जिसमें वह मंदिर परिसर में जूता पहनकर बैठी हुई दिखाई दे रही है।

सरथ कुमार ने अपनी शिकायत में महिला पर जान-बूझकर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लड़की का अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 153, 153A और 295A के तहत दंडनीय है।

यहाँ पर ध्यान देने वाली बात है कि केरल के मलप्पुरम में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी है। जनगणना के आँकड़ों के मुताबिक यहाँ के लगभग 70% निवासी मुस्लिम हैं। दरअसल, मलप्पुरम को इस्लामवादी कट्टरवाद का अड्डा माना जाता है और मुस्लिम लीग की उपस्थिति की वजह से मलप्पुरम जिले में कट्टरता का विस्तार भी हुआ है।

इस साल की शुरुआत में खबर आई थी कि मलप्पुरम जिले के कुट्टिपुरम में एक कॉलोनी के हिंदू निवासियों को कथित तौर पर पीने के पानी से वंचित किया गया था और ऐतिहासिक नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर सरकार का समर्थन करने के लिए मुस्लिम समूहों द्वारा कथित रूप से बहिष्कार का सामना करना पड़ा था।

केरल का मुस्लिम बहुल मलप्पुरम जिला ग्रूमिंग जिहाद का फैक्ट्री है

हकीकत यह है कि कई विवादास्पद धार्मिक रूपांतरण केंद्रों का मुख्यालय इस जिले में है। 2016 की एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, कोझिकोड और मलप्पुरम में दो ज्ञात धर्मांतरण केंद्रों ने 2011 और 2015 के बीच 5,793 लोगों को इस्लाम में परिवर्तित किया। रिपोर्ट में कहा गया कि संभव है कि गैर-मान्यता प्राप्त धर्मांतरण केंद्रों में इससे अधिक लोगों का धर्म परिवर्तन किया गया हो।

हाल ही में सिरो मालाबार चर्च, केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल और कई ईसाई संगठनों ने केरल में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) मामलों की बढ़ती संख्या पर अपनी चिंता व्यक्त की थी। पिछले कुछ वर्षों से यह भी आरोप लग रहे हैं कि केरल में ऐसी ताकतें सक्रिय हैं, जो युवा महिलाओं को निशाना बना रही हैं, ‘धार्मिक अध्ययन’ के नाम पर उनका ब्रेनवॉश करके जबरन धर्मांतरण करवा रही है। इसके बाद उन्हें सेक्स स्लेव्स के रुप में आईएसआईएस के पास भेजा जाता है।

कोलकाता में RSS के मुखिया मोहन भागवत: दुर्गापुर में पार्टी वर्कर के घर धमाका, TMC ने बीजेपी को बताया जिम्मेदार

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले जारी राजनीतिक हिंसा के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत दो दिन के दौरे पर कोलाकाता पहुँचे हैं। इससे पहले पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर से हिंसा की घटना सामने आई थी।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ शुक्रवार (11 दिसंबर 2020) रात दुर्गापुर में सत्ताधारी टीएमसी के एक कार्यकर्ता के घर आग लग गई। पार्टी ने फायर बम फेंकने का आरोप बीजेपी पर लगाया है।

टीएमसी कार्यकर्ता के अनुसार, “हम एक घर में बैठे थे तभी हमारे बीच एक फायरबॉम (firebomb) फेंका गया। इस हमले की वजह से एक गाय घायल हो गई। मुझे लगता है कि भाजपा कार्यकर्ता इस बात को लेकर गुस्सा हैं कि मैं टीएमसी कार्यकर्ता हूँ और यहाँ के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हूँ।” वहीं दूसरी तरफ भाजपा कार्यकर्ताओं ने टीएमसी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 

भाजपा कार्यकर्ता ने इस घटना पर अपना पक्ष रखते हुए कहा, “हमारी पार्टी के कार्यकर्ता वहाँ पर आग बुझाने में मदद करने के लिए गए थे। यह नियम बन गया है कि प्रदेश के भीतर होने वाली किसी भी तरह की अव्यवस्था के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा दिया जाए। हमें उम्मीद है कि घटना के असल षड्यंत्रकारियों पर कार्रवाई होगी। हमें पूरा भरोसा है कि आगामी विधानसभा चुनावों में इस दमनकारी सरकार का अंत होगा।”        

इन सब के बीच आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत भी बंगाल की राजधानी स्थित संगठन के कार्यालय पहुँचे हैं। उनका यह दौरा दो दिवसीय होगा। प्रदेश में जारी सियासी गर्मागर्मी के बीच इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि गुरुवार (दिसंबर 10, 2020) को दक्षिण 24 परगना में एक कार्यक्रम के लिए डायमंड हार्बर की ओर जाते वक़्त बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था। इस हमले में बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी पर ईंट फेंकी गई थी। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए पूरी घटना की सूचना दी थी। 

इस घटना पर कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा था, “बंगाल पुलिस को पहले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी। लेकिन एक बार फिर बंगाल पुलिस नाकाम रही। सिराकोल बस स्टैंड के पास पुलिस के सामने ही TMC के गुंडों ने हमारे कार्यकर्ताओं को मारा और मेरी गाड़ी पर पथराव किया।” काफिले पर हुए हमले को लेकर बंगाल पुलिस ने कहा था कि किसी को कुछ नहीं हुआ है और सभी लोग सुरक्षित हैं। 

जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र की नई सुबहः पहली बार शरणार्थी, गोरखा, वाल्मीकि समुदाय के लोग भी डालेंगे वोट

पिछले दिनों केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की नई अधिवास नीति, मीडिया नीति, भूमि स्वामित्व नीति और भाषा नीति में बदलाव करते हुए शेष भारत से उसकी दूरी और अलगाव को खत्म किया गया है। भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर राजभाषा अधिनियम-2020 लागू करते हुए पाँच भाषाओं- कश्मीरी, डोगरी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी को राजभाषा का दर्जा दिया है। बहुप्रयुक्त स्थानीय भाषाओं को राजभाषा का दर्जा मिलने से न सिर्फ इन भारतीय भाषाओं का विकास हो सकेगा, बल्कि शासन-प्रशासन में जनभागीदारी भी बढ़ेगी।

बहुत जल्दी जम्मू-कश्मीर की औद्योगिक नीति भी घोषित होने वाली है। अब वहाँ त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिला विकास परिषद के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने अक्टूबर महीने में पंचायती राज से सम्बंधित 73 वें संविधान संशोधन को जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह लागू कर दिया था। राज्य में यह कानून पिछले 28 वर्ष से लंबित था। पंचायती राज व्यवस्था न सिर्फ लोकतान्त्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव है, बल्कि स्वशासन और सुशासन की भी पहचान भी है।

जम्मू-कश्मीर के नए उप राज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने ‘चलो गाँव की ओर’ और ‘माइ सिटी, माइ प्राइड’ जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत करके शासन-प्रशासन को जनता से जोड़ने और उसे संवेदनशील बनाने की पहल की है। यह कार्यक्रम विकास योजनाओं में जनभागीदारी पर बल देने वाले हैं। सभी हितधारकों ख़ासकर आम नागरिकों में भरोसा पैदा करके और उन्हें साथ जोड़कर ही सरकारी योजनाओं का सफल कार्यान्वयन संभव है।

जम्मू-कश्मीर भू-स्वामित्व कानून में बदलाव के बाद उनके द्वारा आयोजित ‘निवेशक सम्मेलन’ का विशेष महत्व है। इस सम्मेलन में देश के 30 शीर्षस्थ उद्योगपतियों ने भागीदारी करते हुए जम्मू-कश्मीर में भारी आर्थिक निवेश के प्रति आश्वस्त किया है। निश्चय ही, यह निवेशक सम्मलेन नई संभावनाओं का सूत्रपात करने वाला है। 30 अक्टूबर, 2020 को उनके द्वारा जम्मू-कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री के के शर्मा की नियुक्ति के साथ ही जम्मू-कश्मीर में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया की बहाली की हलचल तेज हो गई।

लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में सभी नागरिकों की विश्वास बहाली और भागीदारी सुनिश्चित करना किसी भी राज्य का सर्वप्रमुख कर्तव्य है और यही उसकी सबसे बड़ी चुनौती भी है। आज केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर इस कर्तव्य को पूरा करने की चुनौती स्वीकार करने की दिशा में अग्रसर है। इसीलिए वहाँ त्रि-स्तरीय पंचायती राज्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण और सबसे बड़े सोपान जिला विकास परिषद के चुनाव पहली बार कराए जा रहे हैं।

4 नवम्बर, 2020 को जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, 28 नवम्बर से 22 दिसम्बर के बीच 8 चरणों में जिला विकास परिषद चुनाव और पंचायत और स्थानीय निकायों के उपचुनाव संपन्न होंगे। जम्मू-कश्मीर में 20 जिले हैं। प्रत्येक जिले को 14 निर्वाचन-क्षेत्रों में बाँटा गया है। पंचायती और जिला विकास परिषद चुनाव मतपत्रों द्वारा और स्थानीय निकाय चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों द्वारा सुबह 7 बजे से दोपहर दो बजे के बीच संपन्न होगी।

इतिहास में पहली बार पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, गोरखा और वाल्मीकि समुदाय के लोग भी मतदान कर सकेंगे। अभी तक ये अभागे और उपेक्षित समुदाय राज्य के चुनावों में मतदान के अपने लोकतान्त्रिक अधिकार से वंचित रहे हैं। अभी तक पाँच चरण के चुनाव हो चुके हैं। फिलहाल ये चुनाव लगभग शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो रहे हैं, क्योंकि शासन ने सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की है।

प्रत्येक प्रत्याशी को शासन की ओर से सुरक्षा मुहैय्या कराई गई है ताकि वह बेख़ौफ़ होकर लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में भागीदारी कर सके। अनेक पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद और पूर्व विधायक भी जिला विकास परिषद चुनाव लड़ रहे हैं। इन चुनावों में जम्मू-कश्मीर की जनता भी बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रही है। अभी तक मतदान का प्रतिशत भी उत्साहजनक है। जम्मू संभाग में जहाँ औसत मतदान 65 प्रतिशत के आसपास है, वहीं कश्मीर संभाग में यह 40 प्रतिशत के आसपास है।

भारतीय जनता पार्टी, कॉन्ग्रेस, पैंथर्स पार्टी जैसे दल तो इन चुनावों में जोर-आजमाइश कर ही रहे हैं। इनके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेस, पीडीपी, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी जैसे कई चिर- प्रतिद्वंद्वी दल ‘पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लरेशन’ के बैनर तले गठबंधन बनाकर जिला विकास परिषद का चुनाव लड़ रहे हैं। यह मतलबपरस्तों और जम्मू-कश्मीर के लुटेरों का मौकापरस्त गठजोड़ मात्र है।

पहले गुपकार गठजोड़ चुनाव में भागीदारी को लेकर असमंजस में था और चुनाव बहिष्कार की योजना बना रहा था किन्तु बाद में उन्हें लगा कि कहीं चुनाव बहिष्कार करके वे भी अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की तरह अलग-थलग पड़कर अप्रासंगिक न हो जाएँ और ‘राजनीतिक स्पेस’ को नए खिलाड़ी घेर लें, इसलिए वे गठबंधन बनाकर पूरी मजबूती से यह चुनाव लड़ रहे हैं और इन चुनावों के परिणामों के माध्यम से कोई बड़ा राजनीतिक सन्देश देने की फिराक में हैं।

हालाँकि, इन चुनावों का वास्तविक और सबसे बड़ा सन्देश राज्य में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया की बहाली और उसमें व्यापक जन भागीदारी ही होगा। आतंकवादी और अलगाववादी संगठनों को ठेंगा दिखाते हुए न सिर्फ भारी संख्या में लोग चुनाव लड़ रहे हैं, बल्कि पूर्ववर्ती चुनावों से कहीं ज्यादा मतदान भी कर रहे हैं। जनता के इस मूड को भाँपकर ही ‘पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लरेशन’ को चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। किन्तु जिन मंसूबों के तहत यह अवसरवादी, अपवित्र और बेमेल गठबंधन चुनाव लड़ रहा है, वे इस चुनाव से पूरे नहीं होंगे, क्योंकि इन चुनावों के परिणाम से ज्यादा महत्वपूर्ण इस प्रक्रिया में जनता की भागीदारी और इसका समयबद्ध, शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न होना है।

‘रोशनी एक्ट’ के अंधेरों से जम्मू-कश्मीर का आम नागरिक परिचित है। नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और कॉन्ग्रेस के तमाम राजनेताओं, नौकरशाहों और उद्योगपति भूमाफियाओं ने इस एक्ट की आड़ में बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि को हड़प लिया था। अब उस जमीन का हिसाब-किताब किया जा रहा है और उसे इनके कब्जे से मुक्त कराकर आम जनता की आवश्यकताओं और हितों के अनुरूप उपयोग किया जाएगा।

रोशनी एक्ट भूमि घोटाला न सिर्फ सरकारी भूमि की लूट का मामला था बल्कि जम्मू संभाग की जनसांख्यिकी को बदलने की सुनियोजित साजिश भी थी, इसलिए जम्मू संभाग में धर्म विशेष के लोगों के अलावा रोहिंग्या और बंगलादेशी घुसपैठियों को भी बड़ी तादाद में सरकारी जमीन पर बसाया गया।

ऐसी तमाम असंवैधानिक और सांप्रदायिक नीतियों के पर्दाफाश और अंधेरगर्दी और अराजकता पर अंकुश लगने से घबराए हुए नेशनल कॉन्फ्रेस और पी डी पी जैसे चिर-प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल गुपकार घोषणापत्र के बहाने एक मंच पर आ गए हैं। अनुच्छेद 370 की बहाली के फारुख अब्दुल्ला द्वारा चीन से सहायता लेने की बात करना और महबूबा मुफ़्ती द्वारा अनुच्छेद 370 की बहाली तक तिरंगा न उठाने की बात कहना इनकी राष्ट्रभक्ति और असल इरादों का खुलासा करते हैं।

राज्य में लोकतान्त्रिक प्रक्रिया शुरू हो जाने और शांति बहाल हो जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में पूँजी निवेश और विकास की अपार संभावनाएँ हैं। जिला विकास परिषद् चुनाव लोकतान्त्रिक प्रक्रिया की बहाली की दिशा में उठाया गया पहला और निर्णायक कदम है।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर की राज्य विधान-सभा में क्षेत्रीय असंतुलन रहा है। इसलिए चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव कराने से पहले वहाँ विधान-सभा क्षेत्रों का परिसीमन करा रहा है। यह परिसीमन कार्य अगले वर्ष तक पूरा होने की सम्भावना है। परिसीमन प्रक्रिया के पूर्ण हो जाने के बाद लोकतान्त्रिक व्यवस्था और विकास-प्रक्रिया में सभी क्षेत्रों और समुदायों का समुचित प्रतिनिधित्व और भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

शासन-प्रशासन की कश्मीर केन्द्रित नीति भी संतुलित हो सकेगी और अन्य क्षेत्रों के साथ होने वाले भेदभाव और उपेक्षा की भी समाप्ति हो जाएगी। ये सारी कोशिशें जम्मू-कश्मीर को न सिर्फ आपस में जोड़ने बल्कि उसे शेष भारत और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रतिफलन है।

चीन से यूपी आएगी सैमसंग की फैक्ट्री, OLED डिस्प्ले बनाने वाला तीसरा देश बनेगा भारत: ₹4825 करोड़ का निवेश

योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश निवेश का नया हब बन रहा है। तकनीकी कंपनियाँ भी इसे अपनी पहली पसंद बना रही हैं। विश्व की दिग्गज आईटी कंपनियों में गिनी जाने वाली सैमसंग ने भी उत्तर प्रदेश में मोबाइल डिस्प्ले उत्पादों के निर्माण का निर्णय लिया है। सैमसंग ने अपनी OLED डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को चीन से हटा कर यूपी के नोएडा में स्थापित करने का फैसला किया है। इससे प्रदेश में कुल 4825 करोड़ रुपए का निवेश होगा।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना के साथ ही भारत अब OLED तकनीक से निर्मित होने वाले मोबाइल डिस्प्ले उत्पादों का निर्माण करने वाले दुनिया का तीसरा देश होगा। यूपी के निवेश मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि योगी कैबिनेट की बैठक में 4825 करोड़ रुपए की लागत वाले सैमसंग डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को शुक्रवार (दिसंबर 11, 2020) को मँजूरी दे दी गई।

उन्होंने कहा, “यह इलेक्ट्रॉनिक निवेश चीन से भारत पुनर्स्थापित किया जा रहा है। यह भारत का सबसे बड़ा ऐसा प्लांट होगा। भारत दुनिया का तीसरा राष्ट्र होगा, जहाँ OLED मोबाइल डिस्प्ले का प्लांट लगेगा।” उन्होंने आगे बताया कि भारी-भरकम निवेश और औद्योगिक विकास को देखते हुए योगी सरकार ने सैमसंग के इस प्रोजेक्ट को विशेष प्रोत्साहन देने का फैसला किया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भी आईटी कंपनियों को प्रोत्साहन देने के मामले में गंभीर है।

योगी सरकार ने कहा कि पीएम मोदी की इसी सोच को यूपी में भी अमल में लाया जा रहा है। भारत के अलावा सैमसंग सिर्फ वियतनाम, चीन और दक्षिण कोरिया में ही मोबाइल डिस्प्ले का निर्माण करती है। अब यूपी के नोएडा में इसका निर्माण होगा। कैबिनेट के फैसले के अनुसार, ‘मेसर्स सैमसंग डिस्प्ले नोएडा प्राइवेट लिमिटेड को ‘उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति-2017’ के तहत पूँजी उपादान, भूमि हस्तान्तरण पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट की सुविधा दी गई है।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, चीन से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश आ रही इस परियोजना को पूँजी उपादान के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के हिसाब से स्थिर पूँजी निवेश में पुरानी मशीनों की लागत को भी अनुमति प्रदान की जाएगी। इस यूनिट से 1500 लोगों को सीधा रोजगार प्राप्त होगा। कंपनी को भारत सरकार की ‘स्कीम फॉर प्रोमोशन ऑफ मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेन्ट्स एण्ड सेमीकण्डक्टर्स’ का भी लाभ मिलेगा।

टीवी, मोबाइल फोन, टैबलेट और घड़ियों सहित आजकल के कई उपकरणों में डिस्प्ले का प्रयोग होता है और समय के साथ इसमें लगातार बदलाव हो रहा है। सैमसंग 70% से अधिक वियतनाम, चीन और दक्षिण कोरिया में ही निर्मित किया जाता है। वैसे भी 27 बिलियन डॉलर के साथ मेसर्स सैमसंग उत्तर प्रदेश के सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। अगले 5 वर्षों में वो कुल 50 बिलियन डॉलर (3.68 लाख करोड़ रुपए) का निवेश करने वाला है।

ज्ञात हो कि कोरोना काल में जब वैश्विक स्तर पर मंदी के बादल घने होते जा रहे थे, उस दौर में भी उत्तर प्रदेश बेहतर निवेश और कारोबार के केंद्र के रूप में उम्मीद की किरण बनकर उभरा। यह योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि है कि औद्योगिकीकरण की ओर कदम बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश ने विदेशी कंपनियों को खास तौर पर आकर्षित किया है। सिर्फ कोरोना काल में ही 28 विदेशी कंपनियों ने लगभग 9000 करोड़ रुपए उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए करार किया है।

मंडी, मंडी से बाहर, डिजिटल प्लेटफार्म, जहाँ मन हो वहाँ बेचिए अपनी पैदावारः PM मोदी ने किसानों को गिनाए कृषि कानूनों के फायदे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI India)’ की 93वीं वार्षिक आम बैठक को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि हम लोगों ने 20-20 के मैच में तेजी के साथ बहुत कुछ बदलते देखा है, लेकिन 2020 के इस वर्ष ने सभी को मात दे दी है। कोरोना महामारी की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस साल न जाने उतार-चढ़ाव के कितने ही मौके आए। उन्होंने कृषि कानूनों पर बात करते हुए किसान वर्ग को भी समझाया।

उन्होंने बताया कि भारत में रिकवरी का औसत अच्छा है और ये शुभ संकेत है। FICCI India के सम्मलेन में पीएम मोदी ने कहा कि इतने उतार-चढ़ाव से देश और दुनिया गुजरी है कि कुछ वर्षों बाद जब हम कोरोना काल को याद करेंगे तो शायद यकीन ही नहीं आएगा। लेकिन, अच्छी बात ये रही कि जितनी तेजी से हालात बिगड़े, उतनी ही तेजी के साथ सुधर भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक क्षेत्र उम्मीद जगा रहा है।

प्रधानमंत्री ने सभी के भीतर आत्मविश्वास जगाते हुए कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में देश ने काफी कुछ सीखा है और इससे हमारी आकांक्षाओं को बल ही मिला है। उन्होंने उद्यमियों, किसानों और युवाओं को इसका क्रेडिट दिया। उन्होंने कहा कि जो देश ज्यादा से ज्यादा लोगों की जिंदगियाँ बचा सकता है, वो सभी आर्थिक क्षेत्रों में भी पुनः विकास की स्थिति ला सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वैश्विक महामारी में भारत ने सबसे ज्यादा प्राथमिकता एक ही चीज को दी- लोगों की जान बचाने में।

कोरोना काल में भी FDI और PFI में रिकॉर्ड विदेशी निवेश आए। पीएम मोदी ने इसके लिए ख़ुशी जताई। उन्होंने कहा कि भारत का प्राइवेट सेक्टर न सिर्फ हमारी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, बल्कि एक वैश्विक छवि भी बना सकता है। उन्होंने आत्मनिर्भर अभियान की बात करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य है- भारतीय इंडस्ट्रियों को प्रतियोगी बनाना और देश में उत्तम गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट्स का उत्पादन करना।

उन्होंने कहा कि इस महामारी के समय भारत ने अपने नागरिकों के जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, ज्यादा से ज्यादा लोगों का जीवन बचाया। आज इसका नतीजा देश भी देख रहा है और दुनिया भी देख रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने जिस तरह बीते कुछ महीनों में एकजुट होकर काम किया, नीतियाँ बनाई, निर्णय लिए हैं, स्थितियों को सँभाला है, उसने पूरी दुनिया को चकित करके रख दिया है। उन्होंने कहा कि अब इंस्पेक्टर राज और टैक्स टेररिज्म का जमाना जा चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने FICCI India के सम्मलेन में शामिल लोगों को भारत के कॉर्पोरेट टैक्स को लेकर भी आश्वस्त किया कि ये अन्य देशों के मुकाबले सबसे ज्यादा प्रतियोगी है। उन्होंने कहा कि एक वाइब्रेंट अर्थव्यवस्था में एक सेक्टर के विकास का असर दूसरे सेक्टर पर पड़ता है। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार विकास के रास्ते में आने वाली बाधाओं को हटा रही है और कृषि सेक्टर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि पिछले 6 वर्षों में भारत ने भी ऐसी ही सरकार देखी है, जो सिर्फ और सिर्फ 130 करोड़ देशवासियों के सपनों को समर्पित है और जो हर स्तर पर देशवासियों को आगे ले जाने के लिए काम कर रही है। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ अभियान चल रहा है और इससे किस तरह दुनिया प्रभावित हुई है, उन्होंने इसकी भी चर्चा की और कहा कि छोटे ठेले वालों तक को भी डायरेक्ट पेमेंट्स मिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि हर महीने 4 लाख करोड़ रुपए का UPI से लेनदेन होते हैं और हर साल ये रिकॉर्ड टूट रहा है। उनके मुताबिक, सबसे बड़ी बात तो ये है कि ग्रामीण भारत में शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा सक्रिय इंटरनेट यूजर्स हैं। इसी तरह से Tier-II और Tier-III शहरों में सबसे ज्यादा स्टार्टअप्स खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एग्रीकल्चर सेक्टर और उससे जुड़े अन्य सेक्टर जैसे एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर हो, फ़ूड प्रोसेसिंग हो, स्टोरेज हो, कोल्ड चैन हो इनके बीच हमने दीवारें देखी हैं। साथ ही बताया कि अब सभी दीवारें हटाई जा रही हैं, सभी अड़चनें हटाई जा रही हैं। उन्होंने कहा:

“इन रिफॉर्म्स के बाद किसानों को नए बाजार मिलेंगे, नए विकल्प मिलेंगे, टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा, देश का कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होगा। इन सबसे कृषि क्षेत्र में ज्यादा निवेश होगा। इन सबका सबसे ज्यादा फायदा मेरे देश के किसान को होने वाला है। आज देश का किसान मंडियों में, मंडी से बाहर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर, हर जगह अपने उत्पाद बेच सकता है। किसानों की आय बढ़ा कर उन्हें समृद्ध करने के लिए हम हर कदम उठा रहे हैं। इसी तरह पीएम-वाणी योजना के तहत देशभर में सार्वजनिक WiFi हॉटस्पॉट्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे गाँव-गाँव में कनेक्टिविटी का व्यापक विस्तार होगा। मेरा आपसे आग्रह है कि रूरल और सेमी रूरल क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी के इन प्रयासों में भागीदार बनें।”

FICCI India के वार्षिक सम्मलेन में पीएम मोदी ने कहा कि देश के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बीते वर्षों में तेजी से काम किए गए हैं। इससे भारत का एग्रीकल्चर सेक्टर पहले से कहीं अधिक वाइब्रेंट हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि 21वीं सदी के भारत के विकास को गाँव और छोटे शहर ही सपोर्ट करने वाले हैं। उद्यमियों को प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि उन्हें गाँव और छोटे शहरों में निवेश का मौका बिल्कुल नहीं गँवाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इन सारे प्रयासों का लक्ष्य यही है कि किसानों की आय बढ़े, देश का किसान समृद्ध हो। जब देश का किसान समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा। बता दें कि ‘कृषि आंदोलन’ के नाम पर दिल्ली दंगों और भीमा-कोरेगाँव हिंसा के आरोपितों का समर्थन हो रहा है। साथ ही प्रदर्शन तेज होने के साथ हिंसा की भी आशंका जताई जा रही है, जिस कारण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की है।

शोएब खान ने पहचान छिपा 15 साल की लड़की से दोस्ती की, अगवा कर निकाह की कोशिश; दिल्ली पुलिस ने दबोचा

दिल्ली पुलिस ने शोएब खान (18) को पहचान बदल कर नाबालिग लड़की को झाँसा देने, अपहरण और जबरन निकाह की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया है। देश में ‘ग्रूमिंग/लव जिहाद’ की स्थिति दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही है, जिसमें कट्टरपंथी मुस्लिम गैर-मुस्लिम महिलाओं को अपना निशाना बनाते हैं। ठीक इसी कड़ी में यह घटना सामने आई है। 

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ शोएब खान ने फेसबुक पर फर्ज़ी नाम के ज़रिए 15 साल की लड़की से दोस्ती की। इसके बाद उसने नाबालिग का अपहरण किया और जबरन निकाह करने का दबाव बनाया। लेकिन बहुत जल्द नाबालिग लड़की को खोज लिया गया। पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर राजौरी पुलिस गार्डेन पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

ग्रूमिंग जिहाद का बढ़ता भय

पिछले महीने दिल्ली के हिन्दू युवक ने गोंडा, उत्तर प्रदेश की मुस्लिम महिला पर आरोप लगाया था कि शादी के पहले महिला ने अपनी छुपाई और पहचान सामने आने पर इस्लाम स्वीकार करने का दबाव भी बनाया। दोनों की बातचीत फेसबुक पर शुरू हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मुस्लिम महिला फेसबुक पर बातचीत के दौरान प्रताड़ित होने का नाटक करती थी। महिला का कहना था कि पहले वह हिन्दू थी लेकिन उसके माता-पिता ने उसके साथ बहुत बुरा बर्ताव करते थे। दोनों की शादी होने के बाद महिला अपने पिता के घर वापस चली गई। 

युवक ने आरोप लगाया कि जब वह माँ के साथ अपनी पत्नी को लेने के लिए गोंडा गया तब पुलिस वालों ने उसे धमकाया और 80,000 रुपए देने की बात कही। इसके बाद महिला के परिजनों ने युवक और उसकी माँ को कमरे में बंद कर बंधक बना लिया। फिर युवक के सामने उसकी माँ को जान से मारने की धमकी देकर उससे इस्लाम कबूल कराया। धर्मांतरण के बाद उसका निकाह भी कराया गया, युवक ने मुस्लिम महिला के परिजनों पर पूरी घटना को अंजाम देने आरोप लगाया था। 

एक अन्य घटना में गोलू खान नाम के आरोपित ने हिन्दू बन कर एक नाबालिग को बहलाया-फुसलाया और उस पर इस्लाम स्वीकार करने का दबाव बनाया और अंत में उससे निकाह किया। इस घटना को अंजाम देने के दौरान लोगों के सामने हिन्दू नज़र आने के लिए उसने तिलक लगाया और कलेवा भी पहना।   

ऐसे ही एक और मामले में बलिया के इमरान खान ने अपना मज़हब छुपा कर नाबालिग लड़की को झाँसे में लिया। इसके बाद वह नाबालिग के साथ भागने में कामयाब भी रहा, लेकिन नाबालिग के रिश्तेदारों ने उसे धर दबोचा। अंत में उसकी गिरफ्तारी हुई थी और उस पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। ऐसे ही एक और मामले में मुस्लिम युवक ने अपनी पहचान हिन्दू बता कर एक दलित युवती से संबंध बनाए और शादी करने की बात पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा।     

इस तरह के मामलों की सूची अनंत है। अब राजनीतिक दलों पर ऐसे मामलों का संज्ञान लेने का दबाव है। भाजपा शासित राज्यों की सरकारें इस तरह के मामलों को रोकने के लिए क़ानून लेकर भी आ रही हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस मुद्दे पर अध्यादेश लागू कर चुकी है। वहीं मध्य प्रदेश में इस क़ानून को अंतिम सूरत देने की तैयारियाँ अंतिम चरण में है।    

शिवसेना MLA प्रताप सरनाईक के घर से मिला पाकिस्तानी महिला का क्रेडिट कार्ड: कैलिफोर्निया का बैंक, पता विधायक के घर का

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच कर रहा है। इसी बीच उनके आवास से पाकिस्तानी नागरिक का एक क्रेडिट कार्ड बरामद हुआ है। इस क्रेडिट कार्ड पर उनके ही आवास का पता लिखा है। इसके बरामद होने के बाद सम्बंधित बैंक को ED ने डिटेल्स के लिए लिखा है। साथ ही प्रताप सरनाईक से क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट भी माँगा है। इस मामले में अभी और डिटेल्स आने बाकी हैं।

‘CNN-News 18’ की खबर के अनुसार, प्रताप सरनाईक के आवास से जो क्रेडिट कार्ड बरामद हुआ है, वो एक पाकिस्तानी नागरिक के नाम पर है। जिसके नाम का क्रेडिट बना हुआ है, वो एक महिला है। उसके पति का नाम फरहाद है। ये दोनों ही पाकिस्तानी नागरिक हैं। ये क्रेडिट कार्ड किसी भारतीय बैंक का नहीं है। ये क्रेडिट कार्ड कैलिफोर्निया के एक बैंक का है। ED अभी और डिटेल्स खँगालने में लगी हुई है।

प्रताप सरनाईक के घर छापेमारी के बाद बड़ा खुलासा (वीडियो साभार: CNN-News 18)

इससे पहले गुरुवार (दिसंबर 10, 2020) को भी ED ने प्रताप सरनाईक से 6 घंटे पूछताछ की थी। वो 175 करोड़ रुपए के घोटाले में फँसे हुए हैं, जिसका सीधा सम्बन्ध Tops Group नामक कम्पनी से है। इस कम्पनी के CEO को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। शिवसेना विधायक के बेटे को भी ED ने हिरासत में लिया था। इससे पहले दो बार पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बावजूद सरनाईक नहीं पहुँचे थे।

हालाँकि, उनका कहना है कि अगर सचमुच कोई मनी लॉन्ड्रिंग हुई है तो वो इस मामले में ED के अधिकारियों के साथ हैं। वे और उनका परिवार इस जाँच में पूरी तरह सहयोग करेगा। उन्होंने अपने बेटे और साले के साथ सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था, जहाँ उन्होंने माँग की थी कि उन्हें अपने वकीलों के समक्ष पूछताछ की अनुमति दी जाए। उनके बेटे को भी ED ने 5 बार समन जारी किया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के सबसे करीबी दोस्त अमित चंदोल को भी गिरफ्तार कर चुकी है। अमित की गिरफ्तारी टॉप्स ग्रुप सिक्योरिटी कंपनी में गलत तरीके से निवेश करने के मामले में हुई। बताया गया है कि ये घोटाला एक डील को लेकर है, जिसका कुछ हिस्सा विधायक तक भी पहुँचा था। टॉप्स ग्रुप और प्रताप सरनाईक के बीच इस डील को लेकर कोई लिखित कॉन्ट्रैक्ट नहीं हुआ था। 

हैदराबाद से 5 औरतों को सैफी ने दुबई भेजा, वहाँ सफीर ने ₹2 लाख में बेचा: पीड़ित परिवारों ने मोदी सरकार से लगाई बचाने की गुहार

हैदराबाद की 5 महिलाएँ दुबई में फँस गई हैं है। इन महिलाओं के परिवारों के मुताबिक़ एक ट्रैवल एजेंट की धोखाधड़ी की वजह से ऐसा हुआ। शुक्रवार (11 दिसंबर 2020) को इन पाँचों महिलाओं ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई।

इस घटना के संबंध में एएनआई से बात करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमजद उल्लाह खान ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया, “तेलंगाना हैदराबाद स्थित मिसरीगंज के लोकल एजेंट सैफी ने हैदराबाद की ही 5 महिलाओं को दुबई के एक शॉपिंग मॉल में नौकरी दिलाने की बात कही थी। अक्टूबर 2020 में उसने पाँचों महिलाओं को तीन महीने के वीज़ा पर दुबई भेजा और फिर उन्हें दुबई की लेबर रिक्रूटमेंट कंपनी में काम करने वाले अल सफीर को सौंप दिया। इसके बाद प्रत्येक महिला को 2 लाख रुपए में बतौर घरों में काम करने वाली नौकरानी, अरब परिवारों को बेच दिया गया।” 

15 घंटे काम और यौन शोषण

महिलाओं के हालात का ज़िक्र करते हुए अमजद उल्लाह ने बताया, “इन महिलाओं को पर्याप्त खाना और रहने की जगह दिए बिना ही इनसे 15 घंटे तक काम करवाया जाता है। इन महिलाओं को बातें नहीं सुनने पर यातनाएँ दी जाती हैं और अक्सर यौन शोषण तक किया जाता है। ये जब से दुबई गई हैं तब से ही इन्हें वेतन भी नहीं मिला है।” 

उन्होंने भारत सरकार से निवेदन किया वह जल्द से जल्द इस मामले में दखल देकर मदद करें। अबू धाबी, यूएई में मौजूद भारतीय दूतावास और दुबई में मौजूद भारतीय वाणिज्य दूतावास मदद के लिए आगे आए ताकि इन महिलाओं को इस मुश्किल से बचाया जा सके और इनकी देश वापसी संभव हो सके। 

पीड़ित अमरीन बेग़म की बहन समीना बेग़म ने एएनआई से बात करते हुए कहा, “एक लोकल एजेंट सैफी के माध्यम से मेरी बहन दुबई गई थी। उसने हमें फोन करके बताया कि वह मुश्किल में है। उसके अलावा 4 और ऐसे लोग हैं जो इस षड्यंत्र का शिकार हुए हैं। जब हमें इस बात की जानकारी मिली तब हमने उस लोकल एजेंट से संपर्क किया और सभी को वापस बुलाने की बात कही। उसने ऐसा करने के लिए 1.50 लाख रुपए माँगे। हमारा परिवार बहुत गरीब है, हम उन्हें वापस बुलाने के लिए इतने रुपए नहीं दे सकते हैं। हमने भारत सरकार से निवेदन किया है कि उन सभी को सुरक्षित वापस भारत बुला लें।”  बदरून्निसा का कहना है कि सैफी ने उनकी बेटी को काम के लिए दुबई भेजा और अब उसे वहाँ प्रताड़ित किया जा रहा है।

दिल्ली में ‘किसान आंदोलन’ के बीच हिंसा की आशंका, अमित शाह ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ की बैठक

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के शीर्ष सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की। इनमें सुरक्षा विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के हिंसक होने की आशंका है। ऐसे में केंद्र सरकार पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखते हुए अधिकारियों को सतर्क रखना चाहती है। किसी भी प्रकार की हिंसा की वारदात को टालने की योजना बनाई जा रही है।

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ कट्टरपंथी तत्व घुस गए हैं और वो न सिर्फ इस विरोध-प्रदर्शन को लम्बे समय तक चलाना चाहते हैं, बल्कि हिंसा को भी बढ़ावा देना चाहते हैं। उनका मकसद है कि इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव होगा और अराजकता की स्थिति बनेगी। ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया है कि कम से कम ऐसे 10 संगठन इस आंदोलन में घुस चुके हैं।

किसान संगठनों ने अब पूरी तरह तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग रख दी है, जबकि केंद्र सरकार MSP और APMC पर लिखित में आश्वासन देने के अलावा उनके सुझाव अनुसार संशोधनों के लिए भी तैयार है। सरकार अभी भी बातचीत के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्रियों नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और अमित शाह के साथ बातचीत के बावजूद किसान नहीं माने। शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को देश भर में प्रदर्शन के साथ-साथ दिल्ली-जयपुर हाइवे को जाम किया जा रहा है

किसान संगठनों ने धमकाया है कि सोमवार को इससे भी बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया जा सकता है। ये भी जानने लायक बात है कि इन्होंने ‘जेल में बंद बुद्धिजीवियों, लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले एक्टिविस्ट्स और छात्र नेताओं’ की रिहाई की माँग भी रखी हुई है। हिंसा की संभावना को देखते हुए गुरुग्राम में 3500 और फरीदाबाद में 2000 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। हरियाणा के इन दोनों क्षेत्रों की सीमाएँ दिल्ली से लगती हैं।

शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर तीनों कानूनों को एकपक्षीय बताया। कई याचिकाओं के दायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहले ही केंद्र को नोटिस जारी कर चुका है। अगले कुछ दिनों में भाजपा इन कानूनों के फायदे जन-जन तक पहुँचाने के लिए 100 अलग-अलग जगहों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी और किसानों के साथ 700 बैठकों के माध्यम से उन्हें भ्रामक अभियान के विरुद्ध सजग करेगी।

किसानों ने कट्टर वामपंथियों द्वारा उनके आंदोलन को हाइजैक किए जाने की खबरों को नकार दिया है। ‘कृति किसान संगठन’ का कहना है कि वो सरकार के इस दावे को नकारते हैं। उसने कहा कि उन्हें कोई भी प्रभावित नहीं कर सकता है। इन संगठनों ने दावा किया है कि सभी निर्णय ‘संयुक्त किसान यूनियन’ द्वारा ही लिए जा रहे हैं। पीएम मोदी कई बार तीनों कानूनों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर कर चुके हैं।

उधर किसानों ने टोल नाकों को फ्री करने के अपने अभियान के तहत अम्बाला के शम्भू टोल प्लाजा के पास हिंसा की। उन्होंने इसे बंद करवा दिया। वहीं कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी दिसंबर 14 को होने वाले विरोध-प्रदर्शनों में पूर्णरूपेण भागीदारी की बात की है। उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी कहा है कि सार्थक बातचीत के जरिए हर समस्या को सुलझाया जा सकता है। इन सबके बावजूद किसान लगातार अड़े हुए हैं।

विभिन्न रिपोर्ट्स में पता चल रहा है कि किसान प्रदर्शनों पर अब वामपंथी अतिवादी अपना कब्जा जमा चुके हैं। खुफिया सूत्रों का कहना है कि अतिवादी संगठन किसानों को भड़का कर हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की योजना बना रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए किसानों के प्रदर्शन को खालिस्तानियों के समर्थन की बात भी सामने आई है।