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फ्रांस में ED ने विजय माल्या की 1.6 मिलियन यूरो की संपत्ति जब्त की, किंगफिशर के अकाउंट से भेजा था पैसा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भगोड़े विजय माल्या के ख़िलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फ्रांस में उसकी 1.6 मिलियन यूरो ( भारतीय रुपए के मुताबिक लगभग 14 करोड़) की प्रॉपर्टी जब्त की है। अपने ट्विटर अकाउंट पर इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए ईडी ने बताया कि विजय माल्या की 14 करोड़ रुपए की संपत्ति फ्रांस में एंटी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जब्त की गई है।

ईडी ने कहा उनके आग्रह पर विजय माल्‍या की 32 अवेन्‍यू फोच (FOCH), फ्रांस की संपत्ति को फ्रेंच अथॉरिटी ने जब्‍त किया है। केन्द्रीय एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि जाँच में खुलासा हुआ था कि संपत्ति के लिए किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के बैंक खाते से बड़ी राशि विदेश भेजी गई थी।

बता दें कि किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड का मालिक और शराब कारोबारी विजय माल्या भारत से लंबे समय से फरार है। वह साल 2016 से ब्रिटेन में रह रहा है। उसे पिछले साल की शुरुआत में भारत सरकार ने भगोड़ा घोषित किया था। उसके बाद से सरकार विजय माल्या को प्रत्यर्पित करने की कोशिश में लगी है। उसके ऊपर 9 हजार करोड़ रुपए से अधिक के बैंक कर्ज धोखाधड़ी का मामला चल रहा है।

इस हालिया कार्रवाई से कुछ हफ्ते पहले विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया था कि गोपनीय कानूनी मुद्दे के तहत भगोड़े विजय माल्या के प्रत्यर्पण में बाधा आ रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था,

“हमें बताया गया है कि एक गोपनीय कानूनी मुद्दा है जिस पर कार्यवाही चल रही है, जिसके बाद विजय माल्या को भारत को सौंपा जा सकता है। हमें किसी विशेष समयरेखा का संकेत नहीं दिया गया है और हम इस मामले पर बातचीत जारी रखना चाहते हैं।”

इसके अलावा इस साल की शुरुआत में ही विजय माल्या को पीएमएलए कोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और कई अन्य बैंकों को भगोड़े विजय माल्या की जब्त संपत्ति को बेचकर कर्ज वसूली करने की इजाजत दी थी।

‘तारक मेहता…’ के राइटर ने की आत्‍महत्‍या: परिवार ने कहा- उन्हें ब्लैकमेल कर रहे थे, हमें दे रहे हैं धमकी

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की असामयिक मृत्यु की खबर सुर्खियों में आने के बाद से ही कई टेलीविजन और बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ की कथित रूप से आत्महत्या करने की खबर सामने आ रही है। इस तरह का एक और मामला सामने आया है। लोकप्रिय टेलीविजन कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के लेखक अभिषेक मकवाना ने आत्महत्या कर ली है। 37 साल के अभ‍िषेक का शव कांदि‍वली स्‍थ‍ित उनके फ्लैट से 27 नवंबर को मिला। पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है।

कथित तौर पर पुलिस ने उनके फ्लैट से एक सुसाइड नोट बरामद किया था, जो कि गुजराती में था। इसमें मकवाना ने अपने आत्महत्या का कारण पिछले कुछ महीनों से चल रहे वित्तीय संकट को बताया है।

हालाँकि, लेखक के परिवार ने दावा किया है कि अभिषेक मकवाना साइबर धोखाधड़ी और ब्लैकमेल का शिकार हुआ था। परिवार ने कहा कि लेखक की मृत्यु के बाद भी उन्हें धमकी भरे फोन आ रहे हैं। परिवार के मुताबिक, अभिषेक द्वारा लिए गए कर्ज का भुगतान करने के लिए उन पर लगातार दबाव डाला जा रहा है। कथित तौर पर उनके भाई जेनिस ने कहा कि उन्हें अभिषेक की मृत्यु के बाद इन मुद्दों के बारे में पता चला जब उन्हें फ़ोन आने शुरू हुए।

जेनिस कहते हैं, “मैंने भाई के ईमेल्‍स चेक किए, क्‍योंकि जब से उनकी मौत हुई है मुझे पैसों के लिए बहुत सारे फोन कॉल्‍स आ रहे हैं। इनमें से एक फोन कॉल बांग्‍लादेश के नंबर से, एक म्‍यांमार के नंबर और बाकी भारत के दूसरे राज्‍यों से आए हैं। मुझे भाई के ईमेल्‍स से पता चला कि उन्‍होंने शुरुआत में ‘इजी लोन’ ऐप के जरिए छोटे कर्ज लिए, जिनका ब्‍याज दर बहुत ज्‍यादा था।”

जेनिस ने आगे कहा, “मैंने उनके और भाई के बीच हुए पैसों के लेन-देन का जायजा लिया। मैंने पाया कि मेरे भाई ने आवेदन नहीं किया था, बावजूद इसके उन्‍हें कुछ पैसे भेजे गए। इनका ब्‍याज दर 30 परसेंट से भी ज्‍यादा है। भाई के फोन में भी टेक्‍स्‍ट मैसेज हैं, जिनसे पता चलता है कि उन्‍हें ब्‍लैकमेल किया जा रहा था।”

जेनिस ने बताया कि भाई की मृत्यु के बाद जब लोन देने वालों को उनकी आत्महत्या के बारे में सूचित किया गया और कहा कि वह और उनका परिवार अभी इस मुद्दे पर चर्चा करने की स्थिति में नहीं हैं, तो वो और अधिक अपमानजनक हो गए।

गौरतलब है कि पुलिस ने परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को मद्देनजर रखते हुए जाँच शुरू कर दी है और धोखाधड़ी के आरोपों पर अधिक जानने के लिए लेनदेन के विवरण के लिए बैंक से संपर्क किया है।

वहीं मामले की जाँच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि, “फिलहाल हमारे पास कोई पक्‍के सबूत नहीं हैं कि कर्ज देने वाली कंपनी उन्‍हें परेशान कर रही थी। जब हमें कुछ पुख्‍ता मिलेगा, हम जरूरी कार्रवाई करेंगे।”

बता दें कॉमेडी सीरीज तारक मेहता का उल्टा चश्मा का 28 जुलाई 2008 को सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया के चैनल, सब टीवी पर प्रसारण शुरू हुआ था। हाल ही में इस शो के 3000 एपिसोड पूरे हुए हैं।

‘हमने MP और शाजापुर को शाहीन बाग बना दिया’: जमानत देते हुए अनवर से हाईकोर्ट ने कहा- जाकर काउंसलिंग करवाओ

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने गत 26 नवंबर को अनवर नाम के एक युवक को जमानत देते हुए उसे काउंसलिंग लेने का आदेश दिया। जस्टिस वीरेंद्र सिंह की बेंच ने सोशल मीडिया पर सीएए और एनआरसी को लेकर भड़काऊ मैसेज भेजने वाले अनवर को बेल देते हुए कहा कि उसे फरवरी, मार्च और अप्रैल 2021 के पहले हफ्ते वकील एवं समाजिक कार्यकर्ता रश्मि पांडे से काउंसलिंग लेनी ही होगी।

कोर्ट ने कहा कि पांडे से मिलकर अनवर को न केवल काउंसलिंग लेनी होगी, बल्कि उनके निर्देशों को सख्ती से फॉलो भी करना होगा। अगर काउंसलिंग सत्र के बाद सामाजिक कार्यकर्ता रश्मि पांडे की ओर से कोई विपरीत रिपोर्ट जमा हुई तो बेल बढ़ाने की जगह कोर्ट उसे निरस्त कर देगा।

बता दें कि अनवर के ख़िलाफ वॉट्सएप पर एक विवादित संदेश शेयर करने के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस संदेश में लिखा था, “तुमने दिल्ली में गोली चलाई, हमने मध्यप्रदेश और शाजापुर (Shajapur) को शाहीन बाग बना दिया।” इस मुकदमे के बाद अनवर को 2 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में ही था।

प्रशासन ने उसके इस स्टेटस से धार्मिक सौहार्दता और लोक शांति के विपरीत रूप से प्रभावित होने की आशंका पाते हुए उसके विरुद्ध आईपीसी की धारा 505(2) और 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद पूरे मामले में जाँच पूरी करके चार्जशीट दायर हुई थी।

हाईकोर्ट ने नवंबर में अनवर को बेल भी इसी आधार पर दी है कि उसने कोर्ट से वादा किया कि वो दुबारा ऐसे अपराध नहीं करेगा, जिससे राष्ट्रीय पहचान और एकता पर असर पड़े। उसने कोर्ट के समक्ष अंडरटेकिंग भी जमा की है।

गौरतलब है कि दिल्ली में गत 24 और 25 फरवरी को इस्लामी और वामी कट्टरपंथियों के कारण भारी दंगे हुए थे। इन दंगों में फाइल हुई चार्जशीट में AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड बनाया गया था। उस पर हत्या और दंगे करवाने का आरोप है। इसके अलावा ताहिर पर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को मारने का भी आरोप है।

दंगों की शुरुआत शाहीन बाग का ही व्यापक असर था, जहाँ दिसंबर से ही प्रदर्शन चल रहे थे और साजिशकर्ता अपनी साजिश रच रहे थे। जब फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए और पुलिस ने अपनी जाँच शुरू की। जाँच के दौरान शाहीन बाग से जुड़ा लगभग हर सक्रिय नाम शक के घेरे में आया। ऐसे में कई अन्य प्रदेशों में जब शाहीन बाग बनाने की बात हुई तो लोगों ने उसके विरुद्ध शिकायतें करवाईं और कई लोग ऐसे मामलों में गिरफ्तार भी हुए।

भारत ने कनाडा के उच्चायुक्त को किया तलब, ‘किसानों के प्रदर्शन’ पर जस्टिन ट्रूडो ने की थी बयानबाजी

भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कनाडा के उच्चायुक्त को तलब कर कहा कि किसानों के आंदोलन के संबंध में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और वहाँ के अन्य नेताओं की टिप्पणी देश के आंतरिक मामलों में “अस्वीकार्य हस्तक्षेप” के समान है।

MEA ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि अगर इस तरह की कार्रवाई जारी रहती है तो इसका भारत और कनाडा के बीच के संबंधों पर प्रभाव पड़ेगा। बयान में आगे कहा गया कि इस तरह के बयानों से चरमपंथी समूहों को प्रोत्‍साहन मिला है और वे कनाडा स्‍थित हमारे उच्‍चायोग व काउंसलेट तक पहुँच सकते हैं, जो हमारी सुरक्षा के लिए चुनौती है। भारत यह भी उम्मीद करता है कि कनाडा उन घोषणाओं से परहेज करेगा जो चरमपंथी सक्रियता को वैध बनाती हैं।

MEA का बयान

दरअसल, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और उनके मंत्रियों ने 1 दिसंबर को भारत में चल रहे किसानों के विरोध पर चिंता व्यक्त की थी। वर्चुअल गुरपुरब 2020 समारोह के दौरान पीएम ट्रूडो ने अपने संबोधन की शुरुआत में भारत में किसानों के विरोध प्रदर्शनों के बारे में बात की थी। इस बातचीत में नवदीप एस बैंस, हरजीत सज्जन और बर्दिश चग्गर सहित सिख समुदाय के मंत्री शामिल हुए थे।

ट्रूडो ने विरोध-प्रदर्शनों के बारे में बात करते हुए कहा, “भारत से किसानों के आंदोलन के बारे में खबर आ रही है। स्थिति चिंताजनक है और सच्चाई यह है कि आप भी अपने दोस्तों और परिवारों को लेकर फिक्रमंद हैं। मैं याद दिलाना चाहता हूँ कि कनाडा ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया। हम बातचीत में विश्वास करते हैं। हमने भारतीय अधिकारियों के सामने अपनी चिंताएँ रखी हैं।” जस्टिन ट्रूडो ही नहीं कनाडा के कई अन्य मंत्रियों ने भी किसानों के विरोध पर टिप्पणी करके भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया था।

वहीं इस मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, “हमने कनाडाई नेताओं द्वारा भारत में किसानों से संबंधित कुछ ऐसी टिप्पणियों को देखा है जो भ्रामक सूचनाओं पर आधारित हैं। इस तरह की टिप्पणियाँ अनुचित हैं, खासकर जब वे एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से संबंधित हों।”

गौरतलब है कि भारत में हो रहे किसान विरोध-प्रदर्शन को काफी हद तक खालिस्तानी तत्वों द्वारा हाईजैक किया गया है। ऑपइंडिया ने रिपोर्ट किया था कि पाकिस्तान द्वारा वित्त पोषित संगठन SFJ ने पहले खालिस्तान के समर्थन के बदले पंजाब और हरियाणा में किसानों के लिए $ 1 मिलियन का अनुदान घोषित किया था। बता दें इसके अलावा सितंबर में ही, प्रतिबंधित प्रो-खालिस्तानी समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने अपने अलगाववादी एजेंडे का समर्थन करने वाले मतदाताओं के पंजीकरण के लिए एक डोर-टू-डोर अभियान की घोषणा की थी जिसे ‘रेफरेंडम 2020’ का नाम दिया गया था।

बता दें एक तरफ जहाँ इस प्रदर्शन को खालिस्तानी समर्थकों द्वारा हाइजैक किया गया है तो वहीं इस प्रदर्शन में पीएम मोदी को जान से मारने की धमकी और उनके विरोध में नारे भी लगाए जा रहे है। किसानों द्वारा किए जा रहे इस प्रदर्शन में खालिस्तानी समर्थकों ने जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थन में भी नारे लगाए हैं।

‘इंदिरा सरकार के कारण देश छोड़ना पड़ा, पति ने दम तोड़ दिया’: आपातकाल के जख्म लेकर 94 साल की विधवा पहुँचीं सुप्रीम कोर्ट

आजाद भारत के इतिहास में आपातकाल का काला दौर आज भी लोगों की स्मृतियों से धुँधला नहीं हुआ है। यही वजह है कि 94 साल की विधवा वीरा सरीन 45 साल बाद इंसाफ माँगने सुप्रीम कोर्ट पहुँची हैं। इस विधवा की गुहार है कि साल 1975 में इंदिरा गाँधी के शासन के दौरान लागू किया गया आपातकाल असंवैधानिक घोषित किया जाए और उन्हें मुआवजे के तौर पर 25 करोड़ रुपए दिलवाए जाएँ।

94 साल की वीरा सरीन चाहती हैं कि चार दशक पहले उनका और उनके बच्चों का जो भी आपातकाल की वजह से नुकसान हुआ, उसकी अब भरपाई हो। सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिका के अनुसार, तत्कालीन सरकार (इंदिरा सरकार) ने उनके पति और उन पर ‘अनुचित और मनमाने ढंग से डिटेंशन के आदेश’ जारी किए। इसके कारण उन्हें देश छोड़ना पड़ा। सरकार के आदेशों से उनका बिजनेस ठप्प हो गया। वहीं कई मूल्यवान वस्तुओं को अपने कब्जे में ले लिया। 

याचिका में कहा गया है कि सरकार का यह अत्याचार याचिकाकर्ता के पति बर्दाश्त नहीं कर पाए और उन्होंने दबाव में आकर दम तोड़ दिया। इसके बाद वह अकेले हर परेशानी को झेलती रहीं और उन कार्रवाइयों को खुद ही सामना किया जो उनके ख़िलाफ़ आपातकाल में शुरू हुई थीं।

साल 2014 में उस मामले से जुड़ी सारी प्रोसीडिंग को खत्म किया गया, लेकिन उनके पति की अचल संपत्ति उन्हें अब तक वापस नहीं मिली है जो उनसे आपातकाल के समय अवैध रूप से छीनी गई थी।। दुखद यह है कि कुछ समय पहले याचिकाकर्ता के बेटे ने अपनी माँ के जेवरों के कुछ चोरी हुए हिस्सों को नई दिल्ली की एक सेल में देखा था।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एस के कौल के समक्ष उनके मामले पर अब 7 दिसंबर को सुनवाई होगी। यहाँ बता दें कि वीरा की शादी 1957 में एचके सरीन से हुई थी। सरीन करोल बाग और कनॉट प्लेस में उत्कर्ष कला व रत्न का व्यवसाय करते थे। जब आपातकाल लागू हुआ तो सरीन की बेशुमार दौलत को सरकार ने जब्त कर लिया। लंबे समय तक उनके परिवार के लोग सरकार के अत्याचार का शिकार बने रहे।

अब वीरा कीमती रत्नों का व्यावसाय करने वाले अपने पति की दौलत की लूट को लेकर अधिकारियों पर सारी जिम्मेदारी तय करते हुए 25 करोड़ की हर्जाना माँग रही हैं। महिला फिलहाल देहरादून में अपने बेटे के साथ रहती हैं और उनके द्वारा दायर याचिका में गृह मंत्रालय को भी एक पक्षकार बनाया गया है। वह चाहती हैं कि उनकी माँग पर सुनवाई हो, ताकि जीवन भर वह जिस पीड़ा से गुजरीं और दुख उठाया, उन सब पर विराम लगे।

‘विरोध-प्रदर्शन से कोरोना भयावह होने का खतरा’: दिल्ली बॉर्डर से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

प्रदर्शनरत किसानों को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की सीमा के नज़दीक से हटाए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। दिल्ली में कोविड 19 महामारी के ख़तरे का हवाला देते हुए याचिका में प्रदर्शन करने वाले किसानों को वहाँ से हटाने की माँग की गई है। अधिवक्ता ओमप्रकाश परिहार द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों की वजह से ‘आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ’ बाधित हो रही हैं। 

याचिका के अनुसार, “जैसा कि पिछले कुछ समय में देखा गया है कि राजधानी में महामारी अपने चरम है और इसका दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए यह बेहद आवश्यक हो चुका है कि किसानों के इस विरोध-प्रदर्शन को जल्द से जल्द रुकवाया जाना चाहिए। प्रदर्शन करने वालों को उस जगह पर विरोध करना चाहिए, जहाँ उनके लिए जगह सुनिश्चित की गई है और इस दौरान उन्हें कोरोना महामारी के संबंध में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन भी करना चाहिए।”

याचिका में इस बात का अनुरोध किया गया है कि राजधानी की सीमा पर जिस तरह प्रदर्शन की सूरत में इतनी भीड़ इकट्ठा हो रही है वह कोरोना महामारी के दृष्टिकोण से भयावह है। इस ख़तरे का संज्ञान लेते हुए प्रदर्शनकारियों को जल्द से जल्द उस जगह पर भेजा जाए जो उनके लिए सरकार द्वारा तय की गई है। 

बीते 26 नवंबर से हज़ारों की तादाद में किसान दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए ‘कृषि सुधार विधेयकों’ को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने किसानों के समक्ष बातचीत का प्रस्ताव रखा था। फ़िलहाल इस बातचीत को लेकर नतीजे आने में समय है। किसानों का प्रदर्शन जारी है और उनका कहना है कि यह क़ानून वापस लिया जाए। 

याचिकाकर्ता का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में इन प्रदर्शनकारियों को रोका था, लेकिन बाद में इन्हें राजधानी स्थित निरंकारी मैदान, बुराड़ी में विरोध-प्रदर्शन जारी रखने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सीमा को बंद कर रखा है और किसी को भी वहाँ से जाने नहीं दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि सीएए और एनआरसी के विरोध में शाहीन बाग़ में हुए प्रदर्शन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रदर्शन के दौरान रोड ब्लॉक करना असंवैधानिक है। 

सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि रास्ता जाम करने और आम नागरिकों को असुविधा पहुँचाने वाले विरोध-प्रदर्शन को अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। याचिका में कहा गया है, “इस प्रदर्शन की वजह से दिल्ली के लाखों लोगों की जान ख़तरे में पड़ सकती है, क्योंकि कोरोना संक्रमण से होने वाली महामारी है। अगर इस बीच कम्युनिटी स्प्रेड होता है तो उससे हालात भयावह हो जाएँगे, इसलिए अदालत से अनुरोध है कि इस मामले में जल्द से जल्द उचित कदम उठाया जाए।”   

टेरर फंडिंग वाले विदेशी संगठनों से AIUDF के अजमल फाउंडेशन को मिले करोड़ों, असम में कॉन्ग्रेस की है साथी

बदरुद्दीन अजमल (Badruddin Ajmal) की पार्टी AIUDF (ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक फ्रंट) असम में कॉन्ग्रेस की साझेदार रही है। इसी AIUDF से जुड़े अजमल फाउंडेशन (Ajmal Foundation) पर विभिन्न संदिग्ध स्रोतों से 69.55 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग लेने का आरोप लगा है।

संस्था पर यह आरोप लीगल एक्टिविस्ट समूह, लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) ने लगाया है। इनका कहना है कि अजमल फाउंडेशन को मिला फंड ऐसे स्रोतों से मिले हैं जो टेरर फाइनेंसिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों में संलिप्त हैं।

LRO ने कहा है कि एनजीओ को मिली फंडिंग में से वह 2.05 करोड़ रुपए खर्च ‘शिक्षा’ पर कर चुके हैं और बाकी का पैसा AIUDF को पहुँचाया जा चुका है, ताकि वह असम की राष्ट्रवादी पार्टियों को टक्कर दे सकें।

अपने थ्रेड में LRO ने तुर्की, फिलिस्तान और ब्रिटेन के इस्लामी आतंकी समूहों के नाम खुलासा किया, जो अजमल फाउंडेशन को फंडिंग दे रहे हैं।

विदेश के आतंकी संगठनों से AIUDF के लिंक

यूके का अल इम्दाद फाउंडेशन (Al Imdaad Foundation) इनमें से एक है। इस फाउंडेशन के संबंध फिलिस्तीनी टेरर ग्रुप हमस (Hamas) से जुड़े हैं, जो इजरायल के ख़िलाफ कई बार बमबारी कर चुका है। ये फाउंडेशन हलाल सर्टिफिकेशन फीस लाखों में इकट्ठा करता है और फिर वही पैसा आतंकी गतिविधियों में लगाता है।

अगला समूह उम्माह वेल्फेयर ट्रस्ट ( Ummah Welfare Trust) है। इस इस्लामी संगठन पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के आरोप हैं। गल्फ आधारित अखबार अल अरबिया की रिपोर्ट में पिछले दिनों इस बात का उल्लेख हुआ था कि यूएस ने इसे आतंकवादी ईकाई के रूप में नामित किया है।

अजमल फाउंडेशन को तुर्की के इंसानी यरदीम वक्फी (Insani Yardim Vakfi) से भी पैसा आता है। इसका संबंध अल-कायदा और ग्लोबल जिहाद नेटवर्क से है। रिपोर्ट बताती हैं कि साल 2014 में इस ग्रुप ने अल-कायदा को हथियार दिए थे। इस समूह के संबंध PFI से भी हैं।

उल्लेखनीय है कि देश के पीएफआई और सिमी जैसे कट्टरपंथी समूह कई राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में पैसा लगाने के कारण कुख्यात हैं। हाल में इनके संबंध ISIS से मालूम हुए थे, लेकिन इससे जुड़े लोग फिर भी अल-कायदा से जुड़े संगठनों से मिलते रहे। तुर्की के इंसानी यरदीम वक्फी समूह ने पीएफआई नेताओं से साल 2018 में मुलाकात की थी।

तुर्की के इंसानी यरदीम वक्फी के नेताओं ने की पीएफआई सदस्यों से मुलाकात (साभार: www.ournortheast.com)

अजमल फाउंडेशन को डोनेशन देने वाले अगले समूह का नाम Muslim Aid UK है। इसके संबंध भी कश्मीर में आतंक मचाने वाले आतंकी समूह हिजबुल मुजाहिद्दीन से हैं। असम के एक स्थानीय अखबार में ही इसके आतंकी कनेक्शन का उल्लेख पढ़ने को मिल जाता है।

यहाँ बता दें कि LRO ने इस पूरे मामले पर अपने पास इकट्ठा हुई सारी जानकारी गृह मंत्रालय को भेजी है और आरोप लगाया है कि इन्हें मिलने वाली फंडिग FCRA के रूल्स का उल्लंघन करती है, इसलिए इनके लाइसेंस को रद्द किया जाना चाहिए।

AIUDF और कई विवाद

बदरुद्दीन अजमल और उनकी पार्टी कई बार अवैध गतिविधियों के कारण विवादों का कारण बनी है। हाल में असम में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के ख़िलाफ़ कानून लाने पर बात करते हुए भाजपा नेता हिमंत बिस्व शर्मा ने बदरुद्दीन अजमल की पार्टी व समर्थकों पर आरोप लगाए थे।

उन्होंने कहा था कि असम की बच्चियाँ अजमल कल्चर का फेसबुक पर निशाना बन रही हैं। इस्लामी कट्टरपंथियों को अजमल जैसे नेताओं का प्रोत्साहन मिल रहा है कि वह असम की हिंदू लड़कियों को निशाना बनाएँ और झूठी पहचान के साथ अपने जाल में फँसाएँ।

इसके अलावा साल 2012 में AIUDF पर जिहादी फोर्स को असम में ट्रेनिंग देने का इल्जाम लग चुका है। मगर तब भी कॉन्ग्रेस पार्टी साल 2021 में इनके साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने को तैयार है। 

कुछ समय पहले नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया (Debabrata Saikia ) ने कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी उन सभी लोगों से हाथ मिलाने के लिए तैयार है, जिन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध किया था। उन्होंने अपनी बात में जोर देकर कहा था कि अकेले AIUDF के साथ गठबंधन से पार्टी को फायदा हो सकता है।

भाजपा ने इस बयान के बाद गठबंधन की बात पर सवाल उठाए थे और AIUDF के राष्ट्रविरोधी चेहरे का खुलासा किया था। भाजपा ने कहा था कि ऐसी साजिशें राज्य को नुकसान पहुँचा सकती हैं। भाजपा ने बताया था कि कॉन्ग्रेस शासन में कई अवैध प्रवासी यहाँ आए जिससे यहाँ की डेमोग्राफी बदली और कई स्थानीय लोग अपनी जगह छोड़ने को मजबूर हुए।

3 दिन में 3 मर्डर: अररिया का मुहम्मद रजी गुरुग्राम में बन गया सीरियल किलर, पहले लूटता था फिर निर्मम तरीके से करता था कत्ल

साइबर सिटी में सिलसिलेवार हत्या और लूट की वारदात को अंजाम देने वाले एक सीरियल किलर को गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित का नाम मुहम्मद रजी है और वह मूलरूप से बिहार के अररिया जिले के रहने वाला है। जाँच के दौरान मुहम्मद रजी ने लूट के बाद पकड़े जाने के डर से लगातार 3 दिन में 3 हत्याएँ करने की बात कबूल कर ली है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम में सीरियल किलर मुहम्मद रजी ने 24, 25 और 26 नवंबर की रात को 3 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। पुलिस पूछताछ में रजी ने खुलासा किया कि वह लूटपाट के इरादे से राह चलते लोगों को शिकार बनाता था। फिर पकड़े जाने के डर से लूटने के बाद उनकी हत्या कर देता था।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 24 नवंबर को सेक्टर-29 थाना इलाके से एक लाश बरामद की थी। उसके अगले दिन 25 नवंबर की शाम को दिल्ली-जयपुर हाइवे किनारे गाँव झाड़सा के नजदीक पार्क से एक शव बरामद किया गया था। तीसरी लाश पुलिस ने 26 नवंबर को सेक्टर-47 इलाके की झाड़ियों से बरामद की थी, जिसका सर धड़ से अलग था।

25 और 26 नवंबर को मिली लाशें उत्तरप्रदेश के रहने वाले दो युवकों की थी। पुलिस पूछताछ में मुहम्मद रजी ने कबूल किया कि यह हत्याएँ उसी ने लूटपाट करने के बाद पकड़े जाने के डर से की थी। दरअसल पुलिस को तलाशी के दौरान मुहम्मद रजी का पता चला था। शक होने पर पुलिस ने दबिश देते हुए उसे धर दबोचा और पूछताछ करने पर उसने वारदातें अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली।

गौरतलब है कि लगातार 3 दिनों में तीन शव मिलने पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। इसके बाद क्राइम ब्रांच की पालम विहार एवं सेक्टर-40 टीम को मामले के जानकारी दी गई। जाँच के दौरान दोनों टीमों ने संयुक्त ऑपरेशन चलते हुए आरोपित को अपने गिरफ्त में कर लिया। बता दें कि इससे पहले वर्ष 2006 एवं 2018 के दौरान भी गुरुग्राम में सीरियल किलर कांड सामने आया था।

हिजाब वाली पहली मॉडल का इस्लाम पर करियर कुर्बान, कहा- डेनिम पहनने के बाद खूब रोई; नमाज भी कई बार छोड़ी

इस्लाम को बढ़ावा देने के नाम पर एक और मुस्लिम लड़की ने अपने करियर की कुर्बानी दे दी है। इस लड़की का नाम हलीमा अदन (Halima Aden) है। हलीमा 23 वर्ष की मुस्लिम अमेरिकन मॉडल थीं। हाल में उन्होंने इस्लाम के लिए फैशन इंडस्ट्री को अलविदा कहने का फैसला किया। उनका कहना है कि इस इंडस्ट्री में कई ऐसी चीजें होती हैं जो उनके मजहब के ख़िलाफ़ है।

हलीमा के इस तरह फैशन इंडस्ट्री छोड़ने की जानकारी इंस्टाग्राम के फेमस अकाउंट डाइट प्राडा (Diet Prada ) ने दी है। सोमाली अमेरिकन मॉडल सबसे पहले चर्चा में साल 2016 में आई थीं। वह केन्या के रिफ्यूजी कैंप में पली-बढ़ी थीं। साल 2016 के Miss Minnesota USA pageant में उन्होंने हिजाब पहनकर भाग लिया। इसके बाद वह American Vogue, Vogue Arabia, Elle and Allure का फीचर कवर बनीं। इसके अलावा हलीमा पहली मॉडल थीं, जिन्होंने स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड स्विमसूट एडिशन के लिए भी हिजाब पहना।

अमेरिकी मॉडल हलीमा अदन
हलीमा अदन

‘रैंप से बुरी ऊर्जा आती है, मुझे हिजाब के नाम पर डेनिम पहनने को किया मजबूर

अपने इंस्टाग्राम स्टोरी की पूरी एक श्रृंखला में 23 साल की हिजाब पहनने वाली मॉडल ने फैशन रैंप के बारे में अपनी राय रखी थी। इसमें उन्होंने बताया था कि फैशन रैंप से बुरी ऊर्जा निकलती है। इसके कारण कई बार उन्हें अपनी नमाज छोड़नी पड़ी। कई बार वह अपने मजहबी कार्य नहीं कर पाईं, क्योंकि उन्हें प्रोजेक्ट करने होते थे।

अपने 1.2 मिलियन फॉलोवर्स को अदन ने बताया कि इस कोरोना महामारी के समय में उन्हें अपने मूल्यों पर ध्यान देने का अवसर मिला और उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें अपना मार्ग छोड़ना चाहिए।

अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में अदन ने अपनी पुरानी फोटो डाली और दावा किया कि वह फैशन इंडस्ट्री में बहुत असहज थीं। उन्होंने ये भी बताया कि कैसे उन्हें पहले सिर पर डेनिम पहनने के लिए फोर्स किया गया और फिर कैसे सिर पर हिजाब इस तरह बाँधने के लिए मजबूर किया गया कि जिससे उन्हें लगा वह अपने मजहब को धोखा दे रही हैं।

अदन कहती हैं कि अमेरिकन इगेल आउटफिटर्स के साथ डेनिम फोटोशूट के बाद वह खुद को कमरे में बंद करके बहुत देर तक रोईं। इससे पहले उन्होंने कभी जींस नहीं पहनी थी। इससे उनका उद्देश्य न केवल पराजित हुआ, बल्कि उनके विश्वास (faith) को भी चोट लगी।

उन्होंने लिखा, “लेकिन..ये मेरा स्टाइल नहीं था? कभी नहीं। मैंने उन्हें क्यों इजाजत दी कि मेरे सिर पर जींस रखें जब मैंने सिर्फ स्कर्ट या लंबी ड्रेस ही पहनती थी?” आगे उन्होंने कहा, “मैं अपने होटल के कमरे में आई और उस शूट के बाद खूब रोई। मैं जानती थी वो मैं नहीं हूँ। लेकिन बोलने में मुझे बहुत डर लगा।”

उनके अनुसार, इस फोटोशूट के बाद उन्होंने खुद को बहुत असहज पाया। उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्होंने खुद को खो दिया। अदन मानती हैं कि सब गलती उनसे हुई कि उन्होंने ऐसे प्रोजेक्ट उठाए। लेकिन फिर भी फैशन इंडस्ट्री को कोसती हैं कि इस उद्योग में मुस्लिम स्टाइलिस्ट नहीं है जो निजी रूप से इस बात को समझें कि हिजाब पहनना उनके लिए सब कुछ है।

मॉडल कहती है, “मुझे याद है कि मेरे पास रास्ता दिखाने वाला कोई नहीं था। मैंने अपनी गलतियों से, अपने अनुभव से सीखा। मैंने अच्छा किया लेकिन वह काफी नहीं। हम ये वार्तालाप कर रहे हैं ताकि सिस्टम को सही तरीके से बदल सकें।”

हलीमा के मुताबिक अगर कोई प्रोजेक्ट उन्हें उनकी मजहबी मूल्यों के समझौता करने को कहेगा तो वह उसे कभी नहीं लेंगी, चाहे उसके बदले उन्हें 10 मिलियन डॉलर ही क्यों न दिए जाएँ। उनका कहना है कि अब वह समझ चुकी हैं कि एक हिजाबी होने के नाते उन्होंने क्या गलतियाँ की।

ध्यान दिला दें कि अदन पहली मुस्लिम महिला नहीं है, जिनके करियर पर इस्लाम हावी हुआ हो। भारत में दंगल फिल्म की कलाकर जायरा वसीम ने भी पिछले साल इंस्टाग्राम पर ऐसी घोषणा की थी। इस्लाम को वजह बताकर उन्होंने भी बॉलीवुड को अलविदा कहा था। इसके बाद सना खान ने भी इस्लाम का हवाला देकर मनोरंजन इंडस्ट्री को छोड़ दिया था

लखनऊ: प्रशासन को बताए बिना हिन्दू युवती से मुस्लिम युवक कर रहा था शादी, नए अध्यादेश का हवाला देकर पुलिस ने रोकी

हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार धर्म परिवर्तन को लेकर नया अध्यादेश लेकर आई है। इस अध्यादेश के उल्लंघन का हवाला देते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार (2 दिसंबर 2020) को एक अंतर धार्मिक विवाह रुकवाया। लखनऊ के पारा क्षेत्र में हिन्दू युवती और मुस्लिम युवक शादी करने जा रहे थे। इसकी सूचना हिन्दू संगठनों ने पुलिस को दी। इसके बाद मौके पर पहुँच पुलिस ने शादी रुकवाई। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ युवक और युवती ने आपसी सहमति के बाद शादी करने का निर्णय लिया था। पुलिस ने विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश का हवाला देते हुए कहा कि शादी के पहले दोनों को जिलाधिकारी से ‘अनुमति’ लेनी होगी। हिन्दू युवती का नाम रैना गुप्ता (22) है, वह रसायन शास्त्र से पोस्ट ग्रेजुएट है और मुस्लिम युवक मोहम्मद आसिफ (24) फार्मासिस्ट है। 

इस घटना के संबंध में जानकारी देते हुए एडिशनल डीएसपी साउथ सुरेश चन्द्र रावत ने कहा, “लखनऊ के पारा क्षेत्र में यह शादी होनी थी। तय योजना के मुताबिक़ पहले हिन्दू परम्पराओं के आधार पर शादी होनी थी। इसके बाद मुस्लिम रिवाजों से निकाह भी होना था। युवक और युवती के परिजन इससे सहमत भी थे, लेकिन पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही शादी रोक दी।” उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाह को उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 की धारा 3 और 8 (खंड दो) के आधार पर रोका गया है।  

घटना के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए इंस्पेक्टर त्रिलोकी सिंह ने कहा कि नरपतखेड़ा के डूडा कॉलोनी निवासी विजय गुप्ता की बेटी रैना की शादी मोहम्मद आसिफ के साथ हो रही थी। राष्ट्रीय युवा वाहिनी के प्रदेश संयोजक (अल्पसंख्यक मोर्चा) मोहम्मद यासिर खान और अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार शुक्ला ने इस विवाह के बारे में सूचित किया।

इसके बाद पुलिस ने बुधवार शाम लगभग 4 से 5 बजे के बीच मौके पर पहुँच कर शादी रोकने की बात कही। पुलिस ने दोनों पक्षों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए अध्यादेश के बारे में बताया। पुलिस ने दोनों पक्षों को इसकी पूरी प्रक्रिया भी समझाई और कहा इसके बिना शादी संभव नहीं है। 

इस बात पर युवक और युवती दोनों ने सहमति जताई। लड़की के परिजनों का कहना था कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि अंतर धार्मिक विवाह के लिए दोनों पक्षों के सहमत होने के बावजूद जिला मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी के बाद ही शादी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अब वह मजिस्ट्रेट से अनुमति लेकर शादी करेंगे।