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राहुल गाँधी की क्षमता पर शरद पवार ने फिर उठाए सवाल, कहा- उनमें निरंतरता की कमी, पर ओबामा को नहीं कहना चाहिए था

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) केंद्र और महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों का हिस्सा रही है। महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार में भी दोनों दल शामिल हैं। फिर भी राकांपा प्रमुख शरद पवार समय-समय पर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते रहते हैं। उन्होंने कहा है कि राहुल गाँधी में एक राष्ट्रीय नेता के रूप में कुछ हद तक ‘निरंतरता’ की कमी लगती है। इससे पहले चीन को लेकर राहुल गाँधी की बयानबाजी पर सवाल उठाते हुए पवार ने कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

लोकमत मीडिया के अध्यक्ष और पूर्व सांसद विजय दर्डा को दिए हालिया साक्षात्कार में पवार ने राहुल गाँधी की निरंतरता को लेकर बयान दिया। यह पूछे जाने पर कि क्या वायनाड के सांसद को देश का नेता मानने के लिए तैयार है, पवार ने जवाब दिया, “ इस संबंध में कुछ सवाल हैं। उनमें निरंतरता की कमी लगती है।”

गौरतलब है कि शरद पवार की राकांपा महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस पार्टी और शिवसेना के साथ गठबंधन में है और वर्तमान में राज्य में शासन कर रही महा विकास अघाड़ी सरकार का हिस्सा भी है।

हालाँकि पवार ने राहुल पर बराक ओबामा की टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताई। दरअसल, ओबामा ने अपने हाल ही में प्रकाशित संस्मरण में कहा है कि राहुल गाँधी शिक्षक को प्रभावित करने के लिए उस उत्सुक छात्र की तरह लगते हैं जिसमें विषय में महारत हासिल करने के लिए योग्यता और जुनून की कमी है। इसको लेकर पवार ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि हम सभी के विचार को स्वीकार करें।

पवार ने कहा, “मैं अपने देश के नेतृत्व के बारे में कुछ भी कह सकता हूँ। लेकिन मैं दूसरे देश के नेतृत्व के बारे में बात नहीं करूँगा। सभी को उस सीमा को बनाए रखना चाहिए। मुझे लगता है कि ओबामा ने उस सीमा को पार कर लिया।”

कॉन्ग्रेस के भविष्य और यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल गाँधी पार्टी के लिए ‘बाधा’ बन रहे हैं तो पवार ने वायनाड सांसद का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी पार्टी का नेतृत्व इस बात पर निर्भर करता है कि संगठन के भीतर उन्हें कैसे स्वीकार किया जाता है। एनसीपी प्रमुख ने कहा,”कॉन्ग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी और उनके परिवार के साथ मेरे मतभेद हैं, लेकिन आज भी कॉन्ग्रेसियों में गाँधी परिवार के प्रति स्नेह की भावना है।”

उल्लेखनीय है कि राहुल गाँधी पर पवार द्वारा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने के लिए कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत सबसे पहले सामने आए। सावंत ने कहा, “हमें नहीं पता कि पवार साहब ने किस संदर्भ में टिप्पणी की है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस और हमारे नेता राहुल गाँधी आरएसएस और मोदी सरकार के विरोध में किसी भी अन्य पार्टी की तुलना में अधिक सुसंगत रहे हैं।”

शरद पवार की टिप्पणी के बचाव में भले कॉन्ग्रेस नेता सामने आए हों लेकिन 2019 के आम चुनावों में करारी हार के बाद से राहुल गाँधी के नेतृत्व को लेकर पार्टी की भीतर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अगस्त 2020 में सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर पार्टी में व्यापक बदलाव की माँग की थी।

जब नक्सलियों की ‘क्रांति के मार्ग’ में डिल्डो अपनी जगह बनाने लगता है तब हथियारों के साथ वाइब्रेटर भी पकड़ा जाता है

कल सुरक्षा बलों ने पलामू के सलामदिरी में माओवादी आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में ‘हथियार’ पकड़े। पीआईबी त्रिपुरा ने इसकी जानकारी देते हुए दो तस्वीरें शेयर की जिसमें पिस्तौल-बंदूक, गोली और मोबाइल फोन आदि के साथ दो और भी ‘क्रांतिकारी’ वस्तुएँ नजर आईं जो हल्के गुलाबी और गहरे गुलाबी रंग की थीं।

आम तौर पर माओवंशी वामपंथी छात्राओं को नशा खिला कर बलात्कार करने से ले कर जंगलों में नव-वामपंथनों को सेक्स गुलाम बना कर इस्तेमाल करने के लिए कुख्यात रहे हैं, अतः गुलाबी रंग के दो शेड में दिख रहे इन दो वस्तुओं को देख कर लोगों की जिज्ञासा जगी तो उस पर सबका ध्यान गया।

एक वस्तु जो आकार में छोटी है, और उससे तार जुड़े दिख रहे हैं, कथित तौर पर उसे ‘वाइब्रेटर’ कहा जा रहा है। हालाँकि, कुछ लोग उसे यूएसबी/बैटरी संचालित पंखा भी कह रहे हैं। दूसरे लोग ऐसे लोगों को ‘भोला-भाला’ बताते हुए कह रहे हैं कि बगल में जो दूसरा यंत्र है, उसे शायद कूलर या एसी न कह दिया जाए।

सॉल्ट न्यूज की तकनीक द्वारा जाँच

हमने सॉल्ट न्यूज की पेटेंटेड उन्नत तकनीक का प्रयोग कर के गूगल पर रीवर्स इमेज सर्च किया तो उसे ‘सेक्स ट्वॉय’ यानी कि ‘यौन आनंद प्रदान करने वाला यंत्र’ कहा गया। फिर हमने पंचर और रबर मामलों के जानकार मोहम्मद जुबैर को फोन कर के पता किया कि फोटो में जो दिख रहा है, वो वही है क्या।

जुबैर ने फोन पर बात करते हुए बताया, “देखिए, मेरा तो दिन-रात का काम रबर का ही है। मैं देख कर ही पहचान जाता हूँ कि कौन से ट्यूब की रबर किस क्वालिटी की है, और कितनी चलेगी। इसमें जब पॉलिथीन में लिपटी वस्तु पर मैंने ज़ूम किया तो मैंने पाया कि वह वस्तु रबर की ही बनी हुई है, और लचीली भी है।”

हमने जब उनसे पूछा कि इतने विश्वास से कैसे कह रहे हैं तो उन्होंने बताया कि कभी-कभी वह स्वयं भी ऐसे यंत्रों का सहारा लेते हैं तो उसका अनुभव भी काम आया है। हालाँकि, हमें किसी के निजी मामलों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है तो काम की बातें करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि फोटो में दिखने वाली वस्तु ‘डिल्डो’ है जिसका प्रयोग यौन आनंद पाने हेतु लोग-बाग करते हैं।

वामपंथियों का क्रांतिकारी इतिहास

पिछले कुछ समय में वामपंथियों की विकृत कामवासना अपने ही विचारधारा की लड़कियों का बलात्कार करने से ले कर उन्हें जंगलों में सर्वहारा की लड़ाई के नाम पर ‘सेक्स स्लेव’ बनाने की खबरों के रूप में सामने आती रही हैं। जेएनयू के अनमोल रतन हों, या फिर गढ़चिरौली पुलिस को आत्मसमर्पण करने वाली मोती उर्फ राधा हो, लड़कियों के बलात्कार और वामपंथियों का चरित्र गुँथा हुआ मिलता है।

चाहे जलना जंगल (बोकारो) का संतोष महतो हो, सपन तुडु हो, हजारीबाग इलाके के सुदर्शन और विनय हों, मनीष और करम हों, राँची के गुरुपीरा का कुंदन प्रधान हो, लक्खीसराय का सिधु कोड़ा हो, माओवादी नक्सली आतंकियों ने आदिवासी लड़कियों को, नाबालिग बच्चियों को, अपने काडर के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं की पत्नियों तक का लगातार बलात्कार किया है और आवाज उठाने पर सबके सामने गला भी रेता है।

मँजे हुए वामपंथी अक्सर जेएनयू की पाठशाला में सेक्स पर आलेख लिखने से ले कर, नई छात्राओं को इसके फायदे गिनाते हुए, उसे शारीरिक स्वतंत्रता से जोड़ कर पहले इन्हें बरगलाते हैं और फिर लगातार उनका शारीरिक शोषण होता रहता है।

एक बहुत बड़े कामपंथी नेता बताते हैं, “अमूमन, सर्वहारा की क्रांति में लड़कियों का इतना ही महत्व है। लेकिन ‘इतना ही’ का मतलब कम न समझें। जंगलों में भी शरीर की जरूरतें होती ही हैं। फासीवादियों से हमारी लड़ाई लम्बी चलेगी, इसलिए हमें जंगल में भी कॉलेज जैसा माहौल चाहिए। क्रांति तो होती रहेगी, लेकिन माहौल में किसी भी तरह की कमी होने से सीनियर नेता दुखी हो जाते हैं।”

हमने एक नववामपंथन को डेढ़ सौ फेसबुक शेयर का विश्वास दिलाया तो उन्होंने कहा, “मूल बात तो यह है कि ज्योंहि आप वामपंथी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता लेते हैं, या फिर फेसबुक पर मोदी को फासीवादी कह कर, नारी देह पर लम्बे लेख लिखने लगती हैं, तभी से आपकी देह तो कम्यून की प्रॉपर्टी हो जाती है। जब देह ही आपकी नहीं रही तो फिर उससे मोह कैसा?”

आगे उन्होंने कहा, “डिल्डो के मिलने से इतनी बात क्यों हो रही है? बवाल करना बैकवर्ड लोगों और ट्रोलों का कार्य है। क्या जंगल में शारीरिक भूख पेड़ों से मिटाई जाएगी? कुछ लोग यह भी मजे ले रहे हैं कि नक्सली मर्द आखिर डिल्डो से कर क्या रहे हैं? अरे भाई! उनका डिल्डो, उनका शरीर, उनकी क्रांति, उनकी इच्छा कि वो अपने किस हथियार का क्या प्रयोग करते हैं। यह किसी की निजी पसंद है, समाज या फासीवादी सरकार यह तय नहीं करेगी कि कौन सा नक्सली किस वस्तु को कैसे प्रयोग में लाए।”

जंगल के नक्सली ‘डिल्डो’ से करते क्या हैं?

आम तौर पर इस ‘खिलौने’ का प्रयोग स्त्रियों में ज्यादा देखा गया है, लेकिन माओवादियों से हुई मुठभेड़ में इसका मिलना बताता है कि बात गंभीर है। मैं तो ऐसे मामलों में खुली दृष्टि रखता हूँ, अतः मैं इसे लिंग के दर्शन में नहीं बाँधना चाहता। इसलिए मैंने डिल्डो मामलों के जानकार अनमोल वामरतन से बात करने की कोशिश की।

“हम सब जानते हैं कि जंगलों से माओवादी कम होते जा रहे हैं। वामपंथनों की सप्लाय भी कम पड़ गई है क्योंकि विश्वविद्यालयों में राष्ट्रवादी विचारधारा के सुसंस्कृत लोग पहुँच रहे हैं। सीडी देने के बहाने आप उन्हें बुला नहीं सकते क्योंकि टोरेंट पर सब कुछ उपलब्ध है।”

“ऐसे में जब कोई सिधु कोडा, करम दा, कामरेड कुंदन, कामरेड सपन आदि कैंपस रिक्रूटमेंट हेतु कैंप लगाते हैं तो वामपंथनें उतनी संख्या में नहीं आतीं। जो आती हैं, उनको सीनियर नेता अपना शिकार बनाते हैं। ऐसे में जूनियरों में आंदोलन को ले कर काफी उदासीनता दिखने लगती है। इसी को जागृत रखने के लिए, क्रांति की मशाल जलाए रखने के लिए ऐसे यंत्रों का सहारा लिया जाता है।” अनमोल वामरतन ने बताया।

अब बात यह है कि ‘डिल्डो’ का प्रयोग वामपंथनों की जगह वामपंथी क्रांतिकारी तो नहीं कर रहे?

अनमोल बताते हैं, “हाँ करते हैं, इसमें दिक़्क़त क्या है? जंगल है, लोग एडवेंचरस हो ही जाते हैं। दूसरी बात, वामपंथी कौन सा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करते हैं कि उन्हें पता चले कि कौन-सी चीज का क्या काम है! कई बार सीनियर नेता भी उन्हीं से अपनी दैहिक जरूरतें पूरी कर लेते हैं, तो उन्होंने भी सोचा होगा कि क्रांति के मार्ग में ‘डिल्डो’ भी अपनी जगह बना ही लेगा।”

क्या है दूसरा पक्ष?

हमने दूसरा पक्ष जानने की कोशिश की तो मुझे कपूर्वानंद और फैजान भाई ही उचित लगे क्योंकि ये लोग धरती पर दिखती हर चीज या चर्चित विषय पर जानकारी रखते हैं। खास कर जब बात वामपंथियों की हो रही हो तो ये लोग टीवी पर इस पक्ष पर सारगर्भित वचनामृत से आम जन तक ज्ञानवृष्टि कर देते हैं। फोन किया तो दोनों ने मेरा नाम सुनते ही ‘भाग #₹& के’ कह कर गरियाते हुए फोन काट दिया।

फिर मैंने ‘नक्सली सेक्स मामलों के नए जानकार’ धैर्यकांत मिश्रा से बात की। उन्होंने तीन ‘ज्वाइंट’ का पैसा लेने के बाद कहा, “अजीत भारती जी, क्या एक नक्सली को शारीरिक सुख लेने का अधिकार नहीं है? आप भी तो अखंड सिंगल हैं, आपको तो कम-से-कम उस नक्सली का दर्द समझ में आना चाहिए। लानत है महाराज! आप उस नक्सली के मनोविज्ञान को समझिए जो एक तरफ़ फ़ासिवादी सरकार से लड़ भी रहा है और दूसरी तरफ़ अपने शरीर को वो सुख भी दे रहा जो उसका शरीर डिज़र्व करता है। ये डिल्डो सिर्फ़ डिल्डो नहीं, एक तमाचा है देश की मोड़ी सरकार पर जो अपने नक्सली नागरिकों को उसके सेक्सुअल राइट से कोसों दूर रखता है।”

“क्या इस डिल्डो के मिल जाने के बाद हमें सरकार से सवाल नहीं पूछना चाहिए? ‘जंगल में मंगल’ कह कर उपहास किया जा रहा है। एक डर का माहौल बनाया जा रहा है। मुझे तो डर है कि कल को अगर CRPF को नकली हाथ मिल जाए तो लोग उसका भी मजाक उड़ाएँगे लेकिन कोई भी एक नक्सली की पीड़ा को नहीं समझेगा। इस डिल्डो के मिलने के बाद मेरा दिल रो रहा है, मैं सो नहीं पा रहा हूँ और एक नागरिक होने के कारण आपको भी नहीं सोना चाहिए।”

“मुझे तो नींद नहीं आएगी क्योंकि मैं उस नक्सली की पीड़ा को अपनी पीड़ा से जोड़ कर देख रहा हूँ कि कितनी मेहनत से उसने यह वस्तु किसी वामपंथन के बैग से टपाई होगी, और अब वो भी पकड़ ली गई। आप यह सोचिए कि एक ही पकड़ी गई, बंदूकें तो कई हैं। इसका मतलब यह है कि कई लोग एक से ही काम चला रहे थे। यहाँ कोई मनरेगा नहीं है कि सबको इतने दिन संतुष्टि की गारंटी मिलेगी ही। सरकारों ने इस बुनियादी अधिकार के लिए कोई नीति नहीं बनाई है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।”

“2014 से पहले ऐसा नहीं होता था, जंगल में पूरी व्यवस्था रहती थी। लेकिन इस सरकार ने अडानी-अम्बानी को सारे जंगल बेच दिए हैं। कल को वहाँ नेचर फ़्रेश का तेल मिल जाए तो ज़्यादा हैरानी नहीं होगी। आखिर क्या हो रहा है इस देश में? पवन सिंह ने एक बार एक गीत गाया था – ‘ए राजा! चलऽ ना पिपरवा के तरवा ओहि जे सारा काम हो जाई’, लेकिन किसको पता था कि पिपरवा के तरवा फासीवादी सरकार की दमनकारी पुलिस पहले से बैठी होगी, निंदनीय!”

चूँकि धैर्यकांत ने ‘अखंड सिंगल’ वाली बात कह कर मेरी दुखती रग पर हाथ रख दिया, तो मैंने उसकी पेमेंट काट ली और ज्वाइंट में मंगोलियाई घोड़े की लीद मिला दी।

क्या कहते हैं संघी ट्रोल

चंदन नाम के एक स्वघोषित संघी ट्रोल ने नाम छपवाने की शर्त पर कहा, “मेरा नाम छापिएगा तब ही बोलूँगा। आपने यह देखा कि डिल्डो जंगल में मिलने का मतलब क्या है? इसका सीधा मतलब है कि वामपंथी न तो क्रांति कर पा रहे हैं न ही वामपंथनों को संतुष्ट कर पा रहे हैं। मैं ऊपर के लोगों की तरह यह मानने को तैयार नहीं हूँ कि पुरुष लोग इसका इस्तेमाल कर रहे होंगे।”

“इसका एक ही अर्थ है कि इस सरकार ने वामपंथियों का मनोबल ही नहीं, पौरुष भी तोड़ दिया है। अब, ऐसे टूटे हुए पौरुष वालों का जंगल के वीराने में वामपंथनें क्या करेंगी? इसलिए उन्होंने विश्वविद्यालय से आने वाली नई वामपंथनों से यह यंत्र मँगवाया और अपनी दैहिक जरूरतों को पूरा कर रही थीं। मैं उनका सम्मान करता हूँ कि उन्होंने खराब क्वालिटी के वामपंथियों से संसर्ग करने की जगह एक रबर के यंत्र को चुना। यही तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।”

“साथ ही, यूँ तो वामपंथियों को मच्छर भी काट ले तो मैं प्रसन्न होता हूँ, पर नारीवादी होने के कारण मेरा हृदय फफक-फफक कर चीत्कार रहा है कि पूरे जंगल में एक ही यंत्र से काम लेने वाली वामपंथनें अब क्या करेंगी? यह एक विचारणीय प्रश्न है। संभव है कि जेएनयू में इस पर एक सेमिनार आयोजित करवाया जाए और इसके समाधान पर प्रकाश डाला जाए।”

आगे क्या होगी वामपंथियों की नीति?

सीताराम केंचुली ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “सरकार ने अपने विचारों से अलग लोगों को नई तरह की हिंसा से दबाने की कोशिश की है। ठीक है कि फंड के अभाव में हमारे कार्यकर्ता थोड़े कमजोर हो गए हैं, तो शारीरिक संतुष्टि के लिए ये सब उपाय किए जा रहे हैं। आप ही बताइए कि बंदूक पकड़ने का तो समझ में आता है, मोबाइल का भी समझ सकते हैं कि षड्यंत्र रचने में सहयोगी होता है, लेकिन एक अदद डिल्डो को पकड़ कर इस फासीवादी सरकार ने कौन सी बहादुरी दिखाई है?”

वहीं, वरिष्ठ वामपंथन निंदा करैत ने केंचुली जी की बातों का समर्थन करते हुए कहा, “आगे से हमारे काडरों को हाशमी दवाखाना और अलीगढ़ के हकीम एम जान से सर्टिफिकेट ले कर ही फील्ड में पोस्टिंग दी जाएगी। ये सब पकड़ा जाता है, फिर न्यूज बना दी जाती है तो कार्यकर्ताओं में हीनभाव आ जाता है। जरूरत पड़े तो रामदेव जी के योग की वीडियो भी दिखाई जाएगी। क्रांति के मार्ग में मेन काम पर ही बाधा हो जाना, हर तरह से गलत है। चुनाव जीतें न जीतें, सरकारी कर्मचारियों के नरसंहार आदि के लिए तो काडर को मजबूत होना ही होगा।”

वहीं, अंधकार करैत ने भी अपनी राय देते हुए सरकार को जम कर कोसा, “मेरी तो उमर नहीं रही कि ऐसी तस्वीरें देख सकूँ, लेकिन मैं इतना अवश्य ही जानता हूँ कि सरकार को समझना चाहिए कि विरोध अपनी जगह है, और डिल्डो-वाइब्रेटर तक पकड़ कर प्रदर्शन करवा देना अलग। थोड़ा तो लिहाज करते मोदी जी… वामपंथ तो संख्या बल में भी कमजोर है, अब आप हमें कितना कोने में ढकेलिएगा साहब? हाँ हैं हम सेक्सुअली कमजोर, नहीं संतुष्ट कर पाते वामपंथनों को… हो गए खुश? क्या मिल गया इससे? 2024 में दस सीट और जीत जाओगे, लेकिन जिसका डिल्डो छिन गया है, उसकी हाय जरूर लगेगी।”

करैत द्वय ने जिस तरह से अपनी बात कही, कई लोगों को शक हुआ कि कहीं इन्हीं का तो नहीं पकड़ लिया गया। लेकिन, स्थानीय पुलिस ने बताया कि जाँच चल रही है, कई लोगों के फिंगर प्रिंट पाए गए हैं, अतः सही मालिक तक पहुँचने में समय लगेगा। उन्होंने आगे कहा, “हालाँकि, हमारी जाँच के दायरे में ये सब नहीं आता, न ही हमारी प्राथमिकता है ये सब सुलझाना।”

निष्कर्ष

कुल मिला कर बात यह है कि मैं जब वामपंथियों को कामपंथी कहा करता था, तो उसका आधार उनके ही भागे हुए महिला काडरों द्वारा अपने सीनियर माओवादियों के हाथों सेक्स स्लेव बन कर, बलात्कार और व्यवस्थित शारीरिक शोषण करने की खबरें हुआ करती थीं। लेकिन पिस्तौल-बंदूक के साथ दूसरे तरह की ‘बंदूकों’ का मिलना बताता है कि क्रांति की राह में सर्वहारा कभी प्राथमिकता होती ही नहीं, वामपंथी वस्तुतः सेक्स के भूखे, फ़्रस्ट्रेटेड, बलात्कारी और स्त्रियों को वासना की वस्तु समझने वाले लोग हैं, जिनकी सारी क्रांति एक डिल्डो या फिर किसी आदिवासी लड़की की योनि में सिमट कर जबरन स्खलित हो जाती है।

हमने छठ पर भी संयम रखा, लेकिन दिल्ली को बार-बार बंधक बनाया जा रहा: राष्ट्रपति कोविंद से कहा- जीवन के साथ खिलवाड़ रोकें

साल 2020 की शुरुआत से ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। पहले शाहीन बाग का प्रदर्शन, फिर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे, बाद में कोरोना की मार और अब किसान आंदोलन, दिल्ली की सड़कें यहाँ के निवासियों के लिए आए दिन असुविधा पैदा कर रही हैं।

ऐसे में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि दिल्लीवासियों को बार-बार बंधक बनाया जाना अब बंद हो और यहाँ की सड़कें खोली जाएँ।

भाजपा नेता ने इस पत्र को दिल्ली के लोगों की ओर से लिखने का दावा किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि वह अत्यंत असहाय होकर इस पत्र को एक आशा की किरण के रूप में लिख रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से कहा है कि दिल्ली के निवासी देश की राजधानी के नागरिक होने के बावजूद अपने मूल अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। यहाँ बार-बार उनसे दफ्तर जाने, दुकान खोलने, इलाज के लिए अस्पताल जाने, जैसे साधारण अधिकार छीने जा रहे हैं। 

पत्र में कपिल मिश्रा ने दिल्ली की वास्तविक स्थिति पर गौर करवाते हुए कहा कि कोरोना महामारी से बचने के लिए दूरी बनाना और भीड़भाड़ को एकत्रित न होने देना बेहद जरूरी है, लेकिन यहाँ इसका सरेआम उल्लंघन चल रहा है।

उन्होंने लिखा कि दिल्ली में स्थिति पहली बार ऐसी नहीं हुई है, बल्कि यहाँ बार-बार ऐसा हो रहा है। साल की शुरुआत में दिल्ली को जगह-जगह शाहीन बाग आंदोलन के नाम पर बंधक बनाया गया और राजधानी में नफरत व हिंसा का माहौल बनाया गया। बाद में स्वंय उच्चतम न्यायालय ने भी इस प्रकार सड़कों को बंद करने को गैर कानूनी घोषित किया। लेकिन, अब पिछले दिनों से कई राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता दिल्ली को दोबारा बंधक बना रहे हैं, जिससे दिल्ली वासियों की बुनियादी जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

कपिल मिश्रा ने कोरोना महामारी में दिल्ली की स्थिति पर चिंता जाहिर की और राष्ट्रपति को बताया कि यहाँ लगातार सरकार व कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करके बुजुर्ग माता-पिता और छोटे-छोटे बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

उन्होंने राष्ट्रपति से कहा कि दिल्ली वालों ने बहुत संयम का परिचय दे दिया। सरकारी निर्देशों को मानते हुए छठ के त्योहार तक को सार्वजनिक तौर पर नहीं मनाया। मगर, आज दिल्ली वालों को चारों ओर से बंद कर दिया गया है। शहर में बिना टेस्टिंग के भीड़ की इकट्ठा हो रही है और दिल्ली सरकार पोस्टर, बैनर, होर्डिंग लगाकर लोगों को दिल्ली में बुला रही है।

पत्र में उन्होंने कहा है कि दिल्ली वासियों का जीवन भी उतना ही महत्व रखता है, जितना अन्य राज्य के लोगों की जिंदगी। यहाँ के नागरिकों के मूल अधिकारों को भी अन्य राज्यों के लोगों की तरह संविधान का संरक्षण प्राप्त है। लिहाजा दिल्ली वासियों की जिंदगी को इस प्रकार मौत के मुँह में बार-बार फेंके जाने के ख़िलाफ ठोस व निर्णायक निर्णय लिए जाएँ। साथ ही राजनीति के लिए करोड़ों लोगों की जिंदगी से ख़िलवाड़ न किया जाए।

दुनिया सबसे सस्ते और सुरक्षित वैक्सीन को लेकर भारत की ओर देख रही, हमारे पास टीकाकरण का अनुभव: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (दिसंबर 04, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस पर सर्वदलीय बैठक को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अभी अन्य देशों की कई वैक्सीन के नाम हम बाजार में सुन रहे हैं, लेकिन दुनिया कोरोनो वायरस बीमारी (COVID-19) के सबसे सस्ते और सबसे सुरक्षित टीके के इन्तजार में है और भारत की ओर देख रही है।

पीएम मोदी ने देश में COVID-19 की स्थिति पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक के दौरान कहा, “हमारे वैज्ञानिक COVID-19 के टीके बनाने के अपने प्रयास में सफल होने के लिए बहुत आश्वस्त हैं। दुनिया सबसे सस्ते और सुरक्षित वैक्सीन पर नजर रखे हुए है। यही कारण है कि दुनिया भारत को देख रही है।”

बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार वैक्सीन की कीमत को लेकर राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर रही है और इसके बारे में निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में रख कर लिया जाएगा। उन्होंने सभी नेताओं से लिखित रूप में अपने सुझाव भेजने का आग्रह किया ताकि उन पर गंभीरता से विचार किया जाए।

पीएम मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से कहा, “केंद्र और राज्य सरकार की टीमें एक साथ टीका वितरण के लिए काम कर रही हैं। भारत में अन्य देशों की तुलना में वैक्सीन वितरण की क्षमता बेहतर है। हमारे पास टीकाकरण के क्षेत्र में बहुत बड़ा और अनुभवी नेटवर्क है। हम इसका पूरा फायदा उठाएँगे।”

पहले वैक्सीन किसे उपलब्ध कराई जाएगी, इस पर चर्चा के बीच पीएम मोदी ने कहा कि जैसे ही वैज्ञानिक हरी झंडी देंगे, भारत में टीकाकरण शुरू हो जाएगा। हेल्थकेयर, फ्रंटलाइन वर्कर्स और गंभीर बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इसी पर आगे बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा- “करीब 8 ऐसी संभावित वैक्सीन हैं, जो ट्रायल के अलग-अलग चरण में हैं और जिनका उत्पादन भारत में ही होना है। भारत की अपनी 3 वैक्सीन का ट्रायल अलग-अलग चरणों में है। विशेषज्ञ ये मान रहे हैं कि वैक्सीन के लिए बहुत ज़्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।”

अपने सम्बोधन में पीएम मोदी ने बताया कि भारत ने एक विशेष सॉफ्टवेयर भी बनाया है – ‘Co-WiN’, जिसमें आम लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन का उपलब्ध स्टॉक और उससे जुड़ी सभी जानकारी उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा,

“एक नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में केंद्र के लोग, राज्य सरकारों के लोग और एक्सपर्ट हैं। कोरोना वैक्सीन के वितरण पर यही ग्रुप सामूहिक रूप से निर्णय लेगा।”

PM मोदी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में विकसित देशों को भी काफी मुश्किल हुई है लेकिन भारत ने एक राष्ट्र के तौर पर बेहतरीन काम किया है। राजनीतिक दलों को वैक्सीन वितरण से जुड़ी किसी भी तरह की अफवाह फैलने से रोकना चाहिए।

हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि भारतीयों का साहस इस लड़ाई के दौरान अदम्य और अभूतपूर्व रहा है। हमने अपने साथ, अन्य देशों की भी मदद का प्रयास किया। अब जब हम वैक्सीन के मुहाने पर खड़े हैं तो वही वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। टीकाकरण की अफवाहें जनहित और राष्ट्रहित, दोनों तरह से नुकसानदेह हैं। हमें लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना होगा।

कंगना रनौत का ट्विटर एकाउंट रद्द कराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका, महाराष्ट्र सरकार को कहा था- ‘पप्पू सेना’

बॉम्बे उच्च न्यायालय में अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध महाराष्ट्र सरकार को निशाना बनाते हुए ट्वीट करने के लिए याचिका दायर की गई है। दरअसल, 17 अक्टूबर को किए गए ट्वीट में कंगना रनौत ने महाराष्ट्र सरकार पर टिप्पणी करते हुए की जम कर आलोचना की थी। इसके पहले बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध एक एफ़आईआर दर्ज की गई थी। 

दायर की गई याचिका में कंगना रनौत द्वारा किए गए ट्वीट के लिए अदालत के समक्ष उनके ट्विटर एकाउंट को रद्द करने की माँग उठाई गई थी। 

याचिका में ऐसा कहा गया था कि कंगना रनौत ने अपने ट्वीट में न्यायपालिका पर अभद्र टिप्पणी करते हुए महाराष्ट्र सरकार को ‘पप्पू सेना’ कह कर संबोधित किया था। याचिका में आगे कहा गया था कि यह ट्वीट अदालत की आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है। दरअसल, नवरात्र के दौरान कंगना ने खुद के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज किए जाने के बाद एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र की गठबंधन वाली शिवसेना सरकार की जम कर आलोचना की थी। 

कंगना ने अपने ट्वीट में लिखा, “और कौन नवरात्र में व्रत रख रहा है? आज के आयोजन की कुछ तस्वीरें क्योंकि अब मुझ पर एक और एफ़आईआर दर्ज की जा चुकी है। महाराष्ट्र में ‘पप्पू सेना’ मुझ पर हावी होने की कोशिश कर रही है। मुझे इतना याद करने की ज़रूरत नहीं है, मैं जल्द ही वहाँ पहुँच जाऊँगी।”

बीते दिन कंगना रनौत को एक अधिवक्ता की तरफ से लीगल नोटिस भेजा गया था क्योंकि उन्होंने कृषि सुधार क़ानूनों के लिए जारी किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाली एक वृद्ध महिला को शाहीन बाग़ की मशहूर बिलकिस बानो समझ लिया था। 

किसानों ने की कंगना रनौत और दिलजीत के बीच मध्यस्थता की पेशकश, समझौता न होने पर दी प्रदर्शन की चेतावनी

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और पंजाबी गायक और ‘श्वेत महिलाओं को ऑनलाइन स्टाक’ करने वाले दिलजीत दोसाँझ के बीच ट्विटर पर जारी शास्त्रार्थ अब ‘ऑनलाइन गतिरोध’ का मामला बन चुका है। कृषि कानूनों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे किसानों ने इन दोनों कलाकारों पर आरोप लगाया है कि यह उनके धरने से ध्यान भटकाने के लिए करण जौहर के काम देने के तरीकों को राष्ट्रीय चर्चा बनाकर इस तरह का ‘सीन तैयार’ कर रहे हैं।

गौरतलब है कि बृहस्पतिवार शाम ट्विटर पर छिड़ी एक जंग में कंगना रनौत ने दिलजीत दोसाँझ की जिस तरह से वर्चुअल कम्बल पिटाई की, उसने पूरे देश का ध्यान भटकाया और किसानों का मुद्दा हासिए पर धकेल दिया। इस पर शाहीन बाग़ फेम बिलकिस दादी का भी बड़ा बयान सामने आया है। बिलकिस दादी का कहना है कि ‘वो तो धरनों की आदत सी पड़ गो है, वरना असली ‘फन’ तो इसी लड़ाई में आरो है।’

किसान अब केंद्र सरकार से माँग कर रहे हैं कि वो किसानों के मुद्दों से पहले ट्विटर पर कंगना रनौत और दिलजीत दोसाँझ के बीच चलने वाली जुबानी जंग पर विराम लगाएँ। किसानों की एक नई टुकड़ी बुला ली गई है और केंद्र सरकार को सख्त चेतावनी दे दी गई है कि अगर एक बार फिर कंगना रनौत और दिलजीत ट्विटर पर उलझते हैं तो किसानों की नई टुकड़ी धरने पर बैठ जाएगी।

कुछ लोगों का दावा है कि दिलजीत दोसाँझ की जिस तरह से वर्चुअल कुटाई कंगना रनौत ने की है, उसे देखकर उन्हें रामलीला का वो दृश्य याद आ गया, जब बाली ने सुग्रीव के ललकारने पर उसकी जमकर धुलाई की थी। इस पर विवादित मजहबी आरजे सायमा ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए मशहूर गजल गायक अल्ताफ राजा की नज्म को याद करते हुए कहा – “वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है।”

किसानों ने यह भी सुझाव दिया है कि अगर केंद्र सरकार चाहे तो किसान कंगना रनौत और दिलजीत के बीच मध्यस्थता करने को भी राजी हैं। पहले से ही प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि वो अपनी समस्याओं से क्या कम परेशान हैं जो अब उन्हें मिलने वाली अटेंशन को करण जौहर के काम देने के तरीकों को उछालकर शिफ्ट किया जा रहा है।

इस विषय पर जब उन्होंने पूछा कि अपनी माँगों के अलावा उन्हें और क्या बातें परेशान कर रही हैं तो इस पर अपनी जगुआर के सनरूफ से गर्दन बाहर निकालकर एक ‘किसान पुत्र’ ने कहा कि उन्हें संदेह है कि उनके प्रदर्शन में कुछ समाजवादियों ने अपनी नाक घुसानी शुरू कर दी है। इसके प्रमाण में उन्होंने जिस अखबार की कटिंग को हवा में उछाला, उसका शीर्षक था- “किसानों के 3 मोबाइल और 40 टोंटियाँ चोरी।”

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टोंटी चोरी की अपुष्ट किन्तु ‘वायरल’ खबर

हालाँकि, इस खबर को पुष्टी के लिए सॉल्ट न्यूज़ के फैक्ट चेकर जुब्बू मियाँ को भेज दिया गया है। टोंटी चोरी का समाजवाद से क्या सम्बन्ध हो सकता है इसका पता लगाने के लिए फैक्ट चेकर ज़ुब्बू का कहना है कि वो रिवर्स इमेज सर्च कर जल्द ही इस सम्बन्ध का पता लगा लेंगे।

PFI के औरंगाबाद कार्यालय में छापा: कट्टरपंथी भीड़ ने ED अधिकारियों को धमकाया, लगे ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अनेक टीमों ने कल (3 दिसंबर 2020) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) के कई ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया। पीएफ़आई पर विदेशी फंडिंग लेने और विरोध प्रदर्शन की आड़ में षड्यंत्र रचने का आरोप है जिसके चलते ईडी ने कार्रवाई की। इसी कड़ी में ईडी की टीम ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में भी छापा मारा जिसके बाद अलग ही नज़ारा सामने आया। वहाँ ईडी की कार्रवाई के बाद पीएफ़आई के लोगों ने ईडी के अधिकारियों को धमकाते हुए रैली निकाली और संगठन के समर्थन में ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे भी लगाए। जिसे वीडियो में 10.23 और 11.10 पर सुना जा सकता है।

ईडी ने अपने छापेमारी अभियान के तहत महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर में पीएफ़आई के कार्यालय पर छापा मारा। इस कार्रवाई के कुछ ही देर बाद पीएफ़आई के समर्थन में कट्टरपंथी भीड़ भी नज़र आई। इस भीड़ ने सार्वजनिक रूप से पीएफ़आई के झंडे भी लहराए, अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से धमकी दी और संगठन के समर्थन में नारे भी लगाए। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें लोग देश के अन्य संगठनों के लिए मुर्दाबाद और पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया के लिए ज़िंदाबाद का नारा लगा रहे हैं। 

इस वीडियो में मौजूद लोगों को ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का नारा लगाते हुए भी सुना जा सकता है। इसी बीच एक व्यक्ति मीडिया वालों से बात करते हुए मोदी सरकार पर आपत्तिजनक टिप्पणी करता है और कहता है कि हम रास्ते जाम कर सकते हैं। वीडियो में ही एक और व्यक्ति कहता है कि पीएफ़आई पर आँच भी आ गई तो औरंगाबाद की बस्तियों से आदमी, औरत और बच्चे सभी निकल कर आएँगे और सरकार को मुँह तोड़ जवाब देंगे। फ़िलहाल इस वीडियो को लेकर पूरे सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।              

पिछले कुछ समय में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) का नाम विदेशी फंडिंग से लेकर विरोध प्रदर्शन की आड़ में षड्यंत्र रचने में सामने आया है। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) देश के अलग-अलग क्षेत्रों में छापेमारी अभियान चला रही है। ईडी के समूहों ने 9 राज्यों में स्थित कुल 26 ठिकानों पर छापा मारा था, इसी बीच उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बाराबंकी में भी छापा मारा गया। 

इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कल ही पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) के नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेम्बर करमना अशरफ मौलवी के तिरुअनंतपुरम स्थित पूंथुरा आवास पर छापा मारा था। ईडी ने साल 2018 के दौरान पीएफ़आई के कई सदस्यों पर धन शोधन निरोधक अधिनियम (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया था। इसके अलावा कोज़ीकोड़े, मल्लापुरम और एर्नाकुलम स्थित पीएफ़आई नेताओं के आवासों पर भी छापा मारा गया।

हैदराबाद निकाय चुनाव में भाजपा का अप्रत्याशित प्रदर्शन: शुरूआती रुझानों में 80 सीटों पर बढ़त, TRS 30 सीटों पर आगे

हाल ही में हुए ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव (जीएचएमसी) की मतगणना जारी है। शुरूआती रुझान भारतीय जनता पार्टी के लिए अप्रत्याशित रूप से सकारात्मक परिणाम लेकर आए हैं। भाजपा ने शुरूआती रुझानों में ही भारी बढ़त दर्ज कर ली है। असदुद्दीन ओवैसी और उनके राजनीति दल एआईएमआईएम का गढ़ माने जाने वाले हैदराबाद में भाजपा लगभग 75 से 80 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं प्रदेश का सत्ताधारी दल तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) लगभग 30 से 35 सीटों पर आगे चल रहा है। 

भाजपा ने हैदराबाद के निकाय चुनावों में पूरे संगठन की ताकत झोंक दी थी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम फायरब्रांड नेताओं ने हैदराबाद के कई क्षेत्रों में जनसभाएँ और रोड शो किए थे। भाजपा के इन राजनीतिक आयोजनों में भी काफी भीड़ नज़र आई थी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुराने हैदराबाद क्षेत्र में कई जनसभाओं के दौरान भाषण भी दिए थे। 

भाषण के दौरान उन्होंने हैदराबाद का नाम बदलने का ज़िक्र छेड़ा था जो काफी सुर्ख़ियों में बना हुआ था। इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह ने भी निकाय चुनाव के ठीक पहले हैदराबाद का दौरा किया था, उन्होंने कहा था कि भाजपा के चुनाव जीतने पर हैदराबाद को निज़ाम-नवाब कल्चर से आज़ादी दिलायेंगे। इसके अलावा शहर को तकनीक के हब के रूप में स्थापित करेंगे। 

साल 2016 के हैदराबाद निकाय चुनावों में भाजपा को सिर्फ 5 सीटें हासिल हुई थीं। इस चुनाव में आज कुल 1122 प्रत्याशियों के भाग्य का निर्णय होना है। ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव की मतगणना सुबह आठ बजे से ही शुरू कर दी गई थी, पहले पेपर बैलेट की गणना की जा रही है। एक घंटे के भीतर 10 सीटों का रुझान आने के दौरान ही भाजपा 7 सीटों पर आगे चल रही थी और टीआरएस ने सिर्फ 3 सीटों पर बढ़त बनाई थी। 

दूसरा घंटा पूरा होने पर भाजपा ने लगभग 25 से 30 सीटों पर बढ़त बना ली थी और टीआरएस 10 सीटों पर आगे थी। इसके कुछ समय बाद के रुझान में भाजपा 40 सीटों पर आगे चल रही थी और सत्ताधारी दल टीआरएस कुल 14 सीटों पर आगे चल रही थी। ख़बर लिखे जाने तक सामने आए रुझानों की बात करें भाजपा लगभग 80 सीटों पर आगे चल रही थी। वहीं प्रदेश का सत्ताधारी दल टीआरएस ने 32 और एआईएमआईएम ने 14 सीटों पर बढ़त बनाई थी। फ़िलहाल यह शुरूआती रुझान हैं, कुछ घंटों के बाद ही चुनावी नतीजों की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।               

घर के बहाने जुबैर साथ ले गया, जावेद ने नाबालिग राहुल को चाकू से मार डाला: देखें हत्या का दिल दहला देने वाला वीडियो

17 साल के नाबालिग लड़के की बेरहमी से चाकुओं से गोद कर हत्या का मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के रायपुर में जावेद और जुबैर ने वारदात को अंजाम देने के बाद शव को रास्ते पर ही फेंक दिया और घटनास्थल से फरार हो गए। हत्या की इस घटना में दो अन्य आरोपित भी शामिल हैं, पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है। 

अब तक पुलिस जावेद और जुबैर को इस मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। घटना के वीडियो साफ़ देखा जा सकता है कि जावेद पूरी निर्दयता से नाबालिग लड़के पर धारदार हथियार से लगातार कई वार करता है। जिसकी वजह से नाबालिग लड़के की मौके पर ही मृत्यु हो गई, फ़िलहाल पुलिस इस मामले के अन्य पहलुओं पर जाँच कर रही है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ राहुल तांडी (17), निवासी टिकरापारा नेहरु नगर बीते रविवार की रात लगभग 12 बजे अपने एक साथी गोपी के साथ नशे की हालत में बूढ़ा तालाब के नज़दीक बैठा था। इसके बाद जावेद नाम का युवक उनके पास पहुँचा और राहुल से बोरियाखुर्द तक स्कूटी से छोड़ने की बात कही। राहुल, गोपी और जुबैर जैसे ही बोरियाखुर्द आरडीए कॉलोनी के नज़दीक पहुँचे, वहाँ पर घटना का मुख्य आरोपित जावेद पहले से ही मौजूद था। 

जावेद ने तुरंत ही राहुल पर हमला कर दिया, पहले उसे स्कूटी से धक्का देकर घसीटा और इसके बाद उस पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। घटना के वीडियो में भी देखा जा सकता है कि जावेद नाबालिग लड़के पर बेरहमी से वार करता है। इन हमलों की वजह से राहुल की मौके पर ही मृत्यु ही गई, जिसके बाद जावेद और जुबैर मौक़ा-ए-वारदात से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि घटना का वीडियो जावेद के साथी जुबैर ने ही बनाया है। फ़िलहाल पुलिस ने इन दोनों को गिरफ्त में ले लिया है मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।  

यूपी PFI अध्यक्ष नसीम अहमद के घर से ED ने जब्त किए संदिग्ध दस्तावेज़, बाराबंकी में मुदस्सिर के आवास पर भी छापा

पिछले कुछ समय में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) का नाम विदेशी फंडिंग से लेकर विरोध प्रदर्शन की आड़ में षड्यंत्र रचने में सामने आया है। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) देश के अलग-अलग क्षेत्रों में छापेमारी अभियान चला रही है। ईडी के समूहों ने 8 राज्यों में स्थित कुल 26 ठिकानों पर छापा मारा, इसी बीच उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बाराबंकी में भी छापा मारा गया। 

ईडी की टीम उत्तर प्रदेश पीएफ़आई अध्यक्ष, नसीम अहमद के इंदिरानगर लखनऊ स्थित आवास पर पहुँची। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उसके आवास से संदिग्ध दस्तावेज़ भी बरामद किए गए हैं हालाँकि, नसीम अहमद छापेमारी के दौरान अपने घर पर मौजूद नहीं था। नसीम अहमद पर पिछले वर्ष हुए सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन की आड़ में बड़ी साज़िश रचने का आरोप है। फ़िलहाल ईडी की टीम नसीम अहमद को तलाश रही है।

लखनऊ के अलावा ईडी की टीम ने बाराबंकी में भी छापा मारा, बाराबंकी में पीएफ़आई के सदस्य मुदस्सिर के आवास पर छापा मारा गया। मुदस्सिर पर आरोप है कि उसने सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान रुपए लेकर माहौल गड़बड़ करने का प्रयास किया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मुदस्सिर पर कुल 80 हज़ार रुपए लेकर इन षड्यंत्रों को अंजाम देने आरोप है। उत्तर प्रदेश के अलावा केरल के 6, तमिलनाडु के 5, कर्नाटक के 3, दिल्ली के 2, बिहार के 2, महाराष्ट्र और राजस्थान के 1-1 ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी का अभियान चलाया। 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कल ही पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) के नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेम्बर करमना अशरफ मौलवी के तिरुअनंतपुरम स्थित पूंथुरा आवास पर छापा मारा था। ईडी ने साल 2018 के दौरान पीएफ़आई के कई सदस्यों पर धन शोधन निरोधक अधिनियम (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया था। इसके अलावा कोज़ीकोड़े, मल्लापुरम और एर्नाकुलम स्थित पीएफ़आई नेताओं के आवासों पर भी छापा मारा गया। 

बता दें कि पीएफ़आई और एसडीपीआई अपनी अराजक गतिविधियों, आपराधिक कृत्यों, जबरन धर्मांतरण और देश विरोधी गतिविधियों के चलते शुरुआत से ही संदेह और जाँच के दायरे में रहा है। पिछले साल दिसंबर महीने के दौरान हुए सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में पीएफ़आई पर फंडिंग उपलब्ध कराने और दंगा भड़काने का आरोप लगा था। इस साल के जनवरी महीने में केंद्रीय जाँच एजेंसी ने इस संबंध में कई दस्तावेज़ भी पेश किए थे जिसमें पीएफ़आई के खातों और प्रदर्शनकारियों के खातों के बीच लेन-देन की पूरी जानकारी थी।