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‘माँ! तुम छठ की तैयारी करो, दिल्ली में तुम्हारा बेटा बैठा है’: PM मोदी ने सुनाई बूढ़ी माँ की कहानी, ‘डबल-डबल युवराज’ पर कसा तंज

बिहार में दूसरे चरण के चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (नवंबर 1, 2020) को बिहार के छपरा में चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि चुनाव सभाएँ हमने पहले भी देखी हैं, चुनाव में कितनी भी गर्मी आई हो, चुनाव कितना भी नजदीक क्यों न आ गया हो, तो भी सुबह 10 बजे से पहले इतनी बड़ी विशाल रैली कभी संभव नहीं होती। उन्होंने छठ पर्व की भी चर्चा की। उन्होंने आशा जताई कि पहले चरण के मतदान से साफ नजर आ रहा है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार दोबारा बन रही है।

पीएम मोदी ने बिहार के छपरा में कहा कि पहले चरण के मतदान में जनता ने एनडीए को जो भारी समर्थन के संकेत दिए हैं और जिन्होंने भी मतदान किया है, उनका वो अभिनंदन करते हैं। साथ ही कहा कि भाजपा के लिए, एनडीए के लिए, जनता का ये प्रेम कुछ लोगों को अच्छा नहीं लग रहा है, रात को उन्हें नींद नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि उनकी हताशा-निराशा, बौखलाहट, गुस्सा, अब बिहार की जनता बराबर देख रही है। चेहरे से हँसी गायब हो गई है।

बकौल पीएम मोदी, बिहार के लोगों को और उनकी भावनाओं को ये लोग कभी समझ नहीं सकते। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि ये अपने परिवार के लिए पैदा हुए हैं, अपने परिवार के लिए जी रहे हैं, अपने परिवार के लिए ही जूझ रहे हैं। उन्हें न बिहार से कोई लेना देना है और न बिहार की युवा पीढ़ी से कोई लेना देना है। उन्होंने कहा कि आज बिहार के सामने, डबल इंजन की सरकार है, तो दूसरी तरफ डबल-डबल युवराज भी हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि उनमें से एक तो जंगलराज के युवराज भी हैं। साथ ही आश्वासन दिया कि डबल इंजन वाली एनडीए सरकार, बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, तो ये डबल-डबल युवराज अपने-अपने सिंहासन को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। पीएम ने याद दिलाया कि 3-4 साल पहले यूपी के चुनाव में भी डबल-डबल युवराज बस के ऊपर चढ़ कर लोगों के सामने हाथ हिला रहे थे। यूपी की जनता ने वहाँ उन्हें घर लौटा दिया था।

उन्होंने जनता को चेताया कि वहाँ के एक युवराज अब जंगलराज के युवराज से मिल गए हैं। साथ ही आशा जताई कि यूपी में जो हाल डबल-डबल युवराज का हुआ, वो ही बिहार में होगा। महामारी की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में आज कोई ऐसा नहीं है, जिसे कोरोना ने प्रभावित न किया हो, जिसका इसने ने नुकसान न किया हो। उन्होंने याद दिलाया कि एनडीए की सरकार ने कोरोना की शुरुआत से ही प्रयास किया है कि वो इस संकटकाल में देश के गरीब, बिहार के गरीब के साथ खड़ी रहे।

बिहार के साथ अपने लगाव की बात करते हुए छपरा में पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के काल में किसी माँ को ये चिंता करने की जरूरत नहीं है कि छठ पूजा को कैसे मनाएँगे। पीएम मोदी ने बिहार के छपरा में कहा, “अरे मेरी माँ! आपने अपने बेटे को दिल्ली मैं बिठाया है, तो क्या वो छठ की चिंता नहीं करेगा! माँ! तुम छठ की तैयारी करो, दिल्ली में तुम्हारा बेटा बैठा है।” बता दें कि छठ इस बार 20-21 नवंबर को है। उन्होंने कहा कि आज के नौजवान को खुद से पूछना चाहिए कि बड़ी-बड़ी परियोजनाएँ जो बिहार के लिए इतनी जरूरी थीं, वो बरसों तक क्यों अटकी रहीं?

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि बिहार के पास सामर्थ्य तब भी भरपूर था। सरकारों के पास पैसा तब भी पर्याप्त था। फर्क सिर्फ इतना था कि तब बिहार में जंगलराज था। उन्होंने जंगलराज की यादें ताजा करते हुए पूछा कि पुल बनाने के लिए कौन काम करेगा जब इंजीनियर सुरक्षित नहीं हो? कौन सड़क बनाएगा जब ठेकेदार की जान चौबीसों घंटे खतरे में हो। उन्होंने याद दिलाया कि किसी कंपनी को अगर कोई काम मिलता भी था, तो वो यहाँ काम शुरू करने से पहले सौ बार सोचती थी।

छठ पर्व की चर्चा के बाद एक इमोशनल घटना का जिक्र करते हुए छपरा की चुनावी जनसभा में पीएम मोदी ने बताया कि बिहार के एक गाँव की किन्हीं बुजुर्ग महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसमें एक व्यक्ति उन महिला से पूछता है कि मोदी को काहे खातिर वोट देबो। आखिर मोदी ने तुम्हारी खातिर किया क्या है? पीएम ने बताया कि उस वीडियो ने उन्हें प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, “उस गाँव की महिला, उस माँ ने उसके सवाल का एक साँस में जवाब देना शुरू कर दिया। जब वो जवाब दे रही थी तो वो जो सवाल पूछने वाला था, उसका चेहरा लटक गया।

बता दें कि उक्त वीडियो में उस महिला ने बिना लाग लपेट के कहा “मोदी हमारा के नल देहलन, लाइन देहलन, बिजली देहलन, मोदी हमरा के कोटा देहलन, राशन देहलन, पेंसिन देहलन। मोदी हमरा के गैस देहलन। उनका क्यों वोट न देबे, का तौहर के देब।” पीएम ने स्वीकार किया कि ये भी सच है कि बिहार के हज़ारों युवाओं का अलग-अलग कंपीटिशन की कोचिंग में, तैयारी में ऊर्जा, समय और पैसा दोनों लगता है। अब रेलवे, बैंकिंग और ऐसी अनेक सरकारी भर्तियों के लिए एक ही एंट्रेंस एग्ज़ाम की व्यवस्था की जा रही है।

प्रधानमंत्री ने चेताया कि देश में चौतरफा हो रहे विकास के बीच, आप सभी को उन ताकतों से भी सावधान रहना है, जो अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित के खिलाफ जाने से भी बाज नहीं आतीं। ये वो लोग हैं जो देश के वीर जवानों के बलिदान में भी अपना फायदा देखने लगते हैं। उन्होंने पाकिस्तानी संसद के वायरल वीडियो की चर्चा करते हुए कहा कि 2-3 दिन पहले पड़ोसी देश ने पुलवामा हमले की सच्चाई को स्वीकारा है। बकौल पीएम, इस सच्चाई ने उन लोगों के चेहरे से नकाब हटा दिया, जो हमले के बाद अफवाहें फैला रहे थे।

जुमे की नमाज के बाद सीरिया के ऑर्थोडॉक्स चर्च पर इस्लामी भीड़ का हमला: क्रॉस उखाड़ कर फेंका

जहाँ दुनिया भर में फ्रांस के खिलाफ मुस्लिम मुल्क माहौल बनाने में लगे हुए हैं, वहीं अब इसी क्रम में इसके धर्मस्थलों को भी निशाना बनाया जा रहा है। अब सीरिया में एक ऑर्थोडॉक्स चर्च पर इस्लामी भीड़ ने हमला कर दिया और वहाँ स्थित क्रॉस को उखाड़ फेंका। ये हमला ‘सेंट सेर्गिअस एंड बच्चुस ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च’ में हुआ, जो रक़्क़ा के पास स्थित तब्क़ा शहर में स्थित है। शुक्रवार को जुमे के नमाज के बाद इस्लामी भीड़ ने ये हमला किया।

एक स्थानीय मस्जिद में नमाज के बाद भीड़ सीरिया के इस चर्च की ओर निकली और इस हमले को अंजाम दिया। इसे फ्रांस के खिलाफ दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के रूप में देखा जा रहा है। जहाँ ये हमला हुआ, वो इलाका कुर्दिश नेतृत्व वाले सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज के नियंत्रण में है, जिसे अमेरिका का समर्थन प्राप्त है। इसीलिए, इसे मुस्लिम भीड़ का ईसाईयों के खिलाफ हमला भी माना जा रहा है।

सीरिया के जिस चर्च पर ये हमला हुआ, उसे आतंकी संगठन ISIS पहले ही तबाह कर चुका है। तब्क़ा की स्थानीय सरकार डमस्कस की सरकार से स्वतंत्र रूप से खुद को संचालित करती है और उसने कुछ महीनों पहले ही ISIS द्वारा उखाड़ कर फेंके गए क्रॉस को फिर से स्थापित करवाया था। ईसाई शरणार्थी शहर में वापस आएँ, इसीलिए ये कदम उठाया गया था। ISIS अब तुर्की के साथ मिल कर एक कट्टरवादी समूह को ऐसी हरकतें करने के लिए भड़का रहा है।

‘पेट्रियोटिक वॉइसेस’ की अध्यक्ष नदीन मेंज़ा ने कहा कि वो 1 दिन पहले ही यहाँ आई थी और अब इसका क्रॉस गायब है, जो डर कायम करने के लिए किया गया है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि कुछ समूह अमेरिका समर्थित सुरक्षा एजेंसियों की मदद भी कर रहे हैं, ताकि ISIS द्वारा ध्वस्त की गई संरचनाओं का पुनर्निर्माण हो सके। इससे पहले यहाँ कई चर्च हुआ करते थे और यहाँ ऑर्थोडॉक्स ईसाईयों की अच्छी-खासी संख्या थी।

बता दें कि फ्रांस के विरोध में चल रहे विरोध प्रदर्शन से भारत भी अछूता नहीं है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने माँग की है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव फ्रेंच प्रॉडक्ट्स को राज्य में प्रतिबंधित करें। ‘तेलंगाना कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक सेल’ के अध्यक्ष शेख अब्दुला सोहैल ने कई मुस्लिमों के साथ शुक्रवार (अक्टूबर 30, 2020) को एर्रागड्डा के प्रभात नगर स्थित मस्जिद-ए-रहमानिया के पास जुमे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने बयान में इस्लाम का अपमान किया है।

‘तुम सिखाते हो कि महिलाओं के पास पुरुषों की तरह अधिकार नहीं है’: फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा- समझ लो, ये हमारे संस्कार नहीं

फ्रांस में लगातार हो रहे आतंकी हमलों के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि वो दुनिया भर में मुस्लिमों के साथ तनाव कम करना चाहते हैं और माना कि पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून शॉकिंग हो सकता है, लेकिन साथ ही इसके पीछे फ्रांस की सरकार का हाथ होने को झूठ बताया। उन्होंने कहा कि वो मुस्लिमों की संवेदनाओं को समझते हैं लेकिन जिस ‘इस्लामी कट्टरवाद’ से उनकी लड़ाई है, वो पूरी मानवता के लिए खतरा है।

उन्होंने कहा कि आज फ्रांस के खिलाफ दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच फ़िलहाल उनका दो ही कर्तव्य है – शांति को बढ़ावा देना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना। उन्होंने कहा कि वो अपने देश में अभिव्यक्ति की, बोलने की, लिखने की, सोचने की और चित्र बनाने की स्वतंत्रता की रक्षा करते रहेंगे। उन्होंने उन नेताओं को भी आड़े हाथों लिया, जो फ्रांस को लेकर झूठ फैला रहे हैं।

इमैनुएल मैक्रों ने कहा, “मेरे शब्दों को लेकर झूठ बोला गया और मेरे बयानों के साथ छेड़छाड़ हुई। लोगों ने इसी पर प्रतिक्रिया दी क्योंकि उन्हें लगा कि मैं उन कार्टून्स का समर्थन करता हूँ और इन सबके पीछे हमारी सरकार ही है।” उन्होंने कहा कि वो कार्टून्स सरकारी प्रोजेक्ट नहीं हैं बल्कि स्वतंत्र और मुक्त मीडिया संस्थान के हैं, जो सरकार से सम्बद्ध नहीं हैं। उन्होंने हाल ही में इस्लाम का फ्रांस के साथ तालमेल बिठाने के लिए मजहब में सुधारों की बात कही थी।

उन्होंने कहा कि आज इस्लाम के नाम पर हिंसा और हत्याओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही कहा कि आज ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम के नाम पर हिंसक अभियान चलाते हुए हत्याओं और नरसंहार को जायज ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद इस्लाम की भी समस्या है क्योंकि इसके 80% पीड़ित मुस्लिम ही हैं और वो इसके पहले पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ जंग जारी रहेगी।

इस्लामी कट्टरवाद पर बोलते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि वो शिक्षा में विश्वास रखते हैं और मानते हैं कि महिलाओं के पास भी वही अधिकार हैं, जो पुरुषों के पास। साथ ही कहा कि जो लोग ऐसा नहीं सोचते, वो ये सब कहीं और करें लेकिन फ्रांस की धरती पर ये नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सिखाते हैं कि फ्रांस का सम्मान मत करो और यहाँ के क़ानून को मत मानो। उन्होंने कहा कि जो ये शिक्षा देते हैं कि लड़कियों के पास लड़कों की तरह अधिकार नहीं हैं, वो समझ लें कि ये हमारे संस्कार नहीं।

इन सबके बीच ही फ्रांस के लियोन शहर में शॉटगन से लैस अपराधी ने एक ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी को गोली मार दी। ग्रीक ऑर्थोडॉक्स पादरी पर हमला तब हुआ, जब वो चर्च को बंद करके लौटने की तैयारी में थे। शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को हुई इस घटना में नुकीले हथियार लगे शॉटगन का इस्तेमाल किया गया। 52 वर्षीय पादरी को उसके पेट में गोली मारी गई। ये घटना हेलेनिक ऑर्थोडॉक्स चर्च के पास हुई।

‘भारत के डर की वजह से हुई अभिनंदन की रिहाई’: पाकिस्तानी नेता अयाज सादिक अपने बयान पर कायम, कहा- ‘बहुत से राज़ जानता हूँ’

पाकिस्तानी सांसद अयाज सादिक़, जिन्होंने हाल ही में खुलासा किया था कि बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत के हमले से डरते हुए पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को रिहा किया था। उन्होंने कहा है कि वह अपने बयान से पीछे नहीं हटने वाले हैं और अपने बयान को लेकर स्पष्ट हैं। पीएमएल-एन के नेता अयाज सादिक ने पाकिस्तान की संसद (नेशनल असेंबली) में इस मुद्दे पर खुलासा किया था। उन्होंने कहा था पाकिस्तानी सेना इस बात से डर कर पसीने-पसीने हो चुकी थी कि विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा नहीं किया गया तो भारत पाकिस्तान पर हमला देगा। 

अयाज सादिक़ के इस बयान पर काफी बड़े पैमाने पर विवाद हुआ था। भारत के ‘लिबरल मीडिया’ ने भी इस बयान का काफी प्रोपेगेंडा फैलाया था और पाकिस्तान की इमरान सरकार के इस कदम को शांति की पहल के रूप में दिखाया गया था। जबकि सच्चाई यह थी कि इमरान सरकार ने भारतीय सेना की कार्रवाई के डर से विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा किया था। 

उन्होंने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा था, “मैं उस बैठक में मौजूद था, मुझे अच्छे से याद है शाह महमूद कुरैशी भी उस बैठक में शामिल हुए थे और इमरान खान ने इस बैठक में शामिल होने से मना कर दिया था। इसके अलावा सेना प्रमुख भी इस बैठक का हिस्सा थे। उनके पाँव काँप रहे थे, वह पूरी तरह पसीने-पसीने हो चुके थे। विदेश मंत्री कुरैशी ने सेना प्रमुख से गुज़ारिश करते हुए कहा था कि अल्लाह के वास्ते अभिनंदन को छोड़ दो नहीं तो भारत की सेना 9 बजे तक हमला कर देगी।”

पूरे पाकिस्तान में अयाज सादिक़ के इस बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था। उन्हें इस पर काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था इसके बावजूद भी वो अपनी बात पर कायम हैं। अपने ताज़ा बयान में उन्होंने कहा है कि वह अपने इस बयान से पीछे नहीं हटने वाले हैं और वह कई राज़ जानते हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि वह बहुत से राज़ जानते हैं फिर भी उन्होंने आज तक कोई निरर्थक या निराधार बयान नहीं दिया। 

विंग कमांडर अभिनंदन

बीते साल फरवरी के दौरान भारतीय सेना ने बालाकोट में स्थित आतंकवादी कैम्प पर एयर स्ट्राइक किया था। इसके ठीक बाद पाकिस्तानी सेना ने भी अपने विमान भारत पर हमले के लिए भेजे थे, जिसे भारतीय वायु सेना ने खदेड़ दिया था। तब इस एयर-फाइट में विंग कमांडर अभिनंदन ने मिग-21 से पाकिस्तानी वायु सेना के विमान एफ़-16 को मार गिराया था। इसी कड़ी में वह पाकिस्तानी सीमा के भीतर चले गए थे और एक पाकिस्तानी मिसाइल से उनका प्लेन हिट हुआ था, जिसके कारण वो इजेक्ट कर पाकिस्तानी सीमा में गिरे थे। वहाँ की सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था और उनसे पूछताछ भी की थी। 

इसका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें देखा जा सकता है कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारी विंग कमांडर अभिनंदन को चाय के लिए पूछ रहे थे। इस वीडियो के ज़रिए पाकिस्तान यह दिखाने का प्रयास कर रहा था कि वह अभिनंदन की किस कदर खातिरदारी कर रहे हैं। भारत की तरफ से बरकरार रहे कड़े रवैये ने पाकिस्तान को झुकने के लिए मजबूर किया था, नतीजतन पाकिस्तान ने अभिनंदन को रिहा किया था। 1 मार्च 2019 को विंग कमांडर अभिनंदन अटारी वाघा बॉर्डर से भारत आए थे।    

चीन में ध्वस्त किए जा रहे हैं मस्जिदों के गुंबद: मज़हबी स्थलों को ‘शौचालय’ में बदलने के बाद नया अभियान जारी

पिछले कुछ वर्षों में चीन के भीतर उइगर समुदाय के लोगों पर होने वाला अत्याचार काफी बड़े पैमाने पर बढ़ा है। इसी कड़ी में चीन वहाँ पर स्थित उनके धार्मिक स्थल भी नष्ट करता रहा है। हाल ही में चीन के शिनजियांग प्रांत के आतुश नामक स्थान पर स्थित एक मस्जिद को नष्ट किया गया था और वहाँ शौचालय का निर्माण कराया गया था। ताज़ा मामला चीन के ही यिनचुआन प्रांत का है जहाँ अरब शैली में निर्मित मस्जिदों के गुंबद को तोड़ा गया है।

टेलीग्राफ में प्रकाशित ख़बर के अनुसार पूरे चीन में इस तरह की गतिविधियाँ एक अभियान के तहत हो रही हैं। चीन के निगज़िया प्रांत की राजधानी यिनचुआन ऐसा क्षेत्र है जहाँ चीन के हूई जातीय अल्पसंख्यक रहते हैं, इस जगह की एक मुख्य मस्जिद के बुनियादी ढाँचे में परिवर्तन देखा गया है। इस क्षेत्र की नुआंगन मस्जिद जो देखने में सुनहरे रंग की थी, उसके ठीक ऊपर प्याज के रंग का गुंबद था जिसे फ़िलहाल नष्ट कर दिया गया है। इतना ही नहीं, मस्जिद के भीतर सजावटी मेहराब, इस्लामी शैली की फिजरी और अरबी लिपि में उकेरे गए शब्दों को भी मिटा दिया गया है। 

फ़िलहाल इस मस्जिद की स्थिति कुछ ऐसी है कि इनकी पहचान करना तक मुश्किल है और यह तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। दरअसल, चीन में ब्रिटेन मिशन के उप प्रमुख क्रिस्टीना स्कॉट ने चीन द्वारा मस्जिदों पर चलाए जा रहे इस अभियान की तस्वीरें साझा की। इन तस्वीरों में इस बात की पहचान कर पाना तक मुश्किल है कि नया ढाँचा ‘मस्जिद’ है। स्कॉट ने इस घटना पर ट्वीट करते हुए लिखा, “यात्रा सलाहकार ने सुझाव दिया कि यिनचुआन में नुआंगन मस्जिद का भ्रमण किया जा सकता है।” इसके बाद तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, “वहाँ जितना नज़र आता है वह केवल इतना ही है। गुंबद समेत इस तरह के सभी आकार नष्ट किए जा रहे हैं, किसी भी आगंतुक को यहाँ आने की अनुमति नहीं है। यह कितना निराशाजनक है।” 

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने भी इस संबंध में ट्वीट करते हुए जानकारी दी। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, “चीन में जिस तरह इस्लाम और अन्य धर्म पर पाबंदी लगाई जा रही है, हम इस बात से बेहद चिंतित हैं। हमारा इस मुद्दे पर चीन से इतना कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था को अपने संविधान और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुसार बनाए रखें। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लिनेक्सिया में स्थित ‘लिटिल मक्का’ नाम से मौजूद इस्लामी धरोहरों को भी लगातार नष्ट किया जा रहा है।    

चीन में इस तरह के धार्मिक अत्याचार और सामाजिक उत्पीड़न की ख़बरें बिलकुल नई नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन के शिनजियांग प्रांत में लाखों लोगों को डिटेंशन कैम्प (कैद शिविर) में रखा जाता है। वहाँ उन पर तमाम तरह के अत्याचार किए जाते हैं, उनको शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। इसके अलावा वहाँ लोगों को अपनी धार्मिक मान्यताओं का अनुसरण करने पर कड़ी कार्रवाई से गुज़रना पड़ता है। 

वहाँ दाढ़ी बढ़ाना, रोज़ा रखना और यहाँ तक कुरान पढ़ना सभी को संदिग्ध गतिविधि के दायरे में रखा गया है। इस मुद्दे पर अलग-अलग जानकारों के अपने मत हैं, कुछ का मानना है कि चीन की जिनपिंग सरकार का यह रवैया बेहद नकारात्मक है, इसका लोगों पर भयावह प्रभाव पड़ रहा। इससे चीन का एक वर्ग कट्टरपंथ की ओर आगे बढ़ेगा।    

ध्वस्त हुआ मुख़्तार अंसारी का ‘ताजमहल’: गाजीपुर के गजल होटल पर चला योगी सरकार का बुलडोजर, अवैध था निर्माण

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने माफिया विधायक मुख़्तार अंसारी के अवैध साम्राज्य पर अब तक का सबसे करारा प्रहार किया है। गाजीपुर में ‘मुख़्तार अंसारी का ताजमहल’ कहे जाने वाले उसके गजल होटल को ध्वस्त कर दिया गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी देवरिया की चुनावी सभा में याद दिलाया था कि कैसे योगी सरकार गुंडे-माफियाओं की अवैध सम्पत्तियों पर बुलडोजर चलवा रही है।

गाजीपुर के गजल होटल को रविवार (नवंबर 1, 2020) की सुबह ध्वस्त किया गया। ये मुख़्तार अंसारी की बीवी और बेटों के नाम पर पंजीकृत है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियंत्रक प्राधिकारी बोर्ड विनियमित क्षेत्र गाजीपुर ने शनिवार को गजल होटल के मालिक अब्बास अंसारी व उमर अंसारी की अपील खारिज कर दी। ये दोनों मऊ से 5वीं बार विधायक चुने गए मुख़्तार अंसारी के बेटे हैं। अपील ख़ारिज होने के साथ ही बुलडोजर चलना तय हो गया था।

बोर्ड ने 15 पेज के फैसले में एसडीएम सदर/विनियमित क्षेत्र अधिकारी के ध्वस्तीकरण के फैसले को सही मानते हुए अग्रिम कार्रवाई का आदेश प्रदान कर दिया था। देर रात ही इस आदेश की कॉपी होटल की दीवालों की शोभा बढ़ाने लगी और प्रशासन ने पहले ही दुकानदारों को खाली करने को कह दिया था। होटल को ध्वस्त करने की कार्रवाई देखने आई भीड़ को भी हटाया गया। प्रशासन ने पाया कि ये होटल पूरी तरह अवैध है।

राजस्व जाँच में भी दस्तावेजों के हेरफेर और अनाधिकृत रजिस्ट्री की बात पता चली। यानी, इस होटल के निर्माण के दौरान एक भी नियम-कायदे का पालन नहीं किया गया। गजल होटल के प्रथम तल समेत, सीढ़ी, उत्तर दिशा की दुकानें और बैंक का परिसर सहित कई हिस्सों को ध्वस्त कर दिया गया। होटल में कई अनियमितताएँ मिली थीं और इसका नक्शा भी गड़बड़ पाया गया था। मुख़्तार अंसारी की बीवी व बेटों पर इस मामले में 12 एफआईआर दर्ज हैं।

ज्ञात हो कि सदर एसडीएम की अदालत ने बीते अक्टूबर 8, 2020 को एक सप्ताह का समय देते हुए इसे ध्वस्त करने का आदेश पारित किया था। इसके बाद अंसारी परिवार हाइकोर्ट चला गया। यहाँ उन्हें जिलाधिकारी के यहाँ अपील दाखिल करने का आदेश प्राप्त हुआ था। दो बार हुई सुनवाई के बाद अपील ख़ारिज हो गई। इसके एक भाग में HDFC बैंक चल रहा था, जिसे दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। प्रथम तल पूरी तरह ध्वस्त होगा, जबकि निचले तल के कुछ हिस्से बचे रहेंगे।

हाल ही में भाजपा के दिवंगत विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी और मोहम्मदाबाद से भाजपा विधायक अलका राय ने कॉन्ग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा को पत्र लिख कर कहा कि वो उनके पति के हत्यारे मुख़्तार अंसारी को बचाना बंद करें। अलका राय का कहना था कि वह 14 साल से पति की हत्या का इंसाफ पाने के लिए लड़ रही हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस उस जुल्मी (मुख़्तार अंसारी) को खुला संरक्षण दे रही है।

फ्रांस में अब ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी को गोली मारी: विदेश में रह रहे फ्रेंच नागरिकों को किया गया अलर्ट, 3 दिन में तीसरा हमला

फ्रांस में आतंकी हमले थमते नहीं दिख रहे हैं। ताज़ा वारदात लियोन शहर में हुई है, जहाँ शॉटगन से लैस अपराधी ने एक ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी को गोली मार दी। ग्रीक ऑर्थोडॉक्स पादरी पर हमला तब हुआ, जब वो चर्च को बंद करके लौटने की तैयारी में थे। शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को हुई इस घटना में नुकीले हथियार लगे शॉटगन का इस्तेमाल किया गया। 52 वर्षीय पादरी को उसके पेट में गोली मारी गई।

इस गोलीकांड को अंजाम देकर अपराधी भाग निकला। हालाँकि, पुलिस ने एक संदिग्ध को धरा है, जिसके बारे में आशंका है कि उसने ही इस घटना को अंजाम दिया है। काले रंग का लम्बा कोट पहने अपराधी ने कोट के नीचे ही बन्दूक छिपा रखी थी। लियोन के 7वें जिले के निवासियों ने हेलेनिक ऑर्थोडॉक्स चर्च के पास गोली चलने की दो आवाज़ें सुनीं। उन्होंने फायरिंग करने वाले को भागते देखा और फिर पादरी घायल अवस्था में पड़े हुए पाए गए।

इस हमले का क्या उद्देश्य था, इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं हो सका है। फ्रांस की आतंक-रोधी एजेंसियाँ वहाँ की पुलिस के साथ मिल कर जाँच में लगी हुई है। वहाँ के प्रधानमंत्री जीन कास्टेक्स ने इसे एक गंभीर घटना करार दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो पहले ही कह चुके हैं कि इस्लाम के नाम पर आतंकवाद उनके देश के लिए समस्या है। पादरी निकोलोस काकावेलाकि फ़िलहाल अस्पताल में हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

पादरी को काफी नजदीक से ‘पॉइंट ब्लेंक रेंज’ से गोली मारी गई। फ्रांस में फिर से लॉकडाउन लगे हैं, ऐसे में चर्च में हलचल भी नहीं थी और वहाँ लोग न के बराबर थे। विदेश में रहने वाले फ्रेंच नागरिकों को भी सावधान किया गया है कि वो जहाँ भी हैं, उन पर हमले हो सकते हैं। फ्रांस में रविवार तक धार्मिक स्थलों को लॉकडाउन से बाहर रखा गया है क्योंकि उस दिन ईसाई ‘ऑल सेंट्स डे’ मनाने वाले हैं।

इससे पहले फ्रांस के एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया था। इसके बाद पुलिस वालों ने उस व्यक्ति पर जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई जिसमें उस व्यक्ति की मौत हो गई। हाल ही में फ्रांस के ही नीस शहर के चर्च में 1 महिला समेत 3 लोगों की गला काट कर हत्या कर दी गई थी। ये सब तब हो रहा है, जब देश पैगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखाने वाले शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या के बाद से ही उबल रहा है।

‘सर कटा सकते हैं, लेकिन ईशनिंदा बर्दाश्त नहीं, फ्रांस मिट जाएगा-इंशा अल्लाह’: रज़ा अकादमी के समर्थन में उतरे कट्टरपंथी

ट्विटर पर शनिवार से #WeStandWithRazaAcademy ट्रेंड कर रहा है। दरअसल सोशल मीडिया पर कई मजहबी यूज़र्स कट्टरपंथी इस्लामी संगठन- रज़ा अकादमी के लिए अपना समर्थन व्यक्त कर रहे है, क्योंकि उन्होंने देश के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक फ्रांस के खिलाफ एक अभियान छेड़ रखा है।

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन के समर्थन को लेकर सोशल मीडिया पर कई इस्लामवादियों ने रज़ा अकादमी के समर्थन में ट्वीट पोस्ट किए।

रज़ा अकादमी के कारनामों का बचाव करते हुए शाहिद मंसूरी नाम के एक यूजर ने कहा कि वो सर कटा सकते हैं, लेकिन ईशनिंदा के कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जीना और मरना उसके अल्लाह को समर्पित है। रजा अकादमी के समर्थन में उसने ट्वीट किया, “फ्रांस मिट जाएगा, इंशा अल्लाह”

एक यूजर ने दावा किया कि रज़ा अकादमी एक मजहबी संगठन था जो जनता के कल्याण के लिए काम करता था और संगठन के खिलाफ आलोचना उन्हें बदनाम करने का एक प्रयास है। उसने साथियों से रज़ा अकादमी का समर्थन करने का आग्रह किया।

रज़ा अकादमी के एक अन्य प्रशंसक सुहैल रज़ा ने कहा, “क्यों लोग पहले उकसाते हैं और फिर उनकी प्रतिक्रिया के लिए दोषी ठहराते हैं।” उसने प्रतिक्रिया के रूप में इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा फ्रांस में आतंकवादी हमलों का उल्लेख किया।

वहीं कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन रज़ा अकादमी ने खुद भी इसी हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए कई ट्वीट्स पोस्ट किए। साथ ही रज़ा अकादमी ने मजहबी यूज़र्स को सपोर्ट करने और टॉप ट्रेंड बनाने के लिए धन्यवाद भी दिया, क्योंकि इन सभी ने संगठन को निंदा के लिए इस्लाम की रक्षा के नाम पर नफरत फैलाने का अवसर दिया।

बता दें रज़ा अकादमी के समर्थन में सोशल मीडिया का रुझान कट्टरपंथी इस्लामी संगठन द्वारा फ्रांस के खिलाफ घृणा अभियान छेड़ने के लिए तीव्र आलोचना के बाद आया था।

रज़ा ने फ्रांस के खिलाफ छेड़ा जंग

इस्लामिक संगठन जैसे रज़ा अकादमी, AIMPLB जैसे संगठनों के साथ मिलकर जानबूझ फ्रांस में चल रहे कट्टरपंथी इस्लामिक आतंक के खिलाफ लड़ाई में भारतीयों को भड़काने का काम किया है।

गौरतलब है कि फ्रांस में कुछ सप्ताह पहले कट्टरपंथी द्वारा एक शिक्षक के गले को धड़ से अलग कर दिया गया था। जिसके बाद वहाँ के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने इस्लामिक आतंकवादियों के खिलाफ जंग छेड़ दिया। भारत ने भी इस मामले में फ्रांस का समर्थन किया।

वहीं इस्लामी संगठन रज़ा अकादमी ने भी दुनिया भर के बाकी कट्टरपंथियों से प्रेरणा लेते हुए भारत में भी फ्रांस के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया। बता दें तुर्की, पाकिस्तान, कतर जैसे इस्लामी देशों ने फ्रांस के खिलाफ दुनिया भर में बहिष्कार अभियान शुरू किया था।

बता दें रज़ा अकादमी ने शार्ली हेब्दो द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर कार्टून प्रदर्शित करने के लिए मजहबी देशों को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ फतवा जारी करने की माँग की थी।

रज़ा अकादमी ने यह भी माँग की कि मजहबी देशों में सभी फ्रांसीसी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को बंद कर दिया जाए और फ्रांस के सभी राजदूतों को हाल की घटनाओं के बाद वापस भेज दिया जाए। इसने सोशल मीडिया पर लोगों से हैशटैग ‘मैक्रों द डेविल’ और ‘हुज़ूर की मोहब्बत में’ लिख कर पोस्ट करने का आग्रह भी किया।

चौंकाने वाली बात यह है कि रज़ा एकेडमी ने मुंबई में मजहबी प्रदर्शनकारियों की हरकतों को सही ठहराया था, जिन लोगों ने शहर की सड़कों पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति की तस्वीरें लगा रखी थीं। ताकि लोग उस पर चल कर अपना विरोध दर्ज करें।

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन रज़ा अकादमी के मौलाना अब्बास रिज़वी ने कहा कि उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति के विरोध में इमैनुएल मैक्रों के पोस्टर को जूते से माला पहनाने की कार्रवाई का समर्थन किया है। मौलाना अब्बास रिज़वी ने कहा, “इमैनुएल मैक्रों द्वारा किया गया अपमान निंदनीय है और वह कड़ी सजा के हकदार हैं।”

उल्लेखनीय है कि रज़ा अकादमी उन कुख्यात कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों में से एक रही है जिसने पहले भी देश की सड़कों पर हिंसा भड़काई है।

रज़ा अकादमी ने अगस्त 2011 में असम और म्यांमार में समुदाय वालों पर कथित अत्याचारों के विरोध में आज़ाद मैदान में मोर्चा संभाला था, जो बाद में दंगे में बदल गया। एक कुख्यात समूह द्वारा पुलिसकर्मियों पर हमला करने के बाद विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया जिसमें दो व्यक्ति मारे गए और 58 पुलिसकर्मियों सहित 63 लोग घायल हो गए थे।

रज़ा अकादमी ने मुम्बई की सड़कों पर भी हिंसक प्रदर्शन किया था। वहीं आजाद मैदान में सबसे चौंकाने वाली घटना मजहबी लोगों द्वारा अमर जवान ज्योति स्मारक का अपमान था। युद्ध स्मारक 1857 के सेनानियों को समर्पित है – प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम। दंगों के कारण विभिन्न सार्वजनिक संपत्तियों को लगभग 2.72 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

इस संगठन ने पैगम्बर मोहम्मद पर बनी एक फ़िल्म पर भी काफी बवाल मचाया था। साथ ही इस्लामिक संगठन ने फिल्म के संगीतकार एआर रहमान और ईरानी निर्देशक माजिद मजीदी के खिलाफ 2015 में फतवा भी जारी किया था।

रिपब्लिक के खिलाफ भी दर्ज कराया था एफआईआर

इसी रज़ा अकादमी ने रिपब्लिक टीवी के अर्नब गोस्वामी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें संगठन ने ’सांप्रदायिक घृणा’ फैलाने का आरोप लगाया था। जबकि वे पालघर की भीड़ द्वारा दो साधुओं की हत्या के बारे में बता रहे थे।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में रज़ा अकादमी का प्रतिनिधित्व किया था, जब अर्नब गोस्वामी ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

‘मैं खुलासा कर दूँ तो कॉन्ग्रेस को चेहरा दिखाना मुश्किल हो जाएगा’: राजनाथ सिंह का चीन मुद्दे पर करारा जवाब

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्षी पार्टियों पर जमकर हमला किया। राजनाथ सिंह ने शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को पटना में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर उन्होंने खुलासा कर दिया तो कॉन्ग्रेस को चेहरा दिखाना मुश्किल हो जाएगा।

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस के द्वारा हमारे सेना के जवानों के शौर्य और पराक्रम पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि चीन ने 1200 वर्ग किमी ज़मीन क़ब्ज़ा कर ली है। यदि मैं खुलासा कर दूँगा, तो चेहरा दिखाना मुश्किल हो जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं तब गृह मंत्री था जब पुलवामा हमले में हमारे 40 जवानों की जान चली गई थी, उन्होंने (कॉन्ग्रेस) इसे चुनावों से पहले सहानुभूति पाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा रची गई साजिश बताया। हम ऐसी घृणित राजनीति करने के बजाए घर बैठेंगे।”

बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बिहटा के विष्णुपुरा मनेर विधानसभा सीट से बीजेपी के प्रत्याशी डॉ निखिल आनंद के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। राजनाथ सिंह ने कहा, “आप लोग पढ़े लिखे लोग हो। 1962 से 2013 तक का इतिहास उठाकर देख लीजिए। मैं रक्षा मंत्री होने के नाते सीना ठोककर आपसे कहना चाहता हूँ कि हमारी सेना के जवानों ने जो पराक्रम दिखाया है, देश का मस्तक उससे गर्व से ऊँचा हो गया है।”

इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार (अक्टूबर 30, 2020) को कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रश्न किया कि पुलवामा हमले में पाकिस्तान का हाथ होने की पड़ोसी देश के मंत्री की स्वीकारोक्ति के बाद कॉन्ग्रेस मौन क्यों है और उसके नेताओं की बोलती क्यों बंद है?

पीरपैंती के प्रगति मैदान में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, “पुलवामा हमले पर पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में एक मंत्री ने बयान देकर वास्तविकता को उजागर कर दिया है। पाकिस्तान ने यह स्वीकार कर लिया है कि पुलवामा में हमला उसने ही कराया था। जबकि पूर्व में वह कहा करता था कि पुलवामा हमले में उसका हाथ नहीं था।’’ उन्होंने कहा कि पुलवामा में जब आतंकवादियों ने हमला किया था और हमारे जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे तब कॉन्ग्रेस के लोग हमारी नीयत पर सवाल उठा रहे थे।

कमलनाथ ध्यान से सुनो! हाँ, मैं कुत्ता हूँ क्योंकि जनता मेरा मालिक है: ज्योतिरादित्य सिंधिया

मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के लिए 3 नवंबर को होने जा रहे उपचुनाव में नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज होती जा रही है और बयानों का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। वहीं शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को अशोकनगर जिले के शडोरा में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए, भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान को लेकर उन्हें जमकर लताड़ा।

कॉन्ग्रेस नेता की आलोचना करते हुए बीजेपी नेता सिंधिया कहते हैं, “कमलानाथ अशोकनगर आते हैं और मुझे कुत्ता कहकर नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।” ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जोर देकर कहा, “कमलनाथ, ध्यान से सुनो। हाँ, मैं कुत्ता हूँ क्योंकि जनता ही मेरा मालिक है, जिसकी मैं ईमानदारी से सेवा करता हूँ।”

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “कमलनाथ जी ने मुझे कुत्ता कहा। हाँ, मैं कुत्ता हूँ क्योंकि मेरा मालिक मेरी जनता है और मैं उसकी सेवा करता हूँ। कमलनाथ जी मैं कुत्ता हूँ क्योंकि कुत्ता अपने मालिक और अपने दाता की रक्षा करता है। हाँ, कमलनाथ जी मैं कुत्ता हूँ क्योंकि अगर कोई भी व्यक्ति मेरे मालिक को ऊँगली दिखाए और मालिक के साथ भ्रष्टाचार और विनाशकारी नीति दिखाए तो कुत्ता काटेगा उसे। मुझे गर्व है कि मैं अपने जनता का कुत्ता हूँ।”

रैली के अलावा सिंधिया ने ट्विटर पर भी लिखा, “अशोक नगर मेरे दिल में बसता है, और यहाँ की जनता मेरा परिवार है। यहाँ की माटी से मेरा खून का संबंध है और मैं अपने जीवन के आखिरी सांस तक आप लोगों की सेवा करता रहूँगा।” उन्होंने अशोक नगर के शाडोरा के भाजपा प्रत्याशी श्री जजपाल जज्जी जी को वोट देने की अपील भी की।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 22 सीटें कॉन्ग्रेस के बागी विधायकों की थीं, जिन्होंने भाजपा को हराया था। भाजपा को विधानसभा में बहुमत हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए सिर्फ 9 सीटों की आवश्यकता है। वहीं 28 में से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में आती हैं, जो ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ माना जाता है।

बता दें सिंधिया ने कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और इस साल मार्च में भाजपा में शामिल हुए थे। सिंधिया ने कॉन्ग्रेस से अलग होने पर कहा था कि कॉन्ग्रेस अब वह पार्टी नहीं रही जो वह हुआ करती थी।