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पटाखों से प्रदूषण, प्रदूषण से कोरोना इसलिए पटाखे न जलाएँ.. मैं भी पूजा करूँगा- अरविन्द केजरीवाल

देश भर में पूरी ऊर्जा और उत्साह से मनाया जाने वाला त्यौहार दिवाली बेहद नज़दीक है। इस त्यौहार की तैयारियाँ भी शुरू हो चुकी हैं लेकिन तैयारियों के साथ साथ पटाखे जलाने से होने वाले प्रदूषण पर भी बयानबाजी शुरू हो चुकी है। इसी कड़ी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिवाली के ठीक पहले आम लोगों से निवेदन करते हुए एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में केजरीवाल ने जनता से निवेदन करते हुए कहा है कि वह लोगों के साथ पूजा करने को तैयार हैं लेकिन कोई पटाखे न जलाए।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने सीधे प्रसारण के दौरान संबोधित करते हुए इस मुद्दे पर अपनी बात कही। उन्होंने कहा, “इस बार भी हम सभी लोग मिलकर दिवाली मनाएँगे, पटाखे नहीं जलाएँगे। किसी भी हालत में पटाखे नहीं जलाने हैं अगर पटाखे जलाएँगे तो हम लोग अपने ही बच्चों की ज़िन्दगी के साथ खेलेंगे। ऐसा करके हम लोग अपने दिल्ली के परिवार की ज़िन्दगी के साथ खेलेंगे। पटाखे नहीं जलाएँगे और दिवाली का त्यौहार एक साथ मनाएँगे।” 

इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, “इस बार हम दिवाली के लिए अलग इंतज़ाम कर रहे हैं। दिवाली वाले दिन 14 तारीख को 7 बज कर 39 मिनट से हम सारे लोग (दिल्ली के 2 करोड़ लोग) मिल कर लक्ष्मी पूजन करेंगे। मैं अपने मंत्रियों के साथ दिल्ली में एक जगह लक्ष्मी पूजन शुरू करूँगा, 7 बज कर 39 मिनट पर और कुछ टीवी चैनल उसका सीधा प्रसारण करेंगे।” 

केजरीवाल ने ये बातें एक डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली इस समय कोरोना और प्रदूषण से जंग लड़ रही है। हम सबके पूरे प्रयास हैं कि इन दोनों से हम जीत जाएँ, प्रदूषण की वजह से कोरोना स्थिति और खराब हो रही है।

दिल्ली की जनता से निवेदन करते हुए अरविन्द केजरीवाल ने कहा, “मैं आप सभी से अपील करता हूँ, दिल्ली के मेरे सभी भाइयों-बहनों और दिल्ली परिवार के सभी सदस्यों से अपील करता हूँ कि आप सब लोग उस वक्त अपना टीवी ऑन करके अपने अपने घर में, अपने अपने परिवार के साथ मिल कर/बैठ कर। वहाँ पर पंडित जी मंत्रोच्चारण करेंगे और उस वक्त आप सभी लोग अपने घरों में लक्ष्मी पूजन करें।”  

कर्नाटक: भाजपा नेता की हत्या के मामले में कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी गिरफ्तार

बृहस्पतिवार (नवंबर 05, 2020) को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्नाटक सरकार में पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता विनय कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी साल 2016 के दौरान धारवाड़ से भारतीय जनता पार्टी के नेता रहे योगेश गौड़ा की हत्या के संबंध में की गई है। कॉन्ग्रेस नेता विनय कुलकर्णी पर यह कार्रवाई राकेश रंजन की अगुवाई वाली 6 सदस्यों की सीबीआई टीम ने की है। 

कॉन्ग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी को धारवाड़ जिले के बाराकोटरी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। फ़िलहाल सीबीआई की टीम उन्हें पूछताछ के लिए धारवाड़ के उपनगरीय पुलिस थाने लेकर गई है, और उनसे इस मामले में पूछताछ जारी है। इसके अलावा, सीबीआई ने इस पूरे प्रकरण के अन्य पहलुओं पर भी जाँच शुरू कर दी है।

दरअसल 15 जून साल 2016 को कॉन्ग्रेस नेता विनय कुलकर्णी के मुखर आलोचक और भाजपा नेता योगेश गौड़ा की धारवाड़ जिले के सप्तपुर में कुल पाँच बदमाशों ने हत्या कर दी थी। क्योंकि योगेश गौड़ा उस वक्त जिम में मौजूद थे इसलिए पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी। जाँच पड़ताल के बाद यह बात सामने आई थी कि पाँचों आरोपित कॉन्ग्रेस नेता विनय कुलकर्णी के सहयोगी थे। इस दौरान कुलकर्णी कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री पद पर भी थे। 

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता कुलकर्णी के इस्तीफे की माँग भी काफी बड़े पैमाने पर उठी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी इस मामले के तहत लगाए गए आरोपों को भाजपा का षड्यंत्र कह कर टाल दिया था।

उनका कहना था कि कुलकर्णी लिंगायत आंदोलन के दौर से ही सक्रिय नेता रहे हैं इसलिए लोग उनकी छवि धूमिल करना चाहते हैं। आरोपों के अनुसार कथित तौर पर यह हत्या संपत्ति विवाद के चलते की गई थी। भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद पिछले साल के सितंबर महीने में इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी थी।  

प्रेस फ्रीडम है क्या? क्या वाकई पहले के मामलों को अर्णब के समकक्ष रखा जा सकता है?

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी बहस का विषय है। कुछ लोग इस पर खुलकर राय रख रहे हैं और कुछ लोग खुद को इस से अलग रख रहे हैं। प्रेस की स्वतंत्रता आखिर है क्या? सबसे पहली बात तो यह कि प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है। इसका मकसद एक ‘वॉचडॉग’ की तरह काम करना होता है, हालाँकि, आदर्श परिस्थितियों में ही यह संभव है वरना प्रेस अक्सर पालतू पशु की तरह ही नजर आती है।

प्रेस जिस घोटाले को उजागर करना चाहता है उसे इस सवाल पूछने और उसका दमन करने के बजाय उसका जवाब दिया जाना चाहिए। रिपब्लिक टीवी के खिलाफ मुंबई पुलिस और सोनिया सेना की मुहिम पर एक वर्ग सवाल किए जा रहा है कि NDTV, वायर, या फिर क्विंट के समय आप क्यों चुप थे? लेकिन क्या इन सबके मामले प्रेस या पत्रकारिता से ही जुड़े हुए थे?

NDTV की आतंकी हमले की कवरेज

NDTV पठानकोट आतंकी हमले की लाइव रिपोर्टिंग कर चुका है, जो कि गैरकानूनी होने के साथ ही देश के प्रति भी गैरजिम्मेदाराना रवैया था। प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस है, करोड़ों के हेरफेर की बात है, तो फिर इसकी जाँच प्रेस पर हमला कैसे कही गई? जबकि जो कुछ भी महराष्ट्र में अर्णब के खिलाफ चल रहा है वह तो स्पष्ट तौर पर राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है।

वायर: सिद्दार्थ वरदराजन

यूएस की नागरिक सिद्दार्थ वरदराजन, जो कि प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ के भी संस्थापक हैं, ने एक ट्वीट में खुला झूठ लिखा था। तबलीगी जमात को बचाने के लिए ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चलाते हुए लिखा कि जिस दिन इस इस्लामी संगठन तबलीगी जमात का मजहबी कार्यक्रम हुआ, उसी दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 25 मार्च से 2 अप्रैल तक अयोध्या प्रस्ताविक विशाल रामनवमी मेला का आयोजन नहीं रुकेगा क्योंकि भगवान राम अपने भक्तों को कोरोना वायरस से बचाएँगे।

‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चला तो दी लेकिन वो पकड़ा गया। ‘द वायर’ ने अपने लेख में ऐसा दावा किया और उसके संपादक वरदराजन ने इस लेख को शेयर भी किया। लेकिन, उनकी पोल खुलते देर न लगी। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने सिद्धार्थ वरदराजन की ये चोरी पकड़ ली और उन्हें जम कर फटकार लगाई। उन्होंने सिद्धार्थ को चेताया कि अगर उन्होंने अपनी इस फेक न्यूज़ को तुरंत डिलीट नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी और उन पर मानहानि का मुकदमा भी चलाया जाएगा।

फर्जी बयानों के जरिए, किसी राज्य की सरकार और सीधा उसके मुख्यमंत्री के हवाले से कुछ भी मनगढ़ंत बयान चला देना, वह भी एकदम मजहबी मामलों में, क्या इसमें भी प्रेस की स्वतन्त्रता का हवाला दिया जाना चाहिए था?

प्रशांत कनौजिया

‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी’ इस वाक्य का पत्रकारिता से कितना वास्ता है? प्रशांत कनौजिया ने ये शब्द उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लेकर एक फर्जी तस्वीर शेयर करते हुए लिखी थी। लखनऊ पुलिस ने 8 जून 2019 को खुद को स्वतंत्र पत्रकार कहने वाले प्रशांत जगदीश कनौजिया को उसके आवास से गिरफ्तार किया था।

6 जून को कनौजिया ने फेसबुक और ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें हेमा नाम की एक युवती मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर खड़ी होकर खुद की योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी। साथ ही वो ये भी दावा कर रही थी कि सीएम योगी उसके साथ एक साल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर रहे हैं। प्रशांत ने इस वीडियो को ‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी’ कैप्शन के साथ शेयर किया था।

द क्विंट – राघव बहल

ED का काम ही पैसों की हेरफेर पर नजर रखना और कार्रवाई करना है। उन्हें ‘द क्विंट’ के खिलाफ सबूत मिले तो उन्होंने कार्रवाई की। यह एक प्रक्रिया के ही अंतर्गत हुआ और राघव बहल के घर और ऑफिस में छापा मारा गया। इसे कैसे आप प्रेस फ्रीडम पर हमला बता देंगे?

इस विषय पर विस्तृत चर्चा आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं

आपातकाल 2.0 में आपका स्वागत है: महाराष्ट्र सदन में इंदिरा के साथ नजर आए उद्धव ठाकरे

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने बुधवार (नवंबर 04, 2020) को मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के विरोध में दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन के बाहर ’आपातकाल 2.0’ के पोस्टर चिपकाए। इन पोस्टर्स में लिखा है- “आपातकाल 2.0 में आपका हार्दिक स्वागत है।”

एक पुराने बंद मामले की फ़ाइल अदालत की सहमति के बिना खोलकर अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद, महाराष्ट्र की उद्धव सरकार और महाराष्ट्र पुलिस को लगातार आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया से लेकर देशभर में इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई का विरोध स्पष्ट रूप से नज़र आ रहा है। इसी कड़ी में देश की राजधानी दिल्ली में ‘आपातकाल 2.0’ के पोस्टर्स लगाए गए हैं।

इन पोस्टर्स में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि उद्धार ठाकरे की तुलना इंदिरा गाँधी से की जा रही है। पोस्टर में एक तरफ उद्धव ठाकरे की तस्वीर लगी है और दूसरी तरफ इंदिरा गाँधी की और नीचे लिखा हुआ है – ‘आपातकाल 2.0।’ यानी, महाराष्ट्र की उद्धव सरकार द्वारा अर्णब गोस्वामी पर की गई कार्रवाई इंदिरा गाँधी के आपातकाल के दौर की याद दिलाती है।

जिस तरह कॉन्ग्रेस के शासन वाली इंदिरा सरकार में पत्रकारों को अत्याचार और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। ठीक वैसा ही शिवसेना – कॉन्ग्रेस और एनसीपी की गठबंधन सरकार में भी हो रहा है। 

यह पोस्टर कॉन्ग्रेस मुख्यालय समेत राजधानी दिल्ली के तमाम क्षेत्रों में लगाया जा चुका है। दिल्ली की सड़कों पर चस्पा किए गए इन पोस्टर्स में लिखा है, ‘आपातकाल 2.0 में आपका हार्दिक स्वागत है।’

इन पोस्टर्स का उद्देश्य यह दिखाना है कि महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार की यह अलोकतांत्रिक कार्रवाई आपातकाल के भयावह दौर की यादें ताज़ा करती है। इस घटनाक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन का कहना है, “महाराष्ट्र में सत्ता और शक्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है। राज्यपाल को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए।” 

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को 14 दिन की पुलिस हिरासत में रखने के लिए मुंबई की अदालत में याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है। साथ ही, अर्णब को जल्द ही जमानत मिलने की भी सम्भावना है, जिसका आशय है कि शायद उन्हें न्यायिक हिरासत में भी न रहना पड़े।

मुंबई पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को बीते दिन (4 नवंबर 2020) एक पुराने ‘बंद मामले’ में गिरफ्तार किया था। आधी रात में चली सुनवाई के बाद अलीबाग न्यायालय ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसका मतलब यह है कि इस दौरान मुंबई पुलिस उनसे पूछताछ नहीं कर पाएगी। अदालत में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा दायर की गई माँग याचिका खारिज किए जाने के बाद अर्नब ने अदालत से निकलते हुए कहा था, “मुंबई पुलिस हार चुकी है।” 

बागपत: मस्जिद में हनुमान चालीसा पाठ की परमिशन देने से आहत मुस्लिमों ने गुप्त बैठक कर मौलाना को निकाला, हिन्दू करेंगे पंचायत

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में सौहार्द का हवाला देते हुए विनयपुर गाँव की मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने की परमिशन देने वाले मौलाना को मस्जिद से निकाल दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर मौलाना अपना पूरा सामान लेकर गाजियाबाद स्थित लोनी चला गया है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा आयोजित की गई गोपनीय बैठक में मौलाना को हटाने का निर्णय लिया गया। वहीं दूसरी तरफ हिन्दू समुदाय के लोग मौलाना को समर्थन देने के लिए पंचायत की तैयार पूरी कर चुके हैं। 

दरअसल बागपत में खेकड़ा क्षेत्र के विनयपुर गाँव में भाजपा की जिला कार्यकारिणी सदस्य एवं जनसंख्या फाउंडेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनुपाल बंसल मंगलवार (नंवबर 3, 2020) को मस्जिद में पहुँचे थे। उनका कहना था कि मौलाना अली हसन से इजाजत लेने के बाद उन्होंने भाईचारे के लिए पवित्र स्थान मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ किया। हनुमान चालीसा के पाठ को फेसबुक पर लाइव किया गया और गायत्री मंत्र का पाठ भी किया गया था। 

इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई थीं। मनुपाल बंसल जिला पंचायत चुनाव की तैयारियाँ में भी जुटे हुए हैं। एसपी अभिषेक सिंह का कहना है कि पुलिस ने जानकारी मिलते ही मामले की जाँच कराई। मौलाना की सहमति ली गई थी। मनुपाल बंसल विनयपुर की मस्जिद में जाते रहते हैं।

इस वीडियो में वह यह भी अपील कर रहे थे कि कोई ऐसे मामलों को तूल न दें और लोग आपसी सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखें। उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी लोग भाईचारे से रहें। कोई तर्क-वितर्क न करें, हम सब हिंदुस्तानी हैं, कोई किसी पर कटाक्ष न करें।

वहीं, मस्जिद के मौलाना अली हसन ने कहा था कि ऊपर वाले का नाम कहीं भी बैठकर लिया जा सकता है। सब जगह उसकी बनाई हुई है। उन्होंने ही मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठन करने की इजाजत दी थी। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। सभी लोग भाईचारे से काम लें।

हरियाणा: गुंडों ने पुजारी को बल्ले से पीटकर किया अधमरा, गंभीर हालत में मथुरा के अस्पताल में भर्ती

सोशल मीडिया और इंटरनेट पर एक वीडियो काफी चर्चा में बना हुआ है, जिसमें एक पुजारी को कुछ लोग क्रिकेट के बल्ले से पीट रहे हैं। घटना हरियाणा, फतेहगढ़ जिले स्थित भट्टू कलाँ ब्लॉक के ढाबी कलाँ गाँव की बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पुजारी की पहचान 26 वर्षीय कैलाश शर्मा के रूप में हुई है जो कि मूल रूप से मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित एक गाँव के निवासी हैं। वह पिछले दो सालों से अपने भाई रामजी के पास हरियाणा में भट्टू कलाँ गाँव में रह रहे हैं। 

आज से लगभग 6 महीने पहले उन्हें ढाबी कलाँ गाँव के मंदिर का पुजारी बनाया गया था। सोमवार (नवंबर 02, 2020) को गाँव के कई युवाओं ने उस पुजारी पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं, हमलावरों ने इस क्रूर कृत्य का वीडियो भी बना लिया जो पूरे इंटरनेट पर काफी वायरल हो चुका है। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि पुजारी को हमलावर क्रिकेट के बल्ले से बुरी तरह पीट रहे हैं और इस दौरान वह पुजारी लगातार खुद पर दया करने की याचना करते नजर आ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पुजारी की चीख-पुकार सुनने के बाद गाँव के लोग मौके पर पहुँचे और उसे हमलावरों से बचाया। इसके बाद गाँव वालों ने पुजारी के परिवारों को भी इस मामले की सूचना दी, घटना की जानकारी मिलते ही पुजारी का भाई और उसके पिता चरण दास घटनास्थल पर पहुँचे और उसे अपने साथ गाँव (मध्य प्रदेश) लेकर गए। पुजारी का परिवार घटना का वीडियो देख कर दहशत में था। इतना ही नहीं पुजारी के पिता ने उसका उपचार हरियाणा में कराने के बजाय मध्य प्रदेश के अस्पताल में भर्ती कराने का निर्णय लिया। 

घर जाने के दौरान जब रास्ते में पुजारी कैलाश शर्मा की स्थिति बिगड़ी तब उन्हें मथुरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। कैलाश के पिता चरण दास ने इस घटना पर कहा कि उनके बेटे पर बुरी तरह हमला हुआ है और वह हमलावरों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं।

परिवार के लोगों ने कहा कि मेडिकल परीक्षण के आधार पर हमलावरों के विरुद्ध मामला दर्ज किया जाएगा। वहीं, इस मामले पर पुलिस अधिकारी राजपाल का कहना था कि अभी तक उन्हें इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। पुलिस ने वीडियो के आधार पर मामले की जाँच शुरू कर दी है।   

पंजाब: J&K से लाई गई ₹200 करोड़ कीमत की 34 किलो ड्रग्स बरामद, 3 गिरफ्तार

ड्रग्स के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पंजाब पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) ने 34 किलोग्राम ड्रग्स बरामद की है। इस ड्रग्स की कीमत अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में लगभग 200 करोड़ रूपए है। इसके अलावा, एसटीएफ़ ने इस मामले के तहत लुधियाना में तस्करों (स्मगलर्स) को भी गिरफ्तार किया है। 

जब्त की गई ड्रग्स में 28 किलो हेरोइन है और 6 किलो आइस ड्रग्स है। इतनी हेरोइन की कीमत 140 करोड़ रूपए बताई जा रही है। एसटीएफ़ के अधिकारिओं के अनुसार, मामले के आरोपित पूरे देश में ड्रग्स का वितरण (सप्लाई) कर रहे थे और इनके संबंध अंतरराष्ट्रीय तस्करों से भी थे। गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान 30 वर्षीय मंजीत सिंह मन्ना (नया भगवान नगर, जोधवाल), 20 वर्षीय विशाल (बटाला, गुरदासपुर) और 40 वर्षीय अँगरेज़ सिंह (पटियाला) के रूप में हुई है। 

‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले के कुछ अन्य आरोपितों की भी पहचान हुई है, जिसमें राजन शर्मा, हैप्पी रंधावा हरमिंदर सिंह, सनी और तनवीर बेदी शामिल हैं। एसटीएफ़ आईजी आरके जायसवाल के मुताबिक़ उन्हें सूत्रों से जानकारी मिली, जिसके बाद सोमवार की शाम उन्होंने साहनेवाल के पास मंजीत मन्ना को गिरफ्तार किया जब वह अपनी एसयूवी में घूम रहा था। खोजबीन के दौरान अधिकारियों ने गाड़ी के बूट स्पेस में बने खुफ़िया कम्पार्टमेंट में बनाई गई जगह के भीतर 18 किलो हेरोइन और 6 किलो आइस ड्रग्स बरामद की। पूछताछ के दौरान मंजीत ने अपने अन्य साथियों के बारे में पूरी जानकारी दी।

मंजीत द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर एसटीएफ़ ने छापा मार कर विशाल और अँगरेज़ को फगवाड़ा बंगा रोड स्थित बेहरम प्लाज़ा से गिरफ्तार किया। 3 नवंबर को हुई इस छापेमारी में उनके पास से लगभग 10 किलो हेरोइन बरामद हुई थी। विशाल और अँगरेज़ सिंह ने अपनी गाड़ी के बूट स्पेस और दरवाजों में ड्रग्स छिपा रखी थी। आरोपित ड्रग्स श्रीनगर, जम्मू कश्मीर से लेकर आए थे जिसे वह पंजाब समेत कई अन्य राज्यों में बेचने वाले थे। 

अधिकारियों ने इस बात का दावा किया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपित तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय तस्करों से संबंध होने की बात कही। अँगरेज़ सिंह लुधियाना के किताब बाज़ार की कार पार्किंग में काम करता था। फ़िलहाल इन आरोपितों को 8 नवंबर तक की हिरासत में भेज दिया गया है। पंजाब में पिछले 4 सालों में लगभग 13 बार आइस ड्रग्स पकड़ी गई है लेकिन इस कार्रवाई को अब तक की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। 

अर्णब 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, अदालत ने कहा- हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं: आज होगी सुनवाई

मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को 14 दिन की पुलिस हिरासत में रखने के लिए मुंबई की अदालत में याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है। साथ ही, अर्णब को जल्द ही जमानत मिलने की भी सम्भावना है, जिसका आशय है कि शायद उन्हें न्यायिक हिरासत में भी न रहना पड़े।

मुंबई पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को बीते दिन एक पुराने ‘बंद मामले’ में गिरफ्तार किया था। आधी रात में चली सुनवाई के बाद अलीबाग न्यायालय ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसका मतलब यह है कि इस दौरान मुंबई पुलिस उनसे पूछताछ नहीं कर पाएगी। 

बुधवार (नवम्बर 04, 2020) की सुबह पुलिसकर्मियों के एक बड़े समूह जिनके पास एके 47 जैसे हथियार तक मौजूद थे, उन्होंने अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था। शुरुआत में अदालत के भीतर पेशी के दौरान, अदालत ने उनके मेडिकल परीक्षण का आदेश दिया क्योंकि पुलिस ने अर्णब गोस्वामी के साथ हिंसा भी की थी। मेडिकल परीक्षण के बाद अर्नब को शाम 4:45 बजे के आस-पास दोबारा अदालत में पेश किया गया था जिसमें 14 दिन की न्यायिक हिरासत की माँग की गई थी। 

मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी को साल 2018 के एक बंद मामले में गिरफ्तार किया गया था जिसमें उनके विरुद्ध कोई सबूत नहीं मिला था। इस मामले में साल 2018 के दौरान अन्वय नायक नाम के व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली थी, उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि कि अर्नब गोस्वामी समेत कुल दो लोगों के पास कुछ रूपए मौजूद हैं और वह वापस करने से इनकार कर रहे हैं। इसकी वजह से उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है इसलिए वह आत्महत्या कर रहे हैं। रिपब्लिक ने इस तरह के तमाम आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उन्होंने अनुबंध के मुताबिक़ सारे भुगतान कर दिए थे। 

अदालत द्वारा उल्लेखित बिंदु 

  • पुलिस हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं
  • आत्महत्या और अर्नब गोस्वामी के बीच किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं
  • अदालत की अनुमति के बिना पुराने मामले की फाइल को दोबारा खोला गया

मुंबई पुलिस ने दावा करते हुए कहा था कि जिस मामले को अदालत ने साल 2018 में बंद कर दिया था उसमें पुलिस को नए सबूत हासिल हुए हैं। इसकी वजह से उन्हें मामले की जाँच के लिए अर्णब गोस्वामी को पुलिस हिरासत में रखने की माँग उठाई थी। 6 घंटे की मैराथन सुनवाई के बाद अदालत ने पुलिस हिरासत की माँग को ठुकराते हुए अर्णब को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 

अदालत ने कहा इस मामले में पुलिस हिरासत के लिए कोई अर्थपूर्ण आधार नहीं हैं। इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि मामले आत्महत्या और अर्णब गोस्वामी की भूमिका के बीच संबंधों की कोई कड़ी नज़र नहीं आती है। न्यायाधीश ने इस बात का भी उल्लेख किया कि यह एक पुराना मामला है जिसकी फाइल बंद हो चुकी थी और इसे बिना अदालत की अनुमति के शुरू किया गया है। 

आधी रात में सुनवाई पूरी होने के और फैसला आने के बाद अर्णब गोस्वामी ने कहा, “पुलिस हार चुकी है।”

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने अर्णब गोस्वामी के वकील को जमानत संबंधी दस्तावेज़ तैयार रखने के लिए कहा है। आज सुबह अलीबाग अदालत में इस मामले की सुनवाई होगी। इसी दौरान मुंबई उच्च न्यायालय साल अर्नब गोस्वामी द्वारा दायर की गई 2018 के इस मामले को ख़त्म करने की याचिका पर भी सुनवाई करेगी।

इसके अलावा,  मुंबई उच्च न्यायालय रिपब्लिक टीवी की मुंबई पुलिस के विरुद्ध दायर की गई याचिका पर भी सुनवाई करेगी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने इंडिया टुडे समूह का बचाव करते हुए उन्हें टीआरपी से छेड़छाड़ का आरोपित बताया है। जबकि इंडिया टुडे का नाम इस मामले में प्राथमिक रूप से दर्ज था।  

बार एसोसिएशन ने अर्णब की रिहाई के लिए राज्यपाल को लिखा पत्र, गिरफ्तारी को बताया SC के दिशानिर्देशों का उलंघन

मुंबई पुलिस द्वारा 2018 के एक बंद मामले में गिरफ्तार किए गए रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को देश भर के अलग अलग कोने से समर्थन मिल रहा है। साथ ही, अर्णब गोस्वामी की रिहाई की माँग को लेकर देश में बहुत जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।

इसी कड़ी में ऑल इंडिया बार एसोसिएशन (AIBA) ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पत्र लिखते हुए कहा है कि मुंबई पुलिस द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उलंघन करते हुए गोस्वामी की गिरफ़्तारी हुई है।

एआईबीए द्वारा साझा की गई एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एआईबीए के अध्यक्ष डॉ आदिश सिंह अग्रवाल ने राज्यपाल से गोस्वामी को तुरंत रिहा करने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के इस कार्रवाई को ‘सत्ता का दुरुपयोग” और ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला’ ठहराया है। प्रेस विज्ञप्ति ने उन दिशानिर्देशों को भी सूचीबद्ध किया जिसका मुंबई पुलिस ने गोस्वामी को गिरफ्तार करने में उल्लंघन किया था।

सुप्रीम कोर्ट के वकील ने CJI को लिखा पत्र

मुंबई पुलिस द्वारा गोस्वामी की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक वकील सिद्धार्थ आचार्य ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे को पत्र लिखा है।

आचार्य ने CJI से अनुरोध किया कि वह मुंबई पुलिस की कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के रूप में वर्णित करते हुए गोस्वामी की गिरफ्तारी का स्वत: संज्ञान लें। उन्होंने लिखा है कि शुद्ध राजनीतिक प्रतिशोध का लेकर की गई ‘अवैध’ गिरफ्तारी कानून का उल्लंघन है।

आचार्य ने लिखा, “यह इस तथ्य से स्पष्ट है कि अर्णब को न तो पहले नोटिस दिया गया और न ही उनको अपनी कानूनी टीम से इस बारे में बातचीत करने का मौका दिया गया। अर्णब की गिरफ्तारी करते समय कानून की विधिवत प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया है। यह महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुंबई पुलिस का दुरुपयोग कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा और अभूतपूर्व हमला है ”।

उन्होंने कहा कि यह व्यक्तिगत दुश्मनी निकलने के लिए राज्य की शक्ति का घोर दुरुपयोग था। उन्होंने सीजेआई से मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार को तत्काल रिहाई के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया।

मुंबई पुलिस ने अर्णब, उनकी पत्नी व बेटे पर भी दर्ज की FIR, पुलिस को पीटने का लगाया आरोप

मुंबई पुलिस ने बुधवार (नवंबर 4, 2020) शाम को रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी और उनकी पत्‍नी, बेटे और दो अन्‍य के खिलाफ एक ताजा एफआईआर दर्ज की। उन्‍होंने गिरफ्तार करने गए पुलिस अधिकारियों के सामने विरोध दर्ज कराया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 353, 504, 506 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

इस एफआईआर में कहा गया है कि जब पुलिस की टीम अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार करने उनके घर पहुँची तो उस दौरान उन्होंने महिला पुलिस अधिकारी सुजाता तानवडे से मारपीट की। जबकि सामने आए वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि अर्णब के साथ मुंबई पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

साभार: Live Law

अर्णब गोस्वामी के समर्थन में भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी बुधवार को दिल्ली में जंतर-मंतर पहुँचे और महाराष्ट्र में अर्णब की चौंकाने वाली गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया।

मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा, “अर्नब, फाइट! भारत के दिग्गज आपके साथ हैं, मेरे लड़के! आप एक शेर के बेटे हैं। डरिए मत। क्या आपको लगता है कि हम इस घटना को आसानी से जाने देंगे? उन्होंने उकसाया है! उन्होंने लोगों को उकसाया है। उन्होंने एक सेना अधिकारी के बेटे को उकसाया है।”

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के विरोध में बुधवार को दिल्‍ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी की तुलना आपातकाल से की। वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र के भाजपा कार्यकर्ता काले बिल्ले या काले कपड़े पहनेंगे, जब तक कि टेलीविजन पत्रकार अर्नब गोस्वामी को पुलिस द्वारा रिहा नहीं किया जाता है।  

महाराष्‍ट्र के भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने रिपब्लिक टीवी के संपादक की आत्महत्या मामले में गिरफ्तारी को ‘आपातकाल की तरह’ करार दिया। उन्‍होंने कहा कि अर्णब की रिहाई तक भाजपा कार्यकर्ता काले बैज या काले कपड़े पहनेंगे। भाजपा नेता ने कहा कि मामला गोस्वामी के खिलाफ था, एक राजनीतिक स्कोर को सुलझाने के लिए फिर से खोल दिया।

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के विरोध में भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष वीडी शर्मा, सांसद साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और भाजपा कार्यकर्ताओं ने टार्च रैली निकाली। बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ने कहा, “सत्य की बात जो भी करेगा हम उसके साथ हैं। अर्णब के साथ गलत हो रहा है। सच के आवाज से उद्धव सरकार डर गई है। ये लोकतंत्र है, लोग कहते हैं BJP लोकतंत्र की हत्या करती है लेकिन BJP हमेशा लोकतंत्र की रक्षा करती है।”

वहीं ‘इंडियन डिजिटल मीडिया असोसिएशन (IDMA)’ ने ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के मुख्य संपादक अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी और मुंबई पुलिस की ‘मनमानी’ पर हैरानी जताई। IDMA ने कहा कि वीडियो में दिख रहे विजुअल्स से ये स्पष्ट है कि पुलिस अर्णब गोस्वामी की पत्नी पर लगातार दबाव बना रही थी और उन्हें जबरन एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने को कह रही थी, और वो कौन से दस्तावेज थे, ये स्पष्ट नहीं है। IDMA ने इसे ‘महाराष्ट्र सरकार की मनमानी की हैरान कर देने वाली अवस्था’ बताया और कहा कि एक पत्रकार को चुप कराने के लिए स्टेट मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अर्णब ने वीडियो संदेश जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि मुंबई पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। अर्णब ने अपने वीडियो में कहा कि उनके साथ प्रदीप पाटिल समेत 8 पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की है और मारपीट की है। उन्हें धक्का दिया और गले से पकड़ा। उन्होंने कहा, पुलिस द्वारा जबरन उन्हें घर से उठाकर लाया गया है। यहाँ तक कि उनके पैरों में जूते भी नहीं थे। अर्णब ने हाथ में जख्म भी दिखाया और कहा कि उन्होंने डॉक्टरों को अपनी चोट दिखाई, जो कि उनके अनुसार मुंबई पुलिस द्वारा उनके साथ की गई मारपीट में उन्हें लगी है।

अर्णब गोस्वामी ने आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस ने उनके, उनकी पत्नी, बेटे और सास-ससुर के साथ हाथापाई की। रिपब्लिक टीवी ने इस पूरे मामले पर बयान जारी कर अपना पक्ष भी रखा है। पुलिस का कहना है कि अर्णब गोस्वामी को 53 साल के एक इंटीरियर डिज़ाइनर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है।