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14 दिनों के न्यायिक हिरासत में अर्णब गोस्वामी को रखा गया इस क्वारंटाइन सेंटर में: देखें वीडियो

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को मुंबई और अलीबाग पुलिस ने 4 नवंबर, 2020 को उनके घर से घसीटते और मारते पीटते हुए गिरफ्तार किया। अर्णब की गिरफ्तारी बुधवार सुबह हथियारों से लैस कई पुलिस अधिकारी, एनकाउंटर कॉप और शिवसेना के पूर्व सदस्य सचिन वेज के नेतृत्व में उनके घर में जबरन घुसकर की गई थी।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उन्हें अलीबाग के एक पुलिस स्टेशन में रखा और फिर उन्हें मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। जहाँ अदालत ने पुलिस कार्रवाई पर तीखी टिप्पणी करते हुए अर्नब गोस्वामी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस पूरी कार्यवाही को वकीलों की जीत के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि मुंबई पुलिस अर्णब के लिए 14 दिनों की पुलिस हिरासत की माँग कर रही थी।

मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा की गई टिप्पणियाँ इस प्रकार हैं:

  • ◆अदालत की मंजूरी के बिना मुंबई पुलिस द्वारा 2018 का आत्महत्या का मामला खोला गया।
  • ◆मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने देखा कि अर्नब को गिरफ्तार किए जाने के मामले और आत्महत्या के केस में कोई संबंध नहीं था। केस को पहले 2018 में बंद कर दिया गया था और अब फिर से खोला गया। जिसमें अर्णब गोस्वामी की भूमिका बताई जा रही है।
  • ◆फैसला सुनाने के दौरान CJM ने यह भी देखा कि पुलिस हिरासत के लिए कोई ‘उचित आधार’ नहीं है।

अर्णब को रखा गया इस क्वारंटाइन सेंटर में

अलीबाग में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अर्णब गोस्वामी की न्यायिक हिरासत मंजूर करने के बाद, उन्हें क्षेत्र के एक क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है।

क्वारंटाइन सेंटर की तस्वीर

मजिस्ट्रेट के अनुसार, अर्णब गोस्वामी को इस जगह 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया गया है।

हालाँकि, उच्च न्यायालय ने अर्णब गोस्वामी को आज अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। साथ ही सुनवाई को कल के लिए टाल दिया गया है। कल अदालत गोस्वामी के वकीलों की याचिका पर सुनवाई करेगी ताकि उन्हें राहत प्रदान की जा सके और उन्हें हिरासत से मुक्त किया जा सके।

गौरतलब है कि ऑपइंडिया हिंदी के संपादक को दिए एक साक्षात्कार में, सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ मुंबई पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की थी। मंत्री ने कहा, “मुंबई पुलिस जो कर रही है, उसका कोई भी समर्थन नहीं करेगा।” मुंबई पुलिस ने इंडिया टुडे के नाम पर दर्ज एफआईआर के आधार पर टीआरपी घोटाले में रिपब्लिक टीवी को फर्जी फँसाया था।

बता दें पुलिस ने टीआरपी घोटाले में कथित तौर पर रिपब्लिक टीवी का नाम लेने के लिए गवाहों के साथ जबरदस्ती की थी। मुंबई पुलिस ने चैनल के सभी वित्तीय लेनदेन का विवरण भी माँगा था। वहीं जब अपने सारे करतूतों में मुंबई पुलिस नाकाम हो गई तो उन्होंने कब अर्णब को फँसाने के लिए 2018 में बंद कर दिए एक केस का सहारा लिया है।

बिकरू कांड: SIT ने सौंपी 3200 पन्नों की रिपोर्ट, 75 अधिकारियों के खिलाफ की कार्रवाई की सिफारिश

कानपुर के बिकरू कांड पर एसआईटी ने बुधवार (नवंबर 4, 2020) को अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। यह रिपोर्ट 3200 पन्नों की है। इसमें विशेष जाँच टीम ने अधिकारियों व कर्मचारियों को मिलाकर कुल 75 लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट के निष्कर्ष में पुलिस की गंभीर चूक सामने आई है। अब आगे प्रशासन इस रिपोर्ट पर विचार करेगा।

मीडिया खबरों के अनुसार, इस पूरे मामले में अपर मुख्य सचिव संजय आर भूसरेड्डी की अध्यक्षता में गठित SIT द्वारा काफी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है। टीम को कुल 9 बिन्दुओं पर जाँच करके अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया था।

खबरों में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जिन 75 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है, उनमें से 60 फीसदी पुलिस विभाग के ही हैं। बाकी 40 प्रतिशत प्रशासन, राजस्व, खाद्य एवं रसद तथा अन्य विभागों के हैं।

कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आरोपितों को बर्खास्त करने का फैसला ले सकती है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि कैसे पुलिसवाले विकास दुबे को थाने में चल रही हर गतिविधि के बारे में पहले से ही बताते रहते थे। घटना वाले दिन भी पुलिसवालों की दबिश के बारे में पहले से ही विकास को सब कुछ बता दिया था।

बाद में विकास दुबे ने उसी जानकारी को पाकर असलहे और गुंडों को तैयार किया व पुलिस के पहुँचते ही उन पर हमला बोल दिया। इस पूरी घटना में विकास दुबे तो मौके से फरार हो गया मगर 8 पुलिसकर्मियों को बेरहमी से मार दिया गया।

पूरी घटना की बाबत बीती 11 जुलाई को अपर मुख्य सचिव संजय भुसरेड्डी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन हुआ। इसमें अपर पुलिस महानिदेशक हरिराम शर्मा व पुलिस उप महानिरीक्षक जे रवींद्र गौड़ को सदस्य नामित किया गया था।

गठन के समय ही सरकार ने एसआईटी को जाँच पूरी कर 31 जुलाई तक रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा था। लेकिन निर्धारित समय सीमा तक जाँच पूरी नहीं हो सकी थी और एसआईटी के आग्रह पर जाँच की अवधि को कई बार बढ़ाया गया।

शासन ने एसआईटी से मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे, उसके परिवार, उसके करीबी, रिश्तेदार व गैंग के सदस्यों को मिलाकर कुल 57 लोगों की संपत्तियों और उनके ठेकों और शस्त्र लाइसेंस के संबंध में जानकारी माँगी थी। 

‘तेज रफ्तार’ पर राष्ट्रवाद भारी, बिहार की बाज़ी एनडीए ने पलटी

तेज रफ्तार, तेजस्वी सरकार। यह राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन का नारा है। इसी गठबंधन का वादा है कि सरकार बनते ही 10 लाख सरकारी नौकरी मिलेगी। इसे कई राजनीतिक विश्लेषक मास्टरस्ट्रोक भी मानते हैं।

पहला चरण: नीतीश कुमार से नाराजगी पड़ी भारी

28 अक्टूबर को बिहार विधानसभा की 71 सीटों पर वोट डाले गए थे। ये सीटें राजद के दबदबे वाली मानी जाती हैं। हालाँकि, 2010 में जब बीजेपी और जदयू साथ थे तो उन्हें इन 71 सीटों में 61 पर जीत मिली थी। 2015 में जदयू जब राजद के साथ चली गई तो महागठबंधन को 53 सीटें मिली और तत्कालीन एनडीए केवल 14 सीटों पर सिमट गई थी।

यानी, इन सीटों पर जदयू जिधर होती है, पलड़ा उधर झुक जाता है। लेकिन, इस बार इन सीटों पर नीतीश कुमार को लेकर भारी नाराजगी साफ दिख रही थी। बालू खनन बंद होने से भी लोग नाराज थे। पलायन और रोजगार बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा था। लोजपा के अलग होने से कागजों पर भी एनडीए के समीकरण उलझे हुए थे। 71 में से 42 सीटों पर लोजपा ने उम्मीदवार दिए थे। भोजपुर, बक्सर और मगध की कुछ सीटों पर विपक्षी गठबंधन को वामदलों के साथ होने का फायदा भी हो रहा था। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के ‘हम’ का साथ होना एनडीए के लिए इस तरह का कोई प्रभाव पैदा नहीं कर रहा था।

ऐसे माहौल में मतदान से ठीक पहले मुंगेर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं पर बल प्रयोग हुआ। इन सब फैक्टर का असर इन सीटों के मतदान पर भी दिखा। इन जगहों पर मतदान के बाद भी राजद के नेतृत्व वाला गठबंधन एनडीए पर भारी दिख रहा था। बीजेपी से जुड़े सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया कि उनके इंटरनल सर्वे में भी पहले चरण की 71 सीटों से मिले ​फीडबैक बेहद निराशाजनक हैं।

दूसरे चरण में पलटी बाजी

इस चरण में 3 नवंबर को 94 सीटों पर मतदान हुआ। पहले चरण के मतदान के बाद मिले फीडबैक के बाद एनडीए ने नए सिरे से रणनीतियों पर अमल करना शुरू किया। मुंगेर पर डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हुई। फ्रांस में इस्लामी कट्टरपंथी घटना और मथुरा की एक मंदिर में नमाज पढ़ने के मामले ने पलायन और रोजगार के चर्चे को नेपथ्य में धकेल दिया। विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई पर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के खुलासे ने भी मोदी सरकार की छवि मजबूत करने का काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभाओं के बाद राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, ईसाई धर्मांतरण जैसे मसले चर्चा के केंद्र में आ गए।

मसलन, मुस्लिम बहुल केवटी, बिस्फी और जाले के समीकरणों का प्रभाव मधुबनी और दरभंगा की सभी 20 विधानसभा सीटों पर हो रहा है। खासकर, जाले से कॉन्ग्रेस द्वारा मस्कूर अहमद उस्मानी को प्रत्याशी बनाने का मतदाताओं के बीच सही संदेश नहीं गया। इसके अलावा इन इलाकों में ओवैसी के चुनावी कार्यक्रमों ने भी एनडीए के पक्ष में मतदाताओं को गोलबंद करने में निर्णायक भूमिका निभाई। ये दोनों ऐसे जिले हैं जहाँ मजहबी कट्टरपंथ का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ‘दरभंगा मॉड्यूल’ तो राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा है। इसके अलावा ईसाई मिशनरियाँ भी प्रभाव बढ़ा रही हैं। भले धर्मांतरण को लेकर लोग फिलहाल उतने मुखर नहीं हैं, लेकिन मजहबी कट्टरपंथ के खतरे के खिलाफ यहाँ के लोग अब खुलकर बोलने लगे हैं।

इसका सीधा फायदा एनडीए खासकर बीजेपी को हो रहा है। इसने महादलितों और अतिपिछड़ों के बीच नीतीश कुमार के कमजोर होते आधार को भी रोकने का काम किया है। विपक्ष को कई सीटों पर पप्पू यादव की जाप और ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट (जिसमें उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, बसपा, समाजवादी जनता दल लोकतांत्रिक सहित 6 पार्टियाँ शामिल हैं) के उम्मीदवारों ने भी नुकसान पहुॅंचाया है।

इन सबका ही असर है कि ​कुछ दिन पहले तक जिन सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की हार तय लग रही थी, मतदान के बाद अब उनकी जीतने की चर्चा जमीन पर अचानक से होने लगी है।

तीसरा चरण निर्णायक

7 नवंबर को तीसरे और आखिरी चरण में 78 सीटों पर वोट डाले जाएँगे। इनमें ज्यादातर सीटें सीमांचल और कोसी की हैं। साथ ही तिरहुत और मिथिलांचल की बची हुई सीटों पर भी वोट डलेंगे। कोसी और सीमांचल की सीटों पर अल्पसंख्यक, महिला और प्रवासी वोटरों का सबसे ज्यादा असर होगा। सीमांचल की तो कई सीटों पर 50 फीसदी से ज्यादा अल्पसंख्यक वोटर हैं। पर एनडीए के लिए राहत की बात यह है कि इन सीटों पर ओवैसी फैक्टर के साथ-साथ हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का मुद्दा भी काम कर रहा है। इन 78 सीटों में से 58 ऐसी हैं, जहाँ पिछली बार पुरुषों से अधिक महिलाओं ने वोट डाला था। अच्छी बात यह है कि महिलाओं खासकर, ग्रामीणों महिलाओं के बीच नीतीश कुमार की लोकप्रियता अब भी बनी हुई है। इस चरण में भितरघात और बगावत भी कई सीटों पर विपक्ष का सिरदर्द है।

इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ गोलबंदी का ही असर है कि कई सीटों पर राजद का माई समीकरण भी अब दरकता दिख रहा है, जबकि शुरुआत में यह वर्ग राजद के पक्ष में काफी मुखर और लामबंद दिख रहा था। इनको लग रहा था कि सत्ता में प्रभाव में लौटने का यही मौका है और तेजस्वी यादव की ताजपोशी तय है। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा माहौल बदलने लगा। जैसा कि रतनपुर के विशेषचंद्र कुमार कहते हैं, “हिंदुत्व को मिटाने में सभी नेता लगा हुआ है। मुस्लिम जिस भी गाँव में है हिंदू की बहू-बेटी का इज्जत भी नहीं छोड़ रहा है। आतंकवादी, गुंडा को राज दीजिएगा तो वो क्या करेगा। वो औरंगजेब जैसा करेगा। सब जानते हैं कि मोदी जी के आने के बाद देश का, समाज का, सबका विकास हुआ है।”

असल में मतदाताओं पर मोदी का यही प्रभाव बिहार में एनडीए की उम्मीदों का पतवार है।

ममता सरकार का आ चुका है आखिरी समय, बंगाल में बनेगी 2/3 बहुमत से भाजपा की सरकार: गृहमंत्री अमित शाह

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने राज्य में अपनी ताल ठोक दी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह स्वयं इस समय प्रदेश के दौरे पर हैं। उन्होंने ममता सरकार के ख़िलाफ़ हुंकार भरते हुए जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने बंगाल की जनता से आज ही कह दिया है, “हमें एक मौका दें, हम बंगाल को सोनार बांग्ला बनाएँगे।”

केंद्रीय गृहमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ममता सरकार का अंत करीब आ चुका है। आने वाले दिनों में यहाँ पर सोनार बांग्ला की रचना करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरसक प्रयास होंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में 2/3 बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनने जा रही है।

उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि बंगाल एक सीमावर्ती राज्य है और यहाँ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व युवाओं को रोजगार देने के लिए उन्हें ममता सरकार को भाजपा सरकार से बदलना होगा। वह इसे दोबारा सोनार बांग्ला बनाएँगे।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, “जिस प्रकार के दमन का चक्र, विशेषकर भाजपा के कार्यकर्ताओं पर ममता सरकार ने चलाया है, मैं निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि ममता सरकार का आखिरी समय आ गया है और आने वाले दिनों में यहाँ भाजपा की सरकार दो तिहाई बहुमत से बनने जा रही है।”

जनता के बीच में अमित शाह ने कहा, “बंगाल के युवाओं को नौकरी, बंगाल के गरीबों को गरीबी से बाहर निकालने के लिए ममता सरकार को उखाड़कर फेक दीजिए।” उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की 80 से अधिक योजनाएँ जिनसे गरीबों और पिछड़े वर्ग को फायदा हो, वो जरूरतमंदों को नहीं मिल रही है। इसलिए अब समय आ गया है बदलाव लाने का।

उल्लेखनीय है कि आज भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देकर केंद्रीय गृहमंत्री ने जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने बंगाल की नब्ज टटोलकर मीडिया में बयान दिया कि बंगाल में एक ओर ममता सरकार को लेकर भयंकर जनआक्रोष दिखाई पड़ता है तो वहीं दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के प्रति एक आशा और श्रद्धा दिखाई पड़ती है। कोलकाता पहुँचने के बाद अमित शाह पूर्व मिदनापुर के पटासपुर के बीजेपी बूथ उपाध्यक्ष मदन घोराई के परिजनों से भी मिले और ट्विटर पर तस्वीरें भी साझा की।

अमित शाह के बयान आने के बाद टीएमसी सदस्यों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी लोकसभा सदस्य सौगता रॉय (Saugata Roy) मानना है कि अमित शाह दिन में सपने देख रहे हैं। उनका पूछना है कि अगर भाजपा बंगाल को सोनार बनाने में सक्षम है तो उन्होंने यूपी को क्यों नहीं बनाया। भाजपा अमीरों की पार्टी है। आदिवासी परिवार के घर में लंच करना सिर्फ़ ड्रामा है। यहाँ की जनता उन्हें कभी सत्ता में नहीं लाएगी।

‘AAP सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य को मजाक बना दिया है, दिल्ली बन जाएगी देश की कोरोना कैपिटल’- HC

दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात है कि देश की राजधानी में कोरोना वायरस से पनपी महामारी की तीसरी लहर आ चुकी है। इसी के मद्देनजर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इस मुद्दे को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि हालात ऐसे ही बने रहे तो बहुत जल्द दिल्ली पूरे देश की ‘कोरोना कैपिटल’ बन जाएगी। 

न्यायाधीश हिमा कोहली और सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने इस मुद्दे पर चिंता जारी करते हुए अपना नज़रिया पेश किया। पीठ ने कहा, “कोरोना महामारी दिल्ली की सरकार पर पूरी तरह हावी हो चुकी है। दिल्ली आम आदमी पार्टी सरकार यहाँ की जनता के स्वास्थ्य को हल्के में लिया अब उन्हें अलग से इसका सामना करना पड़ेगा। इस तरह के हालात दिल्ली की कार्यप्रणाली पर तमाम प्रश्न खड़े करते हैं।”

पीठ ने कटाक्ष करते हुए कहा कि दिल्ली की AAP सरकार ने नागरिकों के स्वास्थ्य का मजाक बनाकर रख दिया है और इस मामले से अलग से निपटा जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने टेस्टिंग के मामले में पहले नंबर पर आने के कई दावे किए हैं लेकिन मामलों की संख्या यहाँ सबसे अधिक है।

इसके बाद पीठ ने महामारी के विषय पर कहा, “सरकार इस बात को लेकर तमाम तरह के दावे करती है कि वह टेस्टिंग के मामले में सबसे आगे हैं लेकिन मामलों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से बढ़ोतरी हुई है। यह शहर बहुत जल्द देश का ‘कोरोना कैपिटल’ बन जाएगा। यह सब कुछ लगातार बढ़ते हुए मामलों की संख्या के चलते होगा। अब हमें इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेना होगा।” 

दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ ने यह टिप्पणी चिकित्सकों, पैरा मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मचारियों, शिक्षकों, अभियंताओं और उत्तरी दिल्ली नगरपालिका के तहत आने वाले कर्मचारियों के रुके हुए वेतन भुगतान के संबंध में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी की। इसके पहले दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों पर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को खुद तीसरी लहर का डर सता रहा था। 

इस पर बयान देते हुए अरविन्द केजरीवाल ने कहा था, “दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। हम कह सकते हैं कि राजधानी में यह कोरोना महामारी की तीसरी लहर (Third wave) है। हम फ़िलहाल इस मुद्दे की पूरी तरह से निगरानी कर रहे हैं और इससे संबंधित हर ज़रूरी कदम उठाएंगे।”

बुधवार (4 नवंबर 2020) तक राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के कुल 6842 नए मामले सामने आए थे। इसके साथ दिल्ली में कोरोना महामारी से प्रभावित मरीजों की संख्या 4,09983 पहुँच गया था।

‘F*ck you fascist’: ट्रम्प के खिलाफ प्रदर्शन कर रही देविना सिंह ने न्यूयॉर्क पुलिसकर्मी के चेहरे पर थूका, गिरफ्तार

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव लगभग पूरे हो चुके हैं और जल्द ही तस्वीर भी साफ़ हो जाएगी। इसी बीच एक डोनाल्ड ट्रम्प के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक घटना में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक महिला ने न्यूयॉर्क पुलिस डिपार्टमेंट (NYPD) के अधिकारी पर अभद्र टिप्पणी करते हुए उसके चेहरे पर थूक दिया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में बना हुआ है।

पुलिस अधिकारी को ‘फ़क यू फ़ासिस्ट कहकर’ गाली देने वाली और उस पर थूकने वाली इस युवती का नाम देविना सिंह है। 24 वर्षीय देविना सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एलिज़ाबेथ मर्लिन रोज़नर (Elizabeth Rosner) नाम की ट्विटर यूज़र द्वारा साझा किए गए वीडियो में पूरी घटना स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स  के मुताबिक़ यह घटना अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर स्थित वेस्ट विलेज क्षेत्र की है जहाँ भारी संख्या में लोग मौजूद थे। अमेरिका में हो रहे चुनाव के दौरान अपने अपने राजनीतिक दलों के समर्थन में उतरे तमाम लोगों में से एक महिला ने वहाँ मौजूद एक एनवाईपीडी अधिकारी से बेहद अभ्रद्रता पूर्वक तरीके से कहा, “f*ck you, fascist”।

पुलिस अधिकारी को अपशब्द कहने वाली महिला इतने पर ही नहीं रुकी। इसके बाद उसने चिल्लाते हुए एनवाईपीडी अधिकारी के चेहरे पर थूक दिया। इस पर अधिकारी महिला को पकड़ लेता है और उसे जमीन पर गिराकर उसे हथकड़ी लगाकर एक पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार करता है। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों और सुरक्षाबलों के बीच हाथापाई भी हुई और यह भी वीडियो में बेहद स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 

इस घटना को ट्वीट करते हुए न्यूयॉर्क पुलिस डिपाटर्मेंट ने लिखा है कि इस तरह का बर्ताव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फ़िलहाल इस वीडियो को लेकर लाखों लोग दे चुके हैं और इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सिर्फ ट्विटर पर ही इस वीडियो को ख़बर लिखे जाने तक लगभग 22 लाख से अधिक लोग देख चुके थे।

अमेरिका में चुनाव परिणाम आने के ठीक पहले और चुनावी गतिविधियों के बीच इस तरह की तमाम घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। वहाँ के अलग अलग क्षेत्रों में आम लोग सड़कों पर अपने अपने राजनीतिक दलों के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं।

ईशनिंदा के आरोप में सिक्योरिटी गार्ड अहमद नवाज ने बैंक मैनेजर को मारी गोली: पाकिस्तानियों ने मनाया जश्न, देखें वीडियो

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जहाँ कथिततौर पर ईशनिंदा के आरोप में बैंक मैनेजर को गोली मारने वाले एक सिक्योरिटी गार्ड के अहमद नवाज समर्थन में उतरे पाकिस्तानी उसके साथ जश्न मनाते और उसका अभिवादन करते नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तानी एक्टिविस्ट राहत ऑस्टिन ने ख़ुशब की क़ैदाबाद तहसील में नेशनल बैंक ऑफ़ पाकिस्तान शाखा के एक मैनेजर को ईशनिंदा के आरोप में गोली मारने वाले सिक्योरिटी गार्ड अहमद नवाज का वीडियो शेयर किया है। वीडियो में अहमद एक भीड़ का नेतृत्व करते, नारे लगाते और हत्या का जश्न मनाते हुए सड़क पर दिखाई दे रहा है। इस प्रदर्शन के बीच एक व्यक्ति को भीड़ से निकलते और उसे चूमते हुए भी देखा जा सकता है।

एक अन्य वीडियो में आप देख सकते हैं कि भीड़ किस तरह हत्या के आरोपित को संरक्षण देते और हत्या के लिए उसे बधाई देती नजर आ रही है। भीड़ के साथ आरोपित मजहबी नारे लगाता है, जिसका अर्थ है “पैगंबर का अपमान करने वालों का सर कलम कर दो।”

एक अन्य वीडियो में गार्ड को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मृतक प्रबंधक ने पैगम्बर का अपमान किया था।

गौरतलब है कि यह घटना 4 नवंबर (बुधवार) को ख़ुशब की तहसील क़ैदाबाद में हुई थी। बैंक शाखा में तैनात सुरक्षाकर्मी अहमद नवाज ने नेशनल बैंक ऑफ़ पाकिस्तान के अधिकारी मुहम्मद इमरान हनीफ को गोली मारकर घायल कर दिया था। नवाज ने कहा कि उन्होंने हनीफ को कथित ईशनिंदा करने के आरोप में खुलेआम गोली मार दी थी। हालाँकि, पाकिस्तानी पुलिस ने पुष्टि की कि कुछ दिनों से दोनों के आपसी विवाद चल रहा था। जिस वजह से घटना को अंजाम दिया गया।

वहीं जैसे ही सुरक्षा गॉर्ड को पुलिस हिरासत में ले रही थी, एक बड़ी संख्या में भीड़ उसके समर्थन में उतर आई और उसके पक्ष में नारे लगाते हुए दिखी।

पैगंबर मुहम्मद या उनके खिलाफ बोलना ईश निंदा माना जाता है, जिस पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने मासूम लोगों को मौत के घाट उतारने का काम किया है। बीते दिनों यह नजारा फ्रांस में देखने को मिला जब शिक्षक द्वारा पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून दिखाने पर उसका सर कलम कर दिया गया था।

वहीं पूर्व हिंदू महासभा के नेता और हिंदू समाज पार्टी के संस्थापक कमलेश तिवारी की हत्या और बेंगलुरु में हुए दंगों के पीछे की वजह भी यही थी। अक्सर असहज तथ्यों को बोलने की हिम्मत रखने वालों के खिलाफ नफरत और असहिष्णुता देखी ही जाती है।

अर्णब की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने भेजा रायगढ़ के SP को समन: माँगी पूरी जानकारी

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली से लेकर भोपाल तक में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार व मुंबई पुलिस की खुल कर आलोचना हो रही है। ऐसे में महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने रायगढ़ एसपी को कारण बताओ नोटिस भेज दिया है।

महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने रायगढ़ एसपी को नोटिस भेजकर कल सुबह उन्हें पेश होने को कहा है। साथ ही सारे सबूत आयोग के समक्ष पेश करने के आदेश भी दिए गए हैं।

बता दें कि वकील आदित्य मिश्रा ने अर्णब गोस्वामी की अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के समक्ष एक याचिका दायर की थी और मामले पर तत्काल विचार करने का आह्वान किया था।

इस पूरे मामले में रिपब्लिक टीवी ने कुछ देर पहले बताया है कि मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक के एग्जिक्यूटिव एडिटर निरंजन नारायणस्वामी को भी समन जारी किया है। वह अलीबाग में पिछले 24 घंटे से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उन्हें मुंबई पुलिस द्वारा अब तक चौथी बार समन भेजा गया है।

गौरतलब है कि अर्णब गोस्वामी को बुधवार को बिना समन जारी किए जबरदस्ती घर से उठाया गया था। कुछ पुलिस अधिकारी उनके घर पहुँचे थे और उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें एक पुराने केस में गिरफ्तार किया था।

इसके बाद अर्णब की कई वीडियोज सामने आई थी। वीडियो में उनके शरीर पर मारपीट के निशान साफ नजर आए थे, जिसे देख जगह-जगह मुंबई पुलिस के रवैये की आलोचना हुई थी।

देर रात तक अदालत की सुनवाई चलने के बाद अर्णब को कल 18 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया जबकि मुंबई पुलिस लगातार 14 दिन की हिरासत का अनुरोध कर रही थी। अदालत ने पुलिस से कहा कि हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है।

दूसरी ओर अदालत द्वारा गोस्वामी को न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद उनके वकील आबाद पोंडा और गौरव पारकर ने जमानत के लिए याचिका दाखिल कर दी है। वकील पोंडा ने कहा, ‘‘अदालत ने पुलिस से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।”

डॉ जावेद के जहरीले इंजेक्शन से खाँसी के मरीज की मौत, मृतक को लौटने थे ₹1 लाख

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित टांडा इलाके के मंजारा गाँव में जावेद नाम के एक डॉक्टर ने खाँसी वाले मरीज की जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि मरीज जब डॉक्टर जावेद के पास गया तो उसने उसको गलत इंजेक्शन दिया जिससे मरीज की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने कार्रवाई की माँग करते हुए थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन किया।

मृतक के भाई अनिल कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “मेरे भाई को खाँसी थी। वो दवाई लेने के लिए डॉ जावेद के पास गया था। जावेद को उनके एक लाख रुपए लौटाने थे। उसने मेरे भाई को जहरीला इंजेक्शन लगाया जिसके बाद उसकी मौत हो गई। जब हम न्याय की माँग करने थाने पहुँचे तो थाना प्रभारी ने हमारे साथ मारपीट की।”

इस पूरे मामले को लेकर रामपुर जिलाधिकारी अंजनेय कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने शिकायत ले ली है और जाँच होने के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अपनी ओर से पूरे मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि यूपी के रामपुर से यह मामला सामने आने के बाद लोग इस पर हैरानी व्यक्त कर रहे हैं। लोगों का पूछना है कि आखिर कोई डॉक्टर अपने मरीज के साथ ऐसा कैसे कर सकता है। वहीं एक रविशंकर नाम के यूजर का लिखना है कि भारतीय पुलिस के पास हिंदुओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की पूरी आजादी है, लेकिन समुदाय विशेष के अपराध खिलाफ़ एफआईआर भी दर्ज नहीं कर सकते।

समाचार एजेंसी एएनआई के ट्वीट पर रामपुर पुलिस से जुड़े पुलिसकर्मी रोहित यादव का ट्वीट भी आया है। इस ट्वीट में उन्होंने बताया है कि इस घटना की बाबत पुलिस ने झोलाछाप को हिरासत में ले लिया है और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने जानकारी दी है कि मृतक के पंचायत नामा की कार्रवाई की जा चुकी है तथा अन्य विधिक कार्रवाई की जा रही हैं।

रामपुर पुलिस ने भी अपने ट्विटर अकॉउंट से बताया है कि मृतक का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के जिला अस्पताल भिजवा दिया गया है। कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य है। अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।

हिंदुत्व को मिटाने में सब लगा हुआ है: जाले विधानसभा के रुझान

बिहार में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जाले विधानसभा इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि कॉन्ग्रेस ने यहाँ से एक जिन्ना समर्थक व AMU छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी को प्रत्याशी के रूप में उतारा है। ऐसे में क्षेत्र के वर्तमान विधायक व भाजपा प्रत्याशी जिवेश मिश्रा किन मुद्दों के साथ इस बार यहाँ चुनाव लड़ रहे हैं, इस पर ऑपइंडिया ने उनसे विस्तार से बात की।

वह इस बातचीत में बताते हैं कि कॉन्ग्रेस पूरे मिथलांचल तथा सीमांचल को कट्टरपंथ के प्रयोगशाला के तौर पर देख रही है और इसलिए जिस मशकूर ने जिन्ना का पोस्टर लगाकर ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ का नारा दिया था, उसे ही अपने प्रत्याशी के रूप में उतारा है। जिवेश मिश्रा को पूरी उम्मीद है कि उनके क्षेत्र की जनता यह देख कर कॉन्ग्रेस को मुँहतोड़ जवाब देगी, जिसका असर 10 नवंबर को देखने को मिलेगा।

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