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लड़कियाँ छेड़ते थे ये कॉन्ग्रेसी नेता, 2 ने मिलकर जूते-थप्पड़ों से सरेआम कूट दिया: पैर पर गिर कर माँगी माफी, वीडियो वायरल

कॉन्ग्रेस के नेता अक्सर सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। मामला इस बार भी सुर्खियों में बने रहने का ही है कारण अनैतिक है। उत्तर प्रदेश में जालौन के कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष ने कथित तौर पर लड़कियों के साथ छेड़खानी की और इस हरकत के लिए उन्हें परिणाम झेलना पड़ा। फ़िलहाल उनका वीडियो सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रहा है। इसमें लड़कियाँ उन्हें पीटती हुई नज़र आ रही हैं और वह माफ़ी माँगते हुए नज़र आ रहे हैं।

घटना उत्तर प्रदेश के उरई की बताई जा रही है और वीडियो में नज़र आने वाले कॉन्ग्रेस नेता की पहचान अनुज मिश्रा के रूप में हुई है। अनुज मिश्रा उत्तर प्रदेश, जालौन के कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष हैं। इन पर कथित रूप से लड़कियों के साथ छेड़खानी करने का आरोप है। इसके बाद दो लड़कियों ने उन्हें खूब पीटा, वीडियो में उन लड़कियों को काफी कुछ कहते हुए सुना भी जा सकता है। 

वायरल हुए वीडियो में वह दोनों कॉन्ग्रेस नेता से पूछ रही हैं, “अब लड़कियों को गाली दोगे? अब छेड़खानी करोगे? अब लड़कियों पर ट्राय करोगे?” जिस पर कॉन्ग्रेस नेता अनुज मिश्रा लड़कियों के पैर पकड़ कर उनसे माफ़ी माँगते हैं, उन्हें बहन कह कर संबोधित करते हैं और अंत में कहते हैं कि अब वह ऐसा कभी नहीं करेंगे। सोशल मीडिया पर नेटिज़न्स के बीच इस वीडियो को लेकर काफी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।  

इस घटना के वीडियो के अलावा सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस नेता अनुज मिश्रा की एक तस्वीर भी खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर में वह प्रियंका गाँधी वाड्रा के साथ नज़र आ रहे हैं। इस घटना और वीडियो के चर्चा में आने के बाद इस मुद्दे पर कई सवाल खड़े होते हैं। कॉन्ग्रेस नेता की ऐसी हरकत के बाद पार्टी उन पर क्या कार्रवाई करेगी? इसके अलावा प्रशासन की तरफ से कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई बात सामने नहीं आई है। ऐसे में यह भी देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करता है। 

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब कॉन्ग्रेस नेता के साथ मारपीट हुई है या उन पर इस तरह के अनैतिक आरोप लगे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के टाउन हॉल स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय में शनिवार (10 अक्टूबर 2020) को बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी मुकुंद भास्कर मणि का स्वागत होना था। इस दौरान कॉन्ग्रेस की ही तारा यादव का राष्ट्रीय सचिव सचिन नायक से विवाद हो गया। विवाद बहुत जल्द हाथापाई में बदल गया, जिसमें साफ़ देखा जा सकता है कि कई कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने तारा यादव को पीट दिया। जल्द ही वहाँ मौजूद अन्य कार्यकर्ता उन्हें कार्यालय से बाहर लेकर गए। 

बाहर निकलने के बावजूद कॉन्ग्रेस नेत्री तारा यादव चिल्ला कर विरोध कर रही थीं। इसके अलावा बाहर निकलने पर उन्होंने कहा कि थप्पड़ मार कर सुकून मिल गया। एक समाचार समूह से बात करते हुए उन्होंने कहा, “पार्टी ने एक गलत व्यक्ति को टिकट दिया है, वह नेता (मुकुंद भास्कर मणि) बलात्कारी है। मैंने राष्ट्रीय सचिव से यही कहा था कि उन्होंने एक गलत व्यक्ति को टिकट दिया है। इस कदम से संगठन की छवि पर प्रभाव पड़ेगा, यह टिकट किसी और को दिया जाना चाहिए। कोई ऐसा जिसका चरित्र और तौर तरीका बेहतर हो, यह बात कहने की वजह से मेरे साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट हुई।”      

BJP ने संविधान में भगवान राम सहित हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरों को चित्रित किया – फैक्ट चेक

कांशीराम बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय सचिव अक्षयवर नाथ कनौजिया का सोशल मीडिया पर एक विचित्र दावे के साथ एक वीडियो सामने आया है। इस वायरल वीडियो में वह यह दावा कर रहे हैं कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने आम जनता को बताए बिना संविधान में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें जोड़ीं।

जानकारी के अनुसार, यह वीडियो 9 अक्टूबर 2020 को लखनऊ में बसपा के संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान शूट किया गया था। कनौजिया ने दावा किया कि सरकार ने हिंदू भगवान की तस्वीरों जिसमें भगवान राम, माँ काली, भगवान हनुमान और कई अन्य शामिल हैं, उनको संविधान के नए संस्करण में जोड़ा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी 2024 के आम चुनावों में सत्ता में वापस आने और इन तस्वीरों को परमानेंट बनाने की उम्मीद कर रही है। कनौजिया ने आगे कहा कि उनकी पार्टी केबीएसपी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस तरह के परिवर्धन संविधान में शामिल नहीं हों।

इसके बाद उन्होंने लोगों को कहा कि यह तभी संभव हो सकता है, जब 2022 में उत्तर प्रदेश के राज्य चुनावों में और 2024 में आम चुनावों में भाजपा को सत्ता से हटा कर उसका स्थान लिया जाए। इस कार्यक्रम में केबीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सावित्री बाई फुले, उनके बगल में बैठी हुई थीं। वो खुद भी वीडियो में लोगों से संविधान की कॉपी की जाँच करने का आग्रह कर रही थीं।

दावे के पीछे की असल सच्चाई

वास्तव में कन्नौजिया जिन तस्वीरों को लेकर का दावा कर रहे थे कि उन्हें हाल ही में संविधान में जोड़ा गया है, वह असल में संविधान की पहली कॉपी में ही थे। प्रसिद्ध कलाकार नंदलाल बोस ने इन कलाकृतियों को संविधान के लिए डिज़ाइन किया था।

राज्यसभा में 4 फरवरी 2020 को अपने संबोधन के दौरान, भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने भारत के संविधान की मूल मैनुस्क्रिप्ट की एक कॉपी दिखाते कहा था कि जिस पेज पर मौलिक अधिकारों का उल्लेख है, वहाँ पहले से भगवान राम की तस्वीर को चित्रित किया गया है।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 2017 में बताया था कि कैसे नागरिकता के लिए ‘भारत का वैदिक जीवन’ को दर्शाया गया। फिर मौलिक अधिकारों को दिखाने के लिए ‘भगवान राम का श्रीलंका से माता सीता और लक्ष्मण के साथ लौटने’ वाले दृश्य को चित्रित किया गया। इसके बाद ‘‘भगवान कृष्ण ने महाभारत में गीता का उपदेश ‘राज्य नीति के प्रत्यक्ष सिद्धांतों के लिए और और वित्त, संपत्ति, अनुबंध और सूट के लिए ‘भगवान नटराज’ संविधान की मूल प्रति में जोड़े गए थे।

उन्होंने कहा, “अगर संविधान को आज फिर से लागू किया जाए और संविधान सभा को उसी रेखाचित्रों का उपयोग करना हो, तो लोगों को भारत को सांप्रदायिक कहने का एक बहाना मिल जाएगा! यह वह स्तर है, जिसने हमारी विरासत को कमज़ोर किया है।”

दिलचस्प बात यह है कि, कनौजिया ने उस हिस्से का उल्लेख बिल्कुल नहीं किया जहाँ संविधान की मूल मैनुस्क्रिप्ट में बुद्ध, रानी लक्ष्मी बाई, गुरु गोबिंद सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गाँधी, अकबर, टीपू सुल्तान और कई अन्य लोगों को चित्रित किया गया था।

पुलिस से मामले पर कार्रवाई करने की उठी माँग

कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने वायरल वीडियो को पोस्ट और रिट्वीट करते हुए यूपी पुलिस को भी टैग किया। और उनसे संविधान के बारे में भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए कन्नौजिया के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने भी यूपी पुलिस को टैग किया और उनसे अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की।

इस संबंध में लखनऊ पुलिस ने जवाब दिया कि उन्होंने वीडियो को संबंधित विभाग को जाँच करने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया है।

‘पुलिस की गोली से मेरे बेटे की हत्या हुई’: अनुराग पोद्दार के पिता के बयान के बाद मुंगेर के पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज

मुंगेर में पुलिस की बर्बरता के दौरान मारे गए अनुराग पोद्दार के पीड़ित पिता के बयान को आधार बनाते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोतवाली थाने में FIR दर्ज की गई। अनुराग पोद्दार के पिता ने कहा है कि पुलिस की चलाई गोली से उनके बेटे की हत्या हुई। साथ ही SHO के बयान के आधार पर उन 20-25 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है, जिन्होंने दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं पर लाठीचार्ज किया था।

बता दें कि मुंगेर में पूरब सराय सहित 3 थानों में आक्रोशित लोगों द्वारा आगजनी के बाद चुनाव आयोग ने डीएम राजेश मीणा और एसपी लिपि सिंह को हटा दिया था। डीआईजी मनु महाराज के अनुसार, गुरुवार (अक्टूबर 29, 2020) को हुई आगजनी के मामले में अब तक 6 FIR दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की पहचान भी कर ली गई है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच की जा रही है।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, पुलिस ने कुछ लोगों की पहचान भी कर ली है। साथ ही प्रशासन ने अफवाहों पर ध्यान न देकर शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। अब मानवजीत सिंह ढिल्लों को मुंगेर का नया एसपी बना कर भेजा गया है। 2009 कैडर के आईपीएस अधिकारी ढिल्लों इससे पहले पटना एसटीएफ में तैनात रहे हैं। वैशाली का एसपी रहते इन्होने 3 लापरवाह अधिकारियों समेत 66 पुलिसकर्मियों पर FIR करवाई थी।

बता दें कि मुंगेर मामले पर राजनीति भी हो रही है और तमाम विपक्षी दल नीतीश कुमार की सरकार पर हमलावर हैं। लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने राज्य सरकार को महिषासुर बता दिया। कॉन्ग्रेस ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर नीतीश सरकार को बरख़ास्त करने की माँग की। वहीं राजद ने एसपी लिपि सिंह को ‘जनरल डायर’ बताया। आगजनी के मामले में 68 नामजद और 1000 अज्ञात को आरोपित बनाया गया है।

इस मामले को लेकर पटना उच्च न्यायालय में पीआईएल भी दाखिल की जा चुकी है। इसके अलावा राज्य मानवाधिकार आयोग में भी आवेदन किया गया है। राजद नेता और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी का कहना है कि इसका असर अगले दोनों चरणों के चुनावों पर पड़ेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब तक इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों रविशंकर प्रसाद और गिरिराज सिंह ने भी इस घटना की निंदा की है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए मुंगेर की ‘बड़ी दुर्गा पूजा समिति’ के पदाधिकारियों ने बताया था कि उनके कम से कम 150 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था और उनके साथ क्रूरता की गई। उनका कहना था कि इनमें से कई अभी भी अलग-अलग थानों में पुलिस कस्टडी में हैं। एक और आरोप ये लगा था कि उनमें से जिन्हें छोड़ा भी गया है, उनके मोबाइल फोन्स पुलिस ने अपने पास रख लिए। आरोप है कि कई लड़कों को एसपी लिपि सिंह के सामने लाकर और उन्हें जम कर पीटा गया।

CM योगी की घोषणा के बाद अब हरियाणा में भी बनेगा लव जिहाद के खिलाफ कानून: गृह मंत्री अनिल विज ने ट्वीट कर दी जानकारी

उत्तर प्रदेश के बाद अब हरियाणा में भी लव जिहाद को रोकने के लिए कानून बनाया जाएगा। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने प्रदेश में लव जिहाद को रोकने के लिए कानून बनाने पर विचार की बात की है। उन्होंने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। बता दें कि निकिता हत्याकांड के बाद से लव जिहाद का मामला चर्चा में है। अनिल विज ने ट्वीट कर कहा कि हरियाणा में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने पर विचार चल रहा है।

विज ने एक टीवी चैनल से कहा, “योगी आदित्यनाथ जी जो कहते हैं, जब कहते हैं, सत्य कहते हैं, ये लव जिहाद का इलाज करना जरूरी है बच्चियों को बचाने के लिए। अगर इसके लिए कानून बनाना पड़े, कुछ और करना पड़े तो, किया जाना आवश्यक है। हम इस पर विचार कर रहे हैं।”

इससे पहले शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने का ऐलान किया था। सीएम योगी ने कहा कि इससे कोर्ट के आदेश का पालन भी होगा और बहन-बेटियों का सम्मान भी होगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था, “हम लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए एक प्रभावशाली क़ानून बनाएँगे। छद्म वेश में, चोरी-छिपे नाम बदल कर जो लोग बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनके लिए पहले से मेरी चेतावनी है। अगर वह सुधरे नहीं तो राम नाम सत्य है की यात्रा अब निकलने वाली है। बता दें कि शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि महज शादी के लिए धर्म परिवर्तन वैध नहीं है।

गौरतलब है कि फरीदाबाद हत्याकांड की सुनवाई फास्ट ट्रैक में करवाने का निर्णय हरियाणा सरकार पहले ही ले चुकी है। इस बात की जानकारी भी गृह मंत्री विज ने दी थी। विज ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि मामले के आरोपित को जल्द सजा मिलेगी। विज के अनुसार बल्लभगढ़ प्रकरण की जाँच एसआईटी अब 2018 से करेगी। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में दिन प्रतिदिन की जाएगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री भी इस मामले में कह चुके हैं कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। 

लव जिहाद के एंगल से होगी जाँच

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि बल्लभगढ़ मामले की जाँच 2018 से एसआईटी करेगी। क्योंकि 2018 में बेटी के अपहरण की शिकायत दर्ज करवाने के बाद ऐसी क्या नौबत आई कि परिजनों ने खुद ही शपथ पत्र देकर केस वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि इस केस को भी पुनर्जीवित किया जाएगा। इतना ही नहीं विज ने यह भी साफ किया कि इस मामले की धर्म-परिवर्तन और लव जिहाद की दृष्टि से भी जाँच करवाई जाएगी।

विज के निशाने पर कॉन्ग्रेस

बल्लभगढ़ मामले को लेकर अनिल विज कॉन्ग्रेस पर हमलावर हैं। उन्होंने कहा था कि बल्लभगढ़ की घटना कॉन्ग्रेस के दबाव में हुई। आरोपित कॉन्ग्रेस नेताओं का रिश्तेदार है। कॉन्ग्रेस नेताओं के दबाव में ही 2018 में दर्ज करवाया मुकदमा परिजनों ने रद्द करवा दिया। 

‘किसी की दबंगई नहीं चलने दूँगा’

गृहमंत्री ने कहा था, “मैं एक बात साफ बता देना चाहता हूँ कि मैं किसी की दबंगई नहीं चलने दूँगा। मैं सिसक-सिसक कर लड़कियों को मरने नहीं दूँगा। मैं इस प्रकार प्रदेश में किसी को दादागिरी करने नहीं दूँगा। जो भी यह लोग हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।”

निकिता हत्याकांड 

बता दें कि बीते 26 अक्तूबर को बीकॉम अंतिम वर्ष की छात्रा निकिता तोमर की तौसीफ ने गोली मारकर हत्या कर दी। तौसीफ ने इस घटना को तब अंजाम दिया जब वह बल्लभगढ़ स्थित अग्रवाल कॉलेज में परीक्षा देने पहुँची थी। पहले तो मुख्य आरोपित तौसीफ और रेहान ने छात्रा को जबरदस्ती कार के अंदर डालना चाहा था, लेकिन निकिता के साथ मौजूद छात्रा ने हत्यारों का विरोध किया, जिसके बाद तौसीफ ने छात्रा की गोली मारकर हत्या कर दी।

निकिता हत्याकांड: वारदात के बाद तौसीफ-रेहान ने बदल लिया था हुलिया, सीसीटीवी ने ऐसे बिगाड़ा हत्यारों का खेल

फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में निकिता तोमर की हत्या करने के बाद आरोपित नूंह की बजाय फरीदाबाद में ही छिपे थे। आरोपितों को यकीन नहीं था कि वह पकड़े भी जा सकते हैं। मगर अग्रवाल कॉलेज के गेट पर लगे सीसीटीवी ने उनके खेल को बिगाड़ दिया। सीसीटीवी के कारण ही निकिता के भाई नवीन ने तौसीफ को पहचान लिया और उसकी धर पकड़ शुरू हो गई।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपितों ने शुरुआत में फरीदाबाद में ही अपने एक रिश्तेदार के निर्माणाधीन घर में शरण ली थी। यहाँ आकर पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपित तौसीफ और रेहान ने अपना हुलिया बदल लिया था।

आरोपितों ने घर पर ही नाई बुलवाकर सिर के बाल कटवा दिए। वारदात के दौरान तौसीफ के सिर के बाल काफी बड़े थे। सीसीटीवी में पहचान होने के बाद अपराध शाखा सक्रिय हो गई और आरोपितों को धर दबोचा।

महापंचायत के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प

इधर आज निकिता मर्डर केस को लेकर महापंचायत बुलाई गई। सर्व समाज महापंचायत में फैसला लिया गया है कि 21 साल की नीकिता की हत्या मामले में दोषियों को जल्द से जल्द फाँसी की सजा दी जाए। जिसके बाद रविवार (नवंबर 1, 2020) को उग्र भीड़ ने फरीदाबाद-बल्लभगढ़ हाईवे को जाम कर दिया है। ये लोग निकिता हत्याकांड में दोषियों को जल्द से जल्द फाँसी की सजा देने की माँग कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि भीड़ ने आगजनी और पथराव भी किया जिसके बाद भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के ऊपर भी पथराव कर दिया है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया

जेल में भी वीआईपी ट्रीटमेंट लेना चाहता है तौसीफ

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक निकिता हत्याकांड में मुख्य आरोपित तौसीफ गिरफ्तारी के बाद से ही वीआईपी ट्रीटमेंट के खेल में लग गया है। नीमका जेल में बंद तौसीफ ने रिमांड के बाद की पहली पेशी में ही जान का खतरा बताकर खुद को गुरुग्राम के भोंडसी जेल में शिफ्ट करने की अर्जी कोर्ट में दी थी, क्योंकि इसी जेल में कॉन्ग्रेसी नेता का बेटा डिप्टी जेलर के पद पर कई सालों से कार्यरत है।

क्या है मामला?

फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ में परीक्षा देकर लौट रही बीकॉम तृतीय वर्ष की छात्रा 21 वर्षीय निकिता की गोली मारकर हत्या की गई थी। कत्ल का आरोप नूह से कॉन्ग्रेस विधायक आफताब अहमद के चचेरे भाई तौसीफ पर लगे हैं। तौसीफ ने पुलिस हिरासत में स्वीकार किया कि उसने निकिता की हत्या की योजना वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ देखने के बाद बनाई थी।

दरअसल, तौसीफ निकिता से शादी करना चाहता था। इसलिए वह कॉलेज के बाहर निकिता को ले जाने के लिए उसका इंतजार कर रहा था। जैसे ही निकिता कॉलेज से बाहर आई, तौसीफ उसे जबरन कार में बिठाने लगा। लेकिन निकिता ने इनकार करते हुए विरोध किया। इसके बाद आरोपित ने निकिता की गोली मारकर हत्या कर दी।

‘जिनका फैक्ट्रियाँ बंद करने का इतिहास है, वो निवेश दे सकते हैं क्या?’: जानिए PM मोदी ने रघुवंश प्रसाद और कर्पूरी ठाकुर को क्यों किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के समस्तीपुर में चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ‘जननायक’ कर्पूरी ठाकुर और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना की बंदिशों के बीच भी इतनी भारी संख्या में आना, लोगों का ये जोश और उत्साह साफ-साफ बता रहा है कि नतीजे क्या होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ हर कोने में विजय का विश्वास है, उमंग है, उत्साह है और वो बिहार के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प देख रहे हैं।

बिहार में छपरा में अपने सम्बोधन के बाद समस्तीपुर पहुँचे पीएम मोदी ने कहा कि आज अगर हर आकलन, हर सर्वे NDA की जीत का दावा कर रहा है तो उसके पीछे ठोस और मजबूत कारण है। उन्होंने कहा कि आज NDA की फिर से सरकार हमारी माताएँ-बहनें बना रही हैं, जिन्हें राजग सरकार, नीतीश सरकार ने सुविधाओं और अवसरों से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि वो ‘जीविका दीदियाँ’, जो आज आत्मनिर्भर परिवार और आत्मनिर्भर बिहार की प्रेरणा बन रही हैं, वो NDA को ताकत दे रही हैं।

बिहार में हो रहे विकास कार्यों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि घर-घर, स्कूल-स्कूल बने शौचालयों ने जिन बहनों-बेटियों को गरिमा दी, अंधेरे के इंतज़ार से मुक्ति दी, वो NDA की सरकार बना रही हैं। उन्होंने कहा कि जिन बहनों को पीने के पानी के संघर्ष से मुक्ति मिली, वो NDA के पक्ष में वोट डाल रही हैं। जीवन भर धुएँ में उलझती उन बहनों का वोट NDA के लिए है, जिनके घर में उज्जवला का सिलेंडर पहुँचा है।

समस्तीपुर की जनता को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने ये भी कहा कि बिहार के बेटे-बेटियाँ, जिन्हें आज मुद्रा लोन मिल रहा है, बैंकों ने जिनके लिए दरवाजे खोल दिए हैं, जिन्हें IIT-IIM-एम्स मिल रहा है, वो आज अपने उज्जवल भविष्य के लिए NDA पर भरोसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में एक तरफ लोकतंत्र के लिए पूर्ण रूप से समर्पित, एनडीए का गठबंधन है, वहीं दूसरी तरफ अपने निहित स्वार्थ को समर्पित पारिवारिक गठबंधन हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल को याद करते हुए पीएम मोदी ने पूछा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन सिर्फ और सिर्फ देश के लिए लगाया या नहीं? सरदार पटेल कॉन्ग्रेस पार्टी के थे कि नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि फिर भी कॉन्ग्रेस पार्टी ने कल सरदार पटेल की जन्म जयंती पर उनका स्मरण तक नहीं किया। उन्होंने पूछा कि सिर्फ और सिर्फ अपने-अपने परिवार के लिए काम कर रही इन पारिवारिक पार्टियों ने आपको क्या दिया?

लालू यादव के परिवार द्वारा अर्जित की गई अकूत संपत्ति पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए पूछा कि बड़े-बड़े बंगले बने, तो किसके बने? महल बने, तो किसके बने? बड़ी-बड़ी करोड़ों की गाड़ियाँ आईं, गाड़ियों का काफिला बना, तो किसका बना? उन्होंने बताया कि NDA का मंत्र है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास। NDA सरकार का निरंतर ये प्रयास रहा है कि कोई व्यक्ति, कोई भी क्षेत्र विकास के लाभ से छूट ना जाए। उन्होंने कहा कि सुविधा, सम्मान और सुअवसर में किसी के साथ भी कोई भेद नहीं होना चाहिए। यही तो सुशासन का भी लक्ष्य है।

पीएम मोदी ने समस्तीपुर की जनता को चेताया कि जिनकी नीयत खराब हो, जिनकी नीति सिर्फ गरीबों का धन लूटने की हो, जो निर्णय सिर्फ अपने और अपने परिवार को ध्यान में रखकर लेते हों, वो विकास के हर प्रयास का विरोध ही करेंगे। साथ ही कहा कि इन लोगों को गरीब की परेशानी, उसकी मुसीबतों से कोई लेना देना नहीं है। इन्हें गरीब सिर्फ और सिर्फ चुनाव में याद आते हैं। उन्होंने तंज कसा कि जब चुनाव आते हैं तो ये माला जपना शुरू कर देते हैं- गरीब, गरीब, गरीब… जब चुनाव पूरा हुआ तब ये बस अपने परिवार का कुनबा लेकर बैठ जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने लोगों से सवाल दागा कि जंगलराज की विरासत, जंगलराज के युवराज क्या बिहार में उचित माहौल का विश्वास दे सकते हैं? जो वामपंथी, नक्सलवाद को हवा देते हैं, जिनका उद्योगों और फैक्ट्रियों को बंद कराने का इतिहास रहा है, वो निवेश का माहौल बना सकते हैं क्या? पीएम मोदी ने बिहार के दिवंगत सीएम को याद करते हुए कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर जी ने एक इंटरव्यू में कहा था- सत्ता के आसपास अवसरवादियों को शरण या तरजीह बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए।

कर्पूरी ठाकुर ने आगे कहा था कि ये अवसरवादी मुझे नहीं तो मेरे बेटे या संबंधियों को भ्रष्ट करेंगे। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कर्पूरी ठाकुर के बाद, बिहार के लोगों ने इस बात को 100 फीसदी सच होते देखा है। उन्होंने बताया कि बरौनी का खाद कारखाना अपने-आप बन्द नहीं हुआ था, ये उनकी गलत नीतियों के कारण बन्द हुआ था जो आज बड़ी-बड़ी बातें करके, लोक लुभावनी चर्चाएँ करते हैं। साथ ही याद दिलाया कि बरौनी के खाद कारखाने को भी नया जीवन मिल रहा है।

इस दौरान रघुवंश प्रसाद सिंह को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि रघुवंश बाबू ने हमेशा सोशलिस्ट मूल्यों को आगे बढ़ाया, अपना पूरा जीवन बिहार की सेवा में लगा दिया। उन्होंने याद दिलाया कि अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए रघुवंश प्रसाद सिंह को कैसे अपमानित किया गया, ये पूरे बिहार ने देखा है। हाल ही में रघुवंश प्रसाद सिंह का निधन हो गया था। उससे पहले उन्होंने लालू यादव की पार्टी राजद से इस्तीफा दे दिया था।

चायनीज झालर-बत्ती को लोग कह रहे NO: दिवाली के पहले ‘वोकल फ़ॉर लोकल’, विदेश से भी मिल रहे दीयों के ऑर्डर

दिवाली को सिर्फ दो हफ्ते रह गए हैं। इस बीच भारत के दुकानदार बेहद स्पष्ट रूप से देख पा रहे हैं कि आम लोग चीनी झालरों और उत्पादों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। अपने कम दामों के चलते कुछ समय पहले भारतीय बाज़ार में चीनी झालर काफी लोकप्रिय हुआ करते थे और उनकी खरीद भी काफ़ी ज़्यादा थी। लेकिन इस साल ट्रेंड बदल गया है।

भारत और चीन की सेना के बीच सीमा पर हुए विवाद के बाद पूरे देश में चीन को लेकर आक्रोश की भावना जगी और इसका नतीजा यह निकला कि छोटे दुकानदारों के लिए यह वरदान जैसा साबित हुआ। साथ ही भारत में तैयार किए गए दीयों की माँग और खरीद काफी बढ़ गई है। 

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए एक दुकानदार ने बताया कि फ़िलहाल भारत में निर्मित (स्वदेशी) मिट्टी के दीयों की खरीद काफी ज़्यादा है। दुकानदार ने बताया कि पहले इस तरह के दीये चीन से भी बन कर आते थे लेकिन इस बात स्थानीय उत्पादों की माँग बहुत ज्यादा है। इसके अलावा दुकानदार ने कहा:

“आम जनता चीनी उत्पादों को सिरे से नज़रअंदाज़ और खारिज कर रही है। इस चीज़ से हमें काफी फ़ायदा होगा और हम अपनी दुकानों में भी स्वदेशी उत्पाद ही रख रहे हैं।”

इसके अलावा एक और दुकानदार ने बताया कि उसे विदेश से मोमबत्तियों और दीयों के ऑर्डर मिले हैं।

6 लाख दीयों से रोशन होगी अयोध्या, बनेगा विश्व रिकॉर्ड 

अयोध्या का जिला प्रशासन दिवाली के मौके पर विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी कर रहा है। पिछले साल 4.1 लाख दीये जलाए गए थे, वहीं इस साल दिवाली के मौके पर प्रशासन 6 लाख दीये रोशन करने की तैयार कर रहा है। यह सारे दीये अयोध्या में स्थित सरयू नदी के तट पर जलाए जाएँगे।

जिला प्रशासन ने बताया है कि इस विशालकाय योजना को प्रभावी रूप से अंजाम देने के लिए विश्वविद्यालयों के कुल 8 हज़ार छात्रों को शामिल किया गया है। कुल 6 लाख दीये दिवाली से ठीक एक दिन पहले 13 नवंबर को रोशन किए जाएँगे। 

आत्मनिर्भर भारत अभियान ‘वोकल फॉर लोकल’ 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का आह्वान किया था, जिसके तहत उन्होंने भारत के नागरिकों को ‘वोकल फॉर लोकल’ का मूलमंत्र दिया था। इसकी वजह से भारत के स्थानीय उत्पादों और सुविधाओं में काफी बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी हुई है।

भारत में सावन के बाद से ही त्यौहारों का मौसम शुरू हो जाता है, जिसमें रक्षाबंधन, नवरात्रि, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, विजयादशमी, दिवाली समेत कई अन्य त्यौहार मनाए जाते हैं। इन सभी त्यौहारों के लिए स्थानीय शिल्पकार, कलाकार और कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) स्वदेसी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।

रक्षाबंधन में लोगों ने कहा था चीनी राखी को ‘ना’

चीन और भारत की सेना के बीच हुए विवाद के बाद से आम लोगों में चीन से जुड़ी लगभग हर चीज़ को लेकर काफी आक्रोश है। इसका ही नतीजा था कि रक्षाबंधन के दौरान लोगों ने चीन की राखियों को सिरे से नकार दिया था।

एएनआई की रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र था कि लोग स्थानीय उत्पादों में ज्यादा रूचि ले रहे हैं। अहमदाबाद के एक दुकानदार की बात का उल्लेख करते हुए उस रिपोर्ट में बताया गया था कि लोग चीन के बदले भारत के उत्पाद खरीदने के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने के लिए भी तैयार हैं।       

J&K में 125 आतंकियों के शव सेना ने सुदूर इलाकों में दफनाए: जिहाद और आतंकवाद समर्थक भीड़ को रोकना है मक़सद

भारतीय सेना और सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए ‘आतंकवाद विरोधी अभियान’ में इस वर्ष 125 स्थानीय आतंकवादी मारे जा चुके हैं। इन सभी आतंकवादियों को इनके घरों से काफी दूरी पर स्थित और सुदूर क्षेत्रों में दफ़नाया गया है। इसके अलावा घाटी के अनेक आंतरिक इलाकों में इस साल 10 अक्टूबर तक कुल 171 आतंकवादी मारे गए हैं। 

इस साल के अप्रैल महीने में जम्मू कश्मीर प्रशासन ने इस मुद्दे पर फैसला किया था कि मारे जाने वाले स्थानीय आतंकवादियों को उनके घरों से काफी दूरी पर दफ़नाया जाएगा। इसके पीछे दो मूल वजहें थीं, पहला सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को बेहतर बनाए रखना और दूसरा घाटी में कानून व्यवस्था प्रभावित नहीं हो। इसके अलावा प्रशासन ने यह भी कहा था कि जिहाद समर्थक भीड़ के एकत्रित होने के ख़तरे को मद्देनज़र रखते हुए स्थानीय आतंकवादियों का शव उनके परिजनों को नहीं सौंपा जाएगा। 

इस विषय पर भारतीय सेना के एक अधिकारी का कहना था कि मारे जाने वाले स्थानीय आतंकवादियों को दफ़नाने के लिए निकाला जाने वाला जुलूस पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठनों के लिए भर्ती करने का सशक्त माध्यम बन गया था। आतंकवादियों की मृत्यु और अंतिम यात्रा वहाँ की आम जनता के लिए प्रदर्शनी का विषय बन जाता था। स्थानीय लोग इस तरह की घटनाओं पर यह कह कर शोक जताते थे कि उस मरने वाले आतंकवादी ने सेना के विरुद्ध लड़ाई की। नतीजा उन्हें दफ़न करने के पहले निकाले जाने वाला जुलूस भारी मात्रा में लोगों को आकर्षित करता था और लोग उसमें शामिल भी होते थे। 

धीरे-धीरे इस तरह के हर जुलूस में भीड़ बेहद आम बात हो गई थी। हर अंतिम यात्रा के जुलूस के बाद कम से कम 2 या 3 ऐसे युवा सामने आते ही थे जो इससे प्रभावित होकर आतंकवादी संगठन या गतिविधियों का हिस्सा बन जाते थे। इस मुद्दे पर सेना के एक अधिकारी ने कहा, “हमारे लिए युवाओं को ऐसे आतंकवादी संगठनों में शामिल होने से रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था।” जुलूस में इकट्ठा होने वाली भीड़ सुरक्षाबलों और सेना के जवानों पर पत्थरबाजी भी करती थी, जिससे वहाँ की क़ानून व्यवस्था नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता था। 

इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जम्मू कश्मीर प्रशासन ने फैसला किया था कि दफ़नाने की प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की निगरानी में और स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की जाए। इसके अलावा प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि दफ़नाने की प्रक्रिया धार्मिक मानदंडों को मद्देनज़र रखते हुए सीमित परिजनों की मौजूदगी में पूरी की जाए। अधिकारियों के मुताबिक़ इस पर किसी भी तरह का संदेह न किया जाए और पारदर्शिता बनी रहे इसके लिए डीएनए सैम्पल भी लिए जा रहे हैं।    

इस महीने की शुरुआत के दौरान सोपोर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी सज्जाद नवाब डार को दफ़नाने के वक्त तमाम पाबंदियों और दिशा निर्देशों के बीच सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी। यह कश्मीर के तमाम अधिकारियों के लिए बेहद चिंता का विषय था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जम्मू कश्मीर प्रशासन उत्तर कश्मीर में मारे जाने वाले आतंकवादियों को दक्षिण कश्मीर में दफ़न करता है और दक्षिण कश्मीर में मारे गए आतंकवादियों को उत्तरी कश्मीर में। इस दौरान प्रशासन इस बात का विशेष ध्यान रखता है कि आतंकवादी के परिजन मौके पर मौजूद रहें। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मुद्दे पर एक वरिष्ठ अधिकारी का कहा है कि ऐसा सिर्फ इसलिए किया जाता है जिससे आतंकवादियों की पहचान ऐसी चेहरों के रूप में न स्थापित हो जिससे प्रेरणा लेकर युवा भी हथियार उठाना शुरू कर दें। पिछले कुछ जुलूसों में स्थानीय लोगों की तरफ से भावनात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। जिसके तहत वह खुद आतंकवादी नहीं बल्कि सिपाही मानते हैं जिसे भारत की सेना का सामना करना है। 

यह फैसला इस साल के अप्रैल महीने में लिया गया था जिसके तहत सिर्फ प्रशासन ही आतंकवादियों को दफ़न करेगा और इस दौरान मौके पर सिर्फ परिजन मौजूद रहेंगे। इस पर एक सेना अधिकारी का कहना था कि इस आदेश की वजह से घाटी में काफी परिवर्तन देखा गया है, विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जो आतंकवाद का गढ़ हैं।    
      

पश्चिम बंगाल में पेड़ से लटकती हुई मिली 34 वर्षीय BJP कार्यकर्ता की लाश: पार्टी ने कहा- बंद हो राजनीतिक हत्याएँ

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के एक और कार्यकर्ता की हत्या की खबर आई है। पश्चिम बंगाल के नदिया में 34 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता बिजॉय शील की लाश एक पेड़ से लटकते हुए पाई गई। पश्चिम बंगाल भाजपा ने अपने ट्विटर हैंडल पर तस्वीरें शेयर करते हुए इस घटना को लेकर दुःख जताया। पार्टी ने आरोप लगाया है कि अब उसे रोकने के लिए आतंक का सहारा लिया जा रहा है। साथ ही ममता बनर्जी की सरकार को घेरा।

भाजपा ने कहा है कि वो रुकेगी नहीं और उसके जितने भी कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, उन सभी के लिए न्याय सुनिश्चित कर के रहेगी। पार्टी ने कहा कि इस तरह की ‘राजनीतिक हत्याएँ’ तुरंत रुकनी चाहिए। राज्य में सत्ता पक्ष को इन हत्याओं के लिए दोषी ठहराते हुए भाजपा ने कहा कि अब तक उसके 105 कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं और तृणमूल कॉन्ग्रेस की सरकार ने किसी को भी न्याय दिलाने की कोशिश तक नहीं की।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में भाजपा पूरे जोर-शोर से अपनी पैठ बनाने में लगी हुई है और कैलाश विजयवर्गीय राज्य में पार्टी के प्रभारी के रूप में जमीन पर उतर कर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि राज्य में दिलीप घोष पार्टी के मुखिया बने रहेंगे। उनके नेतृत्व में ही पार्टी अगले विधानसभा चुनावों में जाएगी। 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा का दौर अभी से ही शुरू होता दिख रहा है। पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता अक्सर निशाना बनते रहे हैं और उनके साथ मारपीट, अपहरण व हत्या की कई खबरें सामने आती हैं।

इसी महीने के पहले सप्ताह में पश्चिम बंगाल के अपराध जाँच विभाग (CID) ने बैरकपुर इलाके के टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के पास भाजपा नेता मनीष शुक्ला की निर्मम हत्या के लिए दो लोगों को गिरफ्तार किया था। ये हत्या रविवार (अक्टूबर 4, 2020) शाम करीब 8:30 बजे उस वक्त हुई थी जब वह एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पार्टी कार्यालय गए थे। सीआइडी ने मामले में मोहम्मद खुर्रम और गुलाब शेख नाम के दो आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

अब कनाडा में हुए हमले में 2 की मौत, 5 घायल: फ्रेंच इलाके में हुई घटना, मध्यकालीन युग के कपड़े पहने हुए था हमलावर

फ्रांस के बाद अब कनाडा में भी चाकुओं से हमला किया गया है। कनाडा के सेंट लॉरेंस नदी के किनारे स्थित क्यूबेक सिटी में एक व्यक्ति ने ताबड़तोड़ हमले किए, जिससे 2 की मौत हो गई और 5 अभी भी अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हमलावर मध्यकालीन युग का एक खास परिधान पहने हुए था, जिसे हिरासत में ले लिया गया है। आशंका जताई जा रही है कि उसने ही इस हमले को अंजाम दिया।

इससे पहले शनिवार (अक्टूबर 31, 2020 की) रात कनाडा में क्यूबेक की पुलिस ने सूचना दी थी कि उसे एक ऐसे अपराधी की तलाश है, जो मध्यकालीन युग का खास परिधान पहने हुआ है। साथ ही वो अपने साथ नुकीला व खतरनाक हथियार भी लिए हुआ था। ये घटना नेशनल असेंबली के पास ही हुई। बता दें कि क्यूबेक में अधिकतर फ्रेंच बोलने वाले लोग ही रहते हैं। पुलिस ने क्षेत्र के लोगों को घर में ही रहने को कहा है।

घायलों की स्थिति के बारे में कुछ बताया नहीं गया है लेकिन प्रशासन का कहना है कि ये एक गंभीर हमला था और क्यों किया गया था, इसकी जाँच हो रही है। चूँकि ये घटना पार्लियामेंट हिल के पास हुई है, इसीलिए सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस को तैनात कर के इमरजेंसी सेवाओं को एक्टिवेट कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि इस मामले में और लोगों के मरने की सूचना आ सकती है।

हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने फ्रांस की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए फ्री स्पीच का तो बचाव किया था लेकिन साथ ही कहा था कि इसकी एक लिमिट होनी चाहिए और ये ‘बिना ज़रूरत के या मनमाने ढंग से’ किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि हमें दूसरों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि विविधता भरे समाज में हमें हमारी शब्दों को लेकर सावधान होना चाहिए।

बता दें कि आज सुबह ही फ्रांस के लियोन शहर में शॉटगन से लैस अपराधी ने एक ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरी को गोली मार दी। ग्रीक ऑर्थोडॉक्स पादरी पर हमला तब हुआ, जब वो चर्च को बंद करके लौटने की तैयारी में थे। शनिवार (अक्टूबर 31, 2020) को हुई इस घटना में नुकीले हथियार लगे शॉटगन का इस्तेमाल किया गया। 52 वर्षीय पादरी को उसके पेट में गोली मारी गई। ये घटना हेलेनिक ऑर्थोडॉक्स चर्च के पास हुई।