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‘मुझमें और हाथरस की बेटी में क्या फर्क? राहुल गाँधी मेरे पास क्यों नहीं आ सकते?’ – बारां की रेप पीड़िता के चुभते सवाल

उत्तर प्रदेश के हाथरस की घटना को लेकर पूरे देश में विरोध हुआ। सभी ने इस घटना पर जम कर विरोध और बहस की लेकिन इस बीच कुछ कुछ घटनाएँ पीछे छूट गईं। ऐसी ही एक घटना हुई थी राजस्थान के बारां जिले में, जहाँ एक महिला को बंधक बना कर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया।

इस बीच पीड़िता ने राहुल गाँधी से सवाल पूछा है कि वह यहाँ (बारां) क्यों नहीं आते हैं? पिछले कुछ समय से राजस्थान में महिलाओं के साथ ज़्यादती के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन वहाँ की घटनाओं पर सभी ने मौन धारण कर रखा है। 

न्यूज़ नेशन में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ पीड़िता ने राहुल गाँधी को संबोधित करते हुए कई बातें कहीं। पीड़िता ने पूछा:

“राहुल गाँधी बारां क्यों नहीं आ सकते हैं? राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक दूसरे राज्य में घटनाएँ होने पर वहाँ जाते हैं, लेकिन अपने ही प्रदेश में स्थित बारां नहीं आते हैं। मुझमें और हाथरस की बेटी में क्या फर्क है, अन्याय तो मेरे साथ भी हुआ है। मैं भी हाथरस की बेटी जैसी हूँ। मैं चाहती हूँ कि मेरे साथ भी न्याय हो, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी यहाँ (बारां) आएँ। मेरे मामले पर भी सुनवाई हो और मुझे भी न्याय मिलना चाहिए।”  

इसके बाद पीड़िता ने आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2020 को दो लोग आए और कहा कि उनके माता-पिता ने खेत पर बुलाया है। इसके बाद आरोपित पीड़िता को उसके घर वालों के पास लेकर जाने के बदले डरा-धमका कर श्योपुर ले गए।

वहाँ उन्होंने पीड़िता को महीनों तक एक कमरे में बंद कर दिया और उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपितों ने उसके साथ जबरदस्ती करके शादी के कागज़ पर हस्ताक्षर भी करा लिए थे। इसके अलावा आरोपित रात के वक्त पीड़िता के साथ मारपीट भी करते थे।

तमाम कोशिशों के बाद पीड़िता उनके चंगुल से छूट कर बाहर आई, तब उसने 7 अगस्त को सीसवाली थाना क्षेत्र में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस का रवैया भी बेहद लापरवाही भरा है और अभी तक एक भी आरोपित गिरफ्तार नहीं किया गया है। पीड़िता ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक से भी मदद की गुहार लगाई थी। 

वहीं पुलिस ने शनिवार को इस मामले पर बयान देते हुए कहा था कि पीड़िता 1 जुलाई से लापता थी। वह 7 अगस्त को पुलिस थाने आई थी और उसने बलात्कार व अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। फ़िलहाल इस मामले में जाँच जारी है, आरोपित अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। अधिकारियों का अपने बचाव में कहना था कि कोरोना वायरस महामारी के चलते जाँच में समय लगा।

इस दौरान पुलिस अधीक्षक ने जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी का स्थानांतरण भी कर दिया था। पीड़िता ने बताया कि बलात्कार करने वाले आरोपित उसे और उसके परिवार वालों को लगातार धमकी दे रहे हैं। जिसके चलते उसे और उसके पूरे परिवार को अपना घर तक छोड़ना पड़ गया। पिछले 2 महीने से पीड़िता और उसका परिवार अपने रिश्तेदार के घर रह रहा है और आरोपित बेख़ौफ़ होकर घूम रहे हैं।

पीड़िता के चाचा का कहना था कि पुलिस बिलकुल सहयोग नहीं कर रही है। जब उन्होंने पीड़िता की मेडिकल जाँच के लिए निवेदन किया तब थानाध्यक्ष ने कहा, “क्या मैं तुम्हारा नौकर हूँ? क्या मैं इस लड़की का मिट्टी का पुतला बना कर थाने में लगवा दूँ।”

सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। आरोपितों ने डरा-धमका कर शादी के लिए साइन तक करा लिया है और लगातार धमकियाँ दे रहे हैं।

60 लाख से 15 लाख हो गए मंगोलियाई, 5 लाख की निर्मम हत्या: इनर मंगोलिया में चीन की कम्युनिस्ट सरकार का दमन

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा शिनजियांग में उइगरों का नरसंहार छिपा नहीं है। अब इसी तरह के तथ्य इनर मंगोलिया को लेकर सामने आए हैं। यहॉं भी बड़े पैमाने पर जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। ग्लोबल कैंपेन फॉर डेमोक्रेटिक चाइना: यूनाइटिंग अगेंस्ट चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी रिप्रेसिव रिजीम नामक वेबिनार [पीडीएफ] में साउर्दन मंगोलियन ह्यूमन राइट्स इन्फोर्मेशन सेंटर के डायरेक्टर एंगबेतु तोगोचोग (Enghebatu Togochog) ने बताया कि किस तरह सीमाई इलाकों में चीन ने लाखों लोगों का उत्पीड़न किया है। इस वेबिनार का आयोजन भारतीय थिंक टैंक लॉ ऐंड सोसायटी अलायंस की ओर से एक अक्टूबर को किया गया था।

दक्षिणी मंगोलिया, जिसे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी इनर मंगोलिया भी कहती है में मंगोलियाई लोगों की आबादी करीब 60 लाख थी। तोगोचोग के अनुसार चीनी शासन करीब 5 लाख मंगोलियाई लोगों की निर्मम हत्या कर चुका है। आज उनकी आबादी 60 लाख से घटकर 15 लाख रह गई है।

CCP की सांस्कृतिक दमननीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “चीन ने 1980 के दशक में सांस्कृतिक समावेश शुरू किया और लाखों दक्षिणी मंगोलियाई किसानों को यातनाएँ दी गई। इसके अलावा उन्हें अधिकारहीन कर दिया गया।” उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासियों को पिछले 2 दशकों से बड़े पैमाने पर खेती के लिए भूमि का उपयोग करने से प्रतिबंधित किया गया है। तोगोचोग ने बताया,”चीन ने यह पूरे मंगोलियाई आबादी पर लागू किया है। घास के मैदानों पर रहना अपराध माना जाता है। अपनी ज़मीन पर काम करने वाले चरवाहों को कैद कर लिया जाता है या सताया जाता है। साथ ही चीन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में लाखों खानाबदोश आबादी को भी मिटा दिया है।”

उन्होंने बताया कि कैसे चीन अपनी भाषाई नीति के द्वारा जातीय संस्कृति को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय भाषा मंदारिन को मंगोलियाई नागरिकों पर थोपा जा रहा है और कैसे अब यह स्कूल पाठ्यपुस्तकों में शिक्षा की भाषा बनने जा रही है।

उन्होंने कहा, “मंगोलियाई संस्कृति पर इस अंतिम प्रहार को लेकर पूरे दक्षिणी मंगोलियाई लोग एकजुट होकर इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं। किंडरगार्टन से लेकर मिडिल स्कूल के छात्र, संगीतकार से लेकर टैक्सी ड्राइवर, सरकारी अफसर से लेकर पार्टी के सदस्य तक, सभी चीनी अधिकारियों के सांस्कृतिक नरसंहार के नए प्रयासों के खिलाफ उठ चुके हैं। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ और लोगों का गायब हो जाना आम चलन बन गया है। पिछले महीने ही लगभग 4000-5000 दक्षिणी मंगोलियाई लोगों को हिरासत में लिया गया या उन्हें गायब कर दिया गया है।”

इतना ही नहीं एंगबेतु तोगोचोग ने चीनी कम्युनिस्ट शासन के हाथों मंगोलियों के उत्पीड़न के अन्य रूपों की ओर भी संकेत किया। उन्होंने बताया, “लोगों को नौकरी से निकाल देना, सामाजिक लाभ उठाने वालों को निलंबित करना, बैंक ऋण तक पहुँच से वंचित करना, संपत्तियों को जब्त करना, छात्रों को डिग्री से वंचित करना यह सब अप्रत्यक्ष यातना के कुछ उदाहरण हैं। ये यातनाएँ सीसीपी को स्थानीय आबादी पर नियंत्रण करने में सक्षम बनाता है।”

मंदारिन थोपने का हो रहा विरोध

जबरन अपनी भाषा थोपने का निर्णय इनर मंगोलिया में रहने वाले लोगों के खिलाफ था। इनर मंगोलिया के लोगों की पारंपरिक वर्णमाला है। वे रूस के प्रभाव में सिरिलिक लिपि का उपयोग करते हैं। ऐसे में मंदारिन थोपने के चीनी शासन के प्रयासों का विरोध हो रहा है।

भाषा को लेकर 3,00,000 छात्रों के साथ उनके माता-पिता द्वारा सत्तावादी कम्युनिस्ट पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए इसका विरोध किया गया है। जैसे, इस महीने में स्कूल खुलने पर केवल 40 मंगोलियाई छात्रों ने ही अगले सत्र के लिए खुद को रजिस्टर्ड किया, जबकि पहले दिन केवल 10 ही छात्र स्कूल पहुँचे। बता दें मंगोलियाई बच्चों के माता-पिता ने पहले ही घोषणा की थी कि वे शिक्षा की नई भाषा को स्वीकार करने के बजाय अपने बच्चें को घर में रखेंगे।

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स्वरा भास्कर और दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक कर दी हाथरस पीड़िता की पहचान, NCW भेजेगा नोटिस

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा है कि न सिर्फ भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय, बल्कि अभिनेत्री स्वरा भास्कर और कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह जैसे कइयों ने भी जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हाथरस की पीड़िता की पहचान जाहिर कर दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में बलात्कार सम्बन्धी बात अभी रिपोर्ट्स में स्पष्ट नहीं हैं और न ही कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि जब हाथरस मामले में बलात्कार पर चीजें स्पष्ट हो जाएँगी, तब NCW इस मामले में पीड़िता की पहचान जाहिर करने वाले सभी लोगों को नोटिस देगा। उन्होंने कहा कि जिन भी लोगों ने सोशल मीडिया में या फिर विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर प्रदेश के हाथरस की पीड़िता की तस्वीरों का इस्तेमाल किया है, उन सभी के डिटेल्स उनके पास हैं।

विरोध प्रदर्शन की वायरल तस्वीरों में स्वरा भास्कर भाषण देती हुई दिख रही हैं और उनके पीछे समर्थकगण हाथरस की पीड़िता का पोस्टर लहरा रहे हैं। इन तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वरा भास्कर ने लिखा है, “हमारी लड़ाई है, हम सबको साथ लड़ना होगा। आज चुप रहना मतलब इस दरिंदगी में शामिल होना।” उन्होंने जिस तस्वीर को कोट कर के ट्विटर पर ये बात लिखी, उसमें पीड़िता का चेहरा स्पष्ट दिख रहा है।

साथ ही स्वरा भास्कर ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का वीडियो भी शेयर किया, जिसमें कई लोग हाथरस की पीड़िता की तस्वीरों वाले पोस्टर-बैनर लहरा रहे हैं। अभिनेत्री ने दावा किया कि ये सभी चिंतित नागरिक हैं, जो न्याय के लिए खड़े हैं। कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने कंगना रनौत मामले में टिप्पणी पर NCW द्वारा संज्ञान लेने की खबर की चर्चा करते हुए रेखा शर्मा को घेरा, जिसके बाद उन्होंने जवाब दिया कि इस मामले में भी संज्ञान लिया गया है – वो ये सब कह के समाज को न बाँटें।

बता दें कि कई लिबरल वामपंथी इस बात से नाराज़ हैं कि अभिनेत्री कंगना रनौत के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ महिला आयोग ने संज्ञान क्यों लिया। साथ ही हाथरस मामले में महिला आयोग द्वारा सक्रियता दिखाए जाने के बावजूद ये अध्यक्ष रेखा शर्मा को घेर रहे हैं, जबकि खुद पीड़िता की पहचान जाहिर कर रहे। ऐसे ही कठुआ की मासूम पीड़िता की पहचान भी जाहिर कर दी गई थी।

दिग्विजय सिंह ने फैलाया फेक न्यूज़

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तो हाथरस के पीड़िता की जगह चंडीगढ़ की एक अन्य युवती की तस्वीर लगा दी, जिसकी दो वर्ष पहले ही बीमारी से मौत हो गई थी। इस तस्वीर के वायरल होने से उस युवती के परिजन भी दुःखी हैं। ये तस्वीर मदद की अपील के लिए तब डाली गई थी, जब पीड़िता अस्पताल में थी। दिग्विजय सिंह ने अस्पताल में हाथरस की पीड़िता की तस्वीर के साथ इसे भी शेयर कर दिया।

‘हाथरस दरिंदों के जो भी सिर काट कर लाएगा…’ – कॉन्ग्रेसी नेता निजाम मलिक का बयान, खुद हो गए गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना पर प्रतिक्रियाओं का दौर अभी तक जारी है। ताज़ा मामले में कॉन्ग्रेस नेता निजाम मलिक ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने हाथरस की घटना पर कहा है कि जो व्यक्ति आरोपितों का सिर कलम करेगा, उसे उनका समुदाय 1 करोड़ रुपए का इनाम देगा। इस बयान के चर्चा में आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज करके कॉन्ग्रेस नेता को गिरफ्तार कर लिया है।

निजाम मलिक कॉन्ग्रेस पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हैं। सचिन गुप्ता नाम के यूज़र द्वारा ट्विटर पर साझा किए गए इस वीडियो में निजाम मलिक का बयान साफ़ तौर पर सुना जा सकता है। बयान देते हुए निजाम मलिक ने कहा, “जिन दरिंदों ने बलात्कार किया है, मैं अपने समाज और खुद की तरफ से माँग करता हूँ कि उन्हें फाँसी की सज़ा होनी चाहिए। जो लोग उन अपराधियों का सिर काट कर लाएँगे उन्हें हमारा समाज 1 करोड़ रुपए का इनाम देगा।” 

बयान विवादित होने की वजह से बहुत जल्द सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। जिसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस तुरंत हरकत में आई और निजाम मलिक को मुंडाखेड़ा चौराहे से गिरफ्तार किया। बुलंदशहर पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करके इस गिरफ्तारी की पुष्टि की। बुलंदशहर पुलिस के ट्वीट में लिखा था, “उक्त संबंध में तत्काल थाना खुर्जानगर पर समुचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया है।”    

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दे चुके हैं। यह फैसला इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग के बाद आया था। पीड़िता के पिता ने सीबीआई जाँच की माँग की थी, जिसे यूपी के सीएम ने मान लिया है।

यूपी सीएम दफ्तर की ओर से ट्वीट कर सीबीआई जाँच की जानकारी दी गई थी। यूपी सीएम दफ्तर की ओर से ट्वीट किया गया, “मुख्यमंत्री श्री योगी जी ने सम्पूर्ण हाथरस प्रकरण की जाँच सीबीआई से कराए जाने के आदेश दिए हैं।” इससे पहले, उन्होंने अपराध की जाँच के लिए एक एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था।

कॉन्ग्रेसी मंत्री के लिए रेप भी बड़ी और छोटी, कहा- हाथरस में बड़ी घटना हुई, बलरामपुर में छोटी

क्या रेप भी छोटी या बड़ी होती है? यह सवाल हम इसलिए पूछ रहे क्योंकि छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री शिव डहरिया का ऐसा कहना है। डहरिया के अनुसार हाथरस में बड़ी घटना हुई और उनके राज्य के बलरामपुर में हुई गैंगरेप की घटना छोटी है।

उन्होंने कहा, “हाथरस में बड़ी घटना हुई, रमन सिंह ट्वीट क्यों नहीं कर रहे हैं? बलरामपुर में छोटी सी घटना घटी। छत्तीसगढ़ की आलोचना करने के अलावा उन्होंने कुछ नहीं किया।”

बता दें कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने बलरामपुर गैंगरेप को लेकर सरकार की आलोचना की थी और साथ ही सवाल किया था कि क्या राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी पीड़िता के लिए न्याय की माँग करेंगे।

इसके जवाब में डहरिया ने दुष्कर्म को छोटी घटना बताया है। उनका एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सामने आया है। इस दौरान उनसे एक पत्रकार ने बलरामपुर में नाबालिग से दुष्कर्म मामले को लेकर प्रश्न कर दिया। जवाब में वह कहते हैं, “हमारे यहाँ जो घटना हुई, वो हाथरस जैसी घटना नहीं है। हाथरस में इतनी बड़ी घटना हुई है, रमन सिंह ट्वीट क्यों नहीं कर रहे हैं। रमन सिंह की जुबान क्यों बंद है। उनको ये जवाब देना चाहिए कि हाथरस में जो घटना हुई, क्या वो अच्छा हुआ है। उसके लिए वो ट्वीट नहीं कर रहे हैं। बलरामपुर में एक छोटी घटना हो गई तो वह ट्वीट कर रहे हैं। वो सिर्फ छत्तीसगढ़ सरकार की आलोचना के सिवा कोई दूसरा काम नहीं कर रहे हैं।”

रमन सिंह का ट्वीट

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने 2 अक्टूबर को घटना के बारे में ट्वीट करते हुए लिखा था, “छग के बलरामपुर में नाबालिग के साथ हैवानों ने दरिंदगी की, लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार न्याय दिलाने की जगह मामले को दबाने में लग गई। राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी में यदि संवेदनाएँ हो तो इस बेटी को भी न्याय दिलाने छग आएँ। भूपेश बघेल से जवाब माँगे। प्रदेश की बेटी को कब मिलेगा न्याय?”

डहरिया के बयान के बाद रमन सिंह ने एक और ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस की विकृत मानसिकता देखिए! इन्हें छत्तीसगढ़ की बेटियों के साथ दरिंदगी की घटनाएँ छोटी लगती है। राहुल गाँधी जी बताएँ क्या छत्तीसगढ़ में घट रही दुष्कर्म की घटनाएँ आपके लिए भी छोटी हैं? ऐसी घटिया सोच वाले मंत्री को आप आज हटाएँगे या कल? आखिर कब होगा न्याय?”

मामले में कॉन्ग्रेस की किरकिरी के बाद शिवकुमार डहरिया ने सफाई देते हुए कहा, “मैंने दुष्कर्म के मामले को छोटा मामला नहीं बताया है। किसी भी महिला के साथ किया गया दुष्कर्म हमेशा बड़ा हादसा होता है। मैंने अपना बयान एक क्रम में हो रही घटनाओं को लेकर दिया है ना कि दुष्कर्म को लेकर।”

गौरतलब है कि 27 सितंबर को छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में एक 14 वर्षीय लड़की को नशीला पदार्थ पिलाया गया, उसका बलात्कार किया गया, गला घोंटा गया और फिर मरने के लिए उसे जंगल में छोड़ दिया गया। बलात्कार के बारे में खबर 2 अक्टूबर को सामने आई। 

नाबालिग से बलात्कार के आरोप में पुलिस ने 22 वर्षीय जयप्रकाश अगरिया को गिरफ्तार किया। बयान में, लड़की ने कहा कि वह एक पुरुष मित्र के साथ जंगल में मिट्टी इकट्ठा करने गई थी। अगरिया ने उसे वहीं पकड़ लिया और जबरन एक दवा खिला दी, जिससे वह आंशिक रूप से बेहोश हो गई। घनास्थल पर 19 वर्षीय घनश्याम गोंड भी मौजूद था, जिसने इस कृत्य में उसका साथ दिया। पीड़िता का पुरुष मित्र घटनास्थल से भाग गया था।

‘हिन्दू सुप्रीमेसिस्ट सरकार से डरकर रहते हैं दलित और मुस्लिम’: CM योगी की बर्खास्तगी के लिए कई NGO का UNHRC को पत्र

हाथरस मामले के नाम पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। अब अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर कई NGO ने मिल कर ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (UNHRC) को पत्र लिख कर हाथरस मामले की अंतरराष्ट्रीय जाँच और सीएम योगी को बर्खास्त करने की माँग की है। इनमें से कई ऐसे हैं जो खुद को फेमिनिस्ट और दलित NGO बताते हैं। इस पत्र पर ब्रिटेन के कुछ सांसदों के अलावा ‘आंबेडकर इंटरनेशनल मिशन’ के कुछ समूह शामिल हैं।

ब्रिटेन के सांसदों जॉन मैक्डोनल, किम जॉनसन, बेल रिबेइरो-एडी और पॉला बेकर शामिल हैं। इन सभी ने मिल कर UNHRC के प्रमुख मिशेल बाचेलेत से कहा है कि वे हाथरस मामले में एक अन्तरराष्ट्रीय जाँच बिठाएँ और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद ‘महिलाओं, खासकर दलितों पर बढ़ रहे अत्याचार’ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहें कि वो सीएम योगी को तुरंत बर्खास्त करें।

इन संस्थाओं ने UNHRC को लिखे पत्र में कहा है कि हाथरस मामले को एक अलग अपराध की तरह नहीं देखना चाहिए, बाकि इसे ‘दलितों और महिलाओं पर हो रहे क्रमबद्ध हमलों’ के रूप में देखा जाना चाहिए। इसमें भारतीय मीडिया के ही गिरोह विशेष के नैरेटिव को हवा देते हुए दावा किया गया है कि यूपी पुलिस ने जबरदस्ती पीड़िता के शव को रात में ही जला दिया, जबकि परिवार इसके विरुद्ध था।

साथ ही लिखा गया है कि हाथरस मामले के 24 घंटे के भीतर ही राज्य में बलात्कार के 3 बड़े मामले आए। हालाँकि, इसमें बलरामपुर वाली घटना की चर्चा नहीं है, जहाँ शाहिद और साहिल नामक दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। भदोही में एक 14 साल की लड़की के बलात्कार के बाद हत्या और आजमगढ़ में 8 साल के मासूम के बलात्कार की घटनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बर्खास्त करने की माँग की गई है।

इस पत्र को लिखने की पहल अमृत विल्सन ने की, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हैं और लंदन में रहते हैं। वे ‘साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप (SASG)’ से जुड़े हुए हैं। इस काम में उनका साथ दिया है ‘कास्ट वाच यूके’ ने। अमृत विल्सन खुद को ब्रिटेन और दक्षिण एशिया में जाति व लैंगिक भेदभाव का विशेषज्ञ मानते हैं और ‘एक्टिविस्ट’ भी कहते हैं। इस वर्ष फ़रवरी में वो कोलकाता भी आए थे। SASC लगातार ट्विटर पर इसे लेकर प्रोपेगेंडा फैलाने में लगा है।

उन्होंने TOI से कहा कि हाथरस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत शर्मसार हुआ है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने जिस तरह से ‘हाथरस में इस भयावहता को अंजाम दिया है’, उससे दुनिया भर के दलित और महिला एक्टिविस्ट्स आक्रोशित हैं। उन्होंने शनिवार (अक्टूबर 3, 2020) को कहा कि सीएम योगी को तो सत्ता से बेदखल होना ही चाहिए लेकिन अंततः मोदी सरकार ही है, जिसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

जब पूछा गया कि रेप तो अन्य राज्यों में भी हो रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि 2016 के बाद से सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएँ उत्तर प्रदेश में हुई हैं, जो 16% हैं। उन्होंने योगी सरकार को ‘हिन्दू सुप्रीमेसिस्ट गवर्नमेंट’ करार देते हुए कहा कि उनके द्वारा फैलाई गई हिंसा के कारण मुस्लिम और दलित डर कर रहते हैं। लंदन की आर्किटेक्ट सोफ़िया करीम ने भी इस पर हस्ताक्षर किया है, जो भारत की सरकार को फासिस्ट कहती हैं।

हाथरस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था, “दोषियों को सजा देना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है।” सीएम ने कहा, “लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस किसी भी हद तक जा सकती है और सरकार सजा देने के कानूनी तरीकों में भी बदलाव कर सकती है।” उन्होंने कहा कि एक तरफ, हमें दोषियों के साथ सख्त रहना पड़ता है तो दूसरी तरफ, हमें पीड़ितों के साथ नरमी बरतनी चाहिए।

‘दलित लड़कियों का रेप करना सवर्ण का अधिकार’: पाकिस्तान में छपा मीडिया गिरोह ThePrint के पत्रकार का लेख

भारत के मीडिया गिरोह विशेष को अब भारत में प्रोपेगेंडा फैलाने से मन भर गया है। तभी तो अब उनके लेख पाकिस्तानी मीडिया पोर्टलों में प्रकाशित हो रहे हैं और इसके द्वारा देश को भी बदनाम किया जा रहा है। पाकिस्तानी अख़बार ‘Dawn’ की वेबसाइट पर लिखे एक लेख में शेखर गुप्ता की ‘दि प्रिंट’ के शिवम विज ने ये नैरेटिव बनाने की कोशिश की है कि भारत के दलितों को उनकी जाति की वजह से यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है।

इस लेख में शेखर गुप्ता के ‘दि प्रिंट’ में कार्यरत शिवम विज ने लिखा है कि कैसे हाथरस मामले को ‘एक दलित लड़की का बलात्कार’ बताने पर जो लोग ये कह रहे हैं कि इसमें जाति घुसाने की क्या ज़रूरत है या फिर जो ये पूछ रहे हैं कि क्या नॉन-दलितों का बलात्कार और उनकी हत्याएँ नहीं होती – वो सही नहीं हैं। उन्होंने नैरेटिव बनाया है कि इस मामले से जाति का बहुत कुछ लेना-देना है और दलितों के साथ यौन हिंसा के हर मामले में जाति का लेना-देना है।

इस लेख में आरोपितों को बार-बार ‘ठाकुर’ कह कर सम्बोधित किया गया है और निर्भया गैंगरेप की तुलना कर के बताया गया है कि कैसे ये मामला अलग है क्योंकि ‘आरोपित ठाकुर लोग’ और पीड़ित परिवार के पड़ोसी ही थे। लिखा गया है कि निर्भया मामले में कुछ शराब पिए हुए लोग थे, जो ‘Fun’ की खोज में थे। इस लेख में पीड़िता के भाई के हवाले से न्यूज़लॉन्ड्री में छपे बयान का जिक्र किया गया है।

पाकिस्तानी मीडिया पोर्टल में ‘दा प्रिंट’ के शिवम विज का लेख

इसमें दावा किया गया है कि जिस भी गाँव में अलग-अलग जाति के लोग हैं, वहाँ ‘उच्च जाति के लोग’ दलितों को परेशान करते हैं और ‘ठाकुर लोग’ ये तक बर्दाश्त नहीं कर पाते कि उनके खेतों में किसी दलित की भैंस चरने आ जाए। साथ ही पूछा गया है कि अगर आरोपित मुस्लिम होते तो उसके बाद आजकल क्या होता है, ये सबको पता है। बड़ी चालाकी से इस लेख में बलरामपुर वाली घटना का जिक्र ही नहीं है। इसमें लिखा है कि सवर्ण ये सोचते हैं कि उनका अधिकार है कि वो दलित लड़कियों का बलात्कार करें।

‘Dawn’ के इस लेख में भारत को बदनाम करने की कोशिश करते हुए शेखर गुप्ता के ‘दि प्रिंट’ के शिवम विज ने एक प्रोफेसर के हवाले से लिखा है कि क्या किसी ने कभी किसी दलित को ब्राह्मण लड़की का बलात्कार करते हुए सुना है? दावा किया गया है कि संदीप शराब पी कर अक्सर महिलाओं के साथ छेड़खानी किया करता था लेकिन उसके खिलाफ इसीलिए किसी ने शिकायत दायर नहीं की थी, क्योंकि वो ‘ठाकुर’ है।

इससे पहले ‘द वायर’ की पत्रकार रोहिणी सिंह ने अपने ट्वीट में दावा करते हुए कहा था कि बलात्कार सिर्फ सेक्स से संबंधित नहीं है, यह महिलाओं को उनका स्थान बताने के लिए भी किया जाता है। रोहिणी के अनुसार, ‘ऊँची जाति वाले लोग नीची जाति की महिलाओं के साथ’ दुष्कर्म इसलिए करते हैं, जिससे वह निम्न समुदाय के लोगों को संदेश दे सकें। रोहिणी ने कहा था कि वह इस बात को नहीं समझ सकती, जबकि रोहिणी खुद एक ‘ऊँची जाति’ से आती हैं। वो भी बलरामपुर पर चुप हैं।

‘हमें बंदूक-पिस्तौल खरीदना है, 50% सब्सिडी दे सरकार’ – 20 लाख बहुजनों के लिए चंद्रशेखर की ‘नौटंकी’

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना को लेकर देश के लोगों में आक्रोश है। अनेक विपक्षी नेता भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। दिल्ली के जंतर मंतर पर भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर भी प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार (3 अक्टूबर 2020) को उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर एक विवादित बयान दिया। चंद्रशेखर ने जीने के अधिकार (राईट टू लाइफ) की दलील देते हुए कहा दलित समुदाय के लोगों को बंदूक मिलनी चाहिए। 

चंद्रशेखर ने ट्वीट करते हुए कहा कि संविधान में सभी को जीने का अधिकार मिला है। इस अधिकार में खुद की सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है, इस बात को मद्देनज़र रखते हुए सरकार दलित समुदाय के लोगों को 50 फ़ीसदी सब्सिडी पर बंदूकें दे। ट्वीट करते हुए चंद्रशेखर ने लिखा, 

“संविधान में हर नागरिक को जीने का अधिकार दिया है, जिसमें आत्म रक्षा का अधिकार शामिल है। हमारी माँग है कि देश में 20 लाख बहुजनों को हथियारों के लाइसेंस तत्काल दिया जाए। हमें बंदूक़ और पिस्तौल ख़रीदने के लिए 50% सब्सिडी सरकार दे। हम अपनी रक्षा खुद कर लेंगे।” 

इस मामले में सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि बंदूक की माँग एक ऐसे नेता ने की है, जो खुद भीमराव अंबेडकर की विचारधारा को मानने वालों में से एक है। जो अंबेडकर हमेशा संविधान के आधार पर चलने की बात करते थे, उनकी विचारधारा को मानने वालों लोगों को अब बंदूक की ज़रूरत पड़ रही है।      

बहस यहीं पर नहीं रुकी, इसके बाद एक दलित कार्यकर्ता ने इस बात के समर्थन में कई नियमों का हवाला तक दे दिया। दलित कार्यकर्ता सूरज येंगडे ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1995 को आधार बनाते हुए अपनी बात कही। उनके मुताबिक़ यह नियम एक व्यक्ति को सुरक्षा के लिए हथियार का लाइसेंस प्रदान करने का अधिकार देता है। 

हालाँकि कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर कहा, “मेरा मानना है कि हमें गाँधीवादी दर्शन से ही आगे बढ़ना चाहिए। अहिंसा इस लड़ाई का इकलौता सार्थक विकल्प है, इसके ज़रिए ही अन्याय के विरुद्ध लड़ाई लड़ी जा सकती है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुन कर आई लोकतांत्रिक सरकार आम नागरिकों की संरक्षा और सुरक्षा के लिए पूरी तत्परता और प्रभावी रूप से प्रतिबद्ध है। इस प्रकार के बयान और माँगों का उद्देश्य केवल नौटंकी है, इसका कोई अर्थ नहीं है।”  

हिंदुओं के रेप में जाति का समीकरण परोसता मीडिया, TRP के लिए 13 साल पहले ही दिख गया था मीडिया का गिद्ध रूप

हाथरस मामले के बीच ये याद करने की ज़रूरत है कि बारह वर्ष पहले, साल का करीब-करीब यही वक्त था (अक्टूबर 2008), जब उमा खुराना ने एक स्टिंग ऑपरेशन को लेकर अपना मानहानि का मुकदमा वापस लिया। उनका कहना था कि टीवी न्यूज़ चैनल के साथ, अदालत के बाहर ही संतोषजनक तरीके से मामला सुलझा लिया गया है।

उमा खुराना ने नवम्बर 2007 में चैनल के रिपोर्टर और सीईओ पर झूठी खबर चला कर उनकी इज्जत उछालने का मुकदमा करवाया था। क्या मामला सिर्फ मानहानि का था? चाहे कितनी भी तमीज से कह लिया जाए, ये सिर्फ मानहानि का मामला नहीं कहा जा सकता।

उमा खुराना को भीड़ ने पकड़कर खूब पीटा था, उनके कपड़े फाड़ दिए गए। सरेआम दिल्ली में जब ये घटना हुई थी तो जनता की सहानुभूति भी मीडिया लिंचिंग की शिकार हुई इस महिला के साथ नहीं थी। उस वक्त उमा खुराना केन्द्रीय दिल्ली के सर्वोदय कन्या विद्यालय में गणित की शिक्षिका थीं।

दिल्ली में एक समाचार चैनल “जनमत चैनल” को नाम बदलकर “लाइव इंडिया” के नाम से दोबारा लॉन्च किया गया था। मार्कंड अधिकारी के ब्रोडकास्ट इनिशिएटिव्स लिमिटेड के इस चैनल पर पहले चर्चाओं और विचारों वाले कार्यक्रम आते थे, लेकिन अब इस चैनल का ध्यान 24X7 न्यूज़ पर था। अगस्त 2007 में “लाइव इंडिया” के कार्यक्रमों में बदलाव आना शुरू भी हो चुका था।

ऐसे कामों के लिए नई भर्तियाँ भी हो रही थीं और रजत शर्मा के न्यूज़ चैनल “इंडिया टीवी” से निकलकर सुधीर चौधरी ने मार्च 2007 में “लाइव इंडिया” में सीईओ के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। “लाइव इंडिया” ने अपना टैग लाइन बदलकर “खबर हमारी फैसला आपका” रख लिया था। उसके टैग लाइन की ही तरह लोगों ने फैसला भी लिया।

अगस्त 2007 में ही आईबीएन7 से लाइव इंडिया में आए पत्रकार प्रकाश सिंह ने एक दिन एक स्टिंग ऑपरेशन दिखा दिया। इसमें उमा खुराना पर शिक्षिका होने की आड़ में वेश्यावृति करवाने के आरोप थे। स्टिंग को बिना किसी जाँच के सुधीर चौधरी ने अपने चैनल पर चलवा दिया। इसका नतीजा ये हुआ कि गुस्साई हुई भीड़ ने उमा खुराना के कपड़े फाड़ डाले और उनके साथ जमकर मार पीट की।

सच्चाई सुधीर चौधरी, प्रकाश सिंह, और लाइव इंडिया चैनल की दिखाई खबर में कितनी थी, इसकी जाँच जब तक होती, उससे पहले ही काफी कुछ हो चुका था। मीडिया लिंचिंग में सरे बाजार कपड़े फाड़े जाने और पिटाई के अलावा भी उमा खुराना को काफी कुछ भुगतना पड़ा था। दिल्ली के शिक्षा विभाग ने उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया था।

जब मामले की जाँच शुरू हुई तो पता चला कि प्रकाश सिंह का बनाया हुआ स्टिंग का वीडियो फर्जी था। जिस लड़की को दिखाया गया था, उसे पत्रकार बनना था, और यही लालच देकर प्रकाश सिंह ने कैमरे पर उससे उमा खुराना पर झूठा, वैश्यावृति करवाने का आरोप लगवाया था

प्रकाश सिंह को गिरफ्तार किया गया और उस पर मुकदमा भी दाखिल हुआ था। सुधीर चौधरी ने कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है। सारी गलती उनके फर्जी पत्रकार प्रकाश सिंह की थी और उनसे पूरी जाँच ना कर पाने भर की मानवीय भूल हुई है। मीडिया लिंचिंग करवाने वाले सुधीर चौधरी अब एक दूसरे बड़े चैनल में अक्सर नजर आ जाते हैं। उमा खुराना का क्या हुआ मालूम नहीं।

प्रकाश सिंह जैसे पत्रकार और फर्जी स्टिंग चलाने की आदत सुधरी हो, ऐसा कहा नहीं जा सकता। ब्रेकिंग न्यूज़ की टीआरपी लेने के चक्कर में ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं और किसी ना किसी बेगुनाह को मीडिया लिंचिंग का शिकार होना पड़ता है।

हाथरस मामले में भी ऐसा ही हुआ लगता है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ये आम बात है कि प्रेम प्रसंगों में जब युगल पकड़े जाते हैं या उनके भाग जाने पर भी मुकदमा होता है तो युवक पर अपहरण और बलात्कार के अभियोग लगाए जाते हैं। गैर जमानती धाराओं से छूटकर आने में युवक को जितना समय लगता है, उतने में अक्सर लड़की की शादी कहीं और हो चुकी होती है।

बलात्कार के मामलों में “कन्विक्शन रेट” के 30% से भी कम होने की एक वजह ये भी है कि इनमें से कई मामले फर्जी होते हैं। जुलाई 2014 में वीमेन कमीशन ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें बताया गया था कि अप्रैल 2013-जुलाई 2014 के बीच दर्ज हुए बलात्कार के 53.2% मामले झूठे थे

ऐसे मामलों में मीडिया लिंचिंग भी कोई नई बात नहीं है। अख़बारों में ऐसी ख़बरों के शीर्षक अक्सर “नाबालिग से दरिंदगी” जैसे होते हैं। इसके अलावा लम्बे समय तक फिल्मों के जरिए ठाकुरों को आततायी, ब्राह्मणों को धूर्त या गाँव के लाला को उधार के बदले शोषण करने वाला दर्शाने का भी समाज पर असर पड़ा होगा। इस वजह से जब बलात्कार जैसे मामलों को जातिय कोण के साथ “परोसा” जाता है तो समाज पर उसका असर और त्वरित प्रतिक्रिया स्वाभाविक ही है।

गौरतलब ये भी है कि जातियों का कोण समाचारों में तभी नजर आता है, जब मामला हिन्दुओं का हो। दूसरे समुदायों के बलात्कारियों की खबर अगर चलती भी है तो मजहब या जाति जैसे मामले नजर नहीं आते।

जो भी हो, हाथरस मामले को सीबीआई को सौंपे जाने की अनुशंसा हो गई है। इस एक मामले की आड़ में यूपी के ही सर काट लेने या बुलंदशहर जैसे दूसरे मामले दब भी गए हैं। पंद्रह दिनों तक दिल्ली में इलाज करवा रही लड़की को दिल्ली के ही नेता, मौत के बाद हाथरस में देखने क्यों पहुँचे, ये सवाल पूछना चाहिए या नहीं, ये हमें मालूम नहीं।

जुबेर ने बिहार की 19 साल की लड़की का दिल्ली में कई बार किया रेप: पहली बार ही बना लिया था वीडियो, देता था धमकी

राजधानी दिल्ली में एक युवती के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। दिल्ली के द्वारका सेक्टर 7 में एक युवती को नशीला पदार्थ देकर उसके साथ बलात्कार किया गया। वारदात के आरोपित जुबेर ने युवती को जान से मारने की धमकी भी दी और उसके घर पर छोड़ कर चला गया। बलात्कार के दौरान जुबेर ने पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाया था और इसके ज़रिए ही पीड़िता को धमकी देता था। इसके बाद युवती ने पुलिस से पूरी घटना की शिकायत की जिसके आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।   

लाइव हिन्दुस्तान में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधिकारी ने इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 19 वर्षीय पीड़िता बिहार के पूर्णिया की रहने वाली है, दिल्ली के पालम क्षेत्र में किराए के घर में रहती है। द्वारका के एयरफ़ोर्स सोसाइटी में बेबी केयर टेकर का काम करती है। पुलिस द्वारका साउथ थाना में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा था कि लगभग 1 साल 3 महीने पहले उसकी जुबेर से पहचान हुई थी। इसके बाद दोनों संपर्क में आए और जुबेर ने उसे नौकरी दिलाने की बात कही। इस संबंध में दोनों की 31 जनवरी को मुलाक़ात हुई, इस दौरान जुबेर ने उसे किसी अन्य व्यक्ति से मिलाने की बात भी कही। 

जुबेर पीड़िता को द्वारका सेक्टर 9 क्षेत्र में स्थित बीडी पैलेस नाम के होटल में लेकर गया। इसके बाद युवती को नशीला पदार्थ पिला कर उसके साथ बलात्कार किया। इस घटना के दौरान जुबेर ने युवती की कई अश्लील तस्वीरें ली और वीडियो भी बना लिए। बलात्कार की वारदात को अंजाम देने के बाद जुबेर ने पीड़िता को उसके घर छोड़ा और मौके से फरार हो गया। पीड़िता ने अपनी शिकायत में यहाँ तक बताया कि उसने जुबेर से संपर्क ख़त्म करने का हर संभव प्रयास किया लेकिन उसने पीछा नहीं छोड़ा। इतना कुछ होने के बाद आरोपित जुबेर ने पीड़िता का अपहरण करके दूसरी बार उसके साथ बलात्कार किया था। 

जुबेर के पास पीड़िता के कई वीडियो और तस्वीरें थीं, जिसे वायरल करने की धमकी देकर आरोपित ने पीड़िता के साथ कई बार दुष्कर्म किया। कोई विकल्प नहीं नज़र आने की सूरत में पीड़िता ने सबसे पहले इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने परिवार वालों को दी। इसके बाद उसने पुलिस के पास जाकर इस घटना के संबंध में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जुबेर के विरुद्ध धारा 376/506 के तहत मामला दर्ज करके 2 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर लिया।