हाल ही में पारित किए गए कृषि क़ानून को लेकर देश भर में अलग अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली। लगभग सभी राज्यों के किसानों ने इस क़ानून को लेकर अपना नज़रिया जाहिर किया। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कृषि विधेयक के समर्थन में रैली निकाली। इस दौरान उन पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने धावा बोल दिया। उनके द्वारा किए गए हमले में भाजपा के कई कार्यकर्ता बुरी तरह घायल भी हो गए, घटना के कई वीडियो ट्विटर पर साझा किए गए हैं।
पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले स्थित नोडाखली गाँव में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कृषि क़ानून के समर्थन में शनिवार (3 अक्टूबर 2020) को रैली निकाली थी। अचानक ही तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया। घटना के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि उनके हाथ में पत्थर और डंडे थे यानी वह इस घटना को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी के साथ आए थे। अभी तक हमले की इस घटना के मामले में कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
#WATCH West Bengal: BJP workers, who were carrying out a march in support of Farm Laws yesterday in Nodakhali village of South 24 Parganas district, were attacked allegedly by TMC workers. Seven people arrested. (03.10.2020) pic.twitter.com/rpk3qsSyK8
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भाजपा पूरे प्रदेश में कृषि आंदोलन के समर्थन में रैलियाँ निकाल रही है। जिससे किसानों को इस क़ानून से होने वाले फ़ायदों के बारे में सही जानकारी दी जा सके। इस अभियान की अगुवाई भाजपा पश्चिम बंगाल अध्यक्ष दिलीप घोष कर रहे हैं। जिस समय भाजपा कार्यकर्ताओं 24 परगना जिले में हमला हुआ, उस ठीक उस वक्त दिलीप घोष पूर्वी मिदनापुर के हल्दिया में रैली निकाल रहे थे।
BJP workers and supporters attacked by TMC goons while taking part in a rally at Budge Budge in South 24 Parganas . Bombs and bullet shots were fired, karyakartas were beaten up, shops looted and mahila karyakartas were molested. Where is democracy? pic.twitter.com/CFRu1yjgAD
भाजपा कार्यकर्ता सत्यपिर्ताला की तरफ मार्च करते हुए आगे बढ़े तभी उन पर यह हमला हुआ। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन पर पत्थर और ईटों से हमला किया गया। कई जगहों पर छोटे बम धमाके तक किए गए, इस पूरे घटनाक्रम में कई कार्यकर्ता बुरी तरह घायल भी हो चुके हैं। हालाँकि कुछ ही समय बाद मौके पर पुलिस आई और हालात पर काबू किया गया। पुलिस इस घटनाक्रम में अभी तक कुल 7 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
‘भीम आर्मी’ के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ के एक समर्थक समूह ने बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर पर जम कर निशाना साधा है। समूह ने उस तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए ये बातें लिखी, जिसमें स्वरा भास्कर हाथ में बाबासाहब आंबेडकर की तस्वीर लिए ‘रावण’ के साथ एक मंच पर दिख रही हैं। ‘रेवोलुशनरी मीम्स फॉर बहुजन टीन्स’ (RMBT) नामक फेसबुक पेज ने लिखा कि जेएनयू में सोशियोलॉजी की छात्र रहीं स्वरा दलित-बहुजन स्पेस के लायक नहीं हैं, वो पैरासाइट हैं।
उक्त समूह के फेसबुक पेज पर 32,000 लाइक्स हैं और वो इस बात से आक्रोशित हैं कि हाथरस मामले में स्वरा भास्कर भी चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ के साथ ‘लाइलाइट लूट रही’ हैं। साथ ही अभिनेत्री की माँ, जो सेंशर बोर्ड की सदस्य रह चुकी हैं – उन पर भी कई आरोप लगाए। उनके माता-पिता और उनके राज्यों को भी नहीं बक्शा। बता दें कि हाथरस मामले में दलितों का मुद्दा बना कर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
इसके लिए उसने कारण गिनाया कि स्वरा भास्कर ने कभी पिअर बोर्दियू, अंटोनिओ ग्रामस्की, जेन इलियट, पेग्गी मैलन्तोष या मालकम एक्स को नहीं पढ़ा होगा कि वो दलित-बहुजन स्पेस में कूदने के लिए पहला मौका तलाशें। साथ ही समूह ने सलाह दी कि ‘आधी ब्राह्मण, आधी कायस्थ’ स्वरा भास्कर को सबसे पहले अपने समुदायों में सुधार अभियान चलाना चाहिए। लिखा कि उनके पेरेंट्स जिन राज्यों से आते हैं, वो वहाँ सुधार अभियान चलाएँ – दलित-बहुजन विरोध प्रदर्शन में लाइमलाइट ढूँढ़ने से पहले।
साथ ही ‘रावण’ समर्थक RMBT ने आरोप लगाया कि स्वरा भास्कर के भाई ने एक जोशी के साथ शादी की है और अभिनेत्री खुद एक शर्मा के साथ रिलेशनशिप में हैं। साथ ही पूछा कि आखिर कैसे ये ‘ब्राह्मण सवर्ण’ समूह के लोग अपने ही ‘ब्राह्मण सवर्ण’ समूह के ही लोगों के साथ प्यार में पड़ते हैं। RMBT ने लिखा कि ये लोग बहुजन आंदोलन को हाईजैक करने से पहले अपने समुदायों के ‘पक्षपाती’ रवैये पर कब बोलेंगे?
RMBT ने आरोप लगाया कि स्वरा भास्कर के माता-पिता आंध्र प्रदेश और बिहार से आते हैं और इन्हीं दोनों राज्यों में ‘ऑनर किलिंग’ सबसे ज्यादा होती है। उसने लिखा कि स्वरा भास्कर के ‘एक्टिविज्म’ के लिए यही दोनों राज्य सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं क्योंकि वहाँ ‘छोटी-छोटी बातों पर सवर्ण समाज के लोग बहुजन युवाओं की जान ले लेते हैं’। स्वरा भास्कर की माँ और जेएनयू में प्रोफेसर इरा भास्कर पर भी ‘रावण’ समर्थक समूह ने बहुजन छात्रों के साथ भेदभाव करने व उन्हें फेल कर देने का आरोप लगाया।
उसने पूछा कि क्या स्वरा भास्कर ने कभी भी इन मुद्दों पर अपनी माँ को घेरा या अपनी प्रोफेसर माँ से सारे सम्बन्ध तोड़े? साथ ही RMBT ने आरोप लगाया कि उक्त तस्वीर में स्वरा भास्कर को चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ के साथ मंच पर कोई जगह मुहैया नहीं कराई गई थी, वो बिन-बुलाई ही वहाँ कूद गईं। बता दें कि अभिनेत्री के पिता उदय भास्कर पूर्व नौसेना अधिकारी हैं, जो 3 बड़े थिंक टैंकों के अध्यक्ष रह चुके हैं।
हाल ही में ‘रसभरी’ वेब सीरिज की अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने नसीरुद्दीन शाह से सहमति व्यक्त करते हुए कहा था, “मैं बिल्कुल नसीर सर से सहमत हूँ। वास्तव में मैं यह कई दिनों से कह रही हूँ। आप इसे मेरे सोशल मीडिया पर देख सकते हैं, यह देखने के लिए कि यह कैसे सोशल मीडिया और कई मीडिया घरानों ने अपनी कॉन्सपिरेसी थ्योरी को शुरू किया है और जनता को झूठ का शिकार बना रहे हैं।”
पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत मामले में मीडिया में एम्स के डॉक्टरों के हवाले से चल रही खबर का खंडन करते हुए बड़ा खुलासा करने की बात कही है। चैनल ने कहा है कि क्या एम्स के डॉक्टरों के हवाले से ‘अनाधिकारिक लीक’ ही वो ‘सच’ है, जिसे मीडिया जम कर प्रचारित कर रही है। चैनल ने कहा है कि ऐसा नहीं है, बल्कि ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ सुशांत सिंह राजपूत के बारे में ‘धमाकेदार खुलासा’ करने वाला है, जिससे इस मामले में चल रही ‘आत्महत्या थ्योरी’ वाला नैरेटिव पलट जाएगा।
रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और लोकप्रिय पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने बताया कि वो सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को सुबह 10 बजे सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ‘फाइनल खुलासा’ करेंगे, जो एम्स के डॉक्टरों के लीक हुए अनाधिकारिक बयान पर जश्न मना रहे लोगों के लिए ‘वेक अप कॉल’ की तरह होगा। साथ ही उन्होंने मीडिया में चल रही इन ख़बरों को नकार दिया।
चैनल ने कहा है कि इस मामले में कई मीडिया संस्थानों को ‘सेलेक्टिवली’ बातें बताई गईं, उसके आधार पर उन्होंने ये फैलाना शुरू कर दिया कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या नहीं की गई, उन्होंने आत्महत्या की है। सितम्बर 28 को एम्स के डॉक्टरों की टीम ने मुंबई पुलिस की पोस्टमॉर्टम व ऑटोस्पी रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद फोटोग्राफिक सबूतों का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट सीबीआई को सबमिट कर दी है।
अब सीबीआई इस मामले में जाँच कर रही है कि ये मामला हत्या का है या आत्महत्या का, लेकिन इससे पहले ही मीडिया में कई तरह की खबरें चलनी शुरू हो गई हैं और लोग उसे आधार बना कर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। इधर ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के चैनलों का मानना है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत से 1 दिन पहले कई गवाहों ने उनके घर पर उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती को देखा था।
एनडीटीवी सहित कई मीडिया चैनलों और खबरिया पोर्टलों ने एम्स के जाँच पैनल की अगुवाई कर रहे डॉक्टर सुधीर गुप्ता के हवाले से खबर प्रकाशित की थी कि सुशांत मामले की गुत्थी सुलझ गई है और उनकी रिपोर्ट में आया है कि ये हत्या नहीं, आत्महत्या था। अर्नब गोस्वामी ने इन ख़बरों को ‘प्लांटेड स्टोरीज’ करार दिया है। उन्होंने पूछा कि ये चीजें ऑन रिकॉर्ड क्यों नहीं बोली जा रही? उनके चैनलों ने इस खुलासे को लेकर काउंटडाउन भी चला रखा है।
अर्नब गोस्वामी ने कहा कि उन्हें सैकड़ों लोगों के फोन कॉल्स आ रहे हैं और वो पूछ रहे हैं कि ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ और ‘रिपब्लिक भारत’ ने जो न्याय की लड़ाई 3 महीने से सुशांत के लिए चलाई है, तो क्या ये व्यर्थ होगा? उन्होंने कहा कि लोग एम्स के डॉक्टर सुधीर गुप्ता के बयान वाली खबरों के आधार पर लोग ऐसा पूछ रहे हैं। अर्नब गोस्वामी ने कहा कि वो इस खबर से विचलित हो गए थे।
इससे पहले मीडिया की ख़बरों में कहा गया था कि इंसान की मृत्यु का समय भी एक अहम सबूत माना जाता है, लेकिन सुशांत सिंह का मामले में इसका कोई उल्लेख ही नहीं है। 7 पन्नों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि सुशांत सिंह के शरीर पर बाहरी चोट के कोई निशान नहीं थे। इसके अलावा सुशांत के गले के पिछले हिस्से में भी कोई निशान नहीं मिले थे। बताया गया था कि सुशांत सिंह के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक बार फिर से विपक्षी नेताओं द्वारा जहरीली बयानबाजी शुरू हो गई है। ताज़ा घटना मध्य प्रदेश के सिवनी की है, जहाँ ‘गोंडवाना गणतंत्र पार्टी’ के पूर्व विधायक रामगुलाम उइके ने पीएम नरेंद्र मोदी को बम से उड़ाने की धमकी दी है। धनौरा जनपद के कुड़ारी गाँव में आदिवासी समुदाय की जनसभा को सम्बोधित करते हुए रामगुलाम उइके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ये टिप्पणी की।
आदिवासी नेता ने कहा कि इस देश में पूर्व प्रधाममंत्री इंदिरा गाँधी को गोली मार दिया गया और राजीव गाँधी को बम से उड़ा दिया गया। इसके बाद उन्होंने आपत्तिजनक सवाल पूछा कि पीएम मोदी के लिए कोई बम क्यों नहीं बना रहा, उन्हें कोई बम से उड़ाने की धमकी क्यों नहीं दे रहा? रामगुलाम उइके घंसौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जहाँ लोगों ने उनकी निंदा की।
नक्सली, वामपंथी कुंठा : पीएम @narendramodi को बम से उड़ाने की धमकी सुनिए, वीडियो में रामगुलाम उईके कह रहा है , इंदिरा गांधी के लिए गोली बन गयी, राजीव गांधी को उड़ाने के लिए बम बन गया, मोदी जी को उड़ाने के लिए कोई बम नहीं बना पा रहे क्या ? ? pic.twitter.com/MQzUt94d8Y
उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमण से उपचार में गड़बड़ी का आरोप लगते हुए सवाल उठाया लेकिन वो यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि ये सब से सब ‘हत्यारे’ हमारे देश में ही मौजूद हैं, जो आज सत्ता के गलियारे तक पहुँच गए हैं। बताया जा रहा है कि उनका ये बयान 3 दिन पुराना है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अभी तक भाजपा के नेताओं की तरफ से इसकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रामगुलाम उइके में मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए थे, जब उन्हें ‘गोंडवाना गणतंत्र पार्टी’ के टिकट पर 55,389 मत प्राप्त हुए थे। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी की उर्मिला देवी को हराया था। हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब किसी विपक्षी नेता या विरोधी गैंग ने प्रधाममंत्री की मौत की दुआ की हो। इससे पहले भी सोशल मीडिया पर इस तरह की भद्दी बयानबाजी कई बार हो चुकी है।
अभिनेताओं ऋषि कपूर और इरफान खान की मौत की खबरों के बीच भी कट्टरपंथी मुस्लिमों के साथ-साथ सोशल मीडिया के वाम-उदारवादियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपनी घृणा का निशाना बनाया था। बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान की मौत की खबर के बाद कुछ लोगों को यह भी लिखते हुए देखा गया था कि इरफान खान की जगह अक्षय कुमार को होना चाहिए था और ऋषि कपूर की जगह उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौत की खबरों का इंतजार है।।
यदि कोई आपसे सवाल करे कि बलात्कार और न्याय के बीच दूरी कितनी है? इस प्रश्न का उत्तर क्या होना चाहिए या यूँ कहे, “क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि इन दो शब्दों के बीच कितना फ़ासला है।” इसका एक ही जवाब है ‘हिन्दू राष्ट्र’ या ‘हिंदुत्व’! पहली बार में बेशक विचित्र लग सकता है पर यह सत्य है क्योंकि ‘न्याय’ की गुहार लगाने वालों की लड़ाई अन्याय के विरुद्ध शुरू होकर हिन्दू राष्ट्र और हिंदुत्व तक सीमित रह जाती है। विरोध करने वाली ‘संभ्रांत जनता’ अत्याचार को ख़त्म करते-करते हिन्दू राष्ट्र के खात्मे की ओर निकल लेती है।
बड़े बुजुर्ग कह गए हैं संसार में हर रोग का उपचार उपलब्ध है लेकिन वैचारिक विकलांगता और दिग्भ्रमित हठधर्मिता का नहीं है। उत्तर प्रदेश के हाथरस की घटना को लेकर पूरे देश में आक्रोश है, सोशल मीडिया से लेकर सड़कों और चौराहों पर प्रदर्शनों की तस्वीर इस बात की तस्दीक करती हैं। विरोध होना भी चाहिए, अपराध हुआ तो विरोध भी होगा और न्याय भी। लेकिन सवाल जनता के उस हिस्से को लेकर है, जिनका एजेंडा ही कुछ और है। जो इंसाफ़ दिलाने के लिए सड़कों पर उतरते तो हैं लेकिन सदियों पुरानी वैचारिक कुंठा के फलीभूत अलग रास्ते पर निकल जाते हैं। सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से कुछ तस्वीरें साझा की जा रही हैं।
कुल मिला कर इस मिजाज़ की दो तस्वीरें हैं और दोनों का मजमून हुबहू है। तस्वीर में एक पोस्टरनुमा चीज़ नज़र आ रही है, जिस पर लिखा है “HINDURASHTRA IS A RAPIST” मायने हिन्दू राष्ट्र बलात्कारी है। एक दो व्यक्ति नहीं बल्कि पूरा का पूरा राष्ट्र, हर नागरिक! मतलब बलात्कार सिर्फ एक ही धर्म में होते हैं अन्य मज़हब के लोग देवतुल्य हैं जन्नत से उतरे हुए, अन्य मज़हबों में बलात्कार होते ही नहीं। शायद होते होंगे लेकिन उस समय ऐसे क्रांतिकारी पोस्टर सामने नहीं आते हैं, जिसमें लिखा हो कि फलां (मज़हब) राष्ट्र इज़ ए रेपिस्ट या ढिमकां (रिलीजन) राष्ट्र इज़ ए रेपिस्ट (जनता स्वयं समझदार है)।
हिन्दू राष्ट्र को रेपिस्ट बताने वाले ढपलीबाज (साभार – सोशल मीडिया)
बात स्वयं में कितनी हास्यास्पद है कि इंसाफ़ की गुहार में हिन्दू शब्द इस कदर घुला हुआ है कि उसका धब्बा इन क्रांतिकारियों के कपड़ों से उतरता ही नहीं। इस पड़ाव पर लड़ाई/विरोध में न्याय शब्द का कद बौना हो जाता है और दोषी बन जाता है हिन्दू राष्ट्र। यहाँ अपराधी और अपराध शब्द मायने नहीं रखता बल्कि सारा दोष हिन्दू राष्ट्र का हो जाता है (वही हिन्दू राष्ट्र जिसमें रह कर तथाकथित क्रांतिकारी लोग प्रदर्शन कर रहे हैं)। ऐसे ही प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों का मूल स्वरूप सामने आता है।
सोशल मीडिया पर जारी विरोध प्रदर्शन में एक और ऐसी ही तस्वीर सामने आई जिसमें लिखा था “I am a dalit not a hindu” अर्थात मैं एक दलित हूँ, हिन्दू नहीं। बेशक आप क्या हैं या कौन हैं, यह तय करने का अधिकार संविधान ने आपको दिया है। कुछ भी बन जाइए पर क्या यही समय है अपनी पहचान के प्रचार का? जो इच्छा है बने रहिए लेकिन जब समय मिले तो जनता को इस बात का जवाब भी ज़रूर दीजिए कि “मैं हिन्दू नहीं हूँ” इस अतिक्रांतिमय वक्तव्य से न्याय मिलने में कितनी मदद मिलेगी? सिद्ध क्या होगा यह बता कर?
गुड! लोकतंत्र है (साभार – सोशल मीडिया)
हिन्दू शब्द से स्वघोषित बुद्धिजीवी जमात का ‘लगाव’ नया बिलकुल नहीं है। हाल फ़िलहाल के कुछ साल उठा लीजिए, मुद्दा क़ानून व्यवस्था का हो या सामाजिक अव्यवस्था का, क्रांतिकारी महोदयों के अनुसार सारे फसाद की जड़ हिन्दू राष्ट्र और हिंदुत्व ही है।
सीएए और एनआरसी का विरोध में देश के अलग अलग क्षेत्रों में हुआ, इन प्रदर्शनों की तस्वीरें भी बकायदे चर्चा में रहीं। ऐसी ही एक तस्वीर थी, जिसमें एक युवती के गालों पर (जी हाँ सही पढ़ा आपने गालों पर) विशुद्ध हिन्दी में लिखा था ‘फ़क हिन्दू राष्ट्र’। लोकतंत्र है और लोकतंत्र में ढपली पीट कर आलोचनात्मक कीर्तन करने का अधिकार सभी के पास है। फिर भी ठंडे दिमाग से सोचिए मुद्दा देश पर लागू किए गए एक क़ानून से जुड़ा हुआ है और स्वघोषित क्रांतिकारी हिन्दू राष्ट्र ‘फ़क’ करने निकले हैं।
क्या किसी और मज़हब को भी इस तरह फ़क किया जा सकता है? (साभार – सोशल मीडिया)
ऐसी ही एक और तस्वीर है। हालाँकि यह पुरानी है लेकिन इसके मूल में भी वही संदेश है। यहाँ लिखा है महिलाएँ हिन्दू राष्ट्र को डिस्ट्रॉय करेंगी (कारण भी बताते चलिए)। क्या इस धर्म को नष्ट करना आसान है? सदियों से इस श्रेणी के प्रयास हो रहे हैं, 1-2 हथौड़ा आप भी चला कर देख लीजिए और हो जाए तो अवश्य सूचित करिए।
लेकिन कैसे? (साभार – सोशल मीडिया)
एक तस्वीर में इस वैचारिक निर्लज्जता की सीमा ही पार कर दी गई थी। हिटलर की नाज़ी सेना के चिन्ह को स्वास्तिक के रूप में दिखा कर हिंदुत्व के लिए अपशब्द लिखे गए थे।
ढपलीबाज स्वास्तिक और नाज़ी के चिन्ह की खिचड़ी बनाते हुए (साभार – सोशल मीडिया)
बाकी देश के दो तथाकथित उदारवादी और बुद्दिजीवियों के गढ़ जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में लगाए गए नारे सदाबहार हैं ही। उन नारों में खपाई गई ऊर्जा और झोंके गए मंतव्य से साफ़ हो जाता है कि व्यक्ति के जीवन में केवल शिक्षा महत्वपूर्ण नहीं होती। बहुत कुछ अहम होता है जिसकी इन लोगों के पास भीषण कमी है।
इस ग्रह का कोई भी अन्य मज़हब (सॉरी धर्म) उठा लीजिए और उसके बारे में चंद व्यंग्यात्मक टिप्पणी करके देखिए। पलक झपकते ही नज़ारे बदल जाएँगे, संदेह हो तो लिखिए एक बार ‘फ़क फला मज़हब’। फिर इस मुल्क में रहने वाले बुद्धिजीवी कहते हैं कि हिन्दू शब्द के इर्द गिर्द गढ़ी गई सारी परिभाषाएँ असहिष्णु हैं।
यह बात ऊपर कई बार लिखी जा चुकी है एक बार फिर से पढ़ लीजिए, क्या बलात्कार हिन्दू राष्ट्र में ही होते हैं? क्या पूरा हिन्दू राष्ट्र बलात्कारी है, हर नागरिक? क्या दूसरे समुदायों में बलात्कार नहीं होते हैं? होते हैं तो क्या उनके लिए भी आपका विरोध इतना ही स्पष्ट और खरा होगा? ऐसे विरोध की सूरत वाली लड़ाइयों का नतीजा क्या होगा यह तो नहीं पता लेकिन यह भटकी हुई ज़रूर हैं। तय इन्हें ही करना है कि न्याय के लिए लड़ना है या हिन्दू राष्ट्र से?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (अक्टूबर 3, 2020) को जब ‘अटल टनल’ के उद्घाटन के बाद हिमाचल प्रदेश स्थित मनाली के सोलांग वैली में जनता को सम्बोधित कर रहे थे, तब एक महिला पुलिसकर्मी अचानक से मूर्च्छित हो गईं। जैसे ही पीएम मोदी ने ये देखा, उन्होंने अधिकारियों को मंच से ही निर्देश दिया कि उक्त महिला पुलिसकर्मी को जल्द वहाँ से ले जाया जाए और बिठा दिया जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उक्त महिला पुलिसकर्मी के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हो गए और कई बार कहा, “उन्हें बिठा दीजिए“, जिसके बाद अधिकारियों ने उनके निर्देश का पालन किया। इसके बाद पीएम मोदी ने कहा कि उनकी जो मेडिकल टीम है, उसे काम पर लगाया जाए। इसके बाद पीएम मोदी की मेडिकल टीम ने महिला पुलिसकर्मी को अटेंड किया और उनका इलाज किया। जब पीएम अपन सम्बोधन ख़त्म कर रहे थे, तब ये घटना हुई।
जब पीएम मोदी ने देखा कि उक्त महिला पुलिसकर्मी को फिर से ड्यूटी पर लगाया जा रहा है, तो उन्होंने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “उस बेटी को ले जाइए भाई, वो ड्यूटी बाद में करेगी। कोई अधिकारी जरा उन्हें लेकर साथ में जाए।” इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने महिला पुलिसकर्मी से कहा, “आप जाकर बैठो वहाँ। आप ड्यूटी की कोई चिंता मत कीजिए।” तत्पश्चात अधिकारियों ने महिला पुलिसकर्मी को ले जाकर बिठाया।
पीएम मोदी की जनसभा के दौरान मूर्च्छित हुई महिला पुलिसकर्मी
सोलांग वैली में पीएम मोदी इस बात से खुश दिखे कि वहाँ की जनसभा में सोशल डिस्टेन्सिंग का अच्छी तरह से पालन किया जा रहा था और लोग एक-दूसरे से दूरी पर बैठे हुए थे। उन्होंने इस दौरान बताया कि अगर ‘अटल टनल’ का काम 2013-14 वाली गति से चलता रहता तो इसके बनने में 2040 तक का समय लग जाता। उन्होंने वहाँ की पहाड़ी जनता से संवाद किया और विकास कार्यों की समीक्षा भी की। साथ ही ‘अटल टनल‘ की खासियतों को देखा।
हाथरस की घटना ने पूरे देश को दहला दिया है। अलग-अलग जगहों से लोग 19 वर्षीय मृतका के लिए इंसाफ माँग रहे है। हालाँकि, अभी तक इस घटना की जाँच पूरी नहीं हुई है। हर दिन मामले में अलग-अलग साक्ष्य सामने आ रहे है।
बता दें इस मामले का पूरा विवरण अभी तक सामने नहीं आया है, फिर भी विपक्षी पार्टी और मीडिया की ओर से घटना का राजनीतिकरण जारी है। भाजपा को नीचा दिखाने और अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए कोई भी विपक्षी पार्टी पीछे नहीं है।
हाथरस पीड़िता की दुर्भाग्यपूर्ण मौत का राजनीतिकरण करने और राजनीतिक लाभ हासिल करने की एक और कोशिश करते हुए विपक्षियों द्वारा सोशल मीडिया पर आरोपितों में से एक के पिता को भाजपा नेता साबित करने के लिए कई तस्वीरें शेयर की जा रही है। साथ ही तस्वीरों में आरोपित के पिता की निकटता राजनाथ सिंह, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ और अन्य भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी बताया जा रहा है।
टीएमसी नेता डॉ काकोली दस्तीदार ने हाथरस की घटना के आरोपितों में से एक के पिता का भाजपा के टॉप नेताओं के साथ कथितरूप से संबंधों को बताते हुए एक व्यक्ति की कई तस्वीरों को साझा किया है। कथिततौर पर जिस व्यक्ति को आरोपित का पिता बताया गया है उसकी फोटो यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ भी है। साथ ही टीएमसी नेता ने यह आरोप लगाया कि भाजपा ने 19 वर्षीय लड़की के हत्यारों का समर्थन किया।
कई अन्य सोशल मीडिया ने भी इन चित्रों को साझा करते हुए एक जैसा ही दावा किया है। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ दिख रहे एक व्यक्ति को हाथरस के केस में गिरफ्तार चार आरोपितों में से एक का पिता बताया गया है।
एक अन्य टीएमसी नेता उत्तर 24 परगना के जिला महासचिव पारोमिता सेन ने भी फेसबुक पर तस्वीरें साझा करके आरोप लगाया कि आरोपित के पिता का भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।
टीएमसी नेता पारोमिता सेन का फेसबुक पोस्ट
वहीं शिवसेना के कार्यवाहक लालाभाई गढ़वी ने भी यह कहते हुए तस्वीरें साझा की कि हाथरस की घटना में गिरफ्तार अभियुक्त के पिता के साथ योगी जी और मोदी जी दिखाई दे रहे हैं।
शिवसेना के कार्यवाहक लालाभाई गढ़वी द्वारा शेयर की गई फोटो
फैक्ट चेक
गौरतलब है कि जिन तस्वीरों को वायरल कर विपक्षी आरोपित के पिता का संबंध भाजपा के साथ जोड़ कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे, दरअसल वह तस्वीर आरोपित के पिता की नहीं बल्कि प्रयागराज के भाजपा नेता डॉ श्याम प्रकाश द्विवेदी की है। जिसका पता रिवर्स सर्च से चला है।
भाजपा नेता डॉ श्याम प्रकाश द्विवेदी की फेसबुक प्रोफाइल
डॉ श्याम प्रकाश द्विवेदी के फेसबुक अकाउंट पर भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ उनकी कई तस्वीरें हैं। द्विवेदी भाजपा युवा मोर्चा के काशी मंडल के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष और प्रयागराज के वरिष्ठ नेता हैं।
इसलिए पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं के साथ हाथरस के आरोपित पिता की फ़ोटो होने का दावा फर्जी है। अपनी राजनीति चमकाने और जनता के बीच भाजपा की लोकप्रियता पर दाग लगाने की एक मात्र कोशिश की गई है। रिवर्स सर्च से यह साबित हो गया है कि जिन चित्रों को साझा किया जा रहा है, वह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के भाजपा नेता डॉ श्याम प्रकाश द्विवेदी की हैं।
एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद शुरू हुई जाँच ने बॉलीवुड में फैले ड्रग्स के महाजाल का खुलासा शुरू कर दिया। सुशांत की मौत के बाद से ही बॉलीवुड को लेकर दर्शकों में खासा गुस्सा देखा जा रहा है और लोग कई फिल्मों का बायकॉट कर रहे हैं। ऐसे में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने इस सारे मामले पर बोलते हुए अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। अक्षय ने अपने इस वीडियो में कहा कि बॉलीवुड में ड्रग्स की समस्या है इससे इनकार नहीं है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पूरी इंडस्ट्री को टारगेट किया जाए।
अक्षय कुमार ने अपना वीडियो शुरू करते हुए कहा, “आज बड़े भारी मन से आपसे बात कर रहा हूँ। पिछले कुछ हफ्तों में कई बातें आई मन में कहने के लिए लेकिन हर तरफ इतनी निगेटिविटी थी कि समझ नहीं आता कि क्या बोलूँ, किससे बोलूँ और कितना बोलूँ। स्टार भले ही हम कहलाते हैं लेकिन बॉलीवुड को आपने अपने प्यार से बनाया है। हम सिर्फ एक इंडस्ट्री नहीं है, हमने फिल्मों के जरिए अपने कल्चर, अपने वेल्यूज को दुनिया के हर कोने तक पहुँचाया है।”
Bahot dino se mann mein kuch baat thi lekin samajh nahi aa raha tha kya kahoon, kisse kahoon. Aaj socha aap logon se share kar loon, so here goes… #DirectDilSe ?? pic.twitter.com/nelm9UFLof
वो कहते हैं, “जब-जब हमारे देश की जनता के सेंटिमेंट्स की बात आई, जो भी आप महसूस करते हैं, हमने उसे ही दिखाने की कोशिश की। फिर चाहे वो एंग्री यंग मैन वाला आक्रोश हो या फिर करप्शन, गरीबी, बेरोजगारी, हर मुद्दे को सिनेमा ने अपने तरीके से दिखाने की कोशिश की है। अगर आज आपके सेंटिमेंट में गुस्सा है तो वो गुस्सा भी हमारे सिर माथे पर।”
अक्षय कुमार ने अपने इस वीडियो में आगे कहा, “सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ऐसे कई मुद्दे सामने आए हैं, जिन्होंने हमें भी उतना ही दर्द दिया है, जितना आप सबको। और इन मुद्दों ने हमारे खुद के गिरेबान में झाँकने के लिए हमें मजबूर किया। हमारी फिल्म इंडस्ट्री की ऐसी कई खामियों को देखने को मजबूर किया है जिन पर ध्यान जाना बहुत ज्यादा जरूरी है।”
अक्षय ने कहा, “जैसे नारकोटिक्स और ड्रग्स के बारे में आजकल बात हो रही है। मैं आज दिल पर हाथ रखकर कैसे आपसे झूठ बोल दूँ कि ये प्रॉब्लम एग्जिस्ट नहीं करती। जरूर करती है। वैसे ही जैसे हर इंडस्ट्री में होती होगी, लेकिन हर इंडस्ट्री का हर इंसान उस समस्या में लिप्त हो जरूरी नहीं। ऐसा नहीं हो सकता।”
अक्षय कुमार आगे कहते हैं, “ड्रग्स कानूनी मैटर है और मुझे यकीन है कि हमारी अथॉरिटी और कोर्ट इस पर जो भी एक्शन लेगा, वो बिल्कुल सही होगा। मैं यह भी जानता हूँ कि इंडस्ट्री का हर इंसान उनके साथ पूरी तरह सहयोग देगा। लेकिन प्लीज मैं आपसे हाथ जोड़कर कहता हूँ कि ऐसे तो मत करो न कि पूरी इंडस्ट्री को एक ही बदनाम दुनिया की नजरों के साथ देखने लगो। ये सही नहीं है। ये तो गलत है न।”
अक्षय ने आगे कहा, “मुझे पर्सनली हमेशा से मीडिया की ताकत में बहुत विश्वास रहा, अगर मीडिया सही मुद्दे सही वक्त पर न उठाए तो शायद बहुत से लोगों को न आवाज मिलेगी न इंसान। मैं मीडिया से तहेदिल से रिक्वेस्ट करता हूँ कि वो अपना काम, अपनी आवाज उठाना जारी रखे। लेकिन प्लीज थोड़ा सेंसेटिवली। क्योंकि एक निगेटिव न्यूज किसी इंसान की बरसों की इज्जत और कड़ी मेहनत को बर्बाद करके रख देगा।”
फैन्स को लेकर अक्षय ने कहा, “आखिर में लोगों से एक ही मैसेज ही यार आप सभी ने तो हमें बनाया है। आपका विश्वास जाने नहीं देंगे। अगर आपको कोई नाराजगी है तो हम और मेहनत करेंगे अपनी खामियों को दूर करने की। आपका प्यार और विश्वास जीतकर रहेंगे। आप हो तो हम हैं, बस साथ बनाए रखना।”
अक्षय की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो हाल ही में उन्होंने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘बेल बॉटम’ की शूटिंग खत्म की है। फिल्म में अक्षय के साथ हुमा कुरैशी, वाणी कपूर और लारा दत्ता लीड रोल में हैं।
हाथरस मामले में योगी सरकार ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया से कहा, “दोषियों को सजा देना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है।” सीएम ने कहा, “लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए उनका पुलिस बल किसी भी हद तक जा सकती है और सरकार सजा देने के कानूनी तरीकों में भी बदलाव कर सकती है।”
रिपब्लिक न्यूज़ के रिपोर्ट के अनुसार सीएम योगी ने कहा, “यूपी पुलिस देश में सबसे बड़ा पुलिस बल है। हम सजा देने के कानूनी तरीकों में भी बदलाव कर सकते हैं। एक तरफ, हमें दोषियों के साथ सख्त रहना पड़ता है तो दूसरी तरफ, हमें पीड़ितों के साथ नरमी बरतनी चाहिए। लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस बल को किसी भी हद तक जाना चाहिए।”
साभार- ज़ी न्यूज़
वहीं इससे पहले यूपी सीएम ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया था। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश में माताओं-बहनों के सम्मान-स्वाभिमान को क्षति पहुँचाने का विचार मात्र रखने वालों का समूल नाश सुनिश्चित है। इन्हें ऐसा दंड मिलेगा जो भविष्य में उदाहरण प्रस्तुत करेगा। आपकी उत्तर प्रदेश सरकार प्रत्येक माता-बहन की सुरक्षा व विकास हेतु संकल्पबद्ध है।”
उत्तर प्रदेश में माताओं-बहनों के सम्मान-स्वाभिमान को क्षति पहुंचाने का विचार मात्र रखने वालों का समूल नाश सुनिश्चित है।
इन्हें ऐसा दंड मिलेगा जो भविष्य में उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
आपकी @UPGovt प्रत्येक माता-बहन की सुरक्षा व विकास हेतु संकल्पबद्ध है।
वहीं हाथरस मामले में योगी सरकार ने प्राथमिक जाँच की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन द्वारा बरती गई लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए हाथरस के एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य अधिकारियों को निलंबित करने का भी निर्देश दिया था। और अब वहीं इस मामले में सीबीआई जाँच के भी आदेश दे दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि यूपी प्रशासन ने मीडिया को अनुमति दे दी है कि वह पीड़ित परिवार वालों से मिलकर बात कर सकते हैं। एसडीएम ने कहा, “इस मामले में एसआईटी की जाँच पूरी हो चुकी है इसलिए मीडिया के लिए लगाई गई पाबंदी भी हटा दी गई है। फ़िलहाल उस इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लागू है, इसलिए एक समय पर 5 से अधिक मीडियाकर्मी मौजूद नहीं रह सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “अभी वहाँ सिर्फ मीडियाकर्मियों को जाने की अनुमति है। जब प्रतिनिधिमंडल के लिए हरी झंडी दिखाई जाएगी तब हम सभी को प्रवेश करने की अनुमति देंगे। इस तरह के जितने भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पीड़िता के परिवार वालों के फोन लिए जा चुके हैं या उन्हें घर में बंद करके रखा गया है, यह सभी आरोप बेबुनियाद है।” उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर इस तरह के आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने पीड़िता के परिवार वालों के फोन जब्त कर लिए हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए हैं। यह फैसला इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग के बाद आया है। पीड़िता के पिता ने सीबीआई जाँच की माँग की थी, जिसे यूपी के सीएम ने मान लिया है। यूपी सीएम दफ्तर की ओर से ट्वीट कर सीबीआई जाँच की जानकारी दी गई है।
Chief Minister Yogi Adityanath orders Central Bureau of Investigation (CBI) probe into the #Hathras case: Chief Minister’s Office (CMO) (File pic) pic.twitter.com/VVvf2M6hRc
यूपी सीएम दफ्तर की ओर से ट्वीट किया गया, “मुख्यमंत्री श्री योगी जी ने सम्पूर्ण हाथरस प्रकरण की जाँच सीबीआई से कराए जाने के आदेश दिए हैं।” इससे पहले, उन्होंने अपराध की जाँच के लिए एक एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। तब से, मामला बेहद पेचीदा हो गया है और कई नए पहलू सामने आए हैं।
मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी ने सम्पूर्ण हाथरस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराए जाने के आदेश दिए हैं।
बता दें कि आज यूपी के डीजीपी और गृह सचिव अवनीश अवस्थी ने पीड़ित परिवार के साथ मुलाकात की थी और उनसे उनकी शिकायतें और माँगें सुनीं। परिवार से मुलाकात के बाद अधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने पीड़ित परिवार की सारी माँगों को रखा, जिसके बाद ही यूपी के सीएम ने सीबीआई जाँच के आदेश दे दिए।
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत के बाद से हाथरस मामले को लेकर काफी बहस और राजनीतिकरण हो रहा है। पीड़िता के साथ दो सप्ताह पहले कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। मामले में देशव्यापी आक्रोश का माहौल उत्पन्न हो गया जब कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि हाथरस पुलिस ने परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना रात में लड़की का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने बाद में बताया था कि पीड़िता के पिता दाह संस्कार के दौरान मौजूद थे।
एएनआई से बात करते हुए, एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया था कि जिन फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार था, वो आ गई हैं। एडीजी ने कहा कि एफएसएल रिपोर्ट में ‘बलात्कार’ का कोई सबूत नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यह निष्कर्ष निकाला गया था कि कोई यौन हमला नहीं था, और मौत का कारण गला घोंटने और रीढ़ की चोट थी।
आरोपितों के परिवार ने भी आरोपों से इनकार किया है और यह दावा किया कि आरोप झूठे हैं और पीड़ित परिवार के साथ एक पुराने पारिवारिक झगड़े की वजह से लगाए गए हैं। ठाकुर समुदाय ने भी यह माँग की है कि इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई की जाए और निष्पक्ष जाँच के बाद निर्दोष पाए जाने पर आरोपितों को छोड़ दिया जाए।