Home Blog Page 4461

जम्मू कश्मीर में नहीं थम रहा बीजेपी नेताओं की हत्या का सिलसिला: अब BDC चेयरमैन की आतंकियों ने की गोली मार कर हत्या

जम्मू कश्मीर में एक और बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में बीजेपी कार्यकर्ता और ब्लॉक विकास पार्षद (बीडीसी) खग के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह को कथित तौर पर आतंकियों ने उनके घर पर ही हमला करते हुए उन पर गोलियों की बौछार कर दी। जिसके चलते तत्काल उनकी मृत्यु हो गई।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू कश्मीर पुलिस ने बताया, “बुधवार शाम करीब 7:45 बजे आतंकवादियों ने खग के बीडीसी अध्यक्ष, भूपिंदर सिंह (Bhupinder Singh) पर गोलीबारी की, जिनकी मौके पर ही मौत हो गई। उन्होंने अपने साथ रहने वाले दो पीएसओ को खग पुलिस स्टेशन में ही छोड़ दिया और श्रीनगर में अपने आवास पर चले गए थे। पुलिस को बिना सूचित किए वह गाँव दलवाश चले गए। जहाँ उनपर जानलेवा हमला किया गया।”

हालाँकि, यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में बीजेपी नेता शेख वसीम बारी, उनके भाई और पिता की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनके पिता, बशीर अहमद और भाई, उमर बारी भी हमले में घायल हुए थे। तीनों को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था।

बनारस की शिवांगी बनी राफेल की पहली महिला फाइटर पायलट: अम्बाला में ले रही हैं ट्रेंनिंग, पिता ने जताई ख़ुशी

महिलाएँ दुनिया के हर क्षेत्र में अपनी क़ामयाबी के झंडे गाड़ रही हैं। इसी कड़ी में सबसे ताकतवर फाइटर विमान राफेल के स्क्वाड्रन गोल्डन एरो में वाराणसी की शिवांगी सिंह महिला फ्लाईट लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल हुई हैं। शिवांगी की सफलता पर न केवल घरवालों, बल्कि पूरे शहर को नाज हो रहा है। काशी में पली-बढ़ीं और BHU से पढ़ीं शिवांगी राफेल की पहली फीमेल फाइटर पायलट बनी हैं।

जानकारी के मुताबिक, वाराणसी में टूर एंड ट्रैवेल का कारोबार करने वाले कुमारेश्वर सिंह की बेटी ने साल 2017 में भी इतिहास रचा था। वह उस वक्त वायु सेना में फाइटर विमान उड़ाने वाली पाँच महिला पायलटों में शामिल हुई थी और अब महज तीन साल के भीतर वह राफेल के स्क्वाड्रन गोल्डन एरो में शामिल हुईं। बेटी की हिम्मत और मेहनत पर पिता को काफी नाज है।

साभार: दैनिक जागरण

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र के कुमारेश्वर सिंह कहते हैं, ”बेटी राफेल उड़ाएगी इससे बड़ी खुशी एक पिता के लिए क्या हो सकती है? शिवांगी की माँ गृहणी हैं। शिवांगी अब देश की अन्य बेटियों के लिए नजीर बनी है। उनका एक छोटा भाई है जो 12वीं में पढ़ रहा है मिडिल क्लास से आईं शिवांगी के सपने हमेशा से ऊँचाईयाँ छूने के थे।”

गौरतलब है कि शिवांगी अपनी पढ़ाई के दौर से ही यानी बीएचय में ही नेशनल कैडेट कोर में 7 यूपी एयर स्क्वाड्रन का हिस्सा थीं। प्रशिक्षण के लिए उन्होंने 2016 में वायु सेना अकादमी को ज्‍वाइन किया था। इतना ही नहीं फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी भारतीय वायुसेना के सबसे पुराने जेट विमान मिग -21 बाइसन और सुखोई एमकेआई से लेकर आधुनिकतम राफेल विमान को उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं।

बता दें, देश की हवाई ताकत में इजाफा हुआ है और राफेल की पहली खेप भारत में आ चुकी है। वहीं भारत में राफेल आ जाने के बाद चीन और पाकिस्तान में खलबली मची हुई है।

दिल्ली दंगा केस में राज्य विधानसभा पैनल को झटका: SC ने दिया फेसबुक को राहत, कहा- 15 अक्टूबर तक कोई कार्रवाई नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने आज (सितंबर 23, 2020) दिल्ली दंगा मामले में सुनवाई करते हुए फेसबुक को बड़ी राहत दी। सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक के वाइस प्रेसिडेंट अजित मोहन के खिलाफ 15 अक्टूबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने दिल्ली विधानसभा और केंद्र को नोटिस भी जारी किया है।

दरअसल, दिल्ली विधानसभा की कमेटी ने दिल्ली हिंसा के दौरान भड़काऊ सामग्री पर रोक नहीं लगाने को लेकर फेसबुक के अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। जिसको लेकर अजित मोहन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए याचिका दायर किया था। जिसपर जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने आज याचिका पर सुनवाई की है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा कमेटी को नोटिस जारी करते हुए एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक सुनवाई हो रही है तब तक फेसबुक पर कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह विधासनभा के पैनल के नोटिस के बावजूद तय तारीख पर फेसबुक के अधिकारी नहीं पहुँचे थे। कुछ समय पूर्व अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने ये दावा किया था कि फेसबुक ने जानबूझकर दिल्ली दंगों के दौरान भड़काऊ सामग्री पर रोक नहीं लगाई।

फेसबुक इंडिया के वीपी और एमडी अजित मोहन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, “यह नोटिस मेरे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। मैं कोई जनता का सेवक नहीं हूँ, जिसके बयान की आवश्यकता है। मैं एक अमेरिकी कंपनी हूँ।”

कोर्ट में हरीश साल्वे ने कहा, “हमने 13 सिम्बर को इस बारे में कमेटी को लिखा भी है कि वो समन को वापस ले, लेकिन अजित मोहन के पेश न होने पर कमेटी ने इसे विशेषाधिकार हनन मानते हुए समन जारी कर दिया। जबकि विशेषाधिकार का मसला विधानसभा तय करती है, कमेटी नहीं।” उन्होंने आगे कहा, “आर्टिकल 19 के तहत अभिव्यक्ति की आजादी के अंर्तगत ही किसी मसले पर न बोलने का अधिकार भी निहित है। ये मसला राजनीतिक रंग ले चुका है।”

फेसबुक की ओर से दलील देते हुए हरीश साल्वे ने कहा, “कमेटी के सामने पेश होने के लिए मज़बूर करना और ऐसा न करने की सूरत में दंड भुगतने की धमकी देना, अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार का हनन है। विधानसभा चाहे, वो फैसला लेने या कमेटी के गठन के लिए स्वतंत्र है।”

अजित मोहन को विधानसभा पैनल ने उपस्थिति होने के लिए नोटिस भेजा था। यह नोटिस उन्हें दंगों के दौरान लगे आरोपों पर पैनल को सफाई पेश करने के लिए जारी किया गया था। लेकिन अजित नोटिस के बावजूद पैनल के सामने नहीं पेश हुए। इसके बजाए पैनल को फेसबुक के डायरेक्टर ऑफ ट्रस्ट एंड सेफ्टी विक्रम लांगेह की तरफ से एक खत मिला। फेसबुक ने अपने खत में नोटिस पर सवाल खड़े करते हुए उसे वापस लेने की अपील की थी।

प्रभावी टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट, सर्विलांस, स्पष्ट मैसेजिंग पर फोकस और बढ़ाना होगा: खास 7 राज्यों के CM के साथ बैठक में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (सितंबर 23, 2020) को कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर हालात की समीक्षा की। बुधवार शाम को हुई इस वर्चुअल मीटिंग में इन राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी से निपटने की रणनीति और इसके प्रबंधन को लेकर चर्चा की।

प्रधानमंत्री के साथ हुई वर्चुअल मीटिंग में जिन 7 राज्यों के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री शामिल हुए, उनमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली और पंजाब शामिल हैं। देश में कोरोना संक्रमण के कुल ऐक्टिव केसों में से 63 प्रतिशत से ज्यादा इन्हीं 7 राज्यों से हैं। इसके अलावा देश में कोरोना के कुल मामलों में इन राज्यों की हिस्सेदारी 65.5 प्रतिशत है। इसी तरह देश में कोरोना से हुई कुल मौतों में 77 फीसदी इन्हीं 7 राज्यों से हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने मुश्किल समय में भी पूरे विश्व में जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की है। ऐसे में एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच दवाइयाँ आसानी से पहुँचे, हमें मिलकर ही ये देखना होगा। 

पीएम ने कहा कि प्रभावी टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट, सर्विलांस और स्पष्ट मैसेजिंग, इसी पर हमें अपना फोकस और बढ़ाना होगा। प्रभावी मैसेजिंग इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ज्यादातर संक्रमण बिना लक्षण का है। ऐसे में अफवाहें उड़ने लगती हैं। सामान्य जन के मन में ये संदेह उठने लगता है कि कहीं टेस्टिंग तो खराब नहीं है। यही नहीं, कई बार कुछ लोग संक्रमण की गंभीरता को कम आँकने की गलती भी करने लगते हैं। 

आगे पीएम ने कहा कि जो 1-2 दिन के लोकल लॉकडाउन होते हैं, वो कोरोना को रोकने में कितना प्रभावी हैं, हर राज्य को इसका अवलोकन करना चाहिए। कहीं ऐसा तो नहीं कि इस वजह से आपके राज्य में आर्थिक गतिविधियाँ शुरू होने में दिक्कत हो रही है? मेरा आग्रह है कि सभी राज्य इस बारे में गंभीरता से सोचें। 

पीएम मोदी ने कहा कि बीते महीनों में कोरोना इलाज से जुड़ी जिन सुविधाओं का विकास किया है, वो हमें कोरोना से मुकाबले में बहुत मदद कर रही है। अब हमें कोरोना से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को तो मजबूत करना है, जो हमारा हेल्थ से जुड़ा, ट्रैकिंग-ट्रेसिंग से जुड़ा नेटवर्क है, उनकी बेहतर ट्रेनिंग भी करनी है। 

मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि जब तक रोजमर्रा में सावधानी नहीं बरतेंगे, तब तक कोरोना से जीत नहीं पाएँगे। बीते अनुभवों से समझ में आया है कि एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच सेवाओं और सामान की आवाजाही में सामान्य नागरिकों को अनावश्यक परेशान होना पड़ा। ऑक्सीजन की कमी नहीं है लेकिन राज्यों के बीच तालमेल बहुत जरूरी है। जिससे जीवन की रक्षा की जा सके। 

पीएम मोदी ने कहा कि इन दिनों रोज 10 लाख से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं। शुरू में हमने जो लॉकडाउन किया उसके बहुत फायदे मिले। दुनिया ने सराहा लेकिन अब हमें माइक्रो कंटेनमेंट जोन पर ध्यान देना है। कई बार अफवाहें उड़ने लगती है। लोगों के मन में संदेह होता है कि टेस्टिंग तो खराब नहीं है। 

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि देश में 700 से अधिक जिले हैं, लेकिन कोरोना के जो बड़े आँकड़े हैं वो सिर्फ 60 जिलों में हैं, वो भी 7 राज्यों में। मुख्यमंत्रियों को सुझाव है कि एक 7 दिन का कार्यक्रम बनाएँ और प्रतिदिन 1 घंटा दें। वर्चुअल तरीके से हर दिन 1 जिले के 1-2 ब्लॉक के लोगों से सीधे बात करे। संयम, संवेदना, संवाद और सहयोग का जो प्रदर्शन इस कोरोना काल में देश ने दिखाया है, उसको हमें आगे भी जारी रखना है। संक्रमण के विरुद्ध लड़ाई के साथ-साथ अब आर्थिक मोर्चे पर हमें पूरी ताकत से आगे बढ़ना है। 

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

पत्रकारिता के नाम पर इस्लामी प्रोपगेंडा चलाने वाली राणा अय्यूब ने ऐलान किया है कि वह शाहीन बाग की एक ‘दादी’ की तस्वीर फ्रेम करवाने वाली हैं। इन दादी का नाम बिलकिस है और इनकी उम्र 82 साल है। दादी ने शाहीन बाग में हुए सीएए विरोध प्रदर्शनों में अपना योगदान दिया था। 

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं। उनका कहना है कि वह खुद को खुशनसीब मानती है जो उन्हें यह मौका मिला।

अब राणा अय्यूब ने टाइम्स पर क्या लिखा है? इस पर पहले गौर करें। अपनी टिप्पणी में राणा ने 82 वर्षीय वृद्धा को उन सभी छात्र नेताओं की ताकत बताया है जिन्हें प्रदर्शनों के दौरान जेल में डाला गया। उन्होंने लिखा कि जब वह पहली बार बिलकिस से मिलीं, तो वृद्धा कई युवा महिलाओं की भीड़ के बीच में बैठीं थी। अय्यूब के मुताबिक, दादी बिलकिस ने उनसे कहा था, “मैं यहाँ तब तक बैठूँगी जब तक मेरी रगों में खून बहना नहीं बंद हो जाता, ताकि इस देश और दुनिया के बच्चे न्याय और समानता की हवा में साँस लें।”

दिलचस्प बात यह है कि राणा अय्यूब ने अपनी टिप्पणी के पहले पैरा और अंतिम पैरा में जिक्र दादी बिलकिस का किया, मगर बीच में चंद शब्दों में मोदी सरकार को लेकर अपनी घृणा भी व्यक्त कर दी। अय्यूब ने बड़ी चालाकी से इस छोटी सी टिप्पणी में एक बार फिर सीएए को लेकर झूठ फैलाया और लिखा कि मोदी सरकार ऐसा कानून ले आई है जिसके कारण मुस्लिमों के लिए देश की नागरिकता पाने का रास्ता बंद हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि करीब 10 महीने से चली आ रही बहस के बाद आज यह बात सब जान चुके हैं कि सीएए केवल प्रवासियों के लिए है। खासकर उन प्रवासियों के लिए जिन्हें पड़ोसी मुल्कों में उनके धर्म आदि के कारण प्रताड़ित किया गया और वह मजबूर होकर भारत में शरण लेने आए। सरकार ने संसद में इस कानून पर बार-बार समुदाय विशेष को आश्वस्त किया कि इससे उन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

बावजूद इसके राणा अय्यूब जैसे इस्लामी बुद्धिजीवि व लिबरल गिरोह के लोग अपना प्रोपगेंडा चलाते रहे और आज भी चला ही रहे हैं। उनके इन्हीं एजेंडों ने शाहीन बाग में एक नवजात की जान ली थी, लेकिन तब गलती मानने की बजाय यह फैला दिया गया कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में बच्चे को शहादत मिली। ये दादी भी उसी प्रदर्शन का चेहरा हैं।

साभार: ndtv india

जाहिर हैं इन्होंने अपने आप शाहीन बाग तक का रास्ता तय नहीं किया होगा। इन्हें किसी ने बकायदा बैठाकर तसल्ली से समझाया होगा और इनके भीतर डाला होगा कि देश खतरे में हैं और समुदाय के लोगों को उन जैसी बुजुर्गों की भी जरूरत है। इसलिए, खुशी की बात बस यह है कि भले ही दादी ने अपनी सर्दियाँ एक निराधार प्रदर्शन में बिताईं, लेकिन ये भी सोचिए कि उन्हें प्रदर्शन में बैठते हुए यही लग रहा था कि वह देश के बच्चों को बचाने निकली हैं उसके संविधान को बचाने निकली हैं।

शाहीन बाग में उनकी भूमिका की सराहना होनी चाहिए या नहीं? ये व्यापक बहस है। मगर, उनकी मंशा (देश को बचाने की) यदि वही थी जो उन्होंने अय्यूब को बताई तो वह और उनके जैसी ‘अंजान महिलाएँ’ वाकई तारीफ के लायक है कि देश को खतरे में देखकर घर से निकल पड़ीं।

दादी बिलकिस पर बात करते हुए आज हम उन रिपोर्ट का जिक्र नहीं कर रहे, जिन्होंने दावा किया कि शाहीन बाग में बैठने के लिए महिलाओं को पैसे और बिरयानी दी गई। हम इस पर भी चर्चा नहीं करेंगे कि उन आयोजनों के लिए फंड को लेकर कौन-कौन से संगठनों के नाम सामने आए और उससे पहले उनकी संलिप्ता किन देशविरोधी कार्यों में पाई जा चुकी थी। हम दादी बिलकिस पर लिखते हुए उन भड़काऊ भाषणों को भी कुछ समय के लिए दरकिनार कर रहे हैं जिन्होंने इन प्रदर्शनों में देश को तोड़ने की बात की।

मगर, इस बीच एक बिंदु पर विचार करने को जरूर कह रहे हैं कि आखिर सोचिए, 82 वर्षीय बिलकिस और उनकी जैसी तमाम महिलाओं को कहाँ से पता होगा कि शाहीन बाग का चेहरा आने वाले समय में इतना भयंकर होने वाला है कि वह कई मासूमों की जान ले लेगा। उन्हें क्या मालूम था सफूरा जरगर, खालिद सैफी, उमर खालिद, ताहिर हुसैन जैसे तमाम पढ़े लिखे, समाज के ‘प्रतिष्ठित’ लोगों ने उन्हें और उनकी जैसी वृद्धाओं को कड़ाके की ठंड में क्यों बिठाया हुआ है। उन्हें तो जो बताया गया वह उसी आधार पर देश के बच्चों को बचाने निकलीं वो भी अपनी उम्र को ताक पर रखकर।

आज राणा अय्यूब दादी को एक सशक्त चेहरा मानती हैं। उनके टाइम्स में शामिल होने पर गर्व करती हैं। हमें भी इससे कोई आपत्ति नहीं है। बस विचार करने वाली बात है कि जिस टाइम्स ने शाहीन बाग में बैठी बिलकिस को लेकर इतनी सकारात्मक टिप्पणी की है, उसी टाइम्स ने अपनी सूची में नरेंद्र मोदी का नाम शामिल करते हुए यह लिखा है कि उनके पीएम बन जाने से देश की स्थिरता और समसरता संदेह के घेरे में आ गई है।

पीएम मोदी को लेकर एक तरफ जहाँ टाइम्स ने ये दावा किया है कि उनके शासन से यह ज्ञात होता है कि उनके लिए हिंदुओं के सिवा कोई महत्त्व नहीं रखता। वहीं, दादी बिलकिस को लेकर कहा जाता है कि उन्होंने देश भर में शाहीन बाग जैसे ‘शांतिपूर्ण’ आंदोलनों को प्रेरित किया। अब एक तरफ मोदी सरकार पर ‘हिंदुत्व की राजनीति’ करने का आरोप और दूसरी ओर शाहीन बाग-‘एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन’!

दोनों लेखों में ऐसे विशेषणों का इस्तेमाल देखकर खुद अंदाजा लगाइए कि क्या लिबरल मीडिया खुद नहीं चाहता कि उनका पाखंड दुनिया के सामने उजागर हो। क्या उसे नहीं लगता कि एक ओर हिंदुओं का नाम लेकर मोदी सरकार को संशय के घेरे में रखना और दूसरी ओर समुदाय विशेष के आंदोलन को शांतिपूर्ण कहना उनकी दोहरे चेहरे का प्रमाण है? आखिर कितना उचित है उस आंदोलन को बार बार ‘शांतिपूर्ण’ कह देना जिसका अंतिम व भयावह चेहरा पहले ही पूरी दुनिया ने गत फरवरी में देख लिया है।

बिलकिस को आज चेहरा बनाकर टाइम्स ने भले ही शाहीन बाग की सभी प्रदर्शनकारियों को सम्मान दिया हो, पूरी बहस को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की हो, सवाल उठाने वालों के मुँह पर तमांचा जैसा बताया हो। मगर, इस भ्रम में यह भी नहीं भूला जाना चाहिए कि उनकी जैसी वृद्धाओं की आड़ में ऐसी ‘दंगाई’ महिलाएँ भी उस प्रदर्शन का हिस्सा बनीं थी, जिन्होंने पहले शाहीन बाग में अपनी उपस्थित दर्ज करवाई। फिर गाड़ियों में भरकर जाफराबाद पहुँची और वहाँ अपना हिंसात्मक चेहरा दिखाया।

दिल्ली दंगों पर आधारित मोनिका अरोड़ा की किताब बताती है कि उस दिन ऐसी ही प्रदर्शनकारी महिलाओं की भीड़ ने बुर्के के अंदर तमाम ईंट पत्थर छिपाए थे और ‘शांतिपूर्ण’ प्रदर्शन को अंजाम तक पहुँचाने के लिए कॉन्सटेबल रतन लाल को मौत के घाट उतार दिया था व अन्य पुलिस अधिकारियों पर जानलेवा हमला बोलकर दंगे भड़काए थे। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट कहती है कि इन महिलाओं को जहाँगीरपुरी से इकट्ठा करके लाया गया था। ये संख्या में 250-300 थीं।

मेरी झोरा-बोरा की औकात, मौका मिले तो चुनाव लड़ने का निर्णय लूँगा, लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आऊँगा: पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय

स्वेच्छा से रिटायरमेंट (VRS) के एक दिन बाद बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने फेसबुक के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने पढ़ाई की, कैसे आईपीएस अधिकारी बने। पांडेय ने कहा कि उन्होंने सिविल सर्विस में कभी कोई कोचिंग नहीं की। पटना यूनिवर्सिटी में 100 रुपए में कोचिंग मिलती थी लेकिन उन्होंने कोई कोचिंग नहीं की। उन्होंने कहा, “मैं जिद्दी बहुत था, हौसला था, यही दृढ़ इच्छा थी जिसकी वजह से मैं यहाँ तक पहुँचा। मेरा कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं रहा। मैं इस जगह तक पहुँचा तो इसमें मेरे माता-पिता का आशीर्वाद है।”

गुप्तेश्वर पांडेय ने फेसबुक लाइव में बताया, “मेरे माता-पिता बेहद सहज-सरल स्वभाव के थे। आईपीएस बनने के बाद चतरा में मेरी पोस्टिंग हुई। वह नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था। इसके बाद मेरी पोस्टिंग बेगूसराय में हुई। 90 के दशक में वहाँ काफी अपराध था, मेरे जाने के बाद 40 दुर्दांत अपराधियों का एनकाउंटर हुआ। मेरे वहाँ पोस्टिंग के बाद हालात बिल्कुल बदल गए, आपराधिक वारदातों पर लगाम लग गई। जाने के बाद 500 नौजवानों को संगठित किया, आम लोगों की शांति के लिए उन्होंने सहयोग किया। जिसके बाद 40 अपराधी मारे गए, कई अपराधियों ने सरेंडर किया।”

गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि जब भी उनकी कहीं पोस्टिंग हुई तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी संभाली। कम्यूनिटी पोलिसिंग के जरिए उन्होंने अपराध को खत्म करने की कोशिश की। जहाँ-जहाँ वो एसपी रहे, चाहे नालंदा, बेगूसराय कहीं भी पोस्टिंग हुई हो, जनता से जुड़े रहना उनके स्वभाव में शामिल है। उन्होंने कहा, “मेरे घर के दरवाजे हमेशा गरीबों, हर वर्ग के लोगों के लिए खोल के रखा। जिस दिन मैंने वीआरएस लिया उस दिन तक मैंने एक-एक आदमी से उनकी बात सुनी। इसमें कोई राजनीति है क्या? गरीब का बेटा हूँ ना, यही मेरे काम करने का तरीका है।”

चुनाव लड़ने वाली बात को लेकर हो रही अटकलों पर बात करते हुए गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा, “मैं जो भी बोलता हूँ बिल्कुल दिल से बोलता हूँ। मेरा भाव गलत नहीं होता है। मैंने अभी कोई पार्टी ज्वाइन करने का ऐलान तो नहीं किया। मैं चुनाव लड़ूँगा, यह भी कहीं नहीं कहा। इस्तीफा तो दे दिया। चुनाव लड़ना कोई पाप है? मैं पहली बार ऐसा कर रहा हूँ क्या? या करूँगा क्या? ये कोई पाप है? ये गैरकानूनी है? यह असंवैधानिक है? यह अनैतिक है क्या? हत्या करने वाले, अपराध करने वाले, जिनके ऊपर 50 FIR हैं, वो अगर चुनाव लड़ सकते हैं, तो मैंने कौन सा ऐसा अपराध कर दिया? एक गरीब किसान का बेटा चुनाव नहीं लड़ सकता क्या? जिसकी 34 साल की सेवा बेदाग रही है।”

पूर्व डीजीपी ने आगे कहा कि कई लोग उन्हें सुशांत सिंह राजपूत के केस से जोड़ रहे हैं। उनके वीआरएस को सुशांत केस से क्यों जोड़ रहे हैं। सुशांत बिहार का बेटा था वो, पूरे देश की शान था वो, जिस तरह से उसकी मौत हुई, उनके पिता के एफआईआर के बाद उन्होंने सिर्फ वही किया जो पुलिस अधिकारी होने के नाते उनका दायित्व था। कोई कुछ भी बोल सकता है। सुशांत मामले से उनके वीआरएस का कुछ भी लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “कोई कुछ भी कहे लेकिन मैं कहता हूँ कि अगर जरूरत पड़ी तो मैं राजनीति में जरूर आऊँगा। मेरा मनोबल गिराने की कोशिश हो रही है। सुशांत के केस से जोड़ा जा रहा लेकिन मेरी कोशिश यही है कि सुशांत को जस्टिस मिले।”

इस दौरान उन्होंने उन लोगों पर जमकर हमला बोला, जो उनके वीआरएस लेने के फैसले को राजनीति से जोड़ रहे हैं। फेसबुक लाइव के दौरान पांडे ने एक पुरानी घटना का जिक्र किया और बताया कि उन्होंने 8 साल पहले एक महादलित की बेटी का कन्यादान किया था। उनके घर में मंडप लगा था। ब्राह्मण के घर में दलित की बेटी का कन्यादान किया। बिहार के पूर्व डीजीपी ने इस घटना का जिक्र करते हुए पूछा क्या मैं उस समय चुनाव लड़ने के लिए यह काम किया था?

वो आगे कहते हैं, अगर मौका मिले, तो मैं चुनाव लड़ने का भी निर्णय लूँगा। मैं एक स्वतंत्र नागरिक हूँ। राजनीति में आने पर लोगों को बता दूँगा कि सेवा क्या होता है। मैं लोगों की सेवा करने के लिए राजनीति में आऊँगा। किसी भी पर्व के दौरान किसी तरह का सांप्रदायिक विवाद उत्पन्न नहीं हुआ। ये सब जनता, अधिकारी और मुख्यमंत्री के सहयोग से संभव हुआ। राजनीति में आने पर किसी पर भी व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करूँगा। सकारात्मक टिप्पणी करूँगा। मेरी झोरा-बोरा की औकात है और उसी औकात से अपने बक्सर जा रहा हूँ।”

दिल्ली बार काउंसिल ने वकील प्रशांत भूषण को भेजा नोटिस: 23 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश, हो सकती है बड़ी कार्रवाई

दिल्ली बार काउंसिल (BCD) ने विवादास्पद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के मद्देनजर 23 अक्टूबर को उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण पर एक रुपए का सांकेतिक जुर्माना लगाया था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अवमानना मामले में भूषण का मामला छ: सितंबर को दिल्ली बार काउंसिल के पास विवेचना करने और कानून सम्मत फैसला लेने के लिए भेजा था। इसके बाद दिल्ली बार काउंसिल ने यह कदम उठाया है।

दिल्ली बार काउंसिल ने प्रशांत भूषण से जवाब माँगा है कि न्यायपालिका के खिलाफ विवादित ट्वीट के लिए उन्हें दोषी ठहराए जाने के मद्देनजर एक वकील के तौर पर उनका पंजीकरण रद्द करने की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। भूषण को 23 अक्टूबर को व्यक्तिगत तौर पर या वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश होने का निर्देश दिया गया है। उन्हें नोटिस मिलने के बाद 15 दिन में बार काउंसिल को उत्तर देना होगा।

राज्य की बार काउंसिल ही एक व्यक्ति को वकालत करने का लाइसेंस प्रदान करती है। राज्य बार काउंसिल को ही वकील कानून के तहत कतिपय परिस्थितियों में अपने सदस्य का वकालत करने का अधिकार निलंबित करने या इसे वापस लेने सहित व्यापक अधिकार प्राप्त है।

दिल्ली बार काउंसिल ने नोटिस में कहा कि आपको सुनवाई के लिए व्यक्तिगत तौर पर या आपकी ओर से अधिकृत वकील के जरिए काउंसिल के ऑफिस में 23 अक्टूबर को शाम चार बजे पेश होना होगा। आप अपनी सुविधा के अनुसार व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए भी पेश हो सकते हैं।

काउंसिल ने कहा कि आपको यह पत्र मिलने के बाद 15 दिन में काउंसिल को यह बताना होगा कि सवालों के घेरे में आए आपके ट्वीट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना की याचिका के तहत दोषसिद्धि के मद्देनजर आपके खिलाफ वकील कानून की धारा 35 और धारा 24ए (पंजीकरण रद्द करना) के तहत कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।

प्रशांत भूषण ने बुधवार (सितंबर 23, 2020) सुबह ट्वीट करके नोटिस मिलने की बात स्वीकार की। काउंसिल ने कहा कि यदि भूषण उसके सामने तय तारीख को पेश नहीं होते हैं, तो एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।

जस्टिस अरुण मिश्रा (अब सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक ट्वीट करने के कारण प्रशांत भूषण को 14 अगस्त को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था और 31 अगस्त को उन पर एक रुपए का सांकेतिक जुर्माना किया था। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जुर्माना अदा नहीं करने पर अवमाननाकर्ता को तीन महीने की कैद भुगतनी होगी और वह तीन साल तक वकालत करने से प्रतिबंधित रहेगा। प्रशांत भूषण ने 14 सितंबर को कोर्ट की रजिस्ट्री में अवमानना मामले में दंड के रूप में एक रुपया जमा कराया था।

NCB ने ड्रग्स मामले में दीपिका, सारा अली खान, श्रद्धा समेत टॉप 4 हीरोइन को भेजा समन, जल्द होगी पूछताछ

सुशांत सिंह राजपूत केस जाँच के दौरान निकले ड्रग्स एंगल में नारकोटिक्स क्राइम ब्यूरो (NCB) ने दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुल प्रीत, श्रद्धा कपूर को समन भेजा है। बता दें, दीपिका पादुकोण को 25 सितंबर एनसीबी के सामने पेश होना होगा। वहींं श्रद्धा कपूर और सारा अली खान से एनसीबी 26 तारीख को तलब करेगी। श्रद्धा और सारा अली खान से 26 सितंबर को सवाल-जवाब होंगे।

बता दें कि ड्रग एंगल की छानबीन कर रही एनसीबी (NCB) ने जाँच के दायरे को आगे बढ़ाते हुए दीपिका पादुकोण की मैनेजर करिश्मा प्रकाश और क्वान टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी के सीईओ ध्रुव चिटगोपेकर को पूछताछ के लिए तलब किया था। वहीं प्रकाश ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एनसीबी के सामने नहीं पेश हुई थी।

गौरतलब है कि रिया चक्रवर्ती से पूछताछ के दौरान दीपिका, दीया, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आया था। दीया का नाम पूछताछ के दौरान ड्रग तस्कर अनुज केशवानी ने लिया था। केशवानी ने बताया कि दीया की मैनेजर ड्रग्स खरीदती थी। उन्होंने इसके सबूत भी दिए थे। अब इस मामले में एनसीबी जल्द ही दीया मिर्जा को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है।

NCB ने सुशांत सिंह राजपूत के पूर्व बिजनेस मैनेजर श्रुति मोदी और टैलेंट मैनेजर जया साहा से भी पूछताछ की थी। जया साहा के कई एक्ट्रेस के साथ चैट सामने आए थे। जिसमें वो ड्रग्स की बात कर रही थी। दीपिका पादुकोण के मैनेजर करिश्मा प्रकाश का जया शाह के साथ एक फोटो सामने आया था।

बता दें कुछ न्यूज चैनलों ने कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स के बीच ड्रग्स को लेकर हुई व्हाट्सएप चैट का खुलासा किया था। इस चैट में बॉलीवुड के 5 टॉप ऐक्टर्स के नाम सामने आए थे। चैट के दौरान जो नाम दिख रहे हैं वह सब एक अक्षर (जैसे- N,J,S,D,K) में हैं। इस चैट में ड्रग्स के लेन-देन की बात हुई थी। कथित तौर पर ये सभी A ग्रेड के कलाकार हैं। अब बताया जा रहा है कि ड्रग चैट की D यानी दीपिका पादुकोण हैं और जिस K से ‘माल’ यानी ड्रग्स मॉंग रही हैं, वह असल में करिश्मा हैं।

‘बोतल डॉन’ खान मुबारक की 20 दुकान वाले कॉम्प्लेक्स पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: करोड़ों की स्कॉर्पियो, जेसीबी, डंपर भी जब्त

उत्तरप्रदेश में बाहुबलियों और माफियों पर योगी सरकार की कार्रवाई जारी है। जहाँ एक तरफ नामी माफिया मुख्तार अंसारी की अवैध संपत्तियों की कुर्की का काम तेजी से चल रहा, वहीं आए दिन अतीक अहमद और उसके गुर्गो की अवैध सम्पतियों पर बुलडोजर चलाकर जमींदोज किया जा रहा। इसी बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने अंडरवर्ल्ड से ताल्लुक रखने वाले खान मुबारक और उसके गुर्गो की अवैध संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के टॉप टेन अपराधियों की सूची में शामिल माफिया सरगना खान मुबारक पर शिकंजा कसते हुए मंगलवार को गैंगेस्टर अधिनियम के तहत हंसवर बाजार स्थित 20 दुकान वाले कॉम्प्लेक्स को ढहा दिया गया। इसकी की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए थी। माफिया सरगना के नेटवर्क को ध्वस्त करने के क्रम में फरार चल रहे खान मुबारक के करीबी शातिर बदमाश परवेज की मखदूमपुर गाँव स्थित करीब 50 लाख की संपत्ति को अंबेडकर नगर पुलिस द्वारा ध्वस्त कर दिया गया।

कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए हंसवर समेत आधा दर्जन थानों की पुलिस व पीएसी कर्मी मौके पर मौजूद रहे। वहीं पुलिस ने खान मुबारक के एक करोड़ 20 लाख कीमत की स्कॉर्पियो, जेसीबी, डंपर को भी जब्त कर लिया है।

बता दें अंबेडकर नगर में बोतल डॉन नाम से कुख्यात खान मुबारक वर्तमान में हरदोई जेल में बंद है। जिले के लोग आज भी उसके नाम से थर्राते है। वहीं प्रशासन की कार्रवाई के बाद से लोगों में उसका डर खत्म होता नजर आ रहा है। इस मामले में एसपी ने अवैध संपत्तियों की कुर्की को लेकर बयान दिया है कि अभी तो यह शुरुआत है। ऐसी कई संपत्तियाँ है जिन्हें खान द्वारा अपराध के बलबूते पर कमाया गया है। प्रशासन की निगाहें सभी पर टिकी है जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। साथ ही खेतों का भी सिजरा निकाल कर देखा जाएगा।

गौरतलब है कि हरदोई जेल में बंद मशहूर डॉन मुबारक को भारी मात्रा में असलहों के साथ 2017 में यूपी STF द्वारा गिरफ्तार किया गया था। खान का खौफ इलाके में ऐसा था कि जेल के अंदर से भी वह इलाके के व्यापारियों और डॉक्टरों से रंगदारी वसूला करता था। जेल में बंद होने के बावजूद उसके कारोबार का काम समान्तर रूप से जारी था।

सोशल मीडिया में जारी एक वीडियो में खान मुबारक ने एक व्यापारी द्वारा रंगदारी नहीं देने पर उसके सर पर बोतल रख कर पिस्टल से निशाना साधा था जिसके बाद से ही उसका नाम बोतल डॉन पड़ गया। लोगों में खान मुबारक का डर उसके भाई जफर खान उर्फ जफर सुपारी की वजह से भी है। जोकि अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के सबसे खास शूटर है। इनका गैंग छोटा राजन को शूटर मुहैया कराते रहे है।

वहीं खान मुबारक का नाम मुंबई के मशहूर हत्याकांड काला घोड़ा शूटआउट और फरीद तनाशा हत्याकांड में भी सामने आया था। बता दें खान मुबारक का भाई जफर सुपारी भी पुलिस की गिरफ्त में है और इस वक्त मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में बंद है।

मुख्य रूप से खान मुबारक ने रंगदारी वसूली से लेकर सुपारी किलिंग और रेलवे के धुलाई व स्क्रैप ठेके, कोयले और खनन के बड़े पट्टों में कट लेकर करोड़ों का कारोबार करके अवैध संपत्तियाँ हासिल की थी। यूपी प्रशासन की कार्रवाई ने मुंबई के माफियों में भी खलबली मचा दी है।

पाकिस्तान 171 हिंदुओं को मदरसा अहसान-उल-तालीम में करवाया गया इस्लाम कबूल: मानवाधिकार कार्यकर्ता का दावा

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 171 हिंदुओं को रविवार (सितंबर 20, 2020) को इस्लाम में धर्मांतरित करवाया गया। पाकिस्तान के ही मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने ये दावा किया है। 

राहत ऑस्टिन ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हिंदू पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का धर्म परिवर्तन पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मदरसा अहसान-उल-तालीम (Ahsan-ul-Taleem), कराची के संगर में आयोजित एक सामूहिक धर्मान्तरण समारोह में किया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस्लामिक आइडियोलॉजी काउंसिल के पूर्व सदस्य नूर अहमद तशर ने उन्हें इस्लाम कबूल करवाया।

रिपोर्ट में बताया गया कि विभिन्न प्रलोभन देकर हिंदू भील समुदाय के लोगों का धर्मांतरण कराया गया। बता दें कि इन्हें पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों में सबसे कमजोर और हाशिए पर रखा गया समुदाय माना जाता है।

इससे पहले जून में, सिंध प्रांत के बाडिन जिले में सौ से अधिक हिंदुओं को इस्लाम में धर्मांतरित किया गया था। कथित तौर पर, एक स्थानीय मंदिर में रखी हिंदू देवताओं की सभी मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया और परिसर को एक मस्जिद में बदल दिया गया। 17 मई को सिंध प्रांत में हिंदुओं ने दावा किया था कि तबलीगी जमात के लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उनके घरों में तोड़फोड़ की और इस्लाम कबूल नहीं करने पर एक हिंदू लड़के का अपहरण भी कर लिया।

तबलीगी जमात के अपहरणकर्ता उक्त लड़के को छोड़ने के लिए रुपए-पैसे की माँग नहीं कर रहे थे। उनका कहना था कि अगर अपहृत लड़के का परिवार इस्लाम अपना लेता है तो उसे छोड़ दिया जाएगा। लेकिन, परिवार इसके लिए तैयार नहीं था।

वहीं 15 अगस्त को 204 अल्पसंख्यक हिंदुओं का पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन करवाया गया। धर्म परिवर्तन करने वाले अधिकांश हिंदू भील समाज के थे। इनमें से कुछ अभी हाल में धार्मिक वीजा से हिंदुस्तान से लौटे थे। बताया गया था कि 194 हिंदू सादिकाबाद में रहने वाले हैं जबकि 10 (एक ही परिवार के) रहिमयारखान के निवासी हैं। इस धर्मपरिवर्तन की सूचना जोधपुर में रहने वाले लोक संगठन के प्रेमचंद भील ने दी थी। वह लगातार हिंदुओं के संपर्क में हैं और उनके साथ ज्यादतियों को साझा करते रहते हैं।

पिछले दिनों राहत ऑस्टिन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर बताया था कि सिमरन का कुछ समय पहले घोटकी-सिंध के मीरपुर इलाके से कट्टरपंथियों ने अपहरण किया था। फिर बलात्कार कर उसे इस्लाम कबूल करवा दिया गया। परिवार ने इंसाफ के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई। लेकिन कोर्ट ने उसे यह कहकर खारिज कर दिया कि एक इस्लाम मानने वाले का गैर-इस्लामी परिवार से कोई संबंध नहीं होता। अगर उन्हें उनसे मिलना है तो उन्हें भी इस्लाम कबूल करना होगा।