Home Blog Page 4461

‘रोओ मत, इमोशनल कार्ड मत खेलो’ – दीपिका पादुकोण 3 बार रोने लगीं, NCB अधिकारियों ने मोबाइल भी कर लिया जब्त

नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो ने शनिवार (सितम्बर 27, 2020) को ड्रग्स मामले में बॉलीवुड की तीन बड़ी अभिनेत्रियों दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के साथ पूछताछ की। दीपिका पादुकोण सुबह के 10:30 बजे NCB के कोलाबा स्थित दफ्तर पहुँचीं और वहाँ दोपहर 3:30 तक रहीं। करीब 5 घंटे की पूछताछ के दौरान उनके मैनेजर करिश्मा के बयानों को लेकर भी उनसे सवाल किए गए।

NCB ने दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के मोबाइल फोन्स को भी आगे की जाँच के लिए जब्त कर लिया। ‘इंडिया टुडे’ की खबर के अनुसार, दीपिका पादुकोण पूछताछ के दौरान 3 बार रो पड़ीं। इसके बाद जाँच एजेंसी के अधिकारियों ने उन्हें आगाह किया कि वो यहाँ पर अपना इमोशनल कार्ड न खेलें। दीपिका पादुकोण ने व्हाट्सप्प चैट्स में किए अपने मैसेज्स की स्वीकारोक्ति भी की।

हालाँकि, दीपिका पादुकोण ने किसी भी प्रकार का ड्रग्स कंज्यूम करने की बात से इनकार कर दिया। उनके मैनेजर करिश्मा प्रकाश के साथ उनके चैट्स वायरल हुए थे, जिसमें वो ‘माल’ की बातें कर रही थीं। इन तीनों अभिनेत्रियों के अलावा रकुल प्रीत सिंह, जया साहा और साइमन खम्भा के भी मोबाइल फोन्स जब्त कर लिए गए हैं। NCB ने दीपिका पादुकोण और करिश्मा को आमने-सामने बिठा कर उनके ड्रग्स वाले चैट को लेकर पूछताछ की।

दीपिका पादुकोण इससे पहल गोवा में एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थीं, जहाँ से समन मिलने के बाद वो अपने पति रणवीर सिंह के साथ मुंबई पहुँचीं। शुरुआत में रणवीर ने भी अर्जी दी थी कि उनकी पत्नी से पूछताछ के दौरान उन्हें कमरे में रहने की अनुमति दी जाए क्योंकि वो कई बार घबरा जाती हैं, जिसे अस्वीकृत कर दिया गया। हालाँकि, रणवीर भी एक गाड़ी से NCB दफ्तर तक पहुँचे थे लेकिन वो अंदर नहीं गए।

दीपिका पादुकोण ने इस बात से भी इनकार कर दिया कि उन्होंने किसी को ड्रग्स की सप्लाई की है। उनसे सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर कोई सवाल नहीं किए गए। इसी तरह श्रद्धा कपूर भी सुबह 11:45 बजे NCB के दफ्तर पहुँचीं। 6 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें 5:45 में छोड़ा गया। सारा अली खान से दोपहर के 1 बजे पूछताछ शुरू हुई और वो भी 5:45 बजे शाम को ही पूछताछ के बाद घर के लिए निकलीं।

सारा अली खान ने NCB के समक्ष पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वो सिगरेट पीती हैं लेकिन ड्रग्स लेने की बात को उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि को पार्टियों के दौरान अक्सर दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत से मिलती-जुलती रहती थीं और फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग के दौरान वो उनके काफी करीब भी आ गई थीं। रिया के उन आरोपों का उन्होंने जवाब नहीं दिया, जिसमें उन्होंने सारा पर सुशांत का ड्रग्स से परिचय कराने के आरोप लगाए थे।

उधर रकुल प्रीत सिंह दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका लेकर पहुँची हैं, जिसमें उन्होंने माँग की है कि जाँच एजेंसी द्वारा उनसे जो भी पूछताछ हुई है, उस बारे में मीडिया डरा कुछ भी प्रसारित करने, छापने या प्रकाशित करने पर रोक लगाई जाए। दीपिका के प्रोफेशनल कार्यों को देखने वाली टैलेंट मैनेजमेंट कपनी KWAN भी जाँच एजेंसी के रडार पर है। जया साहा को इस नेटवर्क का किंगपिन भी माना जा रहा है। उधर करण जौहर के करीबी क्षितिज प्रसाद के गिरफ्तार होने के बाद उनपर भी उँगली उठ रही है।

करण जौहर ने भी बयान जारी करते हुए कहा है कि मीडिया रिपोर्ट्स में भ्रामक दावा किया जा रहा है कि जुलाई 28, 2019 को उनके यहाँ हुई पार्टी के दौरान ड्रग्स का इस्तेमाल हुआ था। बता दें कि इस पार्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रहा है। उन्होंने इस दावे को गलत बताते हुए इसे अपने खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके परिवार और कम्पनी पर झूठा कलंक लगाने के मीडिया ऐसा कर रही है।

MP रवि किशन को ड्रग्स पर बोलने के कारण मिल रही धमकियाँ, कहा- बच्चों के भविष्य के लिए 2-5 गोली भी मार दी जाए तो चिंता नहीं

गोरखपुर से बीजेपी सांसद और एक्टर रवि किशन ने हाल ही में खत्म हुए संसद के मॉनसून सत्र में बॉलीवुड में ड्रग्स का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि देश के युवाओं के भविष्य के लिए इस मामले की गहराई से जाँच करने की बेहद जरूरत है। अब रवि किशन को ड्रग्स का मामला उठाने की वजह से कथित तौर पर धमकी मिल रही है। धमकियों पर उन्होंने कहा कि देश के भविष्य के लिए 2-5 गोली खा लेंगे तो कोई चिंता नहीं है।

जान से मारने की मिल रही धमकियों के बारे में पूछे गए एक सवाल पर शनिवार (सितंबर 26, 2020) को न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा, “मैं सही समय आने पर इस बारे में बात करूँगा। हमने देश के बच्चों के भविष्य के लिए, अपने भारत के लिए, फिल्म इंडस्ट्री के बच्चों के लिए, युवाओं के लिए आवाज उठाई है। उसमें हमने ये नहीं सोचा कि मुझे कोई जान से मार देगा। अगर कोई मार भी देता है तो देश के बच्चों के भविष्य के लिए अगर दो-पाँच गोली भी खा लेंगे तो कोई चिंता नहीं है।”

रवि किशन शुक्रवार (सितंबर 25, 2020) को दिल्ली से गोरखपुर आए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। ऐसा माना जा रहा है कि किसी धमकी भरे फोन के बाद वो योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुँचे थे। सीएम से मुलाकात के बाद रवि किशन ने कहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ड्रग्स के कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ जो करवाई के निर्देश दिए हैं, वो उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं। उनके नेतृत्व में प्रदेश में ऐसे अराजक तत्वों का सफाया होगा जो इस काले कारोबार से जुड़े हैं।

रवि किशन ने संसद में कहा था, “नशीले पदार्थों की तस्करी और लत की समस्या बढ़ रही है। देश के युवाओं को नष्ट करने के लिए षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। हमारे पड़ोसी देश इसमें योगदान दे रहे हैं। पाकिस्तान और चीन से ड्रग्स की तस्करी हर साल की जाती है। इसे पंजाब और नेपाल के जरिए भारत में लाया जाता है।” उन्होंने कहा था, “ड्रग की लत फिल्म इंडस्ट्री में भी है। कई लोगों को पकड़ा गया है। NCB बहुत अच्छा काम कर रहा है। दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर, सजा देने और पड़ोसी देशों की साजिश के अंत के लिए मैं केंद्र सरकार से सख्त कार्रवाई करने का आग्रह करता हूँ।”

रवि किशन के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री जया बच्चन ने उन पर जमकर हमला बोला था। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद कर रहे हैं। वहीं फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने आरोप लगाया था कि रवि किशन खुद वीड लेते थे। अब नेता बन गए हैं तो शायद ये सब ना करते हों।

रवि किशन ने पिछले दिनों नेपोटिज्म पर बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म इतना ज्यादा हावी है कि उन्हें अपना सरनेम (शुक्ला) तक हटाना पड़ा था। भाजपा नेता ने बताया कि उन्होंने नेपोटिज्म के कारण बहुत कुछ खोया है। उन्होंने कहा कि वो इंडस्ट्री में रुपए कमाने और अपने माँ-बाप का नाम रौशन करने आए थे। उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद वो एक गरीब परिवार से मुंबई आए थे, इसीलिए उन्हें यहाँ आकर अपना सरनेम हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

छत्तीसगढ़: वन भूमि अतिक्रमण को लेकर आदिवासी और ईसाई समुदायों में झड़प, मामले को जबरन दिया गया साम्प्रदयिक रंग

छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग के कोंडागाँव जिले के कथित तौर पर वन भूमि अतिक्रमण के मुद्दे पर कुछ गाँवों के बीच आपस में झड़प का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक समूह के लोगों द्वारा 22 और 23 सितंबर को दूसरे समूह से संबंधित कुछ परिवारों के घरों को कथित तौर पर लूट लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ स्थानीय आदिवासी लोगों द्वारा कथित रूप से आदिवासी संस्कृति का पालन नहीं करने पर ईसाई परिवारों पर हमला किया गया था। कथित तौर पर आदिवासी ग्रामीणों ने ईसाई परिवारों से कहा कि यदि वे उनके साथ रहना चाहते है तो वे मूल देवताओं की पूजा करें।

हालाँकि, इस मामले को लेकर जिला पुलिस ने कहा कि मुद्दा काकडाबेड़ा, सिंगनपुर और सिलाती गाँवों के दो समूहों के बीच वन भूमि अतिक्रमण का है, न कि समुदायों के बीच झगड़े का। पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी ने कहा कि स्थिति को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया है।

इस मामले में पुलिस द्वारा अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है क्योंकि घटनाओं के विवरण का पता लगाने के लिए प्रारंभिक जाँच की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ परिवार ऐसे हैं जो पिछले 6 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाँवों में आदिवासी समुदाय के स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन नहीं करने वाले ईसाई परिवारों के साथ कुछ मुद्दे थे।

आईजी ने आश्वासन दिया कि शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया, “वरिष्ठ अधिकारी स्थिति के बारे में जानकारी होने के बाद बुधवार को मौके पर पहुँचे और ग्रामीणों को शांत किया। वर्तमान में स्थिति को काबू में कर लिया गया है।”

छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने दावा किया कि हिंसा पुलिस की मौजूदगी में हुई और कुछ परिवार रायपुर भाग गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण ईसाई परिवारों पर ईसाई धर्म छोड़ने या अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को मिलने वाले लाभों से वंचित करने का दबाव डाल रहे थे।

हालाँकि, कोंडागांव के एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने सीसीएफ के उन दावों को खारिज कर दिया कि हिंसा पुलिस की मौजूदगी में हुई थी। उन्होंने कहा कि यह एक सांप्रदायिक हिंसा नहीं थी, बल्कि मामला भूमि अतिक्रमण से संबंधित था।

वहीं CCF के अध्यक्ष पन्नालाल ने एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज या जिला जज से उच्चस्तरीय जाँच के साथ-साथ ईसाई परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपए के मुआवजे की माँग की है।

द वायर ने एडिटेड वीडियो से कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले के बारे में फैलाई फर्जी खबरें, यहाँ जाने सच

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि बिहार की राजधानी पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी (JAP) के कुछ सदस्यों के साथ मारपीट की।

यह हमला कथित रूप से उस समय हुआ जब मोदी सरकार द्वारा पारित कृषि बिलों के विरोध में JAP नेता पप्पू यादव पटना में एक ट्रैक्टर रैली निकाल रहे थे।

बिहार के पटना में किसान बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा तथाकथित हमलों का यह वीडियो ‘National Dastak’ नामक न्यूज पोर्टल ने ट्वीट किया था। घटना के वीडियो को पोस्ट करते हुए, समाचार संगठन ने दावा किया था कि मोदी समर्थकों ने कृषि बिलों का विरोध करने के लिए कुछ लोगों पर लाठियों से हमला किया था।

1:30 मिनट के इस वीडियो को काफी चतुराई से एडिट किया गया। इसमें देखा जा सकता है कि लोगों के एक समूह को पार्टी के कार्यकर्ताओं को लाठी से पिटाई करने के लिए JAP पोस्टर वाले वाहन पर चढ़ रहे थे। कथित तौर पर ये लोग भाजपा कार्यकर्ता थे।

जैसे ही कथित घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, ‘लिबरल-सेक्युलर’ समुदाय के सदस्य पूरी घटना के बारे में गलत जानकारी फैलाने में जुट गए कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने किसान बिल का विरोध करने के लिए विपक्षी दलों के सदस्यों पर हमला किया। 

वामपंथी वेबसाइट ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक -सिद्धार्थ वरदराजन भी इस होड़ में शामिल हो गए, जिनका फेक न्यूज़ फ़ैलाने का पुराना इतिहास रहा है। वरदराजन ने ‘नेशनल दस्तक’ द्वारा शेयर किए गए वीडियो को पोस्ट किया और दावा किया कि विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया हमला ‘काम पर फासीवाद’ के अलावा कुछ नहीं था।

Image Source: Siddharth Varadarajan

एक अन्य स्व-घोषित ‘पत्रकार ’और इस्लामवादी –आरफ़ा खानम शेरवानी, ‘द वायर’ के अपने संपादक के नक्शेकदम पर चलते हुए, उसी भ्रामक वीडियो को यह दावा करने के लिए पोस्ट कर दिया कि किसान बिल समर्थक कृषि बिल विरोधियों पर हमला कर रहे हैं।

हिंदू और भाजपा विरोधी के रूप में पहचानी जाने वाली आरफा खानम शेरवानी ने एंटी-सीएए और कृषि विरोधी बिल विरोधों के बीच एक समानता बताते हुए संकेत दिया कि कृषि बिल समर्थकों ने कृषि बिल विरोधियों पर उसी तरह से हमला किया, जैसा उन्होंने सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ किया। शेरवानी ने पूछा कि क्या लोगों को ‘गरीब-विरोधी और जन-विरोधी कानूनों के पारित होने’ के खिलाफ विरोध करने की अनुमति नहीं है।

Image Source: Arfa Khanum Sherwani

फर्जी-न्यूज़ पेडलर और अदालत के अवमानना मामले में दोषी प्रशांत भूषण ने भी भाजपा-विरोधी एजेंडा फैलाने के लिए एक बार फिर से बेशर्मी के साथ सोशल मीडिया पर आए और दावा किया कि विरोध कर रहे तथाकथित ‘किसानों’ को कुछ लोगों ने पीटा, जिन्हें उन्होंने स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में ‘मोदी भक्तों’ और ‘गुंडों’ की संज्ञा दी।

Image Source: Prashant Bhushan

हालाँकि, बीजेपी सरकार पर हमला करने और बिहार विधानसभा चुनावों से पहले अपने भाजपा-विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने की जल्दी में, वरदराजन और भूषण जैसे वामपंथी ‘कार्यकर्ताओं’ ने सावधानीपूर्वक एडिटेड वीडियो का सहारा लिया, जिसमें बीजेपी कार्यकर्ताओं को हमलावर के रूप में दिखाया गया था और विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ता को पीड़ित के रूप में।

फैक्ट-चेक

ऑपइंडिया ने पटना बिहार में पप्पू यादव द्वारा आयोजित किसान बिल के विरोध प्रदर्शन का ओरिजिनल वीडियो हासिल किया, जहाँ पर कथित तौर पर यह घटना हुई थी। इसमें देखा जा सकता है कि विपक्षी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं का समूह पटना के वीरचंद पटेल मार्ग स्थित भाजपा कार्यालय के भीतर घुसने की कोशिश कर रहा था।

गुस्साए कृषि बिल विरोधियों को भाजपा कार्यालय के गेट पर नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। जबकि बिहार पुलिस JAP के सदस्यों को वहाँ से हटा रही है, जिन्होंने कथित रूप से पटना में भाजपा कार्यालय पर हमला किया था।

पार्टी कार्यालय पर हमला के बाद कृषि बिल विरोधियों से खुद को बचाव करने के लिए बीजेपी कार्यकर्ता सड़क पर निकल आए। बचाव के क्रम में ही वो JAP की गाड़ी पर चढ़ गए, इस दौरान JAP के सदस्यों के साथ भिड़ंत हो गई।

यह भी देखा जा सकता है कि विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पटना की सड़कों पर ट्रैफिक जाम कर दिया था। कुछ भाजपा कार्यकर्ता, जो पार्टी कार्यालय के खिलाफ JAP हमले का बचाव कर रहे थे, उन्हें भी ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’, ‘भाजपा जिंदाबाद’ कहते सुना गया।

इस घटना के दोनों पक्षों की रिपोर्ट करने के बजाय, सिद्धार्थ वरदराजन और आरफा शेरवानी जैसे तथाकथित ‘निष्पक्ष’ पत्रकारों ने जानबूझकर भाजपा कार्यकर्ताओं पर प्रारंभिक हमले को नजरअंदाज कर दिया और इस घटना के बारे में आधे सच को आगे फैलाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था।

ड्रग्स में संलिप्त कलाकारों को निर्माता नहीं दें काम, सुशांत के मामले को भी जल्द सुलझाए CBI: रामदास अठावले

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शनिवार को सुशांत मामले की जाँच को लेकर सीबीआई पर निशाना साधा है। सुशांत की कथित हत्या के मामले में सामने आए ड्रग्स के एंगल ने कई फिल्मी हस्तियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है लेकिन इन सब में मुख्य मुद्दा सुशांत की मौत के पीछे छुपे रहस्य का मामला दब सा गया है। जिसपर पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने दिशा के मामले में भी सीबीआई की जाँच की माँग की है।

वहीं अब केंद्रीय मंत्री ने कहा, “नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की जाँच चल रही है। मुझे नहीं पता CBI क्या कर रही है। NCB की जाँच चल रही है लेकिन सुशांत की मौत मामले की जाँच भी होनी चाहिए। CBI की टीम को ज्यादा समय नहीं लेना चाहिए।”

सुशांत की मृत्यु से पहले उनके पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की आत्महत्या के मामले को लेकर अठावले ने कहा, “वो मुंबई में रहती थीं। आठ जून को उनकी हत्या हुई। उसी दिन उनके घर में पार्टी थी। पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला है। अगर किसी के घर में पार्टी हो तो वो उस दिन आत्महत्या क्यों करेगा? दिशा सालियान की मौत की सीबीआई जाँच भी होनी चाहिए।”

ड्रग्स में शामिल कलाकारों को लेकर उन्होंने यह भी कहा, “ड्रग्स में संलिप्त कलाकारों को निर्माता काम नहीं दें। ड्रग्स में संलिप्त कलाकारों को फिल्में देना बंद नहीं हुआ तो आरपीआई कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराते हुए शूटिंग बंद करने भी पहुँचेंगे।”

पूछताछ के लिए बुलाई जा रहीं टॉप अभिनेत्रियों को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, “ड्रग्स के उपयोग के संदेह पर NCB द्वारा केवल महिला एक्ट्रेस से पूछताछ की जा रही है। अगर इसमें अभिनेताओं के नाम हैं, तो उनसे भी पूछताछ की जानी चाहिए। पुरुषों और महिलाओं के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। लेकिन केवल अभिनेत्रियों के नाम कैसे आ रहे हैं, इस सवाल को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।”

बता दें कि 8 जून को दिशा सालियान की उनके अपार्टमेंट की 14 वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। दिशा सालियान, सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। सुशांत 14 जून को बांद्रा स्थित अपने किराए के फ्लैट में फंदे पर लटके पाए गए थे।

वहीं अब सामने आए ड्रग्स मामले में NCB ने आज क्षितिज रवि प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया है। क्षितिज धर्मा प्रोडक्शन में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर (EP) थे। उसका नाम ड्रग पेडलर अंकुश अरनेजा ने लिया था। इसके बाद एनसीबी के सामने पूछताछ में अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने भी उनके बारे में जानकारी दी थी।

मुख्तार अहमद से राहुल बनने की साजिश में वकील फातिमा ने की मदद: SIT को मिली लव जिहाद से जुड़े मास्टरमाइंड की कड़ी

उत्तरप्रदेश में शादी के बहाने जबरन धर्मांतरण की बढ़ती संख्या की जाँच के लिए कानपुर पुलिस ने आठ सदस्यीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया है। वहीं अब जाँचदल ने लव जिहाद मामले के आरोपित का कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में एक महिला वकील फातिमा का पता लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस को आशंका है कि एडवोकेट फातिमा ने कानपुर और आसपास के अन्य इलाकों से सामने आए कई लव जिहाद मामलों में आरोपितों की मदद की है। पुलिस उसके फ़ोन रिकॉर्ड को खंगाला रहीं है। पुलिस इस महिला एडवोकेट के जरिए लव जिहाद के मास्टरमाइंड तक पहुँचना चाहती है जो कि संगठित अपराध को अंजाम दे रहे हैं।

गौरतलब है कि यह खुलासा कानपुर के लव जिहाद मामले के बाद सामने आया है। जहाँ नौबस्ता मछलियाँ के रहने वाले 32 साल के मुख्तार अहमद ने हिंदू लड़की से राहुल बन कर दोस्ती की थी। 22 वर्षीय लड़की आवास विकास में रहने वाली है। साथ ही वह पॉलिटेक्निक की छात्रा थी। दोस्ती के बाद मुख्तार ने लड़की को झूठे दावे करते हुए अपने प्यार में फँसा लिया और उसे धर्म के प्रति बरगलाने लगा। अहमद ने लड़की का ब्रेनवाश किया और बिना किसी की जानकारी के 17 अप्रैल 2019 को कोर्ट मैरिज कर ली। जिसके बाद यह बात सबसे छिपाते हुए दोनों अपने-अपने घर रहने लगे।

वहीं शादी के बाद लड़की को हाल ही में पता चला कि जिस मुख्तार के प्यार में आकर उसने अपने परिजनों को बिना बताए शादी की थी वह पहले से ही शादीशुदा है और उसके बच्चें भी है। इतना ही नहीं मुख्तार की पहली पत्नी भी दूसरे समुदाय की ही निकली।

पीड़िता के पिता ने घटना की जानकारी पुलिस को देते हुए आरोपित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया था। पुलिस की पूछताछ में जब युवक ने अपना असली नाम मुख्तार अहमद बताया तो स्वजनों के होश उड़ गए थे। जब लड़की से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि मुख्तार ने उससे राहुल बनकर दोस्ती की थी। उसने इस तरह से मुझे अपने काबू में कर लिया था कि वह जो कहता मैं करती चली जाती। उसने फिर परिजनों से अपने मरियम फातिमा बनने को लेकर भी खुलासा किया।

वहीं पुलिस को लव जिहाद के इस घिनौने खेल के पीछे पाकिस्तानी संगठन का पता चला है। यह संगठन मुस्लिम युवकों को हिंदू लड़कियों का ब्रेनवाश और धर्मांतरण करने के लिए फंडिंग करता था। साथ ही इस पूरे मामले की साजिश के पीछे एक मस्जिद का भी नाम सामने आया है। पुलिस मुखबिरों से मामले से जुड़ी और जानकारी पता लगाने की कोशिश कर रहीं है।

मीडिया अगर किसी भी सेलेब्रिटी की गाड़ी का पीछा करेगी तो मुंबई पुलिस गाड़ी जब्त कर ड्राइवर पर करेगी कार्रवाई: DCP

मुंबई पुलिस ने शनिवार (सितंबर 26, 2020) को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा ड्रग्स की जाँच के लिए बुलाए जाने वाले सेलेब्स के वाहनों का पीछा करने के खिलाफ मीडिया वाहनों को चेतावनी दी। एक सख्त बयान में, डीसीपी (जोन I) संग्राम सिंह निशंदर ने कहा कि आज पुलिस ने कई मीडिया वाहनों का अवलोकन किया, जिन्होंने एनसीबी जाँच के लिए बुलाए गए लोगों का पीछा करते हुए पाए गए।

संग्रामसिंह निशंदर ने कहा, “आज दोपहर को कई मीडिया चैनल्स पूछताछ के लिए बुलाए गए लोगों का पीछा करते हुए पाए गए। कई गाड़ियाँ पीछे से साइड से, उतर कर, अपनी जान खतरे में डालकर, सामने वाली की जान खतरे में डालकर और सड़क पर चलने वाले सामान्य लोगों की जान खतरे में डालकर ये काम कर रहे हैं। इसे हम कदापि सहन नहीं करेंगे। अगर आगे से इस तरह का काम करते हुए किसी को पाया जाता है, तो हम उस गाड़ी को जब्त करेंगे और उसके ड्राइवर पर कार्रवाई करेंगे।”

ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से, बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच के बाद से, कुछ मीडिया-वाहनों द्वारा इस तरह से पीछा किया जा रहा है। उनमें रिया चक्रवर्ती, दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और कई अन्य जैसे सेलेब्स शामिल थे, जिन्हें सुशांत मामले में ड्रग एंगल जाँच के संबंध में बुलाया गया था।

सुशांत सिंह राजपूत केस में ड्रग्स एंगल की जाँच करने के लिए आई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की एंट्री ने बॉलीवुड में ड्रग्स के धंधे को उजागर कर दिया है। ड्रग्स मामले में अब एनसीबी की रडार पर बॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार्स हैं, जिनमें से अब कुछ नाम सामने आ गए हैं। सुशांत सिंह राजपूत ड्रग्स केस में रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद अब दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुल प्रीत सिंह जैसी फिल्म अभिनत्रियों के नाम इसमें आए हैं।

जानकारी के मुताबिक, दीपिका ने एनसीबी पूछताछ के दौरान ड्रग्स चैट की बात मान ली है। ड्रग्स के रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए एनसीबी ने आज दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर को पूछताछ के लिए बुलाया था।

ये तीनों अभिनेत्रियाँ आज यानी शनिवार को जाँच में शामिल होने पहुँची थी। इन सभी लोगों से एनसीबी की पूछताछ खत्म हो गई है। एनसीबी ने दीपिका से लगभग 5.30 घंटे तक उनसे पूछताछ की है। जाँच एजेंसी ने दीपिका पादुकोण और करिश्मा प्रकाश को आमने-सामने बैठाकर 2017 में की गई चैट के बारे में पूछताछ की। 

बताया जा रहा है कि अभिनेत्री ने जाँच एजेंसी को संतोषजनक जवाब नहीं दिया, जिसकी वजह से उनसे दूसरे राउंड की पूछताछ के लिए रविवार (सितंबर 27, 2020) को भी बुलाया गया है। सारा अली खान से लगभग चार घंटे और श्रद्धा से भी लगभग इतनी ही देर पूछताछ हुई। बता दें कि शुक्रवार को रकुल प्रीत सिंह से चार घंटे तक पूछताछ हुई थी।

CM योगी को धमकाने वाला ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार: मुख़्तार अंसारी को 24 घंटे के भीतर रिहा करने की दी थी धमकी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी देने वाले को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित एटा जिले का रहने वाला है। पेशे से ट्रक ड्राइवर अमरपाल को पुलिस गिरफ्तार करके लखनऊ के हजरतगंज थाने लाई है। उससे पूछताछ की जा रही है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, हजरतगंज पुलिस स्टेशन के एसएचओ अंजलि पांडे ने बताया कि अपराधी को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है। जिसकी पहचान अमरपाल के रूप में हुई है। वह इटावा का रहने वाला है।

पुलिस पूछताछ में अपराधी ने बताया कि उसने नशे की धुन में धमकी भरे व्हाट्सअप मैसेज यूपी के 112 नंबर पर भेजा था। उसने किसी के साथ कोई संबंध होने से इनकार किया है।

गौरतलब है कि बुधवार (सितम्बर 23, 2020) की सुबह 9:56 से लेकर 10:11 के बीच धमकी भरे मैसेज मिले थे। इनमें सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था। साथ ही धमकी देते हुए कहा गया था कि मऊ से 5 बार विधायक रहे मुख़्तार अंसारी को 24 घंटे के भीतर रिहा किया जाए।

अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो शुक्रवार (सितम्बर 25, 2020) को सरकार ‘मिटा’ दी जाएगी। पुलिस ने उस नंबर के डिटेल्स पता कर लिए हैं, जिससे ये मैसेज भेजे गए थे। पुलिस की एक टीम आरोपित की गिरफ़्तारी के लिए गठित कर दी गई थी। जिसके बाद आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया गया है।

UN में स्थायी सीट के लिए PM मोदी ने ठोकी ताल, पूछा- कब तक इंतजार करेगा भारत, पाक और चीन पर भी साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (सितंबर 26, 2020) को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया अलग दौर से गुजर रहा है। पूरी दुनिया कोरोना महामारी से निपट रही है। उन्होंने कहा कि आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तब की परिस्थितियों में हुआ था, उसका स्वरूप क्या आज भी प्रासंगिक है?

पीएम मोदी ने कहा कि अगर हम बीते 75 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों का मूल्यांकन करें, तो अनेक उपलब्धियाँ दिखाई देती हैं। अनेक ऐसे उदाहरण भी हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के सामने गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता खड़ी करते हैं। ये बात सही है कि कहने को तो तीसरा विश्व युद्ध नहीं हुआ, लेकिन इस बात को नकार नहीं सकते कि अनेकों युद्ध हुए, अनेकों गृहयुद्ध भी हुए। कितने ही आतंकी हमलों ने खून की नदियाँ बहती रहीं। इन युद्धों में, इन हमलों में, जो मारे गए, वो हमारी-आपकी तरह इंसान ही थे।

वो आगे कहते हैं कि पिछले 8-9 महीने से पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से संघर्ष कर रहा है। इस वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र कहाँ है? संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रियाओं में बदलाव, व्यवस्थाओं में बदलाव, स्वरूप में बदलाव, आज समय की माँग है। भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र के रिफॉर्म्स को लेकर जो प्रोसेस चल रहा है, उसके पूरा होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। भारत के लोग चिंतित हैं कि क्या ये प्रोसेस कभी लॉजिकल ऐंड तक पहुँच पाएगा। आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के डिसिजन मेकिंग स्ट्रक्चर से अलग रखा जाएगा।

वो लाखों मासूम बच्चे जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़कर चले गए। कितने ही लोगों को अपने जीवन भर की पूँजी गँवानी पड़ी, अपने सपनों का घर छोड़ना पड़ा। उस समय और आज भी, संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे? पिछले 8-9 महीने से पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से संघर्ष कर रहा है। इस वैश्विक महामारी से निपटने के प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र कहाँ है?

उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ 4-5 साल में 400 मिलियन से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना आसान नहीं था। लेकिन भारत ने ये करके दिखाया। सिर्फ 4-5 साल में 600 मिलियन लोगों को ओपन डिफिकेशन से मुक्त करना आसान नहीं था। लेकिन भारत ने ये करके दिखाया। भारत की आवाज़ मानवता, मानव जाति और मानवीय मूल्यों के दुश्मन- आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स, मनी लॉन्डरिंग के खिलाफ उठेगी।

पीएम मोदी ने कहा कि विश्व के सब से बड़े लोकतंत्र होने की प्रतिष्ठा और इसके अनुभव को हम विश्व हित के लिए उपयोग करेंगे। हमारा मार्ग जनकल्याण से जगकल्याण का है। भारत की आवाज़ हमेशा शांति, सुरक्षा, और समृद्धि के लिए उठेगी।

उन्होंने कहा, “विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के तौर पर आज मैं वैश्विक समुदाय को एक और आश्वासन देना चाहता हूँ। भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और वैक्सीन डिलिवरी क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के लिए काम आएगी। महामारी के इस मुश्किल समय में भी भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयाँ भेजीं हैं।”

पीएम आगे कहते हैं, “भारत जब किसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, तो वो किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होती। भारत जब विकास की साझेदारी मजबूत करता है, तो उसके पीछे किसी साथी देश को मजबूर करने की सोच नहीं होती। हम अपनी विकास यात्रा से मिले अनुभव साझा करने में कभी पीछे नहीं रहते। हम पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं। यह हमारी संस्कृति, संस्कार और सोच का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने हमेशा विश्व कल्याण को ही प्राथमिकता दी है।”

महामारी के बाद बनी परिस्थितियों के बाद हम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान, ग्लोबल इकॉनमी के लिए भी एक फोर्स मल्टिप्लायर होगा। भारत में ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी योजनाओं का लाभ, बिना किसी भेदभाव, प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे।

आज भारत अपने गाँवों के 150 मिलियन घरों में पाइप से पीने का पानी पहुँचाने का अभियान चला रहा है। कुछ दिन पहले ही भारत ने अपने 6 लाख गाँवों को ब्रॉडबैंड ऑप्टिकल फाइबर से कनेक्ट करने की बहुत बड़ी योजना की शुरुआत की है।

लवजिहाद के लिए पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी कर रहा करोड़ों की फंडिंग: कानपुर SIT जाँच में खुलासा

कानपुर शहर में हिन्दू लड़कियों को प्रेम संबंधों में फँसाकर जबरन धर्मपरिवर्तन कराने के खेल में पाकिस्तानी संगठनों का हाथ सामने आया है। एसआईटी (SIT) जाँच में मजहबी फरेब के इन मामलों में पाकिस्तानी कनेक्शन को लेकर कई चौकाने वाले खुलासे हुए है। खबरों के अनुसार, हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाने और उनके धर्मांतरण के लिए पाकिस्तानी संगठन फंडिग कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि मस्जिद से पूरी साजिश रची जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कानपुर में बढ़ते लव जिहाद के मामलों को देखते हुए मोहित अग्रवाल द्वारा जाँच पड़ताल के लिए एसआईटी की एक टीम का गठन किया गया था। एजेंसी की जाँच में 50 हज़ार से अधिक फॉलोवर्स वाले पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी का पता चला है। ये फॉलोवर्स पूरे शहर में घूम घूम कर अपने समुदाय के लोगों को इस्लाम धर्म के प्रति कट्टर बनाने और हिंदुओं के प्रति नफरत भरने और उन्हें बरगलाने का काम कर रहे है। एजेंडे के तहत उनके द्वारा भोली-भाली हिन्दू लड़कियों को फँसाने, इस्लाम कबूल करवाने के साथ ही कई हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा हैं।

एसआईटी के प्रभारी सीओ विकास पांडेय ने बताया कि सभी मामलों की जाँच करने के बाद पता चला कि सभी आरोपितों का जुड़ाव शहर की ऐसी मस्जिदों से है, जहाँ पाकिस्तान कट्टरपंथी विचारधारा के संगठन दावते इस्लामी का कब्जा है। संगठन के अनुयायी शहर का हेडक्वार्टर कही जाने वाली डिप्टी पड़ाव स्थित एक मस्जिद से संगठन का संचालन कर जबरन धर्मपरिवर्तन कराने की सोच का प्रचार प्रसार करते हैं।

लव जिहाद के पीछे के घिनौने सच को उजागर करते हुए उन्होंने आगे बताया कि हेडक्वार्टर से जुड़ी करीब दो दर्जन अन्य मस्जिदों में भी दावत ए इस्लामी का ही हस्तक्षेप होने की जानकारी मिली। जूही लाल कॉलोनी के सभी मामलों में आरोपितों और उनके परिजनों का जुड़ाव भी एक ही मस्जिद से होने की बात सामने आने के बाद एसआईटी ने अपनी जाँच का रुख इस ओर मोड़ दिया है। पहले भी इस संगठन का विरोधी घटनाओं से ताल्लुक पता लगने के बाद इसी जाँच में एटीएस जुटी हुई थी।

फंडिंग को लेकर SIT प्रभारी ने बताया कि थोड़े बहुत नहीं बल्कि इस्लामिक संगठन को देश से करोड़ों रुपयों का चंदा दिए जाने की बात का भी पता चला है। यह सारा पैसा SBI के एक एकाउंट में इकठ्ठा किया जाता है। जिसके जरिए शिकार बनाने वाले मजहबी युवकों को हिन्दू लड़कियों को जबर्दस्ती इस्लाम धर्म कबूल करवाने के लिए दबाव दिया जाता है। एसआईटी शहर से इस संगठन को दिए जाने वाले चंदे का भी डाटा खंगालने में जुटी है।

वहीं इस मामले में एसआईटी के एक और अधिकारी चीफ एसपी साउथ दीपक भूकर ने बताया कि सिर्फ दावत ए इस्लामी ही नहीं, लव जिहाद के खेल में कई संगठनों के विषय में जानकारी मिली है। जिनका पता लगाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इन संगठनों की गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। चौकाने वाली बात यह है कि इन संगठनों के विषय में जानकारी यू-ट्यूब पर भी उपलब्ध है। यूट्यूब के वीडियो में चंदे के लिए एकाउंट समेत कई जानकारी बताई गई है। शहर की मस्जिदों में मुखबिरों को सतर्क कर दिया गया है।