Monday, October 26, 2020
Home विचार सामाजिक मुद्दे टाइम्स में शामिल 'दादी' की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन...

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

82 वर्षीय बिलकिस और उनकी जैसी तमाम महिलाओं को कहाँ से पता होगा कि शाहीन बाग का चेहरा आने वाले समय में इतना भयंकर होने वाला है कि वह कई मासूमों की जान ले लेगा। उन्हें क्या मालूम था सफूरा जरगर, खालिद सैफी, उमर खालिद, ताहिर हुसैन जैसे तमाम पढ़े लिखे, समाज के 'प्रतिष्ठित' लोगों ने उन्हें और उनकी जैसी वृद्धाओं को कड़ाके की ठंड में क्यों बिठाया हुआ है........

पत्रकारिता के नाम पर इस्लामी प्रोपगेंडा चलाने वाली राणा अय्यूब ने ऐलान किया है कि वह शाहीन बाग की एक ‘दादी’ की तस्वीर फ्रेम करवाने वाली हैं। इन दादी का नाम बिलकिस है और इनकी उम्र 82 साल है। दादी ने शाहीन बाग में हुए सीएए विरोध प्रदर्शनों में अपना योगदान दिया था। 

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं। उनका कहना है कि वह खुद को खुशनसीब मानती है जो उन्हें यह मौका मिला।

अब राणा अय्यूब ने टाइम्स पर क्या लिखा है? इस पर पहले गौर करें। अपनी टिप्पणी में राणा ने 82 वर्षीय वृद्धा को उन सभी छात्र नेताओं की ताकत बताया है जिन्हें प्रदर्शनों के दौरान जेल में डाला गया। उन्होंने लिखा कि जब वह पहली बार बिलकिस से मिलीं, तो वृद्धा कई युवा महिलाओं की भीड़ के बीच में बैठीं थी। अय्यूब के मुताबिक, दादी बिलकिस ने उनसे कहा था, “मैं यहाँ तब तक बैठूँगी जब तक मेरी रगों में खून बहना नहीं बंद हो जाता, ताकि इस देश और दुनिया के बच्चे न्याय और समानता की हवा में साँस लें।”

दिलचस्प बात यह है कि राणा अय्यूब ने अपनी टिप्पणी के पहले पैरा और अंतिम पैरा में जिक्र दादी बिलकिस का किया, मगर बीच में चंद शब्दों में मोदी सरकार को लेकर अपनी घृणा भी व्यक्त कर दी। अय्यूब ने बड़ी चालाकी से इस छोटी सी टिप्पणी में एक बार फिर सीएए को लेकर झूठ फैलाया और लिखा कि मोदी सरकार ऐसा कानून ले आई है जिसके कारण मुस्लिमों के लिए देश की नागरिकता पाने का रास्ता बंद हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि करीब 10 महीने से चली आ रही बहस के बाद आज यह बात सब जान चुके हैं कि सीएए केवल प्रवासियों के लिए है। खासकर उन प्रवासियों के लिए जिन्हें पड़ोसी मुल्कों में उनके धर्म आदि के कारण प्रताड़ित किया गया और वह मजबूर होकर भारत में शरण लेने आए। सरकार ने संसद में इस कानून पर बार-बार समुदाय विशेष को आश्वस्त किया कि इससे उन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

बावजूद इसके राणा अय्यूब जैसे इस्लामी बुद्धिजीवि व लिबरल गिरोह के लोग अपना प्रोपगेंडा चलाते रहे और आज भी चला ही रहे हैं। उनके इन्हीं एजेंडों ने शाहीन बाग में एक नवजात की जान ली थी, लेकिन तब गलती मानने की बजाय यह फैला दिया गया कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में बच्चे को शहादत मिली। ये दादी भी उसी प्रदर्शन का चेहरा हैं।

साभार: ndtv india

जाहिर हैं इन्होंने अपने आप शाहीन बाग तक का रास्ता तय नहीं किया होगा। इन्हें किसी ने बकायदा बैठाकर तसल्ली से समझाया होगा और इनके भीतर डाला होगा कि देश खतरे में हैं और समुदाय के लोगों को उन जैसी बुजुर्गों की भी जरूरत है। इसलिए, खुशी की बात बस यह है कि भले ही दादी ने अपनी सर्दियाँ एक निराधार प्रदर्शन में बिताईं, लेकिन ये भी सोचिए कि उन्हें प्रदर्शन में बैठते हुए यही लग रहा था कि वह देश के बच्चों को बचाने निकली हैं उसके संविधान को बचाने निकली हैं।

शाहीन बाग में उनकी भूमिका की सराहना होनी चाहिए या नहीं? ये व्यापक बहस है। मगर, उनकी मंशा (देश को बचाने की) यदि वही थी जो उन्होंने अय्यूब को बताई तो वह और उनके जैसी ‘अंजान महिलाएँ’ वाकई तारीफ के लायक है कि देश को खतरे में देखकर घर से निकल पड़ीं।

दादी बिलकिस पर बात करते हुए आज हम उन रिपोर्ट का जिक्र नहीं कर रहे, जिन्होंने दावा किया कि शाहीन बाग में बैठने के लिए महिलाओं को पैसे और बिरयानी दी गई। हम इस पर भी चर्चा नहीं करेंगे कि उन आयोजनों के लिए फंड को लेकर कौन-कौन से संगठनों के नाम सामने आए और उससे पहले उनकी संलिप्ता किन देशविरोधी कार्यों में पाई जा चुकी थी। हम दादी बिलकिस पर लिखते हुए उन भड़काऊ भाषणों को भी कुछ समय के लिए दरकिनार कर रहे हैं जिन्होंने इन प्रदर्शनों में देश को तोड़ने की बात की।

मगर, इस बीच एक बिंदु पर विचार करने को जरूर कह रहे हैं कि आखिर सोचिए, 82 वर्षीय बिलकिस और उनकी जैसी तमाम महिलाओं को कहाँ से पता होगा कि शाहीन बाग का चेहरा आने वाले समय में इतना भयंकर होने वाला है कि वह कई मासूमों की जान ले लेगा। उन्हें क्या मालूम था सफूरा जरगर, खालिद सैफी, उमर खालिद, ताहिर हुसैन जैसे तमाम पढ़े लिखे, समाज के ‘प्रतिष्ठित’ लोगों ने उन्हें और उनकी जैसी वृद्धाओं को कड़ाके की ठंड में क्यों बिठाया हुआ है। उन्हें तो जो बताया गया वह उसी आधार पर देश के बच्चों को बचाने निकलीं वो भी अपनी उम्र को ताक पर रखकर।

आज राणा अय्यूब दादी को एक सशक्त चेहरा मानती हैं। उनके टाइम्स में शामिल होने पर गर्व करती हैं। हमें भी इससे कोई आपत्ति नहीं है। बस विचार करने वाली बात है कि जिस टाइम्स ने शाहीन बाग में बैठी बिलकिस को लेकर इतनी सकारात्मक टिप्पणी की है, उसी टाइम्स ने अपनी सूची में नरेंद्र मोदी का नाम शामिल करते हुए यह लिखा है कि उनके पीएम बन जाने से देश की स्थिरता और समसरता संदेह के घेरे में आ गई है।

पीएम मोदी को लेकर एक तरफ जहाँ टाइम्स ने ये दावा किया है कि उनके शासन से यह ज्ञात होता है कि उनके लिए हिंदुओं के सिवा कोई महत्त्व नहीं रखता। वहीं, दादी बिलकिस को लेकर कहा जाता है कि उन्होंने देश भर में शाहीन बाग जैसे ‘शांतिपूर्ण’ आंदोलनों को प्रेरित किया। अब एक तरफ मोदी सरकार पर ‘हिंदुत्व की राजनीति’ करने का आरोप और दूसरी ओर शाहीन बाग-‘एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन’!

दोनों लेखों में ऐसे विशेषणों का इस्तेमाल देखकर खुद अंदाजा लगाइए कि क्या लिबरल मीडिया खुद नहीं चाहता कि उनका पाखंड दुनिया के सामने उजागर हो। क्या उसे नहीं लगता कि एक ओर हिंदुओं का नाम लेकर मोदी सरकार को संशय के घेरे में रखना और दूसरी ओर समुदाय विशेष के आंदोलन को शांतिपूर्ण कहना उनकी दोहरे चेहरे का प्रमाण है? आखिर कितना उचित है उस आंदोलन को बार बार ‘शांतिपूर्ण’ कह देना जिसका अंतिम व भयावह चेहरा पहले ही पूरी दुनिया ने गत फरवरी में देख लिया है।

बिलकिस को आज चेहरा बनाकर टाइम्स ने भले ही शाहीन बाग की सभी प्रदर्शनकारियों को सम्मान दिया हो, पूरी बहस को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की हो, सवाल उठाने वालों के मुँह पर तमांचा जैसा बताया हो। मगर, इस भ्रम में यह भी नहीं भूला जाना चाहिए कि उनकी जैसी वृद्धाओं की आड़ में ऐसी ‘दंगाई’ महिलाएँ भी उस प्रदर्शन का हिस्सा बनीं थी, जिन्होंने पहले शाहीन बाग में अपनी उपस्थित दर्ज करवाई। फिर गाड़ियों में भरकर जाफराबाद पहुँची और वहाँ अपना हिंसात्मक चेहरा दिखाया।

दिल्ली दंगों पर आधारित मोनिका अरोड़ा की किताब बताती है कि उस दिन ऐसी ही प्रदर्शनकारी महिलाओं की भीड़ ने बुर्के के अंदर तमाम ईंट पत्थर छिपाए थे और ‘शांतिपूर्ण’ प्रदर्शन को अंजाम तक पहुँचाने के लिए कॉन्सटेबल रतन लाल को मौत के घाट उतार दिया था व अन्य पुलिस अधिकारियों पर जानलेवा हमला बोलकर दंगे भड़काए थे। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट कहती है कि इन महिलाओं को जहाँगीरपुरी से इकट्ठा करके लाया गया था। ये संख्या में 250-300 थीं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बुलंदशहर की चुनावी रैली में भिड़े भीम-AIMIM: दिलशाद पर हाजी यामीन समर्थकों का जानलेवा हमला

बुलंदशहर में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के काफिले पर फायरिंग की खबर के साथ ही AIMIM प्रत्याशी दिलशाद अहमद पर भी जानलेवा हमले की खबर सामने आई हैं।

नवरात्र में ‘हिंदू देवी’ की गोद में शराब और हाथ में गाँजा, फोटोग्राफर डिया जॉन ने कहा – ‘महिला आजादी दिखाना था मकसद’

“महिलाओं को देवी माना जाता है लेकिन उनके साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है? उनके व्यक्तित्व को निर्वस्त्र किया जाता है।"

‘मिया म्यूजियम’ चाहिए कॉन्ग्रेसी MLA शेरमन अली को, असम सरकार ने खारिज की माँग

“...कोई मिया संग्रहालय स्थापित नहीं किया जाएगा। संग्रहालयों के प्रबंध विभाग किसी भी मिया संग्रहालय की स्थापना नहीं करेंगे।"

नवरात्रि में महिलाओं की पूजा, अन्य दिन रेप: कार्टून से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली वकील दीपिका पर FIR

जम्मू कश्मीर पुलिस ने दीपिका राजावत के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है। उनके ख़िलाफ़ धारा 505 (बी)(2), 294 और 295 के तहत मामला दर्ज हुआ है।

लालू यादव के 3 बकरों की बलि, मुझे मारने के लिए कराई थी तांत्रिक पूजा: सुशील मोदी

"लालू को जनता पर भरोसा नहीं, इसलिए वे तंत्र-मंत्र, पशुबलि और प्रेत साधना जैसे कर्म-कांड कराते रहे हैं।" - सुशील मोदी के इस ट्वीट के बाद...

मंदिर तोड़ कर मूर्ति तोड़ी… नवरात्र की पूजा नहीं होने दी: मेवात की घटना, पुलिस ने कहा – ‘सिर्फ मूर्ति चोरी हुई है’

2016 में भी ऐसी ही घटना घटी थी। तब लोगों ने समझौता कर लिया था और मुस्लिम समुदाय ने हिंदुओं के सामने घटना का खेद प्रकट किया था

प्रचलित ख़बरें

जब रावण ने पत्थर पर लिटा कर अपनी बहू का ही बलात्कार किया… वो श्राप जो हमेशा उसके साथ रहा

जानिए वाल्मीकि रामायण की उस कहानी के बारे में, जो 'रावण ने सीता को छुआ तक नहीं' वाले नैरेटिव को ध्वस्त करती है। रावण विद्वान था, संगीत का ज्ञानी था और शिवभक्त था। लेकिन, उसने स्त्रियों को कभी सम्मान नहीं दिया और उन्हें उपभोग की वस्तु समझा।

Video: मजार के अंदर सेक्स रैकेट, नासिर उर्फ़ काले बाबा को लोगों ने रंगे-हाथ पकड़ा

नासिर उर्फ काले बाबा मजार में लंबे समय से देह व्यापार का धंधा चला रहा था। स्थानीय लोगों ने वहाँ देखा कि एक महिला और युवक आपत्तिजनक हालत में लिप्त थे।

वो इंडस्ट्री का डॉन है.. कितनों की जिंदगी बर्बाद की, भाँजा ड्रग्स-लड़कियाँ सप्लाई करता है: महेश भट्ट की रिश्तेदार का आरोप

लवीना लोध ने वीडियो शेयर करके दावा किया है महेश भट्ट और उनका पूरा परिवार गलत कामों में लिप्त रहता है। लवीना ने महेश भट्ट को इंडस्ट्री का डॉन बताया है।

मजार के अंदर सेक्स रैकेट, मौलाना नासिर पकड़ाया भी रंगे-हाथ… लेकिन TOI ने ‘तांत्रिक’ (हिंदू) लिख कर फैलाया भ्रम

पूरी खबर में एक बात शुरू से ही स्पष्ट है कि आरोपित मजार में रहता है और उसका नाम नासिर है। लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया उसे तांत्रिक लिख कर...

फ्रांस के राष्ट्रपति ने इस्लाम के बारे में जो कहा, वही बात हर राष्ट्राध्यक्ष को खुल कर बोलनी चाहिए

इमैनुअल मैक्राँ ने वह कहा जो सत्य है। इस्लाम को उसके मूल रूप में जानना और समझना, उससे घृणा करना कैसे हो गया!

AajTak बड़े-बड़े अक्षरों में लिख कर और बोल कर Live माफी माँगे: सुशांत के फेक ट्वीट पर NBSA का आदेश

सुशांत मामले में फेक न्यूज़ चलाने के लिए 'न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBSA)' ने 'आज तक' न्यूज़ चैनल को निर्देश दिया है कि वो माफ़ी माँगे।
- विज्ञापन -

बुलंदशहर की चुनावी रैली में भिड़े भीम-AIMIM: दिलशाद पर हाजी यामीन समर्थकों का जानलेवा हमला

बुलंदशहर में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के काफिले पर फायरिंग की खबर के साथ ही AIMIM प्रत्याशी दिलशाद अहमद पर भी जानलेवा हमले की खबर सामने आई हैं।

नवरात्र में ‘हिंदू देवी’ की गोद में शराब और हाथ में गाँजा, फोटोग्राफर डिया जॉन ने कहा – ‘महिला आजादी दिखाना था मकसद’

“महिलाओं को देवी माना जाता है लेकिन उनके साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है? उनके व्यक्तित्व को निर्वस्त्र किया जाता है।"

‘मिया म्यूजियम’ चाहिए कॉन्ग्रेसी MLA शेरमन अली को, असम सरकार ने खारिज की माँग

“...कोई मिया संग्रहालय स्थापित नहीं किया जाएगा। संग्रहालयों के प्रबंध विभाग किसी भी मिया संग्रहालय की स्थापना नहीं करेंगे।"

माँ बीमार, दिहाड़ी न कटे इसलिए 15 साल की बेटी को भेजा काम पर… लेकिन मालिक मो. मुक्तजीर ने किया रेप

नाबालिग पीड़िता की माँ मोहम्मद मुक्तजीर नामक व्यक्ति के गोदाम में काम करती थीं। अचानक से उनकी तबियत खराब हो गई, जिसकी वजह से...

नवरात्रि में महिलाओं की पूजा, अन्य दिन रेप: कार्टून से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली वकील दीपिका पर FIR

जम्मू कश्मीर पुलिस ने दीपिका राजावत के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है। उनके ख़िलाफ़ धारा 505 (बी)(2), 294 और 295 के तहत मामला दर्ज हुआ है।

₹250 में 10-16 साल के बच्चों के sexual acts वाले वीडियो, TV कलाकार करता था इंस्टाग्राम-टेलीग्राम पर यह काम

CBI ने मुंबई के एक TV कलाकार के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया। आरोपित के ऊपर विदेशी नाबालिग बच्चों की यौन संबंधी सामग्री बेचने का आरोप...

लालू यादव के 3 बकरों की बलि, मुझे मारने के लिए कराई थी तांत्रिक पूजा: सुशील मोदी

"लालू को जनता पर भरोसा नहीं, इसलिए वे तंत्र-मंत्र, पशुबलि और प्रेत साधना जैसे कर्म-कांड कराते रहे हैं।" - सुशील मोदी के इस ट्वीट के बाद...

कंगना जब हवाई जहाज में थीं तो 9 रिपोर्टर-कैमरामैन टूट पड़े थे कुछ बुलवाने को, इंडिगो ने लगाया सभी पर बैन

डीजीसीए ने विमानन कंपनी को कहा था कि चंडीगढ़ से मुंबई जा रही फ्लाइट में हंगामा करने वाले लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। कंगना इसी से...

Xitler: ओलम्पिक को चीन से बाहर कराने की माँग, लोगों को सता रहा 1936 के हिटलर का डर

वैश्विक शक्ति घोषित करने की होड़ में चीन ने हर उस आवाज़ को दबाने का प्रयास किया है, जो उसके विरोध में उठाई गई। यहाँ तक कि...

मंदिर तोड़ कर मूर्ति तोड़ी… नवरात्र की पूजा नहीं होने दी: मेवात की घटना, पुलिस ने कहा – ‘सिर्फ मूर्ति चोरी हुई है’

2016 में भी ऐसी ही घटना घटी थी। तब लोगों ने समझौता कर लिया था और मुस्लिम समुदाय ने हिंदुओं के सामने घटना का खेद प्रकट किया था

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
79,187FollowersFollow
337,000SubscribersSubscribe