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एंबुलेंस ड्राइवर नौफल ने कोरोना संक्रमित लड़की का किया था रेप: पीड़िता ने लगाई फाँसी, गेट तोड़ बचाया गया

केरल के पतनमिट्टा से पिछले दिनों एक कोरोना पीड़िता के साथ बलात्कार की घटना सामने आई थी। अब खबर है कि उसी पीड़िता ने कोट्टयम के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में सुसाइड करने की कोशिश की है।

डेक्कन क्रॉनिकल की खबर के अनुसार, पीड़िता अपने आइसोलेशन वार्ड के बाथरूम में फँदे पर लटकने जा रही थी, तभी अस्पताल प्रशासन ने बाथरूम का गेट तोड़ कर उसे बचा लिया। फिलहाल लड़की की स्थिति स्थिर है और उसे निगरानी में रखा गया है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों केरल के पतनमतिट्टा जिले में कोरोना संक्रमित लड़की के साथ बलात्कार की घटना सामने आई थी। आरोपित की पहचान नौफ़ल नामक एक एंबुलेंस चालक के रूप में हुई थी। नौफ़ल ने घटना को अंजाम रविवार (6 सितंबर 2020) देर रात करीब 1 बजे दिया था। मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने नौफ़ल की गिरफ्तारी की थी।

पड़ताल में मालूम हुआ था कि कोरोना संक्रमित के साथ बलात्कार करने वाला नौफ़ल अलाप्पुझा (Alappuzha) जिले का रहने वाला था और राज्य सरकार के 108 एंबुलेंस सर्विस विभाग से जुड़ा हुआ था।

20 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार की घटना उस वक्त हुई थी, जब उसे एंबुलेंस के जरिए पतनमतिट्टा से कोज़ेनचेरी स्थित कोविड स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था। ख़बरों के मुताबिक एंबुलेंस में दो मरीज थे। स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक को कोज़ेनचेरी जिला अस्पताल लेकर जाने के लिए कहा और दूसरी को कोविड स्वास्थ्य केंद्र। इसके बाद नौफ़ल ने एक मरीज को जिला अस्पताल पहुँचाया और दूसरी को कोविड स्वास्थ्य केंद्र की तरफ लेकर गया।

कोविड स्वास्थ्य केंद्र जाने से पहले उसने एर्नामुला हवाई अड्डे के पास लड़की के साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने के बाद वहाँ मौजूद कर्मचारियों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद कर्मचारियों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। उसी वक्त पीड़िता ने अपना बयान भी दर्ज कराया और पुलिस ने आरोपित एम्बुलेंस चालक नौफ़ल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को जाँच में पता चला कि आरोपित पर एक हत्या का मामला भी दर्ज है।

वहीं, पीड़िता के साथ हुई घटना की जानकारी होने के बाद उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन मेंटल ट्रॉमा से गुजरने के कारण उसे काउंसलिंग की आवश्यकता थी इसलिए उसे कोट्टयम मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाना पड़ा, जहाँ स्थानीय मीडिया के अनुसार उसने हाल में फाँसी लगाने की कोशिश की।

AAP वाले संजय सिंह, TMC के डेरेक ओ ब्रायन सहित 8 सांसद एक सप्ताह के लिए सस्पेंड: वेंकैया नायडू

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सदन में उपद्रव करने के लिए 8 सांसदों को 1 सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है। इस दौरान वो सदन की कार्यवाही में भी हिस्सा नहीं ले सकेंगे। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने जिन सांसदों को सस्पेंड किया, उसमें आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और तृणमूल कॉन्ग्रेस के डेरेक ओब्रायन भी शामिल हैं। इन सभी ने रविवार (सितम्बर 20, 2020) को जबरदस्त उपद्रव किया था।

संजय सिंह और डेरेक ओब्रायन के अलावा राजू सातव, केके रागेश, रिपुन बोरा, डोला सेन, सैयद नज़ीर हुसैन और एलमरान करीम पर कार्रवाई करते हुए इन सभी को 1 सप्ताह के लिए सस्पेंड किया गया। इन सभी ने रविवार को सदन में महत्वपूर्ण कृषि बिलों के पास होने के दौरान जम कर हंगामा किया था। उपसभापति हरिवंश के सामने लगे माइक को भी तोड़ डाला गया था। साथ ही बिल की प्रति फाड़ कर चेयर की तरफ फेंका था।

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने पूरी कार्यवाही की वीडयो फुटेज देख कर उपद्रवी सांसदों के व्यवहारों को देखा। जैसे ही सोमवार को राज्यसभा शुरू हुई, डिप्टी स्पीकर हरिवंश ने सभी सस्पेंड हुए सांसदों को सदन से बाहर जाने को कहा। वहीं सभापति नायडू ने कहा कि रविवार को राज्यसभा के लिए अत्यंत बुरा दिन था, जब कुछ सांसदों के व्यवहार ने निश्चित रूप से संसदीय मर्यादा और शिष्टाचार की सारी रेखाओं को पार कर दिया और सदन के सम्मान को नीचा दिखाया।

हालाँकि, सस्पेंड हुए सांसदों ने पहले तो सदन से निकलने से इनकार कर दिया, जिसके बाद 10 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले इन सांसदों पर कार्रवाई के लिए सदन में मोशन मूव किया गया। नायडू ने कहा कि कल डिप्टी स्पीकर को शारीरिक रूप से धमकाया गया और मार्शल अगर समय पर हस्तक्षेप नहीं करते तो उन्हें नुकसान भी पहुँचाया जा सकता था।

नायडू ने कहा कि बेंच पर चढ़ जाना, सदन में नाचने लगना और चेयर की तरफ रूल-बुक फेंकना सांसदों के लिए अशोभनीय व्यवहार है। उन्होंने कहा कि वो रविवार की कार्यवाही देखने के बाद क्षुब्ध हैं। उधर उल्टा डिप्टी स्पीकर के खिलाफ ही राज्यसभा में नो-कॉन्फिडेंस मोशन पेश कर दिया गया, जिसे ‘प्रॉपर फॉर्मेट’ में न होने के कारण सभापति वेंकैया नायडू द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया। सदन में आज भी हंगामा जारी है।

बता दें कि राज्यसभा में बिल का विरोध करते हुए विपक्षी सांसद वेल तक पहुँच गए थे। कोविड-19 के खतरे को भुलाते हुए धक्‍का-मुक्‍की भी हुई। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के सामने रूल बुक फाड़ने की कोशिश की। इस दौरान ब्रायन उप सभापति हरिवंश के बिल्कुल ही करीब पहुँच गए। वहाँ खड़े मार्शल ने बड़ी ही मुश्किल से उन्हें हटाया। राजनाथ सिंह ने भी संसद में हुए हंगामे की कड़ी निंदा की। 

जावेद चिकना, साहेबजान, सैफ गिरफ्तार: दिल्ली में दोहरे हत्याकांड का पर्दाफाश, महिला की शादी इससे या उससे का मामला

दिल्ली में हुए एक दोहरे हत्याकांड की परत अब जाकर खुली है, जब पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर के उनसे पूछताछ की। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली जिले की पुलिस ने जावेद चिकना, साहेबजान और जहाँ सैफ अली को गिरफ्तार किया। 22 वर्षीय जहाँ सैफ अली दिल्ली के न्यू मुस्तफाबाद का रहने वाला है। तीनों ने बताया है कि दोहरे हत्याकांड को अंजाम देकर वो अजमेर, मेरठ और रुड़की में छिपते फिर रहे थे।

ये घटना शनिवार (सितम्बर 12, 2020) की है, जब मूँगा नगर स्थित संजय चौक पर बन्दूक से फायरिंग की सूचना दयालपुर थाने की पुलिस को फोन से मिली। पुलिस घटनास्थल पर जब एक इमारत की पहली मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में पहुँचे तो उन्होंने देखा कि जहाँ एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, वहीं दूसरा गोली लगने से गंभीर रूप से घायल है। मृतक की पहचान मुस्तफाबाद के फ़ारूक़ अहमद के रूप में हुई थी।

इसके कुछ ही देर बाद नेहरू विहार की एक गली से फायरिंग की सूचना आई। जब पुलिस वहाँ पहुँची तो उसने पाया कि अब्दुल हमीद नामक व्यक्ति मृत पड़ा हुआ था। इन मामलों में दो एफआईआर दर्ज कर के पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। जाँच के दौरान पुलिस ने आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए और सीसीटीवी फुटेजों को खँगाला। आरोपित जावेद चिकना और उसके एक साथी की पहचान होने के बाद पुलिस ने अपने मुखबिरों को मुस्तैद कर तलाश के लिए टीमें गठित की।

‘इंडिया टुडे’ की खबर के अनुसार, सितम्बर 19 को पुलिस को सूचना मिली कि तीनों आरोपित दिल्ली से किसी अनजान जगह पर छुपने जा रहे हैं। पुलिस को उनका कार नंबर भी मिल गया। पुलिस ने जाल बिछाया और तीनों आरोपित धरे गए। साथ ही उक्त कार को भी जब्त कर लिया गया। पूछताछ में तीनों आरोपितों ने दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने की बात कबूल की और व्यक्तिगत दुश्मनी को इसकी वजह बताया।

चिकना और साहेबजान की मृतकों से एक महिला की शादी को लेकर दुश्मनी हुई थी, जिसमें वो किसी और पक्ष का समर्थन कर रहे थे। साथ ही संपत्ति और वित्तीय विवाद भी थे, जिनके कारण तीनों ने इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया। फज्जी सहित अन्य आरोपितों ने इस मामले में उसकी मदद की। दो ऑटोमेटिक पिस्टल और एक देशी रिवॉल्वर को जब्त किया है। एक आरोपित अभी भी फरार है, जिसे गिरफ्तार करने के लिए तलाश जारी है।

अयोध्या मस्जिद का नाम नहीं होगा बाबरी, मक्का के काबा शरीफ जैसा (वर्गाकार, गुंबद या मीनारें नहीं) संभव: ट्रस्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अयोध्या के धन्नीपुर गाँव में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिली जमीन पर बनने जा रही मस्जिद आम मस्जिदों जैसी नहीं होगी। इसका नाम किसी भी राजा या शासक के नाम पर नहीं होगा और इसकी बनावट भी अन्य मस्जिदों से एकदम अलग हो सकती है। कहा जा रहा है कि इसकी बनावट मक्का में स्थित काबा शरीफ जैसी हो सकती है यानी वर्गाकार।

इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) के सचिव एवं प्रवक्ता अतहर हुसैन ने रविवार को पीटीआई को बताया कि धन्नीपुर गाँव में 15,000 वर्ग फीट की मस्जिद बनाई जाएगी। इसका क्षेत्रफल बाबरी मस्जिद जितना होगा। मगर, इसका आकार बाकी मस्जिदों से एकदम भिन्न होगा। यह मक्का में स्थित काबा शरीफ की तरह चौकोर हो सकता है जैसा कि मस्जिद के लिए नियुक्त किए गए आर्किटेक्ट एसएम अख्तर ने इशारा भी दिया है।

इस सवाल के जवाब में कि मस्जिद में गुंबद या मीनारें नहीं होंगी जैसे काबा शरीफ में नहीं हैं? उन्होंने कहा कि हाँ ऐसा हो सकता है। इसकी संभावनाएँ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में वास्तुशास्त्री को खुली छूट दी गई है कि वह अपने हिसाब से काम करें। हुसैन के मुताबिक, “मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद नहीं होगा। यह किसी राजा या शासक के नाम पर भी नहीं होगा। उनकी निजी राय में इसे धन्नीपुर मस्जिद बुलाया जाना चाहिए।”

उन्होंने जानकारी दी कि ट्रस्ट इसके लिए पोर्टल बना रहा है ताकि लोग मस्जिद, म्यूजियम, अस्पताल, रिसर्च सेंटर के लिए डोनेट कर सकें, जिन्हें परिसर के अंदर बनाना है। इस पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्कॉलर के लेख भी नजर आया करेंगे। हुसैन की मानें तो पोर्टल पर अभी कुछ काम पूरा होना बाकी है, इसलिए, दान शुरू नहीं हुआ है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने 5 एकड़ के भूखंड पर मस्जिद के निर्माण के लिए एक ट्रस्ट, IICF का गठन किया है। राज्य सरकार ने यह भूखंड सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर दिया है। दशकों से चले आ रहे विवाद पर पिछले साल 9 नवंबर को फैसला आया था। कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को राम मंदिर का निर्माण कराने और मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या के ही किसी प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था।

‘अनुराग की उपस्थिति में पूरी सुरक्षित, हमेशा खुश रहती हूँ’ – तापसी के बाद अब राधिका भी कश्यप के बचाव में

बॉलीवुड में 20 से भी अधिक फ़िल्में निर्देशित कर चुके अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री पायल घोष ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जिसके बाद फिल्म निर्देशक ने कहा था कि उन्हें फँसाया जा रहा है। अब उन्होंने अपने वकील प्रियंका खिमानी के जरिए बयान जारी किया है। प्रियंका ‘वीमेन इन म्यूजिक’ की अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि उनके क्लाइंट अनुराग कश्यप के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार के जो ‘झूठे आरोप’ लगे हैं, उससे वो काफी दर्द में हैं।

प्रियंका का कहना है कि यौन शोषण के ये आरोप पूरी तरह गलत, दुर्भावनापूर्ण और बेईमानी भरे हैं। उन्होंने कहा कि ‘Me Too’ जैसे एक महत्वपूर्ण सामाजिक अभियान का निहित स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और इसे किसी के ‘कैरेक्टर एसेसिनेशन’ का माध्यम बनाया जा रहा है। प्रियंका ने इसे ‘मनगढ़ंत आरोप’ बताते हुए दावा किया कि इससे ‘Me Too’ अभियान कमजोर होता है। ये बयान सोमवार (सितम्बर 21, 2020) को जारी किया गया।

साथ ही अनुराग कश्यप की वकील प्रियंका ने कहा कि यौन शोषण के इस तरह के आरोपों का अर्थ हुआ कि असली पीड़ितों के दर्द और जख्म का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनके क्लाइंट को क़ानून के हिसाब से आगे बढ़ने का पूरा अधिकार है और वो इस दिशा में जाएँगे। अनुराग कश्यप ने प्रियंका का बयान शेयर करते हुए लिखा कि ये उनके वकील का बयान है, उनकी तरफ से।

इससे पहले अनुराग कश्यप ने कहा था कि अभी बहुत से आक्रमण होने वाले हैं और उन्हें पता है कि और कहाँ-कहाँ से तीर छोड़े जाने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार फोन आ रहे हैं और चुप रहने के लिए कहा जा रहा है। बकौल अनुराग कश्यप, उन्हें ऐसे और आरोपों का इन्तजार है। पत्रकार विनोद कापड़ी से लेकर फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने भी अनुराग कश्यप का समर्थन किया है।

उधर अभिनेत्री तापसी पन्नू के बाद अब राधिका आप्टे भी अनुराग कश्यप के समर्थन में उतर गई हैं। आप्टे ने इंस्टाग्राम और अनुराग कश्यप के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि वो उनके सबसे करीबी मित्रों में से एक हैं और उन्होंने हमेशा उन्हें प्रेरित किया है, उनका समर्थन किया है। आप्टे ने लिखा, “आपने हमेशा मेरे साथ बराबरी का व्यवहार किया है और हम दोनों के बीच जो प्यार और सम्मान है, उससे मैं हमेशा खुश रहती हूँ।”

राधिका आप्टे ने किया अनुराग कश्यप का समर्थन

राधिका आप्टे ने लिखा कि वो हमेशा से अनुराग कश्यप की उपस्थिति में पूरी तरह से सुरक्षित महसूस करती हैं और वो हमेशा उनके सबसे ज्यादा विश्वासपात्र मित्र रहेंगे। वहीं अनुराग कश्यप की पूर्व पत्नी आरती बजाज ने भी इंस्टाग्राम के जरिए अनुराग कश्यप को ‘रॉकस्टार’ बताते हुए आरोपों को ‘सस्ता स्टंट’ करार दिया। हालाँकि, सोशल मीडिया पर लोग लगातार बॉलीवुड सेलेब्स के दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।

गौरतलब है कि पायल घोष ने कहा था, “मैं अनुराग से बात करने के अगले दिन उनसे मिलने गई। वह शराब पी रहा था। मिलने के बाद वह मुझे दूसरे कमरे में ले गया। वहाँ उसने अपनी ज़िप खोली और मेरी सलवार कमीज खोलकर मेरी योनि (vagina) के अंदर अपने c**k (penis) को जबरदस्ती डालने की कोशिश की।” अब वो अनुराग कश्यप के खिलाफ मुंबई में शिकायत दर्ज कराएँगी।

केवल इसी को बेचो या अपनी मर्जी से कहीं भी बेचो… किसान के लिए क्या बेहतर?

कभी ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टर-कम्पाउण्डर या झोला छाप डॉक्टर का ही, दवाइयों वाला थैला खुलते हुए देखा है? ये बैग काफी भरा हुआ सा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में दवाइयाँ मिलनी मुश्किल होती हैं।

इस वजह से डॉक्टर कई जरूरी दवाएँ साथ ही लिए चलते हैं। चूँकि झोला इतना भरा हुआ होता है, इसलिए एक दवा ढूँढनी हो तो पूरा थैला ही खाली करना पड़ता है! ऐसा होते ही आपको दिखेगा कि थैले में 1-2 लाइफबॉय साबुन की टिकिया भी रखी है। आप सोचेंगे कि शायद ये हायजिन मेन्टेन करने के लिए डॉक्टर ने हाथ धोने का साबुन रखा हुआ है।

ऐसा बिलकुल नहीं है। ये एक दवाई के तौर पर ही रखी हुई है। ग्रामीण इलाकों में आत्महत्या का सबसे आसान तरीका कीटनाशक पी लेना होता है। घर से रेल की पटरी पता नहीं कितनी दूर होगी, झोपड़ी में फूस का छप्पर इतना ऊँचा ही नहीं होता कि लटका जा सके, तैरना पहले ही आता है तो डूबना भी मुश्किल है, लेकिन कृषि आधारित काम करने वालों के पास सल्फास से लेकर तरल कीटनाशकों के डब्बे मौजूद होना कोई बड़ी बात नहीं।

किसी के ऐसे जहर खा-पी लेने पर सबसे पहले उसे उल्टी करवाकर उसके पेट से जहर को बाहर निकालने की कोशिश की जाती है। इसके लिए नए लाइफबॉय साबुन को पानी में थोड़ा घोलकर पिला दिया जाता है।

जब कोई और तरीका ना सूझे तो नए लाइफबॉय को पानी में घोलकर पिला देना उल्टी करवाने का सबसे आसान तरीका होता है। अक्सर ऐसा करने पर प्राइमरी हेल्थ सेंटर या अस्पताल तक ले जाने का वक्त मिल जाता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि क्या कीटनाशक से इतनी मौतें होती हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों के डॉक्टर उसका इंतजाम पास ही रखते होंगे? तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के मुताबिक 900000 से अधिक मौतें विश्व भर में आत्महत्या से होती हैं। इसमें से 250000 से 300000 मौतें सिर्फ कीटनाशक वाले जहर से होती हैं। इसमें से भी ज्यादातर मौतें एशियाई देशों, जिनमें चीन, मलेशिया और श्रीलंका भी शामिल हैं, में होती हैं।

हाल ही में जब एनसीआरबी ने किसानों की आत्महत्या का 2019 का आँकड़ा पेश किया तो पता चला कि गत वर्ष 10281 किसानों ने आत्महत्या की है। ये आँकड़े पिछले 25 वर्षों में सबसे कम हैं। सन 1995 से, जबसे ये आँकड़े मौजूद हैं, उसके आधार पर देखें तो 2015 के बाद से इनमें लगातार कमी आती जा रही है।

जाहिर है कुछ लोगों को ये हजम नहीं होता। अपनी आदत के मुताबिक, जब आँकड़े नहीं होते तो वो कहेंगे कि आँकड़े छुपाए जा रहे हैं, और जब आ जाते हैं तो सवाल करेंगे कि क्या इन पर भरोसा किया जाए?

जब इन आँकड़ो को भी गौर से देखा जाए तो पता चलता है कि गरीबी या कर्ज की वजह से कम ही किसान आत्महत्या कर रहे हैं। अधिकांश में आत्महत्या का कारण “अन्य वजहें” नजर आती हैं।

गौरतलब है कि किसानों में दो किस्म के लोग आते हैं। एक तो वो हैं, जो खुद के खेतों में खेती करते हैं, और दूसरे वो जो खेतों में मजदूरी करते हैं। अब अगर आँकड़ों को देखा जाए तो ये पता चलता है कि अपनी जमीन पर खेती करने वालों की आत्महत्या की दर कम नहीं हुई है।

एक तथ्य ये भी है कि 19 राज्य ऐसे हैं, जो किसानों की आत्महत्या के कोई आँकड़े नहीं दे रहे। अब अगर ये देखा जाए कि किसानों की आत्महत्या का कारण क्या है, तो 2015 में उस वक्त के कृषि मंत्री ने कहा था कि कई बार किसान प्रेम संबंधों या नपुंसकता के कारण भी आत्महत्या करते हैं। इस बयान पर अच्छा ख़ासा बवाल भी हुआ था।

ये सब हमें वापस इस बात पर ले आता है कि अगर स्थिति ऐसी है तो क्या कृषि क्षेत्र में सुधारों की जरूरत नहीं है? जिनकी याददाश्त अच्छी होगी, उन्हें इस मुद्दे पर राहुल गाँधी का अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ जाना भी याद होगा।

जाहिर है कृषि क्षेत्रों में सुधार बहुप्रतीक्षित थे। किसान अपनी फसल केवल खुदरा ही कहीं और बेच सकता था, थोक में उसे लाइसेंस-परमिट धारकों के पास ही जाना पड़ता था, उस किसान को इस लाइसेंस-परमिट राज से मुक्त किया जाना आवश्यक था।

अब जब ये कदम उठाया जा रहा है तो तरह-तरह के जुमलों से किसानों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। एमएसपी जो कि अभी भी लागू है, उसके ख़त्म किए जाने का डर बनाया जा रहा है। इस समय ये लोग बताना भूल जाते हैं कि एमएसपी पर खरीदने के बाद भी सरकारें लम्बे समय तक भुगतान नहीं करतीं। इसके लिए भी यदा-कदा धरने-प्रदर्शन की ख़बरें आ ही जाती हैं।

बाकी अब जब लाइसेंस-परमिट राज को कृषि उत्पादों के थोक बाजार से ख़त्म कर दिया गया है, तब बदलाव आने में कितनी देर लगेगी, वो देखने लायक होगा। कुछ वर्षों बाद कृषक की आय दोगुनी हुई है या नहीं, ये तो सरकार की रिपोर्ट कार्ड पर चढ़ेगा ही!

राज्यसभा में हंगामे पर घिरे AAP के संजय सिंह, राजनाथ ने कहा- दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक

राज्यसभा ने ध्वनिमत से रविवार को कृषि बिलों को पास कर दिया। लेकिन उससे पहले विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। इसका एक वीडियो सामने आने के बाद से आप (AAP) के सांसद संजय सिंह की सोशल मीडिया में आलोचना हो रही है। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ वह दुखद, शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण था।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “संसद में मार्शल का गला दबाकर मारते संजय सिंह। बाद में घूँसों से मार्शल पर हमला किया।”

एक यूजर प्रशांत पटेल उमराव ने ट्वीट कर कहा है, “संजय सिंह ने राज्यसभा में मार्शल का गला दबाया और घूँसों से मार्शल पर हमला किया। माइक तोड़ना, बिल की कॉपी फाड़ना और सभापति की टेबल पर अभद्रता करके डेरेक ओ ब्रायन व संजय ने अपनी पुरानी आदतों का परिचय दिया है। इनका यह कृत्य किसी भी प्रकार से विद्वत राज्यसभा के अनुकूल नहीं है।”

बता दें कि राज्यसभा में बिल का विरोध करते हुए विपक्षी सांसद वेल तक पहुँच गए थे। कोविड-19 के खतरे को भुलाते हुए धक्‍का-मुक्‍की भी हुई। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के सामने रूल बुक फाड़ने की कोशिश की। इस दौरान ब्रायन उप सभापति हरिवंश के बिल्कुल ही करीब पहुँच गए। वहाँ खड़े मार्शल ने बड़ी ही मुश्किल से उन्हें हटाया।

राजनाथ सिंह ने संसद में हुए हंगामे की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, “आज राज्यसभा में जो हुआ वह दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक था। सदन में चर्चा की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी होती है, लेकिन विपक्ष का यह भी कर्तव्य है कि वह अनुशासन बनाए रखे।”

राजनाथ ने कहा, “लोकसभा या राज्यसभा के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है। राज्यसभा में ऐसा होना और भी बड़ा मामला है।” उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा,”अफवाहों के आधार पर किसानों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। सदन में जो हुआ, वह उसकी गरिमा के खिलाफ था।”

दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने अपने हैंडल से एक वीडियो ट्वीट कर लिखा है, “भाजपा के किसान विरोधी काले कानून के खिलाफ सबसे आगे रहकर पूरे दम के साथ किसानों की आवाज बने सांसद संजय सिंह। सड़क से लेकर संसद तक देश के किसानों की आवाज उठाएँगे। संघर्ष जारी रहेगा।”

सोमवार को अनुराग कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज करवाएँगी पायल घोष, कहा था- उसने अपनी जिप खोली और…

फिल्मकार अनुराग कश्यप के खिलाफ अभिनेत्री पायल घोष ने एफआईआर दर्ज करवाने का फैसला किया है। अभिनेत्री के वकील ने इसकी जानकारी दी है। पायल ने अनुराग पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।

पायल के वकील नितिन सतपुते का कहना है, “हम ओशिवारा पुलिस स्टेशन में सोमवार (सितंबर 21, 2020) को शिकायत दर्ज कराएँगे। आज हमने पेपर वर्क किया है। पायल ने फैसला ले लिया है कि वह अब अनुराग के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएँगी।”

वकील ने आगे कहा, “हर कोई सोच रहा होगा कि वह इतने वर्षों में इस बारे में क्यों नहीं बोली, तो मैं केवल यह कहना चाहूँगा कि उन्होंने कोशिश की थी, लेकिन उन्हें धमकी दी गई थी। उन पर दबाव डाला गया था कि अगर उन्होंने शिकायत की, तो उनका बहिष्कार किया जाएगा। लेकिन आज इतना सपोर्ट मिलने के बाद पायल ने अनुराग कश्यप के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज करने का फैसला किया है।”

गौरतलब है कि पायल घोष ने कहा था, “मैं अनुराग से बात करने के अगले दिन उनसे मिलने गई। वह शराब पी रहा था। मिलने के बाद वह मुझे दूसरे कमरे में ले गया। वहाँ उसने अपनी ज़िप खोली और मेरी सलवार कमीज खोलकर मेरी योनि (vagina) के अंदर अपने c**k (penis) को जबरदस्ती डालने की कोशिश की।

उन्होंने मुझसे इस तरह बात की जैसे फिल्म इंडस्ट्री में शारीरिक संबंध बनाना गलत नहीं था। उन्होंने कहा कि हुमा कुरैशी, ऋचा चड्डा और मही गिल जैसी अभिनेत्रियाँ हमेशा उनसे फोन पर संपर्क में रहती हैं।” आगे अनुराग कश्यप, पायल घोष से कहता है, “जब भी मैं उन्हें बुलाता हूँ, वह दौड़कर आती है और मेरा c**k (penis) चूसती  है।”

इसके बाद पायल घोष ने मीडिया के साथ आपबीती साझा करते हुए बताया था कि अनुराग कश्यप ने उन्हें आपत्तिजनक वीड‍ियो दिखाए थे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अनुराग के 200 से ज्यादा लड़कियों से संबंध थे और अब यह संख्या 500 से ज्यादा हो सकती है।

पायल ने कहा, “अनुराग ने मुझे बताया था कि 200 से अधिक लड़कियों के साथ उनका अच्छा सम्बन्ध रहा है। अनुराग ने मुझे कहा था कि 200 से अधिक लड़कियों के साथ उन्होंने अच्छा टाइम बिताया है। ये बात वे बहुत गर्व के साथ बोल रहे थे।” पायल का कहना है कि इस दौरान उन्होंने माही गिल, ऋचा चड्ढा और हुमा कुरैशी के भी नाम लिए। 

पायल घोष ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा था, “अनुराग कश्यप ने खुद का इस्तेमाल करके मुझे पर बेहद बुरी तरह दबाव बनाया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी मेरा आपसे अनुरोध है कि इस आदमी पर कार्रवाई कीजिए जिससे दुनिया को पता चले कि इस रचनात्मक इंसान के पीछे कितना बड़ा राक्षस छुपा हुआ है। मुझे पता है यह इंसान मुझे नुकसान पहुँचा सकता है, मेरी सुरक्षा खतरे में है, मदद करिए।”

हिंदू बन शकील, इमरान और नूर ने 3 बहनों को फँसाया, लखनऊ बुलाकर 9 युवकों ने की रेप की कोशिश

छत्तीसगढ़ की तीन बहनों के यूपी में लव जिहाद का शिकार होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हरदोई के शकील, इमरान और नूर आलम ने नाम और धर्म बदलकर युवतियों से दोस्ती की। फिर नौकरी के बहाने तीनों लड़कियों को लखनऊ बुलाया। यहाँ 9 युवकों ने उनसे रेप की कोशिश की।

पुलिस ने मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। तीसरा आरोपित फिलहाल फरार है।

संडीला थाने में 26 वर्षीय पूनम यादव और उसकी दो नाबालिग बहनों ने आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है कि वे बिलासपुर, छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं। शकील अहमद, इमरान, और नूर आलम ने एक बरस पहले टेलीफोन पर खुद को हिन्दू बताकर उनसे दोस्ती की। फिर शादी और रोजगार का झाँसा देकर उन्हें लखनऊ बुलाया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वे 16 सितंबर को लखनऊ पहुँची तो संडीला नाम के कस्बे में उन्हें एक कमरे में बंद कर उनके गहने और पैसे छीन लिए गए। उन्होंने बताया कि तीनों बहनों के साथ 9 युवकों ने जबर्दस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की और जान से मारने की धमकी दी। उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित किया गया। किसी तरह छिप-छिपाकर वे वहाँ से निकलीं।

घटना की जानकारी होते ही तीनों बहनों को वापस लाने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस सक्रिय हो गई है।

उत्तरप्रदेश के एक पत्रकार सचिन गुप्ता ने इस बारे में ट्वीट किया है। इसका जवाब देते हुए बिलासपुर के आईजी दीपांशु काबरा ने ट्विटर पर बताया है कि इन लड़कियों की शिनाख्त हो गई है। वे छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा की रहने वाली हैं और पुलिस टीम उन्हें वापिस लेने जा रही है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, कोतवाल सूर्य कुमार शुक्ला ने बताया कि तहरीर के आधार पर तीनों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली गई है। पकड़े गए आरोपित इमरान और शकील को जेल भेज दिया गया है। तीसरा फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। तीनों युवतियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। फिर मजिस्ट्रेट के सामने उनके बयान दर्ज कराए जाएँगे।

चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार का ग्लोबल टाइम्स ने किया बचाव

दिल्ली पुलिस ने 14 सितंबर को स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा को भारत की सीमा रणनीति और भारतीय सेना की तैनाती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी चीनी खुफिया एजेंसियों को साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया। इसके बाद, मामले में चीनी एजेंट किंग शी और उसके नेपाली सहयोगी शेर सिंह को गिरफ्तार किया गया। राजीव शर्मा चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स (समाचार पत्र) के लिए स्तम्भ भी लिखा करता था।

अब ग्लोबल टाइम्स उसके बचाव में सामने आया है। उसके प्रधान संपादक हू ज़िजिन ने लिखा,“मुझे लगता है कि इस मामले को ग्लोबल टाइम्स से सार्वजनिक रूप से जोड़ना और ध्यान आकर्षित करने के लिए सनसनी पैदा करना भारतीय पक्ष के लिए बहुत अनुचित है। वे स्पष्ट रूप से चीनी मीडिया आउटलेट के लिए सम्मान दिखाने में विफल रहे हैं और ऐसा करना भारत सरकार के लिए विशेष रूप से अनुचित है।”

Hu Xijin comes out in defence of Rajeev Sharma

यह दावा करते हुए कि राजीव शर्मा को ग्लोबल टाइम्स के साथ जोड़ने से सरकारी मीडिया के खिलाफ एक ‘नकारात्मक एसोसिएशन’ बनेगा, हू जिजिन ने कहा, “ग्लोबल टाइम्स ने चीन-भारत सीमा तनाव पर कई रिपोर्ट और विचार प्रकाशित किए हैं। मुझे पता है कि कुछ भारतीय हमसे नाखुश हैं। वे हमारी खुली आलोचना कर सकते हैं या हमारे साथ बहस कर सकते हैं, लेकिन इस तरह की क्षुद्रता दिखाना निरर्थक है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव के कारण शर्मा के ग्लोबल टाइम्स के साथ लिंक को इस तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

इसके अलावा कुछ भारतीय पत्रकार भी शर्मा के समर्थन में सामने आए हैं। NDTV ‘जर्नलिस्ट’ अरविंद गुणसेकर ने तर्क दिया कि राजीव शर्मा की गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता के खिलाफ थी।

Arvind Gunasekar defends Rajeev Sharma

एनडीटीवी के समाचार एंकर गार्गी रावत ने कहा कि राजीव शर्मा को कठोर’ (‘draconian’) ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया।

Gargi Rawat on Rajeev Sharma’s arrest

दिल्‍ली पुलिस के स्‍पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि शर्मा बार-बार जगह बदल कर चीनी खुफिया अधिकारियों मुलाकात कर रहा था। खासकर 2016 से 2018 के बीच देश के बाहर अलग-अलग जगहों पर उसने चीन के खुफिया अधिकारियों से मुलाकात कर खुफिया दस्‍तावेज और अहम जानकारी दी।

दिल्ली पुलिस ने यह भी बताया कि चीनियों को गोपनीय सूचना देने के आरोप में गिरफ्तार राजीव शर्मा को बीते एक साल में 40-45 लाख रुपए मिले थे। शर्मा को प्रत्येक सूचना के बदले 1000 डॉलर मिलते थे। चीनी खुफिया अधिकारियों ने पत्रकार को ज्‍यादा से ज्‍यादा खुफिया जानकारी मुहैया कराने को कहा था। इसके बदले उसे पैसे के साथ लग्‍जरी हॉलीडे पैकेज का भी ऑफर दिया गया था।

इन खुफिया जानकारी में आर्मी से जुड़ी जानकारी, डिफेंस सिस्‍टम से जुड़ी, भारत की विदेश नीति के साथ दलाई लामा के बारे में भी जानकारी माँगी गई थी। काम के बदले पेमेंट करने के लिए चीनियों ने नेपाल के कुछ लोगों के साथ मिल कर शेल कंपनी बना रखी थी। इसी से पैसा भारत में ट्रांसफर होता था।

राजीव शर्मा द्वारा साझा की गई जानकारी सेना के मूवमेन्ट्स, रक्षा अधिग्रहण, दलाई लामा, विदेश नीति आदि से संबंधित थी। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ के अनुसार, राजीव शर्मा ने खुलासा किया था कि उसने डोकलाम, गलवान घाटी, भारत-भूटान-चीन, भारतीय-म्यांमार सैन्य सहयोग, भारत-चीन सीमा मुद्दे और अन्य संबंधित मुद्दों पर जानकारी प्रदान की थी।