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टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

पत्रकारिता के नाम पर इस्लामी प्रोपगेंडा चलाने वाली राणा अय्यूब ने ऐलान किया है कि वह शाहीन बाग की एक ‘दादी’ की तस्वीर फ्रेम करवाने वाली हैं। इन दादी का नाम बिलकिस है और इनकी उम्र 82 साल है। दादी ने शाहीन बाग में हुए सीएए विरोध प्रदर्शनों में अपना योगदान दिया था। 

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं। उनका कहना है कि वह खुद को खुशनसीब मानती है जो उन्हें यह मौका मिला।

अब राणा अय्यूब ने टाइम्स पर क्या लिखा है? इस पर पहले गौर करें। अपनी टिप्पणी में राणा ने 82 वर्षीय वृद्धा को उन सभी छात्र नेताओं की ताकत बताया है जिन्हें प्रदर्शनों के दौरान जेल में डाला गया। उन्होंने लिखा कि जब वह पहली बार बिलकिस से मिलीं, तो वृद्धा कई युवा महिलाओं की भीड़ के बीच में बैठीं थी। अय्यूब के मुताबिक, दादी बिलकिस ने उनसे कहा था, “मैं यहाँ तब तक बैठूँगी जब तक मेरी रगों में खून बहना नहीं बंद हो जाता, ताकि इस देश और दुनिया के बच्चे न्याय और समानता की हवा में साँस लें।”

दिलचस्प बात यह है कि राणा अय्यूब ने अपनी टिप्पणी के पहले पैरा और अंतिम पैरा में जिक्र दादी बिलकिस का किया, मगर बीच में चंद शब्दों में मोदी सरकार को लेकर अपनी घृणा भी व्यक्त कर दी। अय्यूब ने बड़ी चालाकी से इस छोटी सी टिप्पणी में एक बार फिर सीएए को लेकर झूठ फैलाया और लिखा कि मोदी सरकार ऐसा कानून ले आई है जिसके कारण मुस्लिमों के लिए देश की नागरिकता पाने का रास्ता बंद हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि करीब 10 महीने से चली आ रही बहस के बाद आज यह बात सब जान चुके हैं कि सीएए केवल प्रवासियों के लिए है। खासकर उन प्रवासियों के लिए जिन्हें पड़ोसी मुल्कों में उनके धर्म आदि के कारण प्रताड़ित किया गया और वह मजबूर होकर भारत में शरण लेने आए। सरकार ने संसद में इस कानून पर बार-बार समुदाय विशेष को आश्वस्त किया कि इससे उन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

बावजूद इसके राणा अय्यूब जैसे इस्लामी बुद्धिजीवि व लिबरल गिरोह के लोग अपना प्रोपगेंडा चलाते रहे और आज भी चला ही रहे हैं। उनके इन्हीं एजेंडों ने शाहीन बाग में एक नवजात की जान ली थी, लेकिन तब गलती मानने की बजाय यह फैला दिया गया कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में बच्चे को शहादत मिली। ये दादी भी उसी प्रदर्शन का चेहरा हैं।

साभार: ndtv india

जाहिर हैं इन्होंने अपने आप शाहीन बाग तक का रास्ता तय नहीं किया होगा। इन्हें किसी ने बकायदा बैठाकर तसल्ली से समझाया होगा और इनके भीतर डाला होगा कि देश खतरे में हैं और समुदाय के लोगों को उन जैसी बुजुर्गों की भी जरूरत है। इसलिए, खुशी की बात बस यह है कि भले ही दादी ने अपनी सर्दियाँ एक निराधार प्रदर्शन में बिताईं, लेकिन ये भी सोचिए कि उन्हें प्रदर्शन में बैठते हुए यही लग रहा था कि वह देश के बच्चों को बचाने निकली हैं उसके संविधान को बचाने निकली हैं।

शाहीन बाग में उनकी भूमिका की सराहना होनी चाहिए या नहीं? ये व्यापक बहस है। मगर, उनकी मंशा (देश को बचाने की) यदि वही थी जो उन्होंने अय्यूब को बताई तो वह और उनके जैसी ‘अंजान महिलाएँ’ वाकई तारीफ के लायक है कि देश को खतरे में देखकर घर से निकल पड़ीं।

दादी बिलकिस पर बात करते हुए आज हम उन रिपोर्ट का जिक्र नहीं कर रहे, जिन्होंने दावा किया कि शाहीन बाग में बैठने के लिए महिलाओं को पैसे और बिरयानी दी गई। हम इस पर भी चर्चा नहीं करेंगे कि उन आयोजनों के लिए फंड को लेकर कौन-कौन से संगठनों के नाम सामने आए और उससे पहले उनकी संलिप्ता किन देशविरोधी कार्यों में पाई जा चुकी थी। हम दादी बिलकिस पर लिखते हुए उन भड़काऊ भाषणों को भी कुछ समय के लिए दरकिनार कर रहे हैं जिन्होंने इन प्रदर्शनों में देश को तोड़ने की बात की।

मगर, इस बीच एक बिंदु पर विचार करने को जरूर कह रहे हैं कि आखिर सोचिए, 82 वर्षीय बिलकिस और उनकी जैसी तमाम महिलाओं को कहाँ से पता होगा कि शाहीन बाग का चेहरा आने वाले समय में इतना भयंकर होने वाला है कि वह कई मासूमों की जान ले लेगा। उन्हें क्या मालूम था सफूरा जरगर, खालिद सैफी, उमर खालिद, ताहिर हुसैन जैसे तमाम पढ़े लिखे, समाज के ‘प्रतिष्ठित’ लोगों ने उन्हें और उनकी जैसी वृद्धाओं को कड़ाके की ठंड में क्यों बिठाया हुआ है। उन्हें तो जो बताया गया वह उसी आधार पर देश के बच्चों को बचाने निकलीं वो भी अपनी उम्र को ताक पर रखकर।

आज राणा अय्यूब दादी को एक सशक्त चेहरा मानती हैं। उनके टाइम्स में शामिल होने पर गर्व करती हैं। हमें भी इससे कोई आपत्ति नहीं है। बस विचार करने वाली बात है कि जिस टाइम्स ने शाहीन बाग में बैठी बिलकिस को लेकर इतनी सकारात्मक टिप्पणी की है, उसी टाइम्स ने अपनी सूची में नरेंद्र मोदी का नाम शामिल करते हुए यह लिखा है कि उनके पीएम बन जाने से देश की स्थिरता और समसरता संदेह के घेरे में आ गई है।

पीएम मोदी को लेकर एक तरफ जहाँ टाइम्स ने ये दावा किया है कि उनके शासन से यह ज्ञात होता है कि उनके लिए हिंदुओं के सिवा कोई महत्त्व नहीं रखता। वहीं, दादी बिलकिस को लेकर कहा जाता है कि उन्होंने देश भर में शाहीन बाग जैसे ‘शांतिपूर्ण’ आंदोलनों को प्रेरित किया। अब एक तरफ मोदी सरकार पर ‘हिंदुत्व की राजनीति’ करने का आरोप और दूसरी ओर शाहीन बाग-‘एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन’!

दोनों लेखों में ऐसे विशेषणों का इस्तेमाल देखकर खुद अंदाजा लगाइए कि क्या लिबरल मीडिया खुद नहीं चाहता कि उनका पाखंड दुनिया के सामने उजागर हो। क्या उसे नहीं लगता कि एक ओर हिंदुओं का नाम लेकर मोदी सरकार को संशय के घेरे में रखना और दूसरी ओर समुदाय विशेष के आंदोलन को शांतिपूर्ण कहना उनकी दोहरे चेहरे का प्रमाण है? आखिर कितना उचित है उस आंदोलन को बार बार ‘शांतिपूर्ण’ कह देना जिसका अंतिम व भयावह चेहरा पहले ही पूरी दुनिया ने गत फरवरी में देख लिया है।

बिलकिस को आज चेहरा बनाकर टाइम्स ने भले ही शाहीन बाग की सभी प्रदर्शनकारियों को सम्मान दिया हो, पूरी बहस को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की हो, सवाल उठाने वालों के मुँह पर तमांचा जैसा बताया हो। मगर, इस भ्रम में यह भी नहीं भूला जाना चाहिए कि उनकी जैसी वृद्धाओं की आड़ में ऐसी ‘दंगाई’ महिलाएँ भी उस प्रदर्शन का हिस्सा बनीं थी, जिन्होंने पहले शाहीन बाग में अपनी उपस्थित दर्ज करवाई। फिर गाड़ियों में भरकर जाफराबाद पहुँची और वहाँ अपना हिंसात्मक चेहरा दिखाया।

दिल्ली दंगों पर आधारित मोनिका अरोड़ा की किताब बताती है कि उस दिन ऐसी ही प्रदर्शनकारी महिलाओं की भीड़ ने बुर्के के अंदर तमाम ईंट पत्थर छिपाए थे और ‘शांतिपूर्ण’ प्रदर्शन को अंजाम तक पहुँचाने के लिए कॉन्सटेबल रतन लाल को मौत के घाट उतार दिया था व अन्य पुलिस अधिकारियों पर जानलेवा हमला बोलकर दंगे भड़काए थे। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट कहती है कि इन महिलाओं को जहाँगीरपुरी से इकट्ठा करके लाया गया था। ये संख्या में 250-300 थीं।

मेरी झोरा-बोरा की औकात, मौका मिले तो चुनाव लड़ने का निर्णय लूँगा, लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आऊँगा: पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय

स्वेच्छा से रिटायरमेंट (VRS) के एक दिन बाद बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने फेसबुक के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने पढ़ाई की, कैसे आईपीएस अधिकारी बने। पांडेय ने कहा कि उन्होंने सिविल सर्विस में कभी कोई कोचिंग नहीं की। पटना यूनिवर्सिटी में 100 रुपए में कोचिंग मिलती थी लेकिन उन्होंने कोई कोचिंग नहीं की। उन्होंने कहा, “मैं जिद्दी बहुत था, हौसला था, यही दृढ़ इच्छा थी जिसकी वजह से मैं यहाँ तक पहुँचा। मेरा कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं रहा। मैं इस जगह तक पहुँचा तो इसमें मेरे माता-पिता का आशीर्वाद है।”

गुप्तेश्वर पांडेय ने फेसबुक लाइव में बताया, “मेरे माता-पिता बेहद सहज-सरल स्वभाव के थे। आईपीएस बनने के बाद चतरा में मेरी पोस्टिंग हुई। वह नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था। इसके बाद मेरी पोस्टिंग बेगूसराय में हुई। 90 के दशक में वहाँ काफी अपराध था, मेरे जाने के बाद 40 दुर्दांत अपराधियों का एनकाउंटर हुआ। मेरे वहाँ पोस्टिंग के बाद हालात बिल्कुल बदल गए, आपराधिक वारदातों पर लगाम लग गई। जाने के बाद 500 नौजवानों को संगठित किया, आम लोगों की शांति के लिए उन्होंने सहयोग किया। जिसके बाद 40 अपराधी मारे गए, कई अपराधियों ने सरेंडर किया।”

गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि जब भी उनकी कहीं पोस्टिंग हुई तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी संभाली। कम्यूनिटी पोलिसिंग के जरिए उन्होंने अपराध को खत्म करने की कोशिश की। जहाँ-जहाँ वो एसपी रहे, चाहे नालंदा, बेगूसराय कहीं भी पोस्टिंग हुई हो, जनता से जुड़े रहना उनके स्वभाव में शामिल है। उन्होंने कहा, “मेरे घर के दरवाजे हमेशा गरीबों, हर वर्ग के लोगों के लिए खोल के रखा। जिस दिन मैंने वीआरएस लिया उस दिन तक मैंने एक-एक आदमी से उनकी बात सुनी। इसमें कोई राजनीति है क्या? गरीब का बेटा हूँ ना, यही मेरे काम करने का तरीका है।”

चुनाव लड़ने वाली बात को लेकर हो रही अटकलों पर बात करते हुए गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा, “मैं जो भी बोलता हूँ बिल्कुल दिल से बोलता हूँ। मेरा भाव गलत नहीं होता है। मैंने अभी कोई पार्टी ज्वाइन करने का ऐलान तो नहीं किया। मैं चुनाव लड़ूँगा, यह भी कहीं नहीं कहा। इस्तीफा तो दे दिया। चुनाव लड़ना कोई पाप है? मैं पहली बार ऐसा कर रहा हूँ क्या? या करूँगा क्या? ये कोई पाप है? ये गैरकानूनी है? यह असंवैधानिक है? यह अनैतिक है क्या? हत्या करने वाले, अपराध करने वाले, जिनके ऊपर 50 FIR हैं, वो अगर चुनाव लड़ सकते हैं, तो मैंने कौन सा ऐसा अपराध कर दिया? एक गरीब किसान का बेटा चुनाव नहीं लड़ सकता क्या? जिसकी 34 साल की सेवा बेदाग रही है।”

पूर्व डीजीपी ने आगे कहा कि कई लोग उन्हें सुशांत सिंह राजपूत के केस से जोड़ रहे हैं। उनके वीआरएस को सुशांत केस से क्यों जोड़ रहे हैं। सुशांत बिहार का बेटा था वो, पूरे देश की शान था वो, जिस तरह से उसकी मौत हुई, उनके पिता के एफआईआर के बाद उन्होंने सिर्फ वही किया जो पुलिस अधिकारी होने के नाते उनका दायित्व था। कोई कुछ भी बोल सकता है। सुशांत मामले से उनके वीआरएस का कुछ भी लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “कोई कुछ भी कहे लेकिन मैं कहता हूँ कि अगर जरूरत पड़ी तो मैं राजनीति में जरूर आऊँगा। मेरा मनोबल गिराने की कोशिश हो रही है। सुशांत के केस से जोड़ा जा रहा लेकिन मेरी कोशिश यही है कि सुशांत को जस्टिस मिले।”

इस दौरान उन्होंने उन लोगों पर जमकर हमला बोला, जो उनके वीआरएस लेने के फैसले को राजनीति से जोड़ रहे हैं। फेसबुक लाइव के दौरान पांडे ने एक पुरानी घटना का जिक्र किया और बताया कि उन्होंने 8 साल पहले एक महादलित की बेटी का कन्यादान किया था। उनके घर में मंडप लगा था। ब्राह्मण के घर में दलित की बेटी का कन्यादान किया। बिहार के पूर्व डीजीपी ने इस घटना का जिक्र करते हुए पूछा क्या मैं उस समय चुनाव लड़ने के लिए यह काम किया था?

वो आगे कहते हैं, अगर मौका मिले, तो मैं चुनाव लड़ने का भी निर्णय लूँगा। मैं एक स्वतंत्र नागरिक हूँ। राजनीति में आने पर लोगों को बता दूँगा कि सेवा क्या होता है। मैं लोगों की सेवा करने के लिए राजनीति में आऊँगा। किसी भी पर्व के दौरान किसी तरह का सांप्रदायिक विवाद उत्पन्न नहीं हुआ। ये सब जनता, अधिकारी और मुख्यमंत्री के सहयोग से संभव हुआ। राजनीति में आने पर किसी पर भी व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करूँगा। सकारात्मक टिप्पणी करूँगा। मेरी झोरा-बोरा की औकात है और उसी औकात से अपने बक्सर जा रहा हूँ।”

दिल्ली बार काउंसिल ने वकील प्रशांत भूषण को भेजा नोटिस: 23 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश, हो सकती है बड़ी कार्रवाई

दिल्ली बार काउंसिल (BCD) ने विवादास्पद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के मद्देनजर 23 अक्टूबर को उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण पर एक रुपए का सांकेतिक जुर्माना लगाया था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अवमानना मामले में भूषण का मामला छ: सितंबर को दिल्ली बार काउंसिल के पास विवेचना करने और कानून सम्मत फैसला लेने के लिए भेजा था। इसके बाद दिल्ली बार काउंसिल ने यह कदम उठाया है।

दिल्ली बार काउंसिल ने प्रशांत भूषण से जवाब माँगा है कि न्यायपालिका के खिलाफ विवादित ट्वीट के लिए उन्हें दोषी ठहराए जाने के मद्देनजर एक वकील के तौर पर उनका पंजीकरण रद्द करने की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। भूषण को 23 अक्टूबर को व्यक्तिगत तौर पर या वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश होने का निर्देश दिया गया है। उन्हें नोटिस मिलने के बाद 15 दिन में बार काउंसिल को उत्तर देना होगा।

राज्य की बार काउंसिल ही एक व्यक्ति को वकालत करने का लाइसेंस प्रदान करती है। राज्य बार काउंसिल को ही वकील कानून के तहत कतिपय परिस्थितियों में अपने सदस्य का वकालत करने का अधिकार निलंबित करने या इसे वापस लेने सहित व्यापक अधिकार प्राप्त है।

दिल्ली बार काउंसिल ने नोटिस में कहा कि आपको सुनवाई के लिए व्यक्तिगत तौर पर या आपकी ओर से अधिकृत वकील के जरिए काउंसिल के ऑफिस में 23 अक्टूबर को शाम चार बजे पेश होना होगा। आप अपनी सुविधा के अनुसार व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए भी पेश हो सकते हैं।

काउंसिल ने कहा कि आपको यह पत्र मिलने के बाद 15 दिन में काउंसिल को यह बताना होगा कि सवालों के घेरे में आए आपके ट्वीट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना की याचिका के तहत दोषसिद्धि के मद्देनजर आपके खिलाफ वकील कानून की धारा 35 और धारा 24ए (पंजीकरण रद्द करना) के तहत कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।

प्रशांत भूषण ने बुधवार (सितंबर 23, 2020) सुबह ट्वीट करके नोटिस मिलने की बात स्वीकार की। काउंसिल ने कहा कि यदि भूषण उसके सामने तय तारीख को पेश नहीं होते हैं, तो एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।

जस्टिस अरुण मिश्रा (अब सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक ट्वीट करने के कारण प्रशांत भूषण को 14 अगस्त को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था और 31 अगस्त को उन पर एक रुपए का सांकेतिक जुर्माना किया था। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जुर्माना अदा नहीं करने पर अवमाननाकर्ता को तीन महीने की कैद भुगतनी होगी और वह तीन साल तक वकालत करने से प्रतिबंधित रहेगा। प्रशांत भूषण ने 14 सितंबर को कोर्ट की रजिस्ट्री में अवमानना मामले में दंड के रूप में एक रुपया जमा कराया था।

NCB ने ड्रग्स मामले में दीपिका, सारा अली खान, श्रद्धा समेत टॉप 4 हीरोइन को भेजा समन, जल्द होगी पूछताछ

सुशांत सिंह राजपूत केस जाँच के दौरान निकले ड्रग्स एंगल में नारकोटिक्स क्राइम ब्यूरो (NCB) ने दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुल प्रीत, श्रद्धा कपूर को समन भेजा है। बता दें, दीपिका पादुकोण को 25 सितंबर एनसीबी के सामने पेश होना होगा। वहींं श्रद्धा कपूर और सारा अली खान से एनसीबी 26 तारीख को तलब करेगी। श्रद्धा और सारा अली खान से 26 सितंबर को सवाल-जवाब होंगे।

बता दें कि ड्रग एंगल की छानबीन कर रही एनसीबी (NCB) ने जाँच के दायरे को आगे बढ़ाते हुए दीपिका पादुकोण की मैनेजर करिश्मा प्रकाश और क्वान टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी के सीईओ ध्रुव चिटगोपेकर को पूछताछ के लिए तलब किया था। वहीं प्रकाश ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एनसीबी के सामने नहीं पेश हुई थी।

गौरतलब है कि रिया चक्रवर्ती से पूछताछ के दौरान दीपिका, दीया, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आया था। दीया का नाम पूछताछ के दौरान ड्रग तस्कर अनुज केशवानी ने लिया था। केशवानी ने बताया कि दीया की मैनेजर ड्रग्स खरीदती थी। उन्होंने इसके सबूत भी दिए थे। अब इस मामले में एनसीबी जल्द ही दीया मिर्जा को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है।

NCB ने सुशांत सिंह राजपूत के पूर्व बिजनेस मैनेजर श्रुति मोदी और टैलेंट मैनेजर जया साहा से भी पूछताछ की थी। जया साहा के कई एक्ट्रेस के साथ चैट सामने आए थे। जिसमें वो ड्रग्स की बात कर रही थी। दीपिका पादुकोण के मैनेजर करिश्मा प्रकाश का जया शाह के साथ एक फोटो सामने आया था।

बता दें कुछ न्यूज चैनलों ने कई बड़े बॉलीवुड सेलेब्स के बीच ड्रग्स को लेकर हुई व्हाट्सएप चैट का खुलासा किया था। इस चैट में बॉलीवुड के 5 टॉप ऐक्टर्स के नाम सामने आए थे। चैट के दौरान जो नाम दिख रहे हैं वह सब एक अक्षर (जैसे- N,J,S,D,K) में हैं। इस चैट में ड्रग्स के लेन-देन की बात हुई थी। कथित तौर पर ये सभी A ग्रेड के कलाकार हैं। अब बताया जा रहा है कि ड्रग चैट की D यानी दीपिका पादुकोण हैं और जिस K से ‘माल’ यानी ड्रग्स मॉंग रही हैं, वह असल में करिश्मा हैं।

‘बोतल डॉन’ खान मुबारक की 20 दुकान वाले कॉम्प्लेक्स पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: करोड़ों की स्कॉर्पियो, जेसीबी, डंपर भी जब्त

उत्तरप्रदेश में बाहुबलियों और माफियों पर योगी सरकार की कार्रवाई जारी है। जहाँ एक तरफ नामी माफिया मुख्तार अंसारी की अवैध संपत्तियों की कुर्की का काम तेजी से चल रहा, वहीं आए दिन अतीक अहमद और उसके गुर्गो की अवैध सम्पतियों पर बुलडोजर चलाकर जमींदोज किया जा रहा। इसी बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने अंडरवर्ल्ड से ताल्लुक रखने वाले खान मुबारक और उसके गुर्गो की अवैध संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के टॉप टेन अपराधियों की सूची में शामिल माफिया सरगना खान मुबारक पर शिकंजा कसते हुए मंगलवार को गैंगेस्टर अधिनियम के तहत हंसवर बाजार स्थित 20 दुकान वाले कॉम्प्लेक्स को ढहा दिया गया। इसकी की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए थी। माफिया सरगना के नेटवर्क को ध्वस्त करने के क्रम में फरार चल रहे खान मुबारक के करीबी शातिर बदमाश परवेज की मखदूमपुर गाँव स्थित करीब 50 लाख की संपत्ति को अंबेडकर नगर पुलिस द्वारा ध्वस्त कर दिया गया।

कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए हंसवर समेत आधा दर्जन थानों की पुलिस व पीएसी कर्मी मौके पर मौजूद रहे। वहीं पुलिस ने खान मुबारक के एक करोड़ 20 लाख कीमत की स्कॉर्पियो, जेसीबी, डंपर को भी जब्त कर लिया है।

बता दें अंबेडकर नगर में बोतल डॉन नाम से कुख्यात खान मुबारक वर्तमान में हरदोई जेल में बंद है। जिले के लोग आज भी उसके नाम से थर्राते है। वहीं प्रशासन की कार्रवाई के बाद से लोगों में उसका डर खत्म होता नजर आ रहा है। इस मामले में एसपी ने अवैध संपत्तियों की कुर्की को लेकर बयान दिया है कि अभी तो यह शुरुआत है। ऐसी कई संपत्तियाँ है जिन्हें खान द्वारा अपराध के बलबूते पर कमाया गया है। प्रशासन की निगाहें सभी पर टिकी है जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। साथ ही खेतों का भी सिजरा निकाल कर देखा जाएगा।

गौरतलब है कि हरदोई जेल में बंद मशहूर डॉन मुबारक को भारी मात्रा में असलहों के साथ 2017 में यूपी STF द्वारा गिरफ्तार किया गया था। खान का खौफ इलाके में ऐसा था कि जेल के अंदर से भी वह इलाके के व्यापारियों और डॉक्टरों से रंगदारी वसूला करता था। जेल में बंद होने के बावजूद उसके कारोबार का काम समान्तर रूप से जारी था।

सोशल मीडिया में जारी एक वीडियो में खान मुबारक ने एक व्यापारी द्वारा रंगदारी नहीं देने पर उसके सर पर बोतल रख कर पिस्टल से निशाना साधा था जिसके बाद से ही उसका नाम बोतल डॉन पड़ गया। लोगों में खान मुबारक का डर उसके भाई जफर खान उर्फ जफर सुपारी की वजह से भी है। जोकि अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के सबसे खास शूटर है। इनका गैंग छोटा राजन को शूटर मुहैया कराते रहे है।

वहीं खान मुबारक का नाम मुंबई के मशहूर हत्याकांड काला घोड़ा शूटआउट और फरीद तनाशा हत्याकांड में भी सामने आया था। बता दें खान मुबारक का भाई जफर सुपारी भी पुलिस की गिरफ्त में है और इस वक्त मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में बंद है।

मुख्य रूप से खान मुबारक ने रंगदारी वसूली से लेकर सुपारी किलिंग और रेलवे के धुलाई व स्क्रैप ठेके, कोयले और खनन के बड़े पट्टों में कट लेकर करोड़ों का कारोबार करके अवैध संपत्तियाँ हासिल की थी। यूपी प्रशासन की कार्रवाई ने मुंबई के माफियों में भी खलबली मचा दी है।

पाकिस्तान 171 हिंदुओं को मदरसा अहसान-उल-तालीम में करवाया गया इस्लाम कबूल: मानवाधिकार कार्यकर्ता का दावा

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 171 हिंदुओं को रविवार (सितंबर 20, 2020) को इस्लाम में धर्मांतरित करवाया गया। पाकिस्तान के ही मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने ये दावा किया है। 

राहत ऑस्टिन ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हिंदू पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का धर्म परिवर्तन पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मदरसा अहसान-उल-तालीम (Ahsan-ul-Taleem), कराची के संगर में आयोजित एक सामूहिक धर्मान्तरण समारोह में किया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस्लामिक आइडियोलॉजी काउंसिल के पूर्व सदस्य नूर अहमद तशर ने उन्हें इस्लाम कबूल करवाया।

रिपोर्ट में बताया गया कि विभिन्न प्रलोभन देकर हिंदू भील समुदाय के लोगों का धर्मांतरण कराया गया। बता दें कि इन्हें पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों में सबसे कमजोर और हाशिए पर रखा गया समुदाय माना जाता है।

इससे पहले जून में, सिंध प्रांत के बाडिन जिले में सौ से अधिक हिंदुओं को इस्लाम में धर्मांतरित किया गया था। कथित तौर पर, एक स्थानीय मंदिर में रखी हिंदू देवताओं की सभी मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया और परिसर को एक मस्जिद में बदल दिया गया। 17 मई को सिंध प्रांत में हिंदुओं ने दावा किया था कि तबलीगी जमात के लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उनके घरों में तोड़फोड़ की और इस्लाम कबूल नहीं करने पर एक हिंदू लड़के का अपहरण भी कर लिया।

तबलीगी जमात के अपहरणकर्ता उक्त लड़के को छोड़ने के लिए रुपए-पैसे की माँग नहीं कर रहे थे। उनका कहना था कि अगर अपहृत लड़के का परिवार इस्लाम अपना लेता है तो उसे छोड़ दिया जाएगा। लेकिन, परिवार इसके लिए तैयार नहीं था।

वहीं 15 अगस्त को 204 अल्पसंख्यक हिंदुओं का पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन करवाया गया। धर्म परिवर्तन करने वाले अधिकांश हिंदू भील समाज के थे। इनमें से कुछ अभी हाल में धार्मिक वीजा से हिंदुस्तान से लौटे थे। बताया गया था कि 194 हिंदू सादिकाबाद में रहने वाले हैं जबकि 10 (एक ही परिवार के) रहिमयारखान के निवासी हैं। इस धर्मपरिवर्तन की सूचना जोधपुर में रहने वाले लोक संगठन के प्रेमचंद भील ने दी थी। वह लगातार हिंदुओं के संपर्क में हैं और उनके साथ ज्यादतियों को साझा करते रहते हैं।

पिछले दिनों राहत ऑस्टिन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर बताया था कि सिमरन का कुछ समय पहले घोटकी-सिंध के मीरपुर इलाके से कट्टरपंथियों ने अपहरण किया था। फिर बलात्कार कर उसे इस्लाम कबूल करवा दिया गया। परिवार ने इंसाफ के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई। लेकिन कोर्ट ने उसे यह कहकर खारिज कर दिया कि एक इस्लाम मानने वाले का गैर-इस्लामी परिवार से कोई संबंध नहीं होता। अगर उन्हें उनसे मिलना है तो उन्हें भी इस्लाम कबूल करना होगा।

सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों से वसूला जाएगा किराया, ढहाने के खर्च की भी होगी क्षतिपूर्ति: योगी सरकार का नया निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी जमीनों से अवैध कब्जों को हटाने व निर्माण गिराने के साथ-साथ भूमाफियों व अपराधियों को सबक सिखाने के लिए एक नया निर्देश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि अब आरोपितों से सरकारी संपत्ति पर कब्जे की अवधि के हिसाब से किराया भी लिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से योगी सरकार बडे़ पैमाने पर प्रदेश को भूमाफियों से आजाद करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में बीते दिनों प्रशासन ने कई इमारतों पर बुल्डोजर चलवाया है।

अगस्त से लेकर सितंबर तक में माफिया मुख्तार अंसारी के ख़िलाफ़ ही 4-5 कार्रवाई हो चुकी हैं। कुछ दिन पहले मुख्तार अंसारी के दो बेटों को अपराधी घोषित किया गया था। वहीं अंसारी के अवैध निर्माण को लखनऊ नगर निगम ने गिरा दिया था। इससे पहले भी गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर सहित वाराणसी में मुख्तार गैंग के करीबियों और अवैध निर्माण, कारोबारों पर कार्रवाई हो चुकी है।

बता दें कि सबसे पहले प्रशासन ने 27 अगस्त को माफिया मुख्तार अंसारी की डालीबाग कॉलोनी में स्थित अवैध संपत्ति को ध्वस्त किया और ऐलान किया कि इमारत ध्वस्त करने में जो खर्चा आया है वह भी मुख्तार अंसारी से वसूला जाएगा।

इसके बाद 28 अगस्त को मऊ में उसके करीबी रईस कुरैशी के बूचड़खाने पर प्रशासन ने कार्रवाई की और बुलडोजर चला कर उसे गिरा दिया। खबरों में इस बूचड़खाने की कीमत 40 लाख बताई गई।

फिर 3 सितंबर को मऊ में ही प्रशासन ने अंसारी के वसूली गैंग के गुर्गे सुरेश सिंह की अवैध रूप से कमाई संपत्ति पर शिकंजा कसा और उसकी 1 करोड़ 5 लाख 40 हजार मूल्य की संपत्ति जब्त की गई। इसमें कई वाहन शामिल थे। 9 सितंबर की खबर के मुताबिक ताबड़तोड़ कार्रवाई के चलते उसे 25 वाहन सीज किए जा चुके थे। सभी वाहनों की कीमत 4. 29 करोड़ थी।

एक चायनीज को दलाई लामा बनाने के लिए करोड़ों की जासूसी, बौद्ध भिक्षुओं को हवाला से भेजे जाते थे पैसे

हवाला नेटवर्क मामले में गिरफ्तार चीनी नागरिक चार्ली पेंग के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। ED के अनुसार चीनी शख्स कर्नाटक के बाइलाकुप्पे के सेरा बौद्ध मठ में रह रहे भिक्षुओं को घूस के रूप में मोटी रकम देकर बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा के संबंध में जानकारी निकाल रहा था। उसने भारत में भिक्षुओं के बीच हवाला का पूरा जाल फैला रखा था। बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग का रैकेट चलाने के आरोप में उसकी गिरफ्तारी हुई थी।

न्यूज़ 18 की खबर के अनुसार, कर्नाटक के सेरा बौद्ध मठ (Monks of Sera Monastery) के प्रमुख ने इस बारे में बताते हुए कहा कि एसके ट्रेडिंग के खाते से सेरा बौद्ध मठ के भिक्षु जाम्यांग जिंपा (Jamayang Jinpa) को 30 लाख रुपए का भुगतान किया गया था।

जाँचकर्ता ने बताया कि यह अकाउंट चीनी नागरिक चार्ली पेंग (Charlie Peng) द्वारा भिक्षुओं को पैसा भेजने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कई शेल कंपनियों के अकाउंट में से एक है। वहीं अब जाँच एजेंसी इस बात की भी जाँच कर रही है कि कहीं पेंग दिल्‍ली में तिब्‍बती लोगों को तो घूस नहीं दे रहा था।

42 साल का यह चीनी नागरिक पूरे भारत में कुछ बौद्ध भिक्षुओं को रिश्वत दे रहा था। इसमें दलाई लामा और उनके सहयोगी के बारे में जानकारी जुटाने के लिए इसने दिल्ली स्थित मजनू का टीला को अपने रडार पर रखा था। जाँचकर्ताओं के अनुसार दलाई लामा को पछाड़कर एक चीनी व्‍यक्ति के दलाई लामा घोषित किए जाने के समर्थन के लिए ऐसा किया जा रहा था।

मामले में जाँचकर्ता ने आगे बताया कि कई भिक्षुओं को लाखों का भुगतान किया गया था। जिसमें कर्नाटक के बौद्ध मठ के एक अन्य बौद्ध भिक्षु थुपटेंन छोडक (Thupten Chodak) को कथित रूप से 15 लाख रुपए का भुगतान किया गया था, जबकि फुंसोक धरग्याल (Phuntsok Dhargyal), नवांग लोजेल (Ngawang Losel) और ताशी चोपेल (Tashi Choepel) को 10-10 लाख रुपए दिए गए थे। थुप्टेन वांग्चुक (Thupten Wangchuk) को 8 लाख रुपए और लॉब्सांग चोडेन (Lobsang Choeden) को 7 लाख रुपए की राशि भुगतान की गई थी।

इसके अलावा इसी कंपनी ने कर्नाटक के मुंदगोड में ड्रेपुंग लोजलिंग (Drepung Loseling) को 10 लाख रुपए और सोनम दोरजी (Sonam Dorjee) को 7 लाख रुपए का भुगतान किया था। ऐसे ही नवी मुंबई में पैन मिंगमिंग (Pan Mingming) नामक एक भिक्षु को भी एसके ट्रेडिंग कंपनी के अकाउंट से 10 लाख रुपए दिए गए थे।

चीनी नागरिक चार्ली पेंग से घूस लेने वाले 10 में से 6 भिक्षु जिस मठ में रहते हैं, वो कोरोनो वायरस महामारी के कारण बाहरी लोगों के लिए बंद हैं। आरोपित पहले ही वहाँ से गायब थे। लेकिन उनमें से कम से कम दो के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने सेरा मठों के प्रमुख खॉन्पोॉन ताशी सेरिंग (Khonpon Tashi Tsering) के सामने लेनदेन की बात स्‍वीकार की थी।

ताशी ने बताया, “कुछ भिक्षुओं को दिल्ली में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति से पैसा मिला। लेकिन इन भिक्षुओं का कहना है कि यह पैसे उन परिवार और दोस्तों के थे, जो यहाँ अध्ययन करने आए थे और इसलिए पैसा परिवार द्वारा भेजा गया था।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने उनसे पूछा कि वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर का इस्तेमाल क्यों नहीं किया। मैं जाँच एजेंसियों पर ये सब छोड़ना चाहता हूँ। मैंने दो भिक्षुओं से बात की। वे इस आदमी (चार्ली पेंग) से कभी नहीं मिले। उन्होंने उसे सिर्फ किसी के पैसे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया। इसके अलावा, उन्हें नहीं पता कि यह आदमी कौन है।”

बता दें कि इस मामले को लेकर अधिकारियों ने बताया कि सच्चाई का खुलासा करने के लिए कर्नाटक और दिल्ली पुलिस द्वारा सितंबर में कम से कम 30 भिक्षुओं से पूछताछ की गई है।

उल्लेखनीय है कि चीनी नागरिक चार्ली पेंग भारत में रहकर हवाला रैकेट चलाने वाला एक जासूसी नेटवर्क का भी हिस्‍सा था। उसने अन्‍य चीनी नागरिकों के साथ मिलकर चीनी शेल कंपनियों के नाम से बैंक खाते खोले और करीब 1000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की। फिलहाल इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट से लेकर कई एजेंसियाँ उससे पूछताछ कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूछताछ में पेंग ने खुलासा किया था कि चीनी खुफिया एजेंसियों ने उसके जरिए दिल्‍ली में निर्वासन में रह रहे तिब्‍बतियों को घूस देने की कोशिश की थी।

केरल सोना तस्करी केस: UDF ने की CM पिनराई विजयन को मुख्यमंत्री पद से हटाने की माँग, सीताराम येचुरी को लिखा पत्र

यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के संयोजक बेनी बेहानन ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पद से हटाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जब से मुख्यमंत्री कार्यालय पर सवाल उठने शुरू हुए हैं, पिनराई का पद पर बने रहना अनुचित है। 

बेहानन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सीएमओ के खिलाफ आरोप गंभीर हैं। उनके कुछ अधिकारियों को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने बुलाया है। उन्होंने कहा कि सीएमओ आरोपों से भाग नहीं सकते हैं और पिनराई को जाँच में सहयोग करना चाहिए।

पत्र में बेहानन ने लिखा, “उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील के अलावा, कुछ और मंत्रियों के बच्चे भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। जिन सीपीएम नेताओं और मंत्रियों ने पार्टी को शर्मिंदा किया है, उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्हें वापस बुला लिया जाना चाहिए। सीपीएम नेताओं को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए जाना जाता है।”

बता दें कि पिछले महीने विपक्ष नेता रमेश चेन्निथला ने भी कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए। इस अनुरोध के साथ उन्होंने येचुरी को पत्र लिखा था। उन्होंने यह भी कहा था कि ये खबर काफी हैरान कर देने वाली है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के प्रमुख सचिव सोने की तस्करी में शामिल थे। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। ऐसे में तुरंत सीएम को अपना इस्तीफा दे देना चाहिए।

वायनाड में सोना तस्करी के मामले में कथित संबंध होने पर मुख्यमंत्री पी विजयन के इस्तीफे की माँग कर रहे कार्यकर्ताओं पर केरल पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इसका वीडियो भी सामने आया था।

गौरतलब है कि यह पूरा मामला केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) के पते वाले डिप्लोमैटिक कार्गो से 30 किलो सोना मिलने का है। दावा किया गया था कि कार्गो के संबंध में स्वप्ना सुरेश ने एयरपोर्ट के अधिकारी से संपर्क साधा था। यूएई वाणिज्य दूतावास जनरल ऑफिस के उच्च कूटनीतिज्ञ राशिद खामिस अल शामली के कहने पर कथित तौर पर संपर्क किया गया था। तस्करी किए गए सोने की कीमत 15 करोड़ रुपए बताई गई है। 

यह सोना उस कार्गो में छिपाया गया था, जिसमें बिस्किट, नूडल्स और बाथरूम आदि का सामान रखा जाता था लेकिन कस्टम को तस्करी को लेकर पहले से सूचना मिल चुकी थी। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने स्वप्ना सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर को इस मामले में आरोपित बनाया है। तीनों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

उड़ता पंजाब के प्रोड्यूसर ने भी जया साहा से माँगा था वीड: सुशांत के दोस्त ने कहा- काम के लिए यहाँ ड्रग्स और कास्टिंग काउच मजबूरी

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद ड्रग एंगल का मामला गरमाने से धीरे-धीरे बॉलीवुड की कई हस्तियाँ अब एनसीबी के निशाने पर हैं। ताजा नाम इस सूची में उड़ता पंजाब के एक प्रोड्यूसर मधु मंटेना का सामने आया है। इनकी चैट जया साहा के साथ मिली है। बताया जा रहा है दोनों के बीच 22 जून 2020 को बात हुई थी। इसमें मधु मंटेना, जया साहा से वीड की डिमांड कर रहे थे। इस पर जया साहा ने उनसे कहा कि वह उन्हें वीड भिजवा देंगी।

बता दें कि मधु मंटेना वर्मा से आज NCB पूछताछ करने वाली है। वहीं जया साहा को भी एनसीबी ने तीसरे दिन फिर पूछताछ के लिए बुलाया है। रिपोर्ट्स की मानें तो एनसीबी मधु मंटेना और जया दोनों को आमने सामने बैठाकर उन्हें ड्रग्स चैट दिखाकर अपनी पूछताछ करेगी। दोनों के तार क्वान कंपनी के कारण भी एक दूसरे से जुड़े पाए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि अभी तक जया साहा ने पूछताछ में बताया है कि बॉलीवुड के ज्यादातर सेलिब्रेटीज डिप्रेशन के शिकार हैं। उन्होंने इन सेलेब्स को खुश करने के लिए ड्रग्स भिजवाए थे। एनसीबी को शक है कि जया ड्रग्स के सवाल पर गुमराह कर रही हैं और अपने क्लाइंट को बचाने की कोशिश कर रही है।

ज्ञात हो कि क्वान एक टैलेंट मैनेंजमेंट एजेंसी है। इसे लेकर सुशांत के दोस्त व अभिनेता युवराज एस सिंह ने दावा किया है कि ये एजेंसी अभिनेताओं को प्रताड़ित करती है। इसके अलावा इनकी संलिप्ता ड्रग व्यापार में भी है। रिपब्लिक मीडिया से बात करते हुए अभिनेता ने दावा किया कि क्वान जैसी टैलेंट एजेंसी नए लोगों को ड्रग धंधे में धकेलती हैं। अगर कोई कलाकार ऐसा करने से मना करता है तो उसे नकार दिया जाता है।

उनका कहना है कि वह एजेंसी के सीईओ ध्रुव को 10 सालों से जानते हैं और दावा करते हैं कि क्वान से जुड़े ए-लिस्टर्स भी ड्रग्स के चक्कर में हैं। उन्होंने अपनी ये बात रखते हुए कि टैलेंट मैनेजर नेक्सस और ड्रग तस्कर जुड़े होते हैं, इस ओर भी इशारा किया कि बॉलीवुड के कई बड़े नाम इन सब में शामिल हैं और जया साहा ही इनकी एजेंट है। वह बताते हैं कि ध्रुव की एजेंसी ने कई बड़े चेहरों को साइन किया था जिनके रिकॉर्ड इंडस्ट्री में अच्छे नहीं थे। उनके साथ लेन-देन की दिक्कत थी। इस कारण युवराज कई बार उनके ऑफिस भी गए थे।

वह आगे कहते हैं, “वो लोग सही डील नहीं करते। और अब उन्होंने लड़कियों का पक्ष लिया है। जो हमारे सभी बॉलीवुड हिरोइन व मॉडल्स, जिन्होंने 3-4 फिल्में की हैं, उनका शोषण करते हैं। उन्हें बर्बाद करते हैं, उन्हें ड्रग के धंधे में धकेलते हैं और उनका इस्तेमाल भी करते हैं। इसके अलावा अन्य कामों के लिए भी उन लड़कियों का इस्तेमाल होता है। इसमें पुरुषों को भी यूज किया जाता है। जो उनके साथ कॉपरेट नहीं करते। उनके लिए यह लोग सुनिश्तित करते हैं कि उन्हें कहीं काम न मिले। वह उन्हें इंडस्ट्री से बाहर करवा देते हैं। यही सारे काम लड़कियों के साथ होते हैं। ये टैलेंट एजेंसियों का बहुत बड़ा रैकेट है, जिसका खुलासा मीडिया के जरिए हुआ और आगे भी होगा।”

सुशांत के दोस्त युवराज ने इस बातचीत में रिया चक्रवर्ती के सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अभिनेता को फँसाकर ड्रग्स के चक्करों में धकेला गया। उन्होंने बताया कि वह सुशांत से जिम के बाहर मिले और उन्हें उनकी सफलता की बधाई दी। उन्होंने सुशांत को यही कहा था ,”अब तुम्हें बहुत काम मिलेगा।” युवराज बताते हैं कि वो सुशांत से मिलनकर उनके साथ काम करना चाहते थे क्योंकि वह हिंदी फिल्मों के बड़े अभिनेता बन चुके थे और युवराज पंजाबी सिनेमा के बड़े प्रोड्यूसर हैं। सुशांत के जाने का अफसोस जताते हुए वह कहते हैं कि अब वह इन सबपर क्या बोलें? उनका कहना है कि यहाँ बहुत बड़ा नेक्सस काम करता है और ये जरूरी है कि ये बंद हो।

युवराज का कहना है कि इस इंडस्ट्री में नए लोगों के लिए काम पाना बहुत मुश्किल है। खासकर जो मेहनत करते हैं और ड्रग्स नहीं लेते। अगर कोई चरस, गांजा, कोकीन नहीं लेता तो उसे काम नहीं मिलता। ऐसे में उसे इनका सेवन करना पड़ता है। कंगना ने भी बताया कि उन्हें यह लेना पड़ा था। युवराज के मुताबिक उन्हें भी ये ऑफर हुआ था और उन्हें लेना पड़ा। वो कहते हैं कि यहाँ सबको यह लेना पड़ता है, अगर नहीं लेते तो आपको बड़ी फिल्में नहीं मिलतीं और कोई बड़ा स्टार नहीं बनता। अगर आपको बड़ा स्टार बनना है तो कास्टिंग काउच और ड्रग्स से होकर गुजरना पड़ेगा। बाकी और कोई रास्ता नहीं है।

यहाँ बता दें कि इससे पहले जया साहा की कंपनी क्वान की मैनेजर करिश्मा संग दीपिका पादुकोण की ड्रग्स चैट का खुलासा हुआ था। दीपिका का ड्रग्स एंगल में नाम आने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। दीपिका पादुकोण पर कंगना रनौत ने भी निशाना साधा है। अभी तक इस मामले में दीपिका की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। एनसीबी के सूत्रों से पता चला है कि उन्हें जल्द समन भेजा जाएगा।