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बेंगलुरु दंगों पर कर्नाटक सरकार सख्त: न्यायिक जाँच का आदेश, पहले किया दंगाइयों से नुकसान वसूलने का ऐलान

मंगलवार की शाम (11 अगस्त 2020) को बेंगलुरु की सड़कों पर संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ पत्थर चलाते हुए और जम कर तोड़-फोड़ करती हुई नज़र आई। अब कर्नाटक की राज्य सरकार और प्रशासन दंगाइयों पर कार्रवाई करने की पूरी तैयारी कर चुका है। राज्य सरकार ने इस मामले में न्यायिक जाँच के आदेश जारी कर दिए हैं।

न्यायिक जाँच का फैसला कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुराप्पा, गृहमंत्री बसवराज बोम्मई और पुलिस अधिकारियों की बैठक में लिया गया था। इस जाँच की अगुवाई मजिस्ट्रेट करेंगे। बेंगलुरु के पूर्वी और उत्तर पूर्वी इलाक़ों में हुए इन दंगों में 3 लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही कई लोग घायल भी हुए हैं।  

कर्नाटक के गृहमंत्री बोम्मई ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “बेंगलुरु में हुई दंगों की न्यायिक जाँच होगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के तमाम नीति-निर्देशों को मद्देनज़र रखते हुए पूरे घटनाक्रम की जाँच मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगी। इस जाँच के बाद षड्यंत्र रचने वाले असल आरोपित सामने आएँगे।”  

मंगलवार की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर संप्रदाय विशेष की हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं।  

बेंगलुरु में हुए दंगों का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस वीडियो में केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा के लिए गोली चलने की इजाज़त मांग रहे थे। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि इस्लामियों की अनियंत्रित भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ती है। हालात इतने भयावह हो जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति माँगी।  

जिस पर अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा कि वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो ज़रूरी समझें वह करें। वीडियो में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा “आपको जो सही लगे वह करिए! इस समय आपको कोई और नहीं बचा सकता है। आपको अपनी सुरक्षा खुद से ही करनी होगी।” टीवी 9 द्वारा प्रसारित इस वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे संप्रदाय विशेष की भीड़ ने पूरे बेंगलुरु शहर को आग में झोंक दिया।  

इसके अलावा कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को कहा था कि राज्य सरकार बेंगलुरु हिंसा की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।

मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “मैं संपत्ति की वसूली को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा करना चाहता हूँ कि सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सार्वजनिक संपत्ति की भरपाई उन व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए जिन्होंने नुकसान पहुँचाया है। हम तुरंत कार्रवाई करने जा रहे हैं। हम व्यक्तियों की पहचान कर रहे हैं और नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इसके बाद दंगाइयों द्वारा नुकसान की वसूली की जाएगी।”

ट्रांसपैरेंट टैक्सेशन – ऑनरिंग द ऑनेस्ट: PM मोदी ने लॉन्च किया प्लेटफॉर्म, ईमानदार टैक्सपेयर्स को प्रोत्साहन

ईमानदार करदाताओं की कई मौकों पर तारीफ कर चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब उनके लिए एक खास गिफ्ट लेकर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ईमानदारी से कर चुकाने वालों के लिए पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान (‘ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन- ऑनरिंग द ऑनेस्ट) नामक एक प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया।

पीएम मोदी के नए प्रोग्राम का मुख्य फोकस इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स यानी व्यक्तिगत आयकरदाताओं पर है। इसमें ईमानदार टैक्सपेयर्स को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

पीएम मोदी ने ट्वीट के माध्यम दे इसकी जानकारी दी है। बृहस्पतिवार (अगस्त 13, 2020) सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से होने वाले इस आयोजन में केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर भी उपस्थित हैं।

बृहस्पतिवार सुबह ही पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में कहा कि कहा कि इससे कर व्यवस्था में सुधार करने और इसे आसान बनाने के हमारे प्रयासों को बल मिलेगा। साथ ही, लिखा कि इससे ईमानदार करदाताओं को लाभ मिलेगा जिनकी कड़ी मेहनत से देश की प्रगति को ताकत मिलती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 3-4 हफ्तों से पीएम मोदी वरिष्ठ टैक्स अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं और वह इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि देश में एक पारदर्शी टैक्सेशन की जरूरत है। इन बैठकों में आयकर रिटर्न को लेकर काफी चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी के नए प्रोग्राम का मुख्य फोकस इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स पर होगा।

प्लेटफॉर्म के उद्घाटन के अवसर पर पीएम मोदी ने कहा – “देश में चल रहा स्ट्रक्चरल रिफॉर्म का सिलसिला आज एक नए पड़ाव पर पहुँचा है। ट्रांसपैरंट टैक्सेशन- ऑनरिंग द ऑनेस्ट, 21वीं सदी के टैक्स सिस्टम की इस नई व्यवस्था का आज लोकार्पण किया गया है।”

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 6 सालों में हमारा उद्देश्य सरकार का कम से कम हस्तक्षेप करना रहा है। पहले दबाव में लिए गए फैसलों को ‘रिफोर्म कहा जाता था लेकिन हमारे लिए रिफोर्म का मतलब नीति आधारित फैसला लेना और उसे दूसरे रिफोर्म का आधार बनाना है।

पीएम मोदी के भाषण की कुछ प्रमुख बातें –

आज हर नियम-कानून को, हर पॉलिसी को प्रोसेस और पॉवर सेंट्रिक अप्रोच से बाहर निकालकर उसको पीपल सेंट्रिक और पब्लिक फ्रेंडली बनाने पर बल दिया जा रहा है। ये नए भारत के नए गवर्नेंस मॉडल का प्रयोग है और इसके सुखद परिणाम भी देश को मिल रहे हैं।

ईमानदार का सम्मान। देश का ईमानदार टैक्सपेयर राष्ट्रनिर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। जब देश के ईमानदार टैक्सपेयर का जीवन आसान बनता है, वो आगे बढ़ता है, तो देश का भी विकास होता है, देश भी आगे बढ़ता है।

टैक्स पेयर के लिए अधिकार और कर्तव्य, दोनों को संतुलित करने और सरकार की जिम्मेवारी पक्की करने का यह बहुत अहम कदम है। टैक्स पेयर को सम्मान देने वाले दुनिया में बहुत कम देश हैं लेकिन अब भारत भी इस महत्वपूर्ण कदम में शामिल हो गया है। अब टैक्स पेयर को उचित व्यवहार और सम्मान का लाभ दिया जाएगा। विभाग अब बिना कसी आधार के उसे शक की नजर से नहीं देखेगा। यदि कोई संदेश है तो टैक्स पेयर को अपील और समीक्षा का भी अधिकार होगा।

जहाँ कॉम्प्लेक्सिटी होती है, वहाँ कम्प्लायंस भी मुश्किल होता है। कम से कम कानून हो, जो कानून हो वो बहुत स्पष्ट हो तो टैक्सपेयर भी खुश रहता है और देश भी। बीते कुछ समय से यही काम किया जा रहा है। अब जैसे, दर्जनों टैक्सों की जगह जीएसटी आ गया।

अभी तक होता यह है कि जिस शहर में हम रहते हैं उसी शहर का टैक्स डिपार्टमेंट टैक्स से जुड़ी सभी बातों को हैंडल करता है। स्क्रूटनी हो, नोटिस हो, सर्वे हो जब्ती हो, इसमें उसी शहर के आईटी अधिकारी की मुख्य भूमिका रहती है। यह भूमिका अब खत्म हो गई है।

अब इसे टेक्नॉलजी की मदद से बदल दिया गया है। अब स्क्रूटनी के मामलों को देश के किसी भी क्षेत्र में किसी भी अधिकारी के पास रैंडम तरीके से भेजा जाएगा। अब मुंबई के टैक्सपेयर का मामाला मुंबई के अधिकारी के पास नहीं जाएगा, संभव है कि वह चेन्नै या रायपुर या फिर किसी अन्य जगह चला जाए।

करदाता और इनकम टैक्स दफ्तर को जान पहचान बनाने का, प्रभाव और दवाब का मौका अब जीरो हो गया है। सब अपने अपने दायित्व के हिसाब से काम करेंगे। विभाग को इससे लाभ यह होगा कि अनावश्यक मुकदमेबाजी खत्म होगी। ट्रांसफर-पोस्टिंग वाली गैरजरूरी ऊर्जा से भी राहत मिलेगी। इससे टैक्स के जुड़े मामलों की जाँच के साथ-सात अपील भी फेसलेस होगी।

इंदिरा गाँधी बाबर की कब्र पर गईं, सिर झुकाया और बोलीं – ‘मैंने इतिहास को महसूस किया…’

पाँच अगस्त को अयोध्या की हलचल के दौरान एक कॉन्ग्रेसी ने पुण्य भाव से खुलासा किया कि प्रधानमंत्री राजीव गाँधी राम मंदिर निर्माण के पक्ष में थे। ऐसा कहकर उन्होंने कॉन्ग्रेस की छवि पर ठोस हो चुकी बदबूदार सेक्युलर गर्द को एक फूँक से साफ करने की कोशिश की।

वर्ना आजादी के तुरंत बाद सोमनाथ में मंदिर निर्माण की पहल पर पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के महान विचारों और सरदार पटेल से घृणापूर्ण असहमतियों से सारा देश भलीभाँति परिचित है। वह सब कुछ रिकॉर्ड पर है। बीच में इंदिरा गाँधी भी लंबे अरसे तक प्रधानमंत्री रहीं। इतिहास को महसूस करने की उनकी अपनी दिशा और सोच थी। कुँवर नटवरसिंह ने इंदिरा गाँधी से जुड़ा एक चौंकाने वाला वाकया लिखा है।

यह अगस्त 1969 की बात है। वे काबुल के दौरे पर थीं। उनके साथ राजीव और सोनिया भी थे, जहाँ 1947 के बाद खान अब्दुल गफ्फार खान से उनकी मुलाकात हुई थी। नटवरसिंह इस दौरे में उनके साथ ही थे। वे बताते हैं कि एक दोपहर थोड़ा समय खाली था और उन्होंने तय किया कि वे मेरे साथ ड्राइव पर चलेंगी।

काबुल से बाहर कुछ मील की दूरी पर उन्हें एक जीर्ण-शीर्ण इमारत दिखाई दी, जो कुछ पेड़ों से घिरी थी। उन्होंने अफगान सुरक्षा अधिकारी से पूछा कि वह क्या था। उसने बताया कि वह बाग-ए-बाबर (बाबर का मकबरा) है। श्रीमती गाँधी ने वहाँ जाने का निर्णय लिया। प्रोटोकॉल विभाग के लिए मुसीबत हो गई, क्योंकि उन्होंने वहाँ कोई सुरक्षा प्रबंध नहीं किए थे।

नटवर सिंह के अनुसार वो बाबर के मकबरे की ओर चल दिए। वे मकबरे के सामने खड़ी हुईं और हल्का सा सिर झुकाया। नटवर उनके पीछे खड़े थे। बाद में वे बोलीं – “मैं इतिहास को महसूस कर रही थी।” नटवरसिंह ने उनसे कहा कि मैं दो इतिहासों को महसूस कर रहा था। जब वे समझी नहीं तो उन्होंने विस्तार से बताया कि भारत की साम्राज्ञी की उपस्थिति में बाबर को श्रद्धांजलि अर्पित करना मेरे लिए बहुत बड़े गौरव की बात है।

भरतपुर रियासत से संबंद्ध रहे नटवरसिंह कॉन्ग्रेस के दूसरे नेताओं से इस मायने में अलग थे कि वे बुनियादी रूप से नेता नहीं थे। करीब तीस-पैंतीस साल वे विदेश सेवाओं में अपने चमकदार करिअर के बाद कॉन्ग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुए थे और राजीव गाँधी ने उन्हें पहली ही बार में केंद्र में मंत्री बनाया था। विदेश सेवाओं में उनका चयन पंडित नेहरू के समय ही हो गया था।

नटवरसिंह इंदिरा गाँधी के समय राजनीति में आए लेकिन पहला चुनाव लड़ने के पहले ही इंदिरा गाँधी की हत्या हो गई। इस तरह पंडित नेहरू से लेकर सोनिया गाँधी तक सीधे संपर्क में काम करने का दीर्घकालीन विलक्षण अनुभव उनके पास है। अगर यूपीए-2 के समय कड़वे अनुभवों के साथ पहले केबिनेट और फिर कॉन्ग्रेस से उनकी अपमानजनक विदाई न हुई होती तो हम नहीं कह सकते कि वर्ष 2014 में आई उनकी आत्मकथा ‘वन लाइफ इज नॉट एनफ’ किस तरह लिखी गई होती।

यह किताब नेहरू से लेकर सोनिया गाँधी के कामकाज के ढंग और उनकी पसंद-नापसंद का खुलासा बहुत सलीके से करती है। नटवरसिंह चूँकि एक राजनयिक रहे हैं। वैश्विक स्तर पर एक बड़े फलक पर काम करने वाले हाजिर जवाब अफसर के रूप में उनकी सक्रिय भूमिका शानदार पारी खेलने की रही है। वे पटियाला राजघराने के दामाद हैं।

लेखन में उनके इस पद और कद की राजसी झलक साफ है। कालिख से भरी कॉन्ग्रेस की राजनीति के अंदर के सच को ऐसी साफगोई से कोई पूर्णकालिक नेता शायद ही रख पाता। राजनीति को तटस्थ भाव से जीने वाला शख्स ही अपने आसपास घटित होने वाली घटनाओं को देखने की ऐसी दृष्टि रखता है।

नेहरू ने चीन यात्रा का ब्यौरा एडविना को लिख भेजा

अक्टूबर 1954 में पंडित नेहरू चीन की चर्चित यात्रा पर थे, जहाँ उनकी खुली कार के दोनों तरफ सड़कों पर लाखों लोग स्वागत में खड़े थे। नटवर बताते हैं कि बाद के वर्षों में जब मैंने इन वार्तालापों के बारे में पढ़ा तो पाया कि वहाँ वास्तव में कुछ भी सार्थक नहीं हुआ था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि सीमा से जुड़े मसलों पर बात तक नहीं की गई।

लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण जानकारी यह है – “वापसी पर पंडित नेहरू कलकत्ता में ठहरे। उन्होंने पहला पत्र एडविना माउंटबेटन को लिखा और उनके साथ अपने चीन के अनुभव बाँटे। यदि कड़े शब्दों में कहा जाए तो चीनी नेताओं से हुई बातचीत को एडविना के साथ बाँटना उनके द्वारा ली गई गोपनीयता की शपथ के विरुद्ध था। नि:संदेह तब तो उस पत्र के बारे में कोई नहीं जानता था और वह तभी प्रकाश में आया, जब उनके लेखन को एस गोपाल ने प्रकाशित किया।”

कश्मीर मसले पर नेहरू की अत्यंत घातक नीतियों के बारे में वे कहते हैं कि माउंटबेटन ने नेहरू को अंधेरे में रखा। यह पंडित नेहरू की भूल थी कि उन्होंने भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को भारत के प्रथम गवर्नर जनरल के रूप में नियुक्त किया। जिन्ना उनसे ज्यादा व्यवहारिक था, जो उसने ऐसा नहीं किया। नेहरू को यह पश्चाताप रहा कि उन्होंने माउंटबेटन की सलाहें क्यों मानीं!

ब्लादमीर की खास यात्रा, जहाँ सोनिया गाँधी के पिताश्री कैद में थे

साल 2004 में यूपीए सत्ता में आया और डॉ मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। अगले ही साल गर्मियों में एक कन्वेंशन के लिए सोनिया गाँधी एक खास प्लेन से मास्को गईं। नटवरसिंह लिखते हैं:

“इस मीटिंग के बाद मैं और सोनिया गाँधी एक हेलीकॉप्टर से एक छोटे से शहर व्लादमीर के लिए रवाना हो गए। मैं समझ नहीं पा रहा था कि सोनिया ने क्यों इस छोटे से शहर का चुनाव किया है, जिसके बारे में मैंने कुछ सुना भी नहीं था। ब्लादमीर एक जंगल के मध्य स्थित शहर था, शांत और सुकून भरा। सोनिया एक बड़ी इमारत की तरफ पैदल चल दीं, जिसको एक छोटे से म्युजियम में तब्दील कर दिया गया था। हम एक अष्टकोणीय कमरे में दाखिल हुए, जिसकी दीवारों पर हस्तलिखित पर्चियाँ चिपकी थीं। विश्व युद्ध के दौरान सोनिया के पिता बतौर युद्ध बंदी इसी कमरे में रहे थे। यहाँ से वे भाग निकले और इटली तक पैदल ही पहुँचे। हम लोग गाँव के चारों तरफ घूमते रहे। रिटायरमेंट के बाद चैन से जिंदगी बिताने के लिए व्लादमीर एक आदर्श जगह थी।”

सोनिया गाँधी भय पैदा करने वालीं रहस्यमय और संदेहपूर्ण

यह वही समय था, जब नटवरसिंह को रक्षा सौदों में कथित हिस्सेदारी के पचड़े में फँसाया गया। सोनिया गाँधी पर यहाँ नटवर की एक बेबाक टिप्पणी है – “सोनिया की सार्वजनिक छवि अच्छी नहीं है। इसके लिए बहुत हद तक वह स्वयं ही दोषी हैं। वह कभी मुक्त भाव से नहीं बैठती और अपने मन की बात किसी को बताती नहीं। बेहद रहस्यमय और संदेहपूर्ण व्यक्तित्व वाली यह महिला भय तो पैदा करती है पर श्रद्धा नहीं।”

सोनिया गाँधी के बारे में वे बताते हैं कि न तो वह अच्छी संप्रेषक थीं, न वक्ता और किसी अग्रणी राजनीतिज्ञ के लिए यह दोनों ही अपरिहार्य गुण होते हैं। अपना पहला भाषण तैयार करने में उन्हें कई घंटे कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी।

नटवरसिंह बताते हैं कि सोनिया गाँधी को हर भाषण तैयार करने में 6 से 8 घंटे लगते थे। कभी-कभी तो यह तकलीफदेह भाषण सत्र आधी रात तक चलते थे। सोनिया अपना भाषण पढ़तीं और नटवरसिंह उसका समय नोट करते। फिर वह हिंदी में अनुवादित किया जाता था। फिर हिंदी का भाषण रोमन लिपि में बड़े-बड़े अक्षरों में छापा जाता।

जब तक लिखित पाठ (वो भी रोमन में) सामने न हो, वह हिंदी नहीं बोल पातीं। नटवरसिंह ने तब सुझाव दिया कि तुलसीदास की एकाध चौपाई या कबीर के दोहे अच्छी तरह से रट लें, जो वह अपने भाषणों में प्रयोग कर सकती हैं। पर उन्होंने हथियार डाल दिए और कहा:

“सामने लिखित पाठ होने पर भी मैं कुछ नहीं बोल पाऊँगी। तुम चाहते हो कि मैं अपने आप कुछ बोलूँ। इसे भूल जाओ।”

हमारा अपराध था मैडम को नाखुश करना!

जब कथित फायदे का विवाद गहराया तो रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट को नटवरसिंह जैसा स्पष्टवादी और अपनी शर्तों पर जीने वाला आदमी खामोश होकर सहन कर ही नहीं सकता था। वे कहते हैं – “प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस प्रेसिडेंट ने मिलकर यह निर्णय लिया कि जब तक यह विवाद खत्म नहीं हो जाता, मैं विदेश मंत्रालय छोड़कर बिना विभाग का मंत्री बना रहूँ। पार्टी और सरकार में उच्च पदस्थ कुछ पुराने घाघों ने मुझे निशाना बनाने की ठान ली थी। कॉन्ग्रेस में तो बिना सोनिया गाँधी के इशारे या अनुमति के पत्ता भी नहीं खड़कता। यह था बिना जिम्मेदारी की सत्ता को भोगना और गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे-बैठे कार ड्राइव करने की कला।”

जयपुर की एक रैली के बाद नटवरसिंह के बेटे को भी कॉन्ग्रेस से निकाल दिया गया। इस पर वे कहते हैं:

“हमारा अपराध था – मैडम को नाखुश करना!”

नटवरसिंह की यह किताब एक बेबाक बयान है, जो हमारी राजनीति के कुछ ऐसे दिलचस्प पहलुओं को उजागर करता है, जिसके बारे में हमें पता होना चाहिए। एक तरह से करिअर के पतन से उपजी अपनी निजी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए नटवरसिंह के शब्द हैं – “मनमोहन सिंह और उनके कैबिनेट मिनिस्टरों की मुझे छूने की हिम्मत भी न पड़ती अगर सोनिया की अनुमति न होती। कॉन्ग्रेस तो मुझे व्यक्तित्व विहीन बनाने पर उतारू थी पर सफल नहीं हो पाई। वे जो मेरे चारों तरफ राजनीतिक कृपा पाने की फिराक में घूमते रहते थे – गवर्नर बनवा दो, कैबिनेट में घुसवा दो, पार्टी में पद दिलवा दो – आज मुझसे कतराते हैं और मुँह फेरकर चले जाते हैं। सोनिया गाँधी की उपलब्धि यह रही: संसार की एक महानतम राजनीतिक पार्टी को लोकसभा में सिर्फ 44 सांसद के ठूँठ पर बैठा दिया गया।”

लेखक: विजय मनोहर तिवारी

उतावले राजदीप ने चलाई प्रणब मुखर्जी की मौत की ‘ब्रेकिंग’ खबर, फिर फेक न्यूज बता कर ट्वीट किया डिलीट

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हालत गंभीर बनी हुई है और वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर बने हुए हैं। लेकिन इंडिया टुडे के कर्मचारी राजदीप सरदेसाई ने बृहस्पतिवार (अगस्त 13, 2020) की सुबह आदतन उतावलेपन में उनकी मौत की फेक न्यूज़ को ‘ब्रेकिंग’ बताते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर कर डाली।

प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने अपने पिता के स्वास्थ्य के बारे में ‘अटकलों’ और उनके देहांत की फेक खबर को खारिज करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति अभी भी जीवित हैं और उनकी हालत स्थिर है। राजदीप सरदेसाई का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि उनके पिता की मौत को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिष्ठित पत्रकारों द्वारा फर्जी खबरें प्रसारित की जा रही हैं।

राजदीप सरदेसाई ने इसे ‘ब्रेकिंग’ न्यूज़ कहते हुए अपने ट्विटर पर लिखा – “ब्रेकिंग: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया है.. विदाई प्रणब दा.. इंदिरा पीढ़ी के राजनेता और जीवंत राजनीति का हिस्सा रह चुके एक शख्स की कई यादें मौजूद हैं .. RIP.”

राजदीप द्वारा डिलीट किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

लेकिन प्रणब मुखर्जी के बेटे द्वारा इस खबर को फेक बताने के तुरंत बाद राजदीप सरदेसाई ने अपनी ‘ब्रेकिंग’ न्यूज़ को डिलीट कर दिया। राजदीप द्वारा फैलाई गई इस फर्जी खबर को कई लोगों ने सच मानकर प्रणब मुखर्जी की आत्मा के लिए शान्ति की कामना तक कर डाली, इनमें से एक कॉन्ग्रेस AICC के सचिव चल्ला वामसी चंद रेड्डी भी थे।

प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी के बेटे द्वारा किए गए ट्वीट पर मोहम्मद शाहिद मेवाती ने जवाब में कॉन्स्पिरेसी थ्योरी को ऊपर रखते हुए लिखा है – “हमें पता है कि इसकी आधिकारिक घोषणा 15 अगस्त के बाद ही होगी।”

ज्ञात हो कि प्रणब मुखर्जी को 10 अगस्त को दिल्ली छावनी के अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उनके दिमाग में खून का थक्का हटाने के लिए सर्जरी की गई थी। 84 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति सर्जरी से पहले COVID -19 जाँच में भी पॉजिटिव पाए गए थे।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और कॉन्ग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी अपने पिता के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि भगवान उनके लिए सब ठीक कर देंगे। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता के बारे में राजदीप द्वारा फैलाई गई फेक न्यूज़ को लेकर लताड़ लगाते हुए यह भी कहा कि यह ख़बरें झूठी हैं और मैं खासकर मीडिया वालों से निवेदन करती हूँ कि मुझे कॉल ना करें क्योंकि मुझे अस्पताल से आने वाली अपडेट के लिए अपने फोन की जरूरत है।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने ट्विटर पर कहा, “उनके लिए जो सबसे अच्छा हो, भगवान वही करें और भगवान मुझे जीवन के सुख और दुख, दोनों को समान भाव से स्वीकार करने की शक्ति दें। मैं उन सभी को इमानदारी से धन्यवाद देती हूँ, जो उनके लिए चिंतित हैं।”

उन्होंने कहा, “पिछले साल 8 अगस्त मेरे लिए सबसे खुशी के दिनों में से एक था क्योंकि मेरे पिता को भारत रत्न मिला था। ठीक एक साल बाद 10 अगस्त को वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गए।”

…जब पुलिस वालों ने रोते हुए सीनियर ऑफिसर से माँगी गोली चलाने की इजाजत: बेंगलुरु दंगे का सच

मंगलवार की शाम (11 अगस्त 2020) को बेंगलुरु की सड़कों पर संप्रदाय विशेष की भीड़ पत्थर चलाते हुए और जम कर तोड़-फोड़ करती हुई नज़र आई। हमने इस घटना की रिपोर्ट की थी। कैसे डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के भीतर संप्रदाय विशेष की भीड़ दाखिल हुई। इसके बाद लगभग 200 से 250 वाहन मौके पर ही जला दिए गए।  

इस घटना का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इस वीडियो में डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा के लिए गोली चलाने की इजाज़त माँग रहे हैं। वीडियो में साफ़ सुना जा सकता है कि इस्लामी भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ी है। हालात इतने भयावह हो जाने के बाद पुलिस कर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा में गोली चलाने की अनुमति माँगी।  

जिस पर अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा कि वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो ज़रूरी समझें, वह करें। वीडियो में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, “आपको जो सही लगे वह करिए! इस समय आपको कोई और नहीं बचा सकता है। आपको अपनी सुरक्षा खुद से ही करनी होगी।” टीवी 9 कर्नाटक द्वारा प्रसारित इस वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ ने पूरे बेंगलुरु शहर को आग में झोंक दिया।  

जिस इस्लामी भीड़ ने मंगलवार की शाम कॉन्ग्रेस विधायक का घर तहस-नहस किया, उसी भीड़ ने कुछ समय बाद शहर के दो पुलिस थाने भी तबाह किए।  इसके अलावा उन्होंने आस-पास मौजूद गाड़ियों को भी जला कर दिया। उन्हें इस बात का अंदेशा था कि पुलिस ने उनके साथियों को इन पुलिस थानों में बंद करके रखा है।  

पूरे बेंगलुरु में हुई तोड़-फोड़ और आगजनी की घटनाओं में कई पुलिस वाले घायल तक हुए और उनकी गाड़ियों में तोड़-फोड़ भी हुई। घटना नियंत्रित करने के लिए कुछ समय बाद KSRP प्लाटून्स को मौके पर बुलाया गया था। उनके द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ दंगाइयों ने उन पर छतों से पत्थर फेंके। कई मौक़ों पर पुलिस वालों को हालात नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले तक चलाने पड़े।  

हिंसा की इन घटनाओं में अब तक कुल 3 लोगों के मारे जाने की ख़बर है। घटना के बाद डीजे हल्ली पुलिस थाने के इर्द-गिर्द काफी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इस मामले में अब तक कुल 145 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। साथ ही पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है।   

इस मुद्दे पर कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को कहा कि राज्य सरकार बेंगलुरु हिंसा की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।

मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “मैं संपत्ति की वसूली को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा करना चाहता हूँ कि सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सार्वजनिक संपत्ति की भरपाई उन व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए जिन्होंने नुकसान पहुँचाया है। हम तुरंत कार्रवाई करने जा रहे हैं। हम व्यक्तियों की पहचान कर रहे हैं और नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इसके बाद दंगाइयों द्वारा नुकसान की वसूली की जाएगी।”

CCTV कैमरों और स्ट्रीटलाइट्स को तोड़ा, फिर धारदार हथियार से थाने पर हमला: बेंगलुरु दंगे की पूरी प्लानिंग

बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा किए गए दंगों के दौरान उग्र भीड़ डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के बेसमेंट में घुस गई और कथित तौर पर 200-250 वाहनों में आग लगा दी। खबरों के मुताबिक, कॉन्ग्रेस विधायक के आवास पर तोड़फोड़ करने वाली संप्रदाय विशेष की भीड़ ने मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को पुलिस थाने में यह मानकर तोड़फोड़ और वाहनों को क्षतिग्रस्त किया कि पुलिस ने आरोपितों को हिरासत में रखा है।

जिन पुलिसकर्मियों ने दंगाइयों को रोकने की कोशिश की, उन पर भी संप्रदाय विशेष की भीड़ ने हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप 60 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। मंगलवार रात पूर्वी बेंगलुरु में भड़की इस हिंसा में 3 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

इस बीच, बेंगलुरु अर्बन के उपायुक्त जीएन शिवमूर्ति ने डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन का दौरा किया और पुष्टि की कि हिंसा में बहुत सारी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा है। डीसीपी शिवमूर्ति ने कहा, “बीती रात हुई घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। सार्वजनिक संपत्ति को बहुत नुकसान हुआ है। मैं शहर के सभी लोगों से अपील करता हूँ कि इस घटना से उत्तेजित या परेशान न हों।”

डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों का संप्रदाय विशेष की सशस्त्र दंगाई भीड़ ने पीछा किया और उन्हें आस-पास के इलाकों में शरण लेनी पड़ी, यहाँ तक ​​कि उन्हें सुरक्षाबल के आने का इंतजार करना पड़ा।

इन दंगों में कई मीडियाकर्मी भी घायल हुए, कुछ को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। जबकि, कुछ लोगों को संप्रदाय विशेष की भीड़ के रोष का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ को दंगों की स्थिति को कवर करने के दौरान दंगाइयों की हिंसा का शिकार होना पड़ा।

इसके अलावा, पत्थरबाजी के दौरान लगभग 70 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। भीड़ ने उन पर धारदार हथियार भी फेंके। इनमें, 40 घायल पुलिस डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के थे, 10 केजी हल्ली स्टेशन के थे जबकि, शेष 20 अधिकारी आसपास के थानों से थे।

उपद्रवियों ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों में स्ट्रीटलाइट्स और सीसीटीवी कैमरों को भी नुकसान पहुँचाया, ताकि वो निश्चिन्त रहें कि पुलिस बाद में उनकी पहचान करने और उन्हें ट्रैक करने में कामयाब नहीं हो पाएगी।

डीसीपी गेल्ड के वाहन चालक वेलयुधा पर भीड़ ने हथियारों से हमला किया, जिस कारण उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पुलिस कमिश्नर कमल पंत द्वारा किए गए फोन के बाद भीड़ ने पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया। भीड़ ने उनके वाहनों को निशाना बनाते हुए उन पर हमला कर दिया और उन्हें प्रतिक्रिया करने तक का समय नहीं दिया।

देवराजीवनहल्ली पुलिस स्टेशन और कडुगोंडानहल्ली पुलिस स्टेशन पर भीड़ ने हमला किया। यह सब तब शुरू हुआ, जब पुलिस अधिकारी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के एक कार्यकर्ता मुज़म्मिल पाशा की शिकायत पर बातचीत कर रहे थे।

मुजम्मिल पाशा ने कांग्रेस विधायक अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन पी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा था। मुजम्मिल का आरोप था कि नवीन ने पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक पोस्ट किया था।

संप्रदाय विशेष की दंगाइयों की भीड़ इस बात से आक्रोशित थी कि पुलिस ने नवीन को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया और देखते ही देखते डीजे हॉल पुलिस स्टेशन में हिंसा भड़क उठी। कुछ ही देर बाद जब पुलिस की एक टीम नवीन के घर से वापस आ गई तो संप्रदाय विशेष की भीड़ ये देखकर नाराज हो गई कि पुलिस वैन में उनके साथ नहीं था।

कर्नाटक सरकार के रेवेन्यू मिनिस्टर आर अशोक ने विधानसभा में कांग्रेस नेता श्रीमूर्ति से मुलाकात की और कहा कि हमलावर चाहे जो हों, चाहे जहाँ छिपे हों, हम उन्हें खोज निकालेंगे। अशोक का आरोप है कि संप्रदाय विशेष के दंगाई कॉन्ग्रेस विधायक की हत्या करना चाहते थे।

पहले से रची गई थी दंगों की साजिश

रेवेन्यू मिनिस्टर अशोक ने कहा कि इस मामले से बहुत सख्ती से निपटा जाएगा ताकि आगे इस तरह की घटनाएँ न हों। उन्होंने कहा कि जिस तरह से दंगा भड़का, उससे स्पष्ट होता है कि इसके लिए गहरी साजिश रची गई थी।

अशोक ने कहा- “दंगाई शहर के दूसरे हिस्सों में आग फैलाना चाहते थे। जिस तरह से मूर्ति के घर तोड़फोड़ और लूटपाट हुई, उससे साफ हो जाता है कि हमलावर मूर्ति को मारने के इरादे से आए थे। हम ये पता लगा रहे हैं कि साजिश रचने वाले लोग राज्य के हैं या बाहर के। लेकिन, वे चाहे जहाँ छिपे हों, हम उन्हें खोज निकालेंगे। उन्हें ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि भविष्य में लोग कानून को हाथ में लेने की हिम्मत नहीं करेंगे। हमें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि हिंसा में PFI का हाथ है या SDPI का! जो गुनाहगार है, बो बख्शा नहीं जाएगा।”

क्या सुशांत सिंह को मारने के लिए किया गया स्टन गन का प्रयोग? सुब्रमण्यम स्वामी ने की NIA जाँच की माँग

सुशांत सिंह राजपूत की मौत को दो महीने बीतने वाले हैं। हर दिन कोई नई थ्योरी सामने आती है, जिसमें मौत की वजह का अंदाजा लगाया जाता है। अब स्टन गन थ्योरी सामने आई है, जिसे एक यूजर ने सोशल मीडिया पर डाला। वहीं इस थ्योरी को मद्देनजर रखते हुए बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत मृत्यु मामले की एनआईए जाँच की माँग की है।

दरअसल, उन्होंने एक फैंन के ट्वीट को देखने के बाद इस बात की आशंका जताई है कि एक्टर की मृत्यु फाँसी लगाने से नहीं बल्कि स्टन गन से हुई है। फैन के यह थ्योरी ट्विटर पर इस वक्त काफी वायरल हो रही है।

असल में ट्विटर पर एक फैन ने ट्वीट करके कहा है कि उसने स्टन गन के बारे में काफी कुछ पढ़ा है, जिसके बाद उसने यह निष्कर्ष निकाला है कि सुशांत सिंह राजपूत की हत्या स्टन गन से की गई है। फैन के ट्वीट के अनुसार, ”आज मैंने स्टन गन के बारे में पढ़ा और यह भी जाना कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है। यह भी देखा कि इनसे किस तरह के निशान शरीर पर पड़ते हैं। एकदम वैसे ही निशान हैं भाइयों (जैसे सुशांत की बॉडी पर थे)। उन लोगों ने पैरालाइज्ड करने के लिए स्टन गन का ही इस्तेमाल किया।”

इसके साथ ही यूजर ने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे और भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को टैग किया है।

इस फैन के ट्वीट का जवाब देते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर पर लिखा है, “क्या यह गन अरब सागर के जरिए भारत में आई है? एनआईए को इस मामले की जाँच के साथ जुड़ना चाहिए ताकि सच सबके सामने आ सके।”

इस वक्त इस थ्योरी ने लोगों को और भी हैरान कर दिया है। हर कोई इस सच्चाई को तह तक जानने की कोशिश करना चाहता है क्योंकि इससे पहले भी सुशांत की हत्या को लेकर कई बातें सामने आई थी।

वहीं इस यूजर से पहले अमेरिका के इंटरनल मेडिसिन में प्रैक्टिशनर डॉक्टर राजू बाधवा ने भी इस थ्योरी को लेकर एक पोस्ट किया था। उन्होंने कहा था कि सुशांत के मामले में स्टन गन का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने सुशांत की गर्दन की बाईं ओर पड़े जलने के निशान का जिक्र करते हुए अपनी थ्योरी को पुष्ट करने की कोशिश भी की है। उन्होंने लिखा- इसी तरह से स्टन गन का इस्तेमाल अमेरिका के एक नेवी सील अफसर को मारने के लिए किया गया था। ऐसा दिखाने की कोशिश की गई थी कि उसने आत्महत्या की है। लेकिन, फॉरेंसिक जाँच करने वालों ने हत्यारों को पकड़ लिया।

गौरतलब है कि इससे पहले सुशांत के मामले में राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर सीबीआई जाँच की माँग की थी। इसके साथ ही उन्होंने बॉलीवुड के कई हस्तियों को कटघरे में भी खड़ा किया था।

‘हिंदुओं को निशाना न बनाएँ संप्रदाय विशेष, BJP समस्याएँ खड़ी करने के लिए कर सकती है इस्तेमाल’: अभिसार

बेंगलुरु के दंगों पर बात करते हुए, जहाँ संप्रदाय विशेष की हिंसक भीड़ ने मंगलवार (अगस्त 11, 2020) शाम सड़कों पर तोड़फोड़ की, वहीं स्व-घोषित ‘पत्रकार’ अभिसार शर्मा ने दावा किया कि संप्रदाय विशेष को दंगा नहीं करना चाहिए क्योंकि ‘भाजपा प्रचार तंत्र’ अब इस मुद्दे का इस्तेमाल कर उन्हें निशाना बनाएगी और उनके लिए समस्याएँ खड़ी करेंगी।

HW नेटवर्क पर अपने शो में, अभिसार शर्मा एक धर्मनिरपेक्ष ‘भारतीय’ के रूप में आने की भरसक कोशिश करते हैं, जो हर कीमत पर हिंसा के इस कृत्य का विरोध करते हैं, लेकिन जैसे ही वह आगे बढ़ते हैं, उम्मीद से जल्द ही, उसकी वास्तविक चिंताएँ उजागर हो जाती हैं।

वीडियो में 2.15 मिनट पर, अभिसार शर्मा का दावा है कि भाजपा संप्रदाय विशेष के खिलाफ इस घटना का उपयोग करेगी और भविष्य में उनके लिए समस्याएँ पैदा करेगी। 4.54 मिनट पर, उन्होंने भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा द्वारा किए गए एक ट्वीट को दोहराया कि भाजपा ने इस घटना का उपयोग झूठी कहानी फैलाने के लिए पहले ही शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रवक्ता ने बेंगलुरु की घटना का इस्तेमाल दलित तथा संप्रदाय विशेष को निशाना बनाने के लिए किया।

अभिसार शर्मा ने कहा, “चूँकि जिस कॉन्ग्रेसी नेता पर हमला हुआ था, वह दलित था, इसलिए भाजपा नेता ने बड़ी चालाकी से, खूबसूरती से दंगों का इस्तेमाल जातिगत एंगल देने के लिए किया।”

अभिसार शर्मा, जो कभी अन्य पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए छवियों को जोड़कर फर्जी खबरें फैलाते हुए पकड़े गए थे, ने कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या पर भी बात की, जिन्हें इस्लामवादियों ने मौत के घाट उतार दिया था।

शाबाशी हासिल करने के लिए, तथाकथित पत्रकार का कहना है कि उन्होंने पहले अपने एक शो में उन राजनीतिक नेताओं की निंदा की थी, जिन्होंने ईशनिंदा के लिए हिंदू कार्यकर्ता को मृत्युदंड देने की माँग की थी। वाहवाही बटोरने के अपने उत्साह में, ’पत्रकार’ ने लगभग 3.04 मिनट पर एक बार नहीं बल्कि दो बार, कमलेश तिवारी के लिए कमलेश त्रिपाठी शब्द का इस्तेमाल किया।

अभिषेक शर्मा, शो में 3.45 मिनट पर “मंदिर के संरक्षकों” की जय-जयकार करने लग जाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने सराहना किया कि कैसे संप्रदाय विशेष के युवाओं ने अनियंत्रित भीड़ से ‘मंदिर की सुरक्षा’ के लिए ‘मानव शृंखला’ बनाई। अभिसार शर्मा ने इसे सुखद समाचार बताते हुए कहते हैं कि यह भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को प्रदर्शित करता है। मगर संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा ‘मानव शृंखला’ बनाकर ‘मंदिर बचाने वाले’ का राग अलापने वाले अभिसार शर्मा यह भूल जाते हैं कि हमलावर भी उनके अपने भाई ही थे।

खैर यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है। अभिसार शर्मा भी उन्हीं लोगों में शामिल थे, जिनके लिए ‘आगजनी करने वालों’ का कोई धर्म नहीं था, मगर ‘मानव शृंखला’ बनाकर ‘मंदिर बचाने वाले’ वाले का धर्म पता था। बता दें कि यौन उत्पीड़न के आरोपित विनोद दुआ ने भी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए HW नेटवर्क का इस्तेमाल किया था।

गौरतलब है कि बेंगलुरु पुलिस ने केजी हल्ली थाना क्षेत्र में दंगा भड़काने के आरोप में SDPI के नेता मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि वो इन दंगों का मास्टरमाइंड है। इसके अलावा दो अन्य नेताओं के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। दोनों फिलहाल फरार चल रहे हैं।

SDPI का नेता मुजम्मिल पाशा नवीन नामक व्यक्ति के खिलाफ पैगम्बर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में मामला दर्ज करवाने केजी हल्ली थाना पहुँचा था। फिर उसने भड़काऊ भाषण देते हुए पुलिस थाने के बाहर खड़ी संप्रदाय विशेष की भीड़ को सम्बोधित किया। इसके बाद वो कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास के आवास पर हिंसक भीड़ के साथ प्रदर्शन करने पहुँचा। 

इस दौरान मुजम्मिल पाशा के साथ SDPI के दो और नेता साथ थे जो लगातार लोगों को भड़का रहे थे। उसके सहयोगी नेताओं जफ़र और खलील ने संप्रदाय विशेष की भीड़ को पत्थरबाजी करने और थाने के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले करने के लिए भड़काया था। जहाँ पुलिस मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार करने में कामयाब रही है, वहीं बाकी 2 नेता फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज से भी इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

LOC पर मौजूद हैं लश्कर-जैश-अल बद्र के आतंकियों के कई शिविर: खुफिया एजेंसी ने किया अलर्ट

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने और दो केंद्र शासित प्रदेशों- लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के निर्माण की पहली वर्षगाँठ पर इन इलाकों में विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है। सभी की निगाह लद्दाख पर है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में लगातार पाकिस्तान की तरफ से आतंकवादियों के घुसपैठ की कोशिश जारी है।

खुफिया एजेंसियों द्वारा मिले इनपुट के अनुसार, न केवल लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद, बल्कि अल बद्र जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े दर्जनों आतंकियों का नियंत्रण रेखा पर मौजूद लॉन्च पैड और शिविरों में होने का पता चला है।

‘टाइम्स नाउ’ की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में तालिबान से जुड़े आतंकवादियों को जम्मू और कश्मीर में तैनात करने की चर्चा की जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना की खुफिया एजेंसी ISI के साथ जिहाद से जुड़े संगठन UJC द्वारा इसे समन्वित किया जा रहा है।

इंटेलीजेंस सोर्स द्वारा मिली जानकारी के अनुसार:-

◆ 6 लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर सरदाली में देखा गया है। यह मैकैल सेक्टर (Macchal sector) के सामने है, जहाँ 56 राष्ट्रीय राइफल्स तैनात हैं। वहीं, फुलवाल में LET और हिज्बुल मुजाहिदीन के 7 सदस्यों का एक मिश्रित समूह मौजूद है, जो मैकैल सेक्टर के विपरीत है।

◆ सुरक्षा एजेंसियों ने 3 लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादियों को कृष्णाघाटी सेक्टर के सामने डिगवार क्षेत्र में देखा है। इसके अलावा, भीमम्बर गली के सामने, गिड्रान में 5 एलईटी के आतंकियों का पता चला है।

◆ कृष्णाघाटी में घुसपैठ की योजना के साथ 7 लश्कर के एक और समूह दारुचियान में देखा गया है। तंगधार के सामने जुरा में अल बद्र के 7 आतंकियों को देखा गया है। जो घुसपैठ की तैयारी में थे, लेकिन योजना सफल नहीं होने की वजह से उन्होंने इस प्लान को बदल दिया।

◆ कुपवाड़ा क्षेत्र में आत्मघाती हमले की योजना बना रहे दुधियाल में 4 जेईएम आतंकवादी का पता लगा है। बता दें कि जैश-ए-मुहम्मद संगठन, लश्कर-ए-तैयबा से छोटा संगठन है, लेकिन ये अपनी विचारधारा और संगठन के प्रति काफी प्रतिबद्ध है।

◆ जैश-ए-मुहम्मद का एक समूह केरन सेक्टर में एलओसी पर एक भारतीय पोस्ट पर लड़ाई एक्शन ग्रुप हमले की योजना बना रहा है। यह संगठन पाकिस्तान सेना के कमांडो द्वारा समर्थित स्पेशल सर्विसेज ग्रुप या एसएसजी की स्वजवात्र है। 4 जेईएम के आतंकी पल्लनवाला के पास चंब में मौजूद हैं।

◆ इनके अलावा, 5 जैश-ए-मुहम्मद आतंकी करीमाबाद/अरहाल क्षेत्र में हमले की योजना बना रहे हैं और 4-6 अज्ञात आतंकवादियों के दो समूह सांबा सेक्टर के सामने सुखमल और ‘मसरूर बड़ा भाई’ पर स्थित हैं।

सुशांत केस: शेखर सुमन ने की रिया की गिरफ्तारी की माँग, बोले- अब रिहा नहीं हो सकती रिया

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया चक्रवर्ती संदेह के घेरे में हैं। केस के समीकरण कितनी बार भी क्यों ना बदले, लेकिन हर बार कनेक्शन रिया के साथ सामने आ रहा है। इस बीच बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शेखर सुमन ने भी रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी की माँग की है।

एक्टर शेखर सोशल मीडिया पर लगातार सुशांत को न्याय दिलाने की मुहिम चला रहे हैं। शेखर सुमन ने एक बार फिर रिया के खिलाफ आवाज बुलंद की है। शेखर सुमन ने रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी की माँग करते हुए ट्वीट किया है।

वो ट्वीट कर लिखते हैं, “रिया अब रिहा नहीं हो सकती।” उन्होंने अपने ट्वीट में #ArrestRheaChakraborty हैशटैग का भी इस्तेमाल किया है। मालूम हो कि ये पहली बार नहीं है जब शेखर सुमन ने सुशांत मामले में सक्रियता दिखाई हो, जब एक्टर के केस में सीबीआई जाँच की माँग हो रही थी, तब शेखर सुमन भी लगातार प्रशासन पर सीबीआई जाँच का दवाब बना रहे थे।

इसके साथ ही उन्होंने कई ट्वीट्स भी किए हैं। जिसमें उन्होंने सुशांत के मामले पर प्रकाश डालते हुए लिखा है, “यह पूरा मामला राजनीतिक जटिलता में उलझा दिया गया है। सभी को बेहतर की उम्मीद करते हुए सबसे बुरे के लिए तैयार रहना होगा।”

इसके साथ ही उन्होंने अपने अगले ट्वीट में सिस्टम पर सवाल खड़े करते हुए कहा, “जब आप मर जाते हैं, या आपकी हत्या कर दी जाती है, तो आप सफल, प्रसिद्ध और एक बड़े स्टार बन जाते हैं। वरना इससे पहले किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई संज्ञान नहीं लेता, न ही सिस्टम, न ही पुलिस, कोई भी नहीं।”

गौरतलब है कि सीबीआई तमाम मुद्दों पर रिया से पूछताछ कर रही है। वहीं रिया चक्रवर्ती का कॉल डिटेल रिकॉर्ड अब सीबीआई के रडार पर आ गया है। सीबीआई को रिया के कॉल लॉग से पता चलता है कि उन्होंने किसी शख्स का नाम ‘AU’ से सेव किया है।

नंबर और रिया चक्रवर्ती के बीच 44 आउटगोइंग कॉल थे। हालाँकि, जब कोई नंबर पर कॉल करता है, ‘SU’ नाम का शख्स रिसीव करता है। फिलहाल, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले की जाँच कर रही है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि यह व्यक्ति कौन है और क्या व्यक्ति किसी भी तरह से उक्त मामले में शामिल था।

बता दें कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में सीबीआई ने रिया चक्रवर्ती के साथ-साथ उनके परिजन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इधर सुशांत सिंह मौत मामले की जाँच के लिए SIT गठित की गई है। जिन 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उसमें रिया चक्रवर्ती व उनके परिजन, इंद्रजीत चक्रवर्ती, संध्या चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सैमुअल मिरांडा, श्रुति मोदी शामिल हैं।।