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नाबालिग हिन्दू लड़कियों को नशे का आदी बना रहा था जावेद: इंस्टाग्राम पर दोस्ती कर ले जाता था हुक्का बार

मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक ऐसे युवक को गुरफ्तार किया गया है, जो नाबालिग हिन्दू लड़कियों को अपना शिकार बना कर उन्हें नशे की ओर धकेलता था। एक ट्विटर यूजर कपिल शर्मा ने हुक्का बार के वायरल वीडियो के हवाले से लिखा कि मेरठ निवासी जावेद खान (नाबालिग, इसीलिए बदला हुआ नाम) शास्त्री नगर में रहता है और उसका मुख्य पेशा प्रतिष्ठित हिन्दू कॉलनियों की लड़कियों को निशाना बनाना है। मेरठ पुलिस ने बताया कि उक्त प्रकरण में दो अभियुक्त गिरफ्तार कर के जेल भेजे जा चुके हैं।

नौचंदी पुलिस ने बताया है कि आरोपित जावेद खान नाबालिग स्कूली छात्राओं को हुक्का पीला कर उन्हें नशे का आदी बनाता था। उसे बुधवार को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया जाएगा। उसका ठिकाना रंगोली मंडप के पास स्थित डगआउट कैफे हुआ करता था। सोशल मीडिया में इस कैफे की 2 वीडियो वायरल हुई। धर्म रक्षा समिति के बेटी बचाओ के प्रमुख मनीष लोईया ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी।

मेरठ हुक्का बार के वायरल वीडियो में एक नाबालिग युवक द्वारा दो लड़कियों को हुक्का पिलाते हुए देखा जा सकता है, जिनके बारे में बताया गया कि वो हिन्दू हैं। मेरठ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 दिन पहले डगआउट कैफे को बंद करा दिया था। बाद में लॉकडाउन के उल्लंघन के आरोप में कैफे मैनेजर और मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया। फिर आरोपित जावेद को मंगलवार अगस्त (अगस्त 11, 2020) की शाम आरटीओ कार्यालय रोड से धर-दबोचा गया।

आरोपित के पास से 400 ग्राम गाँजा भी बरामद हुआ है। उसकी उम्र 17 साल 2 महीने है, इसीलिए उसे जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया जाएगा। उसकी कई दिनों से तलाश जारी थी। आरोपित जावेद 6 महीने पहले भी लड़कियों से छेड़छाड़ के आरोप में ‘बच्चा जेल’ जा चुका है। फ़िलहाल वह जमानत पर बाहर था। ट्विटर यूजर कपिल ने इस घटना को लेकर लिखा:

शहर की सबसे अमीर व शानदार हिंदू कालोनी की नाबालिग लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फँसा कर होटलों और बार में ले जाकर उनके साथ मजे करना इसका पेशा था। उन लड़कियों को नशे की लत लगाना आरोपित का प्रमुख कार्य था। इस लड़के का फोकस ज्यादातर नाबालिग लड़कियों पर ही रहता था। इस लड़के का फोकस ज्यादातर नाबालिग लड़कियों पर ही रहता है। हम सभी हिन्दू परिजनों से निवेदन करते हैं कि आप अपने बच्चों का ख्याल रखें। अगर ट्यूशन या जॉब करने भी जा रही है, तो भी वाट्सएप काल या अन्य विडियो कालिंग से लोकेशन लेते रहें।

आरोपित जावेद इंस्टाग्राम के माध्यम से हिन्दू लड़कियों से दोस्ती बढ़ाता था और फिर उन्हें मिलने के लिए बुलाता था। वह खुद भी नशे का आदी है। वायरल तस्वीरों में दिख रही दोनों लड़कियाँ भी इंस्टाग्राम पर ही उसकी दोस्त बनी थीं। ये तीनों नशा कर के इंस्टाग्राम पर तस्वीरें डालते रहते थे। वायरल वीडियो जुलाई 16 की है। कहा जा रहा है कि कई छात्राओं के परिजनों ने जब उसकी हरकतों का विरोध किया था तो उसने जान से मार डालने की धमकी भी दी थी।

‘अमर उजाला’ की खबर के अनुसार, जावेद कई लड़कियों की ज़िंदगियाँ बर्बाद कर चुका है। उन्हें नशे का आदी बना चुका है। वहीं पुलिस-प्रशासन में भी उसकी सेटिंग होने का दावा किया गया है। शास्त्रीनगर के पॉश इलाक़े में ही वो लड़कियों को निशाना बनाता था। मेरठ में चल रहे हुक्का बार का मामला हाईकोर्ट भी जा चुका है। लॉकडाउन के बाद इस मामले की सुनवाई होगी। मेरठ में सदर, आबूलेन, शास्त्रीनगर और लालकुर्ती में हुक्का बार चल रहे हैं।

पैगम्बर मुहम्मद पर FB पोस्ट लिखने वाला हुआ अरेस्ट: बेंगलुरु में कट्टरपंथी भीड़ द्वारा हिंसा में 150 दंगाई गिरफ्तार

बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा दलित कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर किए गए हमले, दंगे, आगजनी और पत्थरबाजी और हिंसा के मामले में सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। बता दें कि भीड़ ने पुलिस स्टेशन में भी आगजनी की। सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है।

बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है और सरकार इस प्रकार की भड़काऊ हरकतों और अफवाहों को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई निश्चित है। श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

नवीन के ही फेसबुक पोस्ट को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ था। उस पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर विवादित पोस्ट डालने का आरोप है। अब तक हिंसा करने वालों में से 150 को गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने लोगों को शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना में 2 लोग मारे गए और 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

पूरे बेंगलुरु में धारा-144 लगा दिया गया है। बता दें कि 100 के क़रीब संप्रदाय विशेष की भीड़ ने न सिर्फ कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर तोड़फोड़ की थी बल्कि बाहर खड़ी गाड़ियों को भी जला डाला था। विधायक आवास में तोड़फोड़ का नज़ारा अभी भी देखा जा सकता है। दंगाइयों ने मजहबी नारे लगाते हुए पत्थरबाजी और आगजनी की। विधायक ने भी शांति की अपील की है।

बता दें कि पूर्वी बेंगलुरु के केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के बाहर मजहबी नारेबाजी हुई, पत्थरबाजी की गई और गाड़ियों को फूँक दिया गया। पूर्वी भीमाशंकर के डीसीपी की कर को डंडों और पत्थरों से निशाना बनाया गया। वहीं डीजे हल्ली में पुलिस की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। रात के करीब 10:30 बजे अतिरिक्त पुलिस बल की टुकड़ियाँ आईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की। यहाँ तक कि पुलिस को थाने के भीतर घुसने के लिए भी संप्रदाय विशेष की भीड़ ने जगह नहीं दी।

वामपंथियों को दिल्ली दंगों की सच्चाई नहीं आ रही रास, 20 अगस्त को भेजेंगे ओपन लेटर, गुप्त सूचना हुई लीक

वजाहत हबीबुल्लाह, वृंदा करात, हर्ष मंदर, इरफान हबीब, अशोक धवले, आनंद पटवर्धन, प्रकाश राज, शबनम हाशमी… ये कुछ नाम हैं। परिचय यह है कि ये सभी वामपंथी हैं। फिलहाल ये सभी दर्द से गुजर रहे हैं। इनका दर्द है कि दिल्ली दंगों की जाँच सही से नहीं चल रही।

दंगों की जाँच पुलिस कर रही है। हर जगह पुलिस ही करती है। लेकिन दिल्ली दंगों की जाँच में निकल कर आ रहे नाम और इलाके इनके गले की हड्डी बनते जा रहे हैं। जाँच के कारण इनके हिंदू-विरोधी नैरेटिव और दंगों के लिए हिंदुओं को बिना किसी सबूत के दोषी ठहराने देने की आसमानी फितरत का पर्दाफाश हो रहा है। इसलिए अब ये जाँच पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

दिल्ली दंगों की जाँच को पटरी से उतारने के लिए इन्होंने इसे एक तरह से अनुचित, एक पक्षीय और बनावटी कह दिया है। वामपंथी मानसिकता वाले ये बड़े नाम दिल्ली दंगों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच के लिए केजरीवाल सरकार को लेटर लिखे हैं।

वैसे तो इस लेटर को 20 अगस्त को तब प्रकाशित किया जाना था, जब इसे दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को भेजा जाता। लेकिन उससे पहले ही ऑपइंडिया के हमारे सूत्रों ने इस लेटर को लीक कर दिया। इसे हम नीचे प्रकाशित कर रहे हैं।

केजरीवाल को दिल्ली दंगों की जाँच से संबंधित भेजने वाले लेटर पर साइन करने के लिए ये वामपंथी अपने दोस्तों से आग्रह भी कर रहे हैं। ऊपर जो लेटर है, उसके लिंक के साथ एक आग्रह पत्र भी ये भेज रहे हैं। आग्रह पत्र में यह लिखा है कि 19 अगस्त 2020 की सुबह तक सब अपना समर्थन भेजें क्योंकि 20 अगस्त 2020 को दोपहर 12 बजे दिल्ली सरकार को लेटर भेज दिया जाएगा।

आग्रह पत्र के नीचे जिनका नाम है, उनका जिक्र ऊपर किया जा चुका है। मतलब – वजाहत हबीबुल्लाह, वृंदा करात, हर्ष मंदर, इरफान हबीब, अशोक धवले, आनंद पटवर्धन, प्रकाश राज, शबनम हाशमी।

पैगम्बर मुहम्मद पर FB पोस्ट, दलित कॉन्ग्रेस MLA के घर पर हमला: 1000+ कट्टरपंथियों की भीड़, बेंगलुरु में दंगे व आगजनी

मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात पूर्वी बेंगलुरु में दंगे और आगजनी का भीषण नज़ारा देखने को मिला। केजी हल्ली, डीजे हल्ली और पुल्केशी नगर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। 1000 से भी अधिक की संप्रदाय विशेष की भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी। उनका आरोप था कि विधायक के रिश्तेदार ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किया है।

सबसे पहले तो केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के सामने एक हज़ार से ज्यादा की संख्या में संप्रदाय विशेष के लोग इकट्ठे हो गए और कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन की गिरफ्तारी की माँग करने लगे। इसके बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। इसी तरह विधायक के आवास के बाहर भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। उनके घर के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। कई घण्टों तक आगजनी चली।

जब आग बुझाने के लिए दमकल को गाड़ियाँ वहाँ पर पहुँची तो दंगाइयों ने उन्हें अपना काम करने से रोक दिया और एंट्री नहीं दी। केजी हल्ली पुलिस स्टेशन पहुँची संप्रदाय विशेष की भीड़ ने आरोप लगाया कि पुलिस शिकायत दर्ज करने में आनाकानी कर रही है। रात के करीब 8:30 बजे विधायक के आवास के बगल में बन रही उनकी एक निर्माणाधीन इमारत को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इसके बाद पुलिस स्टेशन के पास ही दंगे शुरू हो गए। संप्रदाय विशेष की भीड़ ईस्ट बेंगलुरु स्थित पुल्केशी नगर के विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति की गिरफ़्तारी की माँग कर रही थी।

अल्लाह-हो-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच जला डाला पुलिस स्टेशन

पुलिस स्टेशन के बाहर मजहबी नारेबाजी हुई, पत्थरबाजी की गई और गाड़ियों को फूँक दिया गया। पूर्वी भीमाशंकर के डीसीपी की कर को डंडों और पत्थरों से निशाना बनाया गया। वहीं डीजे हल्ली में पुलिस की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। रात के करीब 10:30 बजे अतिरिक्त पुलिस बल की टुकड़ियाँ आईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की। यहाँ तक कि पुलिस को थाने के भीतर घुसने के लिए भी संप्रदाय विशेष की भीड़ ने जगह नहीं दी।

कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि 10 मिनट तक पुलिस ये सब होते हुए देखती रही और उसने कुछ नहीं किया। वो असहाय नज़र आ रही थी। यहाँ तक कि आधी रात के बाद भी पुलिसकर्मी दंगाइयों से काफी कम संख्या में थे और संघर्ष कर रहे थे। कमिश्नर कमल पंत भी घटनास्थल पर पहुँचे लेकिन फिर पुलिस की एक गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। पुलिस ने विधायक अखंड श्रीनिवास के रिश्तेदार नवीन को हिरासत में ले लिया।

नवीन ने दावा किया कि उक्त फेसबुक पोस्ट उसने नहीं किया है और उसका एकाउंट हैक किए जाने के बाद इसे पोस्ट किया गया है। कन्नड़ न्यूज़ चैनल सुवर्ण न्यूज़ के पत्रकारों पर भी हमला किया गया, जो इन दंगों को लाइव कवर कर रहे थे। दो पत्रकारों को घायल कर दिया गया। उनके कैमरे फोड़ डाले गए। गृहमंत्री बसवराज बोमई ने वीडियो डाल कर शांति की अपील की। उन्होंने कहा कि पुलिस दोषियों को नहीं बख्शेगी लेकिन लोग क़ानून को अपने हाथ में न लें।

वहीं ईस्ट बेंगलुरु स्थित पुल्केशी नगर के विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति ने भी संप्रदाय विशेष के लोगों से शांति की अपील करते हुए कहा कि हमलोग भाई-भाई हैं और चाहे कोई भी मुद्दा हो, हमें लड़ाई नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिसने भी ग़लती की है, उसे क़ानूनी रूप से सज़ा दिलाई जाएगी। उन्होंने संप्रदाय विशेष के लोगों से कहा कि दोषियों को सज़ा देने के लिए कार्रवाई की जाएगी। यहाँ तक कि चमराजपेट के कॉन्ग्रेस विधायक भी डीजे हल्ली थाने पहुँचे।

उन्होंने अपनी ही पार्टी के दलित विधायक अखंड श्रीनिवास की गिरफ्तारी की माँग की। वो कई मौलानाओं और संप्रदाय विशेष समाज के नेताओं के साथ थाने पहुँचे थे। उन्होंने फिर से विरोध प्रदर्शन की धमकी दी है। पुलिस फायरिंग में 2 लोगों की मौत हुई है। वहीं 60 पुलिसकर्मी इस दंगेबाजी में घायल हुए। घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर लोग दंगाईयों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

मौलाना ने 9 साल की अपनी ही स्टूडेंड का किया रेप, अब बच्ची से शादी कराने और केस वापस लेने की धमकी

एक मौलाना है। मदरसा में बच्चों को पढ़ाता है। नाम है अरशद रहमानी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाले इस 25 साल के मौलाना पर रेप का आरोप है। रेप अपनी ही एक स्टूडेंट के साथ, जिसे यह पढ़ाता था। वो स्टूडेंट जिसकी उम्र मात्र 9 साल है।

पुलिस ने रेप आरोपित मौलाना अरशद रहमानी को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन यह दो दिन पुरानी खबर है। ताजा खबर इससे भी भयावह है। जिस मौलाना पर रेप का आरोप है, उसके परिवार वाले पीड़ित बच्ची के परिवार पर दबाव बना रहे हैं कि वो 9 साल की बच्ची की शादी मौलाना से कर दे और केस वापस ले।

25 साल का मौलाना (जिसने रेप किया), 9 साल की बच्ची (जिसका रेप हुआ) – दोनों की शादी की सोच 21वीं सदी में! वो भी धमकी के साथ! पीड़िता के पिता ने थाने में जाकर इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस जो अब तक मौलाना के रेप आरोप की तहकीकात कर रही थी, वो अब परिवार वालों की शादी की धमकी को लेकर भी जाँच कर रही है।

रायपुर के खमारडीह थाना पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता के पिता ने बताया कि मदरसे से जुड़े कुछ लोगों द्वारा केस वापस नहीं लेने पर बेटी को बदनाम करने और समाज से बहिष्कृत करने की धमकी दी जा रही है।

अरबी पढ़ाने आता था पीड़िता के घर

रायपुर शहर के खमारडीह थाना क्षेत्र में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अरशद रहमानी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि आरोपित मौलाना रहमानी पंडरी क्षेत्र के मदरसे में शिक्षक है। वह बच्ची और उसकी बहन को अरबी पढ़ाने उनके घर जाता था। आरोपित मौलाना पिछले 15 दिनों से अरबी पढ़ाने बच्ची के घर जा रहा था। रविवार के दिन उसने बच्ची को अकेला देख कर उसके साथ बलात्कार किया।

आरोपित मौलाना अरशद पिछले लगभग 3-4 सालों से रायपुर स्थित मदरसे में रह रहा था। पुलिस ने कहा है कि इसके पहले भी मौलाना पर छेड़छाड़ के आरोप लग चुके हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित मौलाना अरशद रहमानी को गिरफ्तार किया। मौलाना पर भारतीय दं संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 506 (आपराधिक धमकी) और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रिया चक्रवर्ती ने ‘AU’ को किए 44 कॉल, सुशांत सिंह राजपूत की मौत से पहले और बाद भी किए गए कई कॉल: रिपोर्ट्स

बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती का कॉल डिटेल रिकॉर्ड अब सीबीआई के रडार पर आ गया है। सीबीआई को रिया के कॉल लॉग से पता चलता है कि उन्होंने किसी शख्स का नाम ‘AU’ से सेव किया है।

टाइम्स नाउ ने बताया कि रिया ने ‘AU’ नाम के शख्स के साथ कई बार बातें की है। बता दें कि रिया चक्रवर्ती मृतक बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड हैं और उन पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि सुशांत की रहस्यमय मौत में वो भी शामिल थीं।

टाइम्स नाउ के अनुसार, उस नंबर और रिया चक्रवर्ती के बीच 44 आउटगोइंग कॉल थे। हालाँकि, जब कोई नंबर पर कॉल करता है, ‘SU’ नाम का शख्स रिसीव करता है। फिलहाल, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले की जाँच कर रही है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि यह व्यक्ति कौन है और क्या व्यक्ति किसी भी तरह से उक्त मामले में शामिल था।

TrueCaller में भी यह नंबर SU के नाम से रजिस्टर्ड है। 44 आउटगोइंग कॉल और 2 एसएमएस के अलावा 17 इनकमिंग कॉल थे। बॉलीवुड अभिनेता की मृत्यु से एक दिन पहले 13 जून को भी उस नंबर पर एक कॉल गया था, और फिर सुशांत की मृत्यु के एक दिन बाद भी उस नंबर पर कॉल गया था। 16 जून को भी कॉल किया गया था।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को रिया चक्रवर्ती की याचिका पर फैसला रिजर्व कर लिया है। वहीं मृत अभिनेता के पिता ने कहा कि किसी ने भी सुशांत सिंह राजपूत की बॉडी को पंखे से लटकते हुए नहीं देखा था और जब उनकी बहन कमरे के अंदर घुसी, तब तक बॉडी उतारी जा चुकी थी।

रिया चक्रवर्ती के वकील ने केस को मुंबई ट्रांसफर करने की माँग की। उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दूसरे राज्य (बिहार) में FIR करा कर सीबीआई को जाँच ट्रांसफर की गई है, इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

वहीं, सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह के वकील विकास सिंह ने कहा कि जानबूझ कर रिया द्वारा सुशांत को उनके परिवार से दूर किया जा रहा था। सुशांत के पिता ने कई बार अपने बेटे के इलाज के बारे में पूछा और आने देने को कहा, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया।

भूमिपूजन पर भगवा झंडे-पटाखे दिए जलाना डरा रहा है संप्रदाय विशेष को: शन्नो की शिकायत पर ‘वायर’ की तरफदारी

प्रोपेगेंडा न्यूज़ वेबसाइट ‘द वायर’ ने अपनी एक सनसनीखेज रिपोर्ट में दावा किया है कि अयोध्या श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन के अगले दिन दिल्ली की एक ‘मस्जिद’ वाली गली में भगवा झंडे लगा दी गए। द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के सुभाष मोहल्ले में लेन नंबर 2 क्षेत्र के निवासियों ने ‘द वायर’ के पास शिकायत की है कि वहाँ पर भूमिपूजन के बाद ‘अशोभनीय’ और ‘सांप्रदायिक ‘ नारेबाजी की गईं।

इस बेहद काल्पनिक घटना का विवरण देते हुए ‘द वायर’ ने अपनी इस तथाकथित रिपोर्ट में लिखा है कि इस साल की शुरुआत में फरवरी में दिल्ली के दंगों से पहले ये लेन खुली होती थी, लेकिन अब इस पर गेट लग चुके हैं।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वहाँ के निवासियों ने वायर को बताया कि भूमिपूजन की रात को ‘मीडिया हाइप’ और आरएसएस की कारस्तानी से लोगों ने दीए जलाए और रात के करीब 1 बजे वहाँ मौजूद लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए ‘गद्दारों को बाहर निकालो’ और ‘मुल्लों बाहर निकलो’ की आवाजें लगाईं।

हालाँकि, वायर ने ये रिपोर्ट किसी ‘अनम*’ नाम के हवाले से लगाए हैं लेकिन इसमें नाम के साथ लगे हुए स्टार के चिन्ह के बारे में द वायर ने कोई नोट नहीं लिखा है कि ये नाम वास्तविक हैं या फिर वायर की इस रिपोर्ट के अनुसार ही मनगढ़ंत किरदार हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार, “अनम को एहसास हुआ कि उस रात उसके पति ने जो कहा, वह सच था। यह अहसास तब हुआ जब उसने शनिवार रात उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा पुलिस स्टेशन में एक घटना के बारे में सुना।”

द वायर के अनुसार, शन्नो नाम की एक महिला ने रोते-बिलखते हुए आरोप लगाए हैं कि उनके गाल पर थप्पड़ के भी निशान हैं और उनकी 17 साल की बेटी को भी चांटे मारे गए साथ ही, उनकी छाती पर हाथ मार कर उसका कुरता फाड़ दिया गया।

वायर की रिपोर्ट के अनुसार, शन्नो ने कहा कि वो लोग भगवा झंडे लेकर ‘संप्रदाय विशेष’ की गली में घुसे जिससे गली में साम्प्रदायिक तनाव का माहौल हो गया है। शन्नो का कहना है कि
आज उन्होंने मस्जिद के पास भगवा झंडे बाँध दिए हैं और उसके गेट के बाहर पटाखे फोड़ रहे हैं, अगर उन्हें दंड नहीं मिला तो वो कल मस्जिद के अंदर ऐसा करेंगे।”

संप्रदाय विशेष के पत्रकार लोगों से मिलकर कर रहे हैं फर्जी रिपोर्टिंग

जब ऑपइंडिया ने सुभाष मोहल्ले के स्थानीय लोगों से इस सम्बन्ध में बातचीत की तो उन लोगों ने बताया कि भूमिपूजन की रात उन्होंने दीए जलाए और पटाखे जरुर फोड़े लेकिन किसी प्रकार की नारेबाजी नहीं की।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सब कुछ सामान्य ही था लेकिन इसके कुछ दिन बाद संप्रदाय विशेष के पत्रकारों ने वहाँ मौजूद परिवारों से बातचीत कर इसे मजहबी रंग देने का प्रयास किया। जब भूमिपूजन के उत्साह में लोगों ने दीए जलाए और पटाखे फोड़े तो शन्नो नाम की इस महिला ने लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की।

आज भी कुछ संप्रदाय विशेष के पत्रकार उस गली में गए थे, लेकिन आज वहाँ मौजूद लोगों ने पुलिस को इसकी सूचना दी कि ये लोग मामले की गलत रिपोर्टिंग कर रहे हैं जिसके बाद पुलिस उन पत्रकारों को ही थाने ले गई।

शन्नो को लेकर दर्ज हुई है शिकायत

उल्लेखनीय है कि ‘द वायर’ की रिपोर्ट में शन्नो के किए गए दावों के विपरीत सुभाष मोहल्ला के लोगों ने सलीम की पत्नी शन्नो के खिलाफ लोगों को परेशान करने और उन्हें अपनी ‘ऊँची पहुँच’ को लेकर धमकाने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

पूर्वोत्तर दिल्ली के भजनपुरा थाने में दर्ज शिकायत में स्थानीय लोगों ने कहा है कि फरवरी माह में हुए दंगों के बाद से ही इलाके माहौल शांतिपूर्ण है लेकिन शन्नो जबरन यहाँ तनाव पैदा करने का प्रयास करती हैं।

अगस्त 11, 2020 को दर्ज इस शिकायत के अनुसार, “हमारे क्षेत्र में एक शन्नो, पत्नी सलीम, रहती है जो कि हर आए दिन हमारे क्षेत्र में माहौल ख़राब करने में लगी रहती है और झगड़ा करने की कोशिश करती है। वह लगातार झूठी शिकायत करती रहती है और कहती है कि मेरी हाईकोर्ट के वकील से पहचान है। मैं सबको दंगों और लड़ाई के साथ अन्य आरोपों में फँसा दूँगी। साथ ही, अन्य महिलाओं को भी हमारे खिलाफ भड़का रही है, जिससे मोहल्ले का माहौल ख़राब होने का अंदेशा है। हम सभी क्षेत्रवासी परेशान हैं। आपसे अनुरोध करते हैं कि इस महिला से हमें बचाया जाए और ऐसे साम्प्रदायिक माहौल ख़राब करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।”

शिकायत की कॉपी

इस शिकायत में दीपक गोस्वामी, रवि तिवारी और फखरुद्दीन समेत कुल 14 लोगों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। ऐसे में सवाल यह उठते हैं कि प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की इस खोजी रिपोर्ट और इसके कथित पीड़ित किरादारों में से एक शन्नो के सभी आरोप कितने सही हैं?

इस रिपोर्ट और इसके आरोपों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गली में यदि कोई भगवा झंडे लेकर घुसा भी है तो वह पाकिस्तान की गली में नहीं बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली की ही किसी गली में घुसे होंगे और यदि वो कथित तौर पर भगवा झंडे लगा रहे हैं तो फिर भगवा झंडे लगा देने में शन्नो को सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की उम्मीद क्यों नजर आ रही है?

जिस तरह की भूमिका द वायर जैसे प्रपंचकारियों ने श्रीराम मंदिर के शुरुआत से लेकर इसके आखिरी फैसले, और अब भूमिपूजन के दौरान इसे दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों से जोड़ने के लिए किए, उससे यही साबित होता है कि यह इस्लामिक विचारधारा के समर्थक तथाकथित मीडिया चैनल्स अभी तक भी राम मंदिर में विवाद पैदा करने की अपनी हर आखिरी कोशिश में जुटें हुए हैं।

द वायर की इसी रिपोर्ट में शन्नो विवाद पर भजनपुरा के SHO अशोक शर्मा ने कहा है कि इस इलाके में हिंदू और संप्रदाय विशेष दोनों तरह के लोग रहते हैं। उन्होंने पटाखे भी फोड़े। अब वे हमें उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कह रहे हैं। जब राष्ट्र में हर कोई जश्न मना रहा है, दीया जला रहा है और पटाखे फोड़ रहा है, तो फिर मुद्दा क्या है?

SHO शर्मा ने कहा कि यह एक समस्या तब होती, जब उनके घर के दरवाजे पर यह किया गया होता, दीया जलाना और केसरिया झंडे लगाना कोई अपराध नहीं है। अशोक शर्मा ने कहा है कि इस विषय में स्थानीय लोगों के साथ बात करने पर ही पता चल पाएगा कि यह मुद्दा क्या है और यदि कोई विवाद है तो क्या यह आपसी बातचीत से हल किया जा सकता है।

‘मैं कहाँ चला जाऊँ, राजदीप? मैं तो गर्त में हूँ!’ भूमिपूजन पर विलाप करते ओवैसी के जवाब पर राजदीप हुए ट्रोल

ऐसा लग रहा है कि प्रोपेगैंडिस्ट-इन-चीफ राजदीप सरदेसाई अब अपने ही प्रशंसकों के बीच अलोकप्रिय हो रहे हैं। हाल ही में एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी के साथ इंटरव्यू की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, राजदीप सरदेसाई को इस्लामवादियों और अन्य लोगों द्वारा सरकारी लाइन पर बोलने के लिए ट्रोल किया गया था।

वायरल हुआ वीडियो क्लिप 5 अगस्त को भूमि पूजन से एक दिन पहले के लाइव शो का है। जिसमें हैदराबाद के नेता और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का मेल्टडाउन होते हुए देखा जा सकता है।

क्लिप में साक्षात्कार के दौरान राजदीप सरदेसाई द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने बड़े ही चतुराई से प्रश्न को घुमा दिया।

सवाल इस संबंध में था कि क्या यह हिंदू और संप्रदाय विशेष के लोगों दोनों के लिए भविष्य में “अतीत के मनमुटाव के साथ जीने की बजाय” दोनों समुदायों के लिए एक नई कॉम्पैक्ट खोजने का समय है।

हालाँकि, असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल को अलग संदर्भ में ले लिया और इसका मतलब यह निकाला कि उन्हें राजदीप सरदेसाई द्वारा ‘मूव ऑन’ करने के लिए कहा जा रहा था। इसके बाद संप्रदाय विशेष वाला नेता ओवैसी का भारी मेल्टडाउन देखने को मिला। उन्होंने पूछा कि क्या देश को मोहनदास करमचंद गाँधी की हत्या, 1984 में कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा किए गए सिख नरसंहार और 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस को भूल कर आगे बढ़ जाना चाहिए।

फिर असदुद्दीन ओवैसी ने, “राजदीप, आप मुझे कहाँ ले जाना चाहते हो? मैं पहले से गर्त में हूँ।” उन्होंने पूरे मामले पर ‘धर्मनिरपेक्ष दलों’ को भी उनकी चुप्पी के लिए जमकर फटकार लगाई। इसके साथ ही उन्होंने राजदीप सरदेसाई जैसे लिबरलों को भी लताड़ा, जो हिन्दुओं के बढ़ते वर्चस्व को रोकने में नाकाम रहे।

क्लिप के वायरल होने के बाद, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने राजदीप सरदेसाई और भारत के बहुसंख्यक समुदाय के ‘प्रमुख वर्चस्ववादी’ होने की निंदा की। असदुद्दीन ओवैसी से सऊदी और ईरान के इस्लामिक शासन पर सावल पूछने को लेकर इंडिया टुडे के एंकर की भी निंदा की गई।

इन टिप्पणियों के बाद राजदीप सरदेसाई ने माना कि इस्लामिक देशों के संबंध में प्रश्न को गलत तरीके से रखा गया था लेकिन उन्होंने कहा कि हैदराबाद के नेता अपनी पार्टी की अल्पसंख्यक राजनीति के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, “हमें प्रमुखतावाद और अल्पसंख्यकवाद को खारिज करना चाहिए।” हालाँकि, इस्लामवादियों और धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी खेमे ने उनकी बातों पर नरमी नहीं दिखाई।

राजदीप सरदेसाई को उनके सवाल की लाइन के साथ-साथ अल्पसंख्यकवाद के बारे में उनकी टिप्पणी के लिए भी लताड़ा गया था। कथित स्वास्थ्य पत्रकार विद्या कृष्णन ने राजदीप सरदेसाई पर अपनी पत्रकारिता के बारे में अच्छा महसूस करने के लिए ओवैसी पर ‘धौंस’ दिखाने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनकी पत्रकारिता केवल संप्रदाय विशेष के लिए जवाबदेह है। विद्या कृष्णन ने यह भी कहा कि यह ‘अविश्वसनीय’ था कि उसने माफी माँगने से इनकार कर दिया।

एक अन्य व्यक्ति ने इंडिया टुडे के एंकर द्वारा की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि ‘उदारवादी संघियों के गधे हैं।’

एक अन्य व्यक्ति ने टिप्पणी की कि राजदीप सरदेसाई के दिमाग में ‘पूरा गोबर’ भरा हुआ है।

राजदीप सरदेसाई पर सरकार के ‘दलाल’ होने का आरोप भी लगाया गया था।

ओवैसी के साथ के साथ कई अन्य लोगों का भी मेल्टडाउन होते देखा गया, जिन्होंने दावा किया कि भारत में सामूहिक हत्यारे का शासन है और उत्तर प्रदेश में एक ‘अतिवादी भिक्षु’ का शासन है।

राजदीप सरदेसाई को यह भी कहा गया था कि उन्हें AIMIM और अकालियों जैसी पार्टियों को ‘निशाना’ नहीं बनाना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें अपना ध्यान भाजपा, शिवसेना और आरएसएस पर केंद्रित करना चाहिए जो ‘प्रमुख राजनीति’ करते हैं।

काफी सारी प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि लोगों की राय थी कि ‘अल्पसंख्यकवाद’ नाम की कोई चीज मौजूद नहीं है। हालाँकि, हम निश्चित तौर पर नहीं कह सकते हैं कि राजदीप सरदेसाई के शब्दों से क्या मतलब है। मगर ऐसा लग रहा है कि वह एआईएमआईएम नेता के भड़काऊ बयानबाजी के संदर्भ में बात कर रहे थे।

उदाहरण के लिए, AIMIM सुप्रीमो के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक बार खुलेआम हिंदुओं को धमकी दी थी और कहा था कि अगर 15 मिनट के लिए देश भर में पुलिस हटा ली गई, तो संप्रदाय विशेष के लोग हिंदुओं को दिखा देंगे कि मालिक कौन है। अभी हाल ही में, एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता वारिस पठान ने सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा था कि 15 करोड़ संप्रदाय विशेष के लोग 100 करोड़ हिंदुओं पर हावी होंगे। पठान ने हिंदू समुदाय से कहा, “कल्पना करें कि हम आपके साथ क्या कर सकते हैं।”

‘मेरठ से हूँ, हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं.. पता दे फिर देखते हैं किसमें कितना दम है’: हम्जा ने धमकी के बाद अकाउंट किया डिलीट

पूर्व एमनेस्टी इंडिया के प्रमुख आकार पटेल ने एक ट्वीट में संप्रदाय विशेष को आरक्षित सीट या पृथक निर्वाचन क्षेत्र की माँग की वकालत करते हुए एक ट्वीट किया, जिसमें हम्ज़ा नाम के एक युवक ने एक महिला को धमकी देते हुए उसका पता पूछकर कहा है कि हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है।

दरअसल, रविवार (अगस्त 09, 2020) को आकार पटेल ने एक ट्वीट में लिखा- “संप्रदाय विशेष को आरक्षित सीट या पृथक निर्वाचन क्षेत्र के लिए माँग करनी चाहिए। हिंदू राष्ट्र अधिकारों को स्वीकार नहीं करेगा।”

इस पर एक ट्विटर यूजर निधि बहुगुणा ने लिखा, “मेरे परिवार को पलायन के बाद सियालकोट से मेरठ प्रवास करने के लिए मजबूर किया गया था। मेरठ में संप्रदाय विशेष अपने पैतृक घरों में रहे। मेरे परिवार को पाकिस्तान में बहुसंख्यक संप्रदाय विशेष से कोई सुरक्षा या अलग निर्वाचन का विकल्प नहीं दिया गया।”

लेकिन निधि बहुगुणा के इस ट्वीट से हम्ज़ा (@hamza63714280) नाम के एक युवक को बेहद आपत्ति हुई और इसके विरोध के लिए उसने निधि बहुगुणा को धमकी दे डाली।

@hamza63714280 ने लिखा – “मैं भी मेरठ से हूँ, हापुड़ रोड मेरठ। कहाँ से है तू? और हम भी हिन्दुस्तानी हैं, हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है, समझा? एड्रेस (पता) दे अपना, देखते हैं किसमें कितना दम है।”

निधि बहुगुणा को @hamza63714280 द्वारा दी गई धमकी का स्क्रीनशॉट

निधि बहुगुणा को @hamza63714280 नाम के ट्विटर यूजर के इस यूजर द्वारा दी गई खुली धमकी पर एहतियात के तौर पर एक अन्य ट्विटर यूजर ने मेरठ पुलिस को टैग करते हुए लिखा कि ये आदमी एक महिला को खुली धमकी दे रहा है और वह मेरठ से ही है।

इस पर मेरठ पुलिस ने फ़ौरन जवाब देते हुए लिखा कि इस मामले में साइबर सेल को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

लेकिन ख़ास बात यह रही कि मेरठ पुलिस के ट्वीट के फ़ौरन बाद @hamza63714280 नाम के ट्विटर यूजर ने अपना धमकी भरा ट्वीट डिलीट कर दिया और अपना अकाउंट भी डिलीट कर दिया है। यह अकाउंट अगस्त, 2020 में ही बनाया गया है, और सम्भव है कि यह हिन्दुओं को इसी प्रकार की धमकियाँ देने के लिए इस्तेमाल किया जाता हो।

गौरतलब है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने वर्ष 2013 में भी हिन्दुओं को ठीक इसी तरह की धमकी देते हुए कहा था कि ‘हम (संप्रदाय विशेष) 25 करोड़ हैं और तुम (हिंदू) 100 करोड़ हो, 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो, देख लेंगे किसमें कितना दम है।’

किसी ने सुशांत को लटकते हुए नहीं देखा, गले पर बेल्ट के निशान दिख रहे थे: SC में बोले सुशांत के पिता

सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की याचिका पर फैसला रिजर्व कर लिया है। वहीं मृत अभिनेता के पिता ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि किसी ने भी सुशांत सिंह राजपूत की बॉडी को पंखे से लटकते हुए नहीं देखा था और जब उनकी बहन कमरे के अंदर घुसी, तब तक बॉडी उतारी जा चुकी थी। वहीँ रिया चक्रवर्ती के वकील ने केस को मुंबई ट्रांसफर करने की माँग की।

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दूसरे राज्य (बिहार) में FIR करा कर सीबीआई को जाँच ट्रांसफर की गई है, इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

वहीं, सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह के वकील विकास सिंह ने कहा कि जानबूझ कर रिया द्वारा सुशांत को उनके परिवार से दूर किया जा रहा था। सुशांत के पिता ने कई बार अपने बेटे के इलाज के बारे में पूछा और आने देने को कहा, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया।

सुशांत सिंह राजपूत के पिता के वकील विकास सिंह ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की लाश को देख कर ये नहीं कहा जा सकता था कि उन्होंने आत्महत्या की है, बल्कि उनके गर्दन पर बेल्ट के निशान प्रतीत हो रहे थे। उन्होंने कहा कि दूसरा पक्ष मीडिया रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया दे रहा है।

इससे पहले महाराष्ट्र सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “देश मे संघीय ढाँचा है और क्या शिकायतकर्ता की सुविधा के लिए कहीं भी केस दर्ज कर लिया जाएगा? उन्होंने कहा कि इस केस में हर कोई वकील और जज बन गया है, कोई कह रहा है आत्महत्या है, कोई हत्या! लेकिन यह तय है कि मामले में आपराधिक मुकदमा प्रक्रिया की हत्या हो रही है।”

सिंघवी ने पूछा कि CrPC 406 के तहत चल रही इस कार्रवाई में मुकदमा एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर किया जा सकता है लेकिन क्या सिंगल जज खुद सीबीआई को जाँच सौंप सकते हैं? उन्होंने कहा कि मीडिया चाहे इस मामले को जितना भी सनसनीखेज बनाए, इससे कोर्ट को कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में संघीय ढाँचा है, कहीं का केस कहीं भी दर्ज नहीं किया जा सकता।

वहीं, बिहार की तरफ से पेश हो रहे वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि अगर सुशांत के बैंक अकाउंट से 15 करोड़ रुपए गायब हुए हैं तो सुशांत के पिता को पटना में रिपोर्ट दर्ज करवाने का पूरा अधिकार था। उन्होंने मुंबई पुलिस की जाँच को मीडिया के सामने किया गया दिखावा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुंबई पुलिस पर मामले को दबाने के लिए कोई दबाव है।

उधर ईडी ने श्रुति मोदी से पूछताछ की। रिया व सुशांत की पूर्व मैनेजर श्रुति मोदी ने अपने बयान में किसी भी तरह के गैरकानूनी वित्तीय लेन-देन से इनकार कर दिया या बैंक फंड से पैसे लेने की बात कही। उन्होंने रिया के बारे में खुलासा किया कि सुशांत की ज़िंदगी में आने के बाद सारे फैसले वही ले रही थी। रिया की जब श्रुति से मुलाकात हुई, तब वो उनकी बिजनेस पार्टनर थी। हालाँकि, फ़रवरी, 2020 के बाद उनकी बहुत कम बातचीत होती थी।

रिया चक्रवर्ती के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मुंबई पुलिस काफी काम कर रही है क्योंकि उसने 56 लोगों के बयान लिए हैं। रिया की तरफ से उनके वकील ने कहा कि रिया ने खुद ही सीबीआई जाँच की माँग की थी, लेकिन अब सोशल मीडिया पर लगातार मिल रही धमकियों के कारण वो परेशान हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले का पटना से कोई लेना-देना नहीं है।