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गुंजन सक्सेना में दिखाया भारतीय वायु सेना की खराब इमेज: नहीं सुधर रहा बॉलीवुड, IAF ने दागा लेटर

भारतीय वायु सेना वो संस्था है, जहाँ पुरुष और महिला दोनों को समान अवसर प्रदान किया जाता है। लेकिन बॉलीवुड को इससे क्या मतलब! वो तो धनबाद की कहानी में भी स्विट्जरलैंड घुसाता आया है। ठीक वैसे ही तड़का लगाने के लिए इंडियन एयर फोर्स की कहानी गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल (Gunjan Saxena: The Kargil Girl) में भी मसाला डाल दिया।

गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल (Gunjan Saxena: The Kargil Girl) में ‘अनुचित नकारात्मक चित्रण’ को लेकर भारतीय वायु सेना ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से लिखित शिकायत की है। श्रीदेवी की बेटी जाह्णवी कपूर की फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ आज नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो रही है।

इंडियन एयर फोर्स ने सेंसर बोर्ड को लिखे अपने पत्र में बातें साफ-साफ समझाईं। IAF के अनुसार, “नेटफ्लिक्स और धर्मा प्रोडक्शंस ने भारतीय वायु सेना का प्रतिनिधित्व प्रामाणिकता के साथ करने की सहमति व्यक्त की थी ताकि यह फिल्म अगली पीढ़ी को वायु सेना में जॉइन करने के लिए प्रेरित करने में मदद करती।”

IAF के अनुसार जब फिल्म का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया, तो यह देखा गया कि इसमें भारतीय वायुसेना को अनुचित ढंग से नकारात्मक तरह से दिखाया गया है। गुंजन सक्सेना मतलब श्रीदेवी की बेटी जाह्णवी कपूर (बॉलीवुड में नेपोटिजम) के स्क्रीन कैरेक्टर को महिमामंडित करने के लिए फिल्म में जबरन ऐसी परिस्थितियाँ प्रस्तुत की गईं, जो वायु सेना की कार्य संस्कृति के विपरीत है।

गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल (Gunjan Saxena: The Kargil Girl) में यह दिखाया गया है कि इंडियन एयर फोर्स पुरुष और महिला में फर्क किया जाता है। जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ भी नहीं है। इसी को लेकर IAF ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) को पत्र लिख कर आपत्ति जताई है।

सोपोर में सेना पर घात लगाकर आतंकी हमले में एक जवान घायल, जैश आतंकी आजाद अहमद आज पुलवामा में हुआ ढेर

उत्तरी कश्मीर के बारामूला-श्रीनगर मार्ग पर ह्यागम क्रॉसिंग के पास भारतीय सेना के काफिले पर घात लगाकर बैठे आतंकवादियों ने हमला किया है। बताया जा रहा है कि बारामूला जिले के सोपोर के ट्रूमगुंड-ह्यगाम क्रासिंग (Trumgund Hygam crossing) पर संदिग्ध आतंकियों ने आर्मी की पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला किया जिसमें सेना के एक जवान को चोटें आईं हैं। इस हमले के फ़ौरन बाद घायल जवान को तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकवादियों ने सेना, CRPF और पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी पर ह्यागम में एक होटल के पास फायरिंग की, जिसकी जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी फायर किया, लेकिन आतंकवादी वहाँ से भागने में सफल रहे। इस बारे में अभी तक किसी प्रकार के आधिकारिक बयान का इन्तजार है।

‘आज तक’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आतंकियों की फायरिंग में सेना के एक जवान को चोटें आई हैं और उनका इलाज किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस हमले के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है और तलाशी ली जा रही है।

पुलवामा एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने 1 आतंकी को मार गिराया, 1 जवान बलिदान

गौरतलब है कि बुधवार (अगस्त 12, 2020) की सुबह ही एक अन्य मुठभेड़ में पुलवामा एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने 1 आतंकी को मार गिराया है। वहीं, इस मुठभेड़ के दौरान 1 जवान के बलिदान होने की भी खबर सामने आई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षाबलों को पुलवामा के कमराज़ीपोरा इलाके में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। जिसके बाद पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप, राष्ट्रीय राइफल्स और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने बुधवार की सुबह इलाके में घेराबंदी करके सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

इस दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकियों को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई में फायरिंग करते हुए एक आतंकी को मार गिराया।

हालाँकि, इस ऑपरेशन के दौरान एक जवान वीरगति को प्राप्त हुए। मारे गए आतंकी की पहचान आजाद अहमद/आजाद लालहरी (Azaad Lalhari) के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि आजाद अभी हाल ही में जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन में भर्ती हुआ था। सुरक्षाबलों द्वारा इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है।

बेंगलुरु दंगा: PFI समर्थित SDPI के दंगाइयों की गिरफ्तारी पर ओवैसी से लेकर कॉन्ग्रेस में पसरा मौन, वोट बैंक का चक्कर

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान के कारण व्यापक दंगे और आगजनी हुई। संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा मंगलवार (अगस्त, 11, 2020) देर रात हुई इस हिंसा में प्रमुख विपक्षी कॉन्ग्रेस इसके जवाब को लेकर दुविधा में नजर आ रही है और अभी तक भी यह निर्णय नहीं ले पार ही है कि आखिर उसे दंगों पर क्या राय रखनी है।

राज्य के अधिकांश कॉन्ग्रेस नेताओं ने इन दंगों पर चुप्पी साध ली है। जिसके पीछे एक कारण इन दंगों में इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा के संगठन PFI द्वारा समर्थित SDPI की संलिप्तता को माना जा सकता है।

वहीं, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने आखिरकार इन दंगों में बेहद चालाकी से अपनी जुबान खोलते हुए कहा है कि बेंगलुरु में हुई हिंसा और ‘आपत्तिजनक सोशल मीडिया’ पोस्ट बेहद निंदनीय हैं। इसके साथ ही ओवैसी ने कहा है कि सभी लोगों को शांति से पेश आना चाहिए।

कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने एक बयान में इस हिंसा में साजिश की आशंका जताते हुए इसके पीछे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) का हाथ बताया है। बेंगलुरु पुलिस ने डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन पर हुई हिंसा मामले में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के नेता मुजम्मिल पाशा (Muzammil Pasha) को गिरफ्तार भी कर लिया है। मुज़म्मिल के अलावा, एक अन्य एसडीपीआई कार्यकर्ता अयाज़ भी दंगाइयों को उकसाने के लिए जाँच के दायरे में है।

ज्ञात हो कि ये वही एसडीपीआई है, जिस पर दिल्ली दंगों में CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान यह आरोप लगा था कि इसके नेता हिंसा भड़काने में इस्लामिक कट्टरपंथी पीएफआई का सहयोग कर रहे थे। पीएफआई और एसडीपीआई नाम भले ही अलग हों, लेकिन इनके पीछे आइडलॉजी एक ही है।

हालाँकि, पीएफआई के कागजी दस्तावेज आतंकी संगठन सिमी से सम्बन्ध से इनकार करते हैं लेकिन ख़ुफ़िया एजेंसियाँ अक्सर खुलासा करती आई हैं कि पीएफ़आई की जड़ों में सिमी का जहर मौजूद है। एसडीपीआई पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया द्वारा शुरू की गई एक कट्टरपंथी राजनीतिक पार्टी है।

कर्नाटक में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेता अमित शाह ने दावा किया था कि कॉन्ग्रेस द्वारा चुनाव मैदान में उतारे गए दो उम्मीदवार वास्तव में एसडीपीआई के सदस्य थे।

अब बेंगलुरु दंगों में एसडीपीआई की संलिप्तता पर भी अभी तक कॉन्ग्रेस ने चुप्पी साध रखी है, जिसके पीछे प्रमुख वजह यह हो सकती है कि यहाँ पर कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक वोटबैंक के मामले में एसडीपीआई के साथ सीधे टकराव में है। कुछ रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

कर्नाटक में एसडीपीआई की मौजूदगी और इसके प्रसार से कॉन्ग्रेस को होने वाले नुकसान के बारे में इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ पर कॉन्ग्रेस के विरोध में एसडीपीआई चुनाव लड़कर कॉन्ग्रेस को उन सीटों पर भी नुकसान पहुँचा चुकी है, जहाँ कॉन्ग्रेस को सीट जीतने की उम्मीदें थीं।

ऐसे में सम्भव है कि कॉन्ग्रेस इसी एसडीपीआई के साथ शायद ही कोई जोखिम लेने के मूड में हो! अपने बढ़ते नेटवर्क के माध्यम से, SDPI यहाँ पर लोकप्रियता हासिल करने में कामयाब रही है, जिससे संप्रदाय विशेष के वोटों पर कॉन्ग्रेस की पकड़ का खतरा पैदा हो गया।

ऐसे में यदि कॉन्ग्रेस जोर-शोर से इस हिंसा की निंदा करती है, तो यह डर है कि वह एसडीपीआई का रास्ता ही साफ़ कर रही होगी, जो पहले से ही किसी भी तरह अल्पसंख्यक वोटों और समुदाय के स्वामित्व पर नजर गड़ाए हुए है। और यदि कॉन्ग्रेस इन दंगों की निंदा नहीं करती है, तो बहुसंख्यक वर्ग कॉन्ग्रेस से दूर जा सकता है।

यही वजह है कि राज्य के अधिकांश नेता, जिनमें विपक्ष के नेता सिद्धारमैया और दर्जनों अन्य नेता भी शामिल हैं, ने कल रात से इस घटना पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालाँकि, कुछ मुट्ठी भर नेताओं ने अभी तक ट्वीट के जरिए इसकी निंदा की है।

कॉन्ग्रेस के संप्रदाय विशेष के नेता भी, जो कि एसडीपीआई को अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए खतरे के रूप में देखते हैं, वे एसडीपीआई की इस सांप्रदायिक राजनीति पर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं, और बस दबी जुबान से इन दंगों के बारे में बोल रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दलित कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर किए गए हमले, दंगे, आगजनी और पत्थरबाजी और हिंसा के मामले में बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने कहा है कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

डीजे हल्ली एवं केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा है और शहर के अन्य हिस्सों में धारा 144 लगाई गई है। किसी भी प्रकार की हिंसा की आशंका के चलते शांति बनाए रखने के लिए आरएएफ, सीआरपीएफ एवं सीआईएसएफ की टुकड़ियाँ भी पहुँच रही हैं।

कमल पंत ने कहा कि इस हिंसा में पत्थरबाजी की वजह से करीब 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस के वाहनों को आग के हवाले किया गया। हिंसा करने वाले लोगों का एक समूह एक बेसमेंट में दाखिल होकर वहाँ 200 से 250 वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इस हिंसा मामले की जाँच की जा रही है।

जो बना CAA विरोधी उपद्रव का गढ़, जहाँ नसीरुद्दीन शाह ने उगला था जहर: बेंगलुरु में कट्टरपंथी भीड़ ने वहीं किया दंगा

भारत के लिबरल गैंग जिस भी चीज का हद से ज्यादा गुणगान करे, उसके बारे में समझ जाना चाहिए कि वो उतना ही ज्यादा खतरनाक है। उदाहरण के लिए दिल्ली के शाहीन बाग को ही ले लीजिए। इसी क्रम में बेंगलुरु के बिलाल बाग को भी प्रचारित किया गया। ये वही क्षेत्र है, जिस क्षेत्र में मंगलवार (अगस्त 11,2020) की रात दंगे भड़क गए और कॉन्ग्रेस के दलित विधायक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वहाँ नसीरुद्दीन शाह भी पहुँचे थे।

किस तरह से बेंगलुरु के इस इलाके में इस्लामिक कट्टरवाद को ऊर्जा मिलती रही, इसे समझने के लिए हमें 5 महीने पहले जाना होगा। उसी समय बिलाल बाग में महिलाओं के सीएए विरोधी प्रदर्शन का काफी महिममंडन किया जा रहा था। उसे दक्षिण भारत का शाहीन बाग साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी। तभी बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी वहाँ पहुँचे थे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया था।

बेंगलुरु: जब नसीरुद्दीन शाह पहुँचे थे CAA विरोधी प्रदर्शन में

गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी और अभिनेता नसीरुद्दीन शाह फरवरी 14, 2020 के दिन वहाँ पहुँचे थे। उस दिन जुमा भी था। रात के 9 बजे उपद्रवियों को संबोधित करने पहुँचे नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि महिलाओं को प्रदर्शन करते हुए देख कर उन्हें बोलने का साहस मिला है। नसीरुद्दीन शाह ने उन महिलाओं को बहादुर बताते हुए कहा था कि उन्हें सड़क पर उतरने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

जिग्नेश मेवाणी तो एक कदम और आगे बढ़ गए थे। उन्होंने वहाँ प्रदर्शन कर रही महिलाओं के ‘चेहरे की चमक’ की बात करते हुए दावा कर दिया था कि अगर पीएम मोदी ने उन्हें एक बार भी देख लिया तो वो इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने उन महिलाओं को क्रांतिकारी करार देते हुए कहा कि वो उनके ज्वलंत चेहरे देखने आए हैं। उन्होंने इस दौरान वहाँ पटना और दिल्ली में महिलाओं द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों का जिक्र किया।

क्या आपको पता है कि ये बिलाल बाग कहाँ स्थित है? ये Tannery Road के पास है, जो केजी हल्ली थाना क्षेत्र से 5 किलोमीटर से भी कम की दूरी पर है। वही थाना क्षेत्र, जहाँ पुलिस की गाड़ियों तक को जला डाला गया। फिलहाल वहाँ कर्फ्यू लगा हुआ है। अब ये साबित हो रहा है कि भारत के विभिन्न स्थानों में, जो सीएए विरोधी प्रदर्शनों का हब बना, वहाँ दंगे भड़क रहे हैं। दिल्ली के बाद बेंगलुरु इसका उदाहरण है।

सरकारों ने इन महिलाओं को सड़क जाम करने से लेकर भारत-विरोधी नारे लगाने तक छोड़ दिया और उन्हें उपद्रव करने दिया, जिसका अंजाम आज जनता और पुलिस दोनों को ही भुगतना पड़ रहा है। अगर समय रहते इन उपद्रवियों पर कार्रवाई की गई होती तो शायद नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के दंगे और नहीं होते और केजी हल्ली में एक छोटे से फ़ेसबुक पोस्ट पर इतना बड़ा हंगामा नहीं होता। इसे समय रहते रोका जा सकता था।

जहाँ तक बिलाल बाग की बात है, वहाँ 200 महिलाओं ने डेरा डाला हुआ था। शाहीन बाग की तरह ही वहाँ महिलाओं को उनके छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिठाया गया था। बिलाल मस्जिद के सामने पिलाना रोड को ब्लॉक कर के रखा गया। मीडिया में कई ऐसे लेख ये थे, जिनमें यहाँ की महिलाओं के बयान लेकर उन्हें बहादुर साबित करने का प्रयास किया गया था। सरकार इन चीजों को नजरअंदाज करती रही।

क्या हुआ बेंगलुरु में भड़के दंगे में

केजी हल्ली थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के मामले में ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)’ के नेता मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि वो इन दंगों का मास्टरमाइंड है। मुजम्मिल पाशा ने ही इन दंगों को भड़काया था। SDPI का नेता मुजम्मिल पाशा नवीन नामक व्यक्ति के खिलाफ पैगम्बर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में मामला दर्ज करवाने केजी हल्ली थाना पहुँचा था।

फिर उसने भड़काऊ भाषण देते हुए पुलिस थाने के बाहर खड़ी कट्टरपंथी भीड़ को सम्बोधित किया। सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है। बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है।

ज्ञात हो कि मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात पूर्वी बेंगलुरु में दंगे और आगजनी का भीषण नज़ारा देखने को मिला। केजी हल्ली, डीजे हल्ली और पुल्केशी नगर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। 1000 से भी अधिक की कट्टरपंथी भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी। उनका आरोप था कि विधायक के रिश्तेदार ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किया है।

पैगंबर मुहम्मद पर खबर, भड़के दंगे और 17 लोगों की मौत: घटना भारत की, जब दो मीडिया हाउस पर किया गया अटैक

इस्लामिक भीड़ का आतताई चेहरा एक बार फिर बेंगलुरु में मंगलवार को देखने को मिला। अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच संप्रदाय विशेष के 1000 से भी अधिक ने एक पुलिस थाने को आग के हवाले कर दिया।

बताया जा रहा है कि एक स्थानीय विधायक के किसी संबंधी ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर पैगंबर मुहम्मद को लेकर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी। जिसके बाद समुदाय विशेष की भीड़ इतनी भड़क गई कि उन्होंने पहले उस विधायक के घर पर हमला बोला। फिर वाहनों में आग लगाई और बाद में थाने को ही जला डाला।

यह पहली बार नहीं है, जब पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के बाद इस्लामिक भीड़ का ऐसा रूप देखने को मिला हो। इतिहास के पन्नों में ऐसे कई मामले दर्ज हैं, जब लोकतंत्र की दुहाई देने वाले समुदाय विशेष के लोग पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी सुनकर कानून को भूल गए और भीषण हिंसा को अंजाम दिया गया।

इनमें कुछ मामले बहुत हालिया हैं और कुछ थोड़े पुराने हैं। आज हम उन 5 मौकों का जिक्र करेंगे, जब पैगंबर मुहम्मद के नाम पर इस्लामिक कट्टरता का भयावह चेहरा देखने को मिला।

कमलेश तिवारी हत्याकांड

18 अक्टूबर 2019 को हिंदू महासभा के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की उनके आवास स्थित कार्यालय में बर्बरता से हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद मालूम चला था कि इसके पीछे कट्टरपंथियों का हाथ है, जो बहुत पहले से तिवारी के खिलाफ़ साजिश रच रहे थे। कमलेश तिवारी का अपराध केवल यह था कि उन्होंने साल 2015 में पैगंबर मुहम्मद पर विवादित टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद से ही उन्हें मारने के प्रयास और ऐलान किए जा रहे थे।

शार्ली ऐब्दो मैग्जीन में जब पैगंबर पर कार्टून छापने से गई 17 लोगों की जान

शार्ली ऐब्दो नामक मैग्जीन कुछ साल पहले पैगंबर मुहम्मद का कार्टून छापने के कारण चर्चा में आई थी। इसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया। साल 2011 में इसके कार्यालय पर गोलीबारी हुई और बम फेंके गए। फिर 7 जनवरी, 2015 को कट्टरपंथियों ने इसे एक बार दोबारा निशाना बनाया और अल्लाह हू अकबर कहते हुए 12 लोगों को मौत के घाट उतार गए। इनमें तीन पुलिसकर्मी थे।

पैगंबर मुहम्मद की शादी पर आधारित किताब रंगीला रसूल के कारण गई प्रकाशक की जान

साल 1924 में अनाम लेखक के नाम से रंगीला रसूल नाम की एक किताब प्रकाशित हुई थी। इस किताब में मुहम्मद साहब और एक औरत के परस्पर संबंधों का कथानक था। जिसके कारण संप्रदाय विशेष के लोगों ने इसका काफी विरोध किया और इसके प्रकाशक को वैमनस्यता फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन प्रकाशक के रिहा होते ही इल्मुद्दीन नामक कट्टरपंथी ने महाशय राजपाल की हत्या कर दी और इल्मुद्दीन को बचाने के लिए केस फिर मुहम्मद अली जिन्ना ने लड़ा।

700 वर्ष पुरानी किताब से कोट लेने पर समाचार पत्र ने देखा संप्रदाय विशेष की भीड़ का चेहरा

साल 2000 में न्यू इंडियन एक्सप्रेस नामक समाचार पत्र ने 700 साल पुरानी एक किताब से एक कोट लेकर अपना आर्टिकल लिखा। जिसके कारण संप्रदाय विशेष की भीड़ भड़क गई और बेंगलुरू के इस अखबार ने संप्रदाय विशेष की भीड़ का एक भयानक चेहरा देखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 1000 की भीड़ ने सिर्फ़ आर्टिकल में पैगंबर का नाम आने से कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था और 20 उलेमाओं ने बाद में अखबार के चीफ रिपोर्टर से मिलकर माँग की कि लेख लिखने वाले अखबार के सम्पादकीय सलाहकार टीजेएस जॉर्ज माफी माँगें।

साल 1986 में दंगा, 17 की गई थी जान

साल 1986 में डेक्कन हेराल्ड को ऐसे आक्रोश का सामना करना पड़ा था, जब एक छोटी से स्टोरी के कारण देश में साम्प्रदायिक हिंसा भड़क गई और 17 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। बाद में अखबार ने रेडियो और टेलीविजन के जरिए समुदाय से माफी माँगी। इस घटना में भी संप्रदाय विशेष के लोगों को स्टोरी में यही लगा था कि लिखने वाले ने पैगंबर का अपमान किया है।

बेंगलुरु दंगा के पीछे SDPI का हाथ: मुजम्मिल पाशा ने हिंसा भड़काने के लिए बाँटे थे रुपए, 165 हिरासत में

पूर्वी बेंगलुरु के पुल्केशी नगर के दलित कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर ओर संप्रदाय विशेष की 1000 से भी अधिक की भीड़ ने हमला कर आगजनी, पत्थरबाजी और दंगे किए, जिसके बाद इलाक़े में कर्फ्यू लगा दिया गया है। केजी हल्ली थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के मामले में ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)’ के नेता मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि वो इन दंगों का मास्टरमाइंड है।

मुजम्मिल पाशा ने ही इन दंगों को भड़काया था। स्थानीय ‘सुवर्ण न्यूज़’ के अनुसार, SDPI का नेता मुजम्मिल पाशा नवीन नामक व्यक्ति के खिलाफ पैगम्बर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में मामला दर्ज करवाने केजी हल्ली थाना पहुँचा था। फिर उसने भड़काऊ भाषण देते हुए पुलिस थाने के बाहर खड़ी संप्रदाय विशेष की भीड़ को सम्बोधित किया। इसके बाद वो कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास के आवास पर हिंसक भीड़ के साथ प्रदर्शन करने पहुँचा।

इस दौरान मुजम्मिल पाशा के साथ SDPI के दो और नेता साथ थे जो लगातार लोगों को भड़का रहे थे। उसके सहयोगी नेताओं जफ़र और खलील ने संप्रदाय विशेष की भीड़ को पत्थरबाजी करने और थाने के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले करने के लिए भड़काया था। जहाँ पुलिस मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार करने में कामयाब रही है, वहीं बाकी 2 नेता फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज से भी इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि दंगाइयों को रुपए बाँटे गए थे (फोटो साभार: सुवर्ण न्यूज़)

पुलिस को पता चला है कि पाशा दंगाइयों के बीच रुपए बाँट रहा था, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। सीसीटीवी फुटेज से ये भी पता चला है कि पुलिस पर किए गए हमले की साजिश पहले ही अच्छी तरह से रच ली गई थी। सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए पहले ही दंगाइयों को पूरी साजिश के बारे में बता दिया गया था और वो व्यवस्थित तरीके से वहाँ आए थे। पाशा ने BBMP का चुनाव भी लड़ा था लेकिन वो हार गया था।

वहीं एक अन्य आरोपित खलील स्थानीय कॉर्पोरेटर का पति है। दंगाइयों में से तीन की मौत हुई है, जिनमें से दो के नाम वाजिद और यासीन हैं। इन सबका कोरोना टेस्ट कर के पोस्टमॉर्टम किया जाएगा और फिर लाश परिवारों को सौंप दिए जाएँगे। अब तक 165 लोगों को इस मामले में हिरासत में लिया जा चुका है। राज्य के गृह मंत्री ने सीएम येदियुरप्पा को घटना से अवगत कराया गया है, जिसके बाद उन्होंने कड़ी कार्रवाई की बात कही।

कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने भी कहा है कि ये एक योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया दंगा था। उनकी मानें तो फेसबुक पोस्ट के 1 घंटे के भीतर ही हज़ारों लोग जमा हो गए और उन्होंने 200-300 गाड़ियाँ फूँक डाली व विधायक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। मंत्री ने कहा कि साजिशन इस हिंसा को अंजाम दिया गया है और इसके पीछे SDPI का हाथ है।

सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है। बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है और सरकार इस प्रकार की भड़काऊ हरकतों और अफवाहों को बर्दाश्त नहीं करेगी।

कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि 10 मिनट तक पुलिस ये सब होते हुए देखती रही और उसने कुछ नहीं किया। वो असहाय नज़र आ रही थी। यहाँ तक कि आधी रात के बाद भी पुलिसकर्मी दंगाइयों से काफी कम संख्या में थे और संघर्ष कर रहे थे। कमिश्नर कमल पंत भी घटनास्थल पर पहुँचे लेकिन फिर पुलिस की एक गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। पुलिस ने विधायक अखंड श्रीनिवास के रिश्तेदार नवीन को गिरफ्तार कर लिया है।

पैंगबर से ज्यादा तारीफ इंसान की, गाना लिख कर वायरल करने वाले संगीतकार को अब मौत की सजा

अफ्रीका महाद्वीप के नाइजीरिया में कानो नाम की एक जगह है, जहाँ शरिया अदालत लगती है। इसी अदालत में 22 वर्षीय एक संगीतकार को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। संगीतकार का नाम यहाया शेरिफ अमिन (Yahaya Sherif-Aminu) है।

यहाया पर आरोप है कि उसने अपने एक गीत में तिजानिया मुस्लिम ब्रदरहुड के एक इमाम की तारीफ करते हुए उसे पैंगबर से ज्यादा तरजीह दी और उसे मार्च महीने में व्हॉट्सएप के जरिए वायरल भी किया।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के हौसावा फिलिन हॉकी क्षेत्र में एक ऊपरी शरिया अदालत ने यहाया के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि 22 वर्षीय यहाया शरीफ-अमीन मार्च महीने में व्हाट्सएप के माध्यम से प्रसारित एक गीत के लिए ईशनिंदा का दोषी है।

इस सुनवाई में संगीतकार ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार नहीं किया। वहीं, न्यायाधीश खादी अलियू मोहम्मद कानी ने कहा कि यहाया चाहे तो इस फैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं।

नाइजीरिया की इस अदालत के फैसले के बाद शरिया कानून पर बहस अब तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया यूजर्स भी यहाया को बचाने की अपील कर रहे हैं। यहाया फिलहाल हिरासत में हैं। लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि गाना कंपोज करने के बाद से वह छिपते फिर रहे थे। जिसके कारण प्रदर्शनकारियों ने उनके परिवार के घर को जला दिया और इस्लामिक पुलिस के हेडक्वार्टर ‘Hisbah’ के बाहर एक्शन की माँग करने लगे।

प्रदर्शनकारियों का मत था कि यह गाना ईशनिंदा है और उस गीत में एक इमाम को पैगंबर के बराबर तरजीह दी गई है। बीबीसी के अनुसार, इस प्रोटेस्ट का नेतृत्व करने वाले इदरीस इब्राहिम ने कहा कि यह फैसला एक चेतावनी है, उन लोगों के लिए जो यहाया के रास्ते पर चल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें यह फैसला सुनकर बेहद खुशी हुई क्योंकि इससे पता चलता है कि उनका प्रोटेस्ट व्यर्थ नहीं था। ये फैसला दूसरों को चेतावनी है जिन्हें लगाता है कि वह पैगंबर की या फिर मजहब का अपमान कर देंगे और खुलेआम बचकर घूमते रहेंगे।

बता दें कि शरीया की अदालत में कई मामलों में मौत की सजा मिलना बेहद आम बात है। उदहारण के लिए कई ऐसे मामले हैं, जहाँ महिलाओं को भी अदालत ने मौत की सजा सुनाई है, वो भी सिर्फ़ इसलिए क्योंकि निकाह के बाद उनके संबंध किसी और पुरूष से थे।

आखिरी बार नाइजीरिया के शरीया कोर्ट ने साल 2016 में अब्दुलजीज इन्यास को ईशनिंदा के आरोप में दोषी पाया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने कहा कि तिजानिया संप्रदाय के सेनेगल संस्थापक शेख इब्राहिम नियासे, जिनके अनुयायी पश्चिम अफ्रीका में बहुत तादाद में हैं, वह पैगंबर मुहम्मद से बड़े थे।

जानकारी के लिए बता दें कि नाइजीरिया के संप्रदाय विशेष बहुल इलाकों में न्याय के लिए शरिया कानून चलता है। इस कानून के तहत यदि कोई भी शख्स इस्लाम या उससे जुड़ी मान्यताओं की आलोचना, पैंगबर मोहम्मद को लेकर किसी भी तरह की टिप्पणी, के साथ लोगों की भावनाएँ आहत करता है तो उसके ख़िलाफ़ ईशनिंदा के तहत मामला दर्ज होता है औ मौत की सजा सुनाई जाती है।

रायबरेली में बने भव्य बाबरी मस्जिद, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना कि राम मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनी थी: मुनव्वर राना

उर्दू शायर मुनव्वर राना एक बार फिर से अपने विवादित बोल के कारण चर्चा में आए हैं। उन्होंने माँग की है कि अयोध्या के धन्नीपुर गाँव में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद के लिए जो 5 एकड़ ज़मीन मिली है, वहाँ भगवान राम के पिता राजा दशरथ के नाम पर अस्पताल बनवाया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर उक्त माँग की है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी गई या जबरदस्ती हासिल की गई ज़मीन पर मस्जिद नहीं बनता।

मुनव्वर राना ने संप्रदाय विशेष की छवि सुधारने के लिए ये आईडिया दिया। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि लम्बे समय से संप्रदाय विशेष के बारे में ये प्रचारित किया जा रहा है कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाई थी लेकिन सच्चाई यह है कि संप्रदाय विशेष का कोई भी कभी किसी अवैध कब्जे की जगह पर मस्जिद नहीं बना सकता। उन्होंने कहा कि संप्रदाय विशेष के लोग हमेशा से अपने वतन, यहाँ के निवासियों व उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं।

मुनव्वर राना ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

शायर मुनव्वर राना ने कहा कि इन्हीं बातों का सन्देश देने के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों को अयोध्या में राजा दशरथ के नाम पर अस्पताल बनवाना चाहिए। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि वो मस्जिद निर्माण के लिए रायबरेली में सई नदी के किनारे स्थित अपनी साढ़े 5 बीघा जमीन देने के लिए तैयार हैं। ये ज़मीन उनके बेटे तबरेज के नाम पर पंजीकृत है। साथ ही उन्होंने वक़्फ़ की सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे हटाने की माँग की, ताकि संप्रदाय विशेष की भलाई के लिए उसका इस्तेमाल हो सके। उन्होंने कहा:

मैं चाहता हूँ कि इस जमीन पर बाबरी मस्जिद की एक ऐसी शानदार इमारत का निर्माण किया जाए कि दुनिया के जो भी लोग इधर से गुजरें, वो बाबरी मस्जिद का दीदार कर सकें। एक नए वक्फ बोर्ड का गठन कर सभी वक्फ संपत्तियों को उससे संबद्ध कर दिया जाए। इसमें मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है क्योंकि मैं बोर्ड में किसी पद की लालसा नहीं रखता हूँ। मैं सिर्फ ज़मीन देने वाला व्यक्ति ही बना रहना चाहता हूँ। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मामले में फैसला तो दिया है, लेकिन ये न्याय नहीं है।

वहीं ‘आजतक’ की मानसी मिश्रा से बातचीत करते हुए मुनव्वर राना की बेटी सुमैया ने बताया कि उनके पिता कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे रंजन गोगोई ने अपने फैसले में लिखा कि कोई साक्ष्य नहीं मिला है कि वहाँ मंदिर तोड़कर मस्ज‍िद बनाई गई। सुमैया ने कहा कि राम मंदिर परिसर में ही छोटी सी मस्जिद बनाने के लिए इजाजत दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि रायबरेली वाली ज़मीन पर मस्जिद बनाने के लिए कागजात भी तैयार किए जा रहे हैं।

बता दें कि सीएए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मुनव्वर राना की बेटी सुमैया ने कहा था कि हमें ध्यान रखना है कि हमें इतना भी न्यूट्रल (तटस्थ) नहीं होना है कि हमारी पहचान ही खत्म हो जाए। उन्होंने कहा था कि पहले हम इस्लाम के मानने वाले हैं और उसके बाद कुछ और हैं। सुमैया ने ये भी कहा था कि हमारे अंदर का जो दीन है, जो इमान है, वह जिंदा रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि हम अल्लाह को भी मुँह दिखाने लायक न रह जाएँ।

भारत में नौकरी कर रहे चायनीज ने की ₹1000+ करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग, IT विभाग ने किया भंडाफोड़

भारत में आयकर विभाग ने मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े रैकेट का खुलासा किया है। इस खुलासे से पता चला है कि भारत में रहने वाले चीनी नागरिक बड़े स्तर पर फर्जी कंपनियों के जरिए इस अपराध को भारतीय सहयोगी व बैंक कर्मचारियों की मदद से अंजाम दे रहे थे।

अभी तक इस मामले में आयकर विभाग को 1000 करोड़ रुपए से अधिक ट्रांजैक्शन का मालूम चला है। इसके मद्देनजर अधिकारियों ने चीन के कुछ लोगों और उनके भारतीय साथियों के ठिकानों पर छापेमारी की है।

सीबीडीटी (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) का कहना है कि इस पूरे लेनदेन को शेल कंपनियाँ खोल कर अंजाम दिया गया। उनके मुताबिक उन्हें इस तरह की जानकारी मिली थी कि चीनी और उनके भारतीय बिजनेस पार्टनर मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन में अलग-अलग तरह से शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक, इस सूचना के बाद आयकर विभाग ने दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम में करीब 21 ठिकानों पर छापेमारी करके इस नेक्सस का पर्दाफाश किया।

इनकम टैक्स अधिकारियों का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम देने के लिए फर्जी कंपनियों के नाम पर करीब 40 अकाउंट बनाए गए और उनके जरिए ही हजारों करोड़ों रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ।

अभी तक की जाँच में मालूम चला है कि एक चीनी कंपनी की सहायक फर्म ने फर्जी कंपनियों से 100 करोड़ का फर्जी एडवांस लिया था। यह रकम भारत में रिटेल शोरूम खोलने के लिए एडवांस तौर पर दी गई थी।

आईटी विभाग को अपनी छानबीन में हवाला से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही इन ठिकानों से हॉन्ग कॉन्ग की करेंसी और अमेरिकी डॉलर भी हाथ लगे हैं।

इसके अलावा इस पड़ताल में अधिकारियों को एक चीनी युवक चार्ली पांग (असली नाम-लुओ सांग) का भी मालूम चला है, जो वास्तविकता में चीन का है। लेकिन उसके पास भारत का फर्जी पासपोर्ट है, जिसे मणिपुर से जारी किया गया।

चार्ली पांग हवाला ऑपरेशन के लिए कई चीनी कंपनियों की ओर से प्रतिनिधि था और देश भर में वह करीब 10 बैंक खाते चला रहा था।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि पांग भारत में पिछले 6 साल से नाम बदल-बदल कर रह रहा था। अब उसको हिरासत में लिए जाने के बाद उसे 6 सहयोगियों की भी पहचान कर ली गई है, जो उसके कारोबार में उसकी मदद कर रहे थे।

ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: 400 Gb/s की इंटरनेट स्पीड, इस समुद्री केबल से बदलेगी अंडमान-निकोबार की तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को जोड़ने वाले पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) की शुरुआत की और उसे राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने 30 दिसंबर 2018 को पोर्ट ब्लेयर में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी से द्वीप समूह में अनगिनत अवसर पैदा होंगे। 2300 किलोमीटर की पनडुब्बी केबल बिछाने और इसे निर्धारित लक्ष्य से पहले पूरा करना बेहद प्रशंसनीय है।

गोताखोरों की मदद से अंडमान-निकोबार में बिछाया जा रहा समुद्री इंटरनेट केबल

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तक समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल: एक्सक्लूसिव डिटेल्स

उसी दिन चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर, पोर्ट ब्लेयर से लिटिल अंडमान और पोर्ट ब्लेयर से स्वराज द्वीप तक प्रमुख द्वीपों पर शुरू हुई। पीएम मोदी ने 2300 किलोमीटर तक केबल बिछाने की प्रशंसा करते हुए कहा कि केबल की गुणवत्ता बनाए रखना और विशेष जहाजों के साथ केबल बिछाना कोई आसान काम नहीं है। ऑपइंडिया के पास समुद्र के बीच बिछाए जा रहे केबल की कुछ एक्सक्लूसिव तस्वीरें हैं, जिन्हें आप इस लेख में देख सकते हैं।

वो जहाज जिसकी मदद से अंडमान-निकोबार में बिछाया गया समुद्री इंटरनेट केबल

साथ ही ऑपइंडिया के हाथ कुछ एक्सक्यूसिव डिटेल्स भी लगे हैं, जिससे आपको पता चलेगा कि इस केबल की खासियत क्या है और इससे अंडमान-निकोबार में क्या बदलाव आएँगे। मोदी सरकार लद्दाख, उत्तर-पूर्वी भारत और दक्षिण के द्वीप समूहों पर ध्यान दे रही है, जो विकास के दौर में पीछे छूट गए थे।

अंडमान-निकोबार में समुद्री इंटरनेट केबल बिछाने की प्रक्रिया में गोताखोर

चेन्नई-अंडमान निकोबार ‘अंडर से इंटरनेट केबल प्रोजेक्ट’ के बारे में नीचे इन बिंदुओं से समझिए:

  • चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर केबीच 2313 किलोमीटर का समुद्री केबल बिछाया जाएगा।
  • पोर्ट ब्लेयर के अलावे अंडमान-निकोबार के 7 द्वीपों (स्वराज द्वीप, लॉन्ग आइलैंड, रंगत, लिटिल अंडमान, कमोर्टा, कार निकोबार और ग्रेटर निकोबार) को इससे कनेक्ट किया गया है।
  • पोर्ट ब्लेयर तक 400 GB प्रति सेकंड की इंटरनेट स्पीड दी जाएगी। बाकी द्वीपों के लिए गति इसकी आधी, अर्थात 200 GB प्रति सेकंड होगी।
  • समुद्र के नीचे केबल बिछाने का काम बीएसएनएल ने किया है। कम्पनी ने ये काम रिकॉर्ड 24 महीने में पूरा किया।
  • OFC कनेक्टिविटी के कारण इन द्वीप समूहों पर 4G कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने वाला है।
  • टेली-एजुकेशन और टेली-हेल्थ जैसी अन्य ई-गवर्नेंस सुविधाओं में उछाल आएगा। पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होगा।
समुद्री इंटरनेट केबल का कुछ हिस्सा जमीन के नीचे भी

अंडमान-निकोबार समुद्री केबल पर क्या कहा था पीएम मोदी ने?

पीएम मोदी ने कहा था कि इस परियोजना से ऊँची प्रधानमंत्री ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को इसकी वर्षों से आवश्यकता थी, लेकिन इसे पूरा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने इस तरह की बड़ी चुनौतियों के बावजूद इस परियोजना को पूरा करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। लहरों, तूफानों और मॉनसून जैसी चुनौतियों और कोरोना महामारी जैसे कठिन समय से निपटा जा सकेगा।

अंडमान-निकोबार में बिछाए जा रहे समुद्री इंटरनेट केबल कार्य का निरीक्षण करते केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लोगों को बेहतर और सस्ती कनेक्टिविटी प्रदान करना देश की जिम्मेदारी है। उन्होंने उन सभी को बधाई दी जो परियोजना से जुड़े थे। साथ ही कहा कि पनडुब्बी केबल यह साबित करने का एक प्रयास है कि अंडमान और निकोबार द्वीप दिल्ली से और मुख्य भूमि के दिल से दूर नहीं है। पीएम मोदी ने आश्वस्त किया कि सरकार प्रत्‍येक नागरिक और प्रत्‍येक क्षेत्र को आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि जीवन जीने की बेहतर सुविधा मिल सके।

उन्होंने कहा कि यह ऑप्टिकल फाइबर परियोजना, जो अंडमान निकोबार द्वीप समूह को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ती है, वह नागरिकों के आसान जीवन जीने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है। सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों और द्वीप राज्यों के त्वरित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पनडुब्बी केबल अंडमान और निकोबार की सस्ती और बेहतर कनेक्टिविटी तथा डिजिटल इंडिया के सभी लाभों को प्राप्त करने में मदद करेगी।

अंडमान-निकोबार में समुद्री इंटरनेट केबल बिछाने में मदद करने वाला एक और जहाज

विशेष रूप से ऑनलाइन शिक्षा, टेली-मेडिसिन, बैंकिंग प्रणाली, ऑनलाइन ट्रेडिंग में सुधार और पर्यटन को बढ़ावा देने में ये सहायक सिद्ध होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंद महासागर हजारों वर्षों से भारत के व्यापार और रणनीतिक कौशल का केंद्र रहा है तथा अंडमान और निकोबार भारत के आर्थिक-सामरिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

समुद्र के अंदर तकनीकी पहलुओं की जाँच करता गोताखोर

भारत के सभी द्वीप भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत की नई व्यापार रणनीति के तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

थल से लेकर जल और समुद्र की गहराइयों तक बिछाया जा रहा इंटरनेट केबल

एक्ट-ईस्ट नीति के तहत, पूर्वी एशियाई देशों और समुद्र से जुड़े अन्‍य देशों के साथ भारत के मजबूत संबंधों में अंडमान और निकोबार की भूमिका बहुत अधिक है और यह आने वाले समय में और बढ़ेगी। द्वीप विकास एजेंसी का गठन 3 वर्ष पूर्व अपनी भूमिका को मजबूत करने के लिए किया गया था। बकौल पीएम मोदी, अंडमान और निकोबार में जो परियोजनाएँ वर्षों से पूरी नहीं हुई थीं, वे अब तेजी से पूरी हो रही हैं।

मानव चेन बनाकर बिछाया जा रहा इंटरनेट केबल

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंडमान और निकोबार के 12 द्वीपों में अत्‍यधिक प्रभाव वाली परियोजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही जानकारी दी कि बेहतर इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करने के अलावा, सड़क, वायु और जलमार्ग के जरिए वास्‍तविक संपर्क को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने उत्तर और मध्य अंडमान की सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए दो प्रमुख पुलों और राष्‍ट्रीय राजमार्ग नम्‍बर-4 पर चल रहे कार्य का उल्लेख किया।