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‘गर्दन उड़ाओ उस मादर** की’: कमलेश तिवारी की ही तरह नवीन को भी मिल रही जान से मारने की धमकी

क्या आपको कमलेश तिवारी याद हैं? साल 2015 में पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद से उनका जीवन खतरे में पड़ गया था। जेल में महीनों बिताने और अपनी जिंदगी पर लगातार खतरों का सामना करने के बाद, अक्टूबर 2019 में उनकी हत्या हो गई थी।

कमलेश तिवारी की कहानी को एक बार फिर दोहराया जा रहा है क्योंकि कर्नाटक में एक कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन के खिलाफ इसी तरह से आक्रामक भीड़ द्वारा हमला हुआ है। बेंगलुरु के शांतिपूर्ण शहर को हिलाकर रख देने वाले दंगों ने इसी तरह का असर दिखाना शुरू कर दिया है, जिस प्रकार कमलेश तिवारी की टिप्पणी के बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था।

फेसबुक और ट्विटर, दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नवीन के खिलाफ किए गए पोस्ट और टिप्पणियों से भरे हुए हैं। ‘शांतिपूर्ण समुदाय’ के लोग उत्तेजक और आक्रामक भाषा में उनके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इसके साथ वे यह भी पूछ रहे कि अभी तक उसकी हत्या क्यों नहीं हुई?

फेसबुक पर एक ‘ज़ून गैश’ नाम के एकाउंट से कुछ टिप्पणियाँ पोस्ट की गई हैं। कमलेश तिवारी के मामले में जैसा उन्होंने किया, कुछ वैसे ही नवीन को मारने की भी खुली धमकी दी जा रही है।

शाहिद नाम का यूजर पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ बोलने पर नवीन को जान से मारने की धमकी दे रहा है।

वहीं कामिल नाम का एक शख्स नवीन की गर्दन उड़ाने की बात कह रहा।

इम्तियाज़ एक कमेंट में नवीन की मौत की बात कर रहा है।

अहमद एक कुत्ते की तरह नवीन को मारना चाहता है।

अदनान ने दावा किया कि नवीन को जल्द ही मार दिया जाएगा।

शौकत कहता है कि नवीन को मारना भूलना मत।

अब तक इस दंगे में तीन लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। दंगों में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 110 आगजनी करने वालों को गिरफ्तार किया है। पूरे बेंगलुरु शहर में धारा 144 लगा दी गई है।

जिस दलित विधायक के भतीजे नवीन ने टिप्पणी पोस्ट की, उसका घर जला दिया गया है। गौरतलब है कि हमेशा की तरह लिबरल्स गिरोह ‘शांतिपूर्ण समुदाय’ के लिए ‘दंगों का अधिकार’ को सही ठहराएँगे।

मालदा का ख़ौफनाक दंगा

बेंगलुरु में कल हुए दंगों ने मालदा के दंगों की याद दिला दी ,जब 2 लाख से अधिक कट्टरपंथी सड़कों पर निकले थे, जबकि कमलेश तिवारी उस वक्त जेल में थे। उन्होंने यह माँग रखी थी कि तिवारी को उनकी टिप्पणी के लिए मार दिया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट कर करोड़ों का नुकसान पहुँचया था। इसके अलावा, बीएसएफ की एक वाहन को भी दंगों में झोंक दिया गया था। उन्होंने कालियाचक थाना क्षेत्र में कई घरों को जला दिया और दंगे करते हुए कई दुकानों को भी लूट लिया गया था।

बेंगलुरु दंगों में भारी हिंसा पर उतारू कट्टरपंथी भीड़ के कई भयावह वीडियो इंटरनेट पर वायरल

कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर कथित अपमानजनक पोस्ट शेयर करने के तुरंत बाद मंगलवार (अगस्त 12, 2020) रात बेंगलुरु से भीड़ हिंसा की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई।

पुलकेशिनगर में हिंसा के बाद, बेंगलुरु में धारा 144 लगाई गई है, जबकि केजी हल्ली पुलिस थानों की सीमाओं में कर्फ्यू लगा दिया गया है। इस झड़प में कम से कम तीन लोगों की जान चली गई है और कई लोग घायल हो गए हैं।

बेंगलुरु के दंगों के कुछ घंटों बाद, सोशल मीडिया यूजर्स ने हिंसक झड़पों की भयावह तस्वीरें और वीडियो शेयर किए, जिसमें आक्रोशित भीड़ को ‘अल्लाह-हो-अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ जैसे इस्लामी नारे लगाते देखा गया। उन्हें शहर की सड़कों पर उग्र प्रदर्शन करते हुए आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं में लिप्त पाया गया।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने कल का एक वीडियो शेयर किया, जिसकी तुलना पिछले साल दिसंबर माह में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए सीएए विरोधी दंगों से की गई।

वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन द्वारा शेयर किए गए एक और भयानक वीडियो में, बेंगलुरु की सड़कों पर एक कार को जलते हुए देखा गया था।

बेंगलुरु के एक पुलिस स्टेशन के बाहर के दृश्यों को देख कर साफ पता चलता है कि कैसे संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ ने पुलिस वैन और संपत्ति को नुकसान पहुँचाते हुए अंधाधुंध पथराव किया था।

फेसबुक पर शेयर किए गए वीडियो में अनियंत्रित भीड़ को कार को पलटते हुए देखा जा सकता है।

सोशल मीडिया पर कई ऐसी तस्वीरें शेयर की गईं, जिनमें बेंगलुरु में हिंसा प्रभावित इलाकों की सुनसान सड़कों पर टूटी हुई चारदीवारी, टूटी हुई खिड़कियों से काँच, पत्थर और ईंटें बिखरी हुई दिखाई दीं।

कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर कवाल बिसरांड्रा में, जिस पर मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात संप्रदाय विशेष की भीड़ ने हमला किया था।

पिछली रात को हमला होने के बाद कॉन्ग्रेस विधायक का घर पूरी तरह से जल गया था।

गौरतलब है कि बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष की भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमले को उसी तरह से अंजाम दिया है, जिस तरह से उनके ही समुदाय के लोगों ने दिल्ली के हिंदू-विरोधी दिल्ली दंगों के दौरान हिंसा को अंजाम दिया था, जिसमें पुलिस कांस्टेबल रतन लाल की हत्या हुई थी और IPS अधिकारी अमित शर्मा और IPS अनुज कुमार पर जानलेवा हमले हुए थे।

SDPI ने दंगों के लिए पुलिस को ठहराया दोषी: पोस्ट करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की देरी ने कट्टरपंथी भीड़ को किया नाराज

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) द्वारा बेंगलुरु की सड़कों पर दंगे भड़काने के लिए संप्रदाय विशेष की हिंसक भीड़ का नेतृत्व करने के एक दिन बाद इस्लामी संगठन ने भयावह दंगों के लिए बेंगलुरु पुलिस को दोषी ठहराया है। इस दंगे में तीन लोग मारे गए हैं और 60 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। 

सुवर्ण न्यूज के मुताबिक, एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष इलियास मुहम्मद थुम्बे ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को दावा किया कि कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई करने में बेंगलुरु पुलिस की निष्क्रियता ने संप्रदाय विशेष के लोगों को नाराज कर दिया, जिसकी वजह से वो बेंगलुरु की सड़कों पर हिंसा करने के लिए विवश हुए।

बता दें कि एसडीपीआई के नेताओं के नेतृत्व में संप्रदाय विशेष की भीड़ ने दो पुलिस स्टेशनों और वाहनों को आग लगा दी। साथ ही उन्होंने स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक पर भी हमला किया। इलियास ने इनका बचाव करते हुए दावा किया कि संप्रदाय विशेष के एक समूह ने स्थानीय पुलिस से नवीन नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए संपर्क किया था। मगर पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करने से पहले संप्रदाय विशेष के लोगों को दो घंटे तक इंतजार करवाया।

एसडीपीआई नेता ने दावा किया कि संप्रदाय विशेष की भीड़ पुलिस कार्रवाई में देरी से नाराज हो गई और स्थानीय विधायक के खिलाफ ‘विरोध’ करने के लिए सड़कों पर उतर आई। इलियास मुहम्मद थम्बे ने कहा, “बेंगलुरु पुलिस की अक्षमता और नवीन द्वारा की गई सांप्रदायिक पोस्ट पूरी घटना के लिए जिम्मेदार है।”

संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा की गई पत्थरबाज़ी और उसके बाद हुए दंगों में 60 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्टेशनों के सामने 2 डीसीपी की इनोवा गाड़ी सहित कम से कम 10 वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। भीड़ ने केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के सामने भी वाहनों को आग लगा दी।

पूर्व-नियोजित हमले के दौरान, संप्रदाय विशेष की भीड़, पेट्रोल बम और अन्य हथियार लेकर, पास के पुलिस क्वार्टर में भी घुस गए और परिसर में हमला किया। संप्रदाय विशेष की भीड़ को पुलिस स्टेशन के बाहर ‘अल्लाह-हो-अकबर’ और-नारा-ए-तकबीर’ जैसे इस्लामी नारे लगाते देखा गया। यह भी बताया जा रहा है कि कन्नड़ समाचार नेटवर्क सुवर्ण समाचार से संबंधित पत्रकारों और कैमरामैन पर भी अनियंत्रित भीड़ ने हमला किया।

बेंगलुरु दंगा के पीछे SDPI का हाथ

गौरतलब है कि बेंगलुरु पुलिस ने केजी हल्ली थाना क्षेत्र में दंगा भड़काने के आरोप में SDPI के नेता मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि वो इन दंगों का मास्टरमाइंड है। इसके अलावा दो अन्य नेताओं के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। दोनों फिलहाल फरार चल रहे हैं।

SDPI का नेता मुजम्मिल पाशा, नवीन नामक व्यक्ति के खिलाफ पैगम्बर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में मामला दर्ज करवाने केजी हल्ली थाना पहुँचा था। फिर उसने भड़काऊ भाषण देते हुए पुलिस थाने के बाहर खड़ी संप्रदाय विशेष की भीड़ को सम्बोधित किया। इसके बाद वो कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास के आवास पर हिंसक भीड़ के साथ प्रदर्शन करने पहुँचा। 

इस दौरान मुजम्मिल पाशा के साथ SDPI के दो और नेता साथ थे जो लगातार लोगों को भड़का रहे थे। उसके सहयोगी नेताओं जफ़र और खलील ने संप्रदाय विशेष की भीड़ को पत्थरबाजी करने और थाने के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले करने के लिए भड़काया था। जहाँ पुलिस मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार करने में कामयाब रही है, जबकि बाकी 2 नेता फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज से भी इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

राम मंदिर ट्रस्ट ने दान के के लिए जारी की एकाउंट नम्बर: यथासम्भव दान की अपील, ताकि भव्य मंदिर का सपना हो साकार

अयोध्या में 5 अगस्त को भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए भूमि पूजन व शिलान्यास के बाद मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। ट्रस्ट ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को एकाउंट नंबर और अन्य जानकारियाँ शेयर कर लोगों से यथासंभव व यथाशक्ति दान करने की अपील की है, जिससे कि भव्य मंदिर का सपना साकार हो सके।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ट्वीट में विवरण देते हुए कहा है – “जय श्री राम! प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि पर उनके भव्य और दिव्य मन्दिर के निर्माण का कार्य माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा भूमिपूजन पश्चात प्रारम्भ हो गया है। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र सभी श्रीराम भक्तों का आह्वान करता है कि मन्दिर निर्माण हेतु यथाशक्ति व यथासंभव दान करें। जय श्री राम!”

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा कि 5 अगस्त को प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था, अब मंदिर निर्माण शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि करोड़ों राम भक्त मंदिर निर्माण में योगदान देना चाहते हैं जिसके लिए ट्रस्ट की ओर से सभी जानकारी दी जा रही है।

बैंक अकाउंट का विवरण

उल्लेखनीय है कि गत 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इस कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन चैनल पर किया गया, जिसे समस्त देशवासियों ने बड़े स्तर पर अपने घरों से देखा। कार्यक्रम के दौरान कई साधू, संतों के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे।

‘राम नहीं अल्लाह बोलो, हिन्दू महिलाओं से छेड़छाड़’: भूमिपूजन की खुशी मनाते परिवार ने अमानतुल्लाह के करीबियों पर लगाया आरोप

राम मंदिर भूमि पूजन के बाद 5 अगस्त का दिन पूरे देश में दीपावली की तरह मनाया गया। हर हिंदू ने इस बहुप्रतीक्षित अवसर पर अपने घर में दीया जलाकर इस दिन की खुशियाँ मनाईं। लेकिन इस बीच कुछ क्षेत्र ऐसे भी रहे जहाँ खुशियाँ मनाते-मनाते हिंसा भड़क गई। दिल्ली के कालिंदी कुंज के पास मदनपुर खादर इलाके की गली नंबर 4 में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

यहाँ 5 अगस्त के दिन एक आपसी झड़प की खबर मीडिया में सामने आई। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह बच्चों की लड़ाई का मामला था। जो बाद में बड़ों के बीच विवाद का कारण बन गया और देखते ही देखते वहाँ ईंट, लोहे की रॉड और तलवारें तक चल गईं। खबर में यह भी बताया गया कि पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इनका नाम गगन, मुकेश और दीपक है।

रिपोर्ट्स से यह भी सूचना मिली कि इस मामले को सुलझाने आए मिन्नतुल्लाह खान को दूसरे पक्ष के लोगों द्वारा तलवार से मारा गया, जिसके कारण वह बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बाद में इस संबंध में पुलिस को सूचना दी गई।

ऑपइंडिया के संज्ञान में जब यह मामला आया तो हमने पूरी घटना को जानने का प्रयास किया। हमें इस बीच मिन्नतुल्लाह खान द्वारा कालिंदी कुंज थाने में कराई गई एफआईआर की कॉपी मिली और साथ ही दूसरे पक्ष की शिकायत की प्रति भी मिली।

दोनों पक्षों के अपने-अपने मत थे। लेकिन हैरानी इस बात की थी कि मिन्नतुल्लाह खान की ओर से की गई एफआईआर पर त्वरित कार्रवाई हो चुकी थी। जबकि दूसरा पक्ष अब भी अपनी एफआईआर के लिए जद्दोजहद कर रहा है और घटना के एक हफ्ते बाद भी उनकी कोई सुनवाई नहीं है।

हमने पूरा मामला समझते हुए दूसरे पक्ष से संपर्क किया और उस परिवार से बात की जिनका झगड़ा 5 अगस्त के ही दिन अपने इलाके में रहने वाले दूसरे समुदाय के कुछ लोगों से हुआ था।

परिवार के सदस्य जीतेंद्र ने हमें बताया, “5 अगस्त के दिन राम मंदिर भूमिपूजन की खुशी के अवसर पर हमारे परिवार के बच्चे घर के बाहर दीया जलाकर खुशियाँ मना रहे थे। तभी घर के पास रहने वाले मिन्नतुल्लाह खान उर्फ बुच्ची की ओर से 3-4 लोग आए और बच्चों को धमका कर दीये में लात मार दी। ये सब देख कर हमारे घर की औरतें बीच-बचाव करने पहुँची। लेकिन वह लोग उनसे ही उलझ गए। तभी घर के दो पुरूष (मुकेश और गगन) भी वहाँ गए और उन 4-5 लोगों ने उन पर भी हमला बोल दिया। जब पूरा मामला बढ़ गया तो यह लोग वहाँ से चले गए और कुछ मिनट बाद 30-40 की संख्या के साथ वापस आए।”

जीतेंद्र के अनुसार, “भीड़ ने दोबारा आते ही बगल वाले घर से ईंट उठा कर हमारे घर पर हमला बोल दिया और जो दीया बाहर रखा था उसे भी घर में फेंक कर बाइक में आग लगाने की कोशिश की। जब हमने इस संबंध में पुलिस को संपर्क किया तो पुलिस आई और मुकेश के साथ गगन को भी थाने में ले गई। जब सवाल किया गया तो पता चला कि दूसरे ओर से शिकायत दर्ज हुई है।”

ऑपइंडिया ने यह जानने के बाद जीतेंद्र से पूछा कि आखिर किन कारणों से मुकेश और गगन को गिरफ्तार किया गया? जिस पर जीतेंद्र ने हमें बताया, “दरअसल, उस दिन जब वह लोग हमारी माँ बेटियों के साथ दुर्व्यव्हार कर रहे थे तब मिन्नतुल्लाह खान नलके के हत्थे से हमारे घर की बेटी वर्षा को मारने जा रहा था। लेकिन तभी वर्षा ने अपने सिर पर हाथ लगा लिया जिससे वह बच गई। मगर गगन को यह सब देखकर गुस्सा आया और वह अपनी शादी की तलवार उठाकर ले आया। उसने तलवार के उसके हैंडल से मिन्नतुल्लाह खान के सिर पर मार दिया।”

https://www.youtube.com/watch?v=PQVtziBMl1A

जीतेंद्र ने हमें इस पूरी घटना की वीडियो उपलब्ध करवाई। साथ ही यह भी कहा कि दूसरे पक्ष ने पुलिस का ध्यान केवल तलवार वाली घटना पर गौर दिलवाकर मुकेश-गगन को गिरफ्तार करवा दिया है। हमसे कोई बातचीत नहीं की। इनके अलावा एक दीपक नाम का साथी भी जेल में डाल दिया गया। जिसकी कोई गलती भी नहीं थी। वह घटनास्थल पर भी बाद में आया था। मगर, तब भी वह मुकेश और गगन के साथ तिहाड़ में डाल दिया गया।

जीतेंद्र के अनुसार, मिन्नतुल्लाह खान आम आदमी पार्टी नेता व इलाके के विधायक अमानतुल्लाह खान का खास है। जिसके ऊपर पहले से कई आपराधिक केस दर्ज हैं। लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उनके मुताबिक पुलिस से पूछने पर पुलिस उनसे कहती है कि दूसरे पक्ष की ओर से इस मामले में एफआईआर दर्ज है इसलिए कार्रवाई चल रही है।

बता दें कि जब ऑपइंडिया ने हिन्दू परिवार से बात की तब तक उनकी FIR दर्ज नहीं हुई थी। हालाँकि, आज मालूम चला कि घटना के 6 दिन बाद यानी कल उनकी शिकायत पर FIR हो गई है।

ऑपइंडिया को बताया गया कि काफी जद्दोजहद के बाद हमारी शिकायत को पुलिस ने 11 अगस्त 2020 को अंततः FIR के रूप में दर्ज किया। हिन्दुओं की तरफ से दर्ज कराई गई FIR की प्रति यहाँ संलग्न है। अब इस पर आगे जो भी कार्रवाई होती है वो आने वाले समय में ही पता लगेगा।

हिन्दू पक्ष की ओर से दर्ज FIR-1
हिन्दू पक्ष की ओर से दर्ज FIR-2
हिन्दू पक्ष की ओर से दर्ज FIR-3

घर की महिलाओं का क्या कहना है?

गगन की पत्नी बबीता बताती हैं कि 5 अगस्त के दिन उनके घर के बच्चे दीया जलाकर खुशियाँ मना रहे थे। तभी वह लोग बाहर लड्डू लेने गए। लेकिन दूसरे मजहब के बच्चों ने उनसे कहा कि राम-राम मत बोलो अल्लाह-अल्लाह बोलो। बबीता के मुताबिक, “हमारे बच्चों ने अल्लाह-अल्लाह बोलने से मना कर दिया जिसके कारण वह बच्चे मारपीट करने लगे। हमारे बच्चों ने हमसे शिकायत की। लेकिन तब तक पीछे से वह लोग आ गए और मारपीट करने लगे। इस बीच हमारी भांजी पर हमला कर दिया गया। हम उसे बचाने भी गए, पर तब भी मारपीट होती रही। वह लोग हमारे घर पर पत्थर बरसा कर गए।”

बबीता के अनुसार, दूसरे पक्ष की भीड़ ने इस दौरान उनका हाथ पकड़ा और उनकी छाती में हाथ भी डाला। उनसे कहा गया कि वह सब मिलकर उनकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे और कोई कुछ कर भी नहीं पाएगा।

बबीता के बाद दीपक की माताजी ने इस पूरे मामले के लिए मिन्नतुल्लाह खान को जिम्मेदार ठहराया। वहीं भांजी वर्षा भी बताती हैं कि उस दिन उनके भाइयों के साथ जब बदसलूकी हुई तो वह बाहर गईं। लेकिन उन लोगों ने उनके प्राइवेट पार्ट्स पर हाथ मारे और मुँह पर भी मारा।

वे कहती हैं कि उनकी बस यही माँग है कि उनके मामले में मिन्नतुल्लाह खान के ख़िलाफ़ जल्द से जल्द कार्रवाई हो और आने वाले समय में यदि कोई उनके छोटे भाई-बहनों को कुछ भी करे तो उसके जिम्मेदार भी उन्हें ही माना जाए।

सुदर्शन वाहिनी संगठन के दिल्ली प्रदेश के उपाध्यक्ष सागर मलिक

सुदर्शन वाहिनी संगठन के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष सागर मलिक भी इस मुद्दे पर इस समय पुलिस से कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सब साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने के लिहाज से हुआ है। हिंदू पक्ष ने जो कुछ भी किया वो अपनी बहन-बेटियों की रक्षा में किया। गगन ने जो बिन धार वाली तलवार को मिन्नतुल्लाह खान के सिर पर मारा वह भी बचाव में ही था। 

इसलिए उनके हिसाब से इस मामले में दोनों हिसाब से केस दर्ज होना चाहिए था। लेकिन तब भी एक ही पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई हुई और गगन के अलावा मुकेश व दीपक भी थाने में बुला कर जेल में डाल दिए गए।

सागर कहते हैं कि इस मामले में राजनीतिक दबाव के कारण हिंदू पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही और उन्हीं के लोगों को जेल में डाला गया है।

पुलिस से संपर्क

बता दें, ऑपइंडिया ने इस संबंध में कालिंदी कुंज थाने में अपडेट जानने के लिए संपर्क किया था। लेकिन पुलिस ने इस मामले पर डीएसपी से बात करने को कह दिया। इसके बाद डीएसपी से हमारा संपर्क नहीं हो पाया। अगर आगे कोई भी जानकारी हमें मिलेगी तो हम इस खबर को अपडेट करेंगे।

मिन्नतुल्लाह खान की ओर से दर्ज कराई गई FIR में क्या शिकायत है?

मिन्नतुल्लाह खान की ओर से दायर करवाई गई एफआईआर में उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि 5 अगस्त को राम मंदिर भूमि पूजन के बाद कुछ लोग दीया जला रहे थे। तभी उनके बड़े बेटे का फोन आया कि उनके छोटे बेटे को गगन ने चांटा मार दिया है और जब वह उसे बचाने गया तो उस पर भी हथौड़े से वार हुआ है।

मिन्नतुल्लाह खान के अनुसार, इसी कारण वह गगन से पूछने गए कि उसने बच्चों की आपसी लड़ाई में उनके बड़े लड़के को क्यों मारा।

मिन्नतुल्लाह खान की एफआईआर

लेकिन, तभी मुकेश ने नल के हत्थे से उनपर वार कर दिया और खुद को बचाने में उनके बाएँ हाथ में चोट आ गई। इसके बाद गगन भी घर से तलवार ले आया और जान से मारने के इरादे से हमला किया। फिर दीपक और सुशील समेत कई लोग आ गए और उन पर ईंट पत्थरों से वार करने लगे। 

इसके बाद ईंट लगने से वह घटनास्थल पर बेहोश हो गए जब होश आया तो वह अपोलो में थे। उन्होंने अपनी एफआईआर में यह माँग की है कि उनके बच्चों पर जानलेवा हमला करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो।

बता दें, इस संबंध में पुलिस ने मिन्नतुल्लाह खान की ओर से दूसरे पक्ष पर धारा 307 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।

हिंदू पक्ष की शिकायत में किन लोगों का नाम है?

हिंदू पक्ष की ओर से दी गई शिकायत में उन्होंने मिन्नतुल्लाह खान उर्फ बुच्ची, जोया, सद्दाम, इरफान, बुच्ची की पत्नी चुन्ना, कौशर, कौशर की पत्न, उस्मान अली मंसूरी, सलमान, समीर, शाहरूख, राजा, अमन, अब्दुल्ला, सैम्यूल मैसी व उनके अन्य साथियों के ख़िलाफ़ शिकायत करते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की है। 

इनकी शिकायत में आरोप है कि इनके साथ मारपीट, पथराव, घर की महिलाओं के साथ बदसलूकी के अलावा इनके घर के दीये को उठाकर फेंका गया और बाइक में आग लगाने की कोशिश हुई।

शिकायत में यह भी स्पष्ट लिखा है कि इतनी भीड़ के बीच में उन्होंने खुद को असहाय देखा और जब उनके घर की महिलाओं व छोटी बच्चियों के साथ छेड़छाड़ हुई तो एक साथ उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस बीच उन लोगों को भी चोट आई और ये लोग भी घायल हुए।

परिवार ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि कि दूसरे पक्ष के लोग आपराधिक प्रवृति के हैं। उनके ख़िलाफ़ बहुत से मामले दर्ज हैं। ये लोग फेसबुक पर भी बंदूक के साथ फोटो डालते हैं। अगर आने वाले समय में कोई भी अप्रिय घटना घटित हुई तो उसके लिए ये लोग जिम्मेदार होंगे। 

ऑपइंडिया को मिली वीडियो में क्या है?

घटना से संबंधित वीडियोज में हम देख सकते हैं कि उस दिन काफी लोगों की भीड़ वीडियो बनाने वाले युवक के घर पर गाली-गलौच करते हुए पथराव कर रही थी। बड़ी-बड़ी ईंटों को उठाकर घर पर फेंकी जा रही था। बगल के घर से पत्थर उखाड़ कर भी हमले के लिए प्रयोग किया गया।

एक अन्य वीडियो में दिखता है कि एक युवक बाइक में तोड़फोड़ करता है। फिर घर में जल रहे चिराग को गिराया जाता है और वहाँ खड़ी बाइक पर हमला होता है। दूसरा व्यक्ति बार-बार समझाता है, “बुच्ची भाई बाइक मेरी है” लेकिन उपद्रवी भीड़ नहीं सुनती है और लगातार पत्थरबाजी और गाली गलौच चलता रहता है।

एक वीडियो में यह भी साफ नजर आता है कि गगन अपने घर से तलवार लेकर मिन्नतुल्लाह खान पर हमला करता है और उसके बाद वह लोग वहाँ से भागने लगते हैं। बाद में दूसरी ओर से पथराव भी होता है। बीच में कुछ महिलाएँ बीच-बचाव करने पहुँचती हैं। लेकिन माहौल शांत नहीं होता। आखिर में घर का ही युवक इलाके की वीडियो बनाता है और उसे फेसबुक पर डालने की बात कहता है।

महेश भट्ट की सड़क-2 के ट्रेलर ने बनाया डिसलाइक का नया रिकॉर्ड: केवल यूट्यूब पर 1.3 मिलियन ने कुछ ही घंटो में किया ख़ारिज

सड़क- 2 का ट्रेलर बुधवार (12 अगस्त, 2020) सुबह लॉन्च हो चुका है। वहीं YouTube पर अपने प्रीमियर के कुछ ही घंटों के भीतर इसके ट्रेलर को 1.3 मिलियन डिसलाइक मिल चुके है। जिस वजह से वीडियो स्ट्रीमिंग साइट पर यह अब तक का सबसे अधिक नापसंद करने वाला ट्रेलर बन गया है। ज्ञात हो कि सड़क-2 फ़िल्म , 28 अगस्त को डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज करने की घोषणा हुई। है।

सड़क-2 ट्रेलर, 1.3 मिलियन डिसलाइक

गौरतलब है कि जहाँ इस ट्रेलर को 1.3 मिलियन लोगों ने नापसंद (डिसलाइक) किया है। वहीं 1 लाख से भी कम लोगों ने इसे पसंद (लाइक) किया है। ट्रेलर को लाइक्स से ज्यादा डिस्लाइक्स मिल रहे हैं।

इससे पहले, विहिप ने हिंदू भावनाओं को आहत करने के लिए महेश भट्ट की फिल्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की थी। संजय दत्त, आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर स्टारर फिल्म “नकली साधु” के साथ हीरो की मुठभेड़ के चारों ओर घूमती है। मूल रूप से फिल्म में आलिया का चरित्र एक नकली गुरु और उसके आश्रम को भंडाफोड़ करने के लिए है। संजय दत्त का किरदार आलिया को बाबा की सच्चाई को उजागर करने में मदद करेगा।

पिछले महीने सड़क-2 के पोस्टर रिलीज के समय भी काफी विवाद हुआ था। हिंदू भावनाओं को आहत करने के लिए फिल्म निर्माताओं के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर में एक अदालत के समक्ष शिकायत दर्ज की गई थी।

हालाँकि, इसके ट्रेलर को भी ऑडियंस ने नापसंद कर दिया है। ट्रेलर को लोगों का खास रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। लोगों ने फिल्म की कहानी को घिसा पिटा बताया है। कई लोग सोशल मीडिया पर स्टारकिड्स को बायकॉट करने की माँग भी कर रहे हैं।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही यह फिल्म सोशल मीडिया पर बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद की मिसाल के तौर पर पेश की गई। सुशांत के केस में महेश भट्ट का नाम भी सामने आया था। सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती संग महेश की कुछ तस्वीरों ने बवाल मचा दिया था। इसके अलावा नेपोट‍िज्म को लेकर भी काफी हंगामा हुआ।

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद मामला: सुन्नी सेंट्रल वक़्फ बोर्ड को नोटिस जारी, अगली सुनवाई 1 सितंबर को तय

अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भव्य निर्माण शुरू होने के साथ ही अब वाराणसी में ‘ज्ञानवापी परिसर’ को मुक्त कराने की कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर सोमवार को वाराणसी की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सुनवाई हुई थी। वहीं जिला जज की अदालत ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से कोर्ट में उपस्थिति न होने के कारण सुनवाई की अगली तारीख 1 सितंबर को निर्धारित कर दी है। इससे पहले प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मस्जिद की तरफ से 1 जुलाई को इस मुद्दे पर याचिका दाखिल की गई थी।

अयोध्या में रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के शिलान्यास के बाद से ही काशी और मथुरा का मुद्दा भी गरमाता नजर आ रहा है। लोगों की निगाहें अब काशी विश्वनाथ मंदिर के फैसले पर टिकी हुई है।

गौरतलब है कि प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मस्जिद की ओर से अर्जी दी गई कि मामले में सुनवाई नहीं हो सकती हैं। इस मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद प्रतिवादी की याचिका खारिज कर सुनवाई चालू रखने का आदेश दिया। उधर प्रतिवादी की ओर से एक और अर्जी दी गई। कहा गया कि लखनऊ वफ्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल न्यायाधिकरण के पास प्रकरण को भेजा जाए। अदालत ने इस अर्जी को 25 फरवरी को खारिज कर दिया। इसी आदेश के खिलाफ प्रतिवादी ने जिला जज की अदालत में एक जुलाई को याचिका दाखिल की है।

वहीं एक जुलाई को दायर याचिका की सुनवाई करते हुए जिला जज की अदालत ने प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी करने का आदेश देते हुए अग्रिम सुनवाई के लिए एक सितंबर की तिथि तय की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से पंडित सोमनाथ व्यास और डॉ. रामरंग शर्मा ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने आदि को लेकर वर्ष 1991 में मुकदमा दायर किया है। जिस पर बाद में हाईकोर्ट की ओर से स्टे दे दिया गया।

पिछले वर्ष दिसंबर में वादमित्र ने सिविल कोर्ट (सीनियर डिवीजन-फास्टट्रैक) में एक और याचिका दाखिल कर पूरे परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की माँग की। कहा कि लम्बा समय होने के कारण पूर्व के स्टे का आदेश स्वत: खारिज हो जाता है। लिहाजा, इस मामले में सुनवाई शुरू की जाए।

दिवंगत वादी पंडित सोमनाथ व्यास और डॉ. रामरंग शर्मा के स्थान पर प्रतिनिधित्व करने के लिए पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) विजय शंकर रस्तोगी को न्याय मित्र नियुक्ति किया गया।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में भगवान विश्वेश्वर पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील राजेंद्र प्रताप पांडेय पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अंजुमन इंतेजामि‍या बनारस और यूपी सुन्‍नी सेंट्रल चाहता था कि इस कार्यवाही को स्थगित कर दी जाए और आगे कोई सुनवाई न हो। कोर्ट द्वारा उनकी माँगें ख़ारिज किए जाने के बाद अब इस मामले में कार्यवाही चलेगी। नवम्बर 2019 में सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के पक्ष में फ़ैसला आने के बाद अब लोगों के भीतर उम्मीद जगी है कि मथुरा व काशी विवाद में भी हिन्दुओं को न्याय मिलेगा।

काशी विश्वनाथ व ज्ञानवापी मस्जिद का मामला हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट, दोनों में ही चल रहा था। बाद में हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमा एक ही कोर्ट में चलेगा और सेशन कोर्ट में जारी रहेगा। वादी पक्ष की तरफ से पूरे ज्ञानवापी परिसर के एएसआई द्वारा भौतिक सर्वे कराने के लिए आवेदन दिया गया था, जिस पर संप्रदाय विशेष के पक्ष ने आपत्ति जताई थी। उसका कहना था कि हाईकोर्ट के 1998 में दिए गए आदेश के अनुसार इस मामले में स्टे लगा हुआ है।

बेगूसराय में नाबालिग लड़की के अपहरण को पुलिस ने बताया प्रेम प्रसंग: न आरोपित से पूछताछ और न POCSO में केस दर्ज

बिहार के बेगूसराय के बछवारा पुलिस थाने के अंतर्गत भिखम चक गाँव से गत 26 जुलाई को एक नाबालिग हिंदू लड़की को बंदूक की नोक पर उस समय अगवा कर लिया गया था, जब वह अपने पिता के साथ बाजार से लौट रही थी।

नाबालिग लड़की के पिता दिनेश ने आरोप लगाया था कि जब वह बेगूसराय जिले के मंसूरचक ब्लॉक में बेहरामपुर में पंचायत भवन को पार कर रहे थे, उसी वक्त मुख्य आरोपित नजमुल और एक महिला सहित सात लोगों ने एक बोलेरो कार में उसकी बेटी को जबरन बंदूक की नोक पर अगवा कर ले गए।

इस घटना को घटित हुए 17 दिन हो गए हैं। लेकिन अभी तक माता-पिता के पास अपनी बेटी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। ऑपइंडिया से बात करते हुए, लड़की के पिता दिनेश ने कहा कि उनकी बेटी अभी भी लापता है। पिता ने आरोप लगाया कि पुलिस उसकी तलाश के लिए कुछ नहीं कर रही है।

दिनेश कुमार पंडित ने मुख्य आरोपित इज़मुल खान उर्फ ​​नजमुल उर्फ ​​आर्यन और उसके साथी, मोहम्मद नरूल अंसारी, मोहम्मद मुनफ़र अंजुम अंसारी अलार चंद, फ़रत और अन्य लोगों के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई थी। वहीं, दिनेश ने यह भी बताया था कि पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) 2 अगस्त को उनसे मिलने आए थे और उन्हें धमकाया।

घटना के बारे में बात करते हुए, दिनेश ने कहा कि पुलिस उनकी शिकायतों पर विश्वास नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेगूसराय के डीएसपी ने उनकी बातों को बेतुका करार दिया है। इसके अलावा उन्होंने घटना को एक मनगढंत कहानी भी बताया है।

पुलिस ने दिनेश से सबूत माँगा

बेटी के अपहरण के मामले में पुलिस की उदासीनता के बारे में बताते हुए, दिनेश ने कहा कि उनके परिवार के सदस्य नियमित रूप से मुख्य आरोपित नजमुल के भाई को पड़ोस के गाँव में उनके घर में देखते हैं। वह 10 अगस्त को भी वहीं था, लेकिन जब भी वे पुलिस से पूछते हैं कि वे उसे गिरफ्तार क्यों नहीं कर रहे हैं, तो पुलिस यह दावा करते है कि जब भी वे नजमुल के घर पर छापा मारते हैं तो कोई भी वहाँ मौजूद नहीं होता है।

नाबालिक लड़की के पिता ने कहा- “पुलिस ने मुझे कुछ सुराग देने के लिए कहा। मैं एक गरीब और असहाय आदमी हूँ, मैं कहाँ से सुबूत इकट्ठा करके उन्हें दूँगा?”

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने पुलिस को सूचित किया कि उनके परिवार के सदस्यों ने कल भी नजमुल के भाई को देखा था? दिनेश ने जवाब दिया कि पुलिस को सूचित किया गया था, लेकिन उन्हें इस बारे में नहीं पता है कि जानकारी प्राप्त करने के बाद में क्या कार्रवाई हुई।

बातचीत के दौरान, दिनेश ने यह भी पुष्टि की कि उन्हें इस घटना के बाद उनकी बेटी या अपहरणकर्ताओं की तरफ से कोई कॉल नहीं आया है। किसी भी लड़की के पिता के लिए इससे अधिक चुनौतीपूर्ण कुछ भी नहीं हो सकता है कि उसकी नाबालिग बेटी 17 दिन से से गायब है और उन्हें नहीं पता कि किस तरह वह अपनी बेटी को सुरक्षित वापस लाएँ।

दिनेश ने बताया कि बेटी के अगवा होने के बाद उसकी माँ की हालत बहुत ही खराब है। पूरा परिवार बेहद निराश है। दिनेश ने कहा कि अपनी बेटी को ढूँढने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है। और सभी बड़े और प्रभावशाली लोगों से संपर्क करने की भी कोशिश की, जिनसे वो परिचित था। सभी ने आश्वासन दिया कि वे इस मामले को देखेंगे, लेकिन किसी को परवाह नहीं है। पीड़िता के पिता दिनेश का कहना है कि किसी ने भी उनके मामले में कोई दिलचस्पी नहीं ली।

हमनें सुना था कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, लेकिन ये सब किताबी बातें हैं: नाबालिक लड़की के पिता

दिनेश ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने बेगूसराय के पूर्व विधायक और बिहार कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के राज्य कार्यकारिणी के सदस्य अवधेश कुमार राय से संपर्क किया और उनसे अनुरोध किया कि वह पुलिस को मामले में कुछ ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दें। दिनेश ने बताया कि, आश्वासन के बावजूद, सीपीआई सदस्य अवधेश ने पुलिस से संपर्क नहीं किया। उन्होंने आगे कहा, “चाहे पंचायत सरपंच हो या मुखिया, मैंने सभी के दरवाजे खटखटाए हैं, लेकिन बदले में मुझे सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।”

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक रामदेव राय से संपर्क किया? इस पर दिनेश ने पुष्टि की कि हालाँकि उन्होंने सीधे उनसे संपर्क नहीं किया था, लेकिन उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के ब्लॉक प्रतिनिधि से बात की थी। वो शुरू में पुलिस अधिकारियों से मिले क्योंकि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने कहा कि यह उनके लिए फायदेमंद होगा और उनके मामले को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। उस दिन के बाद ब्लॉक प्रतिनिधि ने भी उनसे संपर्क नहीं किया है। न ही इस मामले में कोई आगे की कार्रवाई की।

लड़की के पिता ने आगे कहा, “अमिय कश्यप सहित कुछ ही भाजपा सदस्य सांत्वना देने और हमें फिर से आश्वासन देने के लिए हमारे पास आते रहते हैं, अन्यथा कोई भी हमारे पास नहीं आता है। किसी भी मीडिया ने हमसे संपर्क नहीं किया।”

यह कहते हुए कि उनका परिवार अब अपनी बेटी को वापस पाने की उम्मीद और न्यायिक प्रणाली में अपने विश्वास को खो रहा है, नाबालिग लड़की के निराश पिता ने कहा – “हमनें सुना था कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, लेकिन ये सब किताबी बातें हैं। गरीब आदमी को कोई देखने वाला नहीं है इस हिंदुस्तान में।”

दिनेश से बात करने और पुलिस और न्यायपालिका के साथ उनकी शिकायतों को सुनने के बाद, ऑपइंडिया ने बेगूसराय के डीएसपी ओम प्रकाश से इस घटना का संस्करण जानने के लिए संपर्क किया।

यह सब प्यार मोहब्बत का चक्कर है, किडनैपिंग की कहानी गलत है: बेगूसराय डीएसपी ओम प्रकाश

जैसे ही हमने उनसे बताया कि किस घटना के बारे में हम उससे बात करना चाहते हैं, डीएसपी ने कहा, “आपको गलत जानकारी दी गई है। किसी भी नाबालिग लड़की का अपहरण नहीं हुआ। लड़की का लड़के के साथ प्रेम संबंध था।”

बेगूसराय डीएसपी ने कहा कि पहले दो बार (हिंदू नाबालिग लड़की और संप्रदाय विशेष का लड़का, नजमुल) दो बार पकड़े गए हैं। लड़की के पिता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पंचायत सदस्यों ने डेढ़ साल पहले लड़के को तब पीटा भी था, जब वह लड़की को प्रेमपत्र देते हुए पकड़ा गया था। वहीं, पहले भी 2 बार लड़की के पिता ने उसका मोबाइल फोन उस समय तोड़ दिया, जब वह नजमुल से बात करते हुए पकड़ी गई थी। डीएसपी ने दावा किया कि यह चीजें बहुत लंबे समय तक गाँव में छुपी नहीं रह सकती हैं।

डीएसपी ने कहा कि इस बार भी दिनेश ने 26 जुलाई की देर शाम तक बेटी के वापस न आने पर ग्राम पंचायत से संपर्क किया था। उन्होंने अपनी बेटी को वापस पाने के लिए पंचायत सदस्यों से आग्रह किया। यह पंचायत की बैठक ग्राम पंचायत के प्रमुखों, सरपंच, लड़की के परिवार के सदस्यों और लड़के के भाई की उपस्थिति में आयोजित की गई थी। जिस दौरान दिनेश ने सदस्यों से नजमुल के भाई से नजमुल के संपर्क विवरण देने के लिए कहा था। लेकिन लड़के के भाई ने कहा कि उसे कुछ पता नहीं है और उसके पास नजमुल का कॉन्टेक्ट डिटेल नहीं है।

‘आप सोचिए, यहाँ दिन दहाड़े कोई भी बंदूक की नोक पर क्या ऐसे किसी को उठा के ले जा सकते हैं?’ बेगूसराय डीएसपी ने यह सवाल पूछते हुए कहा कि पीड़िता का पिता दिनेश झूठ बोल रहा था।

डीसीपी ने आगे कहा, पंचायत सदस्यों ने इससे आगे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह पहली बार नहीं था। जब दोनों ने दोनों शादी के करने के लिए भाग गए थे। तब दिनेश ने इसे काल्पनिक कहानी बना कर इस घटना को धर्म का एंगल दे दिया।

बिहार चुनाव के चलते इस घटना पर हो रही राजनीति: डीसीपी

डीएसपी ने कहा- “यह बिहार है। यहाँ बहुत भ्रष्टाचार है। लोग गंदी राजनीति करते हैं। और अब जब चुनाव दिन आसपास हैं, संयोग से यह विशेष मामला एक हिंदू लड़की और संप्रदाय विशेष के एक लड़के से संबंधित है, कुछ भाजपा नेता दिनेश और इस घटना का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि दिनेश ने इस घटना को सांप्रदायिक मोड़ देते हुए एफआईआर दर्ज की है।”

हालाँकि, बातचीत के दौरान डीएसपी की आवाज बीच में स्पष्ट रूप से सुनी नहीं गई, लेकिन उन्हें ‘पाकिस्तान एंगल’ का उल्लेख करते हुए भी सुना जाता है, जिसके द्वारा हम मानते हैं कि वह दिनेश द्वारा दिए गए बयान के बारे में बात कर। दिनेश ने FIR में इस बात का जिक्र किया था कि नजमुल ने कथित तौर पर लड़की के पिता से कहा था अगर यह पाकिस्तान होता, तो वे लड़की को घर से ले जाते।

डीएसपी ने कहा कि लड़की के पिता ने पाकिस्तान के बयान का सपना देखा है। इस घटना पर हँसते हुए डीएसपी ने कहा, “आप कल्पना कर सकते हैं, प्राथमिकी में लड़के की 17-18 वर्षीय बहन, उसकी माँ, दो भाइयों का सह-अभियुक्त के रूप में उल्लेख किया गया है। क्या यह संभव है कि ये लोग किसी का अपहरण कर सकते हैं, वह भी गनपॉइंट पर?”

डीएसपी ओम प्रकाश ने कहा, “यह एक साधारण प्रेम संबंध का मामला है। जिसे लड़की के परिवार वाले तमाशा बना रहे हैं।” जब डीएसपी ने इस आरोप के बारे में पूछा गया कि पुलिस पीड़ित परिवार का सहयोग नहीं कर रही है, तो उन्होंने उल्टा लड़की के पिता पर ही आरोप लगा दिया कि दिनेश जाँच में सहायता नहीं कर रहे थे। डीसीपी ने कहा कि लड़की के पिता ने अपना मोबाइल नंबर पुलिस को नहीं दिया और थाने में बुलाने पर भी वह नहीं गए।

डीएसपी ने कह कि वो सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जब परिवार के सदस्य सहयोग नहीं करते हैं तो क्या कर सकते हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि वह मानते हैं कि दोनों कोलकाता भाग गए हैं। डीएसपी ओम प्रकाश ने कहा कि पुलिस को 4-5 मोबाइल नंबर मिले, जिससे उन्होंने पता लगाने की कोशिश की, लेकिन जाँच की शुरुआत से ही ये नंबर बंद आ रहे हैं।

डीएसपी ने कहा कि दिव्यांशु नाम के एक नजमुल के दोस्त ने किसी को बताया था कि कोलकाता में उनके दोस्त ने नजमुल को अपनी गर्लफ्रेंड के साथ आने का सुझाव दिया था। डीएसपी ने कहा कि चूँकि बिहार चुनाव पास आ रहे हैं, इसलिए कुछ लोग भ्रम पैदा करना चाहते हैं। यह एक तनावपूर्ण माहौल है और इस घटना से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

सिर्फ लड़की के परिजनों से कर रही है बेगूसराय की पुलिस पूछताछ

यह पूछे जाने पर कि क्या पुलिस ने आरोपित लड़के के परिवार को भी तलब किया है? डीएसपी ने आश्चर्यजनक रूप से हमें बताया कि उन्होंने केवल उस परिवार से पूछताछ की थी, जिसने पंचायत (लड़की के परिवार) से संपर्क किया था। हालाँकि, यह एक रहस्य बना हुआ है कि जब पीड़ित लड़की नाबालिग थी, तो लड़के के परिवारवालों से क्यों पूछताछ नहीं की गई थी? उन्होंने कहा कि उन्हें 30 जुलाई को सूचना दी थी कि एक नाबालिग लड़की का बंदूक की नोक पर अपहरण कर लिया गया था।

नाबालिग लड़की के पिता दिनेश ने बताया कि शाम 5 बजे के आसपास, एक महिला सहित सात लोग, एक बोलेरो कार में उनके पास पहुँचे, जब वे बेगूसराय जिले के मंसूरचक ब्लॉक में बेहरामपुर में पंचायत भवन पार कर रहे थे। और जबरन बेटी को बंदूक की नोक पर उठा के गए।

नजमुल को छह अन्य लोगों के साथ मुख्य आरोपित के रूप में नामित करते हुए, दिनेश ने अपनी शिकायत में लिखा था कि घटना के बाद, वह और उसकी पत्नी इज़मुल खान के घर गए थे, जहाँ उन्हें उसकी माँ हसीना खातुन मिली थी। शिकायत में लिखा गया है कि जब उन्होंने हसीना खातून से इस घटना के बारे में बताने की कोशिश की, तो वह चीखने चिल्लाने लगी थी। उन्होंने भीड़ इकट्ठा कर लड़की के पिता के साथ बदसलूकी और मारपीट भी की।

पीड़ित लड़की के पिता दिनेश ने शिकायत में कहा है कि उन्होंने उनकी पत्नी का मंगलसूत्र खींचकर धमकी दी थी कि अगर वे उसके घर से तुरंत बाहर नहीं निकलेंगे, तो वह उसकी बेटी को बांग्लादेश में बेच देगी और उसे वेश्यावृत्ति में धकेल देगी।

वहीं, लड़की के नाबालिग होने के बावजूद, SHO ने पुष्टि की थी कि इस मामले में POCSO अधिनियम को लागू नहीं किया जाएगा और आरोपितों पर IPC की धारा 366, 323, 341, 379, 384 और 504 के तहत अपहरण और चोट पहुँचने का मामला दर्ज किया गया था।

दंगाइयों के संपत्ति से की जाएगी नुकसान की भरपाई: कर्नाटक के गृहमंत्री का ऐलान, तेजस्वी सूर्या ने योगी सरकार की तर्ज पर की थी माँग

कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को कहा कि राज्य सरकार बेंगलुरु हिंसा की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।

मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “मैं संपत्ति की वसूली को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा करना चाहता हूँ कि सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सार्वजनिक संपत्ति की भरपाई उन व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए जिन्होंने नुकसान पहुँचाया है। हम तुरंत कार्रवाई करने जा रहे हैं। हम व्यक्तियों की पहचान कर रहे हैं और नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इसके बाद दंगाइयों द्वारा नुकसान की वसूली की जाएगी।”

उन्होंने पुष्टि की कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई है, जहाँ आगजनी में लिप्त लोगों से नुकसान की वसूली के बारे में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

मंत्री ने कहा, “मैं लोगों को चेतावनी देना चाहता हूँ कि जो लोग कानून को हाथ में ले रहे हैं उन्हें सबक सिखाया जाएगा। (बेंगलुरु हिंसा) के पीछे की साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।”

बता दें कि इससे पहले बेंगलुरु दक्षिण के सांसद (बीजेपी) तेजस्वी सूर्या ने इस बाबत कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को पत्र लिखा था। पत्र में तेजस्वी सूर्या ने येदियुरप्पा से उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की तरह दंगे में हुई व्यापक क्षति की भरपाई दंगाइयों की संपत्ति जब्त करके करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली दंगाइयों की संपत्ति जब्त करके करें।

भाजपा सांसद ने अपने पत्र को ट्विटर पर पत्र शेयर किया, जिसमें उन्होंने येदियुरप्पा से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार के उदाहरण का पालन करने का आग्रह किया, जिसमें उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराया नहीं जाएगा।

उत्तर प्रदेश के सीएम ने आगजनी में शामिल दंगाइयों की संपत्तियों को कैसे कुर्क किया, इसका उदाहरण देते हुए तेजस्वी ने कहा कि हिंसा के आरोपित व्यक्तियों की होर्डिंग्स लगाई गई और अकेले लखनऊ में 50 लोगों को 1.55 करोड़ रुपए की वसूली नोटिस जारी किए गए। उन्होंने दंगाइयों से सख्ती से निपटने का अनुरोध किया।

सीएम येदियुरप्पा को तेजस्वी सूर्या का लिखा गया पत्र

बता दें कि मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात पूर्वी बेंगलुरु केजी हल्ली, डीजे हल्ली और पुल्केशी नगर में अल्लाह-हो-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच हिंसा फैल गई। संप्रदाय विशेष की 1000 से भी अधिक की भीड़ ने अल्लाह-हो-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच पुलिस स्टेशन को जला डाला। यह दंगे पैगंबर मुहम्मद पर कथित रूप से आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट को लेकर भड़के थे।

1000 से भी अधिक की संप्रदाय विशेष की भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी। सबसे पहले तो केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के सामने एक हज़ार से ज्यादा की संख्या में संप्रदाय विशेष के लोग इकट्ठे हो गए और कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन की गिरफ्तारी की माँग करने लगे। इसके बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। इसी तरह विधायक के आवास के बाहर भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। उनके घर के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। कई घण्टों तक आगजनी चली।

पुलिस स्टेशन के बाहर मजहबी नारेबाजी हुई, पत्थरबाजी की गई और गाड़ियों को फूँक दिया गया। पूर्वी भीमाशंकर के डीसीपी को डंडों और पत्थरों से निशाना बनाया गया। वहीं डीजे हल्ली में पुलिस की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। रात के करीब 10:30 बजे अतिरिक्त पुलिस बल की टुकड़ियाँ आईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की। यहाँ तक कि पुलिस को थाने के भीतर घुसने के लिए भी संप्रदाय विशेष की भीड़ ने जगह नहीं दी।

सुशांत ज़िंदा था तो उतना फेमस नहीं था जितना मौत के बाद बना दिया गया: आतंकी याकूब के वकील रहे NCP नेता मजीद मेमन

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले में महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टियों में से एक एनसीपी (NCP) के नेता मजीद मेमन ने संवेदनहीन टिप्पणी की है। इसके बाद परिवार ने एक 9 पन्ने का पत्र जारी कर सुशांत सिंह राजपूत के लिए न्याय की माँग करने वालों के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने वालों को जवाब दिया है। मजीद मेमन ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को कहा कि सुशांत जब ज़िंदा थे तब वो उतने लोकप्रिय नहीं थे, जितना उन्हें मरने के बाद बना दिया गया है।

साथ ही मजीद मेमन ने तंज कसते हुए कहा कि सुशांत सिंह राजपूत को आजकल मीडिया में उतनी जगह मिल रही है, जितनी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी नहीं मिलती। उन्होंने दावा किया ऐसे मामलों की जब जाँच होती है तो गोपनीयता बरकरार रखनी होती है। उन्होंने कहा कि हर विवरण को मीडिया में डालने का अर्थ है कि इससे जाँच पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

इसके बाद एनसीपी (NCP) नेता ने अपनी ट्वीट्स पर हुए बवाल पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनका ये बिलकुल भी मतलब नहीं था कि सुशांत सिंह राजपूत जब ज़िंदा थे तब लोकप्रिय नहीं थे तो उन्हें मौत के बाद न्याय नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके ट्वीट का सुशांत को अपमानित करने का कोई इरादा नहीं था, इसीलिए इसका गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर एनसीपी नेता मजीद मेमन के विवादित बोल

भाजपा नेशनल मीडिया पैनेलिस्ट तुहिन सिन्हा ने मजीद मेमन के इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि वो मेमन सहित 1993 बम ब्लास्ट के कई आरोपितों के वकील रहे हैं और उन्हें क़ानून का पालन करते हुए खुद को स्थापित करने वाले लोगों से घृणा है। वहीं एनसीपी ने मजीद मेमन के इस बयान से पल्ला झाड़ लिया। प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि उनकी पार्टी इस बयान का किसी भी रूप में समर्थन नहीं करती।

मजीद मेमन पहले भी अपने बिगड़े बोल के कारण विवादों में रहे हैं। अप्रैल 2019 में उन्होंने पीएम मोदी के बारे में कहा था, “मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री भी एक अनपढ़, जाहिल या रास्ते पर चलने वाले आदमी की तरह बात करते हैं। वो इतने बड़े पद पर बैठे हैं, उनका पद एक संवैधानिक पद है। उस संवैधानिक पद के लिए प्रधानमंत्री रास्ते में नहीं चुना जाता।” उन्होंने याकूब की पैरवी करते हुए कोर्ट में कहा था कि उसे संप्रदाय विशेष के होने की सज़ा दी जा रही है।

उधर सुशांत सिंह राजपूत के परिवार ने शिवसेना सांसद संजय राउत द्वारा पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ में लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि लोग इस बात की कल्पना ही नहीं कर सकते कि पिछले 8-10 साल में उनके साथ क्या हुआ है। रिया चक्रवर्ती का नाम लिए बिना इस पत्र में कहा गया है कि सुशांत की वीभत्स हत्या की गई है और ‘उस बदमाश ने’ उन्हें फँसा लिया और अब महँगे वकील किए जा रहे हैं।