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रिया चकवर्ती समेत 6 पर CBI ने दर्ज किया मामला: सुशांत को मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती कराने की बनाई थी योजना

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला CBI के पास पहुँचने के बाद अब रिया चक्रवर्ती की कॉल डिटेल्स का खुलासा हुआ है। इन कॉल डिटेल्स से पता चला है कि रिया चक्रवर्ती कैसे सुशांत को उनके परिवार से दूर करने की कोशिश करती थी और कैसे उनके जीवन से जुड़े फैसले खुद लेती थी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक रिया ने सुशांत को 20 से 24 जनवरी के बीच 25 कॉल किए थे, क्योंकि वह इस बीच अपनी बहन रानी से मिलने चले गए थे। रिया ऐसा नहीं चाहती थी।

सुशांत ने पिछले साल नवंबर में अपनी बहन से मदद माँगने के लिए उसे कॉल भी की थी। तीनों बहनें और सुशांत उस समय चंडीगढ़ जाने को तैयार थे। चारों की टिकट भी बुक हो गई थी। लेकिन उस समय रिया ने सुशांत पर दबाव बनाकर उन्हें उनकी बहनों के साथ जाने से रोक लिया।

बाद में तंग आकर दिसंबर 2019 में सुशांत को अपना नंबर बदलना पड़ा। सुशांत ने अपने नए नंबर से अपनी बहन को दिसंबर में फिर कॉल किया। उन्होंने बताया कि रिया और उसका परिवार उन पर मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती होने के लिए दबाव डाल रहा है। लेकिन वह वहाँ नहीं जाना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि वह मुंबई छोड़कर हिमाचल प्रदेश में कहीं जाना चाहते हैं।

इसके बाद सुशांत एक दिन अपनी गाड़ी ड्राइव कर मुंबई से पंचकुला अपनी बहन रानी के पास चले गए। बहन के साथ सुशांत 20 से 24 जनवरी 2020 तक रहे। उन्होंने गाड़ी से यात्रा इसलिए की क्योंकि उन्हें गलत दवाई लेने की वजह से घुटन महसूस हो रही थी। वहाँ वे दो दिनों तक रहे और उनकी हालत में थोड़ा सुधार भी आया।

सिद्धार्थ पिठानी ने इस बीच रिया को सुशांत के चंडीगढ़ जाने के बारे में बता दिया। रिया ने फिर लगातार सुशांत को 25 कॉल किए और उन्हें धमकी देकर वापस बुलाया। इसके बाद सुशांत 24-25 जनवरी को मुंबई लौट आए।

CBI ने SIT का गठन करके 6 के ख़िलाफ़ किया मामला दर्ज

गौरतलब है कि सुशांत सिंह की मृत्यु का मामला धीरे धीरे कई राज से पर्दा उठा रहा है। रिया चक्रवर्ती, जिन्हें लेकर सुशांत के पिता ने अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। उन पर शिकंजा कसता जा रहा है। सीबीआई ने भी इस मामले की जाँच मिलने के बाद अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

सीबीआई ने इसके लिए स्पेशल टीम का गठन भी किया है। इस टीम में आईपीएस मनोज शशिधर, डीआईजी गगनदीप गंभीर और एसपी नुपूर प्रसाद शामिल हैं। ताजा अपडेट के अनुसार इस मामले में जाँच एजेंसी 6 आरोपितों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर चुकी है। उनका कहना है कि वह लगातार इस केस को लेकर बिहार पुलिस के संपर्क में हैं।

जॉंच एजेंसी ने जिनके खिलाफ मामला दर्ज किया है उनमें रिया चकवर्ती, इंद्रजीत चकवर्ती, संध्या चकवर्ती, सौविक चकवर्ती, सैम्युल मिरांडा, श्रुति मोदी शामिल हैं।

बता दें, कि सीबीआई के अलावा इस मामले में अब ईडी भी सुंशांत के पैसों को लेकर हुई हेर-फेर की जाँच करने में जुटी है। सुशांत के पिता का आरोप है कि उनके बेटे के अकाउंट से ऐसे अकाउंट में पैसे ट्रांसफर हुए जो उसका था ही नहीं।

CM विजयन के साथ मेरा ‘कैजुअल’ रिलेशन: केरल सोना तस्करी में स्वप्ना सुरेश ने NIA के सामने कबूला

केरल में सोना तस्करी मामले की जाँच NIA ने अपने हाथों में ले रखी है। इस मामले में आरोपित स्वप्ना सुरेश ने स्वीकार किया है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के साथ उनके ‘कैजुअल रिलेशन्स’ हैं। दोनों की साथ में कई तस्वीरें वायरल होने के बाद से ही ये सवाल उठ रहे थे।

इस मामले में कोच्चि स्थित NIA कोर्ट में सुनवाई चल रही है, जहाँ जाँच एजेंसी ने स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि केरल के मुख्यमंत्री विजयन के मुख्य सचिव रहे एम शिवशंकर ने ही स्वप्ना सुरेश को बढ़ावा दिया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार (अगस्त 10, 2020) को होगी। स्वप्ना सुरेश पहले तिरुवनंतपुरम में UAE की काउंसलेट के रूप में कार्यरत थी।

5 जुलाई को तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 30 किलो सोने की खेप जब्त की गई थी, जिसे डिप्लोमेटिक बैगेज के अंदर डाल कर तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था। NIA ने बताया है कि इसके बाद स्वप्ना सीधा एम शिवशंकर के फ्लैट पर पहुँची थी और इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा था। हालाँकि, उस समय उन्होंने कोई मदद नहीं की। NIA की तरफ से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल पी विजय कुमार ने दलीलें पेश की।

उन्होंने स्वप्ना के बयान के हवाले से बताया कि वो कभी-कभी शिवशंकर से सलाह-मशविरा करती रहती थी। साथ ही उसके 31 पेज के बयान में मुख्यमंत्री विजयन के साथ ‘कैजुअल सम्बन्ध’ होने की बात भी स्वीकार की है। हालाँकि, स्वप्ना के वकील का कहना है कि उनके क्लाइंट ने ये कभी कबूल नहीं किया है कि मुख़्यमंत्री कार्यालय में वो प्रभाव रखती थी। उन्होंने कहा कि NIA कह रही है कि स्वप्ना सीएम को जानती थी, लेकिन इससे कुछ भी साबित नहीं होता।

स्वप्ना सुरेश के वकील का कहना है कि उनकी क्लाइंट के पास से जो सोना जब्त किया गया, वो उन्हें शादी फंक्शन के लिए मिला था। उन्होंने कहा कि हिन्दू परिवारों में ये सब चलता है। उन्होंने कहा कि अगर ये गोल्ड बार होता तब स्थिति अलग होती, लेकिन फ़िलहाल इस मामले में कुछ भी गलत साबित नहीं होता।

बता दें कि तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयर कार्गो के माध्यम से यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) से आए एक राजनयिक के सामान से 30 किलोग्राम सोना जब्त किया गया था। इसका मूल्य लगभग 15 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। इसके बाद उस व्यक्ति सरित कुमार को कस्टम विभाग ने हिरासत में ले लिया। पूछताछ में सरित ने बताया कि वह लगभग एक साल से हवाई अड्डे से इस तरह का सामान ले जा रहा था।

‘राम मंदिर का समर्थन घुटने टेकने जैसा’: कॉन्ग्रेस MP का सोनिया गाँधी को पत्र, प्रियंका से सहयोगी दल भी नाराज

राम मंदिर पर कॉन्ग्रेस दो गुटों में बँटी नजर आ रही है। हाल ही में कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने भूमि पूजन के अवसर पर राम मंदिर का समर्थन किया। इसे देखकर केरल की कॉन्ग्रेस ईकाई आग बबूला हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता व लोकसभा सांसद टीएन प्रतापन ने तो खुलकर आपत्ति भी जताई है। पार्टी हाईकमान को पत्र लिखा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, त्रिशूर से लोकसभा सांसद टीएन प्रतापन ने सोनिया गाँधी को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने मध्यप्रदेश नेताओं के ख़िलाफ़ शिकायत की है। उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराते हुए कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के उन बयानों के ख़िलाफ नाराजगी जताई जिनमे उन्होंने राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि इस तरह राम मंदिर निर्माण का समर्थन का करना बिलकुल ऐसा है जैसा अस्थायी सफलता के लिए अपने घुटने टेकना। अपने पत्र में उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी को सॉफ्ट हिंदुत्व छवि अपनाने के लिए चेतावनी दी और कहा कि कॉन्ग्रेस को इस बीच उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए जो बाबरी विध्वंस का दुख मनाते हैं और जिनके लिए वह हमला बिलकुल ऐसा था जैसा किसी ने उन पर हमला किया हो। वे कहते हैं कि नरम रवैये के साथ अतिधार्मिक राष्ट्रवाद के पीछे नहीं चल सकते। हमें स्थिति को समझना होगा और कोई और रास्ता खोजना होगा।

क्या कहा था कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने?

गौरतलब है कि केरल सासंद का ये पत्र कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बयानों की प्रतिक्रिया में है। दरअसल दोनों नेताओं ने राम मंदिर निर्माण कार्य का स्वागत ये कहते हुए किया कि वह राजीव गाँधी ही थे जिन्होंने 1985 में राम जन्मभूमि का दरवाजा खोला।

कमलनाथ ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर डालते हुए यह भी कहा कि इस अवसर पर वह अपने भोपाल वाले घर में हनुमान चालीसा का पाठ रखेंगे और कॉन्ग्रेस की राज्य ईकाई की ओर से अयोध्या के लिए 11 ईंट भी देंगे। वहीं दिग्विजय सिंह ने यह दावा किया कि अयोध्या की नींव तो पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी द्वारा रखी जा चुकी है।

इन दोनों नेताओं का विरोध करते हुए जहाँ त्रिशूर सांसद ने इस कार्यक्रम को संघ परिवार द्वारा प्रायोजित धार्मिक राजनैतिक कार्यक्रम बताया और कहा कि अगर हमारे नेताओं को नहीं बुलाया गया तो वह उसके लिए भीख क्यों माँग रहे हैं। वहीं, प्रतापन ने प्रियंका गाँधी का बचाव करते हुए कहा कि राम मंदिर को लेकर प्रियंका गाँधी ने जो रुख अपनाया वो स्वीकार्य है, क्योंकि उन्होंने एकता की बात की है।

वे कहते हैं, “हम निश्चित रूप से जानते हैं कि जहाँ तक ​​संघ परिवार की सत्ता है, वहाँ ऐसी एकता नहीं होगी। अंतत: फर्क इससे नहीं पड़ता कि हमने कितनी असफलताएँ देखीं। फर्क इससे पड़ता है कि हम अस्थायी सफलताओं के लिए झुक गए।”

केरल सीएम पिनरई विजयन ने भी किया विरोध

केरल के मुख्यमंत्री ने भी इन बयानों पर कॉन्ग्रेस पार्टी पर हमला बोला है। उन्होंने बुधवार को कहा कि वह प्रियंका गाँधी के बयानों से अचंभित नहीं हुए। उन्होंने पार्टी पर निशाना साधते हुए सॉफ्ट हिंदुत्व मुद्दे पर पार्टी को घेरा और कहा कि अगर पार्टी कभी सेकुलरिज्म पर तटस्ठ कदम उठाती तो आज ऐसी हालत नहीं होती।

उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दे में कॉन्ग्रेस पार्टी का रुख इतिहास का हिस्सा है, क्योंकि वह मस्जिद नष्ट होने पर “मूकदर्शक” बनी हुई थी।

कॉन्ग्रेस की सहयोगी पार्टी ने भी किया विरोध

केरल में कॉन्ग्रेस की सहयोगी पार्टी इंडिया यूनियन मुस्लिम लीग ने भी प्रियंका गाँधी के बयान पर अपना विरोध दर्ज करवाया है। उन्होंने कहा कि हम राम मंदिर मामले पर प्रियंका गाँधी के बयान के साथ अपनी असहमति जताते हैं। उनका बयान स्थिति से बिलकुल अलग है।

पार्टी ने इसके बाद घटना को तूल नहीं देने का फैसला किया और कहा कि वह इस पर चर्चा दोबारा शुरू करने को लेकर अनिच्छुक है। पार्टी ने कहा, ‘‘IUML ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया था और उसके बाद अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है।”

बता दें कि प्रियंका गाँधी वाड्रा के जिस बयान पर इतना बवाल हुआ है उसमें उन्होंने कहा था कि भगवान राम सभी के हैं और उम्मीद जताई कि आयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए होने जा रहा भूमि पूजन राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और संस्कृति का उत्सव होगा।

उनके प्रपंच का गुंबद था अयोध्या, ढह गया, पर राम मंदिर के उत्साह में मथुरा-काशी का दर्द न दबे

अयोध्या में 5 अगस्त 2020 को भव्य श्रीराम मंदिर का भूमिपूजन हुआ। यह केवल एक मंदिर की नींव नहीं है। यह इस्लामिक आक्रांताओं के उन गुंबदों के ढहने की शुरुआत है जो उन्होंने हथियारों के बल पर गढ़े थे। जिन्हें वामपंथियों ने आजाद भारत में अपने प्रपंचों से सींचा था।

इसका रास्ता बीते साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने खोला था। यदि आपको वह वक्त ध्यान हो तो याद आएगा कि फैसला आने से जो लोग कह रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट जो भी निर्णय देगा वह उन्हें मान्य होगा, वे फैसला आने के चंद मिनट के भीतर ही बदल गए थे। याद करिए सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी से लेकर असदुद्दीन ओवैसी और कमाल फारूकी जैसों के सुर बदल गए। लिबरल गिरोह को फैसला वीएचपी को पुरस्कार देने जैसा लगने लगा था। का लेख

असल में, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान ही दूसरा पक्ष जिरह की बाजी हार गया था। अपने दावे के पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं कर पाए थे। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा भी है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ऐसे सबूत पेश नहीं कर पाया जिससे विवादित जमीन पर उनका हक साबित हो सके। दूसरे पक्ष को यह भी पता था कि पुरातात्विक सबूत​ उनके खिलाफ हैं। चाहे 1822 में सरकार को भेजी गई फैजाबाद अदालत के मुलाजिम हफीजुल्ला की रिपोर्ट हो या उस जमाने के दस्तावेज, सब इस बात की चुगली कर रहे थे कि मंदिर तोड़कर बाबर के सिपहसलार ने मस्जिद बनवाई थी। अंग्रेजों की अदालत में भी वे कानूनी लड़ाई हार थे।

दरअसल, उनके बदले सुर उस साजिश का हिस्सा थे जो वामपंथी इतिहासकारों, तुष्टिकरण की राजनीति के उस्तादों की शह पर अयोध्या मामले को लटकाने के लिए आजादी के बाद से ही रचा जा रहा था। अब यह प्रपंच रचा रहा है कि अयोध्या के उत्साह में बहुसंख्यक उस गुनाह को भूल जाएँ जो मथुरा-काशी में अक्रांताओं ने किया।

कोशिश हो रही है ‘यह तो पहली झॉंकी है, मथुरा-काशी बाकी है’ की आवाज को दबाने की। इसकी शुरुआत उसी दिन हो गई थी जब यह खबर सामने आई कि सुन्नी वक्फ बोर्ड अपने दावे से पीछे हटने को राजी है और इसके लिए उसकी तीन शर्तें हैं। इन शर्तों का लब्बोलुबाब यह था कि मस्जिद के लिए दूसरे मजहब को नई जमीन मिले, बहुसंख्यक हिंदुओं के टैक्स से आए पैसे को सरकार मस्जिदों पर खर्च करें और अयोध्या के अलावा हिंदू अपने किसी भी ऐसे पवित्र स्थल पर दावा न कर सकें जिन्हें आक्रांताओं ने हथियार के जोर पर तबाह किया। कब्जा किया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्हें मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन मिल गई है। वे शोर केवल इसलिए मचा रहे कि बहुसंख्यक समाज मथुरा-काशी में अपना हक न मॉंगे। यानी, मथुरा-काशी पर हिंदुओं का दावा दफन करने की साजिश चुपचाप रची जा रही है। आजाद भारत में मथुरा-काशी को मु​क्त कराने की लड़ाई अयोध्या के साथ ही बनी थी। यह दूसरी बात है कि अयोध्या इस लड़ाई का केंद्र रहा। इसलिए, उनका पहला

आज भले सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अयोध्या पर उनके प्रपंच का गुम्बद ढह गया है। लेकिन बाबरी मस्जिद बनाने के बाद से अयोध्या का करीब 500 साल का इतिहास जोर, छल और प्रपंच का ही गवाह रहा। हथियारों का जोर, जिसके दम पर एक मुगल शासक का प्यादा अपनी वफादारी साबित करने के लिए मंदिर ध्वस्त कर मस्जिद बनाता है। वामपंथी इतिहासकारों का छल, जो आजाद भारत में राम को कल्पना साबित करने पर तुला रहा। कॉन्ग्रेस का धर्मनिरपेक्षता का प्रपंच, जिसके तहत उसके नेता ने कभी राम की मूर्ति हटानी चाही तो कभी बाबरी मस्जिद को फिर से बनाने खम ठोंका। इन सबके बीच, विवादित जमीन पर अस्पताल, संग्रहालय, स्कूल बनाने के विचारों का प्रपंच भी।

अयोध्या विवाद लिबरलों, वामपंथियों और खास मजहब वालों की जिद की नींव पर ही बुलंद था। वरना, सुलह के मौके तो अतीत में कई बार मिले थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी रहे केके मुहम्मद तो कई मौकों पर कहा था कि मजहब के लोगों को अयोध्या, मथुरा और काशी हिंदुओं को सौंप देना चाहिए ताकि हिंदू भी अक्रांताओं द्वारा रौंदे गए अपने शेष 39,997 स्थानों पर दावे से पीछे हट जाएँ।

मुहम्मद वही शख्स हैं, जिन्होंने सबसे पहले बताया था कि अयोध्या में खुदाई से इस बात के सबूत मिले हैं कि मंदिर तोड़ कर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी। अपनी किताब ‘मैं हूॅं भारतीय’ में वे लिखते हैं, “समुदाय के एक व्यक्ति के लिए मक्का-मदीना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण एक हिंदू के लिए अयोध्या है। मक्का-मदीना अन्य धर्मावलंबियों के हाथ पड़े तो… समुदाय वाले इसकी कल्पना नहीं कर सकते। लेकिन, हिंदुओं के बहुसंख्यक होने पर भी उनका पुण्यतीर्थ अन्य धर्मावलंबियों के अधीन हो गया। मजहब के प्रवाचक मुहम्मद नबी से अयोध्या का कोई संबंध नहीं है। सहावी से, खुलफाउराशीदी से संबंध नहीं। ताबिउ, औलिया और सलफुस्सालीहिन से भी कुछ रिश्ता नहीं। मुगल संस्थापक बाबर से मात्र इसका संबंध है। इस तरह की एक मस्जिद के लिए क्यों जिद्दी हो जाते हैं?”

लेकिन, मजहब के लोगों ने उनकी नहीं सुनी। अटल बिहारी वाजपेयी ने तो 1986 में बंबई की एक सार्वजनिक सभा में कहा था कि समुदाय यदि स्वेच्छा से सारा ढाँचा हिंदुओं को सौंप दे तो इस पूरे विवाद का हल निकल जाएगा। लेकिन, उनकी भी नहीं सुनी गई। 1822 में फैजाबाद अदालत का मुलाजिम हफीजुल्ला सरकार को एक रिपोर्ट भेजता है। उसमें कहता है कि राम के जन्मस्थान पर बाबर ने एक मस्जिद बनाई। लेकिन, मजहब के लोग पीछे नहीं हटे।

17 मार्च 1886 को फैजाबाद का जिला जज कर्नल एफईए कैमियर अपने फैसले में लिखता है कि मस्जिद हिंदुओं के पवित्र स्थान पर बनी है। वह 356 साल पुरानी गलती को सुधारने से इनकार कर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देता है। लेकिन, मजहब के लोगों का बड़ा दिल इस फैसले के बाद भी नहीं दिखा। उलटे, 1912 में बहुसंख्यकों की भावनाओं को भड़काने के लिए अयोध्या में गौहत्या की जाती है, जबकि म्यूनिसिपल कानून के तहत 1906 में ही अयोध्या में गौहत्या पर पाबंदी लगा दी गई थी।

2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आता है। विवादित गुंबद राम का जन्मस्थान माना जाता है, फिर भी जमीन के तीन टुकड़े कर दिए जाते हैं। अदालत में पेश भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट से यह प्रमाणित हो गया था कि बाबरी मस्जिद से पहले उस जगह मंदिर था। लेकिन, मजहब के लोग तब भी पीछे नहीं हटे। उन्होंने तो सुप्रीम कोर्ट में भी साक्ष्यों को झुठलाने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि एक खास किस्म की सांप्रदायिकता और कट्टरता को गंगा-जमुनी तहजीब के तले छिपाने की कोशिश तो नहीं हो रही? कहीं, फिर से तो ​आपकी मान्यताओं और विश्वास को छलने की साजिश तो नहीं रची जा रही? इसलिए, सचेत रहें। अयोध्या के उत्साह में इस कदर न डूबें कि मथुरा-काशी याद न रहे। वैसे भी इनकी विश्वसनीयता का कोई भरोसा नहीं है।

जमशेदपुर: हनुमान मंदिर में बजी रामधुन तो झारखंड सरकार ने पुलिस भेज उतरवा लिए लाउडस्पीकर

5 अगस्त के दिन अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हो रहा था। वहीं झारखंड के जमशेदपुर में एक हनुमान मंदिर में रामधुन बजाने पर पुलिस ने लाउडस्पीकर ही उतरवा लिया।

बीते दिन पूरे देश में उल्लास का माहौल था। मंदिर में सजावट की गई थी और घरों में दीपक जलाए गए थे। ऐसा ही नज़ारा झारखंड के जमशेदपुर में भी था, मंदिरों में उत्सव का माहौल था और हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा था। 

शहर के कदमा पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले शास्त्री नगर स्थित हनुमान मंदिर में एक ऐसा ही धार्मिक आयोजन कराया गया था। मंदिर में लगे लाउडस्पीकर के ज़रिये रामधुन बजाई जा रही थी, जिसे देख कर कदमा पुलिस थाने की पुलिस वहाँ पहुँची। इसके बाद मंदिर में लगे सारे लाउडस्पीकर उतरवा लिए। मंदिर समिति और भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस घटना का विरोध किया। 

पुलिस वालों ने इनकी आपत्ति यह कहते हुए अनसुनी कर दी कि इसकी वजह से सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है। घटना पर भाजपा नेता देवेन्द्र सिंह ने कहा इससे यह साबित होता है कि झारखंड सरकार श्रीराम विरोधी है। मंदिर के स्पीकर में कैसेट के ज़रिये रामधुन बजाई जा रही थी। जिसे कदमा पुलिस थाने के थानेदार ने उतरवा लिया। 

इस मुद्दे पर थाने के दरोगा का यह भी कहना था कि सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है। इसलिए रामधुन नहीं बजाई जाएगी। इससे माहौल बिगड़ने की आशंका बढ़ती है। जिस पर भाजपा नेता देवेन्द्र सिंह ने कहा “हम झारखंड सरकार के इस असंवैधानिक कार्रवाई का पुरजोर विरोध करते हैं। झारखंड सरकार की बाबरी नीति और औरंगज़ेब मानसिकता को हम किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।” 

उन्होंने कहा कि इस फैसले की वजह से भारी विरोध का सामना करना पडेगा। अब लोकतांत्रिक तरीके से सरकार की इस कार्रवाई का विरोध होगा। सरकार अपनी इस अ-लोकतांत्रिक कार्रवाई के लिए अब सावधान हो जाए।

हालाँकि, एक स्थानीय समाचार समूह की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस घटना की जानकारी किसी व्यक्ति ने ट्विटर पर साझा कर दी थी। जिस पर संज्ञान लेते हुए डीजीपी एमवी राव ने शहर जमशेदपुर एसएसपी को मामले पर कार्रवाई के आदेश दिए।

साथ ही उनका यह भी कहना था कि अगर ऐसी किसी घटना की वजह से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है तो उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। जिस पुलिसकर्मी ने ऐसे कदम को अंजाम दिया है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।

इस मामले से जुड़ी जानकारी लेने के लिए हमने जमशेदपुर के कदमा थाना से 6572221670 इस नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन कई बार फोन व्यस्त गया और कई बार कॉल जाने पर पर भी फोन नहीं उठा।

थाने से संपर्क न होने के बाद हमने इस थाने के सब इन्स्पेक्टर के नंबर 9431706490 पर संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन यह नंबर शुरू से ही बंद था। हम पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई पर उनका पक्ष जानना चाहते थे लेकिन उनके द्वारा प्रतिक्रिया नहीं मिली।

इससे पहले जमशेदपुर के कदमा में 6 फल विक्रेताओं पर सिर्फ़ इसलिए केस दर्ज कर दिया गया था क्योंकि वे अपनी दुकानों में ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ का बैनर लगा कर और ‘हिन्दू’ लिख कर फल बेच रहे थे। पुलिस कार्रवाई के बाद पूर्व सीएम रघुबर दास पीड़ित फल विक्रेताओं की दुकान पहुॅंचे थे और उन्होंने आश्वासन दिया था कि इन फल विक्रेताओं के खिलाफ कोई केस नहीं दर्ज होने दिया जाएगा।

हर बात पर बक-बक करने वाले भूमिपूजन पर गूँगे, फिर भी कुछ सेलेब्रिटी थे जिन्होंने कहा- जय श्रीराम

राम मंदिर भूमि पूजन का दिन यानी 5 अगस्त विश्व भर के हिंदुओं के लिए किसी दीवाली से कम नहीं था। कई कलाकारों ने इस अवसर पर अपनी कला से भगवान राम की तस्वीरों को बनाया। उन्हें नमन किया।

उधर, अयोध्या में मौजूद रहे पीएम मोदी समेत सभी धर्माचार्य व नेता भी इस अवसर पर बेहद खुश दिखाई दिए। लेकिन भारतीय सेलेब्रिटीज का लगभग पूरा तबका बिलकुल मौन रहा। हर मुद्दे पर राय रखने वालों ने इस अवसर पर कुछ भी टिप्पणी नहीं की। लेकिन, इस बीच फिर भी, कुछ एक थे जिन्होंने इस मौके पर खुल कर अपनी भावनाओं को प्रकट किया।

क्रिकेटर शिखर धवन ने 5 अगस्त को उत्सव का दिन बताया और उन लोगों को शुभकामनाएँ दीं जो इसमें शामिल थे।

अक्षय कुमार ने इस दिन को ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने लिखा, “दीवाली इस साल जल्दी आ गई। वास्तव में यह एक ऐतिहासिक दिन है। जय सिया राम”

वरुण धवन ने भगवान राम और भगवान हनुमान की फोटो डाली। उन्होंने लिखा, “श्री राम जय राम जय जय राम, हरे राम हरे राम हरे राम, हनुमान जी की तरह जपते जाओ, अपनी सारी बाधाएँ दूर करते जाओ।”

निकितिन धीर ने टाइम्स स्क्वायर पर नजर आई राम मंदिर की तस्वीर को शेयर किया और उसके साथ जय श्री राम लिखा।

क्रिकेटर हरभजन सिंह ने सभी भारतीयों को भूमि पूजन की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने लिखा, “समस्त भारतीयों को श्री राम मंदिर के निर्माण के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई। यह बड़े गर्व की बात है, कि इस स्वर्णिम अवसर के हम साक्षी बन रहे हैं। यह सुअवसर हमारे देश भारत में परस्पर प्रेम,मैत्री, करुणा और उच्चतम मानवीय मूल्यों की अभिवृद्धि करने वाला हो, जय श्री राम।”

स्टार प्लस की महाभारत में भीम का रोल करने वाले सौरव गुर्जर ने भी इस अवसर पर शुभकामनाएँ दी। उन्होंने एक वीडियो को शेयर किया और कहा, “राम मंदिर हिंदुओं के विश्वास का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि श्रीराम लंबे समय से टेंट में थे और अब वो दिन आ गया है कि उनके लिए भव्य मंदिर निर्माण की शुरूआत हो। आज हिंदुओं के लिए बहुत महत्तवपूर्ण दिन है।

रणवीर शौरी ने भी अपने ट्वीट पर जय श्रीराम-जय श्रीराम लिखा। साथ ही मुगल आक्रमण, लिबरलों का जिक्र करते हुए कहा कि अब दोबारा घर लौटने का समय आ गया है।

ऐसे ही कार्तिक आर्यन ने 5 अगस्त के मौके पर लिखा, “आज ब्रेकफास्ट में सब्र का फल खाया।”

कंगना रनौत के ऑफिशियल टीम अकॉउंट से लिखा गया, “500 साल में जो नहीं हो पाया वो इस साल हुआ। ये एक दिन की तस्वीर नहीं है। ये कई सदियों का पल है।”

टेनिस प्लेयर सायना नेहवाल ने भी एएनआई की खबर को शेयर करते हुए और बॉलीवुड कलाकार रितेश देशमुख ने हैशटैग के साथ, “जय श्री राम” लिखा।

इस बीच कई सोशल मीडिया यूजर्स ने यह सवाल उठाया कि कई कलाकार ऐसे हैं जो अन्य मुद्दों पर बोलने से नहीं चूकते और त्योहारों पर भी बधाइयाँ देते हैं लेकिन कल के दिन जब पूरे विश्व में हिंदू खुशी मना रहे थे तब सभी कलाकार शांत थे।

बता दें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, राम मंदिर का निर्माण साढ़े 3 साल में पूरा होगा। ट्रस्ट जल्द ही फंड जुटाने के लिए प्रोग्राम चलाएगा। अगर आप मंदिर निर्माण में सहयोग देना चाहते हैं तो इसकी प्रक्रिया को पढ़ सकते हैं।

राम मंदिर भूमिपूजन दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कार्यक्रमों में शुमार, पाकिस्तान को लताड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में अयोध्या में हुए राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम का लाइव टेलीकास्ट हुआ और पूरी दुनिया में भारी संख्या में लोगों ने इसे लाइव देखा। बुधवार (अगस्त 5, 2020) को हुए इस कार्यक्रम को यूके, अमेरिका, कनाडा, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड और नेपाल सहित कई देशों में विभिन्न टीवी चैनलों द्वारा इसका लाइव प्रसारण किया गया। राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम का दूरदर्शन ने लाइव प्रसारण किया था।

दूरदर्शन ने कई कैमरों का प्लेसमेंट कर इस कार्यक्रम का भव्य प्रसारण किया। आउटसाइड ब्रॉडकास्टिंग (OB) और डिजिटल सैटेलाइट न्यूज़ गैदरिंग (DSNG) वैन्स के जरिए प्रसारण को और भव्य बनाया गया। यूट्यूब पर भी करोड़ों लोगों ने इस प्रसारण को देखा। यूएसए, यूके, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जपान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, नेपाल, पकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, फिलीपींस में इसे सबसे ज्यादा लोगों ने देखा।

दूरदर्शन ने बताया कि भारत में 200 चैनलों ने राम मंदिर भूमिपजन कार्यक्रम का प्रसारण किया। इस कार्यक्रम के सिग्नल को ANI के माध्यम से 1200 स्टेशनों को डिस्ट्रीब्यूट किया गया और APTN के माध्यम से विश्व के 450 मीडिया संस्थानों को दिया गया। एशिया पैसिफिक देशों को दीदी न्यूज़ ने इस कार्यक्रम के फुटेज अलग से उपलब्ध कराए। अयोध्या में हुए इस कार्यक्रम का साक्षी पूरा देश बना और पूरे विश्व में इसका प्रसारण हुआ।

इधर पाकिस्तान को भी भारत ने राम मंदिर भूमिपूजन पर उँगली उठाने के लिए कड़ी लताड़ लगाई है। भारत ने पाकिस्तान को दो टूक कहा है कि उसे भारत के आंतरिक मुद्दों पर बोलने से बचना चाहिए और सांप्रदायिकता को शह नहीं देना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जो देश सीमा पर आतंकवाद को बढ़ावा देता है और अपने ही देश के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करते है, उसके द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना अफसोसजनक है, लेकिन ये आश्चर्यजनक नहीं है।

बता दें कि पाकिस्तान ने राम मंदिर भूमिपूजन के विरोध के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी त्रुटिपूर्ण करार दे दिया था। उसने इसे बहुसंख्यकवाद और न्याय पर आस्था की जीत के रूप में प्रदर्शित किया था। पाकिस्तान ने कहा था कि आज के भारत में मजहब और मस्जिदों पर हमले बढ़ रहे हैं। कोरोना की चर्चा करते हुए पाकिस्तान ने कहा था कि भारत में मजहब विशेष को हाशिए पर धकेला जा रहा है। भारत ने साफ कर दिया है कि ये हमारा अंदरूनी मामला है।

उधर पाकिस्‍तान के रेल मंत्री शेख रशीद ने कहा है कि भारत अब धर्मनिरपेक्ष देश नहीं रहा बल्कि राम नगर में तब्‍दील हो गया है। रशीद हमेशा विवादों में रहने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि पुराने समय के धर्मनिरपेक्ष देश अब दुन‍िया भर में खत्‍म हो गए हैं और भारत अब ‘श्रीराम के हिंदुत्‍व’ के देश में तब्दील हो गया है। उन्होंने राम मंदिर भूमिपूजन की तारीख को अनुच्छेद 370 के 1 वर्ष पूरे होने से जोड़ते हुए कहा कि पीएम मोदी ने जानबूझ कर ऐसा किया।

असम: राम मंदिर का जश्न मना रहे बजरंगदल कार्यकर्ताओं से मुस्लिमों ने की हिंसक झड़प, 25 को बनाया बंधक, कर्फ्यू

असम के सोनितपुर जिले में थेलामारा और ढेकियाजुली पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया है और प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमि पूजन समारोह को लेकर दो समुदायों के बीच बुधवार (अगस्त 05, 2020) रात 10 बजे के करीब हुई झड़प में कई लोगों के घायल होने के बाद 5 अगस्त (बुधवार) की रात से ही कर्फ्यू लगा दिया गया है।

बताया जा रहा है कि जब भूमिपूजन की ख़ुशी में स्थानीय बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने नजदीकी शिव मंदिर तक ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते हुए रैली निकाली। इसी रास्ते के बीच एक मुस्लिम समुदाय की बस्ती भी पड़ती है। यहाँ पर मुस्लिम युवकों, जिनमें कथित तौर पर बांग्लादेशी भी शामिल थे, ने उन्हें धार्मिक नारे लगाने और डीजे बजाने से भी रोका।

यही नहीं, पाकिस्तान के समर्थन में भी नारे लगाए गए और बजरंगदल के कार्यकर्ताओं के साथ झड़प शुरू कर दी और उनके वाहनों को क्षतिग्रस्त भी करना शुरू कर दिया। मुस्लिम युवकों ने बजरंगदल के करीब 25 कार्यकर्ताओं को बंधक भी बना दिया और पुलिस अधिकारियों तक को वहाँ पहुँचना पड़ा।

सोनितपुर में इस झड़प में बजरंग दल कार्यकर्ता, विश्व हिन्दू परिषद और राम सेना के तकरीबन 12 घायल हो गए जबकि, कई बाइक और चौपहिया वाहन जल गए हैं। संघर्ष में सोनितपुर के उपायुक्त (डीसी) मानवेंद्र प्रताप सिंह का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट मानवेन्द्र प्रताप ने कहा कि थलपारा और ढेकियाजुली पुलिस थानों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र ‘गोरूडूबा और भारहिंगोरी’ वर्तमान परिस्थितियों के कारण कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

परिस्थितियों को देखते हुए सेना ने जिला प्रशासन के अनुरोध पर बृहस्पतिवार (अगस्त 06, 2020) को अशांत इलाकों में फ्लैग मार्च किया। जिले के थेलामारा और ढेकियाजुली पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया है।

सोनितपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नुमल महता ने कहा कि पहले ही दो व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। कल रात से किसी भी अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं थी और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।

बजरंग दल कार्यकर्ताओं की रैली पर विशेष समुदाय ने जताई आपत्ति

दरअसल, बुधवार को अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन समारोह का जश्न मनाने के लिए बाइक रैली का आयोजन करने वाले बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर हमला करने के बाद असम में तनाव बढ़ गया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, “स्थानीय लोगों ने अपने क्षेत्र में जोर से संगीत बजाने वाले लोगों पर आपत्ति जताई। उन्होंने यह भी पूछा कि जब लोग COVID​​-19 महामारी से लड़ रहे थे, तो रैली का आयोजन क्यों किया गया? इससे बहस शुरू हुई, जो अंततः भयानक हिंसक झड़प में तब्दील हो गई।”

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुँचे सोनितपुर जिले के उपायुक्त मानवेन्द्र प्रताप सिंह पर भी दोनों समूहों द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि झड़प के साम्प्रदायिक टकराव में बदलने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और फिर हवा में गोलीबारी की।

सिंह ने कहा कि वाहनों के जलने पर वहाँ अतिरिक्त पुलिसबल तैनात किया गया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। इस बीच, जिला मजिस्ट्रेट कीर्ति जल्ली ने कहा कि चरमपंथी तत्वों को बांग्लादेश से कछार तक जाने से रोकने और कानून और व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए धारा 144 लगाई गई है।

मौलाना ने दी मंदिर तोड़ने की धमकी, BJP प्रवक्ता ने कहा- यूपी के चौराहों पर सरकारी पोस्टर में चिपक जाओगे

5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ। इसके एक दिन बाद ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के मुखिया ने राम मंदिर पर विवादित बयान दिया। मौलाना साजिद राशिदी ने राम मंदिर को तोड़ने की धमकी दी। राशिदी के मुताबिक़, आने वाले समय में मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनाई जा सकती है। विवादित ज़मीन पर मस्जिद था और वहीं रहेगी। इस बयान पर भाजपा प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी ने राशिदी को जवाब दिया है।

त्रिपाठी ने कहा, “यही भावना रही तो टीवी स्क्रीन से निकल कर कभी भी यूपी के चौराहों पर सरकारी पोस्टरों में चिपक जाओगे।” भाजपा प्रवक्ता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा,

“यह 500 साल पुराना भारत नहीं है। यह मोदी जी का नया भारत है, UP, योगीजी, सीएए प्रदर्शन, पोस्टर, कुर्की, सरकारी वसूली यह सब याद है ना। वही जिससे बचने के लिए गुहार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट तक दौड़े थे। यही भावना रही तो टीवी स्क्रीन से निकल कर कभी भी यूपी के चौराहों पर सरकारी पोस्टरों में चिपक जाओगे।”  

मौलाना साजिद रशिदी ने राम मंदिर पर अपने बयान में कहा था,

“एक मस्जिद हमेशा एक मस्जिद ही रहती है। यह कुछ और बनाने के लिए तोड़ी नहीं जा सकती है। हम ऐसा मानते हैं और भरोसा करते हैं कि वहाँ मस्जिद थी और मस्जिद ही रहेगी। वह मस्जिद एक मंदिर को तोड़ कर नहीं बनाई गई थी, लेकिन अब ऐसा हो सकता है कि कभी मंदिर तोड़ कर उस जगह पर मस्जिद बनाई जाए। प्रधानमंत्री ने अयोध्या के मंदिर निर्माण कार्यक्रम में शामिल होकर संविधान की अवहेलना की है। उस ज़मीन पर बाबरी मस्जिद थी जिसे हिटलर की फ़ौज से मिलते -जुलते लोगों ने तोड़ा था। जो लोग इंसाफ में भरोसा रखते हैं वह किसी न किसी दिन उस मंदिर को मस्जिद में तब्दील कर देंगे।” 

लोकसभा सांसद और ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लीमीन के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर जहर उगला था। ओवैसी ने कहा था कि बाबरी मस्जिद थी और वही रहेगी। बुधवार की सुबह ट्वीट करते हुए ओवैसी ने कहा “बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी इंशाअल्लाह #BabriZindaHai।”

इसके अलावा ओवैसी ने यह भी कहा प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान की शपथ का उल्लंघन किया है। हिंदुत्व की कामयाबी धर्मनिरपेक्षता की हार है। यह सिर्फ और सिर्फ हिंदू राष्ट्र की नींव रखी गई है। जहाँ लोगों ने नमाज़ पढ़ी उसे सर्वोच्च न्यायालय में झूठ बोल कर तबाह किया गया। ओवैसी के मुताबिक़ प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भूमि पूजन को सिम्बल ऑफ़ इंडिया बताया, जबकि देश का सिम्बल कोई भी धार्मिक जगह नहीं हो सकती है। 

4 अगस्त के दिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से भी राम मंदिर मुद्दे पर बयान जारी किया गया था। बोर्ड द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था, “बाबरी हमेशा एक मस्जिद ही रहेगी। हागिया सोफ़िया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अन्यायपूर्ण, दमनकारी और शर्मनाक तरीके से ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया। बहुसंख्यक समाज के तुष्टिकरण वाले इस निर्णय से मस्जिद का दर्जा नहीं बदल सकता। दिल तोड़ने की ज़रूरत नहीं है, हालात हमेशा एक जैसे नहीं रहते हैं।”

भूमिपूजन पर इस्लाम छोड़ 250 लोग बने हिंदू, कहा- मुगलों ने डरा-धमकाकर पूर्वजों को बनाया था मुस्लिम

5 अगस्त 2020 यानी बुधवार को जब अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हो रहा था तो राजस्थान के करीब 50 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म में वापसी की। मामला बाड़मेर जिले पायला कल्ला पंचायत के मोतीसारा गाँव की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन परिवारों के करीब 250 लोगों ने बुधवार को हवन-पूजन किया। पुरुषों ने जनेऊ धारण कर हिंदू धर्म अपनाया। इन लोगों ने कहा है कि ऐसा करने के लिए उन पर किसी ने दबाव नहीं बनाया था।

हिंदू धर्म अपनाने वाले मुस्लिम परिवार के बुजुर्गों का कहना है कि उनके पूर्वज हिंदू थे। उन्हें जैसे ही इतिहास का ज्ञान हुआ इसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह निर्णय स्वेच्छा से लिया गया है।

हिंदू धर्म स्वीकार करने वाले सुभनराम ने मीडिया वालों से बात करते हुए इस बारे में जानकारी दी। सुभनराम ने कहा मुग़ल शासन में मुस्लिमों ने हमारे पूर्वजों (हिंदुओं) को डरा धमका कर उनका धर्म परिवर्तन करा लिया था। 

सुभनराम ने कहा सच यही है कि हम हिंदू धर्म से संबंध रखते थे। शायद इसलिए मुस्लिम हमसे दूरी बना कर रखते हैं। हमने अपने इतिहास के बारे में जानना शुरू किया और तब हमें पता चला कि हम असल में हिंदू हैं। हमें आभास हुआ कि अभी तक हम कितने भ्रम में जी रहे थे। नतीजतन हमें अपने धर्म में वापस लौट आना चाहिए। इतना कुछ पता चलने और समझ आने के बाद हमने अपने धर्म में वापस आने का फैसला लिया।  

इसके बाद उन लोगों के घर पर हवन हुआ और परिवार के लगभग 250 सदस्यों ने हिंदू धर्म अपना लिया। हरजीराम ने बताया कि ये परिवार कंचन ढाढ़ी जाति से संबंध रखते हैं। इन परिवारों के सदस्य पिछले कई सालों से हिंदू धर्म के रीति-रिवाज़ों का पालन कर रहे थे।

विंजाराम के मुताबिक़ परिवार का कोई भी व्यक्ति मुस्लिम रीति रिवाज़ों का पालन कभी नहीं करता था। राम मंदिर के शिलान्यास समारोह में भी हम सभी ने पूजा-पाठ का आयोजन कराया था और हमने पूरी स्वेच्छा से हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया।  

गाँव में लगभग 50 परिवार ढाढ़ी जाति के हैं जिसमें से लगभग एक दर्जन घरों के आस-पास मंदिर बने हुए हैं। इतना ही नहीं परिवारों में ज़्यादातर लोगों के नाम भी हिंदू धर्म से ही प्रेरित हैं। परिवार के बुजुर्गों का दावा है कि औरंगज़ेब के दौर में उनके पूर्वज हिंदू थे। उन्होंने मुग़ल शासक के डर से हिंदू धर्म अपनाया। लेकिन अब उनके परिवार के शिक्षित लोगों को इस बात का ज्ञान हुआ, जिसके बाद उन्होंने वापस हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया। 

कोरोना महामारी के चलते परिवार वालों ने राम मंदिर शिलान्यास के मौके पर सरपंच को सूचित करके खुद हवन करवाया। हरुराम ने बताया कि राम मंदिर के शिलान्यास पर उन्हें बहुत खुशी हुई। इसके लिए उन्होंने अपने घर में दीपक जला कर हवन भी करवाया। 

वहीं गाँव के पूर्व सरपंच प्रभुराम कलबी ने कहा कि ढाढ़ी जाति के सदस्यों पर ऐसा करने के लिए किसी ने दबाव नहीं बनाया। उन्होंने यह सब अपनी मर्ज़ी से किया है। संविधान भी यही कहता है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ धर्म अपना सकता है और इन परिवारों ने वही किया। उनके इस निर्णय से किसी को कोई आपत्ति नहीं है। गाँव का हर व्यक्ति उनके इस फैसले का सम्मान करता है।