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लेबनान की राजधानी बेरूत में जोरदार धमाका: 100 से ज्यादा लोगों की मौत, 4000 लोग घायल, 2 लाख से ज्यादा लोग बेघर

लेबनान की राजधानी बेरूत में कल (4 अगस्त,2020) अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। लोग कुछ समझते इससे पहले 15 मिनट के अंदर इस धमाके ने जबरदस्त भयानक रूप ले लिया। यह जोरदार धमाका किसी भूकंप से कम नहीं था। धमाके में कम से कम 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। वहीं, कुल करीब 4000 लोगों के घायल होने की भी खबर है। हालाँकि, धमाके की भयावहता देखकर लगता है कि मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है।

लेबनान के राष्ट्रपति ने बेरूत में दो हफ्ते के लिए इमरजेंसी लगा दिया है। राष्ट्रपति ने बुधवार को कैबिनेट की आपात बैठक भी बुलाई है। लेबनान के प्रधानमंत्री हसन दियाब ने बताया है कि यह विस्फोट बंदरगाह पर 2700 टन अमोनियम नाइट्रेट से हुआ है।

बेरूत के शहर के गवर्नर मारवान अबाउद ने कहा कि 200,000 से 250,000 लोगों ने अपने घर खो दिए हैं और यहाँ की ऑथोरिटी उन्हें भोजन, पानी और आश्रय प्रदान करने का काम कर रही हैं। उन्होंने आगे जानकारी दी कि, इस धमाके में बेरूत फायर ब्रिगेड के 10 सदस्यों की भी मौत हुई है। इसके अलावा 3 से 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

बता दें, धमाका इतना तेज था कि आस-पास सब तरफ आग लग गई, कारें पलट गईं और लोगों के घरों में खिड़की-दरवाजों के शीशे टूट गए। लेबनान की न्यूज एजेंसी एनएनए और सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि यह विस्फोट शहर के बंदरगाह क्षेत्र में हुआ। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक मीडिया सूत्र ने कहा कि इस क्षेत्र में केमिकल रखे गए थे। सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा साझा वीडियो फुटेज में बंदरगाह से धुआं निकलता दिख रहा, जिसके बाद एक बड़ा धमाका हुआ।

वहीं लेबनान के कस्टम विभाग ने घटना के लिए सीधे तौर पर पोर्ट चीफ को जिम्मेदार ठहराया। कस्टम हेड बादरी दहेर ने कहा- मेरा डिपार्टमेंट अमोनियम नाइट्रेट रखने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। धमाका इससे ही हुआ। इस घटना के लिए पोर्ट चीफ हसन कोरेटेम जिम्मेदार हैं। इस बारे में पोर्ट चीफ ने अब तक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेरूत में हुए धमाके पर दुख जताया। बुधवार सुबह एक ट्वीट में मोदी ने कहा- बेरूत में हुए धमाके की खबर सुनकर दुखी हूँ। कई लोगों ने जान गँवाई और प्रॉपर्टी का भी नुकसान हुआ। ब्लास्ट में मारे गए और घायल हुए लोगों के प्रति हमारी सम्वेदनाएँ हैं।

बेरूत में धमाके के बाद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। वहीं, भारतीय एंबेसी ने बेरूत में फँसे लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। बेरूत में हुए धमाकों को लेकर भारतीय दूतावास की तरफ से कहा गया है कि सभी संयम बनाए रखें। साथ ही अगर किसी भी भारतीय को मदद की जरूरत हो तो वो दूतावास के हेल्पलाइन नंबर 01741270, 01735922, 01738478 पर संपर्क कर सकते हैं।

30 साल की मेहनत के बाद संकल्पपूर्ति का आनंद मिला, हमें मन की अयोध्या को सजाना होगा: संघ प्रमुख भागवत

500 साल बाद आज रामलला के लिए दोबारा भव्य मंदिर बनने जा रहा है। इस अवसर पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ एक मंच पर मौजूद रहे। प्रदेश मुख्यमंत्री ने जहाँ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी और संघ प्रमुख समेत सभी धर्माचार्यों व संतगणों का आभार व्यक्त किया। वहीं संघ प्रमुख ने भी इस अवसर पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने उस संकल्प को याद किया जिसका आह्वान उन्होंने 30 वर्ष पहले किया था। इसके अलावा उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी, अशोक सिंघल और रामचंद्रदास को भी याद किया।

भूमि पूजन के इस शुभ अवसर पर कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि उनके लिए यह बहुत प्रकार से आनंद का क्षण है। उन्होंने कुछ समय पहले एक संकल्प लिया था। उस वक्त संघ के संचालक बाला साहेब देवरस ने उन्हें इस दिशा में कोई कदम आगे बढ़ाने से पहले याद दिलाया था कि इस काम में बहुत साल लगेंगे।

संघ प्रमुख कहते हैं कि बाला साहेब देवरस ने उन्हें पहले ही कहा था कि इस काम के लिए करीब 20-30 साल लगकर मेहनत करनी पड़ेगी, तब जाकर ये काम होगा। मोहन भागवत कहते हैं कि आज 20-30 साल की मेहनत के बाद 30वें साल के आरंभ में उन्हें उनके संकल्पपूर्ति का आनंद मिला।

उन्होंने अपने संबोधन में उन लोगों के प्रयासों और बलिदानों का प्रमुखता से जिक्र किया और कहा कि वह लोग अब हमारे बीच प्रत्यक्ष रूप से मौजूद नहीं है। लेकिन आज कार्यक्रम में वह सभी सूक्ष्म रूप में उपस्थित हैं। उन्होंने उन लोगों को भी याद किया जो जीवित तो हैं लेकिन कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। 

संघ प्रमुख ने रथ यात्रा निकालकर राम मंदिर के आंदोलन को नया रूप देने वाले लाल कृष्ण आडवाणी को याद किया और कहा कि आज वह भी अपने घर में बैठकर यह देख रहे हैं। ये सब परिस्थिति है कि लोग आना चाहते हैं मगर परिस्थितियाँ ऐसी नहीं हैं कि उन्हें बुलाया जा सके।

उन्होंने इस मौके पर आनंदित लोगों की खुशी को सदियों से अधूरी आस को पूरी होने का नतीजा बताया। साथ ही भारत को आत्मनिर्भर बनाने का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा, भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिस आत्मविश्वास और आत्मभान की आवश्यकता थी उसका सगुण अधिष्ठान का शुभांरभ आज हो रहा है।

उन्होंने कहा कि संसार में अभी मंथन चल रहा है और ऐसे समय में भारत ही उसका नेतृत्व करेगा। भारत में यह क्षमता है। भागवत ने कहा कि सारा संसार अंतर्मुख हो गया है। सारा संसार विचार कर रहा है कि कहाँ गलती हो गई। हम उसका हल निकालेंगे, हम उसपर विचार करेंगे, हम शुरू करेंगे, तो हो जाएगा। आज इसके लिए संकल्प करने का दिन है।

भागवत ने श्रीराम के प्रति लोगों की आस्था पर कहा कि सभी भारतवासियों को उनसे प्रेरणा मिलती है कोई अपवाद नहीं, सबके राम हैं सब राम के हैं, इसलिए मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए सबमें दायित्व बाँटे गए हैं और जिम्मेदार लोग अपना काम कर रहे हैं लेकिन इसके साथ ही हमें भी अपना दायित्व पूरा करना है।

भागवत ने कहा, “जिनका जो काम है वो करेंगे, अब हमको अयोध्या को सजाना-सँवारना है। संपूर्ण विश्व को सुख शांति देने वाले भारत को हम खड़ा कर सकें, इसलिए हमें योद्धा बनना है। इस मंदिर के पूर्ण होने से पहले हमारा मन मंदिर बनकर तैयार रहना चाहिए, इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।” भागवत बोले कि हमारे हृदय में भी राम का बसेरा होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम सबको अपने मन की अयोध्या को सजाना है। प्रभु राम जिस धर्म के विग्रह माने जाते हैं, वो सबकी उन्नति करने वाला, सबको अपना मानने वाला धर्म है, हमें अपने मन में भी ऐसी ही अयोध्या बनानी है। मंदिर बनने से पहले मन का मंदिर सज जाना चाहिए। हमारा हृदय भी राम का बसेरा होना चाहिए। हृदय से सब प्रकार के दोषों को मिटाकर बस देशवासियों को ही नहीं, पूरे विश्व को अपनाने, एक साथ लाने का प्रतीक है यह मंदिर, इसकी स्थापना बहुत ही सक्षम हाथों से हुई है।” 

अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने अशोक सिंघल को याद किया। भागवत ने कहा, “आज अगर अशोक जी होते तो कितना अच्छा होता। रामचंद्र दास जी होते तो और अच्छा होता, लेकिन मेरा विश्वास है शरीर से जो नहीं हैं वह सूक्ष्म रूप से आनंद उठा रहे होंगे।”

उन्होंने अपनी बात रखते हुए संबोधन में भारतीयों की मिलनसार प्रवृति और वसुदेव कुटुंब के मंत्र को दोहराया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में अब मंदिर बन कर रहेगा। वे बोले, “हम वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास रखने वाले लोग हैं। यह एक नए भारत की शुरुआत है।”

मैं समस्त भारतवासियों और चर-अचर जीवों का… शांति एवं कल्याण के लिए पूजन करूँगा: PM मोदी का संकल्प

अयोध्या में राम मंदिर के लिए हुए भूमिपूजन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपस्थित अतिथियों को संबोधित करते हुए जो भी कहा, वो पूरे मीडिया है। लेकिन, साथ ही उन्होंने पूजा से पहले जो संकल्प लिया, उसे भी आपको जानने की जरूरत है। यजमान के रूप में बैठे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के दौरान लिए गए संकल्प के रूप में क्या कुछ कहा, वो नीचे उनके ही शब्दों में पढ़ें:

“आज …….. गोत्र में उत्पन्न मैं नरेन्द्र दामोदर दास मोदी नाम वाला यजमान अपने राष्ट्र का प्रतिनिधि, समस्त चर अचर जीवों का, भारत के वासियों का, विश्व के समस्त प्राणियों का, सकल अशुभ एवं दुःखों के नाश के लिए सभी की सुख शान्ति एवं कल्याण के लिए अनन्त ब्रह्माण्ड के नायक भगवान् श्रीसीताराम का अनुग्रह प्राप्त करने के लिए, बनाए जाने वाले इस नूतन मन्दिर की आधार शिला का पूजन सभी के साथ करूँगा। इसी पूजन के अन्तर्गत गणपति का स्मरण करते हुए भूमि आदि पूजन को यथा क्रम मैं करूँगा।”

अयोध्या राम मंदिर पूजन एवं संकल्प के बाद पुरोहित ने पीएम मोदी से ‘दक्षिणा’ की माँग करते हुए कहा कि किसी भी यज्ञ में दक्षिणा महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि दक्षिणा तो आज इतनी दे दी गई कि आज सैकड़ों करोड़ आशीर्वाद प्राप्त हो रहे हैं। भारत तो हमारा ही है, उससे ऊपर और कुछ दें। उन्होंने कहा, “कुछ समस्याएँ हैं, उन समस्याओं को दूर करने का संकल्प तो लिए हुए हैं, 5 अगस्त में कुछ और जुड़ जाए तो भगवान की कृपा होगी।”

वहीं अपने सम्बोधन में पीएम मोदी ने कहा कि जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है, जिनकी तपस्या राममंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है, को उन सबको नमन करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। उन्होंने कहा कि आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं।

विधायकों पर निगरानी के लिए CM गहलोत ने लगाए 700 पुलिसकर्मी, CID: अकेले में फोन पर बात करने पर प्रतिबंध

इधर पूरा देश राम मंदिर भूमिपूजन के जोश में डूबा हुआ है, उधर राजस्थान में अशोक गहलोत अलग ही खेल में लगे हुए हैं। फ़िलहाल तो वो अपने विधायकों को लेकर जैसलमेर के होटलों में भागे हुए हैं। अब खबर आई है कि सभी विधायकों को वहाँ तनोट मातेश्वरी मंदिर में ले जाया गया है। वहीं 3 विधायकों के सचिन पायलट से संपर्क में होने की सूचना के बाद विधायकों के अकेले में फोन पर बात करने को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।

उक्त मंदिर 1200 वर्ष पुराना है। 80-90 विधायकों को वहाँ लेकर जाया जा रहा है। हालाँकि, कोरोना काल में मंदिर को बंद रखा गया था लेकिन मुख्यमंत्री की इस योजना के बाद मंदिर को खुलवाया गया है। सचिन पायलट के 3 करीबी विधायकों ने कहा है कि वो सीएम के तानाशाही रवैये से परेशान हैं और वो अपने सम्मान के लिए जरूर लड़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वो अशोक गहलोत के नेतृत्व में काम नहीं कर सकते।

खबरों के अनुसार, गहलोत सरकार को सीआईडी ने सूचित किया है कि उनके खेमे के 3 विधायकों से सचिन पायलट गुट ने संपर्क साधा है। उन विधायकों के परिजनों के माध्यम से संपर्क साधने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद होटल में पहरेदारी और बढ़ा दी गई है। साथ ही विधायक अब फोन पर अकेले बात भी नहीं कर सकते। साथ ही सीआईडी में विश्वस्त कर्मियों की टीम को भी लगाया गया है, जो जैसलमेर जाएगी।

होटल के घेरे में 700 पुलिस अधिकारियों के अलावा अब सीआईडी को भी तैनात किया जाएगा। विधायकों को कह दिया गया है कि अगर उन्हें फोन पर किसी से बात करनी भी है तो वो अपने साथियों के बीच ही ऐसा करें, कहीं अकेले में जाकर नहीं। होटल के बाहर बैरिकेडिंग भी की गई है। कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला भी जैसलमेर में ही जाकर बैठे हुए हैं और बागियों को भाजपा से नाता तोड़ने की सलाह दे रहे हैं।

सचिन पायलट के करीबी विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने कहा कि पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए पायलट ने पंचायत से लेकर जिला स्तर तक काफी मेहनत की, लेकिन उन्हें ही सरकार में अलग-थलग करने का प्रयास होता रहा जिससे कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता आहत हुए। विधायक इंद्राज सिंह ने आरोप लगाया कि गहलोत ने किसानों की कर्जमाफी और युवाओं के लिए रोजगार जैसे मुद्दे उठाने नहीं दिया।

इधर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के बड़े भाई और उर्वरक घोटाले में आरोपित अग्रसेन गहलोत पर ‘स्मगलिंग सिंडिकेट का भी हिस्सा होने का आरोप लगाया है। डीआरआई और कस्टम अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में यह आरोप लगाए गए थे। कस्टम ऑथोरिटी द्वारा जुलाई की शुरुआत में अग्रसेन गहलोत से जुड़े मामले की शिकायत दर्ज की गई थी।

सदियों से ईद की मुबारकबाद लेने वाले क्या श्रीराम मंदिर के जश्न में आपके साथ हैं?

सदियों के इन्तजार और संघर्ष के बाद आखिरकार अगस्त 05, 2020 का दिन हिन्दुओं की आस्था और उनके सांस्कृतिक गौरव के लिए ऐतिहासिक दिन है। मुझे बचपन से ही याद है जब दादाजी दूरदर्शन पर समाचार देखते हुए हमें बताते थे कि अयोध्या में कुछ हो रहा है, आडवाणी जी रथयात्रा कर रहे हैं।

तब हम बस यही सवाल पूछा करते थे कि भारत में श्रीराम जन्मभूमि पर उनके मंदिर के लिए जनजागरण की आवश्यकता क्या है? यहाँ तो हर किसी की आत्मप्रेरणा को यही कहना चाहिए कि वहाँ श्रीराम मंदिर बने, जहाँ भारतीय हिन्दू राम मंदिर बनाना चाहते हैं।

समय के साथ समझ बढ़ती गई तो यह भी देखने को मिला कि 2002 में श्रद्धालुओं से भरी साबरमती ट्रेन को कुछ कट्टरपंथियों ने जला दिया और इसे मुस्लिमों पर हुआ अत्याचार साबित कर दिया गया।

हम संचार और मीडिया की भाषा में उलझते हुए फिर भी सद्भाव प्रकट करते गए कि मुस्लिमों के साथ कुछ हुआ है, जो नहीं होना चाहिए था। धीरे-धीरे यह भाषा भारत का भविष्य बनते चली गई और देखते ही देखते हिन्दुओं को अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक साबित कर दिया गया।

हिन्दुओं को जब-जब पीड़ित किया गया, उनके साथ संवेदनाओं की कमी देखी गई। उनके प्रतीकों को लज्जित किया जाता रहा और उनकी संस्कृति का अपमान किया गया। यह कभी योग तो कभी आयुर्वेद, कभी गाय और कभी श्रीराम को अपमानित कर खूब होता रहा।

अब सवाल यह था कि यदि भारत का हिन्दू अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक है, तो फिर वह अपने लिए किस देश जाकर न्याय माँगे? उसके संविधान में धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता का जिक्र तो कर दिया गया था, लेकिन उसे सार्वजानिक जगहों पर तिलक लगाने के कारण उपहास का पात्र बनना पड़ा। उसके यज्ञोपवित पर भद्दे चुटकुले उसे उसी के देश में रहते टीवी से लेकर सड़कों तक पर सुनाई देने लगे।

इसमें सबसे बुरा दौर तब आया जब धूर्त कम्युनिस्टों ने कॉन्ग्रेस की शरण में मुस्लिम कट्टरपंथियों के सहारे युवाओं की एक नई पौध तैयार की, जो अपने सहपाठियों और सहकर्मियों को इस बात के लिए लज्जित करते कि वह ‘रिग्रेसिव’ है क्योंकि वह हिन्दू है और उसके माथे पर तिलक लगा है।

हालाँकि, हिन्दुओं का उपहास करने वाले यही लोग मुस्लिमों को उनके ईद और अन्य त्योहारों पर उन्हें जमकर बधाई और मुबारकबाद देते। कहते कि आज उन्होंने अपने मुस्लिम मित्र के घर सेवईंयाँ खाई।

फिर सोशल मीडिया पर नव-विचारकों का उद्भव हुआ और यह बातें कुछ ‘उदारवादी’ नजर आने वाले ‘स्तम्भकार’ जमकर लिखने लगे। वो दीपावली के दिन रंगीन लिबास में अपनी तस्वीरें तो शेयर करते देखे गए लेकिन किसी को पूरा मुँह खोलकर बधाई नहीं देते थे।

यह उदारवादी जन ईद और मुस्लिमों के हर पर्व पर रात के 12 बजने का इन्तजार करते और सहिष्णुता में डूबे हुए भाई-चारे वाले लेख लिखते। MNC और कॉरपोरेट ऑफिस में यह बहुत लोकप्रिय चलन देखा जाता है।

हम अपने मुस्लिम दोस्तों को उनके हर त्यौहार की बधाई देते लेकिन वो हमारे हर त्यौहार पर किसी रूठी हुई महबूबा की तरह खामोश नजर आए। तब हमें यह यकीन होना शुरू हुआ कि श्रीराम ‘भारत’ के विचार में तो हैं, लेकिन यह जनमानस की मूलभावना का हिस्सा अभी तक भी नहीं हैं।

हिन्दुओं ने खुद को हर बार अपने ही देश में रहकर उपेक्षित महसूस किया है और उन्हें ऐसा महसूस करने के लिए मजबूर भी किया जाता रहा। भारत के मन को समझने में भारत के नागरिकों ने बड़ी भूल की। खासकर उन लोगों ने, जो मुस्लिमों के त्योहारों पर खूब उत्साहित नजर आते रहे, उनके साथ बीफ पार्टी में उनके सहयोगी बने और आज जब सदियों से विवादित बताए गए हिन्दुओं की आस्था के सबसे बड़े प्रतीक के जश्न का दिन आया है, तब इस उदारवादी बिरादरी में मातम का माहौल है।

भारत के सेक्युलरिज्म के मुखौटे को नंगा करने के लिए यही तथ्य काफी है कि एकमात्र श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन पर उच्चतम न्यायलय के फैसले के बावजूद मुस्लिम लॉ बोर्ड, और मुस्लिमों के तथाकथित नायक ओवैसी बंधुओं ने इस फैसले को ही मानने से मना करते हुए कहा है कि यह बाबरी मस्जिद ही था, है और रहेगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तो भूमिपूजन के ठीक पहले यह धमकी तक दे डाली है कि परिस्थितियाँ हमेशा यही नहीं रहेंगी। यह वही जुबान है, जिसे लेकर गजनवी भारत आया था, यह वही जुबान है, जिन मुस्लिम आक्रान्ताओं ने हिन्दुओं के मंदिरों को तहस-नहस कर, उन्हें लूटकर खुद को बुतशिकन की उपाधि देने वालों ने इस्तेमाल की थी।

इस संदेश का सिर्फ एक ही अर्थ है; इस देश में मुस्लिम सिर्फ तभी तक सेक्युलर हैं, जब तक उनके हितों का समर्थन कॉन्ग्रेस जैसी सत्ताओं के संरक्षण में होता रहे। और जिस दिन भारत का हिन्दू अपने अधिकारों की माँग करेगा, उस दिन मुस्लिम उन्हें याद दिलाएगा कि इतिहास में बाबर और औरंगजेब ने क्या किया था।

जिसे आप सेक्युलर कहते रहे, वहाँ 7वीं सदी से लेकर आज तक कुछ भी नहीं बदला है। जबकि हिन्दू हर बात पर उदार रहने के बावजूद भी कट्टर और ‘हेट मोंगर’ कहलाए। इतिहास गवाह है कि मुस्लिम हमेशा सिर्फ एक मुस्लिम रहा है, उसके शब्दकोश में कट्टर शब्द ही नहीं है क्योंकि मुस्लिम मजहबी कट्टरता का ही पर्याय है। जबकि, एक हिन्दू, हिन्दू होने के अलावा सब कुछ रहा।

वह सेक्युलर रहा, वह नास्तिक रहा, वह लज्जित हिन्दू रहा, उपेक्षित हिन्दू रहा और अब वह सेक्युलरिज्म का धोखा खाया हुआ हिन्दू है। आज हमारे उत्सव का समय है, इसे जाने नहीं दिया जाना चाहिए। आज खुद को श्रीराम से अलग बताने का समय नहीं है। आज आत्मविश्लेषण करते हुए यह सवाल खुद से पूछने का समय है कि आज आपकी ख़ुशी के इस अवसर में आपके कितने मुस्लिम और सेक्युलर मित्र आपके साथ खुश हैं?

‘लिंच करके तुमसे जय श्री राम बुलवाएगा, तब यह ट्वीट भी नहीं बचाएगा’ – मो. कैफ ने किया राम मंदिर का समर्थन, पड़ी गाली

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आज (अगस्त 5, 2020) भूमि पूजन पूरा हो गया है। भूमि पूजन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य पूजा की और इस ऐतिहासिक कार्य की आज अयोध्या साक्षी बनी है। करोड़ों रामभक्तों का सालों का इंतजार आज पूरा हो गया, जब राम मंदिर की आधारशिला रख दी गई और विधिवत रूप से राम मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है।

सभी रामभक्तों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस पर सेलिब्रिटीज ने भी प्रतिक्रिया जाहिर की। इसी कड़ी में पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने भी एक ट्वीट किया है। कैफ का यह ट्वीट ना केवल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है बल्कि हर कोई इसकी तारीफ भी कर रहा है। मगर कट्टरपंथियों को मोहम्मद कैफ का ये ट्वीट पसंद नहीं आ रहा है।

बता दें कि मोहम्मद कैफ ने भूमि पूजन के बाद ट्वीट करते हुए लिखा, “गंगा-जमुना संस्कृति वाले शहर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में बड़े होते हुए, मुझे करुणा, क्षमा, सम्मान और प्रतिष्ठा की कहानी रामलीला देखना काफी पसंद था। राम ने सभी में अच्छाई देखी और हमारे आचरण में उनकी विरासत को प्रतिबिंबित करना चाहिए। इससे नफरत के एजेंट प्यार और एकता के रास्ते में नहीं आ सकते।”

कैफ को लेकर नफरत का असर ऊपर के ट्वीट में देखिए। उन्हें यूपी का बिना इज्जत वाला मजहबी बता दिया गया। और तो और, शब्दों के साथ खेलते हुए उनके मरने की कामना भी कर ली गई।

एक ट्विटर यूजर ने इस पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा, “मजहब के सरकारी लोग गुजरात दंगों को भूल जाते हैं। याद है जिन्ना, वो सही थे। वह हमसे बेहतर हिंदुओं को जानते थे। पुरानी गंगा जमुनी संस्कृति सिर्फ मिथक है, यह संस्कृति सबसे खराब संस्कृति में से एक है, जो सबसे खराब संस्कृति है।”

इम्तियाज नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “चापलूसी ने इस मुकाम पर पहुँचा दिया कि चंद सिक्के पर जमीर बेचने लगे। खैर तुम अपना धर्मोपदेश अपने पास रखो। सबको तुम्हारी औकात पता है।”

एक ने लिखा, “लंबे समय से तू BCCI में अच्छी नौकरी के लिए बीजेपी और मोदी को चमकाने में लगा है, लेकिन तुम्हें ये नहीं मिलेगा भाई।”

एक यूजर ने लिखा कि कितने पैसे मिले हैं दलाली के।

एक अन्य यूजर ने लिखा, “अभी कोई आएगा और लिंच करके तुमसे जय श्री राम बुलवाएगा। तब फोन खोल कर ये ट्वीट भी दिखलाओ तो भी कुछ नहीं होगा।”

वहीं एक यूजर ने उनके ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “शर्म आनी चाहिए।”

गौरतलब है कि पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ अपने मजहब के लोगों के निशाने पर आ ही जाते हैं। पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योग करती तस्वीर शेयर करने पर उन्हें गालियाँ पड़ी थी।

इससे पहले प्रधानमंत्री के आह्वान पर कोरोना के अंधकार को मिटाकर एक नई सुबह की आस में कैफ ने अपनी पत्नी के साथ 9 मिनट के लिए मोमबत्ती जलाया। जिसके बाद कट्टरपंथी  कैफ को मजहब का पाठ पढ़ाने लगे और ऐसा करने के लिए उन्हें दुत्कारने लगे। उनके लिए अपशब्द बोलने लगे।

आप भगवान राम की शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट हो गईं… क्या कुछ नहीं हुआ: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के दौरान “सियावर रामचंद्र की जय” से शुरू किया सम्बोधन। पीएम मोदी ने कहा कि बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है, जिनकी तपस्या राममंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है, को उन सबको नमन करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। उन्होंने कहा कि आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में उपस्थित अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि यहाँ आने से पहले उन्होंने हनुमानगढ़ी का दर्शन किया। उन्होंने कहा कि राम के सब काम हनुमान ही तो करते हैं, राम के आदर्शों की कलियुग में रक्षा करने की जिम्मेदारी भी हनुमान जी की ही हैं और हनुमान जी के आशीर्वाद से श्री राममंदिर भूमिपूजन का ये आयोजन शुरू हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि श्रीराम का मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा।

पीएम ने कहा कि अयोध्या का मंदिर हमारी शाश्वत आस्था और हमारी राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा, और ये मंदिर करोड़ों-करोड़ लोगों की सामूहिक संकल्प शक्ति का भी प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि इस मंदिर के बनने के बाद अयोध्या की सिर्फ भव्यता ही नहीं बढ़ेगी, इस क्षेत्र का पूरा अर्थतंत्र भी बदल जाएगा। यहाँ हर क्षेत्र में नए अवसर बनेंगे, हर क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे। पीएम ने कहा कि जब पूरी दुनिया से लोग यहाँ आएँगे, पूरी दुनिया प्रभु राम और माता जानकी का दर्शन करने आएगी।

बकौल पीएम मोदी, ये महोत्सव विश्वास को विद्यमान से, नर को नारायण से, लोक को आस्था से, वर्तमान को अतीत से और स्वं को संस्कार से जोड़ने का महोत्सव है। नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में कहा कि आज का ये दिन करोड़ों रामभक्तों के संकल्प की सत्यता का प्रमाण है। आज का ये दिन सत्य, अहिंसा, आस्था और बलिदान को न्यायप्रिय भारत की एक अनुपम भेंट है। उन्होंने कहा कि राममंदिर के निर्माण की ये प्रक्रिया, राष्ट्र को जोड़ने का उपक्रम है। पीएम ने कहा:

“कोरोना से बनी स्थितियों के कारण भूमिपूजन का ये कार्यक्रम अनेक मर्यादाओं के बीच हो रहा है। श्रीराम के काम में मर्यादा का जैसा उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए, देश ने वैसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसी मर्यादा का अनुभव हमने तब भी किया था, जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। हमने तब भी देखा था कि कैसे सभी देशवासियों ने शांति के साथ, सभी की भावनाओं का ध्यान रखते हुए व्यवहार किया था। आज भी हम हर तरफ वही मर्यादा देख रहे हैं। जिस तरह दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों, समाज के हर वर्ग ने आजादी की लड़ाई में गाँधी जी को सहयोग दिया, उसी तरह आज देशभर के लोगों के सहयोग से राम मंदिर निर्माण का ये पुण्य-कार्य प्रारंभ हुआ है। जैसे पत्थरों पर श्रीराम लिखकर रामसेतु बनाया गया, वैसे ही घर-घर से, गाँव-गाँव से श्रद्धापूर्वक पूजी शिलाएँ, यहाँ ऊर्जा का स्रोत बन गई हैं। देश भर के धामों और मंदिरों से लाई गई मिट्टी और नदियों का जल, वहाँ के लोगों, वहाँ की संस्कृति और वहाँ की भावनाएँ, आज यहाँ की शक्ति बन गई हैं।”

पीएम मोदी ने अयोध्या राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम में कहा कि श्री रामचंद्र को तेज में सूर्य के समान, क्षमा में पृथ्वी के तुल्य, बुद्धि में बृहस्पति के सदृश्य, और यश में इंद्र के समान माना गया है। श्रीराम का चरित्र सबसे अधिक जिस केंद्र बिंदु पर घूमता है, वो है सत्य पर अडिग रहना। इसीलिए श्रीराम संपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि उनका अद्भुत व्यक्तित्व, उनकी वीरता, उनकी उदारता उनकी सत्यनिष्ठा, उनकी निर्भीकता, उनका धैर्य, उनकी दृढ़ता, उनकी दार्शनिक दृष्टि युगों-युगों तक प्रेरित करते रहेंगे।

बकौल पीएम मोदी, राम प्रजा से एक समान प्रेम करते हैं लेकिन गरीबों और दीन-दुखियों पर उनकी विशेष कृपा रहती है। जीवन का ऐसा कोई पहलू नहीं है, जहाँ हमारे राम प्रेरणा न देते हों। भारत की ऐसी कोई भावना नहीं है, जिसमें प्रभु राम झलकते न हों। भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं! भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं। उन्होंने कहा कि हजारों साल पहले वाल्मीकि की रामायण में जो राम प्राचीन भारत का पथ-प्रदर्शन कर रहे थे।

नरेंद्र मोदी ने आयोध्य में आगे कहा कि जो राम मध्ययुग में तुलसी, कबीर और नानक के जरिए भारत को बल दे रहे थे, वही राम आज़ादी की लड़ाई के समय बापू के भजनों में अहिंसा और सत्याग्रह की शक्ति बनकर मौजूद थे। आज भी भारत के बाहर दर्जनों ऐसे देश हैं, जहाँ की भाषा में रामकथा आज भी प्रचलित है। उन्होंने विश्वास जताया कि आज इन देशों में भी करोड़ों लोगों को राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू होने से बहुत सुखद अनुभूति हो रही होगी।

पीएम मोदी ने सन्देश दिया कि हमें ये सुनिश्चित करना है कि भगवान श्रीराम का संदेश, हमारी हजारों सालों की परंपरा का संदेश, कैसे पूरे विश्व तक निरंतर पहुँचे। कैसे हमारे ज्ञान, हमारी जीवन-दृष्टि से विश्व परिचित हो, ये हम सबकी, हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ियों की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि श्रीराम के नाम की तरह ही अयोध्या में बनने वाला ये भव्य राममंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का द्योतक होगा। यहाँ निर्मित होने वाला राममंदिर अनंतकाल तक पूरी मानवता को प्रेरणा देगा।

PM मोदी ने लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकाला, 5 शताब्दी के बाद संकल्प पूरा हुआ: योगी आदित्यनाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की आधारशिला रख दी है। भूमि पूजन की सभी प्रक्रिया करने के बाद प्रधानमंत्री ने शुभ मुहूर्त के अनुसार पीएम मोदी ने ठीक 12 बजकर 44 मिनट पर शिला रखी।

इस दौरान उनके साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे।

भूमिपूजन कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को संबोधित किया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 5 शताब्दी के बाद आखिरकार यह संकल्प पूरा हो गया है और प्रधानमंत्री मोदी जी ने लोकतांत्रिक तरीके से इसका समाधान निकाला।

योगी आदित्यनाथ ने अपने सम्बोधन में कहा कि 5 सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है। देश में लोकतांत्रिक तरीकों के साथ ही मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इस घड़ी की प्रतीक्षा में कई पीढ़ियाँ गुजर चुकी हैं।

सीएम योगी ने कहा – “हमने तीन साल पहले अयोध्या में दीपोत्सव का कार्यक्रम शुरू किया था, आज उसकी सिद्धी हो रही है।”

सीएम आदित्यनाथ ने कहा, “हम सब गौरवान्वित हैं कि अवधपुरी को लेकर जो सपना हम सबने देखा है, उस बात का एहसास तीन वर्ष पहले उत्तर प्रदेश की इस अवधपुरी में दीपोत्सव कार्यक्रम के साथ आप सबने महसूस किया होगा।”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस गोरक्षा पीठ के महंत हैं, उस पीठ का अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गोरखनाथ मठ के महंत दिग्विजयनाथ का श्रीराम मंदिर आंदोलन में बड़ी भूमिका रही है। उनकी मृत्यु के बाद उनके शिष्य और उत्तराधिकारी महंत अवैद्यनाथ ने मंदिर में सक्रिय भूमिका निभाई, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ इन्हीं महंत अवैद्यनाथ के ही शिष्य हैं।

‘फिर से अजान होगी, फिर से नमाज होगी – इंशाअल्लाह’: #BabriZindaHai ट्रेंड के साथ ऐसे फैलाया गया नफरत

अयोध्या में आज इतिहास रच गया है। वर्षों तक अदालत में मामला चलने के बाद आज (5 अगस्त, 2020) अयोध्या में प्रधानमंत्री ने राममंदिर की आधारशिला रख दी है। पूजा विधिवत सम्पन्न हो चुकी है। अयोध्या को दीया और फूलों से सजाया गया है। आज का दिन दीपावाली से कम नहीं है।आज जब पूरी दुनिया राम की भक्ति में डूबी हुई है और उत्साह के साथ जश्न मना रही है, ऐसे में समाज का एक विशेष वर्ग इस पावन पर मातम मना रहा है।

आज रामजन्म भूमि के शिलान्यास के शुभ मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग सोशल मीडिया के जरिए #ReturnBabriLandToMuslims, #5AugustBlackDay और #BabriZindaHai जैसे ट्रेंड चला कर समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।

जैसा कि अपेक्षित था, कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने भूमिपूजन के दौरान ट्विटर पर जहर उगलना शुरू कर दिया है। वे रामजन्म भूमि निर्माण स्थल पर हुए भूमिपूजन को सेक्युलरिज्म की हत्या करार दे रहे हैं।

इससे पहले राम जन्मभूमि के फैसले के बाद दुख मना रहे अली सोहराब ने ट्वीटर के जरिए लोगों को बरगलाया था। जिसके लिए उन्हें 48 घंटे के पुलिस रिमांड पर भी भेजा गया था। वहीं अब उसी अली सोहराब, ने फर्जी न्यूज पेडलर के माध्यम से तमाम नफरत भरे ट्वीट्स को हैशटैग के साथ पोस्ट किया है। जैसे कि-: 5AugustBlackDay #ReturnBabriLandToMuslims and #BabriZindaHai

अली सोहराब इतने भड़क गए कि उन्होंने राम मंदिर भूमि पूजन को “आतंकवाद का कार्य” तक कह दिया।

इसके अलावा तथाकथित पत्रकार ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि अपने आप को अल्पसंख्यकों का मसीहा कहने वाले कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो ने भी भूमिपूजन का विरोध नहीं किया। बल्कि ये लोग उल्टा राम मंदिर के समर्थन में लिख रहे हैं।

इसी तरह, अन्य मुस्लिम कट्टरपंथी भी यह मानने से इनकार कर रहे कि राम जन्मभूमि पर बने अवैध ढाँचे यानी बाबरी मस्जिद का कई समय पहले ही विध्वंस हो चुका है। कट्टरपंथी यह बात पसंद करे या नहीं, लेकिन अयोध्या में भव्य राम मंदिर अब एक वास्तविकता है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।

भारतीय लोकतंत्र में 5 अगस्त को काला दिन मानने वाले यह इस्लामी इस बात विश्वास कर रहे हैं कि एक दिन ऐसा आएगा जब बाबरी मस्जिद को दोबारा से बनाया जाएगा।

खैर, अयोध्या में राममंदिर भूमिपूजन हो चुका है। इस्लामवादी कट्टरपंथी मानसिकता वाले लोग इससे खुश हो या दुखी राम मंदिर की निरपेक्षता निर्विवाद है। बता दें, राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की लड़ाई पाँच सौ शताब्दियों तक चली।

यह उस सपने की पूर्ति है जो हिंदू पीढ़ी द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी पोषित किया गया है। इस पवित्र भूमि पर बने राममंदिर को सदियों पहले मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था।

‘ये भारत का सौभाग्य है कि भारत माता ने अपने सपूत नरेंद्र दामोदर दास मोदी को इस कार्य के लिए चुना’

आखिरकार भारतीय इतिहास की वह महान घटना सफलतापूर्वक संपन्न हुई। आखिरकार अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर का भूमिपूजन कार्यक्रम हो चुका है, जिसके लिए हिन्दुओं ने सदियों तक सन्घर्ष और इन्तजार किया और इसके यजमान बने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी!

अनुष्ठान के दौरान जब संकल्प लिया गया तो पुरोहितों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘राष्ट्रप्रमुख, सम्पूर्ण राष्ट्र के प्रतिनिधि’ के तौर पर यजमान के रूप में आह्वान किया गया और कहा कि यह भारत का सौभाग्य ही है कि भारत माता ने इस कार्य के लिए अपने सपूत को चुना है।

संकल्प के दौरान पुरोहितों ने राष्ट्र प्रतिनिधि के रूप में नरेंद्र दामोदर दास मोदी को श्रीराम मंदिर के शिलान्यास के लिए आह्वान किया और जैसे ही भूमिपूजन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, पांडाल जय श्रीराम और हर हर महादेव के नारों से गूँज उठा।

वास्तव में संकल्प पूजा-अनुष्ठान का वह हिस्सा होता है, जिसमें यजमान पूरी पूजा के फल के लिए ईश्वर (देवराज इंद्र) से प्रार्थना करता है। मान्यता है कि यदि यजमान संकल्प नहीं करता है तो उसे अनुष्ठान का फल नहीं मिलता।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि में भूमिपूजन का यह भावुक अवसर देशवासियों ने दूरदर्शन चैनल पर देखा। पुरोहितों ने कहा कि हम सभी भगवन से प्रार्थना करते हैं कि हम स्वयं रामराज्य का दर्शन करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम मंदिर की आधारशिला रख दी है और पूजा सम्पन्न हो गई है। राम मंदिर निर्माण के लिए पहले शिलाओं का पूजन किया गया। 12 बज कर 44 मिनट पर चाँदी की कन्नी से नींव डाली गई। पूजा स्थल पर मुख्यमंत्री योगी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, संघ प्रमुख मोहन भागवत और नृत्य गोपाल दास मौजूद हैं।