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राहुल गाँधी के बहनोई के करीबी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने की 14 जगहों पर छापेमारी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा के करीबी संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। गौरतलब है कि ईडी संजय भंडारी को भगोड़ा घोषित करवाने के लिए कोर्ट में अर्जी लगा चुकी है।

अधिकारियों ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 75 बेसिक ट्रेनर विमानों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विभिन्न शहरों में कई परिसरों पर छापे मारे हैं। उन्होंने कहा कि एजेंसी दिल्ली में एक दर्जन, गुड़गाँव और सूरत में एक-एक सहित कम से कम 14 परिसरों को कवर कर रही है।

क्या है मामला

संजय भंडारी के खिलाफ CBI ने जून 2019 में एयरफोर्स को 75 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट दिलाने के नाम पर कमीशन लेने के आरोप का मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि संजय भंडारी ने अपनी कंपनी Offset India Solutions Pvt Ltd के जरिए ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट देने वाली कंपनी Pilatus Aircrats Ltd के साथ मिलकर ये कॉन्ट्रैक्ट दिलवाया। बदले में Pilatus ने संजय भंडारी को 350 करोड़ रुपए दिए।

मामला प्रकाश में तब आया था जब उपरोक्त सौदे के लिए Pilatus Aircrats Ltd की निकटतम प्रतिद्वंद्वी रही दक्षिण कोरियाई कंपनी कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने पिलैटस को यह करार दिए जाने के खिलाफ तत्कालीन यूपीए सरकार से विरोध दर्ज कराया था। उनका दावा था कि पिलैटस की बोली के दस्तावेज़ अधूरे थे, और इसलिए उसे मिला हुआ करार रद्द होना चाहिए।

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने इस मामले में भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी से बात की थी और उनसे इस निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह किया था। लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला, और अंत में यह अनुबंध पिलैटस को ही दिया गया था।

गौरतलब है कि 2008 से 2012 की अवधि में, हथियार डीलर संजय भंडारी कॉन्ग्रेस सरकार के तहत सक्रिय रूप से अपने ‘बिज़नेस’ के लिए वापसी कर रहे थे और दसाँ (Dassault) के ऑफ-सेट पार्टनर बनने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास भी कर रहे थे। दसाँ ने संजय भंडारी के ऑफ-सेट पार्टनर बनने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

हालाँकि, भूमि सौदे को स्वीकार करते हुए, कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी को भूमि के विक्रेता एचएल पाहवा के साथ संबंधों पर चुप्पी ही साध रखी है। 

ग्लोबल सिटीजन बनने के साथ छात्र अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें: राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर PM मोदी का सम्बोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) सुबह 11 बजे से ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर कॉन्क्लेव’ में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उद्घाटन भाषण देते हुए अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत में नई शिक्षा नीति-2020 पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि शिक्षा नीति पब्लिक डोमेन पर डालने के बाद जो सवा दो लाख से भी ज्यादा सुझाव आए हैं, उस एक-एक सुझाव का विश्लेषण करने के बाद जो अमृत निकला है वो आज आपके सामने है।

नई शिक्षा नीति पर बोलते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि लंबे मंथन के बाद नई शिक्षा नीति बनाई गई, जिसे लागू करना बेहद आसान है। पीएम मोदी ने कहा कि आज हर जगह इसकी चर्चा हो रही है और किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का पूर्वग्रह है, या किसी एक ओर झुकी हुई है।

पीएम मोदी ने कहा – “हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपने राष्ट्रीय महत्व के साथ जोड़ते हुए, अपने राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुसार बदलाव करते हुए चलता है। जिसका मकसद ये होता है कि देश का एजुकेशन सिस्टम अपनी वर्तमान औऱ आने वाली पीढ़ियों को भविष्य के लिए तैयार रखें, ‘फ्यूचर रेडी’ करें।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्बोधन की प्रमुख बातें –

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21 वीं सदी के भारत की नींव रखेगी। हमने इस राष्ट्रीय नीति को यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया है कि यह भारतीयों को अधिक सशक्त और अवसरों के लिए आसानी से आकर्षक बनाता है।
  • बीते अनेक वर्षों से हमारे शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं हुए थे। परिणाम ये हुआ कि हमारे समाज में जिज्ञासा और कल्पना की नीति को प्रमोट करने के बजाए भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था।
  • आज गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि भी है। वो कहते थे – “उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती, बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।” निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बृहद लक्ष्य इसी से जुड़ा है।
  • हमारे छात्रों में, हमारे युवाओं में क्रिटिकल थिंकिंग और इनोवेटिव थिंकिंग विकसित कैसे हो सकती है, जब तक हमारी शिक्षा में ललक न हो, फिलोसोफी ऑफ़ एजुकेशन, शिक्षा का उद्देश्य न हो।
  • इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। School Curriculum के 10+2 स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 करिकुलम का ढाँचा देना, इसी दिशा में एक कदम है।
  • हर विद्यार्थी को ये अवसर मिलना ही चाहिए कि वो अपने Passion को फॉलो करे। वो अपनी सुविधा और ज़रूरत के हिसाब से किसी डिग्री या कोर्स को फॉलो कर सके और अगर उसका मन करे, तो वो छोड़ भी सके।
  • इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है। ये एक बहुत बड़ी वजह है, जिसकी वजह से जहाँ तक संभव हो, पाँचवी कक्षा तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है।
  • आज मुझे संतोष है कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाते समय, इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया। बदलते समय के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है।
  • हमें हमारे छात्रों को ग्लोबल सिटिजन तो बनाना है, इसका भी ध्यान रखना है कि वो इसके साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। जड़ से जग तक, मनुज से मानवता तक, अतीत से आधुनिकता तक, सभी बिंदुओं का समावेश करते हुए, इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तय किया गया है।
  • जब एक शिक्षक सीखता है तो देश अग्रणी बनता है। हम सबको एकसाथ संकल्पबद्ध होकर काम करना है।

एक योगी के तौर पर मस्जिद के शिलान्यास में कतई नहीं जाऊँगा, टोपी पहन लेना ‘सेक्युलरिज्म’ नहीं ढोंग है: योगी आदित्यनाथ

अयोध्या में बनने वाली मस्जिद को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा है कि वह बतौर योगी और बतौर हिंदू मस्जिद के शिलान्यास का हिस्सा नहीं बनेंगे। न तो वह ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल होंगे और न ही उन्हें ऐसी किसी कार्यक्रम से बुलावा आएगा।   

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एबीपी न्यूज़ के साथ साक्षात्कार के दौरान इस मुद्दे पर कई बातें कहीं। उन्होंने कहा कि बतौर राज्य के मुख्यमंत्री उन्हें किसी धर्म से परेशानी नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा “ऐसे नेता जो रोज़ा और इफ़्तार में शामिल होते हैं और टोपी लगा कर खुद को धर्म निरपेक्ष साबित करने में लगे रहते हैं। असल में यह धर्म निरपेक्षता नहीं है और जनता यह बात बहुत अच्छे से समझती है।” 

इसके बाद उन्होंने कहा “अगर आप मुझसे एक मुख्यमंत्री के रूप में पूछेंगे तो मुझे किसी मज़हब, संप्रदाय से परहेज नहीं है। अगर एक योगी के रूप में पूछेंगे तो कतई नहीं जाऊँगा। मैं इसलिए नहीं जाऊँगा क्योंकि क्योंकि मैं एक योगी हूँ। हिंदू धर्म का होने के नाते मेरे पास अपने तौर तरीकों से पूजा करने का अधिकार है। इसलिए न तो मुझे कोई मस्जिद के शिलान्यास में बुलाएगा। और न ही मैं इस तरह के किसी आयोजन का हिस्सा बनने वाला हूँ।”

इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जिस दिन मुझे इस तरह का कोई आमंत्रण आ गया उस दिन सेक्युलरिज्म खतरे में आ जाएगा। और मैं ऐसा बिलकुल नहीं चाहता कि धर्म निरपेक्षता पर किसी भी तरह का ख़तरा हो। इसलिए बेहतर यही होगा कि मैं शांति से अपने कर्तव्य का पालन करता रहूँ। जिससे प्रदेश के हर नागरिक को चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या समुदाय का क्यों न हो। उसे सरकार की तरफ से किसी भी तरह की निराशा न हो।” 

भूमि पूजन के कार्यक्रम के बाद सभी अथितियों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा था कि पाँच सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है। राम मंदिर भूमि पूजन से इतर योगी आदित्यनाथ ने न्यूज चैनल आज तक के साथ खास बातचीत में मस्जिद के शिलान्यास पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि वो मस्जिद के शिलान्यास कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे।

बता दें कि मीडिया चैनल ने सीएम योगी से सवाल किया था, “विरोधी कह रहे हैं कि आपने सभी धर्मों के लोगों को राम मंदिर के भूमि पूजन में बुलाया और सब आए। लेकिन आने वालों दिनों में जब अयोध्या में मस्जिद का निर्माण शुरू होगा, तो कहा जा रहा है कि कि सीएम योगी वहाँ नहीं जाएँगे।”  सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका जवाब देते हुए कहा, “मेरा जो काम है वो काम मैं करूँगा। मैं अपने कार्य को हमेशा कर्तव्य और धर्म मानकर चलता हूँ। मैं जानता हूँ कि मुझे कोई बुलाएगा नहीं इसलिए मैं जाऊँगा भी नहीं।”

मुंबई: फेसबुक लाइव में लोगों पर यकीन ना करने की सलाह देकर भोजपुरी अभिनेत्री ने कर ली आत्महत्या, धोखाधड़ी का लगाया आरोप

भोजपुरी अभिनेत्री अनुपमा पाठक मुंबई स्थित अपने घर पर फाँसी से लटकी पाई गई हैं। बताया जा रहा है कि शहर के दहिसर इलाके में 2 अगस्त को इस अभिनेत्री ने आत्महत्या कर ली थी। और 6 अगस्‍त को यह घटना खबर बनकर सामने आई। प्रारंभिक जाँच के आधार पर पुलिस ने 40 वर्षीय अभिनेत्री अनुपमा पाठक की मौत को आत्महत्या बताया है।

अनुपमा बिहार के पूर्णिया जिले से मुंबई चली गईं थीं, जहाँ उन्होंने भोजपुरी फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों में काम किया। यह कदम उठाने से पहले भोजपुरी अभिनेत्री 10 मिनट के लिए फेसबुक पर लाइव आईं थीं। इस वीडियो में, उन्होंने अपनी परिस्थितियाँ सामने रखते हुए लोगों से किसी पर भरोसा न करने के लिए भी कहा। अभिनेत्री ने फेसबुक लाइव वीडियो में बताया था कि उनके साथ धोखा हुआ है और वह अब किसी पर भरोसा नहीं कर सकती हैं।  

अनुपमा पाठक ने कहा, “यदि आप किसी को बताते हैं कि आप कुछ समस्याओं से गुज़र रहे हैं और आत्महत्या करना चाहते हैं, तो वह व्यक्ति, चाहे वह कितना भी अच्छा दोस्त क्यों न हो, वह अपने आपको तुरंत आपकी समस्याओं से दूर रखने के लिए कहेगा, ताकि आपकी मौत के बाद वो किसी तरह की मुसीबत में न पड़े। इसके अलावा, लोग आपका मजाक बनाएँगे और दूसरों के सामने आपका अपमान करेंगे। इसलिए कभी भी अपनी समस्याओं को किसी के साथ शेयर न करें और कभी भी किसी को अपना दोस्त न समझें।”

फेसबुक लाइव में अभिनेत्री ने कहा – “वो इंसान बनें, जिस पर हर कोई भरोसा कर सकता है, लेकिन कभी किसी पर भरोसा मत करो। मैंने अपने जीवन में यही सीखा है। लोग बहुत स्वार्थी हैं और दूसरों की परवाह नहीं करते हैं।”

रात के 12 बजे किए गए अपने आखिरी फेसबुक पोस्ट में अनुपमा पाठक ने लिखा, “अलविदा और शुभ रात्रि।”

अभिनेत्री के घर से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया हुआ है। इस नोट में उन्होंने आत्महत्या करने के कारणों में अपनी आर्थिक परेशानी का भी उल्लेख किया है। अभिनेत्री अनुपमा पाठक ने अपने सुसाइड नोट में एक शख्स मनीष झा के बारे में भी बताया है। अनुपमा पाठक ने आरोप लगाया कि उस आदमी ने मई में उसका दोपहिया वाहन ले लिया और उसे बाद में वापस करने से मना कर दिया।

अनुपमा के फ्लैट से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने ये कदम उठाने के दो कारण बताए हैं। इस सुसाइड नोट में लिखा, “मैंने एक दोस्त की रिक्वेस्ट पर मलाड की विजडम प्रोड्यूसर कंपनी में 10 हजार रुपए निवेश किए थे। कंपनी को मेरे पैसे दिसंबर 2019 में वापस करने थे। कंपनी मेरा पैसा वापस करने में आनाकानी कर रही है।”

लगातार सामने आई हैं मनोरंजन उद्योग में आत्महत्या की घटनाएँ

अनुपमा पाठक की मौत ऐसे समय में हुई है, जब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के सदमे से उबर रहा है। इससे पहले 9 जून को, राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन ऊँची इमारत से कूद गईं। एक महीने पहले, 15 मई को, टीवी अभिनेता मनमीत ग्रेवाल की उनके मुंबई स्थित घर पर आत्महत्या से मृत्यु हो गई थी।

44 वर्षीय टेलीविजन अभिनेता समीर शर्मा, जो कि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ और ‘लेफ्ट राइट लेफ्ट’ में अपनी भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं, बुधवार को मलाड में अपने घर पर मृत पाए गए।

चीन पर अमेरिका की डिजिटल स्ट्राइक: ट्रम्प ने दी TikTok और वी-चैट पर पाबंदी के आदेश को मंज़ूरी

अमेरिका और चीन के बीच जारी खींचतान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप ने चीन की एप्लीकेशन टिक टॉक और वी चैट के मालिकों से किसी भी तरह का लेन-देन करने पर पाबंदी लगा दी है। कुछ ही दिन पहले ख़बर आ रही थी कि अमेरिकी टेक कंपनी टिक टॉक को खरीद सकती हैं। लेकिन अब ऐसा न होने की सूरत में अमेरिका ने टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने के लिए 15 सितंबर की सीमा तक तय कर दी है।    

अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इस आदेश पर मुहर लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरूवार के दिन टिकटॉक और वी चैट पर पाबंदी लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर किए। आदेश में यह बेहद साफ़ तौर लिखा है कि दोनों ही एप्लीकेशन को अमेरिका में 45 दिन के भीतर बंद कर दिया जाए। हाल ही में अमेरिकी सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए आदेश जारी किया था।  जिसके मुताबिक़ वह इस एप्लीकेशन का उपयोग नहीं कर सकते थे।   

एप्लीकेशन के आदेश पर आधिकारिक रूप से मुहर लगाने के बाद ट्रंप ने कहा कि यह पाबंदी बेहद ज़रूरी थी। टिकटॉक जैसे एप्लीकेशंस का भरोसा नहीं किया जा सकता है। यह एप्लीकेशन जिस तरह देश का डाटा (जानकारी) चुराते हैं उससे देश की आंतरिक सुरक्षा पर प्रभाव पड़ता है। ट्रंप ने इस विषय पर बयान जारी करते हुए कई अहम बातें कहीं। ट्रंप ने कहा, “चीन के यह एप्लीकेशन अमेरिकी लोगों से संबंधित दो तरह की जानकारी चुराते हैं पहली निजी और दूसरी स्वामित्व से जुड़ी। इसके अलावा यह जानकारी चीन की कम्युनिष्ट पार्टी तक पहुँचाई जाती है।” 

इसके बाद ट्रंप ने कहा, “इसकी वजह से चीन की सरकार को अमेरिका के संघीय कर्मचारियों और संगठित – असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की जानकारी मिल जाती है। वह इस तरह की जानकारियों को ट्रैक कर सकते हैं। चीन की सत्ताधारी पार्टी इस तरह की निजी जानकारियों के आधार पर ब्लैकमेल करने का दस्तावेज़ तैयार कर सकती है। ऐसी जानकारियों का इस्तेमाल कॉर्पोरेट स्तर पर जासूसी के लिए भी किया जा सकता है।” 

हालाँकि, इस कार्रवाई पर फिलहाल टिकटॉक और वी चैट की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इसके ठीक पहले अमेरिकी व‍िदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बुधवार को कहा था कि वह अमेरिकी कार्रवाई को चीनी तकनीकी से निजी ऐप तक बढ़ा रहे हैं। उन्‍होंने इस मामले में टिकटॉक और वी चैट का ज़िक्र किया था। भारत में पहले ही सभी तरह के संदिग्‍ध ऐप पर प्रतिबंधित लगाया जा चुका है। 

हाल ही ऐसी ख़बरें आई थीं जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ बढ़ते तनाव और जासूसी के आरोपों के बीच इसके संकेत दिए थे। इधर बाइटडांस (ByteDance) और माइक्रोसॉफ्ट के बीच सौदे को लेकर बातचीत चलने की बात हो रही थी। बाइटडांस टिकटॉक की पैरंट कंपनी है।

रिया पर पैसे के लिए दवाओं के ओवरडोज़ से सुशांत को ‘बीमार’ करने का आरोप: बिहार पुलिस ने SC में दायर की एफिडेविट

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत के मामले में बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में केस सीबीआई को ट्रांसफर किए जाने के कारणों पर हलफनामा दायर किया है, जिसमें एक खुलासा किया गया है कि एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह राजपूत को अपने घर ले जाकर उन्हें मानसिक रूप से बीमार करने की कोशिश किया करती थी। वह पिछले कई दिनों से लगातार सुशांत को दवाईयों की ओवरडोज दे रही थी।

इस हलफनामे (एफिडेविट) में बिहार पुलिस ने रिया चक्रवर्ती को लेकर एक और खुलासा करते हुए कहा है कि रिया और उसके घरवाले सुशांत के जीवन में पैसों के लालच से आए थे और रिया चक्रवर्ती उन्हें अपने घर ले जाकर दवाईयों की ओवरडोज दे रही थीं।

बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधीक्षक ने सुप्रीम कोर्ट को दिए इस हलफनामे में बताया है कि रिया चक्रवर्ती, सुशांत को अपने घर ले गई थीं और वहीं उन्होंने सुशांत को दवाईयों के ओवरडोज देने शुरू कर दिए थे। बिहार पुलिस ने इन सबका सुशांत के पैसे हड़पने का एकमात्र मकसद बताया। दरअसल, ये आरोप असल में सुशांत के पिता केके सिंह ने रिया पर लगाए थे। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा था कि रिया, सुशांत से झगड़ा कर उनका सारा सामान ले गई थीं।

सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या के मामले में सीबीआई ने रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की थी। बिहार पुलिस ने ये भी कहा है कि मुंबई पुलिस से किसी प्रकार की मदद ना मिलने के बावजूद उन्हें इस केस में कई चीजें मिली हैं, जिन पर जाँच की जा सकती है।

गौरतलब है कि सुशांत राजपूत की मौत मामले में जाँच करने मुंबई गई पटना पुलिस की टीम बीएमसी को चकमा देकर बृहस्पतिवार (अगस्त 06, 2020) को पटना पहुँच गई थी। आज सुबह मुंबई बिहार के आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी को क्वारंटाइन से छोड़ दिया गया है। विनय तिवारी को उस समय क्वारंटाइन किया गया, जब वो सुशांत केस को लेकर मुंबई में जाँच कर रही बिहार पुलिस टीम का नेतृत्व करने के लिए पहुँचे थे।

बीएमसी ने उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया, जिसके बाद इस मामले में काफी हंगामा देखने को मिला था। बाद में बिहार सरकार ने सुशांत केस को लेकर सीबीआई जाँच की सिफारिश की, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया।

रिया चक्रवर्ती को आज ईडी के सामने पेश होना था। लेकिन रिया ने अनुरोध किया है कि उनके बयान की रिकॉर्डिंग को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तक के लिए टाल दिया जाए। लेकिन ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपने बयान की रिकॉर्डिंग को स्थगित करने के लिए रिया चक्रवर्ती की याचिका को खारिज कर दिया है।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट स्थापित: 14 राज्यों के 80 संत-महामंडलेश्वर जुड़े, आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए शुरू होगा हस्ताक्षर अभियान

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के साथ ही अब मथुरा में 14 राज्यों के 80 संतों के साथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास की स्थापना की गई है। अयोध्या के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए आंदोलन की रणनीति पर चर्चा जोरों पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रस्ट के प्रमुख आचार्य देवमुरारी बापू ने कहा, “हमने 23 जुलाई को ‘हरियाली तीज’ के अवसर पर पंजीकरण कराया और वृंदावन से 11 संत आए, जो ट्रस्ट का हिस्सा हैं।”

आचार्य ने आगे कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की आजादी के लिए अन्य संतों और साधुओं को जोड़ने के लिए जल्द ही एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हस्ताक्षर अभियान के बाद, हम इस मुद्दे पर एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। हमने फरवरी में अभियान शुरू किया था, लेकिन हम लॉकडाउन के कारण आगे नहीं बढ़े।”

ट्रस्ट में वृंदावन के 11 पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा 14 राज्यों के 80 संत, महामंडलेश्वर को जोड़ा गया है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है, जिसमें निर्णय लिया गया है कि ट्रस्ट में वृंदावन के संत और महंतों को जोड़ने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। 

मथुरा में शाही ईदगाह है विवाद का विषय

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में मुख्य विवाद का विषय शाही ईदगाह है, जो मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के निकट स्थित है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास पहले से ही मस्जिद के बगल में साढ़े चार एकड़ भूमि पर दावा कर रहा है और चाहता है कि इसे और मंदिर के अधिकारियों द्वारा आयोजित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए ‘रंग मंच’ के रूप में इस्तेमाल किया जाए।

अयोध्या के बाद अब मथुरा और काशी

वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद से विश्व हिंदू परिषद (VHP) दावा करती रही है कि मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर को ‘स्वतंत्र’ करना उसके एजेंडे में है।

उल्लेखनीय है कि मथुरा के शाही ईदगाह को ‘प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट’ के तहत संवैधानिक प्रोटेक्शन मिलता है। दिसंबर 6, 1992 को बाबरी विध्वंस के बाद धीरे-धीरे ‘अयोध्या तो एक झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी है’ के नारे राजनीतिक परिदृश्यों के चलते काशी और मथुरा ठंडे बस्ते में चले गए थे।

लेकिन बहुमत के साथ सत्ता में आते ही अयोध्या श्रीराम मंदिर पर केंद्र सरकार ने तत्परता से काम किया है। हालाँकि, इस बारे में अभी बिल्कुल साफ-साफ कहना जल्दबाज़ी होगी कि बीजेपी, काशी और मथुरा के मुद्दों को अयोध्या की तरह प्राथमिकता देगी या नहीं।

विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि मथुरा में ठीक मस्जिद के स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और वह मस्जिद नहीं बल्कि हमारी ज़मीन है। विहिप ने कहा था – “वह मस्जिद है ही नहीं, वह हमारी ज़मीन है।” इस मंदिर परिसर के ठीक बाहर मथुरा का सबसे पुराना मंदिर है, जिसका नाम है केशव देव जी महाराज मंदिर!

ऐतिहासिक तथ्यों से पता चलता है कि जनवरी 1670 में रमजान के महीने में औरंगजेब ने मथुरा के एक बहुत प्रसिद्ध मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था। इस मंदिर का नाम केशव राय मंदिर था, जिसे ओरछा के राजा बीर सिंह बुंदेला ने उस दौर में 33 लाख रुपए में बनवाया था।

इतिहासकार डॉ वासुदेव शरण अग्रवाल ने कटरा केशवदेव को ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि माना है। विभिन्न अध्‍ययनों और साक्ष्यों के आधार पर मथुरा के राजनीतिक संग्रहालय के दूसरे कृष्णदत्त वाजपेयी ने भी स्वीकारा कि कटरा केशवदेव ही कृष्ण की असली जन्मभूमि है।

इति‍हासकारों के अनुसार, सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा बनवाए गए इस भव्य मंदिर पर महमूद गजनवी ने सन 1017 में आक्रमण कर इसे लूटने के बाद तोड़ दिया था।

मौत से 1 दिन पहले निर्माता-निर्देशक संग अगली फिल्म पर चर्चा कर रहे थे सुशांत, रिया की माँ, बाप और भाई पर भी FIR

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सीबीआई ने जाँच शुरू कर दी है। रिया चक्रवर्ती को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। इसी बीच खुलासा हुआ है कि अपनी मौत से 1 दिन पहले सुशांत प्रोड्यूसर रमेश तौरानी और निर्देशक निखिल आडवाणी के साथ फोन कॉल पर अगले प्रोजेक्ट की कहानी पर विचार-विमर्श कर रहे थे।

सीबीआई ने रिया के अलावा उनके पिता इंद्रजीत चकवर्ती, मॉं संध्या चक्रवारी और भाई सोविक चक्रवर्ती के खिलाफ भी FIR दर्ज की है। सुशांत के पूर्व मैनेजर सैमुअल मिरांडा का भी इस FIR में नाम है। उसे भी रिया ने ही हायर किया था। रिया की पूर्व मैनजर श्रुति मोदी के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया है।

‘टाइम्स नाउ’ की ख़बर के अनुसार, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत क़रीब 15-20 मिनट तक निर्माता और निर्देशक के साथ व्हाट्सप्प कॉल पर थे। तौरानी ने भी स्वीकार किया है कि उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की तरफ एक स्क्रिप्ट बढ़ाई थी, जिस पर चर्चा चल रही थी। कहा जा रहा है कि निखिल आडवाणी ने उन्हें एक स्क्रिप्ट का आइडिया दिया था और तब उनकी दिमागी हालत सामान्य दिख रही थी।

सुशांत सिंह राजपूत ने न सिर्फ़ स्क्रिप्ट को ध्यान से सुना बल्कि वो बीच-बीच में सवाल भी पूछ रहे थे, जिनके जवाब निर्देशक ने दिए। ये भी कहा जा रहा है कि सुशांत सिंह राजपूत ने इस बातचीत को लेकर संतुष्टि जताई थी। उनके कॉल रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि 12 मिनट के भीतर उन्होंने 5 लोगों से बातचीत की थी। वो अपने टैलेंट मैनेजर गौरी के साथ 368 सेकंड तक कॉल पर थे। इससे कई सवाल उठ रहे हैं।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला CBI के पास पहुँचने के बाद अब रिया चक्रवर्ती की कॉल डिटेल्स का खुलासा हुआ है। इन कॉल डिटेल्स से पता चला है कि रिया चक्रवर्ती कैसे सुशांत को उनके परिवार से दूर करने की कोशिश करती थी और कैसे उनके जीवन से जुड़े फैसले खुद लेती थी। रिया ने सुशांत को 20 से 24 जनवरी के बीच 25 कॉल किए थे, क्योंकि वह इस बीच अपनी बहन रानी से मिलने चले गए थे। रिया ऐसा नहीं चाहती थी।

ख़बरों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सुशांत सिंह राजपूत के 4 बैंक अकॉउंट मिले हैं। सूत्रों ने बताया कि सुशांत सिंह राजपूत के दो खातों कोटक बैंक और एचडीएफसी बैंक के खाते से रिया चक्रवर्ती को रुपए ट्रांसफर किए गए थे। ये भी खुलासा हुआ है कि सुशांत ने कार के लिए भी लोन लिया था। प्रवर्तन निदेशालय को मुंबई की प्राइम लोकेशन में रिया चक्रवर्ती और उसके परिवार की 2 संपत्तियों का पता चला है, जो हाल ही में खरीदी गई थी।

चीन से $1 अरब का कर्ज लेकर सऊदी अरब का $1 बिलियन लोन चुकाएगा पाकिस्तान

पाकिस्तान ने करीब डेढ़ साल पहले सऊदी अरब से अरबों रुपयों का लोन लिया था। पाकिस्तान को यह लोन कुछ तय शर्तों व ब्याज दरों के साथ निश्चित समय के लिए मिला था। चरमराई आर्थिक स्थिति के कारण पाकिस्तान इसे लौटाने में अक्षम था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली छीछालेदर से खुद को बचाने के लिए उसने चीन से ऋण लेकर सऊदी अरब को देने का फैसला किया है।

पाकिस्तान की फाइनेंस मिनिस्ट्री और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने इस बात का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब का बकाया चुकाने के लिए पाकिस्तान ने चीन से $1बिलियन डॉलर का लोन लिया है।

डेलीटाइम्स की रिपोर्ट् के मुताबिक सऊदी अरब ने साल 2018 में पाकिस्तान को $3 बिलियन का ऋण नकद सहायता के रूप में और $3.2बिलियन का लोन सालाना तेल व गैस सप्लाई जैसी अन्य सुविधाएँ मुहैया कराने के रूप में दिया था। कुल मिलाकर ये ऋण $6.2 बिलियन का था।

समझौते के अनुसार, सऊदी ने पाकिस्तान को यह कैश और तेल की सुविधा एक साल के लिए दी थी। वो भी इस शर्त के साथ कि वह या तो या तो साल के अंत तक सारा बकाया चुका दें या फिर वह उसे आगे 3 साल तक के लिए आगे बढ़ा दें।

अब चूँकि पाकिस्तान को $3 बिलियन सहायता के बदले 3.2 प्रतिशत का ब्याज देना पड़ रहा था, तो उन्होंने बिना अवधि बढ़ाए इसे पहले ही वापस कर दिया।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान को इस सहायता की पहली किश्त यानी $1बिलियन नवंबर 2018 में मिले। फिर $1 बिलियन की दूसरी किश्त 2018 के दिसंबर में मिली और तीसरी किश्त जनवरी 2019 में मिली थी।

गौरतलब है कि संयुक्त अरब अमीरात के प्रिंस जायद-अल-नाहियान कुछ समय पहले पाकिस्तान के दौरे पर गए थे। उसी समय इस ऋण को लेकर होने वाली घोषणा के कयास लगाए गए थे। इस बीच पाक अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से भी 8 अरब डॉलर की कर्ज सहायता के लिए बातचीत कर रहा था और इमरान खान स्वयं भी सऊदी दो बार जाकर उनसे $6.2 बिलियन का ऋण माँग कर चुके थे।

बता दें, इस खबर के अलावा पाकिस्तान और सऊदी अरब के आपसी संबंधों को लेकर एक अन्य बड़ी खबर आई है। दरअसल, कश्मीर मुद्दे में अरब का समर्थन न पाकर विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक न्यूज चैनल पर इस्लामिक सहयोग संगठन को धमकी दी है।

पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने सऊदी अरब के नेतृत्‍व वाले इस्लामिक सहयोग संगठन यानी ओआईसी को कहा कि वह कश्‍मीर पर अपने विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक बुलाने में देरी करना बंद करे।

पाकिस्‍तान के एक लोकल न्‍यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा, “मैं एक बार फिर से पूरे सम्‍मान के साथ इस्लामिक सहयोग संगठन से कहना चाहता हूँ कि विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक हमारी अपेक्षा है। अगर आप इसे बुला नहीं सकते हैं तो मैं प्रधानमंत्री इमरान खान से यह कहने के लिए बाध्‍य हो जाऊँगा कि वह ऐसे इस्‍लामिक देशों की बैठक बुलाएँ, जो कश्‍मीर के मुद्दे पर हमारे साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं और जो दबाए गए कश्मिरियों का साथ देते हैं।”

टीवी कार्यक्रम में कुरैशी ने कहा कि अगर ओआईसी विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक को बुलाने में विफल रहता है, तो पाकिस्तान ओआईसी के बाहर एक सत्र के लिए जाने को तैयार होगा। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब और इंतजार नहीं कर सकता।

बता दें कि 57 मुस्लिम देशों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाने के लिए लगातार दबाव डाल रहा है। संयुक्‍त राष्‍ट्र के बाद ओआईसी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है।

हिंदुओं के लिए वही घृणा, राम मंदिर पर वही जहर: अयोध्या में नींव से बिलबिलाए वामपंथी और मजहब परस्त

अयोध्या में राम मंदिर को लेकर सैकड़ों साल से चल रहे विवाद का न्यायपूर्ण तरीके से पटाक्षेप हुआ था। 5 अगस्त को अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का भूमिपूजन हुआ। लेकिन, अपने आराध्य रामलला की छत मिलने का जश्न मना रहे हिन्दुओं को देख कर वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथियों के गठजोड़ ने जहर उगलना शुरू कर दिया है।

ये वही लोग थे जो कभी कहते थे कि सुप्रीम कोर्ट सर्वोपरि है और वो उसका फैसला तहेदिल से मानेंगे। अब वही कट्टरपंथी क़ानून, सरकार और जनभावनाओं- तीनों के विपरीत जाकर अपना असली चेहरा दिखा रहे हैं।

सबसे पहले चर्चा करते हैं ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी के बयान की, जिन्होंने धमकाया है कि मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को तोड़ा जा सकता है। उन्होंने इस्लाम के हवाले से कहा कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगी और उसे तोड़ा नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि मस्जिद को ध्वस्त कर मंदिर बनाया गया, अब मंदिर ध्वस्त कर मस्जिद फिर से बनेगा।

इसी तरह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयान को देखिए। उसने कहा कि बाबरी मस्जिद हमेशा थी और रहेगी। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ही विरोध कर दिया और इसे बहुसंख्यक तुष्टिकरण का नाम देकर दमनकारी, अन्यायपूर्ण और शर्मनाक बताया। उसने इसके लिए तुर्की के हागिया सोफिया का उदाहरण दिया, जो पहले एक चर्च हुआ करता था, लेकिन उसे हाल ही में मस्जिद में तब्दील कर दिया गया।

इसी तरह उत्तर प्रदेश की संभल लोकसभा सीट से सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद थी, है और हमेशा रहेगी। उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि पीएम मोदी ने ताकत के बलबूते संग-ए-बुनियाद (आधारशिला) रखी और सुप्रीम कोर्ट से अपने पक्ष में फैसला करा लिया। उन्होंने इसे जम्हूरियत का क़त्ल करार दिया और ये भी नहीं देखा कि वे जो कर रहे हैं, उसकी बुनियाद क्या है। 

इन तीनों के बयानों से साफ़ झलकता है कि इनके लिए क़ानून वही है, जो इनका इस्लाम कहता है। इनके लिए आदर्श वही है, जैसा कट्टर इस्लामी मुल्कों में होता है। आज़ादी के बाद से ही अल्पसंख्यकों के लिए दसियों योजनाओं से लेकर हज यात्रा तक की व्यवस्था की गई, लेकिन इतिहास में हुई एक गलती को क्या सुधारा गया, इनका देश की न्यायपालिका और विधायिका तो दूर, देश से ही भरोसा उठ गया।

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के बयानों को ही देख लीजिए। हर मंच पर भारत और इसके संविधान के प्रति आस्था जताने वाला ये व्यक्ति अब कहता है कि बाबरी था, है और रहेगा। बाबरी मस्जिद की तस्वीरें शेयर कर ‘इंशाअल्लाह’ लिखने वाले ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियाँ उड़ा दी। अगर सैकड़ों साल चले न्यायपूर्ण प्रक्रिया पर इन्हें भरोसा नहीं है तो फिर फैसला मक्का और मदीना में बैठे लोग करेंगे?

इस्लामी कट्टरपंथियों और तुष्टिकरण का खेल रच रहे नेताओं की ये कोशिश रहती है कि वो हिन्दुओं को ज्यादा से ज्यादा विभाजित कर सकें ताकि राम और रामायण के प्रति श्रद्धा रखने वालों की संख्या कम हो। यही कारण है कि गुलाम नबी आज़ाद संसद में ‘हिन्दुओं और दलितों’ को अलग-अलग बोल कर दोनों को अलग दिखाते हैं। फिर मॉब लिंचिंग के नैरेटिव में दोनों को पीड़ित दिखाया जाता है।

लेकिन, दलित हितों के लिए ज़मीन पर लड़ने संगठनों को ये सच्चाई पता है। तभी तो दलित पॉजिटिव मूवमेंट नामक संगठन ने गृह मंत्रालय और समाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय के समक्ष AIMPLB के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि संस्था ने हिन्दू दलितों के आराध्य भगवान श्रीराम के बारे में गलतबयानी कर के भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया है।

देश के कोने-कोने से लोकतान्त्रिक तरीके से साफ़ किए जा रहे हिंसक वामपंथियों के नेता भी आजकल सुप्रीम कोर्ट के जजों और केंद्र में बैठी सरकार से ज्यादा संविधान विशेषज्ञ बन कर बैठे हुए हैं। सीताराम येचुरी ने तो राम मंदिर भूमिपूजन को ही संविधान के विरुद्ध बता दिया। साथ ही उन्होंने दूरदर्शन द्वारा इसके लाइव टेलीकास्ट पर भी विरोध जताया। उन्होंने इसे राजनीतिक और शर्मनाक बता दिया।

सीताराम येचुरी सहित सभी वामपंथियों को जानना चाहिए कि दूरदर्शन को इस कार्यक्रम के प्रसारण से काफी फायदा हुआ है, क्योंकि भारत ही नहीं बल्कि पश्चिमी देशों से लेकर पाकिस्तान तक में इसे लाइव देखा गया। 200 से भी अधिक टीवी चैनलों में भारत में इसे दिखाया। क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सिर्फ इसीलिए पलट दिया जाए, क्योंकि किसी ने किसी मजहब की किताब में कुछ और लिखा है?

असल में ये सब एक चाल के तहत किया जाता है। सीएए से भले ही कोई नुकसान न हो लेकिन इसके विरुद्ध लोगों को भड़का कर सरकार को इतना डरा दो कि वो एनआरसी लेकर आए ही नहीं। इसी तरह राम मंदिर को लेकर इतना हंगामा मचा दो कि अब हिन्दू मथुरा और काशी में इस्लामी आक्रांताओं द्वारा हुए अतिक्रमण पर कुछ बोले ही नहीं। शायद इन्हें पता नहीं कि इनके गीदड़-भभकी के दिन अब लद गए हैं।

वहीं सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद पक्ष के वकील रहे जफरयाब जिलानी का कहना है कि खास समुदाय वाले नहीं मानते कि अयोध्या में राम मंदिर था और सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था कि वहाँ मस्जिद थी जिसे गिराना आपराधिक कृत्य था। उनका कहना है कि इसके बावजूद फैसला हिन्दुओं के पक्ष में सुना दिया गया। यही टीवी चैनल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की बातें करते थे। अब क्या हुआ?

असल में इन लोगों का इतिहास ही 16वीं शताब्दी से शुरू होता है। उससे पहले क्या था, इससे किसी को मतलब नहीं है। लेकिन दिसंबर 1992 से पहले वहाँ क्या था, इसका रट्टा उन्हें रोज मारना है। इनके इतिहास में गुरु नानक की अयोध्या यात्रा, वहाँ से मिले हिन्दू प्रतीक चिह्न, रामायण में दिया गया भूगोल, रामचरितमानस में सरयू की महिमा और भारत के सांस्कृतिक इतिहास का कथन- इन सबसे कुछ मतलब है ही नहीं।

इस मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी अबकी कुछ अलग रुख अपना रही है। मध्य प्रदेश में जहाँ पूर्ण सीएम दिग्विजय सिंह अशुभ मुहूर्त का हवाला देकर हर एक बुरी घटना को राम मंदिर से ही जोड़ रहे हैं, वहीं एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भूमिपूजन का स्वागत करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ आयोजित करवाया।

प्रियंका गाँधी अपने बयान में राम और रामायण का गुणगान करते नहीं थक रही हैं तो राहुल गाँधी भी अब राम-राम जप रहे हैं। अब पार्टी के भीतर इसका विरोध शुरू हो गया है। शायद कॉन्ग्रेस को ये पता नहीं है कि दिखावे की आस्था और सचमुच की श्रद्धा में बहुत फ़र्क़ होता है और जनता इसे बखूबी समझती है।

अंत में ये याद रखने की ज़रूरत है कि जो सचमुच राम मंदिर के लिए लड़े थे, उन्होंने अपना कार्य पूर्ण किया। जिन्होंने हमेशा राम के अस्तित्व को नकारते हुए हिन्दुओं की भावनाओं का मजाक उड़ाया, आज उन्हें भी राम-राम करने को मजबूर होना पड़ रहा है।