Home Blog Page 4610

जम्मू-कश्मीर: कुलगाम में BJP नेता और सरपंच सज्जाद खांडे की आतंकियों ने की गोली मारकर हत्या

कश्मीर के कुलगाम जिला स्थित काजीगुंड ब्लॉक के वेसू गाँव में आतंकवादियों ने भाजपा सरपंच सज्जाद अहमद खांडे की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।

सज्जाद अहमद खांडे एक सुरक्षित प्रवासी शिविर में कई सरपंचों के साथ रह रहे थे। वह बृहस्पतिवार (अगस्त 05, 2020) सुबह अपने घर जाने वाले थे और उन्हें आतंकवादियों ने तब गोली का निशाना बनाया जब जब वह अपने घर से मात्र 20 मीटर दूर थे।

भाजपा पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने सभी सरपंचों के लिए सुरक्षा की माँग करते हुए कहा, “यह हताशा के कारण उठाया गया कदम है क्योंकि भाजपा पैर जमा रही है। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि लड़ाई वैचारिक होनी चाहिए। आप उन लोगों को मारते हैं जो गरीबों और वंचितों के लिए लड़ते हैं। मुझे लगता है कि उन सभी सरपंचों को जिन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है, अब उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि पिछले दो दिनों में भाजपा नेता पर किया गया यह दूसरा हमला है। इससे पहले आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में उसी जिले के पंच आरिफ अहमद की मौत हो गई थी।

घाटी में पिछले दो महीनों में, दो अन्य प्रमुख राजनीतिक नेताओं को आतंकवादियों ने मार डाला। वसीम अहमद बारी को उनके भाई और पिता के साथ 9 जुलाई को मार दिया गया था, जबकि, कश्मीरी पंडित समुदाय के सरपंच अजय पंडिता भारती की जून के माह में हत्या कर दी गई थी।

मनोज सिन्हा होंगे जम्मू-कश्मीर के नए LG: भौचक्के उमर अब्दुल्ला ने कहा- सरकार ऐसे ही नाम चुनती है जिसकी उम्मीद न हो

भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व रेलमंत्री (राज्य) मनोज सिन्हा अब जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल पद संभालने वाले हैं। जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल गिरीश चन्द्र मुर्मू ने इस्तीफ़ा दे दिया था जिसके बाद यह फैसला लिया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जीसी मुर्मू का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है। 

भाजपा नेता मनोज सिन्हा मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। संगठन के विश्वसनीय नेताओं में से एक गिने जाने वाले मनोज सिन्हा उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सांसद रह चुके हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह रेलवे और दूरसंचार के राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनका नाम मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में भी आगे था। लेकिन 2019 के आम चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।  

मनोज सिन्हा भारतीय जनता पार्टी से दो बार सांसद रह चुके हैं। इस पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी बयान दिया था। उन्होंने कहा, “बीती रात जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल पद के लिए एक या दो नामों की चर्चा सबसे ज़्यादा थी। उन दोनों नामों से मनोज सिन्हा का दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था। इस सरकार पर एक बात के लिए भरोसा ज़रूर किया जा सकता है। भले अंतिम योजना कैसी भी बनी हो लेकिन यह सरकार कुछ न कुछ ऐसा लेकर आती है जो सभी के लिए अप्रत्याशित होता है।”  

गुज़रे वर्ष 31 अक्टूबर के दिन जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटा गया था। इसमें जम्मू कश्मीर को एक हिस्से में रखा गया और लद्दाख को दूसरे हिस्से में। जीसी मुर्मू केंद्र शासित राज्य के पहले उप राज्यपाल बने थे। उनके पहले सत्यपाल मलिक जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे। जीसी मुर्मू गुजरात कैडर के 1985 बैच के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। 

नरेन्द्र मोदी के गुजरात में मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल के दौरान जीसी मुर्मू प्रधान सचिव का पद भी संभाल चुके हैं। उन्होंने 5 अगस्त 2020 के दिन इस्तीफ़ा दिया, ठीक इसी दिन बीते साल जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिया गया था। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35-ए को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया था।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुर्मू का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया था। जीसी मुर्मू आज यानी गुरूवार के दिन जम्मू कश्मीर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।  

UNSC में PAK की फिर फजीहत, कहा- द्विपक्षीय मुद्दा है कश्मीर, हमारा समय बर्बाद ना करे पाकिस्तान

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बुधवार (अगस्त 05, 2020) को पाकिस्तान के कश्मीर प्रलाप के एक और प्रयास को खारिज कर दिया। और, यह स्पष्ट कर दिया कि यह विषय भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से ही हल किया जाना चाहिए है। UNSC के 5 स्थाई सदस्यों में से चार – अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस – भारत का पक्ष मजबूती से रखते आ रहे हैं।

UN में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने एक ट्वीट में कहा- “पाकिस्‍तान का एक और प्रयास विफल रहा। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की आज की बैठक बंद कमरे में हुई थी, अनौपचारिक थी, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया और इसका कोई परिणाम नहीं निकला। लगभग सभी देशों ने माना कि जम्‍मू-कश्‍मीर एक द्विपक्षीय मसला है और सुरक्षा परिषद के समय और ध्‍यान का हकदार नहीं है।”

टीएस त्रिमूर्ति ने कहा कि पाकिस्तान ने जो दावा किया है, उसके विपरीत उसने जम्मू कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र का एजेंडा बनाने और मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का प्रयास किया। 

पाकिस्तान के कश्मीर राग को इस बार करारा तमाचा लगा है क्योंकि पाकिस्‍तान के लिए शर्मिंदगी की बात यह रही कि अमेरिका ने बेनतीजा बैठक पर जोर दिया, जिस पर चीन ने भी अपनी सहमति जता दी।

राजदूत त्रिमूर्ति ने कहा कि नवंबर, 1965 से भारत-पाकिस्तान मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है। UNSC ने अगस्त, 2019 में पहली बार और बाद में जनवरी 2020 में कश्मीर पर दो बार अनौपचारिक बैठकें की हैं।

अगस्त 2019 की बैठक भारत में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने के बाद दशकों में पहली बार हुई थी। बैठक में चीन ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने के कदम की कड़ी आलोचना की थी। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट रूप से बताया कि संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करना उसका आंतरिक मामला था।

‘जो सबके नाम बदलते थे, मोदी जी ने उनका ही बदल दिया’: PM मोदी के कारण ट्विटर पर मीम्स की बौछार

मौका कोई भी हो वामपंथियों और मोदी विरोधियों को बस एक मौका चाहिए बीजेपी नेताओं को नीचा दिखाने का। राममंदिर भूमि पूजन से लिबरल मीडिया गैंग इतना निराश हो चुका है कि बीजेपी को निशाना बनाने के लिए अब ये लोग तुच्छ हरकतों पर भी उतर आएँ है। वैसे जो कुछ करके ये मजे ले रहे हैं प्रधानमत्री ने कई बार ऐसे क्रिएटिविटी का भी स्वागत किया है।

आज, 29 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (5 अगस्त) को राम मंदिर पूजन के भव्य आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश के अयोध्या पहुँचे और पूरी विधि विधान से ‘श्रीराम जन्मभूमि मंदिर’ का शिलान्यास किया। राम मंदिर शिलान्यास करने के बाद पीएम मोदी ने लोगों को इस शुभ अवसर पर संबोधित किया। भाषण के दौरान गलती से मोदी ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को “आदित्य योगीनाथ” कहकर संबोधित कर दिया।

फिर क्या था, खाली बैठे बीजेपी विरोधियों और लिबरल गैंग ने इस बात को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उन्होंने पूरे भाषण में से उस क्लिप को वायरल करना शुरू कर दिया जिसमें पीएम मोदी राम मंदिर को राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बताते हुए कहते है, “मंच पर विराजमान, उत्तर प्रदेश के ऊर्जावान लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान आदित्य योगीनाथ जी।”

वामपंथियों ने तमाम तरीके के मीम्स और फोटोशॉप तस्वीरों को बना कर योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी का सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया। लोगों ने यह कहते हुए सोशल मीडिया में बाढ़ ला दिया कि, जो सबके नाम बदलते थे, मोदी जी ने उनका ही बदल दिया।

ऐसे ही कुछ ट्वीट्स हम यहाँ शेयर कर रहे है। जिनसे आप पता लगा सकते है लोग मंदिर निर्माण के गुस्से को ऐसी फालतू चीजें वायरल करके शांत कर रहे है।

अर्जुन नाम के यूजर योगी आदित्यनाथ की पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखते है, “जब आप अपने घर वालों को पूरे दिल से चाहते है और वो इसके बदले पूरे देश के सामने आपको गलत (आदित्य योगीनाथ) नाम से बुलाते है।”

वहीं सागरजीत धर नाम के यूजर मोदी और योगी की फ़ोटो साथ में लगा कर तंज कसते हुए ट्वीट करते है।


वहीं इन लोगों का ही मज़ाक उड़ाते हुए पृथ्वी रापर्टी नाम के यूजर अनिल कपूर की फ़ोटो के साथ लिखते है कि बोलने दो बहुत तकलीफ (राम मंदिर निर्माण) हुआ है बेचारों को

ऐसे कई ट्वीट्स और मीम्स सोशल मीडिया पर आपको मिल जाएँगे। जिनसें आप इनकी मानसिकता को समझ सकते है। साथ ही साथ आप भी इस अवसर का आनंद लीजिए कोई खास आहत होने वाली बात नहीं है।

दिशा सालियान के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर और प्राइवेट पार्ट में चोट के निशान: बीजेपी नेता ने लगाया ‘बलात्कार’ और ‘हत्या’ का आरोप

सुशांत सिंह सुसाइड केस में पुलिस हर एंगल से जाँच कर रही है। वहीं अब सुशांत सिंह राजपूत की मौत का कनेक्शन उनकी पूर्व सेक्रेटरी दिशा की मौत से भी की जा रही है। इंडिया टुडे की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार दिशा सालियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और अन्य जगहों पर चोट लगने की बात सामने आई है।

बता दें दिशा मुंबई के एक अपार्टमेंट के 14 वीं मंजिल पर रहती थी। दिशा ने उसी फ्लोर से कूद कर आत्महत्या की थी। इंडिया टुडे ने दिशा सलियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को एक्सेस किया है, जिसमें उनके शरीर पर चोटों का विवरण है।

दिशा की मौत और उसके बाद कि गई जाँच कई सवाल पैदा करती है। जैसे कि सुशांत की मौत से पाँच दिन पहले यानी 9 जून की रात 2 बजे दिशा ने आत्महत्या की थी। लेकिन उसका पोस्टमार्टम 2 दिन बाद किया गया था। आखिर क्यों बोरीवली पोर्टमार्टम सेंटर पर ऑटोप्सी को दो दिन लेट किया गया।

14वीं मंजिल से गिरने की वजह से ऑटोप्सी के रिपोर्ट में सिर में चोट लगने और कई तरह की अप्राकृतिक चोंटो की वजह से दिशा की मौत हुई थी।

वहीं दिशा की मौत पर भाजपा सांसद नारायण राणे ने भी बेहद संगीन खुलासे किए थे। उन्होंने कहा था कि दिशा का ‘बलात्कार’ और ‘हत्या’ किया गया था। सालियान की ऑटोप्सी रिपोर्ट में उनके प्राईवेट पार्ट्स में चोट के निशान सामने आए थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के में निजी भागों पर चोटों के बारे में कोई विशेष उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन ऊँचाई से गिरने के कारण ‘कई चोटों’ का उल्लेख हुआ है। बता दें अप्राकृतिक मौत के मामलों में फीमेल बॉडी के वजाइनल स्वैब टेस्टिंग के लिए रखे जाते हैं और इस मामले में भी ऐसा किया गया था।

गौरतलब है कि, केंद्र ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की सीबीआई जाँच शुरू करने के बिहार सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। अब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच सीबीआई करेगी।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश पर राजीव नगर थाना कांड संख्या 241/ 20 की सीबीआई जाँच की सिफारिश मंगलवार (अगस्त, 04, 2020) को केन्द्र सरकार को भेज दी गई थी। इससे पहले राज्य पुलिस मुख्यालय ने इसका प्रस्ताव तैयार किया। जल्द ही सीबीआई इस मामले में नई एफआईआर दर्ज कर पड़ताल शुरू कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आए हैं। इसमें उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के साथ उनके संबंधों से लेकर उनके मानसिक स्वास्थ्य, बैंक अकाउंट से लेकर उनकी मैनेजर रही दिशा सालियान की मौत से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं।

सुशांत सिंह की कथित आत्महत्या को लेकर उनके पिता कृष्ण किशोर सिंह ने पटना के राजीवनगर थाने में FIR दर्ज कराई है। 25 जुलाई को यह प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें आईपीसी की धारा 341, 342, 380, 406, 306, 420, 506 और 120 (बी) की धाराओं के अंतर्गत मामले दर्ज किए गए हैं।

केरल नन रेप केस: बिशप फ्रैंको मुलक्कल की जमानत को SC ने भी किया रद्द, पादरी को मुकदमे का सामना करने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (5 अगस्त, 2020) को नन से बलात्कार मामले में आरोपित केरल के बिशप फ्रैंको मुलक्कल (Bishop Franco Mulakkal) की आरोप मुक्त करने की याचिका बुधवार को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बिशप के वकील से कहा कि न्यायालय इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है लेकिन आरोप मुक्त करने के मुद्दे पर ही याचिका खारिज की जा रही है।

मुलक्कल ने इस याचिका में केरल उच्च न्यायालय के सात जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें नन द्वारा दायर बलात्कार याचिका के मामले में आरोप मुक्त करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने जालंधर डायोसिस के अपदस्थ बिशप को बलात्कार के मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए कहा था। बिशप के खिलाफ केरल में डायोसिस की नन ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। नन की इसी शिकायत के अधार पर बिशप के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था।

इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बरी करने की याचिका को खारिज कर दिया था। जिसमें उसने नन द्वारा दायर यौन शोषण के मामले में बरी करने की अपील की थी।

न्यायमूर्ति वी शिरसी ने जालंधर क्षेत्र के बिशप को निर्देश दिया कि बलात्कार मामले में वह ट्रायल का सामना करे। केरल में उसी क्षेत्र की एक नन ने उसके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। अदालत ने बिशप की याचिका खारिज करते हुए अभियोजन के इस तर्क को स्वीकार किया कि बलात्कार मामले में मुलक्कल के खिलाफ प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य मौजूद हैं।

इस वर्ष मार्च में निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने की याचिका खारिज करने के बाद रोमन कैथोलिक गिरजाघर के वरिष्ठ पादरी ने समीक्षा याचिका दायर की। बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने बलात्कार का मामला दर्ज किया था।

गौरतलब है कि बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया था। हाई कोर्ट में दायर याचिका में पादरी ने कहा कि जब उन्होंने पीड़िता नन से वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल किया तो उसने उन्हें फँसा दिया।

उल्लेखनीय है कि इस मामले की प्रमुख गवाहों में से एक सिस्टर लिसी ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि उनके वरिष्ठ लोग लगातार उन पर फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ दिए गए बयान को बदलने के लिए दबाव डाल रहे हैं। वहीं आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादला कर दिया गया था।

‘ये मेरा भारत नहीं रहा’ कहने वालों के लिए विमान लेकर इन्तजार कर रहे सोनू सूद, कोपभवन से नहीं निकल रहे लिबरल्स

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत हो चुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही भूमिपूजन के दौरान इसकी आधारशिला रखी, लिबरल प्रजाति के अगुआ लोगों को ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई भारी-भड़कम हाथी उनकी छाती पर पाँव रख कर गुजरा हो। वैसे भी इस ब्रीड का दाना-पानी राम मंदिर विवाद को लेकर ही चल रहा था और मोदी सरकार ने ये मौका भी उनसे छीन लिया।

जिन्होंने रामायण पढ़ी है वो जानते हैं कि जब भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक होना था, तब उनके पिता राजा दशरथ की तीसरी पत्नी कैकेयी कोपभवन में चली गई थी। राजा पर दो वरदान उधार था। कैकेयी ने भारत का राज्याभिषेक और राम का वनवास माँगा, जिसके लिए उन्हें स्वीकृति देनी ही पड़ी थी। लेकिन, लिबरलों के लिए दुःख की बात ये है कि अबकी वाला राजा कुछ ज्यादा ही कठोर प्रशासक है।

एक तो वो ऐरे-गैरों को वरदान नहीं देता, ऊपर से लिबरल ब्रीड के पत्रकार कैसे उसके पाँव तले बैठ कर गुजरात चुनावों में उसका इंटरव्यू लेते थे, ये उन्हें अब तक याद है। इसीलिए उन्हें पता है कि ये किसी कीमत पर नहीं पसीजने वाला। और राजा के मंत्री की तो बात ही क्या! राजा इनकी बात सुन कर थोड़ा-मोड़ा पसीज भी जाएँ तो मंत्री अपनी उँगली से सीधा उस ओर इशारा करते हैं, जिससे इस ब्रीड के पसीने छूट जाते हैं।

इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। एक तो ये जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की पहली बरसी है, ऊपर से लिबरल-सेक्युलर जमात को राम मंदिर भूमिपूजन का भव्य कार्यक्रम देखना पड़ा, जो उन्हें लगता था कि कोरोना के कारण फीका-फीका सा रहेगा। लेकिन, देश की जनता ने भी उनके मजे लेने शुरू कर दिए। घर-घर दीपक जलने लगे और लोग पूजा पर बैठ गए। कार्यक्रम के समय सब टीवी से चिपके रहे।

अब कट्टर इस्लामी पत्रकार राणा अयूब को ही देख लीजिए। मैडम सीधा पहुँच गईं ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में लेख लिखने और बताया कि किस तरह ये दिन भारत के समुदाय विशेष के लिए बहुत बुरा है। अब इस ब्रीड को कौन समझाए कि ये नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार तो है नहीं कि यहाँ की नीतियाँ अब चीन और अमेरिका जैसे देश डिसाइड करेंगे। शायद अथाह गमों के सागर में डूब कर लेख लिखने वाली अयूब को होश में आने के बाद पता होगा कि अरे, भारत तो अमेरिका की कॉलोनी है ही नहीं।

बेचारे शेखर गुप्ता तो अपने पुराने दिन ही याद कर-कर के काम चला रहे हैं। कभी वो गोधरा दंगों के बाद के ‘इंडिया टुडे’ का कवर याद करते हैं और कभी ‘द प्रिंट’ का वो लेख शेयर करते हैं जिसमें बताया जाता है कि कैसे बाबरी ध्वंस की सुनवाई सही से नहीं हो रही है। सब बूत उठवाने का नारा लगाने वाले राम मंदिर के गम में खुद के बूट के फीते भी नहीं बाँध पा रहे। सब ताज उछालने का नारा देने वाले आगरा वाले ताज की ओर देखने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।

सब तख़्त उछालने का नारा देने वाले के तशरीफ़ खुद के घर में रखे तख़्त पर भी नहीं टिक पा रहे। ‘फक हिंदुत्व’ का नारा देने वालों को भी ‘Premature Ejaculation’ नामक रोग से गुजर रहे हैं। देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ का नारा देने वालों के आकाओं के पास अपने शार्गिदों को देने के लिए बिस्किट के टुकड़े भी नहीं हैं। अब स्वास्थ्य और तकनीक पर लेख लिख कर भारत को बदनाम करने वाली विद्या कृष्णन को ही देख लीजिए।

उनका कहना है कि जिन जेलों में ‘हमारे’ कवि, प्रोफेसर, एक्टिविस्ट और पत्रकार रखे जाते हैं, वो उनके लिए मंदिर से भी ज्यादा पवित्र है। एक हिन्दू के रूप में वो खुद को शर्मिन्दा पा रही हैं। वो कहती हैं कि एक आपदा के बीच टीवी के लिए ये सब ड्रामा रचा गया है। विद्या से पूछा जा सकता है कि कोरोना के बीच वो ट्विटर पर टट्टीनुमा ट्वीट क्यों कर रही हैं? कुछ लिबरलों से तो ये भी पूछा जा सकता है कि वो इस आपदा में साँस ही क्यों ले रहे हैं?

ऑपइंडिया के सटायर विभाग के सूत्रों से पता चला है कि इन सबके बीच सेक्युलर-लिबरल ब्रीड ने सोनू सूद से संपर्क किया है। दरअसल, उन्हें लगता है कि ये वो भारत नहीं है जिसमें वो बड़े हुए हैं, जिसका उन्होंने स्वप्न देखा था और जिसके बारे में किताबों में पढ़ा था। अब उनके लिए तो इस देश में कुछ काम रहा ही नहीं। अरे, ये देश उनके लिए अब अच्छा नहीं रहा न? तो अब वो जाएँगे किसी न किसी देश में।

उन्होंने सोनू सूद से संपर्क किया और समाजिक कामों के लिए जाने जाने वाले अभिनेता ने उनकी बात मान ली। लिबरलों ने गूगल सर्च कर के पाया कि दुनिया में मजहब विशेष के सबसे ज्यादा लोग इंडोनेशिया में हैं। लेकिन, उन्हें जैसे ही पता चला कि वहाँ की एक करेंसी पर भगवान गणेश का चित्र होता है, उन्होंने प्लान कैंसल कर दिया। हालाँकि, पाकिस्तान बगल में है। वहाँ वो क्यों नहीं जा रहे, इस बारे में अभी हमें कुछ पता नहीं चल पाया है।

फिलहाल, उनके पास तुर्की और मलेशिया जैसे विकल्प भी हैं जहाँ ज़ाकिर नाइक भी रह रहा है। लेकिन, गिरोह विशेष दयावान सोनू सूद द्वारा मुफ्त में दी जाने वाली इस सेवा का फायदा उठाने को लेकर विचार-विमर्श करने में ही जुटा हुआ है। जब हिन्दू मेजोरिटी वाले भारत में रह कर भारत और हिन्दुओं को गाली दी जा सकती है और उन्हें बदनाम किया जा सकता है तो फिर कहीं और जाने से क्या फायदा?

उधर सोनू सूद तो फ्लाइट की व्यवस्था किए ही बैठे हैं। वो इसी इन्तजार में हैं कि कोपभवन में से विचार कर के लिबरल गैंग आएगा तो उन्हें कहीं ले जाने के लिए विमान सेवा उपलब्ध कराएँगे। लिबरलों की चिंता ये है कि तुर्की और मलेशिया जैसे देशों में रह कर उन्हें गाली नहीं दी जा सकती। ‘ये हमारा भारत नहीं रहा’ कहने वाले भारत छोड़ने के लिए क्यों तैयार नहीं है, ये तो सबके लिए सोचने वाली बात है।

अयोध्या में भूमि पूजन के बाद राममय हुआ न्यूयॉर्क का Times Square: दिखी भगवान राम की झलक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (अगस्त 5, 2020) को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी। राम मंदिर निर्माण की गूँज देश ही नहीं विदेश में भी गूँजी। अमेरिका के प्रसिद्ध स्थल न्यूयॉर्क टाइम्स स्क्वायर पर रामभक्तों ने डिजिटल बिलबोर्ड के जरिए राम में अपनी आस्था प्रकट की।

अयोध्या में प्रभु राम के भव्य मंदिर के भूमि पूजन के मौके पर अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के टाइम्स स्क्वायर में ब्रॉडवे पर भगवान राम का सबसे बड़ा हाई-डेफिनिशन डिजिटल डिस्प्ले दिखाया गया। साथ ही इस मौके पर लोगों ने ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगाए।

टाइम्स स्क्वायर के बिलबोर्ड पर भगवान राम और मंदिर के मॉडल के अलावा भारत का झंडा भी डिस्प्ले हो रहा था। भगवान राम का डिजिटल प्रदर्शन टाइम्स स्क्वायर में हिंदू देवता के सबसे महँगे डिजिटल होर्डिंग में से एक है।

जानकारी के मुताबिक अमेरिकन इंडियन पब्लिक अफेयर कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सेवहानी ने बताया था कि ये जीवन में एक बार या सदी में एक बार होने वाली घटना नही हैं। बल्कि, पूरी मानवजाति के जीवन में इस तरह के मौके एक ही बार आते हैं। इस मौके को खास बनाने के लिए उन्होंने टाइम्स स्क्वायर को चुना।

इससे पहले अयोध्या में ऐतिहासिक राम मंदिर की नींव रखी जाने का अमेरिका में भारतीय- अमेरिकियों ने दीप जलाकर जश्न मनाया। कैपिटल हिल में राम मंदिर की तस्वीरों की एक झाँकी भी निकाली गई।

गौरतलब है कि इससे पहले खबर थी कि अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन की तस्वीरें अब न्यूयॉर्क की टाइम्स स्क्वायर इमारत पर नजर नहीं आएँगी। बताया गया कि जिस विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’ के पास बिल्डिंग पर मुख्य बिल बोर्ड मैनेज करने का अधिकार था, उन्होंने यूएस के मुस्लिम गुटों की आपत्ति के बाद इमारत पर श्रीराम की तस्वीर डिस्प्ले पर दिखाने से मना कर दिया।

संयुक्त राज्य अमेरिका में मुस्लिम समूहों के गठबंधन में से एक समूह ने कहा था कि विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’, जो टाइम्स स्क्वायर में नैस्डैक के लिए डिजिटल विज्ञापन बोर्ड का प्रबंधन करती है और प्रमुख डिजिटल बोर्ड चलाती है, उसने अपने बिलबोर्ड पर भगवान राम की तस्वीरें दिखाने की योजना बनाने वाले हिंदू समूहों के लिए विज्ञापन चलाने से इनकार कर दिया।

भूमि पूजने से पहले अयोध्या को पूरी तरह से सजा दिया गया। जगमग रोशनी से शहर की तस्वीर देखते ही बन रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जब भूमि पूजन के लिए दिल्ली से अयोध्या के लिए निकले तो वह पारंपरिक धोती-कुर्ता धारण किए हुए थे। पूजा के दौरान उनके साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई धर्मगुरु भी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में भूमि पूजन कर श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की आधारशिला रख रहे थे तो दूसरी तरफ उनकी मां हीराबेन अपने घर पर बैठ टीवी पर ऐतिहासिक पलों को देख रही थीं। पीएम मोदी की माँ की कुछ तस्वीरें सामने आईं हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि प्रधानमंत्री अयोध्या में हनुमानगढ़ी में आरती कर रहे थे तो उनकी माँ अपने घर बैठकर टीवी के सामने बैठकर पूरे कार्यक्रम को देख रही थीं।

किसके पूर्वजों ने रामलला की मूर्तियाँ हटाने की कोशिश की थी: नई-नई ‘रामभक्त’ प्रियंका से CM योगी का सवाल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई-नई ‘रामभक्त’ बनी कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी से पूछा है कि किसके पूर्वजों ने भगवान राम की मूर्ति हटाने की कोशिश की थी? प्रियंका गाँधी ने ‘राम सबके हैं’ कहते हुए राम और रामायण का जम कर गुणगान किया था और राम मंदिर के निर्माण का स्वागत किया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस बयान पर प्रतिक्तिया देते हुए पूछा कि वो कौन लोग थे जिन्होंने मूर्तियाँ हटाने की कोशिश की थी?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूछा कि वो कौन लोग थे जो अयोध्या में राम मंदिर नहीं चाहते थे? उन्होंने कहा कि भाजपा काफी पहले से कहती आई है कि राम सबके हैं, कॉन्ग्रेस आज यही बात कर रही। उन्होंने ये भी पूछा कि वो कौन लोग थे जो कह रहे थे कि गर्भगृह से 200 मीटर की दूरी पर राम मंदिर का शिलान्यास होगा? उन्होंने कोरोना वायरस को लेकर हुई तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि किस तरह भाजपा का कोई भी पदाधिकारी इस कार्यक्रम में नहीं आया। न तो पार्टी के राष्ट्रीय और न ही प्रदेश अध्यक्ष यहाँ पहुँचे थे। उन्होंने कहा कि सीमित संख्या में अतिथियों को बुलाए जाने के कारण ऐसा हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम के नाम पर किसी को बाँटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और राम काज में सहयोग भी करना चाहिए क्योंकि वो सभी के हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमने सबको जोड़ने का ही काम किया है। उन्होंने कहा कि राम के नाम पर भाजपा ने राजनीति नहीं की है बल्कि अयोध्या जन्मभूमि में मंदिर के लिए जिस निष्ठा से हम 1984 में जुड़े थे उसी निष्ठा से 2020 में भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 1949 में उनकी भावनाएँ क्या थीं, 1984 में क्या थीं और 1992 में क्या थीं? सीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस कहती कुछ है और करती कुछ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने वही किया, जो कहा। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम बहुप्रतीक्षित था और इसे आगे बढ़ाना था, इसीलिए इस रूप में इसका आयोजन हुआ और टीवी पर लाइव प्रसारण भी किया गया। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम शुभ था और इसके आयोजन के लिए पूरी व्यवस्था की गई थी। इस आयोजन में 200 के क़रीब मेहमान आए थे। कई साधु-संत इसमें आना चाहते थे।

इससे पहले सीएम ने उपस्थित अतिथियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि 5 सदी के बाद आज 135 करोड़ भारतवासियों का संकल्प पूरा हो रहा है। देश में लोकतांत्रिक तरीकों के साथ ही मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इस घड़ी की प्रतीक्षा में कई पीढ़ियाँ गुजर चुकी हैं। सीएम योगी ने कहा – “हमने तीन साल पहले अयोध्या में दीपोत्सव का कार्यक्रम शुरू किया था, आज उसकी सिद्धी हो रही है।”

हाल ही में प्रियंका गाँधी ने राम मंदिर पर बयान देते हुए कहा था कि सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बनें। भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति में रामायण की गहरी और अमिट छाप है।

रिया चक्रवर्ती को ED ने भेजा समन: 7 अगस्त को पेश होने का दिया आदेश, तीन चरणों में होगी पूछताछ

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को समन जारी किया है। रिया चक्रवर्ती को शुक्रवार (अगस्त 7, 2020) को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

ईडी ने रिया चक्रवर्ती को उसके मुम्बई में स्थिति पुराने पते और ईमेल के जरिए समन भेजा है। प्रवर्तन निदेशालय रिया चक्रवर्ती से तीन चरणों में लंबी पूछताछ होगी। इसके लिए ED ने सवालों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार की है। इस पूछताछ में रिया के सुशांत सिंह राजपूत से व्यक्तिगत और व्यवसायिक संबंधों को लेकर गहरी पड़ताल की जाएगी।

प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक रिया से तीन चरणों में पूछताछ होगी। पहले चरण में व्यक्तिगत जानकारियाँ माँगी जाएँगी। पिता का नाम, स्थाई और स्थानीय पता परिवार के सदस्यों के बारे में तमाम जानकारी। दूसरे चरण में व्यवसायिक जानकारियाँ माँगी जाएँगी, जैसे पैन कार्ड के डिटेल, कंपनी का DIN नंबर, सोर्स ऑफ इनकम क्या है, आयकर रिटर्न फाइल करने की जानकारी वगैरह।

इसके अलावा रिया से यह भी पूछा जाएगा कि वे कितनी कंपनियों में डायरेक्टर हैं। कंपनी में उनको क्या काम करना होता है और उसका कितना टर्नओवर है। रिया के कितने बैंकों में खाते हैं। किस-किस बैंक में हैं और उनमें कितनी रकम है। उसके नाम पर कुल कितनी जायदाद है और 3 साल पहले कितनी जायदाद थी?  

क्या कोई जायदाद या खाता विदेश में भी है? उसके भाई का क्या व्यापार है? उसकी कंपनी के बारे में वे क्या जानती हैं? उसके परिजनों की प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी। निदेशालय रिया से उनके पासपोर्ट के डिटेल, विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी लेगी। इसके साथ ही विदेश यात्राओं का खर्चा किसने वहन किया, यह भी पूछा जाएगा।

गौरतलब है कि केंद्र ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की सीबीआई जाँच शुरू करने के बिहार सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। अब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच सीबीआई करेगी।