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किश्तवाड़ में हिजबुल के 5 ओवरग्राउंड वर्कर गिरफ्तार, पकड़े हुए आतंकियों को भगाने में करते थे मदद

सुरक्षाबलों ने बृहस्पतिवार (मार्च 05, 2020) शाम जम्मू कश्मीर में किश्तवाड़ जिले के मारवा इलाके से हिजबुल मुजाहिदीन के पाँच ओवर ग्राउंड वर्करों (OGW) को गिरफ्तार किया है। किश्तवाड़ पुलिस को सूचना मिली थी कि मारवा इलाके के रहने वाले गुलाम हुसैन, मोहम्मद यासीन, जाकिर हुसैन, मोहम्मद इकबाल और बशीर अहमद हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों को पनाह देने के साथ उनकी मदद करते थे।

इस इलाके में सक्रिय आतंकी भी इनके संपर्क में रहते थे। जब भी कभी कोई आतंकी घटना होती थी तो ये OGW आतंकियों को वहाँ से भगाने में भी मदद करते थे। सुरक्षाबल काफी समय से इन लोगों पर नजर रख रही थी जिसके बाद पुलिस ने इलाके में घेराबंदी करके बृहस्पतिवार शाम को इन्हें दबोच लिया। पुलिस की पूछताछ के दौरान इन लोगों से कई महत्वपूर्ण सूचनाएँ मिली हैं। पुलिस ने इन पाँचों ओवरग्राउंड वर्करों पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का मामला दर्ज कर लिया है।

घाटी में आतंकियों का सफाया लगातार जारी है। ज्ञात हो कि स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की टीम ने बीते बुधवार (मार्च 04, 2020) को नरवाल में पाकिस्तान एजेंसी आईएसआई के एक भारतीय एजेंट को भी गिरफ्तार किया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार एजेंट की पहचान सांबा के तरोर निवासी पंकज शर्मा के रूप में की थी। आईएसआई एजेंट पंकज जम्मू-कश्मीर सैन्य कैंपों और अन्य जरूरी जगहों की फोटो और जानकारी पाकिस्तान भेजता था।

यूपी में पुलिस ने चौराहों पर टाँगे दंगाइयों के पोस्टर, 8 अप्रैल तक जुर्माना नहीं भरा तो संपत्ति होगी कुर्क

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) की आड़ में उत्तर प्रदेश हिंसा करने वालों से योगी सरकार सख्ती से निपट रही है। राजधानी लखनऊ में सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुॅंचाने वाले दंगाइयों के चेहरे सार्वजनिक कर दिए गए हैं। इनके पोस्टर चौराहों पर लगाए गए हैं। दंगाइयों पर जुर्माना सरकार पहले ही लगा चुकी है। हिंसा के बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि नुकसान की भरपाई दंगाइयों से की जाएगी।

यूपी पुलिस ने लखनऊ के प्रमुख चौराहों पर 57 दंगाइयों के पोस्टर लगाए हैं। दंगाइयों को संपत्ति के नुकसान की वसूली का नोटिस भी दिया गया है। इस मामले में लखनऊ के डीएम अभिषेक प्रकाश का कहना है कि हिंसा फैलाने वाले सभी उपद्रवियों के लखनऊ में पोस्टर और बैनर लगाए जाएँगे। नोटिस के बाद जुर्माना नहीं देने पर इनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।

प्रशासन ने दोषियों को नोटिस जारी करते हुए है कि अगर आठ अप्रैल तक जुर्माने की धनराशि जमा नहीं की गई तो उनकी सम्पत्ति कुर्क कर जुर्माने की रकम वसूली जाएगी। मजिस्ट्रेट जाँच में 57 लोग दोषी पाए गए थे। इन सभी से हिंसा के दौरान हुए एक करोड़ 55 लाख रुपए के नुकसान की वसूली होनी है।

आपको बता दें कि आदेश के अनुसार ठाकुरगंज में 14 और कैसरबाग में 15 आरोपी बनाए गए थे। ठाकुरगंज में चार और कैसरबाग में 9 आरोपियों पर सुनवाई के दौरान दोष सिद्ध नहीं हो सका। वहीं ठाकुरगंज से 10 और कैसरबाग से 6 आरोपियों को दोषी मानते हुए कुल 69 लाख 48 हजार 900 रुपए हर्जाना तय किया गया है। इनमें शिया चाँद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उपाध्यक्ष कल्बे सादिक के बेटे सिब्तैन नूरी का नाम भी शामिल है।

दरअसल सीएए के नाम पर प्रदर्शनकारियों ने 19 दिसंबर को लखनऊ में हिंसा की घटना को अंजाम दिया था। इस दौरान दंगाइयों ने शहर में हिंसा फैलाते हुए सरकार की करोड़ों रुपए की सम्पत्ति को तहस-नहस कर दिया था। लखनऊ में 19 दिसंबर को हुई हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी ओपी सिंह ने कहा था कि वे हिंसा में किसी भी निर्दोष को हाथ नहीं लगाएँगे, लेकिन जिन्होंने हिंसा की है, उन्हें किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रदेश में सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया है, उसकी भरपाई उपद्रवियों की संपत्ति से ही की जाएगी।

ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम की तलाश: जहाँ हुई IB के अंकित शर्मा की हत्या वहाँ मौजूद था

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों का सरगना ताहिर हुसैन अब पुलिस की ​गिरफ्त में है। चाँदबाग में हिंसा भड़काने और आईबी के अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को गुरुवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब खबर आ रही है कि दंगों में उसके भाई शाह आलम का भी हाथ था। हालाँकि अब तक उस पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। न ही उससे पूछताछ हुई है। इस बीच मौके का फायदा उठा वह फरार हो चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शाह आलम का नाम गवाहों ने अपने बयान में लिया है। इसके मद्देनजर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उससे पूछताछ करनी चाहती है। जब उसकी खोजबीन हुई तो पता चला कि वह फरार है। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि हिंसा वाले दिन शाह आलम अपने भाई यानी ताहिर हुसैन की छत पर दंगाइयों के साथ मौजूद था और हिंसा भड़काने में उसका बहुत बड़ा हाथ है।

हालाँकि, शाह आलम के खिलाफ अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं है, लेकिन क्राइम ब्रांच को पूछताछ में लोगों ने उसका नाम बताया है। इसलिए उसकी तलाश की जा रही है। चश्मदीदों का कहना है कि अंकित शर्मा को ताहिर के गुंडे उसकी इमारत में ले घसीटकर ले गए थे। बाद में उनका शव नाले से बरामद किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से अधिक बार गोदा गया था। चश्मदीदों ने बताया है कि इस इमारत में शाह आलम भी मौजूद था। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद ताहिर हुसैन भी फरार हो गया था। बाद में उसने दिल्ली की एक अदालत में अग्रिम जमानत याचिका डाली। गुरुवार को अदालत में सरेंडर करने से पहले ही पुलिस ने दबोच लिया।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने ताहिर की खोज में बुधवार (मार्च 4, 2020) को यूपी के अमरोहा में भी छापेमारी की थी। ताहिर मूल रूप से यहीं का रहने वाला है। पुलिस के पहुँचने पर रिश्तेदार के घरों पर ताला लगा हुआ मिला। इसके बाद पुलिस ने पड़ोसियों से पूछताछ की। लोगों ने बताया कि मकान में चार दिन से ताला लगा हुआ है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ताहिर के पुश्तैनी गाँव पोरारा पहुँची। लेकिन वहाँ भी उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। बाद में पुलिस ने दबिश देकर ताहिर के ससुराल में भी छापेमारी की। मगर वहाँ से भी पुलिस को अभी कुछ हाथ नहीं लगा। अंकित शर्मा की हत्या को बांग्लादेशी आतंकियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि ताहिर के आतंकी लिंक की अंकित शर्मा जॉंच कर रहे थे। इसलिए दंगों की आड़ में उन्हें जान बूझकर निशाना बनाया गया। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब अंकित की हत्या की गई उस वक्त वहॉं बांग्लादेशी आतंकियों के लोकेशन मिले हैं।

‘मस्जिद से फेंकी गई थी अंकित शर्मा की लाश’ – पिता ने FIR में ताहिर हुसैन को बताया हत्या का आरोपी

आँतें फाड़कर निकाल दी गई, 6 लोगों ने 400 से ज़्यादा बार चाकू भोंका: IB के अंकित शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

IB के अंकित शर्मा की लाश को नाले में फेंक रहे AAP पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडे: सामने आया नया Video

लिबरल प्रोपेगेंडा को जस्टिस मुरलीधर का तमाचा, कहा- 17 फरवरी को ही मिल गई थी तबादले की सूचना

पिछले दिनों जस्टिस मुरलीधर का दिल्ली से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में तबादला कर दिया गया था। इसमें कुछ भी नया नहीं था और पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था। इसके बावजूद लिबरल गैंग और प्रोपेगेंडा पोर्टलों ने इस तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जिससे संदेश जाए कि भाजपा नेताओं के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से दूर रखने के लिए उनका रातोंरात तबादला कर दिया गया।

इन दुष्प्रचारों को खुद जस्टिस मुरलीधर ने भी खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि 17 फरवरी को ही उन्हें तबादले की सूचना मिल गई थी। चीफ जस्टिस एसए बोबडे से उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में उनके स्थानांतरण के लिए कॉलेजियम की सिफारिश की सूचना मिली थी। बकौल जस्टिस मुरलीधर, उन्होंने इसे स्वीकार कर कहा था कि कोई दिक्कत नहीं है।

ये बात उन्होंने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित विदाई समारोह में कही। जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि वह अपने तबादले को लेकर पैदा हुए भ्रम को साफ कर देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें 17 फरवरी को ही तबादले के बारे में सूचित कर दिया गया था। सीजेआई की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने 12 फरवरी की बैठक में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में उनके तबादले की अनुशंसा की थी।

जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने जब कॉलेजियम की राय के बारे में मुझे बताया तो मैंने भी इस पर अपनी सहमति दे दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब मुझसे मेरे तबादले के बारे में पूछा गया तो मैंने कहा कि मुझे पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट जाने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा मैंने सीजेआई को साफ किया कि मुझे प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है।

जस्टिस मुरलीधर ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हमें सच के साथ डटकर खड़े रहना चाहिए। मुरलीधर ने आगे कहा कि सच को जब जीतना होगा वह जीत जाएगा, लेकिन हमें सच के साथ बिना किसी संशय के साथ खड़े रहना चाहिए।

गौरतलब है कि 26 फरवरी की रात जस्टिस मुरलीधर के तबादले का आदेश जारी होने पर विवाद खड़ा हो गया था। आदेश से पहले उनकी अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली दंगों पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई की थी जो बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि इनके भड़काऊ भाषणों के कारण ही दंगे भड़के। सुनवाई के दौरान अदालत में कपिल मिश्रा के बयान का विडियो भी चलाया गया था।

जब ‘दुकानदार’ राजदीप सरदेसाई से डरते थे रवीश कुमार, पिछले दरवाजे से आते थे दफ्तर

वे कुंठा से ग्रसित हैं। मोदी सरकार और बीजेपी को कोसे बिना उनकी कोई बात पूरी नहीं होती। वे टीवी पर ज्ञान बॉंचते हैं और दर्शकों से टीवी नहीं देखने को कहते हैं। वे अख़बारों की रिपोर्टों का हवाला देते हैं और लोगों से अखबार नहीं पढ़ने को कहते हैं। उन्हें लगता है कि मई 2014 के बाद से हिन्दुस्तान में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा। वे शाहरुख में अनुराग मिश्रा तलाशते हैं। उनके प्रोपेगेंडा की फेहरिस्त लंबी है।

आप समझ गए होंगे कि मैं किसकी बात कर रही हूॅं। जी हॉं, सही समझे। बात रवीश कुमार की ही हो रही है। अब रवीश चर्चा में हैं अपने एक पूर्व संपादक को खुलेआम ट्रोल करने के कारण। ये संपादक भी बड़े घाघ हैं और कुंठित रवीश कुमार तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रही है। पत्रकारिता की शुरुआत रवीश ने उनके नेतृत्व में ही की थी। बावजूद इसके रवीश कुमार ने राजदीप सरदेसाई को ‘दुकानदार’ और ‘बैलेंसवादी’ कहने में संकोच नहीं किया है।

मंच था न्यूज 24 का। मंथन नामक उसके कार्यक्रम में रवीश कुमार मंच पर थे। उनसे न्यूज 24 के एग्जीक्यूटिव एडिटर मानक गुप्ता ने एक सवाल किया। इसके जवाब में ही रवीश ने राजदीप पर यह टिप्पणी की। नीचे के विडियो में आप उस कार्यक्रम में रवीश को सुन सकते हैं।

34:59 से 39:11 के बीच रवीश और मानक की बातचीत सुनिए

वीडियो में मानक गुप्ता रवीश से सवाल करते हैं, “क्या आप कुछ ज्यादा ही नेगेटिव नहीं हैं? जैसे कल राजदीप आए थे….” इससे पहले कि मानक अपना सवाल पूरा कर पाते, रवीश कुमार, राजदीप का नाम सुनते ही पानी की बोतल नीचे रखते हैं और तड़ाक से जवाब देते हैं, “मानक मैं दुकानदार नहीं हूँ। आप जिनका नाम लेकर आए हैं, मैं बैलेंसवादी नहीं हूँ… ये सच्चाई है कि मीडिया लोकतंत्र की हत्या का आयोजन कर रहा है और यह सकारात्मकता या नकारात्मकता का मामला नहीं है….अगर आप मर्डर को मर्डर नहीं कहेंगे तो फिर आप क्या कहेंगे?”

इसके बाद ये बातचीत यही नहीं रुकती। रवीश का जवाब सुनने के बाद मानक कहते हैं कि सिर्फ़ राजदीप सरदेसाई ही नहीं, बल्कि कई पत्रकार मानते हैं कि मीडिया दो हिस्सों में बँट गया है। रवीश उनसे असहमति जताते हैं और कहते हैं कि ये सब पूरी तरह से गलत है, यहाँ कोई बैलेंस नहीं है।

खुद को छोड़ सबको गोदी मीडिया बताने वाले रवीश कुमार के लिए किसी दूसरे पत्रकार को खारिज करना कोई नई बात नहीं है। लेकिन राजदीप के लिए उनके मुँह से निकले शब्द चौंकाने वाले जरूर हैं। एक समय दोनों साथ काम किया करते थे। ये बात और है कि उन दिनों राजदीप खुद को चेहरा बना चुके थे, जबकि रवीश पत्रकारिता में अपनी जमीन तलाशने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

नीचे 13 मार्च 2014 का एक विडियो है। इसमें रवीश कुमार एनडीटीवी में अपनी यात्रा को लेकर बात कर रहे हैं। अपने ही चैनल यानी एनडीटीवी के एक प्रोग्राम में रवीश की एनडीटीवी यात्रा साझा की गई थी। वे बता रहे हैं कि आखिर कैसे एनडीटीवी से जुड़ने के बाद उन्होंने काम सीखा और किन-किन लोगों ने उनकी मदद की।

6:50 से 7:10 के बीच में राजदीप को लेकर रवीश के अनुभव सुनिए

बारी-बारी से सहकर्मियों के बारे में बात कर रहे रवीश राजदीप की चर्चा भी करते हैं। बताते हैं कि राजदीप से बहुत डर लगता था। उनके डर के कारण वे पीछे के गेट से दफ्तर में आते थे। वे बताते हैं कि नताशा (एक सहकर्मी) उनसे मजाक में कहा करती थी तुम चूहा हो डरते हो राजदीप से। और राजदीप भी। बिना बात के कोई एडिटर इतना गुस्सा करता है क्या। एक दिन तो राजदीप मेरे बाल को लेकर गुस्सा हो गए कि ये रिपोर्टर के बाल हैं या देवानंद के। तुम रिपोर्टर बनने आए हो या फिर देवानंद।

हालॉंकि विडियो में रवीश ने यह नहीं बताया है कि यह घटना कब की है। शायद यह उस समय का वाकया होगा जब रवीश कथित तौर पर जेएनयू के एक प्रोफेसर का सिफारशी पत्र लेकर एनडीटीवी में दाखिल हुए थे। उस समय वे प्राइम टाइम एंकर नहीं थे। चिट्ठिया छॉंटा करते थे और राजदीप एडिटर हुआ करते थे। मानक के साथ बातचीत में भी रवीश ने कहा है कि राजदीप उनके एडिटर रहे हैं।

रवीश कुमार नहीं समझ पा रहे जामिया की लाइब्रेरी में क्यों भागे ‘छात्र’: बताने की कृपा करें

बात रवीश कुमार के ‘सूत्रों’, ‘कई लोगों से मैंने बात की’, ‘मुझे कई मैसेज आते हैं’, वाली पत्रकारिता की

प्राइम टाइम एनालिसिस: रवीश कुमार कल को सड़क पर आपको दाँत काट लें, तो आश्चर्य मत कीजिएगा

हिंदूफोबिया एक सच्चाई है, मैंने भी इसे झेला है: अमेरिका की पहली हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड

अंतरराष्ट्रीय मीडिया, वामपंथी गिरोह और कट्टरपंथी मिलकर हिंदुओं के ख़िलाफ़ घृणा फैलाने का काम धड़ल्ले से कर रहे हैं। नतीजा ये है कि आज विश्व के सबसे शक्तिशाली देश और सबसे बड़े लोकतंत्र में भी हिंदू खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। हिंदुओं की लाचारी, उनकी बेबसी और उनके प्रति नफरत फ़ैलाने के बात को अमेरिकी राजनेता तुलसी गबार्ड भी मानती है। तुलसी अमेरिका की पहली हिंदू सांसद हैं। वे उन तीन दावेदारों में भी शामिल हैं जिनमें से डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना जाना है। बकौल तुलसी, हिंदूफोबिया एक सच्चाई है। उन्होंने भी इसे कई बार झेला है। यहॉं तक कि कॉन्ग्रेस चुनाव और राष्ट्रपति उम्मीदवारी के अपने अभियान के दौरान भी।

तुलसी गबार्ड ने डॉ. शीनी अम्ब्राडर (वही डॉ. जिन्होंने हिंदू महिला के साथ उबर ड्राइवर की बदसलूकी का वाकया साझा किया था) का पोस्ट शेयर करते हुए ट्ववीट किया है, “बदकिस्मती से हिंदूफोबिया एक सच है। मैंने कॉन्ग्रेस और राष्ट्रपति उम्मीदवारी के अपने अभियान के दौरान हर बार इसे प्रत्यक्ष तौर पर महसूस किया है। ये तो सिर्फ़ एक उदाहरण है कि हमारे देश में हिंदुओं को क्या झेलना पड़ता है। दुखद तो ये है कि इसके बावजूद हमारे नेता और मीडिया इसे न केवल बर्दाश्त करते हैं, बल्कि इसे और भड़काते हैं। “

गौरतलब है कि तुलसी गबार्ड के इस ट्वीट से पहले बुधवार (मार्च 4, 2020) को यूएस की एक साइकेट्रिस्ट एवं साइकोथेरेपिस्ट शीनी अंब्राडर ने एक हिंदू महिला का अनुभव ट्विटर पर शेयर किया था। डॉ. शीनी ने अपने पोस्ट में पीड़िता का नाम नहीं बताया था। पीड़िता का जो फेसबुक पोस्ट डॉ. शीनी ने शेयर किया था, उसमें वह एक उबर ड्राइवर की बदसलूकी के बारे में बताती नजर आईं, जिसे उन्हें हिंदू होने और हिंदुओं का बचाव करने के कारण झेलना पड़ा। पोस्ट में महिला ने बताया था कि आखिर किस तरह अंतरराष्ट्रीय मीडिया की गलत कवरेज के कारण दिल्ली में हुए दंगों को लोग मुस्लिमों के ख़िलाफ़ मान रहे हैं और न केवल हिंदुओं को विलेन समझ रहे हैं, बल्कि उनके प्रति आक्रमक भी हो रहे हैं।

महिला के मुताबिक, जब उसने उबर बुक की तो ड्राइवर ने पहले सुनिश्चित किया कि वे भारतीय हैं। इसके बाद उसने दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के बारे में बात करनी शुरू की। वह इस बात पर जोर देकर बताने लगा कि भारत में मुस्लिमों को हिन्दू मार रहे हैं। हिन्दू मस्जिदों को तोड़ रहे हैं।

लेकिन, ये सुनने के बाद जब महिला ने उसे समझाने की कोशिश की और कहा कि दंगों के बारे में उसकी सोच सही नहीं है। तो वह महिला की बात सुनकर चुप होने की बजाय उसपर गुस्सा निकालने लगा और थोड़ी देर में उसने महिला को और महिला की बहन को अपनी कैब से उतरने को बोल दिया। ड्राइवर का ऐसा रवैया देखकर महिला ने फौरन पुलिस को बुलाया जिसके बाद वह शांत हुआ।

महिला ने अपनी साथ हुई इस घटना के लिए सीधे तौर पर एकतरफा पत्रकारिता को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने इस घटना को बिंदु में रखते हुए पोस्ट लिखा था और आरोप लगाया था कि दिल्ली दंगों पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की एकतरफा पत्रकारिता से विदेशों में हिंदूफोबिया बढ़ रहा है और लोग हिंदुओं के ख़िलाफ़ गलत धारणा बना रहे हैं।

विकिपीडिया का एडिटर जो मुस्लिम दंगाइयों को बचाने में लगा है: दिल्ली दंगे से लेकर ‘चौकीदार चोर है’ तक

दिल्ली दंगा ग्राउंड रिपोर्ट: छतों से एसिड बरसा रही थीं मुस्लिम औरतें, गुलेल से दाग रहे थे पेट्रोल बम

‘रोड जाम करना ही पड़ेगा’: दिल्ली हिंसा पर वामपंथी प्रोपेगंडा पोर्टलों ने यूँ फैलाया ज़हर, दंगाइयों का किया बचाव

दिल्ली दंगो के गुनहगार, अंकित शर्मा का हत्यारोपित ताहिर हुसैन ने कहा- नार्को टेस्ट करवा लो ,वह खुद हुआ तबाह

पिछले हफ्ते हुए दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में अब तक 50 से भी अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है जबकि करीब 200 लोगों के घायल होने की खबर है। इन्हीं दंगों में आईबी के अंकित शर्मा को नृशंसतापूर्वक मार दिया गया था, जिसमें मुख्य आरोपित बनाए गए निलंबित आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन को आज दिन में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

ताहिर हुसैन के खिलाफ अंकित शर्मा की हत्या के मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वो अबतक फरार चल रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के पहले ताहिर हुसैन ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में कहा कि वह पूरी तरह निर्दोष है और उसका नार्को टेस्ट करवा लिया जाए, वह नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार है। ताहिर हुसैन ने मीडिया से बात करते हुए खुद को ही इन दंगों का पीड़ित बताते हुए कहा कि वह खुद ही इन दंगों से तबाह हो गया है।

ताहिर हुसैन को प्रोपोगंडा वेबसाइट द वायर द्वारा ट्ववीट किए गए वीडियो क्लिप में यह भी कहते सुना जा सकता है कि उसे न्यायपालिका पर भरोसा है और उसे उम्मीद है कि उसे मुस्लिम होने की वजह से टार्गेट नहीं किया जाएगा।

याद रहे कि ये वही ताहिर हुसैन है जिसकी चाँद बाग़ स्थित बिल्डिंग की छत पर से सैंकड़ों मुस्लिम फ़सादियों ने आसपास के हिन्दू घरों और गलियों पर पेट्रोल बमों से, तेज़ाब बमों से और पत्थरों से जबरदस्त हमला बोल दिया था। इसी बिल्डिंग की छत पर से मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं पर हो रहे हमलों के दौरान ताहिर हुसैन खुद भी लाठी लिए नजर आ रहा था, जो कई सारे फुटेज और तस्वीरों में साफ़ तौर पर दिखाई पड़ता है।

इसके अलावा कई प्रत्यक्षदर्शी भी इस बात की गवाही देते हैं कि अंकित शर्मा समेत 3 लोगों को मुस्लिम भीड़ इसी ताहिर हुसैन की बिल्डिंग में खींच ले गई थी।

एक मुलाकात: दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों पर मेजर गौरव आर्या, वैभव सिंह के साथ अजीत भारती की बातचीत

इसमें कोई शक नहीं है कि नागरिकता कानून (CAA) के विरोध के नाम पर दिल्ली में हुई हिंसा हिन्दुओं के खिलाफ करीब तीन महीनों से चली आ रही साजिश का ही नतीजा था। शाहीन बाग़ जैसे षड्यंत्रों पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि यह मात्र प्रयोग हैं। इसके कुछ समय बाद ही यह विरोध अपने पूरे रूप में हिंसक खिलाफत-2 जैसे आंदोलन की शक्ल में बाहर आया।

इस हिंसा में ना सिर्फ हिन्दुओं को चिह्नित करके मारा गया, बल्कि उनके परिवार के साथ बसलूकी भी की गई, परिवार की महिलाओं और बेटियों के साथ अश्लील हरकत करने से लेकर पवित्र मंदिरों को भी हिंसक मुस्लिम भीड़ ने अपना निशाना बनाया। इन दंगों में एक सबसे बड़ा नाम आम आदमी पार्टी नेता ताहिर हुसैन का भी आया है।

दरअसल, जब आम आदमी पार्टी नेता ताहिर हुसैन से पूछा गया कि आखिर उनके घर पर पेट्रोल बम, गुलेल, पत्थर और एसिड कैसे आए तो उन्होंने कहा कि ये सब उन्हें फँसाने की साजिश है। जबकि ग्राउंड रिपोर्ट में स्पष्ट देखा गया कि हिन्दुओं पर हमला करने के लिए पहले से ही उनके घर पर ये सब हथियार पहले से ही रखे गए थे। 

दिल्ली में हुए दंगों पर चर्चा पर सेना से रिटायर्ड मेजर गौरव आर्या मौजूद थे। चर्चा में मौजूद डिफेंसिव ऑफेंस यूट्यूब चैनल चलाने वाले वैभव सिंह ने कहा था कि यहाँ कोई नागरिकता कानून विरोधी प्रदर्शन नहीं था बल्कि पूर्व नियोजित हिन्दू विरोधी दंगा था। चर्चा के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हुई निर्मम हत्या से लेकर दिलबर नेगी की हत्या पर बात की गई।

मेजर गौरव आर्या ने कहा कि सेलेक्टिव तरीके से दंगों की रिपोर्टिंग करने वाले मीडिया वालों को उनके हिसाब से चलने दिया जाना चाहिए, लेकिन बाकी लोग अपने अनुसार जरूर विरोध करें। शाहीन बाग़ पर मेजर आर्या ने कहा कि यह पूरी तरह से गुंडागर्दी ही है क्योंकि कुछ लोगों ने मिल जुलकर व्यवस्था को ठप करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि ताहिर हुसैन जैसे लोगों ने जिस क्रूरता का परिचय दिया असल में वो साबित ही यही करना चाहते हैं कि उन्हें देख कर इतना डर जाना चाहिए।

बातचीत के दौरान मेजर गौरव आर्या ने कहा कि भारत में कट्टरपंथ आज से ही नहीं बल्कि कई सदियों से है। उन्होंने कहा कि इसे साल दर साल संस्थागत करने की कोशिश की जाती रही हैं। यही कश्मीर में किया जाता रहा है और यही प्रयोग अब देशभर में किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अपने अनुभव के बारे में भी बताया।

विस्तृत चर्चा इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं –

फैक्ट चेक: जाफराबाद में हिन्दुओं द्वारा 13 साल की मुस्लिम लड़की के गैंगरेप की ख़बर फर्जी

सोशल मीडिया पर दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के के बारे में मीडिया गिरोह ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया एकाउंट्स भी उनका खूब साथ देते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसी ही एक खबर ट्विटर पर शेयर की जा रही है जिसमें दावा किया गया है कि जाफराबाद में हिन्दुओं ने 13 साल की एक मुस्लिम लड़की के साथ बलात्कार किया।

रिपब्लिक ऑफ बज़ के नाम से एक समाचार वेबसाइट ने मार्च 01, 2020 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें दावा किया गया था कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद इलाके की 13 वर्षीय मुस्लिम लड़की दीबा (Deeba) का नागरिकता कानून के विरोध के दौरान हुई हिंसा में हिंदूओं की भीड़ द्वारा बलात्कार किया गया।

रिपब्लिक ऑफ़ बज़ ने इस खबर का शीर्षक रखा है – “हिंदू मॉब ने 13 साल की एक मुस्लिम लड़की का जाफराबाद में गैंग रेप किया।” इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आरोपित हिंदू भीड़ ने जिस कॉलोनी में दीबा रहती है, वहाँ तबाही मचाई और मुस्लिमों के साथ अत्याचार किए। इसमें आगे लिखा गया है कि जैसे ही उसने भागने की कोशिश की, हिंदू भीड़ के लोगों ने दीबा का पीछा किया और उसे सड़क से ले जाकर उसके साथ सात हिन्दुओं ने सामूहिक बलात्कार किया।

इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि हिन्दुओं ने उस लड़की को ओरल सेक्स और अप्राकृतिक सेक्स के लिए भी मजबूर किया। इस खबर को सोशल मीडिया पर साझा करने वाले कई भारतीय ट्विटर उपयोगकर्ताओं में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम सदस्य जुबेर मैमन भी है, जिन्होंने 1 मार्च को ही रिपोर्ट ट्वीट की थी।

यह फर्जी खबर शेयर करने वालों में सिर्फ ज़ुबैर ही नहीं बल्कि तेलंगाना की ही एक राजनीतिक पार्टी MBT के सदस्य और प्रवक्ता अमजद उल्लाह खान ने भी इसे शेयर किया है।

क्या है हक़ीक़त

वास्तविकता यह है कि यह खबर एकदम झूठी है और ऐसी किसी भी मुस्लिम लड़की के साथ बलात्कार नहीं हुआ। रिपब्लिक ऑफ़ बज द्वारा फीचर फोटो के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर को रिवर्स इमेज सर्च में डालने पर पता चलता है कि यह तस्वीर बांग्लादेश से चलने वाले एक पेज ‘वी आर दी गर्ल्स” नाम के पेज से ली गई है, जिसमें कि हिजाब पहने हुए कई अन्य महिलाओं की भी तस्वीर शेयर की गई हैं।

जफराबाद पुलिस SHO सत्यदेव के साथ बातचीत में भी यह पुष्टि की गई है कि दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में सामूहिक बलात्कार की ऐसी कोई भी घटना घटित नहीं हुई है और उन्होंने इसे फर्जी खबर बताया। इसके बाद यदि
Republic of Buzz नाम की इस वेबसाइट पर जाने पर पता चला यहाँ ऐसी ही तमाम फर्जी हिन्दू और भारत विरोधी प्रोपेगैंडा में शामिल खबरों को प्रकाशित करने वाली वेबसाइट है।

वेबसाइट और इनके फेसबुक पेज की पड़ताल में पता चलता है कि इस पेज को पाकिस्तानी चलाते हैं और पाकिस्तानी सेना का भी खूब गुणगान किया जाता है। यह आर्टिकल लिखने वाली Alila Chophy Naga (अलीला नागा) के फेसबुक प्रोफ़ाइल की तलाश लेने पर पता चलता है कि वो एक ‘नागा अलगाववादी भी है।

‘Republic of Buzz’ के यूट्यूब चैनल पर भी भारत-विरोधी एजेंडा से भरी हुई खबरें देखी जा सकती हैं।

निष्कर्ष

जाफराबाद में हिन्दुओं द्वारा तेरह साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार की खबर एकदम फर्जी है।

ताहिर हुसैन के बचाव में उतरी ‘द वायर’: अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के आरोपित को दिया ‘मंच’

आईबी के अंकित शर्मा की बर्बर हत्या समेत दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के प्रमुख आरोपित, फरार चल रहे आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को आज दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

जहाँ एक तरफ इस समाचार से अंकित शर्मा के परिवार सहित बहुत सारे दंगा पीड़ित हिन्दुओं को कुछ संतोष हासिल हुआ होगा वहीं इसने द वायर समेत कई सारे लेफ्टिस्ट मीडिया संगठनों के लिए काम का लोड बढ़ा दिया। अंकित शर्मा की बर्बर हत्या की विभीषका को दमभर झुठलाने की कोशिशों के बाद अब प्रोपोगंडा साइट द वायर अंकित शर्मा के हत्यारोपी ताहिर हुसैन को निर्दोष सिद्ध करने में जान लगा दी है।

द वायर को दिए अपने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ताहिर हुसैन क्लेम करता है कि वह निर्दोष है और खुद ही साम्प्रदायिक हिंसा का शिकार है। द वायर द्वारा ट्वीट की गई वीडियो क्लिप में ताहिर हुसैन को यह कहते सुना जा सकता है कि उसे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और उसको यह भरोसा है कि उसके साथ मुस्लिम होने के कारण अन्याय नहीं होगा।

आज ऐसा ही कुछ क्लेम इसने आजतक को दिए अपने “एक्सक्लूसिव इंटरव्यू” में भी किया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अंकित शर्मा को दो और लोगों के साथ ताहिर हुसैन की बिल्डिंग में एक मुस्लिम भीड़ खींच कर ले गई थी, जिसकी छत पर लाठी लिए ताहिर हुसैन के साथ पेट्रोल बमों और पत्थरों के ढ़ेर को विभिन्न तस्वीरों और फुटेज में देखा जा सकता है। ताहिर हुसैन की इसी बिल्डिंग की छत से सैंकड़ों इस्लामिक फसादियों ने बगल के हिन्दू घरों और मोहल्ले की गलियों पर पेट्रोल बम, तेज़ाब, और पत्थर से हमले करने के लिए इस्तेमाल की थी।

दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के इस नेता के खिलाफ दफा 302 A के अंतर्गत दयालपुर पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज किया हुआ है। मजे की बात ये है कि जहाँ एकतरफ सभी न्यूज़ चैनल ताहिर हुसैन की गिरफ्तारी की खबर चला रहे हैं वहीं कुछ लेफ्टिस्ट पोर्टल उसे निर्दोष सबित करने में जुट गए हैं।

इससे पहले द वायर ने यह कहा- “ऐसा माना जा रहा है कि अंकित शर्मा की पीट-पीट कर हत्या की गई।”, न सिर्फ अंकित शर्मा के वीभत्स मर्डर को झुठलाने की कोशिश की गई थी बल्कि दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में इस्लामिक भीड़ द्वारा हिन्दुओं पर बरपाये गए कहर को भी नजरअंदाज करने का कुत्सित प्रयास किया था।

लेकिन ‘सीरियल ऑफेंडर’ द वायर की इस करतूत पर अचरज करने की कतई जरूरत इसलिए नहीं है क्योंकि वह किसी न किसी प्रकार शरजील इमाम या ताहिर हुसैन जैसे इस्लामिस्ट और दंगाइयों को एक प्लेटफॉर्म मुहैया करवाता आया है।

इसने अंकित शर्मा के बर्बर मर्डर पर भी तभी कुछ कहा था जब इस संबंध में एक एफआईआर दर्ज की गई थी, और वह भी ताहिर हुसैन को बचाने की कोशिश करते हुए। इस प्रोपोगंडा साइट ने दिल्ली के इन हिन्दू विरोधी दंगों को उलटे मुस्लिमों के खिलाफ हिन्दुओं का हमला कहा जबकि दंगों के गुनहगार, प्लानिंग, दंगों के दौरान हुई बर्बरता यह साबित करती है कि ये दंगे हिन्दुओं के नरसंहार के लिए पूरी तरह सुनियोजित थे।