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होली पर हिंसा की प्लानिंग: UP पुलिस ने 5 साल पुराना रिकॉर्ड खँगाल 250 लोगों को किया गिरफ्तार

मंगलवार (मार्च 10, 2020) को होली और सोमवार मतलब आज (मार्च 9, 2020) को होलिका दहन है। इसके लिए उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। राज्य के मेरठ में सीएए के विरोध में हिंसा के इनपुट मिलने के बाद पुलिस अलर्ट मोड पर है। मेरठ जनपद को तीन सुपर जोन, 9 जोन और 31 सेक्टरों में बाँटकर सुरक्षा की जा रही है। होली पर हुड़दंग करने वालों का पिछले पाँच साल का रिकॉर्ड खँगालकर उनको पकड़ने के लिए पुलिस ने अभियान चला रखा है। इसमें अभी तक 250 बवालियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

होली पर हुड़दंग मचाने की तैयारी करने वाले इन 250 लोगों को पुलिस ने अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों ने पूछताछ में होली पर हिंसा करने की प्लानिंग की बात कबूली है। एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि होली पर हिंसा करने वाले वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होली पर हुड़दंग करने वालों का पाँच साल का रिकॉर्ड खँगालने के बाद ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है।

बताया जा रहा है कि मेरठ जनपद में 1421 जगहों पर होलिका दहन का कार्यक्रम होने वाला है। इनमें से 7 अतिसंवेदनशील इलाके हैं, जबकि 48 स्थान संवेदनशील हैं। इन जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुपर जोन में जोनल मजिस्ट्रेट के साथ एसपी सिटी, एसपी देहात व एसपी क्राइम को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। 6 एडिशनल एसपी, 8 सीओ, 40 इंस्पेक्टर, दो कंपनी आरएएफ, चार कंपनी पीएसी और 1400 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। यह सुरक्षा व्यवस्था 12 मार्च की रात तक लागू रहेगा।

रविवार (मार्च 8, 2020) की शाम शहर के एसपी डॉ अखिलेश नारायण सिंह के नेतृत्व में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस ने पैदल मार्च निकाला। इससे पहले एसएसपी अजय साहनी को सूचना मिली थी कि कुछ अराजत तत्व नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर होली पर हिंसा भड़का सकते हैं, जिसके बाद उन्होंने शनिवार (मार्च 7, 2020) देर रात जनपद के सभी थानेदारों को संदिग्ध लोगों के गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। इसके बाद सभी थानेदारों ने अपने-अपने इलाकों में दबिश दी और 250 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया।

हिंदू युवा वाहिनी के UP अध्यक्ष पर हमला, घात लगाकर बैठे 4-5 अराजक तत्वों ने काफिले पर किया पथराव

उत्तर प्रदेश में हिंदूवादी नेताओं पर हमले की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले साल कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या ने सबको झकझोर दिया था और अभी हाल में रणजीत बच्चन की हत्या से प्रदेश सकते में आ गया था। अब ऐसे ही हमले का एक और मामला सामने आया है। घटना आजमगढ़ की है। यहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संगठन हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश राय के काफिले पर कल रात मेंहनगर में पथराव किया गया।

पथराव की इस घटना में बैठे प्रदेशाध्यक्ष सहित उनके समर्थक बाल-बाल बचे। हालाँकि इस पत्थरबाजी के कारण उनका वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के फौरन बाद प्रदेश अध्यक्ष ने पुलिस को इस संबंध में सूचना दी और पुलिस बिना कोई देरी किए छानबीन में जुट गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राकेश राय जौनपुर जिले के केकरात स्थित सेनपुर गाँव में एक कार्यक्रम में भाग लेने गए थे। मगर कार्यक्रम के बाद लौटते हुए उनके काफिले पर ये हमला हो गया। बताया जा रहा है कि देर रात जब राकेश राय अपने काफिले के साथ मेंहनगर थाना क्षेत्र पहुँचे, तभी गौरा गाँव में मौजूद कुछ अराजक तत्वों ने उन पर हमला कर दिया।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, हिंदू युवा वाहिनी नेता राकेश राय ने बताया कि नहर के किनारे करीब 4 से 5 की संख्या में अराजक तत्वों ने उनके काफिले पर पथराव किया। इस हमले में वे और उनके कार्यकर्ता बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी गाड़ी का शीशा पूरी तरह से चकनाचूर हो गया।

इस मामले की जाँच में जुटे एसपी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने बताया कि मौक़े उन्हें पत्थर और चप्पलें मिली हैं। फिलहाल पुलिस इनकी जाँच कर रही है। इस घटना को अंजाम देने के पीछे जिसका भी हाथ होगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

‘…भारत में रहना है, तो मराठी सीखो’ – PM मोदी से वीरता पुरस्कार पा चुकी बच्ची के साथ शिवसेना नेताओं की बदसलूकी

अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भी नेता राजनीति करने से बाज नहीं आते हैं। इसी राजनीति का शिकार इस साल का राष्‍ट्रीय बहादुरी पुरस्‍कार जीतने वाली जेन सदावर्ते हुई हैं। सदावर्ते ने महिला दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिवसेना नेता पर उन्‍हें अपमानित करने का आरोप लगाया है। हालाँकि, शिवसेना की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई सफाई नहीं दी गई है।

जेन सदावर्ते ने कहा कि महिला दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में शिवसेना नेताओं द्वारा उन्हें भाषण देने सिर्फ इसलिए रोक दिया गया क्योंकि वो मराठी में नहीं बोल रही थीं। उन्होंने कहा, “जब मैंने हिंदी और अंग्रेजी में बात की, तो हर किसी के पास मेरा संदेश पहुँचा। लेकिन मुझे नहीं पता कि मंच पर बैठे लोगों के साथ क्या हुआ। वे अचानक से गुस्सा हो गए और मुझ पर हमला किया। मंच पर पैनल में शिवसेना नेता भी मौजूद थे।”

सदावर्ते ने कहा, “मैं उन मुद्दों के बारे में बात कर रही थी जो भारत में गलत हो रहे हैं जैसे कि शनिवार और रविवार को बच्चों को मध्याह्न भोजन नहीं दिया जा रहा है। मैंने ट्रांसजेंडर को समानांतर आरक्षण दिए जाने के बारे में बात की है। ये वो मुद्दे हैं, जिसके बारे में मैंने बात की।” वो आगे कहती हैं, “मुझे नहीं पता कि वहाँ मौजूद विधायकों और शिवसेना के प्रतिनिधियों के साथ क्या हुआ। उन्होंने मुझे अपमानित करना शुरू कर दिया। वे मंच पर झूठ बोलने लगे कि हमने आरक्षण दिया है और दावा किया है कि वे उस राज्य के हैं और वो हमसे बेहतर जानते हैं।” 

सदावर्ते ने कहा कि उन्हें अपनी इच्छा से किसी भी भाषा में बोलने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, “वे लोग हमारे अभिव्यक्ति के अधिकार का शोषण कर रहे हैं। मेरे पास अंग्रेजी और हिंदी दोनों संघीय भाषा में बोलने का अधिकार है। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं भारत में रहना चाहती हूँ तो मुझे मराठी सीखनी पड़ेगी।” उन्होंने कहा कि वो जिस भाषा को बोलना चाहती हैं, उसे बोलने का उनको पूरा अधिकार है।

बता दें कि सदावर्ते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीरता पुरस्कार से सम्मानित कर चुके हैं। वो सातवीं कक्षा में पढ़ती हैं, लेकिन समाज में फैली कुरीतियों को लेकर उनका नजरिया किसी वयस्‍क व्‍यक्ति से कम नहीं है। वह समाज की बुराइयों को लेकर आवाज उठाती रहती हैं। इससे पहले भी उन्होंने शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन के दौरान 4 महीने की बच्ची की मौत पर आवाज उठाते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बोबडे को पत्र लिखा था और इस मामले पर संज्ञान लेने के लिए कहा था।

जेन ने सीजेआई बोबडे को भेजे पत्र में लिखा था कि जनवरी 30, 2020 को शाहीन बाग में एक बच्ची की मौत पर संज्ञान लेते हुए ऐसे विरोध प्रदर्शनों में बच्चों को शामिल किए जाने पर रोक लगाई जाए। जिस पर सीजेआई ने संज्ञान लिया था।

प्रियंका गाँधी कनेक्शन के बाद अब सेक्रेट्री का खुलासा: कपूर की बेटियों वाली कंपनी से होता था लोन-दलाली का खेल

ईडी ने रविवार (मार्च 8, 2020) को राणा कपूर की रिमांड एप्लीकेशन को कोर्ट में जमा कर दिया। इस एप्लीकेश में ईडी ने राणा कपूर के सेक्रेट्री का हवाला देकर बताया कि राणा कपूर के सचिव ने ही DHFL के अधिकारियों के साथ कॉर्डिनेट किया था। जिसमें DOIT अर्बन वेंचर्स को कथित रूप से 600 करोड़ रुपए वापस मिले। बता दें कि DOIT अर्बन वेंचर्स को राणा कपूर की तीनों बेटियों द्वारा संचालित किया जाता है।

ईडी के अनुसार, यस बैंक द्वारा डीएचएफएल समूह की कंपनियों को 4,450 करोड़ रुपए के डिबेंचर निवेश और ऋण के बदले में ये उल्लेखित पैसा दिया गया था। इसके अलावा ईडी का यह भी आरोप है कि कपूर ने यस बैंक में अपने पद का कई मामलों में गलत इस्तेमाल करके करीब 2000 करोड़ रुपए अपनी कंपनी और अपने परिवार के सदस्यों द्वारा चलाई जा रही कंपनियों के लिए किकबैक (दलाली) के रूप में हासिल किए।

जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर, दीवान हाउसिंह (डीएचएफएल) और डीओआईटी अर्बन वेंचर्स कंपनी के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। इसके बाद ईडी और अन्य जाँच एजेंसियों ने इनके ख़िलाफ़ पड़ताल की और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में कपूर को गिरफ्तार कर लिया।

ईडी के मुताबिक यस बैंक पर यह भी आरोप है कि उसने अप्रैल-जून 2018 के बीच डीएचएफएल में 3,700 करोड़ रुपए निवेश किए और बाद में 750 करोड़ रुपए DHFL समूह की अन्य कंपनी को दिए। लेकिन बाद में बैंक ने धन की वसूली के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए।

कपूर (62) से इस संबंध में पूछताछ की जा रही है। जिसमें मालूम हुआ है कि डीओआईटी अर्बन वेंचर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड कपूर परिवार की ही कंपनी है और उसे घोटाले से प्रभावित गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी डीएचएफल को 3000 करोड़ रुपए का कर्ज देने के बाद 600 करोड़ रुपए की राशि मिली, जो कथित तौर पर रिश्वत थी।

इसके अतिरिक्त डीएचएफएल के अध्यक्ष राजेंद्र मिराशी ने अपने बयान में बताया कि ED कि DOIT अर्बन वेंचर्स ने डीएचएफएल को 735 करोड़ रुपए के वैल्यूएशन के साथ पांच प्रॉपर्टीज़ दी। लेकिन बाद में मालूम पड़ा कि संपत्ति की खऱीद प्राइज केवल 40 करोड़ रुपए ही है। यानी डीएचएफएल से एक कंपनी को लोन जारी करवाने के लिए 40 करोड़ की संपत्ति की कीमत को बढ़ा-चढ़ाकर 735 करोड़ रुपए का बताया गया। जिसमें आरोप है कि कंपनियों से मिली रिश्वत से राणा कपूर एंड फैमिली ने संपत्ति में 2000 करोड़ रुपए का निवेश किया। हालाँकि, अभी इन तमाम आरोपों पर राणा कपूर ने चुप्पी साध रखी है। हिरासत में जान से पहले जब मीडिया ने उनसे पूछताछ करने की कोशिश की तो भी वे चुप्पी साधते नजर आए।

मिराशी के अनुसार, वह कपूर की तीनों बेटियों से कभी नहीं मिले। लेकिन उन्होंने राणा कपूर की सीनियर एक्जिक्यूटिव सेक्रेट्री से कॉर्डिनेट किया था। उनके अनुसार, कपिल वाधवान या उनके असिस्टेंट एस गोविंदन ने ही मिराशी को ट्रांजेक्शन करने के लिए निर्देश दिए।

मिराशी ने ईडी को बताया कि उसके बाद से उनके बीच कोई बिजनेस एक्टिविटी नहीं हुई और न ही कोई राजस्व आता दिखाई दिया। मगर फिर फिर भी 600 करोड़ रुपए का ऋण इस तरह से संरचित किया गया था, जैसे 2023 में एकल भुगतान होना हो। लेकिन वास्तविकता में अब तक सिर्फ़ उनसे ब्याज लिया जाता रहा।

इन सब पहलुओं के अलावा ईडी के अधिकारी के मुताबिक, जाँच के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे साफ होता है कि कपूर परिवार के पास लंदन में भी कुछ संपत्ति है। अब ईडी इस संपत्ति को हासिल करने के लिए इस्तेमाल की कई रकम का सोर्स तलाश रही है। ईडी ने कपूर के खिलाफ कार्रवाई शुक्रवार को शुरू की थी। इसी दिन देर रात को उनके घर पर छापा मारा था। जाँच एजेंसी की टीम ने मुंबई के समुद्र महल टॉवर स्थित कपूर के घर पर देर रात तक छानबीन की थी।

बता दें कि इससे पहले ने सीबीआई, दीवान हाउसिंग फाइनेंस लि (DHFL) पर उत्तर प्रदेश में बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के भाविष्य निधि कोष से 2200 करोड़ रुपए के गबन के आरोप में पहले ही मुकदमा कायम कर चुकी है। इसके साथ ही इस बैंक के स्वामित्व का पुनर्गठन करने की योजना पर काम भी शुरू कर दिया है ताकि बैंक को बचाया जा सके और इसमें धन जमा करने वाले इसके ग्राहकों का हित सुरक्षित किया जाएगा। आरबीआई की योजना के मसौदे के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक यस बैंक में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगा।

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‘न तो BJP ने बंधक बनाया, न ही कोई लालच दिया गया… मंत्री नहीं बना, इसलिए गुस्से में तीर्थ यात्रा पर गया’

मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से चल रहे सियासी ड्रामे ने मुख्यमंत्री कमलनाथ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य में अब उन विधायकों की मान-मनौव्वल की जा रही है, जिनकी पिछले एक साल से मंत्री और अधिकारी तक नहीं सुन रहे थे। इस बीच 5 दिन से लापता अनूपपुर से कॉन्ग्रेस विधायक बिसाहू लाल सिंह रविवार (मार्च 8, 2020) को भोपाल लौट आए हैं। यहाँ वो मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिले और अपनी बात रखी।

हालाँकि इस दौरान उन्होंने इस बात को माना कि वरिष्ठ होने के बावजूद कमलनाथ सरकार में मंत्री पद न मिलने को लेकर वो नाराज हैं। उन्होंने कमलनाथ सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “जब जूनियर्स को मंत्री बनाया जाता है और कई बार विधायक होने के बावजूद आपको मंत्री नहीं बनाया जाता है, तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। अगर आपके हितों की रक्षा नहीं की जाती है, तो इसमें गुस्सा होने में कुछ भी गलत नहीं है।”

बता दें कि पिछले दिनों वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया था और मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने भी आरोप लगाया कि बिसाहू लाल सिंह पिछले तीन दिनों से बेंगलुरु में भाजपा के चंगुल में फँसे हुए थे। हालाँकि बिसाहू लाल सिंह ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्हें न तो बीजेपी ने बंधक बनाया था और न ही किसी तरह का कोई लालच दिया था, बल्कि वो तीर्थ यात्रा के लिए दक्षिण भारत की मंदिरों में गए थे। 

मुख्यमंत्री से मिलने के बाद उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि वो चार दशकों से कॉन्ग्रेस के साथ हैं और अब भाजपा में शामिल नहीं होना चाहते। वहीं जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें मंत्री पद का आश्वासन दिया गया है, तो उन्होंने सवाल को टाल दिया, लेकिन कहा कि वह मंत्री बनने के अवसर का स्वागत करेंगे, जब मौका आएगा, तब देखेंगे।

बिसाहू लाल सिंह ने दावा किया कि इस तीर्थ यात्रा के दौरान भी वो लगातार अपने परिवार के संपर्क में थे। जब उनसे सवाल किया गया कि उनके बेटे ने भोपाल के एक पुलिस स्टेशन में उनके लापता होने की रिपोर्ट लिखाई थी तो उन्होंने कहा कि यह कुछ नेताओं की साजिश थी। घरवालों ने उनके दबाव में ऐसा किया लेकिन इसके पीछे किसका हाथ है, इसके बारे में वो नहीं बता सकते।

गौरतलब है कि एक दिन पहले शनिवार (मार्च 7, 2020) को गायब विधायकों में से एक सुरेंद्र सिंह शेरा भी भोपाल पहुँच गए थे। राज्य के बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक शेरा दोपहर की फ्लाइट से दिल्ली से वापस लौटे। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें अगवा नहीं किया गया था। वो अब भी कॉन्ग्रेस के साथ हैं। हालाँकि फिलहाल कॉन्ग्रेस विधायक एंदल सिंह कंसाना और हरदीप डंग को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई है।

गायब हुए 10 विधायकों में से अब केवल कॉन्ग्रेस के दो विधायक हरदीप सिंह डंग एवं रघुराज कंसाना ही बचे हैं, जो अब तक गायब हैं। माना जा रहा है कि वे वर्तमान में बेंगलुरु में हैं। इसी बीच, मध्यप्रदेश के गृह मंत्री बाला बच्चन ने यहाँ संवाददाताओं को बताया, “बाकी दोनों विधायकों को भी जल्द ही वापस लाया जाएगा।” हालाँकि, हरदीप सिंह अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को पहले ही भेज चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार (3 मार्च, 2020) को 10 विधायक गायब हो गए थे, जिनमें दो बसपा, एक सपा, एक निर्दलीय एवं बाकी कॉन्ग्रेस के विधायक थे। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि भाजपा नेता इन विधायकों को हरियाणा के एक होटल में ले गए हैं और कमलनाथ की सरकार को गिराने के लिए उन्हें करोड़ों रुपए का आफर दे रहे हैं। हालाँकि वापस आए सभी विधायकों ने इस आरोप को खारिज कर दिया है।

बता दें कि 2 विधायकों का निधन होने के बाद अभी मध्य प्रदेश की 288 सदस्यीय विधानसभा में फ़िलहाल कॉन्ग्रेस के 114 विधायक हैं और वो निर्दलीयों के समर्थन से सरकार चला रही है। 4 निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा विधायक के सहारे कमलनाथ की सरकार चल रही है। बसपा का एक विधायक पार्टी से निलंबित किया जा चुका है। भाजपा के पास 107 विधायक हैं और कॉन्ग्रेस के पास 121 विधायकों का समर्थन है।

2 परिवार से आगे निकली J&K की राजनीति: PDP, NC, कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री, MLA ने बना ली ‘अपनी पार्टी’

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी छोड़कर सैयद अल्ताफ बुखारी ने ‘अपनी पार्टी’ के गठन का एलान किया। रविवार (8 मार्च 2020) को बुखारी ने अपनी पार्टी की घोषणा करते समय कहा कि उनकी पार्टी का एकमात्र एजेंडा जम्मू कश्मीर का विकास है। इस पार्टी में न सिर्फ PDP बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस के भी 30 से ज्यादा नेता शामिल हुए हैं। नई नवेली पार्टी में पूर्व मंत्री से लेकर कई पूर्व विधायक भी हैं। अल्ताफ बुखारी की इस नई पार्टी का एलान बुखारी के लाल चौक स्थित आवास पर किया गया।

इससे पहले शनिवार को पार्टी से जुड़ने वाले नेताओं की अहम बैठक हुई, जिसमें नए दल की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। इस नई पार्टी के अस्तित्व में आने से पीडीपी को तगड़ा झटका लगा है। ‘अपनी पार्टी’ के गठन के बाद जम्मू कश्मीर की राजनीति को 2 परिवारों की जकड़ से निकाल आगे ले जाने का संकल्प लिया गया। साथ ही 370 पर सदा के लिए रोने के बजाय आगे बढ़ने पर भी बल दिया गया।

पार्टी बनाने की घोषणा करते के बाद मीडिया से बातचीत में बुखारी ने कहा कि यह एक बहुत ही खुशी की बात है कि हमने आखिरकार अपनी पार्टी बना ली है और इसे ‘अपनी पार्टी’ के रूप में जाना जाएगा। बुखारी ने कहा कि ये पार्टी आम लोगों की पार्टी है, जो आम लोगों ने बनाई है। ये किसी परिवार की बनाई पार्टी नहीं है और इसका अध्यक्ष कोई भी इंसान दो कार्यकाल से ज्यादा के लिए नहीं हो सकता। उनके अनुसार, “हम पर बहुत सारी जिम्मेदारी है, क्योंकि उम्मीदें और चुनौतियाँ बहुत हैं। मैं जम्मू और कश्मीर के लोगों को विश्वास दिलाता हूँ कि मेरी इच्छाशक्ति मजबूत है।”

प्रेस से बात करते वक्त आर्टिकल 370 और नेताओं की नजरबंदी आदि सवालों पर बुखारी ने खुल कर अपनी राय रखी। पीडीपी की सरकार में मंत्री रहे अल्ताफ बुखारी ने जम्मू कश्मीर के तीन पूर्व सीएम सहित अन्य नेताओं की गिरफ्तारी पर कहा कि लोकतंत्र में नेताओं को नजरबंद रखना सही नहीं है। याद रहे कि आर्टिकल 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा खत्म किए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट देने के बाद से राज्य में हिंसा की संभावना को देखते हुए कई नेता नजरबंद रखे गए हैं, जिनमें फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। वहीं 370 के सवाल पर बुखारी ने कहा कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है, जिसके फैसले का हम सभी को इन्तजार है, लिहाजा इस पर अभी बात करने की कतई जरूरत नहीं समझता।

बुख़ारी ने अपनी पार्टी के एजेंडे पर कहा, “राज्य के लोगों के आत्मसम्मान और सम्मान की रक्षा करने, कश्मीरी पंडितों की गरिमापूर्ण वापसी, युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण की माँग ‘अपनी पार्टी’ करेगी।” बुखारी ने कहा कि यह सूबे के आम लोगों की पार्टी है, इसलिए इसका नाम ‘अपनी पार्टी’ रखा गया है। और उनकी पार्टी लोगों की तर्कसंगत आकांक्षाओ का ध्यान रखेगी। बकौल बुखारी उनकी पार्टी ऐसा कोई वादा नहीं करेगी, जो सच पर आधारित नहीं हो।

जम्मू कश्मीर के “प्रधानमंत्री” रह चुके बख्शी गुलाम मोहम्मद से अपनी तुलना पर पीडीपी के पूर्व हैवी वेट नेता अल्ताफ बुखारी ने जवाब दिया- अगर बख्शी साहब (बख्शी गुलाम मोहम्मद) के साथ मेरी तुलना की जाती है तो ठीक है, मुझे याद आता है कि बख्शी साहब का पॉलिटिकल और इकोनॉमिक विजन था। उसी विजन को आज उभारने की जरूरत है।

जम्मू-कश्मीर के आर्थिक हालातों का जिक्र करते हुए बुखारी ने कहा कि चाहे छोटा व्यवसायी हो या बड़ा, सबकी हालत खराब है। उन्होंने कहा कि हम चुप बैठते लेकिन मेरे जमीर ने मुझे यह इजाजत नहीं दी। 5 अगस्त के बाद से जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों के सवाल पर बुखारी ने ऐसे सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की माँग की।

दिल्ली की राजनीति से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि हम इसे इस तरह नहीं देखते कि वहाँ कौन राज कर रहा है, हमारे लिए वहाँ जो भी है, वो भारत सरकार है, जिसके साथ हमें मिलकर चलना है। पार्टी में शामिल हुए और आगे शामिल होने वाले नेताओं से जुड़े सवाल पर बुखारी ने कहा कि हमारी पार्टी ओल्ड एंड यंग चेहरों का मिक्स्चर है। पार्टी में अनुभवी और युवाओं की जरूरत है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीडीपी से निष्कासित अल्ताफ बुखारी के निवास पर कल शनिवार शाम को इस नव गठित ‘अपनी पार्टी’ के कोर ग्रुप की बैठक हुई थी, जिसमें पार्टी के संविधान और एजेंडे को सलाह मशविरे के बाद अंतिम रूप दिया गया था। अल्ताफ बुखारी को पार्टी का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पूर्व कृषि मंत्री गुलाम हसन मीर ने पेश किया। जिसका समर्थन नेकां से औपचारिक इस्तीफा देने वाले पूर्व एमएलसी विजय बकाया ने किया।

‘अपनी पार्टी’ में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस व अन्य कई दलों के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक शामिल हुए हैं। अपनी नई पार्टी के गठन की घोषणा के पहले बुखारी ने सभी महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आज के दिन ही नहीं, बल्कि महिलाओं को हर दिन इज्जत दी जानी चाहिए।

एंटी-CAA की आड़ में मुस्लिम युवाओं को बहला कर फिदायीन हमले का प्लान: कश्मीरी पति-पत्नी गिरफ्तार

दिल्ली के जामिया नगर से दिल्ली पुलिस ने एक दम्पति को गिरफ्तार किया। कश्मीर के रहने वाले इस दम्पति पर आईएस के खुरासान मॉड्यूल से संबंध रखने का आरोप है। रविवार (8 मार्च, 2020) की सुबह इनकी गिरफ्तारी के बाद इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह दम्पति आईएस-खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) के आला आतंकियों से सम्पर्क में था और वर्तमान में नए नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों का फायदा उठा, मुस्लिम युवाओं को भड़का कर आतंकी कार्यवाही करने के लिए उकसा रहा था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया, “कश्मीर का रहने वाला दम्पति जहाँजैब सामी और उसकी पत्नी हिंदा बसीर बेग को आज हिरासत में लिया गया है। हम औपचारिकता पूरी कर उन्हें जेल भेजेंगे।”

जहाँजैब सामी नामक यह व्यक्ति अफगानिस्तान के आईएसकेपी संगठन के वरिष्ठ सदस्यों के साथ सम्पर्क रखने के कारण भारतीय इंटेलिजेंस की नजरों में आया। यह संगठन अफगानिस्तान में आईएस का सहयोगी है। ऐसा मालूम पड़ता है कि यह व्यक्ति फिदायीन हमले की तैयारी में था और इसके लिए हथियारों को भी जमा करने की कोशिश में था।

इंटेलिजेंस के अधिकारियों के अनुसार जहाँजैब सामी आईएस खुरासान विंग के पाकिस्तानी कमांडर हुजैफा अल बाकिस्तानी के सम्पर्क में था, जिसने कश्मीरी युवाओं को रेडिकलाइज कर आतंकी संगठन ज्वाइन करवाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

पिछले साल जुलाई में हुजैफा अल बाकिस्तानी की एक ड्रोन हमले में अफगानिस्तान में मौत हो गई थी, जिसकी मौत की पुष्टि आईएस की मीडिया विंग ने “भारतीय एजेंसीज की रातों की नींद उड़ा देने वाले” के रूप में की थी। हुफैजा पहले लश्कर ए तैयबा के साथ जुड़ा हुआ था, जिसने बाद में आईएस ज्वाइन कर ली थी।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर PM मोदी के ट्विटर अकाउंट को संभालने वाली 7 महिला अचीवर्स

आज रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर देश की 7 महिलाओं ने पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट के जरिए अपनी कहानियों को देश के लोगों तक पहुँचा उन्हें प्रेरित करने का काम किया। पिछले हफ्ते एक अस्पष्ट से ट्वीट में मोदी ने सोशल मीडिया एकाउंट्स को त्यागने की बात कही थी, जिसके बाद तरह तरह की अटकलों का बाजार गर्म था। लेकिन एक दिन बाद पीएम मोदी ने अपनी मंशा साफ़ करते हुए बताया था कि उनका इरादा 8 मार्च को एक दिन के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट को उन महिला अचीवर्स के सुपुर्द करने का है, जिनकी कहानियाँ हमें प्रेरित करती हैं।

आज सुबह देश की महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने कहा कि जैसा मैंने कुछ दिन पहले कहा था, आज मेरा सोशल अकाउंट 7 महिलाओं के पास रहेगा, जो अपनी प्रेरणादायक कहानियाँ साझा करेंगीं और शायद आपसे मेरे सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए संवाद भी स्थापित करेंगी।

जिन 7 महिलाओं को आज पीएम मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने का मौका मिला, वो सभी अलग अलग क्षेत्रों से संबंध रखती हैं। इनमें जल संरक्षण से लेकर दिव्यांग जनों के लिए काम करने वाली स्त्रियाँ भी शामिल हैं। मोदी ने इन सातों महिलाओं का एक संक्षिप्त वीडियो अपने ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया।

ये रहीं वे 7 स्त्रियां जिन्होंने आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट का संचालन किया:

स्नेहा मोहनदास

पीएम मोदी का ट्विटर अकाउंट संचालित करने वाली पहली महिला एचीवर आज चेन्नई की स्नेहा मोहनदास रहीं जिन्होंने ‘फूडबैंक’ नामक संगठन की स्थापना की है। जो बेघरबार लोगों तक भोजन पहुँचाने का काम करता है। स्नेहा मोहनदास ने अपनी इस यात्रा को साझा करते हुए लोगों से भूखों की मदद कर भूखविहीन ग्रह के निर्माण में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने अपनी इस प्रेरक जीवन यात्रा के पीछे अपनी माँ के योगदान को याद किया जिन्होंने उनमें भूखों को खाना खिलाने की आदत विकसित की थी।

मालविका अय्यर

पीएम मोदी का ट्विटर अकाउंट उपयोग कर अपनी कहानी देश के साथ साझा करने वाली दूसरी महिला मालविका अय्यर थीं, जिन्होंने 13 साल की उम्र में भयानक बम ब्लास्ट में अपने हाथों को खो दिया था। बम ब्लास्ट में अपने हाथ गँवाने और पैरों का काफी नुक्सान देखने के बाद भी मालविका ने अपनी हिम्मत और मानसिक मजबूती के दम पर पीएचडी पूरी करने में सफलता प्राप्त की। मालविका ने पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट के जरिए देश के युवाओं से दिव्यांगों और दिव्यांगता के प्रति अपने दृष्टिकोण में सुधार लाने की अपील की।

आरिफा

तीसरी महिला आरिफा हैं, जिन्होंने कश्मीर में महिला कारीगरों की जिंदगी बदलने का काम किया है। आरिफा कश्मीर की पारम्परिक नमदा बुनकर हैं। नमदा बुनकर ऊन के कार्पेट बनाती हैं। कश्मीर की इस लुप्त होती कला को आरिफा ने नया जीवन दिया है।

कल्पना

कल्पना हैदराबाद की हैं जो आर्किटेक्ट हैं। ये रेन वाटर हार्वेस्टिंग के क्षेत्र में काम कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण करने की जरूरत है। इसके लिए हमें जल के पुनर्चक्रण, झीलों को बचाना, वर्षा जल का संचयन आदि आदि के विषय में जागरूकता पैदा करनी होगी।

विजया पवार

महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके से आने वालीं विजया पवार ने बंजारा समुदाय की गोरमाटी कला और हस्तशिल्प पर अपनी बात रखी।

विजया ने कहा, “गोरमाटी कला को बढ़ावा देने के लिए नरेंद्र मोदी जी ने न केवल हमें प्रोत्साहित किया बल्कि हमारी आर्थिक सहायता भी की। ये हमारे लिए गौरव की बात है। इस कला के संरक्षण के लिए मैं पूरी तरह से समर्पित हूँ और महिला दिवस के अवसर पर गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ।”

कलावती

कानपुर की कलावती देश की बहन, बेटी और बहुओं को संदेश देतीं हैं कि समाज को आगे ले जाने के लिए ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी निष्फल नहीं होता।

कलावती लिखती हैं, “मैं जिस जगह पर रहती थी, वहाँ हर तरफ गंदगी ही गंदगी थी। लेकिन दृढ़ विश्वास था कि स्वच्छता के जरिए हम इस स्थिति को बदल सकते हैं। लोगों को समझाने का फैसला किया। शौचालय बनाने के लिए घूम-घूमकर एक-एक पैसा इकट्ठा किया। आखिरकार सफलता हाथ लगी। स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता जरूरी है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने में थोड़ा समय जरूर लगा। लेकिन मुझे पता था कि अगर लोग समझेंगे तो काम आगे बढ़ जाएगा। मेरा अरमान पूरा हुआ, स्वच्छता को लेकर मेरा प्रयास सफल हुआ। हजारों शौचालय बनवाने में हमें सफलता मिली है। अगर कोई कड़वी भाषा बोलता है तो उसे बोलने दीजिए।अगर अपने लक्ष्य को पाना है तो पीछे मुड़कर नहीं देखा करते हैं।”

वीणा देवी

“जहाँ चाह वहाँ राह… इच्छा शक्ति से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। मेरी वास्तविक पहचान पलंग के नीचे एक किलो मशरूम की खेती से शुरू हुई थी। लेकिन इस खेती ने मुझे न केवल आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाकर एक नया जीवन दिया।”

मुंगेर की वीणा देवी आगे अपनी कहानी बताते हुए कहती हैं- “आज महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अगर देश की नारी शक्ति ठान ले तो घर के अपने कमरे से ही अपनी यात्रा शुरू कर सकती है। इसी खेती की वजह से मुझे सम्मान मिला। मैं सरपंच बनी। मेरे लिए खुशी की बात है कि अपने जैसी कई महिलाओं को ट्रेनिंग देने का अवसर भी मिल रहा है।”

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हिंदू के घर पर कब्जा, 90 मजहबी दंगाई और 6 घंटे पत्थरबाजी व हमला: नए विडियो से न्यूज़लॉन्ड्री का दावा दोबारा फुस्स

जब मीडिया का एक बड़ा वर्ग दंगाई मजहबी भीड़ के महिमामंडन में लगा है और हिन्दुओं को बदनाम कर रहा है, हम आपका ध्यान ‘स्वराज्य मैग’ की स्वाति गोयल शर्मा के एक ट्वीट थ्रेड पर दिलाना चाहेंगे, जो वामपंथी मीडिया के प्रोपेगेंडा को सबूतों के साथ काट रहा है। स्वाति द्वारा ट्वीट किए गए वीडियोज में पहला वीडियो तब का है, जब आईबी में कार्यरत अंकित शर्मा की हत्या नहीं हुई थी। उनके गायब होने से 1 दिन पहले के वीडियो में दिख रहा है कि शोभराम नामक एक दलित के घर को आग के हवाले कर दिया गया है। उसी इमारत में सबसे नीचे एक रिक्शावाला और एक फर्नीचर दुकान का गार्ड रहता था, जिसके घर को जला डाला गया।

नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे ग़रीबों के घर धू-धू कर जल रहे हैं और ताहिर हुसैन के घर से निकले गुंडों का इसमें हाथ है। वो गुंडे गेट के पास दिख रहे हैं। दलित शोभराम रोते हुए पूछते हैं कि आखिर उनका कसूर क्या था कि न सिर्फ़ उनके सामान बल्कि सारे कागज़ात भी जला डाले गए। वो कहते हैं कि ‘उनलोगों’ ने काग़ज़-कागज़ की रट लगा रखी है लेकिन उनके तो सारे कागज़ ‘उन्हीं लोगों’ ने जला दिए। देखें वीडियो और ट्वीट:

शोभराम कहते हैं कि उनके घर में कुछ भी नहीं बचा, कपड़े तक भी जल गए। जब आग लगी, तब घर में 2 साल की एक बच्ची भी थी। लगभग सारे समान जल गए। टीवी, कूलर और संदूकों से लेकर गैस चूल्हे तक जल गए। आग काफ़ी दे तक लगी रही। बाद में उन्होंने बुझाया। दलित शोभराम बताते हैं कि ये वही घर था, जहाँ वो पिछले 30 वर्षों से रह रहे हैं। घर के दरवाजे तक जल गए। उस इमारत के बारे में लोगों ने कहा कि वो कभी भी गिर सकती है। वो कहते हैं कि अब एक ग़रीब आदमी इतना सब कुछ कैसे झेलेगा?

जब उनके घर में आग लगी हुई थी, तब आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद (अब निलंबित) ताहिर हुसैन के गुंडे लगातार पत्थरबाजी कर रहे थे। आग लगाने के बाद भी उनका जी नहीं भरा था और उस तरफ़ से लगातार हमले होते रहे। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में दंगाइयों की गुंडागर्दी का दृश्य देखें:

उसी मोहल्ले में रहने वाले शोभराम और बिजेंद्र के घरों के बीच में मंदिर है। बिजेंद्र ने बताया कि दंगाई भीड़ ने उनके घर की छत को ही हमले के लिए बेस बना लिया और वहाँ कब्ज़ा कर लिया। बिजेंद्र का घर मंदिर से सटा हुआ ही है। मंदिर पर बुरी तरह पथराव किया गया। पुजारी जी अपने परिवार को लेकर घर में बंद होने को मजबूर हो गए थे। बिजेंद्र ने बताया कि छत पर क़रीब 90 आदमी थे। पत्थर ढो-ढो कर लाए जा रहे थे। हालाँकि, न्यूज़लॉन्ड्री ने दंगाइयों को बचाने के लिए दावा कर दिया कि मंदिर पर हमले ही नहीं हुए।

चश्मदीद बिजेंद्र बताते हैं कि मंदिर पर पूरे 6 घंटे तक हमले किए गए लेकिन वामपंथी मीडिया (ख़ासकर न्यूज़लॉन्ड्री) वैसे ही उन दंगाइयों को बचाने में लगा हुआ है, जैसे हिन्दुओं का दमन करने वाले औरंगज़ेब और अल्लाउद्दीन खिलजी जैसे राजाओं का महिमामंडन किया जाता है। क्या मंदिर पर 6 घंटे तक लगातार पत्थरबाजी करना, उसकी छत पर चढ़ जाना और नुकसान पहुँचाना हमला नहीं कहलाता है? हमला तभी कहलाएगा या न्यूज़लॉन्ड्री के दिल को तसल्ली तभी मिलेगी, जब मंदिर को वहाँ से उखाड़ कर वहाँ बाबरी जैसा कोई ढाँचा खड़ा कर दिया जाए?

और शोभराम जैसे पीड़ितों को तो सरकारी सहायता या राहत तक नहीं मिलती। ऐसे कई पीड़ित हैं, जिन्हें सरकार तक नहीं पूछती। समाज के लोग ही आपस में मिलजुल कर उनकी मदद करते हैं। खाने-पीने के भी लाले पड़े हैं, राशन के लाले पड़े हैं। मोहल्ले से राशन और खाने-पीने की गाड़ियाँ गुजरती हैं लेकिन सारी व्यवस्था सिर्फ़ समुदाय विशेष के लिए है, ऐसा शोभराम व स्थानीय लोगों ने बताया। अब चूँकि न्यूज़लॉन्ड्री ये कहता है कि हमारी रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के नाम लिए बिना उनके हवाले से कुछ भी लिख दिया जाता है, हम उसे सलाह देंगे कि नीचे संलग्न किए गए वीडियो को बार-बार प्ले कर के देखे:

यहाँ स्थानीय लोगों के नाम भी हैं, पीड़ितों के बयान भी हैं, वीडियो भी है, ऑडियो भी है, दंगाई मजहबी भीड़ की क्रूरता के दृश्य भी हैं, हिन्दुओं के पीड़ित होने के सबूत भी हैं, सरकारी पक्षपात के गवाह भी हैं, मंदिर पर हमले की बात भी है, पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाओं के विज़ुअल्स भी हैं और साथ ही न्यूज़लॉन्ड्री को लताड़ती हुई हर वो चीज है, जो दंगाइयों से सहानुभूति रखने वाले उस नक्सली पोर्टल को सच का आइना दिखाती है।

हम शब्दों की संख्या पर ध्यान नहीं देते। अगर हमारे पास वो वीडियो है, जिसमें ताहिर हुसैन के गुंडे एक दलित के घर को जलाते दिख रहे हैं तो फिर उस वीडियो के साथ 100 शब्द ही क्यों न हों, वो मायने रखते हैं। अगर आपको सिर्फ़ गालियाँ बकनी हैं और संपादक द्वारा दिए गए टास्क को कुछ भी कर के धूर्ततापूर्वक पूरा करना है तो फिर आप 10000 शब्द लिख कर भी झूठ परोसने में लगे रहें क्योंकि आपके पास न सबूत हैं और न ही तथ्य हैं। अगर हैं तो आप उसे फ़िल्टर कर के उसमें से वही चीजें दिखाएँगे जो आपके मतलब की हो, वो भी तोड़-मरोड़ कर। पत्रकारिता की ‘कुछ ज्यादा ही पढ़ाई’ करने का दावा करने वाले अब ये तय करने में लगे हैं कि ग्राउंड रिपोर्ट में कितने शब्द होने चाहिए, कितनी मात्राएँ होनी चाहिए और कितनी बार अनुस्वार और चंद्रबिंदु का प्रयोग किया जाना चाहिए।

नीचे हम वो वीडियो भी संलग्न कर रहे हैं, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को गालियाँ बकते हुए जम कर पत्थरबाजी की जा रही है। ‘शिव मंदिर’ पर हमले किए जा रहे हैं। ये सब न्यूज़लॉन्ड्री को नहीं दिखेगा। जब ऑपइंडिया ने दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का बीड़ा उठाया तब उसने ये नहीं देखा कि कौन सा मंदिर किस देशांतर और अक्षांस रेखाओं के संयोग पर खड़ा है या फिर भूमध्य रेखा से कितनी दूरी पर कौन सा पीड़ित किस दिशा में खड़ा होकर बयान दे रहा है। हमारा जोर था पीड़ितों के ‘डर’ और ‘दर्द’ को आप तक पहुँचाना, दंगा के आरोपितों की पोल खोलना। हमने शब्दों की संख्या और मंदिर-मस्जिद का लोकेशन से ज्यादा प्रायॉरिटी पीड़ितों की दबी हुई आवाज़ को दी।

ये सब छोटी-छोटी चीजें हैं। खजुरी खास या फिर मौजपुर में किस घर की चौहद्दी क्या है और किस मंदिर के तरफ कितनी पुलिया, नदी, पहाड़ और पठार हैं- ये सब सेकेंडरी चीजें थीं हमारे लिए। लेकिन, जब न्यूज़लॉन्ड्री ने दंगाइयों को महान साबित करने के लिए हमें ये इन सब चीजों पर घेरने की कोशिश की है तो हमने इस रिपोर्ट में उन चीजों को मेंशन किया है। पत्थरबाजी करते हुए हमारे देवी-देवताओं को गाली देने वाले कौन? दलितों का घर जलाने वाले ताहिर हुसैन के गुंडे कौन? वो कहाँ खड़े थे ये मायने रखता है या फिर वो क्या कर और कह रहे थे ये सूचना आप तक पहुँचानी ज़्यादा आवश्यक है?

मंदिर की छत देखिए। छत का एक-एक कोना देखिए। हमला कर के, पत्थरबाजी कर के इसे कैसा बना दिया गया है। न्यूज़लॉन्ड्री वालों को आँखें फाड़-फाड़ कर देखना चाहिए कि भगवान के मंदिर को लेकर कैसे उसने झूठ फैलाया है। चीजें अस्त-व्यस्त हैं, छत पर बड़ी-बड़ी ईंटों के टुकड़े पड़े हुए हैं लेकिन नहीं, न्यूज़लॉन्ड्री के अनुसार मंदिर को तो किसी ने छुआ भी नहीं! मंदिर ने अपने आप आसपास के सारे ईंट-पत्थर अपनी ओर खिंच लिए। मंदिर में दंगाई मजहबी भीड़ ने ईंट-पत्थर फेंक कर पूजा अर्चना की। कल को न्यूज़लॉन्ड्री ऐसी दलीलें दे सकता है, इसीलिए हैरान मत होइए। फ़िलहाल आप ख़ुद वीडियो देखें:

नीचे देखिए, एक स्थानीय व्यक्ति क्या कह रहा है। हमें इससे ज्यादा मतलब होना चाहिए कि वो स्थानीय है, या फिर इससे कि उसने कौन से रंग की शॉल ओढ़ी हुई है या फिर उसके सिर में कितनी संख्या में बाल हैं? अरे, कल को न्यूज़लॉन्ड्री ये लिख दे तो आश्चर्य नहीं कि स्थानीय लोगों के बयान तो लिए ऑपइंडिया ने लेकिन उन चश्मदीदों के सिर के बाल तो गिने ही नहीं। फिर प्रोपेगेंडा पोर्टल “मैं नहीं खेलूँगा, गोल हो गया” कह कर बिल में घुस सकता है। नीचे जो स्थानीय व्यक्ति हैं, वो स्पष्ट कह रहे हैं कि मंदिर पर बाहर से हमला हुआ, अटैक हुआ, बाकी मीडिया वाले जो भी लिखें।

मंदिर की छत पर ईंट-पत्थर मिले, ऐसा कहना है स्थानीय लोगों का। एक नहीं, कई लोग इस वीडियो में मौजूद हैं, जो ये कह रहे हैं। उन सबने बताया कि मंदिर के चारों तरफ़ से पथराव हुआ, चीजें जला दी गईं, तोड़फोड़ की गईं और छत पर ऊपर से पथराव हुआ। ऊपर चढ़ने के लिए मंदिर पर सीढ़ियाँ लगाई गईं। मंदिर की छत पर, परिसर में चीजों को तबाह करने और पत्थरबाजी व आगजनी करने को मंदिर पर हमला नहीं माना जाएगा क्या? देखें वीडियो, जो न्यूज़लॉन्ड्री के दावों की पोल खोलता है:

सारे वीडियो को देखिए और अंदाज़ा लगाइए कि किस कदर मीडिया के ये गैंग विशेष आपको न सिर्फ़ सबूतों से दूर कर रहा है बल्कि पूरे मुद्दे को मीडिया का झगड़ा बनाना चाह रहा है ताकि आपका ध्यान इन हिन्दू विरोधी दंगों में हुई मजहबी दंगाई भीड़ की क्रूरता से हट जाए। भारत की जनता है, थोड़ा इधर-उधर की बातें करने पर अपने ऊपर हुए सभी अत्याचार भूल जाएगी- इसी फिलॉसफी पर काम कर रहे हैं न्यूज़लॉन्ड्री व ऐसे ही अन्य नक्सल मीडिया संस्थान। हिन्दुओं को बेरहमी से मारा गया, उनके देवी-देवताओं को गालियाँ दी गईं लेकिन फिर भी अपराधी उन्हें ही ठहराया जा रहा है। और जो दोषी हैं, दंगाई हैं? उन्हें महान बताने के लिए झूठ और प्रोपेगेंडा का सहारा लिया जा रहा है।

यही कारण है कि न्यूज़लॉन्ड्री को मृत दिनेश कुमार खटीक के भाई सुरेश का वो बयान नहीं दिखता, जिसमें वो सभी मदरसों और मस्जिदों पर पुलिस की छापेमारी की वकालत करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि वहीं सारे हथियार छिपा कर रखे जाते हैं। दिलबर नेगी के हाथ-पाँव काट कर उन्हें ज़िंदा आग में झोंक दिया गया। उसी दुकान की आग में, जिसमें वो काम करते थे। लेकिन नहीं, मीडिया का गिरोह विशेष तो कहता है कि वो ‘जलने से हुए घाव से मरे’। अभी तो कुछ ही दिन बीते हैं, कुछ साल बाद यही मीडिया वाले कहेंगे कि दिल्ली दंगों में एक भी हिन्दू नहीं मरा, जो मरे उन्होंने आत्महत्या की होगी!

काशी की राजकुमारी, अयोध्या के राजकुमार और युद्ध से बना रक्त का कुंड… जब स्वयं प्रकट हुईं माँ आदि शक्ति

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जिन दिव्य स्थलों पर देवी माँ साक्षात प्रकट हुईं, वहाँ निर्मित मंदिरों में उनकी प्रतिमा स्थापित नहीं की गई है, ऐसे मंदिरों में चिह्न पूजा का ही विधान है। दुर्गा मंदिर में भी प्रतिमा के स्थान पर देवी माँ के मुखौटे और चरण पादुकाओं का पूजन होता है। कहा जाता है कि जब राजा-महाराजाओं ने सुदर्शन को युद्ध के लिए ललकारा तो माँ आदि शक्ति ने युद्धभूमि में प्रकट होकर सभी विरोधियों का वध कर डाला। इस युद्ध में इतना रक्तपात हुआ कि वहाँ रक्त का कुंड बन गया, जो वर्तमान में दुर्गाकुंड के नाम से प्रसिद्ध है।

दुर्गाकुंड, देवी माँ का मंदिर और सुदर्शन का युद्ध… कुछ कंफ्यूजन है ना! दरअसल इसके पीछे एक कहानी है। कहानी है एक विवाह की। काशी नरेश की पुत्री के विवाह की। इस विवाह के पीछे रोचक कथानक है कि काशी नरेश राजा सुबाहू ने अपनी पुत्री के विवाह योग्य होने पर उसके स्वयंवर की घोषणा की। स्वयंवर दिवस की पूर्व संध्या पर राजकुमारी को स्वप्न में राजकुमार सुदर्शन के संग उनका विवाह होता दिखा।

राजकुमारी ने अपने पिता काशी नरेश सुबाहू को अपने स्वप्न की बात बताई। काशी नरेश ने इस बारे में जब स्वयंवर में आए राजा-महाराजाओं को बताया तो सभी राजा सुदर्शन के खिलाफ हो गए व सभी ने उसे सामूहिक रूप से युद्ध की चुनौती दे डाली। राजकुमार सुदर्शन ने उनकी चुनौती को स्वीकार कर माँ भगवती से युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद माँगा। राजकुमार सुदर्शन ने जिस स्थल पर आदि शक्ति की आराधना की, वहाँ देवी माँ प्रकट हुई और सुदर्शन को विजय का वरदान देकर स्वयं उसकी प्राणरक्षा की।

मंदिर स्थल पर माता भगवती के प्रकट होने का संबंध अयोध्या के राजकुमार सुदर्शन की कथा से जुड़ा है। राजकुमार सुदर्शन की शिक्षा-दीक्षा प्रयागराज में भारद्वाज ऋषि के आश्रम में हुई थी। शिक्षा पूरी होने के उपरान्त राजकुमार सुदर्शन का विवाह काशी नरेश राजा सुबाहू की पुत्री से हुआ था। आज यह दुर्गा मंदिर काशी के पुरातन मंदिरों में से एक है। इसलिए आइए आज कुछ तस्वीरों के जरिए काशी के दुर्गा मंदिर, भैरो बाबा, गंगा मैया समेत त्रिकालदर्शी के दर्शन करें।

कहते हैं कि इस मंदिर का उल्लेख ” काशी खंड” में भी मिलता है। यहाँ माँ दुर्गा “यंत्र” रूप में विरजमान थी। इस मंदिर में बाबा भैरोनाथ, लक्ष्मीजी, सरस्वतीजी, एवं माता काली की मूर्ति रूप में भी मंदिर बने हुए थे।
हर हर महादेव (मंदिर के भीतर)
काशी के कोतवाल – बाबा भैरो (बाएँ), मालवीय जी ने जो बनाया था उस घर के प्रांगण में विराज रखे बाबा (दाएँ)
काशी घाट पर शिव स्तुति गाते -गाते कैमरा देखकर शर्माते बुजुर्ग बाबा।
ये घाट काशी के अमूल्य रत्न हैं, जिन्हें किसी जौहरी की आवश्यकता नहीं। गंगा केवल काशी में ही उत्तरवाहिनी हैं तथा शिव के त्रिशूल पर बसे काशी के लगभग सभी घाटों पर शिव स्वयं विराजमान हैं। विभिन्न शुभ अवसरों पर गंगापूजा के लिए इन घाटों को ही साक्षी बनाया जाता है।
अस्सी से आदिकेशव तक घाट श्रृंखला में हर घाट के अलग ठाठ हैं, कहीं शिव गंगा में समाए हुए हैं तो किसी घाट की सीढ़ियाँ शास्त्रीय विधान में निर्मित हैं, कोई मन्दिर विशिष्ट स्थापत्य शैली में है तो किसी घाट की पहचान वहाँ स्थित महलों से है तो कई घाट मौज-मस्ती का केन्द्र हैं।
गंगा किनारे आरती
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नोट: यह फोटो फीचर @shrimaan के ट्विटर हैंडल से ली गई तस्वीरों से बनाया गया है। जिसका पूरा थ्रेड आप इस लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।