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गृह मंत्रालय ने एबीपी न्यूज़ को लगाई लताड़: दिल्ली पुलिस पर लगाया था अफवाह फ़ैलाने का आरोप

आज गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्विटर के जरिए एबीपी न्यूज़ पर अफवाहें फैला दिल्ली पुलिस की छवि खराब करने का आरोप लगाया। गृह मंत्रालय ने कहा, एबीपी न्यूज़ का यह दावा बिलकुल गलत है जिसमें उन्होंने दिल्ली हिंसा पर गृह मंत्रालय की किसी संवेदनशील रिपोर्ट तक खुद की पहुँच की बात कही थी। गृह मंत्रालय ने कहा ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है जैसा कि चैनल ने दिखाया है, और उन्हें सलाह दी जाती है कि वो निराधार दावे कर दिल्ली पुलिस जैसी प्रोफेशनल फ़ोर्स की इमेज खराब न करें।

गृह मंत्रालय ने यह प्रतिक्रिया एबीपी न्यूज़ की उन दो रिपोर्ट्स के पब्लिश होने पर दी जिसमें कहा गया था कि गृह मंत्रालय दिल्ली हिंसा से निपटने के दिल्ली पुलिस के तरीके से असंतुष्ट है और वह इसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही कर सकता है। एबीपी ने इन दो रिपोर्ट्स में से एक को 3 मार्च और दूसरी को आज जारी किया था।

एबीपी न्यूज़ ने शुक्रवार 6 मार्च को एक आर्टिकल में दावा किया कि गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से जो दिल्ली हिंसा पर रिपोर्ट माँगी थी वो उसे मिल गई है। एबीपी के न्यूज़ आर्टिकल के अनुसार, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटेलिजेंस की सूचना के बाद भी दिल्ली पुलिस स्थिति से निपटने में नाकाम रही। फरवरी 22 की रात को जफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास सड़क रोक कर बैठ गईं महिलाओं को वो नहीं रोक सकी और न ही दिल्ली हिंसा में बाहरी लोगों के शामिल होने को ही वो रोक पाई।

एबीपी ने सूत्रों के हवाले से यह भी रिपोर्ट किया कि गृह मंत्रालय दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है।

ऐसी ही एक खबर एबीपी ने 3 मार्च को पब्लिश की थी जिसमें भी उसने दावा किया था कि गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से दिल्ली हिंसा पर एक रिपोर्ट माँगी है, जिसके आधार पर वह दोषियों पर कार्यवाही कर सकता है। एबीपी न्यूज़ ने कहा था कि रिपोर्ट मिलने के बाद गृह मंत्रालय दिल्ली पुलिस के उन अधिकारियों पर एक्शन ले सकता है जो दिल्ली हिंसा से निपटने में लापरवाही बरतते पाए जाएँगे।

दिल्ली में तनाव नए नागरिकता कानून के खिलाफ होते प्रदर्शनों के समय से ही लगातार बना हुआ था जिससे निपटने में दिल्ली पुलिस ने अनथक परिश्रम किए। कई वीडियो सामने आए जिनमें दिल्ली पुलिस के अधिकारी लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने और बाहर न निकलने को कहते नजर आए क्योंकि इलाके में देखते ही गोली मारने के आदेश इशू हो चुके थे।

इसके अतिरिक्त दंगे पर काबू पाने के लिए तत्काल प्रभाव से आईपीएस एसएन श्रीवास्तव को स्पेशल कमिश्नर लॉ एंड आर्डर बना कर लाया गया जो कि उस समय सीआरपीएफ में बतौर एडीजी जम्मू कश्मीर (वेस्ट जोन) में तैनात थे।

मीडिया रिपोर्ट्स को नकारते हुए दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस ने लगातार इस बात को दोहराया कि उसके पास इस हिंसा से निपटने के लिए ग्राउंड पर फोर्सेज की कमी नहीं है और दिल्ली पुलिस, केंद्रीय पैरा मिलिट्री फोर्सेज के साथ इस हिंसा में निपटने में पूरी तरह सक्षम है।

दिल्ली पुलिस अबतक दिल्ली के इन हिन्दू विरोधी दंगों के लिए गुनहगार ताहिर हुसैन और शूटर मोहम्मद शाहरुख़ समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार भी कर चुकी है जिसमें उसके डीसीपी समेत कई अधिकारी न सिर्फ घायल हुए बल्कि रतनलाल नामक दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल को अपनी जान भी गँवानी पड़ी।

API से जुड़े हैं CAA पर उकसाने वाले हर्ष मंदर: इतालवी सरकार के लिए काम करता है यह संगठन

ऑपइंडिया हमेशा से विदेशों से फंड प्राप्त करने वाले एनजीओ और उनके काम करने के तौर-तरीकों, उनकी मंशा पर विस्तार से विमर्श और रिपोर्टिंग करता रहा है। हम बताते रहे हैं कि कैसे हर्ष मंदर जैसे लोगों की मदद से विदेश से फंड हासिल करने वाले एनजीओ देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए न्यायपालिका का दुरुपयोग करने की कोशिश करते रहते हैं। सिविल सोसायटी के नाम पर विदेशी फंड प्राप्त करने वाले एनजीओ द्वारा भारत की सम्प्रभुता और आंतरिक सुरक्षा को खतरा पहुँचाने के लिए देसी संगठनों के साथ सॉंठगॉंठ पर भी हम लगातार विस्तार से रिपोर्ट करते रहे हैं।

इन सबके साथ जिस एक व्यक्ति पर हमारा फोकस रहा है, वह सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज से जुड़े हर्ष मंदर हैं। उनका जॉर्ज सोरोस से संबध रहा है। मनमोहन सरकार के जमाने में सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली नेशनल एडवायजरी काउंसिल के भी वे सदस्य रहे हैं। इसी काउंसिल ने हिन्दू विरोधी सांप्रदायिक हिंसा बिल का ड्राफ्ट तैयार किया था। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में भी मंदर सक्रिय रहे हैं। उनके हाल में विडियो भी सामने आए हैं जिसमें वे प्रदर्शनकारियों को उकसाते नजर आए हैं।

हर्ष मंदर के बारे में जाँच पड़ताल करने पर हमें एक बेहद अज्ञात से संगठन Ara Pacis Initiative (API), के बारे में पता चला। मंदर इसके वरिष्ठ सदस्य हैं। वे एपीआई की ‘कॉउन्सिल फॉर डिग्निटी, फॉरगिवनेस, जस्टिस एंड रिकन्शीलिएशन’ के सदस्य हैं।

इस संगठन के बारे में और गहराई से जानकारी जुटाने पर हमें कुछ ऐसे तथ्य मिले जिससे मंदर के खतरनाक मंसूबों का पता चलता है। एपीआई की स्थापना एक अज्ञात इटालियन एक्ट्रेस ने की थी जो शायद वहाँ के शक्ति केंद्रों से काफी नजदीकी रखती है। इसके अलावा इसके फॉउन्डिग मेंबरों में से एक नोबल पुरस्कार विजेता का नाम भी शामिल है। लेकिन इन तथ्यों के अलावा कुछ और तथ्य भी मिले जो इसके इटली सरकार के एक अंग के रूप में काम करने की तरफ इशारा करते हैं।

इस संगठन की वेबसाइट पर साफ़ तौर पर लिखा है कि इसका उद्घाटन 21 अप्रैल 2010 को रोम के मेयर द्वारा किया गया। इसको इटली के राष्ट्रपति का वरदहस्त प्राप्त है। इटली के प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री कार्यालयों का सहयोग मिला हुआ है। इससे पता चलता है कि एपीआई इटली सरकार का एक अहम कार्यालय है जो उसके हितों की पूर्ति के लिए कार्य करता है।

एपीआई की वेबसाइट से

हमारे संदेह को और पुख्ता किया इस संगठन की प्रेसीडेंट रह चुकी Gaida के लिंक्डइन प्रोफाइल ने। इसमें एपीआई को ‘ग्लोबल नॉट फॉर प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन डेडिकेटेड टू ह्यूमन डायमेंशन ऑफ़ पीस’ कहा गया है। इसमें ‘गैर सरकारी’ शब्द का प्रयोग नहीं हुआ।

इसके अलावा हमें रायटर्स की एक रिपोर्ट भी हाथ लगी जिसमें एपीआई को इतालवी सरकार द्वारा समर्थित एक संगठन बताया गया है जो “कनफ्लिक्ट प्रिवेंशन एंड रेसोलुशन के लिए समर्पित” है। रायटर्स की इस रिपोर्ट के बाद अब इस बात पर कोई शक ही नहीं रह गया कि हर्ष मंदर जिस संगठन के लिए काम करता है वो इतालवी हितों के लिए सक्रिय है।

Gaida की लिंक्ड इन प्रोफाइल से

इस संगठन के लीबिया इनिशिएटिव से संबंधित दूसरी रिपोर्ट्स से भी यह पता चलता है कि हर्ष मंदर इतालवी सरकार और उसकी सीक्रेट सर्विसेज से जुड़े उस संगठन का सदस्य है जो लीबिया से इटली में होने वाले माइग्रेशन पर रोक लगाने की दिशा में काम कर रहा है। यही हर्ष मंदर हैं, जो भारत में घुसपैठियों के खिलाफ किसी कार्यवाही को रोकने के लिए अति उत्सुक दिखाई पड़ते हैं।

मंदर का यह दोहरा चरित्र अभी हाल के नए नागरिकता कानून के विरोध में होते हिंसक प्रदर्शनों के दौरान स्पष्ट तौर से देखा जा सकता है। मंदर और उनका एनजीओ कारवाँ-ए-मोहब्बत इन प्रोटेस्ट्स में काफी सक्रिय भूमिका निभाता देखा गया है। कारवाँ-ए-मोहब्बत ने लोगों से शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने को भी कहा था।

बीजेपी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने को कोर्ट पहुँचे मंदर का एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें वो प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहते हैं, “ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में नहीं जीती जाएगी, क्योंकि हमने सुप्रीम कोर्ट को देखा है- एनआरसी के मामले में, कश्मीर के मामले में, अयोध्या के मामले में। उन्होंने (सुप्रीम कोर्ट) इंसानियत, समानता और सेक्युलरिज्म की रक्षा नहीं की है।” वे आगे कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में हम कोशिश जरूर करेंगे। लेकिन इसका फैसला न संसद में होगा, न सुप्रीम कोर्ट में होगा, बल्कि ये फैसला सड़कों पर होगा। इस वायरल विडियो को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उनसे सफाई भी माँगी है।

Yes Bank संकट पर बोलीं वित्त मंत्री- किसी को घबराने की जरूरत नहीं, सभी ग्राहकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित

संकट से जूझ रहे यश बैंक पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने अपना बयान जारी करते हुए ग्राहकों से अपील की है कि किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है सभी ग्राहकों का पैसा बैंक में पूरी तरह से सुरक्षित है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, कि मैं RBI गवर्नर के साथ बातचीत कर रही हूँ। किसी को भी कोई नुकसान नहीं होगा। सभी ग्राहकों का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। इस संकट के दौरान बैंक ग्राहकों को बिल्कुल घबराना नहीं चाहिए। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि अगर किसी को इमरजेंसी है तो वो नियमों के तहत ज्यादा रकम भी निकाल सकते हैं। नोटिफिकेशन में दी गई जानकारी के मुताबिक, कुछ विशेष परिस्थितियों में अकाउंट होल्डर्स अपने खाते से 50,000 रुपए से अधिक रकम विड्रॉ कर सकते हैं। 

इससे पहले RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि हमने 30 दिनों के लिए यह लिमिट लगाई है। जल्द ही आरबीआई यस बैंक को संकट से निकालने के लिए तेजी से कार्रवाई करेगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा, आपको बैंक को समय देना होगा, प्रबंधन द्वारा उठाए जाने वाले जरूरी कदम को उठाने की कोशिश करनी होगी और उन्होंने कोशिश की। जब हमने पाया कि यह कोशिश काम नहीं कर रहा तो आरबीआई ने हस्तक्षेप किया। आपको RBI से बहुत ही जल्द कार्रवाई करने की योजना दिखाई देगी ताकि Yes Bank को पुनर्जीवित किया जा सके।

हालाँकि, भारतीय स्टेट बैंक के बोर्ड ने संकटग्रस्त यस बैंक में निवेश के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। यानी अगर सबकुछ ठीक रहा तो आर्थिक संकट में फँसे यस बैंक में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI की हिस्‍सेदारी होगी। गुरुवार को ऐसी खबर आने के बाद यस बैंक के शेयर करीब 26 फीसदी की उछाल के साथ 37 रुपए पर पहुँच गए थे।

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने यस बैंक पर सख्ती बरतते हुए इससे निकासी की सीमा 50 हजार रुपए निकासी की सीमा तय की है। आरबीआई का ये आदेश अगले एक महीने के लिए है। एनएसई ने यस बैंक के फ्यूचर और ऑप्शन सौदों पर रोक लगा दी है। इसकी वजह से देश भर के यस बैंक ग्राहकों में डर कायम हो गया है और गुरुवार रात कई शहरों में यस बैंक के एटीएम में ग्राहकों की कतारें देखी गईं।


मंदिर बचाने निकले नरेश सैनी ने ICU में ली आखिरी साँस, दंगाइयों ने मारी थी गोली

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में कई बेकसूरों की जान गई। इन बेकसूरों में एक नाम नरेश सैनी का भी है। नरेश अब हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने कई दिन तक जीटीबी अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ी और 4 मार्च को आखिरी साँस लेते हुए सबको हमेशा के लिए अलविदा कह गए।

ब्रह्मपुरी इलाके के गली नंबर-1 में रहने वाले नरेश सैनी हिंसा वाले दिन अपने घर से मंदिर बचाने निकले थे। उस समय सुबह के 4: 30 बजे। अन्य गली वालों की तरह उन्हें भी यही मालूम चला था कि मुस्लिमों की भीड़ मंदिर तोड़ने आई है। बस फिर क्या था? वो भी बाकी गली वालों के साथ निकल गए।

नरेश के परिजनों के मुताबिक, जब वो यहाँ से मंदिर की ओर भागे उस समय सामने से 400-500 लोगों की भीड़ आई और उस भीड़ में से ही किसी ने नरेश पर गोली चला दी। गोली लगने के बाद नरेश की हालत इतनी गंभीर हो गई कि वो दोबारा होश में नहीं आए। उन्हें जीटीबी अस्पताल भी ले जाया गया, लेकिन वहाँ भी वे आईसीयू में भर्ती रहे और 4 तारीख को उन्होंने दम तोड़ दिया।

परिजन बताते हैं कि दंगाई भीड़ ने जिस समय नरेश पर हमला किया उस समय वह बिलकुल निहत्थे थे, वे घर के पास स्थित मंदिर को बचाने निकले थे, मगर उन्हें क्या पता था कि उस दंगाई भीड़ का कहर उनपर ही टूटेगा।

गौरतलब है कि बेकसूर होने के बावजूद जान गँवाने वालों में नरेश सैनी की कहानी अकेले इतनी पीड़ादायक नहीं है। गोकुलपुरी के नितिन, आलोक तिवारी जैसे अनेकों की कहानियाँ बेहद दर्दनाक है। जिन्हें सुनकर ही मन सिहर जाए। दिलबर नेगी के साथ हुई निर्ममता तो रूह कँपा देने वाली है। 24 फरवरी को जिस समय दिल्ली में हिंसा भड़की थी, उसी शाम इन दंगों की क्रूर वास्तविकता का शिकार 20 साल के दिलबर सिंह नेगी को होना पड़ा था। दिलबर सिंह नेगी को दंगाइयों की भीड़ ने तलवार से काटने के बाद जलते हुए घर में आग के हवाले कर दिया था। बाद में जलकर राख हुए दिलबर नेगी की विडियो भी वायरल हुई थी।

रतनलाल के हत्यारों की हुई पहचान, पुलिस पर हमले से पहले दंगाइयों ने तोड़ दिए थे CCTV कैमरे

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के सुनियोजित होने के एक और सबूत मिले हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस पर हमले से पहले दंगाइयों ने सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए थे। इस हमले में दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत हो गई थी। डीसीपी अमित शर्मा गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रतनलाल के हत्यारों की पहचान कर ली है।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, क्राइम ब्रांच में आरोपितों की शिनाख्त करने और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की बात कही है। 24 फरवरी को चॉंदबाग इलाके में हुई हिंसा में रतनलाल की मौत हो गई थी। खबर के अनुसार, विडियो से हमले की पूरी साजिश को समझा जा सकता है। हिंसा भड़कने से पहले कुछ लोग सीसीटीवी को तोड़ते साफ तौर पर देखे गए। इसके बाद इन लोगों ने पुलिस को 1 बजे के करीब कॉल किया। जब एसीपी अनुज, डीसीपी अमित शर्मा और हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल व अन्य पुलिसकर्मी वहाँ पहुँचे, तो हिंसक भीड़ ने सोची-समझी साजिश के तहत उन पर पथराव कर दिया।

दावा किया जा रहा है कि पुलिस पर हमले से पहले ही वहाँ पर सारे सीसीटीवी को तोड़ा-फोड़ा गया था ताकि उपद्रवियों की पहचान न हो सके। लेकिन, अब इसी सीसीटीवी फुटेज के कारण सैकड़ों की तादाद में दंगाइयों की पहचान हुई है। इसी के आधार पर उनकी धर-पकड़ की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसक भीड़ ने आतंक मचाने के पहले 15 से ज्यादा सीसीटीवी को निशाना बनाया था। जारी वीडियो में हम देख सकते हैं कि वहाँ मौजूद दंगाई सीसीटीवी को ढूँढ-ढूँढ कर उसे तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

न्यूज 18 द्वारा दिखाई गई इन तस्वीरों से साफ मालूम होता है कि 11 बजे तक चाँदबाग इलाके में भीड़ का नामोनिशान तक नहीं था। लेकिन 12 बजे के करीब वहाँ लड़के इकट्ठा होने शुरू हुए और उन्होंने सुनियोजित ढंग से अपने साथियों को इकट्ठा किया, सीसीटीवी में तोड़फोड़ की और बाद में पुलिस पर हमला किया। इसी हमले में हेड कॉन्स्टेबल को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, एसीपी अनुज घायल हुए और डीसीपी अमित शर्मा को गंभीर चोटें आईं।

हमले का जो विडियो सामने आया है उसमें दंगाई भीड़ दिल्ली पुलिस पर लाठी और पत्थर से हमला करती नजर आ रही है। भीड़ में शामिल बुर्का धारी महिलाएँ भी पुलिस पर हमला करते हुए नजर आती हैं। डीसीपी अमित शर्मा की पत्नी ने भी कहा है कि उनके पति महिला प्रदर्शनकारियों से बात करने गए थे। लेकिन, वहां उन पर हमला कर दिया गया। इससे पहले एसीपी अनुज कुमार ने भी उस भीड़ की हिंसा के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, “24 तारीख की सुबह साढ़े 11 बजे और 12 बजे के आसपास की बात है। मेरी और रतनलाल और बाकी कर्मचारियों की ड्यूटी चाँदबाग मजार से 80-100 मीटर आगे थी। 23 को वहाँ पर वजीराबाद रोड को जाम किया गया था, जिसे देर रात को खुलवाया गया था। उस रास्ते को क्लियर रखने के निर्देश मिले थे।”

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बुर्का पहनी महिलाएँ बरसा रहीं पत्थर, दंगाई दाग रहे गोली: उस भीड़ का Video जिसने ली रतनलाल की जान

‘शेर-ए-पंजाब’ जो कोहिनूर अपनी बाँह पर पहनते थे चुने गए दुनिया के सर्वकालिक महान नेता

भारतीय इतिहास में महाराजा रणजीत सिंह का जिक्र सबसे गौरवशाली पन्नों में से एक है। लेकिन 19वीं सदी के इस महानायक का साहस और शौर्य आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। हाल ही में ‘बीबीसी वर्ल्ड हिस्ट्रीज मैगजीन’ की तरफ से कराए गए एक सर्वेक्षण में महाराजा रणजीत सिंह दुनिया भर के नेताओं को पछाड़कर ‘सर्वकालिक महान नेता’ चुने गए।

इस सर्वेक्षण में पाँच हजार से अधिक पाठकों ने हिस्सा लिया। 38% से ज्यादा मत पाने वाले रणजीत सिंह की सहिष्णु साम्राज्य बनाने के लिए प्रशंसा की गई। इस प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर अफ्रीकी स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी अमिलकार काबराल रहे, जिन्हें 25% मत मिले। उन्होंने पुर्तगाल के आधिपत्य से गिनी को मुक्त कराने के लिए दस लाख से अधिक लोगों को एकजुट किया था और इसके बाद कई अफ्रीकी राष्ट्र स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने के लिए प्रोत्साहित हुए थे।

युद्ध के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे विंस्टन चर्चिल सूझबूझ और त्वरित फैसले लेने के लिए 7% वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन चौथे और ब्रिटिश साम्राज्ञी एलिजाबेथ प्रथम महिलाओं में सर्वाधिक वोट प्राप्त कर पाँचवें स्थान पर रहीं।

ज्ञात हो कि ‘शेर ए पंजाब’ के नाम से मशहूर महाराजा रणजीत सिंह आर्थिक एवं राजनीतिक अस्थिरता के बाद सत्ता में आए थे। 19वीं सदी के शुरुआती दशक में उन्होंने सिख खालसा सेना का आधुनिकीकरण किया था। महाराजा रणजीत सिंह की एक आँख खराब थी। इससे जुड़ी एक प्रचलित कथा यह भी है कि वो कहते थे, ”भगवान ने मुझे एक आँख दी है, इसलिए उससे दिखने वाले हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, अमीर और गरीब मुझे सभी बराबर दिखते हैं।”

महाराजा रणजीत सिंह से जुड़े प्रमुख तथ्य

कहते हैं महाराजा रणजीत सिंह ने विश्वनाथ मंदिर में मन्नत माँगी थी कि काबुल फतह करवा दीजिए, उसके बाद छत सोने से मढ़ा दूँगा। सरदार हरि सिंह नलवा जो रणजीत सिंह की सेना के सेनाध्यक्ष थे, का अधूरा कार्य डोगरा राजपूतों ने पूरा किया और काबुल भी खालसा साम्राज्य के अधीन आ गया। उसके बाद महाराजा रणजीत सिंह ने बाबा विश्वनाथ के शिखर पर 880 किलो सोना मढ़वाया।

महाराजा रणजीत सिंह ने ही हरमंदिर साहिब यानी, स्वर्ण मंदिर (गोल्डन टेम्पल) का जीर्णोद्धार करवाया था। महाराजा रणजीत सिंह उन व्यक्तियों में से थे जिन्होंने पूरे पंजाब को एकत्रित कर रखा था और अपने रहते कभी राज्य के आस-पास अंग्रेजों को आने भी नहीं दिया। उस समय पंजाब पर अफगान और सिखों का अधिकार था और उन्होंने पूरे पंजाब को कुछ मिसलो में बाँट दिया था। महज दस साल की उम्र में अपना पहला युद्ध लड़ने और जीतने वाले रणजीत सिंह को बचपन में चेचक हो गया था। इसकी वजह से उनकी बाईं आँख की रोशनी कम होती गई।

अपने चालीस साल के शासन के दौरान सिख सम्राज्‍य के संस्‍थापक महाराजा रणजीत सिंह एक धर्मनिरपेक्ष राजा की तरह रहे, वो हिन्दुओं और सिखों के हक़ के लिए हमेशा खड़े रहे। उन्होंने उस समय वसूले जाने वाले जजिया पर रोक लगाई थी।

रणजीत सिंह ने मात्र सत्रह साल की उम्र में भारत पर हमला करने वाले आक्रमणकारी जमन शाह दुर्रानी को हराया था। उन्होंने पूरे पेशावर समेत पश्तून क्षेत्र पर अपना अधिकार स्थापित किया था। यह वो समय था जब पश्तूनों पर किसी गैर मुस्लिम ने राज किया। इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने पेशावर, जम्मू-कश्मीर और आनंदपुर पर भी अधिकार कर लिया। पहली आधुनिक भारतीय सेना- ‘सिख खालसा सेना’ को स्थापित करने का श्रेय भी रणजीत सिंह को ही जाता है। पंजाब उनके समय में बहुत शक्तिशाली सूबा था। उनके कारण ही लंबे अर्से तक अंग्रेज़ पंजाब को आधीन नहीं कर पाए थे।

ऐतिहासिक कूह-ए-नूर (कोहिनूर) की कहानी बड़ी दिलचस्प रही है। वर्ष 1839 तक यह महाराजा रणजीत सिंह के पास रहा था, वह इसे ताबीज के रूप में अपनी बाँह में पहनते थे। बेशकीमती हीरा कोहिनूर महाराजा रणजीत सिंह ने शाह शुजा-उल-मलिक से हासिल किया था। यह उन्होंने कश्मीर पर हमला कर शाह शुजा को छुड़ाने की शर्त पर लिया था। उनकी मृत्यु के बाद राज्य और इस कीमती हीरे की जिम्मेवारी उनके पाँच वर्षीय बेटे दलीप सिंह के ऊपर आ गई थी। लेकिन अंग्रेजों ने पंजाब को कब्जे में ले लिया और बालक दलीप सिंह को कोहिनूर और साम्राज्य सौंपने के लिए विवश कर दिया। इस प्रकार, 1851 में यह इंग्लैंड की महारानी के पास चला गया।

कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई की सदस्यता समाप्त करने की माँग कर सकती है केन्द्र सरकार, सदन में दुराचरण का आरोप

लोकसभा के अंदर कॉन्ग्रेस सांसदों द्वारा किए गए हंगामे के दौरान किए गए व्यवहार को लेकर सरकार असम से कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई की लोकसभा सदस्यता को समाप्त कराने की माँग कर सकती है। इससे पहले अध्यक्षीय पीठ से कागज लेकर उछालने वाले कॉन्ग्रेस के सात सांसदों को संसद की शेष कार्रवाई तक के लिए निलंबित कर दिया गया है।

खबरों के मुताबिक, संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने गुरुवार को कहा कि सरकार अध्यक्ष के टेबल से कागजात छीनने वाले सदन में फेंकने वाले एक कॉन्ग्रेस सदस्य की सदस्यता समाप्त कराने सहित अन्य कार्रवाई की माँग करेगी। हालाँकि, संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कॉन्ग्रेस सांसद के नाम का खुलासा नहीं किया, लेकिन बताया यह जा रहा है कि वह असम से कॉन्ग्रेस के सांसद गौरव गोगोई हो सकते हैं।

अगर लोकसभा द्वारा गोगोई की सदस्यता समाप्त करने का फैसला लिया जाता है तो, कोलिबोर के सांसद गौरव गोगोई को लोकसभा चुनावों के एक साल के भीतर एक और उपचुनाव का सामना करना पड़ सकता है।

मंत्री ने यह भी कहा था कि सरकार लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से अनुरोध करेगी कि वह कॉन्ग्रेस सदस्यों के आचरण की जाँच के लिए एक समिति का गठन करे। वहीं बीते दिन मंत्री प्रहलाद जोशी ने संसद के अंदर कार्रवाई के दौरान बार-बार व्यवधान पैदा करने पर कॉन्ग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा था कि कागज फाड़ना और स्पीकर पर फेंकना स्पीकर की कुर्सी का अपमान था।

वहीं आपको बता दें कि संसद में की गई अनुशासनहीनता के लिए कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई सहित कॉन्ग्रेस के सात सांसदों को शेष बजट सत्र के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया है। इससे पहले एक प्रस्ताव लोकसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया था। दरअसल शेष सत्र 3 अप्रैल तक चलेगा। साथ ही सांसदों पर 374 की कार्रवाई के तहत निलंबित किया गया है। निलंबित सांसदों में गौरव गोगोई समेत टी एन प्रतापन, डीन कुरियाकोस, राजमोहन उन्नीथन, बैनी बहनान, मणिकम टेगोर और गुरजीत सिंह औजला शामिल हैं।

इसी बीच बीजेपी ने सात कॉन्ग्रेस सांसदों को शेष लोकसभा सत्र में भाग लेने से निलंबित करने के निर्णय का स्वागत किया है। भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव ने कहा कि सांसदों का आचरण बेहद शर्मनाक था। इतना ही नहीं कुर्सी का अपमान करने वाले सदस्यों को अधिकतम सजा मिलनी चाहिए।

दरअसल, कॉन्ग्रेस सांसद दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों को लेकर सदन में हंगामा कर रहे थे, हंगामें के दौरान आरोपित कॉन्ग्रेस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी से कागज फाड़कर सदन में फेंके। माना जा रहा है कि इस तरह की अनुशासनहीनता सदन के इतिहास में पहली बार हहुई है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह उत्तर-पूर्वी दिल्ली इलाके में हुए हिंदू विरोधी हिंसा में अब तक 50 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 250 से एधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

MP में कर्नाटक जैसा सियासी ड्रामा, MLA के इस्तीफे से मुश्किल में कमलनाथ सरकार

बीते साल जुलाई में कर्नाटक में एक सियासी ड्रामा देखने को मिला था। इसका पटाक्षेप कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली जेडीएस-कॉन्ग्रेस सरकार के गिरने से हुआ था। नए साल में इसी रास्ते पर मध्य प्रदेश की राजनीति जाती दिख रही है। कमलनाथ सरकार की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। कॉन्ग्रेस के इकलौते सिख विधायक हरदीप सिंह डंग ने अपनी ही पार्टी के राज्य सरकार को भ्रष्ट बता इस्तीफा दे दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डंग ने विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को अपना इस्तीफा पत्र भेजा। पत्र में हरदीप डंग ने कहा कि दूसरी बार लोगों का जनादेश मिलने के बावजूद पार्टी द्वारा उनकी लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने अपने पत्र में कहा, “कोई भी मंत्री काम करने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि वे एक भ्रष्ट सरकार का हिस्सा हैं।”

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हालाँकि हरदीप सिंह डंग के इस्तीफे पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई खबर नहीं हैं। उन्होने कहा, “हरदीप सिंह डंग हमारी पार्टी के विधायक हैं। उनके इस्तीफा देने की खबर मिली है, लेकिन मुझे अभी तक इस संबंध में उनका कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। न ही उन्होंने मुझसे अभी तक इस संबंध में कोई चर्चा की है और न प्रत्यक्ष मुलाकात की है।” सीएम के मुताबिक जब तक हरदीप सिंह की उनसे इस संबंध में चर्चा नहीं हो जाती, तब तक इस बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा।

वहीं विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने देर शाम इस मामले पर अपना अधिकारिक बयान जारी कर दिया था। उन्होंने कहा था, “मुझे सुवासरा विधायक हरदीप सिंह डंग के इस्तीफा देने की खबर मिली है। उन्होंने मुझसे प्रत्यक्ष रूप से मिलकर इस्तीफा नहीं सौंपा है। जब वे मुझसे प्रत्यक्ष रूप से मिलकर इस्तीफा सौपेंगे तो मैं नियमानुसार उस पर विचार कर आवश्यक कदम उठाऊँगा।”

उल्लेखनीय है कि विधायकों के इस्तीफे को लेकर इसी तरह का रुख पिछले साल कर्नाटक के स्पीकर ने भी दिखाया था। बावजूद इसके सरकार नहीं बच पाई थी। उस समय भी जेडीएस और कॉन्ग्रेस ने बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया था। साथ ही बीजेपी विधायकों के संपर्क में होने का दावा किया था। वही सूरतेहाल फिलहाल मध्य प्रदेश में है। हालॉंकि हॉर्स ट्रेडिंग के कॉन्ग्रेस के आरोपों को वहीं विधायक खारिज कर चुके हैं जिन्हें बंधक बनाने का आरोप उसने बीजेपी पर लगाया था।

इस बीच, बीजेपी विधायक संजय पाठक ने कॉन्ग्रेस में शामिल होने की खबरों को अफवाह करार दिया है। उन्होंने कहा है, “मैं सीएम कमलनाथ से नहीं मिला हूँ। बीती रात मुझे अगवा करने की कोशिश की गई थी। मेरे ऊपर बहुत दबाव बनाया जा रहा है। मैं हमेशा बीजेपी के साथ रहूॅंगा।” उन्होंने अपनी हत्या किए जाने या अगवा किए जाने की भी आशंका जताई है।

वैसे कॉन्ग्रेस अब भी सब कुछ ठीक होने का दावा कर रही है। साथ ही जल्द कैबिनेट विस्तार की भी बात कह रही है। लेकिन, कमलनाथ सरकार के मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के ताजा बयान से ऐसा लगता नहीं है। सिसोदिया ने कहा है कि उनके नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपेक्षा होने पर सरकार पर संकट पैदा हो सकता है। यह पहला मौका नहीं है जब अपनी ही सरकार से सिंधिया के सम​र्थकों ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताई है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कह चुके हैं प्रदेश का राजनीतिक संकट कॉन्ग्रेस की अंदरूनी लड़ाई की उपज है। बागी विधायकों में से तीन तो पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खेमे के बताए जाते हैं।

यहाँ बता दें,इस समय मध्यप्रदेश विधानसभा में कॉन्ग्रेस के पास 113 विधायक बचे हैं, बीजेपी के पास 107 एमएलए हैं। 230 सदस्यों वाली विधानसभा में फिलहाल दो सदस्यों के निधन से संख्या 228 है। इसमें कॉन्ग्रेस को दो बसपा, एक सपा और चार निर्दलीय विधायकों  का समर्थन हासिल है।

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महिला प्रदर्शनकारियों से ही बात करने गए थे, हेलमेट निकाल हमला किया: DCP अमित शर्मा की पत्नी

उत्तर पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को भड़की हिंसा में आतताइयों की भीड़ ने पुलिस पर जो हमला किया उसकी विडियो सोशल मीडिया पर कल सबके सामने आ गई। विडियो में हमने देखा कि दंगाई भीड़ में बुर्काधारी महिलाओं ने पुलिस पर जमकर पत्थरबाजी की और बड़ी तादाद में आकर पुलिस को खदेड़ा। इसी भीड़ को सोशल मीडिया पर हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत के लिए जिम्मेदार बताया गया। साथ ही इसी भीड़ को अमित शर्मा के घायल होने के पीछे वजह बताया गया।

अब हालाँकि, रतन लाल हमारे बीच नहीं हैं। उनके परिवार के पास इन विडियोज को देखने के बाद भी न तो कहने को कुछ बचा है और न ही बताने को। लेकिन, डीसीपी अमित शर्मा, जिन्होंने हमले में घायल होने के कुछ दिन बाद अपनी आँख खोली है, उनकी पत्नी इन विडियोज को देखने के बाद सकते में है।

बुर्काधारी महिलाओं को इस तरह पुलिस पर हमला करता देख डीसीपी अमित शर्मा की पत्नी का बयान आया है। मीडिया से बात करते हुए पूजा शर्मा ने दावा किया है कि उनके पति उस दिन भी प्रदर्शनकारियों से ही बात करने गए थे। वहाँ सिर्फ़ महिलाओं का समूह था। उन्होंने ही अमित का हेलमेट पहले निकलवाया और फिर भीड़ ने आकर उनपर हमला किया।

पूजा शर्मा ने ये बयान जारी करते हुए सरकार से अपील की कि दंगाइयों के ख़िलाफ़ सख्त से सख्त एक्शन लिया जाए। क्योंकि उनके पति की हालत अब भी ठीक नहीं है। वो पूरी तरह सही नहीं हो पाए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें ठीक होने में 4 से 5 महीने लगेंगे।

डीसीपी शर्मा की पत्नी उनकी हालत देखकर बेहद भावुक मन से 24 फरवरी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उस दिन अमित शर्मा के ऑफिस स्टाफ ने घर पर कॉल की थी और कहा था कि अमित शर्मा घायल हो गए हैं।उन्हें कहा गया था की अमित शर्मा को मामूली चोटें लगी हैं। लेकिन जब वो जीटीबी अस्पताल पहुँची, तब उन्हें पता चला अमित शर्मा का सीटी स्कैन होना है और उनके सर में गंभीर चोटें आई हैं।

पूजा ने बताया की बीच-बीच में होश आने पर अमित उनसे अपना और बच्चों का खयाल रखने के लिए कह रहे थे। अमित को इस बात का आभास था कि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं, जो उनके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।

पूजा इस दर्दनाक घटना को याद करते हुए कहती कि उनके पति को IFS की नौकरी मिल रही थी। लेकिन उन्होंने फिर आईपीएस होना ही चुना। वे हमेशा से पुलिस ऑफिसर बनना चाहते थे। वो सिर्फ अपने काम को प्राथमिकता देते हैं। यहाँ तक कि 6 महीने पहले जब उनकी (पूजा) की डिलीवरी होने वाली थी तो वो खुद मौजूद नहीं रह पाए थे।

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दम तोड़ रहा है शाहीन बाग: खाली पंडाल में कैमरा देख औरतों ने बजाया हूटर, दौड़ते आए मर्द

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के ख़िलाफ़ शाहीन बाग में चल रहा निराधार विरोध-प्रदर्शन किसी तरह साँसे ले रहा है। वहाँ प्रदर्शनकारी महिलाओं की संख्या हर दिन कम होती जा रही है। ताजा जानकारी के अनुसार तो वहाँ पंडाल खाली पड़ा है। ​इंडिया टीवी के एक पत्रकार के अनुसार शुक्रवार की सुबह वहॉं केवल 19 महिलाएँ ही थीं। प्रदर्शनस्थल को देखकर लगता है कि वहाँ पर सबका जोश शायद शांत हो गया। मगर इस शांति के साथ ही वहाँ हूटर सिस्टम का खुलासा हुआ है। इसका प्रयोग मीडिया को देख औरतें पुरुषों को बुलाने के लिए करती हैं।

जानकारी के अनुसार, इंडिया टीवी की टीम आज सुबह प्रदर्शन को कवर करने शाहीन बाग पहुँची। वहाँ चैनल की महिला पत्रकारों ने देखा कि ज्यादा भीड़ नहीं है। वह प्रदर्शन को कवर करने के लिए लाइव करते हुए सीधे अंदर चली गईं। कैमरे को देखते ही प्रदर्शनस्थल पर मौजूद गिनती की महिलाओं के बीच हड़कंप मच गया। उन्होंने झट से हूटर बजाया और फिर कुछ मर्द वहाँ पहुँच गए।

इंडिया टीवी के पत्रकार सुशांत सिन्हा के अनुसार, इन पुरुषों ने महिला पत्रकारों को डराने के लिए बदसलूकी की। लेकिन फिर भी वे रिपोर्ट करते रहे। महिला पत्रकारों ने बिना डरे शाहीन बाग का सच दर्शकों के सामने रखा और साथ ही इस हूटर सिस्टम का खुलासा भी इन्हीं महिला पत्रकारों की बदौलत हुआ।

पत्रकार सुशांत सिन्हा ने इस वाकये को सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसके अलावा मीनाक्षी जोशी की रिपोर्ट देखने से पता चलता है कि जुमे का हवाला देकर उन्हें प्रदर्शनस्थल से लगातार चले जाने के लिए कहा जा रहा है। इसके जरिए दम तोड़ रहे विरोध-प्रदर्शन की सच्चाई को छिपाने की कोशिश की गई।

विडियो में देख सकते हैं कि वहाँ मौजूद लोग लगातार महिला पत्रकार को बाहर जाने को कह रहे हैं। जब वह 82 दिन से जारी प्रदर्शन का हवाला देकर कहती हैं कि इस बीच में कई बार जुमे आए, लेकिन उन्हें शाहीन बाग खाली नहीं दिखा, तो फिर आज क्यों? इस पर वहाँ मौजूद औरतें उन्हें समझाने लगती है। वे अपनी कम संख्या जस्टिफाई करने के लिए कहती हैं कि आज जुमा है, नमाज पढ़ने के लिए उन्हें नहाना-धोना होता है, क्या उसमें टाइम नहीं लगेगा। विडियो में पुरुषों को भी लगातार हस्तक्षेप करते देखा जा सकता है और ये भी सुना जा सकता है कि अगर इंडिया टीवी को भीड़ देखनी है तो वो 11 बजे के बाद प्रदर्शनस्थल पर आएँ।

इस विडियो से पता चलता है कि आखिर किस तरह से एक महिला पत्रकार को प्रदर्शनस्थल की रिपोर्टिंग करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। किस तरह सवालों के बदले उनसे सवाल किए गए और किस तरह बुजुर्ग महिला से लेकर पुरुष तक उनपर हावी होने की कोशिश करते रहे।