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अगर मुस्लिमों से ज्यादती होगी, उनको जेल भेजोगे, दंगाई ठहराओगे तो इस मुल्क में दंगे होते रहेंगे: अमानतुल्लाह

हमेशा भड़काऊ बयान देते रहने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। उन्होंने उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में आईबी कॉन्सटेबल अंकित शर्मा की हत्या के आरोपित ताहिर हुसैन का बचाव करते हुए मुस्लिम कार्ड खेला है। इसके साथ ही उसने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तबके के साथ नाइंसाफी हो रही है।

अमानतुल्लाह खान ने बेहद भड़काऊ बयान देते हुए कहा, “अब ऐसा लग रहा है कि जैसे पूरी फसाद सिर्फ ताहिर हुसैन ने किया हो। कहीं न कहीं उन लोगों को जो फसादी थे। उन लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है और इस पूरे दंगे को मुस्लिमों पर लादा जा रहा है। कहीं न कहीं इस दंगे को एक रुख दिया जा रहा है कि जैसे ये पूरा दंगा ताहिर हुसैन ने कराया हो या उसके लोगों ने कराया हो। अगर पक्षपात होगा, आप सिर्फ मुस्लिमों से ज्यादती करोगे। उनको जेल भेजोगे, उनको दंगाई ठहराओगे तो इस मुल्क में दंगे होते रहेंगे।”

उनके इस बयान से उनकी धमकी साफ तौर पर झलक रही है। बता दें कि ये उसी ताहिर हुसैन की बचाव में बोल रहे है, जो AAP के पार्षद थे, लेकिन दंगों में आरोपित पाए जाने के बाद पार्टी ने उससे पीछा छुड़ाने के लिए उसे निलंबित कर दिया था। दंगे के दौरान ताहिर के घर की छत पर से सैकड़ों की संख्या में पेट्रोल बम मिले थे, एसिड मिले थे, पत्थर मिले थे, गुलेल मिला था और इसके साथ ही कई ऐसे वीडियो सामने आए थे, जिसमें साफ तौर पर ताहिर की छत पर से लोगों को हिंसा फैलाते हुए, आगजनी करते हुए साफ दिखाई दे रहा था। ताहिर के छत से गुलेलों से पेट्रोल बम दागे गए थे। अंकित शर्मा की हत्या की गई। इसके साथ ही कई अन्य लोगों की नृशंस हत्या की गई।

अब जब लोगों की जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। पुलिस शांति-व्यवस्था कायम करने के साथ ही अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही तो अमानतुल्लाह खान ने एक बार फिर से भड़काऊ बयान देकर शांति को बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले भी अमानतुल्लाह खान ने ताहिर हुसैन का बचाव किया था। अमानतुल्लाह ने एक ट्वीट किया था। जिसमें लिखा कि आज ताहिर हुसैन सिर्फ इस बात की सजा काट रहा है कि वो एक मुस्लिम है। शायद आज हिंदुस्तान में सबसे बड़ा गुनाह मुस्लिम होना है, ये भी हो सकता है कि आने वाले वक्त में यह साबित कर दिया जाए कि दिल्ली की हिंसा ताहिर हुसैन ने कराई है। 

इससे पहले भी अमानतुल्लाह खान ने ताहिर हुसैन के समर्थन में ट्वीट किया था, इसमें लिखा था, “ताहिर हुसैन बेकसूर है। बीजेपी अपने नेताओं को बचाने के लिए और आम आदमी पार्टी को बदनाम करने के लिए ताहिर हुसैन को झूठे केस में फँसा रही है।”

IS के आतंकी दम्पति के बाद अब PFI का दानिश अली गिरफ़्तार: दिल्ली दंगों व जामिया से जुड़े हैं तार

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनपीआर) के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को आज बड़ी सफलता हाथ लगी। जाँच में जुटी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आज सोमवार (मार्च 9, 2020) को दानिश नाम के PFI सदस्य को गिरफ्तार किया। दानिश पर आरोप है कि सीएए के ख़िलाफ़ वो पोस्टर बाँटने के साथ-साथ गलत प्रोपगेंडा फैला रहा था।

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दिल्ली पुलिस के अनुसार, दानिश अली दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके का रहने वाला है। पुलिस इससे पूछताछ करने के बाद अब इसके बाकी साथियों का भी पता लगाने में जुटी है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि आखिरकार इनका नेटवर्क किस प्रकार से जामिया में सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे प्रोटेस्ट में काम कर रहा था व किस प्रकार से इन्हें फंंडिंग हो रही थी और दिल्ली में चल रहे सीएए के विरोध प्रदर्शन में इसका इस्तेमाल कैसे किया गया।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली पुलिस, पिछले दिनों हुई हिंसा में अब तक PFI के दर्जनभर सदस्यों के शामिल होने की बात कह चुकी है। इसी के साथ वह काफी समय से साइबर सेल की मदद से इनके सक्रिय सदस्यों की कॉल डिटेल खंगाल रही थी। जिसके मद्देनजर ही रविवार को जामिया इलाके से ISIS से जुड़े दो संदिग्ध आतंकियों (दंपत्ति) की गिरफ्तारी हुई।

ये दोनों सीएए खिलाफ धरने पर बैठे लोगों को भड़काने और उकसाने का काम कर रहे थे। साथ ही सीएए के विरोध में गलत प्रोपेगेंडा चला रहे थे। पुलिस ने इनके पास से काफी सामान भी बरामद किया था। पड़ताल में ये भी पता चला था कि इनकी कोशिश सीएए के विरोध के जरिए भारत में दंगे कराने की थी।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में सीएए, एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में आगजनी, पथराव और मारपीट की कई घटनाएँ हुईं थीं। जाँच पड़ताल में दिल्ली पुलिस के विशेष जाँच दल ने पाया था कि दक्षिण के जामिया नगर के अलावा उत्तर पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर, जाफराबाद, सीमापुर, दरियागंद में हुए दंगो में बांग्लादेशी शामिल थे। साथ ही पीएफआई की भी इसमें सक्रिय भूमिका थी।

राजस्थान: मामा परवेज करवाता था भांजी का गैंगरेप, इमरान, आमीर सहित कई लोगों ने 1 महीने तक बनाया शिकार

राजस्थान के अलवर से एक शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ 22 साल की एक युवती को एक महीने तक नशे की हालत में रखा गया और फिर अलग-अलग जगहों पर ले जाकर 5-6 लोगों ने गैंगरेप किया। पीड़िता ने इस घिनौनी वारदात के लिए अपने मामा परवेज मुन्सर्फ को जिम्मेदार ठहराया है। पीड़िता का कहना है कि उसका मामा ही उसे अलग-अलग जगहों पर ले जाकर उसका गैंंगरेप करवाता था।

पीड़िता ने शनिवार (मार्च 7, 2020) को थाने पहुँचकर इसकी शिकायत दर्ज कराई और बताया कि आरोपितों ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया है। वो उसे धमकी देते हैं कि अगर उसने किसी को इसके बारे में बताया तो वीडियो वायरल कर देंगे और उसे जान से मार डालेंगे। 

लक्ष्मणगढ़ थानाधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि पीड़िता ने 26 दिसंबर 2019 को अपने रिश्तेदार और उसके साथियों के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज करवाया है। मामला दर्ज कर जाँच लक्ष्मणगढ़ के डीएसपी भूपेंद्र शर्मा को सौंप दी गई है। पीड़िता ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 26 दिसंबर 2019 को वह घर में अकेली थी। इसी दौरान रिश्ते में मामा लगने वाला गाड़ी लेकर उसके घर आया। उसने युवती को नौकरी लगवाने का झाँसा दे दस्तावेज लेकर साथ अलवर चलने को कहा। वह भरोसा कर उसके साथ चली गई। उसके मामा परवेज मुन्सर्फ का उसके घर आना-जाना था। इसलिए वो उसकी बातों पर भरोसा करती थी। उसने बताया कि मामा उसे नौकरी लगाने की भी बात कहता था और परीक्षा में अच्छे नंबर प्राप्त करने का बहाना बनाकर उसे ताबीज भी बनाकर देता रहता था।

जब परवेज ने उसे अपने साथ दस्तावेज लेकर चलने के लिए कहा तो उसने कागज निकालने के लिए पिता का सूटकेस खोला, जिसमें 10 लाख रुपए और 5 किलो चाँदी रखी हुई थी। जिसे परवेज ने देख लिया और तभी उसे नशीला पदार्श पिलाकर उसे बेहोश कर दिया। इसके बाद परवेज पीड़िता के पिता के रुपए और चाँदी लेकर एक मकान पर ले गया। वहाँ उसने फिर से कोल्ड ड्रिंक में नशा मिलाकर पीड़िता को नशा करवाया।

जब पीड़िता नशे की अवस्था में थी तो परवेज उसे गाजियाबाद के होटल में ले गया। यहाँ उसके साथ 3-4 दिन तक रेप किया गया। इसके बाद परवेज उसे नशे की हालत में ही चंडीगढ़ कोर्ट में ले गया, जहाँ उससे कोर्ट में कुछ कागजातों पर जबरन दस्तखत करवाए गए। इसके बाद नशे की हालत में उसके साथ अश्लील वीडियो बनाए गए। आरोपित यहीं पर नहीं रूके। वो फिर उसे अलवर ले गए। जहाँ 4 लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया और फिर धमकी दी कि वह उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती, क्योंकि उसके साथ रेप करने वाले इमरान और आमीर खान पुलिस में हैं।

इसके बाद भी आरोपितों ने पीड़िता को कब्जे में रखा था। यहाँ भी उसकी निगरानी करने वाले सभी लोगों ने नशीला पेय पिलाकर बारी-बारी से तकरीबन एक महीने तक अलग-अलग जगहों पर ले जाकर उसके साथ रेप किया और फिर जान से मारने की धमकी देकर लक्ष्मणगढ़ बस स्टैंड पर गाड़ी में बैठाकर भाग गया। जैसे -तैसे वह घर पहुँची। लेकिन वो घर पर कुछ भी बताने की हालत में नहीं थी। मगर उसने पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराकर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।     

ISI एजेंट गुलाम फई भारत के खिलाफ लॉबिंग में फिर सक्रिय: अर्बन नक्सल और मीडिया गिरोह भी साथ

अमेरिका में आईएसआई के लिए काम करने के अपराध में जेल काट चुका कुख़्यात गुलाम नबी फई आजकल पाकिस्तान के कश्मीरी एजेंडे के लिए अमेरिकी सांसदों को अपने पक्ष में करने में फिर से सक्रिय हो गया है। फई कश्मीर की आजादी के लिए आईएसआई की तरफ से काम करने के जुर्म में जेल जा चुका है।

मीडिया खबरों के अनुसार अमेरिका में भारतीय हितों के प्रति सद्भावना रखने वालों का मानना है कि पिछले दिनों अमेरिकी मीडिया और खासकर कैपिटल हिल में चले विरोधी प्रोपेगेंडा के पीछे फई द्वारा की गई बेहद इंटेंस लॉबिंग जिम्मेदार है। फई को आईएसआई के लिए काम करने के जुर्म में वर्जीनिया से 2011 की जुलाई में गिरफ्तार किया गया था। तब उसको मिली 2 साल की सजा पूरी होने के पहले ही अधिकारियों के साथ “सहयोगी रवैये” के कारण उसे छोड़ दिया गया था।

गुलाम नबी फई अमरीका में भारत विरोधी कश्मीरी लॉबी का जाना-पहचाना चेहरा है। ये भारत सरकार के खिलाफ कश्मीर मुद्दे पर काफी बड़े स्तर पर इवेंट्स आयोजित कर चुका है। कश्मीर में पैदा हुए फई पर आरोप था कि इसने पाकिस्तान से मिले लगभग 4 मिलियन डॉलर का उपयोग कश्मीर के संदर्भ में अमेरिकी पक्ष को प्रभावित करने के लिए किया था।

आईएसआई एजेंट फई के संबंध ‘अर्बन नक्सल’ गौतम नौलखा से भी हैं, जिस पर पीएम मोदी की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। फई द्वारा आयोजित कई इवेंट्स में गौतम नवलखा भाग भी लेता रहता है, जहाँ अमेरिकी नीतियों को कश्मीर पर भारत विरोधी रुख अपनाने के लिए प्रभावित किया जाता था।

जेल से छूटने के बाद कुछ साल तक निष्क्रिय रहा फ़ई आजकल फिर से उन्हीं गंदे तौर-तरीकों पर उतर आया है, जिनके जरिए वो अमेरिका में भारत विरोधी एजेंडे के लिए लॉबिंग करता था। रिपोर्ट के अनुसार भारत में नागरिकता संशोधन कानून पास होने के बाद फई दुबारा से अमेरिकी सीनेट सदस्यों और मीडिया के साथ अपने संवाद में तेजी लाया है।

संडे गार्जियन से एक इंटेलिजेंस के सूत्र ने बताया कि आजकल फई ऑडियो-वीडियो समेत सभी माध्यमों का उपयोग कर अमेरिका में कश्मीर और मुस्लिमों के खिलाफ हो रहे भारतीय अत्याचार पर लगातार लॉबिंग में व्यस्त है।

फई फ़िलहाल वॉशिंगटन बेस्ड ‘वर्ल्ड कश्मीर अवेयरनेस फोरम’ का सेक्रेटरी जनरल है, जिसकी अध्यक्षता गुलाम नबी मीर करता है। यह फोरम अमेरिका में भारत विरोधी कश्मीरी प्रोपेगेंडा फैलाने में सबसे आक्रामक है, जो खुले तौर पर कश्मीर को भारत से अलग करने की बात करता है।

फई के अनुसार आईएसआई तीन बिंदुओं पर काम करता है। पहला, अमेरिकी प्रशासन को इस बात के लिए कन्विंस करना कि कश्मीर को अगर आत्म निर्णय का अधिकार मिले, तो अमेरिकी हितों के लिए फायदेमंद है। दूसरा, अमेरिकी कॉन्ग्रेस को हाउस इंटरनेशनल रिलेशंस और सीनेट फॉरेन रिलेशंस आदि कमिटियों के मार्फत से प्रभावित करना। और तीसरा, मीडिया को कश्मीर विषय पर आयोजित इवेंट्स के जरिए प्रभावित कर कश्मीरी मुद्दे पर विचार-विमर्श को खुद के अनुकूल मोड़ना।

अप्रैल 2012 में जम्मू-कश्मीर सरकार ने आईएसआई और फई के लिए काम करने वाले संगठनों और व्यक्तियों का पता लगाने के लिए एक एसआईटी का गठन भी किया था। यह एसआईटी 2002 बैच के आईपीएस अधिकारी उत्तम चंद की अध्यक्षता में बनाया गया था, जो उस समय बतौर एसएसपी बडगाम तैनात थे। इस एसआईटी की जाँच कहाँ तक बढ़ी, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है क्योंकि किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ फई और आईएसआई से संबंध रखने के कारण कोई एक्शन नहीं लिया गया है। फिलहाल उत्तम चंद सेंट्रल डेपुटेशन पर कैबिनेट सेक्रेटेरिएट में नियुक्त हैं।

बडगाम के जिला अधिकारी ने 1980 में फई के खिलाफ जन सुरक्षा कानून के तहत राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप के चलते एक वॉरंट भी जारी किया था, जो उसके खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में अभी तक पेंडिंग है। इस वॉरंट के जारी होने के बाद फ़ई कश्मीर से भागकर सऊदी अरब चला गया था, जहाँ से किंग फैसल फाउंडेशन के जरिए वो अमेरिका चला गया था। इसी फाउंडेशन ने पेंसिल्वेनिया के टेम्पल यूनिवर्सिटी में फई की पढ़ाई और दूसरे खर्चे उठाए थे।

पाकिस्तान के लिए फई की महत्ता अक्टूबर 2016 की एक रिपोर्ट से पता चलती है, जिसे पाकिस्तानी सेनेट की 13 सदस्यीय कमिटी ने तैयार किया था। इसमें एक मीडिया कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाने की सिफारिश की थी जिसमें पत्रकार, विदेश कार्यालय के प्रतिनिधि, सूचना मंत्रालय, संसद और इंटेलिजेंस के सदस्यों को शामिल करने की बात भी थी, जिसका काम भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाना और कश्मीर पर होती बहसों को खुद के अनुकूल प्रभावित करना निर्धारित किया गया था।

इस कमिटी का काम जम्मू कश्मीर मुद्दे पर लगातार विदेशी जर्नलिस्ट्स को ब्रीफ करना और भारत में उन सभी को अपने साथ एंगेज करना था, जो मोदी सरकार की पाकिस्तानी विरोधी तथा कथित अतिवादी नीतियों के खिलाफ विचार रखते हैं, जिसमें राजनीतिक दल, मीडिया, सिविल सोसाइटी ग्रुप्स और ह्यूमन राइट संगठन शामिल हैं।

दिल्ली हिंसा: AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन का भाई शाह आलम गिरफ्तार

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंदू विरोधी हिंसा मामले में आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम को पुलिस ने आज गिरफ्तार कर लिया। शाह आलम का नाम चाँदबाग में भड़की हिंसा के मद्देनजर जाँच में सामने आया था। उसपर चाँदबाग हिंसा में शामिल होने का आरोप है। साथ ही ये भी आरोप है कि अंकित शर्मा की हत्या के वक्त वह घटनास्थल पर मौजूद था। इसलिए अब केस में उससे पूछताछ की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंसा के काफी समय बाद तक पुलिस का शक शाह आलम की तरफ नहीं गया था। जिसके कारण उसके ऊपर कोई एफआईआर नहीं हुई और न ही उससे कोई पूछताछ हुई। बस फिर क्या, इसी का फायदा उठाकर वह फरार हो गया।

जानकारी के अनुसार, शाह आलम का नाम गवाहों ने अपने बयान में लिया था। इसके मद्देनजर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उससे पूछताछ करनी चाहती थी। मगर, जब उसकी खोजबीन हुई तो पता चला कि वह फरार है। प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया था कि हिंसा वाले दिन शाह आलम अपने भाई यानी ताहिर हुसैन की छत पर दंगाइयों के साथ मौजूद था और हिंसा भड़काने में उसका बहुत बड़ा हाथ है।

हालाँकि, शाह आलम के खिलाफ तब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी, लेकिन क्राइम ब्रांच को पूछताछ में लोगों ने उसका नाम बताया था। इसलिए उसकी तलाश की जा रही थी। चश्मदीदों ने बताया था कि अंकित शर्मा को ताहिर के गुंडे उसकी इमारत में ले घसीटकर ले गए थे। बाद में उनका शव नाले से बरामद किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से अधिक बार गोदा गया था।

चश्मदीदों ने ये भी बताया था कि इस इमारत में शाह आलम भी मौजूद था। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद ताहिर हुसैन भी फरार हो गया था। बाद में उसने दिल्ली की एक अदालत में अग्रिम जमानत याचिका डाली। लेकिन पिछले गुरुवार को अदालत में सरेंडर करने से पहले ही पुलिस ने दबोच लिया।

सीताराम येचुरी के लिए तीसरी बार भी राज्यसभा का रास्ता बंद, अपनी पार्टी के नेता ही बने रोड़ा

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी के लिए तीसरी बार भी राज्यसभा तक पहुँचने का रास्ता बंद हो गया। उन्हें उच्च सदन भेजने को लेकर उनकी खुद की पार्टी में आपसी मतभेद नजर आए। बताया जा रहा है कि पार्टी की केंद्रीय समिति ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल से कॉन्ग्रेस के समर्थन से उन्हें उच्च सदन में भेजने की माँग को रद्द कर दिया।

जानकारी के अनुसार, येचुरी को तीसरी बार भी राज्यसभा भेजने से रोकने के लिए केंद्रीय समिति के 45-50 सदस्यों ने वोट किया। जबकि केवल 25-30 ने उनका समर्थन किया।

इधर, बंगाल के नेताओं का तर्क है कि यदि वह उनके दिए ऑफर यानी समर्थन का फायदा नहीं उठाते हैं तो पार्टी का उच्च सदन में पश्चिम बंगाल से कोई प्रतिनिधित्व नहीं रह जाएगा। लेकिन, CPIM के कुछ नेताओं का मत है कि यदि येचुरी निर्विरोध चुने जाते हैं तो कॉन्ग्रेस के वोट लेने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। वहीं कुछ का तर्क है कि येचुरी को विपक्षी राजनीति में सब जानते हैं और संसद में उनकी उपस्थिति से पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर पैठ बढ़ेगी। 

बता दें, पश्चिम बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों के लिए 26 मार्च को चुनाव होने हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल में विधायकों के आँकड़े के लिहाज से 4 राज्यसभा सीटें टीएमसी के हिस्से में जाना तय हैं और बाकी एक सीट अन्य के खाते में जा सकती है।

ऐसे में इस एक राज्यसभा सीट पर कॉन्ग्रेस और मार्क्सवादी पार्टी मिलकर अपना कब्जा जमा सकती हैं। लेकिन, बंगाल में सीपीएम ही नहीं पूरे वामपंथी दलों को भी मिलाने के बाद इतने विधायक नहीं हो रहे हैं कि वे अपने दम पर सीताराम येचुरी को राज्यसभा भेज सकें।

हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सीताराम येचुरी को राज्यसभा न भेजना एक और ऐतिहासिक गलती होगी। वहीं, पोलित ब्यूरो के सदस्य प्रकाश करात के नेतृत्व में एक वर्ग का मत है कि वह कॉन्ग्रेस के समर्थन से येचुरी के राज्यसभा जाने का समर्थन किसी भी रूप में नहीं करते हैं। उनका कहना है कि पार्टी के महासचिव का कॉन्ग्रेस के समर्थन से चुना जाना पार्टी की उस विचारधारा के खिलाफ है जिसमें उस पार्टी के साथ गठबंधन न करने का फैसला लिया गया है।

गौरतलब है कि येचुरी 2005 से 2017 तक राज्यसभा सदस्य रहे थे, लेकिन 2017 में पार्टी ने उन्हें फिर राज्यसभा में भेजने से इनकार कर दिया। हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी ने पहले भी उन्हें राज्यसभा में भेजने का ऑफर दिया था। मगर, यह तीसरी बार है जब येचुरी को राज्यसभा भेजने में उनकी पार्टी ही रोड़ा बन गई हो।

इंडिया टुडे से बातचीत में एक पार्टी लीडर ने येचुरी को राज्यसभा न भेजे जाने पर कहा कि ये पार्टी की पुरानी परंपरा है कि महासचिव इलेक्शन नहीं लड़ सकता। जबकि दूसरे नेताओं का कहना है कि राज्यसभा जाने के लिए पार्टी एक नेता को दो बार से ज्यादा नॉमिनेट नहीं किया जा सकता।

अलीगढ़ में रंग-बिरंगे तिरपालों से ढक दी गई मस्जिद: होली पर सुरक्षा चाक-चौबंद, 5000 को नोटिस जारी

उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द बनाने रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है। संवेदनशील इलाक़ों पर ख़ास नज़र रखी जा रही है। ऐसे में अलीगढ़ में एक मस्जिद को ढक दिया गया ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो। देश और दुनिया में होली का त्यौहार मंगलवार (मार्च 10, 2020) को है लेकिन इसका खुमार इसके कई दिनों पहले से ही चढ़ जाता है और रंग-गुलाल उड़ने लगते हैं। इसीलिए एहतियातन मस्जिद को शामियाने से ढका गया है।

अलीगढ़ के एसपी अभिषेक ने बताया कि शहर के अति संवेदनशील अब्दुल करीम चौराहे पर स्थित हलवाईयान मस्जिद को शामियाने से ढक दिया गया है। उन्होंने बताया कि ऐसा इसीलिए किया गया है ताकि कहीं कोई मस्जिद पर रंग न फेंक दे। इस क्षेत्र में सांप्रदायिक घटनाओं का पुराना इतिहास रहा है और इसीलिए प्रशासन पहले से ही तैयार है। हालाँकि, ये भी कहा जा रहा है कि इस मस्जिद को पहले भी ढका जाता रहा है। लेकिन, इस बार सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शनों को देखने हुए प्रशासन ज्यादा सावधानी बरत रहा है।

मस्जिद को ढकने के लिए दो तरह के तिरपालों का प्रयोग किया गया है। एक काले तिरपाल और एक लाल-पीले तिरपाल का प्रयोग किया गया है। अलीगढ़ में होली पर व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए क़रीब 5000 लोगों नोटिस जारी किया गया है और 1000 लोगों को पाबंद किया गया है। किसी छत पर पत्थर वगैरह या कोई संवेदनशील चीज न रखी हो, इसके लिए ड्रोन कैमरों से छतों की निगरानी की जा रही है। पुलिस बल लगातार पेट्रोलिंग में लगी हुई है।

रैपिड एक्शन फोर्स को भी पेट्रोलिंग के काम में लगाया गया है। अब्दुल करीम चौक पर बड़ी संख्या में लोग होली खेलने आते हैं, इसीलिए यहाँ ख़ास सुरक्षा-व्यवस्था रखी गई है। जहाँ तक लोगों की होली की तैयारी की बात है, बाजारों में मोदी-योगी के चित्र वाले पतंगों की धूम मची हुई है। अलीगढ़ में होली के साथ-साथ पतंगबाजी का प्रचलन रहा है और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए प्रशासन भी इसे बढ़ावा देता रहा है।

2 बाइक की टक्कर, 2 संप्रदाय के लोग… और एक दर्जन घायल: ‘हिंदू-मुस्लिम तनाव वाली मीडिया रिपोर्ट फर्जी’

मेरठ के लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र में रविवार (मार्च 8, 2020) की दोपहर 2 अलग-अलग संप्रदायों के 2 पक्षों में टकराव व मारपीट का मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार, ये तनाव बाइक टकराने के कारण भड़का। लेकिन, देखते ही देखते इसने इतना तूल पकड़ लिया कि दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सांप्रदायिक झगड़े की खबर सुनकर पुलिस भी एक्शन में आ गई और सूचना के आधार पर फौरन मौक़े पर पहुँची। साथ ही झगड़ा करने वाले दोनों पक्षों को पकड़कर थाने ले गई, जहाँ इन पर आगे की कार्रवाई हुई।

खबरों के मुताबिक, मेरठ के लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र में 2 युवकों की बाइक टकराने पर आपस में बहस शुरू हुई थी। मगर, धीरे धीरे मामला गाली-गलौच तक पहुँच गई और थोड़ी देर में दोनों युवकों के बीच मारपीट हो गई। हाथापाई शुरू होते ही कुछ अन्य लोग भी यहाँ पहुँचे और उन्होंने भी घटनास्थल पर माहौल बिगाड़ने का काम किया। इस झड़प में एक दर्जन लोगों के घायल होने की सूचना है, जिन्हें बाद में इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बताया जा रहा है कि घटना की सूचना मिलने के बाद कई थानों की पुलिस फोर्स मौक़े पर पहुँची और दोनों पक्ष के लोगों को अपने साथ थाने ले गई। मगर, थाने में भी ये मामला शांत नहीं हुआ और दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। पुलिस ने किसी प्रकार वहाँ भी उन्हें समझा बुझाकर शांत करवाया और आगे की कार्रवाई की।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस का कहना है कि होली के त्योहार पर माहौल खराब करने की आशंका को लेकर दोनों पक्षों पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी तरह क्षेत्र का माहौल नहीं  बिगाड़ने दिया जाएगा।

यहाँ बता दें कि बाइक टकराने को लेकर हुई इस झड़प को मीडिया रिपोर्ट्स में साम्प्रदायिक हिंसा का रूप देकर पेश किया जा रहा है। लेकिन ऑपइंडिया ने जब थाने में संपर्क किया तो पुलिस ने कहा कि इस घटना में साम्प्रदायिक हिंसा जैसा कोई मामला नहीं है।

गौरतलब है कि मेरठ में ही कल पुलिस ने होली पर हुड़दंग मचाने की तैयारी करने के आरोप में 250 लोगों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि इनमें कई ऐसे लोग भी गिरफ्तार किए गए हैं, जिन्होंने पूछताछ में होली पर हिंसा करने की प्लानिंग की बात कही है। एसएसपी का कहना है कि होली पर हिंसा करने वाले वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। होली पर हुड़दंग करने वालों का 5 साल का रिकॉर्ड खंगालने के बाद ही यह कार्रवाई की गई है।

सरफराज ने 8 साल की बच्ची से किया रेप, सजा मिली – टकला कर जूते-चप्पल की माला पहनाया और छोड़ दिया

झारखंड के गिरिडीह जिले के तिसरी थाना क्षेत्र के एक गाँव में 8 वर्षीय बच्ची के साथ 30 वर्षीय युवक द्वारा दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। घटना शनिवार (मार्च 7, 2020) की बताई जा रही है। पीड़िता के घर पर कोई नहीं था। वो अकली थी। बच्ची के पिता किसी काम से चंदौरी गए थे और उसकी माँ भी दो बच्चों के साथ एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए गई थी।

इसी बीच आरोपित सरफराज मौका पाकर पीड़िता के घर में घुस गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसका विरोध करने पर सरफराज ने बच्ची का मुँह दबा दिया। तभी बच्ची के पिता वापस आ गए और उन्होंने घर का दरवाजा बंद देख खटखटाया। उन्होंने बच्ची को दरवाजा खोलने के लिए कहा। मगर सरफराज ने उसका मुँह बंद कर दिया था। थोड़ी देर बाद सरफराज ने दरवाजा खोला और पीड़िता के पिता को धक्का देकर भागते बना।

अंदर की स्थिति देख कर पीड़िता के पिता को सारा माजरा समझ में आ गया। उन्होंने गाँव के लोगों को बुला कर घटना की जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीण आरोपित मोहम्मद सरफराज को पुलिस के हवाले करने के बजाए पंचायत ले गए। पंचायत का फैसला आश्चर्यजनक रहा। फैसले के अनुसार, आरोपित सरफराज का बाल मुड़ाकर जूते-चप्पल की माला पहनाकर गाँव में घुमाया गया और फिर छोड़ दिया गया। पीड़िता के पिता थाना में केस करना चाह रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने मना कर दिया।

हालाँकि गाँव की पंचायत के फैसले से पीड़िता के पिता संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने रविवार (मार्च 8, 2020) को थाना प्रभारी तिसरी को आवेदन देकर कार्रवाई की माँग की। आवेदन के आधार पर पोक्सो एक्ट के तहत आरोपित पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पीड़िता के पिता ने पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई एफआईआर में कहा है कि आरोपित सरफराज घर आया और बच्ची से पूछा कि घर में कौन-कौन है। बच्ची बोली कि माता-पिता बाहर गए हैं तो वह अंदर घुस गया और दरवाजा बंद कर दुष्कर्म किया।

पीड़िता के पिता के एफआईआर के बाद पुलिस आरोपित की तलाश में जुट गई है। थाना प्रभारी उत्तम कुमार उपाध्याय ने बताया कि आवेदन मिलने के बाद आरोपित की गिरफ्तारी के लिए तीन ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है। आरोपित फरार है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। डीएसपी नवीन कुमार इस मामले की जाँच करने घटना स्थल पहुँचे और पीड़िता को मेडिकल जाँच के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है।

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दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में जिन-जिन की हुई नृशंस हत्या, सभी परिवारों को 3-3 लाख रुपए: कपिल मिश्रा का ऐलान

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में दिलबर नेगी की नृशंस हत्या का मामला रुह कँपाने वाला है। उन्हें जिस प्रकार दोनों हाथ काटकर जिंदा जलाया गया, उसे शायद ही उनका परिवार भूल पाए। इसी बीच मानवीय संवेदना और मदद के तौर पर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने प्रयासों से उनके परिवार को आर्थिक रूप से राहत मुहैया कराने के लिए 3 लाख रुपए देने का ऐलान किया है।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इसकी जानकारी अपने ट्विटर पर दी। उन्होंने बताया कि वे दंगा पीड़ित हिंदू परिवारों से मिले और उन्होंने सबकी मदद करने का फैसला किया। उन्होंने ऐलान किया कि इन दंगों में जिन 7 लोगों की नृशंस हत्या की गई, उन सभी को 3-3 लाख रुपए दिए जाएँगे। वहीं, 5 गंभीर रूप से घायलों को 2-2 लाख रुपए दिए जाएँगे जबकि 3 पीड़ित परिवारों को 1-1 लाख रुपए दिए जाएँगे। उन्होंने ट्वीट के जरिए ऐलान किया कि वे इस काम के लिए जल्द से जल्द फंड इकट्ठा करने का काम शुरू करने वाले हैं।

इस ट्वीट के बाद कपिल मिश्रा ने एक और ट्वीट किया और बताया कि जिनकी निर्ममता से हत्या हुई है, वे उन सभी परिवारों की मदद करने के लिए तत्पर हैं। उन्होंने लिखा, “कुल 14 लोगों का पता चल चुका हैं जिनकी निर्ममता से हत्या हुई है, हम उन सभी परिवारों की मदद करेंगे। कई लोगो को गोलियाँ लगी हैं, किसी की चाय की, पान की दुकान, रिक्शा, रेहड़ी जला दिया गया हैं। हम किसी भी एक परिवार को टूटने या कमजोर होने नहीं देंगे। ये संकल्प हैं।”

गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा के दौरान 24 फरवरी को शिव विहार में दिलबर नेगी हत्या मामले में क्राइम ब्रांच की SIT-2 ने शहनवाज नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया था। शहनवाज पर आरोप है कि उसने हिंसा के दौरान मिठाई की दुकान में काम करने वाले 22 वर्षीय दिलबर नेगी को बेहरमी से मारा और उसके दोनों हाथ काटकर उसे जिंदा जला दिया। उधर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ जारी है।

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