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बालाकोट की बरसी पर कथित संघर्ष विराम उल्लंघन पर पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिक को किया तलब

दिल्ली में जारी हिंसा के बीच पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन के संबंध में कुछ खबरें सामने आई हैं। इन खबरों में हैरानी की बात यह है कि सीजफॉयर उलंघन का आरोप भारत ने नहीं बल्कि पाकिस्तान ने भारत पर लगाया है। बुधवार को पाकिस्तान ने कश्मीर में एलओसी (LOC) पर भारतीय सैनिकों पर सीज़फायर (संघर्ष विराम) के उलंघन का आरोप लगाया है। इसके संबंध में पाकिस्तान ने एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक को तलब भी किया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाते हुए कहा है कि मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को ही POK स्थित नेजापीर इलाके में भारतीय सेना की ओर से किए गए संघर्ष विराम उल्लंघन के दौरान एक चालीस साल के व्यक्ति को गंभीर चोटें आई हैं।

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, “भारत द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन में वर्ष 2017 से ही
वृद्धि जारी है, इस दौरान भारतीय बलों ने 1,970 युद्धविराम उल्लंघन किए हैं।” उन्होंने कहा कि भारत द्वारा संघर्ष विराम का उल्लंघन क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है और इससे रणनीतिक नुकसान हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अब तक भारत की ओर से 384 बार सीज फायर का उलंघन हो चुका है।

पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने भारतीय राजनयिक की पहचान नहीं बताई है। साथ ही पाकिस्तान ने भारतीय पक्ष से 2003 के युद्धविराम व्यवस्था का सम्मान करने के साथ ही संघर्ष विराम उल्लंघन की इन और अन्य घटनाओं की जाँच, भारतीय सेनाओं को भी युद्धविराम का सम्मान करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा और कार्य सीमा पर शांति बनाए रखने का भी आग्रह किया है।

गौरतलब है कि आज ही उस बालाकोट एयर स्ट्राइक की पहली बरसी है, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुस कर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंपों पर बमबारी कर उसे तबाह कर दिया था। फरवरी 14, 2019 को हुए जम्मू-कश्मीर के पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने 26 फरवरी की देर रात इसका बदला लिया था और पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित जैश के आतंकी कैंप को नेस्तानबूद कर दिया था। भारतीय वायुसेना के इस एयर स्ट्राइक में जैश के करीब 250 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया था। विपक्षी दलों द्वारा बार-बार माँग करने पर भारत सरकार ने इसका वीडियो जारी कर सबूत भी दिखाए थे।

यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है सर… मस्जिद से ऐलान हो रहे हैं इकट्ठा होने के: आपबीती पूर्वी दिल्ली से

रविवार शाम से ही दिल्ली में जारी हिंसा के बीच एक ओर जहाँ देश का लेफ्ट-लिबरल मीडिया गिरोह इसे हिन्दूओं द्वारा भड़काई हुई हिंसा बताने का प्रयास करते हुए देखा गया वहीं, जमीन पर इन दंगों की असलियत सिर्फ आम आदमी ही जान रहे हैं। हिंसा, आगजनी, गोलीबारी और तोड़फोड़ के बीच ऑपइंडिया से एक दंगा पीड़ित युवती ने सम्पर्क किया। घटना के वक़्त वहाँ मौजूद लड़की ने ऑपइंडिया से सम्पर्क करके बताया कि उसके घर के पास स्थित मुस्लिम कॉलोनी में किस प्रकार से दंगे भड़काने का प्रयास किया जा रहा है।

यह घटना मंगलवार (फरवरी 25, 2020) शाम की है। घटनास्थल पर मौजूद युवती ने फौरन व्हाट्सएप पर इस घटना का आँखों-देखा हाल ऑपइंडिया को भेजते हुए बताया, “यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है। मेरे घर के सामने ही दंगे और मारपीट हो रहे हैं। घर के सामने ही मुस्लिम बस्ती है, वहाँ से लोग आकर हिन्दू इलाके में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। यहाँ न कोई पुलिस है ना ही कोई सुरक्षा का प्रबंध। सिर्फ बजरंग दल और आरएसएस के लोग ही आकर मदद कर रहे हैं। ये यहाँ पर न होते तो वो कब के यहाँ घुस चुके होते। उन्होंने मुस्लिम बस्ती में रहने वाले हिन्दुओं के घर और दुकानों को जला दिया है।”

दंगों से घबराई हुई युवती ने बताया कि यह घटना जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर के पास की ही है। ऑपइंडिया को भेजे हुए संदेश में युवती ने बताया है कि मुस्लिम बस्ती में दिन में ही स्पीकर्स से ऐलान किया गया था कि दिन में बारह बजे के बाद दंगे होंगे।

अपने संदेश में युवती ने कहा कि उनकी कॉलोनी के लोग रात भर खौफ के साए में ही रहे और अगली सुबह पुलिस के फ्लैग मार्च के बाद ही वहाँ मौजूद लोगों ने राहत की साँस ली। साथ ही युवती ने कहा कि भागीरथ विहार में मौजूद हिंदुओं ने ही मुस्लिमों को शरण देकर बचाया है। जबकि मुस्लिम भीड़ निरंतर उनकी कॉलोनी में आकर उपद्रव करने की कोशिश करती रही।

बता दें कि मुख्यधारा की मीडिया निरंतर यह दिखाने का प्रयास करती नजर आ रही है कि दिल्ली के दंगों में मात्र मुस्लिमों को ही नुकसान हुआ है। जबकि इसके उलट हक़ीक़त यह है कि हिन्दू पहचान बाहर होने के डर से यह बताने में भी डर रहे हैं कि मुस्लिम उपद्रवियों ने उनके घरों में घुसकर किस तरह से हैवानियत को अंजाम दिया।

नोट: ऑपइंडिया सुरक्षा कारणों से युवती का नाम और स्थान गोपनीय रख रहा है।

झूठ फैलाते ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार को एक व्यक्ति ने यूँ सिखाया सबक, दिल्ली पुलिस को कर रहा था बदनाम

जेएनयू में भड़की हिंसा के समय हमने ‘इंडिया टुडे’ का फर्जी स्टिंग ऑपरेशन देखा था। मीडिया संस्थान जेएनयू के वामपंथी दंगाइयों को बचाने के लिए एकदम से पगला गया था। अब ‘आजतक’ के एक पत्रकार का झूठ पकड़ा गया है, जो अफवाह फैला कर दिल्ली पुलिस को बदनाम कर रहा था। इससे साफ़ पता चलता है कि किस तरह मीडिया जानबूझ कर दिल्ली में हो रही हिंसा की एकतरफा रिपोर्टिंग कर रहा है। ‘आजतक’ भले ही ख़बरों के प्रसारण के मामले में ‘सबसे तेज़’ होने का दावा करता हो, मगर उसकी पोल खुल गई है।

दरअसल, ‘आजतक (इंडिया टुडे)’ के पत्रकार ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए दिल्ली के एक इलाक़े में गया हुआ था। वहाँ से उसने बताया कि उस क्षेत्र में पुलिस की तैनाती नहीं की गई है। उसने एक तरह से दिल्ली पुलिस को बदनाम करने की कोशिश करते हुए यह दिखाने का प्रयास किया कि दिल्ली पुलिस ग्राउंड पर मौजूद नहीं है और कुछ कार्रवाई नहीं कर रही है। हालाँकि, एक सजग नागरिक ने पत्रकार के झूठ को बेनकाब करते हुए कुछ यूँ उसकी पोल खोली:

एक जिम्मेदार नागरिक ने मीडिया को झूठ फैलाने से रोका

हालाँकि, जब एक सजग नागरिक ने वीडियो शूट किया तो पता चला कि वहाँ पर उस इलाक़े में भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद थे, जो सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त थे। उक्त व्यक्ति ने ‘आजतक’ चैनल का विरोध करते हुए उसके पत्रकार को याद दिलाया कि वो एक नेशनल चैनल के पत्रकार हैं और इसीलिए उन्हें जिम्मेदारी निभाते हुए झूठ नहीं बोलना चाहिए। उसने ‘आजतक’ के पत्रकार को अफवाह न फैलाने की सलाह दी। हालाँकि, पत्रकार सवालों से बचता रहा और उसे कोई जवाब नहीं सूझा तो वो भाग खड़ा हुआ।

उक्त नागरिक ने यह भी बताया कि उस इलाक़े में अतिरक्त पुलिस बल के लिए कण्ट्रोल रूम को भी फोन किया गया है, साथ ही पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़ कर स्थिति को नियंत्रित किया। अब सवाल उठता है कि आख़िर इतना बड़ा मीडिया संस्थान होने के बावजूद ‘इंडिया टुडे’ और ‘आजतक’ इस तरह दिल्ली पुलिस को बदनाम करने के पीछे क्यों पड़ा है?

छेनू और नासिर गैंग ने भड़काई दिल्ली में हिंसा, पुलिस ने की 12 उपद्रवियों की पहचान

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तरी-पूर्वी इलाकों में भड़के दंगों में एक नया खुलासा सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में 12 से अधिक लोगों की पहचान कर ली है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुई हिंसा में दो गैंग इरफ़ान छेनू और नासिर गैंग के शामिल होने की बात भी की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार शाम से दिल्ली में हुई हिंसा आगजनी, गोलीबारी और पथराव इन्हीं छेनू गैंग और नासिर गैंग का हाथ था। अब तक पुलिसकर्मियों द्वारा CCTV और वीडियो के आधार पर उस इलाके में सक्रीय गैंग के 12 से ज्यादा लोगों की पहचान की जा चुकी है। कैमरा में पहचाने गए लोग नासिर गैंग और इरफ़ान छेनू गैंग से बताए जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, बीते 3 दिनों में दिल्ली में 600 से ज्यादा राउंड फायरिंग हुई है। इसका मतलब हथियारों और गोलियों की कमी नहीं थी और ये गैंग ही इसकी सप्लाई कर रहे थे। पुलिस ने आशंका जताई है कि दिल्ली में हिंसा भड़काने और आगजनी करने के लिए छेनू गैंग को हायर किया गया था और इन गैंग्स की मदद से सुनियोजित साजिश के तहत हिंसा भड़काई गई।

यमुनापार के रहने वाले कुख्यात छेनू पहलवान और नासिर गिरोह आज की तारीख में दिल्ली पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द माने जाते हैं। दोनों गिरोहों में पहले कई बार दिनदहाड़े गैंगवार की घटनाएँ होती आई हैं। साल 2010 में स्पेशल सेल ने नासिर को 55 लाख की डकैती के मामले में गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद नासिर ने कुख्यात बदमाश हाशिम बाबा से दोस्ती कर ली थी।

इसी समय हाशिम की अकील मामा और छेनू गिरोह से भी तनातनी जारी थी। वहीं, छेनू को अपनी गैंग का शार्प शूटर माना जाता है। छेनू कुख्यात बदमाश हाजी अफजाल और कमल का चचेरा भाई बताया जाता है। यहीं से नासिर और छेनू के बीच मामला गरमा गया और दोनों गैंग के बीच गैंगवार की घटनाएँ सामने आने लगीं।

रिपोर्ट्स में छेनू गैंग को दिल्ली के सबसे खतरनाक गैंग में से एक माना जाता है और ये नार्थ ईस्ट दिल्ली के साथ लोनी गाजियाबाद में भी सक्रिय है। ये गिरोह काफी बेरहम माने जाते हैं। पहचान के बाद पुलिस इस जाँच में लगी है कि हिंसा के लिए किन लोगों ने इनको हायर किया था।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे की ठीक पहली शाम से ही उत्तर पूर्वी दिल्ली में नागरिकता कानून (CAA) को लेकर फैली हिंसा में अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। इस बीच एक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल ने दंगाइयों की गोली लगने से अपनी जान गँवाई और आज सुबह IB के एक सहायक अधिकारी अंकित शर्मा की लाश दिल्ली के चाँदपुर में बरामद हुई। मृतक अंकित को दंगाइयों ने तब अपना निशाना बनाया, जब वो ड्यूटी से अपने घर लौट रहे थे।

बलिदानी रतनलाल का राजकीय सम्मान के साथ दाह संस्कार: 7 वर्षीय बेटे राम ने दी मुखाग्नि

दिल्ली हिंसा में वीरगति को प्राप्त हुए हेड कान्स्टेबल रतनलाल का आज राजस्थान में उनके पैतृक गाँव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान अंतिम दर्शन पाने के लिए क्षेत्र से हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं 7 वर्षीय बेटे द्वारा पिता को दी गई मुखाग्नि को देख हर किसी की आँखें नम हो गई। रतनलाल की अंतिम यात्रा के दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम और शहीद रतनलाल अमर रहें जैसे नारे गूँजते रहे।

बुधवार को राजस्थान के सीकर के जवान रतनलाल का शव अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गाँव तिहावली पहुँचा ऐसे ही गाँव में लोगों का हुजूम लग गया। घंटों लोगों ने रतनलाल के अंतिम दर्शन किए। इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान कि साथ अंतिम संस्कार किया गया। बलिदानी रतनलाल को सात वर्षीय बेटे राम ने मुखाग्नि दी, जिसे देख हर किसी की आँखे नम हो गई।

इससे पहले रतनलाल को शहीद का दर्जा न देने की ग्रामीणों ने शव को लेने से इंकार कर दिया था। इसके बाद मौके पर पहुँचे सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी से बात की। जहाँ से जवान रतनलाल को शहीद का दर्जा दिलाने और एक करोड़ के मुआवजे की घोषणा के बाद ही ग्रामीणों ने रतनलाल का शव लिया। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने हेड कान्स्टेबल रतनलाल की पत्नी को शोक संदेश भेजा और कहा कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में बहादुर पुलिसकर्मी के परिवार के साथ है। उन्होंने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है।

बता दें कि राजस्थान के सीकर निवासी मृतक हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल वर्ष 1998 में कॉन्स्टेबल के पद पर दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। सोमवार को दिल्ली के गोकुलपुरी में हुई सीएए के नाम पर हुई हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल बुरी तरह जख्मी हो गए थे। गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए जवान ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। रतनलाल की मौत की खबर जैसे ही उनकी पत्नी पूनम को मिली, वह बेहोश हो गईं। देखते ही देखते उनके घर भीड़ जमा हो गई। रतनलाल की दो बेटियाँ और एक बेटा है।


वारिस पठान के बयान और शाहीन बाग़ की दादियों की जहालत के कारण जली दिल्ली: वसीम रिजवी

दिल्ली में CAA विरोध के नाम पर हुई हिंसा के लिए शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने AIMIM के नेता वारिस पठान को जिम्मेदार ठहराया है। हिंसा के पीछे वारिस पठान के उस बयान को कारण बताया गया है, जिसे बीते दिनों कर्नाटक के गुलबर्ग में दिया गया था। दिल्ली हिंसा को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने दिल्ली में हो रही हिंसा को लेकर दिए अपने बयान में कहा कि दिल्ली हिंसा AIMIM के नेता वारिस पठान के बयान का नतीजा है। रिजवी का कहना है कि पठान के उस बयान के बाद ही दिल्ली में लोग उग्र हुए हैं।

वसीम रिजवी ने शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चल रहे धरने पर तंज कसते हुए आगे कहा कि ये हिंसा शाहीन बाग में बैठी दादी और नानियों की जिहालत का नतीजा है। रिजवी ने प्रदर्शनकारियों से हाथ जोड़कर अपील की है कि कॉन्ग्रेसी जहर का प्याला लोग न पिएँ। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के जाल में फँस कर हुकूमत के खिलाफ माहौल मत बनाओ। हुकूमत, देश और सीएए कानून हमारा है। आपस में लड़कर मरने वाले को कोई शहीद नहीं कहता।

इससे पहले रिजवी ने सीएए के ख़िलाफ विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर तंज कसते हुए कहा था कि अगर ऐसे ही हालात रहे तो इस्लामिक दाढ़ी और बगैर मूँछ के डरावने चेहरे हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को तार-तार कर देंगे। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा था कि शाहीन बाग जैसे हजारों धरने हो जाएँ, लेकिन नागरिकता संशोधन कानून पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। रिजवी ने पहले भी शाहीन बाग को अपना निशाना बनाते हुए कहा था कि शाहीन बाग का धरना हक माँगने कि लड़ाई नहीं है, बल्कि हिंदुओं का हक छीनने की जिद है।

गौरतलब है कि कर्नाटक के गुलबर्ग में सीएए के ख़िलाफ आयोजित रैली में AIMIM के नेता वारिस पठान ने हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए कहा था,“उनकी संख्या अभी 15 करोड़ है, लेकिन ये 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी है। अगर ये 15 करोड़ साथ में आ गए, तो सोच लो उन 100 करोड़ हिंदुओं का क्या होगा?”। इस दौरान मंच पर पार्टी प्रमुख असदुद्दीन औवेसी भी मौजूद रहे। आपको बता दें कि वारिस पठान वही नेता हैं, जिनकी 2016 में महाराष्ट्र विधानसभा से सदस्यता इसलिए खत्म कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने सदन में भारत माता की जय बोलने से इनकार कर दिया था।

किसी को डरने की ज़रूरत नहीं, पुलिस बल की कमी नहीं है: दिल्ली में सड़क पर उतरे NSA अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल दिल्ली में ज़मीन पर उतर चुके हैं। मौजपुर इलाक़े में घूम कर उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। डोभाल ने जनता को आश्वासन दिया है कि दिल्ली में ज़मीन पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद हैं और किसी को भी अब डरने की ज़रूरत नहीं है। दिल्ली में भड़की हिंसा में अब तक 200 लोग घायल हुए हैं और 22 लोगों की मौत की ख़बर है। गोकुलपुरी पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को भी दंगाइयों ने मार डाला।

डोभाल ने बताया कि स्थिति एकदम नियंत्रण में है और लोग पूर्णतः संतुष्ट हैं। उन्होने कहा कि पुलिस ग्राउंड पर अपना कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि हालात नियंत्रण में है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एक बार स्थिति शांत हो जाए, सभी सवालों का जवाब दिया जाएगा।

मंगलवार (फरवरी 25, 2020) की रात भी डोभाल ने कई इलाक़ों का दौरा करने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया था कि जो क़ानून सम्मत चलने वाले नागरिक हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि डोभाल अधिकारियों सहित हिंसा से प्रभावित क्षेत्र मौजपुर का दौरा कर रहे हैं:

दिल्ली में सीएए के ख़िलाफ़ भड़की हिंसा में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से भी ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। हाईकोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हुई है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी मारे गए लोगों का ससम्मान अंतिम संस्कार किया जाए और साथ ही मदद के लिए एक हेल्पलाइन नंबर और एक हेल्पडेस्क बनाया जाए। हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार कई शेल्टर्स स्थापित करे, जहाँ दवाओं और कम्बल सहित अन्य सुविधाओं की उपलब्धता हो। हाईकोर्ट ने कहा है कि 1984 दंगे जैसी स्थिति न आए, इसका ध्यान रखा जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि ज़मीन पर एजेंसियाँ शांति-व्यवस्था बहाल करने के लिए लगातार लगी हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट में कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर के बयानों का वीडियो भी चलाया गया। हालाँकि, एसजी तुषार मेहता ने साफ़ कर दिया कि इनका दिल्ली में हुई हिंसा से कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं है।

मस्जिद पर भगवा ध्वज की पुरानी वीडियो शेयर करके फँसी राणा अय्यूब, शिकायत दर्ज

साम्प्रदायिक हिंसा की आग में भभकती राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दंगाइयों के जारी आतंक के बीच खुद को पत्रकार कहने वाली एजेंडाधारी राणा अय्यूब ने कल सोशल मीडिया पर एक पुरानी वीडियो पोस्ट की और दावा किया कि इन दंगों में मस्जिदों को तोड़कर भगवा झंडा लहराया जा रहा है। अब हालाँकि, बाद में इस बात की पुष्टि हो गई कि ये वीडियो 2 साल पुरानी है, लेकिन लोगों को भड़काने के लिहाज से राणा अय्यूब द्वारा की गई कोशिश के लिए उन्हें पहले यूजर्स ने सोशल मीडिया पर आड़े हाथों लिया गया। फिर अब उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज हो गई। शिकायत करने वाले का नाम रमेश सोलंकी है। रमेश ने अपनी शिकायत मंगलवार की शाम ऑनलाइन दायर की।

50 वर्षीय सोलंकी ने दावा किया कि वीडियो 2 साल पुराना है और इसे अय्यूब ने समाज में नफरत फैलाने और दिल्ली हिंसा में और अधिक ईंधन जोड़ने के इरादे से पोस्ट किया था। अपनी शिकायत में सोलंकी ने राणा के ट्वीट और ट्विटर हैंडल @ranaayyub की एक तस्वीर भी अपलोड की।

शिकायत के अलावा सोलंकी ने अपने ट्विटर पर ये भी लिखा कि कृपया इस राणा अय्यूब के खिलाफ कार्रवाई करें। राणा अय्यूब द्वारा साझा किया गया वीडियो 2 साल पुराना है और वह इसे फिर से आज की स्थिति में साझा कर रही हैं, जो समाज में नफरत फैलाने और लोगों को उकसाने का प्रयास है।

रमेश सोलंकी के अनुसार, “राणा झूठी अफवाहों को पोस्ट करने और भारत और भारत सरकार को बदनाम करने के लिए नियमित रुप से काम करती रही हैं, देश में सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने में सफल होने से पहले उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरुरी है।”

राणा अय्यूब द्वारा शेयर किया गया ट्वीट

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई साइबर अपराध के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मामले पर कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वे किसी भी कार्रवाई करने का निर्णय लेने से पहले तथ्यों को जाँच करेंगे। उन्होंने कहा, अगर जरूरत पड़ी तो हम शिकायत को आगे की जाँच के लिए संबंधित पुलिस स्टेशन को रेफर कर देंगे।

गौरतलब है कि 25 फरवरी को ट्विटर हैंडल @RanaAyub पर पोस्ट की गई 45-सेकंड की एक वीडियो क्लिप में कुछ लोगों को एक केसरिया ध्वज और राष्ट्रीय तिरंगा लगाने की कोशिश करते हुए दिखाया गया था। अब आमतौर पर एक जिम्मेदार पत्रकार ऐसी वीडियो आदि के सही होने पर भी शेयर नहीं करते क्योंकि हिंसा भड़कने के आसार होते हैं। लेकिन राणा अय्यूब से ऐसी उम्मीद मूर्खता है।

वीडियो के आने पर कई लोगों ने बताया कि ये पुरानी है, और उस पर केस की धमकी दी, तो उन्होंने उस वीडियो को तुरंत अपने ट्विटर प्रोफाइल से हटा दिया और डिलीट कर दिया। अफवाह फैलाने, झूठे वीडियो शेयर करने और लोगों को भड़काने के लिए झूठ बोलना लिबरल पत्रकारों के गिरोह का पुराना पेशा रहा है। जब पोल खुल जाती है तो वो चुपके से अपना ट्वीट डिलीट कर देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि तब तक काफ़ी लोग उसे पढ़ने या देख चुके होते हैं।

मस्जिद पर भगवा ध्वज: राणा अयूब ने गिरफ़्तारी के डर से डिलीट किया वीडियो, फिर से किया ट्वीट
अमित शाह के गृह मंत्री बनते ही राणा अय्यूब ने एक साथ उगला झाग और जहर

पुलिस पिकनिक नहीं मना रही, एसिड अटैक झेल रही है, एकतरफा हंगामा न हो: दिल्ली HC में तुषार मेहता

दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार (फरवरी 26, 2020) को दिल्ली में हो रही हिंसा के संबंध में हर्ष मंदर द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट में कपिल मिश्रा के बयान का विडियो भी चलाया गया। एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि अभी सभी विडियो की जाँच होनी बाकी है क्योंकि कई पक्षों की तरफ़ से कई सबूत मिले हैं। एसजी ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि उनके बयान का हिंसा की वारदातों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। एसजी ने कहा कि सभी विडियो की जाँच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि ये मामला काफ़ी संवेदनशील है।

वहीं दिल्ली सरकार की तरफ से पेश राहुल मेहरा लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। उनका कहना था कि कार्रवाई होती रहेगी, जाँच के लिए एफआईआर तत्काल दर्ज हो। हर्ष मंदर की तरफ से जिरह करते हुए कॉलिन गोंस्लेव्स ने कहा कि राज्य का ये कहना कि एफआईआर बाद में दर्ज होगा, काफ़ी चिंता का विषय है, क्योंकि ये कोर्ट के सामने आने वाले सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है।

कॉलिन ने हाईकोर्ट में दावा किया कि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बयान के बाद ही सब कुछ शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि ‘गोली मारो गद्दारों को’ वाला नारा काफ़ी लोकप्रिय बना दिया गया है और इसकी आड़ में हिंसा भड़क रही है। कॉलिन ने दावा किया कि अनुराग ठाकुर के एक बयान की वजह से 18 लोग मारे गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं ने अपने समर्थकों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया है। इसके बाद कॉलिन ने हाईकोर्ट में भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा का भी भाषण चलाया।

कॉलिन यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने केंद्र सरकार के सहयोग से लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार के ही गुंडे घूम-घूम कर हमले कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सेना की तैनाती मुद्दा नहीं है, क्योंकि फिलहाल एफआईआर दर्ज होगा या नहीं, इस पर ही बहस होगा। जब एसजी तुषार मेहता ने दोनों पक्षों की तरफ़ से कई विडियो सर्कुलेट होने की बात कही तो कॉलिन भड़क गए। उन्होंने मेहता पर आरोप लगाया कि वो उन्हें धमका रहे हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में साफ़ कर दिया कि अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा- तीनों के विडियो के आधार पर जानबूझ कर एकतरफा हंगामा किया जा रहा है। मेहता ने हाईकोर्ट से अपील करते हुए कहा कि पुलिस का मनोबल न गिराया जाए, उन्हें बदनाम करने की कोशिशों पर लगाम लगाई जाए।

एसजी ने कहा कि सही समय पर एफआईआर दर्ज किया जाएगा। इस पर जस्टिस मुरलीधर ने पूछा कि दिल्ली जल रही है, ऐसे में सही समय कब आएगा? एसजी मेहता ने जवाब दिया कि पुलिस कोई पिकनिक नहीं मना रही है, उन पर एसिड अटैक किए जा रहे हैं। तुषार मेहता ने कहा कि सभी पक्षों द्वारा घृणा भरे भाषण दिए जा रहे हैं और सब की जाँच की जाएगी। उन्होंने मुद्दों को बढ़ा-चढ़ा कर न पेश करने की अपील की।

अभी प्यार से बताया जा रहा, फिर सख्ती से बताया जाएगा: दंगाइयों को चेता रही दिल्ली पुलिस का Video

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रविवार से शुरू हुई हिंसा में अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 250 से अधिक जख्मी हैं। बुधवार को करावल नगर, भजनपुरा, जाफराबाद, भजनपुरा, कबीर नगर, सीलमपुर जैसे इलाकों में तनावपूर्ण शांति देखने को मिल रही है। हालात पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए पुलिस पुलिस और सशस्त्र बलों के जवानों ने कई इलाकों में फ्लैग मार्च किया है।

कई इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है। पुलिस लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है। ऐसा ही एक विडियो सीलमपुर से सामने आया है। इसमें पुलिस माइक से घोषणा करते हुए कह रही है, “सीलमपुर में एक महीने के लिए धारा 144 लगा दी गई है। कोई भी व्यक्ति यहाँ नज़र न आए। अभी तो तुम्हें प्यार से बताया जा रहा है, फिर सख्ती से बताया जाएगा। सभी अपनी दुकानें बंद कर दो यहाँ से।”

इससे पहले मंगलवार रात राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल ने भी सीलमपुर सहित कई प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। इस दौरान उनके साथ पुलिस कमिश्‍नर अमूल्‍य पटनायक भी थे। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है। हालत पर काबू पाने के लिए पुलिस को खुली छूट दी गई है। चार इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया था। इसमें सबसे संवेदनशील मौजपुर, जाफराबाद, करावल नगर और बाबरपुर शामिल हैं।