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जिनके हाथ सिखों के ख़ून से रंगे हैं, वो अमित शाह का इस्तीफा माँग रहे: जावड़ेकर का सोनिया को जवाब

दिल्ली दंगों पर कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने आज (फरवरी 26, 2020) गृहमंत्री अमित शाह से बहुत सारे सवाल किए और भाजपा पर खुलकर निशाना साधा। सोनिया गाँधी के तीखे वार के बाद भाजपा की ओर से वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने पलटवार किया। उन्होंने सोनिया गाँधी को जवाब देते हुए कहा कि जिनके हाथ सिखों के खून से रंगे हों, उन्हें राजनीति करने के लिए सवाल नहीं उठाना चाहिए। जावड़ेकर ने कहा कि दिल्ली कॉन्ग्रेस दिल्ली हिंसा पर गंदी राजनीति कर रही है। ऐसे आरोपों से पुलिस का मनोबल गिरता है।

कॉन्ग्रेस द्वारा अमित शाह के इस्तीफे की माँग को भाजपा नेता ने हास्यास्पद बताया और कहा कि इससे हास्यास्पद माँग कोई नहीं हो सकती, क्योंकि अमित शाह तो उस दिन से स्थिति को संभालने में जुटे हुए हैं, जिन दिन पहली बार हिंसा भड़की थी। उनके मुताबिक, कॉन्ग्रेस ने अमित शाह से सवाल किए है कि हिंसा के दौरान वो कहाँ थे, तो बता दें कि अमित शाह ने तो कल सर्वदलीय बैठक की थी। इस बैठक में उन्‍होंने दिल्‍ली में हिंसा की पूरी स्थिति का जायजा लिया था।

अपनी बातचीत में जावड़ेकर ने कॉन्ग्रेस के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि अभी सबका एक मात्र कार्य है कि हिंसा पूर्ण रूप से रुके और स्थायी शांति हो। चर्चा के लिए तो संसद का सत्र है। वहाँ चर्चा कर सकते हैं। और जिनके हाथ सिखों के नरसंहार से रंगे हों, वो यहाँ हिंसा रोकने में सफलता या असफलता की बात कर रहे हैं।

NDTV जर्नलिस्ट ने रचा सहकर्मियों को हिन्दुओं द्वारा मारने का साहित्य, सहकर्मियों ने कहा- हमें कुछ नहीं हुआ है

लेफ्ट लिबरल मीडिया गिरोह के सदस्य दंगों और हिंसक घटनाओं का इन्तजार सिर्फ इस कारण करते हैं ताकि वो लेखन प्रतियोगिता का हिस्सा बन कर पहला नंबर पाने की पूरजोर मेहनत करें। इसके लिए NDTV से लेकर स्क्रॉल, BBC आदि तथाकथित लिबरल्स की घातक टुकड़ियाँ किस तत्परता से अपने काम में जुट जाती हैं इसका ही एक और उदाहरण सामने आया है।

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में जारी हिंसा के बीच NDTV की जर्नलिस्ट निधि राजदान ने ट्वीट शेयर करते हुए लिखा कि उसके कुछ सहकर्मियों को दंगाइयों की एक भीड़ ने बुरी तरह से पीटा और तभी छोड़ा जब उन्होंने अपनी पहचान ‘हिन्दू’ के रूप में बताई।

निधि राजदान ने अपने ट्वीट में लिखा- “मेरे दो सहकर्मियों, अरविन्द गुणाशेखर और सौरभ शुक्ला को दिल्ली में एक भीड़ ने बुरी तरह से पीटा और सिर्फ तभी रुके जब महसूस हुआ कि ये ‘अपने हिन्दू लोग’ हैं। बिलकुल घिनौना!

NDTV पत्रकार ने दावा किया कि अरविन्द गुणाशेखर को भीड़ ने घेर लिया था और उसके मुँह पर हमला कर रहे थे। वो एक लाठी से उसके सर पर हमला करने ही जा रहे थे कि तब तक सौरभ शुक्ला ने बीच-बचाव किया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया कि भीड़ की लाठी शेखर शुक्ला को लगी और उसकी पीठ, पेट में घूँसे मारे गए। साथ ही उसकी टाँगों पर भी हमला किया गया।

लेकिन संयोगवश NDTV जर्नलिस्ट के दावे के उलट जब ‘पीड़ित’ सहकर्मियों ने अपनी तस्वीर शेयर की तो उनके ना ही चेहरों, और ना ही शरीर के किसी हिस्से पर घाव देखा गया।

निधि राजदान के सहकर्मियों ने अपनी इस तस्वीर को ट्वीट करते हुए लिखा कि दिन खत्म हो गया है और वो तीनों सहकर्मी एकदम ठीक हैं। साथ ही उन्होंने दिल्ली को नसीहत देते हुए लिखा कि लोगों को समझाकर एकदूसरे के लिए दिल में जगह बनाइए।

सौरभ शुक्ला की यह ‘एकदम फिट’ तस्वीर देखने के बाद ट्विटर यूजर्स ने निधि राजदान से सवाल करते हुए पूछा कि उसने तो कहा था कि ये लोग अधमरे कर दिए गए थे। लेकिन इस पर NDTV की जर्नलिस्ट की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई।

ज्ञात हो कि दंगों को भड़काने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर फर्जी ख़बरें छापने वालों के खिलाफ सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी की गई हैं। उन्माद की आशंका वाले सोशल मीडिया एकाउंट्स से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप्स तक पर सरकार की निगरानी है।

बाइक पर ‘जय श्री राम’ का स्टीकर देख 40 लोगों ने मेरे पिता को मार डाला: नितिन ने सुनाई आपबीती

नीचे जो वीडियो संलग्न किया गया है, वो सोमवार (फरवरी 24, 2020) का है। जिस व्यक्ति की लाश सड़क पर पड़ी हुई है, उनका नाम विनोद कुमार है। दंगाइयों ने उन्हें मार डाला। उनके बेटे नितिन किसी तरह इस हिंसा में बच निकले लेकिन अपने पिता की मौत का गम शायद ही कभी उनका पीछा छोड़ पाए। नितिन अभी तक सोच रहे हैं कि आख़िर उन पर हमला क्यों किया गया। हमला करने का कोई कारण नहीं था क्योंकि नितिन या विनोद ने कुछ भी ग़लत नहीं किया था। पहले देखें वीडियो:

ऊपर के वीडियो में आप ये भी देख सकते हैं कि कैसे विनोद कुमार की लाश को जब ले जाया जा रहा है, तब बैकग्राउंड में ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ गूँज रहा है। भड़काऊ नारेबाजी के बीच विनोद कुमार की हत्या कर दी गई। नितिन ने अंदेशा जताया है कि उनकी बाइक के स्टिकर पर ‘जय श्री राम’ लिखा हुआ था और यही देख कर दंगाई भड़क उठे। अब आप समझ सकते हैं कि उपर्युक्त मजहबी नारे लगाने वाले और ‘जय श्री राम’ देखते ही हत्या कर देने वाले कौन लोग हो सकते हैं? ‘स्वराज्य’ की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने नितिन का ये बयान शेयर किया है।

उन्होंने इस घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग की है, जिसे यहाँ हम आपके सामने पेश कर रहे हैं। 51 वर्षीय विनोद की हत्या कर दी गई और उनके 25 वर्षीय बेटे नितिन गंभीर रूप से घायल हैं। दोनों ही बाइक से दवा की दुकान पर जा रहे थे, जब उन पर लाठियों से हमला किया गया। घटना के कई वीडियो वायरल हुए हैं। एक वीडियो शूट कर रहा व्यक्ति उस फुटेज में बताता है:

“देखिए, मुस्लिमों का ये हाल। हिन्दुओं का जीना बेहाल कर दिया है। एक लाश भेजी गई है दूसरे समुदाय की तरफ़ से हमारे हिन्दू भाई की। ये घटना ब्रह्मपुरी गली नंबर एक की है। वो सन्देश दे रहे हैं- ले जाओ लाश, ऐसी लाशें तो रात भर उठती ही रहेंगी।”

स्थानीय लोग भी बताते हैं कि सोमवार को हिंसा काफ़ी ज्यादा भड़क गई थी। अभी तक इलाक़े में मातम पसरा हुआ है। प्लास्टिक और मेटल जलने की बू वातावरण में फैली हुई है। पुलिस गश्त लगा रही। सड़क पर लोग शायद ही दिख रहे हैं। गली नंबर एक में जली हुई बाइक पड़ी हुई है। एक व्यथित हिन्दू ने कहा- “आप आए हैं। बहुत बड़ी बात है। यहाँ तो अभी तक कोई भी नहीं आया, हमारा आदमी मार दिया गया।” नितिन ने बताया कि उस रात क्या हुआ था?

बकौल नितिन, जब वो और उनके पिता बाइक से जा रहे थे, एक बड़ा सा पत्थर आकर उन्हें लगा और वो होश खो बैठे। नितिन बताते हैं कि वो 40 लोगों की इस्लामी भीड़ थी। उन्होंने लाठियों और पत्थरों से बाप-बेटे को पीटना शुरू कर दिया। नितिन ने कई दरवाजे खटखटाए लेकिन किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला। मृतक विनोद की एक बेटी भी है। नितिन कहते हैं कि अब वो अनाथ हो चुके हैं, उनके ऊपर से पिता का साया उठ गया। नितिन को केवल इतना ही याद है कि आरोपितों ने इस्लामी टोपी पहन रखी थी।

‘दोनों तरफ के लोग हैं’: ‘दंगा साहित्य’ के दोगले कवियों से पूछिए कि हिन्दू ने कहाँ दंगा किया, कितने दिन किया?

‘दोनों तरफ के लोग हैं’, ‘मरने वाले दोनों तरफ से हैं’, ‘पत्थरबाजी में इधर के भी थे, उधर के भी थे’, हमें यह भी सोचना चाहिए कि ये जो चंद लोग हैं, चाहे हिन्दू हों, या मुस्लिम’, ‘आपको देखना होगा कि सड़क पर दो गुट हैं’ आदि कविताएँ और साहित्य पूरा लिखा जा रहा है। लिखना भी चाहिए, क्योंकि इस देश में इतिहास तभी से शुरू होता है, जब एक खास समुदाय पर खरोंच आती है।

हमारी सामूहिक याददाश्त इतनी कमजोर है कि हम इस ‘दंगा साहित्य’ के कवियों से ये सवाल नहीं पूछ पाते कि ‘दोनों तरफ के लोगों के आने से पहले जो तीन महीने से ‘एकतरफा हमला’ चला है, वो कहाँ गया? हम यह भूल जाते हैं कि पिछले कुछ सालों से विशुद्ध मजहबी कारणों से मरने वाले हमेशा एक ही तरफ के रहे हैं, चाहे वो कासगंज का चंदन गुप्ता हो, कमलेश तिवारी हो, भारत यादव हो, अंकित सक्सेना हो, प्रशांत पुजारी हो, ध्रुव त्यागी हो, या फिर लोहरदगा के नीरज प्रजापति

पत्थरबाज़ी दोनों तरफ से हुई? कश्मीर में ‘दूसरा तरफ’ कौन सा तरफ था? शाहीन बाग में दूसरा तरफ कौन सा तरफ था? जामिया नगर में, लखनऊ के परिवर्तन चौक पर, बशीरघाट में, अलीगढ़ में, बिजनौर में, मेरठ में, अहमदाबाद में… ये दूसरी तरफ से पत्थरबाज़ी कौन कर रहा था, कहाँ से आ रहे थे पत्थर?

ये जो चंद लोग हैं, ‘चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम’ वाला राग कर्णप्रिय और मानवीय जरूर है, लेकिन ये ढोंग है। ‘ये जो चंद लोग हैं’ या फिर पूरी विचारधारा, पूरा समुदाय फर्जी कारण की डफली बजाता सड़क पर उतर जाता है, क्योंकि संविधान में विरोध की आजादी है! और वो विरोध दसियों लोगों की हत्या और सैकड़ों के घायल होने के रूप में प्रतिफलित होती है।

‘चाहे हिन्दू’ ही पहले लिखा जाता है, जबकि पहले तो एक ही उन्मादी भीड़ उतरी है हर बार। पहले गोधरा में 59 हिन्दुओं को जिंदा जलाया गया, जो कि चर्चा से गायब है। उसका हिसाब कौन करेगा? ट्रेन की बॉगी में बैठे कारसेवकों ने किस पर पत्थर फेंका था? उन 59 हिन्दुओं की बात कोई क्यों नहीं करता?

‘या मुस्लिम’? जी नहीं, अंतिम दिन कुछ हिन्दू पत्थर फेंकने लगे, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पहले दिन से हिन्दू पत्थर फेंक रहा था। पहले दिन से अंतिम दिन तक एक ही भीड़ पत्थर फेंकती दिखी, आग लगाती दिखी, जान लेती दिखी, कट्टे चलाती दिखी…

तीन महीने बाद अगर किसी के घर में मजहबी भीड़ घुस जाएगी तो प्रतिकार न सिर्फ स्वभाविक है, बल्कि अत्यावश्यक भी। प्रतिकार को हमला बताया जा रहा है। ‘हिन्दू’ और ‘मुस्लिम’ को एक ही पंक्ति में लिख कर बराबर किया जा रहा है। एक के अपराध के लदे पलड़े के बराबर में उसे रखने की कोशिश दिख रही है जो नगण्य है।

इस नैरेटिव से बचिए और पूछिए कि जिसकी गली में हिन्दू की लाश जला कर पहुँचा दी गई, उसने तीन महीने से किसका क्या बिगाड़ा था। ‘दंगा साहित्य’ के कवियों से पूछिए कि आज जो ‘दोनों तरफ के थे’, ‘इधर के भी, उधर के भी’ की ज्ञानवृष्टि हो रही है, वो तीन महीने के 89 दिनों तक कहाँ थी, जो आज 90वें दिन को निकली है?

यही ट्रैप है, जिसमें आप हमेशा फँसा दिए जाते हैं। अंतिम दिन की बात को पिछले हर दिन की तरह बताया जाता है। कश्मीरी हिन्दुओं के पलायन की बात होती है, नरसंहार गायब कर दिया गया है चर्चा से। गोधरा दंगों की बात होती है, 59 कारसेवकों की नृशंस हत्या पर कहीं बात नहीं होती।

ऐसे नहीं चलेगा। आज किसी कपिल मिश्रा को आतंकवादी कहा जा रहा है, विकिपीडिया पर सबसे ऊपर लिखा जा रहा है कि ‘भड़काऊ भाषण’ दिया था। अमानतुल्लाह की बातें नहीं होती जिसके भड़काऊ भाषणों का घाव नासूर बन कर शाहीन बाग में रिस रहा है। आप पुरानी बात मत भूलिए, वरना रामजन्मभूमि का इतिहास 1528 से ही बताया जाता रहेगा।

और मैं कौन हूँ? मैं दंगा फैलाने वाला कह दिया जाऊँगा क्योंकि मैंने भगवा रंग का कुर्ता पहना हुआ है, मेरे स्कार्फ पर ‘राधे-राधे’ लिखा हुआ है और मेरे हाथ में रुद्राक्ष है।

बस इतना ही काफी है। लेकिन हाँ, दिल्ली ही नहीं, पूरे देशभर में एक ख़ास भीड़ के लोगों द्वारा की गई हर हिंसा को आप झुठला नहीं सकते। क्योंकि रामचंद्र गुहा और रोमिला थापर जैसे फिक्शन राइटर्स उपन्यासकारों की काल्पनिक कहानियों को हर गली में मौजूद कैमरा रिकॉर्ड कर रहा है।

‘AAP पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडों ने IB ऑफिसर को मार डाला, उसके घर से चल रहे बम व गोलियाँ’

दिल्ली में लगातार हो रही हिंसा की कई घटनाओं के पीछे आम आदमी पार्टी का हाथ होने के आरोप लग रहे हैं। दिल्ली के सत्ताधारी पार्टी पर पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने बड़ा आरोप लगाया है। आईबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या को लेकर ये बड़ा आरोप लगाया गया है। दिल्ली के हिंसा प्रभावित क्षेत्र चाँदबाग़ की एक नाली से अंकित का शव बरामद किया गया है। मिश्रा ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल की पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर से निकले लड़कों ने शर्मा की हत्या की है। हुसैन नेहरू विहार का ही निगम पार्षद हैं। बकौल मिश्रा, हुसैन के घर से निकले आरोपितों ने शर्मा को घसीटा।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ये भी आरोप लगाया है कि ताहिर हुसैन के घर से लगातार पेट्रोल बम चलाए जा रहे हैं और गोलीबारी भी की जा रही है। ये बहुत बड़ा आरोप है क्योंकि अंकित शर्मा की हत्या को ख़ुद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने बहुत ही दुखद क्षति बताया है। केजरीवाल ने कहा है कि दोषियों को किसी भी हाल में नहीं बख्शा जाना चाहिए। उन्होंने इस हमले में मारे गए लोगों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता जताई। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में इस तरह की स्थिति पैदा होना दर्दनाक है।

बता दें कि अंकित शर्मा आईबी के कॉन्स्टेबल थे। कुछ दिनों पहले ही एजेंसी में उनकी नौकरी लगी थी। वह पिछले दिनों गायब थे। उनकी हत्या कर के उनकी लाश को गन्दी नाली में फेंक दिया गया। 26 वर्षीय अंकित शर्मा के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जीटीबी हॉस्पिटल ले जाया गया है। अंकित के पिता देवेंद्र शर्मा दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं। उनकी माँ सुधा शर्मा का रो-रो कर बुरा हाल है। सोमवार (फरवरी 24, 2020) को हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या कर दी गई थी। उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं।

केंद्र सरकार लगातार शांति की अपील कर रही है। ख़ुद पीएम मोदी ने स्थिति की समीक्षा के बाद स्थिति को शांतिपूर्ण और सामान्य बनाने पर जोर दिया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कहा है कि सुरक्षा बल लगातार अपने काम में लगे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी मामले की सुनवाई हुई है, जहाँ कपिल मिश्रा के बयान का मुद्दा छाया हुआ है। अब तक हिंसा में 21 लोगों के मौत की ख़बर है।

चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या

दिल्ली के हालात बेकाबू, तत्काल बुलाई जाए सेना: गो बैक के नारों और घेराव के बाद CM केजरीवाल

उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हुए दंगों को लेकर सीएम अरविंद केजरीवाल ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार दिल्ली पुलिस हालात पर काबू पाने में असमर्थ है। स्थिति पर नियंत्रण के लिए दिल्ली में सेना बुलाई जानी चाहिए। इसके लिए केजरीवाल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखने की भी बात कही है।

रविवार से जारी हिंसा को लेकर केजरीवाल ने ट्वीट कर हालात पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में हालात बेकाबू हैं। दिल्ली पुलिस के नियंत्रण में नहीं है। ऐसे में केजरीवाल ने केंद्र सरकार से तत्काल दिल्ली में सेना तैनात करने की माँग की है। उन्होंने सभी प्रभावित क्षेत्रों में भी तत्काल कर्फ्यू लगाने की माँग की है।

इससे पहले हिंसा में वीरगति को प्राप्त हुए रतनलाल के परिवार से मंगलवार को मिलने पहुँचे सीएम अरविन्द केजरीवाल और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को घटना से गुस्साए लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। इस दौरान आक्रोशित लोगों ने ‘केजरीवाल, वापस जाओ’ और ‘गो बैक केजरीवाल’ के नारे लगाए थे। इस विरोध के चलते केजरीवाल और सिसोदिया को उलटे पाँव वापस लौटना पड़ा था। इतना ही नहीं देर रात जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों और पूर्व छात्रों ने केजरीवाल के घर का घेराव भी किया था।

इस बीच जीटीबी अस्पताल के एमडी सुनील कुमार के मुताबिक नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने वालों और विरोध करने वालों के बीच हुई हिंसक झड़प में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं घायलों की संख्या बढ़कर 250 से भी अधिक हो गई है। इनमें 56 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

दिल्ली के कुछ इलाकों में छिटपुट पत्थरबाजी की घटनाएँ आ रही हैं। जाफराबाद, मौजपुर सहित कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण बने हुए है। हालात पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी है और पुलिस फोर्स फ्लैग मार्च कर हालात पर काबू करने में जुटी हुई है।

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से हिंसा मामले पर जवाब माँगा है। न्यायालय ने यह बताने के लिए कहा है कि जिन लोगों ने भड़काऊ भाषण दिया उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। साथ ही दिल्ली पुलिस के किसी बड़े अधिकारी को पेश होकर जवाब देने के लिए भी कहा है। दिल्ली के हालातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उपद्रवियों ने दिल्ली पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल को भी मौत के घाट उतार दिया। यही कारण है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल ने अब खुद पूरी कमान सॅंभाल ली है।

SP सांसद आजम खान ने MLA पत्नी और बेटे के साथ किया सरेंडर, भेजे गए जेल

समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान, उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बेटा अब्दुल्ला को कोर्ट के आदेश पर आज जेल भेज दिया गया है। बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के जुर्म में आजम खान समेत उनकी पत्नी-बेटे पर ये कार्रवाई हुई। सभी को 2 मार्च तक की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इससे पहले बुधवार की सुबह यानी आज ही आजम खान के साथ पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला ने कोर्ट में सरेंडर किया था।

जानकारी के अनुसार, कोर्ट के आदेश पर आज तीनों को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। उनपर आरोप है कि बार-बार कोर्ट के आदेश से लेकर मुनादी तक कराने के बाद भी वो अदालत में कोर्ट में हाजिर नहीं हुए, जिसे मद्देनजर रखते हुए स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार को सीआरपीसी की धारा-83 के तहत संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किया था।

मगर, इस आदेश के बाद जारी होने के बाद आजम खान सामने आए और आज सुबह एडीजे 6 की कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की, लेकिन कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और उनपर ये कार्रवाई हुई।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने गंज कोतवाली में मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्ला आजम और तजीन फातिमा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। साथ ही आरोप लगाया था कि अनुचित लाभ लेने के लिए सपा सांसद आजम खान और उनकी पत्नी तजीन फातिमा ने बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाए। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस मुकदमे में सम्मन के बाद भी हाजिर न होने पर पूर्व में आजम खान, तजीन फातिमा और अब्दुल्ला आजम खाँ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे।

यहाँ बता दें, अब्दुल्ला के खिलाफ 2-2 जन्म प्रमाणपत्र बनवाने, 2-2 पासपोर्ट बनवाने और 2-2 पैन कार्ड बनवाने के मुकदमे दर्ज हैं। इनमें तीन मुकदमे बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने ही दर्ज कराए हैं।

हालात सामान्य बनाने में जुटी हैं एजेंसियाँ, शांति बनाए रखें: दिल्ली दंगों पर पहली बार बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में हो रही हिंसा को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। तीन दिनों से जल रहे राजधानी के विभिन्न इलाक़े अभी भी अशांत बने हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने दिल्ली के कई क्षेत्रों में हुई हिंसा को लेकर एक विस्तृत समीक्षा की है। पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली पुलिस व अन्य सरकारी एजेंसियाँ एक साथ समन्वय बना कर शांति स्थापित करने और स्थिति को समान्य बनाने के लिए ज़मीन पर काम कर रही है। दिल्ली पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ अपनी तरफ़ से पूरा प्रयास कर रही है।

हिंसा में सोमवार (फरवरी 24, 2020) को पुलिस कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या कर दी गई। अब तक कुल 21 लोगों की मौत की ख़बर है। मुस्लिम भीड़ द्वारा कई जगह उत्पात मचाए जाने, घरों को जलाने और निर्दोष नागरिकों के साथ क्रूरता करने की ख़बरें आ रही हैं। पीएम मोदी ने ताज़ा हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सोशल मीडिया पर लिखा:

“शांति और समरसता हमारी प्रकृति का मूल केंद्र रहा है। मैं दिल्ली के भाइयों-बहनों से अपील करता हूँ कि वो हर परिस्थिति में शांति एवं भाईचारा का माहौल बनाए रखें। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि जितनी जल्दी हो सके, सभी क्षेत्रों में शांति स्थापित हो और स्थिति सामान्य हो।”

बता दें कि मंगलवार की रात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने भी पूरी स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिए। उसी दिन सुबह गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और एलजी अनिल बैजल सहित अन्य नेताओं व अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की।

दिल्ली में चल रही हिंसा को लेकर कई निर्मम वारदातों की ख़बरें भी आ रही हैं। चाँदबाग के एक नाले से आईबी कॉन्स्टेबल का शव मिला है। मृतक अंकित शर्मा (26) खजूरी में रहते थे। कहा जा रहा है कि दंगाइयों ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला। विवेक नामक एक युवक के सिर में मुस्लिम भीड़ ने ड्रिल मशीन घुसा दिया। उसकी सर्जरी की गई है।

दिल्ली HC में कपिल मिश्रा की गिरफ़्तारी को लेकर चर्चा, भरी अदालत में चलाया गया Video

हाई कोर्ट में बुधवार (फरवरी 26, 2020) को दिल्ली में भड़की हिंसा को लेकर सुनवाई हुई। हरीश मंदर ने उच्चतम अदालत से दरख्वास्त की थी कि नार्थ-ईस्ट दिल्ली में लगातार हो रही हिंसा की जाँच के लिए एक स्वतंत्र कमिटी गठित की जाए। जस्टिस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि उन्हें दिल्ली के एलजी ने इस मामले में अदालत में उपस्थित होने के लिए आदेश दिया है। हालाँकि, याचिकाकर्ता के वकील राहुल मेहरा ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की सलाह लिए बिना एलजी ऐसे किसी को पक्ष रखने के लिए नहीं कह सकते।

कोर्ट में शाहीन बाग़ को खाली कराने को लेकर भी एक याचिका लंबित है। मेहता ने इस सम्बन्ध में जजों को याद दिलाया। इसके बाद कोर्ट में कपिल मिश्रा के बयान का मुद्दा आया। आरोप लगा कि भाजपा नेता बयान देकर हिंसा को भड़का रहे हैं। हालाँकि, एसजी तुषार मेहता ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा बयान देने के बाद उन्हें गिरफ़्तार करने की कोई जल्दी नहीं है, क्योंकि अभी इस विषय में जाँच होनी बाकी है। जस्टिस मुरलीधर ने बताया कि याचिकाकर्ता इस मामले में त्वरित आदेश की अपेक्षा रखते हैं, इसीलिए इस पर अभी सुनवाई होना आवश्यक है।

एसजी तुषार मेहता का कहना था कि ये मामला उतना भी अर्जेन्ट नहीं हुआ है कि सभी पक्षों को सुने बिना कोई आदेश जारी कर दिया जाए। उन्होंने भारत सरकार को भी इसमें एक पक्ष बनाने की अपील की और अपने सबमिशन के लिए एक दिन का समय माँगा। लेकिन, जस्टिस मुरलीधर ने पूछा कि क्या आरोपितों के विरुद्ध त्वरित रूप से एफआईआर दर्ज करना अर्जेन्ट मुद्दा नहीं है? उन्होंने कहा कि स्थिति काफ़ी भयावह हो गई है और एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि वो इस मामले के सभी बिंदुओं से परिचित नहीं हैं और इसलिए 1 दिन का समय चाहते हैं।

जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि कई ऐसे विडियो सर्कुलेट हो रहे हैं, जिन्हें सैकड़ों लोगों ने देखा है। उन्होंने मेहता से पूछा कि क्या इन सबके बावजूद उन्हें नहीं लगता कि ये अर्जेन्ट मैटर है? एसजी ने बताया कि उन्होंने ऐसी कोई विडियो नहीं देखी है। कोर्ट में पुलिस की तरफ़ से उपस्थित अधिकारी से जस्टिस मुरलीधर ने पूछा कि क्या उन्होंने वो विडियो देखे हैं? अधिकारी ने बताया कि उन्होंने 2 विडियो देखे हैं, लेकिन कपिल मिश्रा ने बयान वाला विडियो नहीं देखा है।

इस जवाब के बाद जस्टिस मुरलीधर ने पुलिस अधिकारी से निराशा जताते हुए पूछा कि आपके दफ्तर में इतने सारे टीवी हैं, आपने कैसे कपिल मिश्रा का विडियो नहीं देखा है? मुरलीधर ने कहा कि वो पुलिस की स्थिति से चकित हैं। तत्पश्चात उन्होंने कोर्ट में कपिल मिश्रा के बयान वाला विडियो चलाने का आदेश दिया। पुलिस अधिकारी ने पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के साथ खड़े सब-इंस्पेक्टर की पहचान की। इस बयान का ट्रांसक्रिप्ट एसजी मेहता को दिया गया। इसके बाद कोर्ट की सुनवाई दोपहर 2:30 तक स्थगित कर दी गई।

चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या

दिल्ली में नागरिकता कानून के विरोध में शुरू हुई हिंसा भयानक रूप लेती नजर आ रही है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा में उपद्रवियों ने एक आईबी कॉन्स्टेबल की हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया। यह घटना दिल्ली के चाँदबाग की है। नाले से आइबी के कॉन्स्टेबल का शव निकाला गया है।

मृतक अंकित शर्मा (26) खजूरी में रहते थे। मंगलवार (फरवरी 25, 2020) शाम को वह ड्यूटी से घर लौट रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि चाँदबाग पुलिया पर कुछ दंगाइयों ने उन्हें घेर लिया और उनकी पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को नाले में फेंक दिया।

दंगे में मारे गए अंकित शर्मा के परिजन मंगलवार से ही उनकी तलाश में थे। ज्ञात हो कि अंकित शर्मा के पिता रविंदर शर्मा भी IB में हेड कॉन्स्टेबल हैं। उनका कहना है कि पिटाई के साथ अंकित को गोली भी मारी गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेज दिया है। अंकित के पिता रविंदर शर्मा ने मौके पर मौजूद मीडिया को बताया कि उनका बेटा अंकित 2017 में IB में शामिल हुआ था। अंकित की अभी तक शादी नहीं हुई थी। उनके लिए लड़की की तलाश की जा रही थी।

इससे पहले दंगाइयों द्वारा 19 साल के एक हिंदू लड़के पर हमला किया और उसके सिर में ड्रिल मशीन से छेद करने की घटना सामने आई थी। पीड़ित विवेक पर उस वक्त हमला किया गया जब वह अपनी दुकान में बैठा था। इसके अलावा सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विडियो में 2-3 लोग एक हिंदू के शव को भीड़ से दूर लेकर जाते नजर आए थे। लेकिन भीड़ अचानक से गली के बाहर आकर अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर का नारा लगाने लगती है। मारे गए युवक का नाम विनोद बताया जा रहा है। घटना ब्रह्मपुरी इलाके की है।

नोट: सोशल मीडिया में कई तरह के विडियो और तस्वीरें पोस्ट हो रहे हैं। ऑपइंडिया इनकी पुष्टि नहीं करता। इस मुश्किल वक्त में धैर्य बनाएँ रखें और प्रशासन को हालात पर काबू पाने में सहयोग करें।