Home Blog Page 5054

ताहिर हुसैन के घर की छत पर पेट्रोल बम, पत्थरों का मिला जखीरा: पार्षद के बचाव में उतरी AAP

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों के दौरान आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। उनका शव चॉंदबाग के नाले से बरामद किया गया था। इस मामले में आप पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। हुसैन को लेकर लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, ताहिर हुसैन की छत पर से पेट्रोल बम का जखीरा, कट्टों और ट्रे में बड़े-बड़े पत्थर, गुलेल आदि बरामद किए गए है। इंडिया टीवी के पत्रकार कुमार सोनू की रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ।

इंडिया टीवी के रिपोर्टर सुशांत सिन्हा और आजतक की पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने इस खबर को तस्वीरों सहित शेयर किया। दावा किया जा रहा है ये तस्वीर ताहिर हुसैन के घर की छत की है। यहाँ की कई वीडियो पहले भी सामने आ चुके हैं। इनमें ताहिर के घर की छत से दंगाई पत्थरबाजी करते और पेट्रोल बम फेंकते नजर आ रहे है। ताहिर भी हाथ में रॉड लिए दिख रहा है।

मीडिया रिपोर्टो के अनुसार जब कुछ मीडियाकर्मी उसके घर की छत पर पहुॅंचे तो चौंकाने वाला नजारा दिखा। पत्थर का अंबार लगा था। एक बड़ी सी गुलेल पड़ी थी। कोल्ड ड्रिंक की बोतलों में पेट्रोल भरा था। कई कट्टे, बोरियॉं मिलीं जिनमें से कुछ में पत्थर भी थे।

फिलहाल ताहिर कहॉं है यह साफ नहीं है। लेकिन एक विडियो के जरिए उसे खुद को बेकसूर बताने की कोशिश की है। उसका कहना है कि हिंसा के वक्त वह घर में नहीं था और वह अपनी जान बचाकर एक रिश्तेदार के घर पर है।

बता दें कि भाजपा नेता एवं दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया है कि ताहिर के घर से निकले गुंडों ने ही आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या की थी। पत्रकार राहुल पंडिता ने भी चश्मदीदों के हवाले से बताया है कि अंकित के अलावा दो और लोगों को दंगाई खींचकर ताहिर के घर ले गए थे।

जी न्यूज को अंकित शर्मा के भाई ने बताया, “मुस्लिम लोग जो सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे हैं, लोगों को मार रहे हैं, ये बहुत गलत कर रहे हैं। इन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इन्होंने कई घरों का नाश कर दिया। इसमें एक घर हमारा भी बर्बाद हो गया।” अंकित के भाई के अनुसार उनके भाई ड्यूटी से लौट रहे थे जब दंगाई गली के बाहर से उन्हें खींचकर ले गए। उनके मुताबिक भीड़ चार लोगों को खींचकर ताहिर हुसैन के मकान में लेकर गई और उन्हें मारकर नाले में फेंक दिया।

दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी अपने पार्षद के बचाव में उतर आई है। AAP ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ताहिर के घर पर आठ घंटे बाद पहुँची थी। इस मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। आप नेता संजय सिंह ने कहा, “ताहिर हुसैन ने बयान जारी किया। उनके घर के अंदर भीड़ घुसी, तो पुलिस को जानकारी दी। लगातार अपने को बचाने के लिए पुलिस से मदद माँगी। पुलिस आठ घंटे बाद पहुँची और पुलिस ने उन्हें निकाला।” उन्होंने कहा कि ताहिर का कहना है कि भीड़ उनके घर में घुसी थी। वह तो दो दिन से घर में ही नहीं हैं। उन्हें पुलिस ने निकाला है।

अंकित को घसीट कर मार डाला: AAP पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत से गुंडे कर रहे बमबारी, देखें Video

‘AAP पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडों ने IB ऑफिसर को मार डाला, उसके घर से चल रहे बम व गोलियाँ’

चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या

4 लोगों को खींचकर AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर ले गए दंगाई, मार कर नाले में फेंक दिया: अंकित शर्मा का भाई

‘कहते रवीश के चैनल से हूँ, तो ये हाल न होता’: NDTV के पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ ने किया पथराव

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर-मौजपुर इलाके में भड़की हिंसा पर रिपोर्ट करने पहुँचे NDTV पत्रकार श्रीनिवासन जैन पर मुस्लिम भीड़ द्वारा पथराव किए जाने की घटना सामने आई है। न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने इस घटना का विडियो शेयर किया है।

विडियो में श्रीनिवासन को रिपोर्टिंग करते देखा जा सकता है और ये भी कहते सुना जा सकता है कि उनपर पथराव हो रहा है। उनके मुताबिक दंगाई कैमरे में रिकॉर्ड होना नहीं चाहते थे। इसलिए कैमरा देखते ही चिल्लाने लगे और देखते ही देखते एनडीटीवी पत्रकार के ऊपर पत्थरबाजी होने लगी।

यह वीडियो देखकर हैरानी तो तब होती है, जब श्रीनिवासन ये कहते हैं कि जाफराबाद इलाके में कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इकट्ठा हुए हैं और उनमें मीडिया के प्रति बहुत ज्यादा गुस्सा है। इसके बाद वो दंगाइयों को चिल्लाता देख उन्हें आश्वासन देते हैं कि वो उनका विडियो नहीं बना रहे, जबकि उनपर पत्थरबाजी शुरू हो चुकी होती है। फिर वो कैमरे को लेकर उलटी दिशा में चलना शुरू कर देते हैं जिससे पत्थरबाजी करने वाली भीड़ कैमरे में कैद नहीं होती।

सोचिए, पत्थरबाजी करने वाले इन अल्पसंख्यक दंगाइयों के प्रति एनडीटीवी का और उसके पत्रकारों का कितना उदार रवैया है कि घटनास्थल पर मौजूद होने के बाद भी वो उन्हें कैमरे में कैद नहीं करते। विडियो में श्रीनिवासन को कहते सुना जा सकता है कि यहाँ पर पत्थर आने शुरू हो गए हैं तो हम यहाँ पर विडियो नहीं बनाएँगे। हम कैमरा घुमाएँगे और दूसरी तरफ चलेंगे। हमें भीड़ को उत्तेजित नहीं करना।

गौरतलब है कि इसी मामले पर दीपक चौरसिया ने श्रीनिवासन का विडियो वीडियो शेयर करके उनपर तंज कसा है। उन्होंने याद दिलाया है कि जब उनपर शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था, तब श्रीनिवासन ने कहा था कि दीपक चौरसिया पत्रकार ही नहीं हैं।

दीपक चौरसिया ने ट्वीट किया है, “प्रिय दोस्त! श्रीनिवासन जैन शाहीन बाग पिटाई के वक्त आपने लिखा था मैं तो पत्रकार हूँ नहीं! लेकिन आप तो हैं! फिर CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे इन शांतिदूतों ने आप पर पत्थर क्यों बरसाएँ? हाँ, अगर आप उनसे कहते कि आप रवीश कुमार के चैनल से हैं तो आपका ये हाल नहीं होता!” बता दें, 24 जनवरी को शाहीन बाग में भीड़ ने चौरसिया पर हमला किया था। उस वक़्त मीडिया गिरोह के लोगों ने इस हमले को जस्टिफाई करने की कोशिश की थी।

दिल्ली दंगा: मरने वालों की संख्या बढ़कर 30, अब तक 18 FIR, 106 गिरफ़्तार

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाकों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। अब तक 30 लोगों के मौत की पुष्टि हो चुकी है।

https://platform.twitter.com/widgets.js

बुधवार देर शाम को दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता एमएस रंधावा ने बताया कि पूर्वोत्तर दिल्ली में हुई घटनाओं के सिलसिले में 18 एफआईआर दर्ज की गई है। 106 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा बताया कि हिंसा को लेकर पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज और पुख्ता सबूत हैं।

दिल्ली पुलिस ने लोगों की सहायता के लिए दो नंबर जारी किए है, जिस पर मदद के लिए कॉल की जा सकती है। रंधावा ने बताया कि पब्लिक किसी भी मदद या जानकारी के लिए 22829334 और 22829335 पर कॉल कर सकती है। मैं जनता से अपील करना चाहूँगा कि अफवाहों पर ध्यान न दें।

प्रभावित इलाकों में अर्धसैनिक बलों की कुल 107 कंपनियां तैनात की गई हैं। रविवार को भड़की हिंसा ने बाद में दंगों का रूप ले लिया था। एक अनुमान के मुताबिक हिंसा में 800 से अधिक दुकानों-मकानों में आगजनी व लूटपाट को गई। 2000 से अधिक वाहनों को आग के हवाले किया गया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार तीन इलाकों ब्रह्मपुरी, नूर-ए-इलाही और उस्मानपुर के तीसरा पुस्ता इलाके में दंगाइयों ने बुधवार देर रात को भी आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया।

जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर को दिल्ली हिंसा से जोड़ लिबरल गैंग ने फैलाया प्रोपेगेंडा, सच्चाई कुछ और…

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में दंगों के बाद अब तनावपूर्ण शांति है। लेकिन, मीडिया गिरोह और लिबरल गैंग अब भी सच्चाई बताने की जगह अपना प्रोपेगेंडा चलाने से बाज नहीं आ रहा। पहले तो भाजपा नेता कपिल मिश्रा पर हिंसा का ठीकरा फोड़ने की कोशिश की गई और अब जजों के तबादले के बहाने झूठ फैलाया जा रहा है।

लिबरल गैंग ने जस्टिस एस मुरलीधर के तबादले को दिल्ली हिंसा की सुनवाई से जोड़ने की कोशिश कर यह संदेश देने की कोशिश की कि उनका तबादला कपिल मिश्रा से जुड़े मामले की सुनवाई के कारण हुई है। अब मीडिया गिरोह की इस प्रकार की रिपोर्टिंग में कितनी सच्चाई है, आइए जानते हैं।

मंगलवार आधी रात और बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। इसके बाद खबर आई कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे की सलाह पर जस्टिस मुरलीधर का ट्रांसफर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में कर दिया है। अब ये फैसला कब लिया गया इससे मीडिया गिरोह को कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने इस खबर के बहाने अपने प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया।

गिरोह ने हेडलाइन के जरिए पाठकों को ये बताने की कोशिश की कि जस्टिस एस मुरलीधर अब कपिल मिश्रा द्वारा दी हेट स्पीच के मामले में सुनवाई नहीं करेंगे। उनका ट्रांसफर कर दिया गया है। सोचिए, ऐसी हेडलाइन पढ़कर किसे मोदी सरकार, फासीवादी नहीं लगेगी। आखिर क्यों पाठक के मन में सरकार के प्रति सवाल नहीं खड़े होंगे। पाठक पूछने थोड़ी जाएगा कि वामपंथी मीडिया ने ऐसा क्यों लिखा और वैसा क्यों नहीं। उसे तो जो परोसा जाएगा, वो उसे ही ग्रहण करेगा न।

खैर, जैसे ही सोशल मीडिया पर ये खबर तूल पकड़ने लगी वैसे ही इस मामले पर आगे की जानकारी आ गई। जिसमें बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने 12 फरवरी को उनके स्थानांतरण की सिफारिश की थी। इसके बाद ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सीजीआइ बोबडे की सलाह पर दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस मुरलीधर को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रभार सँभालने का निर्देश दिया। ऐसा रूटीन प्रक्रिया के तहत किया गया। जस्टिस मुरलीधर के अलावा दो और जजों के तबादले के आदेश जारी किए गए हैं। इनमें से एक मुंबई हाईकोर्ट से तो दूसरे कर्नाटक हाईकोर्ट से संबद्ध हैं।

4 लोगों को खींचकर AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर ले गए दंगाई, मार कर नाले में फेंक दिया: अंकित शर्मा के भाई

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भड़के दंगों में आम आदमी पार्टी (आप) के पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। उस पर दंगाइयों को शह देने के आरोप लग रहे हैं। कुछ विडियो सामने आए हैं जिसमें उसके घर से लगातार गोलीबारी हो रही है। पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं। उसके छत पर जमा लोग पत्थरबाजी कर रहे हैं। कई विडियो ऐसे आए हैं जिनमें ताहिर खुद रॉड के साथ छत पर दिखाई दे रहा है। साथ में कुछ लोग भी हैं।

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया है कि हुसैन के घर से निकले गुंडों ने ही आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या की थी। अंकित का शव नाले से बरामद किया गया था। पत्रकार राहुल पंडिता ने चश्मदीदों के हवाले से बताया है कि अंकित के अलावा दो और लोगों को दंगाई खींचकर ताहिर के घर ले गए थे। वहीं, जी न्यूज से बातचीत में अंकित शर्मा के भाई ने चार लोगों को खींचकर ताहिर के घर ले जाने का दावा किया है।

राहुल पंडिता ने ट्वीट कर कहा है कि चॉंदबाग के मूॅंगा नगर के लोगों ने ताहिर हुसैन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कई चश्मदीदों ने बताया है कि अंकित शर्मा के अलावा दंगाई दो और लोगों को हुसैन के घर घसीटकर ले गए।

वहीं जी न्यूज को अंकित शर्मा के भाई ने बताया, “मुस्लिम लोग जो सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे हैं, लोगों को मार रहे हैं, ये बहुत गलत कर रहे हैं। इन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। इन्होंने कई घरों का नाश कर दिया। इसमें एक घर हमारा भी बर्बाद हो गया।” अंकित के भाई के अनुसार उनके भाई ड्यूटी से लौट रहे थे जब दंगाई गली के बाहर से उन्हें खींचकर ले गए। उनके मुताबिक भीड़ चार लोगों को खींचकर ताहिर हुसैन के मकान में लेकर गई और उन्हें मारकर नाले में फेंक दिया।

नीचे के विडियो में आप अंकित शर्मा के परिवार का वो बयान देख सकते हैं, जिससे पता चलता है कि कैसे दंगाई अंकित को गली से घसीटते हुए ले गई। परिवार का रो-रो कर बेहद बुरा हाल है।

इस बीच ताहिर ने एक विडियो जारी कर अपनी भूमिका पर सफाई दी है। वो कहता है, “बहुत सारी भीड़ जबर्दस्ती मेरा गेट तोड़ अंदर आना चाहती थी। मैंने पुलिस बुलाई। वो आए। हमारे मकान की तलाशी ली गई। जब कोई दंगाई नहीं दिखा तो मैं पुलिस के सहयोग से जान बचाकर बाहर निकला। पुलिसवालों की निगरानी एक दिन रही उसके बाद पुलिस चली गई। मैं एक सच्चा, अच्छा भारतीय मुस्लिम हूॅं, मैं आगे भी हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के लिए काम करता रहूॅंगा। मैं खुद जान बचाकर परिवार के साथ एक रिश्तेदार के पास हूॅं। मैं बच्चे की सौगंध खाकर कहता हूॅं कि इन सबसे मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैं इस तरह की घटिया राजनीति नहीं कर सकता।”

अंकित को घसीट कर मार डाला: AAP पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत से गुंडे कर रहे बमबारी, देखें Video

‘AAP पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडों ने IB ऑफिसर को मार डाला, उसके घर से चल रहे बम व गोलियाँ’

चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या

दिल्ली दंगों की 8 कहानियाँ, जिसे मीडिया छुपा रहा: अजीत भारती के सवाल | Ajeet Bharti on Delhi Riots and Media Hiding Facts

पूर्वी दिल्ली, चाँद-बाग में स्थित एक घर। वो घर, जहाँ एक हिंदू की बेटी की शादी हो रही थी। ताहिर हुसैन के गुंडों और दंगाइयों के हमले और आगजनी से वो घर पूरी तरह जलकर खाक हो गया है और एक मलबे के ढेर में बदल चुका है। मजहबी दंगाइयों द्वारा घर के ऊपर लगातार पेट्रोल बम फेंके गए। लोगों के ऊपर हजारों की संख्या में टाइल्स फेंके गए। पूरा का पूरा पार्किंग लॉट फूँक दिया गया और सारी गाड़ियाँ जलकर कबाड़ में बदल चुकी हैं। 

आईबी के लिए काम करने वाले अंकित शर्मा की सैकड़ों बार चाकुओं से गुदी हुई लाश एक नाले से बरामद हुई है। लेकिन वामपंथी मीडिया ये कहानियाँ नहीं दिखाएगा क्योंकि ये कहानियाँ महत्वपूर्ण नहीं हैं। हिन्दुओं की मौत से इस देश की मीडिया को कोई फर्क नहीं पड़ता है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

‘एंटी-मुस्लिम’ दंगों का सच: मरने वालों में 8 हिन्दू, 5 का नाम पता नहीं

दिल्ली हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 27 तक पहुँच गई है। जिनमें एक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और IB अधिकारी अंकित शर्मा भी शामिल हैं। दंगों में हुई मौतों को लेकर अब तक मिली जानकारी के अनुसार कुल 27 लोगों में आठ हिन्दू हैं, जबकि कुछ के नाम और पहचान अभी सार्वजनिक होने बाकी हैं। 9 नाम समुदाय विशेष के हैं। जिन 5 लोगों के बारे में अभी पता नहीं चला है कि उनके नाम क्या हैं, वो हिन्दू भी हो सकते हैं और दूसरे मजहब से भी। हमारे पास जो लिस्ट है, उसमें कुल 22 नाम ही हैं।

मृतकों में हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल के साथ ही राहुल सोलंकी और कई अन्य की मृत्यु गोली से हुई हैं। हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की मृत्यु गोली लगने से हुई थी। जबकि अंकित शर्मा की मृत्यु कल शाम ही दंगाइयों ने पीट-पीट कर कर दी थी। हालाँकि, उनके पिता ने यह भी आशंका जाहिर की है कि उन्हें पीटने के बाद गोली भी मारी गई थी। जबकि सोमवार को राहुल सोलंकी की हत्या उस समय कर दी गई, जब वो करावल नगर में खरीददारी करने गया था।

‘रोड जाम करना ही पड़ेगा’: दिल्ली हिंसा पर वामपंथी प्रोपेगंडा पोर्टलों ने यूँ फैलाया ज़हर, दंगाइयों का किया बचाव

दिल्ली में दंगाइयों ने तीन दिन से पूरे महानगर को अशांत कर रखा है। इसमें उनका पूरा साथ दे रहा है मीडिया का एक बड़ा वर्ग, जो बिलकुल ही नहीं चाहता कि दंगाई अगर इस्लामी भीड़ की शक्ल में आएँ तो उनकी पहचान उजागर हों। वहीं दो-चार भाजपा नेता के बयानों को लेकर ऐसा हंगामा मचाया जा रहा है, जैसे बाबर को उन्होंने ही भारत बुला कर कत्लेआम करवाया था। ये ट्रेंड तभी शुरू हो गया था, जब दिल्ली में हिंसा की घटनाएँ शुरू हुई थी। जैसे विधानसभा चुनाव से पहले अनुराग ठाकुर के नाम पर बिल फाड़ा जा रहा था, अब कपिल मिश्रा को बलि का बकरा बना कर असदुद्दीन ओवैसी, वारिस पठान, शरजील इमाम और भड़काऊ बयान देने वाले तमाम लोगों को बचाया जा रहा है।

मीडिया का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि दिल्ली पुलिस को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाए और ये साबित किया जाए कि ‘हिंदुत्व के गुंडे’ पुलिस के साथ मिल कर समुदाय विशेष को मार रहे हैं। हम ऐसे ही प्रपंची मीडिया पोर्टलों की पोल खोलने जा रहे हैं, एक-एक कर। साथ ही हम इस लेख में उनके प्रपंच का जवाब देने से भी नहीं चूकेंगे क्योंकि झूठ व भ्रम फैलाना उनका पुराना पेशा रहा है।

पुलिस ने एक्शन नहीं लिया: द क्विंट

‘द क्विंट’ का सवाल है कि आखिर पुलिस ने एक्शन लेने से पहले अपने राजनीतिक बॉस के आर्डर का इंतजार क्यों किया? पहली बात तो ये कि मीडिया पोर्टल को कैसे पता चला कि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई थी और अमित शाह का आदेश आने के बाद ही पुलिस सक्रिय हुई। साथ ही ‘द क्विंट’ ने कई आपराधिक मामले झेल रहे अमानतुल्लाह ख़ान और भाजपा नेता कपिल मिश्रा की तुलना करने का प्रयास किया। अर्थात, इन्होने अमानतुल्लाह की बात तब की, जब इन्हें कपिल मिश्रा को दंगों का कारण साबित करना था। और पुलिस अपने संवैधानिक नेतृत्व से आदेश नहीं लेगी तो मीडिया से लेगी?

‘द क्विंट’ ने कपिल मिश्रा की तुलना अमानतुल्लाह से की

अख़बार वही छापें, जो हम कहें: न्यूज़लॉन्ड्री

ये एक ऐसा प्रोपेगंडा पोर्टल है, जो चाहता है कि सारे समाचारपत्र इसके हिसाब से ही चलें। अर्थात, ‘दैनिक जागरण’ ने सरसंघचालक मोहन भागवत का बयान छाप दिया तो दिक्कत, उसने पहले पेज पर एड दे दिया तो दिक्कत और ट्रम्प-मोदी की रैली को कवरेज दी तो दिक्कत। यानी, कोई अख़बार भागवत का बयान न छापे। क्या वो अपराधी हैं? नहीं। कोई अख़बार अब किसी भी प्रकार का एडवर्टाइजमेंट के लिए अब ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ से अनुमति ले। क्या ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ मीडिया का दादा बन गया है? मोदी-ट्रम्प की रैली में सवा लाख लोग आए थे तो उसे कवर न किया जाए?

‘न्यूज़लॉन्ड्री’ अब तय करेगा कि कौन अख़बार क्या छापे

रोड जाम तो करना ही पड़ेगा, नहीं तो अटेंशन कैसे मिलेगा: द प्रिंट

‘द प्रिंट’ कई मामलों में मीडिया के इस वर्ग को लीड करता है। जैसे, ये बताना कि फलाँ मामले में वामपंथियों का प्रपंची नैरेटिव क्या रहेगा? इस बार भी न्यूज़ पोर्टल ने कुछ ऐसा ही किया। वो पूछता है कि क्या रोड जाम कर देना इतना बड़ा गुनाह है कि कोई क़ानून अपने हाथ में ले ले? पहली बात तो ये कि 2 महीने से रोड जाम करने से लाखों लोगों को प्रतिदिन परेशानी हुई। दूसरी बात, क़ानून हाथ में किसने लिया? इस्लामी टोपी पहने वो 40 लोग कौन थे, जिन्होंने ब्रह्मपुरी में विनोद कुमार को मार डाला? साथ ही ‘द प्रिंट’ रोड जाम करने को सही ठहराता है और कहता है कि तभी तो अटेंशन मिलेगा।

‘द प्रिंट’ ने रोड जाम करने को सही ठहराया

‘द प्रिंट’ दावा करता है कि गृहमंत्री अमित शाह हिंसा भड़का रहे हैं क्योंकि दिल्ली में भाजपा की हार हुई है। भाजपा की हार तो झारखण्ड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र में भी हुई है। वहाँ क्यों नहीं हिंसा भड़की? वो सब तो बड़े-बड़े पूर्ण राज्य हैं, जबकि दिल्ली तो पूर्ण राज्य भी नहीं है। मुंबई में भी सीएए विरोधी आंदोलन हुए लेकिन वहाँ ‘शाह ने हिंसा क्यों नहीं भड़काई?’

केंद्र सरकार ही तो हिंसा करा रही है: स्क्रॉल

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘स्क्रॉल’ ने सारा इल्जाम भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर लगा दिया। साथ ही पोर्टल ने कहा कि पुलिस भी सरकार के साथ मिल कर समुदाय विशेष को मार रही है। लगता है स्क्रॉल अभी भी ‘कॉन्ग्रेस वाले हैंगओवर’ में जी रहा है क्योंकि उसका ‘वैज्ञानिक तर्क’ है कि सत्ता के संरक्षण के बिना ऐसी हिंसा हो ही नहीं सकती। साथ ही उसने भाजपा के बड़े नेताओं की ‘चुप्पी’ ओर सवाल खड़े किए हैं। यानी, भाजपा नेता कुछ बोलें तो वही बयान हिंसा का कारण बन जाएगा और कुछ न बोलें तो पूछा जाएगा कि चुप क्यों हैं? चित भी मेरी और पट भी।

‘स्क्रॉल’ ने पुलिस व केंद्र पर मिल कर हिंसा करने का आरोप मढ़ा

कितना गाँधीवादी है शाहीन बाग़ का आंदोलन: नवजीवन

ये कॉन्ग्रेस का हिंदी मुखपत्र है, ‘नेशनल हेराल्ड’ का हिंदी संस्करण। इसका कहना है कि शाहीन बाग़ का आंदोलन काफ़ी गाँधीवादी है। क्या राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को गाली देकर अपना गाँधीवाद दिखाया जाता है? शाहीन बाग़ प्रोटेस्ट के मुख्य साजिशकर्ता शरजील इमाम ने भी तो यही किया। उसने गाँधी को बीसवीं सदी का सबसे बड़ा फासिस्ट नेता बताया। जिस आंदोलन के नेता ही गाँधी को फासिस्ट कहे, वो आंदोलन गाँधीवादी कैसे?

‘नवजीवन’ ने शाहीन बाग़ के उपद्रवियों को बचाने में पूरी ताक़त खपाई

प्रोपेगंडा पोर्टल ने आगे लिखा है कि शाहीन बाग़ में मजहबी नारे नहीं लगे। तो वहाँ पर ‘तेरा-मेरा रिश्ता क्या’ कौन लोग बोल रहे थे? वहाँ हिन्दुओं के प्रतीक चिह्नों को गाली दी गई, वो क्या था? वहाँ एक के बाद एक मजहबी नारे लगे लेकिन कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ने झूठ पर झूठ परोसा।

दक्षिणपंथी हिन्दू ग्रुप मुस्लिमों को मार रहा है: ब्लूमबर्ग

जब भारत में रह रहे लोगों को बरगलाने में वामपंथी मीडिया पोर्टल कामयाब हो सकते हैं तो फिर भारत के बाहर रह रहे लोगों के मन में देश की नकारात्मक छवि बिठाना तो उनके बाएँ हाथ का खेल हो जाता है। अब विदेशी लोगों को ग्राउंड की जानकारी है नहीं, ‘ब्लूमबर्ग’ जैसे संस्थान उन्हें झूठ परोसते हैं। भारत में भी एक गुट द्वारा इसे ख़ूब शेयर किया जाता है क्योंकि कुछ लोग ‘विदेशी मीडिया’ को ही मानते हैं। इस पोर्टल ने तो सीधा दावा कर दिया कि मुस्लिम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और हिन्दुओं ने हमला कर दिया।

‘ब्लूमबर्ग’ ने बिना सबूत हिन्दुओं को आतंकी ठहरा दिया

‘ब्लूमबर्ग’ ने बिना किसी सबूत के हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए मनगढंत आरोप लगाए और झूठे दावे कर दिए। अगर हिन्दू गुंडे बन गए हैं तो फिर मरने वालों में हिन्दू क्यों हैं? विदेशी मीडिया में इस तरह के प्रपंच सालों से चल रहा है।

हिंदुत्व के गुंडों ने सीएए विरोधियों को मारा: द वायर

बात अगर प्रपंच की हो रही हो और उसमें ‘द वायर’ का नाम न आए तो शायद पूरा लेख ही अधूरा रह जाएगा। इसने तो बिना किसी सबूत के दावा कर दिया कि हिंदुत्व के ‘गुंडे’ सीएए विरोधियों को मार रहे हैं। जबकि सच्चाई ये है कि सीएए के ख़िलाफ़ किसी भी रैली को सीएए समर्थकों ने नुकसान नहीं पहुँचाया लेकिन सीएए के समर्थन में जहाँ भी रैली हुई, मुस्लिम भीड़ ने पत्थरबाजी की।

‘द वायर’ ने हिंसा को सीएए विरोधियों को कुचलने की हिन्दुओं की साजिश करार दिया

साथ ही ‘द वायर’ ने दिल्ली हिंसा पर वामपंथियों का फेवरिट फॉर्मूला अपनाया और कपिल मिश्रा पर दंगे भड़काने के आरोप लगाए। हालाँकि, इस दौरान उसने शरजील इमाम, ओवैसी, वारिस पठान और अन्य भड़काऊ मुल्ला-मौलवियों के आपत्तिजनक बयानों का जिक्र नहीं किया।

दिल्ली हिंसा: ड्रोन कैमरा से देखने पर छतों पर नजर आए पत्थर, देखें VIDEO

रविवार (फरवरी 23, 2020) शाम से उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के इलाके में हुई हिंसा के बाद पुलिस दंगों की जाँच में जुट गई है। दंगों के बाद प्रभावित इलाकों में पुलिस बल को तैनात किया गया है साथ ही अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किया गया है।

पुलिस ने जब हिंसा प्रभावित इलाकों की ड्रोन कैमरों के जरिए जाँच की तो दिल्ली के शिव विहार इलाके में दिल्ली पुलिस को कई घरों की छतों पर इकट्ठे किए हुए पत्थर देखने को मिले। पुलिस अब इन घरों को चिन्हित कर कार्रवाई की बात कह रही है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि हिंसा में अब तक 106 लोग गिरफ्तार किए गए हैं और 18 पर एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस ने आश्वस्त किया है कि अब हालात पूरी तरह कंट्रोल में हैं और किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को भी कोई शिकायत करनी है, वे 112 नंबर पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा 22829334 और 22829335 नंबरों पर कॉल करके भी शिकायत कर सकते हैं या कोई भी सूचना दे सकते हैं।

दिल्ली में दंगा प्रभावित इलाकों में बुधवार को एडिशनल पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दिए गए हैं। वरिष्ठ अफसरों को प्रभावित इलाकों में जाकर हालात का जायजा लिया है। इसी वजह से बुधवार को हिंसा की कोई और घटना नहीं हुई है। ड्रोन के माध्यम से सर्विलांस किया जा रहा है।

हिंसा का जायजा लेने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल दिल्ली में ज़मीन पर उतर चुके हैं। मौजपुर इलाक़े में घूम कर उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। डोभाल ने जनता को आश्वासन दिया है कि दिल्ली में ज़मीन पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद हैं और किसी को भी अब डरने की ज़रूरत नहीं है। दिल्ली में भड़की हिंसा में अब तक 200 लोग घायल हुए हैं और 22 लोगों की मौत की ख़बर है। गोकुलपुरी पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को भी दंगाइयों ने मार डाला।

डोभाल ने बताया कि स्थिति एकदम नियंत्रण में है और लोग पूर्णतः संतुष्ट हैं। उन्होने कहा कि पुलिस ग्राउंड पर अपना कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि हालात नियंत्रण में है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एक बार स्थिति शांत हो जाए, सभी सवालों का जवाब दिया जाएगा।

‘मैं मरे हुए ठुल्ले के लिए संवेदना नहीं जता सकता’: AAP नेता ने किया दिल्ली दंगों में मारे गए IB अफसर का अपमान

ऐसे समय में, जब कि दिल्ली में हो रहे दंगों में कई पुलिस अधिकारी से लेकर आम जनता अपनी जान गँवा रहे हैं, आम आदमी पार्टी और इसके नेता राजनीतिक उद्देश्यों के कारण अपनी जहरीली मानसिकता से बाज नहीं आ रहे हैं। आज सुबह ही दिल्ली के चाँदबाग इलाके में दंगाइयों द्वारा एक 26 साल के IB अधिकारी अंकित शर्मा (Ankit Sharma) की बेरहमी से हत्या करने की खबर सामने आई। अंकित शर्मा की लाश के बारे में किसी को पता न चले इसके लिए उनकी लाश को एक गंदे नाले में छुपा दिया गया।

लेकिन आम आदमी पार्टी के संयोजक मयूर पंघाल (Mayur Panghaal) ने IB अधिकारी को अपमानित करते हुए सोशल मीडिया पर कई अपमानजनक ट्वीट किए। उसने ना सिर्फ मृतक अंकित शर्मा को ठुल्ला कहा, बल्कि यह भी कहा कि मरे हुए ठुल्ले के लिए उसे कोई अफ़सोस नहीं है।

मयूर पंघाल नवी मुंबई के आम आदमी पार्टी का नेता है। उसने फेसबुक से लेकर ट्विटर पर IB अधिकारी मृतक अंकित शर्मा के खिलाफ बेहूदे और शर्मनाक भाषा का प्रयोग किया।

एक ट्वीट में आम आदमी पार्टी नेता ने लिखा- “आज अंकित शर्मा नाम का एक ठुल्ला गटर में पड़ा मिला। लेकिन किसी मरे हुए ठुल्ले के लिए मुझे कोई अफ़सोस नहीं है।”

इसके अतिरिक्त एक अन्य पोस्ट में मयूर पंघाल ने लिखा, “क्या अंकित शर्मा भी अपने साथियों की तरह दंगाइयों की मदद कर रहा था? वर्दी वाले अपराधी की मौत का कोई अफ़सोस नहीं है।”

एक और पोस्ट करते हुए आम आदमी पार्टी नेता ने लिखा कि अंकित शर्मा को अपने हत्यारे साथी ठुल्लों की मदद करने का नतीजा भुगतना पड़ा है। इसके आगे उसने लिखा, “कोई ठुल्ला अपनी किस्मत से टकराए, इसके लिए मैं दुखी नहीं महसूस कर सकता हूँ। माफ़ करना अंकित शर्मा, तुम गलत लोगों की तरफ थे। जो लोग तलवार के साथ जीते हैं, तलवार से ही मारे भी जाते हैं।”

मनोज पंघाल नवी मुंबई में आम आदमी पार्टी का संयोजक है। अंकित शर्मा के खिलाफ अपने विवादित पोस्ट करने के कारण लोगों के निशाने पर आने के बाद उसने पोस्ट डिलीट कर दिया है और साथ ही अपना अकाउंट भी डीएक्टिवेट कर दिया है। हालाँकि, तब तक लोग उसके पोस्ट का स्क्रीनशॉट ले चुके थे।

मृतक अंकित शर्मा (26) खजूरी में रहते थे। मंगलवार (फरवरी 25, 2020) शाम जब वह ड्यूटी से घर लौट रहे थे, उसी समय चाँदबाग पुलिया पर कुछ दंगाइयों ने उन्हें घेर लिया और उनकी पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को नाले में फेंक दिया। अंकित शर्मा के पिता रविंदर शर्मा भी IB में हेड कॉन्स्टेबल हैं। उनका कहना है कि पिटाई के साथ अंकित को गोली भी मारी गई है।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेज दिया है। अंकित के पिता रविंदर शर्मा ने मौके पर मौजूद मीडिया को बताया कि उनका बेटा अंकित 2017 में IB में शामिल हुआ था। अंकित की अभी तक शादी नहीं हुई थी। उनके लिए लड़की की तलाश की जा रही थी।