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ये प्लेटलेट क्या बला है? कौन सी बीमारी है? ये तो हमने नई चीज सीखी है: इमरान ख़ान का फिर बना मज़ाक

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की तबीयत को लेकर वहाँ राजनीति हो रही है। वे लाहौर के एक जेल में बंद थे। हाल ही में उन्हें इलाज के लिए एयर एम्बुलेंस से लंदन ले जाया गया। इस बारे में बोलते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि जब उन्होंने नवाज़ शरीफ की रिपोर्ट देखी तो उसमें कई बीमारियाँ थीं। बकौल इमरान, पूर्व पाक पीएम को दिल का मरीज भी बताया गया है, उन्हें डायबिटीज भी है और किडनी भी ख़राब है। इसके बाद इमरान ख़ान ने कहा कि शरीफ को ‘प्लेटलेट्स भी हो गई हैं’। इमरान ख़ान ने कहा कि उन्होंने पहली बार प्लेटलेट्स नाम की कोई चीज सुनी और सीखी है। उन्होंने पूछा कि भला ये क्या बला है?

67 वर्षीय पाक पीएम के इस बयान पर लोगों ने उनका मज़ाक बनाया। पत्रकार नायला इनायत ने पूछा कि इतनी उम्र और अनुभव होने के बावजूद इमरान ख़ान ने ब्लड प्लेटलेट्स के बारे में नहीं सुना है। यह अजीब है। आप ऊपर देख सकते हैं कि ख़ान ने प्लेटलेट्स को एक बीमारी के रूप में दर्शाया है जबकि ये ब्लड सेल्स होते हैं, जो ब्लीडिंग को रोकते हैं। जब ख़ून में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है तो अत्यधिक ब्लीडिंग का ख़तरा आ जाता है क्योंकि ‘ब्लड क्लॉट’ बनने बंद हो जाते हैं।

इमरान ख़ान पर नवाज़ शरीफ की स्वास्थ्य चिंताओं को नज़रअंदाज़ करने का आरोप भी लगा है। मंगलवार (नवंबर 19, 2019) को शरीफ को लंदन ले जाया गया। इस पर टिप्पणी करते हुए इमरान ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट्स में कहा गया था कि वो कभी भी मर सकते हैं, लेकिन लंदन जाने वाली फ्लाइट को देखते ही उनकी सारी बीमारी दूर हो गई। इमरान ने नवाज़ शरीफ की बीमारी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें प्लेन की तरफ बढ़ते शरीफ को देख कर आश्चर्य हुआ, क्योंकि वो काफ़ी स्वस्थ दिख रहे थे। उन्होंने कहा कि 15 बीमारियों वाले इंसान की सारी बीमारी लंदन वाली फ्लाइट देखते ही दूर हो गई। नवाज़ शरीफ को 7 हफ्ते के लिए लंदन जाने की इजाजत मिली है।

इमरान ख़ान ने कहा कि जिस तरह से नवाज़ शरीफ विमान की सीढ़ियों पर चढ़ रह थे, उनकी बीमारी की फिर से जाँच कराए जाने की ज़रूरत है। ताज़ा स्वास्थ्य अपडेट्स की बात करें तो नवाज़ शरीफ का 7 बार ‘कार्डियक इंटरवेंशन’ किया गया है। उनका इलाज स्विट्जरलैंड के डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है। नवाज़ शरीफ के बारे में डॉक्टरों ने बताया कि दिमाग तक ख़ून पहुँचाने वाली धमनियाँ 80% बाधित हो चुकी हैं।

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…अगर 36 का आँकड़ा पार नहीं कर पाए अजित पवार, तो महाराष्ट्र में गिर जाएगी फडणवीस की सरकार!

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर इतना बड़ा उलटफेर हो जाएगा, इस बात का अंदाज़ा भी किसी को नहीं था। कयास तो यही लगाए जा रहे थे कि राज्य में शिवसेना-कॉन्ग्रेस और NCP मिलकर सरकार बनाएँगे। लेकिन, शनिवार की सुबह देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने मुख्यमंत्री व उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। इस गठबंधन को लेकर किसी को कानों-कान कोई ख़बर नहीं थी।

फ़िलहाल, अब दोनों को आगामी 30 नवंबर तक बहुमत साबित करना होगा। बहुमत के इस गणित को सटीक आँकड़ों के ज़रिए विस्तार से समझते हैं।

NCP के पास कुल 54 सीटें हैं, लेकिन बीजेपी को इस सभी सीटों का समर्थन नहीं मिला है। कहा जा रहा है कि इनमें से 35 विधायक NCP नेता अजित पवार के साथ हैं। वहीं, बीजेपी ने दावा किया है कि 13 निर्दलीय विधायकों का समर्थन उन्हें पहले से ही प्राप्त है। लेकिन अजित पवार को 35 नहीं बल्कि 36 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि दल-बदल कानून से बचने के लिए छोटे पवार के पास यही 36 का आँकड़ा होना जरूरी है। अगर अजित पवार को 36 विधायकों का समर्थन मिल गया तो उन्हें नई पार्टी बनाने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन अगर वो ऐसा करने में क़ामयाब नहीं हो सके तो बागी विधायकों की सदस्यता तक ख़त्म हो सकती है।

NCP प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र में भाजपा नीत सरकार में शामिल होने के अपने भतीजे अजित पवार के फ़ैसले का समर्थन नहीं किया। साथ ही अपने विधायकों को बागी नेता को समर्थन देने की चेतावनी भी दे डाली। शिवसेना के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेन्स में, शरद पवार ने NCP विधायकों को दल-बदल विरोधी क़ानून की याद दिलाई और कहा कि वे अपनी सदस्यता खो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता चला है कि 10-11 विधायक अजित पवार के साथ गए थे।

प्रेस कॉन्फ्रेन्स में मौजूद NCP विधायकों ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि उन्हें शपथ ग्रहण समारोह के लिए राजभवन ले जाया जा रहा है। बाद में, शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि अजित पवार ‘अकेले’ रहेंगे। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि NCP अजित पवार को पार्टी से निष्कासित भी कर सकती है।

क्या होता है दल-बदल विरोधी क़ानून

संविधान के दल-बदल विरोधी क़ानून के संशोधित अनुच्छेद 101, 102, 190 और 191 का संबंध संसद तथा राज्य विधान सभाओं में दल परिवर्तन के आधार पर सांसदी-विधायकी से छुट्टी और अयोग्यता के कुछ प्रावधानों के बारे में है। दल-बदल विरोधी क़ानून भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची जोड़ा गया है, जिसे संविधान के 52वें संशोधन के माध्यम से वर्ष 1985 में पारित किया गया था। इस क़ानून में विभिन्न संवैधानिक प्रावधान थे और इसकी विभिन्न आधारों पर आलोचना भी हुई थी।

दल-बदल का सीधा सा मतलब एक दल से दूसरे दल में शामिल होना है। संविधान के अनुसार इसमें निम्नलिखित स्थितियाँ सम्मिलित हैं-

  • किसी विधायक का किसी दल के टिकट पर निर्वाचित होकर उसे छोड़ देना और अन्य किसी दल में शामिल हो जाना।
  • मौलिक सिद्धान्तों पर विधायक का अपनी पार्टी की नीति के विरुद्ध योगदान करना।
  • किसी दल को छोड़ने के बाद विधायक का निर्दलीय रहना।
  • लेकिन, पार्टी से निष्कासित किए जाने पर यह नियम लागू नहीं होगा।
  • सारी स्थितियों पर यदि विचार करें तो दल बदल की स्थिति तब होती है जब किसी भी दल के सांसद या विधायक अपनी मर्जी से पार्टी छोड़ते हैं या पार्टी व्हिप की अवहेलना करते हैं। इस स्थिति में उनकी सदस्यता को समाप्त किया जा सकता है और उन पर दल-बदल निरोधक क़ानून लागू होगा।
  • पर यदि किसी पार्टी के एक साथ दो तिहाई सांसद या विधायक (पहले ये संख्या एक तिहाई थी) पार्टी छोड़ते हैं तो उन पर ये क़ानून लागू नहीं होगा पर उन्हें अपना स्वतन्त्र दल बनाने की अनुमति नहीं है वो किसी दूसरे दल में शामिल हो सकते हैं।

दरअसल, महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटों के लिए 21 अक्टूबर को मतदान हुआ था और 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजे घोषित हो गए थे। नतीजों के अनुसार, बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, NCP को 54 और कॉन्ग्रेस को 44 सीटें मिली थी। इसमें, सरकार बनाने के लिए बहुमत का ज़रूरी आँकड़ा 145 है। शुरूआत में बीजेपी और शिवसेना साथ थीं, लेकिन ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद की शर्त पर दोनों के बीच कुछ तय नहीं हो सका और गठबंधन टूट गया। इसके बाद बीजेपी को सरकार बनाने के लिए 40 सीटों की ज़रूरत पड़ गई।

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी और किसके साथ सरकार बनेगी, इस पर लंबे समय से सियासी दाँव-पेंच का खेल चल रहा था। लेकिन, आज सुबह एकाएक बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते इस पर विराम लग गया। अंतत: देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने क्रमश: मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए राज्य को नई सरकार दी।

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महाराष्ट्र में बड़ा उलटफेर हो गया। बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा सीएम पद की शपथ ली है। वहीं, एनसीपी नेता अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली है। महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम पर शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि कल रात अजित पवार बैठक में मौजूद थे, लेकिन नजर नहीं मिला रहे थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज भी अलग थी।

शिवसेना ने एनसीपी विधायकों को अगवा करने का आरोप लगाते हुए अपने विधायकों को तोड़ कर दिखाने की चुनौती भाजपा को दी है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा है कि 8 विधायक जो अजित पवार के साथ चले गए थे, उनमें से 5 विधायक वापस आ गए हैं। उनका कहना है कि उन विधायकों को झूठ बोलकर कार में बिठाया गया। राउत ने कहा कि एक तरह से उन विधायकों का अपहरण किया गया है। आगे उन्होंने कहा, “अगर हिम्मत है तो विधानसभा में बहुमत साबित करके दिखाएँ।”

आगे उन्होंने कहा कि वो धनंजय मुंडे के संपर्क में हैं और साथ ही उन्होंने अजित पवार के वापस आने की भी संभावना जताई है। उनका कहना है कि अजित पवार को ब्लैकमेल किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कौन है, इसका खुलासा जल्द ही ‘सामना’ अखबार में किया जाएगा।

बता दें कि शरद पवार से बगावत के बाद एनसीपी के नेता अजित पवार को पार्टी के विभिन्न पदों से हटा दिया गया है। वो एनसीपी के लेजिस्लेटिव समिति के अध्यक्ष थे। उन्हें पार्टी ने तत्काल प्रभाव से अपदस्थ कर दिया है। हालाँकि, अजित पवार को अभी तक पार्टी से नहीं निकाला गया है। शरद पवार ने कहा कि एनसीपी विधायक दल का नया नेता चुना जाएगा।

इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अजित पवार के डिप्टी सीएम बनने के बारे में उन्हें अचानक पता चला। उन्होंने कहा था कि एनसीपी का जो भी प्रमाणिक कार्यकर्ता है, वह उनके (अजित पवार) के साथ नहीं जाएगा। पवार ने कहा था कि अजित पवार का फैसला पार्टी लाइन के खिलाफ है। यह अनुशासन तोड़ने वाला है। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि एनसीपी का कोई भी कार्यकर्ता एनसीपी-बीजेपी की सरकार के समर्थन में नहीं है। इसके अलावा उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए कहा था, “30 नवंबर तक बहुमत साबित करने का वक्त है। हमारे पास नंबर है, सरकार तो हम ही बनाएँगे।”

वहीं, उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “जो खेल चल रहा है, उसे पूरा देश देख रहा है। पहले ईवीएम खेल चल रहा था और अब यह नया खेल चल रहा है। इसके बाद से मुझे नहीं लगता कि चुनावों की भी जरूरत है।” अपने विधायकों को तोड़ने के सवाल पर उद्धव ठाकरे ने कहा, “कोशिश करके देखें, महाराष्ट्र सोने वाला नहीं है।”

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महाराष्ट्र में अब कॉन्ग्रेस को अपनी पार्टी में टूट का डर दिख रहा है। पार्टी को डर है कि अगर शरद पवार जैसे बड़े नेता की पार्टी टूट सकती है और उनका भतीजा ही भाजपा से जाकर मिल सकता है तो कॉन्ग्रेस तो राज्य में चौथे नंबर की पार्टी है। इस डर के कारण कॉन्ग्रेस ने अपने सभी विधायकों का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। उन सभी को जयपुर ले जाया जाएगा। जयपुर में बसपा विधायक दल को 2 बार तोड़ने वाले अशोक गहलोत की सरकार है। कॉन्ग्रेस ने कई दिनों ने अपने विधायकों को जयपुर में ही ठहराया हुआ था लेकिन राष्ट्रपति शासन लगने के बाद उन्हें वापस बुला लिया गया था।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और गाँधी परिवार के वफादार अहमद पटेल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पत्रकारों ने इस मसले को लेकर सवाल पूछा। जवाब में कॉन्ग्रेस नेताओं ने बताया कि उनके सभी 44 विधायक पार्टी के साथ हैं। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के 2 विधायकों के गाँव में होने की बात भी कही गई। खड़गे ने बताया कि वो दोनों भी पार्टी के साथ हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवसेना और एनसीपी में अपने विधायकों को कहीं और शिफ्ट करने में लगी हुई है। एनसीपी ये देखने में लगी है कि उसके कितने विधायक शरद पवार के साथ हैं।

शिवसेना ने भी अपने विधायकों को काफ़ी दिनों तक ठाकरे परिवार के निवास मातोश्री के पास ही स्थित एक होटल में रखा था। उन विधायकों को आधार कार्ड के साथ तलब किया गया था। अब कॉन्ग्रेस के विधायक भी जयपुर के रिसोर्ट में जाएँगे। इससे पहले ख़बर आई थी कि इन विधायकों को भोपाल ले जाया जाएगा, जहाँ कमलनाथ की सरकार है। लेकिन, अब कॉन्ग्रेस को लगता है कि भोपाल से जायदा अच्छी जगह उसके लिए जयपुर ही रहेगी।

न्यूज़ 18 के सूत्रों के अनुसार, अजित पवार 9 विधायकों के साथ एक चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली जा रहे हैं। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को ही अपने आरोपों के लपेटे में लेकर उन्स इस्तीफा माँगा है।

महाराष्ट्र में अजित पवार के साथ एनसीपी का एक धड़ा भाजपा से जा मिला और देवेंद्र फडणवीस फिर से मुख्यमंत्री बने। अजित पवार को डिप्टी सीएम का पद मिला। पल-पल बदलते घटनाक्रम में विपक्षी नेताओं ने विधायकों को बरगलाने का आरोप लगाया। कॉन्ग्रेस का आरोप है कि भाजपा उसका विधायकों को प्रलोभन दे रही है।

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कैसे देवेंद्र बने दोबारा महाराष्ट्र के ‘शाह’: देर रात कैसे लिखी गई उलटफेर की पटकथा

महाराष्ट्र की सियासत में शनिवार सुबह बड़ा उलटफेर हुआ। जिस एनसीपी ने कॉन्ग्रेस और शिवसेना के साथ सरकार बनाने की बात कही थी, उसका एक धड़ा भाजपा से जा मिला। जिस भाजपा ने सबसे ज्यादा सीटें होने के बावजूद सरकार बनाने का दावा तक नहीं पेश किया था, रातोंरात बदले समीकरण में वो सत्ता में वापस लौटी और देवेंद्र फडणवीस के सर फिर से महाराष्ट्र का ताज सजा। यह सब शुक्रवार (नवंबर 23, 2019) की रात शुरू हुआ। शिवसेना सांसद संजय राउत का दावा था कि अजित पवार उस बैठक में अलग-अलग से लग रहे थे और किसी से नज़रें नहीं मिला पा रहे थे। खैर, सुबह महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन का भी अंत हो गया। आइए, देखते हैं कब, क्या, कैसे हुआ।

शुक्रवार देर रात क्या हुआ?

शुक्रवार को एनसीपी, कॉन्ग्रेस और शिवसेना की संयुक्त बैठक हुई थी। बैठक से निकल कर एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने कहा था कि गठबंधन के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे होंगे। लेकिन, देर रात को ही देवेंद्र फडणवीस सरकार बनाने का दावा पेश करने पहुँचे और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को एनसीपी का समर्थन पत्र सौंपा। फडणवीस ने 173 विधायकों के समर्थन का दावा किया। एनसीपी के 54 और 14 अन्य निर्दलीय विधायकों के समर्थन के बाद फडणवीस ने सरकार बनाने का दावा पेश किया।

हालाँकि, रात में किसी को इसकी भनक नहीं लगी। सब यही सोच रहे थे कि सुबह होते ही कॉन्ग्रेस और एनसीपी के समर्थन से शिवसेना सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। रात के पौने 12 बजे एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार भी राज्यपाल के पास पहुँच गए और उन्होंने भाजपा को समर्थन देने सम्बन्धी विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र सौंपा। अजित पवार के इस पत्र के बाद ही राज्यपाल संतुष्ट हुए कि भाजपा के पास बहुमत का जादुई आँकड़ा है। भाजपा ने 170 से भी अधिक विधायकों के समर्थन का दावा किया।

रात के 12 बजे राज्यपाल ने हालात से केंद्र सरकार को अवगत कराया। केंद्र सरकार को राज्यपाल ने कहा कि राज्य में गठबंधन सरकार बनते ही राष्ट्रपति शासन हटा देना चाहिए। इसके बाद इस प्रस्ताव से राष्ट्रपति भवन को अवगत कराया गया।

शनिवार की सुबह क्या-क्या हुआ?

सुबह के 6 बजे राज्यपाल ने निर्णय लिया कि देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद फडणवीस ने 6.45 में राज्यपाल को सूचना दी कि अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए नामित किया गया है। राज्यपाल ने सुबह 8 बज कर 7 मिनट कर फडणवीस और पवार को शपथ दिलाने की प्रक्रिया पूरी की। बस इसके साथ ही उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने का सपना चकनाचूर हो गया।

किसने क्या कहा?

इस दौरान नेताओं की प्रतिक्रियाएँ भी रोचक आईं। उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के अपना दर्द छलकाया, कॉन्ग्रेस की तरफ़ से मल्लिकार्जुन खड़गे और अहमद पटेल ने इसे जनादेश का अपमान बताया। उद्धव ठाकरे ने छत्रपति शिवाजी को याद करते हुए कहा कि भाजपा ने पीछे से वार किया है। उन्होंने पूछा कि ऐसा ही चलता रहा तो चुनाव की ज़रूरत ही क्या है? महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि शिवसेना ने भाजपा को धोखा दिया है। संजय राउत ने कहा कि अजित पवार को ब्लैकमेल किया गया है और विधायकों को अपहृत कर ले जाया गया था।

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने शरद पवार और सुप्रिया सुले को भी मंत्री बनाने का ऑफर दिया। रामविलास पासवान ने लिखा कि जिस जानवर को सड़क पर यह पता नहीं होता कि उसे दाएँ जाना है या बाएँ, वो मारा जाता है। मोदी और शाह ने फडणवीस और पवार को शपथग्रहण के लिए बधाई दी।

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महाराष्ट्र की सियासत शनिवार सुबह कुछ ऐसी बदली जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी। बीजेपी ने रातोंरात बाजी पलटते हुए एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली और शिवसेना को इस गठबंधन की खबर तक नहीं लगी। सुबह राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने फडणवीस को सीएम पद शपथ दिलाई। अजित पवार डेप्युटी सीएम बने।

इस राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी पार्टी का पक्ष रखने के लिए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना ने जब बहुमत प्राप्त किया तो ये भाजपा गठबंधन की नैतिक और चुनावी विजय थी। उन्होंने पूछा, “चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना किसके इशारे पर उत्तेजक हो गई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “शरद पवार और कॉन्ग्रेस ने चुनाव परिणाम के बाद बयान दिया था कि हमें विपक्ष में बैठने का जनमत मिला है। तो ये विपक्ष में बैठने का जनमत कुर्सी के लिए मैच फिक्सिंग कैसे हो गया था? महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मैनडेट मिला था भाजपा और शिवसेना को, लेकिन बड़ी पार्टी कौन थी – भाजपा। और मुख्यमंत्री का मैनडेट था योग्य और ईमानदार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी के लिए।”

रविशंकर प्रसाद ने विपक्षियों पर निशाना साधते हुए तंज किया कि कहा जा रहा है कि लोकतंत्र की हत्या की हो गई है। जब शिवसेना स्वार्थ भाव से प्रेरित होकर अपनी 30 साल की दोस्ती तोड़कर अपने घोर विरोधियों का दामन थाम ले तो ये लोकतंत्र की हत्या नहीं है क्या? और एक स्थाई सरकार के आग्रह पर देवेन्द्र फडणवीस की अगुवाई में अजित पवार के साथ बड़ा तबका आकर सरकार को सहयोग करे तो इसे लोकतंत्र की हत्या कहा जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि जो आदरणीय बाला साहब ठाकरे के आदर्शों को जीवित नहीं रख सके उनके विषय में कुछ नहीं कहना है। उनका प्रमाणिक कॉन्ग्रेस विरोध जग जाहिर है, उनकी राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रवाद और भारत की संस्कृति-संस्कार के प्रति समर्पण प्रमाणिक है। उन्होंने उद्धव ठाकरे के बयान को निशाने पर लेते हुए कहा, “कुछ लोग छत्रपति शिवाजी की विरासत की बात कर रहे हैं, उनसे मैं बस इतना कहूँगा कि सत्ता के लिए अपने विचारों से समझौता करने वाले तो कम से कम छत्रपति शिवाजी की बात न करें।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्यपाल ने तीनों पार्टियों को बुलाया था। NCP और शिवसेना को बुलाया तो उन्होंने कहा कि और समय दीजिए। आज सुबह भाजपा और अजित पवार के साथ NCP के तबके ने आवेदन दिया कि हमारे पास बहुमत है। क्या शिवसेना और NCP का कोई आवेदन राज्यपाल के पास अब तक था।

रविशंकर प्रसाद ने कहा, “महाराष्ट्र की जनता का सवाल था कि हमने जनादेश दिया तो आप सरकार क्यों नहीं बना रहे हैं। क्या इतने बड़े राज्य को ऐसे ही छोड़ दिया जाता? हम एक स्थिर, प्रभावी और प्रमाणिक सरकार देंगे। हमारे पीएम और गृह मंत्री के खिलाफ स्तरहीन भाषा का प्रयोग किया गया, हमने इसे सहा है। आज तक ऐसा नहीं हुआ कि गठबंधन में रहकर कोई ऐसा बोले।”

आगे उन्होंने कहा कि यह देश की आर्थिक राजधानी पर कब्जा करने की कोशिश थी। एक बड़ा जनादेश और बहुमत मिला था, शिवसेना ने क्यों 360 डिग्री का टर्न ले लिया। वहीं जब उनसे पूछा गया कि महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद कॉन्ग्रेस अपने विधायकों को भोपाल भेज रही है। क्या कॉन्ग्रेस को अब भी विधायकों को छुपाने की जरूरत है, तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर आश्चर्य हो रहा है कि क्या भोपाल और जयपुर के अलावा उनके विधायक कहीं और सुरक्षित नहीं हैं क्या?

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NCP ने अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटाया, शरद पवार ने कहा- एक्शन लेगी पार्टी

हमारे पास नंबर है, सरकार तो हम ही बनाएँगे, लेंगे अजित पर फैसला: शरद पवार

धोखा, बेशर्म, पाखंड… विलाप कर रहे लिबरल गैंग की बहुत बुरी जली, शब्दों से दे रहे खुद को तसल्ली

अजित पवार को ब्लैकमेल किया गया है, वे लौट आएँगे: शिवसेना सांसद संजय राउत सामना में करेंगे खुलासा

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर शनिवार (23 नवंबर) की सुबह हुआ, वो भारतीय राजनीति की अब तक की शायद सबसे अप्रत्याशित घटना है। पिछले कई दिनों से शिवसेना-कॉन्ग्रेस और NCP नेताओं की बैठक चल रही थी। शुक्रवार (22 नवंबर) देर रात तक तीनों पार्टियों के बीच मंत्रालयों के बँटवारे को लेकर बातचीत हो रही थी, लेकिन शनिवार की सुबह सब धरा का धरा ही रह गया।

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन और ताजा घटनाक्रम को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने बड़ा बयान दिया है। राउत ने कहा कि अजित पवार की भी वापसी की संभावना है। उन्होंने कहा कि अजित पवार को ब्लैकमेल किया गया है। राउत ने कहा कि जिसने भी यह काम किया है, उसके बारे में जल्द ही शिवसेना के मुखपत्र सामना में खुलासा किया जाएगा।

संजय राउत ने कहा, “हम धनंजय मुंडे के सम्पर्क में हैं और अजित पवार के वापस आने की भी संभावना है। अजित को ब्लैकमेल किया गया है, इसके पीछे कौन है जल्द ही सामना अख़बार में ख़ुलासा किया जाएगा।” एनसीपी के विधायक धनंजय मुंडे भाजपा नेता दिवंगत गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं। इस बार चुनाव में उन्होंने मुंडे की बेटी और फड़णवीस सरकार में मंत्री रहीं पंकजा मुंडे को हराया था।

इससे पहले, शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, ”अजित पवार के साथ गए आठ विधायकों में से पाँच वापस आ गए हैं। उनसे भी झूठ बोला गया और इस तरह कार में बैठाया गया जैसे किसी को अगवा किया जाता है। अगर हिम्मत है तो विधानसभा में बहुमत साबित करके दिखाएँ।”

वहीं, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,

”जो खेल चल रहा है, उसे पूरा देश देख रहा है। पहले ईवीएम खेल चल रहा था और अब यह नया खेल चल रहा है। इसके बाद से मुझे नहीं लगता कि चुनावों की भी जरूरत है। हमने जनादेश का सम्मान किया, हम जो भी करते हैं खुलेआम करते हैं। राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए सुबह-सुबह केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई थी, ऐसी जानकारी मिली है। संविधान के अनुसार काम होना चाहिए। मुझे कोई चिंता नहीं, मेरे साथ पहले भी ऐसा हुआ है। इन लोगों ने बिहार, हरियाणा में भी यही किया। वो लोगों को तोड़ते हैं, हम जोड़ते हैं।”

इस दौरान शरद पवार ने शिवसेना, कॉन्ग्रेस और NCP के बारे में बात करते हुए कहा कि तीनों दलों ने सरकार बनाने का फैसला लिया था। उन्होंने कहा, ”मुझे कुछ लोगों ने सुबह बताया कि हमें यहाँ लाया गया है, वे शायद राजभवन की बात कर रहे थे। अजित पवार के डिप्टी सीएम बनने का अचानक पता चला। एनसीपी का जो भी प्रमाणिक कार्यकर्ता है, वह उनके (अजित पवार) के साथ नहीं जाएगा। अजित पवार ने खुद समर्थन का फैसला लिया। अजित पवार का फैसला पार्टी लाइन के खिलाफ है। यह अनुशासन तोड़ने वाला है। एनसीपी का कोई भी कार्यकर्ता एनसीपी-बीजेपी की सरकार के समर्थन में नहीं है।”

ग़ौरतलब है कि 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी और किसके साथ सरकार बनेगी, इस पर लंबे समय से सियासी दाँव-पेंच का खेल चल रहा था। लेकिन, आज सुबह एकाएक बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते इस पर विराम लग गया। अंतत: देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने क्रमश: मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए राज्य को नई सरकार दी। 

‘मोदी सरकार में मंत्री बन सकती हैं पवार की बेटी सुप्रिया सुले, शाह ने पहले ही कहा था- सब ठीक हो जाएगा’

NCP ने अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटाया, शरद पवार ने कहा- एक्शन लेगी पार्टी

‘मोदी सरकार में मंत्री बन सकती हैं पवार की बेटी सुप्रिया सुले, शाह ने पहले ही कहा था- सब ठीक हो जाएगा’

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले शनिवार (नवंबर 23, 2019) को काफ़ी प्रफुल्लित नज़र आए। महाराष्ट्र में तमाम अनिश्चितताओं के बावजूद भाजपा के साथ बने रहने वाले उसके साथी दल ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया’ के अध्यक्ष रामदास आठवले ने अपना पुराना बयान याद दिलाया है। आठवले ने बताया था कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उनसे पहले ही कह चुके थे कि सब ठीक हो जाएगा। अब जब एनसीपी के अजित पवार गुट ने पार्टी से बगावत करने के बाद भाजपा को समर्थन दे दिया, आठवले ने कहा कि आज ही वो दिन है जब सब ठीक हो गया है। वे काफ़ी ख़ुश नज़र आए।

जहाँ एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार भाजपा को समर्थन देने से पल्ला झाड़ चुके हैं, आठवले ने उनकी बेटी सुप्रिया सुले को लेकर बड़ा दावा किया है। पवार के गढ़ बारामती से सांसद सुप्रिया सुले के बारे में आठवले ने कहा कि वो मोदी कैबिनेट में मंत्री बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि शरद पवार को और प्रफुल्ल पटेल को भी केंद्रीय मंत्री का पद दिया जा सकता है, बशर्ते वो भाजपा के साथ आ जाएँ। ये दोनों ही नेता पहले भी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। आठवले ने बताया कि एनसीपी से 2 कैबिनेट मंत्री और एक राज्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

आरपीआई के अध्यक्ष रामदास आठवले ने अपना पुराना बयान याद दिलाते हुए कहा कि अमित शाह ने तो पहले ही कह दिया था कि चीजें सही दिशा में जा रही हैं, समझने वाले समझ भी गए थे। उन्होंने कहा कि शिवसेना के पास भी भी समय है, वो अपना रुख बदल सकती है क्योंकि कॉन्ग्रेस उसे समर्थन देने के लिए तैयार थी ही नहीं। वहीं, सुप्रिया सुले का कुछ और ही बयान आया है। उनके व्हाट्सप्प स्टेटस से पता चलता है कि एनसीपी के अजित धड़े द्वारा बगावत किए जाने से वो नाराज़ हैं।

शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने अपने ताज़ा व्हाट्सप्प स्टेटस में लिखा है कि परिवार और पार्टी टूट गई है। शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले द्वारा अजित पवार के क़दम से पल्ला झाड़ने के बाद अब एनसीपी में टूट की बात स्पष्ट होती दिख रही है।

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NCP ने अजित पवार को विधायक दल के नेता पद से हटाया, शरद पवार ने कहा- एक्शन लेगी पार्टी

शरद पवार से बगावत के बाद एनसीपी के नेता अजित पवार को पार्टी के विभिन्न पदों से हटा दिया गया है। महाराष्ट्र के नव-निर्वाचित उप-मुख्यमंत्री अजित पवार ने पार्टी के मुखिया शरद पवार से अलग रुख अख्तियार करते हुए अपने धड़े के साथ भाजपा को समर्थन दे दिया। वो एनसीपी के लेजिस्लेटिव समिति के अध्यक्ष थे। उन्हें पार्टी ने तत्काल प्रभाव से अपदस्थ कर दिया है। हालाँकि, अजित पवार को अभी तक पार्टी से नहीं निकाला गया है। शरद पवार ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी नियमानुसार उनके ख़िलाफ़ एक्शन लेगी।

अजित पवार अपने धड़े के साथ भाजपा से मिल गए और इस तरह देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में दोबारा शपथ ली। शुक्रवार की रात तक एनसीपी और कॉन्ग्रेस के समर्थन से शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही जा रही थी और ख़ुद शरद पवार ने कहा था कि उद्धव के नाम पर सहमति बन गई है। सुबह फडणवीस और अजित पवार के शपथ लेने के साथ ही महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन का भी अंत हो गया। ख़बरों के अनुसार, अजित पवार ने 54 एनसीपी विधायकों का समर्थन-पत्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को सौंपा।

शुक्रवार की रात को भी अजित पवार ने एनसीपी, कॉन्ग्रेस और शिवसेना की बैठक में हिस्सा लिया था। संजय राउत ने फडणवीस के शपथग्रहण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रात की बैठक के दौरान भी अजित पवार का रुख कुछ अलग-अलग लग रहा था और वो राउत से नज़रें नहीं मिला पा रहे थे। राउत ने कहा कि अजित पवार बैठक में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। रात को बैठक में हिस्सा लेने वाले अजित पवार का सुबह भाजपा के साथ मिल जाना अभी भी चर्चा का वषय बना हुआ है।

जम्मू-कश्मीर को 2 केंद्र शासित प्रदेश में बॉंटने के बाद अब दो UT को एक करेगी मोदी सरकार

जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटने के बाद केंद्र की मोदी सरकार अब एक और बड़ा फैसला लेने जा रही है। सरकार दो केंद्र शासित प्रदेशों दमन-दीव और दादरा-नगर हवेली को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना बना रही है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने शुक्रवार (नवंबर 22, 2019) को लोकसभा में कहा कि इस संबंध में अगले हफ्ते एक बिल संसद में पेश किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव (केंद्रशासित प्रदेशों का विलय) बिल 2019 अगले हफ्ते के लिए प्रस्तावित सरकारी कामकाज का हिस्सा है। अधिकारियों का कहना है कि गुजरात के पास पश्चिमी तट पर स्थित इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों का विलय बेहतर प्रशासन और विभिन्न कार्यों के दोहराव की जाँच और निगरानी के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों ही केंद्र शासित प्रदेशों का विलय बेहतर प्रशासन और कई चीजों के दोहराव पर रोक लगाने में सहायक होगा। बता दें कि दादरा-नगर हवेली में एक, जबकि दमन-दीव में 2 जिले हैं।

महज 35 किलोमीटर दूर स्थित दोनों प्रदेशों के अपने-अपने सचिवालय और बजट हैं। एक जिले वाले दादरा-नगर हवेली एवं दो जिलों वाले दमन-दीव के विलय से प्रशासनिक खर्चों में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। पुनर्गठित केंद्र शासित प्रदेश को दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव नाम दिए जाने और साथ ही दमन-दीव को इसका मुख्यालय बनाए जाने की संभावना है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को UT बनाए जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश की संख्या बढ़कर नौ हो गई थी। अब जब दो केंद्र शासित प्रदेशों का विलय होगा तो यह संख्या घटकर 8 हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इसी साल अगस्त महीने में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के साथ ही 5 अगस्त को संसद में जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन बिल पेश किया था। इस बिल के माध्यम से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा समाप्त कर प्रदेश को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था।