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हँसी के ठहाके, मीम्स और चुटकलों की भरमार: महाराष्ट्र ने CM के अलावा आज हँसने का मौका भी दिया!

बड़े पैमाने पर राजनीतिक तख़्तापलट करते हुए, आज सुबह भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर और NCP के अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेकर सबको अश्चर्यचकित कर दिया। एक महीने की लंबी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद कल रात तक यह साफ हो चुका था कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे राज्य में अगले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होंगे।

आज सुबह की ख़बर जैसे ही सोशल मीडिया पर प्रचारित-प्रसारित हुई, लोगों ने तालियाँ बजानी शुरू कर दी और इसी के साथ अचानक बदले इस राजनीतिक समीकरण से ट्विटर पर कई चुटकुलों और मीम की बाढ़ आ गई।

संजय राउत भारतीय राजनीति के राहुल गाँधी! आश्चर्य है कि यह किसके लिए अधिक अपमानजनक है।

बॉलीवुड की फ़िल्म के दृश्य को महाराष्ट्र में सरकार गठन से जोड़ा गया।

ग़जब!

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की हँसी भी बहुत कुछ बयाँ करती है। 

क्योंकि, जब आप सिंहासन का खेल खेलते हैं…

झारखंड: BJP की रैली स्थल से 2 किमी दूर नक्सलियों का हमला, 4 पुलिसकर्मी शहीद

झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए जारी तैयारियों के बीच नक्सलियों ने बड़ा हमला किया है। 30 नवंबर को राज्य में पहले चरण का मतदान होना है। उससे पहले नक्सलियों ने लातेहर ज़िले में पुलिसकर्मियों पर हमला किया है। हमले में 4 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। चंदवा में भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के सभास्थल से महज दो किलोमीटर दूर ही हमला किया गया।

मारे गए पुलिसकर्मियों की पहचान सब-इंस्पेक्टर सुकिया उरांव, कॉन्स्टेबल दिनेश कुमार, कॉन्स्टेबल सिकंदर सिंह, वाहन चालक यमुना राम के रूप में हुई है। इस घटना पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दुख जताते हुए कि कहा कि पूरा देश शहीदों के परिवार के साथ खड़ा है।

ख़बर के अनुसार, शुक्रवार रात क़रीब आठ बजे पुलिस की पीसीआर वैन पर नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में एक सहायक पुलिस उपनिरीक्षक समेत चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। हमले के बाद एक जवान लापता हो गया था। हालाँकि बाद में जख्मी हालत में वह मिला।

राज्य के भाजपा सचिव सुबोध सिंह गुड्डू ने बताया कि हमने नारे लगाने की आवाज़ सुनी थी। शुरू में हमने माओवादी हमलावरों को किसी राजनीतिक पार्टी का कार्यकर्ता समझा। उन्होंने मेरी कार और एक अन्य वाहन जो हमसे आगे था उस पर गोलीबारी की।

नक्सलियों ने पुलिस पर यह हमला लातेहार ज़िले के चंदवा थाना से महज़ दो किलोमीटर की दूरी पर किया। इस दौरान पुलिस और नक्सलियों में मुठभेड़ भी हुआ।

गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को घटना स्थल से 30 किलोमीटर दूर लातेहार के मनिका में एक रैली को संबोधित किया था। पीएम मोदी सोमवार को 80 किमी दूर पड़ोसी पलामू ज़िले में एक रैली को संबोधित करने वाले हैं।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कमल नयन चौबे ने इसे नक्सलियों की क़ायराना हरक़त बताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के वक्त लोगों की आवाजाही को देखते हुए शुक्रवार की रात विशेष पेट्रोलिंग की जा रही थी। रास्ता क्लियर कराने के दौरान ही नक्सलियों ने छुपकर पुलिस बल पर हमला कर दिया। नक्सलियों की इस कायराना हरक़त का मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उनकी तलाश में सर्च अभियान जारी है।

ख़बर के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ऑपरेशन) एमएल मीणा ने बताया, “अतिरिक्त बलों को तलाशी अभियान चलाने के लिए क्षेत्र में भेजा गया है।” राज्य में मतदान के पहले चरण में लातेहार विधानसभा क्षेत्र में 30 नवंबर को मतदान होना है।

हमारे पास नंबर है, सरकार तो हम ही बनाएँगे, लेंगे अजित पर फैसला: शरद पवार

महाराष्ट्र में सुबह-सुबह आए सियासी भूचाल के बाद एनसीपी और शिवसेना साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और शरद पवार पहुँचे थे। वहीं शिवसेना-एनसीपी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉन्ग्रेस शामिल नहीं हुई।

इस दौरान शरद पवार ने शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के बारे में बात करते हुए कहा कि तीनों दलों ने सरकार बनाने का फैसला लिया था। उन्होंने कहा, “मुझे कुछ लोगों ने सुबह बताया कि हमें यहाँ लाया गया है, वे शायद राजभवन की बात कर रहे थे। अजित पवार के डिप्टी सीएम बनने का अचानक पता चला। एनसीपी का जो भी प्रमाणिक कार्यकर्ता है, वह उनके (अजित पवार) के साथ नहीं जाएगा। अजित पवार ने खुद समर्थन का फैसला लिया। अजित पवार का फैसला पार्टी लाइन के खिलाफ है। यह अनुशासन तोड़ने वाला है। एनसीपी का कोई भी कार्यकर्ता एनसीपी-बीजेपी की सरकार के समर्थन में नहीं है।”

उन्होंने कहा कि पार्टी विधायक दल के नेता के चयन के दौरान विधायकों के हस्ताक्षर लिए गए थे, आशंका है कि इस हस्ताक्षर वाली चिट्ठी को ही राजभवन में दिया गया होगा। उन्होंने आगे कहा, “सदन में वो (फडणवीस और अजित पवार) बहुमत पेश नहीं कर पाएँगे, हम फिर से सरकार बनाने का प्रयास करेंगे। सरकार का नेतृत्व शिवसेना के पास हो ऐसा हमारा प्रयास होगा। बहुमत साबित होने तक हम साथ रहेंगे। आज शाम 4 बजे नए एनसीपी विधायक दल के नेता को चुना जाएगा। अजित पवार पर कार्रवाई के बारे में पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। 30 नवंबर तक बहुमत साबित करने का वक्त। हमारे पास नंबर है, सरकार तो हम ही बनाएँगे।”

वहीं उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “जो खेल चल रहा है, उसे पूरा देश देख रहा है। पहले ईवीएम खेल चल रहा था और अब यह नया खेल चल रहा है। इसके बाद से मुझे नहीं लगता कि चुनावों की भी जरूरत है। हमने जनादेश का सम्मान किया, हम जो भी करते हैं खुलेआम करते हैं। राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए सुबह-सुबह केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई थी, ऐसी जानकारी मिली है। संविधान के अनुसार काम होना चाहिए। मुझे कोई चिंता नहीं, मेरे साथ पहले भी ऐसा हुआ है। इन लोगों ने बिहार, हरियाणा में भी यही किया। वो लोगों को तोड़ते हैं, हम जोड़ते हैं।” अपने विधायकों को तोड़ने के सवाल पर बोले उद्धव ठाकरे ने कहा, “कोशिश करके देखें, महाराष्ट्र सोने वाला नहीं है।”

प्रोफ़ेसर फ़िरोज़ ख़ान ने आयुर्वेद विभाग में किया आवेदन, 29 नवंबर को होगा इंटरव्यू

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के संस्कृत विद्या धर्म-विज्ञान संकाय में फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को लेकर काफ़ी दिनों से विरोध चल रहा है। इस बीच ख़बर आ रही है कि BHU में विवाद के बाद अल्पसंख्यक प्रोफ़ेसर फ़िरोज़ ख़ान ने आयुर्वेद विभाग के संस्कृत प्रोफ़ेसर के लिए आवेदन किया है। आयुर्वेद विभाग में 29 नवंबर को इंटरव्यू होगा।

दरअसल, कला संकाय में वैकेंसी नहीं है, केवल एक पद आयुर्वेद विभाग में खाली है। संभवतः वहाँ उन्हें चुन लिया जाएगा। इसके बाद फ़िरोज़ ख़ान SVDV से त्यागपत्र दे देंगे, क्योंकि उनकी जॉइनिंग वाइस चांसलर ऑफ़िस में हो चुकी है। इस क़दम के ज़रिए विवाद पर विराम लगाने की योजना बनाई जा रही है। फ़िलहाल, रैली के रूप में छात्र यूनिवर्सिटी के सिंह द्वार से रविन्द्र पुरी स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय तक रैली निकाल कर PMO को ज्ञापन देंगे।

कयास यह लगाया जा रहा है कि हो सकता है यह फ़िरोज़ ख़ान का निजी फ़ैसला हो और उन्होंने ख़ुद ही इस विवाद से उबरने के लिए यह निर्णय लिया हो। वहीं BHU में प्रदर्शन कर रहे छात्र यह भी मान रहे हैं कि प्रशासन ने विवाद को सुलझाने के लिए यह रास्ता निकाला हो।

बता दें कि शुक्रवार (22 नवंबर) को छात्रों ने PMO के दखल के बाद 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन पर विराम लगा दिया था। प्रशासन लगातार छात्रों पर दबाव बना रहा था कि छात्र धरना ख़त्म कर दें। लेकिन, छात्र विराम देने के बाद भी अपनी माँगों पर बने हुए हैं। PMO और BHU प्रशासन ने छात्रों से इस मुद्दे के समाधान के लिए 10 दिन का समय माँगा था।

छात्रों ने गुरुवार (21 नवंबर) को प्रशासन को अपना माँग पत्र सौंपते हुए कई सवालों का विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब माँगा था। जिसे लेकर देर रात SVDV के संकाय प्रमुख, अन्य विभागाध्यक्षों और VC के बीच मीटिंग चली थी, लेकिन किसी भी नतीजे पर नहीं पहुँचा गया। छात्रों का कहना है जब तक हमारी माँगों का समाधान नहीं होता और फ़िरोज़ ख़ान को यहाँ से हटाया या स्थान्तरित नहीं किया जाता तब तक छात्र कक्षा और 2 दिसंबर से होने वाली परीक्षाओं का बहिष्कार जारी रखेंगे।

ग़ौरतलब है कि पहली बार बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के साहित्य विभाग में एक मुस्लिम सहायक प्रोफ़ेसर डॉ फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति 5 नवम्बर को हुई थी। संकाय के विद्यार्थियों को जैसे ही इसका पता चला, उन्होंने इस नियुक्ति के ख़िलाफ़ विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

शेर, लोमड़ी और भेड़िए में सत्ता संघर्ष… बुरी मौत मरा लोमड़ी: महाराष्ट्र में आज की कहानी

जंगल में सूखा पड़ा था और खाने की कमी होने लगी। शाकाहारी पशु मरने लगे या पलायन कर गए तो शेर, भेड़िये और लोमड़ी को भी खाना मिलना मुश्किल होने लगा। आखिर लोमड़ी ने शेर और भेड़िये के साथ मिलकर बैठक की। तय हुआ कि पूरा एक जानवर तो तीनों में से कोई खाता नहीं, इसलिए अगर तीनों मिलकर शिकार करें, और उसे आपस में बाँट ले तो भी काम चल सकता है। चुनांचे लोमड़ी ने शिकार के लिए हिरणों के झुण्ड की खबर ली, भेड़िये ने एक तरफ से झुण्ड को खदेड़ा और घात लगाए शेर ने झपट्टा मारकर एक हिरण को मार गिराया।

अब बारी थी शिकार के बँटवारे की तो शेर ने लोमड़ी से कहा कि वो बँटवारा कर दे। लोमड़ी शेर से बोली आप सरदार हो, इसलिए सिर आपका। भेड़िये ने दौड़ लगाई इसलिए टाँग भेड़िये की, और जो धड़ बचा उससे मैं गुजारा कर लूँ! शेर को लोमड़ी की चालाकी भाँपते देर नहीं लगी। उसने पंजा उठाया और धर दिया लोमड़ी पर। बस लोमड़ी भी साफ़! एक के बदले अब दो-दो शिकार मौजूद थे। अब शेर बोला चलो भेड़िये अब तुम बँटवारा करो। भेड़िया लोमड़ी की हालत देख चुका था, बोला आप सरदार हो इसलिए सिर भी आपका, शिकार पर छलाँग आपने मारी इसलिए टाँग भी आपकी, और आपकी वजह से हमारा पेट पलता है, इसलिए धड़ भी आपका! जो बची खुची लोमड़ी है हुजूर उससे मैं काम चलाता हूँ!

महाराष्ट्र चुनावों के बाद शिवसेना भी काफी हद तक लोमड़ी वाला बँटवारा करती ही नजर आ रही थी। मेरा ख्याल है कि उसे नतीजे भी वैसे ही झेलने पड़े हैं। 1978 में कॉन्ग्रेस पार्टी की वसंतदादा की सरकार से अलग होकर शरद पवार ने कॉन्ग्रेस तोड़ सोशलिस्ट कॉन्ग्रेस बना ली थी। कॉन्ग्रेस की सरकार गिरा दी और खुद सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बन गए थे। उनके भतीजे अजित पवार ने वही कड़वी दवा शरद पवार को पिला दी है। राजनैतिक तौर पर देखें तो यहाँ ऐसा कुछ नहीं हुआ जो नहीं होता, या नहीं होना चाहिए। हाँ, इसके बाद भी नैतिकता के ऊँचे पायदान पर जा चढ़े बुद्धिपिशाच कहेंगे कि ये सही नहीं।

ऐसे लोगों को कभी कभी फ़िल्में देखनी चाहिए। कुछ वर्षों पहले आई एक अंग्रेजी फिल्म “हल्क” को वैसे तो वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ कल्पनाशीलता मिलाकर बनी मार-धाड़ से भरपूर फिल्म कहा जा सकता है, लेकिन उसमें सीखने का काफी कुछ और भी है। फिल्म का नायक और खलनायक दोनों बिलकुल करीबी सम्बन्धी होते हैं लेकिन उनके चरित्र में बड़ा अंतर था। नायक जहाँ गलती से एक दवा के प्रयोग के कारण अत्यंत शक्तिशाली बन जाता है, वहीं खलनायक शक्ति पाने और उसके उपभोग के लालच में ही उस दवा के पीछे पड़ा होता है। शक्ति बढ़ते ही नायक के भले स्वभाव में वृद्धि होती है, तो दूसरी तरफ खलनायक की विनाश की क्षमता भी उतनी ही तेजी से बढ़ जाती है।

शक्ति और सत्ता के साथ हमेशा से ऐसा होता आया है। बुरे लोगों की नुकसान करने की क्षमता, शक्ति पाते ही कई गुना बढ़ जाती है। हाल ही में राजस्थान से हिन्दू शरणार्थियों को भगाए जाने के प्रयासों को केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने रोका है। बहुसंख्यक समुदाय के नुकसान की मंशा अगर महाराष्ट्र जैसे धनी राज्य की शक्ति के साथ आए तो परिणाम कैसे भयावह होते? एक व्यक्ति के तौर पर या दल के तौर पर लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे, इस निजी स्वार्थ के लिए जनता का हित ठुकराया जाना चाहिए क्या? व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए कई बार राजाओं को वीरगति तो मिली, लेकिन उनके मारे जाने पर प्रजा को अतातायियों के कैसे जुल्म झेलने पड़े ये भारतीय इतिहास के हर पन्ने पर लिखा है।

ये बिलकुल उचित है कि सत्ता और शक्ति जैसे साधनों को दुष्टों से यथासंभव दूर रखा जाए। बुरे लोग शक्तिशाली ना हों, इसके लिए अच्छे लोगों को हर संभव प्रयत्न करने ही चाहिए। महाराष्ट्र की जनता ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा मानकर जिन्हें समर्थन दिया था, वो अगर छल पर आमादा हों, तो उनसे उन्हीं के तरीकों से निपटना आवश्यक है। महाराष्ट्र की नई सरकार को जनादेश का सम्मान करने के लिए हर प्रयास करने का साधुवाद दिया जाना चाहिए!

धोखा, बेशर्म, पाखंड… विलाप कर रहे लिबरल गैंग की बहुत बुरी जली, शब्दों से दे रहे खुद को तसल्ली

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर लंबे समय से चल रही उठा-पटक पर अब विराम लग गया है। भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और NCP के अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस बीच, महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चारों ओर से प्रतिक्रियाओं का दौर भी चल निकला है। 

इसी कड़ी में जहाँ एक तरफ़ राजनीतिक गलियारे में आरोप-प्रत्यारोप का माहौल देखने को मिल रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ़ ‘लिबरल गैंग’ ने भी अपना विलाप करना शुरू कर दिया है।

फ़ेक न्यूज़ फैलाने को लेकर हमेशा ट्रोल होने वाली पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने NCP नेता अजित पवार (अब डिप्टी सीएम) पर निशाना साधते हुए लिखा कि महाराष्ट्र में सरकार गठन के सन्दर्भ में लिखा, “हो गया, पवार ने उद्धव ठाकरे और कॉन्ग्रेस को धोखा दिया।”

भाजपा-विरोधी और उसमें भी मोदी-विरोधी पत्रकारिता करके नाम कमाने वाले राजदीप सरदेसाई ने ट्विटर पर लिखा कि देवेन्द्र फडणवीस ने ‘अजीत पवार’ के कथित सिंचाई विभाग के भ्रष्टाचार को उजागर करके एक भ्रष्टाचार विरोधी धर्मयुद्ध के रूप में अपनी प्रतिष्ठा बनाई थी। आज फडणवीस सीएम और अजीत पवार उनके डिप्टी के रूप में !! यह एक महा ट्विस्ट है !! अब देखना यह है कि शरद पवार क्या कहते हैं !!

पत्रकारिता के समुदाय विशेष का हिस्से के रूप में ख्याति प्राप्त निखिल वागले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा, “सलाम @narendramodi पूरी तरह से बेशर्म राजनीति को बढ़ावा देने के लिए!”

अपने एक अन्य ट्वीट में निखिल वागले ने मुख्यमंत्री फडणवीस को घेरते हुए लिखा, “प्रिय देवेन्द्र फडणवीस, आपने सिंचाई घोटाले को लेकर अजित पवार और NCP के ख़िलाफ़ एक अभियान चलाया था। अब आप उन्हीं पर भरोसा कर रहे हैं। क्या आपने अपनी तथाकथित नैतिकता और भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दे को डुबो दिया? क्या यह पाखंड नहीं है?”

हमेशा कॉन्ग्रेस का गुणगान करने की ताक में रहने वाली वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार पल्लवी घोष ने कॉन्ग्रेस के सूत्रों के हवाले से ट्वीट किया, “कल देर रात उन्होंने (NCP) हमें (कॉन्ग्रेस) बताया कि हम आज दोपहर को मिलेंगे.. NCP ने हमारी पीठ में छुरा घोंपा है।”

पत्रकार वीर सांघवी ने सोनिया गाँधी पर चुटकी लेते हुए लिखा कि छ: साल पहले राहुल गाँधी के कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष बनने से पहले उनकी माँ ने उन्हें चेतावनी दी थी कि ‘पवार ज़हर हैं’। लेकिन, राहुल गाँधी ने उनकी चेतावनी को ठीक से न समझते हुए ‘पावर ज़हर है’ पर भाषण दिया। लेकिन, अब उन्हें पता चल गया होगा।

ग़ौरतलब है कि 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी और किसके साथ सरकार बनेगी, इस पर लंबे समय से सियासी दाँव-पेंच का खेल चल रहा था। लेकिन, आज सुबह एकाएक बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते इस पर विराम लग गया। अंतत: देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने क्रमश: मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए राज्य को नई सरकार दी। और इस तरह शिवसेना के ढाई साल के मुख्यमंत्री पद की शपथ पर अड़े रहने की शर्त और NCP-कॉन्ग्रेस की बैठकों के दौर पर पूरी तरह से विराम लग गया।

…कॉन्ग्रेस का वो डर, जो सही साबित हुआ: महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन का हटना और CM, डिप्टी सीएम का खेल

शायरी से श्राप तक: क्लर्क से संपादक और नेता बने संजय राउत ने जब फैलाया था रायता, आज खुद फैल गए!

ज़िदगी भर तड़पेंगे अजित पवार, साथ न देते तो आर्थर रोड जेल में होते: संजय राउत ने दिया श्राप

‘शिवसेना ने जनादेश का अपमान किया, जनता को स्थिर सरकार चाहिए’ – महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस

‘किसानों की समस्या हल करने के लिए आए साथ’ – अजित पवार ने बताई BJP संग सरकार बनाने की वजह

महाराष्ट्र में बड़ा उलटफेर: देवेंद्र फडणवीस फिर बने CM, अजित पवार डिप्टी सीएम

शायरी से श्राप तक: क्लर्क से संपादक और नेता बने संजय राउत ने जब फैलाया था रायता, आज खुद फैल गए!

शिवसेना सांसद संजय राउत का ट्वीट उन्हीं पर उल्टा पड़ गया। राउत के ट्वीट के तकरीबन एक घंटे बाद ही महाराष्ट्र की रानीतिक तस्वीर बदल गई। राज्य में जारी सियासी गतिरोध के बीच शिवसेना के नेता संजय राउत ने शनिवार (नवंबर 23, 2019) सुबह भारतीय जनता पार्टी पर तंज कसा, लेकिन उनके ट्वीट के एक घंटे बाद ही देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए उसे पलट दिया। 

संजय राउत कभी क्लर्क थे, फिर एडिटर बन कर राजनीति में आए। पिछले कुछ दिनों से उन्होंने शायरी में भी जमकर हाथ आजमाए – रायता फैलाने की जिद तक। आज उनका खुद का रायता फैल गया!

बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व में राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कॉन्ग्रेस की सरकार का खाका तकरीबन तैयार हो चुका था। साथ ही बतौर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नाम पर अनौपचारिक मुहर भी लग चुकी थी। हालाँकि स्पीकर समेत मंत्रालय बँटवारे का पेंच फंसा हुआ था, जिसे जल्दी ही सुलझाने की बात कही जा रही थी।

इस बीच, शिवसेना नेता संजय राउत ने शनिवार को ट्वीट कर बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा था, “जिस-जिस पर ये जग हँसा है, उसी ने इतिहास रचा है।” संजय राउत के इस ट्वीट के एक घंटे बाद देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद की शपथ ले ली, और इस तरह महाराष्ट्र में राजनीति की तस्वीर बदल गई।

संजय राउत ने इससे पहले भी कई अन्य ट्वीट किए। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कभी शायरी पोस्ट किया तो कभी शायरी का सहारा लेकर श्राप तक दिया। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कभी-कभी कुछ रिश्तों से बाहर आ जाना ही अच्छा होता है। अहंकार के लिए नहीं…स्वाभिमान के लिए।”

एक अन्य ट्वीत में संजय राउत ने लिखा, हम बुरे ही ठीक हैं, “जब अच्छे थे तब कौन सा मेडल मिल गया था…!!!”

शिवसेना सांसद ने लिखा, “आहुति बाकी, यज्ञ अधूरा, अपनों के विघ्नों ने घेरा, अंतिम जय का वज्र बनाने, नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ।आओ फिर से दीया जलाएँ। अटल बिहारी वाजपेयी।”

राउत ने भाजपा पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, “अगर ज़िंदगी में कुछ पाना हो तो तरीके बदलो, इरादे नहीं…! जय महाराष्ट्र।”

राउत ने शायराना अंदाज में बीजेपी पर निशाना साधते हुए हबीब जालिब की शायरी ट्वीट करते हुए लिखा था, “तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था। उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था :- हबीब जालिब”

महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच राउत काफी शायराना मूड में नजर आ रहे थे। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा था, “यारों नए मौसम ने ये एहसान किया है। याद मुझे दर्द पुराने नहीं आते- बशीर बद्र।”

संजय राउत ने ट्वीट किया, “बन्दे हैं हम उसके, हम पर किसका जोर, उम्मीदों के सूरज निकले चारों ओर।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में महाराष्ट्र में शिवसेना के सरकार बनाने की तरफ इशारा करते हुए कहा था, “अब हारना और डरना मना है.. हार हो जाती है जब मान लिया जाता है। जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है।”

एक अन्य ट्वीट में भी उन्होंने सरकार बनाने को लेकर विश्वास दिखाते हुए लिखा, “लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती- बच्चन। हम होंगे कामयाब..जरूर होंगे…”

राउत ने एक ट्वीट में लिखा, “रास्ते की परवाह करूँगा तो मंजिल बुरा मान जाएगी………!”

शिवसेना सांसद ने एक और शायरी ट्वीट किया था, “वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से… मैं ऐतबार न करता तो क्या करता…-वसीम बरेलबी।”

राउत ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं, कमाल है कि फ़िर भी तुम्हें यक़ीन नहीं- दुष्यंत कुमार।”

संजय राउत ने दुष्यंत कुमार के एक और शायरी को ट्वीट किया था, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।”

राउत महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहे थे और उन्होंने इसी विश्वास को दिखाते हुए एक और ट्वीट किया था, “उसूलों पर जहाँ आँच आए, टकराना ज़रूरी है, जो ज़िन्दा हो, तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है ….जय महाराष्ट्र।”

उन्होंने एक ट्वीट किया, “साहिब…मत पालिए, अहंकार को इतना, वक़्त के सागर में कई सिकन्दर डूब गए..!”

इसी तरह एक ट्वीट में कमल का फूल हाथ लिए शेर के कार्टून को शेयर करते हुए संजय राउत ने लिखा था, “व्यंग चित्रकाराची कमाल! बुरा न मानो दिवाली है…”

…कॉन्ग्रेस का वो डर, जो सही साबित हुआ: महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन का हटना और CM, डिप्टी सीएम का खेल

शनिवार (नवंबर 23, 2019) को महाराष्ट्र बड़े राजनीतिक उलटफेर का गवाह बना। तमाम अटकलों और कयासों के बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी सरकार गठन में कामयाब हो गई है। बीजेपी नेता देवेंद्र फड़णवीस ने दोबारा सीएम पद की शपथ ली है। वहीं, एनसीपी नेता अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद पद की शपथ ली है। सुबह करीब आठ बजे राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दोनों नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई

राज्य में बीजेपी और एनसीपी की गठबंधन सरकार बनने के बाद अब राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि सुबह 5:47 बजे इसे खत्म कर दिया गया। 

जैसा कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं जलमार्ग विकास मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र की राजनीति पर इशारों में बड़ा बयान देते हुए कहा था कि राजनीति और क्रिकेट में कुछ भी हो सकता है। राजनीति और क्रिकेट में कुछ असंभव नहीं, वैसा ही आज सुबह देखने को मिला। उन्होंने कहा था कि कई बार आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं लेकिन नतीजा उसके ठीक उलट होता है। उन्होंने इस तरफ इशारा भी किया था कि महाराष्ट्र में किसकी सरकार बनेगी, इसके बारे में वो नहीं बता सकते।

कहाँ तो आज शनिवार को शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस के नेताओं की ओर से महाराष्‍ट्र में नई सरकार का ऐलान होना था। इन तीनों दलों के नेता राज्‍यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा भी पेश करने वाले थे, लेकिन शनिवार सुबह बीजेपी ने ऐसी ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक’ की, जिससे शिवसेना और कॉन्ग्रेस तो क्‍या, जिसने सुना, हैरान रह गया। बता दें कि शुक्रवार (नवंबर 22, 2019) को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने तीन दिवसीय सम्मेलन के लिए दिल्ली की अपनी सप्ताहांत यात्रा रद्द कर दी और मुंबई में ही रहने का फैसला किया।

किसी को अंदाजा नहीं लग पाया कि आखिर शुक्रवार रात को ऐसी कौन सी खिचड़ी पकी कि शनिवार सुबह होते-होते वहाँ बीजेपी के नेता देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्‍व में सरकार बन गई। लोगों का कहना है कि महाराष्‍ट्र में बीजेपी ने खिचड़ी तभी से पकानी शुरू कर दी थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्‍यसभा की 250वें सत्र में एनसीपी के बारे में तारीफ के पुल बाँधे थे।

लोग तो यह भी कह रहे हैं कि यह पीएम नरेंद्र मोदी की सोची-समझी रणनीति थी। उसके बाद एनसीपी नेता शरद पवार ने बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से संसद भवन में मुलाकात की थी। अब तीन दिन बाद उस मुलाकात का जो रिजल्‍ट आया है, उससे कॉन्ग्रेस का डर सही प्रतीत हो रहा है। 

दरअसल कॉन्ग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह से शरद पवार की मुलाकात की टाइमिंग पर सवाल उठाए थे। शायद कॉन्ग्रेस समझ गई थी कि महाराष्‍ट्र में राजनीति जिस मोड़ पर है, वैसे में पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के चाणक्‍य कहे जाने वाले गृह मंत्री से शरद पवार की मुलाकात से बाजी पलट सकती है।

बताया जा रहा है कि महाराष्‍ट्र में क्‍या कुछ होना है, यह सब परदे के पीछे चल रहा था। सामने शरद पवार, उद्धव ठाकरे के नाम पर कॉन्ग्रेस को एकमत करने में जुटे थे और पर्दे के पीछे अजित पवार के नेतृत्‍व में काम चल रहा था। शरद पवार कॉन्ग्रेस और एनसीपी से बात कर रहे थे तो एनसीपी की बी टीम बीजेपी के संपर्क में थी। एनसीपी ने आखिरकार बीजेपी के साथ जाना मुनासिब समझा। जैसा कि अजीत पवार ने बताया, तीन दलों के गठबंधन से बेहतर था बीजेपी के साथ जाकर स्‍थिर सरकार बनाएँ। उन्होंने किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला लिया।

सीएम फडणवीस ने राष्ट्रवादी पार्टी के नेता अजित पवार को साथ आने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके साथ कई अन्य लोग भी आए। जिसके बाद उन्होंने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया। फड़णवीस ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल से राष्ट्रपति जी से अनुशंसा की कि वह राष्ट्रपति शासन वापस लें। इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया और उन्होंने एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाया। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वो महाराष्ट्र में स्थिर और स्थाई सरकार दे पाएँगे।

ज़िदगी भर तड़पेंगे अजित पवार, साथ न देते तो आर्थर रोड जेल में होते: संजय राउत ने दिया श्राप

महाराष्ट्र में राजनीतिक अटकलों ने एकाएक करवट बदली, सूबे में भाजपा-एनसीपी (फिलहाल अजित पवार) ने नई सरकार गठित की। देवेंद्र फडणवीस जहाँ मुख्यमंत्री बने, वहीं अजित पवार ने डेप्युटी सीएम के नाम का शपथ ग्रहण लिया। लेकिन, NCP पार्टी प्रमुख शरद पवार ने इस निर्णय पर नाख़ुशी ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि भाजपा को समर्थन देने का अजीत पवार का निर्णय उनका व्यक्तिगत निर्णय है न कि राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) का। शरद पवार ने कहा, “हम उसके इस फ़ैसले का समर्थन नहीं करते हैं।”

वहीं, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने महाराष्ट्र में अचानक बदले राजनीतिक समीकरणों पर अश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि NCP ने यूटर्न क्यों लिया हमें नहीं पता। अनवर ने कहा, “देश में सिद्धांत-विचारधारा की राजनीति बची नहीं है। साजिश थी जिसको गुप्त रखा गया। पीएम और भाजपा अपने साजिश में कामयाब हुए।” वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में सरकार गठन पर अजित पवार के निर्णय पर वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यह निर्णय पार्टी का नहीं है और न ही इस निर्णय को शरद पवार का समर्थन प्राप्त है।

इस बीच, शिवसेना सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स आयोजित की, इसमें उन्होंंने कहा कि बैठक में अजित पवार हमसे बात नहीं करते थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज ऐसी थी – वो बाहर निकले और अपना फोन बंद कर दिया। राउत ने कहा कि इन सारी बातों से शरद पवार का कोई संबंध नहीं। अजित पवार ने जो निर्णय लिया है, भाजपा की ओर से तोड़ने की कोशिश हुई है, उसे जनता जवाब देगी। उसने शरद पवार को धोखा दिया। उन्होंने कहा कि अगर देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री नहीं बनते तो अजित पवार आर्थर रोड जेल में होते।

संजय राउत ने कहा कि जो महागठबंधन करने जा रहे थे उससे देश की दिशा बदलने वाली थी। रात में ये पाप हुआ है। दिन में सब के सामने शपथ क्यों नहीं लिया? चोरी की है, डाका डाला है, जनता के साथ दगा किया है। पैसा और सत्ता का दुरुपयोग करके ये धोखा हुआ है। आँखे खुलने के पहले ये पाप नष्ट होगा। राउत ने आगे कहा, “अजित पवार पर बोलने की ज़रूरत नहीं। कल नौ बजे तक हमारे साथ बैठे थे, बात भी कर रहे थे। फिर ग़ायब हो गए। लेकिन वो नज़रों से नज़र नहीं मिला रहे थे क्योंकि उनकी नज़रों में चोरी थी। भाजपा ने राजभवन का दुरुपयोग किया है।”

प्रेस कॉन्फ्रेन्स में शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, “मैं मानता था कि राज्यपाल ऐसे व्यक्ति हैं जो आरएसएस से आए हैं, संस्कारी हैं, लेकिन ये अंधेरे में पाप हुआ है, धोखा हुआ है। अजित पवार और उनके साथ जो विधायक हैं उन्होंने छत्रपति शिवाजी और महाराष्ट्र का नाम खराब किया है। जनता जवाब देगी।”

ताजा जानकारी के अनुसार, दोपहर 12:30 बजे उद्धव ठाकरे और शरद पवार की प्रेस कॉन्फ़्रेंस होगी।

‘शिवसेना ने जनादेश का अपमान किया, जनता को स्थिर सरकार चाहिए’ – महाराष्ट्र CM देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र में चुनावी नतीजों के बाद से सरकार गठन को लेकर लंबे समय से चल रहे रहे राजनीतिक घमासान पर रातों-रात विराम लग गया। इसके परिणामस्वरुप महाराष्ट्र में आज सुबह देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की दोबारा शपथ ली। वहीं, एनसीपी नेता अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर शुभकामनाएँ दी हैं।

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “जनता ने हमें स्पष्ट जनादेश दिया था, शिवसेना ने जनादेश का अपमान किया है। महाराष्ट्र की जनता को स्थिर और स्थाई सरकार चाहिए, खिचड़ी सरकार नहीं चाहिए।”

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए एनसीपी के साथ मिलकर काम करेंगे।

महाराष्ट्र में अब तक राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP), कॉन्ग्रेस और शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर कोशिशें की जा रही थी। इसके लिए शुक्रवार (22 नवंबर) को तीनों पार्टियों के बीच दो घंटे तक बैठक भी हुई। इस बैठक में उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनी थी। लेकिन, शनिवार को राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए और महाराष्ट्र में बीजेपी और NCP ने मिलकर नई सरकार का गठन किया।

हाल ही में, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं जलमार्ग विकास मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र की राजनीति पर इशारों में बड़ा बयान दिया था। उन्होंने एक समारोह में कहा था कि राजनीति और क्रिकेट में कुछ भी हो सकता है। कई बार आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं लेकिन नतीजा उसके ठीक उलट होता है। जो आज वास्तविकता में तब्दील हो गया।

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए 21 अक्टूबर को चुनाव हुए थे और नतीजे 24 अक्टूबर को आए थे। राज्य में किसी पार्टी या गठबंधन के सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करने की वजह से राज्य में 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। शिवसेना के मुख्यमंत्री पद की माँग को लेकर बीजेपी से 30 साल पुराना गठबंधन तोड़ने के बाद से राज्य में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था।

‘किसानों की समस्या हल करने के लिए आए साथ’ – अजित पवार ने बताई BJP संग सरकार बनाने की वजह

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