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‘राहुल भाई आप भी आइए, सवालों का जवाब दीजिए’: राहुल कंवल ने भरे मंच से बताया कितने सालों से राहुल गाँधी की प्रतीक्षा कर रहा इंडिया टुडे, कॉन्ग्रेस ने किया ब्लैकलिस्ट

कॉन्ग्रेस पार्टी ने रविवार (15 दिसंबर 2024) को इंडिया टुडे के न्यूज़ डायरेक्टर राहुल कंवल को ब्लैकलिस्ट कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में गृह मंत्री अमित शाह के साथ बातचीत के दौरान राहुल गाँधी पर की गई टिप्पणी को कॉन्ग्रेस ने “अपमानजनक” बताया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस और मीडिया के बीच खटास को उजागर किया।

सोशल मीडिया पर किया बैन का ऐलान

कॉन्ग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “कॉन्ग्रेस पार्टी हमेशा प्रेस की आज़ादी और निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करती है। लेकिन ऐसे लोग जो प्रेस कार्ड लेकर किसी राजनीतिक पार्टी के ट्रोल की तरह काम करते हैं, उनके साथ संवाद करना ज़रूरी नहीं। राहुल कंवल को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला लिया गया है। कॉन्क्लेव में उन्होंने खुद को ‘चाणक्य’ समझने वाले नेता की वाहवाही की, जिन्होंने विपक्ष के नेता के खिलाफ बेबुनियाद बातें कहीं। राहुल कंवल को माफ करने का मौका दिया गया था, लेकिन वे बार-बार वही गलती दोहरा रहे हैं। वो पत्रकारिता के नाम पर क्या कर रहे हैं, वो हमारी समझ से परे है।”

पवन खेड़ा ने एक अन्य पोस्ट में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा—गृह मंत्री का राहुल गाँधी के खिलाफ गटर स्तरीय बातें करना या कंवल का सस्ती लोकप्रियता के लिए उनका साथ देना? क्या कंवल में हिम्मत है कि वे शाह से मोदी की पत्नी या स्नूपगेट पर सवाल पूछ सकें? क्या यही है इंडिया टुडे कॉन्क्लेव, श्रीमान अरुण पुरी?”

यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने राहुल कंवल पर निशाना साधा हो। खेड़ा ने सितंबर में बताया था कि एक विवादास्पद डिबेट के बाद कंवल ने कॉन्ग्रेस नेताओं से माफी माँगी थी। हालाँकि, इस बार पार्टी का रुख सख्त है।

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में क्या हुआ?
गृह मंत्री अमित शाह के साथ इंटरव्यू में राहुल कंवल ने लोकसभा चुनाव, हालिया विधानसभा चुनाव, और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सवाल किए। अमित शाह ने राहुल गाँधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “राहुल गाँधी हार में भी अहंकारी बन जाते हैं। वह हमेशा विदेशी स्रोतों पर भरोसा करते हैं। भारत में न्यायपालिका, सतर्कता संस्थाएँ और लोकतांत्रिक तंत्र मौजूद हैं, लेकिन वह अपनी आलोचनाओं के लिए विदेशी रिपोर्ट्स का सहारा लेते हैं।”

गृह मंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस की ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर स्थिति का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, “जब कॉन्ग्रेस जीतती है, ईवीएम सही होती है। लेकिन हारते ही ईवीएम खराब हो जाती है। ये उनकी हार स्वीकार न करने की प्रवृत्ति को दिखाता है।”

कंवल ने बातचीत में जोड़ा कि राहुल गाँधी लगातार इंडिया टुडे के मंचों से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा, “हमने राहुल गाँधी को 20 सालों से आमंत्रित किया है। लेकिन वह कभी नहीं आते। ऐसा लगता है मानो वह सवालों से एलर्जी रखते हैं।” उन्होंने कहा, “राहुल भाई आप भी आइए, सवालों के जवाब दीजिए।”

पत्रकारों से कॉन्ग्रेस के टकराव का इतिहास पुराना

कॉन्ग्रेस का पत्रकारों से टकराव नया नहीं है। सितंबर 2023 में I.N.D.I. गठबंधन ने 14 टीवी एंकरों की सूची जारी कर उनके शो का बहिष्कार किया था। कॉन्ग्रेस ने इन एंकरों पर पक्षपातपूर्ण खबरें फैलाने का आरोप लगाया था। यही नहीं, नवंबर में राहुल गाँधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूज़18 के पत्रकार को ‘बीजेपी एजेंट’ कहा, जब उन्होंने कॉन्ग्रेस पर बीजेपी के आरोपों से जुड़े सवाल पूछे। पत्रकार को कॉन्ग्रेस समर्थकों से विरोध झेलना पड़ा।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

जिस हवन कुंड के पास होता था कीर्तन, आज वहीं हाथ-पैर धो रहे मुस्लिम: संभल के ‘हरिहर मंदिर’ में शफीकुर्रहमान बर्क ने बंद करवाया था हिंदुओं का प्रवेश

संभल के मुस्लिम जिसे ‘जामा मस्जिद’ कहते हैं, उसके सर्वे के दौरान हुई हिंसा के बाद स्थानीय हिंदुओं ने बताया था कि यह जगह ‘हरिहर मंदिर’ ही है। कुआँ पूजन, शादी-ब्याह, पूजा-पाठ सब कुछ यहाँ होता था। लेकिन बाद में इस मंदिर में हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

संभल जिला प्रशासन की एक इंटरनल रिपोर्ट से पता चलता है कि 1978 के दंगों की आड़ में इस मंदिर में हिंदुओं का प्रवेश बंद किया गया था। इसके पीछे शफीकुर्रहमान बर्क था, जो संभल से समाजवादी पार्टी का सांसद रहा है। इस समय उसका पोता संभल का सपा सांसद है और सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर उसके खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद इंटरनल रिपोर्ट से पता चलता है कि इस मंदिर परिसर की जिस हवन कुंड के पास कभी कीर्तन हुआ करता था, अब वहाँ मुस्लिम हाथ-पैर धोते हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है, “इसी दंगे की आड़ लेकर शफीकुर्रहमान बर्क ने जामा मस्जिद/हरिहर मंदिर में जाने से हिंदुओं को प्रतिबंधित कर दिया। इससे पहले हिंदू इस परिसर के मध्य में बने हवन कुंड के चारों ओर कीर्तन करते थे। आज इस हवन कुंड का प्रयोग वजू के लिए किया जा रहा है।”

1978 के दंगों में किस तरह हिंदुओं का कत्लेआम किया गया था, इसके बारे में हम पिछली रिपोर्ट में बता चुके हैं। हम बता चुके हैं इन दंगों में जिस कारोबारी बनवारी लाल गोयल की मुस्लिम दंगाइयों ने हाथ-पैर और गला काटकर हत्या कर दी थी, उनके परिवार पर भी शफीकुर्रहमान बर्क ने दबाव डाला था और आखिर में वह परिवार संभल छोड़कर ही चला गया।

दुकान जले हिंदुओं के, पर बर्क ने ज्यादा मुआवजा मुस्लिमों को दिलवाया

1978 के दंगों में शफीकुर्रहमान बर्क ने इतने ही कारनामे नहीं किए। इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम दंगाइयों ने पूरी सब्जी मंडी जला दी। हिंदुओं के करीब 40 दुकानों में आगजनी और लूटमार की। लेकिन शफीकुर्रहमान बर्क के दबाव में हिंदुओं से अधिक मुस्लिमों को मुआवजा मिला, जबकि उनकी दुकानों को कोई नुकसान नहीं हुआ था।

प्रशासन ने यह रिपोर्ट संभल में हुए दंगों पर तैयार की है। इससे पता चलता है कि दंगों के कारण संभल में धीरे-धीरे हिंदुओं की आबादी कम होती जा रही है। देश की स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी जो आज घटकर 15-20% रह गई है। उस समय मुस्लिम 55% थे। आज वे बढ़कर 80-85 प्रतिशत हो गए हैं।

गौरतलब है कि हालिया हिंसा के बाद बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी एक्स/ट्विटर पर एक पोस्ट करते हुए बताया था कि जिसे मुस्लिम जामा मस्जिद कहते हैं, वह कभी हरि मंदिर ही था। उन्होंने बताया था कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने शफीकुर्रहमान बर्क के दबाव में 2012 में इसे पूरी तरह जामा मस्जिद में बदलवा दिया था। उससे पहले हिंदू इस जगह पर पूजा-पाठ के लिए जाते थे। उन्होंने इस जगह पर धार्मिक कार्यक्रमों की कुछ तस्वीर भी साझा की थी।

इस जगह पर बदलाव की बात आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने कोर्ट को भी बताई थी। बताया गया था कि 1920 में इसे ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित किया गया। लेकिन मुस्लिमों ने इसमें अवैध निर्माण किए। यहाँ तक कि एएसआई की टीम को भी प्रवेश से रोका गया।

‘बिस्मिल्लाह बोलूँगा और योगी की कुर्बानी दे दूँगा’: UP के CM को कैमरे पर दी धमकी, बोला- हमारी दीदी (ममता बनर्जी) बंगाल में अच्छा काम कर रही हैं

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर खबर इंडिया नामक यूट्यूब चैनल पर 13 दिसंबर 2024 को पब्लिश किए गए एक वीडियो में पश्चिम बंगाल से आए मुस्लिम प्रवासी मजदूरों से बातचीत की गई। इस बातचीत में एक मजदूर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया और धमकी देते हुए कहा, “बिस्मिल्लाह बोलूँगा और योगी की कुर्बानी दे दूँगा।” यही नहीं, उसने सीएम योगी पर लगातार अभद्र टिप्पणियाँ की।

सीएम योगी को दी कुर्बानी की धमकी

प्रवासी मजदूर ने अपनी नाराजगी योगी सरकार की नीतियों पर जाहिर की। उसने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण, अवैध मस्जिदों और मजारों पर कार्रवाई, और लाउडस्पीकर व अवैध बूचड़खानों पर लगाम कसने को लेकर नाराजगी जताई। प्रवासी मजदूर ने कहा, “बिस्मिल्लाह बोलूँगा और कुर्बानी दे दूँगा योगी की” और यह कहते हुए उसने हाथों से कुर्बानी देने का इशारा भी किया।

उसने आगे कहा, “खुलेआम भैंस का गोश्त काट रहे हैं हम लोग। खुलेआम अजान चल रहा है। जाओ योगी… सु#$@र के जने के पास.. जो मस्जिद से माइक उतारता है। उसकी अम्मी ने शादी किया है, मुसलमान से… बोलता है मुसलमानों को भगाओ यहाँ से.. सामने आएगा तो बिल्मिल्लाह बोलके #$% दूँगा।”

ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनाने की इच्छा

मजदूर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की और कहा, “हमारी दीदी बंगाल में अच्छा काम कर रही हैं। हम चाहते हैं कि 2029 में वह प्रधानमंत्री बनें।” हालाँकि, कुछ मजदूरों ने ममता सरकार की आलोचना भी की। उन्होंने कहा, “अगर बंगाल में रोजगार होता, तो हम दिल्ली क्यों आते?” एक मजदूर ने आगे कहा, “बंगाल में 28 जिले हैं, लेकिन बड़ी कंपनियां नहीं हैं। रोजगार के लिए हमें 1400 किलोमीटर चलकर दिल्ली आना पड़ता है।”

आप से अधिक कॉन्ग्रेस को दी प्राथमिकता

मजदूरों ने कॉन्ग्रेस को आम आदमी पार्टी और बीजेपी से बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि “राहुल गाँधी एक अच्छे नेता हैं, और कॉन्ग्रेस ही देश में शांति और एकता ला सकती है।” हालाँकि, अप्रवासी मजबूदों ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार की मुफ्त बिजली-पानी योजनाओं की तारीफ की, लेकिन उन्होंने राहुल गाँधी को बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में अधिक मजबूत बताया।

यह बातचीत यह दिखाती है कि चुनाव से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। योगी आदित्यनाथ को धमकी और ममता बनर्जी की प्रशंसा प्रवासी मजदूरों के राजनीतिक झुकाव को उजागर करती है।

ट्रेनों को पटरी से उतारने की तालीम दे रहे हैं मदरसे, NIA और ATS की जाँच से खुलासा: कई वीडियोज मिले, मौलवी से भी पूछताछ

ट्रेन को पटरी से उतारने की बहुत सी साजिशों की खबरें आने के बीच एक नया खुलासा हुआ है। खुलासे से पता चलता है कि ट्रेन को डीरेल करने की कोशिशों में मदरसे अपनी भूमिका खास तौर पर निभा रहे हैं।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी और उत्तर प्रदेश एटीएस ने झांसी और कानपुर में ट्रेन डीरेल की कोशिश के बाद इस मामले में जाँच की थी और पाया था कि मदरसों में न केवल छात्रों के भीतर ट्रेन को डीरेल करने के लिए कट्टरपंथी बनाया जाता है बल्कि उन्हें इसकी ट्रेनिंग भी दी जाती है

ये ट्रेनिंग ऑनलाइन मोड में दी जाती है। जाँच टीम ने ऐसे तमाम वीडियोज पाए हैं जिसमें इस्लामी कट्टरपंथी युवाओं को भड़काते हुए दिख रहे हैं और उन्हें ये भी बता रहे हैं कि ये काम किया कैसे जाता है।

एक मुफ्ती खालिद नदवी नाम के मदरसा टीचर से इसी मामले में पूछताछ भी हुई। गुरुवार को जाँच टीम ने नदवी के घर छापा मारा और कई घंटे उससे सवाल पूछे। लेकिन, जब उसे हिरासत में लिया गया वैसे ही वहाँ मुस्लिम भीड़ आई और उन्होंने नदवी को छुड़ाने का प्रयास किया

इस भीड़ में तमाम महिलाएँ थीं जो मस्जिद से ऐलान के बाद वहाँ इकट्ठा हुई थीं। हालाँकि बाद में पुलिस बल ने मामले को संभालते हुए नदवी को हिरासत में लिया और साइबर सेल थाने में जे जाकर पूछताछ की। इस दौरान नदवी का लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य आइटम भी सीज कर लिए गए। वहीं बाद में 100 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जो हिरासत के दौरान मौलवी को छुड़ाने आए थे।

गौरतलब है कि बीते 3 महीनों में ट्रेन को पटरी से उतारने का तमाम मामले सामने आए हैं। कभी साबरमती एक्सप्रेस को निशाना बनाया गया, कभी कालिंदी एक्स्प्रेस को। यहाँ वंदे भारत पर पत्थर तक फेंके गए। कभी पटरी पर सिलेंडर मिला तो कभी आइरन की रॉड। अगर सही समय पर ट्रेन रोक इसे न हटाया जाता तो कोई भी बड़ी दुर्घटना घटी जा सकती थी।

बनवारी लाल के लिए ‘भाई’ थे मुस्लिम… फिर भी पहले पैर काटा, फिर हाथ और आखिर में गला: संभल में जब 24 हिंदुओं को दंगाइयों ने एक साथ फूँक दिया

संभल में दंगों का पुराना इतिहास रहा है। इन्हीं दंगों के बल पर संभल नगरपालिका क्षेत्र से धीरे-धीरे हिंदुओं को मिटाया गया। देश की स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी जो आज घटकर 15-20% रह गई है। उस समय मुस्लिम 55% थे। आज वे बढ़कर 80-85 प्रतिशत हो गए हैं।

संभल के खग्गूसराय मोहल्ले में एक ऐसा मंदिर मिला है जिसे 1978 के दंगों के बाद गायब कर दिया गया था। संभल में दंगों को लेकर प्रशासन ने एक इंटरनल रिपोर्ट तैयार की है। इसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इससे पता चलता है कि 1978 में संभल में सबसे बड़ा दंगा हुआ था। इसी दंगे के बाद खग्गूसराय में रहने वाले करीब 100 हिंदू परिवार इस इलाके को छोड़कर चले गए।

हिंदू शिक्षक की बेटी से बलात्कार, पत्नी को किया किडनैप

यह दंगा होली के बाद 29 मार्च से शुरू हुआ था। इसमें करीब 184 लोगों की हत्या की गई थी। करीब 30 दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा था। इसी दंगे के दौरान संभल के जाने माने कारोबारी बनवारी लाल गोयल की तड़पा-तड़पाकर हत्या की गई थी। इसी दंगे के दौरान एक हिंदू शिक्षक की बेटी और पत्नी को मंजर शफी ने उठा लिया था। इस दंगे को भड़काने के पीछे भी शफी की बड़ी भूमिका थी। हिंदू शिक्षक की बेटी को बलात्कार के बाद छोड़ा गया। उनकी पत्नी को हिंदुओं ने बचा लिया था। आज न तो इस शिक्षक और न ही बनवारी लाल गोयल का परिवार संभल में रहता है।

गन्ने की खोई और टायर का ढेर लगाकर 24 हिंदुओं को जलाया

दंगे भड़कने के बाद बनवारी लाल गोयल ने कई हिंदू दुकानदारों को अपने साले मुरारी लाल की कोठी में छिप जाने को कहा था। मुस्लिम आढ़तियों ने इसकी सूचना दंगाइयों को दी। इसके बाद मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने ट्रैक्टर लगाकर मुरारी लाल की कोठी का गेट तोड़ दिया। यहाँ 24 हिंदुओं की हत्या कर उन्हें गन्ने की खोई और टायर का ढेर लगाकर मुस्लिम दंगाइयों ने जला दिया। हालात इतने बदतर थे कि अधिकतर हिंदुओं ने कपड़ों के पुतले बनाकर बृजघाट पर अपनों का अंतिम संस्कार किया था।

दैनिक भास्कर ने संभल के इतिहास के जानकार 58 साल के संजय शंखधर के हवाले से भी इस घटना के बारे में बताया है। शंखधर के अनुार इस दंगे से पहले संभल में हिंदुओं की आबादी 35% थी, अब करीब 20 प्रतिशत ही है। उन्होंने कहा, “1978 का दंगा संभल का सबसे बड़ा दंगा है। लाला मुरारी लाल की कोठी में दंगे से बचने के लिए कई लोग छिपे थे। इसका पता चलते ही दंगाइयों ने उनकी कोठी पर हमला कर दिया। जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई। इनमें 24 हिंदू थे।”

बनवारी लाल बोले गोली मार दो, पर दंगाइयों ने काट-काटकर मारा

ऑपइंडिया के पास मौजूद इंटरनल रिपोर्ट बताती है कि दंगे भड़कने की सूचना मिलने पर बनवारी लाल गोयल प्रभावित इलाके में जाने लगे। उनकी पत्नी और बेटे ने उन्हें रोका। लेकिन वे यह कहते हुए दंगा प्रभावित इलाके में चले गए,

सारे मुस्लिम मेरे मित्र और भाई जैसे हैं। सब मेरे साथ काम करते हैं। मुझे कुछ नहीं होगा।

लेकिन बनवारी लाल गोयल को मुस्लिम दंगाइयों ने पकड़ लिया। उनसे कहा कि तुम इन पैरों से पैसे लेने आए हो और उनके पैर काट दिए। फिर कहा कि तुम इन हाथों से पैसे लेने आए हो और हाथ भी काट दिए। इसके बाद गर्दन काट कर उनकी हत्या कर दी गई। इस दौरान मुस्लिम दंगाइयों के सामने बनवारी लाल गिड़गिड़ाते रहे कि मुझे काटो मत, गोली मार दो। पर किसी ने नहीं सुनी। इस घटना को हरद्वारी लाल शर्मा और सुभाष चंद्र रस्तोगी ने अपनी आँखों से देखा था। इस कत्लेआम के दौरान दोनों ने एक ड्रम में छिपकर अपनी जान बचाई थी। हाई स्कूल में पढ़ने वाले हरद्वारी लाल के सगे भाई को भी मुस्लिम दंगाइयों ने चाकू से गोदकर इसी दौरान मार डाला था।

शर्मा और रस्तोगी भी इस कत्लेआम के गवाह थे। इरफान, वाजिद, जाहिद, मंजर, शाहिद, कामिल, अच्छन जैसे नाम आरोपित थे। लेकिन 2010 में यह केस बंद करना पड़ा, क्योंकि गवाह ही हाजिर नहीं हुए। जज ने यह टिप्पणी करते हुए केस बंद किया कि मैं सोच भी नहीं सकता कि इनलोगों (आरोपितों) को फाँसी नहीं हो रही है।

गवाहों पर किस तरह का दबाव रहा होगा इसे इस बात से समझा जा सकता है कि बनवारी लाल के बेटे विनीत गोयल के कारोबारी साझेदार रहे प्रदीप अग्रवाल के भाई की वसीम ने गोली मारकर हत्या कर दी। साथ ही धमकी दी कि यदि उसके खिलाफ किसी ने एफआईआर करवाई तो उसकी भी हत्या कर दी जाएगी। उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार बनवारी लाल के परिवार पर डॉक्टर शफीकुर रहमान बर्क की ओर से भी दबाव डाला गया था। बर्क संभल से समाजवादी पार्टी से सांसद रहे हैं। फिलहाल उनके पोते जियाउर्रहमान बर्क इस सीट से सपा के सांसद हैं। जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हुई हिंसा में जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। 1995 के आसपास बनवारी लाल गोयल के परिवार ने संभल ही छोड़ दिया।

संभल में 46 साल बाद मिला जो मंदिर, उसके कुएँ की खुदाई में निकली देवी-देवताओं की खंडित मूर्ति: लोग दर्शन के लिए उमड़े, प्रशासन करवाएगा जाँच

उत्तर प्रदेश के संभल के खग्गू सराय में शिव मंदिर के पट खोले जाने के बाद अब उस मंदिर के पास स्थित एक कुएँ की खुदाई की जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक प्रशासन ने 15-20 फीट तक मंदिर की खुदाई कर ली है और इतनी ही गहराई में उन्हें देवी-देवताओं की खंडित प्रतिमाएँ मिलनी लगी हैं।

सामने आई तस्वीरों को देख लगता है कि ये 7 से 8 इंच लंबी मूर्तियाँ माता पार्वती, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की हैं। कुएँ से इन तीन मूर्तियों के निकलने के बाद स्थल पर एडिशनल एसपी श्रीशचंद्र अनुज चौधरी भी मौके पर पहुँचे और उन्होंने खुदाई में निकली मूर्तियाँ देखीं। अब इन प्रतिमाओं को आगे जाँच के लिए भेजा जाएगा।

बता दें कि इन तीन मूर्तियों के मिलने की खबर के बाद एक तरफ जहाँ लोग इन प्रतिमाओं को देखने के लिए उमड़ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर ये अनुमान भी लगाए जा रहे हैं कि 46 साल पहले मंदिर को बंद करने से पहले मंदिर की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करके इस कुएँ में डाला गया होगा और बाद में मंदिर बंद करके कुएँ को पाट दिया गया होगा।

अब प्रशासन पूरे मामले की जाँच में जुटा है। इस बीच संभल में 46 साल बाद खुले मंदिर के ऊपर लोगों ने प्राचीन संभलेश्वर महादेव मंदिर का नाम लिख दिया है। इसके अलावा मंदिर की दीवारों पर भी हर-हर महादेव लिखा हुआ है। लोग इस मंदिर में स्थापित मूर्तियों की पूजा-अर्चना और जल अर्पित करने के लिए आतुर हैं ,लेकिन पुलिस लगातार स्थिति संभालते हुए निगरानी बनाए हुए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक संभल बॉर्डर पर पुलिस ने भारी नाकेबंदी की हुई है। किसी गाड़ी को संभल में बिना चेकिंग के एंट्री नहीं दी जा रही है। हालातों को देखते हुए पुलिस ने सतर्कता बढ़ाई है। ये सब उस समय हो रहा है जब संभल में बीते दिनों हिंसा के बाद बिजली चोरों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान शिव मंदिर मिला, हर ओर इसकी कवरेज हुई और लोगों में उत्सुकता बढ़ी। पुलिस को इसी बीच खुफिया जानकारी मिली कि कुछ लोग बाहर से संभल में प्रवेश करने की फिराक में हैं। ऐसे में पुलिस लगातार सतर्क है। वहीं 4 दशक से बंद पड़े मंदिर की कार्बन डेटिंग कराने की बात चल रही है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने एएसआई को पत्र भी लिखा है।

ममेरे भाई से चल रहा था अफेयर, दुल्हन ने शादी के 4 दिन बाद ही मरवा डाला पति: गुजरात पुलिस ने 4 को दबोचा, सख्ती से पूछताछ में कबूला सच

गुजरात के गांधीनगर में एक पत्नी द्वारा अपने पति की हत्या कराए जाने का मामला सामने आया है। महिला का अपने ममेरे भाई से अफेयर था। वह अपनी शादी कहीं और कराए जाने से खुश नहीं थी। आरोपित महिला की शादी को महज 4 दिन ही हुए थे। पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए महिला, उसके प्रेमी सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शनिवार (14 दिसंबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 1 हफ्ते पहले गांधीनगर की रहने वाली पायल की शादी अहमदाबाद के भाविक से हुई थी। शादी के 4 दिनों के बाद शनिवार (14 दिसंबर) को भाविक अपनी पत्नी को लेने एक्टिवा से उसके घर जा रहा था। तभी रास्ते में एक कार ने भाविक की एक्टिवा को टक्कर मार दी। भाविक जमीन में गिर पड़ा तो कार सवारों ने उसे अंदर खींच लिया। गाड़ी में बिठा कर भाविक का गला दबा दिया गया। बाद में इन सभी ने शव को नर्मदा नहर में फेंक दिया और मौके से फरार हो गए।

भाविक जब बहुत देर तक घर नहीं पहुँचा तो उसके परिजन परेशान हो उठे। उनका फोन भी बंद आ रहा था। तलाश करने के दौरान भाविक की स्कूटी रास्ते में पड़ी मिली। आखिरकार मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने अपनी पड़ताल शुरू की तो शक की सुई भाविक की पत्नी पायल की तरफ गई। पायल से पूछताछ की गई तो शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह किया। थोड़ी ही देर के सवाल जवाब में तो टूट गई और सच उगल दिया।

पायल ने पुलिस को बताया कि उनका अपने ममेरे भाई कल्पेश से लम्बे समय से अफेयर चल रहा था। इन दोनों की मर्जी के खिलाफ पायल की शादी भाविक से करवा दी गई। इसी बात से नाराज होकर पायल और कल्पेश ने मिल कर भाविक को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया था। पायल को गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने कल्पेश को भी पकड़ा। कल्पेश ने अपने साथ इस अपराध में दो अन्य लोगों को भी शामिल बताया। उन दोनों को भी दबोच लिया गया। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।

52000 फर्जी सर्टिफिकेट… बांग्लादेशियों-पाकिस्तानियों को बसाने के लिए: रायबरेली के 11 गाँवों में मिला ‘असली’ दिखने वाला जन्म प्रमाण पत्र, मोहम्मद जीशान और रियाज समेत 4 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में 18 जुलाई 2024 में हजारों रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के जन्म प्रमाण पत्रों को बनाने का खुलासा हुआ था, तब इस मामले में जाँच बिठा दी गई थी जो अब पूरी हो चुकी है। कुल 52 हजार से अधिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इस फर्जीवाड़े में भारत के कई राज्यों सहित पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल तक के लोगों के प्रमाण पत्र शामिल हैं। शासन ने इन सभी फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का ऐलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों से सलोन ब्लॉक के कुल 11 गाँव बुरी तरह प्रभावित हैं। इन 11 गाँवों को मिला कर कुल 52,594 जन्म प्रमाण पत्र फर्जी निकले हैं। ये जन्म प्रमाण पत्र बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, तमिलनाडु, केरल व पंजाब राज्यों के साथ बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल तक के नागरिकों के नाम पर बनाए गए थे। उप-निदेशक पंचायती राज सास्वत आनंद सिंह ने इन सभी फर्जी प्रमाणपत्रों को निरस्त करने के आदेश दिए हैं।

इसी के साथ जिले के DPRO को भविष्य में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में खास सावधानी बरतने के निर्देश मिले हैं। जाँच में पता चला है कि कई गाँवों में तो जालसाजों ने एक ही दिन के अंदर 500 से लेकर 1000 तक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बना डाले थे जबकि एक कंप्यूटर से 24 घंटे में 100 प्रमाणपत्र से अधिक नहीं निकल सकते हैं। माना जा रहा है कि एक ही आईडी और पासवर्ड से एक दिन में इतने ज्यादा प्रमाण पत्र बनाने के लिए कई प्रदेशों में बैठे साजिशकर्ताओं ने मिल कर काम किया था।

जिन 11 गाँवों में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पाए गए हैं जिसमें सबसे अधिक प्रभावित पाल्हीपुर है। यहाँ 13707 फर्जी प्रमाण पत्र पाए गए हैं। दूसरे नंबर पर नुरुद्दीनपुर है जहाँ मिले प्रमाण पत्रों की संख्या 10151 है। तीसरा नंबर पृथ्वीपुर का है। यहाँ 9393 फर्जी प्रमाण पत्र मिले हैं। इसके अलावा सांडा सैदन में 4897, माधौपुर निनैया में 3746, लहुरेपुर में 3780, गढ़ी इस्लामनगर में 2255, औनानीश में 1665, गोपालपुर उर्फ अनंतपुर में 225 और दुबहन में 2 फर्जी प्रमाण पत्र खोजे गए हैं।

इस फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपित मोहम्मद जीशान है जो रायबरेली के ही सलोन का निवासी है। उसके साथ साजिश में शामिल रियाज, सुहेल खान और वीडीओ विजय सिंह यादव को भी दबोच लिया गया है। मामले की जाँच में ATS के साथ NIA को भी लगाया गया है। जाँच एजेंसियाँ इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपितों की मिलीभगत की पड़ताल में जुटी हैं।

बताते चलें कि मामले का खुलासा तब हुआ जब जुलाई 2024 में कुछ गाँवों की आबादी से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बना डाले गए। शुरुआत में इस साजिश की भनक गाँवों के कई प्रधानों तक को नहीं लगी थी। खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए विजय यादव ने ही इस फर्जीवाड़े की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। पुलिस की जाँच में यह आया कि विजय यादव ने अपना सरकारी CUG नंबर जीशान को दे रखा था। इसी नंबर पर हर जन्म प्रमाण को एप्रूवल देने वाली OTP आती थी।

₹30 लाख की सुपारी वकील कामिल मुस्तफा ने दी, दुश्मनी हैदर और असद की थी… महिला अधिवक्ता मोहिनी तोमर के कत्ल मामले में दो और गिरफ्तार, कासगंज पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में रविवार (3 सितंबर, 2024) को मोहिनी तोमर नाम की महिला वकील की हत्या कर दी गई थी। उनका शव एक नहर से बरामद हुआ था। महिला वकील के पति ने पुलिस में FIR दर्ज करके मुस्तफा कामिल, असद मुस्तफा, हैदर मुस्तफा, सलमान, मुनाजिर रफी के साथ केशव मिश्रा को नामजद किया था। अब इस मामले में पुलिस ने रविवार (15 दिसंबर 2024) को हत्या की सुपारी लेने वाले 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इन्हें वकील मुस्तफा कामिल और उसके बेटों ने 30 लाख रुपयों की सुपारी दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिवक्ता मोहिनी तोमर हत्याकांड में रविवार को कासगंज पुलिस ने सुनील फौजी और रजत सोलंकी नाम के 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को ये दोनों सुबह 9 बजे उसी हजारा नहर के पास मिले जिसमें से मोहिनी का शव मिला था। दोनों पर प्रशासन ने 1-1 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। तलाशी और पूछताछ के बाद इन दोनों के पास से हत्या में प्रयोग की गई कार, देसी पिस्टल, तमंचा, मृतका का मोबाइल फोन और मोहिनी के नाम की मोहर आदि बरामद हुई हैं।

पुलिस की पूछताछ में सुनील और रजत ने मोहिनी हत्याकांड में अपनी मिलीभगत की बात स्वीकार की। इन दोनों ने बताया कि 3 सितंबर 2024 को वो एक साथ कार से सुनील फौजी के साथ कासगंज कोर्ट गए थे। सुनील फौजी ने एक शादी कराने का बहाना लेकर मोहिनी को अपनी कार में बिठा लिया। बाद में इन सभी ने मोहिनी को गला दबा कर उन्हें मार डाला और लाश को नहर में फेंक दिया। इस साजिश में शामिल रहीं रेनू के साथ बॉबी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

कासगंज के एडिशनल एसपी राजेश भारती ने मीडिया को बताया कि पूछताछ में सुनील फौजी ने कबूला है कि उसे वकील मुस्तफा कामिल, उसके बेटे हैदर मुस्तफा, असद मुस्तफा और मुस्तफा सलमान के साथ मुनाजिर रफी और केशव मिश्रा की तरफ से 30 लाख रुपए की सुपारी मिली थी। सुनील फौजी ने इस साजिश को अंजाम देने के लिए अपने साथ रजत सहित बॉबी और रेनू को भी शामिल कर लिया था। इन्हीं दोनों की कोर्ट मैरिज करने का झाँसा दे कर मोहिनी को अदालत से बाहर बुलवाया गया था।

बताते चलें कि मोहिनी तोमर को वकील मुस्तफा कामिल के बेटों की जमानत अर्जी का विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी मिली थी। तब मृतका ने अपने पति से भविष्य में खुद के साथ किसी अनहोनी की आशंका भी जताई थी। वकील कामिल के बेटों हैदर और सलमान ने 30 जुलाई 2024 को कासगंज की कचेहरी में शिवशंकर नाम के एक युवक को बेरहमी से पीट कर उसकी शिखा उखाड़ ली थी।

कामिल मुस्तफा के रुतबे की वजह से इस केस में शिवशंकर को कोई वकील नहीं मिल रहा था। तब मोहिनी तोमर ने शिवशंकर का केस लड़ने का ऐलान किया था। मोहिनी की वकालत के चलते कामिल मुस्तफा के बेटों को जमानत मिलने में देरी हुई। इसी बात से कामिल मुस्तफा नाराज था। आखिरकार उसने सुपारी दे कर मोहिनी की हत्या करवा दी। फिलहाल पुलिस इस केस में आगे की जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

एडविना माउंटबेटन को जवाहरलाल नेहरू ने चिट्ठी में क्या कहा… पत्र अपने पास रखकर बैठीं सोनिया गाँधी: प्रधानमंत्री संग्रहालय ने की वापसी की माँग, अब राहुल गाँधी को चिट्ठी लिखी

प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी से उनके परिवार के पास मौजूद जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक दस्तावेजों को लौटाने की माँग की है। अहमदाबाद के इतिहासकार और PMML के सदस्य रिजवान कादरी ने 10 दिसंबर 2024 को राहुल गाँधी को लिखे पत्र में 2008 में सोनिया गाँधी द्वारा लिए गए 51 बॉक्स दस्तावेजों को लौटाने की माँग दोहराई है।

इन दस्तावेजों में नेहरू और जयप्रकाश नारायण, एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली, विजया लक्ष्मी पंडित और बाबू जगजीवन राम जैसी हस्तियों के बीच हुए पत्राचार शामिल हैं। यह पहली बार नहीं है जब PMML ने यह अनुरोध किया है। इससे पहले सितंबर 2024 में सोनिया गाँधी को भी ऐसा पत्र भेजा गया था।

कादरी के अनुसार, इन दस्तावेजों का ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक है और इन्हें शोध और अध्ययन के लिए जनता के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर मूल दस्तावेज वापस नहीं किए जा सकते तो उनकी प्रतियाँ या डिजिटल संस्करण उपलब्ध कराए जाएँ।

यह मामला 2008 का है, जब UPA सरकार के दौरान सोनिया गाँधी ने नेहरू मेमोरियल म्यूजियम से 51 बॉक्स निजी दस्तावेज लिए थे। इनमें नेहरू और अन्य हस्तियों के बीच पत्राचार शामिल था। इन दस्तावेजों में नेहरू और एडविना माउंटबेटन के पत्र भी थे, जो हमेशा विवाद का विषय रहे हैं।

सोनिया गाँधी ने साध रखी है चुप्पी

सितंबर 2024 में भेजे गए पत्र का सोनिया गाँधी की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया। इस बार, कादरी ने राहुल गाँधी से हस्तक्षेप की अपील की है। कादरी ने लिखा कि ये दस्तावेज भारत के इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और नेहरू के विचारों को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि अगर दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए तो यह इतिहास के प्रति अन्याय होगा।

कादरी ने अपने पत्र में लिखा कि इन दस्तावेजों का ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक है, और इन तक पहुँच सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि देश के इतिहास को समग्रता से समझा जा सके। उनका कहना है कि इन कागजातों तक पहुँच होने से भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय निर्माण और भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकेगी। उनके अनुसार, गाँधी जी के लेखन को व्यवस्थित रूप से दस्तावेज किया गया है, लेकिन सरदार पटेल के योगदान को लेकर इतने व्यापक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए नेहरू और उनके पिता मोतीलाल नेहरू द्वारा छोड़े गए दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हैं।

कादरी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि अगर सोनिया गाँधी दस्तावेज वापस नहीं करना चाहतीं, तो वे उनकी डिजिटल प्रतियाँ उपलब्ध कराएँ। उन्होंने यह भी पेशकश की कि वह खुद दस्तावेजों का डिजिटलीकरण करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि सोनिया गाँधी द्वारा किए गए दस्तावेजों की वापसी अच्छे इरादों से की गई थी ताकि इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालाँकि, अब समय आ गया है कि इन दस्तावेजों तक पहुँच प्रदान की जाए ताकि राष्ट्र के इतिहास का व्यापक अध्ययन हो सके।

यह मामला केवल दस्तावेजों की वापसी तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठता है कि क्या ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज किसी परिवार की निजी संपत्ति हो सकते हैं, या उन्हें राष्ट्रीय विरासत के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। PMML के अनुसार, इन दस्तावेजों की सार्वजनिक उपलब्धता इतिहास के व्यापक अध्ययन और राष्ट्र की समझ के लिए जरूरी है।

बता दें कि फरवरी 2023 में PMML की वार्षिक बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में यह मुद्दा उठाया गया था। बैठक में कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया था कि इन दस्तावेजों को फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए सत्यापित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब न हो।