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CM योगी आदित्यनाथ को धमकी देने वाला अताउल गनी हथियार के साथ गिरफ्तार, बताया- बांग्लादेश से आकर बंगाल के मालदा में बसा: कहा था- बिस्मिल्लाह बोलकर योगी की दूँगा कुर्बानी

नोएडा पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी देने वाले एक व्यक्ति को दिल्ली के शाहीन बाग इलाके से गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान शेख अताउल (40) पुत्र उसमान गनी के रूप में हुई है। वह मूल रूप से बांग्लादेश का निवासी है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में उसका परिवार बस गया था। बाद में वह दिल्ली के शाहीन बाग में रहने लगा। पुलिस ने आरोपित के पास से एक .315 बोर का तमंचा, जिंदा कारतूस, एक चाकू, आपत्तिजनक दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएडा सेक्टर 39 पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए शेख के खिलाफ मामला दर्ज किया और उसे दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। एडिशनल डीसीपी मनीष मिश्रा ने बताया कि शेख के खिलाफ बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

शुरुआती पूछताछ में शेख ने बताया कि उसने हथियार अपनी सुरक्षा और डर दिखाने के लिए रखा था। पुलिस अब यह जाँच कर रही है कि क्या शेख आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है और क्या वह सच में मुख्यमंत्री पर हमला करने की योजना बना रहा था।

एडिशनल डीसीपी मनीष मिश्रा ने कहा, “वायरल वीडियो में आरोपित व्यक्ति ने संवैधानिक पद पर बैठे एक जननेता के खिलाफ झूठी और भड़काऊ बातें कही थीं, जो सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा दे सकती थीं। आरोपित ने अलगाववादी बयान देकर करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई।”

पुलिस ने आरोपित के पास से मिले मोबाइल फोन और दस्तावेजों की जाँच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि वह किसी संगठन से जुड़ा हुआ था या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था। पुलिस ने बताया कि इस मामले में सोशल मीडिया सेल ने वीडियो को चिह्नित कर सेक्टर 39 थाने में मामला दर्ज कराया था। यह वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हुआ था। आरोपित के भड़काऊ बयानों से सांप्रदायिक तनाव फैलने की आशंका थी।

बता दें कि शेख अताउल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उसने योगी आदित्यनाथ को ‘कुर्बान’ कर देने की धमकी दी थी। वीडियो में उसने भड़काऊ बयान देते हुए सांप्रदायिक भावनाएँ भड़काने की कोशिश की थी। उसने खुलेआम गोश्त खाने और मस्जिदों को ध्वस्त करने के झूठे आरोप लगाकर धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश की। उसने कहा था, “बिस्मिल्लाह बोलूँगा और कुर्बानी दे दूँगा योगी की” और यह कहते हुए उसने हाथों से कुर्बानी देने का इशारा भी किया।

शेख अताउल ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, अवैध मस्जिदों पर कार्रवाई, और लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर अपनी नाराजगी जताई। इसके साथ ही उसने कहा, “खुलेआम भैंस का गोश्त काट रहे हैं हम लोग। खुलेआम अजान चल रहा है। जाओ योगी… सु#$@र के जने के पास.. जो मस्जिद से माइक उतारता है। उसकी अम्मी ने शादी किया है, मुसलमान से… बोलता है मुसलमानों को भगाओ यहाँ से.. सामने आएगा तो बिल्मिल्लाह बोलके #$% दूँगा।”

हर्षा हत्याकांड के गवाह को धमकी, कहा- कोर्ट मत जाना: हिजाब के विरोध में लिखने पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने चाकू से गोदकर मार डाला था, NIA कर रही है जाँच

कर्नाटक के शिवमोगा जिले में बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा हिंदू की हत्या का मामला फिर चर्चा में है। हाल ही में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की कोर्ट में गवाही देने वाले एक गवाह को धमकी देने का मामला सामने आया है। इस मामले में शिवमोगा के तुंगानगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये गवाह उस पेट्रोल पंप पर काम करता था, जहाँ हर्षा हत्याकांड के बाद हत्यारे गाड़ी में ईंधन डलवाने गए थे। NIA ने जाँच के बाद उस पेट्रोल पंप कर्मचारी को सरकारी गवाह बनाया था, जिसे अब धमकाने की कोशिश की गई। आरोप है कि एक अज्ञात व्यक्ति ने इस गवाह को गवाही न देने की धमकी दी।

धमकी के बावजूद युवक ने दी गवाही

बताया जा रहा है कि पेट्रोल पंप पर काम करने वाला यह युवक अब दूसरी नौकरी कर रहा है। कुछ दिन पहले एक व्यक्ति स्कूटर से पेट्रोल पंप पर आया और गवाह की जानकारी माँगी। पंप कर्मचारियों से कहा गया कि गवाह को कोर्ट में पेश होने से मना कर दें। हालाँकि 12 दिसंबर 2024 को गवाह ने एनआईए कोर्ट में गवाही दी। इसके बाद उन्होंने धमकी की जानकारी पुलिस को की। कोर्ट के निर्देश पर तुंगानगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि गवाह की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है और मामले की जाँच जारी है।

कर्नाटक के तत्कालीन सीएम ने दिलाया था न्याय का भरोसा

बता दें कि हर्षा को हिंदुत्व विचारधारा से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए जाना जाता था। साल 2022 में उस समय कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे बासवराज बोम्मई ने इस हत्या को साजिश करार दिया था।

एक इंटरव्यू में तत्कालीन सीएम बासवराज बोम्मई ने कहा था, “हर्षा, जिसे हर्षा हिंदू के नाम से भी जाना जाता था। वो एक कार्यकर्ता था। वो हर तरह के धार्मिक कार्यक्रमों में सबसे आगे रहता था। उसने हाल ही में हिंदुओं के कई अहम मामलों को उठाया था, जिससे कई लोग काफी चिढ़े हुए थे। कई स्थानीय लोग उसके खिलाफ थे। ये हत्या बहुत ही भयानक थी। ये हत्या से बढ़कर है। ये हार्डकोर दुश्मनी है, जिसे एक छोटे से लड़के पर दिखाया गया है। उसकी हत्या पीछे का सबसे बड़ा कारण यह था कि वो एक हिंदू एक्टिविस्ट था और बहुत ही मुखर तरीके से अपनी आवाज को उठाता था।”

फरवरी 2022 में की गई थी हर्षा की हत्या

गौरतलब है कि कर्नाटक के शिवमोगा जिले 26 साल के बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की रविवार (20 फरवरी 2022) को चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि हर्षा ने फेसबुक प्रोफाइल पर हिजाब के ख़िलाफ़ और भगवा शॉल के समर्थन में पोस्ट लिखी थी, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में कई कट्टरपंथी मुस्लिमों को गिरफ्तार किया गया था, जिनकी पहचान रियाज, नदीम, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ, अफान (रिहान) के तौर पर हुई थी। इस हत्याकांड में कासिफ मुख्य आरोपित है।

संभल में पुलिस पर हमला करने जिस इलाके से आए थे मुस्लिम उपद्रवी वहाँ भी एक बंद मंदिर मिला, भीतर में विराजमान थे हनुमान जी और राधा-कृष्ण: प्रशासन 22 कुएँ की खोज में लगा

उत्तर प्रदेश के संभल के खग्गू सराय में 46 साल से बंद पड़े कार्तिकेश्वर महादेव मंदिर के खुलने के बाद एक और सालों से बंद पड़ा हिंदू मंदिर मिला है। ये मंदिर हयात नगर थानाक्षेत्र के सरायतरीन इलाके में मिला। अवैध कब्जे हटाने के बीच पुलिस की नजर इस पर पड़ी। पुलिस प्रशासन ने फौरन इसका ताला खुलवाया और पाया कि अंदर राधा-कृष्ण और हनुमान जी की मूर्तियाँ स्थापित थीं।

प्रशासन ने इस मंदिर को भी साफ करवाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर काफी समय से इसलिए बंद था क्योंकि पूरा इलाका मुस्लिम बाहुल्य है। पहले इलाके में 30 से 40 हिंदू परिवार रहते थे जो कि दंगे के बाद धीरे-धीरे पलायन कर गए।

मालूम हो कि जिस हयातनगर (सरायतरीन) में यह बंद पड़ा मंदिर मिला है उस जगह की चर्चा संभल हिंसा के बाद भी थी। दरअसल, सामने आया था कि हिंसा में इस इलाके के युवक भी शामिल थे। अब दोबारा से बंद पड़े मंदिर के मिलने के कारण इस इलाके की बात हो रही है।

संभल में मिला एक और मंदिर

सामने आई तस्वीर में देख सकते हैं कि मंदिर के आसपास घनी बस्ती है और मंदिर की दीवारें देखकर ही पता चल रहा है कि सालों से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। हालाँकि, मालूम हो कि इस मंदिर के आसपास किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं मिला है जैसा कि कार्तिकेश्वर मंदिर के पास मिला था।

खग्गू सराय में मिले मंदिर के पास अवैध कब्जे को तो मुस्लिम परिवार छोड़ने को तैयार हो गया है और प्रशासन से बातचीत के बाद खुद अतिक्रमण हटा रहा है। लेकिन, अब ये खग्गू सराय इलाके में मिल रहे कुओं के कारण सुर्खियों में है।

जामा मास्जिद के पास मिला एक और कुआँ

बीते दिनों इसी मंदिर को खुलवाने के बाद एक पास में मिले कुएँ की खुदाई भी हुई थी जिसमें से हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ मिली थीं। इस खुदाई के बाद प्रशासन को एक और कुएँ का पता चला। ये कुआँ मस्जिद के बिलकुल दरवाजे के किनारे पर पाटा गया था। प्रशासन इसकी भी खुदाई करवा रहा है। मौके पर पुलिस फोर्स तैनात है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कुआँ नगर पालिका ने ही बंद करवाया था। अब प्रशासन मंदिर के पास बने कुएँ की तरह इसकी खुदाई भी कराएगा।

कुछ रिपोर्ट्स ऐसी भी सामने आई हैं जिसमें जिलाधिकारी डॉक्टर राजेंद्र पैंसिया के हवाले से बताया गया कि संभल में 68 तीर्थ और 21 कूप और 52 सराय और दर्जनों सरोवर होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया कि इलाके में अवैध कब्जा होने के बाद ये सारी चीजें विलुप्त हो गईं। लेकिन अब दोबारा प्रशासन के प्रयासों से संभल अपने वास्तविक रूप में लौट आएगा।

संभल का विवाद

गौरतलब है कि संभल में 24 नवंबर को जामा मस्जिद का सर्वे करने निकली टीम को रोकने के लिए कई इस्लामी कट्टरपंथी सड़कों पर उतर आए थे। इसके बाद इलाके में पथराव से लेकर गोलीबारी तक हुई थी। कुछ ही दिन बाद ये इलाका बिजली चोरी करने के कारण खबरों में आया। प्रशासन ने अपनी कार्रवाई शुरू की और इलाके में बंद पड़े मंदिरों का मामला सामने आया। इसके साथ ही ये भी पता चला कि कैसे 46 साल पहले दंगे के दौरान हिंदुओं को निशाना बनाया गया और उसके बाद तमाम हिंदू पलायन कर गए।

बांग्लादेश की कोर्ट में हमला, मौत की धमकियाँ… फिर भी डटे हुए है संत चिन्मय दास के वकील: बताया- हिंदुओं पर हमले के 1000+ मामले, इलाज के लिए आए हैं भारत

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले के 1000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। यह जानकारी बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रबींद्र घोष ने दी है। वे बांग्लादेश माइनॉरिटी वॉच के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं।

इस्कॉन के संत चिन्मय दास की पैरवी को लेकर उन पर बांग्लादेश की कोर्ट में हमला भी हो चुका है। उन्हें लगातार मौत की धमकी दी जा रही है। वे इलाज के लिए 15 दिसंबर 2024 की रात भारत पहुँचे।

रबींद्र घोष ने बताया कि वह डॉक्टरी जाँच के लिए कोलकाता के पास बैरकपुर आए हैं, जहाँ वह अपने बेटे राहुल के घर ठहरे हुए हैं। बांग्लादेश में चिन्मय दास की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान चटगाँव की कोर्ट में वकीलों के ग्रुप ने उनपर हमला कर दिया था। उन्होंने न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में बताया कि उनके पास अल्पसंख्यकों पर हमलों के 1,000 से अधिक मामले आ चुके हैं, और वो सभी पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ेंगे।

चिन्मय दास पर झूठे आरोप लगाकर की गई गिरफ्तारी

74 वर्षीय वकील रबींद्र घोष ने बताया कि बांग्लादेश के ‘संमिलित सनातनी जागरण जोते’ के प्रवक्ता ISKCON के संत चिन्मोय कृष्ण दास को नवंबर 2024 में ढाका एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ देशद्रोह और अन्य झूठे आरोप लगाए गए हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और कट्टरपंथियों ने उन्हें इसलिए निशाना बनाया, क्योंकि वह हिंदू समुदाय को संगठित कर रहे थे और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर आवाज उठा रहे थे।

घोष ने दावा किया कि उन्हें दास का केस लड़ने के बाद से जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। धमकी भरे फोन और मैसेज के बावजूद उन्होंने कहा, “मौत तो एक दिन आनी ही है, लेकिन मैं अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रखूँगा।”

घोष ने चटगाँव कोर्ट में अपने साथ हुए दुर्व्यवहार का जिक्र करते हुए बताया कि लगभग 40 वकीलों के ग्रुप ने उन पर हमले की कोशिश की। उन्होंने कहा, “वे नहीं चाहते कि कोई वकील दास का केस लड़े। हिंदू वकीलों पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं, ताकि वे भी पीछे हट जाएँ।” घोष ने बताया कि स्थानीय पुलिस ने उस समय उन्हें बचाया, लेकिन बांग्लादेश में हिंदू वकीलों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। रबींद्र घोष ने बताया कि रेप, जमीनों पर कब्जे, गैंगरेप जैसे 1000 से अधिक मामले उनके सामने आ चुके हैं। वो सभी पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।

हिंदुओं को बना दिया गया दोयम दर्जे का नागरिक

वकील रबींद्र घोष ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिंदुओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का बांग्लादेश उस समय लड़े गए आदर्शों के खिलाफ जा रहा है। उन्होंने कहा, “मुक्ति संग्राम समानता और न्याय के लिए था, लेकिन आज हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है।” घोष ने कहा कि मुक्ति संग्राम में हिंदू और मुसलमान दोनों ने मिलकर लड़ाई लड़ी थी, लेकिन आज हिंदुओं को उनके योगदान के बावजूद नजरअंदाज किया जा रहा है।

रबींद्र घोष ने बांग्लादेश में मुहम्मद युनुस की अगुवाई वाली मौजूदा अंतरिम सरकार पर अल्पसंख्यकों की स्थिति और बिगाड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पहले भी अल्पसंख्यकों पर हमले होते थे, लेकिन अब यह स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है।” रबींद्र घोष ने यह भी बताया कि दास की गिरफ्तारी का कारण उनकी बड़ी सार्वजनिक रैलियाँ थीं, जो युनुस सरकार को असहज कर रही थीं। उन्होंने कहा, “कट्टरपंथी और सरकार, दोनों ही दास को चुप कराना चाहते हैं।”

घोष ने कहा कि वह भारत में कुछ दिन इलाज कराएँगे और फिर वापस बांग्लादेश लौटकर चिन्मय दास और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने जीवनभर मुसलमानों और हिंदुओं दोनों के लिए अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। धर्म कोई मायने नहीं रखता, न्याय मायने रखता है।”

मस्जिद कमेटी के झगड़े में मुस्लिम ने मौलवी को मारा, ‘हिंदू ने हत्या कर दी’ की अफवाह उड़ा संभल में तोड़े सूरजकुंड और मानस मंदिर: 5 हिंदुओं की हत्या, 7 दिन कर्फ्यू

16 दिसंबर 2024 को उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल में दंगों का इतिहास गिनाते हुए कहा था कि इनमें 209 हिंदुओं की हत्या की गई। दंगों में हिंदुओं की मौत के इस आँकड़े की पुष्टि संभल जिला प्रशासन की इंटरनल रिपोर्ट भी करती है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 1976 में भड़के दंगों में 5 हिंदुओं की हत्या की गई थी। उस समय हालात पर काबू पाने के लिए 7 दिनों तक कर्फ्यू लगाना पड़ा था। दंगे हिंदू व्यक्ति द्वारा मौलवी की हत्या की अफवाह फैलाकर भड़काई गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार 29 फरवरी 1976 को मुस्लिमों ने अफवाह उड़ाई कि पेतिया गाँव के अर्धविक्षिप्त राजकुमार सैनी ने हमारे मौलवी को मार दिया है, जबकि मस्जिद कमेटी के झगड़े में एक मुस्लिम ने ही मौलवी को मारा था। इसके बाद मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने मंजर शफी और अताउल्ला ततारी की अगुवाई में सूरजकुंड और मानस मंदिर को तोड़ दिया। इसके बाद सरथल चौकी पर मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने किशनलाल का घर जलाने की कोशिश की। हिंदुओं के प्रतिरोध के बाद वे पत्थरबाजी कर भाग खड़े हुए। इसी दौरान सोतीपुरा के हरि सिंह और कोटीपूर्वी मोहल्ले के राकेश वैश्य की हत्या की गई।

इसके बाद 24 अप्रैल 1976 को कोटपूर्वी मोहल्ले में कल्लू के घर भयानक विस्फोट हुआ। इलाज के दौरान उसके बेटे सलाम की मौत हो गई। इसकी प्रतिक्रिया में सरायतरीन के मोहल्ला लाल मस्जिद के पास बुजुर्ग कामता प्रसाद की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा जयचंद रस्तोगी की गोली मारकर हत्या की गई। इसके अलावा एक अन्य हिंदू की हत्या की गई थी, जिसके नाम का उल्लेख इस रिपोर्ट में नहीं है। रिपोर्ट बताती है कि इन मामलों में जब दोषी 20-22 मुस्लिमों को गिरफ्तार किया गया तो संतुलन बनाने के लिए इतने ही ‘निर्दोष’ हिंदुओं को भी प्रशासन ने गिरफ्तार किया था।

ये दंगे जब हुए थे उसी समय शफीकुर्रहमान बर्क भी उभर रहा था। संभल में 1978 में जो सबसे भीषण दंगा हुआ था, उसमें बर्क की खासी भूमिका थी। 1976 के दंगों के दौरान मुस्लिम दंगाइयों की अगुवाई करने वाला मंजर शफी भी 1978 के दंगों के समय सक्रिय था। उस समय इसने एक हिंदू शिक्षक की बेटी और पत्नी को अगवा कर लिया था। शिक्षक की बेटी को रेप के बाद छोड़ा गया था, जबकि उनकी पत्नी को हिंदुओं ने बचा लिया था। इस घटना के बारे में हम अपनी पिछली रिपोर्ट में बता चुके हैं। हम बता चुके हैं कि कैसे 1978 के दंगों के बाद ह​रिहर मंदिर में शफीकुर्रहमान बर्क ने हिंदुओं का प्रवेश बंद करवाया था।

गौरतलब है कि प्रशासन ने यह रिपोर्ट संभल में हुए दंगों पर तैयार की है। इससे पता चलता है कि दंगों के कारण संभल में धीरे-धीरे हिंदुओं की आबादी कम होती जा रही है। देश की स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी जो आज घटकर 15-20% रह गई है। उस समय मुस्लिम 55% थे। आज वे बढ़कर 80-85 प्रतिशत हो गए हैं।

जिस आतंकी ने कहा था ‘मोदी को मार देंगे’, वह अस्पताल के बेड पर मर गया: कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट का दोषी था बाशा, उसके ही साथी की जेल में ‘मालिश’ करवाती थी DMK सरकार

अल उम्मा नाम के प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के संस्थापक और कोयंबटूर ब्लास्ट केस के दोषी एस. ए. बाशा की सोमवार (16 दिसंबर 2024) को मौत हो गई। उसकी उम्र 83 साल थी और बढ़ती उम्र की वजह से वो लंबे समय से बीमार चल रहा था। बता दें कि कोयंबटूर ब्लास्ट केस में बाशा और अल उम्मा के 16 अन्य सदस्यों को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट केस में उम्रकैद की सजा काट रहे एस. ए. बाशा को अक्टूबर 2023 में इलाज के लिए अस्थायी पैरोल दी गई थी, जिसे सरकार ने उसके स्वास्थ्य के आधार पर बढ़ा दिया था। वह चेन्नई के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहा था।

बता दें कि 14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर के आर.एस. पुरम और शहर के अन्य हिस्सों में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 58 लोगों की जान गई और 231 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह हमला उस समय हुआ जब भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी आर.एस. पुरम में चुनाव प्रचार के लिए पहुँचने वाले थे।

पुलिस ने इस मामले में 166 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें बाशा भी शामिल था। स्पेशल कोर्ट ने ने 158 लोगों को दोषी ठहराया और 43 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। बाद में 41 लोगों ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की। हाई कोर्ट ने इनमें से दो नाबालिगों को रिहा कर दिया, जबकि 17 लोगों को उम्रकैद और 22 को बरी कर दिया।

पीएम मोदी को दी थी जान से मारने की धमकी, उस समय थे गुजरात के सीएम

बता दें कि प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन अल-उम्मा के अध्यक्ष एसए बाशा ने जुलाई 2003 में कोयंबटूर का दौरा करने पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जान से मारने की धमकी भी दी थी। बाशा और आठ अन्य लोगों ने यह धमकी उस समय खुले आम दी थी जब हिंदू मुन्नानी नेता की हत्या से संबंधित एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पत्रकार कोयंबटूर अदालत परिसर में इन मुजरिमों से बात कर रहे थे। बाशा ने कहा था कि अगर गुजरात के सीएम मोदी कोयंबटूर आएँगे, तो उनकी हत्या कर दी जाएगी।

बाशा के साथी महदानी की जेल में मालिश कराती थी डीएमके सरकार

यहाँ ये बताना जरूरी है कि बाशा और उसके साथियों पर डीएमके सरकार कितनी मेहरबान रहती थी। दरअसल, 24 जुलाई 2006 को इंडियन एक्सप्रेस में एक समाचार प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था –“कोयंबटूर आतंकी घटनाओं के आरोपी के लिए द्रमुक ने जेल को स्पा में बदला”। समाचार में बताया गया था, “अब्दुल नासिर महदानी की आयुर्वेदिक मालिश का खर्च वहन सरकार कर रही थी और उसकी बीवी के खिलाफ गिरफ्तारी का वॉरंट होने के बावजूद वह महदानी से बेरोकटोक मिल सकती थी। इन हालात में आतंक पर नकेल कसने की जरूरत पर सख्त बातें करने वालों पर हँसा जा सकता है। महदानी 1998 के कोयंबटूर सीरियल विस्फोटों का मुख्य आरोपी है, जिसमें बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी को निशाना बनाने की कोशिश करते हुए 58 लोगों की हत्या कर दी गई थी।”

इसमें आगे लिखा था, “जब से करुणानिधि ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है, तब से यहाँ उच्च सुरक्षा वाली जेल में रखे गए महदानी और अल उम्मा के अन्य 166 कैदियों के बीच माहौल खुशनुमा है। इनमें से ज्यादातर को कोयंबटूर विस्फोटों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। करुणानिधि की बदौलत, 10 मालिश वालों और चार वरिष्ठ आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक टीम ने 2001 से जेल के अस्पताल में रखे गए महदानी पर ‘उच्च गुणवत्ता वाला उपचार’ शुरू किया है …”

बिजली की तारें, जमाल संस का बोर्ड, अवैध निर्माण… अब वाराणसी के मुस्लिम बहुल इलाके में मिला 40 साल से बंद मंदिर, भीतर मलबा और मिट्टी: हिंदू संगठन ने CM योगी को लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश के संभल के बाद अब वाराणसी के मदनपुरा इलाके में 40 साल से बंद पड़ा एक मंदिर सामने आया है, जिसे फिर से खोलने की माँग उठ रही है। इस मंदिर की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए मिली, जिसके बाद सनातन रक्षक दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे और मंदिर को खुलवाने की कवायद तेज हो गई। बताया जा रहा है कि यह मंदिर करीब 150-250 साल पुराना है और इसके अंदर मलबा भरा हुआ है। इस मंदिर के बारे में स्कंद पुराण के काशीखंड में जिक्र है, साथ ही सिद्धतीर्थ कूप का भी जिक्र है, जो इस मंदिर के पास है।

कैसे सामने आया मंदिर का मामला

सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट के जरिए यह जानकारी सामने आई कि वाराणसी के मुस्लिम बहुल इलाके मदनपुरा में एक बंद मंदिर है। सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा को जब इस बारे में पता चला तो वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुँचे।

मंदिर को देखने पर पाया गया कि इसमें मलबा और मिट्टी भरी हुई है और लंबे समय से पूजा-अर्चना बंद है। इस मंदिर के अंदर मलबे में देव-विग्रह भी दबे हो सकते हैं। इस मंदिर के आसपास भयंकर तरीके से अतिक्रमण हुआ है। बिजली के तार लटके हैं। घरों के छज्जे मंदिर की दीवार से सटे हुए हैं। ये मंदिर करीब 40 फिट ऊँचा है और बीते 40 साल से बंद है। वहीं, मंदिर से सटे घर के गेट पर जमाल सन्स का बोर्ड भी लगा हुआ है।

मंदिर से सटाकर बने घर पर जमाल सन्स का बोर्ड, तारों के फैले जाल और अतिक्रमण को बयाँ करती तस्वीर (फोटो साभार: भास्कर)

सनातन रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा, “यह मंदिर सनातन संस्कृति का प्रतीक है और इसे खोलने की पहल पूरी तरह शांतिपूर्ण है। हमने प्रशासन को इसकी जानकारी दी है और उनका पूरा सहयोग मिल रहा है। जल्द ही मंदिर की सफाई कराई जाएगी और पारंपरिक पूजा-अर्चना शुरू होगी। यह किसी प्रकार के विवाद का मुद्दा नहीं है बल्कि सनातन धर्म के गौरव की पुनः स्थापना का प्रयास है।”

अजय शर्मा का कहना है कि यह मंदिर भगवान शिव का हो सकता है। उन्होंने बताया कि नगर निगम और प्रशासन से इस मंदिर के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है ताकि इसे फिर से खोलकर साफ-सफाई के बाद पूजा-अर्चना शुरू की जा सके। उन्होंने मेयर और स्थानीय विधायकों से भी इस बारे में बातचीत की है। इस बारे में सीएम योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखा गया है।

क्या कर रही है पुलिस और प्रशासन?

मंदिर खुलवाने की माँग के बाद पुलिस और प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। दशाश्वमेध थाना प्रभारी प्रमोद कुमार ने बताया कि यह मंदिर काफी समय से बंद है और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात है। स्थानीय लोगों से बातचीत की जा रही है ताकि मंदिर को खोलने को लेकर किसी प्रकार का विवाद ना हो।

डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल ने कहा कि मंदिर सार्वजनिक स्थल पर है, और इसे फिर से खोलने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बातचीत की जा रही है। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति में इस मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाएगा।

स्कंद पुराण के काशीखंड में मंदिर का जिक्र

मदनपुरा में मिले इस मंदिर का जिक्र स्कंद महापुराण के चौथे खंड ‘काशीखंड‘ में आता है। काशीखंड में काशी की महिमा, उसके आधिदैविक स्वरूप और प्राचीन मंदिरों का विस्तार से वर्णन है। इसमें 100 अध्याय और 11,000 से अधिक श्लोक हैं, जो काशी के तत्कालीन भूगोल, परंपराओं, देवी-देवताओं और मंदिरों की कहानियों पर प्रकाश डालते हैं।

काशीखंड में ‘सिद्धतीर्थ कूप’ का भी उल्लेख है, जिसका अर्थ है एक ऐसा पवित्र कुआँ, जो सिद्धि प्राप्त करने का स्थान माना गया है। मंदिर के पास में ही सिद्धतीर्थ कूप भी है। स्कंद पुराण का काशीखंड वाराणसी की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को सिद्ध करता है। शिवजी के महत्व और काशी में उनके वास की कहानियाँ इस ग्रंथ में दी गई हैं।

‘ला इलाहा इल्लल्लाह = अल्लाह के अलावा कोई दूसरा भगवान नहीं’: जामिया मिलिया इस्लामिया में फिर लगा नारा, प्रदर्शन करने वाले वामपंथी+कॉन्ग्रेसी छात्र

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में एक बार फिर से नारेबाजी की घटना सामने आई है। ये नारेबाजी सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों की 5वीं बरसी के एक दिन बाद कैंपस में सुनाई पड़ी। 15 दिसंबर 2019 को भी इसी तरह की पहले नारेबाजी हुई थी उसके बाद कैंपस में प्रदर्शन और बाद में हिंसा देखी गई थी।

ऑर्गनाइजर की पत्रकार सुभुही विश्वकर्मा के अकॉउंट से शेयर की गई वीडियोज में देख सकते हैं कि एक बार फिर से वहाँ- “तेरा-मेरा रिश्ता क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह और हम क्या चाहते? आजादी” जैसे नारे सुनाई पड़े।

पत्रकार ने पूछा कि क्या ऐसी नारेबाजी एक केंद्र द्वारा फंड दिए जा रहे इंस्टीट्यूट में होनी चाहिए? उन्होंने बताया कि ये प्रदर्शनकारी छात्र AISA और NSUI के हैं। क्या इसे देख समझा जाए कि आगे कोई ‘शाहीन बाग’ भी होगा।

ऑर्गनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार (15 दिसंबर 2024) को प्रशासन ने रखरखाव का हवाला देते हुए कक्षाएँ निलंबित कर दी थीं और दोपहर 1 बजे से कैंटीन व लाइब्रेरी भी बंद थी। मगर छात्र ये सूचना पाकर प्रशासन पर शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का इल्जाम लगाने लगे।

कुछ वीडियोज भी सामने आई हैं जिसमें ‘दिल्ली पुलिस वापस जाओ’ जैसे नारे लगाते हुए भी छात्रों को दिखाया गया है। इसके अलावा AISA की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है जिसमें कहा गया, “15 दिसंबर 2019 को दिल्ली पुलिस ने हमारे साथियों को घायल कर दिया था, कैंपस में तोड़फोड़ की थी, हमारे साथ आतंकियों जैसा व्यवहार किया था और अब हमें उस भयावह दिन को याद करने से भी रोका जा रहा है।”

इन वीडियो को देखने के बाद आम लोग माँग करने लगे हैं कि अगर सरकार द्वारा दिए फंड से चल रहे संस्थान में यही सब होना है तो इस संस्थान को ही बंद कर दिया जाना चाहिए।

प्रियंका-राहुल के वायनाड में जनजातीय युवक को मुस्लिम कार वाले ने 500 मीटर तक घसीटा, ऑटोरिक्शा में बुजुर्ग महिला का शव: गाँधी परिवार फिर भी चुप, रोने-धोने का नाटक सेलेक्टिव क्यों?

कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी की हालिया लोकसभा सीट वायनाड, अब उनकी बहन की लोकसभा सीट है। भाई के बाद बहन को वायनाड ने संसद भेजा है, लेकिन उसी वायनाड की हालत खराब है। जनजातीय लोगों पर अत्याचार हो रहा है और प्रशासन भी उनकी अनदेखी कर रही है। वायनाड से हाल ही में दो दर्दनाक घटनाएँ सामने आई हैं, जिन्होंने प्रशासन और राजनीति दोनों की पोल खोल दी है। पहली घटना में 76 वर्षीय चूंडम्मा का शव एंबुलेंस न मिलने की वजह से ऑटोरिक्शा में ले जाया गया। शव का कुछ हिस्सा ऑटोरिक्शा से बाहर लटकता दिखा, जो प्रशासन की बदइंतजामी का शर्मनाक उदाहरण है। दूसरी घटना में 49 वर्षीय जनजातीय युवक माथन को मुस्लिम युवकों के ग्रुप ने कार से आधे किलोमीटर तक घसीटा, जिससे उनके शरीर पर गंभीर चोटें आईं।

जनजातीय बुजुर्ग महिला के शव को ऑटोरिक्शा में ले गए परिजन

पहली खबर में वॉयनाड की 76 वर्षीय वृद्ध महिला चूंडम्मा के शव को अंतिम संस्कार के लिए ऑटोरिक्शा पर ले जाना पड़ा। घटना सोमवार (16 दिसंबर 2024) को तब हुई जब चूंडम्मा का निधन उनके घर पर हुआ और परिवार ने शव को श्मशान ले जाने के लिए जनजातीय विकास विभाग से एंबुलेंस माँगा, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। मजबूर होकर परिजनों ने ऑटोरिक्शा बुलाया और शव को उसमें ले जाया गया। शव को एक चादर में लपेटा गया था और अंतिम यात्रा में शव का कुछ हिस्सा ऑटोरिक्शा से बाहर लटकता हुआ दिखाई दिया।

इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया तथा समाचार चैनलों पर तेजी से वायरल हो गए। इसके बाद कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जनजातीय विकास विभाग के दफ्तर के सामने प्रदर्शन किया। कॉन्ग्रेस ने प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। हालाँकि, अधिकारियों ने इस घटना के लिए स्थानीय पदाधिकारी को दोषी ठहराया, जिन्होंने समय पर विभाग को एंबुलेंस की आवश्यकता के बारे में सूचित नहीं किया। उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया है। वैसे, ये इलाका केरल सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्री ओ आर केलू का है, जिन्हें इस घटना से कोई फर्क नहीं पड़ा।

जनजातीय व्यक्ति को कार से लटकाकर आधे किमी दूर तक घसीटा

वहीं, वायनाड के मंनथवडी क्षेत्र में रविवार (15 दिसंबर 2024) को एक अन्य घटना हुई, जहाँ 49 वर्षीय जनजातीय व्यक्ति माथन को कार से आधे किलोमीटर तक घसीटा गया। हमलावरों ने माथन पर उस समय हमला किया जब वह अपने भाई वीनू के साथ एक दुकान पर सामान खरीदने गए थे। आरोपितों की पहचान मोहम्मद अर्शिद, अभिराम, विष्णु और नावील कमार के रूप में हुई है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल कार (मारुति सेलेरियो, KL 52 H 8733) को जब्त कर लिया है। ये कार मलप्पुरम जिले के कुट्टीपुरम निवासी मोहम्मद रियास के नाम पर है।

हमलावरों ने पहले पत्थरबाजी की और फिर माथन को कार से बाँधकर घसीटा। माथन के पैर और हाथों पर गहरे जख्म हुए हैं। उनका इलाज वायनाड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनके पैरों का मांस पूरी तरह से उधड़ चुका है और उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

बीजेपी ने उठाए सेलेक्टिव अप्रोच पर सवाल

इन दोनों घटनाओं को लेकर बीजेपी के केरल अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने वायनाड की स्थिति और कॉन्ग्रेस के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने ट्वीट किया, “केरल के नकली बौद्धिक उत्तर भारत की घटनाओं पर शोर मचाते हैं, लेकिन वायनाड के मंथवडी में एक जनजातीय युवक को कार से घसीटे जाने की घटना पर चुप्पी साध लेते हैं। यह सेलेक्टिव गुस्सा क्यों? क्या यह इसलिए है क्योंकि यह घटना आपके नैरेटिव को सूट नहीं करती?” उन्होंने प्रियंका के साथ ही मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को भी मेंशन किया।

उन्होंने साफ तौर पर प्रियंका गाँधी और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर निशाना साधते हुए पूछा कि इन संवेदनशील घटनाओं पर आखिर क्यों चुप्पी साध ली गई है। सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस और वामपंथी सरकार वायनाड के जनजातीय समाज के मुद्दों को अनदेखा कर रही हैं।

राहुल और प्रियंका का सेलेक्टिव अप्रोच कितना सही?

प्रियंका गाँधी वाड्रा के लोकसभा क्षेत्र वायनाड की ये दोनों घटनाएँ केरल की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। एक ओर चूंडम्मा का शव ऑटोरिक्शा पर ले जाना सरकार और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही का उदाहरण है। दूसरी ओर, माथन के साथ हुई बर्बरता यह दिखाती है कि किस प्रकार जनजातीय समुदाय आज भी शोषण और हिंसा का शिकार हो रहे हैं।

यह विडंबना है कि वायनाड जैसे संसदीय क्षेत्र, जहाँ कभी राहुल गाँधी सांसद थे और अब उनकी बहन प्रियंका गाँधी प्रतिनिधित्व कर रही हैं, वहाँ जनजातीय समुदाय के लोग इस प्रकार के अपमानजनक हालात झेलने को मजबूर हैं। कॉन्ग्रेस द्वारा पहली घटना पर प्रदर्शन करना और दूसरी घटना पर चुप्पी साध लेना वोटबैंक की राजनीति को स्पष्ट करता है। अगर देखें, तो जहाँ आपके राजनीतिक फायदे की बात होती है, तो कहीं आप पैदल (किसान आंदोलन, ट्रैफिक) जाने को भी तैयार हो जाते हैं। तो कहीं महीनों बाद किसी मुद्दे को जिंदा करने के लिए हाथरस पहुँच जाते हैं। लेकिन जिस जगह से अब आपकी बहन आपकी जगह सांसद चुनी जा चुकी हैं, तब आप (राहुल-प्रियंका) इतनी बड़ी घटनाओं पर भी चुप्पी साध लेते हैं।

वैसे, वायनाड के जनजातीय समुदाय की उपेक्षा कोई नई बात नहीं है। वर्षों से उनकी समस्याएँ चाहे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो, शिक्षा में पिछड़ापन हो, या फिर प्रशासनिक उपेक्षा – इनका समाधान करने के बजाए राजनीतिक पार्टियाँ खासकर केरल में बारी-बारी से सत्ता सुख भोग रहीं कॉन्ग्रेस और लेफ्ट पार्टियाँ सिर्फ चुनावों के समय सक्रिय दिखाई देती हैं। माथन के साथ हुई घटना में आरोपियों का मुस्लिम होना और कॉन्ग्रेस का इस मुद्दे पर मौन रहना सवाल खड़े करता है कि क्या ये फायदा देखकर मुँह खोलने वाली राजनीति नहीं है?

‘राहुल भाई आप भी आइए, सवालों का जवाब दीजिए’: राहुल कंवल ने भरे मंच से बताया कितने सालों से राहुल गाँधी की प्रतीक्षा कर रहा इंडिया टुडे, कॉन्ग्रेस ने किया ब्लैकलिस्ट

कॉन्ग्रेस पार्टी ने रविवार (15 दिसंबर 2024) को इंडिया टुडे के न्यूज़ डायरेक्टर राहुल कंवल को ब्लैकलिस्ट कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में गृह मंत्री अमित शाह के साथ बातचीत के दौरान राहुल गाँधी पर की गई टिप्पणी को कॉन्ग्रेस ने “अपमानजनक” बताया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस और मीडिया के बीच खटास को उजागर किया।

सोशल मीडिया पर किया बैन का ऐलान

कॉन्ग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “कॉन्ग्रेस पार्टी हमेशा प्रेस की आज़ादी और निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करती है। लेकिन ऐसे लोग जो प्रेस कार्ड लेकर किसी राजनीतिक पार्टी के ट्रोल की तरह काम करते हैं, उनके साथ संवाद करना ज़रूरी नहीं। राहुल कंवल को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला लिया गया है। कॉन्क्लेव में उन्होंने खुद को ‘चाणक्य’ समझने वाले नेता की वाहवाही की, जिन्होंने विपक्ष के नेता के खिलाफ बेबुनियाद बातें कहीं। राहुल कंवल को माफ करने का मौका दिया गया था, लेकिन वे बार-बार वही गलती दोहरा रहे हैं। वो पत्रकारिता के नाम पर क्या कर रहे हैं, वो हमारी समझ से परे है।”

पवन खेड़ा ने एक अन्य पोस्ट में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा—गृह मंत्री का राहुल गाँधी के खिलाफ गटर स्तरीय बातें करना या कंवल का सस्ती लोकप्रियता के लिए उनका साथ देना? क्या कंवल में हिम्मत है कि वे शाह से मोदी की पत्नी या स्नूपगेट पर सवाल पूछ सकें? क्या यही है इंडिया टुडे कॉन्क्लेव, श्रीमान अरुण पुरी?”

यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने राहुल कंवल पर निशाना साधा हो। खेड़ा ने सितंबर में बताया था कि एक विवादास्पद डिबेट के बाद कंवल ने कॉन्ग्रेस नेताओं से माफी माँगी थी। हालाँकि, इस बार पार्टी का रुख सख्त है।

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में क्या हुआ?
गृह मंत्री अमित शाह के साथ इंटरव्यू में राहुल कंवल ने लोकसभा चुनाव, हालिया विधानसभा चुनाव, और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सवाल किए। अमित शाह ने राहुल गाँधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “राहुल गाँधी हार में भी अहंकारी बन जाते हैं। वह हमेशा विदेशी स्रोतों पर भरोसा करते हैं। भारत में न्यायपालिका, सतर्कता संस्थाएँ और लोकतांत्रिक तंत्र मौजूद हैं, लेकिन वह अपनी आलोचनाओं के लिए विदेशी रिपोर्ट्स का सहारा लेते हैं।”

गृह मंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस की ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर स्थिति का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, “जब कॉन्ग्रेस जीतती है, ईवीएम सही होती है। लेकिन हारते ही ईवीएम खराब हो जाती है। ये उनकी हार स्वीकार न करने की प्रवृत्ति को दिखाता है।”

कंवल ने बातचीत में जोड़ा कि राहुल गाँधी लगातार इंडिया टुडे के मंचों से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा, “हमने राहुल गाँधी को 20 सालों से आमंत्रित किया है। लेकिन वह कभी नहीं आते। ऐसा लगता है मानो वह सवालों से एलर्जी रखते हैं।” उन्होंने कहा, “राहुल भाई आप भी आइए, सवालों के जवाब दीजिए।”

पत्रकारों से कॉन्ग्रेस के टकराव का इतिहास पुराना

कॉन्ग्रेस का पत्रकारों से टकराव नया नहीं है। सितंबर 2023 में I.N.D.I. गठबंधन ने 14 टीवी एंकरों की सूची जारी कर उनके शो का बहिष्कार किया था। कॉन्ग्रेस ने इन एंकरों पर पक्षपातपूर्ण खबरें फैलाने का आरोप लगाया था। यही नहीं, नवंबर में राहुल गाँधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूज़18 के पत्रकार को ‘बीजेपी एजेंट’ कहा, जब उन्होंने कॉन्ग्रेस पर बीजेपी के आरोपों से जुड़े सवाल पूछे। पत्रकार को कॉन्ग्रेस समर्थकों से विरोध झेलना पड़ा।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)