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मुझे केवल मस्जिद चाहिए, पूजा स्थल ध्वस्त करने वाले हिन्दुओं को जमीन देकर पुरस्कृत किया: वामपंथन संजुक्ता बसु

करीब 500 साल पुराना अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की पॉंच जजों की पीठ ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में विवादित जमीन रामलला को सौंप दी है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश भी सरकार को दिया है।

लेकिन, एक वर्ग को यह ऐतिहासिक फ़ैसला नहीं भा रहा। इनमें एक एक नाम वामपंथी मीडिया स्तंभकार, TEDx स्पीकर और फैलो, संजुक्ता बसु का भी है। उसने ट्वीट किया है, “मैं एक हिन्दू हूँ और मुझे केवल और केवल मस्जिद चाहिए। मुझे शर्म आती है और खेद है कि मेरे साथी हिन्दुओं ने एक पूजा स्थल को ध्वस्त कर दिया और उन्हें सज़ा देने की बजाय पूरी भूमि देकर पुरस्कृत किया गया। मैं दुखी हूँ और शर्मिंदा हूँ कि हम अपने लिए कैसा भविष्य बना रहे हैं।”

अपने एक अन्य ट्वीट में संजुक्ता ने लिखा है कि आज भारतीय मुस्लिम राजनीतिक तौर पर अनाथ हो गए हैं। एक भी ऐसा नेता नहीं है, जिसने अयोध्या फ़ैसले पर अल्पसंख्यकों के अधिकार की बात की हो। किसी में इतनी हिम्मत नहीं है कि कोई सरकार से पूछ सके कि पाँच एकड़ ज़मीन कब और कहाँ मिलेगी?

ऐसे वक्त में जब ज्यादतर तबकों से इस फैसले का स्वागत हो रहा है संजुक्ता बसु की यह टिप्पणी सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश करने जैसा है।

सोशल मीडिया पर ऐसी ही भड़काऊ टिप्पणी @amitbehere यूज़र ने भी की, इसमें उन्होंने लिखा, “मैं एक हिन्दू हूँ, मुझे केवल और केवल बाबरी मस्जिद चाहिए। ऐसा नहीं होने से पता चलता है कि हम न्याय की परवाह नहीं करते।”

आतंकवाद के आगे नतमस्तक होने की बात करने वाले लोगों में केवल @amitbehere ही नहीं शामिल हैं, बल्कि पूर्वा अग्रवाल भी शामिल हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मैं एक हिन्दू हूँ, मुझे केवल बाबरी मस्जिद चाहिए। ऐसा नहीं होने से यह संदेश जाएगा कि हम भीड़ और आतंकवाद के आगे घुटने टेक देते हैं। न्याय की परवाह नहीं करते हैं।

करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन करते इमरान ने पूछा- हमारा सिद्धू किधर है, मनमोहन आ गया?

करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह के मौके पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू से मिलने के लिए बेताब दिखे। एक वीडियो सामने आया है जिसमें इमरान पूछ रहे हैं, “हमारा सिद्धू कहाँ है?”

वायरल हुए इस वीडियो में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और 87 वर्षीय कॉन्ग्रेस सांसद मनमोहन सिंह को ‘मनमोहन’ कहकर पुकारते हुए देखा जा सकता है। दरअसल, पाक पीएम अपने प्रतिनिधियों के साथ करतारपुर साहिब कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए भारतीय नेताओं और प्रतिनिधियों को पाकिस्तान में प्रवेश करने के लिए सीमा के पास एक बस में इंतजार कर रहे थे।

इस दौरान वो कहते हैं, “अच्छा, हमारा वो सिद्धू किधर है? मैं कह रहा हूँ हमारा सिद्धू…आ गया वो?” जिस पर आसपास के लोग जोर-जोर से हँसने लगते हैं। इसके बाद वीडियो में 1:23 पर इमरान खान कहते हैं कि मनमोहन आ गया? तो उसी ग्रुप में शामिल एक महिला कहती है, “उसको रोकेंगे तो….” तभी इमरान उनकी बात को पूरा करते हुए कहते हैं, “अच्छा खासा हीरो बनाएगा।” फिर वो महिला कहती है कि मनमोहन सिंह को रोकने को लेकर न्यूज चैनल बड़ी-बड़ी हेडलाइन्स बनाएँगे। सारे चैनल्स पर यही न्यूज होगी।

बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू शनिवार (नवंबर 9, 2019) को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान पहुँचे थे। जहाँ उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को सिकंदर बताया और उनकी तारीफ में जमकर कसीदे पढ़े। उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण के लिए इमरान खान का शुक्रिया किया और कहा कि इमरान ने ‘अल्लाह का काम’ किया है। सिद्धू ने अपने भाषण में यह दावा किया कि ‘उनके दोस्त’ इमरान ने यह काम (करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण) बिना कोई नफा नुकसान देखे किया है।

राम का जन्म कहाँ हुआ था?: भगवान विष्णु का जवाब बन गया सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हिस्सा

रामजन्मभूमि पर दिए गए फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का भी जिक्र किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1045 पेज के जजमेंट माना है कि वाल्मीकि रामायण की तरह ही रामचरितमानस भी हिन्दुओं के बीच काफ़ी लोकप्रिय है और इसे श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिन्दू धर्म में रामचरितमानस सबसे बड़े साहित्यों में से एक है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में मानस के बालकाण्ड में वर्णित उन चौपाइयों का जिक्र किया है, जिसे और कोई नहीं बल्कि स्वयं भगवान विष्णु ने कहा है। विष्णु द्वारा कही गई बातें सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में भी शामिल हुईं।

इससे पहले बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने अयोध्या मामले में शनिवार (नवम्बर 9, 2019) को जो फ़ैसला सुनाया, उसमें हिन्दुओं की आस्था पर मुहर लगाते हुए विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का आदेश दिया गया। इसके साथ ही ये विवाद भी ख़त्म हो गया, क्योंकि मुस्लिमों को भी मस्जिद बनाने के लिए अलग से 5 एकड़ ज़मीन दी जाएगी। फ़ैसले का मुख्य बिंदु ये रहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक ट्रस्ट बना कर तीन महीने के भीतर राम मंदिर निर्माण के लिए योजना बनाने को कहा।

अब वापस रामचरितमानस की चौपाई पर आते हैं। जब पूरे विश्व में रावण का आतंक बढ़ गया था, तब उससे न सिर्फ़ मनुष्य बल्कि देवता और ऋषि-मुनि भी भयभीत थे। ऐसे में भगवान विष्णु के अलावा उनका सहारा कौन हो सकता था। सारे देवी-देवता, ऋषि-मुनि और गन्धर्व भाग कर भगवान विष्णु के पास गए और उनसे मदद माँगी। भगवान ने भी उनके दुःख हरने का आश्वासन देते हुए कहा:

जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा॥
अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा॥
कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा॥
ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नर भूपा॥
तिन्ह कें गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई॥
नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ॥

अर्थात, भगवान विष्णु ने सभी लोगों ने कहा:

हे मुनि, सिद्ध और देवताओं के स्वामियो! डरो मत। तुम्हारे लिए मैं मनुष्य का रूप धारण करूँगा और उदार (पवित्र) सूर्यवंश में अंशों सहित मनुष्य का अवतार लूँगा। कश्यप और अदिति ने बड़ा भारी तप किया था। मैं पहले ही उनको वर दे चुका हूँ। वे ही दशरथ और कौसल्या के रूप में मनुष्यों के राजा होकर अयोध्यापुरी में प्रकट हुए हैं। उन्हीं के घर जाकर मैं रघुकुल में श्रेष्ठ चार भाइयों के रूप में अवतार लूँगा। नारद के सब वचन मैं सत्य करूँगा और अपनी पराशक्ति सहित अवतार लूँगा।

सुप्रीम कोर्ट ने तुलसीदास रचित और भगवान विष्णु द्वारा कही गई इन बातों को न सिर्फ़ अपने जजमेंट में शामिल किया है, बल्कि साथ-साथ इनका अंग्रेजी अनुवाद भी उद्धृत किया है। सुप्रीम कोर्ट ने बताया है कि किस तरह भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अयोध्या में जन्म लेने की बात कही है। इससे उनलोगों की भी पोल खुल जाती है, जो लगातार कहते हैं कि तुलसीदास ने कभी जन्मभूमि का जिक्र नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि उपर्युक्त चौपाइयाँ न सिर्फ़ ये बताते हैं कि विष्णु मानव रूप में अवतार लेंगे, बल्कि ये भी बताती हैं कि वो दशरथ और कौशल्या के यहाँ अवतरित होंगे।

बकौल सुप्रीम कोर्ट जजमेंट, इन चौपाइयों में भगवान विष्णु ने कहा है कि वो ‘किस जगह’ पर अवतरित होंगे। ‘तिन्ह के गृह’ के अर्थ हुआ ‘दशरथ और कौशल्या के घर’। अफ़सोस की बात ये है कि यही बात अब जब सुप्रीम कोर्ट कह रहा है तो चर्चा हो रही है, लेकिन ये चीजें घर-घर में मौजूद मानस में पहले से ही हैं। किसी ने अनायास इन चौपाइयों को ढूँढ कर नहीं पेश कर दिया, हजारों-लाखो लोग इसका पाठ करते हैं। फिर भी, राम मंदिर को लेकर इतने दिन विवाद की स्थिति बना कर रखी गई। ये चौपाइयाँ सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हिस्सा बन कर ऐतिहासिक नहीं हुईं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें इसीलिए अपने जजमेंट में शामिल किया क्योंकि ये ऐतिहासिक हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने बहुप्रतीक्षित फ़ैसले में कहा है कि रामचरितमानस को सं 1574-75 (विक्रम संवत 1631) में लिखा गया था। यानी बाबर के आक्रमण के बाद। सुप्रीम कोर्ट ने गुरु नानक देव के अयोध्या दौरे का भी जिक्र किया, जिसके हिसाब से यह पता चलता है कि बाबर के आक्रमण से पहले भी अयोध्या में पूजा-पाठ होता था और वो एक तीर्थस्थल था। इसी तरह स्कन्द पुराण और वाल्मीकि रामायण के श्लोकों का भी सुप्रीम कोर्ट ने जिक्र किया है, जिससे तय होता है कि राम का जन्म अयोध्या में ही हुआ था। यही सारे कारण हैं कि इस विवाद का फ़ैसला हिन्दुओं के पक्ष में आया और नवम्बर 9, 2019 का दिन इतिहास में दर्ज हो गया।

‘बिग बॉस’ से निकाल बाहर किए गए रॉबर्ट वाड्रा के जीजा, बीवी बोली- अयोध्या के कारण छोड़ा शो

कॉन्ग्रेस नेता तहसीन पूनावाला को कलर्स टीवी के लोकप्रिय रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ से निकाल बाहर किया गया है। आमतौर पर वीकेंड्स पर रविवार के दिन एलिमिनेशन किया जाता है, लेकिन तहसीन पूनावाला के मामले में ऐसा शनिवार (नवम्बर 9, 2019) के दिन ही किया गया। हालाँकि, उन्हें क्यों एलिमिनेट किया गया, इस सम्बन्ध में अलग-अलग बातें कही जा रही हैं। उन्हें एक सप्ताह पहले ही वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के रूप में शो में एंट्री दी गई थी। शो में उनकी एंट्री को काफ़ी धमाकेदार बता कर प्रचारित किया गया था।

तहसीन पूनावाला सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के जीजा हैं। रॉबर्ट वाड्रा की बहन मोनिका से तहसीन पूनावाला की शादी हुई है। इसलिए वे ‘बिग बॉस 13’ के सबसे चर्चित उम्मीदवारों में से एक थे। इस शो में कंटेस्टेंट्स को दर्शकों के वोट्स न मिलने की वजह से निकाला जाता है। मीडिया सूत्रों का कहना है कि तहसीन पूनावाला के वकीलों ने ‘बिग बॉस 13’ के प्रबंधकों को कॉल कर किसी राजनीतिक मुद्दे के सम्बन्ध में तहसीन से बात कराने को कहा था, लेकिन शो के नियम के अनुसार ऐसा नहीं किया जा सकता। इसीलिए, उन्हें निकाल बाहर किया गया।

उधर, तहसीन पूनावाला की पत्नी और रॉबर्ट वाड्रा की बहन मोनिका वाड्रा ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में अपने पति के ‘बिग बॉस 13’ से बाहर होने के बारे में बात की है। मोनिका ने कहा कि तहसीन के कुछ लीगल कमिटमेंट्स थे, जो अयोध्या मामला और ताज़ा राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े हैं, इसीलिए उन्हें शो से बाहर निकलना पड़ा। मोनिका ने दावा किया कि उनके पति को इस शो में काफ़ी प्यार और समर्थन मिला। मोनिका ने यह भी दावा किया कि उनके पति इस शो में काफ़ी पॉपुलर थे। मोनिका ने कहा कि तहसीन अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों के चलते लौट आए हैं।

मोनिका वाड्रा ने अपने पति तहसीन पूनावाला के ‘बिग बॉस’ से एलिमिनेशन को लेकर जारी किया बयान

यह भी कहा जा रहा है कि तहसीन पूनावाला दिल्ली लौटते ही अपने एलिमिनेशन पर आधिकारिक बयान जारी करेंगे। ‘बिग बॉस 13’ पहले से ही विवादित वजहों से सुर्ख़ियों में है, क्योंकि शो पर अश्लीलता फैलाने का आरोप लग चुका है। इस सम्बन्ध में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर रिपोर्ट भी तलब कर चुके हैं।

कॉन्ग्रेसी मुखपत्र को खटका ‘अयोध्या में रामलला विराजमान’, फैसले को पाकिस्तानी कोर्ट के आदेश जैसा बताया

दशकों पुराने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का ज्यादातर तबकों ने स्वागत किया है। लेकिन, एक वर्ग ऐसा भी है जिन्हें विवादित जमीन रामलला को मिलना खटक रहा है। ऐसा ही हाल कॉन्ग्रेस का भी है। एक तरफ उसके नेता फैसले का स्वागत कर रहे हैं तो दूसरी ओर उसका मुखपत्र नेशनल हेराल्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तुलना पाकिस्तानी कोर्ट के एक बेतुके फरमान से कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को रामजन्मभूमि बताते हुए पूरी राम मंदिर के निर्माण के लिए देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इस जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना हक साबित करने में विफल रहा। बावजूद इसके अदालत ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए पॉंच एकड़ जमीन मुहैया कराने का आदेश भी केंद्र सरकार को दिया है।

इस फैसले का स्वागत कॉन्ग्रेस ने भी किया। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने फैसला आने के बाद ट्वीट कर कहा, “सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ चुका है। भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस भगवान श्री राम के मंदिर के निर्माण की पक्षधर है।”

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मुद्दे पर अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट के इस फैसले का सम्मान करते हुए हम सब को आपसी सद्भाव बनाए रखना है। ये वक्त हम सभी भारतीयों के बीच बन्धुत्व,विश्वास और प्रेम का है।”

प्रियंका गाँधी ने इस फैसले पर ट्वीट करते हुए लिखा, “अयोध्या मुद्दे पर भारत की सर्वोच्च अदालत ने फैसला दिया है। सभी पक्षों, समुदायों और नागरिकों को इस फ़ैसले का सम्मान करते हुए हमारी सदियों से चली आ रही मेलजोल की संस्कृति को बनाए रखना चाहिए। हम सबको एक होकर आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करना होगा।”

लेकिन, मुखपत्र नेशनल हेराल्ड के एक लेख के जरिए इस फैसले की तुलना पाकिस्तानी कोर्ट के आदेश से की गई है। कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वैसा ही फैसला सुनाया जैसा शुरुआत से भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद चाहती रही है। फैसले से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी तौर पर वही किया है जिसकी मॉंग बीजेपी और विहिप लंबे समय से कर रही थी।

नेशनल हेराल्ड के इस लेख को लिखा है आकार पटेल ने। लेख में अपना एक अनुभव साझा करते हुए पटेल ने लिखा है कि 30 साल पहले जब वो छात्र थे, तो बोकारो में उनके यूनिवर्सिटी में इसी मुद्दे पर बोलने के लिए अरुण शौरी आए थे, जो उस समय भाजपा समर्थक थे। उन्होंने कहा था कि मुस्लिम कहीं और मस्जिद बनाए, क्योंकि यह स्थान हिन्दू के लिए पवित्र स्थान है। आकार पटेल ने लिखा कि अभी जो हुआ, वह वही बात है, सिवाय इसके कि अब इसे कानूनी कवर मिल गया है।

नेशनल हेराल्ड के इस लेख में कहा गया है कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के 65 साल पुराने एक आदेश जैसा है। लेख में कहा गया है कि 1948 में जिन्ना की मौत और 1951 में उनके उत्तराधिकारी लियाकत अली खान की हत्या के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग नेतृत्व विहीन हो गया। ऐसे हालात में गुलाम मोहम्मद गवर्नर जनरल बना। उसने 1954 में पाकिस्तान की संविधान सभा को गैरकानूनी तरीके से भंग कर दिया। इसके खिलाफ अदालत में अपील की गई। गुलाम ने जो किया वह कानून के खिलाफ होने के बावजूद अदालत ने उसके फैसले का बचाव किया। इस फैसले ने गुलाम मोहम्मद को मनमर्जी करने की छूट दे दी।

लेख में कहा गया है कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दूरगामी असर होगा। समय के साथ यह देखने को मिलेगा। लेकिन, यह तय है कि इसके नतीजे दिखाई पड़ेंगे ही। हालाँकि लेखक ने ‘उम्मीद’ जताई है कि भारत के लिए यह उतना घातक नहीं हो, जिस तरह वह फैसला पाकिस्तान के लिए साबित हुआ।

राम मंदिर पर फ़ैसले के बाद वामपंथी गैंग में सिर-फुटव्वल, चल रहा फॉलो-अनफॉलो का खेल

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आते ही हिन्दुओं की आस्था पर मुहर लग गई और साथ ही वामपंथी ब्रिगेड भी पागल हो उठा। कइयों ने राम मंदिर की जगह हॉस्पिटल-स्कूल की माँग दोहराई तो कइयों ने बाबरी मस्जिद ध्वस्त किए जाने वाली घटना को याद कर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर ही सवाल उठाए। उधर कविता कृष्णन भी इस फ़ैसले से ख़ासी नाराज़ नज़र आईं। उन्होंने बाबरी मस्जिद को ट्विटर पर अपनी कवर फोटो बना कर इस फ़ैसले का विरोध किया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि विरोध करने का उनका अधिकार कोई नहीं छीन सकता।

इस बीच वामपंथी ब्रिगेड में फुट भी पड़ गई। यूट्यूब के माध्यम से झूठ फैलाने वाले ध्रुव राठी ने एक ऐसा ट्वीट किया, जिसने कविता कृष्णन को नाराज़ कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से बौखलाईं कविता को अपनी ही गुट के किसी व्यक्ति द्वारा ऐसा ट्वीट करना जले पर नमक के समान लगा। दरअसल, ध्रुव राठी ने अपनी ट्वीट में लिखा:

“आज भारत की एकता और सेक्युलरिज़्म के लिए एक अभूतपूर्व दिन है। राम मंदिर बनेगा। मस्जिद भी बनेगा। करतारपुर साहिब कॉरिडोर खुल गया। भारत और पाकिस्तान फिर से एक-दूसरे के साथ सहयोग कर रहे हैं। अर्थात, सभी तीनों धर्मों को सम्मान मिला है। और सबसे बड़ी बात, यह दिन लोगों के लिए टीवी पर धार्मिक बहसों के ख़त्म होने का दिन हो सकता है।”

बस, फिर क्या था? कविता कृष्णन नाराज़ हो गईं कि ध्रुव ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का समर्थन कैसे कर दिया? यूट्यब पर प्रोपेगंडा फैलाने वाला ध्रुव मंदिर बनाने की बातें क्यों कर रहा है, कविता कृष्णन की नाराज़गी की श्याद यही वजह रही होगी। वामपंथियों के हिसाब से तो राम कोई थे ही नहीं, उनका अस्तित्व ही नहीं था, तो राम जन्मभूमि का सवाल कहाँ से आता है? फिर कविता ने ध्रुव को फटकार दिया। उन्हें ट्विटर पर अनफॉलो कर दिया। राठी को डाँटते हुए पूछा कि वो इतना अनभिज्ञ कैसे हो सकता है?

इसके बाद कविता कृष्णन ने आरोपों की झड़ी लगा दी। उन्होंने लिखा कि ध्रुव राठी कभी अपनी आलोचना को स्वीकार नहीं करता है। बकौल कविता कृष्णन, स्वस्थ आलोचना को नज़रअंदाज़ करने वाला ध्रुव कभी इस बात को नहीं समझता कि उसे काफ़ी कुछ सीखने की ज़रूरत है। वामपंथी गैंग के इस डिजिटल सिर-फुटव्वल का लोगों ने सोशल मीडिया पर लुत्फ़ उठाया। हालाँकि, अगले ही दिन कविता कृष्णन ने ध्रुव राठी को फिर से फॉलो कर दिया और लिखा कि ध्रुव ने उनके ट्वीट पर ध्यान दे दिया है, इसलिए वो उन्हें फिर से फॉलो कर रही हैं।

कविता कृष्णन ने लिखा कि ध्रुव राठी को उचित शिक्षा और मार्गदर्शन की ज़रूरत है, जो वो देती रहेंगी। साथ ही कविता ने ‘अधजल गगरी छलकत जाए’ कहावत का जिक्र करते हुए बताया कि वो ध्रुव से बातचीत करती रहेंगी। कविता कृष्णन ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की तुलना बाबरी ध्वस्त करने वालों से की है। उन्होंने एक कार्टून पोस्ट कर ऐसा किया।

5 जजों की पीठ में से 1045 पन्नों का फैसला किसने लिखा? कानून के जानकार भी आश्चर्य में

दशकों पुराने विवाद और 134 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (नवंबर 9, 2019) को राम मंदिर मामले पर फैसला सुना दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने एकमत से अयोध्या को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हुए पूरी जमीन रामलला विराजमान को सौंपकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। वहीं मुस्लिम पक्षकारों को मस्जिद बनाने के लिए अलग से 5 एकड़ जमीन देने का भी निर्णय सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 1045 पन्नों में अपना फैसला सुनाया। लेकिन इस बात का खुलासा नहीं किया गया कि इस फैसले को किसने लिखा। सामान्यत: जब एक पीठ द्वारा किसी विषय पर फैसला दिया जाता है, तो निर्णय को लिखने वाले न्यायाधीश का नाम इसमें दिया जाता है। लेकिन अयोध्या के फैसले को किसने लिखा है, इसका जिक्र नहीं किया गया है।

बता दें कि मामले की सुनवाई कर रहे इस संवैधानिक पीठ में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे। 1045 पेज के फैसले में 929 पेज के आगे 116 पेज परिशिष्ट के रूप में जोड़े गए हैं। 116 पृष्ठों के परिशिष्ट में यह कहा गया है कि विवादित स्थल हिंदू भक्तों की आस्था और विश्वास के अनुसार भगवान राम का जन्म स्थान है। हालाँकि इन्हें जिस जज ने लिखा है, उनका नाम नहीं बताया गया है।

इस बात को लेकर कानून के जानकार भी आश्चर्य जाहिर कर रहे हैं कि फैसला लिखने वाले जज का नाम नहीं लिखा गया है, उसे गुप्त रखा गया है। बता दें कि इससे पहले मौजूदा समय के फैसलों में ऐसा कोई वाकया नहीं रहा, जब सुप्रीम कोर्ट के किसी भी फैसला लिखने वाले जज का नाम न दिया गया हो।

राम मंदिर पर फैसले के बाद आतंकियों के निशाने पर 3 राज्य, ‘डार्क वेब’ पर चल रही प्लानिंग को किया गया डिकोड

सदियों से चले आ रहे राम जन्मभूमि मामले पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के साथ ही एक विवाद का अंत हो गया। विवाद ख़त्म होते ही आतंकी संगठन सक्रिय हो गए हैं। यही वजह है कि सरकार संदिग्ध गतिविधियों की आशंका के मद्देनज़र काफी सख्त रवैया अपना रही है।

मीडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को दस दिन पहले ही इस सम्बन्ध में सतर्क कर दिया गया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न सार्वजनिक करने की शर्त पर ने बताया कि यह खतरे की गंभीरता को दिखाता है। उन्होंने बताया कि रॉ, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) से लेकर सेना तक प्रत्येक एजेंसी इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि यह फैसला आने के बाद से ही पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी हमला होने की सम्भावना काफी अधिक है।

मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स की मानें तो आतंकवादियों के निशाने पर प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश तक हो सकते हैं। बता दें कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमले से संबंधित जानकारी और सूचनाओं के लिए ‘डार्क वेब’ की तकनीक का सहारा लिया, जिसमें सारी बातें इनक्रिपटेड थीं। कोडवर्ड के सहारे चल रही इस बातचीत को डिकोड करने में सुरक्षा एजेंसियों को ख़ासी मेहनत करनी पड़ी।

यूपी के अयोध्या में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विवादित ज़मीन को राम जन्मभूमि करार दिए जाने के बाद से ही यह पूरी कवायद चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने एतिहासिक फैसला सुनाते हुए 2010 में आए इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटकर रख दिया।

रामलला का जन्मभूमि पर हक मानते हुए कोर्ट ने मंदिर बनाए जाने की दलील के पक्ष में फैसला सुनाया तो वहीं मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए अलग से पाँच एकड़ ज़मीन देने का भी आदेश दिया गया।

2 मुस्लिम नाम, जिनको लेकर मो. कैफ ने किया राम मंदिर पर ट्वीट और हो गया Viral

सदियों से चल रहे राम मंदिर मामले पर विराम लगाते हुए देश की शीर्ष अदालत ने शनिवार (9 नवंबर) को ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया। इस फ़ैसले के तहत पाँच जजों की पीठ द्वारा पूरी ज़मीन को सर्वसम्मति से राम लला विराजमान को देने का फ़ैसला किया गया। बता दें कि इस फ़ैसले पर हर ओर से तमाम प्रतिक्रियाएँ आईं, जिसमें कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत किया गया।

इसी बीच, पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ़ ने अयोध्या फ़ैसले पर ऐसा बयान दिया है जिस पर हर भारतीय को नाज़ होना चाहिए। दरअसल, उन्होंने एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने लिखा, “ऐसा केवल भारत में ही हो सकता है। जहाँ एक जस्टिस अब्‍दुल नज़ीर सर्वसम्‍मति से लिए फ़ैसले में शामिल थे और एक केके मोहम्‍मद ने ऐतिहासिक दस्‍तावेज़ दिए। भारत की संकल्‍पना सबको शामिल करने वाली विचारधारा से बड़ी है। सभी ख़ुश रहें, मैं शांति, प्रेम और सद्भाव की दुआ करता हूँ।”

अयोध्या फ़ैसले के सन्दर्भ में किया गया कैफ़ का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर तेज़ी के साथ वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया के यूज़र्स इस ट्वीट की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं। साकेत कुमार ने ट्विटर पर लिखा, “कैफू भैया इंडिया में सिर्फ कुछ तबक़ों ने माहौल बिगाड़ दिया है वर्ना इंडिया जैसे हिंदू बहुसंख्यक देश में कैफ और जहीर खान जैसे क्रिकेटर हीरो के श्रेणी में आते हैं और शाहरुख, सलमान और आमिर खान सुपरस्टार हैं। ये एक पूरे हिंदुस्तानी का प्यार है। बाकी आपका मैसेज बहुत ही अच्छा है।”

ख़बर लिखे जाने तक कैफ़ के ट्वीट को 13.4 हज़ार लोग रीट्वीट कर चुके हैं और 65.3 हजार लोग लाइक कर चुके हैं। बता दें कि कैफ़ से पहले भी खेल जगत की कई हस्तियों ने भी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हुए ट्वीट किए थे।

‘HINDU STHAN’ के नाम से किसने छापी फ्रंट पेज खबर, किसने सिर्फ ‘श्रीराम’ को दी जगह: अखबारों में आज

अयोध्या भूमि विवाद भारत के सबसे पुराने विवाद के रूप में जाना जाता था। इस मामले पर शनिवार (9 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए ऐतिहासिक फ़ैसले से भारत के इतिहास में एक और पन्ना जुड़ गया। इस तरह सदियों से चल रहे इस विवाद पर अंतत: विराम लग गया। अब भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का रास्ता खुल गया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पाँच-सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने एक सर्वसम्मत फ़ैसले में घोषणा की कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड, जो सात दशक पुराने टाइटल सूट के पक्षकार थे, उन्हें तीन महीने में अयोध्या में अन्य जगह पर मस्जिद के निर्माण के लिए पाँच एकड़ ज़मीन दी जानी चाहिए।

देश भर के समाचार पत्रों ने रविवार की सुबह इस ऐतिहासिक फ़ैसले को कैसे कवर किया, आइए इस पर एक नज़र डालते हैं…

नवभारत टाइम्स ने “मंदिर वहीं, मस्जिद नई” शीर्षक से फ्रंट पेज पर ख़बर प्रकाशित की। इस ख़बर में अयोध्या फ़ैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को संबोधित किए जाने का उल्लेख उनकी तस्वीर के साथ किया गया।

पंजाब केसरी ने अपने फ्रंट पेज पर भगवान श्री राम के धनुषधारी तस्वीर को प्रकाशित किया और “श्रीराम मंदिर वहीं बनेगा” शीर्षक से ख़बर प्रकाशित की।

हिन्दी दैनिक अख़बार जनसत्ता ने फ्रंट पेज पर सुप्रीम कोर्ट और शंख बजाते भक्तों के साथ “मंदिर वहीं” शीर्षक से ख़बर प्रकाशित की।

प्रमुख हिन्दी दैनिक अमर उजाला ने अपनी ख़बर “रामलला विराजमान” शीर्षक से प्रकाशित किया और फ़ैसले को राम राज की भोर के रूप में संदर्भित किया।

दैनिक जागरण ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद भगवान राम के एक बड़े चित्र और प्रस्तावित राम मंदिर के एक चित्र को अपने पहले पन्ने पर प्रकाशित किया।

दैनिक भास्कर ने “रामलला ही विराजमान” शीर्षक से सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट प्रकाशित की। दिलचस्प बात यह है कि फ्रंट पेज पर पुरातत्वविद केके मुहम्मद की रिपोर्ट थी, जो पुरातत्वविदों की टीम का एक हिस्सा थे। उन्होंने 1976-77 में राम मंदिर साइट पर पहली खुदाई की थी, जिसमें पुष्टि की गई थी कि बाबरी मस्जिद के नीचे एक भव्य मंदिर के पर्याप्त पुरातात्विक प्रमाण हैं।

दैनिक हिन्दी अख़बार हिन्दुस्तान, जो हिंदुस्तान टाइम्स समूह का एक हिस्सा है, उसने फ्रंट पेज पर “राम मंदिर का रास्ता साफ” शीर्षक से ख़बर प्रकाशित की और साथ ही अयोध्या में भगवान राम का एक भव्य मंदिर भी प्रकाशित किया।

दैनिक हिन्दी अख़बार, प्रभात खबर ने अपने फ्रंट पेज पर सुप्रीम कोर्ट की एक तस्वीर लगाई और “अयोध्या राम की” शीर्षक के साथ ख़बर प्रकाशित की। इसका अर्थ है अयोध्या नगरी भगवान राम की है।

प्रभात खबर ने यह भी उल्लेख किया है कि कैसे मुस्लिम पक्षकारों को अयोध्या में 5 एकड़ ज़मीन केवल एक मस्जिद बनाने के लिए मिलेगी।

अंग्रेजी अखबारों की बात करें तो हिन्दुस्तान टाइम्स के फ्रंट पेज पर ‘श्री राम’ के नाम की ईंटों के साथ खड़े एक संत की तस्वीर है, जो अयोध्या की साइट पर मौजूद थे। दरअसल, इस तस्वीर में वो संत एक भव्य मंदिर के निर्माण का लंबे समय से इंतज़ार करते नज़र आ रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि जिस जगह पर वर्षों से विवाद चला आ रहा है, उसकी जगह अब एक मंदिर होगा, जबकि मस्जिद को 5 एकड़ का भूखंड मिलेगा।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने फ्रंट पेज पर “RAM MANDIR WITHIN SITE” हेडिंग से ख़बर प्रकाशित की।

मुंबई मिरर, जो टाइम्स ग्रुप का ही हिस्सा है, उसने भगवान को मिली जमीन और मुस्लिमों को नाजुक शांति नाम से ख़बर प्रकाशित की।

लेकिन एक अखबार है – द टेलिग्राफ। यह अपने फ्रंट पेज के अपने कुख्यात हेडलाइन के लिए जाना जाता है। जहाँ सभी मीडिया हाउस ने सर्वोच्च न्यायालय की सर्वोच्चता को बरकरार रखते हुए हेडलाइन बनाई, वहीं इसने बड़ी चालाकी से हिंदूस्थान को तोड़ कर हिंदू स्थान लिखा। सामान्य हिंदी भाषी शायद इसकी धूर्तता को समझने में थोड़ा समय लगाए, लेकिन HINDU STHAN को अगर आप ध्यान से देखें तो समझ जाएँगे कि इसका संपादक कितनी गिरी हुई मानसिकता का इंसान है। दरअसल Stan (अगर H को साइलेंट कर दें तो, जो कि टेलिग्राफ के संपादक की मंशा भी थी, तभी उसने इसे ब्रेक करके हेडलाइन बनाई) का अर्थ शैतान होता है। खैर… शायद इन्हें नहीं पता लेकिन ये हेडलाइन बनाते-बनाते खुद हेडलाइन बन जाएँगे, JNU से गायब होते वामपंथियों की तरह।