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अयोध्या: लिबरल गैंग का छलका दर्द, कहा- SC के फ़ैसले ने VHP को किया पुरस्कृत

अयोध्या भूमि विवाद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की पीठ ने अपना ऐतिहासिक फ़ैसला सुना दिया। पीठ ने विवादित ज़मीन पर रामलला के हक़ में निर्णय सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नई मस्जिद बनाने के लिए अलग से पाँच एकड़ ज़मीन देने का निर्देश भी दिया है। इसके अलावा, कोर्ट ने निर्मोंही अखाड़े और शिया वक़्फ़ बोर्ड के दावों को ख़ारिज कर दिया। हालाँकि, निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में जगह देने की अनुमति को स्वीकार कर लिया गया है।

ज्यादातर तबकों में इस फैसले का स्वागत हो रहा है। लेकिन एक समूह ऐसा भी है जिसे फैसला पच नहीं रहा। इस समूह ने अपने दुख का राग अलापना शुरू कर दिया है। निखिल थाटे ने ट्वीट किया कि 1986 में बाबरी मस्जिद के ताले को किसने खोला उन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने यह भी लिखा कि भूमि विवाद मामले में 27 साल पहले न्याय की मौत हो गई थी और आज अंतत: उसे दफ़ना दिया गया।

नंदिनी सुंदर ने हिन्दू पक्ष को पूरी जमीन दिए जाने के फ़ैसले की निंदा करते हुए लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद गिराने के लिए विश्व हिन्दू परिषद (VHP) को पुरस्कृत किया है, यह शर्म की बात है। 

फासिस्ट फकीरा ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को ‘न्याय’ न बताकर ‘निर्णय’ करार दिया और लिखा कि INDIA को आज आधिकारिक रूप से HINDU REPUBLIC घोषित किया गया है।

काकवाणी यूज़र ने अपने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को RSS का फ़ैसला करार देते हुए लिखा कि मालिकाना हक़ का मामला था, तो मालिक़ाना हक़ किसी एक पक्ष को दिया जाता। लेकिन जब ज़मीन पर मुस्लिमों का मालिकाना हक़ है ही नहीं तो 2.77 एकड़ ज़मीन के बदले मुस्लिम पक्ष को पाँच एकड़ ज़मीन दिए जाने का क्या मतलब है?

आदित्य मेनन ने भी लिखा कि अयोध्या फैसले को संतुलित कहना गलत है। पाँच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए कुछ नहीं है। इतना तो मुस्लिम बिना कोर्ट की मदद के भी कर सकते हैं। यह उस विशेष मस्जिद की बात है जिसे एक क्रिमिनल एक्ट में ध्वस्त कर दिया गया अगर ऐसा नहीं होता तो क्या ये फैसला आता।

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि 1857 से पहले हिन्दू यहाँ पूजा करते थे। यानी, अंग्रेजों के आने से पहले ही राम चबूतरा, सीता रसोई और विवादित ज़मीन के बाहरी हिस्से में हिन्दू पूजा किया करते थे। अर्थात, आउटर कोर्टयार्ड हिन्दुओं की पूजा का मुख्य बिंदु था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारा विवाद अंदर के हिस्से को लेकर है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष विवादित ज़मीन के भीतरी हिस्से पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा है और सारा विवाद भीतरी हिस्से को लेकर ही है। यानी, बाहरी हिस्से पर हिन्दू काफ़ी पहले से पूजा करते आ रहे हैं, इसमें कोई विवाद नहीं है।

रोड टू रामलला: 1528 से 2019 तक का सफर, राम मंदिर के लिए हिंदुओं के संघर्ष की पूरी कहानी

शनिवार (9 नवंबर 2019) को वह इंतजार पूरा हुआ जिसका हिंदू दशकों से इंतजार कर रहे थे। अयोध्या में राम मंदिर के लिए लंबे संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है। शीर्ष अदालत ने विवादित जगह पर दूसरे मजहब के दावे को खारिज करते हुए केंद्र सरकार से मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने में ट्रस्ट बनाने को कहा है। मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक का पूरा घटनाक्रम;

  • 1528: बाबर के सेनापति मीर बाकी ने अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान पर ​मस्जिद का निर्माण करवाया।
  • 1528-1731: इमारत पर कब्जे को लेकर हिंदू और मुगलों के बीच 64 बार संघर्ष हुए।
  • 1822: फैजाबाद अदालत के मुलाजिम हफीजुल्ला ने सरकार को भेजी एक रिपोर्ट में कहा कि राम के जन्मस्थान पर बाबर ने मस्जिद बनवाई।
  • 1852: अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह के शासन में पहली बार यहॉं मारपीट की घटना का लिखित जिक्र मिलता है। निर्मोही पंथ के लोगों ने दावा किया कि बाबर ने एक मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई थी।
  • 1855: हनुमानगढ़ी पर बैरागियों और मुगलों के बीच संघर्ष हुआ। वाजिद अली शाह ने ब्रिटिश रेजिडेंट मेजर आर्टम को अयोध्या के हालात पर एक पर्चा भेजा। इसमें 5 दस्तावेज लगाकर यह बताया गया कि इस विवादित इमारत को लेकर यहॉं अक्सर हिंदू और दूसरे मजहब के बीच तनाव रहता है।
  • 1859: ब्रिटिश हुकूमत ने इस पवित्र स्थान की घेराबंदी कर दी। अंदर का हिस्सा नमाज के लिए और बाहर का हिस्सा हिंदुओं को पूजा के लिए दिया गया।
  • 1860: डिप्टी कमिश्नर फैजाबाद की कोर्ट में मस्जिद के खातिब मीर रज्जन अली ने एक दरखास्त लगाई कि मस्जिद के परिसर में एक निहंग सिख ने निशान साहिब गाड़कर एक चबूतरा बना दिया है, जिसे हटाया जाए।
  • 1877: मस्जिद के मुअज्जिन मोहम्मद असगर ने डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर में फिर से अर्जी देकर शिकायत की कि बैरागी महंत बलदेव दास ने मस्जिद परिसर में एक चरण पादुका रख दी है, जिसकी पूजा हो रही है। उन्होंने पूजा के लिए चूल्हा बनाया है। अदालत ने कुछ हटवाया तो नहीं लेकिन मस्जिद में जाने का दूसरा रास्ता बनवा दिया।
  • 15 जनवरी 1885: पहली बार इस जमीन पर मंदिर बनवाने की मॉंग अदालत पहुॅंची। महंत रघुबर दास ने पहला केस फाइल किया। उन्होंने राम चबूतरा पर एक मंडप बनाने की इजाजत मॉंगी। संयोग से इसी साल भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की स्थापना भी हुई।
  • 24 फरवरी 1885: फैजाबाद की जिला अदालत ने महंत रघुबर दास की अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दी कि वह जगह मस्जिद के बेहद करीब है। जज हरिकिशन ने अपने फैसले में माना किया चबूतरे पर रघुबर दास का कब्जा है। उन्हें एक दीवार उठाकर चबूतरे को अलग करने को कहा, लेकिन मंदिर बनाने की इजाजत नहीं दी।
  • 17 मार्च 1886: महंत रघुबर दास ने जिला जज फैजाबाद कर्नल एफईए कैमियर की अदालत में अपील दायर की। कैमियर ने अपने फैसले में कहा कि मस्जिद हिंदुओं के पवित्र स्थान पर बनी है। पर अब देर हो चुकी है। 356 साल पुरानी गलती को सुधारना इतने दिनों बाद उचित नहीं होगी। यथास्थिति बनाए रखें।
  • 20-21 नवंबर 1912: बकरीद के मौके पर अयोध्या में गौहत्या के खिलाफ पहला दंगा हुआ। यहॉं 1906 से ही म्यूनिसिपल कानून के तहत गौहत्या पर पाबंदी थी।
  • मार्च 1934: फैजाबाद के शाहजहॉंपुर में हुई गौहत्या के विरोध में दंगे हुए। नाराज हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद की दीवार और गुंबद को नुकसान पहुॅंचाया। सरकार ने बाद में इसकी मरम्मत करवाई।
  • 1936: इस बात की कमिश्नरी जॉंच की गई कि क्या बाबरी मस्जिद बाबर ने बनवाई थी।
  • 20 फरवरी 1944: आधिकारिक गजट में एक जॉंच रिपोर्ट प्रकाशित हुई। यह 1945 में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के फैजाबाद की रेवेन्यू कोर्ट में मुकदमे के दौरान सामने आई।
  • 22-23 दिसंबर 1949: भगवान राम की मूर्ति विवादित इमारत के भीतर प्रकट हुई। दोनों पक्षों ने केस दायर किए। सरकार ने इलाके को विवादित घोषित कर इमारत की कुर्की के आदेश दिए। लेकिन, पूजा-अर्चना जारी रही।
  • 29 दिसंबर 1949: फैजाबाद म्यूनिसिपल बोर्ड के चेयरमैन प्रिया दत्त राम को विवादित परिसर का रिसीवर नियुक्त किया गया।
  • 1950: हिंदू महासभा के गोपाल सिंह विशारद और दिगंबर अखाड़े के महंत परमहंस रामचंद्रदास ने अदालत में याचिका दायर कर जन्मस्थान पर स्वामित्व का मुकदमा ठोंका। दोनों ने वहॉं पूजा-पाठ की इजाजत मॉंगी। सिविल जज ने भीतरी हिस्से को बंद रखकर पूजा-पाठ की इजाजत देते हुए मूर्तियों को न हटाने के अं​तरिम आदेश दिए।
  • 26 अप्रैल 1955: हाई कोर्ट ने सिविल जज के अंतरिम आदेश पर मुहर लगाई।
  • 1959: निर्मोही अखाड़े ने एक दूसरी याचिका दायर कर विवादित स्थान पर अपना दावा जताया। स्वयं को रामजन्मभूमि का संरक्षक बताया।
  • 1961: सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मस्जिद में मूर्तियों के रखे जाने के विरोध में याचिका दायर की। दावा किया कि मस्जिद और उसके आसपास की जमीन एक कब्रगाह है, जिस पर उसका दावा है।
  • 29 अगस्त 1964: जन्माष्टमी के मौके पर मुंबई में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना।
  • 7-8 अप्रैल 1984: मंदिर निर्माण के लिए राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति बनी। महंत अवैद्यनाथ अध्यक्ष बने। रथयात्राएँ निकाली गई। राम मंदिर आंदोलन ने जोर पकड़ा।
  • 1 फरवरी 1986: फैजाबाद की अदालत ने इमारत का ताला खोलने का आदेश दिया। हिंदुओं को पूजा-पाठ की इजाजत मिली।
  • 3 फरवरी 1986: ताला खोले जाने के खिलाफ हाई कोर्ट में हाशिम अंसारी ने अपील की।
  • 5-6 फरवरी 1986: सैयद शहाबुद्दीन ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की। 14 फरवरी को शोक दिवस मनाने की अपील की।
  • 6 फरवरी 1986: लखनउ में मजहब विशेष की एक सभा हुई। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के गठन का ऐलान। मौलाना मुजफ्फर हुसैन किछौछवी अध्यक्ष और मोहम्मद आजम खान तथा जफरयाब जिलानी संयोजक बने।
  • 23-24 दिसंबर 1986: सैयद शहाबुद्दीन की अध्यक्षता में दिल्ली में बाबरी मस्जिद कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन। 1987 के गणतंत्र दिवस समारोह के बहिष्कार का ऐलान।
  • जून 1989: पालमपुर में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक। मंदिर आंदोलन पहली बार बीजेपी के एजेंडे में। एक प्रस्ताव पास कर राम मंदिर बनाने का संकल्प लिया गया। कहा गया कि यह आस्था का सवाल है। अदालत फैसला नहीं कर सकती।
  • 1 अप्रैल 1989: विहिप ने धर्मसंसद बुलाई। 30 सितंबर को प्रस्तावित मंदिर के शिलान्यास का ऐलान।
  • 14 अगस्त 1989: हाई कोर्ट का आदेश यथास्थिति बरकरार रखी जाए।
  • अक्टूबर-नवंबर 1989: मंदिर निर्माण के लिए पूरे देश से साढ़े तीन लाख रामशिलाएॅं अयोध्या पहुॅंची।
  • 9 नवंबर 1989: राम मंदिर का शिलान्यास प्रस्तावित मंदिर के सिंहद्वार पर हुआ।
  • फरवरी 1990: कारसेवा का ऐलान।
  • जून 1990: विहिप की बैठक में 30 अक्टूबर से मंदिर निर्माण कार्य शुरू करने का ऐलान।
  • 25 सितंबर 1990: सोमनाथ से अयोध्या के लिए लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा शुरू।
  • 30 अक्टूबर-2 नवंबर 1990: कारसेवक लाखों की संख्या में अयोध्या पहुॅंचे। मुलायम सिंह की सरकार ने गोली चलवाई। 40 से ज्यादा कारसेवक मारे गए।
  • 7-10 अक्टूबर 1991: कल्याण सिंह की सरकार ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन का अधिग्रहण किया।
  • 6 दिसंबर 1992: बाबरी मस्जिद गिरा दी गई।
  • अप्रैल 2002: हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने इस बात पर सुनवाई शुरू की कि विवादित स्थल पर किसका अधिकार है।
  • 2003: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को खुदाई करने के निर्देश दिए।
  • जुलाई 2005: विवादित स्थल पर आतंकी हमला। सुरक्षा बलों ने पॉंच आतंकियों को मार गिराया।
  • जून 2009: लिब्राहन आयोग ने बाबरी विध्वंस पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।
  • 2010: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया। विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बॉंट दिया।
  • मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक लगाई। यथास्थिति बनाए रखने को कहा।
  • 21 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला संवेदनशील है। समाधान कोर्ट के बाहर होना चाहिए। सभी पक्षों से एक राय बनाकर समाधान ढूॅंढ़ने को कहा।
  • 14 मार्च 2018: सुप्रीम कोर्ट ने सभी 32 हस्तक्षेप अर्जियों को खारिज कर दिया। वही पक्षकार बचे जो इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले में शामिल थे।
  • 6 अगस्त 2019: मध्यस्थता प्रक्रिया नाकाम होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में रोजान सुनवाई शुरू।
  • 16 अक्टूबर 2019: 40 दिन दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
  • 9 नवम्बर 2019: सुप्रीम कोर्ट ने बहुप्रतीक्षित फ़ैसला सुनाया। पूरी विवादित ज़मीन रामलला की। मंदिर वहीं बनेगा। मस्जिद के लिए अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ ज़मीन दी जाएगी।

(साभार: हेमंत शर्मा द्वारा रचित पुस्तक ‘युद्ध में अयोध्या’)

मंदिर वहीं बनेगा, मस्जिद कहीं और बनेगा: 10 प्वाइंट्स में समझें सुप्रीम कोर्ट का पूरा फ़ैसला

491 सालों का लम्बा इन्तजार। बाबरी मस्जिद निर्माण के 491 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुना राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ़ कर दिया कि मुस्लिम पक्ष अयोध्या की विवादित ज़मीन पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा।

राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट स्थापित कर 3 महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए योजना शुरू की जाए, ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले के दौरान और क्या-क्या कहा, इसे बिंदुवार समझें:

  • सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति से फ़ैसला सुनाया। अर्थात, ये निर्णय 5-0 से आया। कोर्ट ने सबसे पहले निर्मोही अखाड़ा और शिया वक़्फ़ बोर्ड की याचिका को ख़ारिज किया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महज आस्था और विश्वास के आधार पर फ़ैसला नहीं सुनाया जा सकता। साथ ही केवल एएसआई की रिपोर्ट को आधार बना कर भी निर्णय नहीं सुनाया जा सकता है।
  • एएसआई की रिपोर्ट से पता चलता है कि बाबरी मस्जिद के नीचे कोई ढाँचा था, जिसके ऊपर मस्जिद बनाई गई। लेकिन, एएसआई यह साबित नहीं कर पाया कि मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद बनाया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुसार, वो सभी धर्मों की भावनाओं का ख़्याल रखने के लिए प्रतिबद्ध है और संतुलन का ध्यान रखते हुए यह साबित होता है कि हिन्दू बाहरी हिस्से में काफ़ी पहले से पूजा करते आ रहे थे।
  • सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड यह साबित नहीं कर पाया कि विवादित ज़मीन पर उसका विशेषाधिकार अथवा एक्सक्लूसिव स्वामित्व था।
  • फ़ैसले का सबसे अहम भाग ये रहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ट्रस्ट बना कर मस्जिद के लिए अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ ज़मीन की व्यवस्था करने को कहा। इसी ट्रस्ट के माध्यम से राम मंदिर निर्माण के लिए भी योजना बनाने के लिए कहा गया। इस मामले में केंद्र और यूपी सरकार आपस में बातचीत कर आगे की कार्रवाई करे, ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया।
  • केंद्र जो ट्रस्ट स्थापित करेगा, उसे बाहरी और भीतरी अहाते का अधिकार दे दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़-साफ़ कहा कि हिन्दू विवादित ज़मीन पर अंग्रेजों के आने से पहले से ही पूजा करते आ रहे हैं। कोर्ट ने 1934 के दंगे का जिक्र करते हुए बताया कि भीतरी हिस्सा उसी वक़्त गंभीर विवाद का विषय बन गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओं की उस आस्था और विश्वास की भी पुष्टि की, जिसके अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म मुख्य गुम्बद के नीचे हुआ था। हालाँकि, कोर्ट ने बताया कि गवाहों के बयान से ये भी पता चलता है कि वहाँ मुस्लिम भी नमाज पढ़ा करते थे।
  • सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सार यह है कि पूरी की पूरी विवादित ज़मीन हिन्दुओं को दे दी जाएगी और सरकार एक ट्रस्ट बना कर आगे का कार्य करेगी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इनर कोर्टयार्ड और आउटर कोर्टयार्ड को लेकर अलग-अलग बातें कहीं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि के न्यायिक व्यक्ति होने की बात भी अस्वीकार कर दी।

सीएम पिता जानते थे बेटा CJI बनेगा, पर शायद ही पता रहा हो अयोध्या जैसा फैसला भी सुनाएगा

न्यायाधीश का काम ही है फैसला सुनाना। लेकिन, ज्यादातर न्यायाधीशों के करियर में ऐसे मौके नहीं आते कि उनके सुनाए फैसले की छाप अमिट हो। अयोध्या जैसे दशकों पुराने, राजनीतिक रूप से संवेदनशील और आस्था से जुड़े मसले पर फैसला सुनाने का मौका तो विरले को ही मिलता है। इस लिहाज से मौजूदा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और उनकी अगुवाई वाली पीठ में शामिल जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर विरले ही माने जा सकते हैं।

सीजेआई रंजन गोगोई को लेकर किताब ‘गुवाहाटी हाईकोर्ट, इतिहास और विरासत’ में एक रोचक किस्से का जिक्र है। इसके मुताबिक उनके पिता केशब चंद्र गोगोई से उनके एक दोस्त ने पूछा कि क्या उनका बेटा भी उनकी ही तरह राजनीति में आएगा? जवाब में उनके पिता ने कहा- मेरा बेटा शानदार वकील है और उसके अंदर इस देश का मुख्य न्यायाधीश बनने की क्षमता है। उल्लेखनीय है कि 18 नवंबर 1954 को जन्मे गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के बेटे हैं।

बीते साल 03 अक्टूबर को चीफ जस्टिस पद की शपथ लेने वाले गोगोई इस साल 17 नवंबर में रिटायर हो जाएँगे। देश के 46वें चीफ जस्टिस गोगोई इस पद तक पहुॅंचने वाले पूर्वोतर से पहले जज हैं। उनकी छवि पारदर्शिता को पसंद करने वाले और बेहद खुलकर बोलने वाले जज की रही है। सुप्रीम कोर्ट के रोस्टर को लेकर जब बीते साल चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी तो उसमें गोगोई भी शामिल थे। इसके बाद कुछ खेमों से आशंका जताई गई थी कि उनकी वरिष्ठता को नजरंदाज कर किसी और को सीजेआई बनाया जा सकता है।

विनम्र स्वभाव के गोगोई सख्त जज माने जाते हैं। एक बार उन्होंने अवमानना नोटिस जारी कर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू को अदालत में तलब कर लिया था। काटजू ने सौम्या मर्डर केस में ब्लॉग लिखकर उनके फैसले पर सवाल उठाए थे। जेएनयू के छात्र नेता रहे कन्हैया कुमार के मामले में एसआईटी के गठन से इनकार करने वाले जज भी गोगोई ही थे।

फाइटर प्लेन मिराज के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जॉंच को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्होंने याचिकाकर्ता वकील अलख आलोक श्रीवास्तव से पूछा था कि मिराज किस जेनरेशन का है। वकील का जवाब सुन कर कहा:

“आपने याचिका दाखिल की है और आपको पता ही नहीं मिराज किस जेनरेशन के हैं। आप भाग्यशाली हैं कि हम आप पर इस याचिका को दाखिल करने के लिए जुर्माना नहीं लगा रहे और ऐसा इसलिए क्योंकि आप वकील हैं।”

रिटायर होने से पहले जस्टिस गोगोई कई और अहम मामलों में फैसला सुना सकते हैं। इनमें सबरीमाला रिव्यू पिटिशन, राफेल रिव्यू पिटिशन, राहुल गाँधी पर अवमानना का मुकदमा, फाइनेंस एक्ट 2017 की वैधता जैसे मामले शामिल हैं।

मंदिर वहीं बनेगा, ट्रस्ट बना कर निर्माण शुरू करे सरकार: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला

आखिरकार वह फैसला आ ही गया जिसका इंतजार हिंदू दशकों से कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अपने फैसले में कहा कि विवादित जमीन पर मुस्लिम पक्ष अपना दावा साबित करने में विफल रहे। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने इस जगह पर ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण शुरू करने का आदेश केंद्र सरकार को दिया है।

ट्रस्ट बनाने और मंदिर निर्माण की योजना के लिए तीन महीने का वक्त सरकार को दिया गया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने कहीं और मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने का भी निर्देश दिया है। यानी, सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अलग से ज़मीन दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि बाहरी हिस्से पर हिन्दुओं द्वारा पहले से ही पूजा की जा रही थी, इसमें कोई विवाद नहीं है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम भीतरी हिस्से पर भी अपना दावा साबित करने में विफल रहे। 1857 से पहले यहाँ हिन्दुओं द्वारा पूजा करने के सबूत हैं। मुस्लिम पक्ष को राम मंदिर बनाने के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ ज़मीन दी जाएगी।

ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा की भागीदारी सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। हालॉंकि जमीन पर उसका दावा पीठ ने खारिज कर दिया। शिया बोर्ड का भी दावा अदालत ने नहीं माना। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जमीन को तीन हिस्सों में बॉंटने के फैसले को भी शीर्ष अदालत की पीठ ने गलत बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आस्था और विश्वास के आधार पर फ़ैसला नहीं करना चाहिए, बल्कि कानून के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का शूट लिमिटेशन एक्ट के तहत आता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ये लिमिटेशन 12 साल का है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि 1857 से पहले हिन्दू यहाँ पूजा करते थे। यानी, अंग्रेजों के आने से पहले ही राम चबूतरा, सीता रसोई और विवादित ज़मीन के बाहरी हिस्से में हिन्दू पूजा किया करते थे। अर्थात, आउटर कोर्टयार्ड हिन्दुओं की पूजा का मुख्य बिंदु था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारा विवाद अंदर के हिस्से को लेकर है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि मुस्लिम पक्ष विवादित ज़मीन के भीतरी हिस्से पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा है और सारा विवाद भीतरी हिस्से को लेकर ही है। यानी, बाहरी हिस्से पर हिन्दू काफ़ी पहले से पूजा करते आ रहे हैं, इसमें कोई विवाद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पीठ में शामिल सभी जजों को संविधान के अनुसार फ़ैसला सुनना है।

विराजमान रहेंगे रामलला, मस्जिद के लिए मिलेगी दूसरी जगह, केंद्र बनाएगी योजना: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आस्था और विश्वास के आधार पर फ़ैसला नहीं करना चाहिए बल्कि क़ानून के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का शूट लिमिटेशन एक्ट के तहत आता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ये लिमिटेशन 12 साल का है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि 1857 से पहले हिन्दू यहाँ पूजा करते थे। यानी, अंग्रेजों के आने से पहले ही राम चबूतरा, सीता रसोई और विवादित ज़मीन के बाहरी हिस्से में हिन्दू पूजा किया करते थे। अर्थात, आउटर कोर्टयार्ड हिन्दुओं की पूजा का मुख्य बिंदु था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारा विवाद अंदर के हिस्से को लेकर है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि दूसरा पक्ष विवादित ज़मीन के भीतरी हिस्से पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा है और सारा विवाद भीतरी हिस्से को लेकर ही है। यानी, बाहरी हिस्से पर हिन्दू काफ़ी पहले से पूजा करते आ रहे हैं, इसमें कोई विवाद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पीठ में शामिल सभी जजों को संविधान के अनुसार फ़ैसला सुनना है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला गलत था। यानी, तीन हिस्सों में ज़मीन को बाँटने का फ़ैसला ग़लत था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूसरी जगह पर मंदिर बनाने के लिए जगह दी जाए।

सीजेआई रंजन गोगोई ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि कि पूरा जजमेंट पढ़ने में आधा घंटा लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा का दावा ख़ारिज कर दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संतुलन बनाए रखना चाहिए और लोगों की आस्था में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने शिया समुदाय का भी दावा ख़ारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा का सूट केवल मैनेजमेंट का है, वो सहबैत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि राम जन्मभूमि कोई ज्यूरिस्टिक पर्सन नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी, वहाँ कोई न कोई स्ट्रक्चर था। उससे पहले वहाँ जो भी स्ट्रक्चर था, वो इस्लामिक नहीं था। अर्थात, बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बना था।

अयोध्या फैसले से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने बुलाई उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक, शामिल होने पहुँचे अजीत डोभाल

अयोध्या विवाद में फैसले की घड़ी आ गई है। सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना रहा है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली संविधान पीठ ने 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। पाँच सदस्यीय पीठ ने छह अगस्त से लगातार 40 दिन इस मामले की सुनवाई की थी। पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर शामिल हैं।

अयोध्या में यह विवाद सदियों से चला आ रहा था। माना जा रहा है कि शनिवार को आ रहा फैसला इस पूरे विवाद पर पूर्णविराम लगाने में सफल होगा। अयोध्या फैसले को लेकर बीजेपी ने आज दिल्ली में बड़ी बैठक बुलाई है। जानकारी के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आवास पर एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई है। इस बैठक में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, अमित शाह के आवास पर पहुँच चुके हैं। इसके अलावा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के प्रमुख अरविंद कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होने वाले हैं।

इसी बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी राजधानी दिल्‍ली पहुँच चुके हैं। भागवत स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं और वह आज दिल्‍ली में ही रहेंगे। गृह मंत्री अमित शाह के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनके घर के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है और किसी को भी वहाँ से गुजरने की इजाजत नहीं है।

वहीं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एहतियात के तौर पर पूरे प्रदेश में स्कूल, कॉलेज, एजुकेशनल सेंटर और ट्रेनिंग सेंटर बंद रखने का फैसला लिया है। जानकारी के मुताबिक यूपी में 9 से 11 नवंबर तक स्कूल और कॉलेजों में छुट्टी घोषित की गई है। संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि वे प्रदेश में शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखें। योगी ने अपने अपील में कहा है कि प्रशासन सभी की सुरक्षा व प्रदेश में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कटिबद्ध है। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रदेश की जनता से यह भी अपील की है कि आने वाले फैसले को जीत-हार के साथ जोड़कर न देखा जाए और अफवाहों पर कतई ध्यान न दें।

मुस्लिम पक्ष अपना दावा साबित करने में विफल रहा, हिन्दू 1857 से पहले से पूजा करते आ रहे हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आस्था और विश्वास के आधार पर फ़ैसला नहीं करना चाहिए बल्कि क़ानून के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का शूट लिमिटेशन एक्ट के तहत आता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ये लिमिटेशन 12 साल का है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि 1857 से पहले हिन्दू यहाँ पूजा करते थे। यानी, अंग्रेजों के आने से पहले ही राम चबूतरा, सीता रसोई और विवादित ज़मीन के बाहरी हिस्से में हिन्दू पूजा किया करते थे। अर्थात, आउटर कोर्टयार्ड हिन्दुओं की पूजा का मुख्य बिंदु था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारा विवाद अंदर के हिस्से को लेकर है।

मुस्लिम पक्ष भीतरी हिस्से पर अपना स्वामित्व साबित करने में विफल रहे, ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने कहा।

सीजेआई रंजन गोगोई ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि कि पूरा जजमेंट पढ़ने में आधा घंटा लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा का दावा ख़ारिज कर दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संतुलन बनाए रखना चाहिए और लोगों की आस्था में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने शिया समुदाय का भी दावा ख़ारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा का सूट केवल मैनेजमेंट का है, वो सहबैत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि राम जन्मभूमि कोई ज्यूरिस्टिक पर्सन नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी, वहाँ कोई न कोई स्ट्रक्चर था। उससे पहले वहाँ जो भी स्ट्रक्चर था, वो इस्लामिक नहीं था। अर्थात, बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बना था।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एएसआई ने इस सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा है कि वहाँ हिन्दू मंदिर को तोड़ कर ही मस्जिद बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वहाँ क्या था, इस सम्बन्ध में अकेले एएसआई के आधार पर फ़ैसले पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों से पता चलता है कि वहाँ दोनों धर्मों के लोग प्राथना करते आ रहे थे।

खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी बाबरी मस्जिद, पहले से था ढाँचा: सुप्रीम कोर्ट

सीजेआई रंजन गोगोई ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि कि पूरा जजमेंट पढ़ने में आधा घंटा लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा का दावा ख़ारिज कर दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संतुलन बनाए रखना चाहिए और लोगों की आस्था में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने शिया समुदाय का भी दावा ख़ारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा का सूट केवल मैनेजमेंट का है, वो सहबैत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि राम जन्मभूमि कोई ज्यूरिस्टिक पर्सन नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी, वहाँ कोई न कोई स्ट्रक्चर था। उससे पहले वहाँ जो भी स्ट्रक्चर था, वो इस्लामिक नहीं था। अर्थात, बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एएसआई ने इस सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा है कि वहाँ हिन्दू मंदिर को तोड़ कर ही मस्जिद बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वहाँ क्या था, इस सम्बन्ध में अकेले एएसआई के आधार पर फ़ैसले पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों से पता चलता है कि वहाँ दोनों धर्मों के लोग प्राथना करते आ रहे थे।

सुनवाई के मद्देनज़र भारत के कई हिस्सों में स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है और संवेदनशील इलाक़ों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस सोशल मीडिया पर लगातार नज़र रख रही है और अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपील कर चुके थे कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को शांति से स्वीकार किया जाना चाहिए। आज सीजेआई कोर्टरूम का दरवाजा जैसे ही खुला, तभी वकीलों और पत्रकारों की भीड़ अंदर जाने के लिए बेचैन हो उठी। सुप्रीम कोर्ट के इर्द-गिर्द भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।

राम मंदिर मामले में चल रही सुप्रीम कोर्ट की नियमित सुनवाई 6 अगस्त को शुरू हुई थी। 40 दिनों की नियमित सुनवाई के बाद सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने 16 अक्टूबर को फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। सीजेआई गोगोई 17 नवम्बर को रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में तय था कि फ़ैसला उससे पहले ही सुनाया जाएगा। इस पीठ में उनके अलावा भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बोड़बे, जस्टिस अब्दुल नज़ीर, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस वाई चंद्रचूड़ शामिल थे। अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के साथ ही तस्वीर साफ़ हो गई है।

अयोध्या: सुप्रीम कोर्ट ने शिया मुस्लिमों का दावा ख़ारिज किया, आधे घंटे में आएगा पूरा जजमेंट

अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला आने में थोड़ा वक्त लगेगा। पॉंच सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति से शिया वक़्फ़ की याचिका को रद्द कर दिया है।

सुनवाई के मद्देनज़र भारत के कई हिस्सों में स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है और संवेदनशील इलाक़ों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस सोशल मीडिया पर लगातार नज़र रख रही है और अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपील कर चुके थे कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को शांति से स्वीकार किया जाना चाहिए। आज सीजेआई कोर्टरूम का दरवाजा जैसे ही खुला, तभी वकीलों और पत्रकारों की भीड़ अंदर जाने के लिए बेचैन हो उठी। सुप्रीम कोर्ट के इर्द-गिर्द भारी संख्या में सुरक्षा बलों तैनात किए गए थे।

राम मंदिर मामले में चल रही सुप्रीम कोर्ट की नियमित सुनवाई 6 अगस्त को शुरू हुई थी। 40 दिनों की नियमित सुनवाई के बाद सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने 16 अक्टूबर को फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। सीजेआई गोगोई 17 नवम्बर को रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में तय था कि फ़ैसला उससे पहले ही सुनाया जाएगा। इस पीठ में उनके अलावा भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बोड़बे, जस्टिस अब्दुल नज़ीर, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस वाई चंद्रचूड़ शामिल थे। अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के साथ ही तस्वीर साफ़ हो गई है।

राम मंदिर मामले पर कई बार मध्यस्तथा की भी कोशिश की गई लेकिन वो सफल नहीं हो सकी। श्री श्री रविशंकर सहित कई अन्य प्रबुद्ध जनों ने मध्यस्तथा की पहल की लेकिन उसके असफल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 5 सदस्यीय पीठ का गठन कर नियमित सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष की तरफ़ से 92 वर्षीय के पराशरण और वैद्यनाथन ने दलीलें रखीं। वहीं राजीव धवन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील थे। पूरी सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष दलीलों और तथ्यों के मामले में मुस्लिम पक्ष पर भारी पड़ा। राजीव धवन कई बार कोर्ट में झल्लाते हुए भी नज़र आए।